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इंदौर पुलिस ने पकड़ा फर्जी घी का बड़ा कारोबार, 600 लीटर नकली घी बरामद

 इंदौर  प्रदेश भर में मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में, कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देशन में इंदौर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। विभाग की टीम ने भारी मात्रा में मिलावटी घी जब्त किया है, जिसे नामी ब्रांड के पैकेट में पैक किया जा रहा था। पल्हर नगर में घर पर छापा खाद्य विभाग की टीम ने पल्हर नगर स्थित 60 फीट रोड पर एक मकान पर छापा मारा। यह मकान गिरिराज गुप्ता का है, जो मल्हारगंज क्षेत्र में प्रभुश्री ट्रेडर्स के नाम से दुकान संचालित करता है। निरीक्षण के दौरान इस मकान से मिलावट का बड़ा जखीरा बरामद हुआ। नामी ब्रांड के रैपर में 'नकली घी' अधिकारियों को मौके से बड़ी मात्रा में वनस्पति तेल, एसेंस और तैयार घी मिला। चिंता की बात यह है कि मौके से सांची, अमूल, नोवा और मालवा जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड के रैपर और आउटर कवर भी बड़ी संख्या में पाए गए। आरोपी इन रैपर का इस्तेमाल वनस्पति तेल और एसेंस से बनाए गए मिलावटी घी को पैक करने के लिए करता था। 600 लीटर घी-तेल जब्त, 6 सैंपल भेजे खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने मौके से घी, तेल और एसेंस समेत कुल 6 नमूने जांच के लिए हैं। खाद्य अधिकारी मनीष स्वामी ने बताया कि कार्रवाई में कुल 27 डिब्बे वनस्पति, 13 डिब्बे तेल, 3 डिब्बे घी, 5 बोतल एसेंस और लगभग 350 रैपर जब्त किए गए हैं। * उक्त संस्थान से लगभग 600 लीटर घी और तेल जब्त किया गया है। * निर्माता का परिसर बंद करा दिया गया है। * सभी नमूनों को विस्तृत जांच के लिए राज्य परीक्षण प्रयोगशाला, भोपाल भेजा जा रहा है। * संबंधित कंपनियों (अमूल, सांची आदि) को भी सूचित किया जा रहा है, ताकि वे भी अपने स्तर पर वैधानिक कार्रवाई कर सकें। मिलावटखोरी बर्दाश्त नहीं: कलेक्टर कलेक्टर शिवम वर्मा ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों को शुद्ध एवं सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मिलावटखोरी के विरुद्ध इस तरह की सख्त कार्रवाई भविष्य में भी निरंतर जारी रहेगी। 

