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भील समुदाय से निशानेबाजी सीखे थे आजाद, उनके जन्मस्थान पर होगा बड़ा पार्क, CM का ऐलान

आलीराजपुर महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद की विरासत को सहेजने के लिए मध्य प्रदेश सरकार उनकी जन्मस्थली भाभरा में एक बड़ा पार्क बनाएगी। इस बात की घोषणा प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने  की। आजाद का जन्म 23 जुलाई, 1906 को मध्य प्रदेश के झाबुआ में स्थित भाभरा में हुआ था और उन्होंने 27 फरवरी, 1931 को देश के लिए अपनी जान दे दी थी। महानायक की पुण्यतिथि पर भाभरा में आयोजित 'आजाद स्मृति समारोह' में बोलते हुए, यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद नगर (भाभरा) में उनके नाम पर एक बड़ा पार्क बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर आजाद 14 साल की छोटी सी उम्र में स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े थे और आजादी की लड़ाई में उन्होंने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। भील समुदाय से सीखी थी निशानेबाजी यादव ने आजाद को एक बेहतरीन निशानेबाज बताते हुए कहा कि उन्होंने अपना बचपन अलीराजपुर के भील समुदाय के बच्चों के बीच बिताया था और उनसे ही निशानेबाजी की कला भी सीखी थी। यादव ने कहा, ' आजाद की विरासत से जुड़ी जगहों को भी संस्कृति विभाग की मदद से पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।' आदिवासी नायकों से जुड़ी जगहों को संजोया जा रहा यादव ने कहा, 'राज्य सरकार आदिवासी महापुरुषों की विरासत को बचाने के लिए समर्पित है। खरगोन में टंट्या भील के नाम पर एक यूनिवर्सिटी बनाई गई है। इसी तरह, आजादी की लड़ाई के दूसरे आदिवासी नायकों से जुड़ी जगहों को भी संजोकर रखा जा रहा है।' आलीराजपुर जिले को मिली 171 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात इस दौरान मुख्यमंत्री ने आदिवासी बहुल अलीराजपुर जिले में 171 करोड़ रुपए की लागत वाले 49 विकास कार्यों का उद्घाटन और भूमिपूजन भी किया। उन्होंने कहा कि जिले में 1,800 करोड़ रुपए की लागत वाले नर्मदा सिंचाई प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, और इसके पूरा होने पर 170 गांवों को पानी मिलेगा। उदगढ़ में मशहूर आदिवासी त्योहार भगोरिया में शामिल हुए यादव ने कहा कि इस अनुभव ने उनका दिल खुशी से भर दिया। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि MP सरकार ने भगोरिया को राष्ट्रीय त्योहार के तौर पर मनाने का फैसला किया है। भगोरिया त्योहार होली से ठीक पहले मनाया जाता है, जिसमें हर हफ़्ते मेले लगते हैं जो पश्चिमी मध्य प्रदेश के आदिवासियों के रंगीन त्योहारों को दिखाते हैं। ये मेले अलीराजपुर, झाबुआ, धार, खरगोन और बड़वानी जैसे आदिवासी बहुल जिलों में 100 से ज्यादा जगहों पर लगते हैं।

