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रमजान में स्कूलों की स्पेशल टाइमिंग पर BJP का तीखा विरोध, कांग्रेस को किया कटघरे में

बेंगलुरु  कर्नाटक में रमजान के दौरान स्कूलों की स्पेशल टाइमिंग को लेकर भाजपा ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोमवार को एक बयान में कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा है कि कांग्रेस हमेशा अपने वोट बैंक को पहले रखती है। उन्होंने यह सवाल भी उठाए हैं कि अगर रमजान के दौरान स्कूल के स्टाफ या टीचर्स को जल्दी छुट्टी की इजाजत मिली है, तो नवरात्रि में इस तरह का नियम लागू क्यों नहीं किया गया। पूनावाला ने एक बयान में कहा, "हम देख सकते हैं कि कर्नाटक में रमजान के दौरान स्कूलों की टाइमिंग अलग होगा। लेकिन क्या आपने कर्नाटक सरकार किसी हिंदू त्योहार के दौरान ऐसी कोई छूट दी है? आप कह रहे हैं कि रमजान के दौरान टीचर और स्टाफ जल्दी जा सकते हैं, लेकिन क्या आप नवरात्रि के दौरान भी ऐसा ही करेंगे?” शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस हमेशा अपने वोट बैंक को पहले रखती है और कांग्रेस के पास संविधान के अनुसार निष्पक्ष और समान रूप से काम करने का विजन नहीं है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस के लिए हिंदू आस्था का अपमान करना और वोट बैंक की दुकान चलाना, उनकी इकलौती पहचान बन गई है। और इसीलिए वे सबसे पहले वोटबैंक को रखते हैं।” स्कूलों के समय में बदलाव इससे पहले कर्नाटक के कुछ स्कूलों में रमजान को लेकर कुछ दिशानिर्देश जारी किए गए थे। उर्दू और अन्य अल्पसंख्यक भाषा स्कूलों के निदेशालय के एक निर्देश के मुताबिक रमजान के महीने में राज्य में उर्दू मीडियम जूनियर प्राइमरी और सेकेंडरी प्राइमरी स्कूलों के बंद रहने का समय रमजान महीना शुरू होने की तारीख से एक महीने के लिए सुबह 8:00 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक बढ़ा दिया जाएगा।

इंदौर में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला जारी, 32वीं महिला की हुई मौत, स्वास्थ्य स्थितियों का भी असर

इंदौर इंदौर की भागीरथपुरा बस्ती में दूषित पानी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक महीना बीत जाने के बाद भी यहां मौतों का सिलसिला जारी है। रविवार को बस्ती में 32वीं मौत दर्ज की गई, जिसने इलाके में दहशत और बढ़ा दी है। ताज़ा मामला 65 वर्षीय अनिता कुशवाह का है, जिन्होंने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इलाज के दौरान बिगड़ी हालत अनिता को कुछ दिन पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया था। शुरुआत में इसे सामान्य संक्रमण माना जा रहा था, लेकिन धीरे-धीरे उनकी दोनों किडनियां खराब हो गईं। उनकी हालत इतनी नाजुक हो गई कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। इलाज के दौरान उन्हें दिल का दौरा भी पड़ा, जिसके बाद उनकी स्थिति और बिगड़ती चली गई और आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया। बेटे नीलेश ने बताया कि उन्हें पहले से कोई बीमारी नहीं थी। 28 दिसंबर को उल्टी-दस्त के कारण भाग्यश्री हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। दो दिन बाद डिस्चार्ज होकर घर पर लाया गया, लेकिन कुछ ही घंटों बाद फिर हालत बिगड़ी। उन्हें 1 जनवरी को अरबिंदो हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। अरबिंदो हॉस्पिटल से उन्हें 4 जनवरी को बॉम्बे हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया था। इसके बाद उनकी हालत बिगड़ती गई। हालत गंभीर होने पर किडनी फेल हो गई, जिसके चलते लगातार हेमोडायलिसिस किया जा रहा था। फिर वेंटिलेटर पर भी लिया गया। इलाज के दौरान उन्हें कार्डियक अरेस्ट भी आया। सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने बताया कि शासन की ओर से हायर सेंटर पर इलाज करवाया गया, लेकिन दुर्भाग्य से मरीज को बचाया नहीं जा सका। महिला के पति मिल से रिटायर्ड हैं। परिवार में एक बेटा और दो बेटियां हैं। अनिता कुशवाह का अंतिम संस्कार आज होगा। भागीरथपुरा दूषित पानी हादसे में अब तक 32 मौतें हो चुकी हैं। इस मामले में 450 से ज्यादा मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज किए जा चुके हैं, लेकिन दूसरी ओर तीन मरीज अब भी एडमिट हैं। इनमें से 2 आईसीयू में हैं। उनकी हालत काफी क्रिटिकल बनी हुई है। हैरानी की बात यह है कि बस्ती में अब तक 32 लोग जान गंवा चुके हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में सिर्फ 16 मौतें ही दर्ज हैं। विभाग इन मौतों की मुख्य वजह डायरिया (उल्टी-दस्त) मान रहा है। बाकी की अन्य मौतों का अभी तक कोई डेथ ऑडिट नहीं किया गया है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल बस्ती के दो और मरीज अस्पताल में भर्ती हैं जिनकी हालत गंभीर बनी हुई है। राहत की बात बस इतनी है कि अब नए मरीजों के मिलने की रफ्तार कम हुई है और मामूली लक्षण वाले लोगों का घर पर ही इलाज चल रहा है। बस्ती में पानी का संकट अभी भी गहराया हुआ है। नगर निगम अब तक केवल 30 प्रतिशत इलाके में ही नई नर्मदा लाइन बिछा पाया है। बाकी पूरी बस्ती अब भी टैंकरों के भरोसे है। दूषित पानी के खौफ की वजह से लोग नल या टैंकर का पानी पीने से डर रहे हैं। जो लोग सक्षम हैं, वे पीने के लिए बाहर से पानी खरीद रहे हैं। 24 घंटे चालू हैं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर अभी मरीज आ रहे हैं, लेकिन डायरिया के मरीजों की संख्या एकदम कम हो गई है। रोज एक-दो मरीज आते हैं, लेकिन उन्हें एडमिट करने की जरूरत नहीं पड़ रही है। हालांकि यह केंद्र 24 घंटे खुला है और क्षेत्र में दो एम्बुलेंस भी तैनात हैं। 30 प्रतिशत हिस्से में की जा रही पानी की सप्लाई उधर, इलाके में एक दिन छोड़कर 30% हिस्से में पानी का सप्लाय जारी है। निगम का कहना है कि पानी अब साफ आ रहा है लेकिन रहवासी अभी भी आरओ और टैंकर का पानी ही उपयोग कर रहे हैं। दूसरी ओर बचे हुए 70% हिस्से की मेन पाइप लाइन का काम अंतिम दौर में है। इसके बाद यहां लीकेज टेस्ट करने के साथ सैंपल लिए जाएंगे।