कैलाश विजयवर्गीय का स्वास्थ्य ठीक, थकान पर अस्पताल में भर्ती, नियमित जांच पूरी

इंदौर  मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को गुरुवार को बांबे अस्पताल में भर्ती कराया गया। वह गुरुवार सुबह नियमित जांच के लिए अस्पताल पहुंचे थे। डॉक्टरों ने उनकी प्राथमिक जांच के बाद उन्हें भर्ती होने की सलाह दी।देर शाम तक विजयवर्गीय की कई जांचें हुईं। डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें थकान थी। जांच रिपोर्ट सामान्य है। उन्हें आराम की सलाह दी है। व्यस्त दिनचर्या के चलते हुए थकान बॉम्बे अस्पताल के उप निदेशक राहुल पाराशर ने बताया, ''मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को पिछले चार-पांच दिनों से व्यस्त दिनचर्या के कारण अत्यधिक थकान महसूस कर रहे थे, जिसके कारण उन्हें पर्याप्त आराम नहीं मिल पाया था. इसी के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. प्राथमिक जांच और परीक्षण किए गए हैं, अब उनकी हालत स्थिर है.'' उन्होंने कहा कि, ''विजयवर्गीय फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में एक वार्ड में आराम कर रहे हैं और उन्हें पूरी तरह आराम करने की सलाह दी गई है. उन्हें जल्द ही छुट्टी मिलने की उम्मीद है, हालांकि रात होते-होते विजयवर्गीय को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया.'' महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया थकान के कारण वे अस्पताल में भर्ती हुए थे. हालांकि अब उन्हें छुट्टी दे दी गई है वह घर पर आराम कर रहे हैं.'' उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा, मंत्री बिल्कुल ठीक हैं आप लोग निश्चिंत रहें और बॉम्बे हॉस्पिटल की तरफ ना जाएं. डॉक्टरों ने दी आराम करने की सलाह कैलाश विजयवर्गीय के नजदीकी सूत्रों ने जानकारी देते हुए बताया कि, मंत्री कई दिनों से लगातार दौरे कर रहे हैं, जिसके चलते उन्हें थकान हुई है. इसी बीच उनकी तबीयत खराब हो गई थी. अस्पताल से उन्हें छुट्टी मिल गई है. डॉक्टरों ने उन्हें आराम की सलाह दी है, अब वह घर पर ही आराम कर रहे हैं.   कैलाश विजयवर्गीय का सियासी करियर कैलाश विजयवर्गीय इंदौर-1 विधानसभा से विधायक हैं और मध्य प्रदेश में कैबिनेट मंत्री हैं. उनके पास नगरीय विकास एवं आवास विभाग है. उन्होंने इंदौर से अपने सियासी करियर की शुरुआत की थी. उन्होंने वर्ष 1975 में विद्यार्थी परिषद के माध्यम से छात्र पॉलिटिक्स में प्रवेश किया. 1983 में वह पहली बार नगर पालिक निगम इंदौर के पार्षद बने. 2000 में उन्हें इंदौर पालिक नगर निगम का महापौर बनाया गया था. इसके बाद से उनका राजनीतिक करियर चमकता गया. 1990 में पहली बार विधायक बने. कैलाश विजयवर्गीय अपने बयानों को लेकर अकसर चर्चाओं में रहते हैं.  

मुख्य सचिव अनुराग जैन ने राष्ट्रीय एकता दिवस की दिलायी शपथ

भोपाल  मुख्य सचिव  अनुराग जैन ने मंत्रालय स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल पार्क में प्रात: 10 बजे राष्ट्रीय एकता दिवस की शपथ दिलायी। इसके पूर्व सरदार वल्लभ भाई पटेल के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। शपथ में सभी अधिकारियों-कर्मचारियों ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए स्वयं को समर्पित करने और अपने देश की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपना योगदान करने का भी सत्यनिष्ठा से संकल्प लिया। इस अवसर पर  अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा,  के.सी. गुप्ता,  संजय दुबे,  संजय कुमार शुक्ल,  शिवशेखर शुक्लासहित मंत्रालय, विंध्याचल,सतपुड़ा भवन और पुलिस विभाग के अधिकारी- कर्मचारी उपस्थितरहे।

