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नए साल में भी सोने-चांदी का जलवा, चांदी में ₹5656 और गोल्ड में ₹954 की जोरदार तेजी

मुंबई इस नए साल में भी सोने-चांदी का जलवा बरकरार है। आज चांदी के भाव 5656 रुपये उछलकर 234906 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गए। सोने के भाव में भी 954 रुपये की तेजी दर्ज की गई है। जीएसटी समेत चांदी अब 241953 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है। जबकि, 24 कैरेट गोल्ड का रेट अब जीएसटी समेत 138447 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। गुरुवार 1 जनवरी को चांदी बिना जीएसटी 229250 रुपये पर बंद हुई। इसी तरह सोना बिना जीएसटी 133461 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। आज बिना जीएसटी सोना 134415 रुपये पर खुला। सोना 29 दिसंबर 2025 के ऑल टाइम हाई 138181 से 3746 रुपये सस्ता हो चुका है। जबकि, चांदी 243483 से 8532 रुपये टूटी है। यह रेट आईबीजेए द्वारा जारी किए गए हैं। आईबीजेए दिन में दो बार रेट जारी करता है। एक बार दोपहर 12 बजे के करीब दूसरा 5 बजे के आसपास। अभी यह रेट दोपहर 12 बजे वाला है। कैरेट के हिसाब से गोल्ड के भाव आज 23 कैरेट गोल्ड भी 950 रुपये चढ़कर 133877 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर खुला। जीएसटी संग इसकी कीमत अब 137893 रुपये हो गई है। अभी इसमें मेकिंग चार्ज नहीं जुड़ा है। 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 874 रुपये महंगा होकर 123124 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है। जीएसटी संग यह 126817 रुपये है। 18 कैरेट गोल्ड 715 रुपये की तेजी के साथ 100811 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है और जीएसटी के साथ इसकी कीमत 103825 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है। 14 कैरेट गोल्ड का रेट भी 558 रुपये बढ़ा है। आज यह 78633 रुपये पर खुला और जीएसटी समेत यह 80991 रुपये पर है।

मुख्यमंत्री साय ने बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने एक दिवसीय दंतेवाड़ा प्रवास के दौरान आज बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के पावन मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री साय ने मां  दंतेश्वरी के चरणों में नमन करते हुए समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति और सर्वांगीण कल्याण की मंगलकामनाएँ कीं। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, सांसद महेश कश्यप, विधायक चैतराम अटामी, राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती ओजस्वी मंडावी,  संस्कृति सचिव रोहित यादव, आईजी बस्तर सुंदरराज पी., डीआईजी कमलोचन कश्यप, कलेक्टर देवेश ध्रुव, पुलिस अधीक्षक गौरव राय सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।  

बल्लारी में हिंसा को लेकर सनसनीखेज दावा, विपक्ष के नेता ने कहा– भाजपा विधायक को मारने की थी योजना

