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अमर सिंह चहल प्रकरण में जांच तेज, तीन आरोपियों के नाम सामने आए

पटियाला पूर्व IG अमर सिंह चहल के मामले में पंजाब पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन मुख्य आरोपियों की पहचान की है। इसके अलावा पुलिस ने 25 बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिए हैं और करीब 3 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन रोक दिए हैं। यह मामला 8.10 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड से जुड़ा है। जांच में पता चला है कि इस ठग गिरोह के तार महाराष्ट्र से जुड़े हैं और तीन मुख्य आरोपियों की भी पहचान कर ली गई है। जांच में पता चला कि आरोपी WhatsApp और Telegram ग्रुप के एक्टिव मेंबर थे। पुलिस के मुताबिक, ठगों ने कई फर्जी पहचान पत्र और अलग-अलग बैंक अकाउंट के जरिए ट्रांजैक्शन किए। जांच के दौरान 25 बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिए गए हैं और करीब 3 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन रोक दिए गए हैं। शक है कि इस गैंग में 10 से ज्यादा लोग शामिल हैं। आरोपियों ने बैंक का CEO बनकर इन्वेस्टमेंट के नाम पर पैसे ठगे। यह भी पता चला है कि अमर सिंह चहल ने 22 दिसंबर को धोखा खाने के बाद खुद को गोली मार ली थी, हालांकि वह इस घटना में बच गए थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इससे पहले उन्होंने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। पुलिस को मौके से 16 पेज का सुसाइड नोट भी मिला है। नोट में उन्होंने आत्महत्या करने के अपने कारणों की जानकारी दी थी। जिससे पता चला है कि पूर्व IG ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हुए थे, जिससे उन्हें काफी फाइनेंशियल नुकसान हुआ था। गौरतलब है कि 2019 में रिटायर हुए अमर सिंह चहल यहां अर्बन एस्टेट इलाके में अपने परिवार के साथ रहते हैं। वह कुछ दिन पहले दोपहर करीब 1:30 बजे अपने घर के आंगन में आए और राइफल से खुद को सीने में गोली मार ली। फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। 

जनता की सुनवाई को लेकर सक्रिय डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा, लगाएंगे जनता दरबार

पूर्णिया बिहार में जमीन और राजस्व से जुड़े पेचीदा मामलों को सुलझाने के लिए आज पूर्णिया की धरती पर एक बड़ी पहल होने जा रही है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा भूमि सुधार जन कल्याण संवाद कार्यक्रम के माध्यम से आम जनता से मुखातिब होंगे। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वर्षों से लंबित पड़े जमीन विवादों का समाधान करना और अंचल कार्यालयों की कार्यशैली को पारदर्शी बनाना है। मंत्री का भव्य स्वागत और प्रशासनिक हलचल डिप्टी CM विजय कुमार सिन्हा गुरुवार रात को ही पूर्णिया के सर्किट हाउस पहुंच चुके हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें फूलों की माला और बुके के साथ जोरदार स्वागत किया। मंत्री के आगमन के साथ ही प्रशासनिक खेमे में हलचल तेज हो गई है। कार्यक्रम दो चरणों में आयोजित कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए इसे दो हिस्सों में बांटा गया है।     पहली पाली (सीधा संवाद): सुबह 11 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक प्रेक्षागृह सह आर्ट गैलरी में जनता दरबार लगेगा। इसमें डिप्टी CM लोगों की शिकायतें सुनेंगे। अंचलाधिकारी (CO) और राजस्व कर्मचारी शिकायतकर्ता के सामने बैठेंगे, ताकि किसी भी शिकायत पर टालमटोल न हो और समाधान तुरंत निकल सके।     दूसरी पाली (समीक्षा बैठक): दोपहर 3:30 बजे से शाम 5 बजे तक समाहरणालय के महानंदा सभागार में समीक्षा बैठक आयोजित होगी। इसमें जिले के सभी वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे और दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस, ई-मापी और अभियान बसेरा-2 की प्रगति पर चर्चा की जाएगी। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया और उद्देश्य कार्यक्रम में भाग लेने के लिए सुबह 9 बजे से 10:30 बजे तक रजिस्ट्रेशन काउंटर खुलेंगे। रजिस्ट्रेशन अंचलवार किया जाएगा। आवेदकों को अपना नाम, पता और मोबाइल नंबर देना होगा ताकि भविष्य में उनकी शिकायत पर हुई कार्रवाई की जानकारी SMS के जरिए दी जा सके। जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने बताया कि इस संवाद का उद्देश्य भूमि से जुड़ी सेवाओं को समय पर जनता तक पहुंचाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड्स को अपडेट करना और भूमि विवादों को न्यूनतम स्तर तक लाना प्रशासन की प्राथमिकता है।  

