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जल संरक्षण पर सख्ती: सरकारी कार्यालयों व पीएम आवास में वर्षा जल संचयन जरूरी

इंदौर जिले में नए और पुराने तालाबों से आजीविका गतिविधियां जोड़ने के लिए यूजर ग्रुप बनाए जाएंगे, जिनमें महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित कर रोजगार के अवसर विकसित किए जाएंगे। सभी शासकीय भवनों और प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत बनने वाले घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य होगी। श्मशान घाटों के जीर्णोद्धार कार्यों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। जल संरक्षण और संवर्धन की व्यापक रणनीति जिले में जल संरक्षण और संवर्धन को लेकर प्रशासन ने व्यापक रणनीति बनाई है। कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में जल गंगा संवर्धन अभियान सहित विभिन्न जल संरचनाओं के कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सिद्धार्थ जैन तथा वन मंडलाधिकारी लाल सुधाकर सिंह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। अमृत सरोवर और जल संरचनाओं की प्रगति बैठक में बताया गया कि वर्ष 2025-26 के दौरान जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। अमृत सरोवर अभियान के तहत 101 तालाबों का निर्माण पूर्ण किया गया, जबकि इस वर्ष 12 नए तालाबों के निर्माण का लक्ष्य तय किया गया है। इसके अलावा विभिन्न अभियानों के माध्यम से सैकड़ों सोख पिट, रिचार्ज पिट, वर्षा जल संचयन संरचनाएं, खेत तालाब तथा पारंपरिक जल स्रोतों का नवीनीकरण कराया गया है। बरसात से पहले कार्य पूर्ण करने के निर्देश बैठक के दौरान बताया गया कि इस वर्ष ग्रामीण क्षेत्रों में तालाबों में करीब 800 नए कार्य प्रस्तावित हैं, जिनमें चेक डैम, पुलिया, कूप, डगवेल रिचार्ज और अन्य जल संरचनाएं शामिल हैं। कलेक्टर ने सभी कार्य बरसात से पहले हर हाल में पूरे करने के निर्देश दिए हैं।

रंगों की जगह राख, ढोल-नगाड़ों की गूंज श्मशान में: भीलवाड़ा की अनोखी होली देख हैरान रह जाएंगे

भीलवाड़ा जहां देशभर में धुलंडी पर रंग और गुलाल उड़ते हैं, वहीं राजस्थान के भीलवाड़ा में होली की एक अनोखी और दार्शनिक परंपरा निभाई जाती है। यहां रंगों से नहीं, बल्कि चिता की भस्म से होली खेली जाती है वह भी आधी रात को श्मशान में। पिछले 17 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा अब शहर की विशिष्ट पहचान बन चुकी है। यह आयोजन शहर के पंचमुखी मोक्षधाम स्थित प्राचीन मसानिया भैरवनाथ बाबा मंदिर में होता है। मान्यता है कि इसकी शुरुआत काशी के मणिकर्णिका घाट की तर्ज पर की गई थी, जहां जीवन और मृत्यु का दर्शन एक साथ होता है। होलिका दहन की रात लगभग सवा 11 बजे बाबा भैरवनाथ की पालकी मंदिर से निकलती है। ढोल-नगाड़ों, शंखनाद और जयकारों के बीच शोभायात्रा पंचमुखी मोक्षधाम के श्मशान क्षेत्र की ओर बढ़ती है। करीब सवा 12 बजे पालकी चिता स्थल पर पहुंचती है, जहां कंडों की विशेष होली जलाई जाती है। इसके बाद परिजनों की अनुमति से एकत्र की गई चिता की भस्म को गुलाल की तरह हवा में उड़ाया जाता है और श्रद्धालु बाबा भैरवनाथ के साथ भस्म की होली खेलते हैं। श्मशान की नीरवता के बीच जब “बोलो बाबा भैरवनाथ की जय” के जयकारे गूंजते हैं, तो वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठता है। मंदिर के पुजारी रवि कुमार के अनुसार, “यह परंपरा भय उत्पन्न करने के लिए नहीं, बल्कि मृत्यु के भय को समाप्त करने के लिए है। राख हमें याद दिलाती है कि शरीर नश्वर है और आत्मा अमर। इसलिए यहां की होली केवल उत्सव नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि भस्म की होली खेलने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है, नकारात्मक शक्तियां समाप्त होती हैं और मानसिक बल मिलता है। यही कारण है कि इस अनूठे आयोजन में शामिल होने के लिए लोग पूरे वर्ष प्रतीक्षा करते हैं। इस आयोजन में केवल भीलवाड़ा ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों और अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। महिलाएं, बच्चे और युवा सभी श्रद्धा भाव से इसमें भाग लेते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, काशी के मणिकर्णिका घाट के बाद देश में भीलवाड़ा ऐसा दूसरा स्थान माना जाता है, जहां चिता भस्म से होली खेली जाती है। यही वजह है कि यह आयोजन अब धार्मिक पर्यटन का केंद्र भी बनता जा रहा है। जहां ब्रज की लट्ठमार होली और राजस्थान की कोड़ा-मार होली प्रसिद्ध हैं, वहीं भीलवाड़ा की यह श्मशान होली अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। यहां रंगों की चकाचौंध नहीं, बल्कि जीवन के अंतिम सत्य का साक्षात्कार होता है। राख से सना शरीर और गूंजते जयकारे यह संदेश देते हैं कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के संतुलन का भी पर्व है।

