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राज्यसभा उपचुनाव में नया ड्रामा: पंजाब और चंडीगढ़ पुलिस में कस्टडी को लेकर झड़प

 चंडीगढ़ चंडीगढ़ पुलिस और पंजाब पुलिस के जवानों के बीच आज झगड़ा हो गया. यह घटना मंगलवार को दिन दहाड़े सुखना झील के पास हुई, जिसके चलते वहां भारी हंगामा हुआ. पंजाब पुलिस एक उपचुनव एप्लिकेंट नवनीत चतुर्वेदी, को हिरासत में लेना चाहती थी, जिसने राज्यसभा उपचुनाव के लिए नामांकन भरा है. चतुर्वेदी राजस्थान का निवासी है और उस पर आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों के हस्ताक्षर जाली करने का आरोप है. यह झगड़ा तब हुआ जब चंडीगढ़ पुलिस चतुर्वेदी को सुरक्षा कवर में ले जा रही थी. झगड़े का कारण नवनीत चतुर्वेदी की हिरासत थी. चतुर्वेदी ने अपने नामांकन में पंजाब से AAP के दस विधायकों को अपने प्रस्तावक (Proposer) के तौर पर बताया है.  AAP ने आरोप लगाया कि चतुर्वेदी ने विधायकों के जाली हस्ताक्षर किए हैं. इसी आरोप के चलते पंजाब पुलिस चतुर्वेदी को गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही थी. चतुर्वेदी उस समय चंडीगढ़ पुलिस की सुरक्षा में था. सुखना झील के पास क्या हुआ? सुखना झील के पास जब चंडीगढ़ पुलिस की सुरक्षा में नवनीत चतुर्वेदी जा रहा था, तो पंजाब पुलिस के जवानों ने उसे जबरदस्ती हिरासत में लेने की कोशिश की. चंडीगढ़ पुलिस ने इसका विरोध किया, जिसके चलते दोनों पुलिस जवानों में खींचतान हुई और भारी हंगामा हुआ. चंडीगढ़ पुलिस ने चतुर्वेदी को पंजाब पुलिस के हवाले नहीं किया. नामांकन स्क्रूटनी के बाद इंटरसेप्ट यह घटना आज यानी 15 अक्टूबर सुबह तब हुई, जब नवनीत चतुर्वेदी अपने नामांकन की स्क्रूटनी के बाद चंडीगढ़ पुलिस की सुरक्षा में जा रहा था. पंजाब पुलिस ने कथित तौर पर चंडीगढ़ पुलिस के वाहन को इंटरसेप्ट किया. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चंडीगढ़ SSP कंवरदीप कौर को मौके पर आकर मामले को शांत करना पड़ा. क्या है विवाद की वजह? इस पूरे विवाद की जड़ पंजाब में होने वाला राज्यसभा उपचुनाव है. राजस्थान के निवासी नवनीत चतुर्वेदी ने इस उपचुनाव के लिए नामांकन भरा है. हस्ताक्षर जाली करने के आरोप में पंजाब पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज होने के बावजूद, खतरे की शिकायत पर उसे चंडीगढ़ पुलिस ने सुरक्षा कवर दिया था.

वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप: भारत की जीत के बाद टॉप टीम और नई रैंकिंग

