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बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर बड़ी खबर, पीएम मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह प्रस्तावक बनेंगे

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के संबंध में नई जानकारी सामने आई है. सूत्रों से जानकारी के मुताबिक बीजेपी (BJP) के नेताओं ने आज मंगलवार को इसको लेकर एक बैठक की. यह बैठक इसलिए की गई ताकि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को चुनने के प्रॉसेस की रूपरेखा को तय किया जा सके. ऐसी उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इसकी आधिकारिक तौर पर घोषणा की जाएगी. बता दें, यह बैठक भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय में हुई. इस बैठक में मीटिंग में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए बनी कमिटी के संयोजक के. लक्ष्मण शामिल हुए. इनके अलावा सह संयोजक संबित पात्रा और नरेश बंसल ने भी हिस्सा लिया. सूत्रों से यह भी पता चला है कि कमेटी ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी खास बातों पर चर्चा की, जिसमें प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं, समयसीमा और संगठनात्मक समन्वय शामिल हैं. चर्चा का मकसद पार्टी के संवैधानिक ढांचे के हिसाब से एक आसान, पारदर्शी और समय पर चुनाव पक्का करना है. सूत्रों से पता चला है कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव सोमवार 19 जनवरी को हो सकता है. अगले दिन 20 तारीख को चुनाव कराए जाएंगे. पार्टी के वर्किंग प्रेसिडेंट नितिन नबीन 19 जनवरी को अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करेंगे. वहीं, यह भी पता चला है कि पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत पार्टी के सीनियर नेता प्रस्तावक बनेंगे. पार्टी के सीनियर नेता इस बैठक पर करीब से नजर रख रहे हैं, और बातचीत खत्म होने के बाद इसकी आधिकारिक बातचीत या घोषणा होने की उम्मीद है. बीजेपी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव एक अहम संगठनात्मक कदम खासकर पार्टी के भविष्य के राजनीतिक और चुनावी रोडमैप के तौर पर देखा जा रहा है. इससे पहले दिसंबर में, बीजेपी ने बिहार के पांच बार के विधायक नितिन नबीन को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था. अभी केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा नेशनल पार्टी की कमान संभाल रहे हैं. नवीन की नियुक्ति को पार्टी के युवा लीडरशिप पर फोकस करने के तौर पर देखा जा रहा है. बीजेपी हेडक्वार्टर में मीटिंग जारी है, इसलिए आगे की जानकारी का इंतजार है. ऐसे होता है भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव जानकारी के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी के संविधान और नियम की धारा-19 के मुताबिक राष्ट्रीय और प्रदेश परिषद के सदस्यों का एक इलेक्टोरल कॉलेज बनाया जाता है. यही पूरा चुनाव संपन्न कराता है. चुनाव पार्टी के नियमों और कार्यकारिणी के अनुसार ही कराया जाता है. इसके लिए दो शर्ते होती हैं. पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के लिए कम से कम 15 साल से प्राथमिल सदस्य होना आवश्यक है. इलेक्टोरल कॉलेज के कम से कम 20 सदस्यों का प्रस्तावक होना जरूरी है.     बात चुनाव की करें तो पहले नामांकर फॉर्म भरना होता है.     इसके बाद वोटिंग की जाती है.     बैलेट बॉक्स की गिनती होती है.     सबसे आखिरी में नए अध्यक्ष को चुना जाता है.     सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को 3 साल के लिए चुना जाता है. यह कार्यकाल बढ़ाया भी जाता है.   

नए भारत की रफ्तार का प्रतीक ‘प्रगति’, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में यूपी सबसे आगे: योगी आदित्यनाथ

