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राधिका आप्टे और दिव्येंदु की फिल्म साली मोहब्बत का ट्रेलर जारी, ओटीटी पर होगी रिलीज

मुंबई, बॉलीवुड अभिनेत्री राधिका आप्टे और मिर्जापुर से मशहूर हुए अभिनेता दिव्येंदु ओटीटी पर धमाका करने के लिए तैयार हैं। उनकी आगामी चर्चित फिल्म साली मोहब्बत का ट्रेलर जारी कर दिया गया है। इस फिल्म के जरिए अभिनेत्री टिस्का चोपड़ा निर्देशन की दुनिया में कदम रख रही है। वहीं फिल्म के निर्माता ज्योति देशपांडे, मनीष मल्होत्रा और दिनेश मल्होत्रा हैं। निर्माताओं ने साली मोहब्बत का ट्रेलर जारी करते हुए फिल्म की रिलीज तारीख से भी पर्दा उठा दिया है। साली मोहब्बत एक क्राइम-थ्रिलर फिल्म है जिसमें राधिका छोटे शहर की महिला स्मिता का किरदार निभा रही हैं। दिव्येंदु पहली बार पुलिस अधिकारी के किरदार में नजर आए हैं। हालांकि, उनका अभिनय काफी हद तक उनके मिर्जापुर के किरदार मुन्ना भैया की याद दिलाता है। अनुराग कश्यप भी फिल्म में अहम किरदार निभा रहे हैं। फिल्म में भावनाओं, धोखा और फरेब का फुल तड़का लगाया गया है। ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर 12 दिसंबर, 2025 को साली मोहब्बत रिलीज की जाएगी।  

संदिग्ध डिवाइस मिलने पर हड़कंप, मौके पर पहुंची पुलिस और बम निरोधक दस्ता

सांबा  सांबा के दूर-दराज की ब्लाक सुंब के एक गांव में उपकरण मिलने से हड़कंप मच गया। जानकारी अनुसार पुलिस पोस्ट गोरन के चंढली गांव में स्थानीय लोगों ने एक उपकरण और गुब्बारा देखकर पुलिस को सुचित किया, जिसके बाद अलर्ट पुलिस ने तुरंत बम डिस्पोजल दस्ते को सुचित किया और उन्होंने उसे अपने कब्जे में ले लिया।  वहीं उपकरण पर लिखे शब्दों से लग रहा है कि वैसाला रेडियोसॉन्डे एक उपकरण है जिसे मौसम के डेटा को ऊपरी वायुमंडल से एकत्र करने के लिए उपयोग किया जाता है, जिसमें तापमान, आर्द्रता, दबाव और हवा की गति व दिशा शामिल हैं। यह उपकरण एक गुब्बारे से बंधा होता है और यह डेटा को रेडियो के माध्यम से जमीन पर भेजता है। 