नई दिल्ली दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में टीम इंडिया ने सात विकेट से जीत हासिल की। इस जीत के साथ ही विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) में भारत के खाते में 12 अंक और जुड़ गए और अब अंक तालिका में भारत के कुल अंक 40 से बढ़कर 52 हो गए हैं। इस जीत के बाद भी भारत विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 की अंक तालिका में तीसरे स्थान पर ही रहा, लेकिन उसका पॉइंट प्रतिशत (PCT) 55.56% से बढ़कर 61.90% हो गया। वहीं, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका ने अभी तक इस डब्ल्यूटीसी चक्र में अभी तक एक भी टेस्ट पूरा नहीं किया है। पाकिस्तान और द. अफ्रीका के बीच टेस्ट मैच जारी है। ऑस्ट्रेलिया शीर्ष पर बरकरार ताजा आंकड़ों के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया 100 प्रतिशत पॉइंट प्रतिशत के साथ शीर्ष स्थान पर कायम है। टीम ने अब तक तीन मैचों में तीन जीत दर्ज की हैं और उसके पास 36 अंक हैं और अंक प्रतिशत 100% है। ऑस्ट्रेलिया ने अच्छी टीमों के खिलाफ शानदार प्रदर्शन कर अपनी बढ़त मजबूत की है। उसे अब इंग्लैंड से एशेज खेलना है। श्रीलंका दूसरे स्थान पर, भारत तीसरे पर श्रीलंका दो मैचों में एक जीत और एक हार के साथ दूसरे स्थान पर है। उसका पॉइंट प्रतिशत 66.67% है। वहीं भारत, छह मैचों में तीन जीत, दो हार और एक ड्रॉ के साथ तीसरे स्थान पर बना हुआ है। दिल्ली टेस्ट जीतने के बाद भारत के कुल अंक 52 हो जाएंगे, लेकिन पॉइंट प्रतिशत के आधार पर वह अभी भी श्रीलंका से पीछे रहेगा। भारत की मौजूदा स्थिति मजबूत जरूर हुई है, लेकिन शीर्ष दो स्थानों पर पहुंचने के लिए टीम को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज में अच्छा प्रदर्शन करना होगा। अगर भारत इसी लय में आगे बढ़ता रहा, तो विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल 2027 में जगह बनाना मुश्किल नहीं होगा। बांग्लादेश और वेस्टइंडीज निचले पायदान पर इंग्लैंड दो जीत, दो हार और एक ड्रॉ के साथ 43.33% पॉइंट पर्सेंटेज के साथ चौथे स्थान पर है। वहीं बांग्लादेश और वेस्टइंडीज निचले दो स्थानों पर हैं। बांग्लादेश ने दो मैचों में केवल एक ड्रॉ हासिल किया है और उसका अंक प्रतिशत 16.67% है। वहीं, वेस्टइंडीज की टीम अब तक पांचों टेस्ट हार चुकी है और उसका पॉइंट पर्सेंटेज शून्य है। कैसे निकाला जाता है अंक प्रतिशत? विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (2025-2027) में टीमों को प्रत्येक मैच के परिणाम के आधार पर अंक दिए जाते हैं। जीत पर 12 अंक, ड्रॉ पर चार अंक और टाई होने पर छह अंक मिलते हैं। कुल रैंकिंग का निर्धारण केवल अंकों से नहीं, बल्कि पॉइंट प्रतिशत सिस्टम (PCT) से किया जाता है। यह प्रतिशत इस तरह निकाला जाता है। टीम द्वारा अर्जित कुल अंक को कुल उपलब्ध अंक से भाग देना पड़ता है और फिर उसे 100 से गुणा किया जाता है। यही PCT यह तय करता है कि कौन-सी टीम तालिका में किस स्थान पर रहेगी। विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (2025-2027) की तालिका स्थान टीम मैच जीते हारे ड्रॉ बेनतीजा अंक अंक प्रतिशत 1 ऑस्ट्रेलिया 3 3 0 0 0 36 100.000 2 श्रीलंका 2 1 0 1 0 16 66.670 3 भारत 7 4 2 1 0 52 61.904 4 इंग्लैंड 5 2 2 1 0 26 43.330 5 बांग्लादेश 2 0 1 1 0 4 16.670 6 वेस्टइंडीज 5 0 5 0 0 0 0.000

सिवनी में पुलिस पर बड़ी गाज: हवाला लूट मामले में SDOP-एसआई सहित 5 गिरफ्तार, 6 अब भी फरार

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिवनी लूट मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। सिवनी एसडीओपी पूजा पांडे सहित 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। इनमें से 5 आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। इसमें एसडीओपी सिवनी पूजा पांडे, एसआई अर्पित भैरम, कॉन्सटेबल योगेंद्र, नीरज और जगदीश शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाए रखना, अपराध मुक्त वातावरण बनाना और नागरिकों की सुरक्षा पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों का मुख्य दायित्व है। अपने कर्तव्यों से हटकर कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को राज्य सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिवनी प्रकरण में जो भी दोषी पाए गए हैं, उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ कानूनी कार्रवाई भी होगी। प्रदेश में कानून सबके लिए बराबर है। कानून का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कोई भी हो। राज्य सरकार प्रदेश में सुशासन स्थापित करने सतत रूप से कार्य कर रही हैं, इस दिशा में किसी का हस्तक्षेप सहन नहीं होगा। मध्य प्रदेश पुलिस महकमे को झकझोर देने वाले सिवनी हवाला लूट मामले में पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाना के सख्त निर्देशों के बाद बड़ी कार्रवाई की गई है। इस मामले की मुख्य आरोपी मानी जा रही SDOP (नगर पुलिस अधीक्षक/अनुविभागीय अधिकारी पुलिस) पूजा पाण्डेय और एसआई (उप-निरीक्षक) अर्पित भैरम सहित कुल 5 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। ​गिरफ्तार आरोपियों पर डकैती, अवैध रूप से रोकना, अपहरण और आपराधिक षडयंत्र जैसी गंभीर धाराओं (बीएनएस 310(2), 126(2), 140(3), 61(2) के तहत अपराध क्रमांक 473/2025, थाना लखनवाड़ा) के तहत मामला दर्ज किया गया है। ​हालांकि, एफआईआर में नामजद कुल 11 आरोपी पुलिसकर्मियों में से 6 पुलिसकर्मी अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। ​डीजीपी के निर्देश पर पुलिस की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि खाकी वर्दी में छिपे अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। इस चर्चित मामले ने पूरे प्रदेश में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ये भी हैं आरोपी सिवनी मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 310(2) डकैती, 126(2) गलत तरीके से रोकना, 140(3) अपहरण और 61(2) आपराधिक षडयंत्र के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तार किये गये 5 अधिकारी एवं कर्मचारियों के अलावा जिनके विरूद्ध एफआईआर दर्ज की गई, उनमें प्रधान आरक्षक माखन, प्रधान आरक्षक राजेश जंघेला, प्रधान आरक्षक रविंद्र उईके, आरक्षक रितेश वर्मा, एसएएफ आरक्षक केदार और एसएएफ आरक्षक सुभाष सदाफल शामिल हैं।

