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भारत का चीन को झटका? रिपोर्ट में दावा – चीनी कंपनियों से प्रतिबंध हटाकर सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स में उन्हें मिलेगी मौका

 नई दिल्‍ली रॉयटर्स की रिपोर्ट में दावा किया है कि वित्त मंत्रालय उन प्रतिबंधों को हटाने की योजना बना रहा है, जिनके कारण 2020 से चीनी कंपनियों को सरकारी ठेकों के लिए बोली लगाने से रोका गया था. यह प्रतिबंध भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुए घातक सीमा झड़प के बाद लागू किए गए थे और चीन समेत पड़ोसी देशों की कंपनियों को बोली लगाने से पहले एक सरकारी समिति में पंजीकरण कराना और राजनीतिक सुरक्षा संबंधी मंजूरी लेना अनिवार्य था.   इस प्रतिबंध लगने के बाद से ही चीनी कंपनियां करीब 700 अरब डॉलर से 750 अरब डॉलर के सरकारी टेंडर से बाहर हो गई थीं. अधिकारियों को कहना है कि मंत्रालय का लक्ष्य पड़ोसी देशों के बोलीदाताओं के लिए पंजीकरण की आवश्यकता को समाप्त करना है.  PMO से आएगा आखिरी फैसला रिपोर्ट का कहना है कि प्रतिबंध हटाने का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय के पास है और इसकी मंजूरी का इंतजार है. रिपोर्ट का कहना है कि प्रतिबंध इसलिए हटाए जा रहे हैं, क्‍योंकि क्षेत्रीय कमी, परियोजनाओं में देरी हो रही है.  कई मंत्रालयों ने भी उपकरण जुटाने और परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में चुनौतियों की सूचना दी है.  रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्व कैबिनेट सचिव राजीव गाबा की अध्यक्षता वाली एक उच्च स्तरीय समिति ने प्रतिबंधों में ढील देने की सिफारिश की है. ये सिफारिशें कई मंत्रालयों के उन अनुरोधों के अनुसार है, जिनमें परियोजनाओं में देरी को रोकने के लिए छूट मांगी गई थी.  2020 में लागू हुए थे प्रतिबंध यह प्रतिबंध 2020 में लागू किए गए थे, जिसका तत्‍काल प्रभाव पड़ा था. उदाहरण के लिए, नियमों के लागू होने के तुरंत बाद चीनी सरकारी कंपनी सीआरआरसी को 216 मिलियन डॉलर के ट्रेन निर्माण कॉन्‍ट्रैक्‍ट के लिए बोली लगाने से अयोग्य घोषित कर दिया गया था.  ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में चीनी कंपनियों को दिए गए नए प्रोजेक्टों की वैल्‍यू 27 प्रतिशत घटकर 1.67 अरब डॉलर रह गया. पिछले एक साल में राजनयिक प्रयास किए गए हैं, जिनमें प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा, व्यापार वीजा की मंजूरी में आसानी और सीधी उड़ानों की बहाली जैसे कदम शामिल हैं. हालांकि, भारत सतर्क बना हुआ है और चीनी डायरेक्‍ट विदेशी निवेश पर अन्य प्रतिबंध बरकरार रखे हुए है.

‘मैदान नहीं छोड़ूंगी’, काराकाट हारने के बावजूद ज्योति सिंह के लोकसभा चुनाव लड़ने के इरादे मजबूत

पटना  पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनाव में पावर स्टार पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह को हार का सामना करना पड़ा था. वो काराकाट सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ी थीं. इस सीट से सीपीआई (माले) से जुड़े डॉक्टर अरुण सिंह कुशवाहा ने 2836 वोटों से जीत हासिल की थी. चुनावी नतीजों में ज्योति तीसरे नंबर पर रही थीं. इस इलेक्शन को जीतने के लिए ज्योति ने घर-घर जाकर वोट अपील की थी. लेकिन वो जीत नहीं सकीं. फिर से इलेक्शन में उतरेंगी ज्योति लेकिन ज्योति का हौसला नहीं टूटा है. चुनाव में मिली इस हार ने उन्हें तोड़ा नहीं है. एक इंटरव्यू में ज्योति ने बताया कि वो आगे फिर से चुनाव लड़ेंगी. चैनल A TO Z BIHAR संग बातचीत में ज्योति ने कहा- लाइफ है तो हार जीत लगी रहेगी. ये जीवन का खेल है. ऐसा नहीं है कि हार गए तो मैदान छोड़कर भाग जाएंगे. लोगों ने मुझे उम्मीद से 27 हजार वोट दिए थे. मैं पीछे हट जाऊंगी तो लोग क्या सोचेंगे कि मैं डरपोक थी. मैं कायर थी. नहीं, मैं मैदान नहीं छोड़ूंगी. मैं काराकाट नहीं छोड़ूंगी. मैं आज भी बोलती हूं वहां के लोगों ने जो 30 दिन में मुझे 27 हजार वोट दिए, वहां पर एक लहर चली उसमें मुझे इतने वोट मिले.. मैंने खुद उम्मीद नहीं की थी. मैं 27 हजार वोट मिलने से पूरी तरह संतुष्ट थी. ज्योति ने बताया कि काराकाट उनका परिवार है. वो फिर से वहां से चुनाव लड़ेंगी. काराकाट की जनता के हर सुख दुख में वो चुनाव लड़ेंगी. ज्योति ने कहा कि वो इस बार की तरह अलग बार भी पूरी कोशिश करेंगी कि पार्टी से ही चुनाव लड़ें. लेकिन अगर बात नहीं बनेगी तो रास्ता निकालेंगी. ज्योति सिंह ने बातचीत के दौरान बड़ा ऐलान किया. उन्होंने कहा कि हो सकता है विधानसभा चुनाव लड़ने के बाद आगे वो लोकसभा इलेक्शन लड़ें. ज्योति ने किया था इमोशनल पोस्ट ज्योति ने चुनाव में हार मिलने के बाद अपनी एक फोटो के साथ नतीजों पर रिएक्ट किया था. उन्होंने हाथ जोड़ते हुए फोटो शेयर की थी. कैप्शन में लिखा था- हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा. पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की कविता द्वारा मैं अपनी मन:स्थिति को बताना चाहती हूं, ऐसा इसलिए संभव हो पा रहा है क्योंकि काराकाट की जनता ने अपने अपार समर्थन द्वारा मुझे भावनात्मक रूप से और भी दृढ़ और संकल्पित  बना दिया है, इसके लिए हृदय से मैं तमाम  कारकाट की जनता को धन्यवाद देना चाहती हूं. ''साथ ही मैं यह स्पष्ट कर देना चाहती हूं कि यह लड़ाई मैंने महिलाओं के लिए लड़ी हूं ,यह लड़ाई मैंने शोषितों/वंचितों के लिए लड़ी है,ना कि किसी को जीतने या हारने के लिए. हमारे लोकतंत्र में सभी को लड़ने का अधिकार दिया है, साथ ही यह जीवन हमें सिखाता है कि हार/जीत जीवन का हिस्सा है, इससे आगे बढ़ाना है, मैं बढूंगी साथ ही इस क्षेत्र के लिए हमेशा तत्परता से यथा संभव योगदान देती रहूंगी.''

