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18 नवंबर 2025 राशिफल: सभी 12 राशियों के लिए दिन का पूरा ज्योतिषीय विश्लेषण

मेष: 18 नवंबर के दिन मेष राशि के जातकों को उत्साह से भरा दिन मिलने की उम्मीद है। नए अवसर सामने आ सकते हैं, खासतौर पर आपके करियर और प्रेम जीवन में। सावधान रहें और जरूरत पड़ने पर जरूरी कदम उठाएं। वृषभ: 18 नवंबर के दिन का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रोडक्टिव रहें। आज का दिन विकास के अवसरों से भरा हुआ है। आपकी स्वाभाविक जिज्ञासा आपको नए रास्ते तलाशने के लिए मोटिवेट करेगी। खुले दिमाग से काम लें। मिथुन: 18 नवंबर के दिन आप फाइनेंशियल तौर पर स्टेबल रहेंगे लेकिन सावधानी के साथ योजना बनाने की सलाह दी जाती है। अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें, क्योंकि संतुलित जीवनशैली बनाए रखना फायदेमंद रहेगा। कर्क: 18 नवंबर के दिन रिश्तों के लिए धैर्य और समझ की आवश्यकता हो सकती है। धन के मामले में, रिस्क से बचने के लिए सावधानी से फैसला लेना बुद्धिमानी है। संतुलित जीवनशैली बनाए रखते हुए अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें। सिंह: 18 नवंबर के दिन करियर के लक्ष्यों के लिए समर्पण की आवश्यकता होती है। खुले दिमाग से एक्टिव रहकर, आप आज के दिन को उपलब्धियों के दिन में बदल सकते हैं। जीवन के सभी क्षेत्रों में संतुलन को प्राथमिकता देनी चाहिए। कन्या: 18 नवंबर के दिन तनाव न लें। अपने विचारों को व्यवस्थित करने और लक्ष्य निर्धारित करने का यह एक बढ़िया समय है। सबकुछ ठीक-ठाक होता हुआ प्रतीत होता है। शांत रहें और छोटी-छोटी जीत का आनंद लें। तुला: 18 नवंबर के दिन डिसीजन लेने में अपनी गट फीलिंग को अपना मार्गदर्शक बनने दें। प्रियजनों का सपोर्ट लें, क्योंकि वे आपकी सफलता में सहायक होंगे। आशावाद को सावधानी के साथ बैलेंस करके, आप आज के दिन का पूरा लाभ उठा सकते हैं। वृश्चिक: 18 नवंबर का दिन आपके जीवन के कई क्षेत्रों में प्रगति लेकर आएगा। आप अधिक कॉन्फिडेंट महसूस करेंगे और पॉजिटिव बदलावों के लिए खुले रहेंगे। चाहे घर पर हो, काम पर हो या दोस्तों के साथ, आपका व्यावहारिक स्वभाव आपको आगे बढ़ने में मदद करेगा। धनु: 18 नवंबर के दिन आप अधिक केंद्रित और शांत महसूस कर सकते हैं। रिश्ते आसान महसूस हो सकते हैं। काम पर आपके प्रयास प्रगति दिखाने लग सकते हैं। फाइनेंशियल डिसीजन क्लियर हो सकते हैं और आपकी एनर्जी में सुधार हो सकता है। मकर: 18 नवंबर के दिन धन वृद्धि के योग बन रहे हैं। आपकी भावनाएं संतुलित रहेंगी, जिससे आपको सिचूऐशन को क्लियर रूप से देखने में मदद मिलती है। परिवार और दोस्तों के साथ संबंध बेहतर होते हैं क्योंकि आप अधिक धैर्यवान और समझदार हो रहे हैं। कुंभ: 18 नवंबर का दिन बदलाव लेकर आया है। आप इस बात से अधिक अवगत हैं कि क्या मायने रखता है और ऐसी किसी भी चीज को छोड़ने के लिए तैयार हैं, जो आपकी शांति को सपोर्ट नहीं करता है। आपका आत्मविश्वास जीवन के हर हिस्से में पॉजिटिव एनर्जी को आकर्षित करता है। मीन: 18 नवंबर के दिन फिटनेस पर फोकस करें। चाहे काम खत्म करना हो या नया शुरू करना हो, आपका दृष्टिकोण हर चीज को सही रूप से चलाने में मदद करता है। खुद पर भरोसा करें और अपने आस-पास की शांतिपूर्ण ऊर्जा का आनंद लें।

SC की केंद्र को फटकार: WHO 50 को खतरनाक कहता है, दिल्ली-NCR 450 पर कैसे?

