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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अफजाल अंसारी के रुख की सराहना की, बोले सांसद– समर्थन में हूं

नई दिल्ली ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गाजीपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद अफजाल अंसारी को एक पत्र भेजकर गाय की गरिमा और सुरक्षा का विषय उठाने के लिए साधुवाद दिया है। इस पर खुशी जताते हुए सांसद अफजाल अंसारी ने कहा है कि वह विभिन्न मंचों से इस मुद्दे को उठाते रहते हैं और समय आने पर संसद में भी उठाएंगे। सांसद ने कहा कि इस्लाम धर्म के मानने वालों की गाय के प्रति भावना के सवाल पर लोगों में गलत धारणा भर दी गई है। गाय का घी सभी के लिए बहुत मुफीद है, अमृत समान है। मुसलमानों के बारे में यह गलत प्रोपेगंडा है। इस देश में हिंदू धर्म की धार्मिक मान्यताओं को आहत करने की मुसलमानों की कभी मंशा नहीं रही।   सांसद अफजाल अंसारी ने कहा कि बचपन में जब हमें नजला हो जाता था तो मां गाय का पुराना घी मंगाकर छाती पर मल कर सेंक देती थी। यह सर्वोत्तम दवा मानी जाती थी। माना जाता था कि नजला और छाती की जकड़न ठीक हो जाएगी। सांसद ने ये बातें यू ट्यूब चैनल ‘बृजभूषण मारकंडेय’ से बातचीत के दौरान कहीं। अफजाल अंसारी ने कहा कि लोगों में गलत धारणा भर दी गई है कि मुसलमान गाय का मांस खाने के लिए आतुर है। ऐसा है नहीं और यदि कोई ऐसा सोचता है तो वह या तो अपने नबी की बातों को समझ ही नहीं पाया या पढ़ नहीं पाया या सुन नहीं पाया। सांसद ने कहा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने जब गोरक्षा के लिए कदम उठाया तो मुझे बहुत अच्छा लगा। गाजीपुर के सांसद ने कहा कि शंकराचार्य जी के इस अभियान का मैं समर्थक हूं। सार्वजनिक मंचों पर प्रशंसा करता हूं। समय आएगा तो संसद में भी बोलूंगा। गोरक्षा के लिए मुखर हैं शंकराचार्य बता दें कि ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद लंबे समय से गौ रक्षा के लिए मुखर हैं। वह गाय को राष्ट्र माता घोषित करने, गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और पूरे देश के लिए समान कानून बनाने की मांग करते हैं। अपनी इस मांग को लेकर उन्होंने 'गौ प्रतिष्ठा यात्रा' जैसे आंदोलन चलाए हैं। वह देश भर में गौ रक्षा के प्रति जन-जागृति लाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। इसके साथ ही वह राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने की अपील करते हैं। वह लोगों से गौ रक्षक उम्मीदवारों का समर्थन करने की अपील करते हैं।  