बेंगलुरु कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने शुक्रवार को बीजेपी विधायक जी जनार्दन रेड्डी के घर के बाहर हिंसा को साजिश बताया है। उन्होंने दावा किया कि यह रेड्डी की हत्या करने का प्लान था। अशोक ने कहा कि पुलिस पर दबाव डालकर गोलीबारी को मिसफायर बताने को मजबूर किया गया, जबकि एक व्यक्ति की मौत हो गई। यह बैनर विवाद से उपजी झड़प थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायक नारा भरत रेड्डी के समर्थकों ने जनार्दन के घर के अंदर बैनर लगाए, जो 3 जनवरी को वाल्मीकि प्रतिमा स्थापना समारोह के लिए थे। विवाद बहस से शुरू होकर हाथापाई, पथराव और गोलीबारी तक पहुंच गया, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज करके भीड़ को तितर-बितर किया।   आर अशोक ने कहा, 'वे खुद गोली चला रहे थे, खुद हत्या कर रहे थे और अब जनार्दन रेड्डी को दोष देना असहनीय है। यह उनकी पहले से बनाई गई साजिश थी।' उन्होंने दावा किया कि अगर गोली रेड्डी की ओर से चली होती तो इसे मिसफायर न कहा जाता। हिंसा के दौरान बीजेपी नेता बी श्रीरामुलू पर हमला भी हुआ। अशोक ने मामले की न्यायिक जांच की मांग की और चेतावनी दी कि यह अन्य जिलों में न फैले। उन्होंने सिद्धारमैया सरकार पर आंध्र प्रदेश जैसी राजनीतिक हिंसा फैलाने का आरोप लगाया। पुलिस ने जनार्दन रेड्डी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। राज्य की कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष विजयेंद्र येडियुरप्पा ने भी घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तलवारें, कुल्हाड़ियां और लाठियां लहराते हुए गुंडागर्दी की। यह बल्लारी में गुंडा राज का स्पष्ट प्रमाण है, जहां थाने कांग्रेस कार्यालय के विस्तार बन गए हैं। कर्नाटक में कांग्रेस शासन के तहत कानून-व्यवस्था चरमरा गई है। वहीं, पुलिस के सीनियर अधिकारी ने कहा कि स्थिति को नियंत्रण में कर लिया गया है और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं। फिलहाल स्थिति शांतिपूर्ण है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सभी एहतियाती उपाय किए गए हैं।  

मंदिर में सम्मान मांगना मौलिक अधिकार नहीं, भगवान सर्वोपरि — किस केस में हाईकोर्ट का अहम फैसला

मद्रास मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा है कि किसी भी मंदिर में किसी व्यक्ति को विशेष सम्मान मिलना कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा है कि कोई व्यक्ति या संस्था इसे अपना कानूनी अधिकार नहीं मान सकती। इस दौरान हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए यह भी कहा कि मंदिर में पहला स्थान हमेशा भगवान का ही होता है और भगवान से ऊपर किसी को नहीं रखा जा सकता।   सुनवाई के दौरान जस्टिस एस एम सुब्रमण्यम और जस्टिस सी कुमारप्पन की बेंच ने श्रीरंगम श्रीमठ अंडवन आश्रमम की ओर से दायर अपील को खारिज करते हुए कहा कि भले ही मठों के प्रमुखों को सम्मान देने की परंपरा रही हो, लेकिन इसे कभी भी कानूनी अधिकार नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मंदिर में विशेष सम्मान नहीं मांगा जा सकता। क्या है मामला? यह मामला तमिलनाडु हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्त (HR&CE) कानून, 1959 से जुड़ा है। इस मामले में दायर पहली याचिका में यह मांग की गई थी कि मंदिर की परंपराओं में सरकारी दखल ना दिया जाए। याचिका पर एकल पीठ ने फैसला सुनाते हुए था कि परंपरा के मुताबिक सिर्फ पांच मान्यता प्राप्त मठों, कांची कामकोटि पीठम, श्री अहोबिल मठ, श्री वनमामलाई मठ, श्री परकाल जीयर मठ और श्री व्यासराय मठ को ही मंदिर में विशेष सम्मान दिया जाता रहा है। इससे आगे किसी को सम्मान देना विवाद का कारण बन सकता है। इसके बाद श्रीरंगम श्रीमठ अंडवन आश्रमम ने अपील दायर कर कहा कि 1991 के बाद कई बार उसके मठ प्रमुख को भी सम्मान दिया गया, लेकिन बाद में बिना सुनवाई के यह परंपरा बंद कर दी गई। आश्रम की ओर से दलील दी गई कि उन्हें पहले मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया, जिससे वे अपनी बात नहीं रख सके। वहीं HR&CE डिपार्टमेंट ने कोर्ट को बताया कि तय परंपरा के अनुसार सिर्फ उन्हीं पांच मठों को सम्मान दिया जाता है और किसी भी बदलाव के लिए कानून के तहत औपचारिक फैसला जरूरी है। कोर्ट ने खारिज की अर्जी दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने माना कि 1991 के बाद कुछ मौकों पर अपीलकर्ता मठ को सम्मान मिला था, लेकिन सिर्फ इससे कोई कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता। बेंच ने कहा कि मंदिर में सम्मान देने का मामला HR&CE एक्ट की धारा 63(e) के तहत सक्षम अधिकारी तय करेंगे। कोर्ट ने आश्रम को थोड़ी राहत देते हुए कहा कि वह चाहें तो HR&CE कानून के तहत संबंधित प्राधिकारी के पास अपनी शिकायत रख सकते हैं।  