नई दिल्ली दिल्ली-NCR में खतरनाक स्तर पर पहुंच चुके वायु प्रदूषण के मामले में सुप्रीम कोर्ट  ने सोमवार को सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाया और केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ जिसमें जस्टिस विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया भी शामिल थे ने समस्या के समाधान के लिए दीर्घकालिक और व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।  सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी CJI गवई ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को स्पष्ट सलाह दी कि वह सभी हितधारकों को एक साथ बुलाकर इस गंभीर समस्या का समाधान निकाले। CJI ने कहा, "अल्पकालिक कार्रवाई से समस्या हल नहीं होगी। हमें व्यापक दीर्घकालिक समाधान चाहिए।" कोर्ट ने निर्माण कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने जैसे अल्पकालिक उपायों पर चिंता व्यक्त की। CJI ने कहा, "हम निर्माण पूरी तरह बंद नहीं कर सकते… इससे यूपी-बिहार के मजदूरों पर सीधा असर पड़ता है। हम सिर्फ एक पक्ष को देखकर आदेश नहीं दे सकते। जमीन पर ऐसे निर्देशों से कई लोग प्रभावित होते हैं।" सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया कि वह पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और अन्य NCR राज्यों को शामिल करके एक संयुक्त रणनीति तैयार करे।

डॉ. यादव ने की डॉ. खट्टर के साथ सौजन्य मुलाकात, बढ़ाई आपसी संवाद

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री डॉ. खट्टर से की सौजन्य भेंट डॉ. यादव ने की डॉ. खट्टर के साथ सौजन्य मुलाकात, बढ़ाई आपसी संवाद मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री की सौजन्य भेंट, दोनों नेताओं ने की महत्वपूर्ण बातचीत सिंहस्थ-2028 से जुड़ी तैयारियों एवं परियोजनाओं पर हुई विस्तृत चर्चा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार की शाम नई दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री डॉ. मनोहर लाल खट्टर से उनके आवास पर सौजन्य भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन्द्रीय मंत्री डॉ. खट्टर को सिंहस्थ-2028 आयोजन से जुड़ी तैयारियों एवं अन्य प्रमुख परियोजनाओं के बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ क्षेत्र में अधोसंरचनात्मक विकास कार्यो और इसके विस्तार प्रस्तावों, यातायात प्रबंधन, स्वच्छता, शुचिता, नदी संरक्षण, पेयजल व्यवस्था, अस्थायी आवास निर्माण आदि विषयों के संबंध में केंद्रीय मंत्री को विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ-2028 को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का सर्वोत्कृष्ट आयोजन बनाने के लिए राज्य सरकार विभिन्न बहुआयामी योजनाओं पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं —स्वच्छ भारत अभियान, अमृत मिशन, स्मार्ट सिटी पहल, विद्युत परियोजनाओं और शहरी आधारभूत ढांचे से संबंधित अन्य योजनाओं की प्रगति की भी जानकारी दी। बैठक में अपर मुख्य, (मुख्यमंत्री कार्यालय)  नीरज मंडलोई, केंद्रीय विद्युत, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के प्रमुख अधिकारी तथा राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

