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ऐतिहासिक फैसला: हाईकोर्ट ने वक्फ बोर्ड के खिलाफ 600 परिवारों की दावेदारी को ठुकराया

कोच्चि केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि केरल वक्फ बोर्ड द्वारा वर्ष 2019 में मुनंबम की विवादित संपत्ति को वक्फ घोषित करने का निर्णय “कानून के अनुरूप नहीं” था। न्यायमूर्ति एस.ए. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी.एम. की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए एकल पीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें राज्य सरकार द्वारा गठित जांच आयोग को अवैध ठहराया गया था। यह मामला कई दशकों पुराना है। 600 परिवारों के बेघर होने का खतरा बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, मुनंबम की यह भूमि मूल रूप से 404.76 एकड़ थी, जो अब समुद्री कटाव से घटकर करीब 135.11 एकड़ रह गई है। 1950 में सिद्दीक सैत नामक व्यक्ति ने यह भूमि फारूक कॉलेज को उपहार (Gift Deed) के रूप में दी थी। हालांकि, उस समय इस भूमि पर कई परिवार बसे हुए थे। बाद में कॉलेज ने इन परिवारों को भूमि के कुछ हिस्से बेच दिए, लेकिन बिक्री दस्तावेजों में इस संपत्ति को वक्फ भूमि नहीं बताया गया। 2019 में केरल वक्फ बोर्ड ने इस भूमि को औपचारिक रूप से वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया, जिससे पहले हुए सभी भूमि सौदे अमान्य हो गए। इसके बाद लगभग 600 परिवारों को बेदखली का खतरा पैदा हो गया और उन्होंने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया। राज्य सरकार ने बनाई जांच आयोग प्रदर्शनों को देखते हुए केरल सरकार ने नवंबर 2024 में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सी.एन. रामचंद्रन नायर की अध्यक्षता में एक जांच आयोग का गठन किया। इस आयोग का उद्देश्य प्रभावित परिवारों की स्थिति और उनके अधिकारों की जांच करना था। लेकिन ‘वक्फ संरक्षण समिति’ के सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उनका कहना था कि वक्फ संपत्तियों पर जांच आयोग गठित करने का अधिकार सरकार के पास नहीं है, क्योंकि यह अधिकार वक्फ अधिनियम के तहत केवल वक्फ बोर्ड को है। एकल पीठ का फैसला और राज्य की अपील 17 मार्च को न्यायमूर्ति बेकु कुरियन थॉमस की एकल पीठ ने आयोग के गठन के आदेश को रद्द कर दिया था। एकल जज ने यह राय दी थी कि आयोग को वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत पहले से तय या लंबित मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। इसके खिलाफ राज्य सरकार ने डिवीजन बेंच में अपील की। सरकार का तर्क था कि याचिकाकर्ताओं के पास मामले को अदालत में लाने का अधिकार ही नहीं था और वक्फ बोर्ड का आदेश कानूनी रूप से गलत था। डिवीजन बेंच का निर्णय: वक्फ बोर्ड का आदेश ‘अवैध’ और ‘देरी से पारित’ डिवीजन बेंच यानी खंडपीठ ने राज्य सरकार की दलील से सहमति जताते हुए कहा कि 1950 का दस्तावेज “वक्फ डीड” नहीं बल्कि “गिफ्ट डीड” था। अदालत ने कहा, “1950 की दान-पत्री का उद्देश्य ‘ईश्वर के नाम पर स्थायी समर्पण’ करना नहीं था, बल्कि यह केवल एक साधारण उपहार था। अतः यह जमीन किसी भी वक्फ अधिनियम (1954, 1984 या 1995) के तहत वक्फ नहीं मानी जा सकती।” अदालत ने आगे कहा कि वक्फ बोर्ड द्वारा 2019 में जारी आदेश “बेहद विलंबित, कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन में” और “कानूनन अमान्य” हैं। पीठ ने कहा, “वक्फ बोर्ड द्वारा सितंबर और अक्टूबर 2019 में संपत्ति को वक्फ घोषित करने की कार्रवाई न केवल अनुचित देरी से की गई बल्कि यह वक्फ अधिनियमों के प्रावधानों के स्पष्ट उल्लंघन में है। यह आदेश कानून में प्रवर्तनीय नहीं हैं।” “वक्फ डीड” और “गिफ्ट डीड” क्या है? वक्फ डीड एक कानूनी दस्तावेज है जिसके द्वारा कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति को इस्लामी कानून के तहत धर्मार्थ या धार्मिक उद्देश्यों के लिए स्थायी रूप से दान कर देता है। इसे वक्फनामा भी कहते हैं। यह संपत्ति किसी व्यक्ति के निजी लाभ के लिए उपयोग नहीं की जा सकती। वहीं गिफ्ट डीड भी एक कानूनी दस्तावेज है जिसके द्वारा कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति को स्वेच्छा से बिना किसी भुगतान के किसी अन्य व्यक्ति या संस्था को उपहार के रूप में ट्रांसफर करता है। मुख्य अंतर वक्फ डीड धार्मिक/दान उद्देश्य के लिए होती है और स्थायी होती है, जबकि गिफ्ट डीड व्यक्तिगत उपहार के लिए होती है और उद्देश्य में लचीलापन हो सकता है। ‘भूमि हथियाने की कोशिश’ बताया गया अदालत ने अपने कड़े शब्दों में कहा कि वक्फ बोर्ड द्वारा भूमि को वक्फ घोषित करने की प्रक्रिया “भूमि हथियाने की चाल” थी, जिसने सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर असर डाला। अदालत ने कहा, “25 सितंबर 2019 की अधिसूचना, जिसके तहत उक्त भूमि को वक्फ घोषित किया गया, वह वक्फ अधिनियमों के प्रावधानों के विरुद्ध और ‘भूमि हथियाने की कोशिश’ के समान है। इससे सैकड़ों परिवारों की रोटी-रोजी प्रभावित हुई है।” राज्य सरकार वक्फ बोर्ड के आदेश से बाध्य नहीं अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार वक्फ बोर्ड के ऐसे आदेशों से बाध्य नहीं है। पीठ ने कहा, “हम यह घोषित करते हैं कि राज्य सरकार वक्फ बोर्ड की घोषणाओं से बंधी नहीं है, क्योंकि यह केवल एक दिखावा था ताकि संपत्ति को वक्फ बताकर कब्जा किया जा सके। राज्य सरकार को वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 97 के तहत आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का अधिकार है।”  