‘हम ऑस्ट्रेलिया की तरह नहीं खेले’ — एलिसा हीली ने बताई सेमीफाइनल हार की असली वजह

नई दिल्ली  ऑस्ट्रेलिया की टीम वुमेंस वर्ल्ड कप 2025 के सेमीफाइनल में हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गई। टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को 5 विकेट से हरा दिया। ये ऑस्ट्रेलिया के इतिहास की क्या, वुमेंस वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट के इतिहास की सबसे शर्मनाक हार थी, क्योंकि कभी भी 339 रनों का टारगेट किसी टीम ने चेज नहीं किया था। भारत ने ऐसा कर दिखाया। इस हार पर ऑस्ट्रेलिया की कप्तान एलिसा हीली का बयान आया है और उन्होंने स्वीकार किया है कि ऑस्ट्रेलिया की टीम ऑस्ट्रेलिया की तरह नहीं खेली। कैच छोड़ना, खराब फील्डिंग और एक्स्ट्रा रन देना और आखिरी के ओवरों में विकेट फेंकना। ये मुद्दे एलिसा हीली ने उठाए।   338 रनों का विशाल स्कोर जब नॉकआउट मैच में ऑस्ट्रेलिया ने बनाया था तो हर किसी को लग रहा था कि ऑस्ट्रेलियाई टीम इस स्कोर को आसानी से डिफेंड कर लेगी, लेकिन जेमिमा रोड्रिग्स 127 रनों की नाबाद पारी खेलकर दिखा दिया कि वह क्या कर सकती हैं। दूसरे ही ओवर में उनको बल्लेबाजी के लिए उतरना पड़ा था और आखिर तक वे नाबाद लौंटी। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने भी उनका साथ दिया और 89 रनों की पारी खेली। बाद में कुछ कैमियो दीप्ति शर्मा और ऋचा घोष के बल्ले से देखने को मिले। इस तरह वुमेंस वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में एक विश्व रिकॉर्ड रन चेज का भारतीय टीम ने बना दिया। मैच के बाद एलिसा हीली ने कहा, "मुझे लगता है कि आखिरकार हम आज शायद तीनों पहलुओं में उतने तेज नहीं थे कि खुद को सेमीफाइनल जीतने का मौका दे पाते। मुझे लगता है कि हमने मैच में बने रहने के लिए अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। हमने कई मौके बनाए और उस मामले में खुद को निराश किया। इसलिए शायद यहां बैठे-बैठे यह जानकर निराशा हो रही है कि हमने खुद के साथ कुछ हद तक ऐसा किया। मैं भारतीय प्रदर्शन से कोई कमी नहीं कर रही हूं। मुझे लगा कि उन्होंने वाकई अच्छा खेला, लेकिन हां, थोड़ा-बहुत यह भी है कि हमने खुद को थोड़ा निराश किया।" उन्होंने आगे कहा, "टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए, मुझे लगता है कि हम थोड़ा बेहतर प्रदर्शन कर सकते थे और विडंबना यह है कि कुछ और रन बना सकते थे। इसलिए मुझे लगता है कि आधे समय तक हमने सोचा था कि हम ठीक-ठाक हैं। हमें लगा था कि गेंद के साथ अभी भी हमें काफी मेहनत करनी है, लेकिन आखिरकार मुझे लगता है कि हमने कई बार जरूरत से ज्यादा बेकार गेंदें फेंक दीं और शायद हमने जो मौके बनाए, उनका फायदा नहीं उठा पाए। इसलिए यह निराशाजनक है। यह थोड़ा गैर-ऑस्ट्रेलियाई सा लगता है कि हम सामान्य रूप से उतने कुशल नहीं हैं। यह जानते हुए कि हमने इस विश्व कप में कितना अच्छा खेला है, यहां बैठकर थोड़ा निराशाजनक लग रहा है।"  

कठिन समय में काम आएंगी चाणक्य की ये 4 नीतियां, जीवन में लौटेगी समृद्धि और सौभाग्य