2 साल में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की उपलब्धियां, मंत्री कृष्णा गौर ने दी जानकारी

भोपाल। मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव सरकार के 2 साल पूरे होने पर मंत्रियों के अपने-अपने विभागों का रिपोर्ट कार्ड पेश करने का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में 26 दिसंबर शुक्रवार को पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण, विमुक्त घुमंतु और अर्द्धघुमंतु कल्याण विभाग की राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में अपने विभाग की उपलब्धियों और आगामी कार्ययोजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। पत्रकार वार्ता की शुरुआत वीर बाल दिवस के अवसर पर सिख पंथ के 10वें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के साहबजादों वीर जोरावर सिंह और वीर फतेह सिंह की शहादत को नमन करते हुए की गई। मंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि मध्यप्रदेश तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश पूरी ऊर्जा के साथ आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यों की प्रशंसा की गई है। मंत्री ने कांग्रेस शासन पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस के राज में मध्यप्रदेश पिछड़ा हुआ प्रदेश था, लेकिन शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में प्रदेश को ‘बीमारू’ राज्य के टैग से मुक्ति मिली। अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश को नई गति और ऊर्जा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं और सरकार विकास के नए आयाम स्थापित कर रही है। आदर्श छात्रावासों का निर्माण और उन्नयन तेज़ी से हो रहा अपने विभाग की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कृष्णा गौर ने बताया कि पिछले दो वर्षों में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। ओबीसी छात्रावास परियोजना के तहत पूरे प्रदेश में आदर्श छात्रावासों का निर्माण और उन्नयन तेज़ी से किया जा रहा है। प्रथम चरण में 30 कन्या छात्रावासों को शामिल किया गया है और आने वाले समय में सभी छात्रावासों का उन्नयन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आदर्श छात्रावासों में प्रत्येक कक्ष का रिनोवेशन, नया फर्नीचर, अलमारी, अध्ययन टेबल, भोजन कक्ष और आधुनिक किचन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही सभी छात्रावासों में वाई-फाई, इंडोर जिम, ई-लाइब्रेरी और सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इस उन्नयन कार्य पर लगभग 16 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। ओबीसी छात्रों के लिए निशुल्क मेस सुविधा की शुरुआत मंत्री ने बताया कि ओबीसी छात्रों के लिए निशुल्क मेस सुविधा की शुरुआत की गई है, जिससे छात्रों को गुणवत्तापूर्ण भोजन मिलेगा। यह सुविधा 26 जनवरी 2026 से लागू की जाएगी। छात्रावासों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं, जिनमें सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे तथा नियमित रूप से योग शिविरों का आयोजन भी किया जा रहा है। छात्रवृत्ति योजनाओं की जानकारी देते हुए कृष्णा गौर ने बताया कि वर्ष 2023-24 में 7.35 लाख विद्यार्थियों को डीबीटी के माध्यम से 978.43 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति स्वीकृत की गई। वहीं वर्ष 2024-25 में 7.72 लाख छात्र-छात्राओं को 1119.13 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी गई। वर्ष 2025-26 में 5 नवंबर 2025 तक 5.23 लाख विद्यार्थियों को 681.41 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि विभाग की एक विशेष योजना के अंतर्गत प्रत्येक वर्ष 50 विद्यार्थियों को विदेश अध्ययन के लिए भेजा जाता है। वर्ष 2024-25 में चयनित 50 में से 33 विद्यार्थियों को विदेश भेजा गया, जिस पर 15.44 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा एमपीपीएससी और यूपीएससी में सफलता प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को क्रमशः 1 लाख और 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। वर्ष 2024-25 में 1320 अभ्यर्थियों को 3 करोड़ 65 लाख रुपये तथा वर्ष 2025-26 में अक्टूबर तक 635 अभ्यर्थियों को 69 लाख 60 हजार रुपये वितरित किए गए। स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए अल्पसंख्यक उद्यम स्वरोजगार योजना स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए अल्पसंख्यक उद्यम स्वरोजगार योजना चलाई जा रही है। मंत्री ने बताया कि वर्ष 2024-25 में बैंकों के माध्यम से 583 हितग्राहियों को 34 करोड़ 71 लाख रुपये का ऋण तथा 833 हितग्राहियों को 2 करोड़ 79 लाख रुपये का ऋण प्रदान किया गया। इसके साथ ही ओबीसी वर्ग के युवाओं को विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से टेक्निकल इंटर्न ट्रेनिंग प्रोग्राम (TITP) के तहत पहले चरण में 16 बच्चों को जापान भेजा गया, जहां उन्हें रोजगार मिला। इस योजना का विस्तार करते हुए अब 300 युवाओं को जापान और 300 युवाओं को जर्मनी भेजने की कैबिनेट से स्वीकृति मिल गई है। मंत्री ने दिल्ली छात्र गृह योजना की जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना के अंतर्गत लाभार्थियों की संख्या 50 से बढ़ाकर 150 कर दी गई है। साथ ही छात्रों को मिलने वाली मासिक सहायता राशि 1550 रुपये से बढ़ाकर 10 हजार रुपये की जा रही है और अभिभावकों की आय सीमा 1 लाख से बढ़ाकर 3 लाख रुपये की जा रही है। इसके अलावा सरदार पटेल कोचिंग प्रशिक्षण योजना के तहत 10 हजार छात्रों को निशुल्क कोचिंग दी जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कुल 107 छात्रावास संचालित हैं, जिनमें 55 कन्या और 52 बालक छात्रावास हैं। संभागीय स्तर पर 500 सीटर छात्रावासों का निर्माण भी कराया जा रहा है, जिसकी सुविधा फिलहाल इंदौर और जबलपुर में उपलब्ध है। साथ ही अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं के लिए ‘शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना 2025’ तैयार की गई है, जिसके तहत प्रति वर्ष 4 हजार युवाओं को प्रशिक्षण देकर नियुक्ति प्रदान की जाएगी। मंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (PMJVK) के तहत प्रदेश के युवाओं को स्पेस टेक्नोलॉजी से जोड़ने के उद्देश्य से डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सिमेटरी स्पेस सेंटर स्थापित करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। SC-ST को जैसा लाभ मिला वैसा OBC को नहीं मिला पत्रकार वार्ता के अंत में पत्रकारों के सवालों के जवाब में कृष्णा गौर ने आरक्षण को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि आजादी के बाद अनुसूचित जाति और जनजाति को जो लाभ मिले, वैसा ओबीसी वर्ग को नहीं मिला। लंबे संघर्ष के बाद केंद्र सरकार द्वारा ओबीसी समुदाय को अधिकार और लाभ दिए गए। वहीं, उन्होंने वक्फ संपत्तियों को लेकर बताया कि मध्यप्रदेश में वक्फ की संपत्तियों का डिजिटाइजेशन किया जा रहा है और … Read more