आजम खां ने वाई श्रेणी सुरक्षा लेने से किया इनकार, कहा- लिखित आदेश तक नहीं लूंगा

रामपुर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां ने वाई श्रेणी की सुरक्षा लेने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार की ओर से लिखित आदेश नहीं मिलता तब तक वह सुरक्षा स्वीकार नहीं करेंगे। जेल से रिहा होने के बाद आजम ने कहा कि उन्हें सुरक्षा दिए जाने की कोई आधिकारिक जानकारी या दस्तावेज नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों से उन्होंने कहा है कि पहले वह सरकार का आदेश लेकर आएं तभी वह इस व्यवस्था को मानेंगे। सपा नेता ने कहा कि जब एक बार के विधायक को केंद्र सरकार के कमांडो मिल सकते हैं तो मुझे केवल वाई श्रेणी की सुरक्षा क्यों दी गई है। उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि वाई श्रेणी की सुरक्षा में गाड़ी और अन्य खर्च का प्रावधान होता है, जिसका खर्च वह देने की स्थिति में नहीं हैं। जेल से बाहर आने के बाद से आजम लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। अब सुरक्षा को लेकर दिया गया यह बयान एक बार फिर राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। आजम पहले वापस कर चुके हैं सुरक्षा सपा नेता पूर्व में 27 माह तक सीतापुर जेल में रहे थे। उस वक्त जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद उनको सुरक्षा वापस दे दी थी,लेकिन उस वक्त सपा नेता ने सुरक्षा वापस कर दी थी। छह पुलिस कर्मियों की निगरानी में चौबीस घंटे रहेंगे 23 माह बाद जेल से रिहा होने के सपा नेता आजम खां को पूर्व में दी गई वाई श्रेणी की सुरक्षा को वापस कर दिया गया है। वह छह पुलिस कर्मियों की निगरानी में चौबीस घंटे रहेंगे। सपा नेता आजम खां दस बार के विधायक, एक बार के लोकसभा सदस्य व राज्यसभा के सदस्य के साथ ही पांच बार प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। 2012-2017 तक कैबिनेट मंत्री रहे आजम खां की मुश्किलें भाजपा सरकार आने के बाद 2019 से बढ़नी शुरू हुई थीं। उन पर कानूनी शिकंजा कसता चला गया। एक के बाद एक सौ से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए। डूंगरपुर,यतीमखाना बस्ती को खाली कराने के नाम पर लूटपाट, चोरी व डकैती के साथ ही मारपीट समेत अन्य धाराओं में मुकदमे दर्ज हुए। 23 माह पहले उन्हें बेटे के जन्म प्रमाणपत्र के मामले में कोर्ट से सजा हुई थी,जिसके बाद बेटे अब्दुल्ला आजम खां व पत्नी डॉ. तजीन फात्मा के साथ जेल चले गए थे। हालांकि अब सभी जमानत पर रिहा हो चुके हैं। उनको डूंगरपुर केस में भी सजा हो चुकी है। फिलहाल 23 माह बाद 23 सितंबर को सीतापुर जेल से रिहा हो गए थे। जेल जाने से पहले उन्हें वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी, जिसे अब वापस कर दिया गया है। पुलिस अफसरों के मुताबिक वाई श्रेणी की सुरक्षा के तहत पांच पुलिस कर्मियों की एक गारद आवास पर तैनात होगी, जबकि तीन सुरक्षा कर्मी सपा नेता के साथ रहेंगे। सपा नेता को पहले से ही वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी। इसे खत्म नहीं किया गया था। अब फिर से सुरक्षा दे दी गई है। – विद्या सागर मिश्र, एसपी  

