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विकसित भारत का कृषि मॉडल: गौ-आधारित प्राकृतिक खेती से स्वस्थ जीवन की ओर

विशेष लेख विकसित भारत का कृषि मॉडल: गौ-आधारित प्राकृतिक खेती और स्वस्थ जीवन राजेन्द्र शुक्ल भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज विकास के उस मार्ग पर अग्रसर है, जहाँ आर्थिक प्रगति के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और सांस्कृतिक मूल्यों को समान महत्व दिया जा रहा है। इसी समग्र दृष्टि के अंतर्गत भारतीय कृषि को भी एक नए युग की ओर ले जाया जा रहा है। कृषि सदियों से हमारी सभ्यता की रीढ़ रही है। आधुनिक युग में रासायनिक उर्वरकों और सिंथेटिक कीटनाशकों पर अत्यधिक निर्भरता ने खेती की लागत बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता, उसकी जलधारण क्षमता और दीर्घकालिक स्थिरता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। परिणामस्वरूप, हमारे भोजन की गुणवत्ता और नागरिकों के स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया है कि भारत की समस्याओं का समाधान हमारी अपनी परंपराओं और ज्ञान प्रणाली में निहित है। इसी विचार से प्राकृतिक खेती को राष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहन मिल रहा है, जो भारतीय कृषि की मूल आत्मा से जुड़ी हुई है। आज आवश्यकता इस बात की है कि कृषि को केवल उत्पादन के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, स्थिरता और आत्मनिर्भरता के व्यापक संदर्भ में देखा जाए। भारत की पारंपरिक कृषि व्यवस्था सह-अस्तित्व और संतुलन पर आधारित रही है, जिसमें गौमाता की भूमिका केंद्रीय रही है। गौ केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि उत्पादकता और पोषण सुरक्षा का आधार रही हैं। हमारे पूर्वज जानते थे कि गौवंश का संरक्षण सीधे मिट्टी के स्वास्थ्य से जुड़ा है। गोबर और गोमूत्र से भूमि को पोषण मिलता है, सूक्ष्म जीव सक्रिय होते हैं और मिट्टी पुनः जीवंत होती है। स्वस्थ मिट्टी से प्राप्त अन्न अधिक पौष्टिक, सुरक्षित और मानव शरीर के अनुकूल होता है। प्राकृतिक खेती कृषि तकनीक नहीं, बल्कि जीवन जीने की पद्धति प्रधानमंत्री मोदी जी की दृष्टि में प्राकृतिक खेती केवल एक कृषि तकनीक नहीं, बल्कि जीवन जीने की भारतीय पद्धति है। वे इसे किसानों की लागत घटाने, आय बढ़ाने और उन्हें बाहरी निर्भरता से मुक्त करने का सशक्त माध्यम मानते हैं। साथ ही, यह देशवासियों को रसायन-मुक्त, विषरहित भोजन उपलब्ध कराने का मार्ग है। यही कारण है कि प्राकृतिक खेती को आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा गया है। प्राकृतिक खेती की कार्यप्रणाली सरल, स्वदेशी और प्रभावशाली है। इसमें गौशालाओं को केवल संरक्षण केंद्र नहीं, बल्कि कृषि आदानों के उत्पादन के आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है। गोबर और गोमूत्र से तैयार जीवामृत, बीजामृत और पंचगव्य जैसे प्राकृतिक इनपुट मिट्टी के सूक्ष्म जीवों को सक्रिय करते हैं और भूमि की उर्वरता को दीर्घकालिक रूप से बढ़ाते हैं। पलवार (मल्चिंग) जैसी तकनीकें मिट्टी की नमी बनाए रखती हैं, जल संरक्षण में सहायक होती हैं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से फसलों की रक्षा करती हैं। इन उपायों से खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आती है, जिससे शून्य बजट प्राकृतिक खेती का लक्ष्य व्यवहारिक रूप से संभव होता है। सहकारिता से समृद्धि और संस्थागत शक्ति प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन बनाने में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह जी का मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके विजन 'सहकारिता से समृद्धि' के तहत, प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को संगठित किया जा रहा है एवं किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को सशक्त बनाया जा रहा है ताकि छोटे किसानों को न केवल सस्ती दरों पर प्राकृतिक खाद-बीज मिल सकें, बल्कि उनके विषमुक्त उत्पादों को उचित बाजार और लाभकारी मूल्य भी प्राप्त हो सके। गौ-आधारित प्राकृतिक खेती और सहकारिता का मेल ही ग्रामीण समृद्धि का नया मार्ग है। प्राकृतिक खेती का महत्व केवल खेत तक सीमित नहीं है; इसका सीधा संबंध मानव स्वास्थ्य और जीवनशैली से है। आज जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं, जिनका एक बड़ा कारण रासायनिक अवशेषों से युक्त भोजन है। प्राकृतिक खेती से प्राप्त शुद्ध और विषमुक्त अन्न पाचन तंत्र को सुदृढ़ करता है, रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और दीर्घकालिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा योग और आयुष को वैश्विक पहचान दिलाना इसी समग्र स्वास्थ्य दृष्टि का हिस्सा है। योग, प्राणायाम और संतुलित दिनचर्या तभी पूर्ण लाभ देती है जब भोजन भी शुद्ध और प्राकृतिक हो। प्राकृतिक खेती, स्वस्थ भोजन और योग—तीनों मिलकर स्वस्थ भारत की परिकल्पना को साकार करते हैं। प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का व्यावहारिक मंत्र—‘एक एकड़, एक मौसम’—किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है। छोटे स्तर पर प्रयोग कर किसान बिना जोखिम उठाए परिणाम देख सकता है और फिर धीरे-धीरे विस्तार कर सकता है। केंद्र सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, आदानों की उपलब्धता और बाजार से जोड़ने के लिए मजबूत संस्थागत समर्थन दिया जा रहा है। किसान उत्पादक संगठन (FPOs) इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहे हैं, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को सामूहिक शक्ति प्राप्त हो रही है। यह भी उल्लेखनीय है कि महिला किसान इस परिवर्तन में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। इस संपूर्ण प्रयास में गौ-सेवा का स्थान केंद्रीय है। गौवंश का संरक्षण और संवर्धन केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण रोजगार और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी जी की दृष्टि में गौ-आधारित प्राकृतिक खेती ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने और सतत विकास सुनिश्चित करने का एक प्रभावी माध्यम है। मध्यप्रदेश सरकार प्रधानमंत्री मोदी की इस दूरदर्शी सोच को धरातल पर उतारने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। राज्य में प्राकृतिक खेती, गौ-संवर्धन और किसान कल्याण को समन्वित रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। हमारा लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि मिट्टी, किसान और उपभोक्ता—तीनों के स्वास्थ्य की रक्षा करना है। गौ-आधारित प्राकृतिक खेती, भारतीय जीवनदृष्टि का पुनर्जागरण गौ-आधारित प्राकृतिक खेती केवल कृषि सुधार की पहल नहीं, बल्कि भारतीय जीवनदृष्टि का पुनर्जागरण है। गौमाता और मिट्टी की रक्षा के अपने सांस्कृतिक दायित्व को निभाते हुए, हम आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ भोजन, संतुलित जीवनशैली और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं। यही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के विकसित, आत्मनिर्भर और स्वस्थ भारत के स्वप्न को साकार करने का सशक्त मार्ग है।  