फ्री ट्रेड डील के बाद भी भारत के लिए जरूरी काम, रिपोर्ट में मिली अहम जानकारी

नई दिल्‍ली भारत ने एक के बाद एक दूसरे देशों से 18 फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्‍ताक्षर किया है, लेकिन एक्‍सपोर्ट में उतनी तेजी से नहीं बढ़ रहा है. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) का कहना है कि नए समझौतों पर हस्ताक्षर करने के बजाय मौजूदा समझौतों से निर्यात में ठोस लाभ सुनिश्चित करने पर फोकस करना चाहिए. खासकर इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, इंजीनियरिंग और टेक्‍सटाइल्‍स सेक्‍टर में, जहां से ज्‍यादा लाभ मिल सकता है.  रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में भारत का कुल निर्यात 825 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था, लेकिन वित्त वर्ष 2026 के दौरान इसमें मामूली इजाफा हुआ है और यह करीब 850 अरब अमेरिकी डॉलर तक होने का अनुमान है. ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिकी टैरिफ के असर कारण इसमें ज्‍यादा इजाफा नहीं हुआ है.   कमजोर इंटरनेशलन डिमांड और बढ़ते सेफ उपायों के कारण माल निर्यात में कोई खास बदलाव नहीं होने की उम्मीद है, जबकि सर्विस सेक्‍टर एक्‍सपोर्ट 400 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो सकता है. यह भारत के समग्र व्यापार प्रदर्शन को सपोर्ट कर सकता है.  भारत ने की 18 एफटीए डील GTRI की रिपोर्ट में कहा गया है कि 18 मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) पर पहले ही हस्ताक्षर हो चुके हैं और साल 2026 में और भी हस्ताक्षर होने की संभावना है. ऐसे में भारत की प्राथमिकता समझौतों पर हस्ताक्षर करने से हटकर मुक्त व्यापार समझौतों से वास्तविक निर्यात लाभ प्राप्त करने की ओर होनी चाहिए.  GTRI ने इस बात पर फोकस किया है कि भारत पिछले कई सालों में सबसे कठिन ग्‍लोबल ट्रेड सिचुएशन के साथ 2026 में एंट्री ल रहा है. विकसित अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ते संरक्षणवाद, वैश्विक मांग में मंदी और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी नई व्यापार बाधाएं भारत के निर्यात बढ़ाने के प्रयासों के साथ मेल खा रही हैं. इससे बाजार में विस्‍तार के बजाय मौजूदा स्थिति को बनाए रखने पर ज्‍यादा फोकस हो रहा है.  टैरिफ सबसे बड़ा दबाव  संयुक्त राज्य अमेरिका एक महत्वपूर्ण दबाव के तौर पर उभरा है. डोनाल्ड ट्रम्प ने विश्व व्यापार संगठन के मानदंडों को दरकिनार करते हुए एकतरफा भारी टैरिफ लागू किया है. मई और नवंबर 2025 के बीच मौजूदा 50 प्रतिशत टैरिफ के कारण भारत का अमेरिका को निर्यात लगभग 21 प्रतिशत गिर गया.  निर्यात में और गिरावट आ सकती है जीटीआरआई ने चेतावनी दी है कि जब तक अमेरिका भारत द्वारा रूस से तेल की खरीद पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत दंडात्मक टैरिफ को वापस नहीं लेता या कोई व्यापार समझौता नहीं करता, भारत के सबसे बड़े बाजार को निर्यात में और गिरावट आ सकती है.  भारत के लिए यूरोप से भी चुनौती यूरोप एक अलग चुनौती पेश कर रहा है. यूरोपीय संघ 1 जनवरी, 2026 से अपना कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म लागू करेगा, जिसके तहत आयात पर कार्बन टैक्‍स लाया जाएगा. अभी ये टैक्‍स लागू होने से पहले ही यूरोपीय संघ को भारत के इस्पात निर्यात में लगभग 24 प्रतिशत की गिरावट आई है.  हालांकि इन चुनौतियों के बावजूद, रिपोर्ट में लचीलेपन के संकेत मिले हैं. अमेरिका को निर्यात में गिरावट के बावजूद अन्‍य ग्‍लोबल मार्केट को शिपमेंट में करीब 5.5 फीसदी की तेजी है. जीटीआरआई ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक भू-राजनीति पर सीमित प्रभाव के साथ, भारत को अपने देश पर फोकस करना चाहिए. 

