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भारत में चीनी स्मार्टफोन कंपनियों की बिक्री में भारी गिरावट, 10 साल में पहली बार आई धड़ाम

 नई दिल्ली चीन की स्मार्टफोन कंपनियों को भारत में बड़ा झटका लगा है. करीब एक दशक बाद पहली बार इन ब्रांड्स की कमाई और बाजार हिस्सेदारी में गिरावट दर्ज की गई है. Xiaomi, Oppo, Realme और OnePlus जैसे बड़े नामों की बिक्री भारत में कमजोर पड़ी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2025 के दौरान इन कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ निगेटिव रही है, जबकि पिछले कई सालों से लगातार इनका ग्राफ ऊपर जा रहा था. डेटा बताता है कि भारत के स्मार्टफोन बाजार में चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी 2023 में करीब 54 फीसदी थी. अब यह घटकर लगभग 48 फीसदी के आसपास आ गई है.   क्यों गिर रहा भारत में चीनी स्मार्टफोन मार्केट? यानी हर दो में से एक फोन अब चीनी ब्रांड का नहीं रहा. यह बदलाव अचानक नहीं आया है. पिछले दो सालों में भारतीय ग्राहक धीरे धीरे प्रीमियम और ब्रांड वैल्यू वाले फोन्स की तरफ शिफ्ट कर रहे हैं. Apple और Samsung जैसे ब्रांड्स की बिक्री बढ़ी है, खासकर 30 हजार रुपये से ऊपर वाले सेगमेंट में. इस गिरावट की एक बड़ी वजह यह भी मानी जा रही है कि एंट्री लेवल और मिड रेंज सेगमेंट में मार्जिन काफी कम हो गया है. पहले जहां चीनी कंपनियां सस्ते फोन बेचकर बड़ी संख्या में यूजर्स जोड़ लेती थीं, अब उसी सेगमेंट में मुकाबला बहुत तेज हो गया है. ऐपल और सैमसंग का दबदबा भारतीय ब्रांड्स और पुराने इंटरनेशनल प्लेयर्स भी आक्रामक ऑफर दे रहे हैं. साथ ही सरकार की मेक इन इंडिया पॉलिसी और लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर जोर का असर भी बाजार पर दिख रहा है. एक और बड़ा कारण प्रीमियम फोन की डिमांड का बढ़ना है. भारत में अब ज्यादा लोग 5G, बेहतर कैमरा और लंबी सॉफ्टवेयर सपोर्ट वाले फोन चाहते हैं. इस सेगमेंट में Apple और Samsung की पकड़ मजबूत है. प्रीमियम स्मार्टफोन्स पर फोकस Xiaomi और Oppo जैसी कंपनियों ने प्रीमियम फोन लॉन्च किए हैं, लेकिन उन्हें अभी तक वैसी ब्रांड ट्रस्ट नहीं मिल पाई है जैसी पुराने खिलाड़ियों को मिली है. OnePlus का प्रीमियम सेगमेंट में नाम जरूर है, लेकिन उसकी कुल बिक्री पर असर पड़ा है. इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि चीनी कंपनियों के लिए यह चेतावनी है. अगर वे सिर्फ सस्ते फोन पर टिके रहेंगी, तो आने वाले समय में मुश्किल बढ़ेगी. अब उन्हें भारत में ज्यादा निवेश करना होगा, लोकल मैन्युफैक्चरिंग बढ़ानी होगी और प्रीमियम सेगमेंट में भरोसेमंद इमेज बनानी होगी. इसके साथ ही आफ्टर सेल्स सर्विस और सॉफ्टवेयर अपडेट पर भी फोकस करना पड़ेगा, क्योंकि अब भारतीय ग्राहक सिर्फ कीमत नहीं, पूरे एक्सपीरियंस को देखकर फोन खरीद रहा है. चीनी कंपनियों का सप्लाई चेन अब भी मजबूत हालांकि जानकार यह भी कहते हैं कि चीनी कंपनियां इतनी आसानी से बाजार से बाहर नहीं होंगी. इनके पास बड़ा नेटवर्क है, मजबूत सप्लाई चेन है और भारत में पहले से करोड़ों यूजर्स मौजूद हैं. आने वाले महीनों में ये कंपनियां नई स्ट्रैटेजी के साथ वापसी करने की कोशिश करेंगी. लेकिन फिलहाल तस्वीर साफ है. भारत का स्मार्टफोन बाजार बदल रहा है और चीनी ब्रांड्स को अपनी चाल बदलनी होगी, वरना उनकी पकड़ और ढीली पड़ सकती है.

100 रुपये घंटा, 10 मिनट में कामवाली: क्या टिक पाएगा यह नया बिजनेस मॉडल?