‘अब शांति मेरी जिम्मेदारी नहीं’ नोबेल पर भड़के ट्रंप, नॉर्वे PM को लिखा पत्र लीक

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर जुनून अब अपने अगले शिखर तक पहुंचता नजर आ रहा है। इस बार की नोबेल विजेता मचाडो ने भले ही उन्हें अपना नोबेल पदक सौंप दिया हो, लेकिन इसके बाद भी ट्रंप का नॉर्वे की नोबेल समिति को लेकर गुस्सा कम नहीं हुआ है। उन्होंने नॉर्वे के पीएम जोनास गहर स्टोरे को एक पत्र लिखकर कहा है कि अब, जबकि उन्हें नोबेल पुरस्कार नहीं दिया गया है, तो वह 'केवल शांति' के बारे में सोचने की जरूरत महसूस नहीं करते हैं।   रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्टोरे को लिखे एक पत्र में उन्हें नोबेल पुरस्कार न दिए जाने का जिक्र किया। इतना ही नहीं उन्होंने नोबेल समिति में नॉर्वे सरकार की भूमिका को अपनी विदेश नीति से भी जोड़ा। उन्होंने लिखा, "आपके देश ने मुझे 8 से अधिक युद्धों को रोकने के बावजूद नोबेल शांति पुरस्कार न देने का निर्णय लिया, इसलिए अब मुझे केवल शांति के बारे में सोचने की कोई बाध्यता महसूस नहीं होती, हालांकि शांति हमेशा सर्वोपरि रहेगी, लेकिन अब मैं इस बारे में सोच सकता हूं कि संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए क्या अच्छा और उचित है।" ट्रम्प ने आगे ग्रीनलैंड पर डेनमार्क की संप्रभुता पर सवाल उठाया और तर्क दिया कि न तो डेनमार्क और न ही मौजूदा सुरक्षा व्यवस्थाएं इस क्षेत्र को प्रमुख शक्तियों से बचा सकती हैं। उन्होंने कहा, "डेनमार्क अकेले चीन और रूस जैसी शक्तियों से ग्रीनलैंड की रक्षा नहीं कर सकता। वैसे भी उसके पास ग्रीनलैंड के स्वामित्व का कोई अधिकार क्यों है? उनके पास कोई लिखित दस्तावेज नहीं है। बस इतना है कि सैंकड़ों सालों पहले एक नाव ने वहां पड़ाव डाल लिया था, ऐसे तो हमारी भी सैकड़ों नावें वहां उतरती थीं।" अमेरिका के लिए कुछ करे नाटो नाटो में अमेरिका की भूमिका पर बात करते हुए ट्रंप ने दावा किया, "नाटो की स्थापना के बाद से अमेरिका ने किसी भी अन्य देश की तुलना में इसके लिए अधिक काम किया है, और अब नाटो को भी संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए कुछ करना चाहिए। जब तक ग्रीनलैंड पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण नहीं हो जाता, तब तक दुनिया सुरक्षित नहीं रहेगी।”  

तेंदूपत्ता संग्राहकों में खुशियों की लहर, छत्तीसगढ़ सरकार ने फिर शुरू की चरणपादुका योजना, 12.40 लाख वनवासियों को मिला लाभ

रायपुर तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को सरकार द्वारा कई योजनाओं के माध्यम से आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिलती है, जिसमें संग्रहण लाभ का 80% हिस्सा, बच्चों की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य सहायता, बीमा कवर (दुर्घटना मृत्यु या विकलांगता पर), और विभिन्न वनोपज पर न्यूनतम समर्थन मूल्य शामिल हैं, जिससे उनकी आय और जीवन स्तर में सुधार होता है l छत्तीसगढ़ में 5500 सौ रुपए प्रति मानक बोरा पारिश्रमिक और राजमोहिनी देवी योजना के तहत लाभ दिए जा रहे हैं l छत्तीसगढ़ सरकार ने वनवासियों और तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में एक बड़ा कदम उठाते हुए चरणपादुका योजना को पुनः शुरू किया है। पूर्ववर्ती सरकार द्वारा बंद की गई यह जनहितैषी योजना अब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और उनकी संवेदनशीलता के कारण फिर से शुरू की गई है। यह निर्णय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की "गारंटी" के अनुरूप गरीब हितैषी शासन की स्पष्ट तस्वीर पेश करता है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के कुशल मार्गदर्शन में वन विभाग ने इस योजना को तेज गति और पारदर्शिता के साथ धरातल पर लागू किया है। 12.40 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को लाभ  वितरित हुई उच्च गुणवत्ता की चरणपादुकाएं        वर्ष 2024-25 में प्रदेश के 12.40 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों की महिला मुखिया को उच्च गुणवत्ता वाली चरणपादुकाएं प्रदान की गईं। इसके लिए सरकार ने 40 करोड़ रुपये व्यय किए। इस कदम से जंगलों में कठिन परिस्थितियों में कार्य करने वाली महिलाओं को सुरक्षा और सुविधा दोनों मिली हैं। वर्ष 2026 में पुरुष संग्राहकों को भी मिलेगा लाभ            वन मंत्री श्री कश्यप के विशेष प्रयासों से सरकार ने इस योजना का विस्तार करते हुए वर्ष 2026 में पुरुष संग्राहकों को भी चरणपादुका प्रदान करने का निर्णय लिया है। इसके लिए 50 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। यह निर्णय संग्राहक परिवारों के लिए ऐतिहासिक और लाभकारी सिद्ध होगा। पारदर्शी प्रक्रिया — खरीदी जेम पोर्टल से                सरकार ने चरणपादुकाओं की खरीदी जेम पोर्टल के माध्यम से की है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त रहे। तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को वितरित की जा रही चरणपादुकाएं उच्च गुणवत्ता पूर्ण हैं और उन पर एक वर्ष की वारंटी भी दी जा रही है। यह सरकार की गुणवत्ता और लाभार्थी हितों के प्रति गंभीरता को दर्शाता है।           वनांचल क्षेत्रों में उमंग, सुरक्षा और सम्मान की भावना मजबूत मुख्यमंत्री श्री साय और वन मंत्री श्री कश्यप के इस निर्णय से वनांचल क्षेत्रों में खुशी और उत्साह का माहौल है। चरणपादुका योजना सीधे उन मेहनतकश तेंदूपत्ता संग्राहकों तक राहत पहुँचा रही है, जो कठिन परिस्थितियों में जंगलों में कार्य करते हैं और अपनी आजीविका जुटाते हैं।          यह योजना न केवल सुरक्षा और सुविधा प्रदान कर रही है, बल्कि वनवासियों को सम्मान और आत्मविश्वास भी दे रही है जो सुशासन और अंत्योदय की दिशा में राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल बन गई है।