जनता पूछेगी तो जवाब देना होगा: CM मान ने ECI की पारदर्शिता पर उठाए सवाल

चंडीगढ़ आज देश में चुनावों को लेकर एक अजीब-सी बेचैनी फैली हुई है। लोग सवाल पूछ रहे हैं, चर्चा कर रहे हैं, और अपने मन का संदेह खुलकर व्यक्त कर रहे हैं। यह कोई छोटी बात नहीं है—जब जनता, जो लोकतंत्र की असली मालिक है, अपने ही चुनावी सिस्टम पर भरोसा खोने लगे, तो समझ जाइए कि समस्या बहुत गहरी है। इसी बीच पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हाल ही में एक ऐसा बयान दिया, जिसने लोगों के दिलों को छू लिया। चुनाव प्रक्रिया और SIR को लेकर पैदा हुए संदेहों के बीच उन्होंने वह बात कही, जो करोड़ों भारतीयों के मन की आवाज़ थी—“सबूत जनता क्यों दे? जवाब तो चुनाव आयोग को देना चाहिए।” यह बात सिर्फ एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं थी, बल्कि लोकतंत्र की असली आत्मा की रक्षा करने वाला एक साहसिक संदेश था। जब जनता सवाल उठाती है, तो वह देश को कमजोर नहीं करती—वह लोकतंत्र को मजबूत बनाती है। CM मान ने साफ कहा कि अगर वोटर चिंतित हैं, अगर प्रक्रिया पर शक है, तो इसे दूर करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। जनता से सवाल पूछने के बजाय, उसका सम्मान किया जाए। क्योंकि लोकतंत्र जनता से ही चलता है, और जनता के भरोसे पर ही टिकता है। इस दौर में, जब कई नेता जनभावनाओं से जुड़ने से बचते हैं, CM मान का यह बयान लोगों के मन को छू गया। उन्होंने उन्हीं शब्दों में बात की, जिनमें आम आदमी सोचता है। यही कारण है कि उनका संदेश सिर्फ पंजाब में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में गूंज उठा। उन्होंने याद दिलाया कि चुनाव किसी पार्टी का आयोजन नहीं, बल्कि जनता का पवित्र अधिकार है और जब इस अधिकार पर सवाल उठते हैं, तो चुप्पी समाधान नहीं — पारदर्शिता समाधान है। CM भगवंत मान का यह बयान —एक ऐसा सच है, जिसे कहने की हिम्मत बहुत कम नेताओं में होती है। CM मान ने यह भी कहा कि चुनाव प्रक्रिया लोगों को भरोसा दे, डर नहीं। यह बात सुनकर हर वह नागरिक राहत महसूस करता है जो अपने वोट को अपनी आवाज़ समझता है। ऐसे समय में, जब लोग अपने लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर बेचैन थे, CM मान की आवाज़ एक भरोसा बनकर उभरी। उन्होंने न जनता को दोषी ठहराया, न सवाल पूछने वालों को दबाया, बल्कि यह कहा कि सवाल उठाना जनता का हक है, और जवाब देना संस्था का कर्तव्य। ऐसे ही नेताओं से लोकतंत्र मजबूत होता है—जो जनता की चिंता को समझते हैं और सच बोलने से नहीं डरते। भगवंत मान ने साबित कर दिया कि पंजाब सिर्फ बहादुरों की धरती नहीं, बल्कि सच्चाई बोलने और जनता के अधिकारों की रक्षा करने वालों की धरती है। CM मान का यह बयान सिर्फ पंजाब की आवाज नहीं, पूरे भारत की आवाज है।यह याद दिलाता है कि अभी भी इस देश में ऐसे नेता हैं जो कुर्सी से नहीं, जनता के भरोसे से अपनी ताकत लेते हैं।

ऐसे मिनटों में लगाएं अपने चोरी हुए फोन का पता

मौजूदा समय में हमारे ज्यादातर काम स्मार्टफोन पर होते हैं फिर चाहे वो ऑफिशियल काम हो या फिर पर्सनल काम। स्मार्टफोन पर हमारी निजी जानकारी जैसे फोटोज, वीडियोज, सोशल मीडिया अकाउंट और बेंकिग जैसी जानकारियां मौजूद रहती हैं। ऐसे में फोन का खो जाना या फिर चोरी हो जाना किसी भी यूजर के लिए बूरे सपने से कम नहीं है। फोन के चोरी होने या फिर खो जाने पर गूगल का एक फीचर आपके काम आ सकता है। दरअसल एप्पल के फाइंड माय फोन फीचर की तरह एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स में यूजर्स को फाइंड माय फोन फंक्शन मिलता है। फाइंड माय फोन फंक्शन की मदद से आप अपने फोन की पुरानी लोकेशन से लेकर मौजूदा लोकेशन तक की जानकारी पा सकते हैं। गूगल मैप्स की मदद से आप अपने खोए हुए फोन को मिनटों में ढूंढ सकते हैं। तो जानते हैं इन स्टेप्स के बारे में जो आपके काम आ सकते हैं। Step 1: अपने स्मार्टफोन या फिर पीसी पर ब्राउजर को ओपेन करें और डब्लूडब्लूडब्लू डॉट मैप्स डॉट गूगल डॉट को डॉट इन पर जाएं। Step 2: अपने उस गूगल अकाउंट से लॉग-इन करें जिससे खोया या फिर चोरी हुआ फोन लिंक था। Step 3: ऊपर दाई ओर बने तीन डॉट्स पर क्लिक करें। Step 4: इसके बाद योर टाइमलाइन ऑप्शन पर क्लिक करें। Step 5: यहां उस साल, महीना या फिर दिन की जानकारी इंटर करें जब से आप अपने खोए हुए फोन की लोकेशन का पता लगाना चाहते हैं। उदाहरण के लिए अगर आपका फोन 14 अगस्त को चोरी हुआ है या फिर खोया है, तो टाइम लाइन में 14 अगस्त 2018 इंटर करें। Step 6: मैप आपको फोन की पुरानी लोकेशन से लेकर मौजूदा लोकेशन तक की पूरी जानकारी देगा।  

