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बस्तर पंडुम हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोकपरंपराओं, कला और विरासत का जीवंत मंच : मुख्यमंत्री साय

  रायपुर  बस्तर अंचल की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, लोकपरंपराओं और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन वर्ष 2026 में भी गत वर्ष की भांति भव्य एवं आकर्षक रूप में किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दंतेवाड़ा में माँ दंतेश्वरी के आशीर्वाद के साथ मंदिर प्रांगण में बस्तर पंडुम का लोगो एवं थीम गीत का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने नववर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि बस्तर पंडुम बस्तर की  सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने का  सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि आज माँ दंतेश्वरी के इस पावन प्रांगण से बस्तर पंडुम 2026 का शुभारंभ हो रहा है। यहाँ बस्तर पंडुम 2026 का लोगो और थीम गीत का विमोचन किया गया है। बस्तर पंडुम केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा है। यह हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोकपरंपराओं, कला और विरासत का जीवंत मंच है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की असली पहचान हमारी आदिवासी परंपराओं में है। हम नृत्य, गीत, शिल्प, व्यंजन, वन-औषधि और देवगुडि़यों के माध्यम से इन परंपराओं और संस्कृति को जीते हैं। पिछले वर्ष हमने बस्तर पंडुम की शुरुआत की थी। समापन अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी हम सबके बीच आए थे। इस वर्ष हम राष्ट्रपति , केंद्रीय गृहमंत्री, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री तथा भारत में नियुक्त विभिन्न देशों के राजदूतों को भी आमंत्रित कर रहे हैं। पिछली बार बस्तर पंडुम को लेकर बस्तरवासियों का जो उत्साह और जोश देखने को मिला, वह अभूतपूर्व था। इस बार हम इसे और अधिक भव्य बना रहे हैं, ताकि यहाँ की धरोहर राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष बस्तर पंडुम की प्रतिस्पर्धाओं में विधाओं की संख्या सात से बढ़ाकर बारह कर दी गई है। इनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा, आभूषण, पूजा-पद्धति के साथ ही शिल्प, चित्रकला, पारंपरिक व्यंजन-पेय, आंचलिक साहित्य और वन-औषधि को भी शामिल किया गया है। इस बार बस्तर पंडुम प्रतियोगिता का आयोजन तीन चरणों में किया जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर की संस्कृति को सहेजते हुए नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाए। बस्तर अब केवल संस्कृति का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि शांति, समृद्धि और पर्यटन के माध्यम से विकास का भी प्रतीक बनेगा।  उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार बस्तर को नई ऊँचाइयों पर ले जा रही है। यह उत्सव बताता है कि बस्तर अब संघर्ष से नहीं, बल्कि सृजन और उत्सव से पहचाना जाएगा। उन्होंने बस्तरवासियों एवं सभी कलाकार भाई-बहनों से आग्रह किया कि वे अपनी कला के माध्यम से बस्तर का गौरव बढ़ाएँ और अधिक से अधिक संख्या में बस्तर पंडुम के अंतर्गत आयोजित प्रतियोगिताओं में भाग लें। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि ‘पंडुम’ का अर्थ पर्व होता है। बस्तर में खुशियों को बढ़ाने के लिए समय-समय पर विभिन्न पर्व (पंडुम) मनाए जाते हैं। किसी भी पर्व की शुरुआत माता के आशीर्वाद से करने की परंपरा रही है। इसी तारतम्य में बस्तर पंडुम की शुरुआत माँ दंतेश्वरी के मंदिर परिसर से की जा रही है। बस्तर समृद्ध संस्कृति से परिपूर्ण है। यहाँ निवास करने वाली जनजातियों की कला, शिल्प, नृत्य, संगीत और खानपान को समाहित कर बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि  बस्तर में शांति स्थापना के प्रयास सफल हो रहे हैं। मार्च 2026 तक लाल आतंक समाप्त होकर रहेगा। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर की कला, संस्कृति और परंपरा गर्व का विषय है। इस समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का प्रयास बस्तर पंडुम के माध्यम से किया जा रहा है। पौराणिक काल में भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान दंडकारण्य क्षेत्र में समय व्यतीत किया था। ऐसे पावन क्षेत्र में सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करने की पहल सरकार ने की है। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध बस्तर क्षेत्र की विभिन्न विधाओं को बढ़ावा देने और संरक्षित करने के लिए सरकार लगातार दूसरे वर्ष बस्तर पंडुम का आयोजन कर रही है। इस वर्ष बारह विधाओं में प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने मंदिर प्रांगण में ही संभाग के वरिष्ठ मांझी, चालकी, गायता, पुजारी, आदिवासी समाज के प्रमुखजनों तथा पद्म सम्मान से अलंकृत कलाकारों के साथ संवाद किया। कार्यक्रम को बस्तर सांसद महेश कश्यप एवं दंतेवाड़ा विधायक चैतराम आटमी ने भी संबोधित किया। इस दौरान बस्तर के पारंपरिक नेतृत्वकर्ता मांझियों और समाज प्रमुखों ने भी बस्तर पंडुम के आयोजन के लिए सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन 10 जनवरी 2026 से 5 फरवरी 2026 तक तीन चरणों में प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत बस्तर संभाग में 10 से 20 जनवरी तक जनपद स्तरीय कार्यक्रम, 24 से 29 जनवरी तक जिला स्तरीय कार्यक्रम तथा 2 से 6 फरवरी तक संभाग स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।  जिन विधाओं में प्रदर्शन एवं प्रतियोगिताएँ होंगी, उनमें बस्तर जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा एवं आभूषण, पूजा-पद्धति, शिल्प, चित्रकला, जनजातीय पेय पदार्थ, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य तथा वन-औषधि प्रमुख हैं।इस बार के बस्तर पंडुम में विशेष रूप से भारत में विभिन्न देशों में कार्यरत भारतीय राजदूतों को आमंत्रित किए जाने पर भी चर्चा हुई, ताकि उन्हें बस्तर की अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहर, परंपराओं और जनजातीय जीवन से अवगत कराया जा सके। साथ ही बस्तर संभाग के निवासी उच्च पदस्थ अधिकारी, यूपीएससी एवं सीजीपीएससी में चयनित अधिकारी, चिकित्सक, अभियंता, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि तथा देश के विभिन्न राज्यों के जनजातीय नृत्य दलों को आमंत्रित करने का भी निर्णय लिया गया है। प्रतिभागियों के पंजीयन की व्यवस्था इस बार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से करने का प्रस्ताव है, जिससे अधिकाधिक कलाकारों एवं समूहों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। उल्लेखनीय है कि बस्तर अंचल की कला, शिल्प, त्योहार, खानपान, बोली-भाषा, आभूषण, पारंपरिक वाद्ययंत्र, नृत्य-गीत, नाट्य, आंचलिक साहित्य, वन-औषधि और देवगुडि़यों के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके तहत बस्तर संभाग के सात जिलों की 1,885 ग्राम पंचायतों, 32 जनपद पंचायतों, 8 नगरपालिकाओं, 12 नगर पंचायतों और 1 नगर निगम क्षेत्र में तीन चरणों में आयोजन होगा। इस आयोजन … Read more

