samacharsecretary.com

दिल्ली में छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से की मुलाकात

नई दिल्ली/ रायपुर आज दिल्ली प्रवास के दौरान विधानसभा अध्यक्ष माननीय डॉ रमन सिंह जी ने भाजपा के नव नियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष (राष्ट्रीय) और छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रभारी माननीय श्री  नितिन नबीन जी से आत्मीय मुलाकात कर उन्हें नव दायित्व के लिए मंगलकामनायें व्यक्त कीं। इस दौरान उन्होंने नितिन नबीन जी से विभिन्न विषयों पर सार्थक चर्चा कर उनको उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

5–6 करोड़ मिल जाएं तो… युवराज सिंह और वीरेंद्र सहवाग के मुकाबले कितने पीछे हैं मोहम्मद कैफ?

नई दिल्ली नेटफ्लिक्स ने 17 जनवरी को रिलीज होने वाले ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ का प्रोमो रिलीज किया है। इस प्रोमो को देख क्रिकेट फैंस खुशी से झूम उठे हैं, क्योंकि इस बार वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह और मोहम्मद कैफ जैसे दिग्गज जो इस शो पर ठहाके लगाने पहुंचे हैं। प्रोमो में कपिल शर्मा इन तीनों क्रिकेटर्स के साथ काफी मस्ती मजाक करते हुए नजर आ रहे हैं। प्रोमो में मोहम्मद कैफ खुद को युवराज सिंह और वीरेंद्र सहवाग से गरीब बताते हुए नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर यह दोनों यहां कपड़े झाड़ें तो 5-6 करोड़ वैसे ही गिर जाए। युवराज सिंह ने फिर मोहम्मद कैफ से एक ऐसा सवाल किया जिसका जवाब सुन वहां मौजूद सभी लोग हंसने लगे।   वीडियो की शुरुआत में कपिल शर्मा कहते हैं कि युवराज सिंह और वीरेंद्र सहवाग इतने चौके छक्क मारते थे कि चीयरलीडर्स दुआ कहती थीं कि राहुल द्रविड़ आएं तो हम थोड़ा रेस्ट कर सकें। इसके अलावा भी प्रोमो में काफी कुछ है। कपिल तीनों रिटायर्ड प्लेयर्स से पूछते हैं कि वो अब ज्यादा समय क्या करने में गुजारते हैं? तो युवराज ने कहा कि उनकी जिंदगी में आलस बढ़ गया है। वो गोल्फ खेलते हैं और अपने साथ बाकी प्लेयर्स को भी जुड़ने को कहते हैं. लेकिन कोई भी खेलने नहीं आता है। सहवाग इसके जवाब में कहते हैं कि वो खाने पर ध्यान लगाते हैं, वो गोल्फ खेलकर क्या कर लेंगे। प्रोमो में आगे तीनों अलग-अलग क्रिकेटर्स की नकल उतारकर सामने वाले को पहचान कराते हैं। इसमें युवराज हरभजन सिंह की एक्टिंग करते हैं। लेकिन कैफ समझ नहीं पाते, वो उनसे थोड़ी और अच्छी एक्टिंग करने के लिए कहते हैं। मगर युवराज भी इसका अच्छा बदला लेते हैं, जब कैफ की बारी आती है, तो वो भी उनसे क्रिकेटर की अच्छी एक्टिंग करने के लिए कहते हैं ताकि वो समझ पाएं।  

पीयूष गोयल का बड़ा बयान: देश में 2 लाख से अधिक स्टार्टअप रजिस्टर्ड, 21 लाख लोगों को मिला रोजगार

