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क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2 के ऑफ-एयर होने की अफवाहें, मेकर्स ने दी सफाई

17 साल बाद जब ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ की वापसी हुई, तो फैंस बेहद एक्साइटेड नजर आए. अब शो को लेकर एक नई चर्चा तेज हो गई है. कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि यह शो जल्द ऑफ एयर हो सकता है. हालांकि अब तक मेकर्स या चैनल की ओर से शो बंद करने को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. यह पहली बार नहीं है जब ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ के बंद होने की खबरें सामने आई हैं. इससे पहले मार्च में भी ऐसी अफवाहें तेजी से वायरल हुई थी. तब मेकर्स और चैनल ने साफ तौर पर इन खबरों को गलत बताया था. स्टार प्लस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा था, “हमने कुछ मीडिया रिपोर्ट्स देखी हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि शो बंद हो रहा है और उसकी जगह ‘क्योंकि रिश्तों के भी रूप बदलते हैं’ ले रहा है. हम साफ करना चाहते हैं कि ये खबरें पूरी तरह बेबुनियाद हैं. फिलहाल शो को बंद करने की कोई योजना नहीं है.”  तुलसी और मिहिर की कहानी से जुड़ाव आज भी कायम ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ में स्मृति ईरानी और अमर उपाध्याय ने एक बार फिर तुलसी और मिहिर विरानी के अपने आइकॉनिक किरदारों में वापसी की. इतने सालों बाद भी दर्शकों का इन किरदारों से जुड़ाव कम नहीं हुआ है. शो में इस बार पुराने चेहरों के साथ नई पीढ़ी को भी जोड़ा गया है. रोहित सुचांती, तनिषा मेहता, शगुन शर्मा और अमन गांधी जैसे कलाकार नई कहानी को आगे बढ़ाते नजर आ रहे हैं.

संजीव कपूर का खुलासा: मास्टरशेफ इंडिया में अक्षय कुमार से ज्यादा फीस की थी शर्त

 सेलेब्रिटी शेफ संजीव कपूर ने हाल ही में ‘मास्टरशेफ इंडिया’ को लेकर ऐसा खुलासा किया, जिसे फैंस जानते नहीं होंगे. संजीव ने बताया कि जब उन्हें पहली बार ‘मास्टरशेफ इंडिया’ ऑफर हुआ था, तब उन्होंने शो करने से इनकार कर दिया था. वजह थी उनकी एक खास शर्त, जिसे मेकर्स मानने के लिए तैयार नहीं थे. Sanjeev Kapoor Reveals His Condition: ‘मेरी एक ही शर्त थी’ Culinary Culture से बातचीत में संजीव कपूर ने कहा, “जब वे पहली बार मेरे पास आए थे, तब उन्होंने मेरी शर्त नहीं मानी. मेरी शर्त सिर्फ इतनी थी कि मुझे अक्षय कुमार से एक रुपया ज्यादा फीस मिलनी चाहिए.” उन्होंने आगे कहा, “यह शो का पहला सीजन था और मुझे लगता था कि इस काम को मुझसे बेहतर कोई नहीं कर सकता. जब उन्होंने मुझसे बात की, तो मैंने कहा कि मेरी एक शर्त है. उन्होंने उसे नहीं माना और मैं समझौता नहीं करना चाहता था. मैं अपने फैसले से खुश था.” संजीव ने यह भी बताया कि शो छोड़ने के बाद भी मेकर्स लगातार उन्हें मनाने की कोशिश करते रहे. गेस्ट बनकर भी नहीं पहुंचे शो में शेफ ने बताया कि मेकर्स ने उन्हें कई बार एक एपिसोड के लिए गेस्ट बनकर आने का ऑफर भी दिया, लेकिन उन्होंने हर बार मना कर दिया. संजीव कपूर ने कहा, “वे लोग बार-बार कहते थे कि सर, एक एपिसोड के लिए आ जाइए. लेकिन मैंने साफ कह दिया था कि मैं ऐसा नहीं करूंगा.”  तीसरे सीजन में बदली पूरी कहानी संजीव कपूर ने बताया, “तीसरे सीजन में उन्होंने मुझसे कहा कि शो सही तरीके से नहीं चल रहा है और उन्हें मेरी जरूरत है. मैंने कहा कि मुझे नहीं लगता मैं कर पाऊंगा. तब उन्होंने कहा कि हम बिल्कुल वैसा ही करेंगे जैसा आप कहेंगे.” इसके बाद संजीव ने अपनी शर्तों पर शो साइन किया. जब उनसे पूछा गया कि क्या आखिरकार उन्हें अक्षय कुमार से ज्यादा फीस मिली थी, तो उन्होंने हंसते हुए कहा, “बिल्कुल मिली थी. वह शर्त कभी बदलने वाली नहीं थी. अगर मैं अपने फील्ड में यह नहीं कर सकता, तो फिर क्या मतलब है?”