नई दिल्ली शनिवार की सुबह थी. नोएडा की हाई-राइज सोसायटी में रहने वाली 43 साल शिवानी माथुर दिन की तैयारी में लगी थीं, तभी उनका फोन व्हाट्सऐप नोटिफिकेशन से बजा-दीदी, आज मैं नहीं आऊंगी. यह मैसेज उनके लिए नया नहीं था, लेकिन इस बार समस्या यह थी कि घर में मेहमान आने वाले थे. उन्होंने जल्दी से सोसायटी के ग्रुप पर मैसेज किया-किसी की हाउस हेल्प आज आ सकती है क्या? जवाब आया-अर्बन क्लैप (Urban Clap) का इंस्टाहेल्प (InstaHelp) ट्राय करो, 10–15 मिनट में कोई आ जाएगा. कुछ देर बाद बैंगनी यूनिफॉर्म में एक वर्कर उनके दरवाजे पर थी. उसने घर साफ किया, बर्तन धोए और किचन में मदद की-आटा गूंथा, सब्जियां काटीं और चटनी के लिए पुदीना–धनिया तैयार किया. दो घंटे में सारा काम पूरा हो गया और खर्च 200 रुपये से भी कम आया. तभी से यह उनकी फिक्स्ड बैकअप बन चुकी है. शहरों में नया ट्रेंड: इंस्टेंट हाउस हेल्प  शिवानी अकेली नहीं हैं. अब पूरे अर्बन इंडिया में लोग इस सुविधा को अपना रहे हैं. पहले पड़ोसियों और जान-पहचान में मदद ढूंढी जाती थी, अब बस ऐप खोलते ही 10 मिनट में मदद घर पर मिल जाती है. ओला–उबर ने जैसे ट्रैवल बदला, स्विगी–जोमैटो ने फूड डिलीवरी, ब्लिंकिट–बिगबास्केट ने ग्रॉसरी उसी तरह अब स्नैबिट, प्रोंटो, अर्बन क्लैप इंस्टाहेल्प और ब्रूमीज घर के कामों के लिए तैयार हैं. स्नैबिट ने अगस्त में 1 लाख ऑर्डर से अक्टूबर में 3 लाख और अब फरवरी में लगभग 8.5 लाख ऑर्डर पूरे कर लिए हैं. अर्बन कंपनी का इंस्टाहेल्प भी फरवरी 2026 में 50,000 डेली बुकिंग तक पहुंच गया है. 100 रुपये में एक घंटा! कैसे? अर्बन कंपनी  पर एक घंटे की सर्विस 100 रुपये की पड़ती है.स्नैबिट पर तीन एक-घंटे वाली विजिट का पैक 149 रुपये में मिलता है, यानी लगभग 50 रुपये प्रति घंटा.वर्कर्स के नेटवर्क पर यह मॉडल चलता है. बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और ट्रेनिंग के बाद वे ऐप पर जॉब रिक्वेस्ट लेते हैं, बिल्कुल ओला/उबर की तरह है.  बेहतर सैलरी और सम्मान ज्यादातर महिला वर्कर्स के लिए यह बड़ा बदलाव है.नोएडा सेक्टर 121 में काम करने वाली सुनीता कहती हैं कि अर्बन कंपनी (Urban Company) से मुझे 30,000 रुपये मिलते हैं. 8 घंटे पूरे करना है, लेकिन एक साथ करना जरूरी नहीं. अब 6 बजे से भागमभाग नहीं करनी पड़ती. बच्चों को स्कूल भेजकर 8 बजे के स्लॉट के बाद काम शुरू कर लेती हूं. कम डिमांड वाले इलाकों में भी उनकी फिक्स्ड सैलरी सुरक्षित रहती है.2 घंटे वाले मॉडल में 10,000 रुपये फिक्स के साथ बोनस भी मिलता है.SOS फीचर, शिकायत का विकल्प और हेल्थ इंश्योरेंस भी दिया जाता है. कई महिलाएं कहती हैं कि यूनिफॉर्म पहनने से सम्मान महसूस होता है. इतनी सैलरी, इतनी सस्ती कीमत-चल कैसे रहा है यह मॉडल? असल में कंपनियां अभी स्केल पर फोकस कर रही हैं, मुनाफे पर नहीं.अर्बन कंपनी के इंस्टाहेल्प ने Q3 FY 2026 में 61 करोड़ रुपये का EBITDA लॉस दिखाया.स्नैबि और प्रोंटो  भारी वीसी फंडिंग पर चल रहे हैं.स्नैबिट को 56 मिलियन डॉलर और प्रोंटो (Pronto) को 13 मिलियन डॉलर मिल चुके हैं. इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह मॉडल वही रास्ता पकड़ेगा, जो कैब और फूड डिलीवरी में देखा गया.शुरुआत में ज्यादा इंसेंटिव, बाद में कटौती होगी.वर्कर्स की आज की कमाई धीरे-धीरे कम हो सकती है.कस्टमर्स के लिए दाम बढ़ना भी तय माना जा रहा है.अर्बन कंपनी अभी 60 फीसदी डिस्काउंट के बाद 99 रुपये में सर्विस दे रही है. आगे चलकर कीमतें बढ़ेंगी. क्या लोग फिर भी पैसे देंगे? यही बड़ा सवाल है. हो सकता है 'बहुत सस्ता, बहुत अच्छा' वाला फेज खत्म हो जाए, लेकिन एक बात साफ दिख रही है-कंज्यूमर बर्ताव बदल रहा है.लोग ऐप-आधारित सुविधाओं के इतने आदी हो चुके हैं कि शायद आगे चलकर ज्यादा पैसे देकर भी यह सुविधा नहीं छोड़ेंगे.भारत का इंस्टेंट हाउस-हेल्प सेक्टर इसी बदलाव की दहलीज़ पर खड़ा है.तेज, आसान और अब हर घर की जरूरत बनता हुआ.