15 नवंबर तक खिलाड़ियों को रिटेन करने का आखिरी मौका, IPL 2026 ऑक्शन की तैयारियाँ जोरों पर

मुंबई  इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 की नीलामी (Auction) की तारीख लगभग तय मानी जा रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार 13 से 15 दिसंबर के बीच ऑक्शन होने की पूरी संभावना है. यह जानकारी फ्रेंचाइज़ी अधिकारियों ने BCCI के साथ हुई बातचीत के बाद साझा की है. हालांकि IPL की गवर्निंग काउंसिल ने अभी तक शेड्यूल की औपचारिक घोषणा नहीं की है. 'क्रिकबज' की रिपोर्ट के मुताब‍िक ऑक्शन कहां होगा, क्या यह फ‍िर से व‍िदेशी धरती पर होगा. इस बारे में अब तक कोई सूचना नहीं मिली है. ध्यान रहे प‍िछले 2 ऑक्शन विदेशी धरती पर हुए थे. 2023 में ऑक्शन दुबई तो 2024 में ऑक्शन जेद्दा (सऊदी अरब) में हुआ था. वहीं क्रिकबज को सूत्रों ने बताया कि इस बात में कोई आश्चचर्य नहीं होना चाहिए कि म‍िनी ऑक्शन भारत में भी हो सकता है.  हालांकि उस निर्णय को अभी ठोस रूप दिया जाना बाकी है.  हालांकि एक बात लगभग तय मानी जा सकती है कि रिटेंशन की आखिरी तारीख 15 नवंबर है_ तब तक सभी IPL फ्रेंचाइज‍ियों को उन खिलाड़ियों के नाम बीसीसीआई को देने होंगे, जिन्हें वे नीलामी से पहले रिलीज (छोड़ना) चाहती हैं. दूसरी टीमों में बड़े बदलाव की संभावना फिलहाल कम है. सिवाय चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) और राजस्थान रॉयल्स (RR) के… ये दोनों ही टीमें पिछले सीजन में पॉइंट टेबल में सबसे नीचे थीं.  CSK से कौन से ख‍िलाड़ी होंगे र‍िलीज?  रिपोर्ट्स के मुताबिक चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) की रिलीज लिस्ट में दीपक हुड्डा, विजय शंकर, राहुल त्रिपाठी, सैम करन, डेवोन कॉनवे का नाम हो सकता है. पांच बार की IPL चैम्प‍ियन CSK के पास आर अश्विन के आईपीएल से रिटायर होने के बाद पहले ही 9.75 करोड़ रुपये का बजट जुड़ चुका है.  RR से कौन से ख‍िलाड़ी होंगे र‍िलीज?  इस रिपोर्ट में दावा किया गया है राजस्थान रॉयल्स की रिलीज लिस्ट में सबसे ऊपर संजू सैमसन का नाम होगा, अगर फ्रेंचाइज कप्तान के लिए ट्रेड करने में सफल नहीं होती है. वहीं रॉयल्स की टीम में वानिंदु हसरंगा और महीश तीक्ष्णा को रिलीज करने की बात भी चल रही थी, लेकिन कुमार संगकारा के हेड कोच के रूप में लौटने के बाद इस योजना में बदलाव हो सकता है.  स्टार्क, नटराजन, आकाश दीप जाएंगे नई टीम में  टी नटराजन, मिचेल स्टार्क, आकाश दीप, मयंक यादव, डेविड मिलर और अन्य खिलाड़ी नई फ्रेंचाइज़ियों की तलाश में हो सकते हैं, हालांकि अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. वहीं वेंकटेश अय्यर का भी ऐसा ही मामला है. जो पिछली नीलामी में तीसरे सबसे महंगे खरीदे गए खिलाड़ी थे, कोलकाता नाइट राइडर्स ने उनको 23.75 करोड़ रुपये में खरीदा था.   र‍िपोर्ट में इस बात का भी दावा है कि फ्रेंचाइज‍ियों के बीच चल रही चर्चा के अनुसार, कैमरन ग्रीन नीलामी में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले ख‍िलाड़ी हो सकते हैं. इस कंगारू ऑलराउंडर ने पिछली नीलामी चोट के कारण मिस की थी. उनको बड़ी कीमत मिल सकती है. 

