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भारत का ₹26,000 करोड़ का गेमचेंजर प्लान: न ब्रह्मोस, न राफेल, फिर भी चीन-पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ेंगी

बेंगलुरु  भारत ग्‍लोबल सिक्‍योरिटी कंडीशंस को देखते हुए अपने डिफेंस सिस्‍टम को मजबूत करने के साथ ही उसे कटिंग एज टेक्‍नोलॉजी की मदद से अपडेट करने में जुटा है. खासकर एरियल थ्रेट से निपटने के लिए हजारों-लाखों करोड रुपये का निवेश किया जा रहा है. एक तरफ जहां ब्रह्मोस और 5th जेनरेशन फाइटर जेट पर फोकस किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ एयर डिफेंस सिस्‍टम पर भी गंभीरता से ध्‍यान दिया जा रहा है. अब भारत एक और सेगमेंट में काम कर रहा है. दुश्‍मनों की हर गतिविधि पर बाज से पैनी नजर रखने के लिए स्‍पेस में स्‍पाई सैटेलाइट स्‍थापित करने की योजना पर काम किया जा रहा है. भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को अंतरिक्ष के मोर्चे पर नई ऊंचाइयों तक ले जाने की तैयारी में है. सरकार ने ₹26,000 करोड़ की लागत से 52 अत्याधुनिक सैन्य निगरानी सैटेलाइट का विशाल बेड़ा तैनात करने की योजना बनाई है, जिसे ‘स्पेस-बेस्ड सर्विलांस फेज-III’ प्रोग्राम के तहत 2029 तक पूरा किया जाएगा. यह अब तक का भारत का सबसे बड़ा सैन्य अंतरिक्ष निवेश माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य देश की सीमाओं और समुद्री क्षेत्रों की चौबीसों घंटे निगरानी को मजबूत करना है. इस सैटेलाइट ग्रुप की सबसे बड़ी विशेषता इसकी नाइट-विजन और ऑल-वेदर निगरानी क्षमता है. इनमें लगे अत्याधुनिक इंफ्रारेड सेंसर रात के अंधेरे, बादलों और खराब मौसम के बावजूद जमीन पर गतिविधियों की स्पष्ट तस्वीर देने में सक्षम होंगे. इससे भारत को पहली बार ऐसी निर्बाध निगरानी मिलेगी, जो दिन-रात और हर मौसम में लगातार जारी रह सकेगी. यह तकनीक खास तौर पर सीमावर्ती इलाकों और समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को नई धार देगी. ‘इंडियन डिफेंस न्‍यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, इन सैटेलाइट्स में इंफ्रारेड सेंसर के साथ-साथ इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल कैमरे और सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) भी लगाए जाएंगे. यह मल्टी-सेंसर व्यवस्था अलग-अलग परिस्थितियों में हाई क्‍वालिटी की इमेजरी और डेटा उपलब्ध कराएगी. इससे किसी क्षेत्र पर बार-बार नजर रखने का समय अंतराल घटेगा और सेना को ज्यादा तेजी से खुफिया जानकारी मिल सकेगी. सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि कम री-विजिट टाइम का मतलब है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल प्रतिक्रिया संभव हो सकेगी. कब लॉन्‍च होगी पहली सैटेलाइट? योजना के अनुसार, इस बेड़े का पहला उपग्रह अप्रैल 2026 तक लॉन्च किया जाएगा और अगले तीन वर्षों में पूरी प्रणाली तैनात कर दी जाएगी. ये उपग्रह अलग-अलग कक्षाओं में काम करेंगे – लो-अर्थ ऑर्बिट से लेकर जियोस्टेशनरी ऑर्बिट तक. लो-अर्थ ऑर्बिट उपग्रह हाई रेजोल्यूशन और लगातार पास देने में मदद करेंगे, जबकि जियोस्टेशनरी सैटेलाइट संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर बनाए रखेंगे. इस मल्‍टी-लेयर्ड तैनाती से सीमाओं और समुद्री क्षेत्रों में किसी भी तरह के ब्लाइंड स्पॉट की संभावना बेहद कम हो जाएगी. इस महत्वाकांक्षी परियोजना में इसरो 21 उपग्रह विकसित करेगा, जबकि शेष 31 उपग्रह निजी क्षेत्र की कंपनियां बनाएंगी. यह किसी भी भारतीय सैन्य अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजी क्षेत्र की अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी होगी. इससे रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ देश के निजी उद्योगों को अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने का अवसर मिलेगा. सरकार इसे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों के अनुरूप अहम कदम मान रही है. हर कदम पर पैनी नजर एक बार प्रणाली पूरी तरह चालू होने के बाद इसका संचालन और नियंत्रण रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी (Defence Space Agency) के पास होगा. इससे सभी उपग्रहों से मिलने वाले डेटा को एकीकृत कर सैन्य अभियानों में तेजी और सटीकता लाई जा सकेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जमीनी बलों, वायुसेना और नौसेना के बीच समन्वय और बेहतर होगा, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी. इस परियोजना की जरूरत हालिया सैन्य अभियानों से सामने आई सीख से जुड़ी है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि आधुनिक युद्ध में उपग्रह आधारित खुफिया जानकारी कितनी निर्णायक भूमिका निभाती है. रियल-टाइम डेटा से दुश्मन की गतिविधियों, सैनिक जमावड़े और हथियारों की तैनाती पर सटीक नजर रखना संभव हुआ. नई उपग्रह प्रणाली इस क्षमता को और मजबूत करेगी. ये सैटेलाइट जमीन पर माइक्रो चेंज की पहचान करने में सक्षम होंगे. जैसे सीमावर्ती इलाकों में नई संरचनाओं का निर्माण, सैनिकों की तैनाती या समुद्र में जहाजों और पनडुब्बियों की आवाजाही. कम समय में मिलने वाले अपडेट्स से कमांडरों को स्थिति की स्पष्ट तस्वीर मिलेगी और वे तेजी से रणनीतिक फैसले ले सकेंगे. इससे भारत की प्रतिरोधक क्षमता (डेटरेंस) भी मजबूत होगी.

