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बिहार से पकड़ा गया आतंकवादी, हेरोइन-ग्रेनेड बरामद; जांच में सामने आया पाकिस्तान लिंक

पूर्वी चंपारण बिहार में एक आतंकवादी को पकड़ा गया है। पूर्वी चंपारण जिले में रक्सौल बॉर्डर से सेना का भगोड़ा व नार्को आतंकी मॉड्यूल में शामिल राजबीर सिंह उर्फ फौजी को गिरफ्तार किया गया। हरैया रक्सौल पुलिस व पंजाब स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल की संयुक्त छापेमारी में उसे 18 दिसंबर को कस्टम चौक के पास से गिरफ्तार किया गया। भगोड़े सेना के जवान के पास से 500 ग्राम हेरोइन व एक हैंड ग्रेनेड बरमद हुआ है। साथ ही पाकिस्तान स्थित हैंडलर से उसका कनेक्शन सामने आया है। पंजाब पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर अपने साथ पंजाब ले गई है। मिली जानकारी के अनुसार आरोपी नेपाल के रास्ते देश से फरार होने के फिराक में था। राजबीर ने वर्ष 2011 में सेना ज्वाइन की थी। अमृतसर ग्रामीण के घरिनडा थाने में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत दर्ज जासूसी के मामले में नाम आने के बाद वह फरवरी 2025 से सेना से फरार हो गया था।

ट्रेन से सफर हुआ महंगा! रेलवे ने बढ़ाया किराया, स्लीपर और एसी टिकट के नए दाम देखें

नई दिल्ली  रेल यात्रा करने वालों की जेब अब ज्यादा ढीली होने वाली है। भारतीय रेलवे ने किराए के ढांचे में बदलाव करने का फैसला किया है। ऐसे में जनरल, स्लीपर और एसी श्रेणी में टिकट महंगे हो जाएंगे। रेलवे ने बताया है कि किराये की नई दरें 26 दिसंबर से लागू हो जाएंगी। जानकारी के मुताबिक पैसेंजर ट्रेनों के टिकट के दाम नहीं बढ़ाए जाएंगे। मेल, एक्सप्रेस और नॉन एसी कैटिगरी में 2 पैसा प्रति किलोमीटर किराया बढ़ाया गया है। इस हिसाब से 500 किलोमीटर पर 10 रुपये ज्यादा खर्च करने होंगे।   अनुमान है कि इस बढ़े हुए किराए से रेलवे को 600 करोड़ रुपये का फायदा होगा। जानकारी के मुताबिक 215 किलोमीटर से ज्यादा के सफर के लिए यात्रियों के जनरल ट्रेन में एक पैसा प्रति किलोमीटर ज्यादा देना होगा। वहीं मेल/एक्सप्रेस, स्लीपर और एसी ट्रेन में सफर के लिए 215 किलोमीटर से ज्यादा के सफर पर दो पैसे प्रति किलोमीटर ज्यादा देने होंगे। नॉन एसी कोच में सफर के लिए 500 किलोमीटर के सफर पर 10 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। रेलवे का कहना है कि निम्न आय वाले परिवारों का ध्यान रखते हुए लोकल ट्रेनों के किराए में बढ़ोतरी नहीं की गई है। रेलवे के मुताबिक पिछले 10 सालों में ट्रेनों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। इसके अलावा ट्रैक का भी विस्तार किया गया है। सुरक्षा और अच्छे संचालन के लिए ज्यादा कर्मचारियों को भी तैनात किया गया है। ऐसे में रेलवे पर सैलरी का बोझ भी बढ़ा है। रेलवे का कहना है कि अब मानव संसाधन पर 1.15 लाख करोड़ का खर्च है। इसके अलावा पेंशन का बोझ पहले से है। ऐसे में संतुलन के लिए किराए में वृद्धि जरूरी थी।  

दिव्यांग छात्राओं के यौन उत्पीड़न मामले में बड़ा फैसला, कोर्ट ने स्पेशल स्कूल के प्राचार्य को ठहराया दोषी