नई दिल्ली   देश में शुक्रवार को 'स्टार्टअप इंडिया' पहल को 10 साल पूरे हो चुके हैं। इस अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें देश के प्रमुख स्टार्टअप उद्यमियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि आज भारत में करीब 2 लाख स्टार्टअप रजिस्टर्ड हैं। इन स्टार्टअप्स के जरिए अब तक 21 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल चुका है। भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम लगातार मजबूत हो रहा है और देश की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभा रहा है। पीयूष गोयल ने आगे कहा कि भारतीय स्टार्टअप आज 50 से ज्यादा अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इनमें टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, एग्रीटेक, फिनटेक, ड्रोन टेक्नोलॉजी और डीप टेक जैसे क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पिछले बजट में सरकार ने 10 हजार करोड़ रुपए का 'फंड ऑफ फंड्स' घोषित किया था, जिसके जरिए हाई-टेक और डीप टेक स्टार्टअप्स को प्राथमिकता दी जा रही है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि देश के कुल स्टार्टअप्स में से करीब 50 प्रतिशत स्टार्टअप टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहे हैं, जो इस बात का सबूत है कि उद्यमिता अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने कहा कि कर्नाटक और तमिलनाडु अब ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग के बड़े केंद्र बनकर उभर रहे हैं। पीयूष गोयल के मुताबिक, दुनिया के 100 से ज्यादा देश भारत के साथ स्टार्टअप सेक्टर में साझेदारी करना चाहते हैं। सरकार इस दिशा में योजना बना रही है कि इन देशों के साथ सहयोग को कैसे आगे बढ़ाया जाए, ताकि भारतीय स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर पर और ज्यादा अवसर मिल सकें। इससे पहले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि 'स्टार्टअप इंडिया' क्रांति को एक दशक पूरा हो गया है। यह एक साहसिक कदम था, जिसने भारत को बड़ा सोचने और उससे भी बड़ा करने की ताकत दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस दूरदर्शी पहल की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण देश में डीपीआईआईटी द्वारा मान्यता प्राप्त 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स और उनके द्वारा पैदा किए गए 21 लाख से ज्यादा रोजगार हैं। पीयूष गोयल ने कहा कि इस सफलता को यह तथ्य और खास बनाता है कि इससे टियर-2 और टियर-3 शहरों में उद्यमिता की भावना को नई ऊर्जा मिली है और युवाओं व महिलाओं को सशक्त बनाया गया है। राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के अवसर पर उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों की यह यात्रा निरंतरता, समावेशिता और विकास को दर्शाती है, साथ ही भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के उज्ज्वल भविष्य का भरोसा भी देती है।

