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चिकित्सा शिक्षा और आयुष क्षेत्र में मध्य प्रदेश में ऐतिहासिक सुधार, CM मोहन यादव के प्रयासों की गाथा

संकल्प से सिद्धि: स्वास्थ्य हब बनता मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के नेतृत्व में  चिकित्सा शिक्षा और आयुष क्षेत्र में ऐतिहासिक कायाकल्प की गाथा भोपाल  मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएँ अब केवल चुनावी वादों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह दीर्घकालिक सेवा और सुदृढ़ नीति का प्रमाण बन चुकी हैं। 2003 से पहले जहाँ प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की स्थिति स्थिर थी, वहीं आज डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार ने इसे 'जन-आंदोलन' का रूप दे दिया है। एलोपैथी के आक्रामक विस्तार से लेकर आयुष के पुनरुत्थान तक—मध्य प्रदेश अब "बेसिक मेडिकल शिक्षा" से आगे बढ़कर "एडवांस्ड हेल्थ केयर" की ओर कदम बढ़ा चुका है।  चिकित्सा शिक्षा – विस्तार, गुणवत्ता और भविष्य (2003-2028) 1. ठहराव से रफ़्तार तक का सफ़र (ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य) आंकड़े गवाह हैं कि प्रदेश ने पिछले दो दशकों में कैसे लंबी छलांग लगाई है: सीमित अतीत (1946-2003): 1970 के पूर्व और उसके बाद कई दशकों तक मेडिकल कॉलेजों की संख्या लगभग स्थिर रही। 1946 से 2003 के बीच ग्वालियर, इंदौर, भोपाल, जबलपुर और रीवा जैसे चुनिंदा शहरों तक ही चिकित्सा शिक्षा सीमित थी। 2003 तक प्रदेश में शासकीय मेडिकल कॉलेज मात्र 5 थे और कुल कॉलेज केवल 6 थे । बदलाव का दौर (2004-2023): सागर (2009) जैसे नए शासकीय कॉलेज खुले और निजी क्षेत्र को भी अवसर मिला। 2018-19 के बाद विदिशा, दतिया, शहडोल, खंडवा, शिवपुरी और छिंदवाड़ा जैसे जिलों में मेडिकल कॉलेज शुरू हुए, जिससे चिकित्सा शिक्षा संभाग से निकलकर जिले की दहलीज़ तक पहुँची । 2. डॉ. मोहन यादव सरकार का 'आक्रामक विस्तार' (2023 के बाद) वर्तमान सरकार ने मेडिकल शिक्षा के विस्तार को नई दिशा दी है: रिकॉर्ड उपलब्धि: 2003 से पहले जितने मेडिकल कॉलेज खुले थे, डॉ. मोहन यादव की सरकार ने लगभग उतने ही कॉलेज केवल दो वर्षों में खोल दिए हैं । हर लोकसभा तक पहुँच: सिवनी, नीमच, मंदसौर, श्योपुर और सिंगरौली जैसे सुदूर जिलों में नए मेडिकल कॉलेज शुरू हुए हैं। आज प्रदेश का हर लोकसभा क्षेत्र मेडिकल कॉलेज से जुड़ने की दहलीज़ पर खड़ा है । वर्तमान स्थिति (2025): आज शासकीय मेडिकल कॉलेजों की संख्या 14 से बढ़कर 19 और निजी कॉलेजों की संख्या 12 से बढ़कर 14 हो चुकी है। यानी कुल 33 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं । 3. सीटों में अभूतपूर्व वृद्धि (MBBS, PG और सुपर स्पेशलिटी) डॉक्टरों की कमी के पुराने तर्क को ध्वस्त करते हुए सीटों में भारी इजाफा किया गया है: MBBS सीटें: 2003 में मात्र 1,250 सीटें थीं। 2023-24 में यह 4,875 हुईं और 2025-26 के सत्र में यह बढ़कर 5,550 (शासकीय: 2850, निजी: 2700) हो गई हैं। यह वृद्धि जनसंख्या वृद्धि की तुलना में कहीं अधिक है । PG और सुपर स्पेशलिटी (एडवांस्ड केयर): सरकार का फोकस केवल MBBS तक सीमित नहीं है। PG सीटें: कुल PG (MD/MS) सीटें बढ़कर 2,862 हो गई हैं । सुपर स्पेशलिटी: शासकीय क्षेत्र में सीटें 47 से बढ़कर 64 हो गई हैं और कुल सीटें 93 हैं। यह संकेत है कि मप्र अब एडवांस्ड हेल्थ केयर की ओर बढ़ रहा है । 