मुंबई  महाराष्ट्र की एक स्पेशल कोर्ट ने एक दिव्यांग छात्रों के लिए बनाए गए एक स्कूल के पूर्व प्राचार्य और शिक्षक को यौन उत्पीड़न का दोषी ठहराते हुए पांच साल की सजा सुनाई है। प्राचार्य और शिक्षक के ऊपर आरोप थे कि पद पर रहते हुए वह बोलने और सुनने में असमर्थ छात्राओं को अपने ऑफिस में बुलाते थे और फिर उनके साथ यौन उत्पीड़न करते थे। कोर्ट ने शिक्षकों को जीवन का मार्गदर्शक बताते हुए इसे बहुत बड़ा विश्वासघात करार दिया, और आरोपियों के 5 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई।   विशेष न्यायाधीश सत्यनारायण आर नवंदर ने फैसला सुनाने के पहले कहा, "स्कूल एक पवित्र संस्था होती है। बच्चे अपने शिक्षक पर भरोसा करते हैं और उन्हें जीवन का मार्गदर्शक मानते हैं। यदि इस विश्वास के साथ विश्वासघात किया जाए और जब बच्चे के लिए भगवान समान व्यक्ति ही यौन उत्पीड़न करे तो इसमें कोई संदेह नहीं कि पीड़ित जीवन भर के लिए मानसिक आघात झेलेंगे। अदालत ने कहा कि उस स्कूल में सभी नाबालिग लड़कियां थीं, वह सुनने और बोलने में अक्षम थीं। स्कूल के प्राचार्य और शिक्षकों को ही उनके संरक्षण की जिम्मेदारी मिली हुई थी। आरोपियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बच्चों की शारीरिक अक्षमता का अनुचित लाभ उठाया। इसके बाद अदालत ने आरोपी 62 वर्षीय लॉर्डु पापी गाड़े रेड्डी (पूर्व प्राचार्य) और 61 साल के दत्तकुमार भास्कर पाटिल को पॉस्को अधिनियम की धारा 10 और भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत दोषी ठहराया। क्या था पूरा मामला? यह पूरा मामला 2013 और 2014 के बीच का था। इसी बीच रेड्डी और भास्कर यहां पर प्राचार्य और शिक्षक के रूप में पदस्थ थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार वह छात्राओं को अपने कक्ष में बुलाते और फिर उन्हें गले लगाकर चूमते थे, जबकि दूसरा शिक्षक उनकी अश्लील तस्वीरें खींचता था और उनके साथ अनुचित तरीके से छेड़छाड़ करता था। इनके यह काले कारनामे करीब दो सालों तक चलते रहे। इसके बाद एक पीड़ित ने इसके बारे में अपने परिजनों को बताया, जिससे यह मामला खुला। एक के सामने आने के बाद बाकी छात्राओं ने भी अपने साथ हुई आपबीती को बताया। क्योंकि यह सभी छात्राओं बोलने में असमर्थ थीं और नाबालिग थीं इसलिए इनके बयान लेते समय भाषा विशेषज्ञों की भी मदद ली गई, जिन्हें अदालत ने ठोस माना। मामले के शुरू होने के कुछ समय के बाद मुख्य शिकायतकर्ता और उसका परिवार अपनी शिकायत से मुकर गया। हालांकि अदालत ने दूसरी छात्राओं के आधार पर इस मुकदमे को जारी रखा। अदालत ने अभिभावकों की भी की आलोचना अदालत ने अपने इस फैसले में माता-पिता और संस्थानों की इस प्रवृ्त्ति की भी आलोचना की कि वह छात्राओं की शिकायतों को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, खासकर तब जब शिक्षक समाज में ऊंचा दर्जा रखते हों। इस फैसले में अदालत ने प्रत्येक दोषी को पांच साल की सजा के अलावा 25 हजार रुपए का जुर्माना भी भरने का आदेश दिया। इसके अलावा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भी निर्देश दिया कि पीड़ित मुआवजा योजना के तहत पीड़ितों को अतिरिक्त मुआवजा दिया जाए, क्योंकि जुर्माने की राशि पीड़ितों की पीड़ा की भरपाई करने के लिए अपर्याप्त है।  