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन (प्रगति) केवल बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा का मंच नहीं, बल्कि नए भारत की नई कार्यसंस्कृति और परिणामोन्मुख शासन का सशक्त उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटेंट, टेक्नोलॉजी और अकाउंटेबिलिटी के समन्वय से शासन में ठोस और समयबद्ध परिणाम सुनिश्चित हो रहे हैं। मंगलवार को आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रगति उस प्रशासनिक मॉडल का विस्तार है, जिसकी नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए रखी थी और वर्ष 2014 के बाद इसे राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती दी गई। उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस और कोऑपरेटिव फेडरलिज्म को सशक्त बनाते हुए प्रगति ने जटिल परियोजनाओं और प्रशासनिक अड़चनों के समाधान को सरल और तेज बनाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति केवल एक रिव्यू मैकेनिज्म नहीं, बल्कि एक व्यापक गवर्नेंस रिफॉर्म है, जिसने शासन को फाइल-केंद्रित संस्कृति से निकालकर फील्ड-आधारित परिणामों की दिशा में अग्रसर किया है। इसके माध्यम से निर्णय प्रक्रिया में तेजी आई है, समय और लागत की बर्बादी रुकी है और केंद्र व राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय के साथ स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित हुई है। उन्होंने बताया कि प्रगति मॉडल की अवधारणा वर्ष 2003 में गुजरात में ‘स्वागत’ (स्टेट वाइड अटेंशन ऑन गवर्नेंस बाई एप्लिकेशन) के रूप में शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य नागरिक शिकायतों के त्वरित निस्तारण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना था। यही मॉडल आगे चलकर प्रगति के राष्ट्रीय स्वरूप के रूप में विकसित हुआ। राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति के प्रभाव का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके माध्यम से अब तक 86 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को गति मिली है। इनमें 377 प्रमुख परियोजनाओं की प्रत्यक्ष समीक्षा प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है, जबकि 3162 में से 2958 मुद्दों का समाधान किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति मॉडल राज्य के लिए एक गेम-चेंजर साबित हुआ है। आज उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन के रूप में उभर रहा है। एक्सप्रेसवे नेटवर्क, देश का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क, सर्वाधिक शहरों में मेट्रो सेवाएं, एयर कनेक्टिविटी, देश की पहली रैपिड रेल, अंतर्देशीय जलमार्ग और रोपवे परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने में प्रगति की अहम भूमिका रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश के पास 10.48 लाख करोड़ रुपये की लागत की 330 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का पोर्टफोलियो है, जो देश में सबसे बड़ा है। इनमें से 2.37 लाख करोड़ रुपये की 128 परियोजनाएं (करीब 39 प्रतिशत) पूरी होकर कमीशन हो चुकी हैं, जबकि 8.11 लाख करोड़ रुपये की 202 परियोजनाएं निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रगति पर हैं। सरकार की प्राथमिकता गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करते हुए सभी प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनों का समाधान करना है, ताकि परियोजनाएं तय समय में धरातल पर उतर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति पोर्टल के माध्यम से प्रदेश में इंटर-एजेंसी बाधाओं का प्रभावी समाधान हुआ है। राजस्व, वन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर विकास, पंचायती राज सहित सभी संबंधित विभाग एक ही मंच पर समन्वय के साथ निर्णय ले रहे हैं, जिससे हाईवे, रेलवे, पावर और टेलीकॉम जैसी परियोजनाओं में तेजी आई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में प्रगति के तहत 515 मुद्दों में से 494 का समाधान किया जा चुका है, जो लगभग 96 प्रतिशत है। वहीं, 287 परियोजनाओं में से 278 परियोजनाओं का समाधान सुनिश्चित किया गया है, जिसकी समाधान दर 97 प्रतिशत है। प्रगति जैसे तकनीक-आधारित प्लेटफॉर्म के कारण उत्तर प्रदेश आज बॉटलनेक स्टेट से निकलकर ब्रेकथ्रू स्टेट में परिवर्तित हो चुका है। अब राज्य सरकार केवल फैसिलिटेटर नहीं, बल्कि एक्सेलेरेटर की भूमिका में विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ा रही है। समयबद्ध परियोजनाएं रोजगार सृजन के साथ-साथ राज्य की आर्थिक गति को भी तेज करती हैं और इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन के प्रति प्रदेशवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया।