लेट हो रहा मानसून, लेकिन बारिश बनी राहत! पंजाब में पारा लुढ़का, अगले चार दिन यलो अलर्ट

अमृतसर  पंजाब में भले ही मानसून आने में देरी हो रही है, लेकिन कईं जगहों पर हुई हल्की बारिश से भीषण गरमी से कुछ राहत मिली है। सोमवार को पंजाब के तापमान में 3.6 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। इससे अब पारा सामान्य से 2.3 डिग्री नीचे पहुंच गया है। सबसे अधिक 38.6 डिग्री का पारा बठिंडा का दर्ज किया गया।  मौसम विभाग ने अगले चार दिनों के लिए पंजाब में यलो अलर्ट जारी कर दिया है। इसके तहत पंजाब में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। विभाग ने मंगलवार व बुधवार के लिए पंजाब के 14 जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है।  इनमें पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, होशियारपुर, नवांशहर, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, संगरूर, फतेहगढ़ साहिब, रूपनगर, पटियाला और मोहाली शामिल हैं। इसके बाद 25 जून से पश्चिमी विक्षोभ मजबूत होगा और दो दिन पंजाब के सभी जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश पड़ेगी। पंजाब के न्यूनतम तापमान में भी 1.5 डिग्री की कमी दर्ज की गई। यह सामान्य. से 1.7 डिग्री नीचे हो गया है। सबसे कम 23.2 डिग्री का न्यूनतम पारा पठानकोट का दर्ज किया गया। जून के आखिरी हफ्ते में दस्तक दे सकता है मानसून  मौसम विभाग के चंडीगढ़ केंद्र के डायरेक्टर सुरिंदर पाल के मुताबिक मानसून पूर्वी भारत में तेजी से आगे बढ़ चुका है और अब उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ रहा है। अगर स्थितियां अनुकूल बनी रहीं और इसी तरह से मानसून आगे बढ़ता रहा, तो जून के आखिरी हफ्ते में 29 या फिर 30 जून को यह पंजाब में प्रवेश कर सकता है। डायरेक्टर ने कहा कि पंजाब में 25 जून तक होने वाली बारिश पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से पड़ेगी। यह प्रि मानसून की बारिश नहीं है। गौरतलब है कि इससे पहले पंजाब में 20 से 25 जून के बीच मानसून के दस्तक देने की संभावना जताई गई थी।  अमृतसर का अधिकतम पारा 34.9 डिग्री (सामान्य से 3.2 डिग्री नीचे) लुधियाना का 34.2 डिग्री, पटियाला का 36.3 डिग्री, पठानकोट का 36.6 डिग्री, फाजिल्का का 36.0 डिग्री, होशियारपुर का 34.8 डिग्री, एसबीएस नगर का 31.8 डिग्री और रूपनगर का 36.8 डिग्री दर्ज किया गया। अमृतसर का न्यूनतम पारा 24.0 डिग्री, लुधियाना का 23.8 डिग्री, पटियाला का 26.7 डिग्री, बठिंडा का 25.5 डिग्री, फाजिल्का का 25.8 डिग्री, होशियारपुर का 24.7 डिग्री और रूपनगर का 25.8 दर्ज किया गया।