4. अभिनव पहल: पीपीपी (PPP) मॉडल और भविष्य का रोडमैप (2026-28) सरकार निजी निवेश और सार्वजनिक लक्ष्यों के समन्वय से बड़े लक्ष्य साध रही है: PPP मॉडल पर प्रगति : 4 मेडिकल कॉलेजों—कटनी, धार, पन्ना, और बैतूल—के लिए MoU हस्ताक्षरित हो चुके हैं । निविदा प्रक्रिया जारी : 9 जिलों—अशोकनगर, मुरैना, सीधी, गुना, बालाघाट, भिंड, टीकमगढ़, खरगोन और शाजापुर—में पीपीपी मोड पर कॉलेज खोलने की प्रक्रिया प्रगतिरत है । 2026-28 का विजन : दमोह, बुधनी, छतरपुर, राजगढ़, मंडला और उज्जैन में कुल 6 नवीन कॉलेज प्रस्तावित हैं । महायोग (Grand Total) : योजनानुसार, 2028 तक प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की कुल संख्या 52 हो जाएगी और MBBS सीटें 7,450 तक पहुँचने का अनुमान है । 5. सुधरते सामाजिक मानक (Impact Metrics) डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात : प्रति 10 लाख जनसंख्या पर MBBS सीटों की उपलब्धता 2003 में 20.8 थी, जो 2025 में 63 तक पहुँच चुकी है। 2028 तक यह राष्ट्रीय औसत के करीब होगी । विधानसभा स्तर पर सुधार : प्रति विधानसभा सीट MBBS औसत 2003 में 5 था, जो अब बढ़कर 24 हो गया है। आयुष विभाग – गौरवशाली परंपरा, आधुनिक उपलब्धियाँ एलोपैथी के साथ-साथ 'निरोगी काया' के संकल्प को पूरा करने के लिए आयुष विभाग ने भी महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं: 1. अधोसंरचना और मानव संसाधन का सुदृढ़ीकरण नए पदों का सृजन : 05 नए आयुर्वेद महाविद्यालयों के लिए 1570 पद, 50/30 बिस्तरीय आयुष चिकित्सालयों हेतु 1179 पद और 58 जिला आयुष विंगों में 213 पद सृजित किए गए हैं। फैकल्टी की कमी दूर: शासकीय महाविद्यालयों में सीनियर फैकल्टी की कमी को दूर करने के लिए 543 आयुर्वेद, 35 होम्योपैथी, 14 यूनानी चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति और 74 को उच्च पद का प्रभार दिया गया है। 8 नवीन महाविद्यालय: नर्मदापुरम, मुरैना, शहडोल, बालाघाट, सागर, झाबुआ, शुजालपुर और डिंडोरी में 8 नए आयुर्वेद महाविद्यालयों की स्वीकृति प्रदान की गई है। 2. चिकित्सालयों का विस्तार और उन्नयन वेलनेस टूरिज्म: प्रदेश में 12 'वेलनेस टूरिज्म केंद्र' स्थापित किए गए हैं, जो स्वास्थ्य पर्यटन को बढ़ावा दे रहे हैं। आयुष्मान आरोग्य मंदिर: 238 औषधालयों को अपग्रेड कर 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' (Health & Wellness Centres) में परिवर्तित किया गया है और 108 नए औषधालयों का निर्माण किया गया है। नए 50-बिस्तरीय और 30-बिस्तरीय चिकित्सालयों का निर्माण एवं संचालन निरंतर जारी है। 3. आगामी 3 वर्षों की कार्य-योजना (भविष्य की झलक) आयुष विभाग ने अगले तीन वर्षों के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया है: नए संस्थान: 8 नए आयुर्वेद महाविद्यालय, 1 होम्योपैथी महाविद्यालय और 13 नए आयुष चिकित्सालयों (12 पचास-बिस्तरीय, 1 तीस-बिस्तरीय) का संचालन शुरू होगा। छात्र सुविधाएँ: सभी आयुष महाविद्यालयों में 100-सीटर छात्रावास और स्वयं की फार्मेसी स्थापित की जाएगी। एकीकृत स्वास्थ्य (Integrated Health): सभी जिला एलोपैथी चिकित्सालयों में 'आयुष विंग' और 'पंचकर्म यूनिट' स्थापित की जाएगी। सिकल सेल और जनजातीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों का विस्तार होगा। डिजिटल क्रांति : 'E-औषधि' और 'E-Hospital' प्रणाली लागू कर ऑनलाइन औषधि आपूर्ति और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाएगी। अनुसंधान : प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आयुष वेलनेस सेंटर और अत्याधुनिक अनुसंधान लैब का आधुनिकीकरण किया जाएगा। मेडिकल कॉलेजों की संख्या 6 से 52 तक ले जाने का लक्ष्य और आयुष को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प। यह केवल … Read more