मुख्यमंत्री का आह्वान, किसान, एमएसएमई, युवा-उद्यमियों और महिलाओं को ऋण उपलब्धता तेज और सरल की जाएं

यूपी का कुल सीडी रेशियो 60.39% के पार, मार्च तक 62% का लक्ष्य ओडीओपी की तरह अब ओडीओसी को ब्रांड बनाने आगे बढ़ें बैंक, छोटे व्यापारियों और गिग वर्कर्स को होगा बड़ा लाभ: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री का आह्वान, किसान, एमएसएमई, युवा-उद्यमियों और महिलाओं को ऋण उपलब्धता तेज और सरल की जाएं आवेदन और पात्रता की जांच में अनावश्यक देरी न करें बैंक, लाभार्थीपरक योजनाओं की सफ़लता बैंकों के सहयोग से ही संभव: मुख्यमंत्री प्रदेश का बैंकिंग व्यवसाय 08 वर्ष में ₹12.80 लाख करोड़ से बढ़कर ₹32.79 लाख करोड़ वित्तीय समावेशन में यूपी देश में नंबर-1, जनधन, जीवन बीमा, दुर्घटना बीमा और अटल पेंशन योजना में शीर्ष प्रदर्शन ऊर्जा, कृषि, उद्योग और एमएसएमई क्षेत्र में 22,000 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े ऋण स्वीकृत 20 फरवरी और 16 मार्च को दो मेगा ऋण वितरण कार्यक्रम; 2.20 लाख करोड़ रुपये से अधिक  वितरण का लक्ष्य पीएम स्वनिधि, पीएम सूर्य घर और किसान क्रेडिट कार्ड में यूपी की तेज प्रगति, 50.81 लाख किसानों को मिली 1 लाख करोड़ रुपये की सीमा सीएसआर के माध्यम से उत्तर प्रदेश के विकास में सहभागिता बढ़ाएं बैंक: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की विशेष बैठक, कहा जिलों में हर माह हो डीएलबीसी कि बैठक लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चालू वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक प्रदेश में कुल क्रेडिट डिपॉजिट (सीडी रेशियो) 62 प्रतिशत से अधिक करने का लक्ष्य रखा है। रविवार को राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की विशेष बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी बैंक प्रतिनिधियों से उनके सीडी रेशियो के बारे में जानकारी प्राप्त करते हुए सीडी रेशियो बढ़ाने के लिए ठोस प्रयास करने पर बल दिया। बैठक में बताया गया कि दिसंबर 2025 तक उत्तर प्रदेश का कुल सीडी रेशियो 60.39 प्रतिशत हो गया है, जो पिछले लगभग दस वर्षों का सर्वाधिक स्तर है। जनपद-वार समीक्षा के अनुसार 40 प्रतिशत से कम सीडी रेशियो वाले जनपद घटकर केवल पाँच रह गए हैं, जबकि 40-50, 50-60 और 60-80 प्रतिशत की श्रेणी वाले जनपदों की संख्या में भी निरंतर सुधार हुआ है। मार्च 2018 में 40 प्रतिशत से कम सीडी रेशियो वाले 20 जनपद थे, जो अब घटकर 5 हो गए हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि मार्च 2026 तक सभी जनपदों के सीडी रेशियो में लक्षित सुधार सुनिश्चित किया जाए। महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) की सफलता के बाद अब राज्य सरकार एक जिला-एक व्यंजन (ओडीओसी) के माध्यम से छोटे व्यापारियों, पारंपरिक पाक कला से जुड़े कारीगरों और गिग वर्कर्स को नई पहचान देने जा रही है। उन्होंने बैंकों से आह्वान किया कि जैसे ओडीओपी को वित्तीय सहयोग मिला, वैसे ही ओडीओसी को भी प्राथमिकता देते हुए अधिक से अधिक लोगों को ऋण उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रशिक्षण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग में पूरा सहयोग दे रही है, और इस मिशन को गति देने में बैंकों की भूमिका निर्णायक होगी।  राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की विशेष बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान का उदाहरण दिया और कहा कि इन योजनाओं की सफलता के केंद्र में बैंकों की सहयोगी भावना है। उन्होंने साफ कहा कि अनावश्यक दस्तावेज़ों की मांग, बार-बार वेरिफिकेशन और प्रक्रिया में देरी जैसी स्थितियाँ लाभार्थियों को हतोत्साहित करती हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि बैंकिंग प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे आम नागरिक को वास्तविक सहूलियत मिले और पात्र लाभार्थी बिना किसी दिक्कत के योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज आर्थिक गतिविधियों, औद्योगिक निवेश, उद्यमिता, कृषि और महिला-युवा स्वावलंबन के क्षेत्रों में तेज गति से आगे बढ़ रहा है। इस प्रगति में बैंकिंग तंत्र की सक्रिय साझेदारी अनिवार्य है। उन्होंने सभी बैंक प्रतिनिधियों से कहा कि किसान, सूक्ष्म,लघु, मध्यम उद्यम (एमएसएमई), स्टार्टअप, महिला स्वयं सहायता समूहों और नवउद्यमी युवाओं को ऋण उपलब्धता सरल, सम्मानजनक और समयबद्ध हो। मुख्यमंत्री ने उन जनपदों में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए जहाँ सीडी रेशियो 40 प्रतिशत से कम है, और कहा कि बैंकों को गाँवों को लक्षित कर मेगा ऋण मेले आयोजित करने चाहिए। मुख्यमंत्री ने हर माह जिला स्तरीय बैकर्स कमेटी की बैठक सुनिश्चित करने के लिए मुख्य सचिव को निर्देशित किया। उन्होंने बैंकों से सीएसआर के माध्यम से उत्तर प्रदेश के विकास में सहभागी बनने का भी आह्वान किया। बैठक में बताया गया कि पिछले 08 वर्षों में प्रदेश का बैंकिंग तंत्र अत्यंत मजबूत हुआ है। मार्च 2017 में प्रदेश की कुल जमा राशि 8.92 लाख करोड़ रुपये थी, जो दिसंबर 2025 में बढ़कर 20.44 लाख करोड़ रुपये हो गई है। इसी अवधि में कुल ऋण वितरण 4.05 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 12.34 लाख करोड़ रुपये पर पहुँच गया। मार्च 2017 में प्रदेश का कुल बैंकिंग व्यवसाय 12.80 लाख करोड़ रुपये था, जो दिसंबर 2025 में बढ़कर 32.79 लाख करोड़ रुपये हो गया है। अप्रैल 2022 से दिसंबर 2025 के दौरान अकेले जमा में 6.47 लाख करोड़ रुपये, ऋण में 5.03 लाख करोड़ रुपये और कुल बैंकिंग व्यवसाय में 11.50 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है। कृषि, एमएसएमई और प्राथमिकता क्षेत्रों में ऋण प्रवाह लगातार बेहतर हुआ है। दिसंबर 2024 से दिसंबर 2025 के बीच एमएसएमई क्षेत्र में 23 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। वित्तीय समावेशन अभियान (जुलाई-अक्टूबर 2025) की उपलब्धियों की जानकारी भी बैठक में प्रस्तुत की गई। इस अवधि में प्रदेश ने देशभर में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और आठ प्रमुख सूचकों में से सात पर प्रथम स्थान प्राप्त किया। प्रदेश में 57,699 वित्तीय साक्षरता शिविर आयोजित हुए, 22.24 लाख जनधन खाते खोले गए, 17.14 लाख लोगों का जीवन सुरक्षा बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) में और 43.35 लाख नागरिकों का दुर्घटना बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) में नामांकन हुआ। अटल पेंशन योजना (एपीवाई) में 6.90 लाख नए सब्सक्रिप्शन दर्ज किए गए। नामांकन, दावा निपटान, पुनः-केवाईसी और नामांकन अद्यतन जैसे क्षेत्रों में भी प्रदेश का प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष रहा। बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान ऊर्जा, कृषि, बुनियादी ढाँचा, उद्योग, एमएसएमई और एनबीएफसी सह-ऋण मॉडल सहित विभिन्न क्षेत्रों में 22,000 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े ऋण स्वीकृत किए गए हैं। यूपीपीसीएफ, यूपीसीयू, पावर ट्रांसमिशन और … Read more

