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प्रशासनिक सर्जरी की तैयारी में MP, ये अधिकारी होंगे नई जिम्मेदारी से नवाजे गए

भोपाल कुछ समय से मध्य प्रदेश में प्रशासनिक बदलाव की तैयारी की बात हो रही है। अब इसकी तैयारी और तेज हो गई है। होली के बाद रंगपंचमी का त्योहार भी बीत चुका है। मंत्रालय के गलियारों में प्रशासनिक सर्जरी की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। अगले सप्ताह लिस्ट जारी होने की उम्मीद है। इसमें दर्जन भर जिलों के कलेक्टर यहां से  वहां होने की उम्मीद है। भोपाल कलेक्टर से  भोपाल संभाग के आयुक्त पर सबकी नजर है।  निगम-मंडल और प्राधिकरण के एमडी तथा सीईओ के साथ मंत्रालय स्तर पर प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव के प्रभारों में बदलाव होना संभव है। वैसे भोपाल कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह का प्रमोशन हो चुका है।  लिहाजा उनका बदला जाना तय है। वर्ष 2010 बैच के कलेक्टर सिंह को किसी संभाग का आयुक्त बनाया जा सकता है। नई तबादला सूची जल्द ही जारी होने की संभावना है। इस फेरबदल में कुछ कलेक्टरों को मंत्रालय में नई जिम्मेदारी दी जा सकती है, जबकि कुछ अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिलों की कमान सौंपी जा सकती है। धार जिले में बसंत पंचमी के दौरान भोजशाला विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से संभालने वाले युवा आईएएस अधिकारी Priyank Mishra का भोपाल कलेक्टर बनने का नाम चर्चा में है। धार के कलेक्टर प्रियंक मिश्रा को जिले की कमान संभाले तीन साल से ज्यादा समय हो गया है। उनके परफॉर्मेंस को देखते हुए बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। वहीं ग्वालियर और जबलपुर जिलों की कमान महिला आईएएस संभाल चुकी हैं। अब इंदौर और भोपाल जिलों को लेकर संभावनाएं बन रही हैं। वहीं  मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में भी प्रशासनिक बदलाव की संभावना है। अभी CMO में Alok Kumar Singh और Ilaiyaraaja T सचिव के रूप में जिम्मेवारी संभाल रहे हैं।  बताया जा रहा है कि CMO को एक और सचिव मिल सकता है, जबकि कुछ अतिरिक्त सचिवों में भी फेरबदल किया जा सकता है। लिहाजा रंगपंचमी के बीतने के साथ ही प्रशासनिक बदलाव का काउंटडाउन शुरु हो चुका है।

“BCCI का बड़ा कदम: T20 टीम से बाहर हुए क्रिकेटर को मिलेगा अवॉर्ड, राहुल द्रविड़ भी होंगे सम्मानित”

 नई दिल्ली भारत की टेस्ट और वनडे टीम के कप्तान शुभमन गिल को आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए 15 सदस्यीय टीम में जगह नहीं मिली थी. टी20 टीम से बाहर किए जाने के बावजूद शुभमन को भारतीय क्रिकेट का बड़ा सम्मान मिलने जा रहा है. समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार शुभमन को 15 मार्च को होने वाले भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) के वार्षिक 'नमन अवॉर्ड्स' में 'क्रिकेटर ऑफ द ईयर' अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। शुभमन गिल को यह सम्मान उनके 2025 में शानदार प्रदर्शन के लिए दिया जा रहा है. टी20 इंटरनेशनल में उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, लेकिन टेस्ट और वनडे क्रिकेट में उन्होंने बेहतरीन बल्लेबाजी की. वहीं टीम इंडिया के पूर्व कोच और पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा जाएगा। इंग्लैंड दौरे पर किया अविस्मरणीय प्रदर्शन 2025 में शुभमन गिल ने टेस्ट क्रिकेट में शानदार फॉर्म दिखाया. उन्होंने कुल 9 टेस्ट मैचों में 70.21 की औसत से 983 रन बनाए. इनमें से ज्यादातर रन इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई टेस्ट सीरीज में आए, जहां शुभमन ने 4 शतकों की मदद से 754 रन बनाए. इस प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय टेस्ट टीम का सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज बना दिया। साल 2025 में वनडे क्रिकेट में भी शुभमन गिल का बल्ला खूब चला. उन्होंने 11 ओडीआई मैचों में 49.00 की औसत से 490 रन बनाए. इसमें आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी जीतने के अभियान में बनाए गए 188 रन भी शामिल थे, जहां उन्होंने टीम इंडिया की खिताबी जीत में अहम भूमिका निभाई। हालांकि टी20 इंटरनेशनल में शुभमन गिल को संघर्ष करना पड़ा. एशिया कप के दौरान उन्हें टीम में वापस बुलाया गया और उप-कप्तान भी बनाया गया, लेकिन वह लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सके. पिछले साल 15 टी20 इंटरनेशनल मैचों में शुभमन ने 291 रन बनाए, जिसमें उनका औसत 24.25 और स्ट्राइक रेट 137.26 रहा. साउथ अफ्रीका के खिलाफ सीरीज में भी उनका प्रदर्शन खराब रहा और तीन मैचों में वह सिर्फ 32 रन ही बना सके। तीनों फॉर्मेट को मिलाकर शुभमन गिल ने साल 2025 में कुल 35 इंटरनेशनल मैचों में 1,764 रन बनाए, जिसमें 7 शतक और 3 अर्धशतक शामिल रहे. इस दौरान उनका औसत 49.00 रहा. फ्रेंचाइजी क्रिकेट में भी शुभमन का प्रदर्शन शानदार रहा. IPL (इंडियन प्रीमियर लीग) 2025 में गुजरात टाइटन्स (GT) की ओर से खेलते हुए उन्होंने 50 की औसत से 650 रन बनाए। शुभमन गिल को टी20 टीम से ड्रॉप करने का फैसला अंततः भारत के लिए फायदेमंद साबित हुआ. संजू सैमसन और ईशान किशन हालिया टी20 वर्ल्ड कप में भारत के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले शीर्ष दो बल्लेबाज रहे. दोनों के शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारत ने इतिहास रचते हुए लगातार दूसरी बार टी20 वर्ल्ड कप का खिताब जीत लिया. अब शुभमन गिल की नजरें आईपीएल 2026 पर होंगी, जहां वह एक बार फिर गुजरात टाइटन्स की कप्तानी करते नजर आएंगे. गुजरात टाइटन्स अपना पहला मैच 31 मार्च को पंजाब किंग्स के खिलाफ खेलेगी. यह मुकाबला शुभमन के लिए टी20 फॉर्मेट में खुद को फिर से साबित करने का बड़ा मौका होगा।