रायपुर :राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने अवैध रेत खनन और परिवहन के मामलों में सख्ती दिखाई

रायपुर  जिले में लंबे समय से चल रहे अवैध रेत खनन और परिवहन के मामलों को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी के निर्देश पर खनन माफिया पर कार्रवाई नहीं करने वाले अफसरों पर अब शिकंजा कसा गया है। मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए जिला मजिस्ट्रेट और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के प्रतिनिधि संयुक्त रूप से जांच करेंगे और 42 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। जिला खनिज विभाग ने बीते एक वर्ष में रेत, मुरुम, गिट्टी और फर्शी पत्थर के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के मामलों में कार्रवाई करते हुए 1,132 वाहनों को पकड़ा। साथ ही पोकलेन और चेन माउंटेन सहित करीब 40 मशीनें जब्त की गईं। इन प्रकरणों में कुल तीन करोड़ 85 लाख रुपये का अर्थदंड वसूला गया। इसके बावजूद किसी भी गंभीर मामले में कठोर कार्रवाई नहीं की गई। अधिकांश मामलों में मौके पर जुर्माना वसूल कर प्रकरण समाप्त कर दिया गया और एनजीटी को भेजा ही नहीं गया। एनजीटी के स्पष्ट निर्देश एनजीटी ने कहा है कि अवैध रेत खनन केवल राजस्व की चोरी नहीं, बल्कि गंभीर पर्यावरणीय खतरा है। ऐसे मामलों में सिर्फ वाहन जब्ती या जुर्माना पर्याप्त नहीं है। दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई के साथ पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भी अनिवार्य है। इसी आधार पर एनजीटी ने सीईसीबी के सदस्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि अवैध रेत खनन में संलिप्त व्यक्तियों और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए और 42 दिनों के भीतर रिपोर्ट एनजीटी की केंद्रीय पीठ, भोपाल में प्रस्तुत की जाए। मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल 2026 को तय की गई है। वाहन जब्त, माफिया पर असर नहीं एनजीटी के न्यायिक सदस्य श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल की पीठ ने टिप्पणी की कि खनिज विभाग ने अवैध परिवहन में लगे कई वाहन जब्त किए, लेकिन वास्तविक अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। कुछ मामलों को आधिकारिक फाइलों से हटाने की बात भी सामने आई है। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं। जिम्मेदारों की अनदेखी एनजीटी ने पाया कि जिला खनिज विभाग के संज्ञान में मामला आने के बाद भी संबंधित अधिकारियों ने कार्रवाई के बजाय अनदेखी की। इसी कारण सीईसीबी के सदस्य सचिव, खनिज विभाग के उप निदेशक छत्तीसगढ़ और जिला खनन अधिकारी रायपुर को प्रतिवादी बनाया गया है। नियमों की अवहेलना नियमों के अनुसार स्वीकृत क्षेत्र से बाहर खनन, भारी मशीनों का उपयोग, नदी प्रवाह से छेड़छाड़ और पर्यावरण क्षति जैसे मामलों में एफआइआर दर्ज करना अनिवार्य है। अवैध खनन गंभीर अपराध है, जिसमें दो से पांच साल की सजा और पांच लाख रुपये या उससे अधिक का जुर्माना हो सकता है। इसके अतिरिक्त एनजीटी द्वारा पर्यावरणीय क्षति के लिए अलग से भारी मुआवजा भी लगाया जाता है, इसके बावजूद जिला स्तर पर मामलों को एनजीटी तक नहीं भेजा गया। हरदीडीह एनीकट का मामला हरदीडीह एनीकट का गेट बार-बार खोलकर खनन करने का खुलासा नईदुनिया ने किया था। यहां रेत खदान में प्रदेश हाईवा परिवहन संघ के अध्यक्ष विनोद अग्रवाल द्वारा खनन का मामला सामने आया। खबर के अगले ही दिन नदी में चेन माउंटेन उतारकर फिर से अवैध खनन शुरू हो गया। न एफआइआर दर्ज हुई और न ही मशीनें पूरी तरह जब्त की गईं। खनिज विभाग ने प्रकरण बनाया, लेकिन तीन चेन माउंटेन और एक पनडुब्बी मशीन मौजूद होने के बावजूद कार्रवाई केवल एक चेन माउंटेन और पनडुब्बी मशीन तक सीमित रही। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के दतिया में इसी तरह के मामले में एनजीटी ने 17 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था।