ईरान संकट पर ट्रंप कूदे तो खामेनेई का सख्त अल्टीमेटम—नतीजे विनाशकारी होंगे

तेहरान डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी पर ईरान की प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान ने स्पष्ट कहा है कि अगर ईरान के आंदोलन में डोनाल्ड ट्रंप कूदे तो तबाही हो जाएगी। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार ने शुक्रवार को बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हस्तक्षेप से पूरे क्षेत्र में अव्यवस्था फैल जाएगी। गौरतलब है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच ईरानी शासन को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों का दमन किया गया, तो अमेरिका मूकदर्शक बना नहीं रहेगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जारी एक संदेश में स्पष्ट किया कि अगर ईरानी सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई या उनकी हत्या की, तो अमेरिका हस्तक्षेप करने के लिए पूरी तरह तैयार है। सड़क पर उतर चुकी है जनता गौरतलब है कि ईरान की खराब अर्थव्यवस्था से आक्रोशित जनता सड़कों पर उतर आई है। गुरुवार को ये प्रदर्शन प्रांतों में भी फैल गए, जहां सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में कम से कम सात लोग मारे गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। प्रदर्शन में सात लोगों के मारे जाने से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि देश की सरकार प्रदर्शनकारियों से सख्ती से निपटने के मूड में है। लेकिन प्रदर्शनकारी भी अड़े हुए हैं।   2022 के बाद सबसे बड़ा प्रदर्शन राजधानी तेहरान में प्रदर्शन भले ही धीमे पड़ गए हों, लेकिन अन्य जगहों पर इनमें तेजी आई है। बुधवार को दो और बृहस्पतिवार को पांच लोगों की मौत चार शहरों में हुई। इन चारों शहरों में लूर जातीय समुदाय की बहुलता है। यह विरोध प्रदर्शन 2022 के बाद से ईरान के सबसे बड़े प्रदर्शन के रूप में उभरा है। वर्ष 2022 में पुलिस हिरासत में 22 वर्षीय महसा अमिनी की मौत के बाद देशभर में प्रदर्शन हुए थे। अर्थव्यवस्था को लेकर सबसे अधिक हिंसा ईरान के लोरेस्टान प्रांत के अजना शहर में देखी गई। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में वहां सड़कों पर जलती हुई वस्तुएं दिखाई दे रही हैं साथ ही गोलियों की आवाजें गूंजती हैं। अर्धसरकारी समाचार एजेंसी फ़ार्स ने तीन लोगों के मारे जाने की खबर दी। सुधार समर्थक मीडिया संस्थानों सहित अन्य मीडिया ने फार्स के हवाले से ही घटनाओं का जिक्र किया है।  

न्यू ईयर सेलिब्रेशन में झारखंडियों ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, तीन दिन में करोड़ों की शराब बिकी

रांची नए साल के जश्न ने झारखंड में शराब की बिक्री के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। 31 दिसंबर की रात राज्यभर में जश्न, पार्टियों और नाइट सेलिब्रेशन का असर सीधा शराब की दुकानों पर दिखा, जहां देर रात तक भारी भीड़ लगी रही। तीन दिनों में 65 करोड़ रुपये की शराब बिकी 30 दिसंबर से 1 जनवरी तक राज्य में लगभग 65 करोड़ रुपये के शराब की बिक्री का अनुमान है। झारखंड शराब व्यापारी संघ के प्रदेश महासचिव सुबोध कुमार जायसवाल ने बताया कि तीन दिनों में बिक्री 65 से 70 करोड़ रुपये के बीच रही। उन्होंने कहा कि मांग के अनुरूप पूरी बिक्री नहीं हो पाई। सर्वाधिक बिक्री 31 दिसंबर को हुई, जब पूरे राज्य में लगभग 30 करोड़ रुपये की शराब बिकी। पिछले वर्ष 60 करोड़ रुपये की शराब की बिक्री हुई थी कहा जा रहा है कि यह पिछले साल 31 दिसंबर की तुलना में लगभग ढाई करोड़ रुपये अधिक है। पिछले वर्ष इसी मौके पर तीन दिनों में लगभग 60 करोड़ रुपये की शराब की बिक्री हुई थी।  

