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जगद्गुरु रामभद्राचार्य का संभल में प्रवचन: कल्कि अवतार और सतयुग पर बड़ा वक्तव्य

संभल अक्सर अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने एक और विवादित बयान दिया है. उन्होंने कहा कि भगवान कल्कि के अवतार लेने के बाद सतयुग का आरंभ होगा और उसमें केवल सनातनी ही रहेंगे. टीवी9 डिजिटल से बात करते हुए जगतगुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि भगवान कल्कि के अवतार के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा. थोड़ी देर लगेगी, लेकिन भगवान विष्णु के 10वें और अंतिम कल्कि अवतार के साथ सतयुग का आरंभ होगा. अगर मुसलमानों की कन्वर्ट होने की इच्छा नहीं हुई तो? जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने आगे कहा कि संभल में कल्कि पुराण व्याख्यान का आयोजन हो रहा है. विश्व में पहली बार कल्कि भगवान की कथा हो रही है. सतयुग की अवधारणा में कौन-कौन रहेंगे, क्या उसमें मुसलमानों सिख और ईसाइयों के लिए भी जगह होगी? इस सवाल पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि नहीं… जो सनातन धर्म का होगा, वही सतयुग में रहेगा. मौजूदा मुसलमानों का क्या होगा, इस सवाल पर उन्होंने कहा या तो कन्वर्ट होंगे या फिर गोविंदा नमो नमः होंगे. अगर मुसलमानों की कन्वर्ट होने की इच्छा नहीं हुई तो? इस पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि अपने आप कल्कि भगवान इच्छा जगा देंगे. SC-ST के आरक्षण पर क्या बोले रामभद्राचार्य? वहीं जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने एक बार फिर से दोहराया कि जाति आधार पर कहीं भी आरक्षण नहीं होना चाहिए, बल्कि आर्थिक आधार पर आरक्षण होना चाहिए. SC और ST को जाति के आधार पर आरक्षण न देने के बयान पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि मैंने सरकार से SC और ST को जाति के आधार पर आरक्षण न देने की मांग कर दी है. जाति के आधार पर आरक्षण नहीं मिलना चाहिए. यदि आप जातिवाद को नष्ट करना चाहते हैं तो जाति के आधार पर आरक्षण क्यों होगा? ‘गुड़ खाओ और गुलगुले से परहेज करो’. मीडिया ने जब उनसे पूछा कि क्या आपकी मांग पर सरकार ने कोई आश्वासन दिया है? इस पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि सरकार क्या आश्वासन देगी. सरकार तो वोट बैंक चाहती है, लेकिन हमने कहा है. क्या मौजूदा सरकार आरक्षण को हटाने के पक्ष में नहीं है. इस सवाल पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि कोई बात नहीं. हमारा कोई न कोई पक्ष जीतेगा. संभल में कल्कि महोत्सव का आगाज दरअसल, संभल जिले में आज 1 से 7 दिसंबर तक चलने वाले कल्कि महोत्सव का आगाज हुआ है. कल्कि महोत्सव के आयोजक कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम के विशेष आमंत्रण पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ‘विश्व की पहली’ कल्कि कथा करेंगे. कल्कि कथा शुरू होने से पहले महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली और यज्ञशाला की परिक्रमा की. ‘WIFE’ को लेकर दिया था विवादित बयान इस मौके पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि मैं कोई विवादित वक्तव्य नहीं देता. मैं कोई भी अशास्त्रीय और अप्रामाणिक वक्तव्य नहीं देता. धर्माचार्यों को संस्कृत पढ़नी चाहिए, इसमें मैने कुछ भी गलत नहीं बोला. ‘WIFE’ की परिभाषा को लेकर उठे विवाद परजगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि ‘WIFE’ को लेकर मैने जो बोला, वो मैं नहीं अंग्रेज बोलते हैं. ये बात विदेशी कहते हैं. हमारी भारतीय संस्कृति में औरत को पत्नी, मां और बहन माना गया, जबकि वहां पत्नी को ‘WIFE’ और ‘बेबी’ कहा जाता है. हमारी संस्कृति में महिलाओं को देवी कहा गया- रामभद्राचार्य जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने आगे कहा कि जो पतन से बचा ले, वही पत्नी होती है. विदेशी संस्कृति में महिलाओं को ‘बेबी’ और ‘बीवी’ कहा गया, जबकि हमारी संस्कृति में देवी कहा गया है. हमारे यहां डाइवोर्स नहीं है, जबकि विदेशी संस्कृति में डायवोर्स होता है. हमारे यहां पत्नी नहीं धर्मपत्नी कहा जाता है. टीवी9 डिजिटल से बात करते हुए जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि यह व्याख्या मेरी नहीं विदेशियों की है. शेक्सपियर का भी मैंने उदाहरण दिया, मैंने सबके उदाहरण दिए. जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया गया. बिना संस्कृत ज्ञान के उपदेश देना गलत जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने आगे कहा कि मैं जगद्गुरु हूं. आज की तारीख में जितने भी जगद्गुरू गुरु हैं, किसी भी जगद्गुरू ने तीन भाष्य नहीं लिखा, लेकिन मैंने लिखा. मैं सभी सनातनी को गीता दिवस की बधाई देता हूं. जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि मैं आज फिर से कहता हूं कि सभी आचार्यों को संस्कृत आनी चाहिए, उसका ज्ञान उन्हें होना चाहिए. बिना संस्कृत ज्ञान के उपदेश देना गलत है. मैं जगद्गुरू भी हूं और आचार्य भी हूं. मैं ये अहंकार में नहीं बोल रहा हूं. मैंने विदेशी संस्कृति और भारतीय संस्कृत का अंतर बताया. अपने विरोधियों को जवाब देते हुए जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि मेरी प्रतिभा को धुमिल करने के लिए जयचंद मुझे बदनाम करते हैं. ‘हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार’.  