महिलाओं की गरिमा पर AI का हमला? प्रियंका चतुर्वेदी ने की सख्त कार्रवाई की मांग

नई दिल्ली कांग्रेस सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने महिलाओं को टारगेट करने वाले डीपफेक वीडियो और फोटो के खिलाफ केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने हाल ही में सामने आए मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि ये फर्जी कंटेंट महिलाओं को बदनाम करने के लिए बनाए जा रहे हैं। चतुर्वेदी ने बताया कि AI टूल्स से महिलाओं की फोटो को कम कपड़े में या अश्लील तरीके दिखाया जा रहा है, जिससे उनकी गोपनीयता और सम्मान को गहरा आघात पहुंच रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सिर्फ व्यक्तिगत हमला नहीं, बल्कि समाज में महिलाओं के खिलाफ सुनियोजित साजिश है। सांसद ने मांग की है कि सरकार तत्काल हस्तक्षेप कर ऐसे फर्जी कंटेंट को प्लेटफॉर्म्स से हटवाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे।   पत्र में प्रियंका चतुर्वेदी ने साफ किया कि डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग तेजी से बढ़ रहा है, खासकर राजनीतिक और सामाजिक दुश्मनी के चलते। उन्होंने लिखा कि महिलाओं को निशाना बनाकर बनाए जा रहे वीडियो न केवल उनकी छवि खराब करते हैं, बल्कि मानसिक उत्पीड़न का कारण भी बनते हैं। चतुर्वेदी ने उदाहरण देते हुए कहा कि हाल के मामलों में AI का इस्तेमाल कर महिलाओं की तस्वीरों से छेड़छाड़ की गई, जो असामान्य रूप से घिनौना है। उन्होंने आईटी मंत्रालय से अपील की कि महिलाओं के खिलाफ एआई आधारित हमलों को रोकने के लिए विशेष कानून बने। साथ ही, सोशल मीडिया कंपनियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वे ऐसी कंटेंट को तुरंत ब्लॉक करें। उनका कहना है कि यह मुद्दा वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय है, लेकिन भारत में त्वरित कार्रवाई जरूरी है। प्रभावित महिलाओं को न्याय दिलाने की मांग कांग्रेस नेता ने पत्र के अंत में केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि वे इस पर तुरंत संज्ञान लें और प्रभावित महिलाओं को न्याय दिलाएं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह महिलाओं के डिजिटल अधिकारों पर सीधा हमला होगा। प्रियंका चतुर्वेदी की यह पहल सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और कई महिला संगठनों ने उनका समर्थन किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि डीपफेक के खिलाफ सख्त नीति बनाना अब जरूरी हो गया है, ताकि तकनीक का दुरुपयोग रोका जा सके।

राज्यपाल डेका को मुख्यमंत्री साय ने दी नए वर्ष की शुभकामनाएं

रायपुर, राज्यपाल रमेन डेका से आज लोकभवन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भेंट कर नववर्ष की शुभकामनाएं दी और राज्य हित से जुड़े विषयों पर चर्चा की। डेका ने भी उन्हें नववर्ष की शुभकामनाएं दीं।