गडकरी करेंगे 4,400 करोड़ रुपये की 8 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री गडकरी करेंगे 4,400 करोड़ रूपये की 8 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का लोकार्पण–शिलान्यास म.प्र. में सड़क विकास को मिलेगा नया आयाम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि 17 जनवरी का दिन मध्यप्रदेश के लिए सौगात भरा होगा। इस दिन केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी विदिशा जिले में आयोजित कार्यक्रम में 4,400 करोड़ रूपये से अधिक लागत से निर्मित एवं प्रस्तावित 8 राष्ट्रीय राजमार्ग परियाजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 181 किलोमीटर लम्बी ये परियोजनाएँ मध्य भारत एवं बुंदेलखंड क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी को मजबूती प्रदान करेंगी और प्रदेश के सड़क एवं परिवहन अवसंरचना विकास की दिशा में एक ओर ऐतिहासिक अध्याय जुड़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश को मिल रही ये परियोजनाएं क्षेत्रीय विकास, औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार, आवागमन की सुगमता और आर्थिक प्रगति को नई गति प्रदान करेंगी। साथ ही सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने और कुशल, प्रशिक्षित चालकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में 3 आधुनिक ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर परियोजनाओं का भी शिलान्यास किया जाएगा। ये केंद्र सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने, सुरक्षित ड्राइविंग व्यवहार विकसित करने तथा युवाओं को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। बेहतर कनेक्टिविटी, कम यात्रा समय और सुरक्षित सड़कें इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से भोपाल–विदिशा–सागर–राहतगढ़–ब्यावरा सहित प्रमुख औद्योगिक, कृषि एवं पर्यटन मार्गों पर यातायात सुगम होगा। चार-लेन चौड़ीकरण से जहां यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी, वहीं ईंधन की बचत, प्रदूषण में कमी और सड़क सुरक्षा में वृद्धि सुनिश्चित होगी। कई खंडों पर ब्लैक स्पॉट सुधार, अंडरपास तथा ज्यामितीय सुधार किए गए हैं, जिससे दुर्घटनाओं के जोखिम में कमी आएगी। ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर: सड़क सुरक्षा की मजबूत नींव MoRTH की पहल के तहत विदिशा और सागर जिलों में प्रस्तावित 3 ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं से युक्त होंगे। IDTR एवं RDTC अवधारणा पर विकसित ये केंद्र सुरक्षित, अनुशासित और जिम्मेदार ड्राइविंग को प्रोत्साहित करेंगे, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी। इन तीनों सेंटर का शिलान्यास भी किया जायेगा। लोकार्पित होने वानी परियोजनाएँ 1. रातापानी वन्यजीव अभ्यारण्य क्षेत्र, अब्दुल्लागंज-इटारसी खंड 4-लेन चौड़ीकरण लंबाई 12 किमी लागत ₹418 करोड़ यह परियोजना ओबेदुल्लागंज-इटारसी-बैतूल कॉरिडोर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो बैतूल के माध्यम से नागपुर तक बेहतर सड़क संपर्क प्रदान करती है। पहले यह खंड दो-लेन का होने के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक प्रमुख बॉटलनेक बना हुआ था, जिससे भारी यातायात जाम की स्थिति उत्पन्न होती थी। चार-लेन चौड़ीकरण के बाद यातायात प्रवाह सुचारू होगा, जिससे लगभग 15–30 मिनट तक का यात्रा समय बचेगा तथा ईंधन की बचत और प्रदूषण में कमी आएगी। परियोजना के अंतर्गत वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए एनिमल अंडरपास एवं साउंड-प्रूफ कॉरिडोर का निर्माण किया गया है, जिससे टाइगर सहित अन्य वन्यजीवों को सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित होगी और मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी आएगी। 2 देहगांव–बम्होरी मार्ग का निर्माण कार्य लंबाई: 27 किमी लागतः ₹60 करोड़ CRIF के अंतर्गत देहगांव से बम्होरी तक 27 किमी लंबाई में सड़क निर्माण किया गया है। यह मार्ग रायसेन जिले को बाटेरा–सिलवानी–सागर मार्ग के माध्यम से सागर से जोड़ता है। परियोजना से किसानों को कृषि उत्पादों के सुरक्षित, तेज़ और सुगम परिवहन की सुविधा मिलेगी तथा मंडियों और बाजारों तक पहुंच आसान होगी। इसके साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित होगी, जिससे क्षेत्रीय सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। शिलान्यास होने वाली परियोजनाएँ 1. भोपाल-विदिशा खंड का 4-लेन चौड़ीकरण लंबाई 42 किमी लागत ₹1,041 करोड़ यह परियोजना भोपाल-कानपुर कॉरिडोर का एक प्रमुख हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मौजूदा मार्ग को हाई-कैपेसिटी नेशनल हाईवे मानकों के अनुरूप विकसित करना है। परियोजना से अंतर-जिला एवं अंतर-राज्यीय यातायात अधिक सुगम होगा तथा लंबी दूरी और माल ढुलाई ट्रैफिक की आवाजाही सुरक्षित एवं तेज़ बनेगी। इस मार्ग से रायसेन जिले में स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सांची तक बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। 2. विदिशा-ग्यारसपुर खंड का 4-लेन चौड़ीकरण लंबाई 29 किमी लागत ₹543 करोड़ इस परियोजना से विदिशा और आसपास के क्षेत्रों के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी। चौड़ीकरण और ज्यामितीय सुधारों से सड़क सुरक्षा एवं ड्राइविंग आराम में वृद्धि होगी। परियोजना से सांची जैसे ऐतिहासिक स्थलों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित होगी तथा विदिशा जिले के उच्च गुणवत्ता वाले गेहूं एवं अन्य कृषि उत्पादों के परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। 3. ग्यारसपुर-राहतगढ़ खंड का 4-लेन चौड़ीकरण लंबाई 36 किमी लागत ₹903 करोड़ यह खंड क्षेत्रीय एवं लंबी दूरी की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा। परियोजना से यात्रा समय में कमी, सड़क सुरक्षा में सुधार और माल ढुलाई को गति मिलेगी। व्यापार, लॉजिस्टिक गतिविधियों और स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलने से क्षेत्रीय आर्थिक विकास को मजबूती मिलेगी। 4 राहतगढ़-बेरखेड़ी खंड का 4-लेन चौड़ीकरण लंबाई: 10 किमी लागतः ₹731 करोड़ यह परियोजना राष्ट्रीय एवं अंतर-राज्यीय यातायात के लिए सड़क क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। चौड़ीकरण से यातायात सुचारू होगा और दुर्घटनाओं के जोखिम में कमी आएगी। इसके माध्यम से व्यापार, कृषि उत्पादों के परिवहन और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। 5. सागर वेस्टर्न बायपास (ग्रीनफील्ड) का 4-लेन निर्माण लंबाई 20.2 किमी लागत ₹688 करोड़ यह परियोजना NH-146 को सीधे NH-44 से जोड़ने के उद्देश्य से प्रस्तावित है, जिससे सागर शहर के भीतर से गुजरने वाले ट्रैफिक को बाहर डायवर्ट किया जा सकेगा। बायपास के निर्माण से यात्रा समय में लगभग 70% तक की कमी आएगी और लॉजिस्टिक दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा। शहरी ट्रैफिक जाम में कमी, ईंधन बचत और परिवहन लागत में कमी के साथ यह परियोजना क्षेत्रीय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगी। 6. भोपाल–ब्यावरा खंड पर 05 अंडरपास (LVUP/VUP) लंबाई 5 किमी लागत ₹122 करोड़ यह परियोजना ब्लैकस्पॉट सुधार के तहत विकसित की जा रही है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। अंडरपास निर्माण से हाईवे एवं स्थानीय मार्गों के बीच सुरक्षित और बाधारहित यातायात सुनिश्चित होगा। परियोजना से ग्रामीण-शहरी कनेक्टिविटी मजबूत होगी तथा व्यापार, कृषि और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।  