16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध की वकालत, मद्रास हाई कोर्ट ने केंद्र को दी सलाह

मदुरै मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने केंद्र सरकार को बड़ा सुझाव दिया है कि वह ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर कानून लाने की संभावना तलाशे, जिसमें 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का उपयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाए. जस्टिस केके रामकृष्णन और जस्टिस जी जयचंद्रन की डिवीजन बेंच एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई कर रही थी, जिसमें इंटरनेट पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई गई. याचिकाकर्ता एस विजयकुमार ने कोर्ट में 'रिट ऑफ मैंडमस' की मांग की थी. उन्होंने पूरे देश में सभी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (ISP) को 'पैरेंटल विंडो' या पैरेंटल कंट्रोल सुविधा अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने की मांग की. याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क था कि इंटरनेट पर अश्लील सामग्री और चाइल्ड सेक्शुअल अब्यूज मटेरियल (CSAM) आसानी से उपलब्ध है, जो नाबालिग बच्चों तक पहुंच रहा है. इससे बच्चों का मानसिक और भावनात्मक विकास खतरे में पड़ रहा है. हाई कोर्ट ने याचिका पर विस्तार से सुनवाई के बाद इसे निपटाते हुए कहा, 'हम समझते हैं कि ऑनलाइन CSAM वाली वेबसाइट्स और URL लगातार अपडेट होती रहती हैं और सक्रिय रहती हैं. हालांकि, इसके साथ-साथ यूजर एंड पर भी नियंत्रण जरूरी है. यह नियंत्रण केवल पैरेंट कंट्रोल ऐप या सुविधा से ही संभव है. इसके लिए अंतिम उपयोगकर्ताओं को चाइल्ड पोर्नोग्राफी के खतरे और बचाव के उपायों के बारे में जागरूक करना अनिवार्य है.' भारत में भी बने ऑस्ट्रेलिया जैसा कानून हाई कोर्ट ने आगे जोर देते हुए कहा, 'अंततः यह व्यक्तिगत चुनाव और अधिकार है कि कोई व्यक्ति ऐसी घृणित सामग्री देखे या न देखे. लेकिन बच्चों के मामले में जोखिम बहुत अधिक है, इसलिए माता-पिता की जिम्मेदारी भी उतनी ही बढ़ जाती है. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के सुझाव पर हम कहते हैं कि भारत सरकार ऑस्ट्रेलिया जैसे कानून की संभावना तलाश सकती है, जिसमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया का उपयोग वर्जित किया गया हो.' मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने अंतरिम राहत के तौर पर निर्देश दिया कि जब तक ऐसा कानून नहीं बनता, तब तक संबंधित अधिकारी जागरूकता अभियान को और अधिक प्रभावी बनाएं. सभी उपलब्ध माध्यमों से संवेदनशील समूहों, खासकर बच्चों और अभिभावकों तक संदेश पहुंचाया जाए. कोर्ट ने उम्मीद जताई कि केंद्र और राज्य स्तर पर बने आयोग इस दिशा में ठोस कार्ययोजना बनाकर उसे पूरी तरह लागू करेंगे. विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया का अंधाधुंध उपयोग बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, साइबर बुलिंग और अनुचित सामग्री के संपर्क में आने का खतरा बढ़ा रहा है.