योगी सरकार के विजन से आत्मनिर्भर बनी रमा रानी वर्मा, मुख्यमंत्री योजना से मिला 3.5 लाख का ऋण

योगी सरकार के विजन से आत्मनिर्भर बनी संत कबीर नगर की रमा रानी वर्मा मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान से मिला 3.5 लाख का ऋण बी-टेक के बाद नौकरी नहीं, स्वरोजगार को चुना लखनऊ   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विजन केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन योजनाओं को धरातल पर उतार आमजन के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने का है। इसी विजन का सशक्त उदाहरण संत कबीर नगर जिले की रमा रानी वर्मा हैं, जिन्होंने “मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान” के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। वह नैना कॉस्मेटिक्स एंड आर्टिफिशियल ज्वेलरी मेकिंग नाम से एक  इकाई का संचालन कर रही हैं। इनका कहना है कि “योगी आदित्यनाथ सरकार के विज़न और नीति से आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाने का अवसर प्राप्त हुआ है”।  औद्योगिक नगर, मुखलिसपुर रोड, खलीलाबाद की रहने वाली रमा रानी वर्मा ने बी-टेक (कंप्यूटर साइंस) किया है। पढ़ाई के बाद उनके सामने भी वही विकल्प थे जो आज अधिकतर युवाओं के सामने होते हैं, यानी नौकरी की तलाश। लेकिन उन्होंने पारंपरिक रास्ते पर चलने के बजाय खुद का रास्ता बनाने का निर्णय लिया। उनका मानना था कि यदि सरकार का सहयोग मिले तो युवा स्वयं का रोजगार कर न केवल अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी अवसर पैदा कर सकते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नेतृत्व वाली सरकार की ओर से शुरू किए गए मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान ने उनके इस सपने को साकार करने में निर्णायक भूमिका निभाई है। इस अभियान के अंतर्गत रमा रानी वर्मा को 3.5 लाख रुपये का ऋण मिला। यह राशि उनके लिए केवल आर्थिक सहायता नहीं थी, बल्कि आत्मविश्वास और भरोसे की पूंजी थी, जिसने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।  सरकार से मिले इस सहयोग से उन्होंने संत कबीर नगर जिले के खलीलाबाद में कास्मेटिक और आर्टिफिशियल ज्वेलरी के निर्माण के साथ-साथ अपने दुकान के मध्य से उनकी बिक्री शुरू की है। विशेष बात यह है कि उनका यह पूरा कार्य स्थानीय स्तर पर और परिवार के सहयोग से किया जा रहा है। घर से शुरू हुआ यह उद्यम धीरे-धीरे व्यवस्थित स्वरूप लेता जा रहा है। इससे उनकी आय में वृद्धि होने के साथ-साथ परिवार की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ हुई है। रमा रानी वर्मा की यह यात्रा योगी सरकार के लोकल से ग्लोबल विजन को भी दर्शाती है। स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर स्थानीय स्तर पर उत्पादन और रोजगार सृजन ही इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत है। यह वही सोच है जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार आगे बढ़ा रहे हैं ताकि प्रदेश का हर जिला आत्मनिर्भर बने। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि जब प्रदेश का युवा सशक्त होगा तभी उत्तर प्रदेश देश की अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभा सकेगा। इसी उद्देश्य से सरकार ने स्वरोजगार को प्रोत्साहन देने के लिए सरल और पारदर्शी योजनाएं लागू की हैं। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान इसी दिशा में एक प्रभावी कदम है। रमा रानी वर्मा बताती हैं कि योजना की प्रक्रिया सरल रही और उन्हें समय पर ऋण प्राप्त हुआ। किसी प्रकार की अनावश्यक दिक्कत या भटकाव का सामना नहीं करना पड़ा। यह सुशासन और पारदर्शिता योगी सरकार की पहचान बन चुकी है जहां लाभार्थी तक लाभ सीधे और प्रभावी ढंग से पहुंच रहा है। आज रमा रानी वर्मा न केवल आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अन्य युवाओं खासकर महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन गई हैं। रमा रानी वर्मा की सफलता यह प्रमाणित करती है कि यदि मजबूत नेतृत्व वाली सरकार हो और नीतियां स्पष्ट हों तो आम परिवार की बेटी भी उद्यमिता की ऊंचाइयों तक पहुंच सकती है।

दिग्विजय सिंह का बयान: बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले भारत में अल्पसंख्यक मामलों से जुड़े