हरियाणा थंडर ने रोमांचक फाइनल में दिल्ली दंगल वॉरियर्स को हराकर पीडब्ल्यूएल 2026 का खिताब जीता

नोएडा  हरियाणा थंडर नोएडा इंडोर स्टेडियम में दिल्ली दंगल वॉरियर्स के खिलाफ फाइनल में आखिरी बाउट तक चले मैच के बाद प्रो रेसलिंग लीग (पीडब्ल्यूएल) 2026 का चैंपियन बन गया। आठ बाउट के बाद स्कोर 4-4 से बराबर था, नतीजा आखिरी महिलाओं की 62 किलोग्राम बाउट पर निर्भर था, जिसमें पेरिस ओलंपिक की सिल्वर मेडलिस्ट इरीना कोलियाडेन्को ने दबाव में शानदार प्रदर्शन किया। उनकी शानदार टेक्निकल जीत ने हरियाणा थंडर को 5-4 से जीत दिलाई और पीडब्ल्यूएल 2026 का खिताब दिलाया, जो लीग के इतिहास के सबसे नाटकीय फाइनल में से एक था। हरियाणा थंडर पीडब्ल्यूएल 2026 ट्रॉफी के साथ 1.5 करोड़ रुपये की इनामी राशि घर ले जाएगा। रनर-अप, दिल्ली दंगल वॉरियर्स को 75 लाख रुपये मिलेंगे। व्यक्तिगत पुरस्कारों में, दिल्ली दंगल वॉरियर्स के तुरान बायरामोव ने 57 किलोग्राम पुरुष वर्ग में सभी 7 बाउट जीतकर और पीडब्ल्यूएल 2026 में कुल 59 अंक हासिल करके 2.5 लाख रुपये का 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' खिताब जीता। पंजाब रॉयल्स के चंदरमोहन टूर्नामेंट के टॉप पॉइंट स्कोरर थे। नेहा सांगवान (हरियाणा थंडर) को आखिरी बाउट तक फाइनल को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए 'प्लेयर ऑफ द मैच' का पुरस्कार मिला। रौनक (दिल्ली दंगल वॉरियर्स) को पुरुष 125 किलोग्राम वर्ग में अपने शानदार प्रदर्शन के लिए 'फाइटर ऑफ द मैच' का सम्मान मिला। 'इंपैक्ट प्लेयर ऑफ द मैच' अक्षय धेरे (हरियाणा थंडर) थे, जिन्हें 57 किलोग्राम पुरुष वर्ग में उनके मजबूत प्रदर्शन के लिए पहचाना गया। चैंपियनशिप की रात दिल्ली ने बढ़त के साथ शुरू की, जब अजेय तुरान बायरामोव ने 74 किलोग्राम पुरुष बाउट जीती, जल्दी ही शुरुआती बढ़त बनाई और 8-1 से जीत हासिल करने के लिए नियंत्रण बनाए रखा। हरियाणा ने 76 किलोग्राम महिला वर्ग में तुरंत जवाब दिया, जहां अंडर20 विश्व चैंपियन काजल धोचक ने यूरोपीय चैंपियन अनास्तासिया अल्पीयेवा को 3-1 से हराकर स्कोर बराबर कर दिया। 65 किलोग्राम पुरुषों के मैच में मोमेंटम तब बदला जब दिल्ली के कप्तान सुजीत कल्कल ने शानदार वापसी करते हुए वर्ल्ड चैंपियनशिप के सिल्वर मेडलिस्ट तुमुर ओचिर तुलगा को 8-6 से हरा दिया। हरियाणा ने तुरंत अपनी स्टार और कई बार की वर्ल्ड चैंपियन यूई सुसाकी के साथ जवाब दिया, जिन्होंने सारिका पर शानदार टेक्निकल जीत हासिल करके अपना कौशल दिखाया और स्कोर 2-2 से बराबर कर दिया। 86 किलोग्राम पुरुषों के मैच में दिल्ली ने फिर से बढ़त बना ली, जब एशियन चैंपियनशिप के ब्रॉन्ज मेडलिस्ट वफाईपुर हादी बख्तियार ने अशिरोव अशरफ को 11-0 से हरा दिया। हरियाणा ने जोरदार जवाब दिया, जिसमें अक्षय धेरे ने 57 किलोग्राम पुरुषों के इवेंट में दिल्ली के अमित कुमार को टेक्निकल सुपीरियरिटी से हरा दिया। हेवीवेट मैच निर्णायक था, जिसमें रौनक ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अनिरुद्ध गुलिया को 12-2 से हराया, जिससे दिल्ली को 4-3 की बढ़त मिली। हरियाणा ने हार नहीं मानी, और नेहा सांगवान ने 57 किलोग्राम महिलाओं के मुकाबले में अंजलि को पिन करके मैच को जारी रखा, जिससे स्कोर 4-4 से बराबर हो गया। चैंपियनशिप दांव पर लगी थी, और इरीना कोलियाडेन्को ने महत्वपूर्ण 62 किलोग्राम महिलाओं के मैच में कदम रखा। अपने अनुभव और शांत स्वभाव का फायदा उठाते हुए, पेरिस ओलंपिक की सिल्वर मेडलिस्ट ने लगातार टर्न-एंड-एक्सपोजर मूव्स से अंजलि को हराया और 16-0 से टेक्निकल जीत हासिल की। ​​इस जीत ने उन्हें हरियाणा थंडरर्स के लिए खिताब दिलाया।