‘वर्क फ्रॉम होम करें ठाकरे भाई’— BMC चुनाव संकेतों पर शिवसेना की सियासी चुटकी

मुंबई बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की 227 वार्डों की मतगणना जारी है। अब तक के रुझानों के मुताबिक, बीएमसी में भाजपा गठबंधन 118 सीटों पर आगे चल रहा है। ठाकरे भाइयों को 69 सीटें मिलती दिख रही हैं। कांग्रेस को 12 सीटों पर बढ़त हासिल है। इस बीच, शिवसेना नेता शाइना एनसी ने महायुति की महाराष्ट्र नगर निकाय चुनावों में बड़ी जीत का भरोसा जताया है। शाइना ने विपक्षी पार्टी के बार-बार लगाए जाने वाले आरोपों पर सवाल उठाया और ठाकरे से स्क्रिप्ट बदलने की सलाह दी।   शिवसेना लीडर ने कहा, 'उद्धव ठाकरे को अपना स्क्रिप्ट राइटर बदलना चाहिए और कोई नया बहाना ढूंढना चाहिए। हार-जीत का फैसला जनता करती है। संदेश यह है कि जो लोग जमीन पर काम करते हैं, उन्हें मौका मिलता है। जो घर से काम करते हैं, उन्हें घर पर ही रहना पड़ता है।' उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के राज्य में किए गए प्रयासों को रेखांकित किया और शिवसेना (यूबीटी) पर राज्य के विकास में विफल रहने का आरोप लगाया। ठाकरे भाइयों पर कसा तंज महायुति के प्रदर्शन पर शाइना एनसी ने कहा, '25 सालों में उन्होंने कुछ नहीं किया। लेकिन हमारे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दो चरणों में गड्ढों की समस्या हल की। उन्होंने 26 भ्रष्ट ठेकेदारों को जेल भेजा। पिछली सरकार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी नहीं दे पाई। हमने समय पर 7 प्रदान किए। विकास के मामले में हमने 5000 इलेक्ट्रिक बसें, 435 किमी मेट्रो कनेक्टिविटी और पर्यावरण-अनुकूल पहल की हैं।' उन्होंने आगे कहा कि BMC चुनावों के लिए गठबंधन बनाने वाले ठाकरे भाइयों को वर्क फ्रॉम होम करना चाहिए और घर पर रहना चाहिए। वर्क फ्रॉम होम का तंज शाइना एनसी ने कहा कि जो लोग सोचते हैं कि घर बैठे काम हो सकता है, उनके लिए यह समय राजनीति और प्रदर्शन का है, न कि सिर्फ सरनेम के आधार पर वोट कमाने का। हमारे नेता एकनाथ शिंदे आम लोगों के प्रति समर्पित रहे और उनके लिए काम किया, जिससे उन्होंने उनका विश्वास जीता। 2017 के चुनावों में अविभाजित शिवसेना ने कुल 227 में से 84 सीटें जीती थीं। उस समय भाजपा के साथ गठबंधन में आधे से ज्यादा 114 सीटें हासिल की थीं, जिसमें भाजपा ने 82 सीटें जीतीं। अविभाजित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने 9 और कांग्रेस ने 31 सीटें जीती थीं। हाल ही में संपन्न बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव में मतदान प्रतिशत 52.94% रहा।