आतंक के मुद्दे पर जयशंकर का कड़ा रुख, पोलैंड के डिप्टी पीएम को पाकिस्तान की सच्चाई बताई

नई दिल्ली भारत ने पोलैंड को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि सीमा पार आतंकवाद के मामले में वह सीधे या अप्रत्यक्ष तरीके से पाकिस्तान का समर्थन ना करे। इसके अलावा विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूस के साथ व्यापारिक संबंध बनाए रखने पर भी गलत तरीके से निशाना बनाए जाने को लेकर गहरी चिंता जताई है। बता दें कि पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री राडोस्लॉ सिकोर्सकी इन दिनों भारत की यात्रा पर हैं। पड़ोस के आतंकियों की सहायता बंद करें विदेश मंत्री डा. एस जयशंकर ने पोलैंड से आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने की नीति अपनाने का आग्रह करते हुए कहा है कि उसे भारत के पड़ोस में आतंकवादी ढांचों को किसी भी प्रकार से सहायता नहीं देनी चाहिए। डा. जयशंकर ने भारत यात्रा पर आये पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की के साथ सोमवार को यहां वार्ता के दौरान शुरुआती बयान में कहा कि पोलैंड इस क्षेत्र के लिए कोई अजनबी नहीं हैं और वह सीमा-पार आतंकवाद की लंबे समय से चली आ रही चुनौती से भली-भांति परिचित हैं। उन्होंने कहा कि पोलैंड को आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति अपनानी चाहिए और हमारे पड़ोस में आतंकवादी ढांचे को किसी भी प्रकार से सहायता नहीं करनी चाहिए। विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों पक्षों की बातचीत में क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर चर्चा स्वाभाविक रूप से शामिल होगी। विशेष रूप से अपने-अपने पड़ोस के संबंध में आकलनों का आदान-प्रदान उपयोगी रहेगा। उन्होंने कहा कि वह यूक्रेन संघर्ष और उसके प्रभावों पर भारत के विचार पहले भी स्पष्ट रूप से साझा कर चुके हैं और उन्होंने जोर देकर कहा है कि चुनकर भारत को निशाना बनाना न केवल अनुचित बल्कि अन्यायपूर्ण भी है। विदेश मंत्री ने कहा कि वह आज एक बार फिर इस बात को दोहरा रहे हैं। दोनों की हैं अलग-अलग चुनौतियां विदेश मंत्री ने कहा कि यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया में काफी उथल-पुथल है। उन्होंने कहा कि भारत और पोलैंड अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित हैं जिनकी अपनी-अपनी चुनौतियां और अवसर हैं इसे देखते हुए विचारों और दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान करना स्वाभाविक रूप से उपयोगी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध भी निरंतर प्रगति कर रहे हैं लेकिन इन पर निरंतर ध्यान दिए जाने की जरूरत है। भारत और पोलैंड के बीच परंपरागत रूप से गर्मजोशीपूर्ण और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। हाल के वर्षों में ये संबंध उच्च-स्तरीय राजनीतिक आदान-प्रदान तथा सशक्त आर्थिक और लोगों के बीच संपर्कों से आगे बढकर मजबूत हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्ष 2024 की पोलैंड यात्रा के दौरान संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया। डा. जयशंकर ने कहा कि दोनों देश बातचीत के दौरान 2024 से 28 तक कार्ययोजना की समीक्षा करेंगे जिसके माध्यम से हम अपनी रणनीतिक साझेदारी की पूरी क्षमता को साकार करना चाहते हैं। इसके अलावा व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों तथा डिजिटल नवाचार में सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा करेंगे। विदेश मंत्री ने कहा कि पोलैंड मध्य यूरोप में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है और दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 7 अरब डॉलर है जिसमें पिछले एक दशक में लगभग 200 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। पोलैंड में भारतीय निवेश तीन अरब डॉलर से अधिक हो चुका है, जिससे पोलैंड के नागरिकों के लिए रोजगार के अनेक अवसर सृजित हुए हैं। भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, बड़े बाजार का आकार और निवेश-अनुकूल नीतियाँ वहां के व्यवसायों के लिए अपार अवसर प्रदान करती हैं। रूस से व्यापारिक संबंधों को लेकर निशाना बनाना ठीक नहीं भारत ने रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच, मॉस्को के साथ व्यापारिक संबंधों को लेकर नई दिल्ली को "चुनिंदा और अनुचित तरीके से निशाना बनाए जाने" पर पोलैंड के समक्ष गहरी चिंता व्यक्त की है। यह निशाना टैरिफ और अन्य दबावकारी हथकंडों के माध्यम से साधा जा रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वारसॉ को सीमा पार आतंकवाद से संबंधित मामलों में पाकिस्तान को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी प्रकार का समर्थन न देने की कड़ी चेतावनी दी है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जन-हितैषी पहल, ‘मिशन कनेक्ट’ से चौपाल तक पहुँचा प्रशासन

