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औषधीय फसलों की खेती में मध्यप्रदेश सबसे आगे, ईसबगोल और अश्वगंधा का उत्पादन बढ़ा

औषधीय फसलों के उत्पादन में देश में अग्रणी राज्य मध्यप्रदेश  46 हजार हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में होती ईसबगोल, अश्वगंधा की खेती भोपाल  मध्यप्रदेश औषधीय फसलों के उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। प्रदेश में 46 हजार 837 हैक्टेयर क्षेत्र में औषधीय फसलों ईसबगोल, सफेद मूसली, कोलियस व अन्य फसलों की खेती की जा रही है। वर्ष 2024-25 में प्रदेश में लगभग सवा लाख मीट्रकि टन औषधीय फसलों का उत्पादन  हुआ है। देश और विदेश में औषधीय फसलों की बढ़ती मांग के कारण किसानों का भी आकर्षण इन फसलों के उत्पादन की ओर बढ़ा है। प्रदेश में वर्ष 2022-23 में 44 हजार 324 हैक्टेयर में औषधीय फसलों की बोनी की गई थी । जो 2024-25 में बढ़कर 46 हजार 837 हैक्टेयर हो गया यानिकी 2 हजार 512 हैक्टेयर की वृद्धि हुई है। इन फसलों का वर्ष 2021-22 में उत्पादन   एक लाख 16 हजार 848 मीट्रिक टन था जो 2024-25 में बढ़कर एक लाख 24 हजार 199 मीट्रिक टन हो गया है। उल्लेखनीय है कि भारत में औषधीय और सुगंधित फसलों के उत्पादन में मध्यप्रदेश की सर्वाधिक भागीदारी है। एक अनुमान के अनुसार देश में औषधीय फसलों का 44 प्रतिशत हिस्सा मध्यप्रदेश में उत्पादित होता है। राज्य सरकार औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को अनुदान और अन्य प्रोत्साहन दे रही है। औषधीय पौधों की खेती से किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार के अवसर पैदा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए 20 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक का अनुदान प्रदान करती है। सरकार पारंपरिक फसलों के अलावा औषधीय पौधों जैसी वाणिज्यिक फसलों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे किसानों को उनकी उपज का अच्छा मूल्य मिल सके। औषधीय पौधों की खेती और संग्रह से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं।  मध्यप्रदेश में प्रमुख फसलें अश्वगंधा, सफेद मूसली, गिलोय, तुलसी और कोलियस जैसी कई औषधीय फसलों का उत्पादन होता है। प्रदेश में 13 हजार हैक्टेयर में ईसवगोल, 6 हजार 626 हैक्टेयर अश्वगंधा, 2 हजार 403 हैक्टेयर में सफेद मूसली, 974 हैक्टेयर में कोलियस तथा 23 हजार 831 हैक्टेयर में अन्य औषधी फसल की बोनी की गई है। मध्यप्रदेश सरकार राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूह का औषधीय पौधों की खेती आकर्षित कर रही है। राज्य सरकार द्वारा डाबर, वैद्यनाथ जैसी आयुर्वेद कम्पनियों, संजीवनी क्लिनिक में विंध्यवैली जैसे ब्रांड के माध्यम से औषधीय उत्पादन को बाजार मुहैया करा रही है।  