मॉनसून सक्रिय, कई जिलों में बारिश की संभावना, पलामू में लू का खतरा

रांची  मॉनसून की रुक-रुक कर बारिश से जहां रांची, मेदिनीनगर का अधिकतम तापमान 4.7 डिग्री सेल्सियस और चाईबासा का अधिकतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस गिर गया है. वहीं पलामू, गढ़वा और चतरा में 23, 24 और 25 को लू चलने की संभावना व्यक्त की गई है. जबकि झारखंड के अन्य इलाकों में 28 तक जून मेघ गर्जन, वज्रपात और तेज हवा के तक मेघ साथ बारिश होने की संभावना है. वज्रपात से तीन की मौत इस बीच सोमवार को वज्रपात से तीन लोगों की मौत हो गई है. इनमें हजारीबाग जिला अंतर्गत विष्णुगढ़ के नरकी पंचायत स्थित नावाडीह टोला में वज्रपात से गोवर्धन महतो (68 वर्ष) की मौत हो गई वह बकरियों को चराने गए थे. वहीं गढ़वा के मेराल थाना क्षेत्र अंतर्गत विकताम गांव में वज्रपात से महिला ममता कुंवर (53 वर्ष) की मौत हो गई. सिमडेगा जिले के केरसई थाना के भंडारटोली गांव में वज्रपात से 15 वर्षीय किशोरी की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य बच्चे घायल हो गए. राज्य के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश सोमवार को सबसे अधिक चाईबासा (जगन्नाथपुर) में 14 मिमी, सिमडेगा में 10 मिमी, खूंटी में चार मिमी, देवघर और सरायकेला में दो-दो मिमी, बहरागोड़ा में 2.5 मिमी, लोहरदगा में एक मिमी, रांची में छिटपुट बारिश हुई. अधिकतम तापमान की स्थिति     रांची –  28.4     जमशेदपुर – 31.8     मेदिनीनगर – 37.1     बोकारो – 36.1     चाईबासा – 30.8 झारखंड में 60% कम बारिश मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अगले 24 घंटे में राज्य के कई इलाकों में मॉनसून के सक्रिय होने से अच्छी बारिश हो सकती है. मॉनसून के आने के बाद भी झारखंड में 22 दिनों में 60 प्रतिशत कम बारिश हुई है. 1 जून 2026 से 22 जून 2026 तक सामान्य वर्षापात 112.1 मिमी है, जबकि इस दौरान वास्तविक वर्षापात 44.7 मिमी हुई है. रांची में सामान्य से दो मिमी अधिक बारिश हो गयी है. वहीं 23 जिलों सामान्य से कम बारिश हुई है. गढ़वा में में 99% कम बारिश हुई है. रांची में सामान्य वर्षापात 115.6 मिमी है, है, जबकि इस दौरान 118.2 मिमी बारिश हो गई है.

कैंपस में अब नहीं चलेगी प्लास्टिक, कुल्हड़ और जूट को बढ़ावा

 लखनऊ यूपी के स्टेट यूनिवर्सिटी और डिग्री कॉलेजों में सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर बैन लगा दिया गया है। इसके अलावा पॉलीथीन बैग, प्लास्टिक की बोतलें, चम्मच और प्लास्टिक के कप-प्लेट पर भी पूरी तरह प्रतिबंध लगा है। अब इनकी जगह पर कुल्हड़, कागज के बर्तन, जूट के थैले समेत अन्य का प्रयोग किया जाएगा। वहीं, जनभवन की ओर से इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। राज्यपाल व कुलाधिपति के विशेष कार्याधिकारी डॉ. पंकज एल जॉनी की ओर से जारी किए गए आदेश के अनुसार विश्वविद्यालय व कॉलेज परिस की कैंटीन, हॉस्टल व कार्यक्रमों में प्लास्टिक की जगह पर कुल्हड़, जूट के थैले व कागज के बर्तन का प्रयोग किया जाए। वहीं, नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत में छात्रों, शिक्षकों व कर्मचारियों को प्लास्टिक मुक्त परिसर की शपथ दिलाई जाएगी। गीले व सूखे कचरे के लिए अलग-अलग कूड़ेदान की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा प्लास्टिक कचरे की रिसाइक्लिंग की उचित व्यवस्था की जाए। हर उच्च शिक्षण संस्थान में प्लास्टिक मुक्त परिसर बनाने के लिए समिति का गठन के साथ हर शुक्रवार व शनिवार को विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा। प्लास्टिक की बोतल में रखी कोल्ड ड्रिंक-जूस हो, फिर टिफिन में रखा लंच या प्लास्टिक के बर्तन में रखकर माइक्रोवेब में खाना गरमा रहे हैं तो यह दिमाग के संतुलन को बिगाड़ सकता है। दिमाग में ऐसा केमिकल लोचा पैदा हो सकता है जिससे भूलमने की क्षमता पर कुठाराघात हो सकता है। प्लास्टिक के बर्तन, बोतल बनने में बड़ी मात्रा में बिस्फेनॉल ए यानी बीपीए का इस्तेमाल होता है। यह निष्कर्ष भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों के अध्ययन में आए हैं। यह अध्ययन जर्नल ऑफ बॉयोलॉजिकल केमिस्ट में प्रकाशित हो चुका है। इन बीमारियों के होने का है खतरा याददाश्त कमजोर होना, सीखने की क्षमता में कमी, चिंता, अवसाद, स्वभाव में चिड़चिड़ापन, महिला व पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर बुरा असर, हार्मोनल असंतुलन, मोटापा और डायबिटीज, दिल की बीमारियां होने का खतरा है। 25 किलो से अधिक प्रतिबंधित सामग्री जब्त उधर, हरदोई में यूपी शासन के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन अनुभाग-6, लखनऊ के निर्देशों के क्रम में चलाए जा रहे सिंगल यूज प्लास्टिक जब्तीकरण अभियान के तहत नगर पालिका परिषद संडीला ने कार्रवाई की। बीते शनिवार को अभियान के दौरान 25 किलो से अधिक प्रतिबंधित पॉलीथिन एवं सिंगल यूज प्लास्टिक सामग्री जब्त की गई। साथ ही 82 हजार का जुर्माना भी वसूला गया।