नकारात्मक सोच वालों के बीच भी रखें खुद को सकारात्मक

पढ़ाई में पिछड़ने का डर, ऑफिस में असफल होने का विचार, दूसरों से कमतर होने का भय- ये सभी नकारात्मक विचार हैं, जो हमें दिन-रात परेशान कर सकते हैं। जर्नल ऑफ साइकोलॉजिकल रिसर्च के अनुसार, हमारे 80% विचार नकारात्मक होते हैं। ये सभी विचार जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं-रिश्ते, काम, स्कूल पर आधारित होते हैं। इनमें से ज्यादातर विचार दूसरों के द्वारा कही गई बातों पर आधारित होते हैं। दरअसल, रोजमर्रा के जीवन में हमें घर-बाहर कई ऐसे लोगों का सामना करना पड़ सकता है, जो न केवल नकारात्मक बातें कहते हैं, बल्कि उनका व्यवहार भी नकारात्मक होता है। कैसे प्रभावित करती है नकारात्मकता जर्नल ऑफ मेंटल हेल्थ में प्रकाशित शोध बताते हैं कि अगर आप लगातार नकारात्मकता यानी निगेटिविटी से सामना करती रहती हैं, तो यह मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकती है। यह डिमेंशिया के जोखिम को बढ़ा सकती है। यह अवसाद और घबराहट जैसे मनोवैज्ञानिक विकारों को भी जन्म दे सकती है। कैसे नकारात्मक लोगों के बीच अपनी मानसिक सेहत को बचाकर रखें, आइए जानें: सख्ती के साथ करें मना कुछ लोग हमेशा दूसरों के सामने अपना दुखड़ा रोते रहते हैं। किसी और के प्रति अपनी भड़ास निकालते रहते हैं। मनस्थली की संस्थापक और सीनियर साइकोलोजिस्ट डॉ. ज्योति कपूर बताती हैं, ‘ऐसे लोगों की बातों को सुनने में अपनी ऊर्जा खर्च करने की बजाय उन्हें उनकी सीमाओं के बारे में विनम्रता से बता दें। उन्हें दृढ़ता के साथ बताएं कि आप लगातार नकारात्मक बातें नहीं सुन सकती हैं। नकारात्मक विषयों पर चर्चा करना भी आपके लिए मुश्किल है। कई बार लंच के दौरान कुछ सहकर्मी शिकायतों का पिटारा खोल देते हैं। आप उसी समय उन्हें टोक दें और किसी भी नकारात्मक बातचीत को सख्ती के साथ मना कर दें। यह आपकी मानसिक सेहत के लिए सबसे अधिक जरूरी है।’ कारण समझने की कोशिश करें डॉ. ज्योति कपूर बताती हैं, ‘कई बार व्यक्ति नकारात्मक लोगों से घिरा होता है और उनके कारण वह व्यथित होता रहता है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति उसकी बात सुन लेता है, तो वह उसके सामने नियमित रूप से अपनी पीड़ा प्रकट करने लगता है। यदि आप सुनने वालों में से एक हैं, तो उस व्यक्ति के नकारात्मक होने का कारण समझने की कोशिश करें। इससे उनसे निपटना आसान हो जाएगा। आप उन चुनौतियों पर विचार कर सकती हैं, जिनका वे सामना कर रहे हैं, ताकि आप उनकी नकारात्मकता के प्रति सहानुभूति रख सकें। आप उनकी समस्याओं के समाधान प्रस्तुत करने की भी कोशिश करें। इससे आप व्यक्तिगत रूप से सामने वाले की नकारात्मकता से कम प्रभावित होंगी।’ साथ करें गतिविधियां अगर आप किसी व्यक्ति की नकारात्मकता से परेशान हैं, तो उसे अपर्नी ंजदगी से पूरी तरह से बाहर करने के बारे में नहीं सोचें। आप उससे मिलना-जुलना कम कर सकती हैं। इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि आप किसी नकारात्मक व्यक्ति के साथ बहुत अधिक समय नहीं बिताएं। उनके साथ अपनी मुलाकात की समय-सीमा छोटी रखें। यदि उनसे रोज मिलना होता है, तो ऐसी गतिविधियां शेड्यूल करें, जिससे आपकी उनके साथ होने वाली बातचीत सीमित हो जाए। उनके साथ फिल्म देखने या कोई गेम खेलने की योजना बना सकती हैं। लें ध्यान-योग का सहारा किसी नकारात्मक व्यक्ति के साथ समय बिताने से पहले ध्यान और गहरी सांस लेने, अनुलोम-विलोम जैसी योगिक प्रक्रियाएं अवश्य करें। इससे आपको अपना ध्यान केंद्रित करने और शांत बने रहने में मदद मिलेगी। जब आप नकारात्मक व्यक्ति के साथ हों, तो अपनी सांसों पर ध्यान दें और वर्तमान में रहने की कोशिश करें। जर्र्नंलग या कम दूरी के लिए टहलना जैसी गतिविधियों के माध्यम से तनाव को दूर करने के लिए समय निकालें। नकारात्मक व्यक्ति को भी हमेशा ध्यान-योग से जुड़ने के लिए प्रेरित करें। ध्यान-योग से मानसिक सेहत मजबूत होती है और व्यक्ति का मन भी सकारात्मक विचारों से भरता है। राय बनाने से बचें किसी को नकारात्मक मान लेना और उसकी भावनाओं को खारिज करना आसान है। पर, ऐसा करने से सामने वाले के साथ तनाव और गलतफहमी पैदा हो सकती है। यह भी संभव है कि उस व्यक्ति के पास दूसरे गुण हों। अपनी राय बनाने की बजाय उनके प्रति दयालु बनें। उनकी नकारात्मकता को उनके अनुभवों और संघर्षों के प्रर्तिंबब के रूप में देखने का प्रयास करें। उनके प्रति सहानुभूति रखते हुए उनसे ईमानदारी के साथ बातचीत करें। बातचीत को सकारात्मक बनाए रखने के तरीके उन्हें भी बताएं। सामने वाले के दृष्टिकोण को सुनने का भी प्रयास करें। नकारात्मक होने के कारण उनसे सम्मानपूर्वक संवाद करना कभी नहीं छोड़ें। निर्णय लेने से बचें और अपना खुद का सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करें।  

