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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को दी माघ बिहू एवं पोंगल की शुभकामनाएं

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को राष्ट्रीय एकात्मता और कृषि संस्कृति के प्रतीक माघ बिहू, भोगी, उत्तरायण एवं पोंगल पर्व की बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ये सभी पावन पर्व नागरिकों के जीवन में सुख-शांति, सद्भावना और धन-धान्य लेकर आएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कामना करते हुए कहा कि हर घर-आंगन में खुशहाली हो तथा देश के किसान और हमारे सभी भाई-बहन समृद्ध बनें।

तीसरी पारी पर ब्रेक! दिग्विजय सिंह राज्यसभा से बाहर—राजनीतिक मोहभंग या कांग्रेस का मास्टरप्लान?

भोपाल 2 बार राज्यसभा के सांसद रहे वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने तीसरी बार अपर हाउस में जाने से मना कर दिया है। उनका मौजूदा कार्यकाल अप्रैल 2026 में खत्म होने वाला है। एमपी में कांग्रेस विधायकों की संख्या को देखें तो वो आसानी से तीसरी बार राज्यसभा जा सकते हैं, लेकिन उन्होंने कहा है- 'मैं अपनी सीट खाली कर रहा हूं।' दिग्विजय सिंह के ऐलान के बाद कई सवाल बन रहे हैं, जिनमें से दो की चर्चा तेजी से हो रही है। पहला- अगर दिग्विजय सिंह नहीं तो कौन जा रहा है राज्यसभा? दूसरा- क्या उनका राज्यसभा से मोहभंग हो गया है या फिर कांग्रेस में कोई सीक्रेट प्लान बन रहा है?   उनकी जगह कौन जा रहा है राज्यसभा? उनकी जगह या फिर कौन राज्यसभा जा रहा है, इसका जवाब दिग्विजय सिंह ने गोल-मोल करते हुए दिया है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान, जब उनसे पूछा गया- 'मध्य प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने आपको पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि राज्यसभा सीट से अनुसूचित जाति के किसी सदस्य को भेजा जाना चाहिए'- इस पर आपका क्या कहना है? इस पर दिग्विजय सिंह ने कहा- “ये मेरे हाथ में नहीं है।” कांग्रेस की सोची-समझी रणनीति की तरफ इशारा अब दूसरा सवाल उठ रहा है क्या दिग्विजय सिंह का मोहभंग हो गया है या कांग्रेस और राहुल गांधी कोई सीक्रेट प्लान पर काम कर रहे हैं? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दिग्विजय सिंह द्वारा अपना नाम पीछे खींच लेना 'व्यक्तिगत निर्णय नहीं' है। ये 'कांग्रेस आलाकमान की सोची समझी रणनीति' है बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस केवल सदन में सरकार को घेरने की बजाय धरातल पर अपनी पकड़ को मजबूत बनाने की कोशिश में जुटी है। इसी क्रम में युवाओं को आगे लाने की तैयारी हो रही है। वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को संगठन मजबूत करने की जिम्मेदारी दी जा रही हैं। विधानसभा चुनाव की चल रही है तैयारी? साल 2017-18 में दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में नर्मदा परिक्रमा का आयोजन किया गया था। ये परिक्रमा करीब 3300 किलोमीटर लंबी थी। इसे कांग्रेस के लिए मजबूती के तौर पर देखा गया था। जैसे राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के द्वारा कार्यकर्ताओं और लोगों पहुंच बनाई थी, ठीक ऐसा ही प्रभाव नर्मदा परिक्रमा का देखने को मिला था। इसका प्रभाव 2018 के एमपी विधानसभा चुनाव में देखने को मिला था। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार फिर दिग्विजय सिंह से कोई बड़ा जनसंपर्क अभियान कराया जा सकता है। ताकि आने वाले विधानसभा चुनाव में संगठन और नए नेताओं को मजबूत दिशा दे सके। दिग्विजय सिंह की हार-जीत का सफर आपको बताते चलें कि दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा नाम हैं। वो 1993 से 2003 तक लगातार 2 बार एमपी के सीएम रहे हैं। हालांकि 2003 में कांग्रेस की सत्ता गई तो उनकी राजनीति में विराम सा लग गया था। लेकिन एक दशक की शांति के बाद 2013 में उनकी फिर वापसी हुई और 2014 से राज्यसभा के सांसद हैं। इस बीच 2019 और 2024 में लोकसभा का चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।  