फ्लॉप रहा मुंबई कांग्रेस का शो, लेकिन सियासी गणित में उलझे ठाकरे और पवार

मुंबई   महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों के चुनाव परिणामों और रुझानों ने राज्य में शक्ति संतुलन के नए संकेत दिए हैं। जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एक बड़ी बढ़त के साथ सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है, वहीं कांग्रेस की स्थिति विरोधाभासों से भरी नजर आ रही है। कांग्रेस मुंबई जैसे बड़े महानगरों में तो संघर्ष कर रही है, लेकिन पूरे राज्य के आंकड़ों में वह ठाकरे और शरद पवार जैसे क्षेत्रीय दिग्गजों से काफी आगे निकल गई है। 29 नगर निगमों के अब तक के आंकड़ों के अनुसार, भाजपा 910 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना 213 और कांग्रेस के खाते में 171 सीटें जाती दिख रही हैं। कांग्रेस भले ही भाजपा से काफी पीछे है, लेकिन वह राज्य की तीसरी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है, जो ठाकरे और शरद पवार के गुटों के लिए चिंता का विषय है। हैरानी की बात यह है कि कांग्रेस के प्रभावशाली कुल आंकड़े में मुंबई (BMC) का योगदान न के बराबर है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और शिक्षा के केंद्र पुणे दोनों ही जगह कांग्रेस महज 5-5 सीटों पर बढ़त बना पाई है। पिंपरी-चिंचवाड़, वसई-विरार, उल्हासनगर, नांदेड़ वाघाला, जलगांव, अहिल्यानगर, धुले और कल्याण-डोंबिवली जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला है। मुख्यमंत्री शिंदे के गढ़ ठाणे में कांग्रेस सिर्फ 2 सीटों पर आगे है, जबकि नवी मुंबई में यह शून्य पर अटकी है। जहां कांग्रेस ने मारी बाजी भले ही भाजपा ने प्रमुख शहरों पर कब्जा किया हो, लेकिन कांग्रेस ने कुछ नगर निगमों में अपना परचम लहराया है। लातूर में कांग्रेस 21 वार्डों में बढ़त के साथ सबसे आगे है। अमरावती और चंद्रपुर, दोनों जगहों पर पार्टी 13 और 12 वार्डों के साथ शीर्ष पर है। भिवंडी निजामपुर में भी कांग्रेस 12 वार्डों के साथ अन्य दलों से आगे निकल गई है। इसके अलावा, नागपुर (22 वार्ड), कोल्हापुर (23 वार्ड) और अकोला (15 वार्ड) में कांग्रेस दूसरे स्थान पर मजबूती से खड़ी है। पवार और ठाकरे का गिरता ग्राफ चुनाव के रुझानों ने क्षेत्रीय क्षत्रपों के लिए कड़े संदेश दिए हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर की जंग में अजीत पवार अपने चाचा शरद पवार से कहीं अधिक मजबूत नजर आ रहे हैं। शरद पवार के गुट का प्रभाव अब कुछ ही क्षेत्रों तक सिमटता दिख रहा है। वहीं, उद्धव ठाकरे की शिवसेना मुंबई में तो एक मजबूत दावेदार है, लेकिन राज्य के अन्य हिस्सों में उनकी स्थिति कांग्रेस और एनसीपी (अजीत गुट) से भी नीचे चली गई है।  