श्रीलंका U19 वर्ल्ड कप स्क्वॉड घोषित, जानिए किसे मिली कप्तानी और किसे उप-कप्तानी

नई दिल्ली श्रीलंका ने आगामी ICC अंडर-19 मेंस क्रिकेट वर्ल्ड कप के लिए अपनी 15 खिलाड़ियों की टीम का ऐलान कर दिया है। युवा श्रीलंकाई टीम की कप्तानी विमथ दिंसारा करेंगे, जबकि कविजा गामागे को उप-कप्तान बनाया गया है। यह बड़ा टूर्नामेंट 15 जनवरी से शुरू होगा। श्रीलंका की U19 टीम में कप्तान दिंसारा, गामागे और महाविथाना जैसे होनहार बल्लेबाज हैं, साथ ही विरान चामुदिथा, गामागे और चमिका हींटिगला जैसे हरफनमौला खिलाड़ी भी हैं। श्रीलंका को ग्रुप A में डिफेंडिंग चैंपियन ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड और जापान के साथ रखा गया है। वे 17 जनवरी को जापान के खिलाफ अपने U19 वर्ल्ड कप अभियान की शुरुआत करेंगे।   15 जनवरी से शुरू हो रहे अंडर-19 वर्ल्ड कप में कुल 16 टीमें हिस्सा ले रहीं है, जिन्हें 4-4 के चार ग्रुप में बांटा गया है। भारत और पाकिस्तान इस बार अलग-अलग ग्रुप का हिस्सा हैं। भारत ग्रुप-ए में तो पाकिस्तान ग्रुप-बी में है। ग्रुप स्टेज के बाद हर ग्रुप की टॉप-3 टीमें सुपर-6 में भिड़ेंगी। जिम्बाब्वे और नामीबिया मिलकर आने वाले U19 वर्ल्ड कप की मेजबानी करेंगे, यह टूर्नामेंट 15 जनवरी से 6 फरवरी तक खेला जाएगा। 23 दिनों में सेमीफाइनल और फाइनल समेत कुल 41 मैच होंगे। 5 बार की चैंपियन टीम इंडिया 15 जनवरी को बुलावायो के क्वींस स्पोर्ट्स क्लब में यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका के खिलाफ अपना अभियान शुरू करेगी, इसके बाद 17 जनवरी को उसी जगह पर बांग्लादेश के खिलाफ और 24 जनवरी को न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच होंगे। भारत ने अंडर-19 वर्ल्ड कप के इतिहास में पांच खिताब जीते हैं। उन्होंने मोहम्मद कैफ (2000), विराट कोहली (2008), उन्मुक्त चंद (2018), पृथ्वी शॉ (2018) और यश ढुल (2022) की कप्तानी में खिताब जीते हैं। अंडर-19 वर्ल्ड कप के लिए श्रीलंका टीम: विमथ दिंसारा (कप्तान), कविजा गमागे, दिमंथा महाविथाना, विरान चामुदिथा, दुलनिथ सिगेरा, चमिका हींटिगला, एडम हिल्मी, चमारिंदु नेथसारा, सेथमिका सेनेविरत्ने, कुगाथास मथुलन, रसिथ निमसार, विग्नेश्वरन आकाश, जीवंथा श्रीराम, सेनुजा वेकुनागोडा, मलिंथा सिल्वा।