अयोध्या के साधु-संत भड़के राहुल गांधी पर, कहा— कालनेमि जैसा आचरण

अयोध्या लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के राम मंदिर में दर्शन को लेकर चल रही अटकलों पर अयोध्या के संतों और महंतों ने प्रतिक्रिया दी। हनुमान गढ़ी मंदिर के महंत राजू दास ने कहा कि जो व्यक्ति हिंदुओं को हिंसक कहे, जो यह कहे कि युवा मंदिर लड़कियों को छेड़ने के लिए जाते हैं, जिनकी पार्टी राम मंदिर के विरोध में 17 वकील खड़े कर दे, जो हमेशा सनातन की संस्कृति की अवहेलना करे, लेकिन राम मंदिर का विरोध करने वाली पार्टी के नेता आते हैं तो स्वागत है। कालनेमि से सचेत होने की जरूरत है। जब ये सत्ता में होते हैं तो सनातन पर प्रहार करते हैं। हनुमानगढ़ी के देवेशाचार्य महाराज ने कहा कि देखिए, सूचना मिली है कि वे आ सकते हैं। स्वागत योग्य है। देर ही सही, राम की शरण में आ रहे हैं, कल्याण होगा। रामलला का दर्शन कर रहे हैं तो उनकी पार्टी का भी कल्याण होगा। किसी भी राजनीतिक दल को राम के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। महामंडलेश्वर विष्णु दास ने कहा कि राहुल गांधी तो भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे। सद्बुद्धि कहां से आ गई कि वे राम मंदिर आ रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राम पर सवाल उठाने वाले क्यों आ रहे हैं। यह राहुल गांधी की मानसिकता को दिखाता है कि वे राम विरोधी हैं। कभी कहते हैं हिंदू हिंसा फैलाता है, राम के वजूद पर सवाल उठाते हैं। वे राजनीति से प्रेरित होकर आ रहे हैं। सीताराम दास महाराज ने कहा कि राहुल गांधी के डीएनए में खोट है। समय-समय पर गिरगिट की तरह रूप बदलने वाले शुद्ध कालनेमी हैं। यूपी चुनाव को देखते हुए राम मंदिर आ रहे हैं। मैं पूछता हूं कि वे राम प्राण प्रतिष्ठा में क्यों नहीं आए। वे राम सेतु के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे। भगवान राम का दर्शन करने से उनका कल्याण नहीं होगा। इनकी पार्टी के लोग साधु-संतों पर अभद्र टिप्पणी करते हैं। इन्हें सनातन कभी स्वीकार नहीं करेगा। ये मजार पर चादर चढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि जो राम को काल्पनिक कहते थे, जो राम सेतु को काल्पनिक मानते हैं, अब राम की शरण में जाने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है?

BJP में छिंदवाड़ा गुटबाजी पर प्रदेश अध्यक्ष का सख्त एक्शन, बंटी साहू और शेषराव यादव को भोपाल बुलाया

