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छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा हुई सुलभ, छात्रों के सपनों को मिली उड़ान

रायपुर छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है जहाँ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार में शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन और विकास का सबसे बड़ा माध्यम माना जाने लगा है। शिक्षा ही वह शक्ति है जो किसी भी व्यक्ति, समाज और राज्य को नई दिशा देती है। लेकिन उच्च शिक्षा तक पहुँचना हमेशा से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए एक चुनौती रहा है। आर्थिक तंगी के कारण कई मेधावी छात्र अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस समस्या को गहराई से समझा और समाधान के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया — मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना। इस योजना ने हजारों छात्रों के लिए उच्च शिक्षा की राह को आसान बना दिया है। अब छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए लिए गए शिक्षा ऋण पर ब्याज की चिंता नहीं करनी पड़ती, क्योंकि सरकार वह बोझ अपने ऊपर ले रही है। मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना की पृष्ठभूमि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद प्रभावित और पिछड़े क्षेत्रों के छात्र अक्सर आर्थिक कठिनाइयों के कारण तकनीकी व व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते थे। उच्च शिक्षा तक पहुँचने में सबसे बड़ी रुकावट महँगी फीस और शिक्षा ऋण का बोझ था। इसी समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार ने यह योजना शुरू की।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मानना है कि “शिक्षा में निवेश ही सबसे बड़ा निवेश है, क्योंकि शिक्षित युवा ही राज्य और राष्ट्र का भविष्य गढ़ते हैं।” इसी सोच के तहत यह योजना लागू की गई। इस योजना के अंतर्गत अधिकतम 4 लाख रुपए तक का शिक्षा ऋण ब्याज मुक्त उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना का लाभ लेने के लिए छात्र के परिवार की वार्षिक आय 2 लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए। बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, जशपुर आदि नक्सल प्रभावित जिलों के छात्रों को पूर्णत: ब्याज मुक्त ऋण मिलता है।अन्य जिलों के छात्रों को केवल 1% ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। शेष ब्याज सरकार वहन करती है।बैंक द्वारा लगाए जाने वाले ब्याज की पूरी या आंशिक राशि सरकार देती है।इससे छात्रों पर सिर्फ मूलधन  चुकाने की ही बाध्यता रहती है। इस योजना में 35 तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रम शामिल हैं। इनमें डिप्लोमा, स्नातक (ग्रेजुएशन), स्नातकोत्तर (पोस्ट ग्रेजुएशन) और पेशेवर कोर्स सम्मिलित हैं।योजना के लिए पात्र छात्रों का छत्तीसगढ़ का निवासी होना आवश्यक है। उसकी वार्षिक पारिवारिक आय 2 लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए। छात्र को किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में प्रवेश लेना अनिवार्य है। इस योजना के लिए राज्य के किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक / सहकारी बैंक में शिक्षा ऋण के लिए आवेदन किया जा सकता है। आवेदन पत्र के साथ आवश्यक दस्तावेज़ (निवासी प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, प्रवेश पत्र, अंकसूची, आधार कार्ड आदि) जमा करना होता है। बैंक से ऋण स्वीकृत होने के बाद छात्र को योजना का लाभ पाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग या जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आवेदन करना होता है। योजना के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का योगदान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस योजना को बहुत ही कुशलता से धरातल पर उताराने का काम किया है। उनके नेतृत्व में इस योजना का विस्तार इस तरह से किया गया, जिससे नक्सल प्रभावित जिलों के छात्रों को विशेष लाभ मिला।इस योजना में ऑनलाइन प्रक्रिया को सरल बनाया गया ताकि छात्रों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।बजट में बढ़ोतरी करते हुए उच्च शिक्षा विभाग के बजट में इस योजना के लिए पर्याप्त प्रावधान किया गया। इस योजना के लिए एक निगरानी तंत्र बनाया गया है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि बैंक समय पर छात्रों को ऋण दें और ब्याज अनुदान में देरी न हो। योजना के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव छत्तीसगढ़ के मुखिया के नेतृत्व में मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना से गरीब और पिछड़े वर्ग के छात्र उच्च शिक्षा तक पहुँच पा रहे हैं।नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी इस योजना के पहुँचने से काफ़ी उम्मीद बढ़ी है इससे शिक्षा से जुड़ने वाले युवाओं की संख्या बढ़ी है, जिससे नक्सलवाद से लड़ाई को नई ताक़त मिल रही है। तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा लेकर युवा नौकरी और स्वरोज़गार में आगे बढ़ रहे हैं और परिवारों पर ब्याज का बोझ घटने से वे बच्चों की शिक्षा के लिए और अधिक उत्साहित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की भावी योजनाएँ छत्तीसगढ़ सरकार इस योजना को और व्यापक बनाने की तैयारी में है। इस योजना में मिलने वाले ऋण सीमा को 4 लाख रुपए से बढ़ाकर 7 लाख रुपए तक करने पर विचार किया जा रहा है। इस योजना में नॉन-प्रोफेशनल कोर्स (जैसे BA, B.Sc, B.Com) को भी शामिल करने की योजना बनाई जा रही है। डिजिटल पोर्टल पर पूरी तरह से ऑनलाइन आवेदन और स्वीकृति की सुविधा बनाई जा रही है। छात्रवृत्ति और ऋण अनुदान को जोड़कर “डबल बेनिफिट स्कीम” बनाने पर विचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना छत्तीसगढ़ के युवाओं के सपनों को पंख देने वाली योजना है। यह न केवल छात्रों की आर्थिक समस्याएँ हल कर रही है बल्कि राज्य को ज्ञान और कौशल की शक्ति से सशक्त भी बना रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह कदम शिक्षा को लोकतांत्रिक और सुलभ बनाने की दिशा में ऐतिहासिक है। आज जब कोई भी छात्र यह महसूस करता है कि उसकी पढ़ाई सिर्फ पैसे की वजह से अधूरी नहीं रहेगी, तो यह योजना अपने उद्देश्य में सफल मानी जाती है।