विश्व कप विजेता कपिल देव पहुंचे चित्तौड़गढ़, युवाओं में भरा जोश और आत्मविश्वास

चित्तौड़गढ़ भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और 1983 विश्व कप विजेता टीम के महानायक कपिल देव गुरुवार को चित्तौड़गढ़ पहुंचे। इस दौरान उन्होंने इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित सांसद खेलकूद महोत्सव के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। समारोह को संबोधित करते हुए कपिल देव ने कहा कि वर्तमान समय में सरकार द्वारा खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए कई मंच उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सांसद खेलकूद प्रतियोगिता भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। ऐसे आयोजनों से ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को आगे आने का अवसर मिलता है और यही खिलाड़ी आगे चलकर देश का नाम रोशन करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके खेल के समय आज जैसी सुविधाएं खिलाड़ियों को उपलब्ध नहीं थीं, लेकिन अब सरकार और विभिन्न संस्थाएं खेलों को प्रोत्साहन देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं। इससे भारत में खेलों का भविष्य उज्ज्वल नजर आता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कथन का उल्लेख करते हुए कपिल देव ने कहा, “खून-पसीने की कमाई का मजा ही अलग होता है। अगर पूरी लगन और मेहनत से प्रयास किया जाए, तो उसका परिणाम अवश्य अच्छा आता है।” उन्होंने युवाओं से कहा कि जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति चैंपियन ही बने, लेकिन निराश होने की कोई जरूरत नहीं है। कई बार अगली पीढ़ी वही सपना साकार करती है, जिसके लिए आज मेहनत की जाती है। कपिल देव ने कहा कि मेहनत का परिणाम हमारे हाथ में नहीं होता, लेकिन प्रयास पूरी तरह हमारे नियंत्रण में होता है। इसलिए लगातार प्रयास करते रहना चाहिए, सफलता निश्चित रूप से मिलेगी। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जिस तरह आज युवा खिलाड़ी धूप में कड़ी मेहनत कर रहे हैं, कभी वह स्वयं भी इसी तरह मैदान में बैठकर सीखते थे। आज उन्होंने जो कुछ हासिल किया है, वह उसी मेहनत और सीख का परिणाम है। इससे पूर्व इंदिरा गांधी स्टेडियम पहुंचने पर कपिल देव का भव्य स्वागत किया गया। सांसद सीपी जोशी, जिला कलेक्टर आलोक रंजन, पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी, निंबाहेड़ा विधायक श्रीचंद्र कृपलानी, चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान सिंह, कपासन विधायक अर्जुनलाल जीनगर एवं बेगूं विधायक सुरेश धाकड़ ने उन्हें उपरणा ओढ़ाकर तथा विजय स्तंभ का प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।  

केरल में टूटा राजनीतिक मिथक: बीजेपी का पहला मेयर, असेंबली चुनाव से पहले बड़ा संकेत