 भोपाल मध्य प्रदेश की राजनीति में छिंदवाड़ा से बड़ी खबर सामने आई है, जहां भाजपा में आंतरिक कलह चरम पर पहुंच गई है। लोकसभा सांसद विवेक ‘बंटी’ साहू और जिला अध्यक्ष शेषराव यादव के बीच चल रही खींचतान को लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा ने दोनों नेताओं को भोपाल स्थित पार्टी कार्यालय में तलब किया। दोनों को साथ बैठाकर बातचीत कराई गई और पार्टी की एकता बनाए रखने का सख्त अल्टीमेटम दिया गया। छिंदवाड़ा जिले में भाजपा की जिला इकाई में लंबे समय से गुटबाजी चल रही है। सांसद बंटी साहू और जिलाध्यक्ष शेषराव यादव के बीच मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं। जिलाध्यक्ष की बैठकों में सांसद शामिल नहीं हो रहे थे, जबकि शेषराव यादव सांसद के खिलाफ बयानबाजी कर रहे। यह विवाद जिला कार्यकारिणी गठन, पदों के बंटवारे और संगठनात्मक फैसलों को लेकर गहरा गया था।  भोपाल में हुई बैठक में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने दोनों नेताओं से कहा कि लंबे संघर्ष के बाद पार्टी ने छिंदवाड़ा में सफलता हासिल की है, लेकिन वर्तमान स्थिति पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रही है। दोनों को पार्टी हित में मतभेद भुलाकर एकजुट काम करने का निर्देश दिया गया। संगठन महामंत्री हितानंद ने मध्यस्थता की और खींचतान तुरंत खत्म करने की चेतावनी दी। भाजपा सूत्रों के अनुसार, बैठक सकारात्मक रही और दोनों नेताओं ने पार्टी निर्देश मानने का आश्वासन दिया है।

हरियाणवी डांसर सपना चौधरी को हाईकोर्ट से राहत, पासपोर्ट के मामले में बड़ी जीत

सोनीपत  इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अधीनस्थ अदालत को डांसर सपना चौधरी को पासपोर्ट के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) देने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि अभिनेत्री को 10 वर्ष की सामान्य अवधि के लिए पासपोर्ट जारी किया जाए। न्यायमूर्ति प्रकाश भाटिया ने सपना चौधरी द्वारा दायर याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया। सपना की वकील प्रीति सिंह ने दलील दी थी कि अधीनस्थ अदालत ने याचिकाकर्ता को एनओसी जारी करने से मना कर दिया, जबकि उनके खिलाफ दर्ज एक मामले संबंधी जमानत के आदेश में पासपोर्ट से वंचित करने की कोई शर्त नहीं है। अदालत ने पाया कि इसकी कोई संभावना नहीं दिखती कि 2018 में लखनऊ के आशियाना में स्टेज शो नहीं करने से जुड़े आपराधिक मामले में मुकदमा जल्द खत्म होगा। इस मामले में वह जमानत पर हैं। जमानत आदेश में ऐसी कोई शर्त नहीं लगाई गई है कि वह अदालत की अनुमति के बगैर देश नहीं छोड़ेंगी। सपना के वकील का कहना था कि ऐसे में उनके पासपोर्ट के नवीनीकरण की अनुमति न देने से उनके मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। उधर, केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने अर्जी का विरोध किया। कोर्ट ने सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि सपना के पासपोर्ट, जिसका 10 साल के लिए नवीनीकरण होना है, के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र मंजूर करे।   सिलसिलेवार पढ़िए क्या है पूरा मामला…     लखनऊ में मामला दर्ज हुआ: सपना चौधरी के खिलाफ 2018 में लखनऊ के आशियाना थाने में एक शो रद्द होने के बाद धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ था। जिसमें उन्हें जमानत मिल गई थी। इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने उनके पासपोर्ट को रिन्यू कराने के लिए मिलने वाली एनओसी जारी करने से मना कर दिया था। सपना ने कोर्ट में एक याचिका भी दाखिल की थी।     कोई डॉक्यूमेंट जमा नहीं कराया: याचिका में 30 जून 2025 के एक आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत पासपोर्ट नवीनीकरण और विदेश यात्रा की अनुमति इस आधार पर खारिज कर दी गई थी कि यात्रा की अवधि, देश और उद्देश्य से जुड़े डॉक्यूमेंट सपना ने उपलब्ध नहीं करवाए थे।     पासपोर्ट से वंचित रखना उचित नहीं: कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कलाकार या आम नागरिक को अनिश्चितकाल तक पासपोर्ट से वंचित रखना उचित नहीं है, खासकर तब जब उसके फरार होने की कोई आशंका न हो। सपना चौधरी की सामाजिक पहचान, पारिवारिक जिम्मेदारियां और भारत में परमानेंट रेसिडेंट संकेत हैं। जून 2024 में मांगी थी एनओसी जून 2024 में सपना ने अपना पासपोर्ट रिन्यू कराने के लिए कोर्ट से NOC मांगी थी, जिसे ट्रायल कोर्ट ने नामंजूर कर दिया था। इसके बाद ट्रायल कोर्ट के फैसले को सपना ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। जस्टिस पंकज भाटिया की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया। 2 बच्चों की मां, देश छोड़कर नहीं भागूंगी सुनवाई के दौरान सपना चौधरी की ओर से दलील दी गई कि वह 2 बच्चों की मां हैं। भारत में उनकी काफी संपत्ति है। उनका पूरा करियर और परिवार यहां है, इसलिए उनके देश छोड़कर भागने का कोई सवाल ही नहीं है। इस मामले में पहले 7 जनवरी को हुई सुनवाई हुई थी, जिसके बाद हाईकोर्ट ने एनओजी जारी करने के आदेश दिए हैं।