भोपाल बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर सियासत तेज हो गई है. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले, भारत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही कार्रवाइयों का “रिएक्शन” हैं. अल्पसंख्यकों पर कार्रवाई का असर पड़ोसी देश तक दिग्विजय सिंह ने कहा कि भारत में कट्टरपंथी ताकतें अल्पसंख्यकों पर लगातार कार्रवाई कर रही हैं. उनका दावा है कि इसी का असर पड़ोसी देश बांग्लादेश में देखने को मिल रहा है, जहां हिंदू समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है. हिंदुओं पर अत्याचार की घोर निंदा पूर्व मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रहे अत्याचार की वे घोर निंदा करते हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव स्वीकार्य नहीं है और इस तरह की घटनाएं मानवता पर धब्बा हैं. राजनीतिक बयान से बढ़ी बहस दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस और तेज हो गई है. जहां एक तरफ उनके समर्थक इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बता रहे हैं, वहीं विरोधी दल इस बयान को लेकर सवाल उठा रहे हैं. दिग्विजय सिंह ने जोर देकर कहा कि यह मुद्दा सिर्फ राजनीति का नहीं, बल्कि मानवाधिकारों से जुड़ा हुआ है. उन्होंने केंद्र सरकार से भी अपील की कि वह इस मामले को गंभीरता से ले और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाए. भाजपा का पलटवार: ‘भूल से 10 साल मुख्यमंत्री रहे’ दिग्विजय सिंह के इस बयान पर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने जोरदार हमला बोला. उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह “भूल से 10 साल तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे” और आज वे यह तय नहीं कर पा रहे कि वे हिंदुस्तान के नागरिक हैं या पाकिस्तान के एजेंट. आतंकवाद से जोड़ते हुए लगाए गंभीर आरोप रामेश्वर शर्मा ने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय आतंकियों ने दिग्विजय सिंह को “सुपारी” दे रखी है और उन्हें अपना प्रवक्ता बना रखा है. उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह का बयान देशविरोधी ताकतों को बल देता है और अंतरराष्ट्रीय इस्लामी आतंकवाद को नैरेटिव मजबूत करने में मदद करता है. आतंकियों का साथ दिया’ का आरोप रामेश्वर शर्मा ने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन में आतंकियों का समर्थन किया और जब मौका मिला, उन्हें सम्मानित भी किया. उन्होंने चेतावनी दी कि आतंकवाद का समर्थन करने वालों को यह याद रखना चाहिए कि हिंदुस्तान की जनता सब जानती है और समय आने पर जवाब भी देती है. मानवाधिकार बनाम देशहित की बहस इस पूरे घटनाक्रम ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर बहस को दो ध्रुवों में बांट दिया है. कांग्रेस इसे मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया से जोड़ रही है, जबकि भाजपा इसे देशविरोधी सोच और आतंकवाद को परोक्ष समर्थन बताकर हमलावर है.

शराब घोटाले में बड़ा खुलासा: चैतन्य बघेल को करोड़ों की रकम, जांच एजेंसियों ने दाखिल किया आठवां चालान

 रायपुर छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित दो हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के शराब घोटाला मामले में प्रदेश के पूर्व सीएम भूपेश  बघेल के बेट चैतन्य बघेल ने आबकारी विभाग में वसूली के लिए एक बड़ा सिंडिकेट खड़ा किया था। आर्थिक आपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की ओर से आज सोमवार को स्पेशल कोर्ट रायपुर में पेश किये गये 8वें चालान में आरोप लगाया गया है कि चैतन्य बघेल को घोटाले की रकम से 200 से 250 करोड़ रुपये मिले हैं। इतना ही नहीं चालान में यह भी दावा किया गया है कि चैतन्य के सिंडिकेट को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण मिला था। वे प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत कर उन्हें उनके हिसाब से काम करने के लिए निर्देश देते थे। इस वजह से लंबे समय तक यह घोटाला फलता-फूलता रहा। अभी तक घोटाला 3074 करोड़ रुपये का सामने आया है, लेकिन जांच और अन्य सबूत बता रहे हैं कि यह घोटाला 3500 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का हैं। चैतन्य को तीन हजार करोड़ से ज्यादा के कथित घोटाले में आरोपी बनाया ईओडब्ल्यू और एसीबी ने दावा करते हुए बताया कि करीब 3,800 पन्नों चार्जशीट में चैतन्य बघेल को तीन हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के कथित घोटाले में आरोपी बनाया गया है। इस मामले में अब तक कुल आठ चार्जशीट पेश किये जा चुके हैं। नई चार्जशीट में पहले से गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ जांच की मौजूदा स्थिति रिपोर्ट दिया गया है। वहीं हिरासत में लिए गए सभी आरोपियों से डिजिटल साक्ष्य रिपोर्ट भी शामिल हैं। यह दस्तावेज आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ चल रही जांच की प्रगति की भी रूपरेखा बताता है। सिंडिकेट को देते थे निर्देश चार्जशीट का हवाला देते हुए बताया गया है कि चैतन्य बघेल ने अनिल टुटेजा, सौम्या चौरसिया, अरुणपति त्रिपाठी और निरंजन दास जैसे अधिकारियों के बीच समन्वयक के रूप में काम किया, जो प्रशासनिक स्तर पर सिंडिकेट के हितों के अनुसार काम करते थे और नेटवर्क के जमीनी स्तर के संचालकों जैसे अनवर ढेबर, अरविंद सिंह और विकास अग्रवाल (सभी सह-आरोपी) को निर्देश जारी करते थे। घोटाले की रकम को किया ट्रांसफर और मैनेज चार्जशीट में दावा किया गया है कि चैतन्य बघेल ने अपने भरोसेमंद सहयोगियों के माध्यम से व्यवसायी अनवर ढेबर की टीम की ओर से वसूली गई घोटाले की रकम को ऊपर तक पहुंचाया गया। उसने शराब व्यवसायी त्रिलोक सिंह ढिल्लों की विभिन्न फर्मों के माध्यम से अपने हिस्से की रकम प्राप्त की। इसे बैंकिंग चैनलों के माध्यम से अपनी पारिवारिक फर्मों में ट्रांसफर किया और रियल एस्टेट परियोजनाओं में इसका इस्तेमाल किया। इसके अलावा चार्जशीट में दावा किया गया है कि उसने अपने परिवार के सदस्यों, दोस्तों और सहयोगियों के ज़रिए बैंकिंग चैनलों से घोटाले से मिले पैसे की बड़ी रकम ली और इन्वेस्ट किया। शराब घोटाले में शामिल रकम करीब 3,074 करोड़ रुपये होने का अनुमान जांच एजेंसी ने कहा कहा कि "सबूतों से पता चलता है कि चैतन्य ने ऊंचे लेवल पर अपराध की कमाई को मैनेज करने के साथ-साथ अपने हिस्से के तौर पर लगभग 200 करोड़ रुपये से 250 करोड़ रुपये लिए। सिंडिकेट को दी गई हाई-लेवल सुरक्षा, पॉलिसी/एडमिनिस्ट्रेटिव दखल और प्रभाव के कारण यह अपराध लंबे समय तक चलता रहा। जांच से पता चलता है कि शराब घोटाले में शामिल रकम लगभग 3,074 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। हालांकि आगे की जांच से पता चला है कि कथित घोटाले से अपराध की कुल कमाई तीन हजार पांच करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है। जांच एजेंसी ने बताया कि कई आरोपियों के खिलाफ अभी जांच जारी है। सरकारी खजाने को पहुंचा नुकसान केंद्रीय एजेंसी ने बताया कि कथित घोटाले से सरकारी खजाने को काफी नुकसान पहुंचा है। इस घोटाले से एक शराब सिंडिकेट के लाभार्थियों की जेबें भर गईं। यह घोटाला साल 2019 और 2022 के बीच हुआ। उस दौरान छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार की सरकार थी और चैतन्य बघेल के पिता भूपेश बघेल सीएम थे। दूसरी ओर ईडी की ओर से पहले दायर चार्जशीट के अनुसार, चैतन्य बघेल ने शराब घोटाले से मिले एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की "अपराध की कमाई" को "हैंडल" किया था। 18 जुलाई को हुई थी चैतन्य की गिरफ्तारी बता दें कि चैतन्य बघेल फिलहाल रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। उन्हें 18 जुलाई 2025 को ईडी ने शराब घोटाले के आरोप में भिलाई स्थित निवास से गिरफ्तार किया था। इसी मामले में ईडी ने 16 दिसंबर को पूछताछ के बाद सौम्या चौरसिया को भी गिरफ्तार किया था। 19 दिसंबर को कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था।

