samacharsecretary.com

रेत कारोबार में नई पहल: छत्तीसगढ़ के 6 जिलों की 18 खदानें ई-नीलामी के लिए खुलीं

रायपुर छत्तीसगढ़ में रेत खनन को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने नई पहल की है। खनिज साधन विभाग ने प्रदेश के 6 जिलों की 18 रेत खदानों के आवंटन के लिए ई-नीलामी (रिवर्स ऑक्शन) प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए निविदाएं 7 से 13 नवंबर तक खोली जाएंगी। खनिज साधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में अन्य जिलों की खदानों की नीलामी भी इसी प्रणाली से की जाएगी। विभागीय पोर्टल पर पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी ताकि इच्छुक पक्ष कहीं से भी भाग ले सकें। किन जिलों की खदानें शामिल ई-नीलामी के दायरे में आने वाली खदानों में रायपुर जिले की टीला, धमतरी की तेंदूकोन्हा और मुड़पार, महासमुंद की नर्रा और खेमड़ा, बालोद की नेवारीकला-01, नेवारीकला-02, अरौद, देवीनवागांव और पोड, बिलासपुर की जरगा/कोनचरा, कुकुर्दीकला-02 और निरतू, और रायगढ़ जिले की बरभौना, बायसी, कंचनपुर, लेबड़ा और पुसल्दा खदानें शामिल हैं। इन सभी के लिए उच्चतम निर्धारित मूल्य (सीलिंग प्राइज) तय किया जा चुका है। नई रेत नीति 2025 लागू राज्य सरकार ने हाल ही में नई रेत खनन नीति 2025 को मंजूरी दी है। इसके तहत अब सभी खदानों की नीलामी इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली से होगी। अवैध खनन पर रोक लगाने और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रम एमएसटीसी के साथ एमओयू किया है। अधिकारियों के अनुसार, नई नीति से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और स्थानीय निकायों को राजस्व का बड़ा लाभ मिलेगा। वर्तमान स्थिति और आगामी योजना फिलहाल प्रदेश में 120 रेत खदानें संचालित हैं। इसके अलावा 100 से अधिक खदानों को चालू करने के लिए पर्यावरणीय मंजूरी का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है। आने वाले महीनों में लगभग 150 नई खदानों को भी रिवर्स आक्शन प्रणाली से आवंटित किया जाना है। राजस्व में बढ़ोतरी और पारदर्शिता की उम्मीद खनिज विभाग का दावा है कि ई-नीलामी से न केवल रेत की आपूर्ति व्यवस्थित होगी, बल्कि अवैध खनन पर भी प्रभावी रोक लगेगी। पारदर्शी प्रक्रिया से सरकार के साथ-साथ पंचायतों और नगरीय निकायों को भी राजस्व में वृद्धि होगी।

कांग्रेस ने बिहार चुनाव के दूसरे चरण के लिए स्टार प्रचारकों की घोषणा की, जानिए कौन-कौन हैं शामिल

पटना, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण को लेकर कांग्रेस ने अपने स्टार प्रचारकों की आधिकारिक सूची जारी कर दी है। कुल 40 नेताओं को इस सूची में जगह दी गई है, जो दूसरे चरण में पार्टी के उम्मीदवारों के लिए चुनाव प्रचार की कमान संभालेंगे। कांग्रेस की ओर से जारी सूची में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से लेकर क्षेत्रीय स्तर के कई अनुभवी और लोकप्रिय चेहरे शामिल हैं। सूची में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सबसे प्रमुख नाम हैं। ये सभी नेता चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी के मुख्य संदेश को मतदाताओं तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत, भूपेश बघेल, दिग्विजय सिंह, अधीर रंजन चौधरी, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार और युवा नेता सचिन पायलट भी इस सूची में शामिल हैं। कांग्रेस ने इस बार अनुभवी और युवा नेतृत्व का संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है। दूसरे चरण के स्टार प्रचारकों की सूची में मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, प्रियंका गांधी वाड्रा, सुखविंदर सिंह सुक्खू, अशोक गहलोत, भूपेश बघेल, दिग्विजय सिंह, अधीर रंजन चौधरी, मीरा कुमार, कृष्णा अल्लावरु, सचिन पायलट, रणदीप सिंह सुरजेवाला, सैयद नसीर हुसैन, गौरव गोगोई, तारिक अनवर, डॉ. मोहम्मद जावेद और सुप्रिया श्रीनेत जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। इनके अलावा अखिलेश प्रसाद सिंह, मनोज राम, राकिबुल हुसैन, प्रमोद तिवारी, कन्हैया कुमार, पवन खेड़ा, इमरान प्रतापगढ़ी, शकील अहमद, सुखदेव भगत, राजेश कुमार राम, शकील अहमद खान, मदन मोहन झा, सुबोध कांत सहाय, अजय राय, जिग्नेश मेवाणी, रंजीत रंजन, राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, अनिल जयहिन्द, राजेंद्र पाल गौतम, फुरकान अंसारी और प्रदीप नरवाल के नाम भी शामिल हैं। कांग्रेस को उम्मीद है कि इन नेताओं की मौजूदगी और जनसंपर्क अभियान पार्टी को दूसरे चरण में मजबूती देगा। बता दें कि बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 के लिए दूसरे चरण के लिए 11 नवंबर को वोट डाले जाएंगे और 14 नवंबर को वोटों की गिनती होगी। इसके साथ ही चुनाव के नतीजे सामने आएंगे।  

