samacharsecretary.com

अल फलाह यूनिवर्सिटी में फैकल्टी की कमी से छात्रों को परेशानी, 10 प्रोफेसर छोड़कर गए, MBBS फर्स्ट ईयर स्टूडेंट्स को छुट्टी

फरीदाबाद दिल्ली ब्लास्ट के आतंकी मॉड्यूल का सेंटर पॉइंट बनी फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी इन दिनों फैकल्टी की कमी का सामना कर रही है। इसके चलते MBBS फर्स्ट ईयर के छात्रों को एक सप्ताह की लीव पर घर भेजा जा रहा है। यूनिवर्सिटी के अंदर आतंकी नेटवर्क खड़ा कर रहे लेडी आतंकी डॉ. शाहीन सईद और डॉ. मुजम्मिल शकील के गिरफ्तार होने के बाद से लगातार स्टाफ यहां से जॉब छोड़कर जा रहा है। वहीं, यूनिवर्सिटी में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए नई मुसीबत खड़ी हो गई है। दिल्ली ब्लास्ट के बाद से ही यूनिवर्सिटी पर जांच एजेंसियों का शिकंजा कसता जा रहा है। यूनिवर्सिटी सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली ब्लास्ट के बाद से ही यूनिवर्सिटी सेटल नहीं हो पा रही है। अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावेद सिद्दीकी और डॉक्टरों की गिरफ्तारी ने यहां प्रोफेसरों के अंदर डर बैठा दिया है। इन गिरफ्तारियों के बाद यहां से करीब 10 मेडिकल प्रोफेसर अपनी जॉब छोड़कर जा चुके हैं। मेडिकल प्रोफेसरों के अलावा दूसरे विभागों में काम करने वाला स्टाफ भी धीरे-धीरे यहां से निकल रहा है, जिसके चलते मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों की प्रॉपर क्लास नहीं लग पा रही है। यूनिवर्सिटी की तरफ से MBBS फर्स्ट ईयर के छात्रों को एक सप्ताह की अचानक से लीव देकर घर भेजा जा रहा है। हालांकि एक सप्ताह बाद उन्हें वापस यूनिवर्सिटी में जॉइन करने की बात भी कही जा रही है। यूनिवर्सिटी सूत्रों के अनुसार, इस बात से कोई पैनिक न हो, इसलिए सभी को बोला गया है कि वे बाहर जाकर इसे सर्दी की छुट्टी बताएं। दिल्ली ब्लास्ट के बाद से हालात बिगड़े दिल्ली ब्लास्ट के बाद से ही अल-फलाह यूनिवर्सिटी में अफरा-तफरी का माहौल बना है। जांच एजेंसी लगातार यूनिवर्सिटी के चक्कर लगा रही है। लेडी आतंकी शाहीन और मुजम्मिल को यूनिवर्सिटी में लाकर निशानदेही कराई गई। इन दोनों के संपर्क में यूनिवर्सिटी के जितने भी डॉक्टर और दूसरा स्टाफ था, सभी से जांच एजेंसी पूछताछ कर चुकी है। सेफ रहने की कोशिश में छोड़ रहे जॉब यूनिवर्सिटी सूत्रों ने बताया कि 10 के करीब मेडिकल प्रोफेसर अपना रिजाइन देकर जा चुके हैं। जो केवल इसलिए गए है ताकि भविष्य में उन पर कोई आंच ना आ सके। स्टाफ में कई सारे लोग ऐसे हैं, जो पहले परिवार के साथ यहां पर रह रहे थे, लेकिन पहले उन्होंने अपने परिवार को यहां से निकाला और बाद में खुद रिजाइन देकर चले गए। इनमें से अधिकतर लोग ऐसे है, जो छुट्‌टी लेकर घर गए थे और लौटने की बजाय इमेल के माध्यम से अपना रिजाइन भेज दिया।

गोल्डन टेंपल पहुंची दिल्ली CM रेखा गुप्ता, हरिमंदिर साहिब से रामतीर्थ तक आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया

अमृतसर  दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता आज श्री हरमंदिर साहिब पहुंची और माथा टेका। उन्होंने श्री हरमंदिर साहिब की परिक्रमा में स्थित छबील पर जुठे बर्तनों को साफ करने की सेवा की जहां मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा भी उनके साथ मौजूद रहे। मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि आज श्री गुरु हरिमंदिर साहिब में माथा टेकने आए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अरदास की थी कि गुरु तेगबहादुर जी का 350 साला आयोजित कार्यक्रम सुख-शांति के साथ पूर्ण हो। इसके पूर्ण होने पर वह श्री गुरु रामदास जी के दर पर आए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि गुरु तेग बहादुर साहिब का 350 शहीदी पर्व पूरे देश में मनाया जाना तय हुआ तो हमने दिल्ली में, जहां गुरु साहिब की शहादत हुई, वहीं बड़ा आयोजन किया। पूरी तैयारी के साथ दिल्ली सरकार ने व दिल्ली एसजीपीसी ने दिल्ली में समागम किया। जहां लोगों व श्रद्धालुओं ने सिर निवाया। हमने शुरुआत में यही सोचा था कि ये कार्यक्रम गुरु साहिब के आशीर्वाद से ठीक-ठाक हो, कोई भी दिक्कत या परेशान किसी भी श्रद्धालु को ना आए। कुछ दिन पहले ही लाल किले के पास आतंकी हमला हुआ था, इसलिए मन में थोड़ा डर था। लेकिन, गुरु साहिब की शहादत को नमन करने के लिए दिल्ली सरकार ने ये कार्यक्रम रखा और उनके आशीर्वाद से ये कार्यक्रम सही तरीके से हुआ। उनकी शहादत को आने वाली पीढ़ियां भी याद रखें, इसलिए पूरा साल दिल्ली सरकार अलग-अलग कार्यक्रम करवाएगी। CM रेखा गुप्ता क्या बोली? दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि लाल किले में आयोजित 350 सालों की शताब्दी समागम के बाद वे विशेष रूप से गुरुद्वारा साहिब में शुकराना करने आए हैं। रेखा गुप्ता ने कहा कि जब दिल्ली में ब्लास्ट हुआ था, उस समय मन बहुत घबरा गया था और उन्होंने गुरु साहिब के आगे अरदास की थी कि इतना बड़ा दिहाड़ा सुरक्षित और शांति से मन जाए। गुरु साहिब की कृपा से शताब्दी बड़े ही सुचारू और पवित्र ढंग से मनाई गई, और संगत ने भरपूर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि दिल्ली कमेटी के सहयोग से यह ऐतिहासिक दिहाड़ा मनाया गया। साथ ही, गुरु साहिबान की जीवनी और इतिहास पर आधारित कई पुस्तकों का प्रकाशन भी किया गया है, जिससे बच्चों को अपने विरसे और इतिहास से जोड़ने में मदद मिलेगी। सीस गंज साहिब, जहां गुरु साहिब का महान बलिदान हुआ और लाल किला, जहां इतिहास गवाह है, इन दोनों स्थानों ने इस शताब्दी समागम को और भी विशेष बना दिया।  

चंडीगढ़ में बकाया टैक्स पर कार्रवाई, नगर निगम ने 20 हजार से ज्यादा डिफॉल्टर्स के खिलाफ कुर्की नोटिस जारी किया