दीपावली से पहले हरियाणा में सक्रिय होंगे राजनीतिक दल, पीएम मोदी का संभावित दौरा

चंडीगढ़  हरियाणा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस बार दीपावली से पहले हरियाणा का दौरा कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार उनका कार्यक्रम अंबाला छावनी में तय हो सकता है, जहां वे 1857 की क्रांति के शहीदों की याद में बन रहे स्मारक का लोकार्पण करेंगे। अगर यह कार्यक्रम अंतिम रूप नहीं ले पाया, तो संभावना है कि प्रधानमंत्री पहली नवंबर को हरियाणा दिवस पर रोहतक पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री मोदी का हरियाणा से नाता सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहा। अगस्त 2014 से लेकर अब तक वे 16 बार हरियाणा का दौरा कर चुके हैं। इस बार का दौरा उनकी 17वीं यात्रा होगी। हर दौरे में उन्होंने किसी न किसी योजना की सौगात हरियाणा को दी है- चाहे वह किसानों की आय बढ़ाने की पहल हो या गांवों में लंबे समय से बसे परिवारों को मालिकाना हक देने का फैसला। भाजपा सरकार के एक साल का रिपोर्ट कार्ड मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा की भाजपा सरकार ने 17 अक्टूबर को अपने कार्यकाल का पहला साल पूरा कर लिया है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री का यह दौरा राजनीतिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। सरकार का दावा है कि पिछले एक साल में चार दर्जन से अधिक चुनावी वादे पूरे किए गए हैं और लक्ष्य 90 तक पहुंचने का है। महिलाओं के लिए बड़ी पहल हरियाणा सरकार ने हाल ही में ‘दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना’ की शुरुआत की है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2100 रुपये सीधे खाते में दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री सैनी ने प्रधानमंत्री से मुलाकात कर इस योजना की जानकारी दी और बताया कि पहली नवंबर को हरियाणा दिवस पर महिलाओं के खाते में यह राशि आनी शुरू हो जाएगी। गौरतलब है कि हिमाचल, तेलंगाना और पंजाब में भी ऐसी घोषणाएं हुईं, लेकिन वहां अब तक कोई राशि महिलाओं तक नहीं पहुंची। हरियाणा इस दिशा में देश का पहला राज्य बनने जा रहा है। अंबाला या रोहतक में कार्यक्रम की तैयारी प्रधानमंत्री मोदी के हरियाणा दौरे के दो संभावित स्थल माने जा रहे हैं—अंबाला और रोहतक। अंबाला: यहां 1857 की क्रांति से जुड़े शहीदों की स्मृति में बन रहे स्मारक का उद्घाटन करवाने की योजना है।   रोहतक: अगर कार्यक्रम पहली नवंबर को हुआ तो संभावना है कि प्रधानमंत्री हरियाणा दिवस समारोह में रोहतक पहुंचें और वहां से जनता को संबोधित करें। सैनी सरकार के लिए नैतिक बल प्रधानमंत्री का दौरा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार के लिए भी नैतिक बल साबित होगा। यह लगातार तीसरी बार है जब हरियाणा में भाजपा सरकार बनी है। नायब सिंह सैनी ने पहली बार मार्च 2024 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के स्थान पर जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद अक्टूबर 2024 में वे जनता के जनादेश से मुख्यमंत्री बने। एक साल का कार्यकाल पूरा होने पर मोदी का दौरा पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में नई ऊर्जा भरने का काम करेगा। जापान दौरे से लौटेंगे सैनी प्रधानमंत्री के संभावित आगमन से पहले मुख्यमंत्री सैनी पांच अक्टूबर को जापान रवाना हो रहे हैं। वहां वे एक सप्ताह तक निवेश और तकनीकी सहयोग को लेकर दौरे पर रहेंगे। उम्मीद है कि उनके लौटते ही प्रधानमंत्री के कार्यक्रम पर अंतिम मुहर लगेगी। राजनीतिक और सामाजिक संदेश प्रधानमंत्री मोदी के हरियाणा दौरे का असर सिर्फ कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहेगा। यह प्रदेश की राजनीति, खासकर आने वाले चुनावी समीकरणों को भी प्रभावित करेगा। महिलाएं, किसान और युवा—तीन ऐसे वर्ग हैं जिन पर भाजपा ने हमेशा फोकस किया है और यह दौरा भी इन्हीं मुद्दों को आगे बढ़ाने का मंच बन सकता है।