एडिशनल चार्ज पर मिलने लगेगा अतिरिक्त कार्य भत्ता, वित्त विभाग ने किया स्पष्ट

जयपुर राजस्थान में वित्त विभाग ने एक अहम आदेश जारी किया है। प्रदेश में एडिशनल चार्ज के भार से जूझ रहे अधिकारियों को अब इसकी एवज में स्पेशल पे मिलेगी।  वित्त विभाग ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि ऐसे अधिकारी जो 6 महीने से अधिक समय तक किसी विभाग के HOD या सचिव स्तर के पद का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं, उन्हें अतिरिक्त कार्य भत्ता (Special Pay) दिया जाएगा। राजस्थान में कई सरकारी विभागों, बोर्ड-निगमों में प्रमुख पद अतिरिक्त चार्ज पर चल रहे हैं। ऐसे में कई अफसर अपने मुख्य काम के साथ कई विभागों के अतिरिक्त चार्ज संभाल रहे हैं। यह आदेश राजस्थान सेवा नियम 1951 के नियम 35 और 50 के तहत जारी किया गया है। आदेश के अनुसार, जब किसी अधिकारी को अपने नियमित पद के साथ-साथ किसी अन्य रिक्त पद का चार्ज सौंपा जाता है, तो उसे पद रिक्त होने की तिथि से छह माह तक विशेष वेतन दिया जाएगा। यदि छह माह के भीतर उस पद पर नियमित नियुक्ति नहीं होती, तो उस पद को आस्थगित (Keep in Abeyance) माना जाएगा। यानी बजट तैयार करते समय वित्त विभाग इस पद की अनिवार्य नहीं मानते हुए उसे खत्म भी कर सकता है। हालांकि, यह प्रावधान सचिव, प्रमुख सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव जैसे वरिष्ठ पदों पर लागू नहीं होगा। इन उच्च पदों पर यदि छह माह से ज्यादा समय तक नियुक्ति नहीं होती है, तब भी उन्हें आस्थगित नहीं माना जाएगा और पूरी अवधि तक विशेष वेतन मिलता रहेगा। फिलहाल, प्रदेश के करीब 50 विभाग, बोर्ड और कॉर्पोरेशन ऐसे हैं जिनमें विभागाध्यक्ष (HOD) और वरिष्ठ पद अतिरिक्त चार्ज पर चल रहे हैं। यह आदेश उन सभी अधिकारियों पर भी लागू होगा जो वर्तमान में इस प्रकार के पदों का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं। इस फैसले को दीपावली से पहले अधिकारियों के लिए प्रोत्साहन और आर्थिक राहत के रूप में देखा जा रहा है।  

2024-25 में रिकॉर्ड 4,000 नई फैक्ट्रियां हुईं स्थापित, कुल संख्या पहुंची 27,000 के पार

औद्योगिक क्रांति की राह पर उत्तर प्रदेश, योगी मॉडल से बदला उद्योग जगत का नक्शा 2024-25 में रिकॉर्ड 4,000 नई फैक्ट्रियां हुईं स्थापित, कुल संख्या पहुंची 27,000 के पार  फैक्ट्री की संख्या में वृद्धि नए उत्तर प्रदेश के आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ते कदमों का प्रतीक निवेश, रोजगार और औद्योगिक विश्वास में नित नए इतिहास बना रहा है उत्तर प्रदेश  विगत साढ़े 8 वर्षों में योगी सरकार ने उद्योगों के लिए तैयार किया विशेष पारिस्थितिकी तंत्र  निवेशकों को आकर्षित करने के साथ ही उन्हें जोड़े रखने में भी सफलता प्राप्त कर रहा प्रदेश  लखनऊ  कभी पिछड़ेपन और बेरोजगारी के प्रतीक के रूप में देखा जाने वाला उत्तर प्रदेश आज उद्योगों का नया ग्रोथ सेंटर बन गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य ने जिस गति से औद्योगिक विकास की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, उसने