केरल दक्षिणी राज्य केरल में भाजपा ने इतिहास रच दिया है। वहां पहली बार भाजपा का मेयर बना है। भाजपा के वरिष्ठ नेता वी.वी. राजेश (V V Rajesh) शुक्रवार (26 दिसंबर 2025) को केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम नगर निगम के पहले भाजपा मेयर चुने गए हैं। यह दक्षिणी राज्य की राजनीति में एक ऐतिहासिक और अहम घटना मानी जा रही है, क्योंकि राज्य में अब तक BJP को कभी सत्ता नहीं मिली थी। पद संभालने के बाद अपनी पहली टिप्पणी में उन्होंने कहा, "हम सबको साथ लेकर आगे बढ़ेंगे। सभी 101 वार्डों में विकास किया जाएगा… तिरुवनंतपुरम को एक विकसित शहर में बदला जाएगा।" इससे पहले शुक्रवार की सुबह हुए मेयर चुनाव में 45 साल के राजेश को कुल 51 वोट मिले। उन्हें एक निर्दलीय पार्षद (एम. राधाकृष्णन) का भी समर्थन मिला, जबकि एक निर्दलीय पार्षद ने वोट नहीं दिया। इस तरह 100 सदस्यों की उपस्थिति वाले सदन में राजेश के पक्ष में 51 वोट हो गए। उनके खिलाफ खड़े CPIM के आरपी शिवाजी को 29 और कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF के केएस सबरिनाथन को कुल 19 वोट मिले। बता दें कि BJP ने दिसंबर की शुरुआत में हुए तिरुवनंतपुरम नगर निगम चुनाव में 50 सीटें जीतीं थीं। केरल में भाजपा के लिए क्या संकेत? राजेश का मेयर के रूप में पदभार ग्रहण करना ऐसे समय में हुआ है, जब राज्य में आगामी छह महीनों के अंदर विधानसभा चुनाव होने हैं। विधानसभा चुनावों में भाजपा को लंबे समय से संघर्ष करना पड़ रहा है। पार्टी ने इस राज्य में कभी भी जीत हासिल नहीं की है। भाजपा ने 2016 में सिर्फ एक सीट जीती थी। ओ राजगोपाल ने 2016 में तब नेमोम सीट जीती थी। इसके बाद 2024 में पार्टी के एक सांसद अभिनेता सुरेश गोपी ने त्रिशूर से जीत हासिल की थी। इसलिए, राजेश का मेयर बनना केरल की शहरी राजनीति में बीजेपी के लिए एक नए अध्याय का संकेत है। CPM का 45 साल का कब्जा टूटा यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि पिछले 45 वर्षों से तिरुवनंतपुरम नगर निगम पर CPM का कब्जा था। BJP की यह जीत उस परंपरा को न सिर्फ तोड़ती है बल्कि दक्षिणी राज्य में भाजपा की पकड़ को और मजबूत करती है। शपथ ग्रहण समारोह के बाद केरल BJP अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि CPM और कांग्रेस ने मिलकर शहर को पीछे धकेल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया था और पिछले कई वर्षों में ड्रेनेज, पानी और कचरा प्रबंधन जैसे बुनियादी मुद्दों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, “आज से हमारा काम शुरू होता है। हमारा लक्ष्य तिरुवनंतपुरम को देश के शीर्ष तीन शहरों में शामिल करना है।” BJP का कहना है कि यह जीत केरल में शहरी राजनीति के लिए एक नए दौर की शुरुआत है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य में कुछ ही महीनों में चुनाव होने वाले हैं।  

देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु, पटना साहिब में गुरु गोविंद सिंह प्रकाश पर्व का अंतिम आयोजन कल