हरियाणा से बिहार जाने वाले यात्रियों को राहत, अब सफर होगा बिना किसी परेशानी के

चंडीगढ़   बिहार से हरियाणा में आकर बसे कामगारों को अब त्योहार व अन्य किसी मौके पर घर जाने के लिए ज्यादा परेशान नहीं होना पड़ेगा। छठ पूजा की तर्ज पर हरियाणा के शहरों से बिहार के लिए बस सेवा की शुरुआत होगी। इसके लिए बिहार के परिवहन विभाग ने हरियाणा परिवहन विभाग से संपर्क साधा है। अभी हरियाणा से फिलहाल कोई बस सेवा नहीं है। ऐसे में बिहार के लोगों को ट्रेन या फिर दिल्ली की बसों में सवार होकर जाना पड़ता है। छठ पूजा में पहली बार हरियाणा से बिहार के लिए बसें चलाई गई थीं। ट्रायल सफल होने के बाद अब फिर से हरियाणा के उन शहरों में बसें चलाई जाएंगी जहां बिहार के लोगों की संख्या अधिक है। सबसे पहले गुरुग्रामसे बस चलाने की योजना है। गुरुग्राम व उसके आसपास के जिलों में बड़ी संख्या में बिहार के लोग रहते हैं। उसके बाद दूसरे शहरों से भी बसें चलाई जा सकती हैं।     हरियाणा के नौ शहरों में इलेक्ट्रिक बसें मार्च तक आ जाएगी। इसके लिए हरियाणा परिवहन विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है। परिवहन विभाग के महानिदेशक प्रदीप कुमार ने बताया कि अगली परचेज कमेटी की बैठक में बस खरीद का प्रस्ताव रखा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद इलेक्ट्रिक बसें डिपो में पहुंच जाएगी। अभी हरियाणा के नौ शहरों में सिर्फ पांच-पांच इलेक्ट्रिक बसें भेजी गई थीं अं जबकि इन शहरों में 50-50 बसें भेजने का प्रस्ताव है। 

हरियाणा में भारी बारिश और ओले, 12 जिलों में मचा कोहराम, पानीपत में अंधेरा, 7 जिलों में ऑरेंज अलर्ट

हिसार  हरियाणा में पश्चिमी विक्षोभ के असर से मौसम ने खतरनाक रुख अख्तियार कर लिया है। शुक्रवार सुबह प्रदेश के 12 जिलों में तेज गरज-चमक के साथ बारिश शुरू हुई, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सिरसा में जहां देर रात भारी ओलावृष्टि हुई, वहीं पानीपत में सुबह 8 बजे तक घने बादलों के कारण अंधेरा छाया रहा। मौसम विभाग (IMD) ने स्थिति को देखते हुए प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश और ओले गिरने की चेतावनी जारी की है। 60 किमी की रफ्तार से चल रही बर्फीली हवाएं प्रदेश में सिर्फ बारिश ही नहीं, बल्कि 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही तेज ठंडी हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी है। दिल्ली-चंडीगढ़ बेल्ट समेत सोनीपत, यमुनानगर, हिसार, गुरुग्राम, और रेवाड़ी जैसे जिलों में सुबह से ही लगातार बूंदाबांदी का दौर जारी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 25 जनवरी तक प्रदेश में बारिश के आसार बने रहेंगे, जिससे दिन के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा सकती है। इससे लोगों को दैनिक कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ा। गुरुग्राम में बारिश के कारण ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई। लंबा ट्रैफिक जाम रहा, जिससे ऑफिस, स्कूल और बाजार जाने वाले लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। पानीपत में हाईवे और अंबाला में कॉलोनी में जलभराव हो गया। भिवानी में अब तक सबसे ज्यादा 15 एमएम बारिश दर्ज की गई, वहीं मेवात और पलवल एरिया में मौसम शुष्क रहा। उधर, सीएम नायब सैनी बारिश के बीच ही चड़ीगढ़ के सेक्टर तीन स्थित सुभाष पार्क पहुंचे और वहां लगी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा के सामने नमन किया। मौसम विभाग (IMD) ने प्रदेश के 7 जिलों कैथल, करनाल, पानीपत, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, अंबाला और पंचकूला में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही प्रदेश में 60 किलोमीटर/ घंटे की दर से ठंडी हवाएं चल रही है। प्रदेश में 25 जनवरी तक बारिश के आसार बने रहेंगे। हालांकि, बादलों की आवाजाही से रात के तापमान में 3-4 डिग्री की बढ़ोतरी होगी, जिससे रात की ठिठुरन कम होगी, लेकिन दिन के तापमान में गिरावट की स्थिति बनी रहेगी। 7 जिलों में ओलावृष्टि का 'ऑरेंज अलर्ट' मौसम विभाग ने उत्तर हरियाणा के कैथल, करनाल, पानीपत, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, अंबाला और पंचकूला के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश और ओले गिरने की प्रबल आशंका है। वहीं, प्रदेश के बाकी जिलों को 'यलो अलर्ट' पर रखा गया है, जहां मध्यम बारिश के साथ बिजली कड़कने की संभावना है। तापमान का गणित: रात में राहत, दिन में आफत बादलों की सघन आवाजाही के कारण रात के तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे रात की ठिठुरन में मामूली कमी आई है। हालांकि, दिन में धूप न निकलने और बारिश के चलते अधिकतम तापमान में बड़ी गिरावट आई है, जिससे दिन भर गलन वाली सर्दी महसूस की जा रही है।