ऋतिक रोशन करेंगे डिजिटल डेब्यू? ‘स्टॉर्म’ के लिए प्राइम वीडियो से मिलाया हाथ

मुंबई प्राइम वीडियो ने आज अपनी आने वाली ओरिजिनल ड्रामा सीरीज ‘स्टॉर्म’ की घोषणा की है. इस प्रोजेक्ट के साथ सुपरस्टार ऋतिक रोशन  और उनकी कंपनी HRX फिल्म्स (फिल्मक्राफ्ट प्रोडक्शंस का हिस्सा) का एक नया और रोमांचक कोलैबोरेशन शुरू हुआ है. इस सीरीज को अजीतपाल सिंह ने बनाया और डायरेक्ट किया है, जिसकी दिलचस्प कहानी अजीतपाल सिंह, फ्रांस्वा लुनेल और स्वाति दास ने लिखी है. आने वाली इस सीरीज़ को ऋतिक रोशन और ईशान रोशन प्रोड्यूस कर रहे हैं. बता दें कि यह ऋतिक रोशन  के लिए स्ट्रीमिंग की दुनिया में पहला कदम होगा. ‘स्टॉर्म’ में पार्वती थिरुवोथु, आलया एफ, सृष्टि श्रीवास्तव, रमा शर्मा और सबा आजाद जैसी शानदार कलाकारों की टीम नजर आएगी. इसका प्रोडक्शन जल्द ही शुरू होने वाला है. ये एक रोमांचक थ्रिलर ड्रामा है, जिसकी कहानी मुंबई की बैकड्रॉप पर आधारित है. प्राइम वीडियो के वाइस प्रेसिडेंट, APAC और MENA गौरव गांधी ने कहा, “प्राइम वीडियो में हमारा मकसद हमेशा अच्छे कलाकारों और क्रिएटिव लोगों को मौका देना है, चाहे वो कैमरे के आगे हों या पीछे. हम ऐसी कहानियां लाना चाहते हैं जो दुनिया भर के लोगों को पसंद आएं. ऋतिक रोशन भारतीय फिल्मों के सबसे टैलेंटेड और रचनात्मक स्टार्स में से एक हैं. उनके और HRX Films के साथ हमारा यह साथ काम करना हमारे लिए बहुत खास है. ‘स्टॉर्म’ सिर्फ एक सीरीज नहीं, बल्कि एक नए और रोमांचक सफर की शुरुआत है, जिससे आगे और भी बेहतरीन प्रोजेक्ट्स आएंगे. इस सीरीज को बनाते समय हमें बहुत अच्छा अनुभव मिला. ऋतिक की खास सोच और ईशान रोशन की जोश और मेहनत ने कहानी को और बेहतर बना दिया. ‘स्टॉर्म’  में दमदार महिला किरदार और दिलचस्प कहानी है, जो हमें यकीन है कि दुनिया भर के दर्शकों को पसंद आएगी.” एक्टर ऋतिक रोशन ने कहा, “‘स्टॉर्म’ ने मुझे ओटीटी की दुनिया में बतौर प्रोड्यूसर अपनी शुरुआत करने का एक शानदार मौका दिया. साथ ही प्राइम वीडियो, जो बेहतरीन कहानियाँ दर्शकों तक पहुँचाने के लिए जाना जाता है, मेरे लिए पहली पसंद रहा. ‘स्टॉर्म’ की तरफ मुझे जिस चीज ने खींचा, वह अजीतपाल द्वारा बनाई गई दिलचस्प और सच्चाई से भरी दुनिया है. कहानी गहरी, दमदार और यादगार किरदारों से भरी हुई है, जिन्हें बेहद टैलेंटेड कलाकार निभाने वाले हैं. इस सीरीज में सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के दर्शकों को जोड़ने की ताकत है. मैं बेहद उत्साहित हूं कि लोग प्राइम वीडियो पर इसकी शानदार कहानी को देखेंगे.”