चंडीगढ़  चंडीगढ़ नगर निगम ने प्रॉपर्टी टैक्स डिफॉल्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। निगम ने प्राइवेट प्रॉपर्टी मालिकों पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए 20,000 रुपये से अधिक टैक्स बकाया वाले डिफॉल्टरों को प्रॉपर्टी अटैचमेंट नोटिस भेजना शुरू कर दिया है। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि पहले 50,000 रुपये और 30,000 रुपये से अधिक बकाया वाले टैक्स डिफॉल्टरों को नोटिस जारी किए गए थे। अब तीसरी श्रेणी में 20,000 रुपये से अधिक बकाया वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। पानी के कनेक्शन पर भी सख्ती नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय में टैक्स जमा न कराने पर प्रॉपर्टी के पानी के कनेक्शन काटने के आदेश दिए जाएंगे। इसके साथ ही, जरूरत पड़ने पर प्रॉपर्टी को सीज या बेचने का भी अधिकार निगम के पास है। पंजाब म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट 1994 के तहत यह कार्रवाई वैध है। कॉर्पोरेशन कमिश्नर अमित कुमार ने सभी स्तर के टैक्स डिफॉल्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वर्तमान में नगर निगम पर कुल ₹170 करोड़ से अधिक का बकाया है, जिसमें से करीब ₹100 करोड़ मामले कोर्ट में पेंडिंग हैं। इस साल टैक्स कलेक्शन में रिकॉर्ड इस वित्तीय वर्ष में अब तक नगर निगम ने प्रॉपर्टी टैक्स के रूप में लगभग ₹82 करोड़ वसूल किए हैं, जो पिछले वर्षों की तुलना में सबसे अधिक है। पिछले पूरे वित्तीय वर्ष में केवल ₹59 करोड़ का कलेक्शन हुआ था। अधिकारियों का मानना है कि वर्ष के अंत तक यह राशि ₹100 करोड़ को पार कर सकती है। पानी कनेक्शन काटने के आदेश टैक्स न भरने वाले प्रॉपर्टी मालिकों का पानी का कनेक्शन काटने के आदेश तक जारी किए गए हैं। निगम ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि निर्धारित समय में टैक्स जमा नहीं किया गया, तो संबंधित प्रॉपर्टी को अटैच किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर उसकी बिक्री तक की कार्रवाई भी की जाएगी। पंजाब म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट 1994 नगर निगम को प्रापर्टी अटैच करने तथा बेचने दोनों का अधिकार देता है। निगम कमिश्नर अमित कुमार ने सभी तरह के टैक्स डिफाल्टरों के खिलाफ सख्ती बरतने के निर्देश जारी किए हैं। वर्तमान में नगर निगम के पास टैक्स डिफाल्टरों का कुल बकाया 170 करोड़ रुपए से अधिक है, जिसमें से करीब 100 करोड़ रुपए के मामले अदालतों में लंबित हैं। 100 करोड़ पार होने की उम्मीद नगर निगम ने इस वर्ष अब तक करीब 82 करोड़ रुपए प्रापर्टी टैक्स की वसूली कर ली है, जो अब तक की सबसे अधिक वसूली मानी जा रही है। पिछले पूरे वित्त वर्ष में केवल 59 करोड़ रुपए टैक्स जमा हुआ था, लेकिन इस बार सख्ती और लगातार कार्रवाई के चलते रिकॉर्ड वसूली हुई है। अभी वित्त वर्ष के लगभग पांच महीने शेष हैं, ऐसे में निगम अधिकारियों का कहना है कि टैक्स वसूली 100 करोड़ रुपए से अधिक पहुंचने की पूरी संभावना है। करोड़ों का टैक्स अब भी लंबित नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार सबसे बड़ा बकाये दार पंजाब यूनिवर्सिटी है, जिस पर करीब 60 करोड़ रुपए प्रापर्टी टैक्स बकाया चल रहा है। इसके बाद आईटी पार्क का नाम आता है, जिस पर लगभग 45 करोड़ रुपए का बकाया है। पीजीआई पर 23 करोड़ रुपए की देनदारी थी, जिसमें से हाल ही में 11 करोड़ रुपए निगम को जमा करवाए गए हैं। इसी तरह यूटी इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट पर 16 करोड़ रुपए, गोल्फ क्लब पर 12 करोड़ रुपए और पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (PEC) पर 10 करोड़ रुपए का प्रापर्टी टैक्स बकाया दर्ज है। रेलवे स्टेशन ने अपनी देनदारी में से 2.98 करोड़ रुपए हाल ही में जमा करवा दिए हैं। पुराने बड़े डिफाल्टरों से हो रही वसूली नगर निगम नए टैक्स डिफाल्टरों पर कार्रवाई के साथ-साथ पुराने बड़े बकायेदारों से भी एरियर की वसूली तेज कर चुका है। पीजीआई ने अपनी लंबित देनदारी में से 11 करोड़ रुपए एरियर के तौर पर निगम को जमा कराए हैं, जबकि रेलवे विभाग ने भी 3 करोड़ रुपए की राशि अदा कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) स्कीम के तहत भी अधिकांश मामलों के निपटने की संभावना है, जिससे निगम की एरियर रिकवरी और अधिक बढ़ने की उम्मीद है। बड़े डिफॉल्टर और रिकवरी की कोशिशें नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार सबसे बड़ा डिफॉल्टर पंजाब यूनिवर्सिटी है, जिस पर लगभग ₹60 करोड़ का बकाया है। इसके बाद IT पार्क (₹45 करोड़), PGI (23 करोड़, जिसमें ₹11 करोड़ हाल ही में जमा हुए), UT इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट (₹16 करोड़), गोल्फ क्लब (₹12 करोड़) और Panjab Engineering College (PEC) (10 करोड़) शामिल हैं। हाल ही में रेलवे स्टेशन ने ₹2.98 करोड़ जमा किए हैं। पुराने बड़े डिफॉल्टरों से वसूली को भी जोर दिया जा रहा है। PGI ने ₹11 करोड़ का भुगतान किया है, जबकि रेलवे विभाग ने ₹3 करोड़ जमा किए हैं। निगम अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश मामलों का निपटारा वन टाइम सेटलमेंट (OTS) स्कीम के माध्यम से होने की उम्मीद है। नगर निगम की यह सख्ती प्रॉपर्टी टैक्स कलेक्शन को बढ़ाने और बकाया राशि वसूलने के उद्देश्य से की गई है।