योगी सरकार के विजन के अनुरूप उद्योग–शिक्षा सहभागिता से बनेगा सशक्त स्किल इकोसिस्टम

यूपी में कौशल क्रांति को मिलेगी नई रफ्तार एनएईसी-एससीवीटी के बीच एमओयू, एक लाख युवाओं को मिलेगा रोजगारपरक प्रशिक्षण योगी सरकार के विजन के अनुरूप उद्योग–शिक्षा सहभागिता से बनेगा सशक्त स्किल इकोसिस्टम पश्चिमी यूपी के युवाओं को मिलेगा उद्योग-आधारित प्रशिक्षण महिला सशक्तिकरण को मिलेगा बढ़ावा, प्रशिक्षणार्थियों में आधी भागीदारी महिलाओं की लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए निरंतर ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में जनपद गौतम बुद्ध नगर स्थित नोएडा अपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर (एनएईसी) और राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एससीवीटी) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह एमओयू प्रदेश में कौशल विकास, व्यावसायिक शिक्षा और उद्यमशीलता को नई दिशा देने वाला साबित होगा। इस एमओयू के तहत एनएईसी द्वारा पहले चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 18 जनपदों के 128 विकास खंडों और 10,323 ग्रामों से जुड़े एक लाख अभ्यर्थियों को आगामी पांच वर्षों में 28 सेक्टरों में अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें से 70,000 अभ्यर्थियों को औद्योगिक इकाइयों में प्रशिक्षण के बाद रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। खास बात यह है कि कुल प्रशिक्षणार्थियों में 50 प्रतिशत महिलाएं होंगी, जिससे महिला सशक्तिकरण को भी बल मिलेगा। एनएईसी बनेगा स्किल ट्रेनिंग का केंद्र देश के प्रमुख अपैरल निर्यात क्लस्टर के रूप में एनएईसी की सबसे बड़ी विशेषता गारमेंट उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराना होगा। प्रशिक्षण से लेकर प्लेसमेंट तक की पूरी प्रक्रिया एनएईसी द्वारा अपने डिजिटल पोर्टल “कौशल गंगा” के माध्यम से प्रबंधित की जाएगी। इसके साथ ही “कौशल आजीविका” और “कौशल बाजार” पोर्टल भी प्रशिक्षणार्थियों को आजीविका और बाजार से जोड़ने में सहायक होंगे। एससीवीटी करेगा मूल्यांकन और प्रमाणन इस सहभागिता में राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद की अहम भूमिका होगी। एससीवीटी, जो भारत सरकार की राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद की मान्यता प्राप्त अवार्डिंग बॉडी है, सभी प्रशिक्षणार्थियों के मूल्यांकन और प्रमाणन का कार्य करेगी। एनएईसी द्वारा एससीवीटी को प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी के लिए प्रमाणन शुल्क के रूप में ₹1200 दिए जाएंगे। एससीवीटी अपने स्तर से भी पाठ्यक्रम तैयार कर उन्हें राष्ट्रीय परिषद से अनुमोदित कराएगी। कौशल से आत्मनिर्भरता प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का हर युवा हुनरमंद बने और उसे रोजगार के लिए भटकना न पड़े। एनएईसी व एससीवीटी के बीच हुआ यह एमओयू उद्योग व शिक्षा के बीच मजबूत सेतु का कार्य करेगा। इससे न केवल युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश देश का स्किल हब बनकर उभरेगा।  एमओयू हस्ताक्षरित किए जाने के अवसर पर प्रमुख सचिव व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता डॉ. हरिओम तथा विशेष सचिव एवं निदेशक एससीवीटी अभिषेक सिंह भी उपस्थित रहे। उन्होंने इस पहल को प्रदेश की कौशल नीति के लिए मील का पत्थर बताया।