सीमा सुरक्षा सख्त: बांग्लादेश की स्थिति को लेकर असम के सीएम ने की समीक्षा बैठक

गुवाहाटी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को बांग्लादेश की ताजा स्थिति पर चिंता जताई, जहां हिंदुओं पर हिंसक हमले हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार पड़ोसी देश में अल्पसंख्यक हिंदू नागरिकों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री सरमा मंगलवार को बांग्लादेश के साथ लंबी सीमा साझा करने वाले श्रीभूमि जिले में एक सरकारी कार्यक्रम में शामिल होते हुए। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "यह हमारी चिंता है कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर बार-बार हमले हो रहे हैं और पड़ोसी देश में अल्पसंख्यक लोगों के साथ खड़ा होना और उन्हें किसी भी तरह की अवांछित स्थिति से बचाना हमारा नैतिक अधिकार है। केंद्र सरकार ने इस मामले का संज्ञान लिया है और राज्य सरकार को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।" मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि बांग्लादेश में अशांति का असम पर भी कुछ असर पड़ा है और राज्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों में सुरक्षा निगरानी बढ़ा दी है। सीएम सरमा ने आगे कहा कि असम सरकार बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार से कदम उठाने का अनुरोध करेगी। उन्होंने कहा, "हालांकि विदेश संबंध केंद्र सरकार का मामला है, फिर भी हम बांग्लादेश में अत्याचार का शिकार हुए हिंदू लोगों की देखभाल के लिए अनुरोध कर सकते हैं। हाल की घटनाएं बहुत निंदनीय हैं।" इससे पहले, सीएम ने कहा कि इंटरनेशनल बॉर्डर पर हो रहे डेवलपमेंट को अलग-थलग करके नहीं देखा जा सकता, खासकर ऐसे समय में जब हिंसा और असुरक्षा बढ़ती दिख रही है। मुख्यमंत्री ने कहा, "बांग्लादेश में जो कुछ भी हो रहा है, वह हमारे लिए गंभीर चिंता का विषय है। हिंदुओं पर अत्याचार और उत्पीड़न बढ़ रहा है और इसका असम पर भी असर पड़ सकता है।" उन्होंने ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत पर जोर दिया। पड़ोसी देश में हाल के राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए सीएम सरमा ने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में भीड़ की हिंसा और अल्पसंख्यक समुदायों पर टारगेटेड हमलों की घटनाएं बढ़ गई हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहना चाहिए और राज्य में किसी भी तरह के बुरे असर को रोकने के लिए स्थिति पर लगातार नजर रखनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा, "इस समय, हमें सावधान रहने और सीमा पार हो रहे घटनाक्रमों पर करीब से नजर रखने की जरूरत है। साथ ही बांग्लादेश में हिंदू समाज को नैतिक समर्थन और भरोसा देना भी जरूरी है।" 2022 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, बांग्लादेश में लगभग 13.13 मिलियन हिंदू रहते हैं, जो देश की आबादी का लगभग आठ प्रतिशत हैं। सीएम सरमा की यह टिप्पणी बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर क्षेत्र में बढ़ती चिंता के बीच आई है।

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की दौड़ में नितिन नबीन, 20 जनवरी को होगा ऐलान

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में एक अहम संगठनात्मक बदलाव होने वाला है, क्योंकि इसके राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन 19 जनवरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन फाइल करने वाले हैं। नामांकन प्रक्रिया के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक के तौर पर मौजूद रहने की उम्मीद है, जो पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच नबीन के नेतृत्व में मजबूत समर्थन और विश्वास को दिखाता है। प्रधानमंत्री की मौजूदगी को भाजपा की संगठनात्मक और वैचारिक दिशा में निरंतरता और स्थिरता पर जोर देने के तौर पर देखा जा रहा है। नामांकन प्रक्रिया भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को चुनने के लिए उसके स्थापित आंतरिक संगठनात्मक ढांचे का हिस्सा है। कई वरिष्ठ नेता, केंद्रीय नेतृत्व के सदस्य और प्रमुख पदाधिकारी इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं, जिससे यह पार्टी के संगठनात्मक कैलेंडर में एक हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम बन जाएगा। नामांकन प्रोसेस पूरा होने के बाद, नए भाजपा अध्यक्ष की औपचारिक घोषणा 20 जनवरी को होने वाली है। उम्मीद है कि इस घोषणा से आने वाली चुनावी चुनौतियों से पहले पार्टी के नेतृत्व संरचना के बारे में स्पष्टता मिलेगी और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा की संगठनात्मक रणनीति को आकार मिलेगा। राजनीतिक जानकार इन घटनाक्रमों पर करीब से नजर रख रहे हैं, क्योंकि यह नियुक्ति ऐसे अहम समय पर हो रही है जब भाजपा अपनी संगठनात्मक ताकत को मजबूत करने और अपनी नेतृत्व को लंबे समय के शासन और चुनावी लक्ष्यों के साथ जोड़ने पर ध्यान दे रही है। 20 जनवरी को आधिकारिक घोषणा के बाद और जानकारी सामने आने की उम्मीद है। बिहार के पांच बार के विधायक नितिन नबीन को 14 दिसंबर को भाजपा का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, लेकिन खरमास (अशुभ समय) के कारण पार्टी अध्यक्ष के तौर पर उनका औपचारिक पदभार ग्रहण रुका हुआ था, जो 14 जनवरी को खत्म हो रहा है। कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद से, नबीन अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रहे हैं और पार्टी के साथियों से मिल रहे हैं। नवीन पहले पार्टी में कई अहम संगठनात्मक पदों पर रह चुके हैं, जिसमें भारतीय जनता युवा मोर्चा के बिहार अध्यक्ष का पद भी शामिल है।