विंटेज कारों का शौक और देशभक्ति का रंग: ‘बैटल ऑफ गलवान’ में सलमान खान की असली जीप, ‘मैं हूं’ में खास अंदाज़

हैदराबाद,  सुपरस्टार सलमान खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ का नया रोमांटिक गाना “मैं हूं” इन दिनों सोशल मीडिया पर धूम मचा रहा है। वैलेंटाइन डे पर रिलीज हुआ यह गाना तेजी से युवाओं के बीच ‘लव एंथम’ बन चुका है। गाने के विजुअल्स में सलमान खान का बेहद सौम्य और रोमांटिक अंदाज नजर आ रहा है, जहाँ वे समुद्र किनारे और खूबसूरत वादियों में नजर आ रहे हैं। लेकिन इस गाने की सबसे बड़ी खासियत वह पुरानी जीप है जिसे सलमान खुद चला रहे हैं। दर्शकों को लग रहा था कि यह किसी फिल्म सेट का हिस्सा है, लेकिन इसके पीछे की कहानी काफी दिलचस्प और व्यक्तिगत है। फिल्म के करीबी सूत्रों ने खुलासा किया है कि गाने में दिखाई दे रही 1941 फोर्ड विलीज मिलिट्री जीप असल में सलमान खान के निजी कलेक्शन का हिस्सा है। ऑटोमोबाइल और दुर्लभ विंटेज गाड़ियों के प्रति अपने गहरे लगाव के लिए मशहूर सलमान ने इस सीन को असल टच देने के लिए अपनी पसंदीदा गाड़ी का इस्तेमाल करने का फैसला किया। आमतौर पर बड़े बजट की फिल्मों में गाड़ियाँ प्रोडक्शन द्वारा अरेंज की जाती हैं, लेकिन सलमान का यह चुनाव इस गाने को उनके फैंस के लिए और भी खास और यादगार बना देता है। यह जीप युद्ध की पृष्ठभूमि वाली इस फिल्म के थीम के साथ भी पूरी तरह मेल खाती है। ‘बैटल ऑफ गलवान’ फिल्म का निर्देशन अपूर्व लाखिया कर रहे हैं और इसे ‘सलमान खान फिल्म्स’ के बैनर तले सलमा खान द्वारा प्रोड्यूस किया गया है। फिल्म की कहानी भारतीय सेना के अदम्य साहस, वीरता और बलिदान पर आधारित है, जिसमें सलमान के साथ चित्रांगदा सिंह भी मुख्य भूमिका में नजर आएंगी। यह गाना “मैं हूं” फिल्म के भावनात्मक पक्ष को दर्शाता है, जबकि फिल्म का मुख्य हिस्सा युद्ध के मैदान में लचीलेपन और देशभक्ति को समर्पित है। फिल्म की शूटिंग पूरी होने के करीब है और जल्द ही इसके आधिकारिक ट्रेलर की घोषणा की जा सकती है।  