MLA बालेश्वर साहू पर गंभीर आरोप: 42 लाख की हेराफेरी में FIR, सियासी हलकों में हड़कंप

जांजगीर चांपा  छत्तीसगढ़ की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आई है। जैजैपुर से कांग्रेस विधायक के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि विधायक जब सहकारी समिति में प्रबंधक थे, तब उन्होंने किसान परिवार से करीब 42 लाख रुपये की धोखाधड़ी की। जैजैपुर विधायक बालेश्वर साहू और उनके सहयोगी पर थाना चांपा में धोखाधड़ी के इस प्रकरण से राजनीतिक गलियारो में हलचल है। साहू पर ये मामला उस समय का है जब वो सेवा सहकारी समिति बम्हनीडीह में प्रबंधक के पद पर कार्यरत थे। मामले के मुताबिक फरसवानी के राजकुमार शर्मा ने शिकायत की थी कि साल 2015 से 2020 के बीच बम्हनीडीह सेवा सहकारी समिति के तत्कालीन प्रबंधक ने उसकी 50 एकड़ जमीन के नाम पर किसान क्रेडिट कार्ड लोन लेने की सलाह दी थी। जिसके चलते उन्होंने एचडीएफसी बैंक चांपा में खाता खुलवाया। उस समय शाखा प्रबंधक आरोपी बालेश्वर साहू और उसके साथी गौतम राठौर ने उनसे ब्लैंक चेक पर हस्ताक्षर करवा लिए थे। बैंक खाते से 24 लाख रुपए अपने और परिजनों के खातों में ट्रांसफर कर दी। पुलिस जांच में तथ्य सही पाए गए हैं  और बालेश्वर साहू और विक्रेता गौतम राठौर के खिलाफ धारा 420, 468, 467, 471 के तहत अपराध दर्ज किया है। हालांकि अभी आरोपी  गिरफ्त से बाहर हैं। वहीं इस कार्रवाई के बाद राजनीति गरमा गई है। 