शादी की खुशियाँ मातम में बदलीं: DJ बजाने से रोका गया, दूल्हे ने उठाया खौफनाक कदम

नूंह  दिल्ली के पास नूंह के एक गांव में रविवार को शादी वाले दिन सुबह दर्दनाक घटना हो गई। बारात रवाना होने से पहले दूल्हे ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। डीजे बजाने को लेकर हुई कहासुनी को घटना से जोड़ा जा रहा है। सरपंच परिवार के सदस्य फतेला ने बताया कि एक युवक की रविवार को शादी थी। शनिवार को वह शादी की तैयारी के तहत डीजे लेकर आया था, लेकिन गांव के कुछ लोगों ने इसे सामाजिक बुराई बताते हुए बजाने से मना कर दिया। काफी बातचीत के बाद ग्रामीणों ने एक घंटे के लिए डीजे बजाने की अनुमति दे दी थी। तय समय के अनुसार डीजे बजा और इसके बाद दूल्हे को मेहंदी भी लगाई गई। ग्रामीणों का कहना है कि युवक डीजे अधिक देर तक बजवाना चाहता था, लेकिन सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद रात में किसी तरह का कोई विवाद सामने नहीं आया। बिजली के खंभे पर लटका मिला शव रविवार सुबह दूल्हा जल्दी घर से निकल गया। कुछ समय बाद गांव के बाहर बिजली के खंभे से लटकता उसका शव मिलने की सूचना मिली। बताया गया कि उसने बिजली की लाइन वाले खंभे पर फंदा लगाकर आत्महत्या की। परिवार को किसी पर संदेह नहीं सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लिया। सरपंच परिवार के सदस्य फतेला ने बताया कि परिवार को किसी व्यक्ति पर कोई संदेह नहीं है। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया।  

बीजेपी के निशाने पर प्रियंका गांधी, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने किया जवाबी हमला