डिग्री नहीं, स्किल की जरूरत: एआई के दौर में ये 6 हुनर बचाएंगे आपकी नौकरी

नई दिल्ली एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटेमेशन के चलते दुनिया की बड़ी कंपनियों में छंटनी का दौर तेज हो गया है। अमेजन, यूपीएस, टारगेट, माइक्रोसॉफ्ट, इंटेल और नेस्ले जैसी दिग्गज कंपनियों ने हजारों कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। धड़ाधड़ पिंक स्लिप पकड़ाई जा रही हैं और नई भर्तियों पर रोक लगा दी गई है। टेक से लेकर ट्रांसपोर्ट तक जैसी फलने फूलने वाली इंडस्ट्री अब रीस्ट्रक्चरिंग और एफिशिएंसी की भाषा बोल रही हैं। हर सेक्टर के विभिन्न कर्मचारियों का भविष्य अनिश्चितता से भरा है। इस उथल-पुथल के बीच अमेरिकी अर्थव्यवस्था नो हायर -नो फायर यानी न नई भर्ती, न ज्यादा छंटनी , ऐसी स्थिति में फंसी है। इसकी वजह है- जियोपॉलिटिक्स (अंतरराष्ट्रीय तनाव), ऑटोमेशन, टैक्स-टैरिफ और बदलती उपभोक्ता आदतें। अमेरिका की सत्ता में डोनाल्ड ट्रंप के लौटने के बाद से पब्लिक सेक्टर में हजारों लोगों की नौकरियां गई हैं। सरकारी शटडाउन अपने चौथे हफ्ते के करीब है, जिससे कई लोगों को सैलरी नहीं मिली और सभी के पास कोई जवाब नहीं है। भर्तियां अब सिर्फ डिग्री के दम पर नहीं टैग्ड के फाउंडिंग मेंबर और सीईओ देवाशीष शर्मा का कहना है कि भारत में कंपनियों में अब भर्तियां डिग्री के दम पर नहीं, बल्कि कैंडिडेट में जॉब के लिए दिखने वाली तैयारी से तय होगी। प्रोजेक्ट्स, इंटर्नशिप और योग्यता मूल्यांकन से स्किल्स देखी जाएगी। उन्होंने कहा, 'एम्प्लॉयर्स खासकर बड़ी कंपनियां एकेडमिक इंस्टीट्यूशन्स के साथ मिलकर स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स बनाकर और करिकुलम को मिलकर डिजाइन करके जॉब के लिए तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं।' कई बड़ी दिग्गजों कंपनियों खर्चों को लेकर अपना हाथ टाइट कर लिया है और कर्मचारियों की संख्या पर लगाम लगाई है, यहां देखें लिस्ट अमेजन: ने 14,000 कॉर्पोरेट कर्मचारियों (लगभग 4% ) की छंटनी की है। कंपनी इस पैसे को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश कर रही है। यूपीएस : ने इस साल 48,000 नौकरियां घटाई हैं और 93 ब्रांचों को बंद कर दिया है क्योंकि शिपिंग (सामान भेजने) की मात्रा कम हुई है। टारगेट : टारगेट ने 1800 कर्मचारियों (लगभग 8% कॉर्पोरेट कर्मी) को हटाया है। नेस्ले : बढ़ती कीमतों और टैरिफ के कारण अगले दो सालों में दुनिया भर में 16,000 छंटनियां कर रही है। लुफ्थांसा समूह : 2030 तक 4,000 पद खत्म करने की योजना बना रहा है। प्रशासनिक काम को डिजिटल और AI प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट कर रहा है। नोवो नॉर्डिस्क : अपनी ब्लॉकबस्टर दवाओं की भारी मांग के बावजूद 9,000 कर्मचारियों (11% कार्यबल) की छंटनी की घोषणा की है। इंटेल : छंटनी और कर्मचारियों के छोड़ने से अपने मुख्य मैनफोर्स को 99,500 से घटाकर 75,000 कर रहा है। माइक्रोसॉफ्ट : माइक्रोसॉफ्ट ने इस साल 6,000 कर्मचारियों को निकालने के बाद, गेमिंग और प्रबंधन डिवीजनों में 9,000 और कर्मचारियों की छंटनी की है। एआई, ऑटोमेशन और मार्केट की बदलती जरूरतों में कैसे टिके रहें- 1- फिर से सीखें और नए सिरे से सोचें वो दिन गए जब एक ही स्किल से जिंदगी काटी जा सकती है। जिंदगी भर कमाया जा सकता था। खुद की स्किल्स को बढ़ाना और उसे अपग्रेड करना अब ऑप्शनल नहीं है; यह अनिवार्य है और जिदा रहने का तरीका है। प्रोफेशनल्स को लगातार सीखने में निवेश करना चाहिए, चाहे वह एआई साक्षरता हो, डेटा इंटरप्रिटेशन हो, या कम्युनिकेशन को बेहतर बनाना हो। कोर्सेरा, लिंक्डइन लर्निंग जैसे प्लेटफॉर्म और कंपनी-स्पॉन्सर्ड प्रोग्राम किसी के स्किलसेट को नए सिरे से समझने के लिए मजबूत रास्ते देते हैं। 2. एक पर्सनल ब्रांड बनाएं आज की दुनिया में आपकी ऑनलाइन पहचान बहुत मायने रखती है। लिंक्डिन पर नेटवर्किंग, अनुभव साझा करना और ईमानदारी से खुद को पेश करना फायदेमंद साबित हो सकता है। डिजिटल वर्ल्ड में आपकी मौजदूगी आपको भीड़ में सबसे अलग खड़ा कर देगी। 3. फाइनेंशियल दूर की सोच बढ़ाएं जॉब की असुरक्षा के माहौल में आपका बचाया हुआ पैसा बहुत काम आएगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक कम से कम छह महीने के खर्चों को कवर करने वाला एक इमरजेंसी फंड बनाना चाहिए। कंसल्टिंग, फ्रीलांसिंग, या पैसिव इन्वेस्टमेंट के जरिए इनकम के सोर्स को अलग-अलग करें। साइड इनकम के लिए निवेश करें। 4. जुड़े रहें, संपर्क में रहें नेटवर्किंग लेन-देन वाली नहीं, बल्कि रिश्तों को बनाए रखने वाली होती है। नौकरी से निकाले जाने और बदलाव के दौरान इमोशनल सपोर्ट अक्सर साथियों, पुराने साथ काम करने वालों या इंडस्ट्री के लोगों से मिलता है। इन कनेक्शन को बनाए रखने से अनजाने रास्ते खुल सकते हैं। 5. मानसिक संतुलन को प्राथमिकता दें नौकरी छूटने या अस्थिरता से मेंटल हेल्थ पर बुरा असर पड़ सकता है। मानसिक रूप से मजबूत बने रहने में थेरेपी, मेडिटेशन और नियमित दिनचर्या मदद करती है। 6. लगातार सीखें, खुद को बदलें अब हर व्यक्ति को अपनी स्किल्स को बढ़ाने, खुद को नया रूप देने की जरूरत है। आज का जॉब मार्केट खत्म नहीं हुआ है। यह बस बदल रहा है। इसके लिए सिर्फ टेक्निकल काबिलियत ही नहीं, बल्कि इमोशनल इंटेलिजेंस, एडजस्ट करने की क्षमता और समय के साथ बदलना जरूरी है।  