IND vs NZ: 7 सीरीज, 37 साल की अदावत – भारत का न्यूजीलैंड के खिलाफ घर में शानदार ODI रिकॉर्ड

 नई दिल्ली साल 2026 में टीम इंडिया अपने अभियान की शुरुआत वनडे फॉर्मेट से करने जा रही है, जिसकी पहली सीरीज का पहला मैच 11 जनवरी से वडोदरा में है. खास बात यह है कि मुकाबले के लिए जिस कोटाम्बी स्टेडियम को चुना गया है, वहां पहली बार कोई पुरुष इंटरनेशनल मैच खेला जाएगा. इससे पहले वडोदरा में मेजबानी रिलायंस स्टेडियम करता रहा है, लेकिन अब शहर को नई इंटरनेशनल क्रिकेटिंग पहचान मिलने वाली है. दोनों देशों के बीच 50 ओवरों की द्विपक्षीय भिड़ंत का इतिहास दिसंबर 1988 से शुरू होता है. तब से लेकर अब तक कुल 7 बाइलेटरल ODI सीरीज खेली जा चुकी हैं और मजे की बात यह कि हर बार नतीजा एक ही रहा: भारत विजेता, न्यूजीलैंड पराजित. यानी 37 साल में कीवी टीम भारत के खिलाफ एक भी बाइलेटरल ODI सीरीज नहीं जीत पाई. न्यूजीलैंड की टीम पहली बार भारत की सरजमीं पर वनडे खेलने 1987 के वर्ल्ड कप के दौरान आई थी, लेकिन वह एक मल्टी-नेशन टूर्नामेंट था. असली द्विपक्षीय मुकाबला तो दिसंबर 1988 में शुरू हुआ, जब कीवी टीम पहली बार बाइलेटरल ODI सीरीज के लिए भारत पहुंची. भारत ने 4 मैचों की उस सीरीज में न्यूजीलैंड को 4-0 से साफ बहा दिया और घरेलू दबदबे की शुरुआत वहीं से हुई. जनवरी 2023 में न्यूजीलैंड आखिरी बार वनडे सीरीज खेलने भारत आया था, जहां टीम इंडिया ने क्लीन स्वीप कर दिया. दिलचस्प यह है कि कहानी की शुरुआत और अंत दोनों एक जैसे हैं. भारत ने 1988 में न्यूजीलैंड के खिलाफ पहली बाइलेटरल ODI सीरीज खेली तो 4-0 से क्लीन स्वीप किया था, और 2023 में खेली गई आखिरी सीरीज में भी उसी अंदाज में क्लीन स्वीप (3-0), यानी शुरुआत भी सफाया… और अंत भी सफाया. हालाकि इतिहास का यह पक्ष भी याद रखना जरूरी है कि 2024 में टेस्ट फॉर्मेट में समीकरण बिल्कुल उलट थे. रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत को कीवी टीम के हाथों 0-3 से क्लीन स्वीप झेलना पड़ा था. टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में यह पहली बार था जब भारत को अपने घर में तीन या उससे अधिक मैचों की किसी टेस्ट सीरीज में सफाया झेलना पड़ा. ऐसे में भले ही मौजूदा मुकाबला वनडे फॉर्मेट का है, लेकिन उस टेस्ट सीरीज हार की चुभन टीम इंडिया को जरूर याद होगी. यानी वनडे में न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत का घरेलू रिकॉर्ड बेहद एकतरफा रहा है. अपनी सरजमीं पर टीम इंडिया ने कीवी टीम के खिलाफ अब तक 40 वनडे खेले हैं, जिनमें से 31 में जीत दर्ज की है, जबकि एक मुकाबला बेनतीजा रहा. न्यूजीलैंड सिर्फ 8 मैच जीत पाया है. यानी होम कंडीशंस में भी भारत का दबदबा लगभग चार दशकों से जस का तस बना हुआ है. ओवरऑल रिकॉर्ड में भी भारत आगे है. दोनों टीमों के बीच अब तक 120 वनडे खेले गए हैं, जिनमें भारत ने 62 और न्यूजीलैंड ने 50 मैच जीते हैं, जबकि एक मुकाबला टाई रहा और 7 मैच बिना नतीजे के समाप्त हुए. यानी कुल तस्वीर यह बताती है कि खासकर भारतीय सरजमीं पर ज्यादातर वनडे मुकाबलों में भारत का दबदबा रहा है और न्यूजीलैंड को कई बार सीरीज हार का सामना करना पड़ा है. भारत vs न्यूजीलैंड हेड टू हेड ODI (भारत में)  कुल मैच 40     भारत जीता 31     भारत हारा 8     बेनतीजा 1     भारत vs न्यूजीलैंड ओवरऑल हेड टू हेड ODI कुल मैच 120     भारत जीता 62     न्यूजीलैंड जीता 50     टाई 1     बेनतीजा 7     भारत vs न्यूजीलैंड ODI सीरीज के नतीजे (जब बाइलेटरल वनडे सीरीज भारत में हुई) 1988/89: भारत ने न्यूजीलैंड को 4-0 से हराया 1995/96: भारत ने सीरीज 3-2 से जीती 1999/00: भारत ने 3-2 से जीत दर्ज की 2010/11: भारत ने न्यूजीलैंड को 5-0 से क्लीन स्वीप किया 2016/17: भारत ने सीरीज 3-2 से जीती 2017/18: भारत ने 2-1 से जीत हासिल की 2023: भारत ने न्यूजीलैंड को 3-0 से हराया न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, केएल राहुल (विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर (उप-कप्तान), वॉशिंगटन सुंदर, रवींद्र जडेजा, मोहम्मद सिराज, हर्षित राणा, प्रसिद्ध कृष्णा, कुलदीप यादव, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), नीतीश कुमार रेड्डी, अर्शदीप सिंह और यशस्वी जायसवाल.  भारत vs न्यूजीलैंड वनडे सीरीज का शेड्यूल  11 जनवरी- पहला वनडे, वडोदरा  14 जनवरी- दूसरा वनडे, राजकोट  18 जनवरी- तीसरा वनडे, इंदौर  भारत vs न्यूजीलैंड टी20 सीरीज का शेड्यूल  21 जनवरी- पहला टी20, नागपुर  23 जनवरी- दूसरा टी20, रायपुर  25 जनवरी- तीसरा टी20, गुवाहाटी  28 जनवरी- चौथा टी20, विशाखापत्तनम  31 जनवरी- पांचवां टी20, तिरुवनंतपुरम