नाम याद रखिए! पाकिस्तान के समीर मिन्हास ने U-19 एशिया कप फाइनल में भारत के सामने खेली तूफानी शतकीय पारी

नई दिल्ली भारत और पाकिस्तान के बीच अंडर-19 एशिया कप फाइनल दुबई में खेला जा रहा है। इस मैच में पाकिस्तान के सलामी बल्लेबाज समीर मिन्हास ने शतक जड़ महफिल लूट ली है। उनका यह शतक मात्र 71 गेंदों पर आया, जिसमें 12 चौके और 4 गगनचुंबी छक्के शामिल है। मिन्हास ने अपनी इस पारी में परिपक्वता साफ देखने को मिली। अच्छी गेंदों को उन्होंने सम्मान दिया, वहीं बुरी गेंदों को मैदान के बाहर तक पहुंचाया। पाकिस्तान में इतना होनहार बल्लेबाज देख हर कोई यह जानने को इच्छुक है कि समीन मिन्हास कौन है।    समीर मिन्हास का जन्म 2 दिसंबर, 2006 को पाकिस्तान के लाहौर शहर में हुआ था। क्रिकेट पसंद करने वाले परिवार में बड़े होने के कारण, समीर को कम उम्र में ही इस खेल से परिचय हुआ। उनके पिता, जो खुद क्रिकेट के बहुत बड़े शौकीन थे, ने उनकी प्रतिभा को निखारने में अहम भूमिका निभाई। समीर ने गलियों और लोकल पार्कों में क्रिकेट खेलना शुरू किया, और जल्दी ही अपने स्किल्स को बेहतर बनाया और इस खेल से प्यार करने लगे। क्रिकेट में करियर बनाने के मकसद से, वह लोकल क्रिकेट क्लबों में शामिल हुए, जहां उन्होंने अपनी शानदार प्रतिभा और पक्के इरादे का प्रदर्शन किया। समीर, अराफात मिन्हास के छोटे भाई हैं, जो लेफ्ट-आर्म स्पिन-बॉलिंग ऑलराउंडर हैं और पाकिस्तान U19 (2024 वर्ल्ड कप सहित) के लिए खेल चुके हैं, साथ ही पाकिस्तान के लिए चार T20I भी खेले हैं। यह समीर का पाकिस्तान के लिए पहला यूथ ODI था। समीर ने इसी अंडर-19 एशिया कप में मलेशिया के खिलाफ 177 रनों की धुआंधार पारी खेली थी और भारत के वैभव सूर्यवंशी का रिकॉर्ड तोड़ा था। बात IND vs PAK फाइनल की करें तो भारत ने टॉस जीतकर पहले फील्डिंग चुनी थी। पाकिस्तान ने समीर मिन्हास के शतक के दम पर 35 ओवर में 2 विकेट के नुकसान पर 240 रन बोर्ड पर लगा दिए हैं। बचे 15 ओवर में उनकी नजरें 360-80 तक पहुंचने पर होगी।  