भोपाल के 6 प्राइवेट हॉस्पिटल 1 अप्रैल से हो सकते हैं बंद, सीएमएचओ ने रिन्यू न करने पर भेजा नोटिस

भोपाल   राजधानी में लाइसेंस और पंजीयन का नवीनीकरण नहीं कराने वाले आधा दर्जन निजी अस्पतालों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय ने ऐसे 6 अस्पतालों को नोटिस जारी कर स्पष्ट किया है कि 31 मार्च 2026 के बाद बिना नवीनीकरण के उनका संचालन नहीं किया जा सकेगा. वहीं तय समय में आवेदन नहीं करने पर अब इन अस्पतालों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है. अस्पतालों के संचालन के लिए यह नियम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय भोपाल द्वारा शहर के 6 निजी अस्पतालों को लाइसेंस नवीनीकरण का आवेदन नहीं करने पर नोटिस जारी किया गया है. इन अस्पतालों ने निर्धारित समय सीमा के अंदर अपने अस्पताल के लाइसेंस और पंजीयन के नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया था. मध्यप्रदेश उपचारगृह व रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं (पंजीयन व अनुज्ञापन) अधिनियम 1973 व नियम 1997 (संशोधित 2021) के तहत निजी स्वास्थ्य संस्थानों का पंजीयन अनिवार्य है. इस अधिनियम की धारा 3 के अनुसार बिना पंजीयन के किसी भी निजी स्वास्थ्य संस्था का संचालन नहीं किया जा सकता. इन अस्पतालों को जारी किया गया नोटिस सीएमएचओ कार्यालय के अनुसार लालघाटी चौराहा स्थित जहरा अस्पताल, मोतिया तालाब रोड स्थित सरदार पटेल अस्पताल, कैपिटल पेट्रोल पंप के पास राय हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, बीडीए कॉलोनी गोदरमऊ गांधीनगर स्थित हेल्थ केयर हॉस्पिटल, दानिश कुंज कोलार रोड स्थित भगवती गौतम अस्पताल व सोनागिरी पिपलानी पेट्रोल पंप के पास स्थित सचिन ममता अस्पताल को नोटिस जारी किया गया है. ढाई महीने का समय देने के बाद भी नहीं कराया रिन्यू सीएमएचओ कार्यालय से अस्पताल संचालन के लिए पंजीयन और लाइसेंस लेना अनिवार्य होता है, जो हर तीन वर्ष के लिए जारी किया जाता है. इस वर्ष निजी अस्पतालों और क्लिनिकों को एनएचएस पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने के लिए करीब ढाई महीने का समय दिया गया था, लेकिन इन छह अस्पतालों ने निर्धारित अवधि में नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया. 31 मार्च के बाद होगी कार्रवाई मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. मनीष शर्मा ने बताया, '' नर्सिंग होम एक्ट के प्रावधानों के तहत रिन्यूअल आवेदन जमा नहीं करने पर इन अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया है. यदि 31 मार्च के बाद भी ये अस्पताल संचालित पाए गए तो उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.'' डॉ. शर्मा ने बताया कि इसके साथ अन्या अस्पतालों का अनियमितताओं की भी जांच की जा रही है. यदि कोई कमी सामने आती है, तो ऐसे अस्पतालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.