रायपुर : नेचुरोपैथी भवन निर्माण के लिए दी 2 करोड़ 62 लाख रूपये की सौगात

रायपुर : नेचुरोपैथी भवन निर्माण के लिए दी 2 करोड़ 62 लाख रूपये की सौगात कुनकुरी नगर को स्वास्थ्य के क्षेत्र में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने  दिया बड़ा तोहफ़ा रायपुर कई प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, योग केंद्र और वेलनेस हब खुद को नेचुरोपैथी  कहते हैं। जो प्राकृतिक चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान करता है और बापू भवन इसका ऐतिहासिक घर है, जिसे गांधीजी ने अपनाया था। खासकर छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र का उद्देश्य प्राकृतिक उपचार, योग, आहार, मिट्टी स्नान और हर्बल दवाओं के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य प्रदान करना है।  जशपुर जिले के कुनकुरी नगर की स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने नेचुरोपैथी भवन निर्माण के लिए 2 करोड़ 62 लाख रुपए की मंजूरी प्रदान की है।           निर्माण कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। भवन तैयार हो जाने के बाद कुनकुरी नगरवासियों को प्राकृतिक चिकित्सा की अत्याधुनिक सुविधा अपने ही नगर में उपलब्ध होगी। यह भवन न सिर्फ लोगों को आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा की ओर प्रोत्साहित करेगा, बल्कि ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को उपचार के लिए बड़ी राहत भी देगा। अब बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर दराज जाने की आवश्यकता नहीं होगी। नगरवासियों ने इस दूरदर्शी निर्णय के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह सुविधा स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई दिशा और नई उम्मीद लेकर आएगी। स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई ऊंचाई को छूता जशपुर           मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले को स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई सौगातें मिल चुकी है। मेडिकल कॉलेज के लिए बड़ा कदम उठाते हुए वित्त विभाग से 359 करोड़ की सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है । इसी प्रकार 220 विस्तर अस्पताल के लिए 32 करोड़ की मंजूरी, नर्सिंग महाविद्यालय भवन के 8 करोड़ की मंजूरी, फिजियोथेरेपी महाविद्यालय के 14 करोड़ की मंजूरी, कल्याण आश्रम अत्याधुनिक चिकित्सालय भवन के लिए 35 करोड़ की मंजूरी, ग़िनाबहर में मातृत्व शिशु चिकित्सालय भवन निर्माण के 8 करोड़ की मंजूरी सहित कई सौगातें दी गई है, जो जिले वासियों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए वरदान साबित होंगी।

लाड़ली बहना योजना में 31वीं किस्त की घोषणा, 1.26 करोड़ महिलाओं के खाते में 1500 रुपये आएंगे