पूरे देश को चकित किया है। वर्ष 2024-25 में उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड 4,000 नई फैक्ट्रियां स्थापित हुईं, जिससे प्रदेश में कुल फैक्ट्रियों की संख्या 27,000 के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है। यह केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं, बल्कि नए उत्तर प्रदेश के आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ते कदमों का प्रतीक है। योगी सरकार ने विगत साढ़े 8 वर्षों में उद्योगों के लिए एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया है जो निवेशकों को न केवल आकर्षित करता है बल्कि उन्हें लंबे समय तक जोड़े रखता है। राज्य में निवेश से संबंधी प्रक्रियाओं को पारदर्शी और निवेशक-हितैषी बनाया है, जिसके कारण उत्तर प्रदेश आज देश का “न्यू इनवेस्टमेंट हब” बन गया है। यहां स्थापित फैक्ट्रियों में इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, केमिकल और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों की अग्रणी कंपनियां शामिल हैं। तेज रफ्तार से बढ़ा औद्योगिक आधार वर्ष 2003 में उत्तर प्रदेश में सिर्फ 8,980 फैक्ट्रियां थीं। 2021 में यह संख्या बढ़कर 16,503 तक पहुंच गई। 2022 में यह संख्या 17,481 से होते हुए 2023 में 19,100 का आंकड़ा पार कर गई। 2025 में अब यह 27,000 तक पहुंच गई है जो उल्लेखनीय वृद्धि है। यह वृद्धि केवल संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक भूगोल में एक संरचनात्मक परिवर्तन का संकेत है। अब निवेश केवल नोएडा, ग्रेटर नोएडा या लखनऊ तक सीमित नहीं, बल्कि बरेली, कानपुर, झांसी, गोरखपुर, आजमगढ़ और प्रयागराज जैसे शहरों तक फैल चुका है। निवेश और रोजगार का नया युग 2023-24 की एएसआई रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश देश के टॉप-15 औद्योगिक राज्यों में चौथे स्थान पर पहुंच गया था। 2023-24 तक राज्य में 22,141 फैक्ट्रियां संचालित थीं, जो देश की कुल फैक्ट्रियों का 8.5 प्रतिशत हिस्सा थीं। इन इकाइयों में 12.80 लाख से अधिक वर्कर्स कार्यरत थे जो देशभर के औद्योगिक वर्कफोर्स का 8.3 प्रतिशत था। फैक्ट्री ग्रोथ की वार्षिक दर 16 प्रतिशत और वर्कर्स की संख्या में 8 प्रतिशत की वृद्धि ने दर्शाया कि प्रदेश में न केवल उद्योग बढ़ रहे हैं, बल्कि रोजगार के अवसरों में भी लगातार विस्तार हो रहा है। 2025 में 27 हजार फैक्ट्रीज की संख्या इसी का प्रमाण है।  गांवों तक पहुंची औद्योगिक क्रांति सरकार का लक्ष्य केवल शहरी औद्योगिक विकास नहीं, बल्कि ग्राम्य औद्योगिकरण को भी बढ़ावा देना है। एमएसएमई इकाइयों और स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन देने के लिए अनुदान, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और निर्यात सुविधा जैसे कदम उठाए गए हैं। आज यूपी के कई ग्रामीण इलाकों में छोटे उद्योग आत्मनिर्भर भारत की जड़ें मजबूत कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश की यह औद्योगिक कहानी केवल विकास का नहीं, बल्कि विश्वास, पारदर्शिता और परिवर्तन का उदाहरण बन रही है।   