बंगाल में वोटर लिस्ट पर संकट, मुस्लिम बहुल जिलों में नाम कटने का खतरा

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले मतदाता सूची को लेकर एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई है। राज्य में शनिवार को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने वाली है, लेकिन करीब 60,06,675 मतदाताओं के नाम पर अभी भी असमंजस के बादल छाए हुए हैं। ये कुल मतदाताओं का लगभग 8.5% हिस्सा हैं, जिनकी पात्रता की समीक्षा अब निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) के बजाय सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायिक अधिकारी कर रहे हैं। निर्वाचन आयोग के वैधानिक अधिकारियों (EROs और AEROs) ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' को बताया कि उन्होंने पूरी सावधानी से दस्तावेजों की जांच कर लाखों नामों को मंजूरी दे दी थी। हालांकि आयोग द्वारा नियुक्त माइक्रो-ऑब्जर्वर्स द्वारा विसंगतियां बताए जाने के बाद इन स्वीकृत नामों को सिस्टम से रिवर्स कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि सुनवाई की अंतिम तिथि 14 फरवरी तक यह संख्या अचानक कुछ लाख से बढ़कर 60 लाख के पार पहुंच गई। एक अधिकारी ने बताया कि 11 फरवरी के बाद से माइक्रो-ऑब्जर्वर्स ने उन मामलों को भी वापस भेजना शुरू कर दिया जिन्हें पहले हरी झंडी मिल चुकी थी। इसमें एक सेवारत वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। मुस्लिम बहुल जिलों में सबसे ज्यादा मामले लंबित आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि मतदाता सूची से नाम कटने या समीक्षा के दायरे में आने का सबसे ज्यादा असर अल्पसंख्यक बहुल जिलों में दिख रहा है। मुर्शिदाबाद में 11 लाख, मालदा में 8.28 लाख, दक्षिण 24 परगना में 5.22 लाख, उत्तर 24 परगना में 5 लाख, झारग्राम में 6,682 और कालिम्पोंग में 6,790 मामले लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के 530 न्यायिक अधिकारी इस सप्ताह से इन 60 लाख मतदाताओं के भाग्य का फैसला कर रहे हैं। जब तक ये अधिकारी नामों को मंजूरी नहीं देते, ये मतदाता आगामी विधानसभा चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगे। अंतिम सूची में इनके नाम के आगे निर्णय के अधीन लिखा होगा, जिसे न्यायिक मंजूरी मिलने के बाद ही हटाया जाएगा। निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में करीब 8,100 सूक्ष्म-प्रेक्षकों की नियुक्ति की थी, जो देश के किसी अन्य राज्य में नहीं किया गया। तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे चुनौती देते हुए आरोप लगाया है कि इन प्रेक्षकों ने वैधानिक अधिकारियों (EROs) के अधिकारों का अतिक्रमण किया है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग के अधिकारियों का तर्क है कि दस्तावेजों में भारी अनियमितताएं पाई गईं। आरोप है कि कई मामलों में AI-जनरेटेड वोटर आईडी और अवैध दस्तावेज अपलोड किए गए थे। एक रोल ऑब्जर्वर ने बताया कि पुरुषों के आवासीय प्रमाण के रूप में ICDS प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज दिए गए थे। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने स्थिति को अत्यंत अनिश्चित बताया है। उन्होंने कहा कि अदालती हस्तक्षेप और बार-बार की अपीलों के कारण न्यायिक अधिकारियों द्वारा संशोधन की यह अनूठी मिसाल बनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं की पात्रता पर सवाल उठना न केवल प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करता है, बल्कि यह चुनाव की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े करता है। यदि इन 60 लाख लोगों में से एक बड़ा हिस्सा वोट देने से वंचित रह जाता है तो इसके चुनावी परिणाम दूरगामी हो सकते हैं।

‘कपड़ा नहीं तो क्या हुआ, वर्दी तो है’: 6 कॉन्स्टेबल की रील्स पर विवाद, नोटिस जारी