एविएशन सेक्टर में अलर्ट: प्रमुख भारतीय हवाई अड्डों पर GPS छेड़छाड़ की घटनाओं का खुलासा

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि देश के कई बड़े एयरपोर्ट्स पर GPS स्पूफिंग और GNSS इंटरफेरेंस की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन एयरपोर्ट्स में दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, हैदराबाद, अमृतसर, बेंगलुरु और चेन्नई शामिल हैं। सरकार ने बताया कि यह वही समस्या है जिसमें सेटेलाइट आधारित नेविगेशन सिस्टम बाधित हो जाता है और इसका असर सीधे उड़ान संचालन पर पड़ सकता है। नवंबर 2023 में DGCA ने सभी एयरलाइंस और एयरपोर्ट्स को ऐसे मामलों की कंपलसरी रिपोर्टिंग के निर्देश दिए थे। इसके बाद से देशभर से लगातार घटनाओं की रिपोर्ट मिल रही हैं। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि जब भी सैटेलाइट नेविगेशन में दिक्कत आती है, तब भारत में मौजूद न्यूनतम ऑपरेटिंग नेटवर्क जो जमीन आधारित पारंपरिक नेविगेशन और सर्विलांस सिस्टम पर चलता है उड़ानों को सुरक्षित रूप से संचालित करने में सक्षम है। उन्होंने संसद को आश्वस्त किया कि सभी बड़े एयरपोर्ट्स इन घटनाओं को नियमित रूप से दर्ज कर रहे हैं, ताकि किसी भी संभावित समस्या पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। GPS स्पूफिंग और GNSS इंटरफेरेंस क्या है? GPS स्पूफिंग एक तरह का साइबर हमला है, जिसमें हमलावर नकली सैटेलाइट सिग्नल भेजते हैं। इससे विमान या किसी भी GPS-आधारित उपकरण को गलत लोकेशन या डेटा प्राप्त होता है। ऐसी स्थिति में विमान के नेविगेशन सिस्टम को गलत पोजिशन, गलत अलर्ट या गलत टेरेन वार्निंग मिल सकती हैं, जिससे विमान अपनी असली दिशा से भटक सकता है। हाल ही में दिल्ली एयरपोर्ट के पास कई उड़ानों को 60 नॉटिकल मील तक गलत लोकेशन डेटा मिला। इस कारण कुछ विमानों को एहतियातन नज़दीकी एयरपोर्ट जैसे जयपुर या लखनऊ की ओर डायवर्ट करना पड़ा।   एयरपोर्ट के आसपास GPS और GNSS खतरें एयरपोर्ट के पास GPS स्पूफिंग या GNSS इंटरफेरेंस के कारण नेविगेशन, एयरस्पेस सुरक्षा और पायलट के वर्कलोड पर गंभीर असर पड़ सकता है। आधुनिक विमान इन सिस्टम्स पर काफी हद तक निर्भर हैं। GPS या GNSS सिग्नल में गड़बड़ी से विमान की पोजीशन, ऊंचाई और स्पीड में गलतियां हो सकती हैं, जिससे विमान निर्धारित रूट से भटक सकता है या संवेदनशील इलाके में प्रवेश कर सकता है। रनवे अवेयरनेस, टेरेन वार्निंग और ऑटोपायलट जैसे महत्वपूर्ण सिस्टम GPS पर निर्भर हैं। स्पूफिंग की स्थिति में ये सिस्टम गलत अलर्ट दे सकते हैं या पूरी तरह फेल हो सकते हैं, जिससे रनवे या बाधा से टकराने का खतरा बढ़ जाता है। खासकर एयरपोर्ट के पास यह खतरा और भी अधिक होता है, क्योंकि लैंडिंग और अप्रोच के दौरान विमान जमीन के बेहद करीब होता है। गलत पोजिशन डेटा से रनवे मिसअलाइनमेंट, ग्लाइड पाथ में गड़बड़ी या गो-अराउंड जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। इसके अलावा, एक ही इलाके में कई विमानों के GPS डेटा में गड़बड़ी से एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के लिए सही लोकेशन समझना मुश्किल हो जाता है। इससे विमानों के बीच सेपरेशन कम हो सकता है और पायलट एवं ATC दोनों पर वर्कलोड बढ़ जाता है। सरकार ने बताया कि एयरपोर्ट के आसपास GNSS का समुचित संरक्षण और विभिन्न रेडंडेंसी सिस्टम्स का इस्तेमाल आवश्यक है ताकि इन खतरनाक परिस्थितियों से बचा जा सके और हवाई यात्रा सुरक्षित बनी रहे।   