ग्रामीण अंचलों में वर्षों पुरानी ‘बर्तन प्रथा’ बंद, होली पर नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना

भोपाल  चंद्रवंशी खाती समाज ने सामाजिक सुधार की दिशा में एक बड़ा और साहसिक कदम उठाया है. ग्राम पंचायत खेरी स्थित हनुमान मंदिर में समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि होली के पर्व पर बरसों से चली आ रही 'बर्तन प्रथा' को अब पूरी तरह समाप्त किया जाएगा. समाज के इस निर्णय का उल्लंघन करने वाले परिवार पर 5000 रुपये का आर्थिक दंड लगाने का प्रावधान भी किया गया है. फिजूलखर्ची रोकने के लिए कड़ा फैसला बैठक में ग्राम खेरी के सरपंच प्रतिनिधि धनपाल सिंह वर्मा गांव के पटेल मेहरबान सिंह वर्मा के नेतृत्व में समाज के वरिष्ठजनों और प्रबुद्ध नागरिकों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि त्योहारों के नाम पर बढ़ती फिजूलखर्ची और उपहारों के लेन-देन की प्रतिस्पर्धा से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है. 'बर्तन प्रथा' जैसी कुरीतियां समाज में भेदभाव पैदा करती हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए समाज ने अब इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है.  क्या है 'बर्तन प्रथा'? ग्रामीण अंचलों में विशेषकर होली या दीपावली जैसे बड़े त्योहारों पर, शादीशुदा बेटियों और बहनों के घर (ससुराल) जाकर उन्हें उपहार देने की परंपरा रही है. इस परंपरा में कपड़ों और मिठाई के साथ-साथ पीतल, तांबे या स्टील के बर्तनों का सेट (जैसे थाली, लोटा, बाल्टी या कड़ाही) भेंट करना अनिवार्य माना जाने लगा. इसी लेन-देन की प्रक्रिया को 'बर्तन प्रथा' कहा जाता है. समाज में यह एक तरह की होड़ बन गई कि कौन कितने कीमती और बड़े बर्तन देता है. लोग अपनी आर्थिक स्थिति से बाहर जाकर दिखावा करने लगे. आर्थिक दबाव: मध्यम और गरीब परिवारों के लिए हर साल होली पर महंगे बर्तन खरीदना एक बड़ा वित्तीय बोझ बन गया. कई बार इसके लिए कर्ज तक लेना पड़ता था. ससुराल में अपमान का डर: यदि कोई परिवार कम बर्तन देता या साधारण बर्तन ले जाता, तो अक्सर बहू-बेटियों को ससुराल में ताने सुनने पड़ते थे. ग्रामीणों ने किया फैसले का स्वागत ग्राम पंचायत खेरी के इस निर्णय की आसपास के क्षेत्रों में भी सराहना हो रही है. ग्रामीणों का मानना है कि इस प्रकार के कड़े निर्णयों से न केवल समाज में समानता आएगी, बल्कि युवाओं को भी फिजूलखर्ची से दूर रहने की प्रेरणा मिलेगी. समाज के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जुर्माने की राशि का उपयोग समाज के सामूहिक कार्यों और विकास में किया जाएगा. ग्रामीणों का कहना है कि समाज के विकास के लिए पुरानी और बोझिल परंपराओं को त्यागना आवश्यक है. होली खुशियों का त्योहार है, इसे सादगी और प्रेम से मनाया जाना चाहिए. यह फैसला समाज के हर वर्ग के हित में लिया गया है.

समय से पहले गर्मी का असर, प्रदेश में पारा 37 डिग्री के करीब

जयपुर राजस्थान में इस बार गर्मी ने तय समय से पहले ही दस्तक दे दी है। दिन का अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है। पश्चिमी जिलों के साथ अब पूर्वी, उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों में भी तेज धूप के कारण दिन का तापमान तेजी से बढ़ने लगा है। गुरुवार को जयपुर, अजमेर और उदयपुर सहित कई जिलों में अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार राज्य में अगले एक सप्ताह तक मौसम साफ रहेगा। वहीं आगामी 48 घंटों में तापमान में करीब 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी की संभावना है, जिससे गर्मी का असर और तेज हो सकता है। पिछले 24 घंटों के दौरान पूरे राज्य में दिनभर तेज धूप रही और हल्की गर्मी महसूस की गई। पश्चिमी राजस्थान में गर्मी का प्रभाव अधिक देखने को मिला। बाड़मेर में अधिकतम तापमान 36.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जैसलमेर, जोधपुर और बीकानेर में भी तापमान बढ़ा और इन शहरों में अधिकतम तापमान 34 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। अब पूर्वी राजस्थान में भी गर्मी का असर दिखने लगा है। गुरुवार को जयपुर, अजमेर, उदयपुर, गंगानगर और कोटा में अधिकतम तापमान 31 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज हुआ। सीकर और सिरोही सहित अधिकांश शहरों में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रहा। हालांकि दिन में तेज गर्मी के बावजूद सुबह और शाम के समय हल्की ठंडक से लोगों को राहत मिल रही है। गुरुवार को अधिकांश शहरों में न्यूनतम तापमान 15 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले एक सप्ताह तक न्यूनतम तापमान में खास बदलाव की संभावना नहीं है, जबकि अधिकतम तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