रीवा खाकी पर इन दिनों रील बनाने की ऐसी सनक सवार है कि वर्दी की गरिमा और अनुशासन का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है। ताजा मामला रीवा पुलिस ट्रेनिंग सेंटर से सामने आया है, जहां पुलिस आरक्षक प्रशिक्षण ले रहे 6 नव आरक्षकों ने वर्दी में फूहड़ रील (Viral Police Reel) बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी। रील में आरक्षकों ने वर्दी का रौब दिखाते हुए कहा, शक्ल अच्छी नहीं है तो क्या हुआ, सरकारी नौकरी तो है। हमारे पास पैसा नहीं तो क्या हुआ, मंथली तो आता है। हमारे पास कपड़ा नहीं तो क्या, वर्दी तो है ना। आरक्षकों द्वारा यह रील सोशल मीडिया पर डालते ही वायरल हो गई। इसके बाद लोगों ने वर्दी की गरिमा, अनुशासन और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए। रीवा के पुलिस ट्रेनिंग सेंटर से यहां पर ट्रेनिंग ले रहें 6 नव आरक्षकों का एक वीडियो सोशल मीडिया में सर्कुलेट हुआ. वीडियो पर एसपी की नजर जा पड़ी, जिसके बाद इन नव आरक्षकों को भी रील का रियल खामियाजा भुगतना पडा. 6 नव आरक्षकों को कारण बताओ नोटिस रीवा पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण ले रहे 6 नव आरक्षकों का एक वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से सर्कुलेट हो रहा है. वीडियो में 6 नव आरक्षकों ने एक साथ मिलकर एक रील तैयार बनाई. बाद में जिसे सोशल मीडिया पोस्ट किया. देखते ही देखते रील सर्कुलेट हो गई और हजारों लोगों ने उसे देखा. वीडियो PTS एसपी के पास पहुंचा, अधिकारियों ने इस कृत्य को अनुशासनहीनता माना. इसके बाद एसपी ने कार्रवाई करते हुए प्रशिक्षण ले रहे सभी नव आरक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. रील सर्कुलेट होने के बाद एसपी ने लिया एक्शन रील मे सभी 6 नव आरक्षक एक साथ दिखाई दे रहें हैं उनके द्वारा मस्ती भरे अंदाज मे एक वीडियो रिकॉर्ड किया गया. जिसमे कहा गया की" "शक्ल अच्छी नहीं है तो क्या हुआ, सरकारी नौकरी तो है न" "हमारे पास पैसा नहीं है तो क्या हुआ, मंथली तो आता है न" "हमारे पास कपड़े नहीं तो क्या हुआ वर्दी तो हैं न" वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस प्रशिक्षण सेंटर मे पदस्थ PTS एसपी सुरेन्द्र कुमार जैन ने एक्शन लेते हुए सभी 6 नव आरक्षकों को नोटिस जारी करते हुए पत्र जारी किया है. पुलिस मुख्यालय से जारी हो चुके है सख्त निर्देश विभाग की ओर से जारी किए गए पत्र में उल्लेख किया गया की." समय-समय पर पुलिस मुख्यालय भोपाल से सोशल मीडिया में शासकीय कार्य के अतिरिक्त किसी भी प्रकार के वीडियो वर्दी में वायरल नहीं करने के निर्देश प्रसारित किये गये हैं. इस संबंध में प्रशिक्षण के दौरान आंतरिक व बाह्य प्रशिक्षकों द्वारा भी समय-समय पर आप सबको अवगत कराया गया है, वर्दी में रील्स न बनाये जाने के संबंध में निर्देशित भी किया गया है. वीडियो में नवआरक्षक बोले, "हमारे पास पैसा नहीं है तो क्या हुआ सख्त निर्देशों के बाद भी इसका पालन नहीं किया गया. दिनांक 25 फरवरी 2026 को समय 03:04 बजे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' ( ट्विटर) पर बने "मटियामेट ग्रुप" में आपके द्वारा उक्त निर्देशों का उल्लंघन करते हुए विभाग की छवि धूमिल करने वाली रील प्रदर्शित की गई है. रील में ग्रुप के सदस्यों द्वारा वर्दी में एक्टिंग करते हुए कहा जा रहा है कि "शक्ल अच्छी नहीं है तो क्या हुआ, सरकारी नौकरी तो है न. हमारे पास पैसा नहीं है तो क्या हुआ, मंथली तो आता है न. हमारे पास कपड़े नहीं है तो क्या हुआ, वर्दी तो है ना" रील को 25 फरवरी 2026 को रात 08:04 बजे तक तकरीबन 5,010 लोगों द्वारा देखा जा चुका है. साथ ही पुलिस विभाग के प्रति निगेटिव कमेंट भी किए जा रहे हैं. पुलिस विभाग की क्षवि को धूमिल कर रहे रील में बोले गए शब्द PTS एसपी के द्वारा जारी किए गए पत्र में यह भी जिक्र किया गया कि रील में बोले गए शब्द व सभी सदस्यों का अभिनव पुलिस विभाग जैसे अनुशासित विभाग के लिए प्रतिकूल है. साथ ही यह विभाग की क्षवि को भी धूमिल कर रहा है. आज ही स्पष्ट करें की क्यों न आपके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए. 25 फरवरी को पुलिस अधीक्षक कार्यालय पुलिस प्रशिक्षण शाला से सभी 6 नव आरक्षकों के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. उसी दिनांक को जवाब भी मांगा गया था. सभी 6 नव आरक्षकों को PTS एसपी ने जारी किया नोटिस     नव आरक्षक 1108 (चेस्ट नंबर 301) अनिल कड़ोदिया पदस्थापना जिला देवास     नव आरक्षक 4943 (चेस्ट नंबर 313 ) आनंद कुलवरे पदस्थापना जिला इंदौर     नव आरक्षक 1706 (चेस्ट नंबर 316) प्रदीप यादव पदस्थापना जिला उज्जैन     नव आरक्षक 788 (चेस्ट नंबर 317) राज कुमार सैन्धव पदस्थापना जिला उज्जैन     नव आरक्षक 677 ( चेस्ट नंबर 318 ) गोनू सतबाढ़िया पदस्थापना जिला उज्जैन     नव आरक्षक 692 (चेस्ट नंबर 320 ) सुरजीत गर्ग पदस्थापना जिला विदिशा