बांग्लादेश के बजट में कटौती, चाबहार परियोजना के लिए सरकार ने किया ईरान को शून्य फंडिंग का ऐलान

नई दिल्ली बांग्लादेश के साथ तनावपूर्ण संबंधों के बीच इस बार के केंद्रीय बजट में उसके विकास के लिए दी जाने वालीराशि चालू वित्त वर्ष में पिछले वर्ष के मुकाबले आधी कर दी गई है। बजट के मुताबिक बांग्लादेश के लिए इस बार केवल 60 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। वहीं भूटान को पिछले साल के मुकाबले ज्यादा राशि दी जाएगी। उसे कास सहायता के रूप में सबसे अधिक 2,288 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि नेपाल के लिए 800 करोड़ रुपये और मालदीव और मॉरीशस के लिए 550-550 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। चाबहार के लिए कोई आवंटन नहीं इस बार के आम बजट में ईरान के चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए कोई राशि नहीं आवंटित की गई है। बता दें कि भारत चाबहार परियोजना में हिस्सेदार रहा है औऱ वह 100 करोड़ की मदद हर साल करता आ रहा था। अफगानिस्तान, मध्य एशिया और आगे के क्षेत्र में व्यापार के लिए यह बेहद जरूरी पड़ाव माना जाता है। चाबहार ओमान की खाड़ी के मुहाने पर स्थित बंदरगाह है जो कि वैश्विक समुद्री मार्गों तक सीधी पहुंच बनाता है। यह पाकिस्तान की सीमा के पूर्व में ग्वादर पोर्ट के पास है। चीन बी बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव के जरिए ग्वादर को विकसित कर रहा है। ऐसे में यह चाबहार परियोजना भारत के लिए संतुलन बनाने के लिए अहम है। जानकारों का कहना है कि ईरान और अमेरिका में तनाव की वजह से भारत इस बार चाबहार को कुछ नहीं दिया है। विदेश मंत्रालय को चालू वित्त वर्ष के बजट अनुमान 20,516 करोड़ रुपये और संशोधित अनुमान 21,742 करोड़ रुपये के मुकाबले 2026-27 के लिए कुल 22,118 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव किया गया है। आगामी वित्तीय वर्ष के लिए बांग्लादेश के लिए 60 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव किया गया है, जबकि 2025-26 के बजट में बांग्लादेश के लिये 120 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। हालांकि, बाद में संशोधित अनुमान में यह राशि 34.48 करोड़ रुपये कर दी गई थी। अप्रैल में खत्म हो रही है अमेरिका से मिली छूट भारत पिछले कुछ वर्षों से ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में जारी वृहद संपर्क परियोजना पर प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। चाबहार बंदरगाह के विकास में भारत एक प्रमुख साझेदार है। पिछले वर्ष सितंबर में अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन चाबहार बंदरगाह परियोजना पर लागू प्रतिबंधों से भारत को छह महीने की छूट दी थी। यह छूट 26 अप्रैल को समाप्त हो जाएगी। भारत और ईरान मिलकर चाबहार बंदरगाह का विकास कर रहे हैं, ताकि संपर्क और व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा मिल सके। दोनों देश चाबहार बंदरगाह को अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (आईएनएसटीसी) का अभिन्न अंग बनाने के लिए भी पुरजोर प्रयास कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय के आवंटन के तहत 2025-26 के लिए कुल विदेश साझेदारी विकास मद में 6,997 करोड़ रुपये है, जो विदेश मंत्रालय को किए गए आवंटन का 31 प्रतिशत से थोड़ा अधिक है। दिलचस्प बात यह है कि विदेश साझेदारी विकास मद के तहत कुल आवंटन में से 4,548 करोड़ रुपये निकटवर्ती पड़ोसी देशों के लिए निर्धारित किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस राशि का उपयोग पनबिजली संयंत्रों, बिजली पारेषण लाइनों, आवास, सड़कों, पुल जैसी बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं से लेकर छोटे पैमाने पर जमीनी स्तर की सामुदायिक विकास परियोजनाओं तक विभिन्न प्रकार की पहलों के कार्यान्वयन के लिए किया जाएगा। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में लातिन अमेरिकी देशों के लिए कुल सहायता राशि 120 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।