हाई कोर्ट सख्त: सबरीमाला मंदिर चोरी मामले में तुरंत जांच, आरोपी जल्द पकड़े जाएं

केरल  केरल हाई कोर्ट ने शुक्रवार को राज्य पुलिस को आदेश दिया कि वह सबरीमला मंदिर के चौखट या लिंटर से सोने की हेराफेरी को लेकर आपराधिक केस दर्ज कर जांच शुरू करे। जस्टिस राजा विजयराघवन वी. और जस्टिस के. वी. जयकुमार की पीठ ने कहा, 'अब तक की गई जांच से ऐसा प्रतीत होता है कि जहां तक चौखट का संबंध है, सोने की हेराफेरी की गई है। हमारे समक्ष पेश सतर्कता रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि काफी मात्रा में सोना लगभग 474.9 ग्राम – उन्नीकृष्णन पोट्टी (सोने की परत चढ़ाने का प्रस्ताव देने वाले प्रायोजक) को सौंपा गया था।’ हालांकि, रिकॉर्ड से यह पता नहीं चलता कि सोने की यह मात्रा त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (TDB) को सौंपी थी। पीठ ने अपनी ओर से गठित विशेष जांच दल (SIT) को चौखट मुद्दे के साथ-साथ जांच के दौरान सामने आने वाले अन्य सभी पहलुओं की भी पड़ताल करने का निर्देश दिया। इसने कहा कि सतर्कता रिपोर्ट त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के समक्ष रखी जाए, जिसे उसे राज्य पुलिस प्रमुख को भेजने का आदेश दिया गया। राज्य पुलिस प्रमुख को एडीजीपी (अपराध शाखा और कानून व्यवस्था) एच. वेंकटेश को इस मामले के संबंध में आपराधिक मामला दर्ज करने और जांच शुरू करने का निर्देश देने के लिए कहा गया। SIT को निष्पक्ष जांच करने का निर्देश 9 अक्टूबर को जारी सरकारी आदेश के अनुसार, एडीजीपी वेंकटेश एसआईटी का नेतृत्व कर रहे हैं। पीठ ने एसआईटी को पूरी तरह से निष्पक्ष और त्वरित जांच करने का निर्देश दिया ताकि अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाया जा सके। SIT को 6 सप्ताह के भीतर एक रिपोर्ट दाखिल करने और हर 2 सप्ताह में एक बार अदालत के समक्ष जांच की स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश भी दिया गया। पीठ ने यह भी कहा कि SIT अदालत के प्रति सीधे जवाबदेह होगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जांच अत्यंत विवेक और ईमानदारी के साथ की जाए। एसआईटी को यह भी निर्देश दिया गया कि जांच पूरी होने तक वह जांच का विवरण जनता या मीडिया को नहीं बताए।  

कांग्रेस का संगठन सृजन अभियान शुरू, उमंग सिंघार बोले – युवाओं को मिलेगा नेतृत्व का अवसर

बिलासपुर मध्यप्रदेश के नेता प्रतिपक्ष व केंद्रीय पर्यवेक्षक उमंग सिंघार छत्तीसगढ़ दौरे पर पहुंचे हैं. उन्होंने कहा कि नई सोच के साथ आगे लड़ाई लड़ेंगे. जिन्हें चुनाव लड़ना है, उन्हें पहले पद छोड़ना पड़ेगा. चुनाव नहीं लड़ने वाला संगठन में काम करेगा. संगठन सृजन की यही क्राइटेरिया है. दरअसल नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान में शामिल होने बिलासपुर पहुंचे हैं. उन्होंने कहा कि 2028 के चुनाव के लिए संगठन मजबूती के साथ खड़ा रहेगा. नया जोश, नया नेतृत्व, नई सोच जरूरी है. संगठन में नई पीढ़ी को अवसर दिया जाएगा. उद्योगपतियों के लिए काम कर रही सरकार : उमंग सिंघार उमंग सिंघार ने छत्तीसगढ़ और एमपी की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा है कि यहां की सरकार बड़े उद्योगपतियों के लिए काम कर रही है. आम लोगों के लिए काम नहीं कर रही है. आम जनता में बोझ डाला जा रहा है. लोग भारी बिजली बिल आने से परेशान हैं. स्मार्ट मीटर का रिमोट विदेशी कंपनियों के हाथ में है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ दौरे को लेकर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि क्या उद्योगपति के खदानों के लिए शाह लगातार छत्तीसगढ़ आ रहे हैं.