गाँव-गाँव जाकर अधिकारियों ने सुनी समस्याएँ, मौके पर हुआ समाधान रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अंत्योदय और सुशासन की सोच को साकार करने के लिए सुकमा जिले में 'मिशन कनेक्ट' की शुरुआत की गई है। संभागायुक्त बस्तर श्री डोमन सिंह के निर्देशन और कलेक्टर के मार्गदर्शन में शुरू हुए इस अभियान का उद्देश्य प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को खत्म कर सरकारी सेवाओं को लोगों के घर-घर तक पहुँचाना है। गाँव-गाँव पहुँचे अधिकारी, मौके पर हुआ समाधान          विगत दिनों मिशन कनेक्ट के तहत छिंदगढ़ विकासखंड की लगभग 60 पंचायतों में जिला स्तरीय अधिकारी पहुँचे। यह केवल निरीक्षण नहीं था, बल्कि ग्रामीणों की समस्याओं को समझकर मौके पर उनका समाधान करने की एक नई पहल थी। सुबह 10 बजे से ही अधिकारी स्कूलों, आंगनबाड़ियों, आश्रम-छात्रावासों, ग्राम पंचायतों और स्वास्थ्य केंद्रों में सक्रिय दिखाई दिए। गुणवत्ता और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान            निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मध्यान्ह भोजन और पूरक पोषण आहार की गुणवत्ता की स्वयं जांच की। स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों की उपलब्धता, स्वच्छता और अन्य व्यवस्थाओं की गंभीरता से जाँच की गई। ग्राम पंचायतों में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता की भी समीक्षा की गई, ताकि सरकारी राशि का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके। अधिकारियों ने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएँ और सुझाव सुने, जिससे शासन और जनता के बीच विश्वास और मजबूत हुआ। कलेक्टर और सीईओ ने की विस्तृत समीक्षा           निरीक्षण के बाद जनपद पंचायत छिंदगढ़ में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर श्री अमित कुमार और जिला पंचायत सीईओ ने सभी पंचायतों की रिपोर्ट का गहन विश्लेषण किया। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिला स्तर की समस्याओं का समाधान तुरंत किया जाए, जबकि राज्य स्तर के विषयों को संबंधित विभागों को तत्काल भेजा जाए। कलेक्टर श्री अमित कुमार ने बताया कि मिशन कनेक्ट का उद्देश्य केवल निरीक्षण करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि शासन की सभी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। प्रशासन को अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाना हमारी प्राथमिकता है।         सुशासन की ओर मजबूत कदम 'मिशन कनेक्ट' ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि अब योजनाएँ सिर्फ कागजों पर नहीं रहेंगी, बल्कि वास्तव में ग्रामीणों के जीवन में बदलाव लाएँगी। अधिकारियों की सक्रियता से क्षेत्र में लोगों में उत्साह और भरोसा बढ़ा है।

