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‘पुराने झूठ का सहारा ले रहे सुखबीर बादल’, कुलदीप सिंह धालीवाल का तीखा वार

अमृतसर आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मुख्य प्रवक्ता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने रविवार को शिरोमणि अकाली दल की लीडरशिप पर निशाना साधते हुए कहा कि सुखबीर सिंह बादल अपने पिता प्रकाश सिंह बादल की तरह "दोहरी राजनीति" कर रहे हैं और पुराने रटे-रटाए भाषणों और नए दावों से पंजाब के लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। अमृतसर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कुलदीप धालीवाल ने कहा कि गैंगस्टरवाद को खत्म करने के बड़े-बड़े दावे करने से पहले सुखबीर सिंह बादल को अपने पुराने रिकॉर्ड का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि आप एक हलके में एक जाने-माने गैंगस्टर के परिवार के सदस्य को अपना उम्मीदवार बनाते हैं और फिर दूसरे चरण से गैंगस्टरों का सफाया करने की बातें करते हैं। यह सरासर पाखंड पंजाब के लोगों से छिपा नहीं रहेगा। तरनतारन के चुनावों का हवाला देते हुए 'आप' पंजाब के मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि अकाली दल ने आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों से जुड़े लोगों का खुलकर समर्थन किया और वोट मांगे। उन्होंने कहा कि आज वे दावा करते हैं कि वे गैंगस्टरों के घर ढहा देंगे, लेकिन कल वे उनके पारिवारिक समारोहों में शामिल हो रहे थे और उनके रिश्तेदारों को उम्मीदवार के रूप में खड़ा कर रहे थे। पंजाब सब कुछ याद रखता है। प्रकाश सिंह बादल के कार्यकाल से समानताएं दर्शाते हुए कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल उसी रास्ते पर चल रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि बादल परिवार ऐतिहासिक रूप से पंजाब की युवा पीढ़ी का शोषण करके बड़ा हुआ है, पहले राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे तत्वों को संरक्षण दिया और बाद में कानून व्यवस्था की स्थिति पर मगरमच्छ के आंसू बहाए। 2007 से 2017 तक अकाली-भाजपा शासन के दौरान संगठित गैंगस्टरवाद और नशे की मार की जड़ें गहरी हुईं। कुलदीप सिंह धालीवाल ने मौजूदा सरकार को अपराध पर लेक्चर देने के लिए सुखबीर सिंह बादल की नैतिक अधिकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वही लोग जिन्होंने पंजाब को लहूलुहान होने दिया, अब इसके मुक्तिदाता बनने का नाटक कर रहे हैं। जब नशा माफिया और आपराधिक नेटवर्क फले-फूले, तब सत्ता में कौन था? पंजाब के लोग जवाब जानते हैं। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के कामकाज के बारे में चिंता जताते हुए कुलदीप सिंह धालीवाल ने पूछा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब के लापता स्वरूपों, जमीनी सौदों और वित्तीय कुप्रबंधन के बारे में सम्मानित सिख धार्मिक शख्सियतों द्वारा उठाए गए सवालों पर अकाली लीडरशिप चुप क्यों रही। उन्होंने कहा कि मंचों से चीखने की बजाय 328 लापता स्वरूपों, जमीनों की बिक्री और पवित्र संस्थाओं से जुड़े आरोपों के बारे में सवालों के जवाब दो। पंजाब स्पष्टता और जवाबदेही का हकदार है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे विवादों को सामान्य बनाने की कोशिशें सिख समुदाय की भावनाओं का अपमान हैं। उन्होंने कहा कि रोजाना के घोटालों को आम बात कैसे माना जा सकता है? यह सिर्फ राजनीति नहीं है, यह श्रद्धा और जवाबदेही का विषय है। समुदाय पारदर्शिता का हकदार है। कुलदीप सिंह धालीवाल ने यह भी संकेत दिया कि माझे से मालवा तक के कई परंपरागत अकाली परिवारों ने पार्टी से दूरी बना ली है। उन्होंने कहा कि आज जो बचा है वह शिरोमणि अकाली दल नहीं है जो कभी जन आंदोलन का प्रतिनिधित्व करता था, बल्कि एक 'जीजा-साला' द्वारा चलाया जा रहा एक सीमित टोला है। पार्टी सिर्फ अस्तित्व बचाने के लिए संदिग्ध रिकॉर्ड वाले व्यक्तियों को शामिल करने तक सीमित होकर रह गई है। आप विधायक ने आगे कहा कि सुखबीर सिंह बादल ने किसानों के मुद्दों और भारत-अमेरिका व्यापारिक समझौते सहित प्रमुख राष्ट्रीय मुद्दों पर चुनावी चुप्पी साधी हुई है और केंद्र में सालों तक गठबंधन और सत्ता में भागीदारी के बावजूद भाजपा लीडरशिप को सवाल करने का साहस नहीं दिखाया। अपने संबोधन के अंत में कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि पंजाब के लोग राजनीतिक रूप से समझदार हैं और उन्हें नाटकीय भाषणों से गुमराह नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि आप डर पैदा नहीं कर सकते, आपराधिक तत्वों को संरक्षण नहीं दे सकते और फिर उन्हें खत्म करने का वादा नहीं कर सकते। पंजाब आपका चरित्र जानता है। नए ऐलान करने से पहले अपने पुराने कामों का जवाब दो।