UP राजनीति में हलचल: SIR ड्राफ्ट लिस्ट जारी होते ही BJP एक्टिव, 4 करोड़ वोटर बनाने की तैयारी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के तहत जारी हुई ड्राफ्ट मतदाता सूची के बाद भारतीय जनता पार्टी बेहद गंभीर हो गई है। भाजपा ने एक महीने में चार करोड़ नए मतदाता बनाने का लक्ष्य रखा है और मुख्यमंत्री इस अभियान को लेकर खासे सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश में मंगलवार को एसआईआर के तहत जारी ड्राफ्ट लिस्ट में बड़ी संख्या में वोटर कम होने के बाद भाजपा अब वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने की मुहिम में लगी है। ड्राफ्ट लिस्ट में 2.89 करोड़ वोटर के नाम कटे हैं। भाजपा एक महीने में चार करोड़ नए वोटर बनाने की कोशिश में है।   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने पूरे मंत्रिमंडल को दी वोटर लिस्ट में नए सदस्य जुड़वाने की जिम्मेदारी दी है। मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को अपने प्रभार वाले जिलों में मोर्चे पर जम जाने की जिम्मेदारी दी है। मंत्रियों को अपने प्रभार वाले जिलों में जमीनी हकीकत जाननी होगी और ड्राफ्ट लिस्ट में मतदाताओं के नाम जुड़वाने का प्रयास करना होगा। मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल में सहयोगियों को जमीन पर उतरने के साथ पात्र और अपात्र लोगों की पड़ताल करने का निर्देश दिया है। मानना है कि सूची में अपात्र लोगों को पात्र बनने की प्रक्रिया से भी अवगत कराना सरकार की जिम्मेदारी है। पात्र लोगों की पड़ताल कर उनका नाम भी सूची में जारी कराया जाए। मंत्रियों को उनके प्रभार के जिलों में जिम्मा दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे गंभीर बताते हुए संगठन को युद्धस्तर पर काम करने के निर्देश दिए हैं। पार्टी ने विधायकों और सांसदों से वोटर लिस्ट सुधार पर पूरा ध्यान देने को कहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार के सभी मंत्रियों, विधायकों, पार्टी के पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों के साथ वर्चुअल मीटिंग की और कहा कि एक महीने में हर विधानसभा में कम से कम एक लाख वोट बढ़ाया जाए, इस तरह कम से कम चार करोड़ नए वोटर बन जाएंगे। मीटिंग में कहा गया कि नई ड्राफ्ट लिस्ट के मुताबिक, यूपी में 46.23 लाख वोटर की मृत्यु हो चुकी है। पार्टी के मंत्री, विधायक, नेता, कार्यकर्ता इन सभी की दुबारा जांच करें और देखें कि इस लिस्ट में कोई गड़बड़ी तो नहीं है। वर्चुअल मीटिंग में सभी मंत्रियों को भी बूथ में बैठने को कहा गया है। उनके साथ इस बैठक में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पार्टी के सभी राज्य मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, एमएलसी, पदाधिकारियों और जिला अध्यक्षों के बैठक में निर्देश दिया है कि वे पूरी तरह वोटर लिस्ट के काम में जुटें।  विधानसभा की सभी कमेटियों की बैठकें रद करने को कहा गया है, जिससे कि सभी मतदाता बनाने के काम में लगें। पार्टी का फोकस तीन प्रमुख वर्गों पर रखा गया है। पहला तो नए युवा मतदाता जो उम्र पूरी होने के बावजूद अब तक वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हो पाए हैं। दूसरा, वे वे मतदाता जिनके नाम दस्तावेजों की कमी या तकनीकी त्रुटियों के कारण सूची से हट गए हैं। तीसरा, ऐसे मतदाता जिनका पता सत्यापन के दौरान नहीं मिल पाया या जिनकी मैपिंग नहीं हो सकी। लखनऊ में सबसे ज्यादा कटे वोट लखनऊ में सबसे ज्यादा 30 फीसदी वोट कम हुआ है। यहां 12 लाख से अधिक वोट कटे हैं। लखनऊ में सभी नौ विधानसभा सीट पर वोटर ड्राफ्ट लिस्ट की फोटो कॉपी निकाली गई है और पार्टी के कार्यकर्ता घर-घर जाकर छूटे हुए वोटरों की तलाश कर रहे हैं। जिला अध्यक्ष आनन्द द्विवेदी का कहना है कि जो लोग लखनऊ में रहते हैं, लेकिन वोटर लिस्ट में गांव में नाम लिखवाया है, उन्हें समझाया जा रहा है। बहुत सारे लोगों ने लापरवाही में फॉर्म जमा नहीं किए हैं। उनसे फॉर्म 6 भरवाया जा रहा है। लखनऊ कैंट क्षेत्र में पार्षद अपनी टीम के साथ घर-घर जाकर नए वोटरों को जोड़ने में जुटे हैं। उनकी टीम के पास ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की कॉपी है। ये घर-घर जाकर छूटे हुए वोटरों की तलाश कर रहे हैं। प्रदेश के कुल 15.44 करोड़ मतदाताओं में एसआइआर के तहत दो करोड़ 88 लाख 75 हजार 230 ऐसे हैं जो अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट हैं। 1.04 करोड़ मतदाता ऐसे हैं, जिनके रिकार्ड वर्ष 2003 की मतदाता सूची से नहीं मिले हैं। अब इनको मतदाता बनाने का प्रयास होगा। चुनाव आयोग अब इन्हें नोटिस जारी करेगा।  