तेजप्रताप ने मोदी सरकार की सराहना की, लालू यादव के राजनीतिक प्रभाव को बताया खत्म

पटना लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल (JJD) चीफ तेजप्रताप यादव अक्सर चर्चा में रहते हैं। बेबाक अंदाज और बेबाक बात तेजप्रताप यादव की पहचान रही है। अब एक पॉडकास्ट में तेजप्रताप यादव ने एक बार फिर बड़ी ही बेबाकी से अपनी बातें रखी हैं। तेजप्रताप यादव ने कहा है कि अब लालू राज खत्म हो गया है। तेजप्रताप यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 10 में से दस नंबर दिए और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी खुलकर अपनी राय रखी है। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव पर भी तेजप्रताप यादव ने अपनी बात रखी है। यूट्यबूर प्रियंका शर्मा के साथ एक पॉडकास्ट में तेजप्रताप यादव ने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी है। जब तेजप्रताप यादव से पूछा गया कि बिहार चुनाव में राजद के 25 सीटों पर सिमट जाने की एक वजह यह भी है कि आप अलग हो गए? इसपर तेजप्रताप यादव ने कहा कि जब कृष्ण का सम्मान नहीं होगा तो यहीं हश्र होगा। हम मान-सम्मान के लिए लड़ते हैं। जब मान-सम्मान नहीं होगा तो हम अलग हो गए और हमने अपनी अलग लकीर खींच ली। हमारा रास्ता अलग हो गया। बिहार में चुनाव के वक्त टिकट बंटवारे को लेकर राष्ट्रीय जनता दल पर पैसे मांगने के आरोप भी लगे थे। इसपर तेजप्रताप यादव ने बेबाकी से कहा कि हां, तो ऐसा जयचंदों ने किया होगा। तेजप्रताप यादव ने जयचंदों का नाम बताने से इनकार किया और कहा कि 5-6 जयचंद हैं। उन्होंने कहा कि सबको पता है कि जयचंद कौन हैं। तेजप्रताप यादव ने यह भी कहा कि अभी भी वो (जयचंद) परिवार के अंदर है। आपका राजनीतिक सलाहकार परिपक्व होना चाहिए। तेजस्वी के विदेश दौरे पर क्या बोले तेजप्रताप बिहार चुनाव में हार के बाद तेजस्वी यादव के विदेश दौरे पर जाने को लेकर तेजप्रताप यादव ने कहा कि हमारी पार्टी हारी तो हमने तुरंत समीक्षा बैठक की थी। उनको भी उस समय समीक्षा बैठक करनी चाहिए थी। तेजप्रताप यादव ने राजद की हार पर कहा कि हार की वजह वहीं 5-6 लोग (जयचंद) हैं। आपका दुश्मन बाहर नहीं है घर में ही है। तेजप्रताप यादव ने कहा कि उन्हें बड़े भाई होने का जितना कर्तव्य निभाना था उन्होंने निभा दिया। बहन रोहिणी और मां राबड़ी पर भी बोले तेजप्रताप अपनी मां राबड़ी देवी को लेकर तेजस्वी यादव ने कहा कि वो अपनी मां का आशीर्वाद लेने उनके घर गए थे। उन्होंने कहा कि उनकी मां ने उस दिन उनसे घऱ वापस लौटने के लिए कहा था जिसके बाद उन्होंने कहा था कि हमने अलग लाइन बना ली है और हम आगे निकल चुके हैं। बस आपका आशीर्वाद चाहिए। रोहिणी आचार्य को लेकर तेजप्रताप यादव ने कहा कि बहन के आरोप लगाने के बाद उनकी बातचीत बहन से हुई थी। वो काफी भावुक थीं और उन्होंने कहा था कि उनके साथ ऐसी बातें हुई हैं। तेजप्रताप यादव ने कहा कि उनकी बहन रोहिणी बहुत अच्छी हैं उन्होंने पिता को किडनी दी थी। लालू यादव का राज खत्म तेजप्रताप यादव ने कहा कि वो परिवार से दूर रहते हैं और परिवार को मिस करते हैं। इस इंटरव्यू में जब तेजप्रताप यादव से कहा गया है कि आप राजा के बेटे हैं लेकिन आपके शौक सब मिडिल क्लास वाले ही हैं। इसपर तेजप्रताप यादव ने कहा कि राजा-प्रजा कुछ नहीं है। क्या राजा, क्या प्रजा। राजा गए उनका राज चला गया। राजा-प्रजा का कोई बात नहीं है। पीएम मोदी को 10 में से 10 नंबर – तेजप्रताप तेजप्रताप यादव से जब इस साक्षात्कार में कहा गया कि नरेंद्र मोदी को जब आपको प्रधानमंत्री पद और उनके कामों के लिए 10 में से नंबर देने हों तो आप कितने नंबर देंगे? इसपर तेजप्रताप यादव ने बेबाकी से कहा कि 10 में से हम उनको 10 देंगे। वो पूजा-पाठ करते हैं और हम भी पूजा-पाठ करते हैं तो हम उनको दस ही ना देगे। अगर वो पूजा नहीं कर रहे होते तो हो सकता है कि हम उनका नंबर काट देते। इसी के साथ सीएम नीतीश को लेकर तेजप्रताप यादव ने कहा कि उनमें कोई कमी नहीं है सिर्फ बुर्का वाले विवाद की वजह से एक वीडियो वायरल हुआ था। 

पीएम मोदी के दौरे के बाद पंजाब से भाजपा को मिला शुभ संकेत, क्या सिद्धू परिवार लौटेगा?