जनजातीय अधिकार, स्वाभिमान और स्वशासन को सशक्त करता है पेसा कानून: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जनजातीय भाई-बहनों के अधिकार, स्वाभिमान और स्वशासन को सशक्त करने वाला है पेसा कानून: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पेसा कानून स्थापना दिवस पर विचार व्यक्त किए विशाखापट्टनम में हो रहा है राष्ट्रीय पेसा महोत्सव भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पेसा कानून के स्थापना दिवस के अवसर पर, विशाखापट्टनम में आयोजित हो रहे राष्ट्रीय पेसा महोत्सव के आयोजन के लिए राज्य सरकार की ओर से जनजातीय भाई-बहनों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह आयोजन जनजातीय स्वशासन, सम्मान और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सार्थक कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत की पावन भूमि पर आदिकाल से निवास करने वाले जनजातीय समुदाय हमारे राष्ट्र की सांस्कृतिक आत्मा हैं। उनके अधिकार, स्वाभिमान और स्वशासन को सशक्त करने वाला पेसा कानून सहभागी लोकतंत्र की मजबूत आधारशिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश ने पेसा अधिनियम को संवेदनशीलता और दृढ़ संकल्प के साथ लागू किया है। हमने ग्राम सभाओं के गठन से जनजातीय समाज को सशक्त बनाया है। मध्यप्रदेश का जनजातीय समाज अब, अपने जल-जंगल-जमीन, सामाजिक व्यवस्थाओं और विकास की प्राथमिकताओं पर स्वयं निर्णय लेकर स्वशासी समुदाय के रूप में आगे बढ़ रहा है। यह पेसा कानून की भावना और संविधान की आत्मा का सजीव उदाहरण है। मध्यप्रदेश सरकार जनजातीय भाइयों-बहनों के हितों, संस्कृति और परम्पराओं के संरक्षण के लिए सदैव कृत संकल्पित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशाखापट्टनम में जारी पेसा महोत्सव के लिए उपरोक्त वीडियो संदेश में अपने विचार व्यक्त किए।  