प्रशांत किशोर ने किसे ठेस पहुंचाई? बिहार चुनाव में महागठबंधन और NDA पर असर

 नई दिल्ली 14 नवंबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनावों के नतीजे महागठबंधन के लिए ही नहीं प्रशांत किशोर की नई नवेली पार्टी जनसूरज पार्टी (JSP) के लिए भी अप्रत्य़ाशित रहे.  238 सीटों चुनाव पर लड़ने वाली जेएसपी को एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हो सकी. पार्टी कr 236 सीटों पर जमानत जब्त हो गई.   फिर भी, JSP ने 35 सीटों पर वोटकटवा की भूमिका निभाई, जहां पार्टी का वोट शेयर विजेता के मार्जिन से ज्यादा रहा. खास यह रहा कि जनसुराज पार्टी ने दोनों ही गठबंधनों को नुकसान पहुंचाया. विपक्ष उन पर बीजेपी का एजेंट होने का आरोप लगाती रही है पर उनकी पार्टी के उम्मीदवारों ने दोनों ही गठबंधनों के प्रत्याशियों को नुकसान पहुंचाया. कभी मोदी-नीतीश के पोल स्ट्रैटेजिस्ट रहे किशोर ने 2022 में JSP लॉन्च कर 'बदलाव' का नारा दिया था. उन्होंने दावा किया था कि पार्टी या तो अर्श पर रहेगी या फर्श पर. जो शायद सही साबित हुआ.  चुनाव प्रचार के दौरान उनकी सभाओं में उमड़ने वाली भीड़ के बारे में कुछ का मानना था कि उनकी सवर्ण जातिगत पहचान के कारण वह बीजेपी के वोट काटेंगे, जबकि अन्य का तर्क था कि वह राज्य से पलायन जैसे मुद्दों पर बात करके सत्ता-विरोधी युवा वोटों को बांटेंगे. हलांकि निश्चित रूप से उनके चलते एक गठबंधन को ज्यादा फायदा मिला है. आइये देखते हैं कि वह कौन सा गठबंधन है जिसे प्रशांत किशोर की स्ट्रैटेजी से अधिक फायदा पहुंचा?  जिन 35 सीटों पर वोटकटवा बने उनमें किसका नुकसान ज्यादा हुआ? प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने जिन 238 सीटों पर चुनाव लड़ा, उनमें से 236 पर वह जमानत जब्त करा बैठी, लेकिन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि यह पार्टी कई सीटों पर खेल बिगाड़ने वाली भूमिका भी निभाई है.  35 विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी के वोट जीत के अंतर से अधिक थे. इनमें से एनडीए ने 19 सीटें जीतीं जबकि महागठबंधन को 14 सीटें मिलीं हैं. एआईएमआईएम और बीएसपी को भी प्रशांत किशोर के प्रत्याशियों के वोट काटने का फायदा एक-एक सीटों पर मिला है. पार्टी ने कुल 3.5 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं जो एआईएमआईएम, बीएसपी आदि के मुकाबले बेहतर है. इसके साथ कांग्रेस जैसी पुरानी पार्टी के मुकाबले भी जनसुराज का वोट परसेंटेज बेहतर ही कहा जाएगा. गौरतलब है कि काग्रेस ने 8.3 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं. हालांकि निश्चित रूप से यह कहना बहुत मुश्किल है कि जन सुराज को किसी सीट पर अंतर से अधिक वोट मिलने से किसे फायदा पहुंचा . क्योंकि यह जानना असंभव है कि जो वोट पीके की पार्टी को मिले वे वोट कहां जाते. पार्टी 115 सीटों पर तीसरे स्थान पर रही और एक सीट दूसरे स्थान पर रही. इसलिए प्रशांत किशोर को एक खेल बिगाड़ने वाले खिलाड़ी के रूप में देखा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी.राजनीतिक पारी की शुरूआत में हर प्लेयर करीब-करीब ऐसा ही पर्फार्मेंस देता है. किशोर की पार्टी को मिले वोटों के चलते जेडीयू को 10 सीटें पर जबकि बीजेपी को पांच पर फायदा मिला है. एलजेएपी-आरवी को तीन और आरएलएम को एक सीट मिली है. महागठबंधन में, आरजेडी को नौ सीटें मिलीं जबकि कांग्रेस को दो. सीपीएम, सीपीआईएमएल-एल और आईआईपी को प्रत्येक में एक-एक सीट मिली है.  'नौवीं फेल तेजस्वी' का नरेटिव बनाना प्रशांत किशोर ने अपने चुनाव अभियान के दौरान लगातार  तेजस्वी यादव को 'नौवीं फेल' का तंज कसकर और 'जंगल राज' का डर दिखाकर ऐसा माहौल बनाया जो आरजेडी की युवा अपील को ध्वस्त कर दिया. JSP का 3.5 प्रतिशत वोट शेयर वोटकटवा बनकर महागठबंधन को 10-15 सीटें खर्च करा गया. किशोर, जो पूर्व स्ट्रैटेजिस्ट हैं, ने यह नरेटिव सोशल मीडिया और रैलियों में चलाकर आरजेडी की छवि को 'अशिक्षित जंगल राज' का प्रतीक बना दिया.  किशोर ने तेजस्वी की शिक्षा पर सीधा हमला बोला. तेजस्वी ने 2015 में उपमुख्यमंत्री बनने के बाद अपनी नौवीं कक्षा की असफलता को 'सामान्य' बताया था, लेकिन किशोर ने इसे 'अक्षमता' का प्रतीक बनाया. अक्टूबर 2025 की रैलियों में किशोर ने कहा, नौवीं फेल नेता बिहार को नौकरी देंगे? पहले खुद पढ़ लो. युवा वोटर (60% आबादी), जो तेजस्वी को 'नई पीढ़ी' मानते थे, ने इसे 'अपमानजनक' पाया . यह नरेटिव आरजेडी के युवा वोट शेयर को 5% गिरा दिया. तेजस्वी ने जवाब दिया, शिक्षा डिग्री से नहीं, काम से आती है. लेकिन किशोर का तीर लग चुका था. यह प्रहार आरजेडी की 'नौकरी देंगे' अपील को फीका कर गया, क्योंकि बेरोजगारी (14.5%) पर युवा असंतोष JSP की ओर गया. किशोर ने तेजस्वी को 'लालू के जंगल राज' का वारिस ठहराकर डर का माहौल बनाया. 1990s के लालू काल की अपराध, भ्रष्टाचार और आर्थिक ठहराव की यादें ताजा कीं. किशोर ने रैलियों में कहा, तेजस्वी का राज लौटेगा. बीजेपी का विरोध सीमित लेवल पर करना प्रशांत किशोर ने बीजेपी का विरोध 'सीमित स्तर' पर रखा,  किशोर का फोकस मुख्य रूप से तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार पर रहा. किशोर ने बीजेपी नेता डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी पर तमाम गंभीर आरोप लगाए. पर मोदी और शाह के खिलाफ वो खुलकर सामने नहीं आ सके. यह रणनीति एनडीए को सुरक्षित रखते हुए महागठबंधन के खिलाफ नरेटिव बनाने जैसा था. किशोर की JSP ने 'बदलाव' का नारा दिया.बेरोजगारी, प्रवासन, शिक्षा सुधार पर उनकी बातें जिन युवकों ने सुनीं उन्होंने आरजेडी-कांग्रेस की बजाए जनसुराज को वोट देना बेहतर समझा. जाहिर है कि बीजेपी से नाराजगी वाले वोट महागठबंधन को जाते पर वो दो भाग में बंट गए. बेरोजगारी , पलायन आदि के मुद्दे पर बीजेपी से नाराज कुझ वोटर्स के जनसुराज की ओर जाने से स्पष्ट रूप से नुकसान महागठबंधन का ही हुआ.  नीतीश को तेजस्वी पर तरजीह देना महागठबंधन की हुई दुर्गति के लिए एक प्रमुख सूत्रधार प्रशांत किशोर (पीके) साबित हुए, जिनकी जनसूरज पार्टी (JSP) ने किशोर ने तेजस्वी यादव को 'नौवीं फेल' और 'जंगल राज का वारिस' ठहराकर नीतीश कुमार के 'सुशासन' को चमकाया.चुनाव प्रचार के दौरान एक बार किसी पत्रकार ने प्रशांत किशोर से पूछा कि आपको नीतीश और तेजस्वी में से किसी एक को चुनना हो तो किसे चुनेंगे? किशोर ने नीतीश कुमार पर अपनी मुहर लगाई थी. जाहिर है कि इसका फायदा एनडीए को मिला.