नरेंद्र मोदी बनाम खुदा! जावेद अख्तर के बयान से देश में सियासी-वैचारिक हलचल

नई दिल्ली  क्या खुदा का अस्तित्व है? इस सवाल पर मशहूर शायर और गीतकार जावेद अख्तर और इस्लामी विद्वान मुफ्ती शमाइल नदवी के बीच नई दिल्ली में कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई एक बहस ने न सिर्फ सभागार को खचाखच भर दिया, बल्कि इसके बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस देखने को मिल रही। करीब दो घंटे चली इस चर्चा ने आस्था, तर्क, नैतिकता और मानव पीड़ा जैसे मुद्दों को केंद्र में ला दिया। द लल्लनटॉप के इस कार्यक्रम का विषय था- “क्या खुदा का अस्तित्व है?” यह एक दुर्लभ अवसर था जब एक स्वयं को नास्तिक बताने वाले बुद्धिजीवी और एक धार्मिक विद्वान आमने-सामने सार्वजनिक मंच पर तर्क करते दिखे। जावेद अख्तर ने अपनी दलीलों में गाजा युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर खुदा सर्वव्यापी और दयालु है, तो वह वहां हो रही तबाही को कैसे अनदेखा कर सकता है। उन्होंने कहा, “अगर आप सर्वशक्तिमान हैं और हर जगह मौजूद हैं, तो गाजा में भी होंगे। वहां बच्चों के चीथड़े उड़ते आपने देखे होंगे। फिर भी आप चाहते हैं कि मैं आप पर विश्वास करूं?” उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, “उसके मुकाबले हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेहतर हैं, कुछ तो ख्याल करते हैं।” धार्मिक हिंसा का जिक्र करते हुए जावेद अख्तर ने सवाल उठाया कि आखिर खुदा के नाम पर सवाल पूछना क्यों बंद कर दिया जाता है। उन्होंने कहा, “किस तरह का खुदा है जो बच्चों को बमों से मरने देता है? अगर वह मौजूद है और यह सब होने देता है, तो न हो तो भी बेहतर है।” मुफ्ती नदवी का जवाब मुफ्ती शमाइल नदवी ने खुदा को निर्दोष बताते हुए कहा कि बुराई का कारण मानव की स्वतंत्र इच्छा है, न कि खुदा। उन्होंने कहा, “खुदा ने बुराई को पैदा किया है, लेकिन वह स्वयं बुरा नहीं है। हिंसा, बलात्कार या अन्य अपराध इंसान के चुनाव का नतीजा हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि खुदा के अस्तित्व पर बहस में विज्ञान और धर्मग्रंथ कोई साझा मापदंड नहीं हो सकते। उन्होंने कहा, “विज्ञान भौतिक दुनिया तक सीमित है, जबकि खुदा उससे परे है।” मुफ्ती नदवी ने यह भी तर्क दिया कि विज्ञान यह बता सकता है कि ब्रह्मांड कैसे काम करता है, लेकिन यह नहीं कि उसका अस्तित्व क्यों है। उन्होंने जावेद अख्तर से कहा, “अगर आपको नहीं पता, तो यह मत कहिए कि खुदा नहीं है।” विश्वास बनाम आस्था पर टकराव बहस का एक अहम मोड़ विश्वास (belief) और आस्था (faith) के फर्क पर आया। जावेद अख्तर ने कहा कि विश्वास सबूत, तर्क और गवाही पर आधारित होता है, जबकि आस्था बिना प्रमाण स्वीकार करने की मांग करती है। उन्होंने कहा, “जहां न सबूत है, न तर्क और न कोई गवाह, फिर भी अगर आपसे मानने को कहा जाए, वही आस्था है।” उन्होंने चेताया कि ऐसी सोच सवाल पूछने से रोकती है। नैतिकता के मुद्दे पर जावेद अख्तर ने कहा कि नैतिकता प्रकृति की नहीं, बल्कि इंसानों की बनाई हुई व्यवस्था है। उन्होंने कहा, “प्रकृति में कोई न्याय नहीं होता। नैतिकता ट्रैफिक नियमों जैसी है। समाज के लिए जरूरी, लेकिन प्रकृति में मौजूद नहीं।” कार्यक्रम खत्म होते ही यह बहस सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगी। कुछ लोगों ने जावेद अख्तर के सवालों को साहसी और जरूरी बताया, तो कई ने इसे धार्मिक आस्थाओं पर हमला करार दिया। वहीं, मुफ्ती शमाइल नदवी को उनके संयमित और दार्शनिक जवाबों के लिए समर्थन मिला।  