कक्षा 1 से 12वीं तक मप्र में सरकारी स्कूलों के नामांकन में लगातार गिरावट दर्ज

भोपाल  मप्र के सरकारी स्कूलों में बच्चों का नामांकन लगातार कम हो रहा है। 2015-16 से 2024-25 के बीच कक्षा 1 से 12वीं तक के नामांकन में 22.03 लाख तक कमी दर्ज की गई है। विधायक प्रताप ग्रेवाल के सवाल पर स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया कि नामांकन में गिरावट की वैज्ञानिक जांच के लिए 8 मई 2025 को 'अटल बिहारी सुशासन संस्थान' को पत्र लिखा गया था। हैरानी की बात यह है कि विभाग द्वारा रिमाइंडर के बावजूद 10 महीने बीत जाने पर भी संस्थान ने अब तक कार्ययोजना पेश नहीं की है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि विभाग 'कागजी छात्र' दिखाकर अपनी पीठ थपथपा रहा है और असली आंकड़ों को छिपाकर हजारों करोड़ का भ्रष्टाचार किया जा रहा है। दस साल में 22 लाख बच्चों ने पढ़ाई छोड़ी जीतू पटवारी ने कहा है कि पिछले 10 सालों में सरकारी स्कूलों से 22 लाख से अधिक बच्चे पढ़ाई छोड़ चुके हैं, जिससे नामांकन में भारी गिरावट आई है। उन्होंने इसे सरकार की शिक्षा नीति की पूरी नाकामी करार देते हुए दावा किया कि जहां दुनिया के विकसित देशों में बच्चे अंतरिक्ष और मंगल ग्रह पर पानी की खोज कर रहे हैं, वहीं मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चे बुनियादी सुविधाओं जैसे शिक्षक, ब्लैकबोर्ड, किताबें और ठीक-ठाक भवन ढूंढने को मजबूर हैं। जीतू पटवारी ने सरकार से किए सवाल बता दें कि विधानसभा में कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल के सवाल के जवाब में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने जानकारी दी है कि 2015-16 से 2024-25 के बीच कक्षा एक से लेकर बारहवीं तक के स्टूडेंट्स के नामांकन में 22.03 लाख की कमी आई है। इसे लेकर पिछले साल मई में सरकार ने अटल बिहारी सुशासन संस्थान को पत्र लिखकर नामांकन मे गिरावट की वैज्ञानिक जांच करने को कहा था। लेकिन लगभग दस महीने बीत जाने पर भी संस्थान की तरफ से इसे लेकर कोई एक्शन प्लान प्रस्तुत नहीं किया गया है जबकि इस बीच स्कूल शिक्षा विभाग उन्हें रिमाइंडर भी दे चुका है। इसी मामले पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इन बच्चों को “लापता” की श्रेणी में रखते हुए सरकार से सवाल किया कि इतने बड़े पैमाने पर बच्चे स्कूल क्यों छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा है कि ‘प्रदेश में लाड़ली बहनें लापता होने के बाद अब स्कूल के बच्चे भी लापता हो रहे हैं।’ विपक्ष का आरोप है कि गिरावट का खेल साल 2008-09 से ही शुरू हो गया था, लेकिन सरकार केवल 2015-16 के बाद के समय की जांच करा रही है। आंकड़ों के अनुसार, 2008 से 2015 के बीच ही 40.62 लाख बच्चे कम हो चुके थे, जिसे जांच में शामिल नहीं किया गया है। विधायक ने इस पूरे मामले को शिक्षा के नाम पर हो रहे बड़े 'घोटाले' से जोड़ते हुए इसकी सीबीआई जांच और सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। एक साल में ही एक लाख छात्रों का अंतर… जानकारी में सबसे बड़ा खुलासा आंकड़ों की विसंगति को लेकर हुआ है। जानकारी में सामने आई अलग-अलग सूचियों में छात्र संख्या मेल नहीं खा रही है। वर्ष 2015-16 के लिए ही एक सूची में संख्या 22.62 लाख है, तो दूसरी में 23.57 लाख बताई गई है। एक ही साल के डेटा में एक लाख बच्चों का अंतर आया है। आंकड़े छिपाकर करोड़ों का भ्रष्टाचार हैरानी की बात यह है कि विभाग ने बार-बार संस्थान को याद दिलाया है। इसके बाद भी 10 महीने से ज्यादा का वक्त गुजरने के बाद भी संस्थान ने अब तक अपनी योजना नहीं दी है। विपक्ष का कहना है कि विभाग सिर्फ कागजों पर काम दिखाकर वाह-वाही लूट रहा है। असली आंकड़े छिपा कर हजारों करोड़ का भ्रष्टाचार किया जा रहा है। शिक्षा के नाम पर हो रहा घोटाले विपक्ष का कहना है कि बच्चों की संख्या में गिरावट का सिलसिला 2008-09 से ही शुरू हुआ था। सरकार केवल 2015-16 के बाद के आंकड़ों की ही जांच कर रही है। आंकड़ों के मुताबिक 2008 से 2015 तक ही 40.62 लाख बच्चे कम हो गए थे। इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। विधायक ने इस मुद्दे को शिक्षा के नाम पर हो रहे बड़े घोटाले से जोड़ा है। साथ ही सीबीआई से जांच कराने और सरकार से श्वेत पत्र* जारी करने की मांग की है। एक साल में एक लाख बच्चों का फर्क जानकारी में एक बड़ा खुलासा हुआ है जो आंकड़ों की गलती को लेकर है। अलग-अलग सूचियों में बच्चों की संख्या मैच नहीं कर रही है। जैसे कि 2015-16 के लिए एक सूची में 22.62 लाख बच्चों की संख्या दी गई है। वहीं दूसरी सूची में यह संख्या 23.57 लाख बताई गई है। यानी एक ही साल के आंकड़ों में एक लाख बच्चों का फर्क है।     *श्वेत पत्र क्या होता है।     श्वेत पत्र एक तरह का दस्तावेज होता है, जिसे किसी खास समस्या को समझने या उसका समाधान बताने के लिए तैयार किया जाता है। ये दस्तावेज सरकार, कंपनियां या गैर-लाभकारी संगठन उस मुद्दे पर अपने विचार और आंकड़े लोगों तक पहुंचाने के लिए जारी करते हैं। इसमें किसी नीति या समस्या का विश्लेषण किया जाता है, और अक्सर इसमें कोई समाधान या सुझाव भी दिए जाते हैं।     इस दस्तावेज को 'श्वेत पत्र' इसलिए कहा जाता है क्योंकि पहले इसके कवर का रंग सफेद होता था। यह दस्तावेज सार्वजनिक जानकारी और पारदर्शिता को दिखाता है, यानी कि यह जानकारी लोगों के लिए खुली होती है।