सुबह खाली पेट पानी पीने से मिलते हैं ये चौंकाने वाले फायदे

क्या आपको पता सुबह उठ कर खाली पेट पानी पीने से कीतने फायदें होते हैं। आईए हम आपको बताते है। अगर आप भी इस आदत का पालन करते हैं तो आपको बता दें कि सुबह खाली पेट पानी पीने से कई तरह की बीमारियों पर काबू पाया जा सकता है। खाली पेट पानी पीने से शरीर की सारी गंदगी साफ हो जाती है और खून साफ होता है। वैसे तो एक शख्स को सुबह उठकर लगभग 4 से 5 गिलास पानी पीना चाहिए लेकिन आप इस आदत को डालने की सोच रहे हैं तो शुरुआत एक या दो गिलास से कर सकते हैं। -सुबह उठकर पानी पीने से शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ निकल जाते हैं, जिससे खून साफ हो जाता है। खून साफ हो जाने से त्वचा पर भी चमक आती है। -सुबह उठकर पानी पीने से नई कोशिकाओं का निर्माण होता है। इसके अलावा मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं। -सुबह उठकर पानी पीने से मेटाबॉलिज्म सक्रिय हो जाता है। अगर आप वजन घटाना चाह रहे हैं तो जितना जल्दी हो सके सुबह उठकर खाली पेट पानी पीना शुरू कर दीजिए। -जो लोग सुबह उठकर खाली पेट पानी पीते हैं उन्हें कब्ज की शिकायत नहीं होती। सुबह पेट साफ होने की वजह से ऐसे लोग जो कुछ भी खाते हैं उसका उनके शरीर को पूरा फायदा मिलता है। कब्ज की वजह से होने वाले अन्य रोग भी नहीं होते। -सुबह उठकर पानी पीने से गले, मासिक धर्म, आंखों, पेशाब और किडनी संबंधी कई समस्याएं शरीर से दूर रहती हैं।  

सरकार की जांच रिपोर्ट पर सवाल: कफ सिरप विवाद नहीं थमा

जयपुर राजस्थान में कायसन फार्मा की कफ सिरप को लेकर सरकार की जांच रिपोर्ट ही सवालों में आ गई है। शुक्रवार को सरकार ने अपनी जांच रिपोर्ट में कंपनी के झुंझुनु, भरतपुर और जयपुर से उठाए सैंपल्स को क्लीन चिट दे दी। इसके बाद देर रात कंपनी की सभी 19 दवाओं के विरतण पर रोक लगा दी और दवाओं के मानक निर्धारण की प्रक्रिया को प्रभावित करने के मामले में औषधि नियंत्रक राजाराम शर्मा को निलंबित भी कर दिया। जांच रिपोर्ट में जो सैंपल चैक किए गए उनमें दवा के साल्ट तय मानकों से या तो कम थे या ज्यादा थे। जांच रिपोर्ट में क्या? जयपुर का सैंपल- बैच नंबर (KL-25/148), कंपनी कायसन फार्मा:  इस सैंपल में प्रोपलीन ग्लायकॉल , एथेलीन ग्लायकॉल, डायथेलीन ग्लायकॉल कंटेंट नहीं था(इनके होने से दवा एलकोहाल में बदल जाती है)। डेक्ट्रोमेथारफान हाईड्रोब्रोमाइड की 13.5 एमजी मात्रा होनी चाहिए थी लेकिन जांच में यह भी 13.11 एमजी ही पाई गई। भरतपुर का सैंपल- बैच नंबर (KL-25/147), कंपनी कायसन फार्मा: इस सैंपल में प्रोपलीन ग्लायकॉल , एथेलीन ग्लायकॉल, डायथेलीन ग्लायकॉल नहीं था। डेक्ट्रोमेथारफान हाईड्रोब्रोमाइड की 13.5 एमजी मात्रा होनी चाहिए थी लेकिन जांच में यह भी 12.98 एमजी ही पाई गई। झुंझुनू का सैंपल- बैच नंबर (KL-25/250), कंपनी कायसन फार्मा: इस सैंपल में प्रोपलीन ग्लायकॉल , एथेलीन ग्लायकॉल, डायथेलीन ग्लायकॉल नहीं था। इसके अलावा डेक्ट्रोमेथारफान हाईड्रोब्रोमाइड की 13.5 एमजी मात्रा होनी चाहिए थी लेकिन जांच में यह भी 13.22 एमजी ही पाई गई।  इसी तरह कई सैंपल्स में साॅल्ट की मात्रा तय मानकों से अधिक पाई गई। हालांकि इसके लिए जांच कमेटी ने स्टैंडर्ड प्रोसिजर के तहत दवा में तय मानकों से 95 से 105 प्रतिशत के सॉल्ट विरियेशन को कंज्यूमेबल माना है। विवाद बढ़ने के बाद सरकार इस मामले में बैकफुट पर आई। शाम को मंत्री ने अपने बयान में कंपनी को क्लीन चिट दी और रात होते-होते कहा कि कंपनी के सैंपल्स की फिर से जांच करवा लेंगे। सिरप को पीने से अब तक करीब 35 बच्चे गंभीर रूप से बीमार हो चुके हैं। वहीं 4 बच्चों की मौत भी हो चुकी है। जिनमें दो भरतपुर और दो बच्चे सीकर से हैं। हालांकि सरकार ने इस मामले में यह कहकर पल्ला झाड लिया कि इन बच्चों को दवा सरकारी अस्पताल से नहीं लिखी गई। बड़ी संख्या में प्रेसक्रिप्शन होती है कफ सिरप की खरीद पिछले दिनों राजस्थान में आईसीएमआर की एक रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया है कि राजस्थान में बड़ी संख्या में लोग बिना चिकित्सकीय प्रेसक्रिप्शन के ही कफ सिरप खरीदते हैं। इसके लिए जयपुर में कफ सिरप खरीदने वालों का नाम पता दर्ज करने के आदेश भी औषधि नियंत्रक की तरफ से जारी किए गए थे। इसमें कफ सिरप की खरीद करने पर फोन नम्बर एड्रेस देना अनिवार्य करने की बात कही गई थी। हानिकारक दवाओं पर अंकित होगी चेतावनी ऐसी दवाएं जो बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक हो सकती हैं, उन दवाओं पर अब इस संबंध में आवश्यक जानकारी भी अंकित करवाने की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है। साथ ही, ऐसी दवाएं जो सीओपीडी जैसी बीमारी में उपचार के लिए काम आती हैं, उनकी खरीद एवं आपूर्ति को भी नियंत्रित किया जाएगा। सामान्य परिस्थितियों में खांसी के उपचार के लिए वैकल्पिक दवाओं का उपयोग किया जाएगा।