 नई दिल्ली बांग्लादेश में एक हिंदू दीपू चंद्र दास की भीड़ ने ईश निंदा के कथित आरोप में पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. इस मुद्दे पर देशभर में प्रोटेस्ट हो रहे हैं. इसे लेकर सियासत भी गर्मा गई है. केंद्र की सत्ता पर काबिज राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की अगुवाई कर रही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने विपक्षी कांग्रेस और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पर निशाना साधा है. बीजेपी का आरोप है कि प्रियंका गांधी केवल गाजा पर ही बोलती हैं. बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति अनदेखा करती हैं. इसे लेकर अब कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने पलटवार किया है. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि पिछली बार बांग्लादेश के अंदर जो हो रहा था, उस पर सबसे ज्यादा बोलने का काम प्रियंका गांधी ने किया. उन्होंने आगे कहा कि प्रियंका गांधी को प्रधानमंत्री बनाइए न, फिर देखिए कैसे जवाब देती हैं इंदिरा गांधी की तरह. इमरान मसूद ने कहा कि इंदिरा गांधी पाकिस्तान के दो टुकड़े कर के आई थीं न, ऐसे ही प्रियंका गांधी भी जवाब देंगी. उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी ऐसा इलाज करेंगी कि ये (बांग्लादेश) भारत विरोधी अड्डा नहीं बन पाएगा. प्रियंका गांधी अगर प्रधानमंत्री बन गईं, तो राहुल गांधी क्या करेंगे? इस सवाल पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की टोन बदल गई. उन्होंने जवाब में कहा कि राहुल गांधी भी वही करेंगे. इमरान मसूद ने कहा कि ये इंदिरा गांधी के पोता-पोती हैं. ये (राहुल गांधी और प्रियंका गांधी) एक चेहरे के ऊपर ही दो आंखें हैं. इनको अलग-अलग नहीं देखना चाहिए. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी हमारे नेता हैं, वह प्रियंका गांधी के भी नेता हैं. इमरान मसूद ने यह भी स्पष्ट किया कि कौन क्या रहेगा, यह पार्टी देखेगी. मैं तो छोटा सा सिपाही हूं. उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि वह जब असम और बंगाल जाते हैं, तब चुनाव की बात करते हैं. अपना एजेंडा चलाने की कोशिश करते हैं. इमरान मसूद ने कहा कि बांग्लादेश से जब हिंदू भागकर आता है, तब हमारी सीमाएं बंद हो जाती हैं. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत विरोधी अड्डा बनता जा रहा है. यह बहुत ही दुखद है. इमरान मसूद ने कहा कि प्रियंका गांधी और राहुल गांधी को सब लोग जानते हैं. इनके हाथ में जब कमान होगी, पूरी दुनिया देखेगी.

इंडिगो एयरलाइन को बीजेपी नेता नाजिया खान की दो टूक— ‘कठमुल्लों के आगे झुको मत’, चुनौती से गरमाई राजनीति

नई दिल्ली  भारतीय जनता पार्टी (BJP) अल्पसंख्यक सेल की नेता नाजिया इलाही खान ने आरोप लगाया है कि मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से निकलते समय इंडिगो के कर्मचारियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। उन्होंने इंडिगो के मालिक पर हमला करते हुए कहा कि इंडिगो का रवैया हर मामले में दोहरा रहता है। उन्होंने कहा कि अगर हिम्मत है तो इंडिगो उन्हें ब्लैकलिस्ट करके दिखाए। उन्होंने इंडिगो पर मुस्लिमों और पाकिस्तान का समर्थन करने का भी आरोप लगाया है। खान ने सोमवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस घटना जानकारी देते हुए एक वीडियो क्लिप पोस्ट की। इसमें वह हवाई अड्डे के टर्मिनल पर एयरलाइन कर्मचारियों के साथ बहस करती दिख रही हैं। उन्होंने बताया कि दुर्व्यवहार चेक-इन काउंटर से शुरू हुआ और बोर्डिंग प्रक्रिया तक जारी रहा। खान ने कहा कि वह किसी भी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार हैं। नाजिया इलाही खान ने कहा, इंडिगो के मालिक को भारत और पाकिस्तान दोनों के मुस्लिम समर्थकों की बात सुननी चाहिए और मैं चुप नहीं रहने वाली हूं। उन्होंने कहा कि जब भी इंडिगो के उम्माह कर्मचारी अपनी जिहादी मानसिकता का प्रदर्शन करेंगे, तब मैं उनके हिजाब उतार दूंगी। यह मेरी चुनौती है। उन्होंने कहा कि एयरलाइन मुस्लिम कर्मचारियों का पक्ष लेती है। खान ने कहा कि अपना बयान डिलीट करने के लिए उन्हें धमकी दी जा रही है। एक्स पर साझा किए गए पोस्ट में उन्होंने कहा, अब मुझे समझ में आने लगा है कि इंडिगो का संचालन कैसे होता है और इसके मुस्लिमों के साथ कितने गहरे संबंध हैं। इंडिगो अब अपने मुस्लिम समर्थकों की बात ही सुने और मुझे ब्लैकलिस्ट कर दे। इंडिगो बड़ी संख्या में मुस्लिम कर्मचारियों की भर्ती करता है। इंडिगो एयरलाइन या तो उन्हें कंट्रोल कर ले या फिर उनकी भर्ती बंद कर दे। उन्होंने कहा, मैंने जैसे ही इंडोगो की तीन मुसलमानों पर बोला, सोशल मीडिया पर मुझ सुअरों की झुंड ने घेरना शुरू कर दिया। इंडिगो को टैग करके कठमुल्लों ने कहा कि नाजिया को इंडिगो से ब्लैकलिस्ट कर दो। मैं भी कह रही हूं इंडिगो से कि मुझे ब्लैकलिस्ट कर दो। क्योंकि अगर तुमने ऐसा नहीं किया तो जितनी बार मैं इंडिगो से यात्रा करूंगी और मुसलमानों कि जिहादी मानसिकता सामने आएगी, उतनी बार मैं वीडियो बनाकर पोस्ट करूंगी। अगर हमें पाकिस्तान से धमकियां आती हैं तो हम इन धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। खान ने तीन एयरलाइन कर्मचारियों का नाम लेते हुए आरोप लगाया था कि यात्रा के विभिन्न चरणों में कर्मचारियों ने बार-बार और जानबूझकर उनके साथ दुर्व्यवहार किया। उन्होंने बताया कि वह आपातकालीन परिस्थितियों में यात्रा कर रही थीं। यह वीडियो वायरल हो गया और इस पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। इस टिप्पणी से बहस छिड़ गयी है। इसमें यूजर्स ने एयरलाइन स्टाफ के कथित बर्ताव और बातचीत में इस्तेमाल की गई भाषा दोनों पर अलग-अलग राय व्यक्त की है। खान ने आरोप लगाया है कि उन्हें उनकी राजनीतिक पहचान और देशभक्ति के कारण निशाना बनाया गया है। उन्होंने एयरलाइन की आंतरिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठाया और जवाबदेही की मांग की और कहा कि गलती साबित हुई तो सिर्फ माफी पर्याप्त नहीं होगी। इंडिगो की तरफ से खान के आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के अधिकारियों ने भी इस घटना के संबंध में कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज होने की पुष्टि नहीं की है।  