अब तय! दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे कब खुलेगा? पूरी जानकारी—टोल चार्ज से रूट तक

नई दिल्ली दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर सफर का इंतजार अब बहुत जल्द खत्म होने वाला है। दिल्ली के अक्षरधाम मेट्रो स्टेशन से देहरादून तक 213 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस फरवरी के पहले हफ्ते के बाद कभी भी ट्रैफिक के लिए खुल सकता है। इसके शुरू होने से दोनों शहरों के बीच सड़क यात्रा 3 घंटे से भी कम समय में पूरी हो जाएगी। 11000 करोड़ रुपये की लागत से हुआ 3 राज्यों को जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसेव अब करीब-करीब तैयार है। इस कॉरिडोर पर अब बस कुछ ही काम बाकी बचा है। छोटे-छोटे हिस्सों को फाइनल किया जा रहा है, स्ट्रक्चर को ठीक किया जा रहा है और पिट स्टॉप को जल्दी-जल्दी तैयार किया जा रहा है ताकि यात्रियों को चाय, पानी और टॉयलेट मिल सकें। अक्षरधाम मेट्रो स्टेशन से लोनी तक इस रोड को गाड़ियों के लिए खोल दिया गया है, लेकिन फिनिशिंग का काम जारी होने से उससे आगे अभी ट्रैफिक को जाने की इजाजत नहीं दी गई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे अब लगभग पूरा हो गया है, बस कुछ छोटा-मोटा काम ही बाकी है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के अनुसार कॉरिडोर लगभग तैयार है। एनएचएआई अधिकारियों ने कहा कि सभी चार चरणों में औसत फिजिकल प्रोग्रेस 99% से ज्यादा है और बचा हुआ काम कुछ ही दिनों में पूरा होने वाला है। एनएचएआई के एक अधिकारी ने बताया कि मेरठ-बागपत नेशनल हाईवे 334B पर 8 किमी इंटरचेंज पर कुछ छोटा-मोटा काम बचा हुआ है, जो अगले 10 दिनों में पूरा होने की उम्मीद है। दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे स्पीड लिमिट और टोल चार्ज दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे खुलने के बाद दिल्ली से देहरादून तक कार से यात्रा में तीन घंटे से भी कम समय लगेगा। इस रूट पर चार टोल प्लाजा बनाए गए हैं। फास्टैग सालाना पास के जरिये यात्री सिर्फ 60 रुपये में एक साइड की यात्रा पूरी कर सकते हैं। सालाना पास नहीं होने पर उन्हें लगभग 500 रुपये टोल चुकाना होगा। कारों के लिए अधिकतम स्पीड लिमिट 100 किमी प्रति घंटा और बस एवं ट्रकों के लिए 80 किमी प्रति घंटा तय की गई है। चार फेज में बनाया गया दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे फेज- I (31.6 KM) : अक्षरधाम से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे तक, यह ब्राउनफील्ड स्ट्रेच मौजूदा सड़क को सर्विस रोड के साथ छह-लेन एलिवेटेड कॉरिडोर में बदलता है। फेज-II (120 KM): बागपत से सहारनपुर बाईपास तक यह पूरी तरह से ग्रीनफील्ड सेक्शन है। फेज-III (42 KM): सहारनपुर बाईपास से उत्तराखंड में गणेशपुर तक यह स्ट्रेच पूरी तरह से तैयार है। फेज-IV (20 KM): गणेशपुर से देहरादून तक इस सेक्शन में ब्राउनफील्ड और ग्रीनफील्ड दोनों हिस्से शामिल हैं और यह सबसे बड़ी चुनौती थी।  