आप सरकार की SDRF मांग पर राज्यपाल का इनकार, पंजाब में टकराव जारी

चंडीगढ़  पंजाब में बाढ़ राहत और मुआवजे को लेकर केंद्र और आम आदमी पार्टी सरकार के बीच जारी तनातनी और तेज हो गई है। राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने साफ कहा है कि राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) के मानक पूरे देश के लिए समान हैं और इन्हें किसी एक राज्य की मांग पर बदला नहीं जा सकता। कटारिया ने स्पष्ट किया कि नियमों में बदलाव केवल सामूहिक स्तर पर लिए गए फैसले से ही संभव है। उन्होंने यह भी दोहराया कि पंजाब सरकार के पास राहत और मुआवजे के लिए एसडीआरएफ में 12,000 करोड़ रुपये पहले से उपलब्ध हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब पंजाब सरकार ने बीते चार दशकों की सबसे विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित लोगों को अधिक मुआवजा देने के लिए एसडीआरएफ मानकों में संशोधन की मांग की थी। राज्य सरकार का दावा है कि उसके पास केवल 6,000 करोड़ रुपये ही उपलब्ध हैं, जबकि केंद्र लगातार 12,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पेश कर रहा है। इसी सप्ताह मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर 20,000 करोड़ रुपये के बाढ़ राहत पैकेज की मांग रखी थी। उन्होंने बताया था कि राज्य को 13,800 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। शाह ने भी उसी समय कहा था कि पंजाब के पास एसडीआरएफ में पर्याप्त राशि मौजूद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल आंकड़ों का नहीं बल्कि राजनीतिक खींचतान का भी हिस्सा है। केंद्र का कहना है कि राज्य के पास पर्याप्त फंड हैं, जबकि राज्य सरकार उच्च मुआवजे की दर और अतिरिक्त मदद के लिए दबाव बना रही है।

रिहा चक्रबोर्ती को वापस मिला पासपोर्ट, एक्ट्रेस ने शेयर किया अपने नए सफर का संदेश