दर वृद्धि का विरोध उग्र: पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बरसाई लाठियाँ

दुर्ग शहर के पटेल चौक पर आज भूमि की गाइडलाइन दर और रजिस्ट्री दर में वृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले लोगों ने चक्का जाम कर दिया। इस दौरान पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए लाठीचार्ज किया। प्रदर्शन का नेतृत्व मनोज राजपूत, बिल्डर्स एंड डेवलपर्स के संचालक द्वारा किया जा रहा था। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नई गाइडलाइन दर और रजिस्ट्री दर में वृद्धि से आम जनता और छोटे व्यवसायियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। आज सुबह से ही कई वाहन मार्ग अवरुद्ध रहे, जिससे शहर के महत्वपूर्ण मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस ने पहले चेतावनी देने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने मार्ग खाली नहीं किया, जिसके बाद अधिकारियों ने कड़ी कार्रवाई करते हुए लाठीचार्ज किया। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों को मामूली चोटें आई हैं। इससे पहले भी यहां व्यापारियों का जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला था, जब प्रदेश अध्यक्ष किरण देव के काफिले को रोककर व्यापारियों ने विरोध जताया था। प्रशासन ने उस समय भी संयम बरतने और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश की थी।

AIIMS से महिपालपुर तक जाम मुक्त कॉरिडोर की शुरुआत, दिल्ली–गुरुग्राम यात्रा होगी बेहद आसान