26 टन गोमांस की पुष्टि, हिंदूवादी संगठनों का प्रदर्शन: भोपाल में स्लाटर हाउस सील

भोपाल  राजधानी भोपाल में गोकशी के मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं. बीते 8 महीने में ऐसी 14 घटनाएं सामने आ चुकी हैं. जिसमें या तो गोवंशो को मार दिया गया या फिर हिंदूवादी संगठनों के समय पर पहुंचने की वजह से उन्हें बचा लिया गया. लेकिन अब नगर निगम भोपाल के अत्याधुनिक स्लाटर हाउस से गोमांस की सप्लाई का मामला सामने आया है. सरकार द्वारा पीपीपी मोड पर चलाए जा रहे इस स्लाटर हाउस में गोकशी की जानकारी मिलते ही नगर निगम भोपाल के अधिकारियों की नींद उड़ गई है. इधर जिला प्रशासन ने गोमांस की पुष्टि होने के बाद स्लाटर हाउस को सील कर दिया है. विरोध में हिंदू संगठनों ने कमिश्नर कार्यालय का घेराव कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है. एसी वैन में पकड़ा गया था 26 टन गोमांस 17 दिसंबर की रात भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय के सामने हिंदू संगठनों ने मांस से भरा एक ट्रक पकड़ा था. कार्यकर्ताओं का आरोप था कि इस ट्रक में जो मांस का परिवहन हो रहा था, वह गोमांस है. इसकी सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस और अन्य अधिकारी पहुंच गए थे. पुलिस ने सबसे पहले ड्रायवर नवेद को गिरफ्तार किया था. इसके बाद इस मांस को लैब में टेस्टिंग के लिए राज्य पशु चिकित्सालय जहांगीराबाद भेजा गया था. अब इसकी लैब रिपोर्ट आ गई है. जिसमें स्पष्ट हो गया है कि 26 टन मांस जो पुलिस ने जब्त किया था, वह गोमांस ही है. क्यूआर कोड और स्पेशल बाक्स में पैक था मांस पुलिस ने 17 दिसंबर की रात उत्तरप्रदेश के रजिस्ट्रेशन नंबर वाले जिस ट्रक को पकड़ा था, जब इसकी तलाशी ली गई तो इसमें पैकेटों में भरा गोमांस मिला था. इनमें बकायदा क्यूआर कोड और स्पेशल टैग भी लगे हुए थे. ट्रक का वजन कराने के बाद इसमें करीब 26 टन गोमांस होने की जानकारी सामने आई थी. अब लैब में जांच के बाद यह भी स्पष्ट हो गया है कि यह गोमांस ही था. संस्कृति बचाओ मंच और हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने बताया कि "भोपाल नगर निगम के स्लाटर हाउस से गोमांस की सप्लाई की जा रही थी. भोपाल से गोमांस दूसरे प्रदेशों और फिर विदेशों में भेजने की जानकारी भी मिली है." स्लाटर हाउस सील, कानूनी कार्रवाई की तैयारी इस मामले में शहर वृत्त के एसडीएम दीपक पांडे ने बताया कि "गोमांस की पुष्टि होने के बाद स्लाटर हाउस को सील कर दिया गया. स्लॉटर हाउस के लाइसेंस की शर्तों की भी जांच की जा रही है. नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर लाइसेंस निरस्त करने और संबंधित संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है. वहीं पुलिस की ओर से भी पशु क्रूरता अधिनियम और अन्य धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है." हिंदू संगठनों ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय का किया घेराव जांच रिपोर्ट में 26 टन गोमांस की पुष्टि होने के बाद हिंदू संगठनों में जबरदस्त आक्रोश है. विरोध में बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद ने गुरुवार को पुलिस कमिशनर कार्यलय का घेराव कर जमकर नारेबाजी की. विश्व हिंदू परिषद कार्यकर्ता जीतेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि गोमाता के सम्मान में सभी हिंदू संगठनों ने सामूहिक रूप से प्रदर्शन किया है. संगठनों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था की मांग की है. बजरंग दल नेताओं ने कहा कि पिछले दिनों जहांगीराबाद इलाके में जो 26 टन मांस पकड़ा गया था, वह गोमांस ही था. इसकी पुष्टि हो गई है. यह भी स्पष्ट हुआ है कि नगर निगम के इसी स्लाटर हाउस में गोवंश की हत्याएं होती थीं. नेताओं का आरोप है कि नगर निगम, प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत के बना यह संभव नहीं है. ऐसे में मामले की जांच हो और सभी पर एफआईआर दर्ज होना चाहिए." यह है मामला हिंदू संगठनों ने 17 दिसंबर की रात पुलिस मुख्यालय (PHQ) के ठीक सामने एक संदिग्ध कंटेनर को रोका था। यूपी रजिस्ट्रेशन नंबर वाले इस ट्रक में 26 टन मांस लदा था। सामने आया कि यह मांस कहीं और से नहीं, बल्कि भोपाल नगर निगम के अत्याधुनिक स्लॉटर हाउस से ही लोड होकर निकला था। भड़के हिंदू संगठन विहिप के प्रांत सह मंत्री जितेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि बजरंग दल ने जो 26 टन मांस पकड़ा था, उसके गोमांस होने की पुष्टि हो गई है। इसे नगर निगम द्वारा संचालित स्लॉटर हाउस में ही काटा गया था। इस अपराध के लिए नगर निगम प्रशासन जिम्मेदार है। निगमायुक्त और महापौर पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। संस्कृति बचाओ मंच और हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने इसे 'आस्था पर कड़ा प्रहार' बताया है। दूसरे राज्यों को भेज रहा था गोमांस गोमांस तस्करी के मामले में जहांगीराबाद पुलिस ने स्लॉटर हाउस लाइवस्टाक के संचालक असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा और कंटेनर संचालक शोएब को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपित जिंसी स्थित लाइवस्टाक स्लाटर हाउस से दूसरे राज्यों तक गोमांस पहुंचा रहे थे। ये तीन किरदार, जिन पर इसे रोकने की जिम्मेदारी नगर निगम का वेटनरी डाक्टर जिम्मेदारी: स्लॉटर हाउस में जाकर वहां कट रहे पशुओं और मानकों की जांच करनी चाहिए थी, लेकिन अपनी जिम्मेदारी को सही तरीके से नहीं निभाया। हर्षित तिवारी, अपर आयुक्त, वेटनरी शाखा जिम्मेदारी : वेटनरी शाखा के पास स्लॉटर हाउस की गतिविधियों की निगरानी का जिम्मा है। इन्हें वहां से सप्लाई होने वाले मांस के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए थी। संस्कृति जैन, निगमायुक्त जिम्मेदारी: स्लॉटर हाउस नगर निगम द्वारा पीपीपी मोड पर संचालित किया जा रहा है। ऐसे में नगर निगम का समय-समय पर होने वाले निरीक्षण और वहां की गतिविधियों की रिपोर्ट लेनी चाहिए थी, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया। भोपाल में बीते 8 महीने में गोवंश को लेकर हुई घटनाएं     1. थाना निशातपुरा में 8 मई 2025 को सब्जी मंडी करोंद में गोमाता के अवशेष मिले.     2. 16 मई व 27 जून 2025 को पलाशी रोड शिव मंदिर और हाउसिंग बोर्ड चौकी के पास गोकशी/अवशेष मिले.     3. थाना सूखी सेवनिया में एक कार से 4 गौवंश का मांस पकड़ा गया.   … Read more