जयशंकर का पाकिस्तान को चेतावनी, “आतंकवाद फैलाने पर भारत चुप नहीं रहेगा

 चेन्नई विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान को आतंकवाद बढ़ावा देने वाला खराब पड़ोसी बताया है और कहा है कि भारत को अपनी सुरक्षा के लिए पूरा अधिकार है. आईआईटी मद्रास में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा और आतंकवाद से निपटने के तरीके पर किसी बाहरी दबाव या सलाह को स्वीकार नहीं करेगा. विदेश मंत्री ने कहा कि जब कोई पड़ोसी देश लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देता है तो भारत को अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा हक है. हम जो जरूरी होगा, वही करेंगे. आप हमसे ये उम्मीद नहीं कर सकते कि हम आपके साथ पानी साझा करें और आप हमारे देश में आतंकवाद फैलाते रहें. विदेश मंत्री ने साफ कहा कि आतंकवाद पर भारत की प्रतिक्रिया क्या होगी, ये फैसला सिर्फ भारत करेगा. उन्होने आगे कहा कि हम अपने अधिकार का इस्तेमाल कैसे करेंगे, ये हमारा फैसला है. कोई हमें ये नहीं बता सकता कि हमें क्या करना चाहिए या क्या नहीं. अपनी सुरक्षा के लिए जो जरूरी होगा, हम करेंगे. पाकिस्तान का नाम लिए बिना एस. जयशंकर ने कहा कि कई देशों को मुश्किल पड़ोसियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन भारत की स्थिति इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि आतंकवाद को वहां राज्य की नीति की तरह इस्तेमाल किया गया है. अगर कोई देश जानबूझकर और लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देता है तो हमारे पास अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है और हम उस अधिकार का इस्तेमाल करेंगे. उन्होंने सीमा पार आतंकवाद को पानी के बंटवारे जैसे समझौतों से भी जोड़ा. जयशंकर ने कहा कि भारत ने दशकों पहले पानी साझा करने का समझौता किया था लेकिन ऐसे समझौते अच्छे पड़ोसी संबंधों पर टिके होते हैं. उन्होंने कहा कि अगर दशकों तक आतंकवाद चलता रहा, तो अच्छे पड़ोसी वाले रिश्ते नहीं रह सकते. और अगर अच्छे रिश्ते नहीं होंगे, तो उनके फायदे भी नहीं मिल सकते. आप ये नहीं कह सकते कि ‘हमसे पानी भी साझा करो और हम आतंकवाद भी करते रहेंगे.’ ये दोनों बातें साथ नहीं चल सकतीं. गौरतलब है कि भारत-पाकिस्तान के रिश्ते अप्रैल 2025 में उस वक्त और बिगड़ गए, जब पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में कई पर्यटकों की हत्या कर दी थी.

मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट और इकोसिस्टम अवार्ड्स 11-12 जनवरी को, वैश्विक स्टार्टअप डेस्टीनेशन बनने की पहल

मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट एवं इकोसिस्टम अवार्ड्स 11 और 12 जनवरी को मध्यप्रदेश को वैश्विक स्टार्टअप डेस्टीनेशन बनाने की पहल भोपाल मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट एवं इकोसिस्टम अवार्ड्स 2026 का आयोजन 11 और 12 जनवरी 2026 को रवीन्द्र भवन भोपाल में होगा। यह आयोजन प्रदेश में स्टार्टअप एवं नवाचार इकोसिस्टम को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राज्य स्तरीय पहल के रूप में होगा। इस समिट का आयोजन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग द्वारा किया जा रहा है। इससे राज्य में उद्यमिता, नवाचार एवं समावेशी आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। समिट में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल होंगे। इस आयोजन की परिकल्पना मध्यप्रदेश को एक वैश्विक स्टार्टअप गंतव्य के रूप में स्थापित करने के महत्वपूर्ण कदम के रूप में की गई है। समिट का उद्देश्य एवं महत्व समिट का उद्देश्य स्टार्टअप्स, निवेशकों, इनक्यूबेटर्स, उद्योग जगत के लीडर, शैक्षणिक और वित्तीय संस्थानों तथा शासकीय विभागों के लिए एक साझा मंच प्रदान करना है जिससे नवाचार आधारित उद्यमशील विकास को गति दी जा सके। वर्तमान में मध्यप्रदेश में एक सशक्त एवं समावेशी स्टार्टअप इकोसिस्टम विद्यमान है, जिसमें लगभग 6,344 DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स शामिल हैं। इनमें लगभग 3,023 स्टार्टअप्स महिलाओं के नेतृत्व वाले हैं। यह इकोसिस्टम 100 से अधिक इनक्यूबेटर्स के मजबूत संस्थागत ढांचे द्वारा समर्थित है। आयोजन एमपी स्टार्टअप इकोसिस्टम के अंतर्गत प्रमुख उपलब्धियों को प्रस्तुत करेगा, संरचित नीतिगत विमर्श एवं स्टार्टअप–निवेशक संवाद को सक्षम बनाएगा तथा एमपी स्टार्टअप इकोसिस्टम अवार्ड्स 2026 के माध्यम से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित करेगा। उद्घाटन सत्र के दौरान “स्टार्टअप सक्सेस स्टोरीज़ कंपेंडियम” का विमोचन भी किया जाएगा, जिसमें राज्य के उल्लेखनीय स्टार्टअप्स की सफल कहानियाँ सम्मिलित होंगी और यह भावी उद्यमियों के लिए प्रेरणास्रोत के रूप में कार्य करेगा। पहले दिन की गतिविधियां एमपी स्टार्टअप समिट 2026 के दो दिवसीय आयोजन के रूप में नियोजित किया गया है, ताकि सभी इकोसिस्टम हितधारकों की सार्थक एवं परिणामोन्मुखी भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। पहला दिन 11 जनवरी 2026 को इकोसिस्टम सुदृढ़ीकरण एवं प्रारंभिक चरण के निवेश संवाद पर केंद्रित होगा। इसमें इनक्यूबेटर सस्टेनेबिलिटी पर मास्टरक्लास, एग्री एफपीओ को स्टार्टअप के रूप में विकसित करने पर विषयगत चर्चा, स्टार्टअप पिचिंग का क्वालिफायर राउंड तथा निवेशकों एवं इकोसिस्टम लीडर्स के साथ क्लोज्ड-डोर नेटवर्किंग डिनर होगा। समापन 12 जनवरी को होगा दूसरा दिन 12 जनवरी 2026 को रणनीतिक सहभागिता, मान्यता एवं सेक्टर-विशिष्ट ज्ञान साझा करने पर केंद्रित रहेगा। इसमें स्टार्टअप पिचिंग के फाइनल राउंड, मुख्यमंत्री, डॉ. यादव द्वारा उद्घाटन एवं प्रदर्शनी का शुभारंभ, स्टार्टअप सक्सेस स्टोरीज़ कंपेंडियम का विमोचन, एमपी स्टार्टअप इकोसिस्टम अवार्ड्स-2026 का वितरण तथा प्राथमिकता वाले विषयों पर सेक्टर-विशिष्ट सत्र शामिल होंगे। एमएसएमई मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप राज्य में स्टार्टअप विकास हेतु नीतिगत पहलों एवं भविष्य की रूपरेखा को प्रस्तुत करेंगे। एमपी स्टार्टअप इकोसिस्टम अवार्ड्स 2026 एमपी स्टार्टअप इकोसिस्टम अवार्ड्स 2026, समिट की एक प्रमुख गतिविधि होगी। छह स्टार्टअप श्रेणियों—श्रेष्ठ महिला उद्यमी, श्रेष्ठ युवा उद्यमी, सर्वाधिक नवोन्मेषी स्टार्टअप, श्रेष्ठ प्रारंभिक चरण स्टार्टअप, श्रेष्ठ ग्रोथ-स्टेज स्टार्टअप और प्राथमिकता क्षेत्रों में श्रेष्ठ स्टार्टअप के अंतर्गत नामांकन प्राप्त हुए हैं। इसके अतिरिक्त इनक्यूबेटर्स जैसे प्रमुख इकोसिस्टम योगदानकर्ताओं को भी सम्मानित किया जाएगा। उद्योग जगत के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों, वेंचर कैपिटलिस्ट्स एवं वरिष्ठ इकोसिस्टम प्रतिनिधियों से युक्त एक जूरी का गठन किया गया है, जो पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया के माध्यम से आवेदनों का आकंलन कर पुरस्कार विजेताओं की संस्तुति करेगी। प्रदर्शनी एवं सहभागिता इस समिट में लगभग 3 हजार प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है, जिनमें स्टार्टअप फाउंडर्स, निवेशक, इनक्यूबेटर्स, एक्सेलेरेटर्स, बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थान, शैक्षणिक प्रतिनिधि, छात्र, शासकीय अधिकारी एवं उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि सम्मिलित होंगे। प्रदर्शनी में 60 से अधिक स्टॉल्स लगेंगे, जिसमें स्टार्टअप्स के साथ इनक्यूबेटर्स, फंड्स एवं बैंक, एक जिला एक उत्पाद पहल तथा शासकीय विभागों के लिए स्टॉल्स आरक्षित किए जाएंगे। यह प्रदर्शनी स्टार्टअप्स को अपने नवाचार प्रदर्शित करने, निवेशकों से जुड़ने और नीति निर्माताओं एवं उद्योग हितधारकों के साथ संवाद स्थापित करने का अवसर प्रदान करेगी। उभरता हुआ स्टार्टअप नवाचार केंद्र मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व एवं एमएसएमई मंत्री के नीतिगत मार्गदर्शन के अनुरूप एक रणनीतिक एवं उच्च प्रभाव वाली पहल के रूप में परिकल्पित किया गया है, जिसका उद्देश्य मध्यप्रदेश को एक उभरते हुए स्टार्टअप एवं नवाचार केंद्र के रूप में सशक्त करना है। यह समिट इकोसिस्टम सहयोग को गहराई प्रदान करने, निवेश को प्रोत्साहित करने और राज्य में सतत उद्यमशील विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।  