भारत के स्वर्णिम इतिहास में कई बड़े-बड़े विद्वान हुए जिनकी कही गई बातें आज भी हमारे जीवन को सही दिशा दिखाने का काम करती हैं। इन्हीं में से एक थे महान दार्शनिक और कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य।जीवन का शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो, जिसके बारे में आचार्य को ज्ञान नहीं था। आज हम आचार्य के बताए कुछ कुछ जीवन सूत्रों के बारे में ही जानेंगे। जैसा कि हम सभी को अपने जीवन में कई उतार-चढ़ावों का सामना करना पड़ता हैं। कई बार व्यक्ति के जीवन में इतना बुरा समय भी आ जाता है कि उस दौरान सब कुछ एकदम खत्म सा हो गया लगता है। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में बताया है कि जब व्यक्ति के सामने ऐसा बुरा समय आए तो उसे क्या करना चाहिए कि वो बुरा समय जल्द की अच्छे समय में तब्दील हो जाए। आइए जानते हैं- कड़ी मेहनत का ना छोड़ें साथ आचार्य चाणक्य के अनुसार यदि व्यक्ति के जीवन में बहुत ही बुरा समय चल रहा है तो उसे हताश या निराश हो कर बैठने के बजाए कड़ी मेहनत का सहारा लेना चाहिए। यदि व्यक्ति अपने मजबूत इरादों के साथ कड़ी मेहनत पर अटल रहता है, तो बुरा समय भी ज्यादा दिनों तक नहीं टिकता। वहीं अगर वह निराश हो कर मेहनत से किनारा कर लेता है तो ये बुरा समय उसे कहीं का नहीं छोड़ता। जीवन में रखें लक्ष्य आचार्य चाणक्य के अनुसार व्यक्ति के जीवन में एक निश्चित लक्ष्य का होना बेहद जरूरी है। यदि जीवन का लक्ष्य तय है तो मुश्किल से मुश्किल समय भी आसानी से कट जाता है। वहीं अगर किसी व्यक्ति को अपना लक्ष्य ही नहीं पता तो वो कठिन परिस्थितियों के आते ही भटकाव की स्थिति में चला जाता है, जहां से निकालना उसके लिए बहुत मुश्किल हो जाता है। आचार्य के अनुसार यदि कठिन परिस्थितियों के चलते आपका लक्ष्य पाना असंभव लग रहा है, तो उसे छोड़ने के बजाय उसे पाने के तरीके में बदलाव करें और निरंतर प्रयास में लगे रहें। करते रहें नए और बेहतर अवसरों की तलाश केवल प्रतिभावान होना ही काफी नहीं है बल्कि सही समय पर सही अवसर मिलना भी बेहद जरूरी है। आचार्य चाणक्य की नीति के अनुसार बुरा वक्त होते हुए भी नए और बेहतर अवसरों की तलाश में लगे रहना चाहिए। आचार्य कहते हैं कि आलसी लोग हमेशा सही अवसर ना मिलने की शिकायत में लगे रहते हैं। वहीं मेहनती इंसान स्वयं सही अवसर की तलाश करता है और अपना अच्छा समय खुद लाता है। आचार्य के अनुसार परेशानी को ले कर बैठने के बजाए उसके समाधान को ले कर चिंतित होना ज्यादा बेहतर है। चीजों को ना समझें असंभव आचार्य चाणक्य के अनुसार संसार की कोई भी चीज असंभव नहीं है। अगर आप किसी ऐसी स्थिति में फंसे हुए हैं जहां से निकालना आपको असंभव लग रहा है, तो सबसे पहले खुद को समझाएं कि असंभव जैसा कुछ भी नहीं है। आचार्य के मुताबिक सही दिशा में लगातार कठिन परिश्रम करते रहने से आप हर स्थिति को अपने अनुकूल मोड़ सकते हैं।  