देश में Zen-G को लेकर तनाव: प्रदर्शनकारियों और पुलिस में हुई पत्थरबाज़ी

मेक्सिको सिटी मेक्सिको सिटी की सड़कों पर एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा। हजारों युवा प्रदर्शनकारी गलियों और चौकों में उतर आए और अपराध तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने गुस्से का इज़हार किया। इस आंदोलन में सिर्फ युवा ही नहीं, बल्कि विभिन्न उम्र के लोग भी शामिल हुए, जिन्होंने अपने-अपने मुद्दों के लिए आवाज उठाई। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि प्रदर्शन का एक हिस्सा चीन समर्थक राष्ट्रपति के खिलाफ भी था। पुलिस से भिड़ंत और चोटें प्रदर्शन तेज होने के बाद हिंसक मोड़ भी लिया। प्रदर्शनकारियों ने पत्थर, डंडे और चेन के सहारे पुलिस पर हमला किया। मेक्सिको सिटी के सुरक्षा सचिव पाब्लो वैजेक के अनुसार, इस झड़प में लगभग 120 लोग घायल हुए, जिनमें 100 पुलिसकर्मी शामिल हैं। इस हिंसा में 20 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। एक 29 वर्षीय व्यवसायी ने कहा कि उन्हें अधिक सुरक्षा की आवश्यकता महसूस हो रही है। वहीं, एक 43 वर्षीय महिला फिजिशियन ने प्रदर्शन में शामिल होकर सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए अधिक फंड की मांग की। उन्होंने कहा कि आज डॉक्टरों को मार दिया जाता है और इसके लिए कोई जवाबदेही नहीं होती। हत्याओं का डर और सामाजिक गुस्सा हाल के दिनों में मेक्सिको में कई हाई-प्रोफाइल हत्याओं ने जनता को हिला कर रख दिया है। इनमें पश्चिमी राज्य मिचोआकैन के मेयर की हत्या भी शामिल है। प्रदर्शन में शामिल कुछ लोग उनके समर्थन में भी आए। एक नागरिक, रोजा मारिया एविला ने कहा, “यह राज्य मर रहा है। मेयर को इसलिए मारा गया क्योंकि वह युवा अपराधियों से निपटने के लिए अधिकारियों को भेजता था। वह अपराधियों का मुकाबला करने की हिम्मत रखते थे।” प्रदर्शन की विविधता शनिवार को हुए इस विरोध प्रदर्शन में विभिन्न उम्र और पेशों के लोग शामिल थे। युवा प्रदर्शनकारियों ने ऊर्जा और गुस्से का प्रदर्शन किया, जबकि अनुभवी नागरिकों ने अपने अनुभव और समाजिक मुद्दों को उठाया। इस तरह यह प्रदर्शन केवल जेन-जी का आंदोलन नहीं बल्कि एक व्यापक सामाजिक चेतना का प्रतीक बन गया।