भोपाल सेक्स रैकेट: दो बहनों के मामले में नए राज खुलते हैं, जानें सिंडिकेट की इनसाइड स्टोरी

 भोपाल भोपाल के बागसेवनिया थाना क्षेत्र में सामने आए चर्चित धर्मांतरण और दुष्कर्म मामले में गिरफ्तार सगी बहनें अमरीन और आफरीन इस समय जेल में हैं. इस मामले में जांच के दौरान लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं. पुलिस पूरे प्रकरण की अलग-अलग पहलुओं से जांच कर रही है ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके। जांच के दौरान यह भी पता चला है कि दोनों बहनों के परिवार का संबंध भोपाल के ईरानी डेरे से जुड़ा बताया जा रहा है. यह जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने इस दिशा में भी पड़ताल शुरू कर दी है. सूत्रों के अनुसार, जब दोनों बहनें अपने परिवार के साथ अब्बास नगर की झुग्गियों में रहती थीं, उसी दौरान उनके परिवार की ईरानी डेरे से नजदीकियां बढ़ी थीं. अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वहां के आपराधिक छवि वाले लोगों से उनका कोई संपर्क था या नहीं। ब्यूटी पार्लर की आड़ में सेक्स रैकेट पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि दोनों बहनों ने ब्यूटी पार्लर की आड़ में अपना नेटवर्क तैयार किया था. अधिकारियों को शक है कि इसी माध्यम से कई युवतियों को जाल में फंसाया गया हो सकता है. इसलिए पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि अब तक कितनी लड़कियां इस पूरे मामले से प्रभावित हुई हैं। एडिशनल डीसीपी गौतम सोलंकी के मुताबिक पुलिस इस मामले की हर दिशा से जांच कर रही है. उन्होंने कहा कि ईरानी डेरे से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है, हालांकि अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है. पुलिस का कहना है कि जो भी तथ्य और सबूत सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और जांच जारी रहेगी। परिवार में चार बहनें और दो भाई अमरीन और आफरीन के परिवार में कुल चार बहनें और दो भाई हैं. इनमें से दो बहनों की शादी हो चुकी है, जबकि भाइयों में से एक मानसिक रूप से बीमार बताया जाता है. पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि बिलाल नाम का युवक, जो उनका मौसेरा भाई है, इस पूरे मामले में उनका सहयोगी माना जा रहा है. बिलाल मूल रूप से मुंबई का रहने वाला है, लेकिन वह भोपाल आकर अब्बास नगर स्थित घर में दोनों बहनों के साथ रहने लगा था. फिलहाल पुलिस को जानकारी मिली है कि वह मुंबई में मौजूद है। पीड़िताओं ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि अमरीन और आफरीन का गिरोह एमडी ड्रग्स की तस्करी से भी जुड़ा हुआ है। चंदन यादव अमरीन और आफरीन के साथ रहता था एफआईआर के अनुसार, चंदन यादव नाम का युवक सागर रॉयल विला में अमरीन और आफरीन के साथ रहता था. बताया गया है कि दोनों बहनों के संपर्क में आने के बाद उसने इस्लाम धर्म अपना लिया था. पीड़िताओं का कहना है कि अमरीन और आफरीन उन्हें गुजरात और मुंबई भी लेकर गई थीं, जहां उन्हें अनजान लोगों के साथ संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया. इतना ही नहीं, दोनों बहनें उन्हें शराब पीने और एमडी ड्रग्स लेने के लिए भी दबाव डालती थीं। कई लड़कियों को देह व्यापार में धकेला एफआईआर दर्ज कराने वाली दोनों पीड़िताओं का आरोप है कि आरोपी बहनें अब तक करीब पांच से सात लड़कियों को देह व्यापार में धकेल चुकी हैं. उनका तरीका भी लगभग एक जैसा होता था. सबसे पहले वे लड़कियों को बच्चे की देखभाल के नाम पर अपने घर में नौकरी पर रखती थीं. इसके बाद उन्हें अपने साथ घुमाने-फिराने ले जातीं और महंगी पार्टियों में भी शामिल कराती थीं. मौका मिलने पर चंदन, बिलाल और चानू उर्फ हाशिम रजा उनके साथ दुष्कर्म करते थे। पीड़िताओं का कहना है कि जब लड़कियां विरोध करतीं या शिकायत की बात करतीं तो उन्हें बदनामी का डर दिखाकर चुप करा दिया जाता था. बाद में काम दिलाने के बहाने उन्हें अहमदाबाद भेज दिया जाता था, जहां यासिर नाम का व्यक्ति उन्हें स्पा सेंटर में नौकरी का झांसा देकर देह व्यापार के लिए मजबूर करता था। आफरीन फोन को लेकर भटका रही मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी अमरीन, आफरीन और चंदन यादव उर्फ प्रिंस को गिरफ्तार कर लिया है. तीनों को अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया. जांच के दौरान पुलिस ने अमरीन और चंदन के मोबाइल फोन जब्त कर लिए, लेकिन आफरीन का फोन बरामद नहीं हो सका. वह फोन के बारे में पुलिस को लगातार भटकाती रही. आखिरकार रिमांड अवधि खत्म होने के बाद 26 फरवरी को उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे भी जेल भेज दिया गया. पुलिस की दो अलग-अलग टीमें फरार आरोपी यासिर, बिलाल और चानू की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं।  