CJI गवई की शख्सियत का अंदाज: ‘हम भी तो बच्चे थे!’ – SG तुषार मेहता के सामने यह क्यों कहा?

नई दिल्ली देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ आज (शुक्रवार, 10 अक्टूबर को) दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण से जुड़े पटाखों के मुद्दे और ‘हरित’ पटाखों के निर्माण और बिक्री से संबंधित मुद्दों पर सुनवाई कर रही थी। इस दौरान दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि कुछ शर्तों के साथ पटाखे जलाने की अनुमति दी जाए। NCR के राज्यों ने कोर्ट में यह भी दलील दी कि वे सभी हरित पटाखे हों और केवल राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान यानी National Environmental Engineering Research Institute (NEERI) द्वारा हरित पटाखे के तौर पर अनुमोदित हों। सुनवाई के दौरान एनसीआर राज्यों ने शीर्ष अदालत को यह सुझाव भी दिया कि किसी भी ई-कॉमर्स वेबसाइट को पटाखों के लिए ऑनलाइन ऑर्डर स्वीकार नहीं करेंगे। एनसीआर राज्यों ने शीर्ष अदालत को यह सुझाव भी दिया कि दिवाली पर रात 8 बजे से रात 10 बजे तक ही पटाखे जलाने की अनुमति दी जानी चाहिए। एनसीआर राज्यों ने यह सुझाव भी दिया कि क्रिसमस और नए साल की पूर्व संध्या पर रात 11.55 बजे से रात 12.30 बजे तक ही पटाखे जलाने की अनुमति दी जाए। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल इस मामले पर कोई आदेश नहीं दिया है। क्या 2018 में 2024 की तुलना में काफी कम प्रदूषण (AQI) था दरअसल, एनसीआर राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली-एनसीआर में हरित पटाखे जलाने की अनुमति देने का आग्रह किया था। केंद्र सरकार की तरफ से मामले में पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से हरित पटाखे जलाने की इजाजत देने की मांग की थी। बार एंड बेंच के मुताबिक, इस दौरान CJI बीआर गवई ने पूछा, "क्या 2018 में प्रदूषण (AQI) 2024 की तुलना में काफी कम था?" हम सब भी तो बच्चे थे मीलॉर्ड! इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “कोविड काल में यह कम हुआ था… अन्यथा यह हमेशा से वैसा ही रहा है। रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे पता चले कि पटाखों की वजह से ऐसा हुआ है। मैं आग्रह करता हूँ कि पटाखों पर कोई प्रतिबंध न हो। अगर दो घंटे का समय है… तो एक घंटा तो सिर्फ़ माता-पिता को समझाने में ही चला जाता है! हम सब भी तो बच्चे थे मीलॉर्ड!” आधे हरियाणा पर बिना सुनवाई के ही प्रतिबंध इसी दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता के परमेश्वर ने हरियाणा का पक्ष रखते हुए कहा, "आधे हरियाणा पर बिना सुनवाई के ही प्रतिबंध लगा दिया गया है। एनसीआर का विस्तार ऐसा ही है।" CJI जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ पटाखा निर्माताओं द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें प्रतिबंध में ढील देने और ‘हरित’ पटाखे बेचने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया है। बता दें कि शीर्ष अदालत ने 26 सितंबर को प्रमाणित निर्माताओं को इस शर्त के साथ ‘हरित’ पटाखों के निर्माण की अनुमति दी थी कि वे बिना उसकी मंजूरी के प्रतिबंधित दिल्ली-एनसीआर में इन्हें नहीं बेचेंगे।  

कैबिनेट का बड़ा फैसला : साय सरकार ने तय की धान की कीमत ₹3100 प्रति क्विंटल, 7 दिन में मिलेगा भुगतान