3 साल से लंबित प्रकरणों पर कलेक्टर ने लगाई फटकार

मनेन्द्रगढ़. जिले में तीन वर्ष से अधिक समय से लंबित प्रकरणों को लेकर कलेक्टर डी. राहुल वेंकट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कलेक्ट्रेट कार्यालय में आयोजित साप्ताहिक समय-सीमा की वर्चुअल बैठक में उन्होंने राज्य स्तर से लंबित महिला एवं बाल विकास, नगरीय प्रशासन, सूचना का अधिकार, पीएम स्वनिधि, ई-श्रम पोर्टल, कौशल विकास, निर्वाचन, वन, कृषि, शिक्षा, श्रम, पर्यटन, विद्युत, बैंकिंग, नगर निकाय और राजस्व विभागों से संबंधित मामलों की विस्तृत समीक्षा की। तीन साल से अधिक समय से लंबित प्रकरणों पर असंतोष व्यक्त करते हुए कलेक्टर ने संबंधित शाखाओं को कारण बताओ नोटिस जारी करने तथा मामलों के शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए। बैठक में आधार और मोबाइल बैंकिंग यूनिट से जुड़े लंबित प्रकरणों पर विशेष फोकस किया गया। आधार पेंडेंसी की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने विशेष आधार शिविर लगाने के निर्देश दिए, ताकि लंबित मामलों का त्वरित समाधान सुनिश्चित हो और नागरिकों को समय पर सेवाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि मोबाइल बैंकिंग यूनिट के माध्यम से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में आधार अपडेट, आधार सीडिंग, डीबीटी लिंकिंग और बैंक खाता सत्यापन जैसी सेवाएं प्रदान की जाती हैं, लेकिन कमजोर मॉनिटरिंग के कारण कई प्रकरण लंबित हैं। इसे अब स्वीकार नहीं किया जाएगा और मॉनिटरिंग व्यवस्था को सख्त किया जाएगा।

गांव में दलितों के बाल काटने की प्रथा अब हुई खत्म, सरकार ने दिलाया बराबरी का हक

बेंगलुरु कर्नाटक के गडग जिले के शिंगातलूर गांव में दलित समुदाय को बाल कटवाने की सेवा से सालों तक वंचित किया गया. सामाजिक कल्याण विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस गांव में एक खास समय पर दलितों को टोंसुर या बाल कटवाने की सेवा नहीं दी जाती थी. इस अंधविश्वास के कारण दलितों को बाल कटवाने के लिए पड़ोसी गांवों का रुख करना पड़ता था, जिससे उन्हें अनेक असुविधाओं का सामना करना पड़ता था. प्रभावित ग्रामीणों की शिकायतों और ज्ञापनों के बाद प्रशासन ने इस मामले में हस्तक्षेप किया. अब शिंगातलूर गांव में एक नया सैलून बनाया गया है, जो सोशल वेलन विभाग, तालुक प्रशासन, तालुक पंचायत, दलित संगठनों और शिवशरणा हडपदा अप्पन्ना समुदाय की संयुक्त पहल का परिणाम है. तिप्पापुर गांव के बसवराज हडपदा को इस सैलून का संचालन सौंपा गया है, ताकि सभी समुदाय के लोगों को समान और उचित नाई सेवा मिल सके. गांव में मान्यता थी कि महानवमी के दौरान वीरभद्रेश्वर स्वामी हडपदा समुदाय के घर आते हैं और उस समय दलितों के बाल कटवाने से दुर्भाग्य आता है. इस अंधविश्वास के चलते कुछ लोगों ने दलितों को बाल कटवाने की सेवा देना बंद कर दिया था, जिससे सामाजिक विभाजन और भेदभाव बढ़ा. सामाजिक कल्याण विभाग ने बताया कि यह पहल अस्पृश्यता उन्मूलन जागरूकता (छुआछूत) और सामंजस्यपूर्ण जीवन (वर्क लाइफ हार्मनी) कार्यक्रम के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य सामाजिक सद्भाव बढ़ाना और बुनियादी सेवाओं तक सभी की समान पहुंच सुनिश्चित करना है. सैलून का उदघाटन स्थानीय अधिकारियों और ग्रामीणों की मौजूदगी में किया गया, जो सामाजिक समरसता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