MP में सीजन की पहली लू का अलर्ट: रतलाम, नर्मदापुरम और धार में हीट वेव, 14-15 मार्च को बारिश की संभावना

भोपाल  र्मी के इस सीजन में पहली बार मध्य प्रदेश में  हीट वेव यानी लू का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने रतलाम, धार और नर्मदापुरम में हीट वेव चलने की बात कही है। शुक्रवार को भी इन्हीं जिलों में लू चलेगी। बुधवार को सीजन में पहली बार पारा 40 डिग्री पर पहुंचा। रतलाम सबसे गर्म रहा। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में भी गर्मी ने तेवर दिखाए। तेज गर्मी के बीच 14 और 15 मार्च को प्रदेश में बारिश, बादल और गरज-चमक वाला मौसम भी रह सकता है। मौसम विभाग ने वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) की वजह से दो दिन तक अलर्ट जारी किया है। इससे पहले बुधवार को पूरे प्रदेश में तेज गर्मी पड़ी। 5 बड़े शहरों की बात करें तो इंदौर में पारा 38 डिग्री तक पहुंच गया। वहीं, ग्वालियर-उज्जैन में 37.7 डिग्री, भोपाल में 36.4 डिग्री और जबलपुर में 36.5 डिग्री रहा। वहीं, रतलाम में पारा 40 डिग्री रहा। नर्मदापुरम में 39.9 डिग्री, धार में 39.4 डिग्री, टीकमगढ़ में 38.4 डिग्री, खजुराहो में 38.2 डिग्री, गुना में 38.1 डिग्री दर्ज किया गया। दमोह, मंडला, उमरिया, सागर, खरगोन, खंडवा और श्योपुर में तापमान 37 डिग्री या इससे अधिक दर्ज किया गया। इस मार्च में पहली बार अधिकतम तापमान रहा। दूसरे सप्ताह से गर्मी के तेवर तीखे प्रदेश में मार्च के दूसरे हफ्ते से ही गर्मी के तेवर तीखे हैं। सबसे गर्म ग्वालियर, चंबल, उज्जैन और इंदौर संभाग के शहर है। आने वाले दिनों में यही पर गर्मी का असर ज्यादा रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में हवा की दिशा उत्तर-पूर्व से अब पश्चिम और उत्तर-पश्चिम है। वहीं, हवा में नमी बहुत कम है। साथ ही रेगिस्तानी इलाकों से मप्र पहुंचती है। यह अपने साथ गर्मी भी लाती है। 2 दिन इन जिलों में बदलेगा मौसम     14 मार्च– ग्वालियर, नीमच, मंदसौर, मुरैना, श्योपुर और भिंड।     15 मार्च– ग्वालियर, जबलपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, अशोकनगर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नर्मदापुरम, बैतूल। मार्च में सर्दी-जुकाम, एलर्जी का खतरा डॉक्टरों‎ की मानें तो मार्च का यही मौसम ‎सबसे ज्यादा बीमारियां फैलाता है। दरअसल, इस महीने दिन में तो गर्मी बढ़ जाती है, लेकिन रात और सुबह हल्की ठंड रहती है। कई बार लोग दिन की गर्मी से बचने के लिए हल्के कपड़े पहन लेते हैं। वहीं, कोल्ड्रिंक्स समेत शीतल पेय पदार्थों का भी सेवन करते हैं। इससे सर्दी-जुकाम एलर्जी‎ और अस्थमा के मरीज बढ़ते हैं। ‎सुबह और देर रात ठंडी हवा से ‎बचना जरूरी है। खासकर बच्चों और ‎बुजुर्गों को।‎ मार्च के दूसरे सप्ताह में पड़ती है गर्मी प्रदेश में मार्च के दूसरे पखवाड़े में तेज गर्मी का ट्रेंड है। पिछले 10 साल में 15 मार्च के बाद ही तेज गर्मी पड़ी है, लेकिन इस बार ट्रेंड बदल गया है। दूसरे पखवाड़े की बजाय शुरुआत में ही पारे में उछाल आया है।

आइसर की नई तकनीक से सेमीकंडक्टर निर्माण में सुधार, स्वदेशी माइक्रोफैब्रिकेशन से बढ़ेगी गति