पंजाब सरकार का बड़ा फैसला: तीन शहर घोषित हुए पवित्र, नॉन-वेज और शराब की बिक्री पर रोक

चंडीगढ़  अमृतसर वॉलड सिटी (चारदीवारी वाला शहर), तलवंडी साबो और श्री आनंदपुर साहिब में मांस, शराब, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री अब बैन है. पंजाब सरकार ने इन तीनों शहरों को ‘पवित्र शहर’ का दर्जा दिया है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एक वीडियो मैसेज में इसका ऐलान किया था. पिछले महीने श्री आनंदपुर साहिब में पंजाब विधानसभा का एक विशेष सत्र आयोजित किया गया था. इस दौरान सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया था. यह विशेष सत्र गुरु तेग बहादुर की 350वीं शहादत वर्षगांठ के मौके पर बुलाया गया था. फिर 15 दिसंबर को, राज्य सरकार ने रूपनगर जिले में श्री आनंदपुर साहिब, बठिंडा में तलवंडी साबो और अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के आसपास के ‘गलियारा’ क्षेत्र को ‘पवित्र शहर’ का दर्जा की एक अधिसूचना जारी की गई थी. अपने वीडियो संदेश में, सीएम मान ने कहा कि सिखों के पांच ‘तख्त’ हैं. जिनमें से तीन – श्री अकाल तख्त साहिब (अमृतसर), श्री दमदमा साहिब (तलवंडी साबो, बठिंडा) और तख्त श्री केशगढ़ साहिब (श्री आनंदपुर साहिब) पंजाब में हैं. उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ई-रिक्शा, मिनी-बसें, शटल बसें और अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट सर्विस समेत सभी जरूरी व्यवस्थाएं करेगी और सुविधाओं का इंतजाम करेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि पवित्र शहरों में अब सख्त नियम लागू होंगे. साथ ही उन्होंने कहा कि मांस, शराब, तंबाकू और किसी भी नशीले पदार्थ की बिक्री पूरी तरह से बैन है. उन्होंने आश्वासन दिया कि शहरों का उचित विकास होगा. सीएम मान ने कहा कि ये शहर न केवल धार्मिक केंद्र हैं बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत के एक बहुत अहम प्रतीक भी हैं.