KCF हैंडलर के ग्रुप में सैकड़ों युवा, पंजाब पुलिस का खुलासा: जर्मनी-यूके से फैल रहा नेटवर्क

जालंधर  खालिस्तान कमांडो फोर्स (KCF) से जुड़े नेटवर्क पर पंजाब पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लुधियाना के दो युवकों को गिरफ्तार किया था। आरोपियों की पहचान हैबोवाल कलां निवासी करनबीर सिंह (34) और न्यू शिमलापुरी निवासी अवतार सिंह (25) के रूप में हुई थी।  दोनों आरोपियों से पुलिस को एक 9 MM पिस्टल और 5 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। गिरफ्तारी 7 जनवरी को की गई थी। सूचना है कि पाकिस्तान और यूके में बैठे मास्टरमाइंड कुलदीप सिंह इंस्टाग्राम के जरिए युवाओं की भर्ती कर आतंकी नेटवर्क फैला रहे है।पाकिस्तान में बैठे आतंकी रिंदा और यूके में छिपे आतंकी कुलवंत सिंह उर्फ कांता (मान सिंह) के साथ इनके लिंक जुड़े थे। स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (SSOC) मोहाली और काउंटर इंटेलिजेंस लुधियाना की संयुक्त कार्रवाई में पकड़े गए दोनों आरोपी जर्मनी और यूके में बैठे KCF हैंडलरों के संपर्क में थे और उनके निर्देश पर लुधियाना में सरकारी और प्रमुख संस्थानों की रेकी कर चुके थे। पुलिस के मुताबिक, दोनों किसी टारगेट किलिंग की साजिश रच रहे थे। KCF हैंडलर ने कई वॉट्सऐप​​ ग्रुप बनाए पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि जर्मनी स्थित KCF हैंडलर ने कई वॉट्सऐप​​ ग्रुप बनाए हुए हैं, जिनमें सैकड़ों युवाओं को जोड़ा गया है। इन्हें सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित किया जा रहा था। 5 महीने से भड़काए जा रहे आरोपी एक अधिकारी ने बताया कि विदेश में बैठे हैंडलर इंस्टाग्राम पर कट्टरपंथी कंटेंट पोस्ट करते थे, जिसे अवतार और करनबीर देखते थे। इसके बाद उन्हें ग्रुप में जोड़ लिया गया, जहां करीब 5 महीने से उन्हें लगातार भड़काया जा रहा था। कई वॉट्सऐप​​ ग्रुपों को ट्रैक करेगी पुलिस पुलिस ने बताया कि पूछताछ में सामने आया है कि ऐसे और भी कई वॉट्सऐप​​ ग्रुप मौजूद हैं, जिनमें बड़ी संख्या में युवा जुड़े हुए हैं। अब इन सभी को ट्रैक कर नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ने की कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में हरियाणा से एक और आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल आरोपियों को किसी तरह की फंडिंग मिलने के सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन इसकी जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि KCF हैंडलर ने उन्हें पैसों का लालच जरूर दिया होगा। इस मामले में थाना SSOC एसएएस नगर में BNS की धारा 113(5) और 61(2) के तहत केस दर्ज किया गया है।

HERC का बड़ा आदेश: हरियाणा में बिजली निगमों को 3 महीने में देना होगा CSI सर्टिफिकेट, ISO सर्टिफिकेशन अनिवार्य