भोपाल भारत को सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आइसर) भोपाल के वैज्ञानिकों ने कम लागत और कम कार्बन उत्सर्जन वाली स्वदेशी माइक्रोफैब्रिकेशन तकनीक विकसित की है। यह तकनीक सेमीकंडक्टर चिप निर्माण की जटिल और महंगी प्रक्रिया को सरल और किफायती बनाने की क्षमता रखती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नवाचार से भारत में सेमीकंडक्टर अनुसंधान और उत्पादन को नई गति मिल सकती है। साथ ही यह तकनीक बड़े उद्योगों के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्टअप्स के लिए भी चिप निर्माण अनुसंधान को सुलभ बनाएगी। आइसर भोपाल के वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि     आइसर भोपाल के विद्युत अभियांत्रिकी और कंप्यूटर विज्ञान विभाग के डॉ. शांतनु तालुकदार और उनकी टीम ने कई वर्षों के शोध के बाद यह स्वदेशी तकनीक विकसित की है। उनकी टीम में डॉ. स्वप्नेंदु घोष और देबजीत डे सरकार भी शामिल रहे।     वैज्ञानिकों ने माइक्रोफैब्रिकेशन प्रक्रिया में उपयोग होने वाले फोटोमास्क और हार्ड मास्क के निर्माण के लिए नई विधि विकसित की है। इस शोध का प्रकाशन अंतरराष्ट्रीय जर्नल “माइक्रो एंड नैनो इंजीनियरिंग” में भी किया गया है, जिससे इसकी वैश्विक स्तर पर भी सराहना हो रही है। माइक्रोफैब्रिकेशन प्रक्रिया होगी आसान     आधुनिक सेमीकंडक्टर चिप निर्माण में फोटोमास्क और हार्ड मास्क की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इनकी सहायता से नैनोमीटर से लेकर माइक्रोन स्तर तक के सूक्ष्म पैटर्न चिप के सब्सट्रेट पर स्थानांतरित किए जाते हैं।     पारंपरिक तकनीक में इन मास्क को तैयार करने के लिए अत्यंत महंगे उपकरण, अत्याधुनिक लिथोग्राफी मशीनें, विशेष क्लीनरूम और कई प्रकार के खतरनाक रसायनों की आवश्यकता होती है।     यही कारण है कि भारत के कई शैक्षणिक और शोध संस्थानों के लिए इस क्षेत्र में कार्य करना चुनौतीपूर्ण रहा है। नई स्वदेशी तकनीक इन जटिलताओं को कम करते हुए कम संसाधनों में माइक्रोफैब्रिकेशन को संभव बना सकती है। क्रोमियम परत से बनाए जाते हैं सूक्ष्म पैटर्न     नई तकनीक में नैनोमीटर मोटाई की क्रोमियम धातु की परत का उपयोग किया जाता है। वैज्ञानिकों ने एक अत्यंत नुकीले धातु प्रोब की सहायता से इलेक्ट्रोकेमिकल ऑक्सीकरण अभिक्रिया को बेहद सीमित क्षेत्र में नियंत्रित करने की विधि विकसित की है। इस प्रक्रिया में क्रोमियम की सतह पर सीधे पैटर्न बनाए जाते हैं।     वैज्ञानिक इसे इस तरह समझाते हैं जैसे कागज पर पेन से लिखकर आकृति बनाई जाती है। इसी सिद्धांत पर अत्यंत सूक्ष्म स्तर पर चिप के लिए जरूरी डिजाइन तैयार किए जा सकते हैं। इस नवाचार से फोटोमास्क और हार्ड मास्क का निर्माण अपेक्षाकृत सरल और सस्ता हो जाता है। पर्यावरण के लिए भी लाभकारी तकनीक     इस नई विधि की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें अतिरिक्त रेजिस्ट परत, महंगे लिथोग्राफी उपकरण या खतरनाक रसायनों की आवश्यकता नहीं पड़ती। इससे उत्पादन लागत में कमी आने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरणीय जोखिम भी कम हो जाते हैं।     इसके अलावा यह तकनीक माइक्रोफैब्रिकेशन की दो प्रमुख प्रक्रियाओं—लिथोग्राफी और एचिंग—का एक साथ समाधान प्रस्तुत करती है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह मौजूदा सेमीकंडक्टर निर्माण प्रणालियों के साथ भी आसानी से एकीकृत की जा सकती है। स्टार्टअप और संस्थानों के लिए नए अवसर     विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक माइक्रोफैब्रिकेशन अनुसंधान को बड़े उद्योगों और सीमित प्रयोगशालाओं से बाहर निकालकर शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्टअप्स तक पहुंचाने में सहायक होगी। इससे नवाचार की गति तेज होगी और भारत में सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत आधार मिलेगा। आइसर भोपाल के निदेशक प्रो. गोवर्धन दास के अनुसार यह तकनीक उद्योगों के साथ साझा की जाएगी, ताकि बड़े पैमाने पर कम लागत में सेमीकंडक्टर चिप निर्माण को बढ़ावा दिया जा सके। क्या होते हैं फोटोमास्क और हार्ड मास्क     फोटोमास्क एक पारदर्शी प्लेट होती है, जो आमतौर पर कांच या क्वार्ट्ज से बनाई जाती है। इसमें बहुत छोटे-छोटे पैटर्न बनाए जाते हैं, जिनकी मदद से फोटोलिथोग्राफी प्रक्रिया के दौरान चिप पर डिजाइन तैयार किया जाता है।     वहीं हार्ड मास्क एक मजबूत परत होती है, जो सिलिकॉन, ऑक्साइड या नाइट्राइड जैसे पदार्थों से बनाई जाती है। इसका उपयोग माइक्रोफैब्रिकेशन में संरचना को सुरक्षित रखते हुए पैटर्न ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। दोनों तकनीकों का उपयोग सेमीकंडक्टर चिप निर्माण में व्यापक रूप से किया जाता है। सेमीकंडक्टर का बढ़ता महत्व     सेमीकंडक्टर ऐसी सामग्री होती है जिसकी विद्युत चालकता धातुओं और इंसुलेटर के बीच होती है। यही विशेषता इसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए अत्यंत उपयोगी बनाती है। मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर प्रोसेसर, मेमोरी चिप, ट्रांजिस्टर, डायोड, एलईडी और सोलर सेल जैसे उपकरणों में इसका व्यापक उपयोग होता है।     इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों, सेंसर, एयरबैग सिस्टम, रक्षा और अंतरिक्ष तकनीक में भी सेमीकंडक्टर का महत्वपूर्ण योगदान है। 5जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसे आधुनिक प्रौद्योगिकी प्रकल्प भी इसी पर निर्भर हैं। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम     विशेषज्ञों के अनुसार आइसर भोपाल के वैज्ञानिकों की यह उपलब्धि भारत के लिए सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि इस तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग शुरू होता है तो देश में चिप निर्माण की लागत कम हो सकती है और अनुसंधान संस्थानों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं। इससे न केवल तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा बल्कि भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में अपनी मजबूत उपस्थिति भी दर्ज करा सकेगा।  