चंडीगढ़  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पंजाब यात्रा के अगले ही दिन प्रदेश से शुभ संदेश आया है. इसके साथ ही कयासबाजी का दौर भी शुरू हो गया है कि क्‍या सिद्धू परिवार की घर वापसी मतलब भाजपा में वापसी होने जा रही है. पीएम मोदी के पंजाब विजिट से एक दिन पहले कांग्रेस से नाता तोड़ने वालीं नवजोत कौर सिद्धू ने प्रधानमंत्री की तारीफ करते हुए उनका दिल से स्‍वागत किया है. उन्‍होंने सोशल मीडिया पोस्‍ट में लिखा कि पंजाब की जनता भोलीभाली है, जिन्‍हें हमारी सरकार अपने हितों और स्‍वार्थ के चलते हमेशा मूर्ख बनाती रहती है. नवजोत कौर सिद्धू ने आगे लिखा – मोदीजी पंजाब में आपका दिल से स्‍वागत है. नवजोत कौर के इस सोशल मीडिया पोस्‍ट से प्रदेश की सियासत गर्मा गई है. नवजोत कौर सिद्धू ने एक्‍स पर पोस्‍ट शेयर कर कहा, ‘जब हमारे देश के प्रमुख हमारे राज्य को कुछ देने आते हैं, तो सभी राजनीतिक चोर उनके घर वापसी कार्यक्रम में बाधा डालने के लिए एक मंच पर क्यों इकट्ठा हो जाते हैं? हमें यह स्पष्ट समझना चाहिए कि उन्होंने वह पद और शक्ति अपने परिश्रम से अर्जित की है, ताकि वे हमारे राज्य को कुछ महान दे सकें. आभारी बनें. पंजाब के लोग भोले-भाले हैं और स्वार्थी सरकारें अपने हितों के चलते उन्हें हमेशा धोखा देती रही हैं. उन्होंने अपने परिवारों के लिए भारी संपत्ति बना ली है. पंजाब के लिए कुछ करना है नहीं. मोदी जी का प्यार भरे दिल से स्वागत है, यही पंजाबी लोगों की सच्ची प्रकृति है सच्‍चा स्‍वभाव है.’ बीजेपी या AAP ने संपर्क तो नहीं किया? नवजोत कौर सिद्धू ने एक अन्‍य पोस्‍ट में लिखा, ‘मैं संभवतः उन बहुत कम लोगों में से हूं, जिन्होंने किसी भी राजनीतिक कारण से न तो बीजेपी न आप और न ही किसी अन्य पार्टी के किसी नेता से मुलाकात की है और न ही किसी पार्टी ने मुझसे संपर्क किया है. मैं अपनी व्यक्तिगत दृष्टि और चेतना से बात कर रही हूं, क्योंकि मैं केवल वाहेगुरु जी के प्रति उत्तरदायी हूं और किसी और के प्रति नहीं. मैं सिर्फ पंजाब के लोगों की सेवा करना चाहती हूं, जिसे मैं एक एनजीओ बनाकर कर सकती हूं और गुरु ग्रंथ साहिब जी की शिक्षाओं को समझकर तथा जीवित विकसित संतों के सान्निध्य में रहकर निस्वार्थ सेवा और आत्मा के विकास के बारे में थोड़ा सीखते हुए अपनी आत्मा के उत्कर्ष के लिए कार्य करना चाहती हूं. हाल ही में भगवद गीता के उपदेशों के साथ तीन दिन का अद्भुत और आनंदमय समय बिताया और प्रेमानंद महाराज जी जैसे प्रबुद्ध संतों का आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला, जिन्होंने अनेक आत्माओं को उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ाया है.’ सीएम भगवंत मान से सीधा सवाल नवजोत कौर सिद्धू ने एक और पोस्‍ट में लिखा, ‘पंजाब के मुख्यमंत्री जी, जब मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब उन्होंने तीन बार स्पष्ट बहुमत से जीत हासिल की, क्योंकि वे गुजरात के हर नागरिक के प्रति जवाबदेह रहे और सभी विभागों के उपयोग प्रमाणपत्र (utilisation certificates) जमा करते थे, क्योंकि तभी केंद्र से जितनी राशि चाहिए उतनी मिल सकती है. आप पंजाब के लोगों के पैसे का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि आदि के लिए करने के बजाय अपने फायदे के लिए मुफ्त योजनाओं में नहीं कर सकते. मुफ्त बिजली देने के बजाय आपने चंडीगढ़ और कई अन्य राज्यों की तरह सोलर पावर को अनिवार्य क्यों नहीं किया? आपकी खनन और शराब नीति कहां है? यह तो बड़े लोगों के साथ साझेदारी में सिर्फ आपकी जेब भरने के लिए है. पहले अकाली दल और कांग्रेस के साथ यह 75:25 था और अब आप और कांग्रेस/अकाली के साथ 80:20 है. हर विभाग में भ्रष्टाचार फैला हुआ है और आपके शासन में यह सबसे अधिक है, क्योंकि आप अपने निजी हितों के लिए खरीदे हुए मीडिया चैनलों की एक छोटी टीम के साथ अकेले काम कर रहे हैं, जो आपकी महिमा गान में लगे हैं. आपने आपके खिलाफ बोलने वालों की आवाज दबा दी है. हर व्यक्ति का एक समय होता है और वाहेगुरु जी ही सभी के वास्तविक न्यायाधीश हैं. आप उनसे कुछ भी नहीं छुपा सकते.’

अल्काराज का ऐतिहासिक जीत पर सचिन की बड़ी सराहना, धैर्य और शांत स्वभाव की दी जमकर दाद