निपुण भारत मिशन को नई रफ्तार! योगी सरकार ने शुरू किया मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण का दूसरा चरण

निपुण भारत मिशन को नई गति देने में जुटी योगी सरकार, जनपद स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण का दूसरा चरण शुरू – राज्य स्तरीय प्रशिक्षण में 20 जनपदों के एसआरजी सदस्य और डायट मेंटर्स ले रहे भाग – प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स आगे जिला और ब्लॉक स्तर पर हजारों शिक्षकों को देंगे प्रशिक्षण – आधारभूत साक्षरता, गणितीय दक्षता और गतिविधि आधारित शिक्षण पर विशेष फोकस – दीक्षा और निपुण टीचर ऐप जैसे डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर भी दिया जा रहा प्रशिक्षण लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार निपुण भारत मिशन को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए शिक्षकों के क्षमता संवर्धन की मजबूत शृंखला तैयार कर रही है। इसी क्रम में कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से जनपद स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स के लिए पांच दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का दूसरा चरण सोमवार से प्रारंभ हो गया।  राज्य स्तर पर आयोजित इस प्रशिक्षण में सहभागी जनपदों से चयनित राज्य संसाधन समूह (एसआरजी) सदस्यों और डायट मेंटर्स को प्रशिक्षित किया जा रहा है, जो आगे जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण का नेतृत्व करते हुए लाखों शिक्षकों तक निपुण भारत मिशन की अवधारणाओं, नवीन शिक्षण पद्धतियों और अधिगम सुधार की रणनीतियों को पहुंचाएंगे। यह प्रशिक्षण निपुण भारत मिशन के अंतर्गत संचालित राज्यव्यापी शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम की दूसरी कड़ी है। प्रशिक्षण का पहला चरण 16 से 20 मई के बीच सफलतापूर्वक आयोजित किया जा चुका है। इसके बाद जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण के लिए दो और चरण आयोजित किए जाएंगे, जिससे प्रदेश भर में एक सुदृढ़ शैक्षणिक प्रशिक्षण तंत्र विकसित किया जा सके। वर्तमान बैच में प्रदेश के 20 जनपदों के प्रतिनिधि शामिल हैं। प्रत्येक सहभागी जनपद से दो राज्य संसाधन समूह (एसआरजी) सदस्य और दो डायट मेंटर्स को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स की जिम्मेदारी आगे जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन करना होगी, ताकि निपुण भारत मिशन की रणनीतियां और शिक्षण पद्धतियां प्रभावी ढंग से विद्यालय स्तर तक पहुंच सकें। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य आधारभूत भाषा एवं गणितीय दक्षताओं के विकास के लिए प्रभावी कक्षा-कक्ष क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। इसके अंतर्गत दक्षता आधारित शिक्षण पद्धति, गतिविधि आधारित शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाएं, प्रिंट-समृद्ध शैक्षणिक सामग्री और टीएलएम के उपयोग, कक्षा मूल्यांकन की प्रभावी रणनीतियों तथा दीक्षा, कैच-अप शिक्षण एवं रीडिंग कैंपेन जैसे कार्यक्रम पर भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। डिजिटल संसाधनों के बेहतर उपयोग पर विशेष बल है। प्रशिक्षण कार्यक्रम को पूरी तरह सहभागितापूर्ण और व्यावहारिक स्वरूप में तैयार किया गया है। इसमें प्रदर्शन, चिंतन, सहकर्मी अधिगम, समूह चर्चा और कक्षा में प्रत्यक्ष उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि प्रशिक्षण के दौरान विकसित शैक्षणिक समझ और कौशल सीधे शिक्षण व्यवहार में परिलक्षित हों तथा विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में निपुण भारत मिशन को मिशन मोड में लागू किया जा रहा है। विद्यालय कायाकल्प, बाल वाटिका, डिजिटल शिक्षण संसाधनों के विस्तार, शिक्षक क्षमता संवर्धन और अधिगम गुणवत्ता सुधार जैसे प्रयासों के साथ सरकार बुनियादी शिक्षा की मजबूत नींव तैयार करने में जुटी है।