आरसीपी सिंह पर ललन सिंह की दो-टूक: बोले– जेडीयू अपने दम पर मजबूत, प्रशांत किशोर पर भी खुलकर हमला

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष आरसीपी सिंह की वापसी की अटकलें जोरों पर हैं। हालांकि, जदयू के वरीय नेता एवं केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने इन अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने दो-टूक जवाब देते हुए कहा कि जेडीयू को अब आरसीपी सिंह की जरूरत नहीं है। उन्होंने जन सुराज पार्टी के चीफ प्रशांत किशोर की जेडीयू में वापसी की संभावनाओं पर भी प्रतिक्रिया दी।   केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने रविवार को कहा कि प्रशांत किशोर और आरसीपी सिंह की जदयू में वापसी की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा, “इन दोनों नेताओं को जनता ने खारिज कर दिया है और अब बिहार की राजनीति में उनका कोई स्थान नहीं है। पिछले बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पीके ने भविष्यवाणी की थी कि जदयू केवल 25 सीटों पर सिमट जाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया था कि नीतीश कुमार की मुख्यमंत्री के रूप में यह आखिरी राजनीतिक पारी होगी।” जदयू नेता ने सवाल किया कि प्रशांत किशोर के उन दावों और भविष्यवाणियों का क्या हुआ? ललन सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बीते बिहार चुनाव में जदयू की सीटें 42 से बढ़कर 85 हो गईं। वह फिर से मुख्यमंत्री भी बन गए हैं। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद किशोर की राजनीतिक हैसियत अब कुछ भी नहीं है। बता दें कि हालिया चुनाव में जन सुराज पार्टी की करारी हार मिलने के बाद पीके के जेडीयू में लौटने की अटकलें राजनीतिक गलियारों में लगाई जा रही थीं। इसी सवाल का जवाब देते हुए ललन सिंह ने ये बातें कहीं। उन्होंने पीके की पार्टी के नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह की पार्टी में वापसी की संभावनाओं को भी खारिज किया। ललन सिंह ने कहा कि आरसीपी के जेडीयू का अध्यक्ष रहते 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी की सीटें 71 से घटकर 42 रह गई थीं। ऐसे लोगों की अब पार्टी में कोई जरूरत नहीं है। दरअसल, आरसीपी सिंह ने हाल ही में मीडिया से बातचीत में कहा था कि वह और नीतीश कुमार कभी अलग नहीं हुए। उन्होंने कहा था कि नौकरशाही के अपने करियर और बाद में राजनीति में भी वे और नीतीश हमेशा एक ही पन्ने पर रहे हैं और दोनों एक-दूसरे को बहुत अच्छे से जानते और समझते हैं। आरसीपी 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जन सुराज पार्टी में शामिल हो गए थे। उन्होंने जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर की सराहना की थी और कहा था कि व्यवस्था और राजनीतिक परिदृश्य को बदलने का उनका प्रयास बिहार की राजनीति में बड़े अच्छे परिणाम देगा। मगर अब उनके जन सुराज छोड़ने की चर्चा चल रही है।