क्या बदलने वाला है दिल्ली का मुख्यमंत्री? LG के पत्र पर AAP ने खेली चौंकाने वाली चाल

नई दिल्ली  पलूशन के मुद्दे पर दिल्ली की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस जंग में एलजी विनय सक्सेना की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर किए गए हमले से भड़की 'आप' ने दिल्ली की सियासत में नया शिगूफा छेड़ दिया है। एलजी के लेटर को उनकी नई लॉन्चिंग बताते हुए आप के दिल्ली प्रमुख और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश को अब नया मुख्यमंत्री मिलने वाला है। इन दिनों अपने व्यंगात्मक शैली में भाजपा सरकार के खिलाफ वीडियोज को लेकर चर्चा में रहने वाले सौरभ भारद्वाज ने एलजी के लेटर पर नई गुगली फेंकते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि रेखा गुप्ता को हटाने के लिए एलजी को दोबारा सक्रिय किया गया है और जब तक नया सीएम नहीं मिल जाता है एलजी दिल्ली को चलाएंगे। भारद्वाज ने एक दम आगे बढ़ते हुए यह तक दावा कर दिया कि नए सीएम के लिए गृहमंत्री के घर बैठक हुई है। सौरभ भारद्वाज ने एक वीडियो में कहा, 'पिछले 10 महीने से एलजी साहब को इतना बेइज्जत करके साइडलाइन किया गया। मगर अब एकदम केंद्र सरकार ने एलजी साहब को एक्टिव क्यों किया। केंद्र सरकार का मानना है कि रेखा गुप्ता जी की वजह से भारतीय जनता पार्टी का ग्राफ नीचे आ रहा है। पूरे देश में इसका असर पड़ रहा है। कल गृह मंत्री के यहां इसके लिए मीटिंग भी हुई है। हमारा मानना है कि दिल्ली के अंदर नया मुख्यमंत्री बनाया जाने वाला है।' भारद्वाज ने आगे कहा कि जब तक नया मुख्यमंत्री नहीं आता तब तक एलजी साहब को कहा गया है कि आप दिल्ली चलाइए। आप देखेंगे कि आने वाले समय में इनको ऐक्टिव किया जाएगा। कुछ दिनों में नया मुख्यमंत्री आएगा। इसकी शुरुआत कल उस पत्र से कराई गई है। एलजी ने केजरीवाल को लिखे लेटर में क्या कहा है? दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लेटर लिखकर राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण की स्थिति के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया। सक्सेना ने दावा किया कि वायु प्रदूषण पर केजरीवाल के साथ हुई बातचीत के दौरान, पूर्व मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को कमतर आंका और कहा कि यह एक वार्षिक घटना है और पर्यावरण कार्यकर्ता और अदालतें इसे मुद्दा बनाते हैं और फिर भूल जाते हैं। सक्सेना ने 15 पन्नों के लेटर में 'आप' प्रमुख पर आरोप लगाया कि उन्होंने ‘तुच्छ राजनीतिक लाभ के लिए 10 महीने की भाजपा सरकार के सामने अनावश्यक रूप से जटिलताएं पैदा कर दी हैं, जो उनके द्वारा की गई गलतियों को सुधारने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।’ उपराज्यपाल ने कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनावों में करारी हार के बावजूद, केजरीवाल और उनकी पार्टी ने नतीजों से सबक नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ‘दिल्ली की जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर तुच्छ राजनीति करने और झूठ फैलाने में लगी हुई है।’  