मेलबर्न  स्पेन के कार्लोस अल्काराज ने नोवाक जोकोविच को 2-6, 6-2, 6-3, 7-5 से मात देकर ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 में मेंस सिंगल्स का खिताब अपने नाम कर लिया है। इस जीत पर मास्टर-ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने अल्काराज के 'धैर्य और शांत स्वभाव' की तारीफ की है।  अल्काराज ने टेनिस इतिहास रचते हुए अपना पहला ऑस्ट्रेलियन ओपन मेंस सिंगल्स खिताब जीता और करियर ग्रैंड स्लैम हासिल करने वाले सबसे युवा पेशेवर टेनिस खिलाड़ी बन गए। जोकोविच को 11 ऑस्ट्रेलियन ओपन फाइनल में पहली शिकस्त देकर, 22 वर्षीय अल्काराज ओपन एरा में करियर ग्रैंड स्लैम पूरा करने वाले युवा खिलाड़ी बने, जो चारों बड़े टूर्नामेंट में ट्रॉफी जीतकर हासिल किया जाता है। इसके साथ ही अल्काराज करियर ग्रैंड स्लैम पूरा करने वाले 8वें खिलाड़ी बन गए। इस लिस्ट में फ्रेड पेरी (1935), डॉन बज (1938), रॉड लेवर (1962), रॉय एमर्सन (1964), आंद्रे अगासी (1999), रोजर फेडरर (2009), राफेल नडाल (2010) और नोवाक जोकोविच (2015) शामिल हैं। इनमें डॉन बज और रॉड लेवर ऐसे खिलाड़ी रहे जिन्होंने एक ही कैलेंडर वर्ष में ग्रैंड स्लैम जीतने का कारनामा किया। सचिन तेंदुलकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, "ऑस्ट्रेलियन ओपन में जो बात सबसे अलग थी, वह थी कार्लोस अल्काराज का धैर्य। लंबी रैलियों में, वह शांत रहे, अपने प्रतिद्वंद्वी पर दबाव बनाए रखा, और समझदारी से अपने मौके चुने। जिस तरह से उन्होंने कोर्ट को कवर किया, इतनी तेजी और सटीकता से, उन्हें देखकर मजा आया। बधाई कार्लोस अल्काराज। नोवाक जोकोविच की ओर से भी शानदार प्रयास रहा।" अल्काराज अब 7 बार के ग्रैंड स्लैम सिंगल्स चैंपियन हैं। इसके साथ वह अपने साथी जॉन मैकएनरो और मैट्स विलेंडर के साथ ऑल-टाइम सूची में बराबरी पर आ गए हैं। मेलबर्न में उनकी जीत ने यह भी दिखाया कि हाल के वर्षों में ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट्स पर अल्काराज और उनके बड़े प्रतिद्वंद्वी यानिक सिनर का दबदबा रहा है। दोनों ने मिलकर पिछले नौ ग्रैंड स्लैम खिताब जीते हैं, जिसकी शुरुआत जोकोविच की 2023 यूएस ओपन जीत से हुई थी। हालांकि, 2026 ऑस्ट्रेलियन ओपन के सेमीफाइनल में सिनर को जोकोविच से हार का सामना करना पड़ा। कार्लोस अल्काराज ने पूरा किया करियर ग्रैंड स्लैम कार्लोस अल्काराज ने इससे पहले विम्बलडन (2023, 2024), फ्रेंच ओपन (2024, 2025), यूएस ओपन (2022) और ऑस्ट्रेलियन ओपन (2026) का खिताब जीता था। इस जीत के साथ ही अल्कारेज ने करियर ग्रैंड स्लैम पूरा कर लिया है। कार्लोस अल्कारेज करियर ग्रैंड स्लैम पूरा करने वाले सबसे कम उम्र के मेंस खिलाड़ी हैं। अल्कारेज ने डॉन बज का 88 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा है, जिन्होंने 22 साल और 363 दिन की उम्र में करियर स्लैम पूरा किया था। वहीं अल्कारेज ने 22 साल और 272 दिन की उम्र में ये कारनामा किया है। कार्लोस अल्कारेज से पहले इन प्लेयर्स ने पूरा किया है करियर स्लैम कार्लोस अल्कारेज से पहले डॉन बज, रॉड लेवर, रॉय एमर्सन, आंद्रे अगासी, रोजर फेडरर, राफेल नडाल और नोवाक जोकोविच ने करियर स्लैम पूरा किया था। जब कोई खिलाड़ी अपने करियर में चारों मेजर टूर्नामेंट जीतता है, तो ये करियर स्लैम कहलता है। ये चार मेजर टूर्नामेंट ऑस्ट्रेलियन ओपन, फ्रेंच ओपन, विंबलडन और यूएस ओपन है।  

चिकन खाने से पहले सोचें, भागलपुर में बर्ड फ्लू के मामले सामने आए

 पटना भागलपुर के नवगछिया अनुमंडल परिसर स्थित मैदान में बड़ी संख्या में मृत मिले कौओं की जांच रिपोर्ट में बर्ड फ्लू वायरस की पुष्टि होते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है. जिला पशुपालन पदाधिकारी अंजली कुमारी ने आधिकारिक रूप से पुष्टि करते हुए बताया कि मृत कौओं का सैंपल जांच के लिए पटना और भोपाल लैब भेजा गया था, जहां से आई रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि हुई है. रिपोर्ट सामने आते ही जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है और प्रभावित क्षेत्र के चारों ओर 10 किलोमीटर के दायरे में सेनेटाइजेशन अभियान शुरू कर दिया गया है. वहीं इलाके के सभी पोल्ट्री फार्म से भी सैंपल इकट्ठा किया जा रहा है. 150 से अधिक कौओं की मौत से फैली दहशत बता दें कि 11 जनवरी की सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों ने एक ही स्थान पर पेड़ के नीचे 150 से अधिक मृत कौवे पड़े देखे थे. कई कौवे तड़पती हालत में भी मिले थे. घटना के बाद स्थानीय लोगों में बर्ड फ्लू की आशंका को लेकर दहशत फैल गई थी. सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सभी मृत पक्षियों को सुरक्षित तरीके से हटाया गया. सैंपल जांच के बाद हुई फ्लू की पुष्टि वन विभाग और पशुपालन विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर सैंपल कलेक्ट किए. मृत कौओं का सीरम जांच के लिए उच्च स्तरीय लैब भेजा गया था. भोपाल से आई रिपोर्ट में बर्ड फ्लू की पुष्टि होते ही प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय हो गई. जिला प्रशासन का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. स्वास्थ्य और पशुपालन विभाग लगातार निगरानी कर रहे हैं. प्रभावित इलाकों में कराया जा रहा सैनिटाइजेशन   डॉक्टर अंजली ने कहा कि 11 जनवरी को कौओं की मौत हुई थी. उस समय बहुत ठंड थी. ऐसा लगा कि ये ठंड के कारण मरे हैं. लेकिन इसका सैंपल हमने बाहर भेजा, जिसके बाद सरकार से इसकी पुष्टि हुई कि कौओं की मौत बर्ड फ्लू के कारण ही हुई है. फिलहाल हम लोग प्रभावित इलाकों में सैनिटाइजेशन करवा रहे हैं. हमने 11 तारीख को भी सैनिटाइज कराया था. इसके अलावा इस इलाके में जितने भी पोल्ट्री फार्म हैं, उनका जीरो सर्विलेंस करके दोबारा भेजा जाएगा.