रामायण के वीर योद्धा: लक्ष्मण, बाली, अंगद और सुग्रीव का पराक्रम

महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण में हमें अनेक महान योद्धाओं का वर्णन मिलता है चाहे वे असुर हों, मानव हों, वानर हों या देवताओं के अवतार. इन योद्धाओं में से कई को दिव्य वरदान प्राप्त थे, जिनसे उनकी शक्ति कई गुना बढ़ गई थी. आज हम जानेंगे रामायण काल के सबसे शक्तिशाली योद्धाओं के बारे में. श्री राम श्री राम, भगवान विष्णु के अवतार, रामायण के सबसे महान योद्धा थे. उनके पास सभी दिव्य अस्त्र-शस्त्र थे और वे अद्वितीय धनुर्धर थे. उन्होंने अकेले ही असंख्य राक्षसों का वध किया था और अंत में रावण को पराजित कर धर्म की स्थापना की थी. हनुमान जी वायुपुत्र हनुमान अतुलनीय शक्ति और भक्ति के प्रतीक हैं. उन्होंने अकेले ही लंका में प्रवेश कर उसे जला दिया और रावण की सेना को चुनौती दी. उन्हें कई देवताओं से वरदान प्राप्त थे, जिससे वे लगभग अजेय बन गए थे. लक्ष्मण श्री राम के छोटे भाई लक्ष्मण, शेषनाग के अवतार माने जाते हैं. वे अत्यंत पराक्रमी और निपुण धनुर्धर थे. उन्होंने कई राक्षसों का वध किया था और मेघनाद जैसे शक्तिशाली योद्धा को भी परास्त किया था. रावण लंका का राजा रावण एक महान विद्वान और शक्तिशाली योद्धा था. उसे ब्रह्मा जी से कई वरदान प्राप्त थे, जिसके कारण उसे मारना कठिन था. उसने कई देवताओं को पराजित किया था. अंततः भगवान राम ने उसका वध कर धर्म की स्थापना की. मेघनाद (इंद्रजीत) रावण का पुत्र मेघनाद, जिसे इंद्रजीत भी कहा जाता है, अत्यंत शक्तिशाली योद्धा था. उसने इंद्र को पराजित कर यह नाम प्राप्त किया था. उसे मायावी शक्तियां प्राप्त थीं और वह अदृश्य होकर युद्ध कर सकता था. अंत में लक्ष्मण जी ने उसे युद्ध में परास्त किया. कुंभकर्ण कुंभकर्ण रावण का भाई था और अत्यंत विशाल तथा शक्तिशाली था. उसका बल इतना अधिक था कि देवता भी उससे भयभीत रहते थे. युद्ध में उसने वानर सेना को भारी नुकसान पहुंचाया, लेकिन अंत में भगवान राम ने उसे परास्त किया. अतिकाय रावण का पुत्र अतिकाय अत्यंत पराक्रमी योद्धा था. उसे ब्रह्मा जी से वरदान और दिव्य कवच प्राप्त था, जिसके कारण उसे मारना आसान नहीं था. अंत में लक्ष्मण जी ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर उसका वध किया. बाली इंद्रपुत्र बाली वानरों में सबसे शक्तिशाली योद्धाओं में से एक थे. उन्हें वरदान प्राप्त था कि जो भी उनसे युद्ध करेगा, उसकी आधी शक्ति बाली को मिल जाएगी. इसी कारण उन्हें पराजित करना लगभग असंभव था. अंततः भगवान राम ने उनका वध किया. अंगद बाली के पुत्र अंगद अत्यंत वीर और बुद्धिमान योद्धा थे. उन्होंने लंका में दूत बनकर रावण के दरबार में अपना पराक्रम दिखाया. युद्ध में उन्होंने कई राक्षसों का वध किया और अपनी शक्ति का परिचय दिया. सुग्रीव सूर्यपुत्र सुग्रीव किष्किंधा के राजा थे. वे अपने भाई बाली की तरह ही अत्यंत बलशाली थे. उन्होंने युद्ध में कई राक्षसों का वध किया और भगवान राम की सेना का नेतृत्व किया. हालांकि, कुंभकर्ण के साथ उनके युद्ध का वर्णन इस तरह नहीं मिलता जैसा अक्सर बताया जाता है, लेकिन वे एक साहसी और सक्षम योद्धा थे.