‘घर कब आओगे’ गाना रिलीज, ‘बॉर्डर 2’ से जुड़ी पुरानी यादों को करेगा ताजा

मुंबई  जेपी दत्ता की 'बॉर्डर' हर 90s किड की यादों में आज भी ताजा है. फिल्म में दिखाया गया रॉ-एक्शन और इमोशन अभी तक लोगों को महसूस होता है. उस फिल्म का गाना 'संदेसे आते हैं' आज भी लोग यूं ही गुनगुनाने लगते हैं. उस गाने में वो ताकत थी कि उसे सुनकर किसी की भी आंखें नम हो जाएं. आज, वही गाना एक नए अंदाज के साथ दोबारा सुना जा रहा है.  'बॉर्डर 2' फिल्म का पहला गाना 'घर कब आओगे' सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी स्टारर 'बॉर्डर 2' कुछ हफ्तों में रिलीज होने वाली है. लगभग दो हफ्तों पहले इसका दमदार टीजर आया था, जिसने पुरानी यादें ताजा कीं. अब फिल्म का पहला गाना 'घर कब आओगे' सामने आया है, जो वही याद और मैलोडी के साथ दर्शकों के बीच लौटा है. मेकर्स ने गाने का ऑडियो रिलीज किया है, जो आते ही सोशल मीडिया पर हर तरफ छा चुका है.  ये गाना लगभग 28 सालों के बाद वही जादू अपने साथ वापस लेकर आया है, जो 'संदेसे आते हैं' के वक्त लोगों के बीच हुआ था. 'घर कब आओगे' गाना नया जरूर है, लेकिन इसमें वही पुराना फ्लेवर कायम रखने की कोशिश हुई है, जो इसे और भी शानदार बनाता है. इस गाने को सोनू निगम और रूप कुमार राठोड के साथ-साथ अरिजीत सिंह, दिलजीत दोसांझ और विशाल मिश्रा ने गाया है. वहीं जावेद अख्तर और मनोज मुंतशिर ने इसके लिरिक्स लिखे हैं. 'घर कब आओगे' को मिथुन और अनु मलिक ने कंपोज किया है. गाना सुनकर फैंस का क्या है रिएक्शन? फैंस सोशल मीडिया पर 'घर कब आओगे' गाने को लेकर बातें करना भी शुरू कर चुके हैं. X पर कई लोग इस नई कंपोजिशन से खुश हैं. वहीं कुछ का मानना है कि नया तो ठीक है, मगर पुराने वाले का दम आज भी बरकरार है. यूजर्स 'बॉर्डर 2' के इस गाने से इंप्रेस हैं क्योंकि इससे उनकी फिल्म देखने के लिए एक्साइटमेंट काफी बढ़ चुकी है. बता दें कि 'बॉर्डर 2' 23 जनवरी, 2026 को थिएटर्स में रिलीज होने वाली है.