डॉ. चिन्मय पण्ड्या: शिक्षा केवल ज्ञान नहीं, चेतना और समझ का प्रकाश है

हरिद्वार हरिद्वार स्थित जीवन विद्या आलोक केन्द्र देवसंस्कृति विश्वविद्यालय का सातवां समावर्तन समारोह गंगा तट पर आध्यात्मिक संतों, देसंविवि के प्रतिकुलपति व विदेशी विशिष्ट मेहमानों के सानिध्य में सम्पन्न हुआ। समारोह का शुभारंभ राष्ट्रगान व देसंविवि के कुलगीत के साथ हुआ। समावर्तन समारोह के मुख्य अतिथि जूना अखाड़ा के पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी ने कहा कि गायत्री परिवार ने बीते दशकों में युग चेतना को जगाने का ऐतिहासिक कार्य किया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग के अधिकार एवं कर्त्तव्यो के प्रति जाग्रत करने वाला एक व्यापक सांस्कृतिक अभियान है। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार ने नर-नारी समानता को व्यवहार में उतारते हुए महिलाओं को आत्मसम्मान, शिक्षा और नेतृत्व का अवसर प्रदान कर रहा है। साथ ही छुआछूत जैसी सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन, समाज में एकता-समता की भावना के विस्तार तथा मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना में भी इसकी भूमिका अत्यंत प्रभावशाली रही है। उन्होंने कहा कि आज जब समाज अनेक प्रकार की चुनौतियों से गुजर रहा है, तब गायत्री परिवार द्वारा दिया गया यह विचार-दर्शन नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो रहा है। इस अवसर पर समारोह के अध्यक्ष देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि “आज की शिक्षा का लक्ष्य केवल बाहर की चुनौतियों से जूझना नहीं, बल्कि भीतर की सुप्त चेतना को जगाना है। बाहर की आग को बुझाना और अंदर की आग-सेवा, सद्भाव और राष्ट्रभाव को प्रज्वलित करना ही सच्ची दीक्षा है।” उन्होंने कहा कि यह उपाधि एक परिवर्तनकारी यात्रा का आरंभ है, ऐसी यात्रा जो चेतना के मार्ग को रूपांतरण के मार्ग में परिवर्तित करती है। यदि युवा अपनी शिक्षा को सेवा, संस्कार और साधना से जोड़ दें, तो वे न केवल अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं, बल्कि राष्ट्र और मानवता के उत्थान में भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब चिंतन, चरित्र और व्यक्तित्व ऊपर की ओर उठना प्रारंभ करते हैं, तभी व्यक्ति अपने जीवन को सही दिशा देने में सक्षम होता है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य मानवीय चेतना का विकास और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का बोध कराना है। यह दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के लिए एक नई शुरुआत, नई जिम्मेदारी और नए संकल्प का प्रतीक बनकर सामने आया, जहाँ शिक्षा को जीवन निर्माण की प्रक्रिया के रूप में देखने का संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर आया। इस दौरान हाउस आफ लार्ड लंदन के सदस्य लार्ड कृष रावल ने कहा कि देसंविवि शैक्षणिक संस्थान के साथ ही एक आध्यात्मिक सांस्कृतिक अभियान के रूप में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शानदार कार्य किया है। हाउस आफ लार्ड लंदन के सदस्य लार्ड मेंल्डसन ने कहा कि लंदन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने सम्पूर्ण गायत्री परिवार अपनी शुभेच्छा भेजी है। इस अवसर पर शांतिकंुज व्यवस्थापक योगेन्द्र गिरि, स्वामी राम हिमालयन विवि के विवि कुलपति डॉ विजय धस्माना, डॉ अजय तिवारी, डॉ फिरोज मिस्त्री, डॉ जहान मिस्त्री, डॉ शोभित माथुर, डॉ दिनेश शास्त्री, डॉ सतीश कुमार शर्मा, पौलैण्ड स्थित भारत के राजदूत कार्तिकेय जौहरी सहित विश्व के 20 से अधिक देशों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। प्रतिकुलपति ने अतिथियों को रुद्राक्ष की माला, युग साहित्य आदि भेंटकर सम्मानित किया।