रविवार को करें सूर्यदेव का व्रत एवं पूजन और पायें शुभ फल

जो लोग अच्छेे स्वावसथ्यज और घर में सुख समृद्धि की कामना करते हैं उन्हें  पूरी श्रद्धा के साथ रविवार का व्रत एवं पूजन करना चाहिए। इस दिन सूर्य देव की पूजा का विधान है। इसलिए नहाने के बाद सूर्यनारायण को तीन बार अर्घ्य देकर प्रणाम करें। सूर्य के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें, और आदित्य हृदय का पाठ करें। पूजा के बाद भगवान सूर्यदेव का स्मंरण करते हुए व्रत का संकल्प् लें। इस व्रत में बिना तेल और नमक के भोजन करना चाहिये। मान्यनता है कि एक वर्ष तक नियमित रूप से उपवास रखने के पश्चात व्रत का उद्यापन करने वाला जीवन में सभी सुखों को भोगता है और मृत्यु बाद मोक्ष को पाता है। इस दिन संध्या के समय भी सूर्य को अर्घ्य देकर प्रणाम करना उत्ताम होता है। कहते हैं कि रविवार को सूर्यदेव के नाम का उपवास कर उनकी आराधना करने वाले की सारी द्ररिद्रता दूर हो जाती है। रविवार के व्रत की कथा इस प्रकार है। रविवार को सूर्योदय से पहले शुद्ध होकर स्नान आदि करने के बाद इस कथा का श्रवण करना चाहिए। इस प्रकार है रविवार व्रत कथा रविवार की कथा में बताया गया है कि एक बुढ़िया हर रविवार प्रात:काल उठकर नहा धोकर अपने घर आंगन को गाय के गोबर से लीपती फिर सूर्य देव की पूजा करती और उन्हें भोग लगाकर ही भोजन करती थी। बुढ़िया के पास गाय नहीं इसलिये पड़ोसियों के यहां से गाय का गोबर लाती। उसकी इस आस्ज्ञाु    से उस पर सूर्यदेव के अनुग्रह से उसका घर धन धान्य से संपन्न रहने लगा। बुढ़िया के दिन फिरते देख उसकी पड़ोसन जलने लगी। उसने अपनी गाय को सामने से हटा दिया जिससे बुढ़िया को गोबर नहीं मिला और घर की लिपाई नहीं हुई और बुढ़िया ने कुछ नहीं खाया और निराहार रही। सपने में सूर्य देव ने उससे पूछा कि आज आपने मुझे भोग क्यों नहीं लगाया। बुढ़िया ने कहा कि उसके पास गाय नहीं है और वह पड़ोसन की गाय का गोबर लाकर लिपाई करती थी। पड़ोसन ने अपनी गाय अंदर बांध ली जिस कारण वह घर की लिपाई नहीं कर सकी और इसीलिए ना भोजन बना पाई ना भोग लगा सकी। इस पर सूर्य देव ने कहा वे उनकी श्रद्धा व भक्ति से बहुत प्रसन्न है और उसे एक इच्छास पूर्ण करने वाली गाय दी। बुढ़िया बड़ी श्रद्धा के साथ गाय की सेवा करने लगी। पड़ोसन की ईष्याक तब और बढ़ गई जब उसने देखा कि गाय सोने का गोबर कर रही है। बुढ़िया के वहां ना होने का फायदा उठा कर वो सोने का गोबर उठा लाई और सामान्या गोबर उसके स्थाुन पर रख दिया। अब वो रोज ही ऐसा करती और सोने की मदद से अमीर होती गई। तब सूर्य देव ने सोचा कि उन्हें ही कुछ करना पड़ेगा। उन्होंने शाम को तेज आंधी चलवा दी, आंधी के कारण बुढिया ने गाय को अंदर बांध दिया सुबह उसने देखा कि गाय तो सोने का गोबर करती है। फिर वह हर रोज गाय को अंदर बांधने लगी। जब पड़ोसन को सोना नहीं मिलार तो जल कर उसने नगर के राजा को बता दिया कि बुढ़िया के पास सोने का गोबर करने वाली गाय है। राजा ने अपने सैनिक भेजकर बुढ़िया के यहां से गाय लाने का हुक्म दिया। सैनिक गाय ले आये। देखते ही देखते गोबर से सारा महल भर गया, और बदबू फैल गई। राजा को सपने में सूर्य देव ने दर्शन दे कर कहा कि मूर्ख यह गाय उस वृद्धा के लिये ही है। वह हर रविवार नियम पूर्वक व्रत रखती है। इस गाय को वापस लौटाने में ही तुम्हारी भलाई। राजा ने बुढ़िया को बुलाकर बहुत सारा धन दिया और क्षमा मांगते हुए सम्मान पूर्वक वापस भेजा। साथ पड़ोसन को दंडित किया। इसके अलावा उसने पूरे राज्य में घोषणा करवाई की आज से सारी प्रजा रविवार के दिन उपवास रखेगी व सूर्य देव की पूजा करेगी। उसके प्रताप से राजा का राज्य भी धन्य धान्य से संपन्न हुआ और प्रजा में सुख शांति रहने लगी।  