ठंड के मौसम में दिल की सेहत पर मंडराता खतरा, हार्ट अटैक से बचाएंगे ये 5 योगासन

सर्दियों का मौसम अपने साथ कई तरह की बीमारियां भी लेकर आता है। सर्दियों में जुकाम, खांसी, बुखार और जोड़ों में दर्द जैसी समस्याएं होना आम बात है। लेकिन क्या आप जानते यहीं कि सर्दियों में हार्ट अटैक का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। जी हां, कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि सर्दी का मौसम दिल की सेहत के लिए काफी कठिन होता है। दरअसल, सर्दियों में तापमान में गिरावट, सर्द हवाएं, नमी और एयर प्रेशर में बदलाव के कारण दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसके कारण हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ठंड के मौसम में ब्लड वेसल्स संकुचित हो जाती हैं, जिससे ब्लड फ्लो कम हो जाता है हार्ट को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। ऐसे में, बेहद जरूरी है कि हार्ट अटैक से बचाव के लिए सही कदम उठाएं जाएं। हार्ट अटैक से बचाव के लिए आपको अपने खानपान का खास ख्याल रखना चाहिए। इसके अलावा, कुछ योगासन भी हार्ट अटैक के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं। आज इस लेख में हम आपको कुछ योगासनों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो दिल को हेल्दी रखने में मदद कर सकते हैं। ताड़ासन इस योगासन को करने के लिए जमीन पर सीधे खड़े हो जाएं। इस दौरान अपनी कमर को सीधा रखें और आपके पैर आपस में जुड़े होने चाहिए। अब हाथ जोड़ने की मुद्रा में खड़े हो जाएं और धीरे-धीरे अपने हाथों को ऊपर की ओर ले जाएं। अब अपनी एड़ियों पर उठने की कोशिश करें और शरीर का भार अपने निचले हिस्से पर डालें। कुछ सेकंड तक इस स्थिति में रहने के बाद वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं। इस प्रक्रिया को 10-15 बार दोहराएं। भुजंगासन इस आसन को करने के लिए योगा मैट पर पेट के बल लेट जाएं। अपनी कोहनियों को कमर से सटा के रखें और हथेलियां ऊपर की ओर रखें। अब धीरे-धीरे सांस भरते हुए, अपनी छाती को ऊपर की ओर उठाएं। उसके बाद अपने पेट को धीरे-धीरे ऊपर उठा लें। इस स्थिति में 30 सेकंड तक रहें। अब सांस छोड़ते हुए, सिर को धीरे-धीरे जमीन की ओर नीचे लाएं। इस प्रक्रिया को आप 3 से 5 बार दोहराएं। वीरभद्रासन इस आसन को करने के लिए योगा मैट पर सीधे खड़े हो जाएं। अब अपने दोनों पैरों 2-3 फीट की दूरी पर रखें। फिर अपने सीधे पैर को आगे लेकर आए और उल्टे पैर को पीछे की ओर स्ट्रेच करें। इस दौरान हाथों को 180 डिग्री पर फैला कर रखें। इस अवस्था में 30-60 सेकंड तक रुकें। फिर प्रारंभिक मुद्रा में आ जाएं। इस आसन को आप 3 से 5 बार कर सकते हैं। अर्ध मत्स्येन्द्रासन इस आसन को करने के लिए योगा मैट पर बैठें और अपने बाएं पैर को दाहिने पैर के नीचे रखें। दाहिने पैर को बाएं घुटने के पार रखें। बाएं हाथ को दाहिने घुटने पर रखें और दाहिने हाथ को पीछे की ओर रखें। अब शरीर को दाहिनी ओर मोड़ें और इस स्थिति में कुछ सेकंड तक रहें। धीरे-धीरे वापस आएं और दूसरी ओर से भी इस प्रक्रिया को दोहराएं। इस प्रक्रिया को आप 3 से 5 बार दोहराएं। धनुरासन इस आसन को करने के लिए योगा मैट पर पेट के बल लेट जाएं। अपने दोनों हाथों को सीधा रखें। अब अपने घुटनों को मोड़ते हुए सांस छोड़ें। अपनी एड़ी को अपने नितंबों के पास लाएं। अब धनुषाकार होते हुए, अपने पैरों की उंगलियों को हाथों से पकड़ें। अब गहरी सांस लेते हुए अपनी छाती को जमीन से ऊपर उठाएं। फिर सांस छोड़े हुए, वापस प्रारंभिक मुद्रा में आ जाएं। इस आसन को आप 3 से 5 बार कर सकते हैं।