टीम इंडिया में हलचल: शुभमन बाहर, चौथे नंबर पर किसे मिलेगी जगह?

 गुवाहाटी साउथ अफ्रीका के खिलाफ कोलकाता टेस्ट मैच के दौरान भारतीय कप्तान शुभमन गिल को नेक इंजरी हो गई थी. शुभमन भारत की पहली पारी में सिर्फ गेंद खेलकर रिटायर्ड हर्ट हो गए थे. वहीं दूसरी पारी में शुभमन बैटिंग नहीं कर पाए थे. शुभमन को हॉस्पिटल में एडमिट होना पड़ा था. भारतीय टीम को शुभमन की अनुपस्थिति काफी खली. भारतीय टीम 124 रनों का आसान सा टारगेट भी हासिल नहीं कर पाई और उसे 30 रनों से हार का सामना करना पड़ा. कप्तान शुभमन गिल को अब अस्पताल से तो छुट्टी मिल गई है, लेकिन उनकी फिटनेस को लेकर स्थिति अभी भी साफ नहीं है. सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि शुभमन को लेकर अगले 24 घंटों में फैसला लिया जाएगा, बोर्ड शुभमन के मामले में कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता और डॉक्टरों की सलाह के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा. सूत्रों ने बताया कि फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि शुभमन दूसरे टेस्ट में खेल पाएंगे या नहीं, लेकिन अगली मेडिकल स्कैन रिपोर्ट मिलने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी, यदि जरूरत पड़ी तो गिल को पूरा आराम और रिकवरी का समय दिया जाएगा. भारत और साउथ अफ्रीका के बीच टेस्ट सीरीज का दूसरा एवं आखिरी मुकाबला 22 नवंबर से गुवाहाटी के बरसापारा क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाना है. अगर शुभमन गिल गुवाहाटी टेस्ट से बाहर होते हैं तो ऋषभ पंत भारतीय टीम की कप्तानी संभालेंगे. कोलकाता टेस्ट मैच में शुभमन की मौजूदगी में ऋषभ पंत ने ही स्टैंडिंग कैप्टन  के रूप में दिखे थे. …तो इन दोनों में से एक को मिलेगा मौका! अगर शुभमन गिल बाहर होते हैं, तो उनकी जगह चौथे नंबर पर कौन बल्लेबाजी करेगा? ये सवाल सबके मन में है… शुभमन की जगह लेने के लिए साई सुदर्शन और देवदत्त पडिक्कल तगड़े दावेदार दिख रहे हैं. दोनों में से किसी एक को गुवाहाटी टेस्ट मैच में चौथे नंबर पर आजमाया जा सकता है. चयन समिति पर पहले से ही ये सवाल उठ रहे हैं कि वो बाएं हाथ के बल्लेबाजों को तवज्जो दे रही है, लेकिन अब इसे बदला नहीं जा सकता. साई सुदर्शन ने 5 टेस्ट मैचों में 30.33 की औसत से 273 रन बनाए हैं, जिसमें दो अर्धशतक शामिल रहे. वहीं पडिक्कल ने भी 3 पारियों में 30 के एवरेज और 1 अर्धशतक की मदद से 90 रन बनाए. साई सुदर्शन और देवदत्त पडिक्कल के टेस्ट रिकॉर्ड लगभग समान हैं, इसलिए चयन का आधार दाएं हाथ के स्पिनर्स के खिलाफ उनका प्रदर्शन हो सकता है.  बता दें कि कोलकात टेस्ट मैच में ऑफ-स्पिनर साइमन हार्मर ने कुल 8 विकेट लिए थे और साउथ अफ्रीकी टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई थी. साई सुदर्शन दाएं हाथ के स्पिनर्स के खिलाफ 2 बार आउट हुए हैं. वो दोनों बार रोस्टन चेज का शिकार बने. वही देवदत्त पडिक्कल भी एक मौके पर राइट आर्म स्पिनर (शोएब बशीर) का शिकार बन चुके हैं. यानी यहां भी कोई बड़ा अंतर नहीं है. आंकड़े निर्णायक नहीं हैं, लेकिन इंग्लैंड और वेस्टइंडीज सीरीज में टीम मैनेजमेंट ने साई सुदर्शन पर जो भरोसा दिखाया है, उसके आधार पर वह गुवाहाटी टेस्ट मैच में शुभमन गिल की जगह लेने के सबसे बड़े दावेदार दिखाई देते हैं.