चंडीगढ़ हरियाणा विद्युत नियामक आयोग ने राज्य की पावर यूटिलिटीज को सेवा गुणवत्ता के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने उपभोक्ता संतुष्टि सूचकांक (सीएसआई), बैलेंस्ड स्कोरकार्ड सिस्टम लागू करने और सभी पावर यूटिलिटीज के लिए आईएसओ प्रमाणन अनिवार्य कर दिया है।    एचईआरसी के अध्यक्ष नंद लाल शर्मा ने राज्य सलाहकार समिति (एसएसी) की 33वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए घोषणा की कि अब एसएसी की बैठक वर्ष में तीन बार आयोजित की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिया कि एसएसी की बैठकों में लिए गए सभी निर्णयों को पावर यूटिलिटीज द्वारा समयबद्ध ढंग से लागू किया जाना सुनिश्चित किया जाए। बैठक में एचईआरसी के सदस्य मुकेश गर्ग और  शिव कुमार, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) के प्रबंध निदेशक विक्रम सिंह, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के कुलपति डॉ. बी. आर. कंबोज , एचईआरसी के सचिव प्रशांत देष्टा, विद्युत लोकपाल आर. के. खन्ना व एचपीजीसीएल, एचवीपीएन, यूएचबीवीएन और डीएचबीवीएन के वरिष्ठ अधिकारी एवं अन्य एसएसी सदस्य उपस्थित रहे। आयोग ने सभी पावर यूटिलिटीज को निर्देश दिया कि वे तीन माह के भीतर सुव्यवस्थित उपभोक्ता संतुष्टि सूचकांक (सीएसआई) लागू करें, जिसकी मासिक निगरानी की जाएगी। यह स्पष्ट किया गया कि सीएसआई का मूल्यांकन सेक्शन स्तर पर जूनियर इंजीनियर से लेकर उप-मंडल, मंडल और यूटिलिटी स्तर तक किया जाना चाहिए, ताकि जवाबदेही तय हो और उपभोक्ता सेवाओं में प्रभावी सुधार हो। लक्ष्य आधारित प्रदर्शन और प्रणालीगत सुधार को संस्थागत रूप देने के लिए अध्यक्ष ने चार माह के भीतर बैलेंस्ड स्कोरकार्ड प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए। इसे एक रणनीतिक प्रदर्शन प्रबंधन उपकरण के रूप में अपनाया जाएगा, जिसके माध्यम से वित्तीय एवं गैर-वित्तीय दोनों प्रकार के लक्ष्यों का निर्धारण और उनकी निगरानी की जाएगी। प्रदर्शन संकेतकों की समीक्षा फील्ड स्तर से लेकर शीर्ष प्रबंधन स्तर तक की जाएगी, जिनमें उपभोक्ता संतुष्टि, संचालन दक्षता, सुरक्षा, हानियों में कमी, सेवा गुणवत्ता और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्र शामिल होंगे। इसकी मासिक समीक्षा अनिवार्य होगी। प्रक्रियाओं के मानकीकरण पर आयोग ने बताया कि हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीजीसीएल) वर्तमान में राज्य की एकमात्र आईएसओ प्रमाणित यूटिलिटी है। आयोग ने हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम  (एचवीपीएन), उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) तथा डीएचबीवीएन को भी आईएसओ प्रमाणन प्राप्त करने के निर्देश दिए, ताकि पारदर्शिता, एकरूप प्रक्रियाएं और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियां सुनिश्चित की जा सकें। लागत अनुकूलन पर जोर देते हुए शर्मा ने हरियाणा पावर परचेज सेंटर (एचपीपीसी) की कार्यप्रणाली को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता रेखांकित की, ताकि अल्पकालिक और मध्यम अवधि की बिजली खरीद में होने वाले वित्तीय नुकसान से बचा जा सके। उन्होंने उपभोक्ताओं पर अनावश्यक भार कम करने के लिए उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों की सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियों को अपनाने की सलाह दी। बैठक के दौरान डीएचबीवीएन के प्रबंध निदेशक विक्रम सिंह ने बताया कि एग्रीगेट टेक्निकल एवं कमर्शियल (एटी एंड सी) हानियों को और कम करने के लिए निरंतर उपाय किए जा रहे हैं। यह भी जानकारी दी गई कि यूएचबीवीएनऔर डीएचबीवीएन ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए 51,156.71 करोड़ रुपये की वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) का अनुमान प्रस्तुत किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा, नेताजी का उद्घोष “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” स्वतंत्रता आंदोलन का मंत्र बन गया था