एयर इंडिया की चीन वापसी, 6 साल बाद उड़ान भरेगी मैत्री का संदेश

नईदिल्ली  भारत और चीन के बीच सीधी उड़ान शुरू होने जा रही है. देश की दिग्गज एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया (Air India) ने सोमवार को कहा कि वो लगभग छह साल बाद फरवरी 2026 से नई दिल्ली से चीन के लिए उड़ानें फिर से शुरू करेगी और अगले साल के अंत में मुंबई-शंघाई मार्ग शुरू करने की योजना बना रही है. एयर इंडिया ने शंघाई के लिए अपनी फ्लाइट की जानकारी साझा करते हुए बताया कि सभी आवश्यक मंजूरी के मिल जाने के बाद 1 फरवरी 2026 से इनकी शुरुआत की जाएगी.  48वां अंतर्राष्ट्रीय डेस्टिनेशन शंघाई, एयर इंडिया ग्रुप द्वारा सेवा प्रदान करने वाला 48वा अंतर्राष्ट्रीय डेस्टिनेशन है. ये भारत में किसी भी अन्य एयरलाइन की तुलना में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक यात्रियों को ट्रेवल करने की सर्विस देता है. एयर इंडिया अपने ट्विन-aisle​बोइंग 787-8 विमान का इस्तेमाल करके दिल्ली और शंघाई के बीच सप्ताह में चार बार उड़ान भरेगी, जिसमें बिजनेस क्लास में 18 फ्लैट बेड और इकोनॉमी क्लास में 238 सीटें हैं.  आर्थिक महाशक्तियों के बीच एक सेतु' एयर इंडिया के CEO और MD कैंपबेल विल्सन ने कहा कि हमारी दिल्ली-शंघाई सेवाओं की बहाली एक रूट लॉन्च से कहीं अधिक है. ये दो महान, प्राचीन सभ्यताओं और आधुनिक आर्थिक महाशक्तियों के बीच एक सेतु है. एयर इंडिया में हमें दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण हवाई गलियारों में से एक को फिर से जोड़ने पर खुशी है. 

बीजेपी और जेडीयू में मंत्रिपद साझा करने को लेकर चर्चा, पुराने फार्मूले को किया जाएगा बदल

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद सरकार बनाने की कवायद तेज हो गई है। चुनाव से पहले बीजेपी और जेडीयू ने बराबर सीटों (101) पर अपने प्रत्याशी उतारने का फैसला किया था। ऐसे में दोनों ही दलों को बराबर मंत्रिपद भी मिल सकते हैं। सरकार गठन के फार्मूले पर बात करें तो चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) को दो मंत्रिपद और जीतनराम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) को 01 वह उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा पार्टी को एक मंत्रिपद दिया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि एनडीए के घटक दलों के बीच सरकार बनाने को लेकर बातचीत चल रही है और कई पहले के मंत्रियों के पोर्टफोलियो बदलने पर भी विचार हो रहा है।  सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को बीजेपी के विधायक दल की बैठक संभावित है। बता दें कि 243 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी ने अकेले 89 सीटें जीती हैं। दूसरे नंबर पर जेडीयू के खाते में 85 सीटें गई हैं। एलजेपी (आरवी) को 19, HAM (S) को पांच और आरएमएम को चार सीटें मिली हैं। 2020 की बात करें तो बीजेपी को 74 सीटें मिली थीं और जेडीयूके पास 43 सीटें थीं। वहीं सरकार में बीजेपी के 22 और जेडीयू के 12 मंत्री थे। बता दें कि बिहार की मौजूदा विधानसबा का कार्यकाल 22 नवंबर को खत्म हो रहा है। ऐसे मे बुधवार या फिर गुरुवार को ही शपथ ग्रहण हो सकता है। बीजेपी सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को बिहार चुनाव परिणाम आने के बाद प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और महासचिव बीएल संतोष के बीच संक्षिप्त बैठक हुई थी जिसमें सरकार बनाने पर चर्चा की गई थी। जानकारी के मुताबिक नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। वहीं उपमुख्यमंत्रियों को लेकर कोई फैसला नहीं किया गया है। मौजूदा उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भ्रष्टाचारा के आरोपों और फिर नामांकन पेपर में गड़बड़ी के बाद सम्राट चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनाया जाएगा या नहीं, इसपर अभी असमंजस की स्थिति है। बता दें कि गांधी मैदान में बिहार की नई सरकार का शपथ ग्रहण कार्यक्रम हो सकता है। 2015 में नीतीश कुमार ने गांधी मैदान में ही शपथ ली थी। 17 से 20 नवंबर तक गांधी मैदान को आम लोगों के लिए बंद किया गया है। माना जा रहा है कि गांधी मैदान में बड़ी संख्या में लोगों के बैठने की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा शपथ ग्रहण के लिए भव्य मंच तैयार किया जाएगा।