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी या झटका? HRA दरों और शहरों की श्रेणी पर 8वें वेतन आयोग की नजर

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार है। ये सिफारिशें लागू होने में करीब डेढ़ साल लग जाएंगे। इस वेतन आयोग से कर्मचारियों के संगठन की डिमांड शुरू हो गई है। कर्मचारियों के संगठन को बेसिक सैलरी से लेकर महंगाई भत्ते तक में बड़े बदलाव की उम्मीद है। माना जा रहा है कि यह वेतन आयोग केवल सैलरी बढ़ोतरी तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि यह ग्रामीण और शहरी कर्मचारियों के बीच के अंतर को भी प्रभावित कर सकता है। HRA (हाउस रेंट अलाउंस) का अंतर आठवां वेतन आयोग HRA (हाउस रेंट अलाउंस) में बड़े संशोधन कर सकता है। खासतौर पर शहरी क्षेत्रों में किराया, परिवहन, शिक्षा और स्वास्थ्य खर्च अपेक्षाकृत अधिक होते हैं। ऐसे में यदि HRA की दरों में संशोधन होता है तो शहरी कर्मचारियों को बड़ा फायदा मिलेगा। इसके उलट, ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन-यापन की लागत कम होने के कारण वेतन वृद्धि का वास्तविक लाभ बचत के रूप में ज्यादा दिख सकता है। सिटी कैटेगरी पर भी पड़ेगा असर? आठवें वेतन आयोग में शहरों के कैटेगरी को लेकर भी अपडेट आ सकता है। बता दें कि 7वें वेतन आयोग में शहरों को X, Y और Z कैटेगरी में बांटा गया था। अगर 8वां वेतन आयोग इस वर्गीकरण में बदलाव करता है, तो छोटे शहरों और कस्बों के कर्मचारियों को अतिरिक्त फायदा मिल सकता है। ट्रैवल अलाउंस यानी TA में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है। क्या है डिमांड हाल ही में National Council (स्टाफ साइड) की अहम बैठक में 8वें वेतन आयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के केंद्र में वेतन संरचना, पदोन्नति नीति, वार्षिक वेतनवृद्धि और पेंशन सुधार जैसे विषय रहे। 8वें वेतन आयोग द्वारा वेबसाइट पर पूछे गए 18 सवालों के जवाब तय समयसीमा के भीतर भेजने पर सहमति बनी है। अगले 10 से 15 दिनों में सभी कर्मचारी संगठनों की मांगों को समेटते हुए एक साझा ज्ञापन तैयार किया जाएगा, जिसे आयोग की अध्यक्ष जस्टिस रंजना देसाई को सौंपा जाएगा। पेंशन पर क्या डिमांड? बैठक में फिटमेंट फैक्टर को लेकर भी व्यापक चर्चा हुई। संगठनों की मांग है कि कर्मचारियों और लगभग 68 लाख पेंशनरों/पारिवारिक पेंशनरों के लिए समान फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाए। प्रतिनिधियों ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन सिस्टम (UPS) को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की पुरानी मांग दोहराई। कर्मचारी संगठनों ने प्रत्येक कर्मचारी को सेवा अवधि में कम से कम पांच पदोन्नति सुनिश्चित करने की मांग रखी। स्वास्थ्य सुविधाओं के तहत CGHS से वंचित शहरों में कर्मचारियों को वर्तमान में 1,000 रुपये मासिक भत्ता मिलता है। कर्मचारी संगठनों ने इसे बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति माह करने की मांग की है। साथ ही इंटरनेट जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए भत्ता शामिल करने का प्रस्ताव भी रखा गया।  

डीएमएफ खर्च को लेकर टकराव: जनप्रतिनिधियों को दरकिनार कर कार्य स्वीकृति से भड़के सांसद-विधायक