दिल्ली में TMC सांसदों का हंगामा: गृह मंत्रालय के बाहर 8 सांसदों का धरना, ममता ने कराई FIR

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, सियासी सरगर्मी बढ़ती जा रही है. गुरुवार को, कोलकाता में पॉलिटिकल कंसल्टेंसी और इलेक्शन मैनेजमेंट कंपनी I-PAC के दफ्तर में ईडी ने छापा मारा. इस दौरान सीएम ममता बनर्जी भी मौके पर पहुंचीं और इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया. बंगाल में ईडी के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज किया गया है. इसके साथ ही, मामला कोर्ट भी पहुंच गया है. TMC ने कोर्ट से ED की कार्रवाई को गैर-कानूनी घोषित करने और पार्टी के सभी गोपनीय दस्तावेज़ तुरंत वापस करने के निर्देश देने की मांग की है. इससे पहले दिन में, ED ने एक याचिका दायर की और दावा किया कि ये छापे 'बंगाल कोयला खनन' घोटाले से जुड़े थे और ममता पर आधिकारिक जांच में 'बाधा डालने' का आरोप लगाया है. प्रदर्शन में डेरेक ओ'ब्रायन, शताब्दी रॉय, महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद जैसे प्रमुख सांसद शामिल हैं। टीएमसी सांसद ईडी की कोलकाता में आई-पैक कार्यालयों और इसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाया और महुआ मोइत्रा और डेरेक ओ'ब्रायन को हिरासत में लिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाया है। TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन और महुआ मोइत्रा को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ऑफिस के बाहर विरोध प्रदर्शन करते समय पुलिस ने हिरासत में ले लिया। टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन और महुआ मोइत्रा हिरासत में त्रिणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद रेक ओ ब्रायन और महुआ मोइत्रा को पुलिस ने हिरासत में लिया। यह कार्रवाई तब हुई जब दोनों सांसद केंद्र के गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा 'हम भाजपा को हराएंगे। पूरा देश देख रहा है कि दिल्ली पुलिस एक चुने हुए सांसद के साथ कैसा व्यवहार कर रही है।' वहीं सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने भी कहा 'आप देख रहे हैं कि यहां सांसदों के साथ क्या हो रहा है।    बंगाल में ईडी की कार्रवाई का विरोध, तृणमूल सांसदों ने गृह मंत्री के घर के बाहर प्रदर्शन किया टीएमसी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियां चुनाव से पहले पार्टी के रणनीतिक दस्तावेजों तथा डेटा को हाथ लगाने की कोशिश कर रही हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमाया गया है। पार्टी का कहना है कि यह कार्रवाई चुनाव वर्ष में राजनीतिक दबाव पैदा करने की साजिश का हिस्सा है। दिल्ली समेत कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन जारी है, जिसमें टीएमसी नेताओं ने प्रवर्तन निदेशालय की I‑PAC के खिलाफ छापेमारी का विरोध करते हुए केंद्र सरकार पर कड़ी टिप्पणियां कीं।  TMC सांसद कीर्ति आजाद ने कहा, "ED ने गलत तरीके से छापे मारे हैं, और यह अलोकतांत्रिक तरीके से चुनाव जीतने की कोशिश है, बीजेपी इस तरह से चुनाव नहीं जीत पाएगी…" सिर्फ चुनाव के दौरान ED, CBI TMC सांसद शताब्दी रॉय ने कहा कि कल ED की टीम भेजी और उन्हें चुनाव के समय सब कुछ याद आता है, वे सिर्फ जीतने के लिए चुनाव के दौरान ED, CBI की टीमें भेजते हैं, लेकिन वे चुनाव नहीं जीतेंगे…" प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के खिलाफ ममता बनर्जी ने आज यानी शुक्रवार को विरोध मार्च निकालने की का ऐलान किया है. उन्होंने इस कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित और चुनावों से पहले TMC को डराने की कोशिश बताया. बंगाल कांग्रेस ने भी ईडी की छापेमारी का विरोध किया है. विपक्ष आए दिनों यह आरोप लगाता रहता है कि मोदी सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों के जरिए उनके नेताओं को जानबूझकर और चुन-चुनकर निशाना बना रही हैं. 