नेताजी सुभाष चंद्र बोस आज भी देशविरोधी तत्वों के सामने न झुकने की प्रेरणा प्रदान करते हैं- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री ने कहा, नेताजी का उद्घोष “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” स्वतंत्रता आंदोलन का मंत्र बन गया था सुभाष चंद्र बोस का नाम लेते ही सच्चे भारतीय के मन में देशप्रेम की भावना उत्पन्न हो जाती है – मुख्यमंत्री  भारत माता के सच्चे सपूत और स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक थे नेताजी – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर राजधानी में आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  लखनऊ “नेताजी सुभाष चंद्र बोस, भारत की आजादी का एक ऐसा नाम है, जो प्रत्येक भारतीय के मन में सर्वोच्च सम्मान के साथ-साथ किसी भी विपरीत परिस्थिति में देशद्रोही व देशविरोधी तत्वों के सामने न झुकने के दृढ़ संकल्प की प्रेरणा प्रदान करता है। भारत माता के सच्चे सपूत नेताजी का नाम लेते ही हर भारतीय के मन में श्रद्धा व सम्मान के साथ राष्ट्रप्रेम की भावना स्वतः उत्पन्न हो जाती है।” मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ये उद्गार नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पावन जयंती के अवसर पर नेताजी सुभाष चौक, हजरतगंज, लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। मुख्यमंत्री ने नेताजी को स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक की संज्ञा देते हुए आजादी की लड़ाई में उनके अमूल्य योगदान के लिए कृतज्ञता व्यक्त की और उनके चित्र पर प्रदेशवासियों की ओर से श्रद्धासुमन अर्पित किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नेताजी का “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” का आह्वान भारत की आजादी का मंत्र बन गया था। उनका एक-एक शब्द स्वतंत्रता आंदोलन का मंत्र बन जाता था। उनका “दिल्ली चलो” का उद्घोष हर भारतीय को प्रेरित करता है। उनका “कदम कदम बढ़ाए जा, खुशी के गीत गाए जा…” गीत आज भी भारतीय सेना के दीक्षांत समारोह में बड़ी शान से गाया जाता है। ऐसा कौन भारतीय होगा, जिसके मन में नेताजी के प्रति श्रद्धा-सम्मान का भाव न हो। नेताजी ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में चल रहे स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई दिशा प्रदान की थी। उन्होंने क्रांतिकारियों के सिरमौर के रूप में आजादी की लड़ाई का नेतृत्व किया। भारत के अंदर रहकर या भारत के बाहर, उन्होंने आजादी के लिए जो योगदान दिया, वह अविस्मरणीय है। जिस प्रकार उन्होंने जर्मनी, जापान तथा दुनिया के तमाम देशों में जाकर देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया, हम सबके लिए प्रेरणा की गाथा है। अपने संबोधन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नेताजी का जन्म 1897 में कटक में एक प्रतिष्ठित अधिवक्ता परिवार में हुआ था। बचपन में ही उन्हें उच्च शिक्षा के लिए ब्रिटेन भेज दिया गया। आईसीएस की परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने के बाद भी उन्होंने अंग्रेजों की चाकरी करने से इनकार कर दिया और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। नेताजी का विराट व्यक्तित्व और देश के प्रति अमूल्य योगदान आज भी हम सबको प्रेरणा प्रदान करता है,  मैं नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करता हूं और उनके श्रीचरणों में प्रदेशवासियों की ओर से नमन करता हूं।  इस अवसर पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल और कार्यक्रम के आयोजक विधान परिषद के सदस्य अवनीश कुमार सिंह, पूर्व मंत्री डॉक्टर महेंद्र सिंह,  अंगद सिंह व पवन सिंह चौहान समेत अन्य गण्यमान्य लोग भी उपस्थित थे।

कुरुक्षेत्र में CM सैनी ने अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव में दी आहुति, 67 करोड़ की योजनाओं का किया उद्घाटन

कुरुक्षेत्र  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी शुक्रवार को कुरुक्षेत्र जिले में 2 बड़े कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए पहुंच चुके हैं। हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की ओर से पिहोवा में चल रहे अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव का आज बसंत पंचमी के मौके पर समापन हुआ. समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री नायब सैनी पहुंचे। समापन के दौरान हवन यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें CM ने खुद पहुंचकर पूर्णाहुति डाली। हालांकि महोत्सव में सरस मेला 25 जनवरी तक चलेगा। आज सिर्फ मुख्य कार्यक्रम का समापन होगा। सीएम नायब सैनी ने पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर भी पूजन किया। 67 करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन सीएम नायब सैनी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव संस्कृति के पुनर्जागरण का पर्व है। यह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गौरव अभियान को आगे बढ़ाने की पहल है। उनके कुशल नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भरता, साहस और संकल्प के पद पर गति से आगे बढ़ रहा है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस और दीनबंधु चौधरी छोटी राम जैसे महापुरुषों के सपनों का भारत बनाने के गंभीर प्रयास को गति दे रहा है। इससे पहले सीएम नायब सैनी ने 67 करोड़ रुपए से ज्यादा की 26 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। सरस्वती कोई काल्पनिक नदी नहीं सीएम ने कहा कि पहले सरस्वती का पुनरुद्धार केवल एक कल्पना लगती थी, लेकिन आज सरस्वती नदी काे पुनर्जीवित करना सबके सामने है। अक्सर अतीत की बातों को केवल मिथक मान लिया जाता है, लेकिन हमारी सरकार ने इतिहास और विज्ञान के बीच सेतु बनाकर काम किया है। इसरो और ओएनजीसी साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इन संस्थाओं के वैज्ञानिक ने अपने अध्ययनों ने यह साबित करके दिखाया है, सरस्वती कोई काल्पनिक नदी नहीं है। आदि बद्री से लेकर गुजरात के कच्छ के तक जमीन के नीचे प्राचीन नदी का चैनल आज भी मौजूद है। हमारे वैज्ञानिकों ने इसे सिद्ध किया है। सरस्वती नदी को विकसित करना लक्ष्य ओएनजीसी की खुदाई और जलवायु विश्लेषण से पता चलता है कि सरस्वती का भूजल 5 हजार से 14 हजार वर्ष यह पुराना है। इसका संबंध हिमालय के ग्लेशियर से है। ये वैज्ञानिक प्रमाण हमारी आस्था का जीत-जागता उदाहरण है। साथ उन आलोचकों को जवाब है, जो हमारी संस्कृति को नकारते थे। हमारा लक्ष्य सरस्वती को नदी के रूप में विकसित करना है। यह हमारी सरकार की प्राथमिकता है। हम सरस्वती तीर्थ को राष्ट्रीय पर्यटन के रूप में विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें कुरुक्षेत्र, हिसार, कैथल, फतेहाबाद और सिरसा जैसे प्रमुख ऐतिहासिक तीर्थ स्थल शामिल है। जाट धर्मशाला में छोटू राम जयंती बताया जा रहा है, सरस्वती महोत्सव के समापन के ठीक बाद CM नायब सैनी कुरुक्षेत्र की जाट धर्मशाला पहुंचेंगे। यहां दीन बंधू सर छोटूराम और सुभाष चंद्र बोस की स्मृति में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम रखा गया है। CM यहां चीफ गेस्ट के तौर पर हिस्सा लेंगे। कल किया एस्ट्रोटर्फ का उद्घाटन CM नायब सैनी कल गुरुवार को भी कुरुक्षेत्र में थे। कल उन्होंने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में नए एस्ट्रोटर्फ का उद्घाटन किया। इसके अलावा, प्री-बजट मीटिंग में लोगों से सुझाव लिए। यह मीटिंग राज्य के आने वाले बजट को बेहतर बनाने के लिए थी, जहां आम लोगों की राय ली गई। सरस्वती तीर्थ के जीर्णोद्धार की उम्मीद पिहोवा का सरस्वती तीर्थ की मुक्ति धाम के नाम से पहचान है। मान्यता है कि यहां पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष मिलता है। CM से तीर्थ के जीर्णोद्धार से जुड़ी की योजनाओं के ऐलान की उम्मीद है। इससे पर्यटकों के लिए सुविधा बढ़ने के साथ तीर्थाटन को बढ़ावा मिलेगा।