उत्सवधर्मिता, टेम्पल टूरिज्म और कस्बा आधारित अर्थव्यवस्था बनेगी भारत के विकास की नई ताकत

महाकुंभ से मिली दिशा, बजट में सनातन अर्थशास्त्र को मिली नीतिगत पहचान उत्सवधर्मिता, टेम्पल टूरिज्म और कस्बा आधारित अर्थव्यवस्था बनेगी भारत के विकास की नई ताकत महाकुंभ के अनुभव से प्रेरित नीतियों के चलते टियर-2–3 शहरों और मंदिर नगरों पर बढ़ा फोकस महाकुंभ, काशी और अयोध्या सर्किट से मिली सीख, बजट में दिखा नया विकास दृष्टिकोण आस्था आधारित अर्थव्यवस्था को मुख्यधारा में लाने की केंद्र सरकार ने की पहल लखनऊ  महाकुंभ से सामने आए बड़े आर्थिक परिणामों और इसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान ने केंद्र सरकार को भारत की पारंपरिक आर्थिक संरचना की ओर नए सिरे से देखने को प्रेरित किया है। केंद्रीय बजट 2026–27 में पहली बार भारत के सनातन आर्थिक स्वरूप- उत्सवधर्मिता, टेम्पल टूरिज्म और कस्बा आधारित अर्थव्यवस्था को नीति स्तर पर पहचान मिलती दिख रही है। यह संकेत है कि भारत की विकास यात्रा अब केवल उद्योग और महानगरों तक सीमित न रहकर अपनी सांस्कृतिक और सभ्यतागत जड़ों से जुड़ते हुए आगे बढ़ेगी। आस्था के साथ अर्थव्यवस्था का बड़ा मॉडल है महाकुंभ यूपीडीएफ के अध्यक्ष पंकज जायसवाल के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सफलतापूर्वक आयोजित महाकुंभ ने यह स्पष्ट कर दिया कि आस्था आधारित आयोजन केवल धार्मिक नहीं होते, बल्कि बड़े आर्थिक उत्प्रेरक भी होते हैं। महाकुंभ के दौरान प्रयागराज, काशी और अयोध्या के सर्किट में होटल, परिवहन, स्थानीय व्यापार, अस्थायी और स्थायी रोजगार, स्वास्थ्य सेवाएं और लॉजिस्टिक्स सब मिलकर एक मजबूत आर्थिक इकोसिस्टम के रूप में सामने आए। इसी अनुभव ने नीति निर्माताओं को यह समझने में मदद की कि आस्था आधारित आयोजन अर्थव्यवस्था को जमीनी स्तर तक गति दे सकते हैं। सिटी इकोनॉमिक रीजन से कस्बों को नई ताकत बजट में टियर-2 और टियर-3 शहरों को सिटी इकोनॉमिक रीजन (सीईआर) के रूप में विकसित करने की घोषणा को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘विकसित टाउन’ की सोच का विस्तार माना जा रहा है। यह योजना उन कस्बों को फिर से मजबूत करेगी, जो सदियों तक भारतीय अर्थव्यवस्था की सप्लाई चेन की रीढ़ रहे हैं। कस्बों के मजबूत होने से उनके आसपास के गांवों के किसान, कारीगर और व्यापारी सीधे लाभान्वित होंगे। स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलेगा और ये कस्बे बड़े शहरों के लिए फुलफिलमेंट सेंटर के रूप में उभरेंगे। इससे अर्थव्यवस्था की मध्य कड़ी मजबूत होगी और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा। उत्तर प्रदेश देश का वह राज्य है जहां सबसे ज्यादा कस्बे और शहरी क्षेत्र हैं। ऐसे में सिटी इकोनॉमिक रीजन योजना का सबसे बड़ा लाभ भी यूपी को मिलने की संभावना है। ‘टेम्पल सिटी’ शब्द का बजट में आना ऐतिहासिक संकेत महाकुंभ से मिले आर्थिक अनुभव के बाद सरकार ने पहली बार बजट भाषण में ‘टेम्पल सिटी’ शब्द का इस्तेमाल किया है। ऐतिहासिक रूप से मंदिरों वाले नगर भारत की अर्थव्यवस्था के प्रमुख केंद्र रहे हैं। भारत में सदियों से पर्यटन का मूल आधार धार्मिक रहा है, जहां यात्रा के साथ व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामाजिक जुड़ाव स्वाभाविक रूप से होता रहा है। प्रयागराज-काशी-अयोध्या सर्किट ने सरकार को यह स्पष्ट संकेत दिया कि यदि देशभर के मंदिर वाले नगरों को केंद्र में रखकर योजनाएं बनाई जाएं, तो हजारों कस्बों और छोटे शहरों का समग्र विकास संभव है। सनातन अर्थशास्त्र से यूपी को सबसे ज्यादा फायदा बजट में सनातन अर्थशास्त्र की दिशा में उठाए गए कदमों से उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है। मथुरा, काशी, अयोध्या, प्रयागराज, नैमिषारण्य, गोरखनाथ, हस्तिनापुर, सारनाथ और कुशीनगर जैसे सनातन और बौद्ध परंपरा के प्रमुख केंद्र यूपी में ही स्थित हैं। इन क्षेत्रों में पर्यटन, सेवा क्षेत्र, स्थानीय उत्पाद और इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास से राज्य की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी। इनलैंड वाटरवे से नदी आधारित अर्थव्यवस्था को नई जान बजट में वाराणसी से पटना के बीच इनलैंड वाटरवे को और विकसित करने की घोषणा से यूपी में लॉजिस्टिक्स व्यवस्था सस्ती और प्रभावी होगी। यह पहल नदी आधारित अर्थव्यवस्था को फिर से जीवंत करेगी। गंगा, यमुना, घाघरा, राप्ती समेत कई नदियों का सबसे बड़ा नेटवर्क यूपी में होने के कारण राज्य सड़क, रेल और वायु मार्ग के साथ-साथ इनलैंड वाटर कनेक्टिविटी में भी अग्रणी भूमिका निभा सकता है। यह बजट इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश सनातन अर्थशास्त्र, कस्बा आधारित विकास और टेम्पल टूरिज्म के जरिए भारत के नए विकास मॉडल का केंद्र बन सकता है।