कृषक उन्नति योजना से कांकेर के 92 हजार से ज्यादा किसानों को लाभ, 372 करोड़ 67 लाख रुपये का भुगतान

 उत्तर बस्तर कांकेर : कृषक उन्नति योजना : जिले के 92493 किसानों के खाते में आएंगे 372 करोड़ 67 लाख रूपए मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय 28 फरवरी को करेंगे किसानों के खातों में राशि का अंतरण  उत्तर बस्तर कांकेर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी कृषक उन्नति योजना के तहत खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान बेचने वाले जिले के किसानों के खातों में अंतर की राशि को अंतरित किया जाएगा। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय शनिवार 28 फरवरी को बिलासपुर के बिल्हा विकासखण्ड के ग्राम रहंगी के खेल मैदान में आयोजित समारोह में दोपहर 12 बजे प्रदेश भर के किसानों के खातों में योजनांतर्गत राशि अंतरित करेंगे। कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान बेचने वाले जिले के 92 हजार 493 किसानों के बैंक खातों में कुल 372 करोड़ 67 लाख 20 हजार रूपए की राशि अंतरित की जाएगी। इन किसानां के द्वारा वर्तमान खरीफ विपणन वर्ष में 50 लाख 98 हजार 696 क्विंटल धान बेचा गया है, जिनकी अंतर राशि 70 बैंक शाखाओं में शनिवार 28 फरवरी को अंतरित की जाएगी।

CG हाई कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस प्रवक्ता की याचिका खारिज की, स्कूल में घुसने को घुसपैठ माना

रायपुर  स्कूल परिसर को केवल पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि ‘प्रापर्टी की कस्टडी’ यानी संपत्ति की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाली जगह भी माना जाएगा। ऐसे में बिना अनुमति स्कूल में घुसना भारतीय दंड संहिता के तहत ‘हाउस ट्रेसपास’ (घर में घुसपैठ) का अपराध बन सकता है। यह महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए हाई कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी की याचिका खारिज कर दी। हाई कोर्ट के जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल ने धारा 452 (चोट, हमला या गलत तरीके से रोकने की तैयारी के बाद घर में घुसना), धारा 442 (घर में घुसने की परिभाषा) और धारा 441 (आपराधिक अतिक्रमण) की विस्तृत व्याख्या की। कोर्ट ने कहा कि इन धाराओं को साथ पढ़ने पर स्पष्ट होता है कि यदि कोई व्यक्ति किसी भवन, टेंट या पोत (वेसल) में आपराधिक अतिक्रमण करता है और वह स्थान या तो मानव निवास के रूप में, या पूजा स्थल के रूप में, या संपत्ति की कस्टडी के रूप में उपयोग में लिया जा रहा हो, तो उसे ‘हाउस ट्रेसपास’ माना जाएगा। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि हाउस ट्रेसपास की परिभाषा में तीन स्थितियां आती हैं पहला- मानव निवास के रूप में उपयोग होने वाला भवन, दूसरा – पूजा के लिए उपयोग होने वाला भवन, तीसरा- संपत्ति की कस्टडी के लिए उपयोग होने वाला भवन। कोर्ट ने कहा कि स्कूल भवन को भले ही निवास या पूजा स्थल नहीं माना जा सकता, लेकिन वहां स्कूल का फर्नीचर और अन्य शैक्षणिक संपत्ति सुरक्षित रखी जाती है। इसलिए इसे ‘प्रापर्टी की कस्टडी’ की श्रेणी में रखा जा सकता है। कोर्ट की टिप्पणी हाई कोर्ट ने कहा कि आरोप तय करते समय केवल प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्यों को देखा जाता है। ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर आरोप तय किए हैं, जिनमें कोई त्रुटि नहीं है। न्यायालय ने कहा कि स्कूल भवन पर शिकायतकर्ता का वैध कब्जा था और याचिकाकर्ता को बिना अनुमति वहां जबरन प्रवेश करने का कोई अधिकार नहीं था। इसलिए धारा 452 के तहत आरोप तय करने में कोई कमी नहीं है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और रिविजनल कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ता और राज्य के तर्क याचिकाकर्ता का कहना था कि वह सरकारी सर्कुलर और गाइडलाइन के खिलाफ स्कूल के कथित अवैध संचालन का विरोध कर रहा था। उसने तर्क दिया कि स्कूल ‘रहने की जगह’ की परिभाषा में नहीं आता, इसलिए धारा 452 के तहत आरोप तय नहीं किए जा सकते। वहीं, राज्य की ओर से दलील दी गई कि कर्मचारियों के बयान से स्पष्ट है कि आरोपी बिना अनुमति परिसर में घुसा और अभद्र व्यवहार किया। यह है पूरा मामला आरोप है कि जून 2024 को विकास तिवारी साथियों के साथ सरोना स्थित कृष्णा किड्स एकेडमी के परिसर में घुसे, वहां गाली-गलौज की और महिला स्टाफ से बदसलूकी की। स्कूल के प्रशासक ने इसकी आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी। सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 452, धारा 294 (अश्लील कृत्य) और धारा 34 (समान आशय) के तहत आरोप तय किए। आरोपित ने इस आदेश को रिविजनल कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली। इसके बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