अफगानिस्तान में भारत की एंट्री, कंगाल पाकिस्तान की दवा इंडस्ट्री को लगा बड़ा झटका

अफगानिस्तान अफगानिस्तान में इन दिनों एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फजल अफगान नाम के एक अफगान ब्लॉगर की कहानी इस बदलाव की गवाह है। फजल को सिरदर्द के लिए 'पारोल' (तुर्की का ब्रांड) खरीदना था जिसकी कीमत 40 अफगानी थी। लेकिन फार्मासिस्ट ने उन्हें भारत में बनी वही दवा महज 10 अफगानी में दे दी। फजल का कहना है कि भारतीय दवा न केवल चार गुना सस्ती थी, बल्कि उसका असर भी बहुत तेज रहा। यह केवल एक व्यक्ति का अनुभव नहीं है, बल्कि पूरे अफगानिस्तान में भारतीय दवाएं अब पाकिस्तानी दवाओं की जगह ले रही हैं। क्यों टूटा पाकिस्तान का वर्चस्व? दशकों से अफगानिस्तान अपनी बुनियादी चिकित्सा जरूरतों के लिए पाकिस्तान पर निर्भर था। वहां की लगभग 70-80% दवाएं पाकिस्तान से आती थीं। लेकिन अक्टूबर-नवंबर 2025 में दोनों देशों के बीच हुई हिंसक सीमा झड़पों के बाद स्थितियां बदल गईं। अफगानिस्तान के उप प्रधानमंत्री अब्दुल गनी बरादर ने घटिया गुणवत्ता का हवाला देते हुए पाकिस्तानी दवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। अफगान व्यापारियों को भारत, ईरान और मध्य एशिया से विकल्प तलाशने को कहा गया। तोरखम और चमन जैसे प्रमुख सीमा व्यापारिक रास्तों के बंद होने से पाकिस्तान से होने वाली सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई। संकट के समय का सच्चा साथी भारत जब अफगानिस्तान दवाओं की कमी से जूझ रहा था, तब भारत ने मानवीय आधार पर मदद का हाथ बढ़ाया। नवंबर 2025 में भारत ने 73 टन जीवन रक्षक दवाओं की खेप काबुल भेजी। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने 108 मिलियन डॉलर की दवाएं भेजी थीं, जबकि 2025 के अंतिम महीनों में ही यह आंकड़ा 100 मिलियन को पार कर गया। भारत केवल दवाएं ही नहीं भेज रहा, बल्कि वहां अस्पतालों का निर्माण भी कर रहा है। काबुल में इंदिरा गांधी चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल (400 बेड) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। जाइडस लाइफसाइंसेज का मेगा डील भारतीय फार्मा दिग्गज जाइडस लाइफसाइंसेज ने नवंबर 2025 में अफगानिस्तान के 'रोफी इंटरनेशनल ग्रुप' के साथ 100 मिलियन डॉलर का समझौता (MoU) किया है। इस समझौते के तहत भारत न केवल दवाएं निर्यात करेगा, बल्कि भविष्य में अफगानिस्तान में ही मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने के लिए तकनीक हस्तांतरण भी करेगा। इससे अफगानिस्तान की आयात पर निर्भरता कम होगी और वहां के लोगों को सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं मिल सकेंगी।  

