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मां बिरासिनी धाम बिलासपुर में मातारानी के दर्शन के लिए दर्शनार्थियों की लगी भीड़

मां बिरासिनी धाम बिलासपुर में मातारानी के दर्शन के लिए दर्शनार्थियों की लगी भीड़ उमरिया उमरिया जिले के बिलासपुर तहसील अंतर्गत मां बिरासिनी धाम बिलासपुर में चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर प्रथम दिन दर्शनार्थियों की भारी भीड़ लगी हुई है। दूर-दराज से लोग दर्शन करने के लिए माता रानी के दरबार में आ रहे हैं।मां विरासनी धाम बिलासपुर में 10 दिनों तक मेला लगा रहता है। यहां पर दूर-दूर से लोग माता रानी के दरबार में आते हैं।दर्शन कर अपनी मनोकामना पूर्ण करते हैं।नवमी के दिन रात्रि में रोशनाई का प्रोग्राम रहता है। बड़ी संख्या में जवारे कलश बोए जाते हैं। जिनका विसर्जन दसवें दिन होता है। वहीं पर मंदिर के पंडा बाबा ने जानकारी देते हुए बताएं कि हम कई पीढ़ियां से यहां माता रानी की सेवा करते आ रहे हैं। यह प्राचीनतम मंदिर है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी की पुण्यतिथि पर किया नमन

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी की पुण्यतिथि पर किया नमन रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी की पुण्यतिथि (20 मार्च) पर उन्हें नमन किया है। उन्होंने कहा कि रानी अवंती बाई लोधी साहस, स्वाभिमान और बलिदान की प्रतीक हैं। उनका नाम भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में अमर वीरांगनाओं में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रानी अवंती बाई लोधी ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों का डटकर विरोध किया। उन्होंने अपने राज्य और मातृभूमि की रक्षा के लिए अंतिम क्षण तक संघर्ष किया और स्वाधीनता के लिए बलिदान दिया।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रानी अवंती बाई नारी शक्ति और सामाजिक चेतना का प्रतीक थीं। उन्होंने समाज को जागरूक करने का कार्य किया और न केवल महिलाओं बल्कि पूरे राष्ट्र को संघर्ष की राह दिखाई। उनकी वीरता, बलिदान और नेतृत्व क्षमता भारत के इतिहास में नारी सशक्तिकरण का अमिट उदाहरण हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारत का इतिहास वीरांगनाओं की शौर्य गाथाओं से भरा हुआ है। रानी अवंती बाई लोधी जैसी महान नारियों की कहानियाँ हमें आज भी राष्ट्रभक्ति, त्याग और साहस की प्रेरणा देती हैं। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि आत्मसम्मान और मातृभूमि की रक्षा के लिए किसी भी चुनौती से पीछे नहीं हटना चाहिए। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे रानी अवंती बाई को लोधी के आदर्शों से प्रेरणा लें और उनके बलिदान को स्मरण कर देश और समाज के उत्थान में अपना योगदान दें।

सुनियोजित शहरी विकास और अवैध प्लॉटिंग पर रोक की दिशा में बड़ा कदम: मुख्यमंत्री साय