MP का शहर जल्द जुड़ेगा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से, हाईस्पीड रोड प्रोजेक्ट को दी हरी झंडी

उज्जैन मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन को जल्द ही देश के सबसे बड़े हाईस्पीड रोड नेटवर्क से सीधा कनेक्शन मिलने वाला है। केंद्र सरकार ने उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे जोड़ने के लिए नई सड़क परियोजना को मंजूरी दे दी है। करीब 80.45 किमी लंबी सड़क बनने से महाकाल की नगरी तक पहुंचना आसान हो जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 3839 करोड़ रुपए बताई जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि सिंहस्थ मेले से पहले इस कनेक्टिविटी को तैयार कर लिया जाए, ताकि देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिल सके। 2025 में बना नेशनल हाईवे, अब तेजी से आगे बढ़ेगा काम इस मार्ग को मई 2025 में राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किया गया था। इसके बाद 6 महीने में ही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली गई है। अब भूमि अधिग्रहण और अन्य प्रक्रियाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक 17 मार्च तक टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है। जबकि अप्रैल 2026 से निर्माण कार्य शुरू करने की योजना है। परियोजना को 2028 से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अभी संकरी सड़क, एक्सप्रेस वे बनने पर होगी तेज रफ्तार फिलहाल जिस मार्ग से यह कनेक्टिविटी बनेगी, वहां कई हिस्सों में मार्ग की चौड़ाई करीब 5.5 मीटर है। यहां वाहन की रफ्तार 20-25 किमी प्रतिघंटा ही है। लेकिन नई सड़क 4 लेन होगी, इसके बनने के बाद वाहनों की रफ्तार 80-100 किमी प्रतिघंटा होगी। गुजरात, महाराष्ट्र से उज्जैन का सफर होगा आसान दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे से जुड़ने के बाद गुजरात और महाराष्ट्र से उज्जैन आने का रास्ता काफी छोटा हो जाएगा। वर्तमान में यहां के यात्रियों को उज्जैन आने के लिए एक लंबा सफर तय करना पड़ता है। नई सड़क बनने के बाद श्रद्धालुओं, पर्यटकों और व्यापारिक गतिविधियों को भी बड़ा फायदा होगा। उद्योगों को भी मिलेगा लाभ इस परियोजना से इंदौर, देवास, उज्जैन के साथ ही पीथमपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को भी फायदा होगा। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से माल परिवहन तेज होगा और लॉजिस्टिक लागत कम होने की उम्मीद भी नजर आ रही है।

MP के तीन तहसीलों के 14 गांवों में मिला लौह अयस्क का खजाना, सरकार को होगा बड़ा फायदा

जबलपुर   मध्य प्रदेश के करीब 15 जिलों में छोटे-बड़े स्तर पर आरयन ओर (लौह अयस्क) के ब्लॉक के बीच जबलपुर से अच्छी खबर है। यहां तीन तहसील मझौली, सिहोरा और पनागर में चार जगह आयरन ओर का बड़ा ब्लॉक मिला है। इसका रकबा 1081 हेक्टेयर है। सबसे बड़ा 936 हेक्टेयर का ब्लॉक मझौली के दर्शनी में मिला है। यह पहला मौका है, जब इतने बड़े क्षेत्र में लौह अयस्क मिला है। जबलपुर व कटनी की वर्तमान खदानें 20 से 35 हेक्टेयर की हैं। यहां से चीन तक लौह अयस्क भेजा जा चुका है। अब नए ब्लॉक मिलने के बाद प्रदेश का राजकोष और मजबूत होगा। संचालक को भेजी गई रिपोर्ट आयरन ओर व मैग्नीज का रकबा मझौली, सिहोरा, पनागर तहसील के 14 गांवों में है। सिहोरा के झीटी और कोड़ामुकुर में 86 हेक्टेयर का ब्लॉक है। मझौली के खुड़ावल में आयरन ओर, लैटराइट व मैग्नीज का रकबा 11, पनागर के कटैया में दोनों खनिज 49 हेक्टेयर में फैले हैं। तीनों का रकबा 1000 हेक्टेयर है। नीलामी प्रक्रिया प्रशासन ने शुरू की है। फैक्ट फाइल – प्रदेश में जबलपुर आयरन ओर का सबसे बड़ा उत्पादक। – 03 साल पहले भी सिहोरा और पनागर में कुछ ब्लॉक मिले थे।  – इनमें 10 लाख टन से अधिक आयरन ओर होने का अनुमान। – अभी 42 छोटी-बड़ी खदानें, इनमें 35 आयरन ओर की हैं। मुख्यालय भेजी है रिपोर्ट जिले में 4 जगह आयरन ओर, मैग्नीज, लैटराइट का ब्लॉक मिला है। रकबा 1081 हेक्टेयर है। ब्लॉक क्षेत्र की भूमि सीमांकन किया जा रहा है। रिपोर्ट मुख्यालय भेजी है। -एके राय, खनिज अधिकारी जबलपुर