एक जयशंकर बनाम पूरी दुनिया? सवाल पर विदेश मंत्री का मोदी से जुड़ा जवाब

नई दिल्ली विदेश मंत्री एस जयशंकर अपनी वाकपटुता के लिए जाने जाते हैं। पुणे में एक कार्यक्रम वैश्विक राजनीति और रणनीति पर बात करते हुए जयशंकर ने भगवान श्री कृष्ण और भगवान हनुमान को दुनिया का सबसे महान रजानयिक बताया। इसी कार्यक्रम में जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत के लिए एक जयशंकर काफी है या फिर हमें और जयशंकर की जरूरत है? इस सवाल का जवाब मुस्कराकर देते हुए जयशंकर ने कहा कि आपका सवाल ही गलत है। विदेश मंत्री ने कहा, "आपका सवाल यह होना चाहिए कि एक मोदी हैं। क्योंकि असली फर्क नेता और उसके विजन, आत्मविश्वास से पड़ता है। देश अपने नेताओं के विजन से पहचाने जाते हैं। उनके उस विजन को अमल में लाने वाले कई लोग होते हैं, लेकिन आखिरकार नेता ही मुख्य होता है।" पुणे बुक फेस्टिवल में पश्चिमी राजनयिकों पर अपनी बात रखते हुए जयशंकर ने महाभारत और रामायण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "ज्यादातर किताबें पश्चिमी लोगों के द्वारा लिखी गई हैं… मैं यह पढ़-पढ़कर थक गया हूं कि वह बहुत रणनीतिक हैं, जबकि भारत के पास रणनीति और राजकौशल की कोई परंपरा नहीं है। हम अपनी आस्थाओं और संस्कृतियों के साथ बड़े हुए हैं लेकिन हम अपने ही शब्दों का इस्तेमाल नहीं करते… इसलिए दुनिया भी उन्हें नहीं जानती है।" उन्होंने कहा, "आम तौर पर हम महाभारत और रामायण को सत्ता, संघर्ष और परिवार की कहानी मानते हैं। हम इनकी रणनीति, युक्ति और गेम प्लान के बारे में स्पष्ट रूप से सोच नहीं पाते। दरअसल, एक बार जब मुझसे किसी ने पूछा था कि आपके हिसाब से सबसे महान राजनियक कौन हैं, तो मैंने कहा था कि भगवान श्रीकृष्ण और हनुमान। इनमें से एक महाभारत के महान राजनयिक हैं, तो दूसरे रामायण के।" गठबंधन के दौर में है दुनिया: जयशंकर वैश्विक स्तर पर मची उथल-पुथल को लेकर अपनी बात रखते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि आज की दुनिया गठबंधन की राजनीति जैसी है। उन्होंने कहा, "आज किसी के पास भी पूर्ण बहुमत नहीं है। किसी गठबंधन के पास भी पूर्ण बहुमत नहीं ह। ऐसे में रोज नए समीकरण बनते हैं, सौदे होते हैं, कोई ऊपर होता है, कोई नीचे, हर दिन कोई नया मुद्दा उभरकर सामने आता है। बहुध्रवीय दुनिया कई पार्टियों के जैसी है। कभी आप एक के साथ होते हैं, तो कभी दूसरे मुद्दे पर दूसरे के साथ… लेकिन इस सब बातों के बीच बस एक ही सिद्धांत है… मेरे देश की मदद करना, जो भी मेरे देश के हित में हो, मदद कर रहा हो… बस वही मेरा विकल्प है।"