गुरुग्राम  दिल्ली और गुरुग्राम के बीच यात्रा को आसान बनाने की दिशा में केंद्र सरकार एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर तेजी से आगे बढ़ रही है. एम्स से गुरुग्राम होते हुए महिपालपुर मार्ग पर प्रस्तावित लगभग 30 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे की डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करने की जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंसल्टेंट कंपनी आरसीटी को सौंपी गई है. कंपनी डेढ़ से दो महीने के भीतर रिपोर्ट सौंप देगी, जिसके आधार पर तय होगा कि मार्ग का कौन-सा हिस्सा भूमिगत रहेगा और कहां एलिवेटेड स्ट्रक्चर बनाया जाएगा. इस एक्सप्रेसवे के बन जाने के बाद एम्स से गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड की दूरी महज 25 से 30 मिनट में तय हो सकेगी. वर्तमान में यही दूरी तय करने में दो घंटे तक लग जाते हैं, जबकि एम्स से गुरुग्राम के सिरहौल बॉर्डर तक जाने में ही डेढ़ घंटे का समय लगता है. नई सड़क से न सिर्फ ट्रैफिक दबाव कम होगा, बल्कि दिल्ली-गुरुग्राम के बीच मौजूदा मार्गों पर भी भीड़ का बोझ घटेगा. फरीदाबाद रोड से होगा कनेक्शन एक्सप्रेसवे को गुरुग्राम में गांव घाटा के पास गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड से जोड़ा जाएगा. इससे दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद- तीनों शहरों के बीच कनेक्टिविटी और बेहतर हो जाएगी. यही नहीं, नोएडा, मेरठ, गाजियाबाद और मुरादाबाद वालों को भी इससे फायदा होगा. मेरठ से गुरुग्राम सिग्नल फ्री वहीं, मेरठ से सराय काले खां तक दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से आसानी से पहुंच सकते हैं. इसके बाद एक्सप्रेसवे के समाप्त होने वाली जगह से लेफ्ट लेकर करीब 2 किलोमीटर बाद डीएनडी फ्लाइओवर पर जाएंगे और बिना रेड लाइट एम्स पहुंचेंगे. यहां से गु्रुग्राम के लिए बनने वाले नए एलिडवेटेड रोड की मदद से लोग बिना किसी रुकावट और सिग्नल के गुरुग्राम पहुंच जाएंगे. इस तरह इससे नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, मेरठ के लोगों को भी फायदा होगा. 5 हजार करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट प्रारंभिक फिजिबिलिटी रिपोर्ट में परियोजना को व्यवहार्य पाया गया है, जिसके बाद एनएचएआई ने औपचारिक रूप से डीपीआर तैयार करने का काम सौंप दिया है. इस बड़े प्रोजेक्ट पर लगभग 5,000 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है. डीपीआर पूरी होते ही निर्माण कार्य को मंजूरी देने की प्रक्रिया तेज कर दी जाएगी. उम्मीद है कि यह एक्सप्रेसवे दिल्ली-एनसीआर में यात्रा को आसान बनाते हुए ट्रैफिक प्रबंधन में गेम-चेंजर साबित होगा. यह नई सड़क जहां आम यात्रियों के लिए राहत लेकर आएगी, वहीं स्वास्थ्य, बिजनेस और आपातकालीन सेवाओं की मूवमेंट को भी नई गति मिलेगी. सरकार की यह पहल दिल्ली-गुरुग्राम की कनेक्टिविटी को भविष्य के लिए और भी आरामदायक बनाएगा.  

सरकार का बड़ा फैसला: हरियाणा में 20 IAS अधिकारियों के तबादले, जानें किसे कौन-सी अहम पोस्ट मिली

हरियाणा  हरियाणा सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए 20 आईएएस अधिकारियों के तबादले के आदेश जारी किए हैं। यह फेरबदल तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है, जिसका उद्देश्य राज्य के प्रशासनिक तंत्र को और मजबूत बनाना बताया जा रहा है। सरकार ने इस तबादले के जरिए कई महत्वपूर्ण पदों पर नए चेहरों को जिम्मेदारी सौंपी है, जिसमें कुछ अधिकारियों को उनके वर्तमान कार्यभार के साथ अतिरिक्त ड्यूटी भी सौंपी गई है। 