देश में सबसे ज्यादा 45 आरवीएसएफ केंद्र यूपी में संचालित, इसके बाद हरियाणा और राजस्थान

लखनऊ,  प्रदूषण मुक्ति और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उत्तर प्रदेश ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वाहन स्क्रैपिंग में यूपी देश का नंबर एक राज्य है। भारत सरकार के सड़क परिवहन और हाइवे मंत्रालय के डैशबोर्ड के आंकड़ों के अनुसार राज्य में दिंसबर 2025 तक लगभग 94,094 वाहन स्क्रैप किए जा चुके हैं जो देश में स्क्रैप वाहनों की कुल संख्या का लगभग 42 प्रतिशत है। इस मामले में यूपी के बाद हरियाणा, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र का नंबर आता है। पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग की नीति न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि आधुनिक, सुरक्षित और कम उत्सर्जन वाले वाहनों को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यूपी में हो रहा है सर्वाधिक आरवीएसएफ केंद्रों का संचालन डैश बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 तक पूरे भारत में लगभग 3.94 लाख वाहन स्क्रैप हो चुके हैं जिनमें 1.65 लाख सरकारी और 2.29 लाख निजी/व्यावसायिक वाहन हैं। देश में रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फेसेलिटी (आरवीएसएफ) केंद्रों के मामले में भी यूपी सबसे आगे है। सीएम योगी आदित्यनाथ के प्रदूषण मुक्ति और पर्यावरण संरक्षण की मुहिम के तहत प्रदेश में अब तक 84 आरवीएसएफ केंद्र खोले जा चुके हैं, जिनमें से 45 केंद्रों का सफल संचालन किया जा रहा है। इनमें वाहनों को पर्यावरण-अनुकूल तरीके से नष्ट करने से न केवल सड़कों पर प्रदूषण का स्तर कम हुआ है, बल्कि सड़क सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। आरवीएसएफ केंद्रों की संख्या के मामले में हरियाणा दूसरे स्थान पर है और उसके बाद राजस्थान और गुजरात का स्थान है। पर्यावरण संरक्षण और सड़क सुरक्षा को बढ़ावा केंद्र सरकार की पुराने और अधिक प्रदूषण करने वाले वाहनों को पर्यावरण अनुकूल तरीके से स्क्रैप करने की नीति वर्तमान में देश के 21 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। लेकिन इस मामले में यूपी की सक्रियता बेजोड़ है, जहां परिवहन विभाग स्क्रैपिंग का संचालन और निगरानी सीधे तौर पर करता है। परिवहन विभाग की यह नीति पर्यावरण संरक्षण और सड़क सुरक्षा को बढ़ावा दे रही है।