106830 किसानों को आज होगा 407 करोड़ का भुगतान

दुर्ग. जिले के समर्थन मूल्य पर धान विक्रय करने वाले किसानों को अंतर की राशि 407 करोड़ 89 लाख 82 हजार का आज भुगतान होगा. इससे कुल 106830 किसान लाभान्वित होंगे. इसमें कामन धान 15351 व ग्रेड ए पर 14931 रुपए प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि दी जाएगी. योजनांतर्गत जिले में वर्ष 2025-26 के कृषक उन्नति योजनांतर्गत विकासखण्ड- दुर्ग के 25057 कृषकों को 8703.03, पाटन 44122 कृषकों को 16995.87 लाख एवं धमधा के 37651 कृषकों को राशि 15090.54 लाख रुपए भुगतान की जा रही है. खरीफ 2025 में प्रदेश के किसानों से उपार्जित धान की मात्रा पर धान (कॉमन) पर राशि 731 रुपए प्रति क्वि. की दर से अधिकतम राशि रू. 15351 प्रति एकड़ तथा धान (ग्रेड-ए) का राशि 711 रुपए प्रति क्वि. की दर से अधिकतम 14931 रुपए प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि प्रदान किया जायेगा.

भिलाई स्टील प्लांट के एचएसएलटी ठेका श्रमिकों की पेंशन शुरु

भिलाई नगर. बीएसपी में एचएसएलटी ठेका श्रमिकों का पेंशन लंबे समय से लंबित था. स्टील ठेका श्रमिक यूनियन इंटक के प्रयास से 110 श्रमिकों को पेंशन मिलना शुरु हो गया है. उन्हें 2700 रु. प्रतिमाह पेंशन मिल रहा है तथा लगभग 170000 रु. मिलना प्रारंभ हो गया है. सेवानिवृत्त एचएसएलटी श्रमिकों ने इंटक के प्रयास के लिए इंटक आफिस जाकर आभार जताया. भिलाई इस्पात संयंत्र में साफ-सफाई एवं उत्पादन कार्य में विगत 40 वर्षों से कार्य करने के उपरांत सेवानिवृत्त हुए एचएसएलटी ठेका श्रमिकों का पेंशन लंबे समय से लंबित था. ईपीएफ के केवाईसी लंबित रहने के कारण लगभग 10 वर्षों से प्रयासों के बावजूद उनका पेंशन प्रारंभ नहीं हो पा रहा था. इस संबंध में ठेका श्रमिकों से ने स्टील ठेका श्रमिक यूनियन (इंटक) कार्यालय में अध्यक्ष संजय कुमार साहू संपर्क किया. विगत दो वर्षों के सतत प्रयासों तथा भिलाई इस्पात संयंत्र के उच्च प्रबंधन, सीएलसी ठेका प्रकोष्ठ, वित्त विभाग एवं कर्मचारी भविष्य निधि संगठन रायपुर के सहयोग से 250 ठेका श्रमिकों में से 110 श्रमिकों का पेंशन प्रारंभ हो गया है. शेष श्रमिकों की प्रक्रिया प्रगति पर है.