गरियाबंद जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) समिति की बैठक सोमवार को लंबे अंतराल के बाद आयोजित हुई, लेकिन शुरुआत से ही माहौल गरमा गया। अफसरों द्वारा पिछली कार्ययोजना का एजेंडा प्रस्तुत किया जा रहा था कि इसी दौरान सांसद रूप कुमारी चौधरी ने कड़ी आपत्ति जताते हुए बैठक में नाराजगी जाहिर की। उन्होंने अफसरों पर आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लिए बिना कार्य आबंटन किया जा रहा है। सांसद ने बैठक में यहां तक पूछ लिया कि जिन कार्यों को स्वीकृति दी गई, वे आखिर किस समिति के अनुमोदन से पारित हुए। उनके तेवर देख बैठक का माहौल तनावपूर्ण हो गया। भाजपा विधायक रोहित साहू भी इस मुद्दे पर मुखर नजर आए। उन्होंने पेयजल संकट से निपटने के लिए प्रस्तावित व्यवस्थाओं की अनदेखी पर नाराजगी जताई। विधायक ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में बोर खनन के लिए 500 फीट खुदाई बताई जा रही है, जबकि कई स्थानों पर 700 फीट से अधिक खुदाई की आवश्यकता है। भारी क्षमता वाली मशीनें लगाने की मांग भी अनसुनी की गई, जिससे पेयजल समस्या जस की तस बनी हुई है। जिला पंचायत अध्यक्ष गौरी शंकर ने भी आदिवासी बहुल गांवों की सड़क और पुल कनेक्टिविटी की मांगों की अनदेखी का मुद्दा उठाया। बैठक में कलेक्टर भगवान सिंह उइके, जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे। जनप्रतिनिधियों की तीखी प्रतिक्रिया के बीच बैठक का माहौल असहज हो गया। सूत्रों के मुताबिक, डीएमएफ के लगभग 22 करोड़ रुपये के बजट में से अब तक करीब 7 करोड़ रुपये के कार्य स्वीकृत और निष्पादित किए जा चुके हैं। इनमें बोर खनन, शौचालय निर्माण, स्प्रिंकलर और पावर स्पेयर जैसे कार्य शामिल हैं। आरोप यह भी है कि जेम पोर्टल की आड़ में कुछ बड़े कार्यों की मंजूरी और आवंटन में प्रभावशाली हस्तक्षेप रहा, जबकि समिति सदस्यों की प्राथमिकताओं को अपेक्षित महत्व नहीं मिला। हालांकि जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर ने स्वीकार किया कि जनप्रतिनिधियों की मांग के अनुरूप कार्यों को मंजूरी नहीं मिलने से नाराजगी की स्थिति बनी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके कार्यकाल में अब तक इस मद से कोई नया कार्य स्वीकृत नहीं हुआ है। बजट शेष है और आगामी दिनों में मांग के अनुरूप कार्यों को स्वीकृति देने की बात कही गई है। कलेक्टर भगवान सिंह उइके से पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, लेकिन कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। वहीं सांसद रूप कुमारी चौधरी की प्रतिक्रिया के लिए भी प्रयास किए गए, परंतु उनका जवाब नहीं आया। उनके निज सहायक सौम्य रंजन ने अधिकृत मीडिया प्रभारी के माध्यम से प्रेस नोट जारी करने की बात कही है। होली से ठीक पहले जिला पंचायत सभागार में उठे इस हंगामे ने डीएमएफ फंड के उपयोग और पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जनप्रतिनिधियों की नाराजगी के बाद कार्य अनुमोदन सूची में किस प्रकार के बदलाव किए जाते हैं।