रेल हादसा थाईलैंड: क्रेन गिरने से ट्रेन हुई तबाह, मौके पर 22 लोगों की मौत

 सिखियो  थाईलैंड में एक बड़ा रेल हादसा हुआ है. यहां एक क्रेन गिरने की वजह से यात्री ट्रेन पटरी से उतर गई, जिसमें कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई और 30 से ज्यादा लोग घायल हो गए. नाखोन रत्चासिमा प्रांत के पुलिस प्रमुख थाचापोन चिन्नावोंग ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि इस हादसे में 22 लोगों की जान चली गई है और कई घायल हैं. ये हादसा बुधवार सुबह सिखियो जिले में हुआ. यह इलाका राजधानी बैंकॉक से करीब 230 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है. हादसे का शिकार हुई यात्री ट्रेन उबोन रत्चाथानी प्रांत की ओर जा रही थी. स्थानीय मीडिया के दिखाए गए लाइव वीडियो में देखा गया कि राहतकर्मी मौके पर मौजूद हैं. रंगीन यात्री ट्रेन पटरी से उतरकर एक ओर पलटी हुई थी और मलबे से धुआं उठ रहा था. आग पर काबू पा लिया गया है और बचाव कार्य अब भी जारी है. नाखोन रत्चासिमा के जनसंपर्क विभाग ने फेसबुक पर जानकारी दी है कि अब तक चार शव मलबे से बाहर निकाले जा चुके हैं. फिलहाल राहत और बचाव कार्य जारी है.अधिकारियों ने बताया कि क्रेन एक ऊंची हाई-स्पीड रेलवे बनाने के लिए इस्तेमाल हो रही थी, जो बैंकॉक से उबोन राचथानी प्रांत जा रही चलती ट्रेन पर गिर गई, जिससे ट्रेन पटरी से उतर गई और उसमें आग लग गई. नाखोन राचासिमा के पब्लिक रिलेशंस डिपार्टमेंट के मुताबिक आग पर काबू पा लिया गया है और बचावकर्मी ट्रेन के अंदर फंसे लोगों को ढूंढ रहे हैं.