भोपाल  दिसंबर का महीना दस्तक दे चुका है। इसी के साथ मध्य प्रदेश की लाखों महिलाओं की निगाहें एक बार फिर से लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) की अगली किस्त पर टिक गई हैं। इस बार इस योजना की 31वीं किस्त जारी की जाएगी। इसके तहत 1.26 करोड़ महिलाओं के बैंक खातों में 1250 की राशि डाली जाती थी। वहीं 30वीं किस्त से बहनों के खाते में 1500 रुपए भेजे जा रहे हैं। इससे राज्य सरकार हर महीने योजना पर 1859 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर रही है। आपको बता दें कि ये महीना बहनों के लिए खास होने वाला है। चलिए आपको बताते हैं हम ऐसा क्यों कह रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 9 दिसंबर को छतरपुर जिले के राजनगर से सीएम मोहन यादव किस्त जारी कर सकते है।हालांकि अभी तक अधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। इससे पहले 12 नवंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिवनी से लाड़ली बहनों के खाते में 30वीं किस्त (1250+250= 1500 रू) के रूप में कुल 1857 करोड़ रूपये सिंगल क्लिक के माध्यम से अंतरित किए गए थे। इस योजना की शुरुआत जून 2023 में हुई थी, तब से अक्टूबर 2025 तक बैंक खातों में 44 हजार 917 करोड़ 92 लाख रू का अंतरण कर चुके हैं। जानिए किस जिले में कितनी लाड़ली बहनें     लाड़ली बहना योजना में सबसे अधिक लाभार्थी इंदौर जिले में हैं, जहाँ 4 लाख 40 हजार 723 महिलाओं को योजना का लाभ मिला है। इसके बाद सागर में 4 लाख 19 हजार 903, रीवा में 4 लाख 3 हजार 182, छिंदवाड़ा में 3 लाख 90 हजार 311, धार में 3 लाख 82 हजार 417, जबलपुर 3 लाख 81 हजार 848 ,बालाघाट जिले में 3 लाख 47 हजार 816, उज्जैन में 3 लाख 40 हजार 203, मुरैना में 3 लाख 33 हजार 821 ,छतरपुर में 3 लाख 24 हजार 454, खरगोन में 3 लाख 13 हजार 741, भोपाल में 3 लाख 9 हजार 20 तथा ग्वालियर जिले में 3 लाख 5 हजार 969 महिलाओं को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है।     राजगढ़ में 2 लाख 95 हजार 459, शिवपुरी में 2 लाख 87 हजार 943, देवास में 2 लाख 85 हजार 496, विदिशा में 2 लाख 74 हजार 946, भिंड में 2 लाख 72 हजार 343, बेतूल में 2 लाख 71 हजार 474 ,सिवनी जिले में 2 लाख 68 हजार 187, मंदसौर में 2 लाख 62 हजार 827, रतलाम में 2 लाख 50 हजार 176, रायसेन में 2 लाख 46 हजार 390, दमोह में 2 लाख 45 हजार 143, सीहोर में 2 लाख 42 हजार 717, और कटनी में 2 लाख 41 हजार 302 बहनों को राशि का लाभ मिला है।     बड़वानी में 2 लाख 37 हजार 60, गुना में 2 लाख 28 हजार 604, खंडवा में 2 लाख 16 हजार 372, नर्मदापुरम में 2 लाख 9 हजार 837, सिद्धी में 2 लाख 9 हजार 706, टीकमगढ़ में 2 लाख 7 हजार 79, नरसिंहपुर में 2 लाख 8 हजार 734 ,सिंगरौली जिले में 1 लाख 97 हजार 4, मंडला में 1 लाख 95 हजार 153, झाबुआ में 1 लाख 92 हजार 511, शहडोल में 1 लाख 88 हजार 729, पन्ना में 1 लाख 82 हजार 220, शाजापुर में 1 लाख 73 हजार 900, नीमच में 1 लाख 57 हजार 658, तथा अशोक नगर में 1 लाख 55 हजार 387 महिलाएँ इस योजना से लाभान्वित हुई हैं।     दतिया में 1 लाख 44 हजार 239, अनूपपुर में 1 लाख 26 हजार 54, अलीराजपुर में 1 लाख 23 हजार 492, आगर मालवा में 1 लाख 17 हजार 255, उमरिया में 1 लाख 9 हजार 113, श्योपुर में 1 लाख 8 हजार 673, और हरदा जिले में 93 हजार 516 बहनों को योजना की राशि का लाभ मिला है। निवाड़ी जिले में 80 हजार 157 महिलाओं को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है। 2023 में शुरू हुई थी लाड़ली बहना योजना     मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मई 2023 में लाड़ली बहना योजना शुरू की गई थी।इस योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था और फिर इसकी पहली किस्त 10 जून को जारी की गई थी।     लाड़ली बहना योजना का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है।     इसमें रक्षा बंधन पर अगस्त 2023, अगस्त 2024 और अगस्त 2025 में लाभार्थी महिलाओं को 250 रूपये की विशेष सहायता राशि तीन बार प्रदान की गई। 2023 अगस्त में राशि को 1000 से बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया ।     नवंबर 2025 में राशि में 250 की फिर वृद्धि की गई है और अब इस योजना के तहत 1500 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 18,000 रुपये मिलते हैं।लाड़ली बहनों को जून 2023 से नवंबर 2025 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 30 किश्तों का अंतरण किया गया है।     इस प्रकार योजना के आरंभ से अब तक 44,917.92 करोड़ रूपये की राशि का सीधा अंतरण लाभार्थी महिलाओं के खातों में किया जा चुका है।प्रदेश के सभी 52 जिलों में कुल 1,26,36,250 (एक करोड़ 26 लाख 36 हजार 250) महिलाओं को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है। लाड़ली बहना योजना में ये अपात्र     महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।जिनके या उनके परिवार के कोई सदस्य इनकम टैक्स देते हैं।     अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।     घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।जो खुद किसी और सरकारी योजना से हर महीने1250 रुपये या उससे ज्यादा की राशि पा रही हैं जिनके परिवार में कोई वर्तमान या पूर्व सांसद या विधायक हो।     जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी बोर्ड, निगम, मण्डल आदि का अध्यक्ष, संचालक या सदस्य हो।जिनके परिवार में कोई स्थानीय निकाय का चुना हुआ जनप्रतिनिधि हो (पंच और उपसरपंच को छोड़कर)।     जिनके परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में … Read more