किसानों को मिलेगी 22वीं किस्त 13 मार्च को, कुछ किसान रह जाएंगे वंचित, जानें पूरी जानकारी

नई दिल्ली  देशभर के करोड़ों किसान जिस किस्त का इंतजार कर रहे थे, उसका समय अब करीब आ गया है. सरकार ने साफ कर दिया है कि किसानों को मिलने वाली अगली राशि जल्द उनके खातों में पहुंचने वाली है. दरअसल पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को हर साल आर्थिक मदद दी जाती है। जिससे खेती से जुड़े छोटे खर्चों में राहत मिल सके. कई दिनों से यह चर्चा चल रही थी कि अगली किस्त कब जारी होगी. अब इस पर तस्वीर साफ हो गई है. सरकार के मुताबिक पात्र किसानों के बैंक खातों में 13 मार्च को 22वीं किस्त भेजी जाएगी. हालांकि हर बार की तरह इस बार भी कुछ किसान ऐसे होंगे जिनके खाते में पैसे नहीं पहुंचेंगे। कब खाते में आएंगे 2 हजार रुपये? काफी समय से किसानों के बीच यह सवाल चल रहा था कि अगली किस्त कब जारी होगी. पहले माना जा रहा था कि फरवरी के आखिर तक पैसे आ सकते हैं. फिर यह चर्चा भी हुई कि होली से पहले किस्त जारी हो सकती है. अब सरकार की तरफ से यह साफ कर दिया गया है कि 13 मार्च को किसानों के खातों में 2000 रुपये भेजे जाएंगे. यह पैसा सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाता है, इसलिए किसानों को कहीं जाने की जरूरत नहीं होती। किसान योजना में ऐसे मिलता है फायदा     हर साल किसानों को कुल 6000 रुपये की मदद मिलती है.     यह रकम तीन किस्तों में दी जाती है.     हर चार महीने में 2,000 रुपये खाते में भेजे जाते हैं.     अब तक किसानों को 21 किस्तें मिल चुकी हैं.     अब 22वीं किस्त जारी होने के बाद लाखों किसानों को एक बार फिर सीधी आर्थिक मदद मिलने वाली है. इन किसानों को नहीं मिलेंगे पैसे हालांकि सभी किसानों को इस बार किस्त का फायदा नहीं मिलेगा. कुछ जरूरी नियम पूरे न होने पर किस्त अटक सकती है. सरकार ने पहले ही साफ कर दिया है कि योजना का लाभ लेने के लिए कुछ प्रक्रियाएं पूरी करना जरूरी है। अगर ये काम पूरे नहीं हैं तो पैसे रुक सकते हैं:     ई-केवाईसी पूरा नहीं किया है.     फार्मर आईडी नहीं बनवाई है.     बैंक खाते की जानकारी गलत है.     आधार और बैंक अकाउंट लिंक नहीं है. इन कारणों से कई किसानों की किस्त रुक जाती है. इसलिए जिन किसानों ने अभी तक ये काम पूरे नहीं किए हैं. उन्हें जल्द से जल्द अपडेट कर लेना चाहिए। आपके खाते में पैसे आएंगे या नहीं किसानों के लिए यह जानना भी आसान है कि उनके खाते में किस्त आएगी या नहीं. इसके लिए ऑनलाइन स्टेटस चेक किया जा सकता है.स्टेटस चेक करने के लिए ये आसान तरीका अपनाएं। ऐसे चेक करें स्टेटस     पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं.     Farmers Corner में Know Your Status ऑप्शन पर क्लिक करें.     अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और कैप्चा भरें.     इसके बाद स्क्रीन पर पूरी जानकारी दिखाई दे जाएगी. यहां से किसान यह भी देख सकते हैं कि उनका ई-केवाईसी, लैंड सीडिंग और आधार बैंक सीडिंग पूरा है या नहीं. अगर पहले किसी वजह से किस्त रुक गई थी और अब सभी जरूरी काम पूरे कर दिए गए हैं. तो आगे आने वाली किस्त फिर से मिल सकती है।

“बिहार ने दिखाया कमाल, गरीबी 41% से घटकर 4% पर! नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुआ बदलाव”