अमिताभ जैन मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त, अग्रवाल और मिश्रा ने भी ली शपथ

रायपुर, राज्यपाल रमेन डेका ने आज यहां लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में आयोजित समारोह में छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के नवनियुक्त मुख्य सूचना आयुक्त अमिताभ जैन एवं राज्य सूचना आयुक्त उमेश कुमार अग्रवाल एवं शिरीष चंद्र मिश्रा को राज्य सूचना आयुक्त के पद की शपथ दिलाई। मुख्य सचिव विकास शील ने शपथ प्रक्रिया पूर्ण कराई। शपथ ग्रहण समारोह में राजस्व, खेल एवं युवा कल्याण, आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, और अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, विधायक पुरंदर मिश्रा, पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर.प्रसन्ना, मुख्यमंत्री के सचिव सुबोध सिंह, राज्य शासन के विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिव एवं सचिव, छत्तीसगढ़ मानव अधिकार आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरिधारी नायक, राज्य सूचना आयोग के आयुक्त आलोक चंद्रवंशी, राज्य सूचना आयोग के पूर्व आयुक्त मनोज त्रिवेदी, अशोक अग्रवाल, धनवेंद्र जयसवाल, राज्य सूचना आयोग के सचिव नीलम नागदेव एक्का सहित गणमान्य नागरिक एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे। ज्ञात हो कि नवनियुक्त मुख्य सूचना आयुक्त अमिताभ जैन सेवानिवृत्त आईएएस पूर्व मुख्य सचिव रहे हैं। राज्य सूचना आयुक्त उमेश अग्रवाल सेवानिवृत्त आईएएस हैं तथा शिरीष चंद्र मिश्रा पत्रकारिता से जुड़े हुए है।  

अयोध्या के बाद अब बंगाल! भव्य राम मंदिर और भाजपा कनेक्शन पर सियासी हलचल

कोलकाता ममता बनर्जी की अध्यक्षता वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) शासित राज्य पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं लेकिन उससे पहले वहां मंदिर-मस्जिद के बहाने ध्रुवीकरण की कोशिशें तेज हो गई हैं। पिछले महीने तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने राज्य के मुर्शीदाबाद जिले के बेलदांगा में 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद का शिलान्यास किया था। उसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद दुर्गा आंगन और महाकाल मंदिर का शिलान्यास किया और अब नादिया जिले के शांतिपुर में ‘बंगाली राम’ थीम पर भव्य राम मंदिर बनाने की योजना सामने आई है, जो इन दिनों चुनावी राज्य में चर्चा का विषय बनी हुई है।   क्या है ‘बंगाली राम मंदिर’ की योजना? यह मंदिर सिर्फ पूजा-पाठ का स्थल नहीं होगा, बल्कि बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को समर्पित एक बड़ा केंद्र बनेगा। मंदिर की अवधारणा 15वीं शताब्दी के प्रसिद्ध कवि कृतिबास ओझा की परंपरा पर आधारित है। कृतिबास ओझा ने ही संस्कृत रामायण का बंगला अनुवाद ‘श्रीराम पंचाली’ लिखा था, जिसे आज भी बंगाल के घर-घर में पढ़ा जाता है। इसी वजह से भगवान राम के इस रूप को ‘बंगाली राम’ या ‘हरा राम’ कहा जाता है। कौन बना रहा है मंदिर? रिपोर्ट के मुताबिक, इस मंदिर का निर्माण श्री कृतिबास राम मंदिर ट्रस्ट करवा रहा है। यह ट्रस्ट 2017 से ही इस परियोजना पर काम कर रहा है। रविवार को ट्रस्ट ने इस बात की जानकारी दी है कि मंदिर के लिए जमीन का अंतिम सर्वे पूरा कर लिया गया है। इसे परियोजना की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है। भाजपा से क्या कनेक्शन? इस ट्रस्ट के अध्यक्ष और शांतिपुर के पूर्व तृणमूल विधायक अरिंदम भट्टाचार्य हैं, जो अब भाजपा में हैं। हालांकि, उनका कहना है कि यह कोई चुनावी परियोजना नहीं है। उन्होंने बताया कि शांतिपुर भक्ति आंदोलन की धरती रही है और कृतिबास ओझा ने राम को बंगाली संस्कृति से जोड़ा। इसी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए यहां भव्य राम मंदिर के निर्माण की योजना बनाई गई है, जो निर्माण के शुरुआती दौर में पहुंच चुका है। कितनी जमीन और कितनी लागत? उन्होंने बताया है कि इस मंदिर के लिए 15 बीघा जमीन स्थानीय निवासी लितन भट्टाचार्य और पूजा बनर्जी ने दान की है। इस परियोजना को करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से साल 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह मंदिर परिसर में केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि एक ऐसा केंद्र होगा, जहां सांस्कृतिक केंद्र, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज और शोध केंद्र भी होंगे। नेपाल के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर से जुड़े वैदिक विद्वान अर्जुन दासतुला को इस मंदिर का संरक्षक बनाया गया है। क्यों उठ रहे हैं सवाल? स्थानीय निवासियों का कहना है कि शांतिपुर का संबंध कृतिबास ओझा की रामायण से जुड़ा है, इसलिए यहां राम मंदिर बनना चाहिए। कई लोग आगे भी जमीन दान करने की इच्छा जता रहे हैं लेकिन कुछ लोग इसकी टाइमिंग पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि मंदिर निर्माण ऐसे समय में सामने आया है जब बंगाल में मंदिर-मस्जिद की राजनीति तेज है, लेकिन ट्रस्ट का कहना है कि इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है और यह पूरी तरह धार्मिक और सांस्कृतिक परियोजना है। शांतिपुर का ऐतिहासिक महत्व वहीं, अरिंदम भट्टाचार्य ने कहा कि अगर सरकार सहयोग करना चाहे तो उसका स्वागत किया जाएगा। हुगली नदी के तट पर स्थित शांतिपुर भक्ति आंदोलन, चैतन्य महाप्रभु की परंपरा और कीर्तन संस्कृति का प्रमुख केंद्र रहा है। ऐसे में ‘बंगाली राम मंदिर’ इस क्षेत्र को एक नई धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान दे सकता है।  