शिवराज सिंह ने सड़क पर घायल युवक को मदद दी, अपनी गाड़ी से भेजवाया अस्पताल

 भोपाल मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक फिर मिशाल पेश की है. जिसकी लोग तारीफ कर रहे हैं. हुआ ये कि वह भोपाल से ग्वालियर जा रहे थे, इस दौरान एक युवक सड़क पर घायल पड़ा था, जबकि उसे भीड़ ने घेरकर रखा था. इस दौरान जब शिवराज सिंह की नजर पड़ी तो उन्होंने अपना काफिला रुकवा दिया और खुद अपनी गाड़ी से युवक को अस्पताल पहुंचवाया. इसको लेकर उन्होंने खुद एक्स पर एक पोस्ट किया है. एक्स पर किए पोस्ट में उन्होंने लिखा कि मैं भोपाल से ग्वालियर की ओर एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहा था. रास्ते में सड़क किनारे एक घायल युवक अचेत अवस्था में दिखाई दिया. चारों ओर भीड़ थी, लोग खड़े थे, देख रहे थे. पर कोई आगे नहीं बढ़ रहा था. मैंने तुरंत गाड़ी रुकवाई. घायल युवक के पास पहुंचा और अपनी गाड़ी में तत्काल अस्पताल पहुंचाया. साथ ही डॉक्टर से बातचीत कर समुचित उपचार की व्यवस्था की.  श्यामला हिल्स के पास रुका काफिला जानकारी के अनुसार, केंद्रीय मंत्री का काफिला श्यामला हिल्स क्षेत्र से गुजर रहा था. किलोल पार्क के पास सड़क किनारे एक व्यक्ति घायल अवस्था में दिखाई दिया. यह देखते ही शिवराज सिंह चौहान ने तत्काल काफिला रुकवाया और स्वयं वाहन से उतरकर घायल के पास पहुंचे. उन्होंने आसपास मौजूद लोगों से तुरंत अस्पताल ले जाने को कहा. इतना ही नहीं, मंत्री ने घायल युवक को खुद सहारा देकर उठाया और अपने ही काफिले की गाड़ी से अस्पताल भिजवाया. जाते समय उन्होंने घायल से कहा कि तुम अस्पताल जाओ, हम फोन करवा रहे हैं. एक्स पर लिखा, नर सेवा ही नारायण सेवा इस घटना के बाद शिवराज सिंह चौहान ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, ''नर सेवा ही नारायण सेवा.'' उन्होंने कहा कि, ''मानवीय संवेदना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है. ग्वालियर के लिए रवाना होते समय रास्ते में घायल युवक को देखकर उन्होंने तत्काल मदद सुनिश्चित की.''   वीडियो वायरल , सोशल मीडिया पर सराहना घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई. समर्थकों और आम नागरिकों ने केंद्रीय मंत्री की संवेदनशीलता और तत्परता की सराहना की. कई लोगों ने इसे जनप्रतिनिधि के कर्तव्य और मानवीय मूल्यों का उदाहरण बताया. बताया जा रहा है कि मंत्री अपने आवास से एयरपोर्ट जा रहे थे, तभी उनके सामने यह घटना दिखी. जिसके बाद केंद्रीय मंत्री ने प्रोटोकॉल से ऊपर उठकर घायल को मदद पहुंचाई. पहले भी दिखा चुके हैं संवेदनशीलता यह पहला मौका नहीं है जब शिवराज सिंह चौहान ने इस तरह मानवीय पहल की हो. जुलाई 2025 में भी भोपाल के अवधपुरी इलाके में एक कार्यक्रम में जाते समय चेतक ब्रिज पर हादसे में घायल युवक की उन्होंने मदद की थी. उस समय भी उन्होंने काफिला रुकवाकर घायल को अस्पताल पहुंचाया और उपचार की व्यवस्था कराई थी.  शिवराज ने लोगों से की ये अपील हमने अक्सर देखा है कि इस तरह की घटनाओं में हम मदद के लिए हाथ बढ़ाने की बजाय तमाशबीन बनकर देखते रहते हैं, जिससे कीमती समय व्यर्थ हो जाता है और घायल व्यक्ति का जीवन खतरे में पड़ जाता है. एक अध्ययन के अनुसार हर वर्ष लगभग डेढ़ लाख से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं. विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि घायल को ‘गोल्डन ऑवर’ में उपचार मिल जाए, तो लगभग 50% जीवन बचाए जा सकते हैं. सोचिए, हमारी छोटी सी मदद और समय पर बढ़ाया गया एक हाथ कितनी माताओं की गोद सूनी होने से बचा सकता है. कितने बच्चों के सिर से पिता का साया हटने से रोक सकता है और कितनी बहनों के विश्वास को टूटने से बचा सकता है. मित्रों, किसी का जीवन बचाना सबसे बड़ा पुण्य है. सेवा ही सच्चा धर्म है और परोपकार ही हमारा कर्तव्य है. जब भी ऐसी स्थिति सामने आए तो आगे बढ़िए और मदद कीजिए. आपकी एक मदद किसी का जीवन बचा सकती है.  