‘इस्लाम की विचारधारा अमेरिका की स्वतंत्रता के खिलाफ’—तुलसी गबार्ड का बड़ा दावा

एरिजोना अमेरिका की डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (DNI) तुलसी गबार्ड ने इस्लाम की विचारधारा को अमेरिका की आजादी और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह कोई धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि एक राजनीतिक विचारधारा है, जिसका उद्देश्य शरीयत कानून के तहत वैश्विक खिलाफत स्थापित करना है। यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पश्चिमी लोकतांत्रिक मूल्यों के बिल्कुल विपरीत है। एरिजोना में टर्निंग पॉइंट यूएसए के अमेरिका फेस्ट को संबोधित करते हुए गबार्ड ने कहा कि यह खतरा अब केवल विदेशों तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका के भीतर भी जड़ें जमा चुका है। उन्होंने कहा, “यह इस्लाम की विचारधारा हमारी आजादी के लिए सीधा खतरा है। यह एक राजनीतिक एजेंडा है, जिसका मकसद वैश्विक खिलाफत और शरीयत आधारित शासन स्थापित करना है।” यूरोप जैसी स्थिति की चेतावनी तुलसी गबार्ड ने चेताया कि यदि अमेरिका ने समय रहते इस विचारधारा को पहचानकर उसके खिलाफ कदम नहीं उठाए, तो देश को यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। तुलसी ने कहा, “अगर हम कार्रवाई नहीं करते और इसे उसके असली रूप में पहचान कर चुनौती नहीं देते हैं तो अमेरिका भी उन देशों की राह पर चला जाएगा। वहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लग चुके हैं।” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जर्मनी में क्रिसमस मार्केट्स रद्द किए जा रहे हैं, जबकि ब्रिटेन में लोग सड़क किनारे चुपचाप प्रार्थना करने पर भी गिरफ्तार किए जा रहे हैं। अमेरिका के भीतर कट्टरपंथ के आरोप तुलसी गबार्ड ने दावा किया कि अमेरिका के कई शहरों में कट्टर इस्लाम की मौलवी खुलेआम युवाओं को भड़काने और कट्टरपंथ की ओर धकेलने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “डियरबॉर्न (मिशिगन) और मिनियापोलिस (मिनेसोटा) जैसे इलाकों में इस्लाम की मौलवी खुलकर इस विचारधारा को बढ़ावा दे रहे हैं और युवाओं की भर्ती कर रहे हैं।” उन्होंने पैटरसन (न्यू जर्सी) और ह्यूस्टन (टेक्सास) का भी उल्लेख किया। तुलसी गबार्ड ने कहा कि इस विचारधारा से जुड़े लोग असहमति की आवाजों को दबाने के लिए केवल सेंसरशिप नहीं, बल्कि हिंसा और धमकी का भी सहारा लेते हैं। तुलसी में कहा, “अगर आप अपने ईश्वर-प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हैं, तो वे आपको चुप कराने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैंष” उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट तक के लिए लोगों को धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने सरकार और समाज से कट्टरपंथी विचारधाराओं के खिलाफ सख्त और स्पष्ट कार्रवाई की अपील की।  

स्मार्ट खेती की दिशा में बड़ी कामयाबी, झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय की प्रोफेसर का डिवाइस पेटेंटेड

रांची झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUJ) की सिविल इंजीनियरिंग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रतिभा वारवाडे और उनकी शोध टीम द्वारा विकसित मिट्टी की नमी मापने वाले उपकरण को पेटेंट मिल गया है। विश्वविद्यालय की ओर से शनिवार को जारी बयान में इसकी जानकारी दी गई। यह उपकरण इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) तकनीक पर आधारित है और एक स्मार्ट सिंचाई प्रणाली का हिस्सा है। इसे खास तौर पर बड़े पैमाने पर कृषि उत्पादन के लिए तैयार किया गया है, जिसमें ड्रिप इरिगेशन के जरिए सब्जी और फलों की अलग-अलग फसलों की सिंचाई की जा सकती है। संस्थान के अनुसार, यह सिस्टम रियल-टाइम मिट्टी की नमी और पर्यावरण से जुड़े आंकड़ों के आधार पर खुद-ब-खुद सिंचाई को नियंत्रित करता है। इससे किसानों की मैनुअल लेबर पर निर्भरता कम होती है और पानी का सही व वैज्ञानिक तरीके से उपयोग संभव हो पाता है। कृषि क्षेत्र के लिए यह पेटेंट बड़ी उपलब्धि: डॉ. प्रतिभा वारवाडे डॉ. प्रतिभा वारवाडे ने कहा कि यह पेटेंट कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। उन्होंने बताया कि यह डिवाइस किसानों को मिट्टी में मौजूद नमी की सटीक जानकारी तुरंत उपलब्ध कराती है, जिससे सिंचाई प्रबंधन ज्यादा प्रभावी, सटीक और वैज्ञानिक बनता है। बयान में बताया गया कि मध्य प्रदेश कृषि विभाग ने इस डिवाइस को किसानों के लाभ के लिए इस्तेमाल करने को लेकर डॉ. वारवाडे से संपर्क किया है। इसके साथ ही यह तकनीक झारखंड जैसे राज्यों के लिए भी काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। कम लागत वाला उपकरण खास बात यह है कि यह उपकरण कम लागत वाला है और बाजार में उपलब्ध अन्य उपकरणों की तुलना में काफी सस्ता है। इससे छोटे और मध्यम किसानों के लिए भी इस तकनीक को अपनाना आसान हो जाएगा। डॉ. वारवाडे ने कहा कि यह उपलब्धि स्मार्ट एग्रीकल्चर की दिशा में नए रास्ते खोलती है। यह तकनीक पानी की बचत, उत्पादन बढ़ाने और सतत विकास (Sustainable Development) में अहम भूमिका निभा सकती है। यह सफलता छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की शोध टीम के साथ संयुक्त परियोजना के तहत हासिल की गई है। झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर क्षिति भूषण दास ने डॉ. वारवाडे को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि शोध और नवाचार को पेटेंट में बदलकर समाज के कल्याण में योगदान देना सराहनीय कार्य है और यह विश्वविद्यालय के लिए गर्व की बात है।  