सबकी समृद्धि और खुशहाली ही है सरकार का पारितोषिक: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश के विकास की गति अब होगी और भी तेज : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सबकी समृद्धि और खुशहाली ही है सरकार का पारितोषिक वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप मनायेंगे खाचरौद को दी सांदीपनि विद्यालय और नवीन कृषि उपज मंडी की सौगात खाचरौद में बनेगा संयुक्त तहसील कार्यालय और जनपद पंचायत का नया भवन मुख्यमंत्री ने खाचरौद में 78.61 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन खाचरौद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सरकार प्रदेश के 'समग्र विकास' के संकल्प के साथ काम कर रही है। हमारा मध्यप्रदेश अब विकास की नई ऊंचाइयों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि हम सुनिश्चित कर रहे हैं कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और कोई भी वर्ग या व्यक्ति विकास की मुख्यधारा से वंचित न रहे। विकास की बात पर हम सबका सहयोग लेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी क्षेत्रों में विकास की बयार है। विकास की यह गति अब और तेज होगी। आप सबके सेवक के रूप में वे खुद चौबीसों घंटे सातों दिन प्राण-प्रण से सेवा में जुटे हुए हैं। सबका कल्याण ही हमारा लक्ष्य है। नागरिकों की समृद्धि और खुशहाली ही हमारा पारितोषिक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को उज्जैन जिले के खाचरौद में विकास कार्यों के लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खाचरौद को विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने यहां 78 करोड़ 61 लाख रुपये की लागत वाले पूर्ण एवं प्रस्तावित 39 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। इसमें 48 करोड़ 51 लाख रुपये की लागत के 16 कार्यों का लोकार्पण एवं 30 करोड़ 10 लाख रुपये की लागत वाले 23 कार्यों का भूमिपूजन शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन सभी कार्यों से खाचरौद के विकास को एक नई दिशा मिलेगी। यह विकास कार्य खाचरौद के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं। सांदीपनि विद्यालय शिक्षा के पवित्र मंदिर, बच्चों के बेहतर भविष्य की लिखेंगे नई इबारत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खाचरौद में 35 करोड़ 40 लाख की लागत से नवनिर्मित सांदीपनि विद्यालय भवन, 11 करोड़ 30 लाख की लागत से नवीन कृषि उपज मंडी प्रांगण सहित अन्य कार्यों का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि खाचरौद का सांदीपनि विद्यालय आधुनिक शिक्षण सुविधाओं का प्रतीक बनेगा और विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय शिक्षा उपलब्ध करायेगा। उन्होंने कहा कि सांदीपनि विद्यालय प्रदेश में शिक्षा के पवित्र मंदिर के रूप में विकसित किए जा रहे हैं। यह हमारे बच्चों के बेहतर और सुनहरे भविष्य की नई इबारत लिखेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि खाचरौद के नवीन कृषि उपज मंडी प्रांगण में किसानों की सुविधा के लिए कृषक विश्राम भवन, भोजनालय, पानी की टंकी एवं प्याऊ भी बनाये गए हैं। मुख्यमंत्री ने खाचरौद में 9 करोड़ 10 लाख रुपये लागत से बनने वाले संयुक्त तहसील कार्यालय के नवीन भवन, 5 करोड़ 25 लाख लागत से बनने वाले जनपद पंचायत भवन एवं 6 करोड़ 91 लाख रुपये की लागत से स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम-2.0) सहित अन्य प्रस्तावित कार्यों का भूमिपूजन भी किया। मुख्यमंत्री ने राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा संचालित खाचरौद के माध्यमिक विद्यालय में 11 स्मार्ट क्लासेस का लोकार्पण भी इस मौके पर किया। खाचरौद में बनेगा फूड प्रोसेसिंग पार्क मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्र में बहुतायत से होने वाली हरी मटर को देश-विदेश तक पहुंचाने और अन्य सभी फसलों को भी मार्केट लिंकेज दिलाने के लिए खाचरौद में फूड प्रोसेसिंग पार्क बनाने और खिलाड़ियों के लिए नया स्टेडियम बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि खाचरौद से रतलाम को डायरेक्ट फोर लेन से जोड़ा जाएगा, जिससे खाचरौद को भी इन्दौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन एरिया की सीधी पहुंच मिल सके। 5 करोड़ की लागत से बनेगा फोरलेन हाई-वे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नागदा से खाचरौद से जावरा से उज्जैन होते हुए करीब 5 हजार करोड़ रुपये की लागत से नया फोरलेन हाई-वे बनाया जा रहा है। इससे पूरे क्षेत्र का चहुंमुखी विकास होगा। उन्होंने कहा कि पार्वती-कालीसिंध-चंबल राष्ट्रीय नदी लिंक परियोजना से मालवा-निमाड़ और चंबल का पूरा क्षेत्र भरपूर सिंचाई की स्थायी सुविधा से लाभान्वित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले 5 सालों में हम प्रदेश की सिंचाई क्षमता बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर कृषि रकबे तक पहुंचा देंगे। किसान एवं कृषि से जुड़े उद्यामियों को देंगे नई दिशा और अवसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2026 किसानों के कल्याण का साल है। इस दौरान हमारा पूरा फोकस किसानों पर ही रहेगा। इस साल हम कृषि आधारित उद्योगों के विकास पर विशेष ध्यान देंगे, जिससे किसानों और कृषि से जुड़े उद्यमियों को नई दिशा और अवसर मिलेंगे। गेहूं की खरीदी पर हम किसानों को 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दे रहे हैं। हम किसानों की आय बढ़ायेंगे। किसानों को अन्नदाता से ऊर्जादाता बनायेंगे। इसके लिए प्रदेश के 32 लाख किसानों को सोलर पम्प उपलब्ध करायेंगे। हर साल 10 लाख किसानों को सोलर पम्प दिए जाएंगे। इससे उन्हें बिजली बिल से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी। किसान खुद बिजली उत्पन्न करके खेतों में सिंचाई, छोटा-मोटा व्यवसाय और निजी उपभोग भी कर सकेंगे। साथ ही सरप्लस बिजली बेचकर अतिरिक्त आयार्जन भी वे कर सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार गरीबों, किसानों, युवाओं, महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए प्रभावी कदम उठा रही है। आत्मनिर्भर और विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण में समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। गरीबों और निराश्रितों का कल्याण सरकार की प्राथमिकता है और प्रदेश के हर जरूरतमंद को शासन की सेवाएं, सुविधाएं और संबल उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि नागदा की विश्व में अपनी अलग ही पहचान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश और प्रदेश में सांस्कृतिक धारा का अभ्युदय हो रहा है। सिंहस्थ 2028 के लिए हमारी तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में सबसे अच्छे स्कूल बन रहे हैं। प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए यही समय है, सही समय है। इसी क्रम में आज खाचरौद को भी नया सांदीपनि विद्यालय मिला है। हमारी सरकार विरासत के संरक्षण के मार्ग पर चलते हुए प्रदेश में श्रीकृष्ण पाथेय का निर्माण करा रही है। श्रीकृष्ण से जुड़े प्रत्येक स्थल को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा। … Read more

मीर यार बलूच ने जयशंकर को चेतावनी दी, ‘बलूचिस्तान में चीन की सेना की घुसपैठ हो सकती है’