पलूशन पर नितिन गडकरी की चिंता: दिल्ली आते ही 3 दिन में एलर्जी की समस्या

नई दिल्ली  केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दिल्ली-एनसीआर में हर साल गंभीर होती जा रही प्रदूषण समस्या पर चिंता जताते हुए कहा है कि राजधानी में कुछ दिन रहने पर ही उन्हें एलर्जी की समस्या होने लगती है। उन्होंने यह बात दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही। भाजपा नेता नितिन गडकरी वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त उदय माहुरकर की पुस्तक के विमोचन समारोह में बोल रहे थे।   इस दौरान उन्होंने दिल्ली की बिगड़ती हवा को लेकर अपनी व्यक्तिगत परेशानी भी साझा की। उन्होंने कहा, “मैं यहां तीन दिन रहता हूं और मुझे प्रदूषण की वजह से एलर्जी हो जाती है।” अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने स्वीकार किया कि दिल्ली-एनसीआर में करीब 40 फीसदी प्रदूषण परिवहन क्षेत्र से आता है। उन्होंने कहा, “मैं खुद परिवहन मंत्री हूं और यह सच है कि 40 प्रतिशत प्रदूषण परिवहन के कारण होता है।” गडकरी ने इस बात पर जोर दिया कि प्रदूषण से निपटने के लिए परिवहन क्षेत्र में बड़े और त्वरित बदलाव की जरूरत है। केंद्रीय मंत्री ने जीवाश्म ईंधन (फॉसिल फ्यूल) पर निर्भरता को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों पर आधारित ईंधन न सिर्फ प्रदूषण बढ़ा रहे हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी भारी बोझ डाल रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह कैसा राष्ट्रवाद है? जीवाश्म ईंधन सीमित हैं और प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। क्या हम इनका इस्तेमाल कम नहीं कर सकते? इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों को बढ़ावा क्यों नहीं दे सकते, जिससे शून्य प्रदूषण संभव हो?” गडकरी ने बताया कि भारत हर साल करीब 22 लाख करोड़ रुपये जीवाश्म ईंधनों के आयात पर खर्च करता है। अपने अनुभव साझा करते हुए नितिन गडकरी ने अपनी एथेनॉल से चलने वाली फ्लेक्स-फ्यूल कार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह वाहन पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल है, प्रदूषण कम करता है, आयातित ईंधन पर निर्भरता घटाता है और किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद करता है। गडकरी का यह बयान ऐसे समय आया है जब दिल्ली की वायु गुणवत्ता एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच गई है। मंगलवार को राजधानी का 24 घंटे का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 412 दर्ज किया गया, जिससे दिल्ली देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर बन गया। वहीं, नोएडा 426 AQI के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या आने वाले दिनों में और गंभीर रूप ले सकती है।  

मंत्रालय में सुशासन दिवस का आयोजन, राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार श्रीमती गौर ने दिलाई शपथ

भोपाल  पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिवस के एक दिन पूर्व मंत्रालय में सुशासन दिवस मनाया गया। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण तथा विमुक्त , घुमन्तु, अर्द्धघुमन्तु कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने मंत्रालय के सरदार वल्लभ भाई पटेल पार्क में प्रात: 11 बजे अधिकारियों और कर्मचारियों को सुशासन दिवस की शपथ दिलाई। इससे पहले उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री श्री वाजपेयी के चित्र पर माल्यार्पण किया। भोपाल के सांसद श्री आलोक शर्मा भी इस अवसर पर उपस्थित थे। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने प्रदेश में सुशासन के उच्चतम मापदण्डों को स्थापित करने के लिये संकल्पित रहकर शासन को अधिक पारदर्शी,सहभागी ,जनकल्याण केन्द्रित और जबावदेह बनाने के प्रयास करने का संकल्प दिलाया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव श्री अशोक बर्णवाल, श्री मनु श्रीवास्तव, श्री के.सी.गुप्ता, श्री संजय कुमार शुक्ला सहित मंत्रालय वल्लभ भवन, सतपुड़ा-विंध्याचल भवन के अधिकारी-कर्मचारी एवं पुलिस अधिकारी आदि उपस्थित थे।  