आर्मी चीफ का बड़ा बयान: जम्मू-कश्मीर में बदले हालात, 31 आतंकियों का सफाया

नई दिल्ली भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में स्थिति संवेदनशील है लेकिन पूरी तरह नियंत्रण में है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में यहां 31 आतंकवादी मारे गए, जिनमें से 65 प्रतिशत पाकिस्तानी मूल के आतंकी थे। यहां मारे गए आतंकियों में पहलगाम हमले के तीनों मुख्य अपराधी भी शामिल हैं। ये आतंकी जम्मू कश्मीर में शुरू किए गए ऑपरेशन ‘महादेव’ में मारे गए थे। मंगलवार को दिल्ली में एक वार्षिक प्रेसवार्ता में जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि जम्मू कश्मीर में अब स्थानीय सक्रिय आतंकवादी न के बराबर है। उन्होंने बताया कि इनकी संख्या अब एकल अंक (सिंगल डिजिट) में रह गई है। यहां आतंकवादी भर्ती लगभग समाप्त हो चुकी है। सेनाध्यक्ष ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सकारात्मक बदलाव के ये स्पष्ट संकेत मिलते हैं। जम्मू कश्मीर में विकास गतिविधियां, पर्यटन का फिर से शुरू होना और शांतिपूर्ण श्री अमरनाथ यात्रा मजबूत सकारात्मक बदलावों को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि श्री अमरनाथ यात्रा में इस वर्ष 4 लाख से ज्यादा तीर्थयात्री आए। जम्मू कश्मीर में टेररिज्म टू टूरिज्म की थीम धीरे-धीरे आकार ले रही है। सेनाध्यक्ष ने यहां पूर्वोत्तर में, विशेष रूप से मणिपुर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की निष्पक्ष, पारदर्शी और निर्णायक कार्रवाई तथा सरकार की सक्रिय पहलों के कारण वर्ष 2025 में स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पूर्वोत्तर की प्रमुख उपलब्धियों में शांतिपूर्ण डुरंड कप का आयोजन शामिल हैं। यहां सामाजिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों जैसे कि शिरुई लिली और संगाई जैसे सांस्कृतिक उत्सवों की वापसी हुई। सितंबर 2025 में उग्रवादी समूहों के साथ सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (एसओओ) का नवीनीकरण किया गया। सेनाध्यक्ष ने बताया कि म्यांमार में अस्थिरता के मद्देनजर, असम राइफल्स, भारतीय सेना और गृह मंत्रालय के समन्वय से एक व्यापक बहु-एजेंसी सुरक्षा तंत्र स्थापित किया गया है। यह तंत्र इसलिए है ताकि पूर्वोत्तर को किसी भी प्रकार के सीमा-पार प्रभाव से सुरक्षित रखा जा सके। म्यांमार में चुनावों के सफल आयोजन के बाद आपसी सहयोग और प्रभावी होने की संभावना जताई गई। थल सेनाध्यक्ष ने बताया कि भारतीय सेना ने वर्ष 2025 में दो पड़ोसी देशों और देश के 10 राज्यों में मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों को अंजाम दिया। इन अभियानों में 30,000 से अधिक लोगों को बचाया गया। वहीं पंजाब में बाढ़ के दौरान पटियाला में ढहती इमारत से सीआरपीएफ कर्मियों को सेना के हेलीकॉप्टर द्वारा बचाने की साहसिक कार्रवाई का विशेष उल्लेख किया गया। इस कार्रवाई ने सेना की त्वरित प्रतिक्रिया और मानवीय प्रतिबद्धता को दर्शाया। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि म्यांमार में जारी अस्थिरता के मद्देनजर भारत ने पूर्वोत्तर को किसी भी दुष्प्रभाव से सुरक्षित रखने के लिए यह व्यापक बहु-एजेंसी सुरक्षा ग्रिड स्थापित किया है। इसमें असम राइफल्स, भारतीय सेना और गृह मंत्रालय मिलकर कार्य कर रहे हैं। म्यांमार में दूसरे चरण के चुनावों के सफल आयोजन के बाद अब दोनों देशों के बीच सहयोग और समन्वय को और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सकेगा। जनरल द्विवेदी ने कहा कि कई सीमावर्ती राज्यों में सेना ने औपचारिक अनुरोध मिलने से पहले ही राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि यह तथ्य इस बात की पुष्टि करता है कि भारतीय सेना आपदा के समय ‘नेचुरल फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की भूमिका निभाती है। थल सेनाध्यक्ष ने कहा कि चाहे वह सीमा-पार अस्थिरता हो या प्राकृतिक आपदाएं, भारतीय सेना हर परिस्थिति में राष्ट्र की सुरक्षा और नागरिकों की सहायता के लिए तत्पर रहती है।