नवंबर में गिरेगा पारा: धुंध से ढका राजस्थान, शुरू हुई कड़ाके की ठंड

जयपुर राजस्थान में अगले कुछ दिनों तक मौसम सामान्य रहेगा। जयपुर, अजमेर, जोधपुर, बीकानेर और भरतपुर संभाग में अगले 2 से 3 दिनों तक आसमान साफ और दिन में धूप खिली रहने की संभावना है। तापमान में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। वहीं, उदयपुर और कोटा संभाग में अगले 48 घंटे तक आंशिक बादल छाए रह सकते हैं। बीते दिनों जिन जिलों में बारिश हुई है, अब वहां धुंध का असर भी देखने को मिल रहा है। पिछले सप्ताह 24 से 30 अक्टूबर के बीच राज्य में औसतन 19.6 मिमी वर्षा हुई। पूर्वी राजस्थान में हल्की से मध्यम और दक्षिण-पूर्वी इलाकों में कहीं-कहीं भारी वर्षा दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार, इस बार नवंबर में प्रदेश में सामान्य से अधिक बारिश होने के संकेत हैं। हालांकि रात के तापमान में विशेष गिरावट नहीं होगी और सर्दी का असर सामान्य रहेगा। उदयपुर, कोटा, जयपुर, भरतपुर और अजमेर संभाग में दिन का तापमान औसत से नीचे रह सकता है। पिछले तीन दिनों की बारिश के बाद शुक्रवार को अलवर और आसपास के इलाकों में हल्की धुंध छाई रही। वहीं उदयपुर, डूंगरपुर, भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ में बादल छाए रहे और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश दर्ज की गई। देर शाम तक मौसम साफ हो गया। मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार, हिंद महासागर में इंडियन ओशन डायपॉल कमजोर और प्रशांत महासागर में ला-नीना की स्थिति बनी हुई है, जिससे पूरे भारत में (जम्मू-कश्मीर और तमिलनाडु को छोड़कर) नवंबर में सामान्य से ज्यादा बारिश की संभावना है। शुक्रवार को प्रदेश में सबसे अधिक तापमान 34.4 डिग्री सेल्सियस बाड़मेर, जबकि सबसे कम 18.2 डिग्री सेल्सियस पाली में दर्ज हुआ। सीकर, टोंक, अजमेर, अलवर, बारां, प्रतापगढ़ और सिरोही में अधिकतम तापमान 30 डिग्री से नीचे रहा। प्रदेश के प्रमुख शहरों का तापमान (तापमान 31 अक्टूबर का डिग्री सेल्सियस में है) — अजमेर 27.8 और 18.9, भीलवाड़ा 25.7 और 20.5, वनस्थली (टोंक) 25.6 और 18.8, अलवर 27 और 21, जयपुर 27.8 और 21.1, पिलानी 31.7 और 20.7, सीकर 29.5 और 19.5, कोटा 25.8 और 21.2, चित्तौड़गढ़ 26.3 और 19, उदयपुर 24 और 20.2, बाड़मेर 34.4 और 23.1, जैसलमेर 34.2 और 19, जोधपुर 31.8 और 22.2, बीकानेर 32.2 और 19.4, चूरू 31.5 और 20.5, गंगानगर 31.5 और 20.1, नागौर 32 और 19.2, जालोर 31 और 22.3, दौसा 28.1 और 21.5, प्रतापगढ़ 25.5 और 20.3, झुंझुनूं 29.9 और 20.5, पाली 27.1 और 18.2 डिग्री सेल्सियस रहा।  