नई दिल्ली बलूचिस्तान के एक नेता ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को एक खुला पत्र लिखा है. इस चिट्ठी में बलूच नेता ने चेतावनी देते हुए कहा कि चीन आने वाले महीनों में बलूचिस्तान में सैन्य बल तैनात कर सकता है, जिससे न केवल इस क्षेत्र में बल्कि भारत के लिए भी एक गंभीर खतरा पैदा होगा.  मीर यार बलूच ने जयशंकर को संबोधित करते हुए एक जनवरी 2026 को लिखे इस पत्र में खुद को बलूचिस्तान का प्रतिनिधि बताते हुए आगाह किया कि अगर बलूचिस्तान की रक्षा और स्वतंत्रता सेनाओं को लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा, तो चीन वहां अपने सैनिक तैनात कर सकता है. उन्होंने ऐसे किसी भी कदम को भारत और बलूचिस्तान दोनों के भविष्य के लिए खतरा बताया. पत्र में कहा गया कि अगर बलूचिस्तान की रक्षा और स्वतंत्रता सेनाओं की क्षमताओं को और मजबूत नहीं किया गया और उन्हें पुराने तौर-तरीकों के अनुसार अनदेखा किया जाता रहा, तो यह पूरी तरह संभव है कि चीन आने वाले कुछ महीनों में बलूचिस्तान में अपनी सैन्य टुकड़ियां तैनात कर दे. उन्होंने कहा कि छह करोड़ बलूच लोगों की इच्छा के बिना बलूचिस्तान की धरती पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी भारत और बलूचिस्तान—दोनों के भविष्य के लिए एक अकल्पनीय खतरा और चुनौती होगी. उन्होंने  चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि पाकिस्तान और चीन के बीच रणनीतिक गठजोड़ अब CPEC के उस चरण में पहुंच चुका है, जिसे उन्होंने इसका अंतिम चरण बताया. उनके अनुसार, इससे हालात और अधिक खतरनाक हो गए हैं. उन्होंने भारत और बलूचिस्तान के बीच ठोस और पारस्परिक सहयोग की मांग करते हुए कहा कि दोनों को जिन खतरों का सामना करना पड़ रहा है, वे वास्तविक और तत्काल हैं. मीर यार बलूच ने भारत और बलूचिस्तान के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का भी जिक्र किया. उन्होंने हिंगलाज माता मंदिर जैसे पवित्र स्थलों का हवाला देते हुए इन्हें साझा विरासत का प्रतीक बताया. इस चिट्ठी में उन्होंने मोदी सरकार द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के तहत की गई कार्रवाइयों की सराहना भी की. उन्होंने कहा कि इस अभियान में किस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के ठिकानों को निशाना बनाया गया और यह पहलगाम आतंकी हमले के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा और न्याय के प्रति असाधारण साहस और दृढ़ प्रतिबद्धता का उदाहरण है. आखिरी में मीर यार बलूच ने हमारे दो महान राष्ट्रों के बीच और अधिक मजबूत सहयोग की उम्मीद जताई.

बीएमसी चुनाव में किरीट सोमैया के बेटे को मिला वॉकओवर, विपक्ष ने क्यों नहीं उतारे उम्मीदवार?