High Court का फैसला: मानसिक क्रूरता के चलते पत्नी को तलाक देने की अनुमति

बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बहुत ही अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पत्नी का पति से शारीरिक संबंध न बनाने को मानसिक क्रूरता माना है। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए पति की दायर अपील पर तलाक का आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि पति को शारीरिक संबंध बनाने से रोकना उसके साथ मानसिक क्रूरता है। जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस एके प्रसाद की डिवीजन बेंच ने कहा कि 11 साल अलगाव और पत्नी की शारीरिक संबंध के लिए ईच्छा न होना मानसिक क्रूरता मानी जाएगी। विवाह के एक महीने बाद ही पत्नी मायके चली गई थी। यह था पति और पत्नी के बीच पूरा मामला दरअसल अंबिकापुर के शख्स की शादी 30 मई 2009 को रायपुर की महिला के साथ हुई थी। पति का आरोप है कि शादी के एक महीने बाद ही उसे पत्नी मायके चली गई। जिस पर उन्होंने फैमिली कोर्ट में तलाक की मांग करते हुए आवेदन दिया। पत्नी पर आरोप लगाया कि वह वैवाहिक दायित्व निभाने से इनकार कर रही है। महिला ने पति को यहां तक धमकी दे डाली कि अगर  वो शारीरिक संबंध बनाएगा तो अपना जीवन खत्म लेगी। पति की कई कोशिशों के बाद भी पत्नी मायके से वापस नहीं लौटी।  केस दर्ज होने के बाद भी उसने कभी पति से संपर्क नहीं किया। महिला ने पति पर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। फैमिली कोर्ट की सुनवाई के दौरान पत्नी ने पति के आरोपों को निराधार बताया। कहा कि उसका पति एक साध्वी का भक्त हैं और वो वैवाहिक संबंधों में रुचि नहीं रखते ।  आरोप लगाया कि पति बच्चे नहीं चाहता था। पत्नी ने पहले वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए अर्जी भी लगाई, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया। फैमिली कोर्ट ने पति की अर्जी को खारिज कर दिया। पति ने फैमिली कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी पति फैमिली कोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं हुआ और हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती दी। कहा कि फैमिली कोर्ट ने उनके तर्कों को सुने बगैर ही तलाक की अर्जी खारिज की है। हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए पाया कि पति-पत्नी 11 सालों से अलग रह रहे हैं। पत्नी ने माना कि वह अब पति के साथ वैवाहिक जीवन जारी नहीं रखना चाहती। हाईकोर्ट ने अलगाव के लंबे अंतराल को मानसिक क्रूरता माना और पति की तलाक की अपील को स्वीकार किया।

बिल्डिंग का बड़ा खर्च, लेकिन मीटिंग हॉल नहीं बना; अब अतिरिक्त 10 करोड़ से निर्माण होगा