भारत ही नहीं, दुनिया को दिशा देती है गीता : नायब सिंह सैनी का संबोधन

चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के अंतर्गत सोमवार को धर्मक्षेत्र–कुरुक्षेत्र के केशव पार्क में भव्य और ऐतिहासिक वैश्विक गीता पाठ आयोजित किया गया। इस सामूहिक पाठ में 21 हजार बच्चों ने एक स्वर में गीता के श्लोकों का उच्चारण कर वह दिव्य दृश्य प्रस्तुत किया, जिसने पूरे वातावरण को ज्ञान, भक्ति और अध्यात्म से सराबोर कर दिया। इस अभूतपूर्व सहभागिता ने वसुधैव कुटुम्बकम् की भारतीय अवधारणा को साकार रूप दिया। इस कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शिरकत की। मुख्यमंत्री ने कुरुक्षेत्र में वैश्विक गीता पाठ में भाग लेने वाले स्कूली छात्रों के लिए मंगलवार को विशेष अवकाश की भी घोषणा की। इस अवसर पर योग गुरु बाबा रामदेव और गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी एवं गीता जयंती के पावन पर्व की शुभकामनाएं देते हुए भगवान श्री कृष्ण से नागरिकों के जीवन को ज्ञान के आलोक से आलोकित करने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि इसी शुभ तिथि पर 5163 वर्ष पूर्व भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को श्रीमद्भगवद् गीता का दिव्य उपदेश दिया, जिसका संदेश आज भी संपूर्ण मानवता के लिए पथप्रदर्शक है। आज 21 हजार विद्यार्थियों द्वारा अष्टादशी श्लोकों के जाप से आकाश गूंज उठा है। यह गर्व की बात है कि आज भारत के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा अनेक देशों में भी एक साथ इन श्लोकों के स्वर गूंज रहे हैं। उन्होंने कहा कि गीता पाठ का महत्व केवल धार्मिक नहीं बल्कि वैज्ञानिक भी है। वेद, उपनिषद और गीता के मंत्रों के उच्चारण से उत्पन्न होने वाली सकारात्मक ध्वनि तरंगें मन और मस्तिष्क को शांति प्रदान करती हैं, विचारों में नैतिकता लाती हैं और व्यक्ति को नई ऊर्जा प्रदान करती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से गीता महोत्सव बन चुका है अंतर्राष्ट्रीय उत्सव, कई देश कर रहे सहभागिता मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मयोगी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ही प्रेरणा से हम गीता जयंती समारोह को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाते हैं। उन्होंने वर्ष 2014 में अमेरिका की अपनी प्रथम यात्रा के दौरान 19 सितम्बर, 2014 को अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा को महादेव देसाई द्वारा लिखित पुस्तक "The Gita According to Gandhi" भेंट की। इस अद्भुत पहल से प्रेरित होकर हम वार्षिक गीता जयंती समारोह को वर्ष 2016 से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने लगे हैं। इसमें कई देशों के प्रतिभागी और लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। उन्होंने कहा कि 25 नवंबर को प्रधानमंत्री कुरुक्षेत्र में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में शामिल हुए और महाभारत थीम आधारित अनुभव केंद्र का लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री ने 28 नवंबर को कर्नाटक के उडुपी में भी इस अनुभव केंद्र का उल्लेख करते हुए देशवासियों से इसे देखने का आग्रह किया। आज यह महोत्सव उनके मार्गदर्शन में विश्वव्यापी स्वरूप ले चुका है। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा दिया गया ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते’ का उपदेश व्यक्ति को कर्तव्य पालन के मार्ग पर करता है अग्रसर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने गीता के अलावा योग को भी पूरे संसार में फैलाने का काम किया है। उन्हीं के प्रयासों से हर साल 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तनाव, क्रोध और अनिश्चितता जैसी कई चुनौतियां हैं, जिनसे निपटने के लिए गीता हमें जीवन के हर उतार-चढ़ाव में समभाव बनाए रखने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन गीता का पाठ करने वाला व्यक्ति काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार से ऊपर उठ जाता है। गीता का प्रत्येक श्लोक ज्ञान का दीप है और प्रत्येक अध्याय जीवन का मार्गदर्शक। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा दिया गया ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते’ का उपदेश व्यक्ति को कर्तव्य पालन के मार्ग पर अग्रसर करता है और समाज में अनुशासन व संतुलन स्थापित करता है। यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति इस सिद्धांत को अपने जीवन में उतार ले, तो समाज में अनुशासन, समरसता और संतुलन स्वतः स्थापित हो जाएगा। गीता का संदेश कालातीत, यह केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत नायब सिंह सैनी ने कहा कि गीता का हर श्लोक हमें जीवन जीने की नई प्रेरणा देता है। गीता केवल अर्जुन और भगवान श्रीकृष्ण जी के बीच का संवाद ही नहीं है, यह हमारे हर प्रश्न का समाधान करती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जिस भी घर में गीता का नियमित रूप से पाठ होता है, वहां पर कभी किसी तरह की कोई नेगेटिव एनर्जी नहीं आ सकती। गीता हमें सिखाती है कि सुख-दुःख, सफलता असफलता, लाभ-हानि जीवन का हिस्सा हैं। इनसे विचलित हुए बिना हमें समभाव बनाए रखना चाहिए। यदि हर व्यक्ति इस शिक्षा को अपने जीवन में उतारे, तो आपसी संघर्ष और तनाव कम होगा। उन्होंने कहा कि गीता का संदेश कालातीत है—यह केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति गीता के उपदेशों को अपनाए, तो कुरीतियाँ, असमानताएँ और संघर्ष स्वतः समाप्त हो जाएंगे और एक आदर्श समाज की स्थापना होगी। गीता के इस संदेश को अपनाकर हम एक दूसरे के साथ बेहतर संबंध स्थापित कर सकते हैं और समाज में समरसता ला सकते हैं। मुख्यमंत्री ने उपस्थिजन को गीता के ज्ञान को समझकर अपने जीवन में अपनाने और इसे दूसरों तक पहुंचाने का संकल्प दिलवाया।