लालू के ‘लाल’ को NDA का न्योता! विजय सिन्हा के भोज में दिखे तेज प्रताप यादव

पटना मकर संक्रांति के अवसर पर बिहार की सियासत गर्माई हुई है। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के पटना स्थित आवास पर मंगलवार को आयोजित दही-चूड़ा भोज में सियासी जमावड़ा देखने को मिला। पूर्व मंत्री एवं जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव भी सिन्हा के भोज में पहुंचे, जो राजनीतिक गलियारे में चर्चा का केंद्र रहा। वहीं, तेज प्रताप को एनडीए से न्योता भी मिलने लगा है। नीतीश सरकार के दो मंत्रियों ने इस मौके पर कहा कि अगर वे एनडीए में आते हैं तो उनका स्वागत है।   डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने मंगलवार को अपने सरकारी आवास पर मकर संक्रांति के अवसर पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया। इसमें सूबे के कई नेताओं को न्योता दिया गया था। सिन्हा के भोज में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी समेत अन्य मंत्री, विधायक समेत कई नेता एवं कार्यकर्ता पहुंचे। हालांकि, इसमें चर्चा राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप की रही। क्या बोले विजय सिन्हा और तेज प्रताप पत्रकारों से बातचीत में विजय सिन्हा ने कहा कि ‘एक बिहारी सब पर भारी’ का भाव जगाना है। तेज प्रताप की एनडीए में एंट्री के सवाल पर उन्होंने कहा कि आने वाले भविष्य में पता चल जाएगा। वहीं, जेजेडी चीफ ने भी इस पर कहा, “पता चल जाएगा, अभी क्यों बताना है।” तेज प्रताप ने कहा कि दही-चूड़ा भोज का आमंत्रण दिया गया था। हम अपना धर्म निभाने आए हैं। नेता लोग मिलते जुलते रहते हैं राजनीति अलग है। तेज प्रताप को एनडीए में आने का न्योता? रिपोर्ट्स के अनुसार, नीतीश सरकार में मंत्री एवं हम सुप्रीमो जीतनराम मांझी के बेटे संतोष सुमन ने कहा कि तेज प्रताप यादव एनडीए में आते हैं तो उनका स्वागत है। हालांकि, यह उनकी मर्जी के ऊपर निर्भर करता है। मंत्री रामकृपाल यादव ने भी तेज प्रताप के एनडीए में आने पर उनका स्वागत करने की बात कही। दरअसल, लालू परिवार और आरजेडी से बेदखल होने के बाद तेज प्रताप ने जनशक्ति जनता दल नाम से नई पार्टी बनाई थी। उन्होंने हालिया बिहार विधानसभा चुनाव में कुछ सीटों पर प्रत्याशी भी उतारे। हालांकि, जेजेडी एक भी सीट नहीं जीत पाई। चुनाव के बाद तेज प्रताप ने नीतीश सरकार को अपना नैतिक समर्थन दे दिया। इसके बाद से उनकी एनडीए नेताओं से नजदीकी की चर्चा चलती रही है। अब तेज प्रताप के भोज पर निगाहें तेज प्रताप यादव ने भी बुधवार को दही-चूड़ा भोज रखा है। पिछले दिनों वे विजय सिन्हा को निमंत्रण देने उनके आवास पर भी पहुंचे थे। उन्होंने एनडीए और महागठबंधन के कई नेताओं को दही-चूड़ा भोज का निमंत्रण दिया है। उनके यहां कौन-कौन नेता पहुंचते हैं। ऐसे में सबकी निगाहें उनके भोज पर टिक गई हैं।  