आस्था का महाकुंभ: रतलाम के शीतलतीर्थ कैलाश पर्वत पर आदिनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक आयोजित

रतलाम शहर के शीतलतीर्थ में कैलाश पर्वत पर 18 फीट पद्मासन आदिनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक पंचकल्याण का द्वितीय वार्षिकोत्सव 1 मार्च को होने जा रहा हैं। इसमें शामिल होने के लिए सम्पूर्ण भारत से आने वाले गुरु भक्तों के लिए कलश आवंटन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी हैं। इस आयोजन के लिए 28 फरवरी को श्रुत संवेगी मुनि आदित्य सागर का ससंघ मंगल प्रवेश होगा। आचार्य योगेंद्र सागर का अवतरण दिवस सैलाना रोड स्थित शीतल तीर्थ धामनोद में गुरु भक्तों ने मनाया। धामनोद के शीतल तीर्थ में आयोजित विनयांजलि सभा में क्षेत्र अधिष्ठात्री डॉ. सविता जैन दीदी ने सभी आगंतुकों का अभिवादन करते हुए कहा कि गुरुदेव आज प्रत्यक्ष हमारे बीच नहीं है, गुरुभक्तों की श्रद्धा में आज भी गुरुदेव बसे हुए है और यही कारण है कि प्रत्येक वर्ष गुरुदेव के अवतरण दिवस पर बिना किसी निमंत्रण के गुरुभक्तों का समूह शीतल तीर्थ पर एकत्रित होता है। सही मायने में तो यह अमृत महोत्सव योगी परिवार का शाश्वत पर्व बन गया है। वृद्धों की सेवा-300 गोवंश की सार संभाल होती विख्यात गणितज्ञ जैन मनीषी डॉ. अनुपम जैन इंदौर ने बताया कि समाधिस्थ आचार्य चतुर्थ पट्टाधीश योगीन्द्र सागर गुरुदेव की प्रेरणा से रतलाम के धामनोद में सन् 2009 में शीतल तीर्थ की नींव रखी गई। तभी से गुरुभक्तों का जुड़ाव इस क्षेत्र से हो गया, आज यहां त्यागी वृत्तियों एवं वृद्धों की सेवा के साथ लगभग 300 की संख्या में गोवंश की सार संभाल की जाती है । आज भी इस क्षेत्र पर अतिशय होते हैं। डॉ. भरत जैन ने भी गुरुदेव के निर्भीक व्यक्तित्व के संस्मरण बताए। गुरुदेव का अवतरण दिवस 17 फरवरी को बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है । इस वर्ष आयोजित कार्यक्रम में क्षुल्लिका 105 चंद्रमति माता धार एवं स्वस्ति भट्टारक अरिहंत कीर्ति का भी मंगल सानिध्य प्राप्त हुआ। गुरु प्रतिमा पर जल एवं दुग्ध से अभिषेक तीर्थ प्रवक्ता राकेश पोरवाल ने बताया कि प्रात: काल श्रीक्षेत्र पर कोटा के आदिश महिला दिव्य घोष द्वारा भट्टारक स्वामी की मंगल आगवानी की गई । गुरु मंदिर में अतिशय कारी चैत्यालय का पंचामृत अभिषेक एवं गुरु प्रतिमा पर जल एवं दुग्ध से अभिषेक हुआ, जिसके बाद ऋषि मंडल विधान आयोजित हुआ। विनयांजलि सभा में मुख्य अतिथि रतलाम भाजपा अध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय ने कहा कि आचार्य योगीन्द्रसागर महाराज सिर्फ जैन समाज ही नहीं अपितु सर्वधर्म के अनुयायियों में लोकप्रिय संत थे।। नेशनल नॉन वायलेंस यूनिटी फाउण्डेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष महेन्द्र गुड़वाले (कोटा) द्वारा सभी आगंतुकों का आभार माना। इस अवसर पर भक्तों द्वारा तीर्थ अधिष्ठात्री डॉ. सविता जैन दीदी का सम्मान पत्र भेंट कर सम्मान किया गया। संचालन राकेश जैन ने किया।