U19 Asia Cup Final Live: तीसरा विकेट गिरा, मिन्हास की जंग जारी—पाकिस्तान 350 की ओर?

दुबई  इंडिया वर्सेस पाकिस्तान अंडर-19 एशिया कप 2025 का फाइनल आज दुबई में खेला जा रहा है। पाकिस्तान के सलामी बल्लेबाज समीर मिन्हास ने भारत के खिलाफ खिताबी मुकाबले में शतक जड़ा। यह सेंचुरी उनकी 71 गेंदों में आई। समीर मिन्हास का यह इस अंडर-19 एशिया कप में उनका दूसरा शतक है।भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ खिताबी मुकाबले में टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया है। पाकिस्तान की तूफानी शुरुआत पर लगाम हेनिल पटेल ने चौथे ओवर में हमजा जहूर (18) को आउट करके लगाई। इसके बाद समीर मिन्हास और उस्मान खान ने 92 रनों की साझेदारी की। इस पार्टनरशिप को खिलन पटेल ने तोड़ा। समीर मिन्हास का खतरा अभी भी क्रीज पर है।   खिलान पटेल ने अहमद हुसैन को 56 के निजी स्कोर पर आउट पाकिस्तान को तीसरा झटका दे दिया है। हालांकि समीर मिन्हास का तूफान जारी है। वह 150 रन के करीब हैं। 32 ओवर के बाद पाकिस्तान का स्कोर 2 विकेट के नुकसान पर 225 रन हो गया है। अहमद हुसैन और समीर मिन्हास के बीच तीसरे विकेट के लिए शतकीय साझेदारी हो गई है। समीर अब 124 के निजी स्कोर पर पहुंच गए हैं। उनका स्ट्राइक रेट लगभग 150 का है। समीर मिन्हास का शतक! पाकिस्तान के सलामी बल्लेबाज समीर मिन्हास ने भारत के खिलाफ फाइनल में 71 गेंदों में शतक जड़ा। यह शतक उन्हें लंबे समय तक याद रहने वाला है। वह अभी तक 12 चौके और 4 गगनचुंबी छक्के लगा चुके हैं। 29 ओवर के बाद पाकिस्तान का स्कोर 2 विकेट के नुकसान पर 193 रन है। मिन्हास और हुसैन के बीच तीसरे विकेट के लिए 50 रनों की साझेदारी हो गई है। 27 ओवर के बाद पाकिस्तान का स्कोर 2 विकेट के नुकसान पर 174 रन है। पाकिस्तान का प्रोजेक्टेड स्कोर 324 का दिखा रहा है। समीर मिन्हास ने शतक की ओर कदम बढ़ाना शुरू कर दिया है। वह 58 गेंदों पर 86 के निजी स्कोर पर पहुंच गए हैं। वह भारतीय गेंदबाजों को पूरी तरह से डोमिनेट कर रहे हैं। खिलन पटेल ने 17वें ओवर में उस्मान खान को आउट कर अपनी गलती को सुधारा, भारत को दूसरी विकेट मिल गई है, मगर समीर मिन्हास का खतरा अभी भी क्रीज पर मौजूद है। खिलन पटेल ने छोड़ा उस्मान खान का कैच! 15वें ओवर में खिलन ने अपनी ही गेंद पर कैच छोड़ पाकिस्तान के बल्लेबाज को जीवनदान दिया है। यह कहीं भारत पर भारी ना पड़ जाए। 15 ओवर के बाद पाकिस्तान का स्कोर 111/1 समीर मिन्हास की तूफानी फिफ्टी के दम पर पाकिस्तान का स्कोर 100 के पार पहुंच गया है। 14 ओवर के बाद पाकिस्तान का स्कोर 1 विकेट के नुकसान पर 110 रन है। समीर मिन्हास 35 गेंदों पर 55 रन बनाकर खेल रहे हैं। वहीं उस्मान खान 32 रन बनाकर उनका साथ दे रहे हैं। भारत को जल्द दूसरा विकेट चटकाना होगा, नहीं तो यह जोड़ी मैच को भारत की गिरफ्त से दूर ले जाएगी।