कानपुर गैंगस्टर विकास दुबे की पत्नी की याचिका खारिज, UP77 सीरीज पर रोक नहीं लगी

 नई दिल्ली उत्तर प्रदेश के कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे के जीवन से जुड़ी वेब सीरीज ‘यूपी 77’ की रिलीज पर रोक लगाने से दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल इनकार कर दिया है. हालांकि कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना अंतिम फैसला सुरक्षित रख लिया है. ये वेब सीरीज 25 दिसंबर को रिलीज होने वाली है. वेब सीरीज पर नहीं लगेगी रोक इस मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सचिन दत्ता ने सवाल उठाया कि क्या ये वेब सीरीज पूरी तरह काल्पनिक कहानी है? इस पर प्रोड्यूसर की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि वेब सीरीज की शुरुआत में डिस्क्लेमर दिया गया है और इसके लिए किसी तरह के सर्टिफिकेशन की जरूरत नहीं होती. उन्होंने ये भी कहा कि सीरीज में दिखाए गए किरदारों के नाम असली नामों से अलग रखे गए हैं. वहीं, याचिकाकर्ता और विकास दुबे की पत्नी ऋचा दुबे की ओर से वकील ने दलील दी कि इस वेब सीरीज से उनके परिवार की बदनामी होगी. वकील ने कहा कि सीरीज के प्रोमो में इसे 'भारत का सबसे चर्चित एनकाउंटर' बताया गया है. भले ही सीरीज में किरदार का नाम विकास की जगह विशाल दुबे रखा गया हो, लेकिन कहानी साफ तौर पर विकास दुबे से जुड़ी हुई लगती है, जिससे परिवार की छवि को नुकसान पहुंचेगा. बिना परमिशन दिखाई जाएगी पर्सनल लाइफ याचिका में ये भी कहा गया कि वेब सीरीज में विकास दुबे की शादीशुदा और निजी जिंदगी को बिना परिवार की अनुमति के दिखाया गया है, जो गलत है. इस पर प्रोड्यूसर के वकील ने जवाब दिया कि फिल्म में दिखाई गई जानकारी पब्लिक डोमेन से ली गई है और जरूरत पड़ी तो डिस्क्लेमर में इसे और साफ तौर पर जोड़ा जाएगा. कोर्ट ने ये भी रिकॉर्ड किया कि प्रोड्यूसर की ओर से कहा गया है कि ये कहानी पूरी तरह काल्पनिक है और किसी भी व्यक्ति के असली जीवन पर आधारित नहीं है. प्रोड्यूसर ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वे याचिकाकर्ता की आपत्तियों को दूर करने के लिए डिस्क्लेमर में जरूरी बदलाव करने को तैयार हैं. इसके लिए वे हाईकोर्ट में एक हलफनामा भी दाखिल करेंगे. क्या था विकास दुबे एनकाउंटर? गौरतलब है कि गैंगस्टर विकास दुबे की मौत 10 जुलाई 2020 की सुबह एक पुलिस मुठभेड़ में हुई थी. उस समय पुलिस उसे उज्जैन से कानपुर लेकर जा रही थी. पुलिस का कहना था कि रास्ते में उनकी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसके बाद विकास दुबे ने भौती इलाके में भागने की कोशिश की और इसी दौरान मुठभेड़ में मारा गया. विकास दुबे के एनकाउंटर से पहले उसके पांच कथित सहयोगी भी अलग-अलग पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए थे. इस पूरे मामले की जांच के लिए एक आयोग बनाया गया था. अप्रैल 2022 में सुप्रीम कोर्ट के जज बी. एस. चौहान की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय जांच समिति ने उत्तर प्रदेश पुलिस को क्लीन चिट दे दी थी. आयोग की रिपोर्ट में कहा गया था कि विकास दुबे और उसके साथियों के एनकाउंटर में यूपी पुलिस की ओर से किसी भी तरह की गलत कार्रवाई के सबूत नहीं मिले.