18 मिनट की इंटरवल वॉकिंग: क्या वाकई तेजी से कम होता है वजन?

आजकल इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर एक नया ट्रेंड छाया हुआ है. हर दूसरा इन्फ्लुएंसर एक जापानी वॉकिंग मेथड की बात कर रहा है. इस तरीके से चलने पर आम वॉक के मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी से फैट बर्न होता है. ऐसे में मन में यह सवाल आता है कि क्या वाकई इस बात में कोई सच्चाई है, या यह भी कुछ महीनों में गायब हो जाने वाला कोई नया चोचला है. आइए जाते हैं. Japanese walking Method: क्या है यह 3-3-3 वॉकिंग फॉर्मूला? यह जापान की एक खास रिसर्च पर बेस्ड है, जिसे ‘इंटरवल वॉकिंग’ कहते हैं. इसमें आपको कुल 18 मिनट की वॉक करनी होती है. शुरुआत के 3 मिनट आपको बिल्कुल आराम से, धीरे-धीरे चलना है. इसके बाद अगले 3 मिनट आपको जितनी तेजी से हो सके, उतनी तेज वॉक करनी है. बस इसी चक्र को आपको 3 बार दोहराना है. इसके लिए आपको न तो किसी जिम की जरूरत है, न किसी महंगे सामान की और न ही किसी कड़े वर्कआउट प्लान की. जब आप धीमे चलते हैं, तो आपके शरीर को आराम मिलता है. वहीं जब आप तेज चलते हैं, तो आपके दिल की धड़कनें बढ़ती हैं. यही उतार-चढ़ाव इस वॉक को आम सैर से अलग और असरदार बनाता है. वजन घटाने में यह कैसे मदद करता है? इस तरीके (Japanese walking Method) से वॉक करने पर आपका मेटाबॉलिज्म बढ़ जाता है. इसका मतलब यह है कि वॉक खत्म करने के कई घंटों बाद भी, जब आप आराम से कुर्सी पर बैठे होते हैं, तब भी आपका शरीर कैलरी बर्न कर रहा होता है. इसके अलावा, यह शरीर में इंसुलिन को बेहतर बनाता है जिससे पेट के आसपास की चर्बी को पिघलाने में मदद मिलती है. चूंकि यह सिर्फ 18 मिनट का है, इसलिए लोग इसे रोज आसानी से कर पाते हैं. आम वॉक से यह कितनी अलग है? रोजाना एक ही रफ्तार में आराम से टहलना सेहत के लिए अच्छा है, इसमें कोई बुराई नहीं है. लेकिन कुछ समय बाद हमारे शरीर को उसकी आदत हो जाती है, जिससे कैलरी बर्न होना कम हो जाता है. 3-3-3 मेथड शरीर को एक ढर्रे पर नहीं आने देता. जब आप अचानक धीमे से तेज होते हैं, तो शरीर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. 30 मिनट की सामान्य सैर के मुकाबले यह 18 मिनट की इंटरवल वॉक आपके दिल और सेहत को कहीं ज्यादा फायदा पहुंचाती है. किसे करना चाहिए और कैसे शुरू करें? यह तरीका (Japanese walking Method) हर उस इंसान के लिए बेस्ट है जो भारी-भरकम एक्सरसाइज या जिम जाने से बचता है. जो लोग लंबे समय बाद दोबारा एक्टिव हो रहे हैं या जिनकी उम्र 40 से ज्यादा है, उनके लिए यह बेहद सुरक्षित और आसान है. बस दिल की बीमारी वाले लोग इसे शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें. इसे करने के लिए सबसे पहले 3 मिनट ऐसे चलें जैसे आप बाजार में घूम रहे हों. फिर अगले 3 मिनट इतनी तेज चलें जैसे आपकी बस छूट रही हो (दौड़ना नहीं है, बस तेज चलना है). ऐसा 3 बार करें. हफ्ते में कम से कम 5 दिन इसे करने का टारगेट रखें. Japanese walking Method: कितने दिन में दिखेगा असर? शुरुआती दो हफ्तों में ही आपको अपनी एनर्जी में सुधार दिखेगा और नींद भी बेहतर आएगी. चार से छह हफ्ते होते-होते आपकी सांस फूलना बंद हो जाएगी और तेज चलना आसान लगने लगेगा. अगर आप वजन और पेट की चर्बी में साफ बदलाव देखना चाहते हैं, तो आपको 8 से 12 हफ्ते यानी दो-तीन महीने लगातार इसे करना होगा.