पटना पटना सिटी स्थित तख्त हरमंदिर साहिब में सिखों के दसवें गुरु, श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के 359वें प्रकाश पर्व का दूसरा दिन श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पटना साहिब पहुंचे। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तख्त साहिब प्रबंधन, विभिन्न गुरुद्वारों और बिहार सरकार की ओर से व्यापक इंतजाम किए गए हैं। बाल लीला गुरुद्वारा में आने वाले संगतों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। यहां 24 घंटे लंगर की निरंतर सेवा जारी है, जिसमें श्रद्धालुओं को बिना किसी भेदभाव के भोजन कराया जा रहा है। संगतों के ठहरने, स्नान और विश्राम की भी समुचित व्यवस्था की गई है। बाल लीला गुरुद्वारा प्रबंधन ने स्वयंसेवकों की तैनाती कर संगतों की हर संभव सहायता सुनिश्चित की है। कश्मीर सिंह भूरी वाले बाबा जी ने बताया कि गुरु गोविंद सिंह जी के प्रकाश पर्व को लेकर देश-विदेश से आने वाली संगतों के लिए रहने, खाने और पीने की पूरी व्यवस्था की गई है। पटना के कंगन घाट पर विशाल लंगर हॉल की व्यवस्था की गई है, जहां हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन लंगर ग्रहण कर रहे हैं। प्रकाश पर्व के दूसरे दिन तख्त श्री हरमंदिर साहिब में कीर्तन-गुरबाणी का विशेष आयोजन किया गया। रागी जत्थों ने गुरु ग्रंथ साहिब की पावन बाणी का मधुर कीर्तन प्रस्तुत किया, जिससे वातावरण गुरु भक्ति से सराबोर हो गया। श्रद्धालुओं ने गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन, बलिदान और संदेशों को स्मरण करते हुए मत्था टेका। इसके साथ ही भव्य शोभा यात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में संगतें शामिल हुईं। शोभा यात्रा में “जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठा। गतका प्रदर्शन, धार्मिक झांकियां और रागी जत्थों के कीर्तन ने शोभा यात्रा को विशेष आकर्षण प्रदान किया। तख्त हरमंदिर साहिब के महासचिव इंद्रजीत सिंह ने बताया कि 27 दिसंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पटना साहिब गुरुद्वारा में शामिल होंगे। केंद्र और राज्य सरकार के सभी मंत्रियों को भी गुरुद्वारा की ओर से निमंत्रण भेजा गया है। इस वर्ष अमेरिका, कनाडा सहित विदेशों से भी हजारों श्रद्धालु प्रकाश उत्सव में शामिल होने पहुंचे हैं। प्रबंधन कमेटी की ओर से उनके रहने, खाने और लंगर की विशेष व्यवस्था की गई है। प्रकाश पर्व के मद्देनज़र बिहार सरकार ने सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया है, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके से गुरुपर्व में भाग ले सकें।

हिना खान ने साझा की दर्दनाक अनुभूति, कैंसर उपचार में नसों का दर्द बना बड़ा संघर्ष

  नई दिल्ली हिना खान कभी भी अपनी कैंसर जर्नी के बारे में बात करने से हिचकिचाती नहीं हैं. उन्होंने जो दर्द सहन किया है, वो उसके बारे में खुलकर बताती हैं. ये सोचकर बताती हैं कि उनकी कही बातों से लोग अवेयर हो सकें कि ये कितनी मुश्किल होती है. कीमोथेरेपी के दौरान हिना काफी शारीरिक और इमोशनल चैलेंजेज से गुजरीं. उनके लिए वो काफी मुश्किल था. खुद को संभालना टफ रहा.  हिना ने बयां किया दर्द काफी महीनों तक हिना ने सबकुछ सहन किया. सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए अपनी बात कही. अपना दर्द बयां किया. सोहा अली खान के पॉडकास्ट में 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' एक्ट्रेस ने कहा- मेरे लिए वो काफी टफ था. बहुत ज्यादा टफ था. वो दिन मैं अपनी जिंदगी में कभी भूल नहीं सकती हूं. तो हर मरीज को एक हफ्ते का गैप दिया जाता है. पहली और दूसरी कीमोथेरेपी में ये गैप देना जरूरी होता है. कुछ के लिए ये गैप तीन हफ्तों का होता है तो मेरे लिए वही था. तीन हफ्ते के गैप में मेरी दूसरी कीमोथेरेपी हुई.  इस ट्रीटमेंट से मरीज अपने आप वो चीजें एक्स्पीरियंस करता है जो उसने सोची भी नहीं होती है. दर्द रुक-रुककर होता है और रिकवरी भी बहुत स्लो होती है. कीमोथेरेपी के साथ जीना मैंने इस दौरान सीखा. हर तीन हफ्ते में मेरी कीमोथेरेपी होती थी. पहला हफ्ता मेरे लिए बहुत ज्यादा मुश्किल भरा बीता. बहुत ज्यादा दर्द था. मुझे सबसे ज्यादा दर्द नसों में होता था. वो भी रुक-रुककर. फिर कीमो के बाद के दो हफ्ते मेरे अच्छे बीतते थे.  कैसे हिना ने खुद को संभाला? उस समय मैंने खुद के साथ समय बिताया. मैंने ट्रैवल किया और वो सबकुछ किया जो मैं करना चाहती थी. पहले फेज का दर्द काफी इंटेन्स था. इसलिए मैंने सोचा कि मैं बाकी के दिन अपने अच्छे गुजारूंगी. दिमाग में मैंने जब ये बात खुद के लिए सोची तो मैं काफी सारी चीजों को और दर्द के झेल पाई. ट्रीटमेंट के दौरान भी काफी चीजें झेल पाई.  वर्कफ्रंट की बात करें तो हिना को आखिरी बार 'पति पत्नी और पंगा' में देखा गया था. पति रॉकी जायसवाल के साथ वो नजर आई थीं. सोनाली बेंद्रे और मुनव्वर फारूकी ने इस शो को होस्ट किया था. रुबीना दिलैक और अभिनव शुक्ला ने शो को जीता था.   