अनिल विज ने महबूबा मुफ्ती पर साधा निशाना, उग्रवाद को बढ़ावा देने का आरोप

अंबाला बीते दिन दिए महबूबा मुफ्ती के बयान पर 'गब्बर' हमलावर हो गए हैं। दरअसल महबूबा मुफ्ती ने बयान दिया था कि लाल किले पर जो धमाका हुआ है यह कश्मीर की आवाज है। इस पर हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने महबूबा मुफ्ती पर जमकर हमला बोलते हुए कहा कि अगर महबूबा मुफ्ती मुबारक लाल किले पर हुए आतंकी हमले पर इस तरह का बयान दे रही है तो वह उग्रवाद का समर्थन कर रही है। विज ने कहा ति इन्होंने पहले भी उग्रवाद का समर्थन किया है इसलिए वास्तव में यह उग्रवाद की मां है, जो इतनी बड़ी घटना को कश्मीर की आवाज बता रही है। विज ने भड़कते हुए कहा कि इसका मतलब यह कश्मीर की आवाज सुनाने के लिए देश में जगह-जगह बम विस्फोट करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि मोहम्मद महबूबा मुफ्ती पूरी तरह से इस देश की भावनाओं के विरुद्ध बात कर रही है । 

DGP ने आतंकवाद को बताया सनक, कहा- सीधे आम लोगों से मुकाबले की क्षमता नहीं

चंडीगढ़  दिल्ली ब्लास्ट पर हरियाणा के डीजीपी ओपी सिंह ने आतंकवाद को लेकर अपने एक्स अकाउंट पर एक लंबी चौड़ी पोस्ट की है, जिसमें उन्होंने आतंकवाद को सनक बताया है। उन्होंने पोस्ट में लिखा है कि आतंकियों की कोई औकात नहीं, वो आम लोगों को टारगेट करते हैं। डीजीपी ओपी  सिंह ने अपनी पोस्ट में लिखा कि जन-सुरक्षा एक कभी न थमने वाला काम है।  ऊपर से ये ऑक्सीजन की तरह है। थोड़ा भी कम होने पर दम घुटने लगता है। खतरा हर तरफ से है। सनकी और चालक लोग शिकार में लगे रहते हैं। अपराध तंत्र भी उनको नाथने में लगा रहता है। वो कभी पहले धरे जाते हैं, कभी बाद में। उन्होंने लिखा कि आतंकवाद एक अलग ही लेवल का सनक है। सिरफिरे अपने औने-पौने मनवाने के फेर में लगे रहते हैं। सीधी लड़ाई की औकात नहीं है। सो, आम लोगों को टारगेट करते हैं। मकसद होता है दहशत फैलाना। इनको रोकने के लिए राज्य पुलिस से लेकर केंद्रीय एजेंसियों तक का एक व्यापक तंत्र है। दिन-रात काम करता है।  हमने NCR क्षेत्र के अपने एंटी-टेररिज्म तंत्र को और भी मजबूत किया: डीजीपी  डीजीपी ने कहा कि कल ही फरीदाबाद में मैंने एक अन्तर्राजीय बैठक की। केंद्रीय खुफिया एजेंसी, दिल्ली पुलिस और यूपी के एंटी-टेररिज्म में लगे पुलिस अधिकारी शामिल हुए। हमने सूचनाएं एवं स्टेटस अपडेट साझा किया। सुरक्षा एजेंसियां जब मिलकर काम करती है तो एक और एक ग्यारह होता है। हमने हरियाणा के एनसीआर क्षेत्र के अपने एंटी-टेररिज्म तंत्र को और भी मजबूत किया है। ये सूचनाएं इकट्ठी करेगी, अनुसंधान करेगी और आंतकवादी गतिविधियों के संदिग्धों के खिलाफ लगातार अभियान चलाएगी। लेकिन आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में सबसे कारगर हथियार है अलर्ट आम नागरिक। जैसे ही कोई संदिग्ध आदमी, गतिविधि या वस्तु मिले, 112 पर फोन घुमायें या स्थानीय पुलिस को बतायें। इससे आतंकियों को छिपने की जगह नहीं मिलेगी, उन्हें प्लानिंग और ऑपरेशन के लिए स्पेस नहीं मिलेगा और समय रहते उनके मंसूबों को निष्फल किया जा सकेगा।  आतंकवादी को सिर्फ जहाज के टेक-ऑफ की ट्रेनिंगः ओपी सिंह ओपी सिंह ने कहा कि जैसे कि अमेरिका में वर्ल्ड ट्रेड टावर पर हमले से पहले अलकायदा के आतंकवादी सिर्फ जहाज के टेक-ऑफ की ट्रेनिंग ले रहे थे। ट्रेनर अगर इसे नोट करता कि इनकी रुचि लैंडिंग में नहीं है और स्थानीय पुलिस को बता देता तो उनकी कम से कम उनकी ये योजना सिरे नहीं चढ़ती। इजराइल के दुश्मन अरब देशों से घिरे होने के बावजूद उनकी पुलिस भारी संख्या में आतंकी हमले को विफल कर देती है। एक कारण ये भी है कि वहां के नागरिक सतर्क रहते हैं। कुछ भी संदिग्ध लगा तो फौरन पुलिस को खबर कर देते हैं।  लोगों से की अपील उन्होंने कहा कि  करनाल में कुछ दिनों पहले ही एक जागरूक होटलकर्मी ने संदिग्ध पहचान पत्र के आधार पर कमरे बुक कराने वाले के बारे में पुलिस को इत्तला दी। रात भर के सघन अंतर्ज़िला ऑपरेशन के बाद उसे धर दबोचा गया। पूछताछ के बाद मामला कुछ और निकला लेकिन एक सजग होटलकर्मी ने अपना काम तो कर ही दिया था। आप भी आतंकवाद के खिलाफ पुलिस के आंख और कान बनें। संदिग्ध व्यक्ति, गतिविधि और वस्तु के बारे में पुलिस को 112 पर फौरन बतायें।   