चेहरे की ढीलापन और झुर्रियां कर रही हैं परेशान? फ्रीजर का ये देसी नुस्खा देगा तुरंत कसावट

बढ़ती उम्र के साथ त्वचा में कई बदलाव आने लगते हैं, जैसे झुर्रियां, फाइन लाइन्स, त्वचा का ढीलापन और चमक की कमी। ऐसे लक्षण त्वचा की उम्र बढ़ने या एजिंग का संकेत होते हैं। मार्केट में इन समस्याओं से निपटने के लिए कई महंगे क्रीम और ट्रीटमेंट मौजूद हैं। हालांकि, अगर आप एक सस्ता, सुरक्षित और नेचुरल उपाय चाहते हैं, तो बर्फ के टुकड़ों का उपयोग एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है। बर्फ न केवल त्वचा को ताजगी देता है, बल्कि इसमें छिपे सौंदर्य लाभ एजिंग की प्रक्रिया को धीमा करने में मदद करते हैं। त्वचा को टाइट बनाता है बर्फ त्वचा की ऊपरी लेयर को ठंडक प्रदान करता है, जिससे स्किन की मांसपेशियां सिकुड़ती हैं और त्वचा टाइट महसूस होती है। इससे ढीलापन कम होता है और उम्र का प्रभाव धीरे-धीरे घटने लगता है। ब्लड सर्कुलेशन में सुधार जब बर्फ चेहरे पर लगाई जाती है, तो यह त्वचा के नीचे के ब्लड फ्लो को बढ़ावा देती है। इससे स्किन को ऑक्सीजन और पोषण बेहतर तरीके से मिलता है, जिससे चेहरा फ्रेश और यंगर दिखता है। झुर्रियों और फाइन लाइन्स को कम करता है नियमित रूप से बर्फ का उपयोग झुर्रियों की गहराई को कम करता है और नई लाइन्स बनने से रोकता है। इससे स्किन स्मूद दिखती है। ओपन पोर्स और पफीनेस में राहत उम्र के साथ स्किन के पोर्स बड़े हो जाते हैं। बर्फ़ इन्हें टाइट करता है और चेहरे की सूजन व थकावट को कम करता है। बर्फ के उपयोग का सही तरीका एक साफ मलमल के कपड़े में 1-2 बर्फ के टुकड़े लपेटें।हल्के हाथों से चेहरे और गर्दन पर सर्कुलर मोशन में 1-2 मिनट तक धीरे-धीरे रगड़ें। बर्फ को सीधे स्किन पर न लगाएं, इससे स्किन जल सकती है।दिन में एक बार, सप्ताह में 4-5 बार इसका उपयोग करें। ज्यादा असरदार बनाने के लिए बर्फ बनाने के लिए साधारण पानी की जगह गुलाब जल, एलोवेरा जूस, ग्रीन टी, खीरे का रस या चुकंदर का रस मिलाएं।इनसे बने बर्फ के टुकड़ों में एंटीऑक्सीडेंट्स और त्वचा को पोषण देने वाले तत्व होते हैं जो एजिंग के संकेतों को और भी प्रभावी ढंग से कम करते हैं। बर्फ के टुकड़ों का उपयोग एक सरल, किफायती और नेचुरल एंटी-एजिंग उपाय है। नियमित रूप से अपनाने से यह न केवल त्वचा को टाइट और फ्रेश बनाता है, बल्कि आपको उम्र से कई साल पीछे भी ले जा सकता है।

वीरगंज हिंसा: धार्मिक स्थल पर विवाद भड़का, पुलिस लाठीचार्ज के बाद सेना संभालेगी मोर्चा