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी में खराब इंजीनियरिंग का एक और नमूना सामने आया है। लिंक रोड नंबर-1 पर भोपाल नगर निगम ने 5 एकड़ में करीब 40 करोड़ रुपए से 8 मंजिला बिल्डिंग तो बना दी, लेकिन जिम्मेदार मीटिंग हॉल बनाना भूल गए।  यह एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि ऐसे 2 प्रोजेक्ट और हैं, जिनमें खराब इंजीनियरिंग के नमूने सामने आ चुके हैं। 90 डिग्री एंगल वाले ऐशबाग ब्रिज को लेकर पहले ही भोपाल सुर्खियों में रह चुका है। फिर मेट्रो के 2 स्टेशन भी सुर्खियां बटोर चुके हैं। इन नमूनों को सिलसिलेवार जानिए…। सबसे पहले निगम मुख्यालय का ताजा मामला लिंक रोड नंबर-1 पर ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर नगर निगम का नया मुख्यालय भवन बना है। इसके बाद 10 से ज्यादा लोकेशन पर बने ऑफिस एक ही छत पर आ जाएंगे। करीब 40 करोड़ रुपए से बन रही बिल्डिंग में सिर्फ सोलर पैनल लग रहे हैं तो गार्डनिंग, फोन, इंटरनेट केबल और कुछ फ्लोर पर फर्नीचर का काम चल रहा है। कई मायनों में बिल्डिंग खास है। जब तक नया हॉल नहीं बनेगा, तब तक आईएसबीटी में होंगी बैठकें इन सब अच्छी बातों में एक बड़ी गलती भी हो गई। इस बिल्डिंग में परिषद का मीटिंग हॉल ही नहीं बना है। इसलिए 10 करोड़ रुपए खर्च कर परिषद हॉल बनाने का प्लान है, लेकिन जब तक यह नहीं बन जाता, तब तक आईएसबीटी में ही परिषद की बैठकें होंगी। पड़ताल की गई तो पता चला कि जब बिल्डिंग बनी थी, तब मीटिंग हॉल ही उसमें शामिल नहीं था। जिम्मेदारों का कहना है कि शुरुआत में बिल्डिंग की कुल लागत 22 करोड़ रुपए थी, लेकिन बाद में लागत बढ़ती गई। अब यह 40 करोड़ में आ गई। हॉल में ही परिषद की बैठक होती है। स्ट्रक्चरल इंजीनियर सुयश कुलश्रेष्ठ का कहना है कि जब भी कोई निर्माण कार्य कराया जाता है तो उसकी डिजाइन समेत कई पैमानों पर नजर रखी जाती है। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया होती है। नगर निगम अपनी ही बिल्डिंग में मीटिंग हॉल जैसा निर्माण करना ही भूल गया। अब मीटिंग हॉल को लेकर दूसरी बिल्डिंग बनेगी, लेकिन पैसा तो जनता का ही लगेगा, जो टैक्स के रूप में वसूला गया है। एक बिल्डिंग, 3 कमिश्नर बिल्डिंग की पूरी डिजाइन निगम कमिश्नर केवीएस चौधरी कोलसानी ने बनवाई थी। उनकी मौजूदगी में बिल्डिंग का आधे से ज्यादा काम हुआ, जबकि बाकी काम हरेंद्र नारायण के समय हुआ। अब संस्कृति जैन के समय फिनिशिंग हो रही है। 40% बिजली उत्पादन को लेकर बिगाड़ा फ्रंट मुख्यालय के ठीक सामने परिसर में ही पार्किंग बनाई गई है, जिस पर शेड है। इन्हीं शेड के ऊपर सोलर पैनल लगा दिए गए, ताकि 40 प्रतिशत बिजली निगम खुद ही बना सके, लेकिन ये ऐसी जगह लगाए गए हैं, जिनसे पूरी बिल्डिंग ही छिप गई, यानी बिल्डिंग का फ्रंट ही बदल गया है। इस मामले में निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी का कहना है कि डिजाइन गलत नहीं है। उस समय आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। हालांकि, इसके बाद इस्टीमेट कॉस्ट बढ़ी है। यह भी सही है कि पुरानी डिजाइन में परिषद हॉल नहीं था। अभी और जमीन लेकर पास में ही परिषद का हॉल बनवा रहे हैं, ताकि यहां बैठकें हो सकें। पार्किंग की जगह पर आपत्ति जताई है। इस वजह से फ्रंट ढंक गया है। सोलर पैनल छत पर लगाए जा सकते हैं।

जंगल सफारी की तैयारियां जोरों पर, सीएम सैनी करेंगे वन्य जीवन का अवलोकन

कलेसर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 18 नवंबर को कलेसर नेशनल पार्क में नौ किलोमीटर तक जंगल सफारी का लुत्फ उठाएंगे। जंगल सफारी के ट्रैक को समतल कर दिया गया है। सफारी के दौरान वे दूरबीन से वन्य प्राणियों का आनंद लेंगे। इसके लिए वन्य प्राणी विभाग के पास आठ से 10 दूरबीन आ चुकी हैं। इसके अलावा ट्री हाउस भी बनाया जा रहा है। नायब सिंह सैनी पहले ऐसे मुख्यमंत्री होंगे जो कलेसर जंगल सफारी का आनंद लेंगे। कलेसर नेशनल पार्क हिमाचल की शिवालिक की पहाड़ियों से सटा है, जोकि 11570 एकड़ में फैला हुआ है। इसमें हाथी, चीता बाघ सांभर, खरगोश, अजगर, जंगली मोर, सांभर, चीतल, हिरण, कोबरा, बंदर, लंगूर जैसे जीव जंतु हैं। कलेसर जंगल में वन्य प्राणियों पर नजर रखने के लिए चार लोहे के वॉच टावर भी बने हैं। ट्री हाउस पहली बार बनाया जा रहा है। यह ट्री हाउस तैयार किया जा रहा नए मुख्यद्वार के पास होगा। मुरादाबाद के कारीगर इसे तैयार कर रहे हैं। 18 फीट ऊंचाई पर पेड़ के ऊपर यह ट्री हाउस बनाया जाना है। ऐसे में वन्य प्राणी विभाग के कर्मचारी इस पर चढ़ कर दूरबीन से वन्य प्राणियों पर नजर रख सकेंगे।  एक द्वार प्रवेश तो दूसरे से होगी निकासी अभी तक कलेसर नेशनल पार्क का एक ही मुख्यद्वार था। अब दो होंगे। नए मुख्यद्वार से अब प्रवेश होगा और पुराने वाले द्वार से जंगल सफारी की निकासी होगी। जंगल सफारी के नए मुख्यद्वार के पास ही टिकट हाउस भी तैयार किया जा रहा है। अब सैलानी यहीं से जंगल सफारी के लिए टिकट लिया करेंगे। मुख्यमंत्री 18 नवंबर को नए मुख्यद्वार का उद्घाटन करने के अलावा वन्य प्राणी विभाग के परिसर में जनसभा को भी संबोधित करेंगे। कलेस्र नेशनल पार्क में जाने के लिए नया रास्ता बनवाया जा रहा है। इस रास्ते पर गेट का उद्घाटन मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 18 नवंबर को करेंगे। इसके लिए विभागीय स्तर पर तैयारियां पूरी की जा रही हैं। टिकट घर के अलावा ट्री-हाउस भी बनाया जा रहा है। – लीलू राम, इंस्पेक्टर वन्य प्राणी विभाग यमुनानगर।    