नई दिल्ली बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक्टर सुशांत सिंह राजपूत मामले में हाल ही में दस्तावेज वापस करने की इजाजत देते हुए एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती के पक्ष में एक बड़ा फैसला सुनाया है. दरअसल, एक्टर के निधन के बाद जांच के चलते रिया चक्रवर्ती का पासपोर्ट जमा कर लिया था. वहीं, अब 5 साल बाद एक्ट्रेस को उनका पासपोर्ट वापस मिल गया है. जिसके बाद उन्होंने पोस्ट शेयर करते हुए एक भावुक पोस्ट लिखा है. बता दें कि रिया चक्रवर्ती ने अपने इंस्टाग्राम पर अपने कठिन वक्त और ‘अनगिनत संघर्षों’ को याद करते हुए कहा कि इस दौरान ‘धैर्य’ ही उनका एकमात्र पासपोर्ट था. एक्ट्रेस ने अपने पोस्ट के साथ कैप्शन में लिखा- ‘पिछले पांच वर्षों से धैर्य ही मेरा एकमात्र पासपोर्ट था. अनगिनत संघर्ष. अनंत आशा. आज, मेरे हाथ में फिर से मेरा पासपोर्ट है. अध्याय 2 के लिए तैयार!’ साल 2020 जून में एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की 14 जून, 2020 को अपने बांद्रा स्थित अपार्टमेंट में हुई मौत के बाद रिया चक्रवर्ती सुर्खियों में थीं. उनके और सुशांत के बीच अफेयर की खबरें थीं. 8 सितंबर, 2020 को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने उन्हें सुशांत की मौत से जुड़े ड्रग्स मामले में हिरासत में ले लिया था. हालांकि, उन्हें एनसीबी के पास अपना पासपोर्ट जमा करने की शर्त पर जमानत मिल गई थी. वर्कफ्रंट की बात करें, तो रिया चक्रवर्ती को आखिरी बार रूमी जाफरी की फिल्म ‘चेहरे’ में नजर आई थीं. इस फिल्म में रिया चक्रवर्ती के अलावा सदी के महानायक अमिताभ बच्चन , इमरान हाशमी और अन्नू कपूर जैसे एक्टर्स भी थे.

अब इंदौर में बिना हेलमेट भी मिलेगा पेट्रोल, कलेक्टर बोले – सख्ती नहीं, समझदारी जरूरी