पटना. बिहार में इन दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा हर चौक-चौराहे पर हो रही है.  नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार का सीएम कौन होगा, इस सवाल का जवाब भी लोग जानना चाह रहे हैं. वहीं नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की जेडीयू में जॉइनिंग के साथ ही उनके सियासी उदय की भी चर्चा जोरों पर है. लेकिन, इन सबके बीच नए बिहार को लेकर जो आंकड़े सामने आए  हैं, वह सच में नीतीश कुमार के विजन और विजडम दोनों की बेहतरीन मिसाल पेश करते हैं। दरअसल कभी विकास के मामले में देश के सबसे पिछड़े राज्यों में गिने जाने वाले बिहार को लंबे समय तक “बीमारू राज्य” कहा जाता रहा. लेकिन, अब तस्वीर तेजी से बदलती दिख रही है. प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य श्यामका रवि ने ‘प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद’ (Economic Advisory Council to the Prime Minister) से जुड़ी अपनी भूमिका के साथ इंडिया एक्स्प्रेस (The Indian Express) में लिखे लेख में बताया है कि पिछले एक दशक में बिहार ने जीवन स्तर, गरीबी और पोषण क्षमता जैसे कई अहम सूचकों पर उल्लेखनीय सुधार किया है। संजय झा ने भी शेयर किया पोस्ट इस आर्टिकल में बताया गया कि गया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल के दौरान बिहार में राजनीतिक स्थिरता और शासन की निरंतरता का असर विकास के आंकड़ों में साफ दिखाई देता है. कई मामलों में बिहार ने पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल को भी पीछे छोड़ दिया है. उपभोग, गरीबी में कमी और पोषण क्षमता जैसे क्षेत्रों में बिहार की प्रगति राष्ट्रीय औसत के करीब पहुंचती दिख रही है. राज्यसभा सांसद और जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी इस आर्टिकल को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट शेयर इसे आंख खोलने वाली रिपोर्ट बताई है। हैरान करने वाले हैं रिपोर्ट के प्रमुख आंकड़े और तथ्य     2011 से 2024 के बीच बिहार के ग्रामीण इलाकों में रियल मासिक प्रति व्यक्ति खर्च (MPCE) में औसतन 4.5% वार्षिक वृद्धि हुई, जो राष्ट्रीय औसत 3.1% से करीब 50% अधिक है।     शहरी बिहार में रियल MPCE की वृद्धि 4.6% रही, जबकि पूरे भारत में यह 2.6% रही.     ग्रामीण बिहार में मासिक प्रति व्यक्ति खर्च 2011-12 में ₹1,086 से बढ़कर ₹3,531 हो गया.     इसी अवधि में पश्चिम बंगाल में यह ₹1,211 से बढ़कर ₹3,366 तक पहुंचा, लेकिन उसकी वृद्धि दर कम रही.     शहरी बिहार में नॉमिनल MPCE की वृद्धि 10.7% रही, जबकि पश्चिम बंगाल में यह केवल 6.9% दर्ज की गई. राष्ट्रीय औसत के मुकाबले बिहार की स्थिति में सुधार     बिहार का ग्रामीण MPCE राष्ट्रीय औसत के 80.5% से बढ़कर 91.7% तक पहुंच गया.     शहरी क्षेत्रों में यह 58.7% से बढ़कर 75.4% हो गया.     इसके विपरीत पश्चिम बंगाल के आंकड़ों में गिरावट देखी गई.     ग्रामीण अनुपात 89.8% से घटकर 87.5% हो गया.     शहरी अनुपात 97.5% से घटकर 82.8% रह गया. गरीबों की आय में भी तेज वृद्धि     ग्रामीण बिहार में सबसे गरीब 20% आबादी की आय में 4.2% CAGR की वृद्धि हुई.     मध्यम वर्ग में यह 4.6% और अमीर वर्ग में 4.4% रही.     शहरी बिहार में गरीब वर्ग की वृद्धि 5.7% रही, जो सबसे ज्यादा है. गरीबी में भारी गिरावट     2011-12 में बिहार में गरीबी दर 41.3% थी.     2023-24 में यह घटकर 4.4% रह गई, जो राष्ट्रीय औसत 4.0% के लगभग बराबर है.     पश्चिम बंगाल की गरीबी दर इसी अवधि में 30.4% से घटकर 6% रही, जो बिहार से अधिक है। पोषण क्षमता में भी सुधार     2011-12 में बिहार में 64.7% परिवार पोषणयुक्त भोजन खरीदने में सक्षम नहीं थे.     2023-24 में यह घटकर 27.4% रह गया.     पश्चिम बंगाल में यह आंकड़ा 56% से घटकर 34.6% तक आया क्या कहता है विश्लेषण? रिपोर्ट के अनुसार बिहार में जीवन स्तर में सुधार, गरीबी में तेज कमी और खपत क्षमता में बढ़ोतरी जैसे संकेत स्पष्ट हैं. विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय तक स्थिर शासन और नीतिगत निरंतरता ने इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है. रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि जिस बिहार को कभी स्थायी आर्थिक पिछड़ेपन का उदाहरण माना जाता था, अब वही राज्य कई सामाजिक-आर्थिक संकेतकों पर तेजी से आगे बढ़ता नजर आ रहा है।