ऑल-गर्ल्स बैंड के जरिए नेहा भसीन ने पेश की अपनी कहानी, आवाज में छिपा जादू

मुंबई   भारतीय संगीत जगत में कई ऐसी आवाजें हैं, जिन्होंने समय के साथ अपनी एक अलग पहचान बनाई है, लेकिन कुछ आवाजें शुरुआत से ही इतनी खास होती हैं कि उनका सफर अपने आप में एक प्रेरणा बन जाता है। नेहा भसीन ऐसी ही कलाकारों में से एक हैं। बचपन से ही गाने के प्रति उनके जुनून को देख लोग कहते थे कि वह एक दिन देश की सबसे खास गायिकाओं में गिनी जाएंगी। आज भले ही लाखों लोग उन्हें 'जग घूमेया' और 'कुछ खास' जैसे सुपरहिट गानों की वजह से पहचानते हों, लेकिन उनके करियर की नींव उस समय पड़ी थी जब उन्होंने भारत के पहले ऑल-गर्ल्स बैंड विवा में जगह बनाई थी। करियर के इस मोड़ ने उनकी पहचान को नई उड़ान दी। नेहा भसीन का जन्म 18 नवंबर 1982 को दिल्ली में हुआ था। महज नौ साल की उम्र में उन्होंने मारिया कैरी का गाना 'हीरो' गाया और एक प्रतियोगिता में जीत हासिल की। इसी स्टेज ने उनके मन में संगीत के प्रति लगाव को बढ़ा दिया। पढ़ाई के दौरान भी नेहा हमेशा प्रोग्राम में हिस्सा लेती और अपनी आवाज से सबका ध्यान खींच लेती थीं। बाद में उन्होंने शास्त्रीय संगीत की ट्रेनिंग उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान से ली, जिसने उनकी आवाज को और भी प्रभावशाली बनाया। कॉलेज के दिनों के दौरान नेहा भसीन ने चैनल वी के शो 'कोक वी पॉपस्टार्स' के लिए ऑडिशन दिया, जो उस समय के सबसे बड़े म्यूजिक टैलेंट सर्च शोज में से एक था। यहां तक पहुंचना आसान नहीं था, लेकिन नेहा न सिर्फ चुनी गईं बल्कि 18 साल की उम्र में यह शो जीत भी लिया। शो जीतने के बाद नेहा और बाकी चार लड़कियों ने मिलकर भारत का पहला ऑल-गर्ल्स पॉप बैंड 'विवा' बनाया। यह बैंड उस समय युवाओं में एक क्रेज बन चुका था। टीवी, रेडियो और म्यूजिक चैनल्स पर हर तरफ विवा की चर्चा होने लगी। यह वह समय था जब भारत में पॉप कल्चर अपने सबसे चमकदार दौर से गुजर रहा था और विवा की सफलता ने इसे और भी आगे बढ़ाया। हालांकि यह बैंड कुछ सालों बाद टूट गया, लेकिन इस दौरान नेहा ने जितनी लोकप्रियता हासिल की, वह उनके आगे के करियर के लिए एक मजबूत नींव साबित हुई। बैंड टूटने के बाद नेहा ने फिल्मी दुनिया में कदम रखा। 2007 में फिल्म 'फैशन' के गाने 'कुछ खास है' से उन्हें वह पहचान मिली, जिसने बॉलीवुड में उनका नाम स्थापित कर दिया। इस गाने के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड में नामांकन भी मिला। इसके बाद उन्होंने 'धुनकी', 'जग घूमेया', 'स्वैग से स्वागत', 'हीरिए' और कई अन्य गानों से अपनी जगह मजबूत की। उनकी खासियत यह है कि वे सिर्फ हिंदी ही नहीं बल्कि पंजाबी, तमिल और तेलुगु सहित कई भाषाओं में गाती हैं और हर भाषा में उनकी आवाज उतनी ही मधुर लगती है। नेहा ने साउथ इंडस्ट्री में भी कई सुपरहिट गाने दिए, जिनमें तमिल गाना 'पेसुगिरेन पेसुगिरेन' और तेलुगु गाना 'अतु नुव्वे' शामिल हैं। इन गानों ने उन्हें साउथ की फिल्मों में पसंदीदा गायिकाओं में शामिल कर दिया। उनके करियर में कई अवॉर्ड जुड़े, जिनमें दो फिल्मफेयर अवॉर्ड्स भी शामिल हैं।

डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर को 19वाँ राष्ट्रीय पुरस्कार, पद्मश्री श्री मठपाल करेंगे सम्मानित

19वाँ डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार से पद्मश्री श्री मठपाल होंगे सम्मानित "पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय विज्ञान के क्षेत्रों में हालिया प्रगति" पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, 09 से 11 जनवरी, 2026 तक भोपाल में राष्ट्रीय संगोष्ठी में संक्षेप (Abstract) जमा करने की अंतिम तिथि 20 नवंबर 2025 तक भोपाल  19वाँ डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार से पद्मश्री श्री यशोधर मठपाल को सम्मानित किया जाएगा। संस्कृति विभाग के संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय द्वारा दिये जाने वाले राष्ट्रीय सम्मान में श्री मठपाल को प्रशस्ति पत्र, सम्मान पट्टिका और 2 लाख रुपये प्रदान किए जायेगे। यह पुरस्कार किसी सक्रिय भारतीय नागरिक या संस्था को पुरातत्व के क्षेत्र में उनकी सृजनात्मक, रचनात्मक और विशिष्ट उपलब्धियों के लिए दिया जाता है। आयुक्त पुरातत्व श्रीमती उर्मिला शुक्ला ने बताया कि डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर के योगदान को स्मरण करने के लिए, पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय निदेशालय, भोपाल 09 से 11 जनवरी, 2026 तक कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर, भोपाल में "पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय विज्ञान के क्षेत्रों में हालिया प्रगति" पर एक राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी का आयोजन कर रहा है। इसी दौरान 19वाँ डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्रदान किया जाएगा। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में, पूरे भारत से प्रशासकों, नीति निर्माताओं, क्षेत्रीय पदाधिकारियों, प्रख्यात वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और छात्रों की भागीदारी होगी, जो पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालयों के क्षेत्रों में विभिन्न उभरते मुद्दों पर चर्चा करेंगे और पुरातात्विक खजानों के प्रभावी संरक्षण, प्रबंधन और विकास के लिए साक्ष्य-आधारित रणनीतियों की सिफारिश करेंगे।  आयुक्त पुरातत्व श्रीमती शुक्ला ने बताया कि राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्देश्य को 3 विषयों पर प्रस्तुति और चर्चा के माध्यम से संबोधित किया जाएगा। इन विषयों में पुरातत्व, नृवंश-पुरातत्व (ethnoarchaeology), पुरातत्वमिति (archaeometry), कलाकृति विश्लेषण, सांस्कृतिक संसाधन प्रबंधन आदि में नई सफलताएँ,  हाइब्रिड सिस्टम सहित अभिलेखागार और रिकॉर्ड प्रबंधन में उभरती प्रौद्योगिकियाँ और मूर्त और अमूर्त विरासतों (tangible and intangible heritages) के संग्रह, भंडारण, पहुँच और संरक्षण में नवीनतम विकास और डिजिटल क्यूरेशन के रुझान शमिल है।  सार-संक्षेप जमा करने की अंतिम तिथि 20 नवंबर तक बढ़ाई गई राष्ट्रीय संगोष्ठी के विषयों या संबंधित क्षेत्रों में से किसी पर भी सार-संक्षेप (Abstracts) आमंत्रित हैं। सार-संक्षेप जमा करने की अंतिम तिथि 10 नवंबर 2025 थी, जिसे अब 20 नवंबर 2025 तक बढ़ा दिया गया है। स्वीकृत सार-संक्षेप के पूर्ण पर्चों (full papers) का मूल्यांकन, संपादन किया जाएगा और उन्हें संगोष्ठी की कार्यवाही पुस्तक (seminar proceeding book) में प्रकाशित किया जाएगा। प्रत्येक विषय क्षेत्र पर सर्वश्रेष्ठ पर्चा प्रस्तुति (best paper presentation) के लिए पुरस्कार भी दिए जाएंगे। अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट www.archaeology.mp.gov.in को देखा जा सकता है।  उल्लेखनीय है कि डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर (1919-1988), जिन्हें 'हरिभाऊ' के नाम से जाना जाता है और भारतीय शैल कला (rock art) अध्ययन के "पितामह" के रूप में संदर्भित किया जाता है, एक प्रख्यात भारतीय पुरातत्वविद्, कला इतिहासकार, मुद्राशास्त्री, पुरालेखविद् और सांस्कृतिक शोधकर्ता थे। उनका जीवन और कार्य भारत के समृद्ध प्राचीन इतिहास और प्रागैतिहासिक कला को उजागर करने और संरक्षित करने के लिए समर्पित था। उन्हें जनवरी 1975 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक, पद्म श्री से सम्मानित किया गया। डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार, जिसे वाकणकर सम्मान भी कहा जाता है, मध्यप्रदेश के भोपाल में पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय निदेशालय द्वारा (वर्ष के आधार पर) वार्षिक या द्विवार्षिक रूप से प्रस्तुत किया जाने वाला एक राष्ट्रीय पुरस्कार है।  

राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी का शुभारंभ 18 नवंबर को, करेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 18 नवम्बर को करेंगे राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदशर्नी का शुभारंभ प्रदशर्नी में 31 प्रदेशों के 900 विद्यार्थी कर रहे हैं सहभागिता 23 नवम्बर तक होंगी विज्ञान पर केन्द्रित गतिविधियां भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल में 18 नवम्बर मंगलवार को प्रात: 9:45 पर 52वीं राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी का शुभारंभ करेंगे। शुभारंभ समारोह में जनजातीय कार्य मंत्री  कुंवर विजय शाह एवं स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री  उदय प्रताप सिंह भी मौजूद रहेंगे। प्रदशर्नी  का आयोजन राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद द्वारा क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, श्यामला हिल्स, भोपाल में किया जा रहा है। प्रदर्शनी के आयोजन में स्कूल शिक्षा विभाग सहभागिता कर रहा है। प्रदर्शनी में 31 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के लगभग 900 विद्यार्थी एवं शिक्षक विज्ञान पर केन्द्रित प्रोजेक्ट एवं मॉडल प्रदर्शित करेंगे। बच्चों में प्रोत्साहित की जायेगी विज्ञान के प्रति रूचि कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी में विज्ञान के प्रति रुचि पैदा करना और वैज्ञानिक विचार विकसित करना है। इस कार्यक्रम में देश के समस्त प्रदेश एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के स्कूली विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं। बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में प्रतिदिन प्रात: 9 बजे से विभिन्न वैज्ञानिक संस्थाओं जैसे आंचलिक विज्ञान केन्द्र, आईसर, मैनिट, आईसेक्ट एवं ग्लोबल स्किल पार्क के वैज्ञानिक सहभागी विद्यार्थियों के साथ वैज्ञानिक वार्ता में विशेष व्याख्यान देंगे। इसके बाद 30 मिनट विद्यार्थियों के साथ प्रश्नोत्तरी भी होगी। विज्ञान प्रदर्शनी का 2025-26 का विषय सतत् भविष्य के लिये विज्ञान प्रौद्योगिकी रखा गया है। प्रदशर्नी के दौरान मुख्य रूप से खाद्य, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, परिवहन एवं संचार, प्राकृति खेती, आपदा प्रबंधन, गणितीय मॉडलिंग और कंप्यूटेशनल थिंकिंग के साथ अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष रूप से चर्चा की जायेगी। विज्ञान प्रदशर्नी में शाम को प्रतिदिन विभिन्न राज्यों के विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। विभिन्न राज्यों से आये विद्यार्थियों को राजधानी भोपाल के आसपास ऐतिहासिक स्थलों, संग्रहालयों, विज्ञान केन्द्र, शिल्प केन्द्र आदि का भ्रमण भी कराया जायेगा। प्रदशर्नी की विशेषताएं प्रदर्शनी में प्रतिदिन 2 हजार विद्यार्थी एवं नागरिक अवलोकन करने पहुंचेंगे। प्रदर्शनी में 240 साइंस मॉडल का प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रदशर्नी में प्रतिभागी विद्यालयों की संख्या 229 है। यह प्रदर्शनी देश के विभिन्न भागों के युवाओं एवं बच्चों को विज्ञान, गणित तथा पर्यावरण संबंधी मुद्दों के विभिन्न पहलुओं के विषय में जानकारी प्राप्त करने और एक-दूसरे के साथ अपनी विविध संस्कृतियों को साझा करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करेगी। भोपाल में 6 दिवसीय प्रदर्शनी का समापन 23 नवम्बर को दोपहर 3:30 बजे होगा।  