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को लोकभवन में उज्जवला योजना के तहत माताओं-बहनों को देंगे निशुल्क सिलेंडर का उपहार

प्रदेश की करोड़ों माताओं और बहनों को योगी सरकार का दीपावली गिफ्ट  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को लोकभवन में उज्जवला योजना के तहत माताओं-बहनों को देंगे निशुल्क सिलेंडर का उपहार  यूपी की 1.86 करोड़ माताओं-बहनों को मिलेंगे दो मुफ्त एलपीजी रिफिल सिलेंडर, त्योहार पर महंगाई से मिलेगी बड़ी राहत वर्ष 2025-26 में योजना को लागू करने के लिए योगी सरकार की ओर से 1500 करोड़ रुपए की धनराशि का प्रावधान  दो चरणों में होगा वितरण, पहला चरण अक्टूबर 2025 से दिसंबर 2025 तक और दूसरा चरण जनवरी 2026 से मार्च 2026 तक  पहले चरण में आधार प्रमाणित 1.23 करोड़ लाभार्थियों को मिलेगा लाभ, लाभार्थियों के खाते में ट्रांसफर होगी सब्सिडी  योजना के पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए हर जिले में सख्त मॉनिटरिंग और शिकायत निवारण तंत्र सक्रिय लखनऊ  योगी सरकार दीपावली के अवसर पर उत्तर प्रदेश की करोड़ों माताओं-बहनों के चेहरों पर मुस्कान लाने जा रही है। प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और वंचित परिवारों को राहत देते हुए दो निःशुल्क एलपीजी सिलेंडर रिफिल देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को लोकभवन सभागार में इस योजना का शुभारंभ करेंगे और पात्र महिलाओं को मुफ्त सिलेंडर रिफिल का उपहार सौंपेंगे। यह कदम राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत वह गरीबों, महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ ईंधन और आर्थिक संबल देने की दिशा में लगातार काम कर रही है।  1.86 करोड़ परिवारों को मिला कनेक्शन उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई 2016 में की गई थी, ताकि वे ग्रामीण और वंचित परिवार जो अब तक लकड़ी, कोयला, गोबर के उपले जैसे पारंपरिक ईंधन का उपयोग कर रहे थे, उन्हें एलपीजी जैसे स्वच्छ ईंधन की सुविधा मिल सके। इस योजना ने ग्रामीण भारत की रसोई को न केवल धुएं से मुक्त किया, बल्कि महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को भी कम किया। उत्तर प्रदेश इस योजना के क्रियान्वयन में अग्रणी राज्य रहा है. यहां अब तक 1.86 करोड़ परिवारों को उज्ज्वला कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। दो चरणों में मिलेगा निःशुल्क रिफिल राज्य सरकार ने उज्ज्वला लाभार्थियों को प्रति वर्ष दो निःशुल्क एलपीजी रिफिल देने का निर्णय लिया है। यह वितरण वित्तीय वर्ष 2025-26 में दो चरणों में किया जाएगा। पहला चरण अक्टूबर 2025 से दिसंबर 2025 तक और दूसरा चरण जनवरी 2026 से मार्च 2026 तक। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए प्रदेश सरकार ने ₹1500 करोड़ की धनराशि का प्रावधान किया है। आधार प्रमाणित लाभार्थियों को प्राथमिकता पहले चरण में आधार प्रमाणित लाभार्थियों को योजना का लाभ दिया जा रहा है। वर्तमान में राज्य में 1.23 करोड़ उज्ज्वला लाभार्थियों का आधार प्रमाणन पूरा हो चुका है। योजनान्तर्गत तीनों ऑयल कंपनियों (इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम) के माध्यम से यह वितरण सुनिश्चित कराया जा रहा है। राज्य स्तरीय समन्वयकों द्वारा मांगी गई ₹346.34 करोड़ की अग्रिम धनराशि ऑयल कंपनियों को प्रदान कर दी गई है, ताकि वितरण में किसी प्रकार की देरी न हो। ऐसे मिलेगा निःशुल्क रिफिल लाभार्थी अपने स्तर से प्रचलित उपभोक्ता दर (सब्सिडी सहित) के अनुसार 14.2 किग्रा एलपीजी सिलेंडर रिफिल खरीदेंगे। इसके बाद मात्र 3–4 दिनों के भीतर सब्सिडी की राशि उनके आधार प्रमाणित बैंक खातों में ऑयल कंपनियों द्वारा अंतरित कर दी जाएगी। केंद्र सरकार की और राज्य सरकार की ओर से सब्सिडी की राशि अलग-अलग लाभार्थियों के खातों में भेजी जाएगी। जिनके पास 5 किग्रा के सिलेंडर हैं, वे चाहें तो 14.2 किग्रा के सिलेंडर भी प्राप्त कर सकते हैं। वहीं, जिनके पास केवल एक कनेक्शन है, उन्हें भी योजना का लाभ मिलेगा। आधार प्रमाणन के लिए विशेष अभियान जिन लाभार्थियों का आधार अभी प्रमाणित नहीं हुआ है, उनका प्रमाणन प्रशासन और ऑयल कंपनियों के सहयोग से अभियान चलाकर किया जा रहा है। ऑयल कंपनियों द्वारा लाभार्थियों को एसएमएस भेजे जा रहे हैं ताकि वे शीघ्र अपना आधार सत्यापित करा सकें। आधार प्रमाणन हेतु विशेष एप विकसित किया जा रहा है, और वितरकों के यहां अतिरिक्त लैपटॉप लगाए जा रहे हैं। प्रत्येक वितरक के यहां बैनर, फ्लेक्सी और कैम्प के माध्यम से प्रचार-प्रसार कराया जा रहा है। लाभार्थियों की सुविधा के लिए रोस्टर आधारित आधार प्रमाणन प्रणाली लागू की गई है। कड़ी मॉनिटरिंग और शिकायत निवारण व्यवस्था योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी के लिए दो स्तरों पर समितियां गठित की गई हैं। राज्य स्तर पर खाद्यायुक्त कार्यालय में गठित समिति योजना की नियमित समीक्षा करेगी। वहीं, जनपद स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति साप्ताहिक समीक्षा बैठकें करेगी। साथ ही, शिकायत निवारण प्रणाली के माध्यम से उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। पूर्ण मात्रा में गैस वितरण की निगरानी यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि उपभोक्ताओं को पूर्ण मात्रा (14.2 किग्रा) में गैस मिले। यदि किसी सिलेण्डर का वजन कम पाया जाता है, तो वितरक अपने संसाधनों से सिलेण्डर रिप्लेस करेगा। बांट माप विभाग और जिला प्रशासन को समय-समय पर जांच के आदेश जारी किए गए हैं। महिलाओं को महंगाई से राहत और स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि के बीच राज्य सरकार का यह निर्णय गरीब परिवारों को महंगाई से राहत देने वाला कदम है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ईंधन के प्रयोग की प्रवृत्ति बढ़ेगी और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