MP दौरे पर उमाभारती का बड़ा आरोप: भारी भ्रष्टाचार… लोगों में आक्रोश चरम पर

भोपाल मध्य प्रदेश में एक बार फिर यात्रा पर निकलीं पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का कहना है कि 'भारी भ्रष्टाचार' और 'सुविधाओं की असमानत' ने लोगों के अंदर आग जला दी है। टीकमगढ़ जिले में मां के मायके से अपनी मायके तक की यात्रा कर रहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि उनकी यह यात्रा अराजनैतिक है। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री मोहन यादव से इन मुद्दों पर बात करेंगी। हाल ही में भाजपा की फायर ब्रांड नेता ने मुख्यमंत्री की कई चुनौतियां गिनाईं थीं, लेकिन भरोसा जताया था कि वह इनसे निपटने में सक्षम हैं।   पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता ने सोमवार को एक्स पर अपनी यात्रा के बारे में कुछ जानकारियां देते हुए कहा कि वह मां के मायके से उनकी सुसराल के बीच तीन दिन की यात्रा पर हैं। उन्होंने लिखा, 'मेरी मां की जन्म भूमि जिला टीकमगढ़ के गरोली ग्राम से 30 नवंबर को शुरू हुई यह तीन दिन की यात्रा है जो कल मेरे ग्राम डूंडा में समाप्त होगी जहां मेरी मां ब्याह के आई थीं। मेरे मां के नाम की यह यात्रा पूर्णतया अराजनैतिक, भावनात्मक एवं प्रेरणास्पद है। यह यात्रा वाहन से है जब कोई गांव आता है तब मैं वाहन से उतरकर थोड़ा पैदल चलती हूं।' झांसी से आगामी लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर कर चुकीं उमा भारती ने कहा, 'यह यात्रा तो मुझे फिर से जन्म दे रही है।' पूर्व सीएम ने लगे हाथ राज्य में भ्रष्टाचार और असमानत की बात कहकर कई अटकलों को हवा दे दी है। उमा भारती ने कहा, 'भारी भ्रष्टाचार एवं सुविधाओं की असमानता ने लोगों के अंदर आग जला दी है, मैं इस विषय पर भोपाल पहुंच कर मुख्यमंत्री मोहन यादव जी से भी बात करूंगी।' एक पखवाड़े पहले उमा भारती ने मौजूदा सरकार के दो साल के कार्यकाल को लेकर कहा था कि मोहन यादव जी के सामने कई चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा था कि सरकार के सामने कई चुनौतियां हैं जैसे, 'मध्य प्रदेश का आधुनिकीकरण, मध्य प्रदेश में हुए निवेशों का धरातल पर आना, उनसे रोजगारों का सृजन होना, किसानों के द्वारा गौ पालन और गौ वंश आधारित कृषि उत्पादन में मध्य प्रदेश का अव्वल राज्य बनना, शराब नीति का ठीक से निरीक्षण करते रहना, सरकारी शिक्षा, सरकारी स्वास्थ्य की व्यवस्था में सुधार, भ्रष्टाचार मुक्त शासन, प्रशासन एवं पुलिस व्यवस्था।' उन्होंने कहा था कि मोहन यादव जी इन चुनौतियों से निपटने में सक्षम भी हैं। इसीलिए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने इनका भरोसा किया है। हम सबको विश्वास है कि वह इसमें खरे उतरेंगे।