वीरगंज नेपाल के सीमावर्ती शहर वीरगंज में दो गुटों के बीच हुई हिंसक झड़प और पथराव के बाद स्थिति तनावपूर्ण देखते हुए परसा जिला प्रशासन ने सोमवार सुबह 9:45 बजे से अगले आदेश तक वीरगंज महानगर क्षेत्र में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए नेपाल पुलिस के साथ-साथ नेपाल सेना और आर्म्ड पुलिस फोर्स (एपीएफ) को सड़कों पर तैनात किया गया है। उल्लेखनीय है कि एक धार्मिक स्थल के पास विवाद से रविवार को भड़की हिंसा में आधा दर्जन लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने हालात को नियंत्रण में लाने के लिए लाठीचार्ज भी किया था। ​पर्सा के डीएसपी हरिबहादुर बस्नेत के अनुसार, विवाद वीरगंज वार्ड नं. 11 स्थित श्रीपुर में एक धार्मिक स्थल के पास शुरू हुआ। आरोप है कि सड़क पर खड़े स्थानीय युवकों के साथ बिना किसी ठोस कारण के मारपीट की गई, जिससे स्थिति अनियंत्रित हो गई और दोनों पक्षों में पथराव शुरू हो गया। इस हिंसा में ललन महतो, अमर महतो और धीरज साह सहित करीब आधा दर्जन लोग घायल हुए हैं, जिनका उपचार नारायणी अस्पताल में चल रहा है।​ पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है। घटना का मुख्य आरोपी नेकपा (एमाले) मधेस प्रदेश कमेटी के सदस्य मोहम्मद निजाम फिलहाल फरार बताया जा रहा है। पुलिस ने उनके घर पर छापेमारी की, लेकिन वह वहां नहीं मिला। प्रशासन उनकी तलाश में सघन छापेमारी कर रहा है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि आम चुनाव के समय साजिश के तहत यह वाक्या हुआ,जिससे सांप्रदायिक तनाव कायम हो गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कर्फ्यू के दौरान किसी भी प्रकार की सभा, जुलूस, प्रदर्शन या बैठक करना पूर्णतः वर्जित है। आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सुरक्षा बल सख्त कानूनी कार्रवाई करेंगे।​ वीरगंज के हालातों का सीधा असर भारतीय सीमा पर भी पड़ा है। अचानक कर्फ्यू से लग्न और होली के बाजार प्रभावित हुआ है। दोनो ओर लोग फंस गए हैं। रक्सौल और वीरगंज के बीच मैत्री पुल के रास्ते होने वाली आम आवाजाही पूरी तरह ठप है।भारतीय सीमा पर तैनात एसएसबी और स्थानीय पुलिस हाई अलर्ट मोड पर है। बॉर्डर के चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है ।ताकि सीमा पार से कोई अवांछित तत्व शांति भंग न कर सके।  

प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दिल्ली से 300 KM दूर हों कोयला उद्योग? केंद्र से मांगा जवाब

नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर में एयर पलूशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत में एक सवाल यह भी उठा कि कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट्स को दिल्ली की सीमा के 300 किलोमीटर दायरे से दूर रखा जाए। प्रस्ताव आया कि ऐसा कोई भी प्लांट दिल्ली की 300 किलोमीटर की परिधि में स्थापित न किया जाए। इस पर बेंच ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। इसके अलावा अदालत ने यूपी, हरियाणा, राजस्थान को आदेश दिया है कि वे कोयला आधारित उद्योगों को लेकर सार्वजनिक नोटिस जारी करें। इस दौरान यह भी सलाह दी गई कि कोयला आधारित उद्योगों को दिल्ली-एनसीआर से बाहर कर दिया जाए। इस पर बेंच ने केंद्रीय मंत्रालयों से जवाब मांगा है और पूछा कि कैसे इन उद्योगों को बाहर किया जा सकता है। ऐसा संभव भी है या नहीं। इस दौरान दिल्ली-एनसीआर में वाहनों के चलने से प्रदूषण बढ़ने का सवाल भी उठा। बेंच ने कहा कि इसका परीक्षण किए जाने की जरूरत है। अदालत ने अब इस मामले की सुनवाई के लिए 12 मार्च की तारीख तय की है। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित सरकारों से यह भी पूछा कि कैसे एनसीआर में एयर पलूशन कम हो। खासतौर पर कंस्ट्रक्शन और निर्माण गिराए जाने से उड़ने वाली धूल को कम किया जा सकता है। इस संबंध में अदालत से भी सवाल पूछा गया।  