सेनेगल ने मोरक्को को हराकर अफ्रीका कप जीता

रबात (मोरक्को) सेनेगल ने पेप गुये के अतिरिक्त समय में किए गए गोल की मदद से मेजबान मोरक्को को 1-0 से हराकर अफ्रीका कप ऑफ नेशंस फुटबॉल टूर्नामेंट का खिताब जीता। बेहद तनावपूर्ण परिस्थितियों में खेले गए फाइनल में दोनों टीम निर्धारित समय तक गोल नहीं कर पाई थी लेकिन आखिर में पेप गुये निर्णायक गोल करने में सफल रहे। फाइनल मैच में तनाव काफी बढ़ गया था। मैच के दौरान ऐसा समय भी आया जब दर्शकों ने मैदान पर घुसने की कोशिश की। यही नहीं सेनेगल के खिलाड़ी दूसरे हाफ के स्टॉपेज टाइम में पेनल्टी के फैसले के विरोध में मैदान से बाहर चले गए थे। ⁠ यह स्पष्ट नहीं था कि खेल जारी रह पाएगा या नहीं क्योंकि प्रशंसक सुरक्षाकर्मियों से भिड़ गए थे। इसके कारण 14 मिनट तक खेल नहीं हो पाया था। खेल शुरू होने पर सेनेगल के एडुआर्ड मेंडी ने ब्राहिम डियाज़ की पेनल्टी को आसानी से बचा लिया। इसके बाद गुये ने अतिरिक्त समय के चौथे मिनट में विजयी गोल दागा। मोरक्को की पराजय के कारण 69,500 दर्शकों की क्षमता वाला प्रिंस मौले अब्देललाह स्टेडियम अंतिम सीटी बजते ही खाली होने लग गया था। सेनेगल के खिलाड़ियों को ट्रॉफी उठाते हुए देखने के लिए बहुत कम लोग बचे थे। सेनेगल ने दूसरी बार अफ्रीका कप जीता। इससे पहले वह 2021 में चैंपियन बना था।