इंदौर क्लीन सिटी इंदौर में अब हेलमेट पहनकर गाड़ियों में पेट्रोल डलवाना जरूरी नहीं है, बल्कि हेलमेट को लेकर जागरूकता ज्यादा जरूरी है. इसी तरह के एक आदेश के बाद क्लीन सिटी इंदौर में अब हेलमेट लगाना स्वैच्छिक कर दिया गया है. बीते 1 अगस्त को इंदौर जिला प्रशासन ने दुपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट लगाना जरूरी किया था. इस आदेश को वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा ने जारी रखने से इनकार कर दिया है. पूर्व कलेक्टर ने अनिवार्य किया था हेलमेट इंदौर में आए दिन होने वाले टू व्हीलर गाड़ियों के एक्सीडेंट में लोगों की सर पर चोट लगने से मौत एक बड़ी वजह है. लिहाजा पूर्व कलेक्टर आशीष सिंह ने पिछले महीने एक आदेश निकालकर शहर में दुपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट लगाना अनिवार्य किया था. इतना ही नहीं बिना हेलमेट के पेट्रोल पंपों पर वाहन चालकों को पेट्रोल नहीं देने के भी आदेश दिए थे. नए कलेक्टर ने स्वैच्छिक किया हेलमेट लगाना उस दौरान इसी आदेश के उल्लंघन के कारण कई पेट्रोल पंप को सील भी किया गया था. 1 अक्टूबर को फिर इस आदेश को सुचारू रखने के लिए नया आदेश किया जाना था, लेकिन वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा ने उसे सुचारू नहीं रखते हुए शहर में हेलमेट लगाना एक बार फिर स्वैच्छिक कर दिया है. इतना ही नहीं अब बिना हेलमेट के भी वाहन चालक पेट्रोल पंपों पर अपने वाहनों में पेट्रोल डलवा पाएंगे. हालांकि नए कलेक्टर के इस फैसले से शहर के उन वाहन चालकों ने राहत की सांस ली है जिन्हें ट्रैफिक पुलिस द्वारा हेलमेट के नाम पर लगातार परेशान किया जा रहा था. पेट्रोल डलवाने के लिए भी पहनना पड़ता था हेलमेट वहीं, वाहनों में पेट्रोल डलवाने के लिए भी लोगों को हेलमेट लेकर पेट्रोल पंप पर पहुंचना पड़ता था. इधर इस आदेश को सुचारू नहीं रखने के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि अधिकांश वाहन चालक पेट्रोल डलवाते समय ही हेलमेट लगा रहे थे. जबकि वाहन चलाते समय हेलमेट लगाने वाले लोगों की संख्या में कोई खास वृद्धि नहीं हुई थी. इधर इस आदेश का स्थानीय भाजपा नेताओं ने भी विरोध किया था. मध्य प्रदेश में सड़क हादसों में इंदौर अव्वल लोगों को हेलमेट न लगाना पड़े इसको लेकर एक जनहित याचिका भी कोर्ट में प्रस्तुत की थी, लेकिन कोर्ट से भी हेलमेट लगाने संबंधी फैसले पर लोगों को राहत नहीं मिल पाई थी. अब जबकि खुद जिला प्रशासन ने ही अपने आदेश को सुचारू नहीं रखा तो पेट्रोल पंपों पर बिना हेलमेट के पेट्रोल दिए जाने की पुरानी व्यवस्था फिर शुरू हो गई है. एक्सीडेंट के मामले में इंदौर पहले नंबर पर है, जहां पिछले साल ही करीब 6075 सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं जो तुलनात्मक रूप से भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर से सर्वाधिक थी. इन दुर्घटनाओं में अधिकांश वाहन चालक टू व्हीलर थे, जो हेलमेट नहीं लगाए थे.  

कोल्ड्रिफ कफ सिरप विवाद: MP-राजस्थान में मासूमों की मौत के बाद देशभर में हलचल, डोर-टू-डोर सर्वे शुरू

जयपुर  कफ सिरप विवाद ने पूरे देश को हिला दिया है. मध्य प्रदेश और राजस्थान में 11 बच्चों की मौत के बाद तमिलनाडु सरकार ने विवादित सिरप 'कोल्ड्रिफ' की बिक्री पर रोक लगा दी है. वहीं, राजस्थान सरकार ने राज्य ड्रग कंट्रोलर को सस्पेंड कर दिया और संबंधित कंपनी की दवाओं का वितरण रोक दिया है. केंद्र सरकार ने भी राज्यों को एडवाइजरी जारी कर कहा है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी-जुकाम की दवाएं न लिखी जाएं. राजस्थान में बड़ा एक्शन… राजस्थान सरकार ने शुक्रवार को बड़ा कदम उठाया और राज्य के ड्रग कंट्रोलर को निलंबित कर दिया है. साथ ही जयपुर की Kaysons Pharma कंपनी की दवाओं के वितरण पर भी रोक लगा दी गई है. इससे पहले विवादित सिरप बच्चों को देने के आरोप में डॉक्टर पलक कुलवाल और फार्मासिस्ट पप्पू कुमार सोनी को भी निलंबित किया गया था. तमिलनाडु में 'कोल्ड्रिफ' सिरप पर बैन तमिलनाडु सरकार ने 1 अक्टूबर से 'कोल्ड्रिफ' कफ सिरप की बिक्री और स्टॉकिंग पर प्रतिबंध लगा दिया है. यह फैसला मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुई बच्चों की मौतों के बाद लिया गया. स्वास्थ्य विभाग ने कंपनी के कांचीपुरम स्थित प्लांट का निरीक्षण कर सैंपल लिए हैं. इन्हें सरकारी लैब में टेस्ट के लिए भेजा गया है ताकि 'डाईएथिलीन ग्लाइकोल' जैसे खतरनाक केमिकल की मौजूदगी की जांच हो सके. '2 साल से कम बच्चों को ना दें कफ सिरप' केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी की है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी और जुकाम की दवा ना लिखी जाए. DGHS की इस गाइडलाइन का मकसद संदिग्ध सिरप से बच्चों की जान बचाना है. राजस्थान में घर-घर अभियान राजस्थान सरकार ने शनिवार से पूरे प्रदेश में घर-घर सर्वे अभियान शुरू करने का फैसला किया है. आशा, एएनएम और सीएचओ आमजन को जागरूक करेंगे कि वे बिना डॉक्टर की सलाह के खांसी-जुकाम की दवा ना लें. बच्चों की पहुंच से दवाएं दूर रखने और दुष्प्रभाव पर तुरंत कदम उठाने की हिदायत दी जाएगी. स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में बिना प्रोटोकॉल दवा लिखने या वितरित करने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. अमित यादव ने कहा कि 4 साल से कम उम्र के बच्चों को डेक्सट्रोमोरफन युक्त दवा नहीं दी जाए. आमजन को समझाया जाए कि वे घर में रखी दवाओं का बिना चिकित्सकीय परामर्श के सेवन नहीं करें. दवा के सेवन के बाद किसी भी तरह का दुष्प्रभाव अथवा सांस लेने में कठिनाई, सुस्ती, बेहोशी, उल्टी, दौरे जैसे लक्षण नजर आएं तो नजदीकी अस्पताल या हेल्पलाइन नंबर 104/108 या राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम नंबर 0141-2225624 पर संपर्क किया जा सकता है. राजस्थान का सिरप सुरक्षित इस बीच राजस्थान सरकार ने लैब टेस्ट कराए हैं जिनमें यह पाया गया है कि विवादित सिरप के सैंपल निर्धारित मानकों पर खरे उतरे हैं. स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह ने कहा कि दवा में कोई गड़बड़ी नहीं मिली, हालांकि जांच जारी रहेगी. महाराष्ट्र में कोडीन सिरप और ड्रग्स नष्ट ठाणे, पालघर और एमबीवीवी पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर 26,935 लीटर कोडीन-आधारित कफ सिरप समेत 147 करोड़ रुपये की नशीली दवाओं और ड्रग्स को नष्ट किया है. यह कार्रवाई महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंजूरी से की गई.