छत्तीसगढ़ विधानसभा से पारित हुआ नगर एवं ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक 2026 सुनियोजित शहरी विकास और अवैध प्लॉटिंग पर रोक की दिशा में बड़ा कदम: मुख्यमंत्री साय  छत्तीसगढ़ में सुनियोजित शहरी विकास को मिलेगी नई दिशा -वित्त मंत्री ओपी चौधरी रायपुर   छत्तीसगढ़ में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और सुव्यवस्थित विकास की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक 2026 को विधानसभा ने ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस संशोधन का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में अनियंत्रित विस्तार और अवैध प्लॉटिंग पर नियंत्रण स्थापित करते हुए योजनाबद्ध विकास को गति देना है। सदन में चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि वर्तमान में नगर विकास योजनाएं तैयार करने और उनके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी  आवास एवं पर्यावरण विभाग के मुख्यतः रायपुर विकास प्राधिकरण और नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण जैसे प्राधिकरणों पर ही निर्भर है। प्रदेश में बढ़ती आर्थिक विकास के फलस्वरूप, शहरों के व्यवस्थित विकास की आवश्यकता आज और बढ़ गई है। मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में विभिन्न एजेंसियों की भागीदारी से नगर विकास योजनाओं के बेहतर परिणाम सामने आए हैं। अहमदाबाद जैसे कई प्रमुख शहरों में रिंग रोड जैसी प्रमुख परियोजनाएं, नगर विकास योजना बनाकर, योजनाबद्ध तरीके से विकसित की गई हैं। वित्त मंत्री चौधरी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में भी रायपुर मास्टर प्लान के अंतर्गत एम.आर.-43 मार्ग का निर्माण नगर विकास योजना के माध्यम से किया जा रहा है, जो इस प्रणाली की उपयोगिता को दर्शाता है। संशोधन के तहत छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा-38 में बदलाव किया गया है। इसके अनुसार अब नगर विकास योजनाएं तैयार करने के लिए अधिकृत एजेंसियों के दायरे का विस्तार किया जा रहा है । नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकरणों के अलावा राज्य शासन के अभिकरणों, स्थानीय नगर निकाय  और सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों द्वारा भी नगर विकास योजना क्रियान्वित की जा सकेगी। इससे योजनाओं की संख्या में वृद्धि होने के साथ-साथ औद्योगिक और आवासीय विकास को भी नई गति मिलेगी। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि इस विधेयक का मूल उद्देश्य राज्य में सुनियोजित शहरी विकास को बढ़ावा देना, अवैध प्लॉटिंग पर अंकुश लगाना और उद्योग व आवास के लिए व्यवस्थित भूखंडों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह संशोधन छत्तीसगढ़ के शहरी परिदृश्य को अधिक सुव्यवस्थित और विकासोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ नगर एवं ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक 2026 के पारित होने पर कहा कि यह निर्णय राज्य में सुनियोजित और संतुलित शहरी विकास को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के इस दौर में अवैध प्लॉटिंग पर नियंत्रण और योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक था। इस संशोधन के माध्यम से विभिन्न एजेंसियों की भागीदारी बढ़ाकर विकास कार्यों को गति दी जाएगी, जिससे शहरों में बेहतर अधोसंरचना, व्यवस्थित आवास और उद्योगों के लिए उपयुक्त भूमि उपलब्ध हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ के शहरों को आधुनिक, सुव्यवस्थित और भविष्य के अनुरूप विकसित करना है, जिससे आम नागरिकों को बेहतर जीवन गुणवत्ता मिल सके।