अब हर महीने ₹3000! लाड़ली बहना योजना को लेकर CM मोहन यादव की बड़ी घोषणा

भोपाल विधानसभा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव(CM Mohan Yadav Ladli Behna Yojana) ने सोमवार को स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के लिए राशि बढ़ाकर तीन हजार रुपये करने का वादा भाजपा के संकल्प (घोषणा) पत्र में किया गया है। यह पांच साल यानी 2028 तक के लिए है। उन्होंने कहा कि किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है, हम तीन हजार रुपये देकर रहेंगे। नए पंजीयन को लेकर उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे सब होगा। कांग्रेस के सदस्य सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और विरोध स्वरूप बहिर्गमन कर गए। प्रश्नकाल में उठा मुद्दा प्रश्नकाल में कांग्रेस के महेश परमार ने नए पंजीयन न होने, तीन हजार रुपये का वादा करने के बाद भी न देने और 60 वर्ष के होते ही योजना से हितग्राही का नाम काटने का मुद्दा उठाया। साथ ही कहा कि सेना की अधिकारी सोफिया कुरैशी का अपमान करने वाले मंत्री विजय शाह यहां बैठे हैं। उन्होंने रतलाम में कहा कि सीएम के सम्मान कार्यक्रम में लाड़ली बहना नहीं आएंगी तो नाम काट देंगे। वहीं, राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा पर भी धमकाने का आरोप लगाया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पंजीयन प्रारंभ करने की तिथि पूछी। महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने बताया कि योजना के प्रारंभ से प्रश्न दिनांक तक 1,31,06,525 महिलाओं का पंजीयन किया गया। वर्तमान में 1,25,29,051 पंजीयन सक्रिय हैं। नए पंजीयन का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। लाड़ली बहना योजना में मृत्यु होने या 60 वर्ष से अधिक आयु होने पर हितग्राही को योजना से बाहर किया जाता है। 60 वर्ष से अधिक आयु होने पर अन्य योजना में पात्रता अनुसार आवेदन किया जा सकता है। राशि और व्यय का ब्यौरा वर्ष 2025-26 में 1,500 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से लाड़ली बहनों को 18,528 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। एक हजार रुपये प्रतिमाह से प्रारंभ हुई योजना की राशि में निरंतर वृद्धि हो रही है। इसका उपयोग बहनें शिक्षा, पोषण सहित अन्य कार्यों में कर रही हैं। विपक्ष ने किया बहिर्गमन मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि जब योजना लागू हुई थी तब कहा जाता था कि यह चुनावी योजना है और बंद हो जाएगी, लेकिन आज हम 1,500 रुपये प्रतिमाह दे रहे हैं। तीन हजार रुपये देने की घोषणा हमारे संकल्प पत्र में है, जो पांच वर्ष के लिए है और हम देकर रहेंगे। पंजीयन पर उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे सब होगा। विपक्ष जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और नारेबाजी करते हुए बहिर्गमन कर गया।

सतत जीवन शैली की ओर अग्रसर महाविद्यालय: ‘वेस्ट टू वेल्थ’ कार्यशाला में नवाचारों की गूंज