महिलाओं को सरकार की सौगात, निकाय चुनाव से पहले मिली ₹1500 की राशि

मुंबई  महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव से पहले राज्य सरकार ने महिलाओं को बड़ी सौगात दी है. लाडकी बहन योजना के तहत दिसंबर माह की 1500 रुपये की किस्त राज्य की पात्र महिलाओं के बैंक खातों में जमा करा दी गई है. इस भुगतान के साथ ही चुनाव से ठीक एक दिन पहले लाखों महिलाओं की ‘झोली भर गई’ है. महाराष्ट्र की लगभग 1 करोड़ से अधिक महिलाएं इस योजना की लाभार्थी हैं. याद दिला दें कि चुनाव आयोग के निर्देशों के चलते सरकार को जनवरी महीने की अग्रिम किस्त जारी करने से रोक दिया गया था. आयोग की ओर से स्पष्ट किया गया था कि आचार संहिता की अवधि में किसी भी तरह का एडवांस पेमेंट नहीं किया जा सकता. यह फैसला नगर निगम चुनावों के कारण लागू आदर्श आचार संहिता के मद्देनजर किया गया है. सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने मकर संक्रांति के अवसर पर दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 की दो किस्तें (कुल 3,000 रुपये) लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा करने की घोषणा की थी, लेकिन इस घोषणा पर विपक्षी कांग्रेस ने आपत्ति जताई और इसे आचार संहिता का उल्लंघन करार दिया था. कांग्रेस की शिकायत पर चुनाव आयोग का एक्शन महाराष्ट्र कांग्रेस के महासचिव संदेश कोंडविलकर ने इसे लेकर राज्य चुनाव आयोग को शिकायत पत्र भेजा था, जिसमें कहा गया कि 15 जनवरी को होने वाली 29 नगर निगमों में वोटिंग से ठीक एक दिन पहले इतनी बड़ी रकम ट्रांसफर करना महिला वोटर्स को प्रभावित करने जैसा है और यह ‘सामूहिक सरकारी रिश्वत’ के समान है. शिकायत मिलने के बाद राज्य चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल से रिपोर्ट तलब की और स्पष्टीकरण मांगा. मुख्य सचिव ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि लाडकी बहिन योजना एक सतत योजना है, जैसे संजय गांधी निराधार योजना और चुनाव घोषणा से पहले शुरू होने वाली ऐसी योजनाओं को आचार संहिता के दौरान जारी रखने की अनुमति है. हालांकि, आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए कि दिसंबर 2025 की नियमित किस्त (1,500 रुपये) दी जा सकती है, लेकिन जनवरी 2026 की किस्त को एडवांस में जमा नहीं किया जा सकता. साथ ही, नए लाभार्थियों का चयन या कोई अतिरिक्त लाभ भी नहीं दिया जा सकता. आयोग के इस फैसले से सरकार को जनवरी की किस्त 14 जनवरी से पहले ट्रांसफर करने की अनुमति नहीं मिली.

मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को मिले दो सम्मान

रायपुर : वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार में दो सम्मान रायपुर छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को वर्ष 2025–26 के मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार में दो प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए हैं। विभाग को यह सम्मान अपनी दो महत्वपूर्ण और नवाचार आधारित पहल FDS 2.0 (ई-कुबेर डिजिटल पेमेंट सिस्टम) तथा वन्यजीव (हाथी) ट्रैकिंग एवं अलर्ट प्रणाली के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए दिया गया है। FDS 2.0 (eKuber डिजिटल पेमेंट सिस्टम) भुगतान व्यवस्था में पारदर्शिता और तेजी FDS 2.0 एक आधुनिक डिजिटल भुगतान प्रणाली है, जिसके माध्यम से वन विभाग की सभी वित्तीय गतिविधियाँ ई-कुबेर प्लेटफ़ॉर्म से सीधे जुड़ी हैं। इस व्यवस्था से भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल हो गई है, पारदर्शिता बढ़ी है। मानवीय त्रुटियों की संभावना कम हुई है तथा कार्यों, योजनाओं और कर्मचारियों के भुगतान में गति आई है। इस नवाचार से विभाग के प्रशासनिक कार्यों में दक्षता बढ़ी है और आम नागरिकों से जुड़े भुगतान संबंधी कार्य भी सरल और समयबद्ध हुए हैं। वन्यजीव (हाथी) ट्रैकिंग एवं अलर्ट प्रणाली मानव–हाथी संघर्ष में राहत वन विभाग द्वारा विकसित यह प्रणाली आधुनिक तकनीक पर आधारित है, जिसके माध्यम से हाथियों की गतिविधियों की वास्तविक समय में निगरानी की जाती है। इस पहल के माध्यम से वन क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को समय पर अलर्ट भेजा जाता है, ग्रामीणों को संभावित खतरे से पहले ही सूचना मिल जाती है,मानव– हाथी संघर्ष कम हुआ है, वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण सुरक्षा दोनों को मजबूत सहारा मिला है। यह प्रणाली विभाग के वन्यजीव प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक, सुरक्षित और जनहितकारी बनाती है। नेतृत्व और टीमवर्क का परिणाम इन दोनों उपलब्धियों के पीछे विभागीय नेतृत्व की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। वन मंत्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि के लिए सभी विभागीय अधिकारियों को बधाई दी है। गौरतलब है कि एसीएस श्रीमती ऋचा शर्मा,पीसीसीएफ एवं होएफएफ श्रीनिवास राव, पीसीसीएफ (वाइल्डलाइफ़) अरुण पांडे, तथा अधिकारीगण श्रीमती शालिनी, श्रीमती सतोविषा और वरुण का मार्गदर्शन, नवाचार को प्रोत्साहन और कार्य निष्पादन पर विशेष ध्यान प्रशंसनीय रहा। विभाग की पूरी टीम ने मिलकर इन पहलों को सफलतापूर्वक लागू किया, जिसके परिणामस्वरूप विभाग को दो महत्वपूर्ण सम्मान प्राप्त हुए हैं। सुशासन और नवाचार को नई दिशा मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के ये सम्मान दर्शाते हैं कि वन विभाग पारदर्शी शासन, तकनीक-आधारित समाधान, नागरिक–केंद्रित सेवा तथा प्रभावी वन्यजीव प्रबंधन की दिशा में निरंतर प्रगति कर रहा है। यह उपलब्धि विभाग की उस प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करती है, जिसके माध्यम से वह राज्य में सुशासन, नवाचार और सार्वजनिक हित को प्राथमिकता देता है।