बच्चों में उभर रहा नया इंफेक्शन: काली खांसी जैसी खांसी से बढ़ी चिंता

चंडीगढ़ काली खांसी (हूपिंग कफ) और लंबे समय से खांसी से पीड़ित मरीजों के लिए एक नई चिंता उभरकर सामने आई है। पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआइ) के किए गए शोध में यह पता चला है कि उत्तर भारत में तेजी से फैल रहा नया बैक्टीरिया, बोर्डेटेला होल्मसी, अब काली खांसी के समान लक्षण उत्पन्न कर रहा है । यह संक्रमण विशेष रूप से पांच से दस वर्ष के बच्चों में फैल रहा है और इसके नियंत्रण में कठिनाई आ रही है। पीजीआइ के मेडिकल माइक्रोबायोलाजी विभाग के डॉ. विकास गौतम ने बताया कि उनकी टीम ने 2019 से 2023 के बीच 935 संदिग्ध काली खांसी के मामलों का अध्ययन किया। इस शोध में पाया गया कि लगभग 37 प्रतिशत मरीजों में संक्रमण का कारण नया जीवाणु बोर्डेटेला होल्मसी था, जबकि पारंपरिक काली खांसी का कारण बोर्डेटेला परट्यूसिस होता है। 2023 में सबसे अधिक मामले पांच से 10 वर्ष के बच्चों में देखे गए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि संक्रमण का पैटर्न बदल रहा है। ये हैं लक्षण     लगातार दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक चलने वाली खांसी     खांसी के बाद सांस लेने में सीटी जैसी आवाज     थकान, कमजोरी और हल्का बुखार     पारंपरिक खांसी की दवाओं से राहत न मिलना काली खांसी के पारंपरिक मामलों में गिरावट के संकेत   पीजीआइ द्वारा 2015 से चलाए जा रहे निगरानी कार्यक्रम में यह पाया गया कि पहले बोर्डेटेला पयूसिस संक्रमण के 15-20 प्रतिशत मामले मिलते थे, जो अब घटकर दो से पांच प्रतिशत तक रह गए हैं। इसके विपरीत, बोर्डेटेला होल्मसी के मामलों में वृद्धि हो रही है। पीजीआइ के विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव संक्रमण की नई प्रवृत्ति की ओर इशारा करता है, जो भविष्य में स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन सकता है। बोर्डेटेला होल्मसी के वारे में यह एक जीवाणु है जो सांस संबंधी संक्रमण उत्पन्न करता है और इसके लक्षण काली खांसी से काफी मेल खाते हैं। पहले इसे दुर्लभ माना जाता था, लेकिन अब भारत सहित कई देशों में इसके मामले बढ़ रहे हैं। यह विशेष रूप से बच्चों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों को अधिक प्रभावित करता है। डाक्टरों को काली खांसी के साथ नए संक्रमण की जांच की भी जरूरत डाक्टरों को सलाह दी गई है कि वे काली खांसी के साथ-साथ नए संक्रमण की भी जांच करें। पीजीआइ की टीम ने सुझाव दिया है कि डाक्टरों को पारंपरिक काली खांसी की जांच तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनसे मिलते-जुलते संक्रमणों की पहचान और निगरानी भी करनी चाहिए। समय पर पहचान, सही जांच और उचित दवाओं से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।  

तेज रफ्तार का कहर: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे बना मौत का हाइवे

दौसा दौसा देश के दो महानगरों दिल्ली और मुंबई को सीधे जोड़ने और यात्रा समय घटाने के उद्देश्य से बनाए गए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को जानवर-रहित और सुरक्षित बताया गया था, लेकिन यह ड्रीम प्रोजेक्ट अब यात्रियों के लिए मौत का हाईवे बनता जा रहा है। एक्सप्रेसवे शुरू हुए 32 महीने से अधिक हो चुके हैं और अब तक 250 से ज्यादा लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं। अकेले दौसा जिले में ही 180 से अधिक मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। जानवरों के कारण बढ़ रहे हादसे केंद्र सरकार के जानवर-रहित हाइवे के दावे हवा में नजर आ रहे हैं। एक्सप्रेसवे पर रोजाना लावारिस पशु घूमते देखे जा रहे हैं, और ज्यादातर हादसे इन्हीं की वजह से हो रहे हैं। भारी-भरकम टोल चुकाने के बाद भी वाहन चालकों को सुरक्षित यात्रा नहीं मिल पा रही है। मॉनिटरिंग सिस्टम फेल, रफ्तार पर नहीं लग रही लगाम वाहनों की तेज रफ्तार हादसों का बड़ा कारण बन चुकी है। एक्सप्रेसवे को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति सीमा के अनुसार तैयार किया गया था, लेकिन मॉनिटरिंग की कमी के चलते कई कारें 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक दौड़ रही हैं। चालक की झपकी और लापरवाही भी कई दुर्घटनाओं की वजह बन रही है। हाई-टेक कैमरे भी बेअसर हादसे रोकने के लिए हर 100 मीटर पर थर्मल सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जो ओवरस्पीड वाहनों की पहचान कर एनएचएआई और यातायात पुलिस को सूचना देने के लिए हैं। बावजूद इसके, हादसों में कोई कमी नहीं आई है। सुरक्षा दीवारें टूटीं, जानवरों का आसान प्रवेश एनएचएआई के दावों के विपरीत, कई जगहों पर एक्सप्रेसवे के किनारे सुरक्षा दीवारें टूटी हुई हैं या बनाई ही नहीं गईं। स्थानीय लोगों ने जगह-जगह दीवार तोड़कर रास्ते बना लिए हैं, जिससे आवारा पशु और दुपहिया वाहन आसानी से एक्सप्रेसवे पर पहुंच जाते हैं। हाईवे के किनारे मिट्टी डालकर बनाए ढाबे और दुकानें पिलर संख्या 190 के आसपास हाइवे की सीमा में मिट्टी डालकर समतलीकरण कर ढाबे और दुकानें खोल ली गई हैं। यहां ट्रक खड़े रहते हैं, जबकि यह क्षेत्र नो-पार्किंग जोन है। कई स्थानों पर 10 फीट ऊंचाई तक मिट्टी भरकर हाइवे से जुड़ाव बना लिया गया है। स्थानीय लोग खुलेआम व्यापार कर रहे हैं, लेकिन एनएचएआई अधिकारियों की अनदेखी के कारण स्थिति बेकाबू है। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। यह ड्रीम प्रोजेक्ट, जो देश की आधुनिक सड़क प्रणाली की मिसाल माना जा रहा था, अब लगातार हादसों और लापरवाही के कारण सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।