बड़ी जीत की तलाश में पाकिस्तान, आखिरी मैच में सम्मान बचाने उतरेगा श्रीलंका

पाल्लेकल अगर मगर की कठिन डगर पर फंसा पाकिस्तान सेमीफाइनल में जगह बनाने की अपनी उम्मीद को जीवंत रखने के लिए शनिवार को यहां वाले टी20 विश्व कप सुपर आठ के अपने अंतिम मैच में बड़ी जीत हासिल करने की कोशिश करेगा जबकि संघर्षरत श्रीलंका सम्मानजनक विदाई लेने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगा। पाकिस्तान का प्रदर्शन अभी तक अच्छा नहीं रहा है और वह अपने ग्रुप में तीसरे स्थान पर है। इस ग्रुप से इंग्लैंड पहले ही सेमीफाइनल में जगह बना चुका है जबकि न्यूजीलैंड और पाकिस्तान अंतिम चार में जगह बनाने की होड़ में हैं। श्रीलंका अपने पहले दो मैच हार कर पहले ही सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गया है। अगर पाकिस्तान और न्यूजीलैंड की बात करें तो कीवी टीम बेहतर स्थिति में नजर आ रही है। न्यूजीलैंड के तीन अंक हैं और उसका नेट रन रेट (3.050) भी पाकिस्तान से बेहतर है। पाकिस्तान का अभी तक केवल एक अंक है और उसका नेट रन रेट भी माइनस 0.461 है। लेकिन पाकिस्तान के लिए अभी सारी उम्मीदें खत्म नहीं हुई हैं और वह सेमीफाइनल में जगह बना सकता है बशर्ते इंग्लैंड शुक्रवार को न्यूजीलैंड को बड़े अंतर से हरा दे और इसके बाद सलमान आगा की अगुवाई वाली टीम श्रीलंका पर बड़ी जीत हासिल कर दे। पाकिस्तान के बल्लेबाजों और गेंदबाजों के लिए अच्छा प्रदर्शन करना चुनौती है क्योंकि अभी तक टूर्नामेंट में वे अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं। पाकिस्तान की तरफ से सलामी बल्लेबाज साहिबजादा फरहान ही अभी तक अच्छा प्रदर्शन कर पाए हैं। उन्होंने 70.75 की औसत से 283 रन बनाए हैं, जिसमें एक शतक और दो अर्धशतक शामिल हैं। उनका स्ट्राइक रेट 158.10 है। फरहान को छोड़कर पाकिस्तान की टीम का कोई भी अन्य विशेषज्ञ बल्लेबाज इस प्रतियोगिता में तिहरे अंक का आंकड़ा नहीं छू पाया है। उसकी तरफ से सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाड़ियों की सूची में ऑलराउंडर शादाब खान दूसरे नंबर पर हैं। उन्होंने 111 रन बनाए हैं। कप्तान सलमान आगा (44 रन), साइम अयूब (70) और स्टार बल्लेबाज बाबर आजम (91) ने निराश ही किया है। ऐसे में पाकिस्तान की उम्मीदें फखर जमां पर टिकी होंगी। पाकिस्तान के गेंदबाजी आक्रमण में में उस्मान तारिक (10 विकेट) की मौजूदगी से उसे मजबूती मिली है। इसके अलावा शाहीन शाह अफरीदी ने इंग्लैंड के खिलाफ चार विकेट लेकर कुछ हद तक फॉर्म हासिल कर ली है। उस मैच में हालांकि वह अपनी टीम को जीत दिलाने में नाकाम रहे थे। श्रीलंका के पास अपने उत्साही प्रशंसकों को खुश करने का यह आखिरी मौका है लेकिन इसके लिए उसे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना पड़ेगा। श्रीलंका इस टूर्नामेंट का सह मेजबान है। पिछली बार जब 2011 में श्रीलंका सह-मेजबानी कर रहा था, तब वह उपविजेता रहा था। दासुन शनाका की टीम ने शानदार शुरुआत की और ग्रुप चरण में ऑस्ट्रेलिया को करारी शिकस्त देकर खिताब के दावेदारों में अपना नाम शामिल कर लिया था। लेकिन श्रीलंका उस जीत के बाद जिम्बाब्वे, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के खिलाफ लगातार तीन मैच हारकर सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पथुम निसांका का शतक सुदूर अतीत की किसी घटना जैसा लगता है, क्योंकि श्रीलंका खेल की प्रत्येक विभाग में जूझ रहा है। श्रीलंका की बल्लेबाजी में गहराई और दृढ़ता दोनों की कमी रही है, जिसके चलते वे नियमित रूप से जल्दी विकेट गंवाते रहे हैं और दबाव वाली परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन करने में नाकाम रहे हैं। उसके गेंदबाज भी विरोधी टीम के बल्लेबाजों के लिए खास परेशानी नहीं खड़ी कर पाए हैं। श्रीलंका के गेंदबाजों ने न्यूजीलैंड को मैच के आखिरी पांच ओवरों में तेजी से रन बनाने का मौका दिया, जबकि मैच पूरी तरह से उनके नियंत्रण में था। इसके बाद बल्लेबाज भी नहीं चल पाए और उसकी टीम को बड़ी हार का सामना करना पड़ा। आलम यह था कि अपनी टीम के निराशाजनक प्रदर्शन से क्षुब्ध श्रीलंका के प्रशंसक न्यूजीलैंड के जयकारे लगा रहे थे। टीम इस प्रकार हैं: श्रीलंका: दासुन शनाका (कप्तान), कुसल मेंडिस (विकेटकीपर), कामिल मिशारा, पथुम निसांका, कुसल परेरा (विकेटकीपर), पवन रत्नायके, चैरिथ असलांका, दुशान हेमंथा, जेनिथ लियानगे, कामिंडु मेंडिस, दुष्मंथा चमीरा, दिलशान मदुशंका, प्रमोद मदुशन, महीश थीक्षाना, दुनिथ वेललागे। पाकिस्तान: सलमान अली आगा (कप्तान), बाबर आजम, फखर जमां, ख्वाजा नफे (विकेट कीपर), साहिबजादा फरहान, उस्मान खान (विकेट कीपर), फहीम अशरफ, मोहम्मद नवाज, सैम अयूब, शादाब खान, अबरार अहमद, नसीम शाह, सलमान मिर्जा, शाहीन शाह अफरीदी, उस्मान तारिक। मैच भारतीय समयानुसार शाम 7:00 बजे शुरू होगा।  