राजधानी में लूट का खेल खत्म: मायापुरी से 5 आरोपी दबोचे गए

पश्चिमी दिल्ली पश्चिमी दिल्ली के मायापुरी थाना पुलिस ने पिस्टल के बल पर लूटपाट करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस गिरोह के पांच आरोपितों को दबोचकर उनके कब्जे से अवैध हथियार और चोरी के वाहन बरामद किए हैं। उपायुक्त डी शरद भास्कर ने बताया कि इस कार्रवाई से पुलिस ने क्षेत्र में सक्रिय अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश की है। पकड़े गए आरोपितों पहचान निखिल (23), मोहम्मद आमिर (19), संदीप कश्यप (26), सूरज चौपाल उर्फ चौपाल (21) और रोशन उर्फ कालू (24) के रूप में हुई है। 26 फरवरी को मायापुरी इलाके में लूट की एक वारदात की सूचना मिली थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएचओ मोहिंदर पाल के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई, टीम ने घटनास्थल के आसपास के दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और अपराधियों के भागने के रूट का पता लगाया। तकनीकी सर्विलांस और गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने छापेमारी कर पांचों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने पकड़े गए आरोपितों की तलाशी के दौरान उनके कब्जे से एक देसी पिस्टल, 06 जिंदा कारतूस, जनकपुरी इलाके से चोरी की गई एक स्कूटी बरामद की है। पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी से दो महत्वपूर्ण आपराधिक मामलों को सुलझाने का दावा किया है। इनमें से एक मामला मायापुरी में हुई हालिया लूट का है, जबकि दूसरा मामला जनकपुरी से स्कूटी चोरी से जुड़ा है। पुलिस अब इन आरोपितों से गहन पूछताछ कर रही है ताकि इनके अन्य साथियों और पिछली वारदातों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके।  

योगी सरकार का बड़ा कदम, आरक्षण पर विपक्ष को कोई मौका नहीं मिलेगा, विभागों को भेजे गए निर्देश

लखनऊ   उत्तर प्रदेश में भर्तियों में आरक्षितों को कम कोटा मिलने के विवाद को पूरी तरह से खत्म करने की तैयारी है। आरक्षित पदों की संख्या तय होने के बाद ही भर्तियां की जाएंगी। विभागों को रिक्तियों का प्रस्ताव भेजने से पहले अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग और ईडब्ल्यूएस के पदों को स्पष्ट करना होगा। जरूरी हुआ तो इसके लिए आयोगों के साथ विभागों द्वारा बैठक भी की जाएगी, जिससे भर्तियों को लेकर कोई पेंच न फंसे। दरअसल 69000 शिक्षक भर्ती हो या लेखपाल की भर्ती यूपी की विपक्षी पार्टियों ने लगातार इसमें आरक्षण के नियमों का पालन नहीं करने का सरकार पर आरोप लगाते हुए इसे मुद्दा बनाया था। इसी वजह से मामला हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा है। एनडीए की सहयोगी पार्टियों ने भी कई बार इशारों में आरक्षण को लेकर अपनी ही सरकार को घेरने की कोशिश की है। ऐसे में सरकार इस बार किसी को कोई मौका नहीं देना चाहती है। ओबीसी के कम पद का लगा था आरोप उत्तर प्रदेश में हर साल हजारों की संख्या में भर्तियां हो रही हैं। राज्य सरकार ने भर्तियों के लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, उत्तर प्रदेश विद्युत सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड और उत्तर प्रदेश सहकारी संस्थागत सेवा मंडल बनाया गया है। सबसे अधिक भर्तियां लोक सेवा आयोग और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग करता है। यूपी में पिछले कुछ भर्ती विज्ञापनों को लेकर आपत्तियां जताई गईं। इसमें कहा गया है कि कुल रिक्तियों में ओबीसी के लिए कम पद तय किए जा रहे हैं। लेखपाल भर्ती को लेकर हुए था बवाल उत्तर प्रदेश में 7994 लेखपाल पदों की भर्ती में ओबीसी के लिए निर्धारित 27% आरक्षण में 1441 पद मिलने पर बड़ा बवाल हुआ था। सपा और अन्य दलों ने इसे आरक्षण में कटौती बता करारा हमला किया था। विरोध के बाद पदों की संख्या बढ़ाई गई। शासन इसीलिए चाहता है कि भर्ती के लिए विज्ञापन निकाले जाने से पहले पदों की गिनती पूरी तरह से कर ली जाएगी। इसमें देखा जाएगा कि आरक्षण के मुताबिक पदों का बंटवारा किया गया है या नहीं। आरक्षण के पालन का निर्देश शासन की ओर से आयोगों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि राज्य के अधीन सेवाओं में अनुमन्य ऊर्ध्वाधर यानी वर्टिकल और क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्थाओं का मानक के अनुरूप पालन किया जाए। उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, जनजातियों एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण) अधिनियम-2020 में दी गई व्यवस्था को पूरी तरह से पालन किया जाएगा। साथ ही आरक्षण अधिनियम में दी गई वर्टिकल आरक्षण व्यवस्था पूरी तरह से पालन किया जाएगा, जिससे कोई विवाद न होने पाए।