महाभियोग मामले में झटका: जस्टिस यशवंत वर्मा की संसदीय कमेटी के खिलाफ अर्जी खारिज

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा को बड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने अधजली नकदी मामले में महाभियोग प्रस्ताव पर उनके खिलाफ आरोपों की जांच कर रहे संसदीय पैनल के खिलाफ उनकी याचिका खारिज कर दी है। इस याचिका में उन्होंने लोकसभा स्पीकर द्वारा उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए बनाई गई संसदीय समिति की वैधता को चुनौती दी थी।   जस्टिस वर्मा ने समिति के गठन पर यह कहते हुए सवाल उठाया था कि उन्हें हटाने का प्रस्ताव राज्यसभा के उपसभापति ने खारिज कर दिया था। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एससी शर्मा की बेंच ने 8 जनवरी, 2026 को इस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब कोर्ट ने इस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिससे संसदीय समिति को आगे बढ़ने की इजाजत मिल गई है। जजेज इन्क्वायरी एक्ट के तहत जांच समिति 16 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा की दायर याचिका पर सुनवाई करने का फैसला किया था। इस याचिका में लोकसभा स्पीकर के उस कदम को चुनौती दी गई थी जिसमें उन्होंने जजों (जांच) एक्ट के तहत "एकतरफा" तरीके से उनके खिलाफ जांच के लिए एक कमेटी बनाई थी। सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में जस्टिस वर्मा का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा था कि 1968 के एक्ट की धारा 3(2) के तहत कमेटी का गठन कानून द्वारा समान रूप से व्यवहार किए जाने और सुरक्षा पाने के उनके अधिकार का उल्लंघन करता है। उन्होंने तर्क दिया कि हालांकि संसद के दोनों सदनों में उसी दिन हटाने के प्रस्ताव के नोटिस दिए गए थे, लेकिन स्पीकर ने एकतरफा तरीके से कमेटी का गठन किया। पिछली सुनवाई पर यानी 8 जनवरी को अदालत ने इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। पिछले साल अगस्त में लोकसभा अध्यक्ष ने बनाई थी कमेटी बता दें कि अगस्त 2025 में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन में महाभियोग प्रस्ताव आने के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाले पैनल की घोषणा की थी। इस तीन सदस्यीय पैनल में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार, मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मनिंदर मोहन और सीनियर एडवोकेट बीवी आचार्य शामिल हैं। मामला क्या? यह पैनल जस्टिस वर्मा के आवास से भारी मात्रा में अधजली नोटों के मिलने के बाद उनके खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव के बाद गठित की गई थी।पिछले साल मार्च में, दिल्ली में जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास पर लगी भीषण आग के बाद, कैश के बंडल मिले थे, जिनमें से कुछ 1.5 फीट से भी ज़्यादा ऊंचे थे। तत्कालीन चीफ जस्टिस ने इस घटना का संज्ञान लिया था और जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया था।  

हरियाणा में 29 लाख संदिग्ध मतदाताओं की पहचान

चंडीगढ़. हरियाणा में विभिन्न स्थानों पर मतदाता सूचियों में 29 लाख ऐसे मतदाता मिले हैं, जिनमें पिता-पुत्र के नाम समान हैं। निर्वाचन विभाग ने इन संदिग्ध मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करने के लिए खंड स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) की ड्यूटी लगाई है। बीएलओ मतदाता सूची में दर्ज पते पर जाकर संबंधित मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच करेंगे। जांच में सही पाए गए लोगों का वोट बरकरार रहेगा, जबकि फर्जी मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर कर दिया जाएगा। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पिछले साल नवंबर में हरियाणा में 25 लाख फर्जी मतदाताओं के सहारे भाजपा पर सरकार बनाने के आरोप लगाए थे। इस दौरान उन्होंने एक ब्राजीलियन माडल की तस्वीर भी दिखाई, जिसका नाम सोनीपत के राई विधानसभा क्षेत्र के 10 बूथों पर वोटर लिस्ट में 22 जगह मौजूद था। इसके अलावा एक अन्य महिला की तस्वीर दिखाते हुए दावा किया कि यह फोटो हरियाणा में 100 स्थानों पर मतदाता सूचियों में अलग-अलग नामों से दर्ज है। इसके बाद निर्वाचन विभाग ने आरोपों की जांच कराई तो आरोप सही नहीं निकले। हालांकि इस दौरान मतदाता सूचियों में 29 लाख लोग जरूर सामने आए, जिनमें मतदाता और उनके पिता का नाम एक ही है। इसलिए इन मतदाताओं की जांच कराई जाएगी। एसआइआर की विधिवत घोषणा से पहले ही निर्वाचन विभाग अपनी तैयारियों में जुट गया है। करीब 21 हजार बीएलओ वर्ष 2002 के साथ वर्तमान मतदाता सूची का मिलान करने में जुटे हैं। प्रदेश में दो करोड़ सात लाख से अधिक मतदाता हैं, जिनमें से एक करोड़ 21 लाख (58 प्रतिशत) मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है। जिन मतदाताओं का नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, लेकिन उनके माता-पिता, दादा-दादी का नाम उस सूची में दर्ज है, उन्हें अलग से दस्तावेज देने की कोई जरूरत नहीं होगी। बाकी मतदाताओं को अपनी पहचान के सबूत देने होंगे, तभी उन्हें मत डालने का अधिकार मिल पाएगा