पीड़िता के बयान और सहमति को देखते हुए हाईकोर्ट ने CAF जवान को बरी किया

बस्तर छत्तीसगढ़ के बस्तर में रेप के आरोप में 10 साल की सजा काट रहे सीएएफ के जवान रूपेश कुमार पुरी को हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकलपीठ ने कहा कि यह मामला प्रेम संबंध का है, झूठे विवाह वादे पर आधारित दुष्कर्म का नहीं। अदालत ने फास्ट ट्रैक कोर्ट जगदलपुर द्वारा 2022 में सुनाई गई सजा को रद्द कर दिया। कोर्ट ने क्या कहा.. हाईकोर्ट ने माना कि पीड़िता बालिग थी और लंबे समय तक अपनी मर्जी से आरोपी के साथ रही। दोनों के बीच बने शारीरिक संबंध आपसी सहमति से थे। अदालत ने कहा कि जब तक यह साबित न हो कि आरोपी ने शुरू से ही शादी का इरादा नहीं रखा था, तब तक ऐसे मामले को दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता।   मामला कैसे शुरू हुआ साल 2020 में पीड़िता ने जवान रूपेश कुमार पुरी पर शादी का झांसा देकर रेप करने का आरोप लगाया था। कहा गया कि जवान ने उसे दो महीने तक घर में रखकर यौन शोषण किया और बाद में शादी से इनकार कर दिया। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने रूपेश को 10 साल की सजा और 10 हजार रुपए जुर्माना लगाया था। क्या कहा बचाव पक्ष ने.. रूपेश के वकील ने दलील दी कि दोनों के बीच 2013 से प्रेम संबंध थे और पीड़िता अपनी मर्जी से आरोपी के घर गई थी। एफआईआर परिजनों के दबाव में दर्ज कराई गई। अदालत ने पाया कि पीड़िता ने खुद आरोपी को फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी और दोनों के बीच लंबे समय तक बातचीत होती रही। हाईकोर्ट का फैसला सभी सबूतों और बयानों की समीक्षा के बाद अदालत ने कहा कि यह मामला जबरन शोषण का नहीं, बल्कि प्रेम और सहमति का है। मेडिकल और एफएसएल रिपोर्ट में रेप के ठोस सबूत नहीं मिले। पीड़िता खुद आरोपी के घर गई और कई बार उसके साथ संबंध बनाए, जिसमें खुद युवती की भी मर्जी दिखी। इस आधार पर कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का निर्णय रद्द करते हुए रूपेश कुमार पुरी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।  

बंगाल में TMC के गुंडों ने BJP सांसद को पीटा, गजेंद्र सिंह बोले: महिलाएं भी असुरक्षित

बीकानेर राजस्थान के बीकानेर में केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह ने बयान दिया है। सिंह ने कहा कि पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में मेडिकल छात्रा के साथ हुए गैंगरेप मामले को लेकर देशभर में आक्रोश है। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि रात में लड़कियों को कॉलेज के बाहर नहीं जाना चाहिए। इस बयान ने व्यापक विवाद खड़ा कर दिया है और विपक्षी दलों ने इसे महिलाओं के प्रति असंवेदनशील करार दिया है। केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह ने ममता सरकार पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि बंगाल में सुरक्षा की स्थिति बेहद खराब है। उन्होंने कहा कि राज्य में न रात में कोई सुरक्षित है और न ही दिन में, और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध इस बात का प्रमाण हैं। गजेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि एक महिला मुख्यमंत्री होते हुए ममता बनर्जी का यह बयान न केवल असंवेदनशील है, बल्कि इससे यह संदेश जाता है कि पीड़ितों को अपने आप को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी लेनी होगी, जबकि अपराधियों पर कठोर कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि टीएमसी के गुंडों द्वारा भाजपा सांसद पर हाल ही में हमला किया गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, और इस तरह की अराजक परिस्थितियों में महिलाओं का असुरक्षित होना और उनके साथ दुराचार होना आम बात बन गई है। गजेंद्र सिंह ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री ने अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई की होती, तो यह स्पष्ट संदेश जाता कि भविष्य में कोई भी अपराध करने से पहले सोचेगा। गजेंद्र सिंह ने चेतावनी दी कि लोकतंत्र में ममता बनर्जी के इस बयान का जवाब अगले चुनाव में वहां की माताएं, बहनें और बेटियां निश्चित रूप से देंगी। वे कांग्रेस के नेता और पूर्व सांसद रामेश्वर डूडी को श्रद्धांजलि देने बीकानेर पहुंचे थे।

अमृतसर से आई IT टीम ने भोपाल में मारा छापा, MP के धनकुबेर के ठिकानों पर कार्रवाई जारी