भारत की ‘डिजिटल स्ट्राइक’! WhatsApp उपयोग पर नए नियम से ISI में हड़कंप, गुप्त बैठकें शुरू

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने साइबर नियमों को और सख्‍त बनाते हुए गाइडलाइन जारी की है. इसके तहत अब WhatsApp, Telegram, Signal, Snapchat, ShareChat, JioChat, Arattai और Josh जैसे लोकप्रिय ऐप बिना एक्टिव SIM कार्ड के काम नहीं कर सकेंगे. दूरसंचार विभाग (DoT) ने यह नियम Telecommunication Cybersecurity Amendment Rules, 2025 के तहत लागू किया है. इस दिशानिर्देश में जो नई बात सामने आई है, वो ये है कि लैपटॉप, डेस्‍कटॉप पर भी ‘व्हाट्सएप वेब’ या अन्‍य प्‍लेटफॉर्म का इस्‍तेमाल करने वाले यूजर्स को हर 6 घंटे में लॉग आउट करना होगा. इसके बाद क्यूआर कोड के जरिए ही लॉगिन हो सकेगा. सरकार की गाइडलाइन पर कंपनियों का कहना कि लगातार सिम जांच और 6 घंटे के भीतर एक बार लॉगआउट के नियम से यूजर्स की प्राइवेसी में बाधा आ सकती है और एक से ज्‍यादा डिवाइस पर इन ऐप्‍स के इस्‍तेमाल की सुविधा खत्‍म हो सकती है. हालांकि, दूरसंचार कंपनियों ने सरकार के इस कदम का समर्थन किया है. वहीं सूत्रों के अनुसार इस कदम से पड़ोसी देश पाकिस्तान की इंटेलिजेंस एजेंसियों में हड़कंप मच गया है. यही वजह है कि, आनन फानन में पाक इंटेलिजेंस एजेंसी ISI ने इसका तोड़ निकालने एक सीक्रेट मीटिंग बुलाई है. सरकारी सर्कुलर में क्‍या कहा गया? दूरसंचार विभाग की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया है कि अगर मोबाइल या टैब में मूल सिम मौजूद न हो तो 90 दिनों के बाद इन ऐप्स का उपयोग नहीं कर पाएंगे. वेब आधारित प्लेटफॉर्म जैसे व्हाट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल, अराटाई, स्नैपचैट, शेयरचैट और ऐसे सभी अन्य प्लेटफॉर्म पर ये नियम लागू होंगे. यूजर्स के रजिस्‍ट्रेशन के समय उपयोग किया जाने वाला SIM यानी सब्सक्राइबर आइडेंटिटी मॉड्यूल सर्विसेज से जुड़ा होना चाहिए. इस मतलब ये हुआ कि मैसेजिंग प्लेटफॉर्म की सर्विसेज सिम से जुड़ी हुई होंगी. यानी जब सिम यूजर्स के फोन में मौजूद होगी, तभी आप इन ऐप्स की सर्विसेज का उपयोग कर पाएंगे जैसे ही सिम बंद हो जाएगी, आप सर्विसेज उपयोग नहीं कर पाएंगे. सरकार यह कदम क्यों उठा रही है? DoT के मुताबिक, अभी ज्यादातर मैसेजिंग ऐप सिर्फ पहली बार इंस्टॉल करते समय मोबाइल नंबर को वेरिफाई करते हैं. उसके बाद ऐप SIM हटाने या बंद होने पर भी चलता रहता है. COAI (सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) ने कहा कि यह तरीका बड़ी सुरक्षा खामी पैदा करता है. इसका फायदा उठाकर साइबर अपराधी SIM बदलने या बंद करने के बाद भी ऐप का इस्तेमाल जारी रखते हैं. उनकी लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड या कैरियर डेटा ट्रेस नहीं हो पाता. इसके अलावा इस नए नियम से सीमा पार आतंकवाद पर भी नकेल कसने में मदद मिलेगी. क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स? कुछ साइबर एक्सपर्ट मानते हैं कि इससे धोखाधड़ी और स्पैम कम हो सकते हैं, क्योंकि यूजर, नंबर और डिवाइस की ट्रेसिंग आसान होगी. लेकिन कई विशेषज्ञों का कहना है कि अपराधी आसानी से फर्जी या उधार लिए हुए दस्तावेजों पर नए SIM ले लेते हैं, इसलिए फायदा सीमित ही रहेगा. वहीं टेलीकॉम उद्योग का मानना है कि भारत में मोबाइल नंबर ही सबसे मजबूत डिजिटल पहचान है और इस नियम से साइबर सुरक्षा बेहतर हो सकती है. आम यूजर पर क्या असर? यह कदम करोड़ों भारतीयों की रोजमर्रा की डिजिटल आदतों में बदलाव ला सकता है. कारण, अब यूजर लगातार कई दिनों तक WhatsApp Web खुले नहीं रख पाएंगे. हर 6 घंटे पर लॉगआउट होना पड़ेगा. वहीं अगर SIM बंद हो गया या SIM स्लॉट में नहीं है तो ऐप खुलेगा ही नहीं. इसके अलावा जिन यूजर्स के पास दो डिवाइस हैं, वे पहले की तरह स्वतंत्र रूप से ऐप नहीं चला पाएंगे.