आवास और अधोसंरचना विकास को नई दिशा और गति देगा यह कानून: मुख्यमंत्री साय

वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल (संशोधन) विधेयक 2026 विधानसभा से पारित आवास और अधोसंरचना विकास को नई दिशा और गति देगा यह कानून: मुख्यमंत्री साय छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल का नाम अब छत्तीसगढ़ गृह एवं अधोसंरचना विकास मंडल -वित्त मंत्री ओ पी चौधरी रायपुर राज्य में आवासीय और शहरी अधोसंरचना विकास को व्यापक स्वरूप देने के उद्देश्य से वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल अधिनियम, 1972 (संशोधन) विधेयक 2026 को विधानसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। यह संशोधन द्वारा अब मंडल का नाम छत्तीसगढ़ गृह एवं अधोसंरचना विकास मंडल किया गया है एवं मंडल की भूमिका को विस्तार देते हुए उसे एक आधुनिक और बहुआयामी इंफ्रास्ट्रक्चर एजेंसी के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सदन में जानकारी देते हुए वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल का गठन मूलतः मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल अधिनियम, 1972 के तहत किया गया था। राज्य गठन के बाद यह संस्था प्रदेश में आवासीय योजनाओं, नगरीय अधोसंरचना और किफायती आवास उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में मंडल द्वारा लगभग 3,050 करोड़ रुपये की लागत से 78 नई परियोजनाएं शुरू की गई हैं। राज्य शासन द्वारा 735 करोड़ रुपये का ऋण भुगतान कर मंडल को ऋणमुक्त किया गया है। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY 2.0) के अंतर्गत 2,000 ईडब्ल्यूएस आवासों के निर्माण को स्वीकृति मिली है। मंत्री चौधरी ने बताया कि 650 करोड़ रुपये से अधिक की 6 रिडेवलपमेंट परियोजनाओं की डीपीआर तैयार हो चुकी है। नवंबर 2025 में आयोजित राज्य स्तरीय आवास मेले में 2,060 करोड़ रुपये की 56 नई परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया, जिसमें 2,517 संपत्तियों की बुकिंग और 1,477 का आवंटन किया जा चुका है। वर्तमान में मंडल छत्तीसगढ़ के 33 में से 27 जिलों में सक्रिय है और प्रक्रियात्मक सुधारों के माध्यम से रजिस्ट्री के साथ भौतिक कब्जा सुनिश्चित किया जा रहा है। इसके अलावा, 858 करोड़ रुपये की लागत से 146 विकासखंडों में शासकीय आवासों का निर्माण कर मंडल ने अपनी तकनीकी क्षमता भी सिद्ध की है। उन्होंने कहा कि रायपुर, नवा रायपुर, भिलाई-दुर्ग और राजनांदगांव को एकीकृत कर एक शहरी कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें गृह निर्माण मंडल की भूमिका अहम होगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल (संशोधन) विधेयक 2026 के पारित होने पर कहा कि यह निर्णय राज्य में आवास और अधोसंरचना विकास को नई दिशा और गति प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि मंडल का दायरा बढ़ाकर उसे एक आधुनिक एवं बहुआयामी इंफ्रास्ट्रक्चर एजेंसी के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे शहरीकरण को सुव्यवस्थित रूप मिलेगा और आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण एवं किफायती आवास उपलब्ध होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार “संकल्प से सिद्धि” के मंत्र के साथ प्रदेश में योजनाबद्ध शहरी विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक अधोसंरचना के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे छत्तीसगढ़ आने वाले समय में एक सशक्त और विकसित राज्य के रूप में उभरेगा।

ईरान-इजरायल से लेकर पाक-अफगान तक युद्ध, करोड़ों बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा गहरा असर, सेव द चिल्ड्रन की रिपोर्ट

  नई दिल्ली आज दुनिया के नक्शे पर एक बड़ा हिस्सा ऐसा है, जहां स्कूलों की घंटी नहीं बल्कि धमाकों का शोर सुनाई दे रहा है. ईरान-इजरायल, रूस-यूक्रेन, पाक-अफगान से लेकर दुन‍िया के कई देश इस आग में झुलस रहे हैं. लेकिन इस सनक का सबसे ज्यादा खामियाजा अगर कोई भुगत रहा है या भुगतने वाला है तो वो आज के बच्चे यानी कल के युवा…  दुनिया की सबसे बड़ी बाल अधिकार संस्था 'सेव द चिल्ड्रन' की ताजा और डराने वाली रिपोर्ट ने इस खतरे को सामने रखा है. रिपोर्ट कहती है कि मिडिल ईस्ट और उसके आसपास के देशों में जारी हिंसा ने करीब 5.2 करोड़ बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप कर दी है। यह आंकड़ा इतना बड़ा है कि इसे एक 'एजुकेशन इमरजेंसी' कहा जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र के डेटा पर आधारित यह रिपोर्ट बताती है कि 5 से 17 साल के करोड़ों बच्चे अब स्कूल जाने के बजाय अपनी जान बचाने की जद्दोजहद में लगे हैं। ईरान में 65 स्कूल मलबे में तब्दील ईरानियन रेड क्रिसेंट सोसाइटी के हवाले से खबर है कि अकेले ईरान में हवाई हमलों ने 65 स्कूलों को पूरी तरह तबाह कर दिया है. जिन कमरों में बच्चे पहाड़े और कविताएं याद करते थे, वहां अब सिर्फ ईंट-पत्थर और धुआं बचा है। स्कूल नहीं, अब 'शेल्टर होम' कहिए रिपोर्ट में उन 12 देशों का जिक्र है जहां शिक्षा व्यवस्था आईसीयू (ICU) पर है. इनमें ईरान, इजरायल, जॉर्डन, सऊदी अरब, फिलिस्तीन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं. इन देशों में दो बड़ी चुनौतियां सामने आई हैं। स्कूलों पर हमला: कई स्कूल बमबारी में क्षतिग्रस्त हो गए हैं. मजबूरी में शरण: जो स्कूल बच गए हैं, उन्हें बंद कर दिया गया है क्योंकि वहां बेघर हुए हजारों परिवार शरण लिए हुए हैं. यानी क्लासरूम अब रहने के ठिकानों में बदल गए हैं। ऑनलाइन पढ़ाई भी फेल! हालांकि कुछ देशों ने बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई से जोड़ने की कोशिश की, लेकिन संसाधनों की कमी और बार-बार कटते इंटरनेट ने इस उम्मीद को भी तोड़ दिया है. कई इलाकों में बिजली और सुरक्षित इंटरनेट न होने के कारण बच्चे महीनों से अपनी किताबों से दूर हैं. बता दें कि इस क्षेत्रीय अस्थिरता का असर सिर्फ युद्ध लड़ रहे देशों तक सीमित नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों में भी इस हिंसा का 'रिपल इफेक्ट' (लहर जैसा असर) दिख रहा है. वहां भी अस्थिरता की वजह से बच्चों की नियमित पढ़ाई में बाधा आ रही है।