भोपाल आज दिनांक 23 फरवरी 2026 को महाविद्यालय में इको क्लब के तत्वावधान में पर्यावरण शिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का विषय “सतत जीवन शैली : वेस्ट टू वेल्थ” रहा। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपशिष्ट प्रबंधन, संसाधनों के पुनः उपयोग एवं सतत विकास की दिशा में प्रेरित करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. उमेश कुमार धुर्वे ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने छात्राओं को शोध, नवाचार एवं सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही इको क्लब द्वारा आयोजित इस सार्थक पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित करने की बात कही। इसके पश्चात इको क्लब प्रभारी डॉ. सतीश बालापुरे ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरणीय उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना है। उन्होंने अपशिष्ट प्रबंधन, वृक्षारोपण एवं जैव विविधता संरक्षण से जुड़े आगामी कार्यक्रमों की जानकारी भी साझा की। मुख्य वक्ता एवं पर्यावरणविद डॉ. आनंद पटेल हेक्सा हिवा इंटरनेशनल (HHI), भोपाल ने अपने उद्बोधन में “वेस्ट टू वेल्थ” की अवधारणा को व्यवहारिक रूप से समझाते हुए अनेक नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संतरे एवं नींबू के छिलकों से बायो-एंज़ाइम तैयार कर घरेलू स्वच्छता एवं जैविक उपयोग में लाया जा सकता है। साथ ही प्लास्टिक कचरे के पुनः उपयोग हेतु इको ब्रिक निर्माण की प्रक्रिया समझाई, जिसमें खाली प्लास्टिक बोतलों में अपशिष्ट प्लास्टिक भरकर उपयोगी निर्माण सामग्री तैयार की जाती है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण हेतु मल्टी लेयर सीड बॉल की तकनीक समझाई, जिसके माध्यम से बीजों को मिट्टी, खाद एवं सुरक्षात्मक परतों के साथ तैयार कर बड़े स्तर पर हरितावरण बढ़ाया जा सकता है। डॉ. पटेल ने सर्कुलर इकॉनॉमी के विचार को स्पष्ट करते हुए बताया कि संसाधनों का पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग ही सतत विकास का आधार है। उन्होंने “मिशन लाइफ” की 7 थीम के आधार पर दैनिक जीवन में अपनाए जा सकने वाले 70 व्यवहारिक उपायों की जानकारी भी दी। अंत में उन्होंने महाविद्यालय को एक इको-फ्रेंडली सोलर लैंप भेंट स्वरूप प्रदान किया, जो ऊर्जा संरक्षण एवं हरित जीवन शैली का प्रेरणादायी प्रतीक रहा। द्वितीय वक्ता एवं विषय विशेषज्ञ उषा दुबे नर्मदापुरम ने अपने संबोधन में दैनिक जीवन में छोटे-छोटे सकारात्मक परिवर्तनों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्राओं को सिंगल यूज़ प्लास्टिक से बचने, रसोई अपशिष्ट से कंपोस्ट तैयार करने तथा कपड़े एवं कागज़ के पुनः उपयोग के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक विद्यार्थी अपने घर और समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाए, तो “वेस्ट टू वेल्थ” एक जन आंदोलन का रूप ले सकता है। अंत में इको क्लब सह-प्रभारी डॉ. रजनीकांत वर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा कि “वेस्ट टू वेल्थ” केवल एक विचार नहीं, बल्कि व्यवहार में अपनाई जाने वाली जीवन शैली है। उन्होंने छात्राओं से घर एवं परिसर में कचरे का पृथक्करण, जैविक खाद निर्माण एवं पुनर्चक्रण की आदत विकसित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस परिवर्तन संभव है। मंच संचालन डॉ. मनीष दीक्षित ने किया तथा डॉ. रजनीकांत वर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्राध्यापकगण रजनीश जाटव, मनोज कुमार प्रजापति, धीरेंद्र दुबे, डॉ. दुर्गा मीना, प्रवीण साहू, मयंक गौर, रजनी हरियाले, नीलम दुबे,  नीलू लोवंशी, राहुल मालवीय एवं इको क्लब इकाई की छात्राएँ तथा महाविद्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।  

दाल के लिए मची अफरा-तफरी, पड़ोसी देश में सप्लाई ठप, कीमतें आसमान पर

फैसलाबाद पड़ोसी देश पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली की खबरें नई नहीं हैं। खस्ताहाल पाकिस्तान दुनिया की कई वैश्विक संस्थानों से कर्ज लेकर अपनी जरूरतें पूरी कर पा रहा है। अब हाल ही में यह खबरें सामने आई हैं कि पाकिस्तान में दाल के लिए हाहाकार मचा हुआ है। स्थिति यह है कि पाकिस्तान अब अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर हो चुका है। पाकिस्तान में दाल का उत्पादन लगातार घट रहा है, जिससे देश को जरूरतें पूरी करने के लिए हर साल करीब 98 करोड़ डॉलर आयात पर खर्च करने पड़ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कृषि विशेषज्ञों ने इस हालात पर गंभीर चिंता जताई है और कहा है कि अगर उत्पादन नहीं बढ़ा तो आयात पर निर्भरता और बढ़ेगी। पंजाब पल्सेज इंपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और ग्रेन मार्केट के चेयरमैन राणा मुहम्मद तैय्यब ने बताया कि 1998 से पहले पाकिस्तान दाल का प्रमुख निर्यातक देश था। लेकिन परवेज मुशर्रफ के दौर में लगाए गए निर्यात बैन के बाद किसानों का उत्साह कम हो गया, क्योंकि दाल कम मुनाफे वाली फसल बन गई। जानकारों के मुताबिक देश में हर साल करीब 16.2 लाख टन दाल की खपत होती है, जिसमें से लगभग 10.7 लाख टन आयात की जाती है। यानी पाकिस्तान को देश में खपत होने वाली करीब 80 प्रतिशत दाल आयात करनी पड़ती है। बारिश ने भी तरसाया तैय्यब ने जलवायु परिवर्तन के असर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि थल जैसे वर्षा आधारित इलाकों में समय पर बारिश हो जाए तो पैदावार 35 प्रतिशत तक बढ़ सकती है, लेकिन बारिश कम होने पर भारी नुकसान होता है और किसान अगले सीजन में दाल बोने से हिचकते हैं। जानकारों ने जताई चिंता ये मुद्दे विश्व दाल दिवस के मौके पर आयूब एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट के पल्सेज रिसर्च इंस्टीट्यूट में आयोजित एक सेमिनार में उठाए गए। विशेषज्ञों ने कहा कि पाकिस्तान की सालाना जरूरत करीब 15 लाख टन है, लेकिन लोकल उत्पादन इसका सिर्फ एक छोटा हिस्सा ही पूरा कर पा रहा है। इसी कारण हर साल करीब 10 लाख टन दाल आयात करनी पड़ती है। AARI के पल्सेज सेक्शन के चीफ साइंटिस्ट खालिद हुसैन ने कहा कि दाल मानव पोषण और मिट्टी की उर्वरता दोनों के लिए जरूरी है। लेकिन सीमित मुनाफा और निर्यात बैन के कारण किसान इसकी खेती से बच रहे हैं। दाल उत्पादन बढ़ाने के मकसद से एक प्रस्ताव तैयार कर संबंधित अधिकारियों को भेजा गया है, लेकिन उसे अभी तक मंजूरी नहीं मिली है।  