मंत्री विजयवर्गीय का क्षेत्र अपराध में नंबर वन, बाणगंगा में 1749 मामले दर्ज

इंदौर  इंदौर शहर में साल 2025 अपराध के आंकड़ों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां लसूड़िया थाना अपराध के मामलों में दूसरे नंबर पर रहता था, वहीं अब उसे पीछे छोड़ते हुए चंदननगर थाना दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। शहर में सबसे अधिक अपराध दर्ज करने वाला थाना बाणगंगा पहले की तरह नंबर वन बना हुआ है, जबकि लसूड़िया तीसरे स्थान पर खिसक गया है। 33 हजार से अधिक केस, अपराध में इजाफा बीते एक साल में शहरभर में 33 हजार से अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। यह संख्या पिछले वर्षों की तुलना में करीब पांच हजार अधिक है, जो शहर में बढ़ते अपराध की ओर इशारा करती है। हत्या, हत्या के प्रयास और बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों में भी वृद्धि दर्ज की गई है। बाणगंगा सबसे आगे, चंदननगर दूसरे नंबर पर आंकड़ों के अनुसार बाणगंगा थाना में सबसे अधिक 1749 केस दर्ज हुए हैं। इसके बाद चंदननगर थाना में 1663 मामले सामने आए। तीसरे स्थान पर लसूड़िया थाना रहा, जहां 1640 केस दर्ज किए गए। चौथे नंबर पर भंवरकुआं थाना रहा, जहां 1370 अपराध दर्ज हुए। इन थानों में दर्ज हुए 30 प्रतिशत मामले इसके अलावा विजयनगर थाना में 1020 और खजराना थाना में 1041 केस दर्ज हुए। शहर के कुल अपराधों में से करीब 30 प्रतिशत मामले इन पांच से छह थानों में ही दर्ज हुए हैं। नए थानों के प्रस्ताव अब भी कागजों में अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस ने कुछ साल पहले तीन नए थानों के गठन का प्रस्ताव भेजा था। इसके तहत बाणगंगा थाना क्षेत्र से सुपर कॉरिडोर थाना, लसूड़िया से महालक्ष्मीनगर थाना और भंवरकुआं से पालदा थाना बनाने का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा गया था, लेकिन यह योजना अब तक कागजों में ही सीमित है। हाल ही में चंदननगर थाना अपराध में दूसरे स्थान पर आने के बाद पुलिस कमिश्नर ने यहां भी नया थाना बनाने का प्रस्ताव तैयार करने की बात कही है। दो टीआई का प्रयोग भी बेअसर अपराध पर नियंत्रण के लिए पुलिस ने हाल ही में लसूड़िया और विजयनगर थानों में दो टीआई का प्रयोग शुरू किया है। यहां दो महिला टीआई को टू आईसी के रूप में पदस्थ किया गया है, लेकिन इसके बावजूद अपराधों में कोई खास कमी नहीं आई है। अन्य थानों में भी यह प्रयोग लागू करने की तैयारी है। सराफा थाना सबसे सुरक्षित शहर में सबसे कम अपराध वाले थानों में सराफा थाना शामिल है। यहां इस साल केवल 155 केस दर्ज हुए हैं। इसके अलावा छत्रीपुरा, सदर बाजार और पंढरीनाथ जैसे संवेदनशील थानों में भी अपराध की संख्या कम रही है। वहीं एमजी रोड, कोतवाली और छोटी ग्वालटोली जैसे व्यापारिक क्षेत्रों वाले थानों में भी अपेक्षाकृत कम अपराध दर्ज हुए हैं। 

मध्य प्रदेश की डिफेंस सिटी: जहां बनती है सेना के लिए व्हीकल्स, तोप, बम और गोले

जबलपुर  मध्य प्रदेश में स्थित जबलपुर को देश की प्रमुख डिफेंस सिटी के रूप में जाना जाता है. यह शहर भारतीय सेना की सामरिक जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाता है. जबलपुर में रक्षा क्षेत्र से जुड़ी चार बड़ी फैक्ट्रियां स्थापित हैं. जहां आर्मी के वाहनों के साथ-साथ तोप, बम, गोले और आधुनिक बंदूकें तैयार की जाती हैं. यहां बनने वाले हथियार और उपकरण देश की थलसेना की ताकत को मजबूत करते हैं. डिफेंस इंडस्ट्री की मौजूदगी के कारण जबलपुर न सिर्फ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यहां हजारों लोगों को रोजगार भी मिलता है. यही वजह है कि जबलपुर को भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता का एक मजबूत केंद्र माना जाता है।. भारत का एक इकलौता शहर जो ज्वालामुखी की गोद में है. चौंकिए नहीं! ऐसा इसलिए क्योंकि, इस शहर में एक या दो नहीं, बल्कि चार डिफेंस की फैक्ट्रियां हैं. यहां भारतीय सेना के अस्त्र-शस्त्र के साथ ही तोप, बारूद, कलपुर्जे से लेकर आर्मी व्हीकल तैयार किए जाते हैं.  अंग्रेजों के शासनकाल की यह फैक्ट्रियां बरसों पुरानी हैं. अंग्रेजों ने इन फैक्ट्री का निर्माण किया था. भारतीय सेना इन फैक्ट्रियों की बदौलत स्वदेशी हथियार बनाकर दुश्मनों के दांत खट्टे कर रही है. इन फैक्ट्री की ताकत इतनी है कि यह शहर की फैक्ट्रियां ही पाकिस्तान जैसे देश को आसानी से तबाह कर सकती हैं. जबलपुर की गन कैरिज फैक्ट्री में सारंग और धनुष जैसी तोपों का उत्पादन किया जाता है. इतना ही नहीं, लाइट फील्ड गन भी फैक्ट्री में बनाई जाती है. इस फैक्ट्री में गन के कलपुर्जे भी बनाए जाते हैं. यह फैक्ट्री 1904 की है, जिसकी शुरुआत अंग्रेजों ने की थी. सारंग तोप जो 32 किलोमीटर दूर तक हमला करने की क्षमता रखती है. जबलपुर की ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया 1942 में स्थापित की गई थी, जिन्हें अंग्रेजों ने बनाया था. ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया के बने बम से भारत-पाकिस्तान 1965 की लड़ाई हो या फिर बांग्लादेश सहित चीन की लड़ाई, हर जगह जबलपुर की फैक्ट्री के गोला-बारूद का इस्तेमाल हुआ. इतना ही नहीं, एयर स्ट्राइक में भी जो बम आतंकी अड्डों पर गिराए गए, वह खमरिया में ही बने थे. जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री, इंडियन आर्मी के हर व्हीकल को तैयार करती है. इसमें हैवी वाहन, स्टालिन, रसोई टैंकर, जनरेटर, बस, ट्रक जैसे व्हीकल शामिल है, जो भारतीय सेना को ताकत देते हैं. इतना ही नहीं lmv जैसे व्हीकल भी तैयार किए जाते हैं, जो मुश्किल रास्तों में भी दुश्मनों के छक्के छुड़ा देते हैं. यह व्हीकल बुलेट प्रूफ होते हैं. यह व्हीकल बुलेट प्रूफ होते हैं. ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया में गोला-बारूद जिन अस्त्र-शस्त्रों में भरे जाते हैं. यह कलपुर्जे जबलपुर की जीआईएफ फैक्ट्री में बनाए जाते हैं.जबलपुर शहर में सेंट्रल ऑर्डिनेंस डिपो, COD फैक्ट्री भी है जो भारतीय सेना के लिए गोला-बारूद और हथियारों के भंडारण करने का काम करती है. देशभर में ऑर्डिनेंस की 12 फैक्ट्रियां हैं, जिसमें से चार फैक्ट्रियां सिर्फ जबलपुर में ही हैं. इसलिए इसे डिफेंस सिटी के नाम से भी जाना जाता है.