सीमा पर बीएसएफ का ऑपरेशन ‘क्लीन बॉर्डर’: पाक ड्रोन, हेरोइन और हथियार जब्त

चंडीगढ़  भारत-पाक सीमा पर एक बार फिर BSF (सीमा सुरक्षा बल) की सतर्कता और सटीक खुफिया कार्रवाई ने पाकिस्तान प्रायोजित गतिविधियों को नाकाम कर दिया है। BSF ने पंजाब के सीमावर्ती जिलों में चलाए गए विशेष ऑपरेशन में तीन पाकिस्तानी ड्रोन, हेरोइन और हथियार बरामद किए हैं। वहीं, दूसरी ओर पंजाब पुलिस ने खालिस्तानी नारे लिखने और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल प्रतिबंधित संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ (एसएफजे) के तीन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा, BSF ने फिरोजपुर सेक्टर में एक पाकिस्तानी घुसपैठिए को भी काबू किया है। इन लगातार हुई कार्रवाइयों ने साबित कर दिया है कि सीमाओं पर भारत की सुरक्षा एजेंसियां पूरी मुस्तैदी से डटी हुई हैं और किसी भी कीमत पर देश की अखंडता से समझौता नहीं करेंगी। BSF प्रवक्ता के अनुसार, अमृतसर और फिरोजपुर सेक्टर के कई गांवों – धनोई कलां, रानियां, दाओके और हबीबवाला में सटीक खुफिया इनपुट के आधार पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इस अभियान में तीन पाकिस्तानी ड्रोन (डीजेआई माविक 3 मॉडल) बरामद किए गए, जिनके साथ 3.8 किलोग्राम से अधिक हेरोइन और गोला-बारूद भी मिला है। BSF ने बताया कि ड्रोन का इस्तेमाल पाकिस्तान की ओर से भारत में नशीले पदार्थ गिराने के लिए किया जा रहा था। स्थानीय पुलिस की मदद से चलाए गए ऑपरेशन में यह तस्करी नेटवर्क ध्वस्त किया गया। प्रवक्ता ने कहा कि यह लगातार बरामदियां BSF की सतर्कता, समन्वय और अटूट प्रतिबद्धता का परिणाम हैं। BSF सीमा पार से आने वाले हर खतरे के खिलाफ एक मज़बूत ढाल के रूप में कार्य कर रही है। तीन एसएफजे समर्थक गिरफ्तार सीमा पार की नापाक कोशिशों के बीच, पंजाब पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने भी बठिंडा जिले में एक अहम सफलता हासिल की है। पुलिस ने प्रतिबंधित संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ (एसएफजे) के तीन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने भिसियाना और मननवाला गांवों के स्कूलों की दीवारों पर खालिस्तान समर्थक नारे लिखे थे।   पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने बताया कि इन आरोपियों को अमेरिका में बैठे एसएफजे के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू का सीधा समर्थन प्राप्त था। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इन लोगों को विदेशी फंडिंग मिल रही थी और वे जन अशांति भड़काने व राष्ट्र-विरोधी माहौल पैदा करने की साजिश में शामिल थे। डीजीपी ने कहा कि राज्य में किसी भी राष्ट्र-विरोधी गतिविधि को फैलने नहीं दिया जाएगा। पुलिस ने पेशेवर और वैज्ञानिक तरीके से जांच कर यह सुनिश्चित किया कि दोषी कानून के शिकंजे से बच न सकें। घुसपैठ की कोशिश नाकाम, पाक नागरिक गिरफ्तार इस बीच, फिरोजपुर सेक्टर के जलालाबाद इलाके में तैनात BSF जवानों ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एक पाकिस्तानी नागरिक को अवैध रूप से भारतीय सीमा में दाखिल होते हुए पकड़ लिया। घटना बार्डर आउटपोस्ट डीआरडी पोस्ट नंबर-5 के पास की है। ड्यूटी पर मौजूद हवलदार शेख हामिद और कांस्टेबल पवन कुमार ने सतलुज दरिया किनारे एक व्यक्ति को संदिग्ध तरीके से घुसपैठ करते देखा। चेतावनी देने के बाद BSF ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम इमतियाज़ अहमद, निवासी गांव परवाल, तहसील नरवाल, जिला शकरगढ़ (पाकिस्तान) बताया। प्रारंभिक जांच के बाद बहिराम पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है और BSF आगे की पूछताछ कर रही है।