बांग्लादेश में अराजकता के साये में जनसंख्या विस्फोट: कंडोम संकट के बीच रिकॉर्ड जन्मदर

नई दिल्ली  शेख हसीना की सरकार के पतन के साथ ही बांग्लादेश अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। वहां हर दिन उपद्रव देखने को मिल जा रहे हैं। इस सबके बीच एक गंभीर संकट सामने आ खड़ी हुई है। बांग्लादेश इन दिनों कंडोम की भारी किल्लत का सामना कर रहा है। इसके कारण जन्मदर में भी बीते 50 वर्षों में भारी उछाल हुआ है। बांग्लादेश का यह ताजा संकट फंड की कमी और मानव संसाधन की भारी कमी के कारण उत्पन्न हुआ है। इसकी वजह से बीते कुछ वर्षों में गर्भनिरोधकों की आपूर्ति लगातार घटती गई है, जिसका सीधा असर देश की जनसंख्या वृद्धि पर पड़ रहा है। स्थिति यह है कि परिवार नियोजन महानिदेशालय के पास उपलब्ध कंडोम का स्टॉक मात्र 39 दिनों के लिए बचा है। ऐसे में अगले वर्ष की शुरुआत में कम से कम एक महीने तक कंडोम वितरित नहीं किए जा सकेंगे। इससे परिवार नियोजन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। 50 वर्षों में पहली बार बढ़ी प्रजनन दर यह संकट ऐसे समय सामने आया है जब देश में कुल प्रजनन दर के मामले में पिछले 50 वर्षों में पहली बार वृद्धि दर्ज की गई है। मल्टीपल इंडिकेटर क्लस्टर सर्वे 2025 के अनुसार, प्रजनन दर 2024 के 2.3 से बढ़कर 2.4 हो गई है। विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि गर्भनिरोधकों की कमी बनी रही तो प्रजनन दर और बढ़ सकती है। गर्भनिरोधकों के उपयोग में भारी गिरावट सर्वे के अनुसार, 15 से 49 वर्ष की विवाहित महिलाओं में गर्भनिरोधकों का उपयोग 2019 के 62.7% से घटकर 58.2% रह गया है। आधुनिक गर्भनिरोधकों तक पहुंच भी 77.4% से घटकर 73.5% रह गई है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि गर्भनिरोधकों की उपलब्धता और प्रजनन दर के बीच सीधा संबंध है। कोविड के बाद बिगड़ी स्थिति बांग्लादेश के अधिकारियों के मुताबिक, कोविड-19 महामारी (2020) के दौरान गर्भनिरोधकों की मांग तो बढ़ी, लेकिन सरकार ने उस समय परिवार नियोजन को प्राथमिकता नहीं दी। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त वहां की मीडिया आुटलेट 'द डेलीस्टार' को बताया कि 2023 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने करीब एक साल तक गर्भनिरोधकों की खरीद रोक दी, जिससे आपूर्ति में भारी अंतर आ गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2019 में कंडोम की आपूर्ति 97.48 लाख थी, जो सितंबर 2025 तक घटकर 41.52 लाख रह गई। एक अधिकारी ने बताया कि सरकार ने पिछले महीने सभी पांच गर्भनिरोधकों की खरीद के लिए एक परियोजना को मंजूरी दी है, लेकिन खरीद प्रक्रिया पूरी होने में कम से कम तीन महीने लगेंगे। उन्होंने कहा कि सीमित मात्रा में कंडोम की खरीद की जा रही है, फिर भी अगले साल एक महीने तक सप्लाई बाधित रह सकती है। ढाका विश्वविद्यालय के जनसंख्या विज्ञान विभाग के प्रोफेसर अमीनुल इस्लाम का कहना है कि गर्भनिरोधकों और स्टाफ की कमी ने जन्म नियंत्रण गतिविधियों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर प्रजनन दर पर पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में कई दंपति दो से अधिक बच्चे चाहने लगे हैं, जो चिंता का विषय है।