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में राज्य के किसानों से खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। राज्य में 25 लाख से अधिक किसानों से 3100 रूपये प्रति क्विंटल की दर से होगी धान खरीदी 15 नवम्बर से प्रारंभ धान के व्यपवर्तन एवं पुर्नचक्रण को रोकने की चौकस व्यवस्था व धान खरीदी हेतु मजबूत प्रशासनिक ढांचा अधिक पारदर्शिता के साथ किसानों को किया जाएगा समय से भुगतान (6 से 7 दिन के भीतर) टोकन तुंहर हाथ मोबाईल एप के माध्यम से होगी ऑनलाईन टोकन की व्यवस्था। किसानों का मिलेगी सोसायटियों में लंबी कतारों से मुक्ति राज्य शासन के द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ प्रदेश के किसानो से दिनांक 15 नवम्बर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक धान खरीदी करने का निर्णय लिया गया है। उक्त अवधि में 25 लाख किसानो से 3100 रूपये प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा तक धान की खरीदी की जावेगी। धान खरीदी में पारदर्शिता को बढावा देने इस वर्ष ई-केवाईसी के माध्यम से, भारत सरकार कृषि मंत्रालय के एग्रीस्टेक पोर्टल में किसान पंजीयन को अनिवार्य किया गया है, जिससे किसान की सहीं पहचान हो एवं डुप्लीकेशन/दोहराव न हो। पंजीयन 31 अक्टूबर 2025 तक कराया जा सकता है। डिजीटल क्राप सर्वे के माध्यम से 23 लाख हेक्टेयर रकबे का सर्वे कराया गया है जिसके फलस्वरूप धान के रकबे का ऑनलाईन निर्धारण डिजीटल रूप से सुनिश्चित हुआ है। प्रदेश के 20,000 ग्रामों में दिनांक 02 अक्टूबर से डिजीटल क्राप सर्वे एवं मैन्यूअल गिरदावरी के डेटा को ग्रामसभा में पठन-पाठन कराया जा रहा है। किसानों को बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित किये जाने हेतु टोकन तुहर हाथ मोबाईल एप के माध्यम से ऑनलाईन टोकन की व्यवस्था की गई है इसके तहत किसान स्वयं अपने सुविधा अनुसार दिनों में धान विक्रय किये जाने हेतु टोकन काट सकेगें। वास्तविक किसानों से धान खरीदी सुनिश्चित करने हेतु बायोमैट्रिक आधारित धान की खरीदी की जावेगी। 2739 खरीदी केन्द्रो के माध्यम से धान खरीदी किये जाने हेतु समितियों में समुचित व्यवस्था किये जाने के निर्देश दिये गये है। समितियों को खरीद विपणन वर्ष 2025-26 में शून्य सुखत आने पर 05 रूपये प्रति क्विंटल के मान से प्रोत्साहन दिया जायेगा। धान खरीदी हेतु आवश्यकतानुसार नये एवं पुराने जूट बारदाने की व्यवस्था किये जाने के निर्देश दिये गये है। खाद्य विभाग भारत सरकार द्वारा खरीफ वर्ष 2025-26 हेतु केन्द्रीय पूल में 73 लाख मीट्रिक टन चावल का लक्ष्य दिया गया है। प्रदेश में धान की रिसाईकलिंग रोके जाने एवं बेहतर मॉनिटरिंग व्यवस्था सुनिश्चित किये जाने हेतु पहली बार इंटिग्रेटेड कमाण्ड एण्ड कन्द्रोल सेंटर मार्कफेड कार्यालय में स्थापित किये जाने का निर्णय लिया गया है। जिलों में भी कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे। धान खरीदी केन्द्रो में बेहतर एवं सुगम व्यवस्था हेतु कलेक्टर द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों को खरीदी केन्द्र प्रभारी बनाने का निर्णय लिया गया है। सीमावर्ती राज्यों से खरीदी केन्द्रो धान की आवक रोके जाने हेतु विशेष चेकिंग दल जिलेस्तर पर गठित किये जाने के निर्देश दिये गये है। धान के परिवहन व्यवस्था अंतर्गत मितव्ययता को सुनिश्चित किये जाने हेतु धान के उठाव व परिवहन, भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं।  