हाई कोर्ट ने नगर निगम को रोका, स्कूल और कॉलेजों से उपकर वसूलने से मना किया

 इंदौर  शैक्षणिक संस्थानों को राहत देते हुए हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने कहा है कि नगर निगम शैक्षणिक संस्थानों के भूमि-भवन जिनका उपयोग वे खुद कर रहे हैं, उस पर शिक्षा उपकर और शहरी विकास उपकर नहीं ले सकता। कोर्ट की एकलपीठ ने एक निजी स्कूल की ओर से दायर याचिका की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने वसूली के आदेश को निरस्त कर दिया है। निगम ने इस निजी स्कूल को वर्ष 2021 में लाखों रुपये की वसूली के लिए नोटिस जारी किया था। इसे चुनौती देते हुए स्कूल ने याचिका दायर की। स्कूल प्रबंधन का कहना था कि पूर्व में हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ शैक्षणिक संस्थानों को संपत्तिकर, शिक्षा उपकर और शहरी विकास शुल्क से छूट दे चुकी है। इस पर निगम की तरफ से तर्क रखा गया था कि हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के फैसले के खिलाफ अपील की गई है। हालांकि इस पर अब तक कोई फैसला नहीं हुआ है। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था जो गुरुवार को जारी हुआ। कोर्ट ने नगर निगम से कहा है कि वह निजी स्कूल द्वारा जमा की गई राशि को उसके खातों में समायोजित करे। इसके साथ ही दो माह में जो राशि शिक्षा उपकर और शहरी विकास उपकर के रूप में जमा की गई है, उसे भी निजी स्कूल को लौटाया जाए। इस तरह मामले में स्कूल प्रबंधन को राहत मिली। पदोन्नति मामले में चार सप्ताह में लें निर्णय इंदौर नगर निगम अपर आयुक्त की पदोन्नति से जुड़े मामले में हाई कोर्ट ने नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे को चेतावनी जारी की है। कोर्ट ने कहा है कि वे पूर्व में दिए गए फैसले के अनुसार अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर के आवेदन पर चार सप्ताह में निर्णय लें। निगम के अपर आयुक्त राजनगांवकर ने पदोन्नति नहीं दिए जाने के खिलाफ एक याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने पांच मई 2025 को आदेश दिया था कि सरकार राजनगांवकर की पदोन्नति के आवेदन पर एक माह में निर्णय लें। सात मई को राजनगांवकर ने कोर्ट के आदेश की प्रति के साथ नगरीय प्रशासन विभाग को नया आवेदन किया। इस आवेदन पर जब सरकार ने पांच माह बाद भी फैसला नहीं लिया तो राजनगांवकर ने अवमानना याचिका दायर कर दी। गुरुवार को कोर्ट में इस पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने प्रमुख सचिव को चेतावनी के साथ पूर्व में दिए आदेश का पालन करने के लिए एक मौका दिया है। कोर्ट ने राजनगांवकर से कहा है कि वे सात दिन में नया आवेदन दें। कोर्ट ने पीएस से कहा है कि वे चार सप्ताह में इस आवेदन पर निर्णय लें।

अंजुमन इस्लामिया स्कूल का नया फरमान, रविवार स्कूल लगाने पर बवाल

जबलपुर  शहर में स्कूल की छुट्टी का एक अनोखा मामला सामने आया है. यहां अंजुमन इस्लामिया नाम के स्कूल ने शुक्रवार की छुट्टी रखी है और रविवार के दिन स्कूल लगाने का फरमान जारी किया है. इस फरमान के खिलाफ अल्पसंख्यक मोर्चा के एक नेता ने आपत्ति जाहिर की है, उनका कहना है कि स्कूल के स्टाफ और कई अभिभावकों ने इस फैसले को गलत माना है लेकिन स्कूल प्रबंधन उनकी बात नहीं सुन रहा है.मामले में जिला शिक्षा अधिकारी को शिकायत की गई है. जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि वे जल्द ही इस मामले में जांच करके फैसला देंगे. पाकिस्तान और बांग्लादेश में होती है शुक्रवार की छुट्टी जबलपुर अल्पसंख्यक मोर्चा के नेता मुजम्मिल अली ने अंजुमन इस्लामिया स्कूल के एक अनोखे फरमान के खिलाफ कलेक्टर कार्यालय में शिकायत की है. मुजम्मिल अली ने कहा, '' स्कूल में एक अनोखा फरमान निकला है, जिसमें स्कूल में साप्ताहिक अवकाश रविवार की जगह शुक्रवार के दिन रखा जाएगा और रविवार के दिन स्कूल लगाया जाएगा. भारत में रविवार की ही छुट्टी होती है, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे मुस्लिम देश में शुक्रवार के दिन की छुट्टी रखी जाती है इसलिए भारत में इस तरह की छुट्टी सही नहीं है. मुजम्मिल ने प्रशासन से इस मामले में दखल देने की अपील की है. शुक्रवार की छुट्टी पर मैनेजमेंट की सफाई इस मामले में अंजुमन इस्लामिया स्कूल के प्रबंधक अनवर अली ने कहा, '' अंजुमन इस्लामिया संस्था पांच स्कूल और एक कॉलेज का संचालन करती है और केवल एक स्कूल नहीं बल्कि सभी स्कूलों में शुक्रवार के दिन की छुट्टी पहले से ही रहती है. मैंने केवल इंग्लिश मीडियम स्कूल की छुट्टी की है और रविवार के दिन इसलिए स्कूल लगाया जा रहा है ताकि बच्चों की पढ़ाई का नुकसान ना हो.'' डीईओ के पास पहुंची अंजुमन की शिकायत वहीं, जबलपुर के जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी ने कहा, '' हमारे पास यह शिकायत आई है क्योंकि अंजुमन इस्लामिया स्कूल एक निजी संस्था चलाती है ऐसी स्थिति में हमें उनके नियम देखने होंगे. हालांकि, भारत में रविवार को ही छुट्टी की परंपरा है. ऐसी स्थिति में अंजुमन इस्लामिया स्कूल ने मनमाने ढंग से कैसे नियम बदला है, इसे देखना होगा. यदि संस्थान नियम विरुद्ध तरीके से काम करेंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.'' अब देखना ये होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और अंजुमन इस्लामिया स्कूल ने किस नियम के तहत ये बदलाव किया.