अकाल तख्त साहिब में पेशी: 15 जनवरी को सीएम भगवंत मान करेंगे हाजिरी

चंडीगढ़ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बयान दिया है कि वह 15 जनवरी को श्री अकाल तख्त साहिब के सामने हाजिर होंगे। श्री अकाल तख्त साहिब ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को औपचारिक समन जारी किया था, जिसमें उन्हें 15 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी दी कि वे 15 जनवरी को सुबह 10 बजे हाजिर होने के लिए तैयार हैं। जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब को संबोधित करते हुए भगवंत मान ने लिखा, "15 जनवरी को मेरा कोई और काम नहीं है। मैंने राष्ट्रपति के ऑफिस को भी बता दिया है। आपके आदेश के अनुसार, 15 जनवरी का दिन पूरी तरह से श्री अकाल तख्त साहिब को समर्पित है। समय बदलने के बारे में मेरी या ऑफिस की तरफ से कोई आधिकारिक पत्र या बयान जारी नहीं किया गया है। मैं 15 जनवरी को सुबह 10 बजे हाजिर होने के लिए तैयार हूं।" हालांकि, श्री अकाल तख्त साहिब ने भगवंत मान को 15 जनवरी को शाम 4.30 बजे पेश होने का समय दिया है। एक आधिकारिक पत्र में कहा गया, "5 जनवरी के एक पत्र के तहत आपको 15 जनवरी को सुबह 10 बजे श्री अकाल तख्त साहिब, श्री अमृतसर में अपनी सफाई देने के लिए बुलाया गया था, लेकिन इस बारे में आपके जारी किए गए बयान में आपकी व्यस्तता का जिक्र किया गया है। इसलिए, सिंह साहिब जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब के जारी आदेश के अनुसार, यह लिखा है कि अब आपको अपनी सफाई देने के लिए 15 जनवरी को शाम 04.30 बजे श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचना है।" वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुख्यमंत्री भगवंत मान के एक तथाकथित वीडियो की जांच की मांग कर रही है। भाजपा की पंजाब इकाई के प्रमुख सुनील जाखड़ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "पंजाब पुलिस, जिसने दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी के वीडियो की फॉरेंसिक जांच एक दिन में पूरी कर ली थी, दिल्ली विधानसभा स्पीकर के 48 घंटे में जवाब मांगने के अनुरोध पर जवाब देने के लिए 10 दिन मांग रही है। दूसरी तरफ, हम लगातार मुख्यमंत्री के चेहरे से मिलते-जुलते वीडियो की जांच की मांग कर रहे हैं, उस पर पुलिस चुप क्यों है?" सुनील जाखड़ ने सोमवार को पंजाब के जीडीपी को भी एक पत्र लिखा था। उन्होंने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री का कथित तौर पर अपमानजनक व्यवहार और बेअदबी दिखाने वाला एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस मामले में डीजीपी को पत्र लिखकर तुरंत फॉरेंसिक जांच और उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