बीजेपी विधायक संजय पाठक के खिलाफ जज फोन मामले में कार्रवाई की मांग, 26 मार्च को होगी HC में सुनवाई

जबलपुर अवैध उत्खनन मामले में कटनी जिले भाजपा विधायक संजय पाठक की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उन्होंने हाईकोर्ट जज को फोन लगाया था। अब इस मामले में कार्रवाई को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई गई है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद अगली सुनवाई 26 मार्च को निर्धारित की है। जज ने सुनवाई से कर दिया था इनकार दरअसल, विधायक संजय पाठक से संबंधित कंपनी के अवैध उत्खनन में मामले में हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा ने 1 सितंबर 2025 को सुनवाई से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट जस्टिस ने अपने आदेश में कहा था कि विधायक ने उनसे फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया। जिसके कारण वह सुनवाई से खुद को अगल कर रहे है। कटनी निवासी ने दायर की है याचिका वहीं, कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि विधायक संजय पाठक ने हाईकोर्ट के जज से संपर्क करने की कोशिश की थी, जो न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास माना जा सकता है। पाठक परिवार से जुड़ी खदानों के मामले की सुनवाई जस्टिस विशाल मिश्रा की अदालत में निर्धारित थी। इसी दौरान 1 सितंबर 2025 को जस्टिस मिश्रा ने स्वयं इस बात का खुलासा किया था कि विधायक ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की थी। केस से खुद को कर लिया अलग घटना के सामने आने के बाद जस्टिस विशाल मिश्रा ने निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को प्रशासनिक स्तर पर चीफ जस्टिस के समक्ष भेजने का निर्देश भी दिया था। यह कदम न्यायपालिका की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इसी कारण उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर विधायक संजय पाठक के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग की है। याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अरविंद श्रीवास्तव और पुनीत श्रोती उपस्थित रहे।

ममता की सुरक्षित सीट पर बदलते समीकरण, 2021 का चुनावी परिणाम TMC के लिए चुनौतीपूर्ण क्यों