मौसम विभाग की चेतावनी: बिहार के 7 जिलों में भारी बारिश, 29 जिलों में भीगेंगे लोग

पटना बिहार में आज का मौसम बारिश भरा रहने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार,  राज्य के 29 जिलों में बारिश की संभावना है, जबकि 7 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज शामिल हैं। इन जगहों पर अगले 24 घंटे के दौरान अति भारी बारिश और वज्रपात की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने इन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। पटना और आसपास का मौसम राजधानी पटना में पिछले तीन दिनों से लगातार रुक-रुककर बारिश हो रही है। तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और ठंड ने दस्तक दे दी है। शहर का अधिकतम तापमान सामान्य से 3 डिग्री तक नीचे चला गया है। “क्या आज बारिश होगी?”  मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आज शाम तक कई जिलों में बारिश के फिर से सक्रिय होने की संभावना है। आज का मौसम बिहार पूरी तरह से मॉनसून जैसा बना हुआ है। मोंथा तूफान का असर जारी, तीन दिन से लगातार बारिश मौसम विभाग ने बताया है कि मोंथा तूफान के कारण गंगा किनारे के जिलों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। तेज हवाओं और लगातार बारिश से जनजीवन प्रभावित हो गया है। सड़कें जलमग्न हो चुकी हैं और कई जगहों पर बिजली आपूर्ति पर भी असर पड़ा है। इन जिलों में आज होगी बारिश मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, आज इन राज्य के पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सिवान, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मधेपुरा, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, मुंगेर, शेखपुरा, बांका, जमुई, नवादा और गया में बारिश की संभावना है। इन जिलों में तेज हवा, वज्रपात और मेघगर्जन की भी चेतावनी जारी की गई है। किसानों की बढ़ी चिंता, रबी फसल पर असर लगातार बारिश से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई जगहों पर कटे हुए धान की फसल खेतों में सड़ने लगी है। रबी फसलों की बुआई भी प्रभावित हो रही है क्योंकि खेतों में जलजमाव  की स्थिति बन गई है। इसका असर सरसों, आलू और मक्का की बुआई पर पड़ रहा है। कल मौसम कैसा रहेगा मौसम विभाग का कहना है कि 2 नवंबर को भी बिहार के उत्तरी और पूर्वी इलाकों में बारिश का असर बना रहेगा। हालांकि दक्षिण बिहार में मौसम धीरे-धीरे साफ होने की संभावना है। अगले 48 घंटों में मौसम सामान्य होने की उम्मीद है।  

सीएम सैनी का रोजगार मिशन: हरियाणा में 2 लाख सरकारी नौकरियों की तैयारी तेज

हरियाणा  हरियाणा सरकार ने वादों को पूरा करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा दिए हैं। बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में 5 साल में 2 लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा किया था।  सीएम ने ग्रुप सी और ग्रुप डी की भर्तियों पर ध्यान देने के निर्देश दिए क्योंकि इन पदों के लिए सबसे अधिक आवेदन आते हैं। करीब दो हफ्ते पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक अहम समीक्षा बैठक बुलाई थी। बैठक में हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) के अध्यक्षों को भी बुलाया गया था।बैठक में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता भी मौजूद रहे। सीएम ने दोनों आयोगों से अब तक हुई भर्तियों की स्थिति और आगे की योजना के बारे में विस्तार से जानकारी ली। जुलाई में हुई थी सीईटी की परीक्षा  बता दें कि सीईटी की परीक्षा 26 और 27 जुलाई 2025 को आयोजित हुई थी। इसके बाद 16 अक्टूबर 2025 को करेक्शन पोर्टल के लिए नोटिस जारी किया गया। उम्मीदवारों को 17 से 24 अक्टूबर तक दस्तावेज़ अपलोड करने का मौका दिया गया था जिसे बढ़ाकर 28 अक्टूबर तक कर दिया गया। अब सभी उम्मीदवार परिणाम का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।   