राजस्थान पुलिस का बड़ा अलर्ट: साइबर अटैक से बचने के ये कदम अपनाएं

जयपुर साइबर अपराधियों ने राजस्थान में अब अपने ठगी के तरीके और ज्यादा घातक और खतरनाक बना लिए हैं। हू-ब-हू असली बैंक या शॉपिंग वेबसाइटों की तरह दिखने वाली वेबसाइट बनाकर ये लोगों के खाते साफ कर रहे हैं। राजस्थान पुलिस ने इन खतरों से लोगों को सावधान करने के लिए अलर्ट जारी किया है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम विजय कुमार सिंह ने बताया कि ठग अब हूबहू असली जैसी दिखने वाली नकली (क्लोन) वेबसाइटों का उपयोग कर रहे हैं। इन नकली लिंक्स को सोशल मीडिया, एसएमएस या ईमेल के माध्यम से भेजकर लोगों को असुरक्षित वेबपेज पर ले जाया जाता है, जहाँ उनकी निजी जानकारी और बैंक विवरण चोरी कर लिए जाते हैं, जिससे बैंक खातों या यूपीआई लिंक से धनराशि निकाल ली जाती है। वेबसाइट सुरक्षा की जांच: चार ज़रूरी कदम एडीजी सिंह ने आमजन को संभावित साइबर अपराध से सचेत रहने के लिए निम्नलिखित चार प्रमुख सुरक्षा सुझाव दिए हैं: 1. स्पेलिंग की बारीकी से जांच अनिवार्य: किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले डोमेन नेम की स्पेलिंग को बहुत ध्यान से देखें। साइबर अपराधी अक्सर एक या दो अक्षरों का हेरफेर कर असली जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइट बनाते हैं। 2. HTTPS और लॉक आइकन अवश्य देखें: सुरक्षित वेबसाइटों की पहचान उनके URL की शुरुआत में दिखने वाले HTTPS और एड्रेस बार में मौजूद ताले (लॉक) के आइकन से होती है। यदि ये सुरक्षा संकेत मौजूद नहीं हैं, तो उस पर अपना कोई भी वित्तीय या निजी विवरण दर्ज न करें। 3. गूगल सेफ ब्राउज़िंग (Google Safe Browsing) का करें उपयोग: किसी भी संदिग्ध लिंक की सुरक्षा जांचने के लिए https://transparencyreport.google.com/safe-browsing/search पर जा सकते हैं। इस पोर्टल पर लिंक पेस्ट करें और सुनिश्चित करें कि यह 'असुरक्षित', 'मालवेयर' या 'फिशिंग' तो नहीं दिखा रहा है। 4. गोपनीय जानकारी साझा करने से बचें: अपनी निजी जानकारी जैसे ओटीपी, आधार, पैन या बैंक विवरण किसी भी व्यक्ति या अज्ञात वेबसाइट से साझा न करें। रिपोर्टिंग और शिकायत के लिए हेल्पलाइन एडीजी सिंह ने बताया कि यदि फिर भी कोई घटना होती है तो संचार साथी के चक्षु पोर्टल https://sancharsaathi.gov.in/sfc/ पर तुरंत रिपोर्ट करें। यदि कोई व्यक्ति साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है तो इसकी सूचना निकटतम पुलिस स्टेशन/साइबर पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर दे। इसके अतिरिक्त सहायता के लिए साइबर हेल्प लाईन नम्बर 1930 या साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930/9257510100 पर संपर्क किया जा सकता है।