इन तीन वस्तुओं का दान संध्या के समय माना जाता है अशुभ, जानें वजह

वास्तु शास्त्र में धन और संपत्ति की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। घर में सुख-समृद्धि बनी रहे, इसके लिए समय और अवसर का सही चयन बहुत जरूरी होता है। खासकर दान देने के समय की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि आप शाम के समय कुछ खास चीजें दान करते हैं, तो यह आपके आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। तो आइए जानते हैं कि शाम के समय कौन सी तीन चीजों का दान नहीं करना चाहिए। सिक्के या छोटे पैसे का दान शाम के समय छोटे-मोटे पैसे या सिक्कों का दान करने से घर में धन की ऊर्जा कमजोर हो सकती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, यह आपके आर्थिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है और अनावश्यक खर्च बढ़ा सकता है। टूटे या पुराने बर्तन का दान पुराने या टूटे बर्तनों का दान करने से भी धन हानि की संभावना बढ़ सकती है। शाम के समय यह करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है और संपत्ति की वृद्धि रुक सकती है। बिना जरूरत की चीजों का दान शाम के समय ऐसा दान करना जिसमें आपकी जरूरत की वस्तुएं शामिल हों या बिना योजना का दान हो, यह भी वास्तु दोष पैदा कर सकता है। इससे न केवल संपत्ति पर असर पड़ता है बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ सकता है।

कमाई की सुनामी: ‘बाहुबली: द एपिक’ ने रिलीज से पहले ही बना डाला नया इतिहास!