5 करोड़ की फिरौती मामले में Sonipat मुठभेड़, तीन बदमाश पकड़े गए

सोनीपत  सोनीपत में अपराध की दुनिया का कुख्यात चेहरा बन चुके एक गैंग को शनिवार सुबह एसटीएफ ने मुठभेड़ में धर दबोचा। पांच करोड़ रुपये की फिरौती मांगने वाले इस गिरोह पर लंबे समय से पुलिस की निगाह थी। खेड़ी दमकन रोड पर हुई इस कार्रवाई में गोलीबारी के बीच दो बदमाश पैरों में गोली लगने से घायल हो गए। पुलिस ने दोनों घायल बदमाशों समेत उनके तीसरे साथी को भी गिरफ्तार कर लिया है। यह वही गैंग है जिसने 16 सितंबर 2025 को सोनीपत के पंखा फैक्टरी मालिक नीटू दांगी का अपहरण किया था। अपहरणकर्ताओं ने उनके पिता से पांच करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। मामले के बाद से गांव निजामपुर के रहने वाले कपिल और दीपक फरार चल रहे थे। दोनों पर हत्या, हत्या प्रयास, लूट, रंगदारी और गैंगवार जैसे गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी पर पांच-पांच हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।   ताबड़तोड़ फायरिंग और पुलिस की जवाबी कार्रवाई शनिवार सुबह एसटीएफ यूनिट ने सूचना के आधार पर लोकेशन ट्रेस की और आरोपियों को पकड़ने के लिए घेराबंदी की। तभी बदमाशों ने पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने दोनों को पैरों में गोली मारकर काबू कर लिया, जबकि तीसरा आरोपी मोहम्मद साहिल मौके से दबोच लिया गया। घायल बदमाशों को गोहाना सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। हथियार और एक्सयूवी गाड़ी बरामद मुठभेड़ के बाद पुलिस ने आरोपियों से दो देसी कट्टे और एक एक्सयूवी गाड़ी बरामद की। एसटीएफ सोनीपत के इंचार्ज योगेंद्र सिंह ने पूरी कार्रवाई का नेतृत्व किया। इस दौरान मौके पर एसटीएफ और जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।