पुतिन की यात्रा समाप्त, जेलेंस्की के आगमन से पहले भारत की कूटनीति सक्रिय

 नई दिल्ली रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सफल दिल्ली दौरे के बाद भारत ने कूटनीति की दूसरी सधी हुई चाल चली है. भारत अब यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को दिल्ली में होस्ट करने की योजना पर काम कर रहा है. कूटनीतिक हलकों में इसे भारत की विदेश नीति का बैलेंसिंग एक्ट माना जा रहा है. माना जा रहा है कि जनवरी 2026 में जेलेंस्की का दिल्ली दौरा हो सकता है, हालांकि अभी इस दौरे की तारीख तय नहीं हो सकी है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक भारत कई हफ्तों से यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय से संपर्क में है. भारत की य़े कोशिश राष्ट्रपति पुतिन के नई दिल्ली दौरे से पहले से ही चल रही है. इस बाबत भारतीय और यूक्रेनी अधिकारियों के बीच कई हफ़्तों से बातचीत चल रही है, और पुतिन के भारत आने से पहले ही नई दिल्ली ज़ेलेंस्की के ऑफिस के संपर्क में थी.  जेलेंस्की की यात्रा से भारत को रूस-यूक्रेन युद्ध के दोनों पक्षों के साथ जुड़े रहने की कोशिशों को बल मिलेगा. भारत इस नीति पर कई महीनों से चल रही है. यही वजह है कि जुलाई 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब मॉस्को गए और पुतिन से मिले, तो इसके एक महीने बाद ही अगस्त में पीएम मोदी ने यूक्रेन का दौरा किया था.  यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के प्रस्तावित दौरे का समय और दायरा कई बातों पर निर्भर करेगा. इसमें सबसे महत्वपूर्ण यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति योजना कैसे आगे बढ़ती है और युद्ध के मैदान में क्या होता है.  यूक्रेन की घरेलू राजनीति, जहां ज़ेलेंस्की की सरकार अभी एक बड़े भ्रष्टाचार घोटाले में फंसी होने के कारण दबाव में है. उसका भी इस प्रस्तावित दौरे पर असर पड़ सकता है.  खास बात यह है कि यूक्रेन का राष्ट्रपति अबतक सिर्फ तीन बार भारत आया है. ये मौके थे. 1992, 2002 और 2012.  पुतिन की यात्रा पर यूरोप की कड़ी नजर रही है. कई यूरोपीय दूतों ने भारत से मॉस्को पर युद्ध खत्म करने का दबाव डालने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने का आग्रह किया है. भारत ने लगातार कहा है कि बातचीत और कूटनीति ही आगे बढ़ने का एकमात्र सही रास्ता है.  इस बार भी राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भारत तटस्थ नहीं है, भारत शांति के पक्ष में है. यूक्रेन युद्ध पर भारत की नीति काफी पहले से रही है.  फरवरी 2022 में यूक्रेन- रूस के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से भारत पुतिन और ज़ेलेंस्की दोनों के संपर्क में रहा है. मोदी ने ज़ेलेंस्की से कम से कम आठ बार फोन पर बात की है, दोनों नेता अलग अलग प्लेटफॉर्म पर कम से कम चार बार मिल चुके हैं.  अगस्त 2024 में यूक्रेन दौरे पर गए पीएम मोदी ने ज़ेलेंस्की से कहा था, “हम युद्ध से दूर रहे हैं, लेकिन हम न्यूट्रल नहीं हैं, हम शांति के पक्ष में हैं. हम बुद्ध और गांधी की धरती से शांति का संदेश लेकर आए हैं.” भारत से हजारों सैकड़ों किलोमीटर दूर चल रहे यूक्रेन-रूस की लड़ाई की सीधा असर भारत की इकोनॉमी पर भी पड़ा है.  भारत की ओर से रूस से कच्चा तेल खरीदने की वजह से अमेरिका ने भारत पर 25 फीसदी पेनाल्टी टैरिफ लगा दिया है. 

नीतीश कुमार का बक्सर में घोषणा: बिहार में इंडस्ट्रीज के विकास की गति बढ़ेगी

बक्सर मुख्यमंत्री लगातार ऐसे कदम उठा रहे हैं, जिनसे बिहार में उद्योगों को बढ़ावा मिल सके. नावानगर में चल रही इकाइयों का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों, उद्योगों के विस्तार की संभावनाओं और रोजगार बढ़ाने जैसे मुद्दों पर अधिकारियों से विस्तार से बातचीत की.  नीतीश कुमार ने क्या कहा ?  उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास को और तेज किया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सके.  सीएम ने यहां प्लांट, बॉटलिंग प्लांट और एथेनॉल यूनिट का भी निरीक्षण किया. सबसे पहले उन्होंने वरुण बेवरेजेस लिमिटेड का दौरा किया और पेय पदार्थ बनने की प्रक्रिया को ध्यान से देखा और समझा.  नए गंगा पूल का किया सर्वेक्षण  इस दौरान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी भी उनके साथ मौजूद थे. इस क्षेत्र में बियाडा ने करीब डेढ़ सौ एकड़ जमीन चिन्हित की है, जिसमें से तीन कंपनियों को जमीन दी जा चुकी है और कुछ इकाइयों में काम भी शुरू हो गया है. बताया गया कि जल्द ही और कंपनियां भी यहां आएंगी. मुख्यमंत्री ने बक्सर में बने नए गंगा पुल का हवाई सर्वेक्षण भी किया.  CM नीतीश ने हाजीपुर में भी किया था दौरा  नीतीश कुमार ने हाजीपुर के औद्योगिक क्षेत्र का भी दौरा किया था.  वहां उन्होंने न्यू जील सीजनल वियर प्राइवेट लिमिटेड, कॉम्पीटेंस एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड और ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनियों का निरीक्षण कर उत्पादन, बाजार, रोजगार और विस्तार की संभावनाओं पर अधिकारियों और प्रबंधन से चर्चा की थी. 