मारुति सुजुकी ने IOLके साथ किया करार, पेट्रोल पंप पर मिलेगी अब मारुति कारों की सर्विसिंग सुविधा

नई दिल्ली    जरा सोचिए… आप पेट्रोल पंप पर गाड़ी में तेल भरवाने पहुंचते हैं. उसी वक्त कार में कोई तकनीकी खामी सामने आती है. ऐसे में जहां तेल भरवाया जा रहा है  वहीं बगल में आपकी कार की सर्विस भी हो जाए. न लाइन की टेंशन, न वर्कशॉप खोजने की भागदौड़. आम आदमी के इसी जरूरत को देखते हुए मारुति सुजुकी ने ऐसा कदम उठाया है, जो गाड़ी मालिकों की रोजमर्रा की परेशानी को काफी हद तक कम कर सकता है. अब सर्विस सेंटर खोजने की भी जरूरत नहीं होगी आपकी कार सीधे पेट्रोल पंप पर ही सर्विस हो जाएगी. जी हां, देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी अपने ग्राहकों की सुविधा को और बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है. कंपनी ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के साथ साझेदारी की है, जिसके तहत अब चुनिंदा इंडियन ऑयल पेट्रोल पंपों पर ही मारुति कारों की सर्विसिंग की सुविधा उपलब्ध होगी. इस पहल का मकसद कार सर्विसिंग को आसान, तेज और हर जगह सुलभ बनाना है, खासकर उन इलाकों में जहां अधिकृत वर्कशॉप कम हैं. मारुति सुजुकी और इंडियन ऑयल के बीच हुए समझौता के तहत देशभर के चुनिंदा इंडियन ऑयल आउटलेट्स पर मारुति सुजुकी के सर्विस प्वाइंट्स बनाए जाएंगे. यहां ग्राहकों को रेगुलर मेंटेनेंस, छोटे-मोटे रिपेयर और जरूरत पड़ने पर बड़ी सर्विसिंग की सुविधा भी मिलेगी. इससे कार मालिकों को अलग-अलग जगह जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और समय की भी बचत होगी. यह नया कदम मारुति सुजुकी के पहले से मजबूत आफ्टर-सेल्स नेटवर्क को और बेहतर बनाएगा. फिलहाल कंपनी के पास देशभर में 2,882 शहरों में 5,780 से ज्यादा सर्विस टचप्वाइंट्स हैं. पेट्रोल पंपों पर सर्विस शुरू होने से यह नेटवर्क और भी ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचेगा. क्या कहती है कंपनी? मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के एक्जीक्यूटिव ऑफिसर सर्विस राम सुरेश अकेला ने कहा कि, "कंपनी का लक्ष्य ग्राहकों के लिए कार सर्विसिंग को जितना हो सके उतना आसान बनाना है. इंडियन ऑयल जैसी भरोसेमंद कंपनी के साथ साझेदारी से उन जगहों तक सर्विस पहुंचाई जा सकेगी, जहां ग्राहक रोजाना आते-जाते हैं. यह कदम मोबिलिटी और एनर्जी सेक्टर को एक साथ जोड़ने की दिशा में अहम है." वहीं इंडियन ऑयल के मार्केटिंग डायरेक्टर सौमित्र पी. श्रीवास्तव ने कहा कि, "कंपनी अपने पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए वैल्यू एडेड सर्विस पर लगातार काम कर रही है. देशभर में 41,000 से ज्यादा फ्यूल स्टेशनों के नेटवर्क के साथ इंडियन ऑयल जरूरी सेवाओं को ग्राहकों के और करीब लाने पर काम कर रही है. मारुति सुजुकी के साथ यह साझेदारी इसी सोच का हिस्सा है." इस साझेदारी का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब ग्राहकों को फ्यूल भरवाने और कार सर्विस कराने के लिए अलग-अलग जगह नहीं जाना पड़ेगा. एक ही लोकेशन पर दोनों काम हो जाने से समय और मेहनत दोनों बचेंगे. खासकर छोटे शहरों और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले कार मालिकों के लिए यह सुविधा काफी उपयोगी साबित हो सकती है.