कोलकाता में बारिश से सवाल, सेमीफाइनल कौन खेलेगा? जानें रविवार का मौसम अपडेट

कोलकाता कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स में रविवार 1 मार्च 2026 को टी-20 वर्ल्ड कप का एक ऐसा मुकाबला होने जा रहा है, जिसे ‘वर्चुअल क्वार्टरफाइनल’ कहना गलत नहीं होगा.  डिफेंडिंग चैंपियन भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाली यह जंग तय करेगी कि सेमीफाइनल की अंतिम टिकट किसे मिलेगी.  भारतीय प्रशंसकों की नजरें न केवल बल्लेबाजों के छक्कों पर हैं, बल्कि कोलकाता के आसमान पर भी टिकी हैं, क्योंकि बारिश खेल का पूरा समीकरण बिगाड़ सकती है. सुपर-8 चरण के रोमांचक मोड़ पर भारत और वेस्टइंडीज दोनों के 2-2 अंक हैं.  दक्षिण अफ्रीका इस ग्रुप से पहले ही सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर चुका है. अब दूसरे स्थान के लिए मुकाबला सीधा है. अगर भारत जीता तो  सीधे 4 अंकों के साथ सेमीफाइनल में प्रवेश कर जाएगा और नेट रन रेट (NRR) की कोई भूमिका नहीं रहेगी. अगर वेस्टइंडीज जीता तो  कैरेबियाई टीम 4 अंकों के साथ आगे बढ़ेगी और भारत टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगा. अगर हुई बारिश, तो कौन मारेगा बाजी? क्रिकेट प्रेमियों के लिए सबसे डरावना सवाल यही है कि अगर कोलकाता में बारिश हुई और मैच धुल गया तो क्या होगा? आईसीसी के नियमों के अनुसार, सुपर-8 मैचों के लिए कोई रिजर्व डे  नहीं रखा गया है. अगर मैच रद्द होता है, तो दोनों टीमों को 1-1 अंक मिलेगा, जिससे दोनों के 3-3 अंक हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में फैसला नेट रन रेट से होगा. वेस्टइंडीज का NRR: +1.791है और  भारत का NRR: -0.100 स्पष्ट है कि वेस्टइंडीज का रन रेट भारत से कहीं बेहतर है. इसलिए, मैच धुलने की स्थिति में वेस्टइंडीज सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई कर जाएगा और टीम इंडिया का वर्ल्ड कप सफर समाप्त हो जाएगा. ईडन गार्डन्स का मौसम और पिच रिपोर्ट अच्छी खबर यह है कि रविवार को कोलकाता में बारिश की संभावना बहुत कम है. मौसम विभाग और विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार बारिश की संभावना: 0% है. संडे को दिन में अधिकतम 34°C और मैच के दौरान 25-26°C के आसपास रहने की उम्मीद है. ईडन की पिच बल्लेबाजों के लिए स्वर्ग मानी जाती है, लेकिन शाम के समय स्पिनर्स को भी मदद मिल सकती है. टीम इंडिया का शानदार फॉर्म भारत ने जिम्बाब्वे के खिलाफ 256/4 का विशाल स्कोर बनाकर अपनी फॉर्म का लोहा मनवाया है. अभिषेक शर्मा (55 रन), हार्दिक पांड्या (नाबाद 50 रन) और तिलक वर्मा (44 रन) ने जिस तरह की बल्लेबाजी की, उसने प्रशंसकों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं.  कप्तान सूर्यकुमार यादव और कोच गंभीर की रणनीति अब वेस्टइंडीज के पावर-हिटर को रोकने पर होगी. एक बात तो साफ है कि टीम इंडिया के लिए रविवार का दिन “करो या मरो” का है उन्हें केवल अपनी काबिलियत पर भरोसा करना होगा, क्योंकि कुदरत का साथ न मिलने की सूरत में बाजी वेस्टइंडीज के हाथ लग सकती है.

WhatsApp 1 मार्च से भारत में करोड़ों यूजर्स के लिए बंद, चेक करें अपने अकाउंट की स्थिति