सुरक्षित सफर की दिशा में—परिवहन विभाग की नई पहल

रायपुर, छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव-2025 में परिवहन विभाग का स्टॉल लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। विभाग द्वारा यहाँ आम नागरिकों को सड़क सुरक्षा, आधुनिक परिवहन सेवाओं और तकनीकी नवाचारों की जानकारी सरल और रोचक तरीके से दी जा रही है। राज्योत्सव में आए आगंतुकों ने परिवहन विभाग के इस स्टॉल को शिक्षाप्रद और जागरूकता बढ़ाने वाला बताया। स्लॉट में आने वाले लोगों ने परिवहन विभाग द्वारा प्रदर्शित पहलुओं को सड़क सुरक्षा और आधुनिक परिवहन प्रणाली की दिशा में एक सराहनीय प्रयास बताया है। स्टॉल में बड़े एलईडी स्क्रीन के माध्यम से ’वाहन चलाने से पहले और वाहन चलाने के दौरान सुरक्षित व्यवहार’ पर आधारित वीडियो मॉड्यूल्स दिखाए जा रहे हैं। कुल 37 मिनट के 12 वीडियो मॉड्यूल्स के जरिए वाहन चालकों को व्यवहारिक ज्ञान प्रदान किया जा रहा है। ये सभी मॉड्यूल्स ’सारथी परिवहन प्लेटफार्म’ पर भी उपलब्ध हैं। स्टॉल में लगाए गए सिम्युलेटर के माध्यम से आगंतुक सुरक्षित वातावरण में वाहन चलाने का अभ्यास कर रहे हैं। यह सिम्युलेटर वाहन संचालन से पहले प्रशिक्षण का एक उपयोगी माध्यम साबित हो रहा है। परिवहन विभाग के स्टॉल में अंर्तविभागीय लीड एजेंसी सड़क सुरक्षा छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि स्टॉल में विभागीय कार्य में पारदर्शिता और आमजनों में जागरूकता लाने प्रमुखता से बस संगवारी ऐप, ड्राइविंग लाइसेंस एवं वाहन पंजीयन प्रमाणपत्र, हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट, परिवहन सुविधा केंद्र, इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग एंड रिसर्च सेंटर, राहवीर योजना, शासकीय ट्रॉमा सेंटर और धनरहित उपचार योजना की जानकारी भी दी जा रही है।