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह के साथ PM मोदी करेंगे किसानों को राशि का वितरण

धमतरी   छत्तीसगढ़ में बुधवार को धमतरी जिले में एक बड़ा राजनीतिक एवं प्रशासनिक कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है, जहां केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय धमतरी पहुंचेंगे। दोनों नेता एकलव्य खेल मैदान में आयोजित जनसभा में शामिल होंगे। इसी दिन कोयंबटूर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किश्त जारी की जाएगी, जिसका सीधा प्रसारण धमतरी के सभा स्थल पर कराया जाएगा। कार्यक्रम के बाद चौहान जनसभा को संबोधित करेंगे और केंद्र की कृषि नीतियों, किसान हितैषी योजनाओं तथा छत्तीसगढ़ के लिए आगामी योजनाओं पर अपने विचार रखेंगे। धमतरी जिला प्रशासन और भारतीय जनता पार्टी इस बड़े आयोजन की तैयारी में जुटे हैं। व्यवस्थाओं की समीक्षा लगातार की जा रही है। वहीं सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री के इस दौरे पर धमतरी जिले के लिए विशेष पैकेज की मांग भी रखी जा सकती है, जिससे जिले में कृषि, सिंचाई और ग्रामीण विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। कार्यक्रम को लेकर जिलेभर में उत्साह का माहौल है और बड़ी संख्या में किसानों एवं ग्रामीण जनों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही हैग पीएम किसान योजना की 21वीं किस्त जानकारी के अनुसार, 2 अगस्त को योजना से जुड़े देशभर के किसानों के खाते में 20वीं किस्त जारी कि गई थी। अब 3 महीने का समय में बीत चुका है। ऐसे में करोड़ों किसान 21वीं किस्त(PM Kisan 21th Installment) का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। बता दें कि, केंद्र सरकार 19 नवंबर को पीएम किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त जारी करेगी। 21वीं किस्त का लाभ मध्यप्रदेश सहित देशभर के 9 करोड़ से अधिक पात्र किसानों को मिलने वाला है। इस किस्त के लिए सरकार कुल 18 हजार करोड़ रुपए की राशि हस्तांतरित करेगी। पात्रता की मुख्य शर्तें     आवेदक मध्य प्रदेश के स्थायी निवासी हो     वे किसान, जिनके पास कृषि योग्य भूमि हो     दो हेक्टेयर या उससे कम भूमि हो     आवेदक किसान के पास आधार कार्ड हो     बैंक अकाउंट होना भी अनिवार्य है     पीएम किसान के लिए फार्मर आइडी अनिवार्य