साल 2026 में महंगे होंगे स्मार्टफोन, कीमतों में 8% की वृद्धि का अनुमान

मुंबई  साउथ कोरियन टेक कंपनी Samsung अपनी अगली फ्लैगशिप Galaxy S26 सीरीज को लॉन्च करने की तैयारी में है, लेकिन इससे पहले ही कंपनी ने स्मार्टफोन की कीमतों को लेकर एक अहम इशारा कर दिया है। Samsung Electronics के ग्लोबल को-CEO और मोबाइल बिजनेस हेड रोह ताए-मून ने साफ कहा है कि मौजूदा हालात पहले कभी नहीं आए हैं और ऐसे में सैमसंग स्मार्टफोन्स की कीमतों में बढ़ोतरी टालना मुश्किल हो सकता है। जो भी डिवाइस आप इस्तेमाल करते हैं साल 2026 में उनकी कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है. इसकी वजह से रैंडम एक्सेस मेमोरी (रैम) की कीमतों में तेजी आना. अक्तूबर 2025 के बाद से रैम की कीमत दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है. रैम का इस्तेमाल कंप्यूटर, स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी, यहां तक की मेडिकल डिवाइस में भी होता है. रैम की कीमतें बढ़ने की वजह एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जुड़े हुए डेटा सेंटर्स की ग्रोथ है. इन्हें ऑपरेट होने के लिए भी रैम की ज़रूरत होती है. इसके चलते डिमांड और सप्लाई में भारी गैप आ गया है और सभी को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है. 2026 में कम होगी स्मार्टफोन की बिक्री काउंटर प्वाइंट ने अनुमान लगाया है कि 2026 में स्मार्टफोन की बिक्री कम होगी और ग्लोबल शिपमेंट में 2.1 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह कंपोनेंट का महंगा होना है. कंपोनेंट महंगे होने के कारण कंपनियों को स्मार्टफोन बनाने की लागत ज्यादा आ रही है और इसका सीधा असर फोन की कीमत पर पड़ेगा, जो ग्राहकों को चुकानी होगी. सस्ते मॉडल्स पर सबसे ज्यादा असर लागत बढ़ने के सबसे ज्यादा असर 200 अमेरिकी डॉलर (लगभग 18,000 रुपये) से सस्ती कीमत वाले मॉडल्स पर पड़ेगा. काउंटर प्वाइंट का कहना है कि इस साल की शुरुआत से इन फोन को बनाने की लागत 20-30 प्रतिशत बढ़ चुकी है. ऐसे में अब कंपनियों के पास इनकी कीमत बढ़ाने के अलावा कोई और ऑप्शन नहीं बचा है. कीमत बढ़ाने पर बजट सेगमेंट वाले ग्राहक इन्हें खरीदेंगे नहीं. इसलिए कंपनियां अब सस्ते मॉडल लॉन्च करने से पीछे हट रही हैं. महंगे फोन पर भी असर बजट के साथ-साथ मिड-रेंज और प्रीमियम फोन भी बढ़ती लागत का असर पड़ा है और अब कंपनियों के लिए इन्हें बनाना 15-20 प्रतिशत महंगा पड़ रहा है. यहां लागत बढ़ने का बड़ा कारण मेमोरी चिप्स की कमी और आसमान छूते दाम है. एआई के चलते कंज्यूमर मेमोरी चिप्स का प्रोडक्शन कम हुआ है और 2026 की दूसरी छमाही तक इनके दाम 40 प्रतिशत तक और बढ़ सकते हैं. इसके चलते भी कंपनियों की लागत 8-15 प्रतिशत तक और बढ़ सकती है. टेक इवेंट CES 2026 से पहले ग्लोबल मीडिया से बातचीत में रोह ने माना कि सेमीकंडक्टर और मेमोरी चिप्स की लागत तेजी से बढ़ रही है, जिसका सीधा असर आने वाले प्रीमियम फोन्स की कीमत पर पड़ेगा। यानी Galaxy S26 सीरीज, Samsung के अब तक के सबसे महंगे स्मार्टफोन्स में से एक हो सकती है। ऐसा ही ट्रेंड इस साल अन्य स्मार्टफोन्स के साथ भी देखने को मिल सकता है। क्यों बढ़ सकती है Samsung फोन्स की कीमत? टेक इंडस्ट्री इस वक्त मेमोरी सप्लाई क्रंच से जूझ रही है। The Korea Herald की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में जनरल-पर्पज DRAM (8Gb DDR4) की कीमत 1.35 अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 9.30 अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई है। यह लगभग 7 गुना बढ़ोतरी है। DRAMeXchange के आंकड़ों के मुताबिक, AI इंफ्रास्ट्रक्चर की जबरदस्त मांग के कारण मेमोरी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर हैं। रोह ताए-मून ने कहा है, 'हम मेमोरी प्राइसिंग के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं', और इसका सीधा असर नए फोन्स की लागत पर पड़ने वाला है। Galaxy S26 सीरीज में क्या होगा खास? Galaxy S26 सीरीज, Samsung के लिए सिर्फ एक नया फोन नहीं बल्कि एक स्ट्रैटेजिक प्रोडक्ट होगी। इस सीरीज में कंपनी का अपना 2-नैनोमीटर Exynos 2600 चिपसेट देखने को मिलेगा, साथ ही Galaxy AI के तहत कई नए AI-पावर्ड फीचर्स भी पेश किए जाएंगे। यह फोन Samsung के वर्टिकली इंटीग्रेटेड मॉडल का असली टेस्ट भी होगा, जिसमें उसके सेमीकंडक्टर और फाउंड्री डिवीजन बड़ी भूमिका निभाते हैं। AI इकोसिस्टम को बढ़ाने की कोशिश Samsung हार्डवेयर के साथ-साथ अपने AI इकोसिस्टम को तेजी से बढ़ाने पर भी काम कर रहा है। कंपनी का दावा है कि वह 2026 के अंत तक Galaxy AI वाले डिवाइसेज की संख्या 400 मिलियन से बढ़ाकर 800 मिलियन करना चाहती है। फिलहाल Galaxy AI, Samsung की इन-हाउस टेक्नोलॉजी और Google के Gemini मॉडल के कॉम्बिनेशन पर चलता है, जिससे इमेज एडिटिंग, ऑन-डिवाइस ट्रांसलेशन जैसे फीचर्स मिलते हैं। इंटरनल सर्वे के मुताबिक, Galaxy यूजर्स में AI ब्रैंड अवेयरनेस 30 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत हो चुकी है। हालांकि, कंपनी यह भी सोच रही है कि भविष्य में कुछ प्रीमियम AI फीचर्स के लिए फीस ली जाए। अभी कोर फीचर्स मुफ्त रहेंगे, लेकिन कुछ एडवांस सुविधाएं पेड मॉडल में जा सकती हैं।