चुनाव के टिकट का ऐलान, 4 उम्मीदवारों का नाम तय; जानिए कोयल मल्लिक की राजनीति में एंट्री

कलकत्ता  पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए अपने चार उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। इस सूची में राजनीति, प्रशासनिक सेवा, कानून और सिनेमा जगत की जानी-मानी हस्तियों को जगह दी गई है। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी देते हुए बताया कि पूर्व डीजीपी राजीव कुमार, अभिनेता से नेता बने बाबुल सुप्रियो, मशहूर वकील मेनका गुरुस्वामी और बंगाली अभिनेत्री कोयल मल्लिक को संसद के उच्च सदन के लिए चुना गया है। यह घोषणा राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले की गई है, जिसे ममता बनर्जी का एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। कौन हैं TMC के ये 4 दिग्गज उम्मीदवार? पार्टी ने अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को चुनकर एक संतुलित टीम बनाने की कोशिश की है: राजीव कुमार: राजीव कुमार बंगाल के प्रभावशाली पुलिस अधिकारी रहे हैं। उन्होंने जुलाई 2024 से लेकर 31 जनवरी 2026 को अपनी सेवानिवृत्ति तक राज्य के पुलिस महानिदेशक के रूप में कार्य किया। उनके प्रशासनिक अनुभव का लाभ पार्टी को दिल्ली में मिलेगा। बाबुल सुप्रियो: पूर्व केंद्रीय मंत्री और मशहूर गायक बाबुल सुप्रियो पहले भाजपा में थे, लेकिन बाद में उन्होंने TMC का दामन थाम लिया था। वे अपनी प्रखर वक्ता शैली के लिए जाने जाते हैं। कोयल मल्लिक: बंगाली सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री कोयल मल्लिक को उम्मीदवार बनाकर TMC ने ग्लैमर और जन-अपील का कार्ड खेला है। उनके पिता रंजीत मल्लिक भी बंगाल के दिग्गज अभिनेता रहे हैं। मेनका गुरुस्वामी: सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने IPAC मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का प्रतिनिधित्व किया था। उनकी कानूनी समझ संसद में पार्टी के पक्ष को मजबूती देगी। विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा संदेश TMC ने अपने उम्मीदवारों को बधाई देते हुए कहा है कि उन्हें इन नेताओं की नेतृत्व क्षमता और समर्पण पर पूरा भरोसा है। पार्टी ने उम्मीद जताई है कि ये चारों उम्मीदवार हर भारतीय के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए TMC की विरासत को आगे बढ़ाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले इन नामों का चयन करके ममता बनर्जी ने यह संदेश दिया है कि उनकी पार्टी हर वर्ग प्रशासन, कला और कानून के बुद्धिजीवियों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है।