मुंबई  महाराष्ट्र की सियासत में बीजेपी के दिग्गज नेता किरीट सोमैया एक ऐसा नाम है, जिसे 'भ्रष्टाचार विरोधी योद्धा' के तौर पर जाना जाता है. मुंबई विश्वविद्यालय से बिजनेस पॉलिसी और एडमिनिस्ट्रेशन में पीएचडी कर किरीट सोमैया ने अपने राजनीति विरोधी नेताओं के द्वारा वित्तीय हेराफेरी की जांच करने पर केंद्रित अपनी सियासी शैली को चुना. सोमैया के सियासी खोजबीन से अजीत पवार, हसन मुश्रीफ, सुनील तटकरे, छगन भुजबल, नारायण राणे और कृपाशंकर सिंह जैसे नेता नहीं बच सके. किरीट सोमैया मुंबई उत्तर पूर्व लोकसभा सीट से दो बार बीजेपी के सांसद रह चुके हैं, लेकिन पिछले काफी समय से पार्टी में साइड लाइन चल रहे थे. बीजेपी ने बीएमसी चुनाव में उनके बेटे नील सोमैया को मुंबई के वार्ड नंबर 107 से दूसरी बार उम्मीदवार बनाकर उतारा है. इस बार उनके बेटी की राह पूरी तरह से आसान हो गई है, क्योंकि विपक्ष की तरफ से कोई कैंडिडेट ही नहीं है. बीजेपी से कैंडिडेट होने के चलते नील सोमैया को एकनाथ शिंदे की शिवसेना का समर्थन हासिल है. नील सोमैया को विपक्षी दलों एक तरफ से वॉकओवर दे दिया है. किसी भी विपक्षी दल से कोई भी कैंडिडेट किरीट सोमैया के बेटे खिलाफ चुनाव में नहीं है. यह संयोग है या फिर कोई प्रयोग? नील सोमैया को विपक्ष का वॉकओवर मुंबई के मुलुंड इलाके की वार्ड नंबर 107 से बीजेपी प्रत्याशी नील सोमैया के खिलाफ राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के गठबंधन ने कोई उम्मीदवार नहीं दिया. ठाकरे ब्रदर्स ही नहीं एनसीपी और कांग्रेस पार्टी से भी किरीट सोमैया के बेटे खिलाफ कोई कैंडिडेट मैदान में नहीं है. एक तरह से विपक्ष ने पूरी तरह से किरीट सोमैया के बेटे को एक तरह से वॉकओवर दे दिया है. इसके चलते नील सोमैया के जीत की राह आसान हो गई है. किरीट सोमैया ने कहा- गॉड इज ग्रेट मुंबई के वार्ड 107 में नील सोमैया की सियासी राह को आसान होती देख किरीट सोमैया ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर कहा- गॉड इज ग्रेट. आगे कहा कि नील सोमैया वार्ड नंबर 107 से चुनाव लड़ रहे हैं. इस वार्ड में ठाकरे ग्रुप, MNS, कांग्रेस और शरद पवार की पार्टी कोई भी कैंडिडेट मैदान में नहीं बचा है. किरीट सोमैया ने कहा कि मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा, सिर्फ इतना ही नहीं कहूंगा कि ठाकरे ब्रदर्स और कांग्रेस के साथ एनसीपी प्रत्याशी उतारने में असफल रहे. भगवान की लीला अनोखी है. इस तरह से उन्होंने अपने बेटी के खिलाफ विपक्ष की तरफ से कैंडिडिट ना होने के लिए भगवान को श्रेय दिया है. समझें, विपक्ष ने क्यों दिया वॉकओवर किरीट सोमैया के बेटे नील सोमैया पहली बार 2017 में मुलुंड के वार्ड नंबर 107 से पार्षद चुने गए थे. अब दूसरी बार फिर से उसी वार्ड से बीजेपी के टिकट पर नील सोमैया चुनावी मैदान में है. विपक्ष की तरफ से कोई भी कैंडिडेट मैदान में नहीं है. मुंबई के मुलुंड विधानसभा क्षेत्र के तहत छह बीएमसी सीटें आती हैं, इन सभी के बाकी पांच वार्ड में इन सभी पार्टियों के कैंडिडेट मैदान में हैं, सिर्फ 107 वार्ड छोड़कर. राज ठाकरे-उद्धव ठाकरे ने कोई प्रत्याशी ही 107 वार्ड से नहीं उतारा, क्योंकि यह सीट उन्होंने शरद पवार की पार्टी के लिए छोड़ दी थी. मुंबई में ठाकरे ब्रदर्स के साथ शरद पवार की पार्टी का गठबंधन है. ऐसे में शरद पवार की एनसीपी (एसपी) ने हंसराज दानानी को वार्ड नंबर 107 से प्रत्याशी बनाया था, दानानी ने अपना नामांकन भी दाखिल किया था, लेकिन उनका पर्चा खारिज हो गया. एनसीपी प्रत्याशी का पर्चा इसीलिए निरस्त हो गया, क्योंकि नामांकन पत्र के साथ हलफनामा नहीं लगाया था. ऐसे में किरीट सोमैया के बेटे की जीत अब तय मानी जा रही है. नील सोमैया को फिर करना होगा मुकाबला शिवसेना (यूबीटी), राज ठाकरे की मनसे और शरद पवार की एनसीपी के उम्मीदवार ना होने के बाद भी नील सोमैया को चुनाव में दो-दो हाथ करना होगा. कांग्रेस ने इस इस सीट पर अपना उम्मीदवार इसीलिए नहीं दे सकी, क्योंकि यह सीट वंचित बहुजन अघाड़ी के लिए छोड़ी है. मुंबई में कांग्रेस और वीबीए का गठबंधन है. ऐसे में वंचिक बहुजन अघाड़ी सहित 9 निर्दलीय उम्मीदवार अभी भी वार्ड 107 से चुनावी मैदान में हैं. ऐसे में नील सोमैया की भले ही राह आसान दिख रही हो, लेकिन जीत के लिए उन्हें संघर्ष करना होगा. वार्ड नंबर 107 में नील सोमैया के खिलाफ वंचित बहुजन अघाड़ी के उम्मीदवार को कांग्रेस का समर्थन है. शरद पवार की पार्टी का पर्चा खारिज होने के बाद ठाकरे ब्रदर्स यहां पर किसी निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन कर सकते हैं. हालांकि, यह इलाका बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है, यहां पर गुजराती और मारवाड़ी समाज के अच्छी खासी संख्या है. ऐसे में देखना है कि विपक्ष नील सोमैया की राह में कैसे बाधा बनते हैं?

अखिल भारतीय न्यायाधीश बैडमिंटन टूर्नामेंट की मेजबानी करेगा रांची, 3 जनवरी से होगा आगाज़

रांची झारखंड उच्च न्यायालय के तत्वावधान में दूसरा ऑल इंडिया न्यायाधीश बैडमिंटन टूर्नामेंट का आयोजन 03 से 04 जनवरी तक रांची में किया जाएगा। इस प्रतियोगिता का आयोजन रांची के होटवार स्थित खेल गांव परिसर के ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव इंडोर स्टेडियम में किया जाएगा। 30 से ज्यादा न्यायाधीश प्रतियोगिता में लेंगे भाग इस प्रतियोगिता में देश के विभिन्न 09 उच्च न्यायालयों के 30 से ज्यादा न्यायाधीश भाग लेंगे। टूर्नामेंट का उद्देश्य न्यायपालिका से जुड़े पदाधिकारियों के बीच खेल भावना, आपसी सौहार्द, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता तथा सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देना है। उच्च न्यायालय द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता के सफल एवं सुचारु संचालन को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। खेल गांव परिसर में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बैडमिंटन कोर्ट, खिलाड़ियों के विश्राम, चिकित्सा सुविधा, सुरक्षा व्यवस्था एवं अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। चार श्रेणियों में मुकाबले आयोजित किए जाएंगे प्रतियोगिता के दौरान चार श्रेणियों में मुकाबले आयोजित किए जाएंगे। मेन सिंगल, मेन डबल्स, वूमेन सिंगल्स और मिक्स्ड डबल्स में देशभर से आए न्यायाधीश अपने खेल कौशल का प्रदर्शन करेंगे। टूर्नामेंट के समापन पर विजेता एवं उपविजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाएगा। जिला प्रशासन द्वारा सभी प्रतिभागियों एवं आगंतुकों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। उल्लेखनीय है कि पहला ऑल इंडिया न्यायाधीश बैडमिंटन टूर्नामेंट का आयोजन 05-06 जनवरी 2025 को ओडिशा में आयोजित किया गया था।