भारतीय परिवारों का 55% लोन खपत के लिए, संपत्ति सृजन में नहीं हो रही वृद्धि

इंदौर  भारतीय परिवारों पर कर्ज लगातार बढ़ रहा है। लोग लाइफस्टाइल खर्चों के लिए जमकर कर्ज ले रहे हैं। पर्सनल लोन अब मोबाइल पर एक क्लिक से ही मिल जाता है। नौकरीपेशा लोगों को बैंक प्री अप्रूव्ड पर्सनल लोन ऑफर कर देते हैं। कार लोन भी प्री-अप्रूव्ड ही मिल जाता है। लोन लेना आसान होन से लोगों पर कर्ज तेजी से बढ़ रहा है। कर्ज मार्च 2025 के आखिर तक बढ़कर, जीडीपी के 41.3% पर पहुंच गया है। यह 5 साल के औसत 38.3% से काफी ज्यादा है और पिछले तीन साल से लगातार बढ़ रहा है। खपत से जुड़ा कर्ज तेजी से बढ़ रहा परिवारों के कर्ज में हुई वृद्धि में खपत से जुड़े कर्ज ने अहम भूमिका निभाई है। यानी भारतीय परिवार संपत्ति सृजन के लिए नहीं, बल्कि अपनी दैनिक जरूरतें पूरी करने के लिए ज्यादातर कर्ज ले रहे हैं। RBI की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के अनुसार, कर्ज में बढ़ोतरी के बावजूद भारतीय लोगों पर कर्ज ज्यादातर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम है। भारतीय परिवारों की उधारी में ज्यादातर गैर-आवास खुदरा ऋण यानी क्रेडिट कार्ड कर्ज, पर्सनल लोन और ऑटो लोन आदि शामिल हैं। इन कर्जों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा परिवारों की कुल उधारी में पर्सनल लोन, ऑटो लोन और क्रेडिट कार्ड कर्ज की हिस्सेदारी 55.3% है। इसकी हिस्सेदारी पिछले 5 साल में लगातार बढ़ी है। 2020 में इसकी हिस्सेदारी 43% थी। खपत से लोन की वृद्धि दर लगातार होम लोन, कृषि और बिजनेस लोन को पीछे छोड़ रही है। यानी भारतीय परिवारों की ओर से लिए गए लोन में खपत के मकसद से लिए गए कर्ज का हिस्सा सबसे ज्यादा है। उसके बाद संपत्ति सृजन और उत्पादन के उद्देश्य का स्थान आता है। कुल कर्ज में होम लोन की हिस्सेदारी 28.6% और कृषि व बिजनेस लोन की हिस्सेदारी 16.1% है। क्या है ग्रॉस डिस्पोजेबल इनकम? ग्रॉस डिस्पोजेबल इनकम (GDI) का मतलब वह आय है, जो देश के निवासियों के पास सही मायने में खर्च करने या बचाने के लिए उपलब्ध है। कर्ज के साथ बचत भी बढ़ी रिपोर्ट में कहा गया है कि परिवारों की वित्तीय बचत वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में सुधर कर जीडीपी का 7.6%, हो गई है। लोगों को बढ़ती महंगाई से थोड़ी राहत मिलने के कारण भारतीय परिवारों की बचत में इजाफा हुआ है, जो 2022-23 में कई वर्षों के निचले स्तर पर आ गई थी। परिवारों की देनदारियां बढ़ने के बावजूद घरेलू सकल वित्तीय बचत बढ़कर 11.2% हो गई।