अरविंद केजरीवाल को लेकर अमित शाह ने दिया करारा जवाब, सोशल मीडिया पर वायरल

नई दिल्ली  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एक बार फिर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर जमकर बरसते नजर आए। गृहमंत्री ने पूर्व सीएम पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने इतने घोटाले किए कि जनता ने उनके चुनाव का 'घोटाला' कर दिया और अब वह घर बैठे हुए हैं। इसी साल फरवरी में हुए चुनाव में आम आदमी पार्टी की सरकार को हार का सामना करना पड़ा था और पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल अपनी सीट तक नहीं बचा पाए थे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को यमुना नदी की सफाई के लिए 1,816 करोड़ रुपये के प्रॉजेक्ट्स की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने पूर्व की आप सरकार और इसके राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर जोरदार निशाना साधा। शाह ने कहा, 'केजरीवाल जी ने 11 साल में मोहल्ला क्लीनिक का घोटाला, सीएनजी का घोटाला, शराब घोटाला, विज्ञापन का घोटाला, दवा का घोटाला, क्लासरूम का घोटाला, दिल्ली जल बोर्ड का घोटाला, शीशमहल का घोटाला, सीसीटीवी लगाने का घोटाला और पैनिक बटन का घोटाला। इतने घोटाले कर दिए कि दिल्लीवालों ने उनके चुनाव का ही घोटाला कर दिया। और अब वह घर पर बैठ हुए हैं।' गृहमंत्री ने इस दौरान कांग्रेस पर भी जोरदार हमला किया और कहा कि देश में उसकी सरकार थी तो 12 लाख करोड़ के घोटाले हुए। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस की सरकार थी देश में तब 12 लाख करोड़ रुपये के घोटाले किए थे। मोदी जी के 11 साल के शासन में एक भी आरोप हमारे प्रधानमंत्री पर नहीं लगे। यही बताता है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकारें जनता को समर्पित सरकारें हैं।' केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि भ्रष्टाचार कम करने और विज्ञापनों पर कम पैसा खर्च करने मात्र से ही यमुना का शुद्धिकरण हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जब दिल्ली की जनता ने परिवर्तन को चुना तब प्रधानमंत्री ने कहा था कि हमारी सरकार की प्राथमिकता में सर्वोच्च स्थान पर मां यमुना को शुद्ध करना है। मोदी ने वादा किया था कि हम 2029 से पहले यमुना जी को स्वच्छ करने का काम पूरा कर देंगे। उन्होंने कहा है कि भ्रष्टाचार कम करने और विज्ञापनों पर कम पैसा खर्च करने मात्र से ही यमुना जी का शुद्धिकरण हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आज यमुना के शुद्धिकरण और साफ यमुना के स्वप्न को साकार करने का रास्ता प्रशस्त हो चुका है।  

आवास विकास का धमाका ऑफर: कम ब्याज, भारी छूट और लम्बी EMI सुविधा सिर्फ दिवाली पर!

लखनऊ उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद (UPAVP) ने अपनी 2273वीं बोर्ड बैठक में दिवाली से पहले आम जनता के लिए घर खरीदना आसान बनाने वाले कई बड़े फैसले लिए हैं. 2000 से अधिक खाली पड़े फ्लैटों को जल्द बेचने के लिए 15% तक की छूट, ब्याज दर में भारी कटौती और 50% भुगतान पर कब्जे जैसे आकर्षक ऑफर दिए गए हैं. इसके अलावा, लखनऊ की अवध विहार योजना में रुका हुआ निर्माण फिर से शुरू होगा, जबकि पुरानी योजनाओं में हुई अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई के आदेश भी जारी हुए हैं. एक साथ पांच जिलों में 5,502 करोड़ की नई आवासीय योजनाओं को हरी झंडी देकर परिषद ने राज्य भर में आवासीय योजनाओं की नई शुरुआत की है. बोर्ड बैठक में लिया गया सबसे चर्चित फैसला खाली फ्लैटों की बिक्री को बढ़ावा देने वाला है. परिषद के पास इस वक्त 2000 से ज्यादा फ्लैट खाली पड़े हैं, जिन्हें दिवाली के मौके पर विशेष छूट के साथ बेचा जाएगा. अब तक 60 दिनों में पूरा भुगतान करने पर सिर्फ 5% छूट मिलती थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 15% कर दिया गया है. वहीं, 90 दिनों के भीतर भुगतान पर 10% छूट का प्रावधान किया गया है. इसके साथ ही, फ्लैट की कीमत का 50% भुगतान करने पर ही खरीदार को कब्जा मिल जाएगा, जबकि बाकी राशि को 10 वर्षों की आसान किश्तों में चुकाना होगा. सबसे बड़ी राहत ब्याज दर में है. पहले 11.50% थी, अब घटाकर 8.50% कर दी गई है.   अपर मुख्य सचिव आवास एवं शहरी नियोजन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में ये फैसले आम आदमी के लिए घर का सपना साकार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं. आवास आयुक्त डॉ. नीरज शुक्ला ने बताया, ये ऑफर विशेष रूप से सरकारी कर्मचारियों और मध्यम वर्ग के लिए हैं. पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर आवंटन होगा. हमारा लक्ष्य है कि दिवाली तक कम से कम 500 फ्लैट बिक जाएं. लखनऊ की अवध विहार योजना सेक्टर के तहत 7D में सरयू एनक्लेव के 7 प्रस्तावित टावरों का निर्माण अब फिर से शुरू होगा. 2017 में कम मांग के कारण यहां पर काम रुक गया था, जिसमें सिर्फ 27 फ्लैट ही बिक पाए थे. 2018 में दोबारा शुरू हुए काम में भी सिर्फ दो टावरों का कुछ हिस्सा बन पाया, बाकी रुक गया. ऑडिट में सामने आया कि अब तक 48 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जिस पर आपत्ति दर्ज की गई थी. बोर्ड ने फैसला लिया है कि बाकी टावरों को ‘जैसा है वैसे में’ 319 करोड़ रुपये में नीलाम किया जाएगा. खरीदार को न केवल निर्माण पूरा करना होगा, बल्कि पहले से बिके 27 फ्लैट मालिकों को परिषद द्वारा दी गई सभी सुविधाएं (जैसे पार्किंग, सिक्योरिटी) भी उपलब्ध करानी पड़ेंगी. इससे न केवल परिषद को राजस्व मिलेगा, बल्कि सैकड़ों फ्लैटों का निर्माण भी पूरा हो सकेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम निजी बिल्डरों को आकर्षित करेगा और योजना को नई जिंदगी देगा. सहारनपुर में डिमांड सर्वे की प्रक्रिया पर काम शुरू सहारनपुर जिले के लिए डिमांड सर्वे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. ऐसे में यहां जल्द ही नई योजना की घोषणा की जा सकती है. ये योजनाएं न केवल हजारों प्लॉट और फ्लैट उपलब्ध कराएंगी, बल्कि स्थानीय रोजगार और बुनियादी ढांचे को भी मजबूत करेंगी.  