कुब्रा सैत ने बताया: एक्टिंग में सफल होने के लिए भावनाओं तक पहुँचना अनिवार्य

मुंबई  कुब्रा सैत हमेशा उस अंदरूनी दुनिया के बारे में बेबाकी से बात करती हैं, जो उनके अभिनय को आकार देती है। अपनी कच्ची, सच्ची परफॉर्मेंसेज़ और जटिल किरदारों में पूरा ढल जाने की क्षमता के लिए जानी जाने वाली कुब्रा अक्सर उस भावनात्मक अनुशासन पर बात करती हैं, जिसकी मांग एक्टिंग करती है। इस व्यक्तिगत अनुभव में, वह उस पल को याद करती हैं जब उन्होंने सच में समझा कि अपनी जिम्मेदारी के साथ, साहस के साथ, और पूरी सजगता के साथ भावनाओं तक पहुँचना क्या होता है।  उनके सफर की शुरुआत में मिली यह सीख आज भी यह उन्हें स्क्रीन के साथ जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। इस सिलसिले में अपनी बात रखते हुए वे कहती हैं, “एक्टर के तौर पर मैंने सीखा कि अगर आप अपनी भावनाओं तक पहुँचने के लिए तैयार नहीं हैं, तो आप एक्टर बन ही नहीं सकते। हालांकि यह भी हो सकता है कि उन भावनाओं तक पहुँचने के लिए जो रास्ता आप अपनाते हैं, वह बहुत खतरनाक हो, लेकिन आपको आगे बढ़ना ही होगा। मुझे याद है, मैंने यह बात अपने एक डायरेक्टर अनुराग कश्यप से सीखी। पहली बार मुझे कैमरे पर रोना था, और मुझे नहीं पता था कि मैं ये कैसे करूँगी। यह डर मेरे दिमाग में घर कर चुका था, तभी उन्होंने मेरी तरफ देखा और कहा, ‘हम यहाँ बैठेंगे, लाइनें पढ़ेंगे और बस खुद के साथ रहेंगे। हम तुम्हारे अंदर की उस खिड़की को खोलेंगे, ताकि भावनाएँ भीतर आ सकें।  और आज रात जाने से पहले हम उस खिड़की को फिर बंद भी करेंगे।’ यह बात मेरे भीतर बस गई। हम सभी के भीतर वह खिड़की होती है, जो हमारी भावनाओं की दुनिया तक पहुँचने का एक रास्ता होती है। उसे खोलने और बंद करने की क्षमता ही हमें संतुलित रखती है और हमें ज़िंदा रखती है। हालांकि अभिनय के बाहर, असल ज़िंदगी में, दुनिया हमेशा इतनी माइंडफुल नहीं होती इसलिए कभी-कभी खिड़की की बजाय पूरी बाँध खुल जाती है और हमारी भावनाएँ हम पर हावी हो जाती हैं।  आज की भागदौड़ भरी दुनिया में हम अक्सर अपने ही विचारों और अपने ही एक्सप्रेशंस में उलझ जाते हैं और हर चीज़ को ‘ट्रिगर’ कहने लगते हैं, जबकि कई बार हम बस चिढ़े हुए या परेशान होते हैं। यही ट्रिगर हमें हमारे अतीत में खींच ले जाता है, लेकिन चिढ़ और परेशानी वर्तमान की होती है। इस फर्क को समझते हुए मैंने अपने भीतर की उस खिड़की को पहचाना और इसीने मुझे एक एक्टर के तौर पर बचाया, एक इंसान के तौर पर मुझे ज़मीन से जोड़े रखा।” सच पूछिए तो कुब्रा की यह बात याद दिलाती है कि भावनाओं तक पहुँच पाना सिर्फ एक कलात्मक कौशल नहीं, बल्कि एक मानवीय अनुभव है, जिसमें जिम्मेदारी चाहिए।  एक्टर सिर्फ किसी सीन के लिए भावनाएँ उधार नहीं लेते, वे सीखते हैं कि उन्हें वापस कैसे रखा जाए, उस खिड़की को कैसे बंद किया जाए जिसे उन्होंने खोला था। जहाँ भावनाएँ हमें या तो भारी कर दें या इसे एक गलत नाम दे दिया जाए, ऐसी दुनिया में उनका यह विचार एक कोमल-सा मार्गदर्शन बन जाता है, यह समझने के लिए कि क्या हमारे अतीत से आता है और क्या हमारे वर्तमान का हिस्सा है, और कैसे इन दोनों के बीच संतुलन बनाया जाए। यदि आपको लगता है कि यह अभिनय का सबक है, जी नहीं, यह उससे कहीं बढ़कर, ज़िंदगी का सबक है।

शादी समारोह में हुई फायरिंग के मामले में गरमाई सियासत, सुखबीर बादल ने लगाए गंभीर आरोप