देवेंद्र फडणवीस का भावुक बयान- अजित दादा जैसा कद दोबारा नहीं मिलेगा, अपूरणीय क्षति

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि अजित पवार ऐसे नेता थे जो महाराष्ट्र के सबसे अच्छे मुख्यमंत्री बन सकते थे, लेकिन राज्य को उनका नेतृत्व उस रूप में कभी नहीं मिल पाया। उनके जाने से एक खालीपन पैदा हो गया है और अब वैक्यूम शब्द का असली मतलब समझ में आ रहा है। विधानसभा में बजट सत्र के पहले दिन शोक प्रस्ताव के दौरान अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस खालीपन को भर पाना नामुमकिन है। उन्होंने कहा कि “दादा” जैसा नेता फिर कभी देखने को नहीं मिलेगा। फडणवीस ने बताया कि विधानसभा सत्र के दौरान अजित पवार हमेशा सबसे पहले विधान भवन पहुंचते थे और अपनी सीट पर मौजूद रहते थे। सदन की कार्यवाही कितनी भी लंबी क्यों न चले, वह अंत तक अपनी जगह पर डटे रहते थे। यह बहुत पीड़ादायक है कि अब वह हमारे बीच नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस वर्ष अजित पवार अपना 12वां बजट पेश करते और अगले साल 13वां बजट पेश कर बैरिस्टर शेषराव वानखेड़े के रिकॉर्ड की बराबरी कर लेते, लेकिन उससे पहले ही उनका निधन हो गया। इस बार बजट पेश करने की जिम्मेदारी खुद संभाल रहे फडणवीस ने कहा कि बजट के मामले में अजित पवार कभी भी कठिन फैसले लेने से पीछे नहीं हटते थे। उन्होंने याद दिलाया कि जब वित्त विभाग ने ‘लड़की बहिन’ योजना पर भारी आर्थिक बोझ का हवाला देते हुए दोबारा विचार करने का सुझाव दिया था, तब भी अजित पवार अपने फैसले पर कायम रहे और यह सुनिश्चित किया कि योजना शुरू की जाए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “लड़की बहन योजना शुरू होने के बाद अजित पवार ने गुलाबी जैकेट पहनना शुरू कर दिया था। उन्होंने हमें भी वह जैकेट पहनाई थी। अब ये बातें सिर्फ यादें बनकर रह गई हैं। यह शोक प्रस्ताव लाना मेरी संवैधानिक जिम्मेदारी है, लेकिन मेरे लिए यह बहुत भावुक क्षण है।” महाकवि भास के नाटक स्वप्नवासवदत्तम की एक पंक्ति का उल्लेख करते हुए फडणवीस ने कहा कि अजित पवार का जाना केवल राजनीतिक नुकसान नहीं है, बल्कि यह उनके लिए गहरा व्यक्तिगत दुख भी है। उन्होंने कहा, “कहते हैं समय हर घाव भर देता है, लेकिन कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो कभी कम नहीं होते, चाहे कितना भी समय बीत जाए। यह वैसा ही दर्द है। किसी नेता के जाने के बाद हम अक्सर कहते हैं कि एक ‘खालीपन’ बन गया है, लेकिन जब अजित दादा जैसे नेता चले जाते हैं, तब सच में उस शब्द का मतलब समझ में आता है। उनकी जगह कोई और नहीं ले सकता।” मुख्यमंत्री ने एक प्रेरक पंक्ति भी दोहराई, “काम को जिंदगी दो और मौत को आराम।” उन्होंने अजित पवार को ऐसा नेता बताया, जिसने अपने जीवन का हर पल काम के लिए समर्पित किया और हर काम की योजना बनाई। फडणवीस ने कहा, “हम दोनों का जन्म 22 जुलाई को हुआ था। वह मुझसे 11 साल बड़े थे, इसलिए सच मायनों में मेरे ‘दादा’ थे। हमारी दस साल से अधिक समय तक गहरी दोस्ती रही। हम 1999 में मिले थे लेकिन 2014 के बाद हमारे बीच एक भावनात्मक रिश्ता बन गया। मैं एनसीपी को राजनीतिक सहयोगी मानता था, लेकिन अजित दादा को हमेशा भावनात्मक रूप से करीब माना।” उन्होंने 2019 में सरकार गठन से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि अजित पवार ऐसे नेता थे, जो हर स्थिति में अपनी बात खुलकर रखते थे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “2019 में सरकार बनाने का फैसला हुआ था, लेकिन बाद में उनके वरिष्ठ नेताओं ने अपना निर्णय बदल दिया, फिर भी क्योंकि उन्होंने मुझसे वादा किया था, उन्होंने उसे निभाने का फैसला किया। कई लोग इसे ‘सुबह-सुबह की शपथ’ कहते थे, लेकिन इस बात से दादा को चिढ़ होती थी। उनका कहना था कि ‘सुबह-सुबह’ का मतलब छह बजे होता है, जबकि हमने नौ बजे शपथ ली थी। उन्हें इस फैसले की बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। जब सुप्रीम कोर्ट ने हमारे खिलाफ फैसला दिया, तब हम दोनों ‘वर्षा’ बंगले पर मौजूद थे। मैंने उनसे कहा था कि वे अपना निर्णय खुद लें, क्योंकि उन्हें अपने साथ जुड़े लोगों के भविष्य के बारे में भी सोचना है।” फडणवीस ने आगे कहा कि अजित पवार समय के बेहद पाबंद नेता थे और उनका राजनीतिक सफर भी लंबा और प्रभावशाली रहा। उन्होंने भावुक होकर कहा, “दादा हमेशा समय का पूरा ध्यान रखते थे, लेकिन इस बार वे अपनी ही टाइमिंग से चूक गए। सबने उन्हें लंबी पारी खेलते देखा, लेकिन वे बहुत जल्दी हमें छोड़कर चले गए।” उन्होंने बताया कि अजित पवार छह बार उपमुख्यमंत्री रहे, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। वे अक्सर मजाक में कहते थे, “मैं किसी दिन मुख्यमंत्री बनूंगा लेकिन अभी के लिए उपमुख्यमंत्री ही ठीक है।”