कोलकाता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए कार्यक्रम का ऐलान होने के बाद से सियासी तापमान बढ़ गया है. राजनीतिक दलों ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अपने 291 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर चुकी है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भवानीपुर सीट से चुनाव मैदान में उतरेंगी. विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर में राजनीतिक माहौल काफी गरम होता दिख रहा है। भवानीपुर की गलियों में चुनावी हलचल तेज है और यहां की लड़ाई सिर्फ एक सीट की नहीं, बल्कि कोलकाता की बदलती पहचान पर जनमत संग्रह की तरह मानी जा रही है. जहां तक नाम का सवाल है, भवानीपुर का अलग आध्यात्मिक इतिहास है. भवानीपुर को देवी भवानी का क्षेत्र माना जाता है और इसकी पहचान पवित्र कालीघाट मंदिर के ऐतिहासिक प्रवेश द्वार के रूप में भी रही है. हालांकि, यह इलाका एक शांत बाहरी बस्ती से अब पॉश इलाके के रूप में तब्दील हो चुका है। भवानीपुर की सामाजिक संरचना बहुत जटिल मानी जाती है. इस इलाके में पारंपरिक बंगाली परिवारों के मोहल्ले हैं, जहां राजनीतिक बहस आम बात है. गुजराती और मारवाड़ी समुदाय इस इलाके की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार माने जाते हैं. भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में सिख और मुस्लिम समुदाय के साथ ही बिहार के लोगों की आबादी भी अच्छी तादाद में है. भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में करीब 70 फीसदी गैर बंगाली आबादी है. साल 1984 में अपने सियासी सफर की शुरुआत के बाद से ही ममता बनर्जी भवानीपुर को अपने मजबूत गढ़ के रूप में देखती रही हैं। 2021 के नतीजे अलार्मिंग  सीएम ममता के इस मजबूत गढ़ में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने भी हालिया समय में अपनी जमीन मजबूत की है. साल 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जिस तरह का प्रदर्शन किया, वह ममता बनर्जी और टीएमसी के लिए अलार्मिंग है. बीजेपी ने टीएमसी के उम्मीदवार को तब न सिर्फ मजबूत चुनौती दी, बल्कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास हरीश चटर्जी स्ट्रीट के आसपास के वार्ड से भी ठीक-ठाक वोट जुटाए. इस बार टीएमसी के सामने दीदी के दुर्ग को मजबूत करने की चुनौती होगी। क्या कहते हैं वोटर जादू बाबू बाजार के आसपास 30 साल से रिक्शा चलाने वाले सिकंदर यादव ने अपना दर्द बयान करते हुए कहा कि कमाई लगभग खत्म हो गई है. उन्होंने कहा कि सरकार को हमारे लिए आगे का रास्ता देना चाहिए. सिकंदर यादव ने कहा कि अगर हमारी जिंदगी नहीं बदलती, तो फिर इससे क्या फर्क पड़ता है कि सत्ता में कौन बैठा है. पास में ही स्थानीय कसाई बरकत ने सामाजिक कल्याण योजनाओं के असर को स्वीकार किया, लेकिन यह भी जोड़ा कि शहर के सामाजिक ढांचे के भविष्य को लेकर समर्थन सशर्त है. इलाके में कॉस्मोपॉलिटन वोट को लेकर भी बदलाव दिख रहा है. ऊंची इमारतों में रहने वाले मध्यम वर्ग के बीच सफेदपोश उद्योगों की कमी को लेकर नाराजगी महसूस की जा रही है और यह वर्ग विकल्प की तलाश में दिखता है. वहीं दूसरी ओर “मां, माटी, मानुष” का नारा अब भी गरीब और वंचित तबकों में गूंजता है. लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाओं के कारण यह वर्ग तृणमूल का मजबूत समर्थक माना जाता है. बंगाल की राजनीति में संगठन की ताकत अक्सर भाषणों से ज्यादा प्रभावी मानी जाती है। तृणमूल कांग्रेस की बूथ स्तर की मशीनरी काफी मजबूत और सक्रिय दिखती है, जबकि बीजेपी की उम्मीद शहरी मध्य वर्ग की नाराजगी पर टिकी है. पार्टी को इस नाराजगी के सहारे चुनावी समीकरण बदलने की उम्मीद है. भवानीपुर में जीत के लिए केवल राजनीतिक लहर काफी नहीं मानी जा रही. मौजूदा हालात में भवानीपुर को सुरक्षित सीट की बजाय ऐसा राजनीतिक रणक्षेत्र माना जा रहा है, जहां पारंपरिक वफादारी और आधुनिक आकांक्षाओं के बीच का टकराव साफ दिख रहा है. इस बार की चुनावी फाइट पर ध्रुवीकरण की छाप भी नजर आ रही है।