सफलता और धन का रास्ता: नीम करोली बाबा की बताई 5 सीख जो बना सकती हैं आपको कामयाब

नीम करौली बाबा एक बहुत ही सरल लेकिन चमत्कारी संत थे। उनके पास जो भी गया, उसे जीवन का सही रास्ता मिला, सुकून मिला और उसके जीवन में बदलाव भी आया। बाबा ने सिखाया कि असली समृद्धि कैसे आती है। उनका मानना था कि अगर इंसान अपने मन, सोच और कर्म को सही दिशा में ले जाए, तो पैसा और सुख अपने आप जीवन में आने लगते हैं। बाबा ने हमेशा सच्चे जीवन और अच्छे कर्मों पर जोर दिया। उन्होंने कुछ ऐसे आसान नियम बताए, जो अगर हर इंसान अपनाए, तो ना सिर्फ वह अमीर बन सकता है, बल्कि मन से भी संतुष्ट रह सकता है। चलिए जानते हैं नीम करौली बाबा के अनुसार जीवन में अमीर बनने के लिए क्या करना चाहिए। सेवा भावना को अपनाएं नीम करौली बाबा का सबसे पहला और महत्वपूर्ण संदेश था- निःस्वार्थ सेवाभाव। उनका कहना था कि जब आप बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की मदद करते हैं, तो ईश्वर आपको इसके बदले में कई गुना ज्यादा लौटा कर वापस देता है। इसलिए नीम करोली बाबा का कहना मानकर जरूरतमंदो की हमेशा सहायता करनी चाहिए फिर वो चाहे आर्थिक रूप से हो या इमोशनली। जो लोग दूसरों की सहायता करते हैं, उनके जीवन में पॉजिटिव एनर्जी आती है, जिससे धन की देवी लक्ष्मी उनकी तरफ आकर्षित होती है। हमेशा सच्चाई और ईमानदारी से रहें नीम करौली बाबा हमेशा सत्य और ईमानदारी की राह पर चलने की प्रेरणा देते थे। उनका मानना था कि अगर इंसान सच्चे दिल से अपने कर्म करे और छल-कपट से दूर रहे, तो भगवान खुद उस व्यक्ति को जीवन के सही रास्ते पर ले जाते हैं। जो लोग सच्चाई और ईमानदारी से रहते हैं, उन्हें व्यापार और नौकरी हर जगह पर तरक्की मिलती है, साथ ही सामाजिक तौर पर भी उनकी इज्जत बढ़ती है। ध्यान और भक्ति से जुड़ें नीम करौली बाबा खुद भक्ति और साधना से जुड़े हुए थे। ऐसे में वे दूसरों को भी भक्ति की राह पर चलने की सलाह देते थे। उनका कहना था कि अगर कोई व्यक्ति रोज थोड़ी देर के लिए ध्यान करता है और भगवान का नाम जपता है, तो उसके अंदर की सारी नेगेटिव एनर्जी खत्म हो जाती है और मन शांत होता है। ऐसे शांत मन के साथ जब कोई व्यक्ति कुछ भी काम करता है तो उसे अपने काम में सफलता जरूर मिलती है। जीवन में उदारता अपनाएं नीम करोली बाबा का कहना था कि धन को कभी भी बांधकर नहीं रखना चाहिए, बल्कि अगर आपके पास धन है तो उससे जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए और दान करना चाहिए। जब आप किसी भूखे को भोजन देते हैं या अनाथ बच्चों की पढ़ाई में सहायता करते हैं, तो इससे आपके जीवन में समृद्धि आती है। कर्म पर भरोसा करें, फल की चिंता ना करें नीम करौली बाबा ने जीवन से जुड़ी एक बहुत ही महत्वपूर्ण सीख दी है कि इंसान को अपना कर्म करना चाहिए और फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। जब कोई व्यक्ति पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपने कर्मों में लगा रहता है, तो उसे जीवन में सफलता जरूर मिलती है। ऐसे व्यक्ति के जीवन में कभी सुख और समृद्धि की कमी नहीं होती।