रायपुर : डबरी निर्माण से बदली सूरत कुमारी की किस्मत, खेती और मछलीपालन से बढ़ी आमदनी

रायपुर : डबरी निर्माण से बदली सूरत कुमारी की किस्मत, खेती और मछलीपालन से बढ़ी आमदनी बहुफसली खेती से पूरे वर्ष मिल रहा लाभ रायपुर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत सरगुजा जिले में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए डबरियों का निर्माण लगातार लाभकारी साबित हो रहा है। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखण्ड के ग्राम कुम्हरता की सूरत कुमारी भी इसी का सफल उदाहरण हैं, जिन्होंने मनरेगा अंतर्गत अपने खेत में डबरी बनवाकर अपनी आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है। मनरेगा के माध्यम से डबरी निर्माण की जानकारी मिलते ही सूरत कुमारी ने रोजगार सहायक से संपर्क कर प्रस्ताव प्रस्तुत किया। वर्ष 2024-25 में उन्हें 2.99 लाख रुपये की स्वीकृति प्राप्त हुई और उन्होंने 30×30 आकार की डबरी का निर्माण कराया। वर्तमान में डबरी में लगभग छह फीट पानी भरा है, जो सालभर उनकी खेती को सहारा दे रहा है। सूरत कुमारी के पास तीन एकड़ कृषि भूमि है, जहां पहले केवल बारिश के मौसम में धान की खेती हो पाती थी। गर्मी और सर्दी में सिंचाई की सुविधा न होने के कारण खेत खाली पड़े रहते थे। लेकिन डबरी बनने के बाद अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। उनकी भूमि पर अब सालभर बहुफसली खेती हो रही है। वे सब्जी, गेहूं, अरहर सहित कई फसलें ले रही हैं, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। डबरी निर्माण से 1231 मानव-दिवस का रोजगार भी सृजित हुआ, जिससे गांव के कई लोगों को काम मिला। खेती के साथ-साथ सूरत कुमारी ने डबरी में मछलीपालन भी शुरू कर दिया है। उन्होंने इस साल पांच किलो मछली बीज डाला है, जिनकी ग्रोथ संतोषजनक है और इससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। सूरत कुमारी बताती हैं कि डबरी निर्माण ने उनकी आजीविका को सुरक्षित और स्थायी बना दिया है। खेती-बाड़ी के साथ-साथ अब मछलीपालन उनकी आय का नया स्रोत बन गया है। उन्होंने शासन की इस योजना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए बताया कि अब वे खुद अन्य ग्रामीणों को भी योजना का लाभ लेने प्रेरित कर रही हैं।

रायपुर : डबरी बनी खुशहाली की राह : किसान हिरमाराम की आमदनी हुई दोगुनी, सालाना बढ़ी एक लाख रुपये तक

रायपुर मनरेगा से निर्मित एक छोटी-सी डबरी ने किसान हिरमाराम के जीवन में बड़ा बदलाव ला दिया है। डबरी बनते ही पहली ही बारिश का मौसम उनके लिए सौभाग्य लेकर आया। डबरी पानी से भर गई और हिरमाराम ने धान खेती के साथ-साथ मछली पालन भी शुरू कर दिया। उन्होंने 5 किलो मछली बीज डालकर पालन शुरू किया, जिससे उन्हें हर साल लगभग एक लाख 10 हजार रुपये की अतिरिक्त आमदनी होने लगी। मनरेगा से 2 लाख 94 हजार रुपये की स्वीकृति से बनाई डबरी            सुकमा जिले में कलेक्टर और जिला सीईओ के मार्गदर्शन में शासकीय योजनाओं का प्रभाव तेजी से दिखाई दे रहा है। जनहित को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन आजीविका से जुड़ी योजनाओं को लाभार्थियों तक पहुंचा रहा है।  ग्राम पंचायत रामाराम के किसान हिरमाराम, जिनके पास केवल 2 एकड़ जमीन है, पहले सिर्फ बारिश के दिनों में ही खेती कर पाते थे। सिंचाई की सुविधा न होने से बाकी समय खेत खाली रहते थे और परिवार की आय भी बहुत कम थी। ग्रामसभा में जब उन्हें मनरेगा के तहत डबरी निर्माण की जानकारी मिली तो उन्होंने तुरंत आवेदन किया। ग्राम पंचायत ने 2 लाख 94 हजार रुपये की स्वीकृति देकर निर्माण कार्य शुरू कराया। डबरी बनने से नियमित आमदनी का साधन मिला          हिरमाराम खुशी से बताते हैं कि पहले उनकी आय सिर्फ खेती पर निर्भर थी, लेकिन डबरी बनने से उन्हें नियमित आमदनी का नया साधन मिल गया है। वे कहते हैं कि मनरेगा ने मुझे आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है। मैं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन का दिल से धन्यवाद करता हूं। यह डबरी अब उनके परिवार की खुशहाली का स्थायी आधार बन चुकी है।