भोपाल करीब 3,800 करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक, देश के साथ विदेशों में करीब 17 राज्यों में काम कर रही कंपनी ' दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड' पर आयकर का छापा पड़ा है। मध्यप्रदेश के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति दिलीप सूर्यवंशी के यहां छापा पड़ने से सनसनी मच गई है। कंपनी के चेयरमैन और एमडी दिलीप सूर्यवंशी ने वर्ष 1987 में कंपनी की शुरुआत की थी, जो कि अब मध्यप्रदेश के साथ ही देश की बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी है। सोमवार सुबह से शुरु हुई कार्रवाई आयकर विभाग द्वारा छापामार कार्रवाई सोमवार सुबह से ही शुरू हो गई थी, लेकिन आयकर विभाग ने रात में अधिकृत जानकारी दी। विभाग ने सोमवार सुबह दिलीप बिल्डकॉन (DBL) और उससे जुड़े सहयोगियों के ठिकानों पर रेड मारी है। खास बात यह है कि आयकर विभाग की यह टीम पंजाब के अमृतसर से आई और भोपाल में दो जगहों पर दस्तावेज खंगाले। अमृतसर से आई टीम ने इस छापेमारी में भोपाल के विभागीय अफसरों को साथ नहीं लिया है। दिलीप बिल्डकॉन को भी आईटी ने कार्रवाई का कारण नहीं बताया अमृतसर इनकम टैक्स की ओर से भोपाल में दिलीप बिल्डकॉन पर की जा रही छापे की कार्रवाई को लेकर कंपनी को कोई जानकारी नहीं दी गई है। कंपनी की ओर से कहा गया है कि आयकर विभाग ने अभी तक ये नहीं बताया कि वे कंपनी के कैम्पस में क्यों आए हैं। हम भी इस बात की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं कि इस कार्रवाई से हमारा कोई संबंध है या नहीं। बीते कुछ समय से कुछ कंस्ट्रक्शन कंपनियों पर आयकर की कार्रवाई हुई है। इसलिए हो सकता है कि भोपाल में दिलीप बिल्डकॉन पर आईटी की कार्रवाई उन्हीं से संबंधित हो। हालांकि इनकम टैक्स की ओर से अब तक कोई बयान भी इस कार्रवाई के संबंध में अब तक जारी नहीं किया गया है। यहां भी पड़े छापे दिलीप सूर्यवंशी के चूनाभट्‌टी स्थित दफ्तर और अरेरा कॉलोनी के दफ्तर सहित अन्य जगहों पर छापे की खबर भी सूत्रों ने दी है। पंजाब के चंडीगढ़ रीजन के आयकर विभाग के अनुसार देर रात तक सर्चिंग जारी थी। टीम ने एमपी एसएएफ की मदद ली है। लोकल पुलिस या केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को नहीं बुलाया। यह कार्रवाई मंगलवार तक जारी रह सकती है। फिलहाल कंपनी ने कितना टैक्स चोरी की है, इसकी जानकारी सामने नहीं आ पाई है। टीम ने धार जिले के पीथमपुर में आर्निल टेक्नोक्राफ्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी पर भी छापा मारा है। यह कंपनी दिलीप बिल्डकॉन ग्रुप से जुड़ी हुई बताई जा रही है। कंपनी फिलहाल भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट समेत देशभर में हजारों करोड़ रुपये के इन्फ्रास्ट्रक्चर, हाइवे, रेलवे और सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। हाल ही में कंपनी को केरल और गुरुग्राम में भी बड़े निर्माण कार्यों के ठेके मिले हैं। दिलीप सूर्यवंशी ने 1988 में दिलीप बिल्डकॉन की स्थापना की थी। शुरुआती दौर में कंपनी ने छोटे सरकारी भवनों और पेट्रोल पंपों के निर्माण का कार्य किया। बाद में 1995 में इंजीनियर देवेंद्र जैन कंपनी से जुड़े, जो वर्तमान में इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। कंपनी को 1993-94 में पहला बड़ा प्रोजेक्ट मिला जिसकी लागत मात्र चार करोड़ रुपये थी, लेकिन 2007 से 2010 के बीच अहमदाबाद–गोधरा हाईवे के लगभग 1000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट ने दिलीप बिल्डकॉन को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। आज कंपनी का नेटवर्क 17 राज्यों तक फैला है और इसकी अनुमानित संपत्ति करीब 3,800 करोड़ रुपये आंकी गई है। आयकर विभाग की टीम अब सभी वित्तीय रिकॉर्ड्स और ट्रांजैक्शंस की विस्तृत जांच कर रही है। बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रही कंपनी आपको बता दें कि दिलीप बिल्डकॉन के पास भोपाल मेट्रो रेल का ठेका है। गुरुग्राम मेट्रो का काम दिलीप बिल्डकॉन और रंजीत बिल्डकॉन को 1,503.63 करोड़ में मिला है, जिसमें मिलेनियम सिटी सेंटर से साइबर सिटी तक 26.65 किमी के कॉरिडोर में वायडक्ट और 14 एलिवेटेड स्टेशन का निर्माण शामिल है। कंपनी को हाल ही में केरल में बड़ा प्रोजेक्ट मिला है। पहले भी पड़ चुके छापे बता दें कि दिलीप बिल्डकॉन का कंस्ट्रक्शन का काम है। कंपनी देशभर में हाईवे और रेल प्रोजेक्ट से जुड़े ठेके लेती है। दिलीप सूर्यवंशी ने वर्ष 1988 में कंपनी बनाई जो कि पहले छोटे रिहायशी प्रोजेक्ट, सरकारी इमारतों और पेट्रोल पंपों का निर्माण करती थी। वर्ष 1995 में 21 वर्षीय इंजीनियर देवेंद्र जैन को काम पर रखा जो कि अब कंपनी में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। सीबीआई की दिल्ली की टीम ने करीब चार साल पहले दिलीप बिल्डकॉन के साउथ इंडिया में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर को रिश्वत देते हुए पकड़ा था। तब भी दिलीप बिल्डकॉन के ऑफिस और घर पर छापा मारा था।