नए साल 2026 में खुशहाली चाहिए? घर की दिशा से लेकर सजावट तक जानें वास्तु टिप्स

आने वाले साल से पहले आप अपने घर में वास्तु नियमों के अनुसार, कुछ बदलाव लाकर सकारात्मक ऊर्जा में बढ़ावा कर सकते हैं। इससे आपके लिए आना वाला साल खुशियों से भरा रहेगा। वास्तु के अनुसार, दिशाओं का ध्यान रखकर सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाया जा सकता है। चलिए जानते हैं ऐसे ही कुछ टिप्स। रसोई में ध्यान रखें ये बातें वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि रसोई में अग्नि कोण यानी दक्षिण-पूर्व दिशा में भोजन पकाना चाहिए। ऐसे में आप स्टोव या गैस को इस दिशा में रख सकते हैं। अगर आप इसे उत्तर या पश्चिम दिशा में रखते हैं, तो इससे स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ सकता है। साथ ही किचन में छुरी-कांटे जैसी धारदार चीजों को कभी भी उल्टा करके नहीं रखना चाहिए। इन सभी नियमों की अनदेखी वास्तु दोष का कारण बन सकती है। इन दिशाओं का भी रखें ध्यान इसके साथ ही वास्तु शास्त्र में आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व दिशा), वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम दिशा), ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) और नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) से जुड़े नियम भी बताए गए हैं, जिनका ध्यान रखना जरूरी है। ईशान कोण में पूजा घर, वाटर टैंक या बोरिंग रखना शुभ होता है। वहीं आग्नेय कोण में इलेक्ट्रॉनिक सामान आदि रखा जा सकता है। वायव्य कोण की बात करें तो आप इस दिशा में बेडरूम या गैरेज बनवा सकते हैं। वहीं अगर नैऋत्य कोण में कैश काउंटर, या मशीनें रखने से लाभ मिलता है। घर के बाहर करें ये चीजें वास्तु शास्त्र में माना गया है कि खराब व टूटी हुई वस्तुएं नकारात्मकता को बढ़ावा देती हैं। ऐसे में जितना जल्दी हो सके इन चीजों को घर से बाहर कर देना चाहिए। ऐसे में अपने घर में टूटा या खराब पड़ा इलेक्ट्रिक सामान और बंद घड़ी बिल्कुल भी नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि इनसे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, जिससे घर में लड़ाई-झगड़े बढ़ सकते हैं।  

राजनीति के गलियारों में हलचल: यूपी विधानसभा में एक लिफ्ट में दिखे केशव मौर्य–शिवपाल यादव

लखनऊ  यूपी विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन सदन के बाहर एक दिलचस्प सियासी संयोग देखने को मिला। कार्यवाही शुरू होने से पहले प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल यादव एक ही लिफ्ट में साथ जाते नजर आए, जिसका वीडियो अब चर्चा का विषय बन गया है। इससे पहले डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने सोमवार को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को विधानसभा में वंदेमातरम् पर विशेष चर्चा के दौरान कहा कि हम एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना से काम कर रहे हैं। वंदेमातरम् आजादी के आंदोलन का महामंत्र है। देश के दुश्मनों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक हो, एयर स्ट्राइक हो, आपरेशन सिंदूर हो, यही वंदेमातरम है। सपा सदस्यों की ओर इशारा करते हुए कहा कि ये जो विरोधी हैं, इनकी भी स्थिति एक ही गाड़ी में बैठकर जाने वाली हो जाएगी। वंदेमातरम विकसित भारत-विकसित यूपी का मंत्र विधानसभा में विशेष चर्चा में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि वह देश की आजादी के आंदोलन में भाग लेने वाले महान क्रांतिकारियों को नमन करते हैं। जिन्होंने फांसी के फंदे को चूम लिया, उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उन्होंने कहा कि हम लोग भारत माता की जय बोलते हैं, आजम का नाम लिए बिना बोले की एक सदस्य क्या बोलते थे, जो आज जेल में हैं। वंदेमातरम् सन्यासी विद्रोह की आग है, वंदेमातरम् भारत की शास्वत चेतना है, अंग्रेजों की पराधीनता से भारत को मुक्ति दिलाने का महामंत्र रहा है। वंदेमातरम् विकसित भारत- विकसित उत्तर प्रदेश का मंत्र होने वाला है। वंदेमातरम् का मतलब है, भारतमाता की जय। नौजवानों के उज्जवल भविष्य के लिए, बिना भेदभाव सबका साथ- सबका विकास, हो रहा, यही वंदेमातरम् है। वंदे मातरम केवल गीत नहीं स्वतंत्रता का जयघोष है: शिवपाल वहीं सपा के वरिष्ठ विधायक शिवपाल यादव ने विधानसभा में संबोधन के दौरान वंदे मातरम् को लेकर कहा कि वह उस पवित्र उद्घोष को नमन करते हैं, जो केवल एक गीत नहीं बल्कि स्वतंत्रता का जयघोष है। शिवपाल यादव ने कहा कि वंदे मातरम् को बंकिमचंद्र ने अपने उपन्यास आनंद मठ में स्थान दिया था। उस दौर में जब बोलना भी विद्रोह माना जाता था, तब यह गीत आज़ादी का मशाल बनकर उभरा। उन्होंने कहा कि इस गीत में पूरे देश की आत्मा निहित है और इसे समग्र रूप से देखा जाना चाहिए। यदि वंदे मातरम् को किसी संप्रदाय विशेष के रूप में देखा जाएगा, तो यह उसकी महिमा का अपमान होगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यदि कोई सच में वंदे मातरम को मानता है, तो उसे समाज में समान व्यवहार भी अपनाना चाहिए। शिवपाल यादव ने सदन में विभाजनकारी बयानों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जब तक विधानसभा में इस तरह की बातें होंगी, वह उनका विरोध करते रहेंगे।