‘उत्तराखंड का स्वर्णिम दौर शुरू’ – पुष्कर सिंह धामी बोले, तीसरा दशक होगा प्रदेश के नाम

देहरादून उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के विकास को लेकर बड़ा संकल्प दोहराया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा बाबा केदारनाथ धाम से किए गए ऐलान के अनुसार 21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा, और राज्य सरकार इसी दिशा में तेजी से काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा, “हम सब मिलकर, एकता और आपसी मेलजोल से उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ेंगे। यह दशक विकास, सुशासन और जनभागीदारी का दशक होगा।” विकास, एकता और जनसहभागिता पर जोर धामी ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए बुनियादी ढांचे, पर्यटन, रोजगार सृजन और निवेश को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे आपसी सहयोग और समन्वय के साथ राज्य निर्माण में भागीदार बनें। ‘उत्तराखंड का दशक’ बनाने का संकल्प मुख्यमंत्री ने दोहराया कि यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि सामूहिक संकल्प है। सरकार का उद्देश्य है कि आने वाले वर्षों में उत्तराखंड शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुए। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से उत्तराखंड देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान और मजबूत करेगा।

BJP ने जारी की राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची, नितिन नवीन जाएंगे संसद; बिहार की दूसरी सीट पर सस्पेंस

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन राज्यसभा जाएंगे। वे भाजपा के बिहार से राज्यसभा उम्मीदवार बनाए गए हैं। वहीं, भाजपा के बिहार से दूसरे कैंडिडेट के नाम चौंकाने वाला है। नितिन नवीन के साथ पार्टी ने दलित नेता शिवेश कुमार राम को प्रत्याशी बनाया है। दोनों नेता 5 मार्च को अपना नामांकन करेंगे। पटना के रहने वाले नितिन नवीन हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए थे। वे अभी पटना की बांकीपुर सीट से विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद से उनके संसद जाने की चर्चा तेज थी। अब भाजपा ने उम्मीदवार सूची जारी कर स्थिति साफ कर दी है। दूसरी सीट पर भाजपा का दलित दांव वहीं, भाजपा ने बिहार से अपने कोटे की दूसरी सीट से शिवेश राम को उम्मीदवार बनाया है। वे दलित वर्ग के नेता हैं। पार्टी ने उन्हें लोकसभा चुनाव 2024 में सासाराम से टिकट दिया था। मगर वे चुनाव हार गए थे। अब उन्हें राज्यसभा भेजा जा रहा है। इससे पहले, भोजपुरी स्टार पवन सिंह को भी राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने की अटकलें चल रही थीं, मगर उनका नाम कैंडिडेट लिस्ट में नहीं आया। उपेंद्र कुशवाहा का भी फिर से राज्यसभा जाना तय भाजपा के बिहार अध्यक्ष संजय सरावगी ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि नितिन नवीन और शिवेश राम के अलावा राष्ट्रीय लोक मोर्चा के चीफ उपेंद्र कुशवाहा भी एनडीए के राज्यसभा उम्मीदवार होंगे। जबकि दो अन्य सीटों पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू से नाम आना अभी बाकी है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बिहार की सभी 5 सीटों पर एनडीए प्रत्याशियों की जीत का दावा किया है। 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव की वोटिंग बिहार की 5 समेत देश भर की 37 राज्यसभा सीटों पर नामांकन की प्रक्रिया चल रही है। 5 मार्च को नॉमिनेशन का आखिरी दिन है। 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान होगा। बिहार में जो 5 राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं, उनपर अभी 3 एनडीए और दो आरजेडी के सांसद हैं। हालांकि, बिहार विधानसभा में मौजूदा संख्याबल के हिसाब से एनडीए की चार सीटों पर जीत पक्की है। पांचवीं सीट जीतने के लिए उसे 3 अतिरिक्त विधायकों का समर्थन चाहिए। विपक्ष से आरजेडी ने भी उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है। महागठबंधन के पास भी पर्याप्त संख्याबल नहीं है। ऐसे में 16 मार्च को मतदान के दौरान क्रॉस वोटिंग के आसार नजर आ रहे हैं।