रायपुर : प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत लगेगा विशेष कृषि शिविर

 रायपुर : प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत लगेगा विशेष कृषि शिविर रबी क्षेत्र विस्तार एवं दलहन-तिलहन उत्पादकता बढ़ाने कृषि विभाग करेगा जागरूकता शिविरों का आयोजन  रायपुर प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) 2025-26 से शुरू की गई एक सरकारी पहल है, जिसका लक्ष्य कम प्रदर्शन वाले कृषि जिलों में किसानों की आय और कृषि उत्पादकता बढ़ाना है, जिसके लिए 11 मंत्रालयों की 36 योजनाओं को समन्वित किया गया है।  इसमें सिंचाई, भंडारण, आसान ऋण तथा फसल विविधीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया हैए, ताकि किसानों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके और देश को दालों सहित विभिन्न फसलों में आत्मनिर्भर बनाने के मिशन का समर्थन किया जा सके। प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना के अंतर्गत कृषकों को रबी फसल की आधुनिक तकनीक से अवगत कराने तथा मत्स्यपालन, पशुपालन सहित अन्य कृषि-संबद्ध व्यवसायों की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से प्रत्येक समिति में विशेष प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।   किसानों आधुनिक खेती से जोडकर लाभान्वित करना है           शिविरों में जशपुर जिले के ऐसे उत्कृष्ट एवं प्रगतिशील कृषकों को प्रशिक्षक के रूप में जोड़ा गया है, जो आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर खेती में अधिक उत्पादन एवं बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं। ये प्रशिक्षक कृषक अपने अनुभव, कठिनाईयों तथा विभागीय योजनाओं से प्राप्त लाभों को अन्य कृषकों के साथ साझा करेंगे, जिससे अधिक से अधिक किसान आधुनिक खेती अपनाकर लाभान्वित हो सकें। साथ ही कृषि एवं संबद्ध विभाग के अधिकारी किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं, अनुदान प्राप्ति की प्रक्रिया, तथा वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने के मार्गदर्शन की जानकारी प्रदान करेंगे। इन शिविरों में कृषि विज्ञान केन्द्र एवं कृषि महाविद्यालय के वैज्ञानिक भी शामिल रहेंगे, जो आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रचार-प्रसार कर किसानों को उन्नत खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। दलहन-तिलहन उत्पादक कृषकों को समर्थन मूल्य पर उपज बेचने की सुविधा            जशपुर जिले में कुल 09 आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों का पंजीयन किया गया है, जहाँ दलहन-तिलहन फसलें उगाने वाले कृषक अपनी उड़द, मूंग एवं मूंगफली को बाजार मूल्य कम होने की स्थिति में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर विक्रय कर सकते हैं। कृषकों के हित में प्रशासन ने अपील की है कि वे एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन अवश्य कराएँ। पंजीयन कराने में किसी भी प्रकार की सहायता हेतु संबंधित ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है। किसान बढ़ा सकते हैं अपनी आय कृषक उत्पादक संगठन से जुड़कर          शिविर के दौरान जिले के जशपुर जिले के प्रत्येक विकासखंड के कृषक उत्पादक संगठन के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। जिन कृषकों ने अभी तक किसी कृषक उत्पादक संगठन की सदस्यता नहीं ली है, वे शिविर में उपस्थित प्रतिनिधियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सदस्यता हेतु आवेदन कर सकते हैं। कृषक उत्पादक संगठन से जुड़कर किसान न केवल आधुनिक कृषि तकनीक, समूह विपणन और सामूहिक क्रय-बिक्री का लाभ उठा सकते हैं, बल्कि अपनी आय दोगुनी करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ा सकते हैं।