भाजपा के जिक्र के साथ मोहन भागवत का बड़ा बयान: ‘हमें सिर्फ सेवा संगठन समझना भारी भूल’

नई दिल्ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत इन दिनों पश्चिम बंगाल के चार दिवसीय दौरे पर हैं। उत्तर बंगाल से कोलकाता पहुंचे भागवत ने साइंस सिटी सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अगर आप संघ को समझना चाहते हैं, तो तुलना करने से गलतफहमियां पैदा होंगी। अगर आप संघ को केवल एक अन्य सेवा संगठन मानते हैं, तो आप गलत होंगे। आरसएस प्रमुख ने कहा कि कई लोगों में 'संघ' को भाजपा के नजरिए से समझने की प्रवृत्ति होती है, जो एक बहुत बड़ी गलती है। संघ की स्थापना का सार एक ही वाक्य में है 'भारत माता की जय'। उन्होंने कहा कि भारत केवल एक देश नहीं, बल्कि अपनी खास संस्कृति, परंपरा और स्वभाव का नाम है। संघ का लक्ष्य इन मूल्यों को बनाए रखते हुए भारत को फिर से विश्व गुरु बनाने के लिए समाज को तैयार करना है। 'संघ को समझाने के लिए इतिहास उदाहरण' भागवत ने साफ किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का जन्म किसी राजनीतिक मकसद, प्रतिस्पर्धा या विरोध के लिए नहीं हुआ। उनका कहना था कि संघ पूरी तरह हिंदू समाज के संगठन, उन्नति और संरक्षण के लिए समर्पित है। संघ की भूमिका समझाने के लिए भागवत ने इतिहास का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि सुभाष चंद्र बोस के निधन के बाद अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष भले ही थम गया, लेकिन राजा राम मोहन राय के समय से शुरू हुई समाज सुधार की प्रक्रिया लगातार चलती रही। उन्होंने इसे समुद्र के बीच एक ऐसे द्वीप की तरह बताया, जो समय के साथ मजबूती से कायम रहा। हमें अपने समाज को मजबूत करना है- आरएसएस प्रमुख अपने संबोधन में आरएसएस प्रमुख ने समाज को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि भारत एक महान विरासत वाला देश है और उसे वैश्विक नेतृत्व के लिए खुद को तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि अतीत में हम अंग्रेजों से युद्ध हार गए थे, लेकिन अब वक्त है कि हम अपने समाज को संगठित और सशक्त बनाएं। उनका पूरा भाषण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की यात्रा, ‘व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण’ की सोच और एकजुट हिंदू समाज के साथ समृद्ध भारत के लक्ष्य पर केंद्रित रहा।