पंकज कपूर ने सुनाया शाहरुख खान से जुड़ा NSD का दिलचस्प किस्सा

दिग्गज एक्टर पंकज कपूर ने हाल ही में पुरानी यादें ताजा करते हुए शाहरुख खान से जुड़ा एक दिल छू लेने वाला किस्सा शेयर किया. नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में अपने स्टूडेंट के दिनों को याद करते हुए, पंकज ने बताया कि बॉलीवुड सुपरस्टार ने एक बार उभरते हुए एक्टर्स की जिंदगी में बैकस्टेज एक छोटा लेकिन यादगार रोल निभाया था. किंडल कास्ट के यूट्यूब चैनल पर अपने पुराने क्लासमेट्स के साथ हाल ही में हुई मुलाकात के बारे में बात करते हुए, पंकज ने कहा कि NSD से ग्रेजुएट हुए उन्हें 50 साल हो गए थे और उन्होंने अपने घर पर एक गेट-टुगेदर रखा था. इस मुलाकात के दौरान, उनके स्टूडेंट के दिनों की यादें ताजा हो गईं, जिसमें मशहूर थिएटर डायरेक्टर इब्राहिम अल्काज़ी के पुराने किले में किए गए नाटकों की कहानियां भी शामिल थीं. पंकज ने याद किया कि इब्राहीम अलकाजी जी एक साथ तीन बड़े नाटकों- रजिया सुल्तान, तुगलक और अंधा युग को डायरेक्ट कर रहे थे. ये नाटक किले की पुरानी दीवारों के बैकग्राउंड में किए गए थे, जिससे एक शानदार और यादगार थिएटर का एक्सपीरियंस मिला. पंकज कपूर ने सुनाया किस्सा एक्टर को 'रजिया सुल्तान' का एक खास सीन याद आया जिसमें भूखे नागरिक शासक के सामने जमा हुए थे. पहले साल के स्टूडेंट के तौर पर, पंकज और उनके दोस्तों को भीड़ का हिस्सा बनाया गया था, जबकि उनके दो क्लासमेट्स ने सैनिक का रोल निभाया था. सीन के दौरान, सैनिकों को भीड़ की तरफ नान फेंकने थे, और स्टूडेंट ने जल्द ही एक चालाक प्लान बनाया. पंकज ने याद करते हुए कहा, 'हमने दोस्तों के साथ एक टीम बनाई. वे हमारी तरफ नान फेंकते, हम उन्हें पकड़ते, और इंटरवल के दौरान हम समोसे खरीदते, सब कुछ बैकस्टेज ले जाते और साथ में नान, समोसा और चाय का मजा लेते.' हालांकि, यह सीक्रेट प्लान ज्यादा देर तक छिपा नहीं रहा. पंकज के मुताबिक, अलकाजी ने आखिरकार देखा कि कुछ एक्टर सीन की स्टेजिंग में बदलाव कर रहे थे और तुरंत उन्हें डांट लगाई. इस कहानी को और भी खास बनाने वाली बात थी समोसे सप्लाई करने वाले व्यक्ति की पहचान. उन्होंने याद करते हुए कहा, 'वे समोसे हमें कोई और नहीं बल्कि शाहरुख खान सप्लाई करते थे. उस समय वह 10 साल का लड़का था. उसके पिता वहां कैंटीन चलाते थे.' शाहरुख के पिता चलाते थे कैंटीन इससे पहले, 2016 में टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ एक इंटरव्यू में, शाहरुख खान ने बताया था कि उनके पिता NSD में कैंटीन चलाते थे. उन्होंने कहा, 'मैं नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) का हिस्सा नहीं था, लेकिन मैं वहां के कई एक्टर्स के साथ काम करता था. मनोज बाजपेयी भी वहां से नहीं थे, लेकिन उन्होंने और मैंने रघुवीर यादव जैसे एक्टर्स के साथ काम किया जो NSD का हिस्सा थे. जब हम दिल्ली में थिएटर करते थे, तो वे हमारे बोलने के तरीके और उच्चारण को बेहतर बनाने में मदद करते थे. मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा. मेरे पिता NSD में कैंटीन चलाते थे, इसी वजह से मैं वहाँ के सभी बेहतरीन एक्टर्स को जान पाया.'