नई दिल्ली, SIM-Binding नियम को लेकर अब तस्वीर और साफ होती दिख रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि मैसेजिंग ऐप्स के लिए SIM से अकाउंट जोड़ना अनिवार्य रहेगा और इसमें किसी तरह की ढील देने का फिलहाल इरादा नहीं है. 1 मार्च की तय समय सीमा को लेकर भी सरकार सख्त रुख में दिखाई दे रही है.  दूरसंचार विभाग यानी DoT ने OTT मैसेजिंग ऐप्स को साफ निर्देश दिए हैं कि यूजर का अकाउंट एक्टिव SIM से जुड़ा होना चाहिए. WhatsApp पर क्या पड़ेगा असर? इसका मतलब यह है कि अगर फोन में वह SIM मौजूद नहीं है, जिससे WhatsApp या Telegram रजिस्टर है, तो ऐप का इस्तेमाल सीमित हो सकता है या बंद भी हो सकता है. भारत में WhatsApp के सबसे ज्यादा यूजर्स हैं जो अलग अलग डिवाइस पर एक ही नंबर का WhatsApp यूज करते हैं. ऐसे में करोड़ों यूजर्स के लिए WhatsApp काम नहीं करेगा जिन्होंने एक अकाउंट को अलग अलग डिवाइसेज पर ऐक्टिव कर रखा है.  रिपोर्ट्स में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बयान का जिक्र किया जा रहा है, जिसमें कहा गया कि सुरक्षा पहले है और SIM-Binding नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा. सरकार का मानना है कि डिजिटल फ्रॉड और फर्जी नंबर के जरिए हो रहे अपराधों को रोकने के लिए यह कदम जरूरी है. Sim Binding से प्रभावित कौन होगा?     जो यूजर एक सिम से अलग अलग डिवाइस पर व्हाट्सऐप चलाते हैं. साथ ही जो बार बार सिम कार्ड बदलते रहते हैं.      WhatsApp Web खुद से हर छह घंटे में लॉगआउट हो जाएगा. जारी रखने के लिए QR कोड स्कैन करना होगा.      60-80% तक छोटे बिजनेस ऑपरेशनल डिसरप्शन का शिकार हो सकते हैं. SIM Binding के बाद WhatsApp का Linked Device काम करेगा? WhatsApp का एक बड़ा फीचर इसका लिंक्ड डिवाइस है. इसके तहत ही एक नंबर से अलग अलग डिवाइस पर व्हाट्सऐप काम करता है. लेकिन इस नियम के बाद इसमें बड़ी रेस्ट्रिक्शन लगेगी.  गौरतलब है कि Sim Binding Rule के बाद Linked Device पूरी तरह से काम करना बंद नहीं करेगा, लेकिन लिमिटेशन आएंगी. WhatsApp सिर्फ उसी फोन में चलेगा जिसमें वो सिम होगा जिससे WhatsApp अकाउंट बनाया है. अगर डिवाइस से सिम निकलेगा तो वॉट्सऐप बंद हो सकता है.  मौजूदा समय में 14 दिन तक वॉट्सऐप लिंक्ड रहता है. लेकिन नियम आ जाने के बाद ये ऐसा नहीं हो पाएगा. बार बार वेरिफिकेशन होगा जिससे वॉट्सऐप  काम करना बंद हो सकता है. सिम बाइंडिंग से डिजिटल फ्रॉड कम होंगे? पिछले कुछ सालों में ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल सेंटर, और नकली प्रोफाइल के जरिए बड़े स्तर पर धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं. सरकार का तर्क है कि अगर हर मैसेजिंग अकाउंट एक्टिव और असली SIM से जुड़ा रहेगा, तो जांच एजेंसियों के लिए अपराधियों तक पहुंचना आसान होगा. यही वजह है कि इस नियम को साइबर सुरक्षा के नजरिए से अहम बताया जा रहा है. SIM Binding पर टेक कंपनियों का विरोध हालांकि दूसरी तरफ कुछ अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियों और इंडस्ट्री ग्रुप्स ने चिंता भी जताई है. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ग्लोबल मैसेजिंग कंपनियों ने DoT के नियमों पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि यह नियम कानूनी दायरे से बाहर हो सकता है. कुछ कंपनियों ने इसे प्राइवेसी से भी जोड़ा है. लेकिन सरकार का रुख फिलहाल साफ दिख रहा है कि नियम वापस लेने या टालने का कोई संकेत नहीं है. WhatsApp यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा? खबरों के मुताबिक 1 मार्च की डेडलाइन इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि इसके बाद नियम पूरी तरह लागू माने जाएंगे. पहले कहा जा रहा था कि कंपनियों को समय दिया गया है ताकि वे अपने सिस्टम में जरूरी तकनीकी बदलाव कर सकें. अब माना जा रहा है कि यह समय सीमा खत्म होने के करीब है. अगर ये नियम 1 मार्च से लागू हो गया तो WhatsApp Web या दूसरे डिवाइस पर लॉगिन के नियम सख्त हो सकते हैं. एक्टिव SIM के बिना ऐप चलाना मुश्किल हो सकता है. हालांकि अभी तक आम यूजर के लिए कोई अलग से आधिकारिक पब्लिक नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है, इसलिए कई लोग इंतजार कर रहे हैं कि अंतिम रूप से क्या व्यवस्था लागू होगी.   WhatsApp ही नहीं, दूसरे ऐप्स पर भी असर यह पूरा मामला सिर्फ WhatsApp तक सीमित नहीं है. Telegram, Signal और दूसरे मैसेजिंग ऐप्स भी इसके दायरे में बताए जा रहे हैं. यानी यह एक व्यापक नीति बदलाव हो सकता है, जो पूरे डिजिटल कम्युनिकेशन सिस्टम को प्रभावित करेगा. फिलहाल साफ संकेत यही है कि SIM-Binding नियम पर सरकार पीछे हटने के मूड में नहीं है. 1 मार्च को लेकर काउंटडाउन जारी है और टेक कंपनियों के साथ-साथ करोड़ों यूजर्स की नजर भी इसी पर टिकी है. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि नियम किस रूप में लागू होता है और आम यूजर के अनुभव में कितना बदलाव आता है.