धमकी भरे ई-मेल से दहली राजधानी, दो स्कूलों में बम की सूचना पर बढ़ाई गई सुरक्षा

नई दिल्ली दिल्ली के दो स्कूल को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। धमकी मिलने के बाद स्कूल की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। दिल्ली के आर्मी पब्लिक स्कूल को ई-मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली है। वहीं लोधी रोड स्थित एयर फोर्स बाल भारती स्कूल को भी ई-मेल के जरिए ही धमकी मिली है। आर्मी पब्लिक स्कूल को मिली धमकी को लेकर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया है कि ‘हम ईमेल के सोर्स की जांच कर रहे हैं। इसे भेजने वाले की पहचान करने के लिए साइबर सेल की मदद ली गई है। अब तक कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला है। एहतियात के तौर पर, स्कूल परिसर को खाली कर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। दिल्ली पुलिस की टीमें, बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वायड और दमकल विभाग मौके पर मौजूद हैं।’ स्कूल प्रशासन ने सोमवार सुबह ही पुलिस को इसकी सूचना दे दी थी। स्कूल प्रशासन की ओर से पुलिस को बताया गया कि ई-मेल में ऐसा दावा किया गया है कि स्कूल में बम इंस्टॉल कर दिए गए हैं। मालूम हो कि हाल में दिल्ली-एनसीआर के स्कूलों को बम से उड़ाने की लगातार धमकियां मिल रही हैं। यही नहीं देशभर में अदालतों को भी इसी तरह से बम से उड़ाने की धमकियां मिल रही हैं। ये सभी अफवाहें झूठी साबित हुईं, फिर भी इनसे स्टूडेंट्स और पैरेंट्स में दहशत जरूर फैली है। बीते हफ्ते भी मिली थी धमकी बीते हफ्ते गुरुवार को भी दिल्ली के तीन स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस की टीमें, बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वायड और दमकल विभाग मौके पर पहुंची। जिसके बाद एजेंसियों ने तुरंत स्कूलों को खाली कराकर तलाशी अभियान चलाया। जांच के बाद सामने आया कि ई-मेल के जरिए सिर्फ अफवाह फैलाई गई। ई-मेल के ही जरिए द्वारका स्थित सीआरपीएफ पब्लिक स्कूल, सेंट थॉमस स्कूल और पश्चिम एन्क्लेव स्थित डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। 9 फरवरी को मिली थी 10 स्कूलों को धमकी वहीं 9 फरवरी (सोमवार) को कम से कम 10 स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी वाले ई-मेल मिले थे। इसके बाद बड़े पैमाने पर सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया था। एहतियात के तौर पर इन सभी स्कूल को खाली करा लिया गया था।