पंजाब  लुधियाना में बाथ कैसल मैरिज पैलेस में शादी के दौरान हुई फायरिंग के मामले में विपक्ष द्वारा सरकार को घेरा जा रहा है और सवाल खड़े किए जा रहे हैं। शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने इस मामले में मंत्रियों और एम.एल.ए. पर आरोप लगाते हुए एक्स पर एक पोस्ट डाली है।  एक्स पर डाली पोस्ट में सुखबीर बादल ने लिखा कि ''पंजाब बणया गैंगलैंड, बीती रात लुधियाना के एक शादी समारोह में हुई गोलीबारी में कई जानें चली गई और कई लोग घायल हो गए। मौके के चश्मदीदों के अनुसार सरकार के एक मंत्री के साथ आए लोगों ने गोलियां चलाई है जो कि गंभीर जांच का विषय है। आप सरकार के विधायक और मंत्री दोस्ती निभाते हुए गैंगस्टरों को शादियों में अपने साथ लेकर जाते हैं तो पंजाब में अमन-कानून की स्थिती का जायजा आप खुद ही लगा सकते हो। भगवंत मान ने रंगले पंजाब को गैंगलैंड बना कर रख दिया है, आए दिन हत्या और लूटपाट हो रही है पर सरकार को कोई फिक्र नहीं। इस घटना में जान गंवाने वालों के परिवारों से मेरी दिल से संवेदना है और  घायलों के जल्दी ठीक होने की प्रार्थना करता हूं।''  इसके साथ ही उन्होंने एक चश्मदीद का वीडियो भी पोस्ट के साथ शेयर किया है।     

SC का बड़ा आदेश: डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी पर CBI जांच, बैंकों की संलिप्तता की होगी पड़ताल

नई दिल्ली  देश भर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बहुत सारे फ्रॉड हुए हैं। कभी दारोगा, कभी कमिश्नर तो कभी सीबीआई, ईडी जैसी एजेंसियों के नाम पर डराकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट करने की धमकियां दी गई हैं और उससे बचाने के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। ऐसे मामलों को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट सख्त हुआ है और उसने सीबीआई से ऐसे सारे मामलों की जांच करने का आदेश दिया है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि एजेंसी देश भर में हुए डिजिटल फ्रॉड के केसों की जांच करे। यही नहीं अदालत ने एजेंसी को बैंकों की भूमिका की जांच करनी होगी। इसके लिए एजेंसी को फ्रीहैंड है।

कृषि के डिजिटल इकोसिस्टम के विकास से विदेशी बाजारों तक अन्नदाता के उत्पादों की पहुंच- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