अब और मरीजों को मिलेगा मुफ्त इलाज, दिल्ली सरकार ने लागू किया नया कदम

नई दिल्ली रेखा गुप्ता सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को जानकारी देते हुए बताया है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक मुफ्त इलाज की सुविधा का फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से सरकार ने EWS (आर्थिक रूप से कमजोर) वर्ग की सालाना आय सीमा तो बढ़ाकर 5 लाख रुपए तक कर दिया गया है। राज्य सरकार ने बताया कि निम्न आय वर्ग के लोगों को यह सुविधा सभी सरकारी अस्पतालों और रियायती दरों पर दी गई जमीन पर बने शहर के अस्पतालों में मिलेगी। जिसके बाद हाई कोर्ट ने भी दिल्ली सरकार की दलीलों को रिकॉर्ड पर लिया।   9 साल पहले लिया था स्वतः संज्ञान इस दौरान उच्च न्यायालय ने बताया कि सक्षम अथॉरिटी ने EWS सीमा की सालाना आय 2.20 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए करने को सहमति दे दी है। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और मनमीत पीएस अरोड़ा की बेंच ने यह बात 8 जनवरी को रेखा गुप्ता सरकार की दलीलों को रिकॉर्ड पर लेते हुए कही। कोर्ट सरकारी अस्पतालों में क्रिटिकल केयर की कमी पर स्वतः संज्ञान लेकर शुरू हुए एक मामले की सुनवाई कर रहा था। सालाना 5 लाख रुपए तक की आय वाले उठा सकेंगे फायदा कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा, 'दिल्ली में स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाने के इच्छुक सभी व्यक्ति अब जरूरी शर्तों को पूरा करने के बाद 5 लाख रुपए की निम्न आय वर्ग सीमा के तहत लाभ पाने के हकदार होंगे। सालाना आय की सीमा में यह बढ़ोतरी दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों और रियायती दरों पर आवंटित ज़मीन पर बने सभी पहचाने गए प्राइवेट अस्पतालों पर लागू होगी, जहां EWS नियम लागू हैं।' इससे पहले तक वार्षिक इतनी इनकम वालों को ही मिलता था फायदा अपने फैसले में कोर्ट ने राज्य सरकार व संबंधित विभागों को इस बढ़ोतरी का पर्याप्त प्रचार करने का निर्देश भी दिया ताकि नागरिकों को इसके बारे में पता चले और वे इसका लाभ उठा सकें। बेंच को बताया गया कि डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज़ ने कोर्ट के पिछले निर्देशों का पालन करते हुए 2 जनवरी को EWS की सालाना आय सीमा को 2.20 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए करने का आदेश पारित किया था। कोर्ट ने यह बात साल 2017 में स्वतः संज्ञान लेते हुए किए एक मामले की सुनवाई के दौरान कही, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी के सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन इलाज में कमी की वजह से साल 2017 में शुरू किए गए एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रहा था। हाई कोर्ट ने पहले AIIMS के डायरेक्टर को डॉ. एसके सरीन समिति की सिफारिशों को लागू करने की जिम्मेदारी लेने का निर्देश दिया था, जिसने स्वास्थ्य प्रणाली में कई कमियों की ओर इशारा किया था, जिसमें खाली पद, महत्वपूर्ण फैकल्टी सदस्यों की कमी और इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। इस मामले में वकील अशोक अग्रवाल को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया गया था।  

443 IAS अफसरों की संपत्ति जानकारी लंबित, यूपी सरकार ने जारी किए कड़े निर्देश

लखनऊ योगी सरकार ने आईएएस अफसरों द्वारा संपत्तियों का ब्योरा देने में हिलाहवाली करने को गंभीरता से लिया है। जानकारी नहीं देने आईएएस अफसरों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। यूपी कॉडर के 683 आईएएस अफसरों में 240 ने संपत्तियों की जानकारी दी है ओर 443 ने स्पैरो पोर्टल पर चल-अचल संपत्तियों की जानकारी नहीं दी है। नियुक्ति विभाग ने इस संबंध में गोपनीय रूप से आंतरिक अलर्ट जारी किया है।   आईएएस अधिकारियों को प्रत्येक वर्ष अर्जित की गई संपत्तियों का विवरण अनिवार्य रूप से स्पैरो (SPARROW) पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज करना होता है। वर्ष 2025 में अर्जित संपत्तियों की जानकारी अधिकारियों को 31 जनवरी तक पोर्टल पर अपलोड करनी है। सूत्रों के अनुसार, नियुक्ति विभाग की समीक्षा में सामने आया है कि कई अधिकारी संपत्तियों का विवरण देने में लापरवाही बरत रहे हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए विभाग की ओर से आंतरिक अलर्ट जारी किया गया है और सभी संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। जानकारी के मुताबिक, कुल 443 आईएएस अधिकारियों में से 12 ऐसे अधिकारी हैं जिन्होंने संपत्तियों का विवरण पोर्टल पर ड्राफ्ट के रूप में भर तो दिया है, लेकिन उसे अब तक अंतिम रूप से सबमिट नहीं किया है। नियुक्ति विभाग ने स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा के बाद जानकारी न देने वाले अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। दो पीसीएस अफसरों की राज्य निर्वाचन आयोग में तैनाती राज्य सरकार ने राज्य निर्वाचन आयोग में दो पीसीएस अधिकारियों की तैनाती की है। यह तैनाती पंचायत चुनाव की तैयारियों को देखते हुए की गई है। अविनाश गौतम एसडीएम कन्नौज और अभिषेक वर्मा एसडीएम रायबरेली को राज्य निर्वाचन आयोग में तैनाती दी गई है।