मुंबई एसएस राजामौली के डायरेक्‍शन में बनी 'बाहुबली' और 'बाहुबली 2' ने साल 2015 और 2017 में भारतीय सिनेमा को दुनियाभर में नए सिरे से पहचान दिलाई। अब पहली फिल्‍म के एक दशक बाद, राजामौली की 'बाहुबली: द एपिक' शुक्रवार, 31 अक्‍टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। यह असल में पिछली दो फिल्‍मों को मिलाकर बनाया गया एक 'वन कट वर्जन' है। मेकर्स ने इसके लिए दोनों फिल्‍मों को फिर से एडिट किया है। महिष्मति साम्राज्य की विशाल गाथा को एक फिल्‍म में समेटना यकीनन आसान काम नहीं होगा। दिलचस्‍प है कि इस रीमास्‍टर्ड फिल्‍म को लेकर बॉक्‍स ऑफिस पर जबरदस्‍त उत्‍साह देखा जा रहा है। रिलीज से पहले इसने देश और विदेश में धमाकेदार एडवांस बुकिंग की है। जबकि ओपनिंग डे पर यह बेजोड़ कमाई करती हुई दिख रही है। पहले ही दिन 'बाहुबली: द एपिक' कम से कम कमाई के चार नए रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में है। प्रभास, राणा दग्‍गुबाती, अनुष्‍का शेट्टी, सत्‍यराज, तमन्‍ना भाटिया और राम्या कृष्‍णनन स्‍टारर 'बाहुबली: द एपिक' की रनटाइम 3 घंटे 45 मिनट है। इसमें 'बाहुबली: द बिगिनिंग' से लगभग 1 घंटा 42 मिनट और 'बाहुबली: द कन्क्लूजन' से लगभग 2 घंटे 3 मिनट के सीन्‍स शामिल किए गए हैं। शुक्रवार, को रिलीज के साथ ही यह भारतीय सिनेमा की सबसे लंबी फिल्‍मों की लिस्‍ट में शामिल हो जाएगी। इसमें सबसे लंबी फिल्‍म के तौर पर 'तमस' का नाम है, जिसकी रनटाइम 4 घंटे 57 मिनट थी। 'थवामई थवामिरंतु' की लंबाई 4 घंटे 35 मिनट और इसी तरह 'LOC: कारगिल' की रनटाइम 4 घंटे 15 मिनट थी। 'बाहुबली द एपिक' की एडवांस बुकिंग, सबसे बड़ी टॉलीवुड री-रिलीज 'बाहुबली: द एपिक' एक तरह से री-रिलीज फिल्म है। यह एडवांस बुकिंग में टॉलीवुड की सबसे बड़ी ओपनर बनकर उभरी है। शुक्रवार को रिलीज से पहले इस फिल्‍म ने देश में प्री-सेल्स से ही 6 करोड़ रुपये से अध‍िक की ग्रॉस कमाई की है। जबकि देश और विदेश मिलाकर इसने करीब 12 करोड़ रुपये की एडवांस बुकिंग कर ली है। पहले दिन टूटेगा पवन कल्‍याण और थलपति विजय का रिकॉर्ड राजामौली की यह फिल्‍म पहले दिन, री-रिलीज हुई साउथ की अब तक की सबसे बड़ी फिल्‍मों का रिकॉर्ड तोड़ने वाली है। पवन कल्याण की 'सरदार गब्बर सिंह' ने री-रिलीज के ओपनिंग डे पर पर 5.08 करोड़ रुपये की कमाई की थी। इसने और थलपति विजय की 'घिल्ली' ने पहले दिन वर्ल्‍डवाइड 8 करोड़ रुपये की री-रिलीज ओपनिंग ली थी। अब 'बाहुबली: द एपिक' इससे करीब दोगुनी कमाई के साथ सबको पीछे छोड़ने वाली है। 'बाहुबली: द एपिक' बॉक्‍स ऑफिस प्रेडिक्‍शन 'बाहुबली: द एपिक' ने प्री-सेल्‍स में ही अपने तेवर दिखा दिए हैं। इसने एडवांस बुकिंग में ही पिछली दो बड़ी साउथ री-रिलीज की पहले दिन की कमाई को पीछे छोड़ दिया है। गुरुवार को राजामौली ने फिल्‍म के कई पेड प्रीमियर शोज भी रखे थे। इनमें भी दर्शकों का खूब उत्‍साह दिखा है। एडवांस बुकिंग के आंकड़ों, फिल्‍म को लेकर नॉस्‍टैल्‍ज‍िया को देखते हुए अनुमान यही है कि 'बाहुबली: द एपिक' पहले दिन दुनियाभर में 15 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्‍शन आसानी से कर लेगी। साउथ सिनेमा में री-रिलीज के बाद सबसे अध‍िक कमाई करने वाली फिल्‍में तेलुगू सिनेमा में री-रिलीज हुई सबसे अध‍िक कमाई करने वाली फिल्‍म महेश बाबू की 'कलेजा' है। इसने अपनी दूसरी पारी में वर्ल्डवाइड 10.78 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्‍शन किया था। तमिल इंडस्‍ट्री में यह रिकॉर्ड थलपति की 'घ‍िल्‍ली' के नाम है, जिसने 22 करोड़ रुपये अध‍िक कमाए थे। जैसे हालात हैं 'बाहुबली: द एपिक' बड़ी आसानी से दो दिन में ही दोनों को पछाड़ देगी।