आर्थिक क्रांति के ध्वजवाहक बन रहे किसान-  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  कृषि के डिजिटल इकोसिस्टम के विकास से विदेशी बाजारों तक अन्नदाता के उत्पादों की पहुंच-  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों से अन्नदाता की आय में वृद्धि, एकीकृत प्लेटफॉर्म से किसानों को मिल रही सटीक जानकारी उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा कोल्ड स्टोरेज, गांवों में भी हो रहा है प्रोसेसिंग पार्क का निर्माण लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अन्नदाताओं की सहूलियत और उनकी समृद्धि के लिए लगातार प्रयासरत रहते हैं और समय समय पर कार्यों और योजनाओं की समीक्षा करते रहते हैं। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश में किसान अब पहले की तुलना में लगातार समृद्धि के वाहक बन रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने के मिशन से किसानों को भी जोड़ने का काम किया है। मुख्यमंत्री के दिशा निर्देश से डिजिटल कृषि नीति पर जोरों से काम हो रहा है। अन्नदाता किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं। वो न केवल नागरिकों का पेट पालते हैं बल्कि अर्थव्यवस्था में भी योगदान करते हैं। वर्तमान डिजिटल क्रांति के युग में किसान पीछे न छूट जाएं इसके लिए डिजिटल एग्रीकल्चर इकोसिस्टम के विकास के लिए विस्तृत योजना बनाई गई है।  अन्नदाता की आय में डिजिटल एग्रीकल्चर इकोसिस्टम से वृद्धि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार अन्नादाता को कृषि संबंधित डाटा एकीकृत प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करा रही है। किसान अब बीज, उर्वरक, मौसम, सिंचाई, बीमा, बाजार, लॉजिस्टिक और फसल से संबंधित डाटा आसानी से प्राप्त कर रहे हैं। डिजिटल कृषि नीति को अतंराष्ट्रीय तकनीक से जोड़ा गया है। उत्तर प्रदेश में डिजिटलीकरण, ई-मार्केट लिंकिंग, वेयरहाउसिंग, प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट उन्मुख नीतियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई जान दे रही हैं। डिजिटल कृषि के विकास पर योगी सरकार द्वारा 4000 करोड़ की परियोजना को तेज गति से लागू करने के निर्देश दिए गए है।  कृषि मंडियों को तकनीक से जोड़ने पर किसानों को लाभ  उत्तर प्रदेश में पहले कृषक मंडियां पुराने ढर्रे पर चलती थीं जिसमें तकनीक का कोई विशेष योगदान नहीं था। इसकी वजह से अन्नदाता और खरीदारों के बीच पारदर्शी प्लेटफॉर्म की कमी थी। पुरानी व्यवस्था में बिचौलिये सारा फायदा उठा ले जाते थे और किसानों को अपनी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाता था। योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों का परिणाम है कि मंडियों का अब डिजिटलीकरण कर दिया गया है कि जिससे अन्नदाता को फसल और मौसम की सटीक जानकारी मिल रही है। इससे किसानों की आय में भी वृद्धि हो रही है।   ग्रामीण क्षेत्रों में कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउस सुविधाओं का विकास उत्तर प्रदेश में 2017 से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की पहुंच कोल्ड स्टोरेज तक सीमित थी। 2017 में यूपी की बागडोर संभालने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउस को बढ़ाने पर जोर दिया। देश के कुल स्टोरेज में से 40% कोल्ड स्टोरेज उत्तर प्रदेश में हैं। इस समय प्रदेश में लगभग 2500 कोल्ड स्टोर हैं। इसकी कुल भंडारण क्षमता 1.55 करोड़ मीट्रिक टन तक पहुंच चुकी है। वर्तमान सरकार कोल्ड स्टोरेज के आधुनिकीकरण पर जोर दे रही है और इसे किसानों की आय से भी जोड़ा गया है। प्रदेश में पीपीपी मॉडल से बड़ी संख्या में नए कोल्डस्टोरेज बन रहे हैं।  प्रोसेस्ड कृषि उत्पादों से वैल्यू एडिशन और नई मार्केटिंग संभावनाएं बढ़ी उत्तर प्रदेश में कृषि प्रसंस्करण कृषि सेक्टर की नई संभावना बनकर उभर रही है। योगी सरकार का अन्नदाता की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान है। किसानों का उत्पादन अब खेतों से सीधे विदेश तक पहुंच रहा है। छोटे-छोटे गांवों में भी एग्रो प्रोसेस यूनिट, फूड पार्क और ODOP आधारित कृषि उत्पादों पर विशेष ध्यान है। खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अनुसार प्रदेश में लगभग 75 हजार खाद्य प्रसंस्करण इकाईयां स्थापित हैं। वहीं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति के तहत 428 इकाइयां लगाई जा चुकी हैं। सरकार ने हर जिले में एक हजार से अधिक प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के लक्ष्य के साथ खाद्य प्रसंस्करण विभाग हर गांव में कम से कम इकाई की स्थापना की योजना बना रहा है। इससे अन्नदाता को अपने कृषि उत्पादों का उचित दाम मिलेगा साथ ही किसानों-ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी मिल सकेगा।