अब पेंशनर्स को नहीं लगानी होगी लाइन: UIDAI ने बताया डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट बनाने का आसान तरीका

नई दिल्ली हर साल नवंबर आते ही पेंशनर्स के लिए लाइफ सर्टिफिकेट जमा करना एक चुनौती बन जाता है। पहले बुजुर्गों को अपने बैंक, सरकारी दफ्तर या पेंशन विभाग के चक्कर लगाने पड़ते थे। लंबी लाइनें, कागजी दस्तावेजों की जद्दोजहद और यात्रा की कठिनाई बुजुर्गों के लिए थकाने वाली होती थी। लेकिन अब UIDAI ने इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और घर बैठे करने योग्य बना दिया है। अब पेंशनर्स सिर्फ अपने मोबाइल फोन का उपयोग करके घर बैठे डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (Digital Life Certificate – DLC) तैयार कर सकते हैं। दो ऐप से आसान होगा पूरा प्रोसेस UIDAI ने बताया कि डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट तैयार करने के लिए दो मोबाइल ऐप्स की जरूरत होती है: ➤ AadhaarFaceRD ऐप: फेस ऑथेंटिकेशन के लिए ➤ JeevanPramaan ऐप: लाइफ सर्टिफिकेट बनाने के लिए ➤ ये दोनों ऐप्स एंड्रॉइड मोबाइल में आसानी से डाउनलोड किए जा सकते हैं। प्रक्रिया इतनी सरल है कि बुजुर्ग इसे स्वयं कर सकते हैं या घर के किसी सदस्य की हल्की मदद से पूरा कर सकते हैं। फेस ऑथेंटिकेशन सबसे पहले AadhaarFaceRD ऐप डाउनलोड करना होता है। इस ऐप की मदद से आपका चेहरा आधार डेटाबेस से मिलाया जाता है और आपकी पहचान की पुष्टि की जाती है। यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें OTP या फिंगरप्रिंट की जरूरत नहीं पड़ती। बस मोबाइल कैमरा की मदद से चेहरे को स्कैन करना होता है। JeevanPramaan ऐप में जानकारी भरें फेस ऑथेंटिकेशन के बाद पेंशनर्स को JeevanPramaan ऐप खोलना होता है। यहां उन्हें कुछ बुनियादी जानकारी भरनी होती है: ➤ आधार नंबर ➤ पेंशन का प्रकार ➤ बैंक खाता विवरण ➤ मोबाइल नंबर इसके बाद उसी मोबाइल नंबर पर एक OTP आएगा। इसे दर्ज करने के बाद ऐप आपका चेहरा एक बार फिर स्कैन करेगा। जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होती है, ऐप डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जेनरेट कर देता है। सबमिट बटन दबाने के बाद प्रमाण पत्र तैयार जब पेंशनर्स सबमिट बटन दबाते हैं, तो उनका डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट सरकारी सिस्टम में जमा हो जाता है। साथ ही इसे मोबाइल और ईमेल पर भी प्राप्त किया जा सकता है। इस पूरी प्रक्रिया का फायदा: ➤ 100% डिजिटल और पेपरलेस ➤ किसी लाइन में खड़े होने की जरूरत नहीं ➤ बैंक या सरकारी दफ्तर जाने की आवश्यकता नहीं ➤ बुजुर्ग भी आसानी से घर बैठे लाइफ सर्टिफिकेट तैयार कर सकते हैं  