अमृत भारत एक्सप्रेस का विस्तार: पीएम मोदी ने शुरू कीं 3 नई ट्रेनें, किन शहरों को मिलेगा फायदा? पूरी डिटेल

तिरुवनंतपुरम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से 4 नई ट्रेन सेवाओं को हरी झंडी दिखाई, जिसमें 3 अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें और एक पैसेंजर ट्रेन शामिल हैं। इनमें नागरकोइल-मंगलुरु अमृत भारत एक्सप्रेस, तिरुवनंतपुरम-तांबरम अमृत भारत एक्सप्रेस, तिरुवनंतपुरम-चारलपल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस और त्रिशूर-गुरुवायुर पैसेंजर ट्रेन शामिल हैं। यह कार्यक्रम पुथरिकंदम मैदान में आयोजित हुआ, जहां पीएम मोदी ने इन ट्रेनों को वर्चुअल या सीधे फ्लैग ऑफ किया। अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें किफायती किराए पर बेहतर सुविधाएं, सुरक्षा और आराम प्रदान करती हैं, जो सामान्य मेल/एक्सप्रेस और प्रीमियम ट्रेनों के बीच की खाई को भरती हैं। नई ट्रेन सुविधाओं से दक्षिण भारत में रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी, खासकर केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच यात्रा आसान बनेगी। इन नई ट्रेनों से पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। तिरुवनंतपुरम-तांबरम अमृत भारत एक्सप्रेस तमिलनाडु और केरल के बीच तेज और सुविधाजनक सफर सुनिश्चित करेगी। नागरकोइल-मंगलुरु ट्रेन कर्नाटक तक कनेक्शन बढ़ाएगी। तिरुवनंतपुरम-चारलपल्ली ट्रेन तेलंगाना से केरल को जोड़ेगी। त्रिशूर-गुरुवायुर पैसेंजर ट्रेन भक्तों और यात्रियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगी, क्योंकि गुरुवायुर मंदिर एक प्रमुख तीर्थस्थल है। पर्यटन क्षेत्र को होगा फायदा, बोले पीएम मोदी पीएम मोदी ने कहा कि ये पहल केरल के समग्र विकास को गति देंगी और पर्यटन क्षेत्र को फायदा पहुंचाएंगी। उन्होंने कहा, 'आज देश के दूसरे हिस्सों से केरल की रेल कनेक्टिविटी और सशक्त हुई है। थोड़ी देर पहले जिन अमृत भारत एक्सप्रेस रेल को हरी झंडी दिखाई गई है इससे केरल में ईज ऑफ ट्रेवल को बल मिलेगा। इस टूरिज्म सेक्टर को बहुत फायदा होगा।' यह कदम भारतीय रेलवे की अमृत भारत योजना का हिस्सा है, जो आधुनिक सुविधाओं वाली किफायती ट्रेनें शुरू कर यात्रियों को बेहतर अनुभव दे रही है। इससे लाखों यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा सस्ती और आरामदायक मिलेगी। यह दक्षिण भारत में रेल नेटवर्क को मजबूत बनाने की दिशा में अहम प्रयास है।