नई पेंशन गणना: अब पेंशनर्स को मिलेगा ज्यादा लाभ, समझें पूरा कैलकुलेशन

नई दिल्ली आठवें वेतन आयोग की चर्चा शुरू होते ही सबका ध्यान सैलरी पर रहता है, लेकिन इस बार पेंशनर्स की संख्या कर्मचारियों से ज्यादा है, इसलिए उनका मुद्दा भी बड़ा हो गया है। सरकार के पेंशनर्स पोर्टल के मुताबिक, 30 अक्टूबर 2025 तक कुल 68.72 लाख पेंशनर्स हैं, जबकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों की संख्या करीब 50 लाख है। सरकार ने 8वें वेतन आयोग के टर्म ऑफ रेफ्रेंस (Terms of Reference- TOR) को मंजूरी दे दी है। रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने की समय सीमा तय की गई है और सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई (Ranjana Prakash Desai) को इसका चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है। अब पेंशनर्स जानना चाहते हैं कि उनकी पेंशन कितनी बढ़ेगी? तो चलिए समझते हैं पूरा कैलकुलेशन। फिटमेंट फैक्टर क्या है और पेंशन कितनी बढ़ेगी? पेंशन बढ़ाने में सबसे अहम रोल फिटमेंट फैक्टर का होता है। यह एक गुणक (Multiplier) होता है जिससे पुराने बेसिक वेतन या बेसिक पेंशन को नए वेतन में बदला जाता है। 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 है। यानी अगर किसी की पुरानी बेसिक सैलरी 10,000 रुपए थी, तो नई सैलरी 10,000 × 2.57 = 25,700 रुपए होगी। आठवें वेतन आयोग में (8th Pay Commission) में फिटमेंट फैक्टर कितना होगा, यह कैबिनेट की मंजूरी के बाद तय होगा। क्या सिर्फ बेसिक पेंशन ही बदलेगी?   नहीं, पेंशनर्स के लिए सिर्फ बेसिक पेंशन ही मुद्दा नहीं है। टर्म ऑफ रेफ्रेंस में पेंशन से जुड़े कई पॉइंट शामिल हैं, जैसे— पेंशन, ग्रेच्युटी, फैमिली पेंशन, कम्यूटेड पेंशन की बहाली हर 5 साल में पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव ओल्ड पेंशन स्कीम (Old Pension Scheme) की बहाली (1 जनवरी 2004 के बाद भर्ती वालों के लिए) CGHS मेडिकल सुविधा, कैशलेस इलाज और महंगाई राहत (DA/DR) को वेतन और पेंशन में जोड़ना। पेंशनर्स की प्रमुख मांगें क्या हैं? ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लॉई फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनजीत सिंह पटेल बता ते हैं कि फिटमेंट फैक्टर जितना ज्यादा होगा, पेंशन उतनी ज्यादा बढ़ेगी। कम्यूटेशन 15 साल से घटाकर 12 साल होना चाहिए, क्योंकि अभी 40% पेंशन काटी जाती है। CGHS अस्पताल हर जिले में नहीं हैं। अभी सिर्फ 3,000 रुपए प्रति महीना मेडिकल लाभ मिलता है, इसे 20,000 रुपए किया जाए। पेंशन कैसे बढ़ती है? फिटमेंट फैक्टर के आधार पर पूरा कैलकुलेशन समझ लेते हैं। मान लीजिए एक शख्स की पुरानी बेसिक पे है- 40,000 रुपए, तो पुरानी पेंशन (50%) होगी यानी 20,000 रुपए। फिटमेंट फैक्टर नई बेसिक पे नई पेंशन (50%) 2.57 40,000 × 2.57 = ₹1,02,800 ₹51,400 3 40,000 × 3 = ₹1,20,000 ₹60,000 3.68 40,000 × 3.68 = ₹1,47,200 ₹73,600   25000 से ₹50000 पेंशन कैसे होगी? अगर फिटमेंट फैक्टर 2.0 माना जाए, तो ₹25,000 × 2 = 50,000 रुपए पेंशन हो सकती है। महंगाई राहत कैसे बढ़ेगी? How will the dearness relief increase DR बेसिक पेंशन का प्रतिशत होता है। पुरानी पेंशन ₹20,000 → DR 20% = ₹4,000 नई पेंशन ₹30,000 → DR 20% = ₹6,000 यानी बेसिक पेंशन बढ़ने से DR अपने आप ज्यादा मिलेगा। EPS, फैमिली पेंशन और Enhanced पेंशन में क्या होंगे बदलाव? पेंशन का प्रकार क्या होता है? नया असर EPS आखिरी बेसिक सैलरी पर आधारित नई वेतन मैट्रिक्स लागू होगी तो EPS भी बढ़ेगी फैमिली पेंशन पेंशनर की मृत्यु के बाद पत्नी/परिवार को 30% बेसिक बेसिक बढ़ेगा तो फैमिली पेंशन भी बढ़ेगी Enhanced पेंशन लंबी सेवा या कम्यूटेशन रिस्टोर होने पर Fitment Factor ज्यादा होने पर ये भी बढ़ेगी   पेंशन का प्रकार क्या होता है? नया असर EPS आखिरी बेसिक सैलरी पर आधारित नई वेतन मैट्रिक्स लागू होगी तो EPS भी बढ़ेगी फैमिली पेंशन पेंशनर की मृत्यु के बाद पत्नी/परिवार को 30% बेसिक बेसिक बढ़ेगा तो फैमिली पेंशन भी बढ़ेगी Enhanced पेंशन लंबी सेवा या कम्यूटेशन रिस्टोर होने पर Fitment Factor ज्यादा होने पर ये भी बढ़ेगी उदारणर में समझें तो- पुरानी फैमिली पेंशन: ₹20,000 → 30% = ₹6,000 नई पेंशन: ₹30,000 → 30% = ₹9,000