ठंड से ठिठुरा बिहार: 14 जिलों में Cold Day का अलर्ट जारी

पटना बिहार के अधिकांश जिलों में इन दिनों गंभीर शीत लहर और कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। मौसम विभाग के अनुसार दिन और रात के तापमान में बेहद कम अंतर रह जाने से राज्यभर में कनकनी काफी बढ़ गई है। फिलहाल पटना, अरवल और औरंगाबाद समेत 14 जिलों में शीत दिवस (Cold Day) की स्थिति बनी हुई है और अगले 3 से 4 दिनों तक ठंड से राहत मिलने की संभावना नहीं है। कई इलाकों में छाया रहेगा घना कोहरा मौसम विभाग ने बताया है कि बिहार के अलग-अलग हिस्सों में Dense Fog बने रहने के आसार हैं। सुबह और रात के समय कोहरे का असर ज्यादा रहेगा, जिससे सामान्य जनजीवन के साथ-साथ यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। 7–8°C के साथ सबसे ठंडा रहा गयाजी बीते 24 घंटों के दौरान गयाजी राज्य का सबसे ठंडा स्थान दर्ज किया गया। यहां न्यूनतम तापमान 7 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड किया गया, जिससे ठंड का प्रकोप और ज्यादा महसूस किया गया। रेल, सड़क और हवाई सेवाएं प्रभावित घने कोहरे के कारण कम दृश्यता की स्थिति बनी हुई है। इसका सीधा असर रेल, सड़क और हवाई यातायात पर पड़ा है। पटना, दरभंगा और पूर्णिया एयरपोर्ट से आज भी कई नियमित उड़ानें रद्द की गई हैं, जबकि कुछ फ्लाइट्स देरी से संचालित हो रही हैं। वहीं कोहरे की वजह से लंबी दूरी की कई ट्रेनें अपने तय समय से काफी देरी से चल रही हैं। ठंड के चलते स्कूलों में छुट्टी तेज ठंड और शीतलहर से बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे असर को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्कूलों को लेकर अहम फैसले लिए हैं—     पटना जिला: कक्षा 8 तक के सभी स्कूल 27 दिसंबर तक बंद     लखीसराय: कक्षा 8 तक शैक्षणिक गतिविधियां 4 जनवरी 2026 तक स्थगित     कक्षा 9 और उससे ऊपर की कक्षाएं सावधानी के साथ जारी     शेखपुरा: कक्षा 8 तक के स्कूलों में 26 दिसंबर तक पठन-पाठन पर रोक     प्रशासन ने अभिभावकों से बच्चों को ठंड से बचाने की अपील की है।

तेजस्वी यादव पर JDU का बड़ा आरोप, हिस्ट्रीशीटर रमीज संग विदेश घूमने का दावा

पटना जदयू प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने बिहार के नेता प्रतिपक्ष को लेकर बड़ा दावा किया है। नीरज कुमार ने बिहार डीजीपी को पत्र लिखकर कहा है कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के साथ विदेश भ्रमण पर हिस्ट्रीशीटर रमीज नेमत खान गए हुए हैं। पुलिस को इसपर कड़ी नजर रखनी चाहिए। उन्होंने कहा है कि मीडिया से यह जानकारी मिली है। उन्होंने कहा है कि रमीज नेतान खान उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के रहने वाले हैं। हत्या के मामले में वह पूर्व में गिरफ्तार भी हो चुके हैं। नीरज कुमार ने एक्स पर लिखा, ‘DGP, बिहार को पत्र। मीडिया के अनुसार तेजस्वी यादव हिस्ट्री-शीटर रमीज़ नेमत खान के साथ विदेश भ्रमण पर गए हैं। आशंका है कि मोतिहारी विधानसभा से राजद के प्रत्याशी देवा गुप्ता भी उस यात्रा में शामिल हो, जिस पर 28 संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं 1 लाख रुपये का इनाम घोषित है।’ कौन है रमीज नेमत खान बिहार चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल की हार और फिर लालू परिवार की बेटी रोहिणी आचार्या के साथ परिवार में टकरार होने के बाद रमीज नेमत खान का नाम सामने आया था। इस हार के बाद रोहिणी आचार्या ने रमीज और संजय यादव का नाम लिया था औऱ इनपर निशाना साधा था। रमीज के बारे में बताया जाता है कि वो तेजस्वी यादव की तरह ही एक क्रिकेटर रहे हैं। रमीज उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के रहने वाले हैं। बताया जाता है कि बिहार चुनाव के दौरान रमीज तेजस्वी यादव की कैंपेनिंग और चुनाव से जुड़े अन्य कार्य संभालते थे। रमीज नेमत खान बलरामपुर के चर्चित नेता रिजवान जहीर के दामाद हैं। रिजवान जहीर पर मर्डर का केस है औऱ वो जेल में बंद हैं। इस मामले में रमीज भी अभियुक्त हैं। रमीज को साल 2022 में गिरफ्तार भी किया गया था। रमीज नेमत खान को तेजस्वी यादव का बेहद करीबी माना जाता है। देवा गुप्ता पर पुलिस ने इनाम रखा है देवा गुप्ता बिहार विधानसभा चुनाव में मोतिहारी जिले से राष्ट्रीय जनता दल के प्रत्याशी थे। उनकी पत्नी मेयर हैं। मेयर पति पर छतौनी थाना क्षेत्र के बढई टोला निवासी देवा गुप्ता पर हत्या के मामले में इनाम की घोषणा की गई है। उसपर जिले के विभिन्न जगहों पर 28 अपराधिक मामले दर्ज हैं। देवा गुप्ता पर एक लाख रुपये इनाम रखा गया है। देवा गुप्ता 2 मामलों में फरार भी बताए जाते हैं।  