छात्र संख्या के आधार पर बिहार के विद्यालयों में तय होंगे शिक्षकों के पद

पटना बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने राज्य के स्कूलों में टीचरों की न्यूनतम संख्या तय कर दी है। शिक्षा विभाग की तरफ से कहा गया है कि पहली से पांचवीं तक के क्लास में 60 छात्रों पर 2 शिक्षकों का होना जरूरी है तो वहीं 61 से 90 छात्रों पर 3 टीचरों का स्कूल में होना अनिवार्य है। बिहार के सरकारी प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षकों की न्यूनतम संख्या कर दी गई है। वास्तविक नामांकन, कक्षा संरचना और विषयगत आवश्यकता के आधार पर इनकी संख्या तय की जाएगी। इस संबंध में प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। शिक्षा विभाग के अनुसार समीक्षा में पाया गया है कि राज्य के अनेक विद्यालयों में निर्धारित मानक के अनुरूप शिक्षक उपलब्ध नहीं है। कुछ विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या आवश्यकता से अधिक है। ऐसे में पूरे राज्य में शिक्षकों के युक्तिकरण और संतुलित वितरण के लिए नया मानक तैयार किया गया है। आदेश में अहम प्रवाधान किए गए हैं कि पहली से आठवीं तक संचालित विद्यालयों में शिक्षक आवश्यकता निर्धारण के लिए कक्षा 1-5 और कक्षा 6-8 को अलग-अलग शैक्षणिक इकाई माना जाएगा। हालांकि, विद्यालय में एक ही प्रधानाध्यापक होंगे। छठी से आठवीं तक छठी से आठवीं तक के लिए प्रत्येक विद्यालय में कम से कम एक-एक शिक्षक विज्ञापन एवं गणित, सामाजिक अध्ययन और भाषा (सामान्यत: हिंदी) में होंगे। 105 से 140 छात्रों के बीच नामांकन होने पर चौथ शिक्षक अंग्रेजी विषय का होगा। जबकि 140 से 175 छात्रों के बीच नामांकन होने पर पांचवां शिक्षक संस्कृत या उर्दू का होगा। इसी तरह 175 से अधिक छात्रों पर आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त शिक्षक दिए जाएंगे। पहली से पांचवी तक के छात्र और शिक्षकों की संख्या कुछ इस तरह निर्धारित की गई है। 61 से 90 – 2 91 से 120 – 4 121 से 150 – 5 150 से अधिक – 5 शिक्षक, 1 प्रधान 150 से अधिक छात्रों वाले विद्यालयों में शिक्षक-छात्र अनुपात 1:30 से अधिक नहीं होगा। शिक्षा विभाग के छह अफसरों पर वित्तीय गड़बड़ियों में गाज वित्तीय अनियमितता और लापरवाही के आरोप में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सोमवार को छह अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दिया है। अधिकारियों में से कुछ की वेतन-पेंशन से कटौती और वेतन वृद्धि पर रोक की भी अनुशंसा की गई है। यह आदेश 8 मई 2026 से प्रभावी होगा। शिक्षा मंत्री ने बताया कि बांका के पूर्व जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) पवन कुमार पर लापरवाही का आरोप है। वे अभी पूर्वी चंपारण के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी हैं। भोजपुर के पूर्व जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मो. इरशाद अंसारी को वित्तीय अनियमितता में बर्खास्त करने की अनुशंसा की गई है। बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के पूर्व सचिव राजेश कुमार पर लापरवाही का आरोप है। शिक्षकों की नियुक्ति में गड़बड़ी में सुपौल के पूर्व डीईओ रामाशीष महतो पर कार्रवाई की गई है। बांका के पूर्व डीईओ रह चुके देवेन्द्र कुमार झा पर भी वित्तीय अनियमितता के आरोप हैं। मधुबनी के मधेपुर की प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मरजीना खातून को विद्यालय परित्याग प्रमाणपत्र पर प्रतिहस्ताक्षर के लिए अवैध राशि लेने के आरोप हैं।