सीमा पर सतर्कता बढ़ी: राजौरी में ‘PIA’ लिखे हवाई जहाज जैसे गुब्बारे से सनसनी

राजौरी जिला राजौरी के थाना धर्मसाल के अंतर्गत आने वाले सरहोटी क्षेत्र में सोमवार दोपहर करीब दो बजे एक हवाई जहाज के आकार का गुब्बारा मिलने से क्षेत्र में कुछ समय के लिए हलचल मच गई। लाल और सफेद रंग के इस गुब्बारे पर उर्दू भाषा में कुछ शब्द लिखे हुए थे तथा उस पर पीआईए भी अंकित पाया गया। सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर गुब्बारे को अपने कब्जे में ले लिया। एहतियातन सीमांत इलाकों में अलर्ट जारी करते हुए स्थानीय लोगों को हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखने के लिए कहा। किसी भी तरह की संदिग्ध हलचल दिखने पर नजदीकी पुलिस स्टेशन में संपर्क करने की सलाह भी दी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्थानीय लोगों ने सरहोटी गांव के समीप खुले क्षेत्र में हवाई जहाज की आकृति वाला गुब्बारा पड़ा देखा। गुब्बारा लाल और सफेद रंग का था और उस पर उर्दू में लिखावट के साथ पीआईए शब्द स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था। संदिग्ध वस्तु को देखकर कुछ लोगों ने एहतियातन तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। सुरक्षित तरीके से अपने कब्जे में लिया गुब्बारा सूचना मिलते ही पुलिस पोस्ट त्रियाठ की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। प्राथमिक जांच के बाद गुब्बारे को सुरक्षित तरीके से अपने कब्जे में ले लिया गया। पुलिस ने आसपास के क्षेत्र का भी निरीक्षण किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वहां कोई अन्य संदिग्ध वस्तु तो नहीं है। स्थानीय लोगों ने बताया कि गुब्बारा हवा के साथ उड़कर इस क्षेत्र में आ सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि गुब्बारा कहां से आया और किस उद्देश्य से छोड़ा गया था। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने सतर्क रहने की दी सलाह घटना की सूचना मिलते ही सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गईं। हालांकि प्रारंभिक तौर पर इसे साधारण गुब्बारा बताया जा रहा है, फिर भी एहतियात के तौर पर इसे कब्जे में लेकर जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी प्रकार की अफवाह से बचने की आवश्यकता है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। इस घटना के बाद कुछ समय के लिए स्थानीय लोगों में जिज्ञासा और हल्की चिंता देखी गई, लेकिन पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई किए जाने से स्थिति सामान्य हो गई। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें किसी भी प्रकार की संदिग्ध वस्तु दिखाई दे तो वे तुरंत इसकी सूचना नजदीकी पुलिस थाना, सेना या प्रशासन को दें और स्वयं उससे छेड़छाड़ न करें। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले में जांच जारी है और यदि आवश्यक हुआ तो संबंधित एजेंसियों से भी सहयोग लिया जाएगा। फिलहाल क्षेत्र में शांति बनी हुई है और जनजीवन सामान्य रूप से चल रहा है।