राहुल गांधी का अनोखा अंदाज: ‘मोहम्मद दीपक’ से बातचीत, फिटनेस को लेकर किया दिलचस्प वादा

देहरादून/दिल्ली उत्तराखंड के कोटद्वार में 'मोहम्मद दीपक' से देशभर में चर्चा बटोरने वाले दीपक कुमार ने लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की है। राहुल गांधी ने इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की हैं। मुलाकात पर अपनी एफबी पोस्ट में राहुल गांधी ने लिखा, "हर इंसान, एक समान यही है भारतीयता, यही है मोहब्बत की दुकान। राहुल गांधी से मुलाकात के बाद दीपक कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राहुल गांधी ने उन्हें साथ देने का भरोसा दिया है। साथ ही कोटद्वार आकर उनके जिम की मेंबरशिप लेने का वादा भी किया है। बीते 26 जनवरी को कोटद्वार में मुस्लिम बुजुर्ग की दुकान के बाबा नाम को लेकर विवाद उठा था। हिंदू संगठन बजरंग दल ने नाम आपत्ति जताई थी और बुजुर्ग को दुकान का नाम बदलने की चेतावनी दी थी। इस पर बुजुर्ग के समर्थन में दीपक कुमार अकेले बजरंग दल से भिड़ गए। उन्होंने कथित तौर पर खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बुलाया था। दीपक के ये शब्द देशभर में वायरल हुए थे और सुर्खियां बटोरी। राहुल गांधी ने तब भी सोशल मीडिया पर दीपक कुमार की जमकर तारीफ की थी और कहा था कि दीपक देश के हीरो हैं। राहुल गांधी की एफबी पोस्ट कोटद्वार में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करने वाले जिम मालिक दीपक कुमार ने हाल ही में दिल्ली स्थित '10 जनपथ' पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात की। इस दौरान राहुल गांधी ने दीपक के साहस की सराहना करते हुए उनकी पत्नी से फोन पर बात की। राहुल गांधी ने दीपक कुमार से मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की हैं। साथ ही कैप्शन में लिखा है, "हर इंसान, एक समान यही है भारतीयता, यही है मोहब्बत की दुकान। उत्तराखंड के भाई 'मोहम्मद दीपक' से मुलाकात – एकता और साहस की ऐसी ही लौ हर भारतीय युवा में जलनी चाहिए।" राहुल गांधी पहले भी दीपक कुमार की जमकर तारीफ कर चुके हैं। राहुल के अलावा एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने भी दीपक की तारीफ में कहा था कि देश को उत्तराखंड के दीपक जैसे और दीपक चाहिए। राहुल कोटद्वार आएंगे और मेरे जिम की मेंबरशिप लेंगे- दीपक दीपक कुमार ने कहा कि "राहुल गांधी ने उनके परिवार से बात की है। कहा कि आपने कोई गलत काम नहीं किया। उन्होंने वादा किया कि वे जल्द कोटद्वार आएंगे और उनके जिम की मेंबरशिप लेंगे। राहुल गांधी ने मुझसे कहा है कि घबराने की जरूरत नहीं है। आप सही कदम पर हैं। मुझे बहुत खुशी मिली है कि राहुल जी अगर आएंगे और मेरे जिम की मेंबरशिप लेंगे।" सुप्रीम कोर्ट के 12 वकील भी ले चुके जिम की मेंबरशिप गौरतलब है कि कोटद्वार में दीपक कुमार का 'हल्क' नाम से जिम सेंटर है। यह कभी 150 से अधिक सदस्यों से भरा रहता था। दीपक कुमार ने हाल ही में आरोप लगाया था कि बाबा दुकान को लेकर हुए हंगामे के बाद उनकी एकमात्र आजिविका पर संकट छा गया है। उन्होंने कहा कि मारे डर के कई लोगों ने उनके जिम से मेंबरशिप हटा दी है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के लगभग 12 वरिष्ठ वकीलों ने 10000 रुपये का शुल्क चुकाकर एक साल के लिए जिम की सदस्यता ली है।