मंजू बनीं जिप चेयरपर्सन, भूपेंद्र हुड्डा को हराने के बाद मां बनने की खुशी जताई

चंडीगढ़  पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सामने गढ़ी-सांपला-किलोई हलके से विधानसभा चुनान लड़ीं मंजू हुड्डा मां बनने वाली हैं। उन्होंने बेबी बंप के साथ सोशल मीडिया पर फोटो शेयर की। जिसमें पति राजेश हुड्डा के साथ इमोशनल अंदाज में दिख रही हैं।  मंजू हुड्डा की शादी कोरोना कॉल के दौरान 2020 में गांव धामड़ निवासी राजेश हुड्डा के साथ हुई। इसके बाद नवंबर 2022 में जिला परिषद का चुनाव लड़ा और 3,281 वोटों से जीत गईं। फिर भाजपा जॉइन की और 14 में से 10 पार्षदों के समर्थन से 27 दिसंबर 2022 को जिला परिषद की चेयरपर्सन बनीं। जब लगा मां बनने के लिए तैयार तो शुरू की प्लानिंग मंजू हुड्डा ने  कहा कि शादी के 4 साल बाद जब लगा कि अब ऑफिस और घर का काम एक साथ मैनेज हो सकता है, तो मां बनने के बारे में सोचा। जब उन्हें प्रेग्नेंसी का पता चला तो खुशी का ठिकाना नहीं था। पति राजेश के चेहरे पर अलग ही खुशी थी। गर्भावस्था के दौरान राजनीतिक कार्यक्रमों में जाना कम किया मंजू हुड्डा ने बताया कि प्रेग्नेंसी और मदरहुड का सफर इंजॉय कर रही हैं। भागदौड़ कुछ कम की है। राजनीतिक कार्यक्रमों में जाना भी कम किया। परिवार के साथ समय अधिक बिताना शुरू कर दिया। ऑफिस, राजनीति और परिवार को मैनेज करते हुए मां बनने के इन पलों को भी संभालने का पूरा प्रयास किया है। गर्भावस्था से संबंधित पढ़नी शुरू की किताब मंजू हुड्डा ने बताया कि प्रेग्नेंसी के बाद से उन्होंने कुछ अच्छी किताबें पढ़ी हैं ताकि गर्भ में पल रहे बच्चे पर अच्छा असर पड़े। अच्छे संस्कार डालने के लिए किताब पढ़ने के साथ ही बड़े बुजुर्गों के अनुसार काम कर रही हैं। धार्मिक किताब भी पढ़ रही हैं, ताकि मन शांत रहे। गुरुकुल में पढ़ने का हो रहा फायदा मंजू हुड्डा ने कहा कि गुरुकुल में पढ़ाई की है तो उसका फायदा मिला है। गर्भावस्था के दौरान मन को शांत करने के लिए योग और मेडिटेशन का सहारा ले रही हैं। गुरुकुल में भी मेडिटेशन और योग करती थीं, तो अब रोजाना सुबह योग जरूर करती हैं, ताकि फिट रह सके। पूर्व सीएम के सामने 37 हजार वोट लिए मंजू हुड्डा ने भाजपा के टिकट पर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ गढ़ी सांपला किलोई हलके से विधानसभा 2024 का चुनाव लड़ा। चुनाव में मंजू हुड्डा को 37 हजार 74 वोट मिले। भूपेंद्र हुड्‌डा को 1 लाख 8 हजार 539 वोट मिले थे। जीत का अंतर 71 हजार 465 वोट रहा। यह भूपेंद्र हुड्डा का गढ़ माना जाता है और प्रचार के लिए भी कम ही आते हैं।