शिवलिंग को इस दिशा में रखकर करें अभिषेक, जीवन बन जाएगा खुशहाल और सिद्धियों से भरपूर

हिंदू धर्म में महादेव को देवों के देव कहा गया है। नए साल के पहले दिन यदि विधि-विधान से घर में शिवलिंग की स्थापना और अभिषेक किया जाए, तो यह न केवल मानसिक शांति लाता है बल्कि रुके हुए कार्यों को भी गति देता है। लेकिन, अक्सर लोग अनजाने में शिवलिंग को गलत दिशा में रख देते हैं, जिससे उन्हें पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता। तो आइए जानते हैं साल के पहले दिन किस दिशा में शिवलिंग रखकर करें अभिषेक करें। किस दिशा में रखें शिवलिंग? वास्तु शास्त्र और शिव पुराण के अनुसार, शिवलिंग की स्थापना के लिए उत्तर दिशा सबसे उत्तम मानी गई है। उत्तर दिशा भगवान शिव और माता पार्वती का निवास स्थान मानी जाती है। शिवलिंग की जलाधारी का मुख हमेशा उत्तर दिशा की ओर ही होना चाहिए। इससे घर में सुख-समृद्धि का प्रवाह निरंतर बना रहता है। भूलकर भी न करें ये दिशा संबंधी गलती शिवलिंग को कभी भी पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर मुख करके नहीं रखना चाहिए। यदि आप दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूजा करते हैं, तो इसे भी शास्त्रों में वर्जित माना गया है। घर के मंदिर में शिवलिंग को हमेशा ऐसी जगह रखें जहाँ से ऊर्जा का संचार चारों ओर हो सके। नए साल पर अभिषेक की विधि सिद्धियों की प्राप्ति के लिए साल के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें। दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से भोलेनाथ का अभिषेक करें। यह जीवन के पांच दोषों को दूर करता है। महादेव को बेलपत्र, धतूरा, और चंदन अर्पित करें। ध्यान रहे कि शिवलिंग पर कभी भी केतकी के फूल या सिंदूर न चढ़ाएं। अंत में गंगाजल या शुद्ध जल से अभिषेक करते समय 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें। घर में शिवलिंग का आकार शास्त्रों के अनुसार, घर में रखे जाने वाले शिवलिंग का आकार बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए। गृहस्थ जीवन जीने वाले लोगों के लिए अंगूठे के ऊपर के पोर जितना बड़ा शिवलिंग ही सबसे शुभ माना जाता है। इससे अधिक बड़ा शिवलिंग मंदिरों के लिए उपयुक्त होता है। सिद्धि और सफलता के लिए विशेष मंत्र अभिषेक के दौरान यदि आप 'श्री शिवाय नमस्तुभ्यं' या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हैं, तो यह आपके स्वास्थ्य और करियर के लिए 'रामबाण' सिद्ध हो सकता है।