65 लाख का राशन गायब! छत्तीसगढ़ में चावल, शक्कर और चना घोटाले में 6 पर FIR

सरगुजा छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में राशन घोटाला का मामला सामने आया है। यहां गरीबों के हक का करीब 65 लाख रुपए का चावल, शक्कर और चना का घोटाला किया गया है। इसका खुलासा तब हुआ जब भाजपा नेता आलोक दुबे की शिकायत के बाद कलेक्टर ने पूरे मामले की जांच कराई। जांच के बाद खाद्य विभाग के इंस्पेक्टर की रिपोर्ट पर पुलिस ने सहकारी समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष समेत 6 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत FIR दर्ज किया है। अंबिकापुर में 62 सरकारी राशन दुकाने हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में दूसरे राशन दुकानों के संचालकों के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है। जानकारी के मुताबिक, अंबिकापुर में जनकल्याण खाद्य सुरक्षा पोषण एवं उपभोक्ता सेवा सहकारी समिति सरकारी राशन दुकान संचालित कर रही थी, लेकिन लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि समिति द्वारा संचालित राशन दुकानों में चावल, चना और शक्कर की बड़े पैमाने पर अफरा तफरी की जा रही है. भाजपा नेता आलोक दुबे ने इस मामले की शिकायत कलेक्टर से की थी। जांच में 1631 क्विंटल चावल, 48 क्विंटल चना और शक्कर घोटाले का खुलासा शिकायत मिलने पर कलेक्टर अजीत वसंत ने खाद्य विभाग के इंस्पेक्टर से राशन दुकानों की भौतिक रूप से जांच कराई. जांच में फूड इंस्पेक्टर को पता चला कि राशन दुकानों में जितना राशन का स्टॉक होना चाहिए उतना नहीं है। मतलब साफ था कि सरकारी राशन निजी दुकानों और राशन माफिया को बेच दिया गया है। जांच में खुलासा हुआ कि 1631 क्विंटल चावल और 48 क्विंटल चना का घोटाला किया गया है। यहां तक कि शक्कर का भी घोटाला सामने आया। इसके बाद फूड इंस्पेक्टर शिव कुमार मिश्रा ने राशन दुकान संचालन एजेंसी जनकल्याण खाद्य सुरक्षा पोषण एवं उपभोक्ता सेवा सहकारी समिति के अध्यक्ष पवन सिंह निवासी घुटरापारा, उपाध्यक्ष सुनिता पैकरा, सहायक विक्रेता फरहान सिद्धीकी और प्रिंस जायसवाल, सहायक विक्रेता सैफ अली, मुकेश यादव के खिलाफ अपराध दर्ज कराया है. आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीम गठित एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने तीन टीम का गठन किया है। यह भी बात सामने आई है कि आरोपियों के खिलाफ ऐसे धाराओं के तहत अपराध दर्ज हुआ, जिससे उन्हें थाना से ही जमानत दिया जा सकेगा, लेकिन कलेक्टर से राशन घोटाला की शिकायत करने वाले भाजपा नेता ने पुलिस अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। फिर धारा 409 भी जोड़ा गया।