शिक्षा विभाग में बड़ा फंड घोटाला: 59.28 लाख के गबन पर अधिकारियों पर केस दर्ज

नूंह नूंह जिले के पुन्हाना क्षेत्र के गांव सिंगार स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में लंबे समय से चल रहे बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है। बिछोर थाना पुलिस ने स्कूल के तत्कालीन डीडीओ और मैसेंजर की कथित मिलीभगत से कर्मचारियों के यूनिक कोड का उपयोग कर 59 लाख 28 हजार से अधिक रुपये के गबन का मामला दर्ज किया है। इस गबन की शिकायत गणित अध्यापक हामिद हुसैन ने दर्ज कराई, जो 2009 से सितंबर 2017 तक सिंगार स्कूल में तैनात रहे थे। ट्रांसफर के बाद उन्होंने किसी प्रकार का एरियर, एलटीसी या भत्ता नहीं लिया था। लेकिन 2018 में सैलरी स्लिप निकालने पर उन्होंने पाया कि उनके यूनिक कोड का दुरुपयोग करते हुए मार्च 2018 में दो बार खाते का नाम और नंबर बदलकर 2.20 लाख रुपये एरियर और 16,500 रुपये शिक्षा भत्ता निकाल लिया गया था। जून 2016 का मामला इसी तरह जून 2016 में उनकी 2016-19 की एलटीसी राशि 49,140 रुपये भी बिना आवेदन के मैसेंजर वाहिद अहमद के खाते में भेज दी गई। जांच की मांग पर डीडीओ मोहम्मद अली और मैसेंजर ने केवल 25 रुपये की फर्जी रसीद दिखाई। बाद में दबाव बढ़ने पर वाहिद ने नकद 49 हजार रुपये लौटाए और नया चालान बनाने की बात कही। शिकायत में आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने अन्य कर्मचारियों के यूनिक कोड से भी फर्जी बिल पास कर लाखों रुपये हड़पे। हामिद ने 2018 में ही इस धोखाधड़ी की शिकायत प्रिंसिपल से लेकर निदेशालय तक की थी। केस दर्ज एएसपी आयुष यादव के अनुसार, बिछोर पुलिस ने मोहम्मद अली (तत्कालीन DDO), वाहिद अहमद (मैसेंजर) और एसएस मास्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है और मुख्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। शिकायतकर्ता ने 2016–19 के सभी वित्तीय रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच की मांग भी की है।

नए नोट छपाई का ठेका चीन को—काठमांडू के फैसले से भारत-नेपाल सीमा विवाद फिर गरमाया

नेपाल  नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) ने चाइना बैंक नोट प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन को 50, 500 और 1,000 के नए नोट डिजाइन करने, छापने और सप्लाई करने का ठेका दिया है। एनआरबी के प्रवक्ता गुरु प्रसाद पौडेल ने कहा कि चीनी कंपनी को 9 महीने के भीतर नोट सौंपने होंगे। चीनी कंपनी डिजाइन तैयार करती है जिसकी मंजूरी के बाद छपाई होती है। यह कंपनी सबसे कम मूल्य की बोली के आधार पर चुनी गई है और पहले भी नेपाल के 5, 10, 100 और 500 रुपये के नोट छाप चुकी है।   चीनी कंपनी को 43 करोड़ के नेपाली रुपये के 1,000 के नोट डिजाइन और छपाई के लिए पत्र मिला था। 1 हजार के नए नोट पर नेपाल का राष्ट्रीय फूल रोडोडेंड्रॉन (लाली गुरांस) के 7 चित्र होंगे, जो देश के सात प्रांतों को दर्शाते हैं। इस पर वर्तमान गवर्नर प्रोफेसर डॉ. बिश्वनाथ पौडेल का साइन भी होगा। इसके चलते भारत के साथ नक्शा विवाद फिर से चर्चा में आ गया है। बीते गुरुवार को नेपाल के केंद्रीय बैंक ने नए राष्ट्रीय नक्शे वाले 100 रुपये के नोट जारी किए, जिसमें कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा क्षेत्र शामिल हैं। ये क्षेत्र महाकाली नदी के पूर्व में स्थित हैं, जिन पर भारत दावा करता है। कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा पर विवाद नेपाल का दावा है कि ये इलाके 1816 के सुगौली संधि के तहत उसके क्षेत्र में आते हैं। ये विवादित क्षेत्र मई 2020 में केपी शर्मा ओली सरकार की ओर से नेपाल के राजनीतिक नक्शे में शामिल किए गए थे, जिसे बाद में संसद ने भी मंजूरी दी। उस समय भारत ने बदले नक्शे की कड़ी आलोचना की थी, इसे एकतरफा और अस्वीकार्य विस्तार बताया गया। दूसरी ओर, एनआरबी के अधिकारी कहते हैं कि नेपाल के 1 और 2 रुपये के सिक्के पिछले दो वर्षों से संशोधित नक्शे के साथ ढाले जा चुके हैं।