MP में सरकारी बसों का शुभारंभ, 20 से ज्यादा शहर जुड़ेंगे नए साल पर ‘सुगम परिवहन’ सेवा से

भोपाल मध्य प्रदेश में जल्द ही 'सरकारी बस' सड़कों पर एक बार फिर दौड़ते नजर आएंगी। मोहन सरकार जल्द ही 'राज्य परिवहन निगम' की तर्ज पर नए सिरे से बस सेवा प्रारंभ करने वाली है। नए साल में प्रदेश की जनता को यह सौगात मिलने वाली है। बता दें कि इसका नया नाम 'सुगम लोक परिवहन सेवा' होगा जो पीपीपी मॉडल पर संचालित होगी। जानकारी अनुसार प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव ने 'सुगम लोक परिवहन सेवा' के जरिए एमपी में सरकारी बसों की वापसी करने जा रहे हैं। सेवा चाहू होने के बाद दूरस्थ्य गांव तक तक सस्ती और लग्जरी यात्रा की सुविधा मिल सकेगी। कैबिनेट में इस प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है। सरकार ने इसके लिए 101 करोड़ की अंशपूंजी को बजट को स्वीकृति दी है। बता दें कि वर्तमान में मध्यप्रदेश के 20 शहरों में सार्वजनिक परिवहन के लिए गठित SPVs में से 16 कंपनियां कार्यरत हैं, जिन्हें अब संभागीय कंपनियों में मर्ज करने का निर्णय लिया गया है। कंपनियों पर नियंत्रण के लिए 'होल्डिंग कंपनी' का गठन प्रदेश में बसों के परिवहन सेवा और व्यवस्था को बेहतर बनाने तथा इसके एकीकृत संचालन के लिए 7 कंपनियों पर दारोमदार होगा। इन सातों कंपनियों पर नियंत्रण के लिए स्टेट लेवल पर 'होल्डिंग कंपनी' का गठन किया जाएगा। यह कंपनी कंपनीज एक्ट—2013 के तहत गठित की जाएगी, साथ ही जिला स्तर पर यात्री परिवहन समितियों के गठन को भी कैबिनेट की स्वीकृति मिली है। बस टर्मिनल व अन्य स्ट्रक्चर PPP मॉडल पर होंगे बता दें कि एमपी में सीएम सुगम लोक परिवहन सेवा के तहत बस स्टेंड, टर्मिनल और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर किया जाएगा। बस संचालन और संधारण भी पारदर्शी प्रक्रिया के तहत निजी बस ऑपरेटर्स के माध्यम से किया जाएगा। हालांकि इन सब पर पूरा नियंत्रण सरकारी कंपनी का रहेगा।