‘कुर्सी जाने का डर था, लेकिन मैंने इसे दायित्व समझकर किया…’, बोले PM मोदी

 नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि युवाओं की तरह उन्हें भी जोखिम लेना पसंद है. पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य को खतरे में डालकर निर्णय लिए हैं, क्योंकि ये फैसले देश हित में थे. दिल्ली के भारत मंडपम में नेशनल स्टार्ट अप डे पर युवाओं से संवाद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज हम स्टार्ट अप इंडिया के 10 साल पूरे होने का माइल स्टोन सेलिब्रेट कर रहे हैं. पीएम मोदी ने कहा कि भारत के युवाओं का फोकस देश की समस्याओं का समाधान करने पर है. सिर्फ 10 साल में स्टार्ट अप मीडिया मिशन एक क्रांति बन चुका है. भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट अप इको सिस्टम है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज जोखिम लेना जिंदगी की मुख्यधारा में शामिल हो चुका है. मंथली सैलेरी से आगे सोचने वालों को अब न सिर्फ एक्सेप्ट किया जाता है बल्कि उन्हें रिस्पेक्ट भी मिलता है. पीएम मोदी ने कहा कि याद कीजिए आज से 10 साल पहले हालत क्या थे. व्यक्तिगत प्रयास औऱ इनोवेशन के लिए बहुत गुंजाइश ही नहीं थे. हमने इसे चुनौती दी. हमने युवाओं को खुला आसामान दिया. आज नतीजा हमारे सामने है. 10 साल में ये क्रांति बन चुका है. युवाओं के रिस्क लेने की क्षमता का तारीफ करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि युवाओं की तरह उन्हें भी रिस्क लेना पसंद है. जोखिम लेने की प्रवृति की सराहना करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "साथियो रिस्क टेकिंग पर मैं खास तौर पर जोर देता रहा हूं, क्योंकि ये मेरी भी पुरानी आदत है, जो काम कोई करने के लिए कोई तैयार नहीं होता, जो काम दशकों से पहले की सरकारों ने नहीं छूए, क्योंकि उनमें चुनाव हारने का, कुर्सी जाने का डर था. जिन कामों के लिए लोग आकर कहते थे. ये बहुत पॉलिटिकल रिस्क है. मैं उन कार्यों को अपना दायित्व समझकर जरूर करता था." प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि, "आप की तरह ही मेरा भी मानना है जो काम देश के लिए जरूरी है उसे किसी न किसी को तो करना ही होगा, किसी न किसी को रिस्क लेना ही होगा. नुकसान होगा तो मेरा होगा. लेकिन अगर फायदा होगा तो मेरे देश के करोड़ों परिवार का होगा."  पीएम ने कहा कि पिछले 10 सालों में ऐसा इको सिस्टम तैयार हुआ है जो इनोवेशन को बढ़ावा देता है.  भविष्य के उद्यमियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत में सवा सौ एक्टिव यनिकॉर्न है. जबकि 2014 में इनकी संख्या मात्र 4 थी. आज के स्टार्ट अप यूनिकॉर्न बन रहे हैं. ये बेहद अच्छी खबर है. पीएम मोदी ने कहा कि मेरे देश का नौजवान आज कंफर्ट जोन में अपनी जिंदगी गुजारने को तैयार नहीं है, उसे घिसी पिटी जिंदगी पसंद नहीं है .