छतरपुर कांग्रेस के खिलाफ कुर्की का नोटिस, बिजली बिल न चुकाने पर बढ़ी मुश्किलें

छतरपुर   कांग्रेस कार्यालय छतरपुर में उस वक्त हड़कम्प मच गया जब कार्यालय को कुर्क करने का नोटिस जारी कर दिया गया. यह नोटिस MPEB द्वारा कांग्रेस कार्यालय के बाहर चस्पा किया गया था. दरअसल, कांग्रेस कार्यालय छतरपुर ने लंबे समय से बिजली का बिल नहीं भरा था और बार-बार सूचना के बाद भी बिल नहीं दिया, जिसके बाद MPEB ने अब कुर्की की कार्रवाई शुरू कर दी है. कांग्रेस ने नहीं चुकाया इतना बिजली बिल नोटिस की जानकारी लगते ही आम जनता सहित कोंग्रेसी नेता भी हैरान रह गए. वहीं, जिला अध्यक्ष गगन यादव ने कहा, '' हमें अभी कोई जानकारी नहीं है लेकिन यह बीजेपी की साजिश लग रही है. जानकारी के मुताबिक बिल नहीं चुकाए जाने पर MPEB के अधिकारियों ने कांग्रेस कार्यालय जाकर पूछताछ की थी लेकिन जब संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो कांग्रेस कार्यालय के बाहर नोटिस चस्पा कर दिया. एमपीईबी के मुताबकि कांग्रेस कार्यालत का 10 हजार 101 रु का बिल बकाया है और उन्हें भुगतान का अंतिम अवसर पहले ही दिया जा चुका है. ये लिखा है कुर्की नोटिस में MPEB के द्वारा चिपकाए गए नोटिस में लिखा है, '' आपके द्वारा विद्युत कनेक्शन क्रमांक 1201021567 के विद्युत बिल का भुगतान नियत तिथि के अंदर भुगतान नहीं किया गया है. यह कि आपके उक्त विद्युत कनेक्शन पर बकाया राशि रु. 10101 का बिल भुगतान हेतु लंबित है. अतः मध्य प्रदेश इलेक्ट्रिकल अंडर टेकिंग (बकाया राशि) वसूली अधिनियम 1959 की धारा 147 में निहित प्रावधानों के अंतर्गत आपको यह नोटिस प्रेषित किया जा रहा है, कि आप कंपनी की बकाया राशि इस नोटिस प्राप्ति के 7 दिवस के भीतर जमा कर दें अन्यथा उक्त राशि उपरोक्त अधिनियम की धारा 6 के अनुसार बकाया भू-राजस्व के रूप में म.प्र. भू-राजस्व संहिता 1959 के तहत एक पक्षीय कार्रवाई करते हुये राजस्व अधिकारियों के माध्यम से संपत्ति कुर्की की कार्रवाई कर बकाया राशि की वसूली की जाएगी. क्या बोले छतरपुर कांग्रेस जिला अध्यक्ष जब मामले में छतरपुर कोंग्रेस जिला अध्यक्ष गगन यादव से बात की तो उन्होंने कहा, '' मुझे जानकारी नहीं है लेकिन आप ने बताया तो पता चला है, हम दिखवाते हैं. सिर्फ 10 हजार रु के लिए नोटिस चिपकाना उचित नहीं है. यह बीजेपी की साजिश लग रही है. वहीं, जब मामले में MPEB के अधिकारी केएस घोसी से बात की गई तो उन्होंने कहा, '' यह रूटीन प्रकिया है. अभी मार्च चल रहा है इसलिए नोटिस भेजे जा रहे हैं. कुछ लोग नोटिस ले लेते हैं, वहीं कुछ नहीं लेते तो चस्पा करने पड़ते हैं. शहर में बिजली का 9 करोड़ बकाया जिसकी वसूली के लिए लगातार प्रयास चल रहा है.''

EPS Pension Update: सरकार ने न्यूनतम पेंशन बढ़ाने पर दिया जवाब, जानें क्या कहा

देश  कर्मचारी पेंशन योजना यानी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत मिलने वाली पेंशन बढ़ाने की लंबे समय से चल रही मांग एक बार फिर संसद में उठी, लेकिन सरकार ने इस पर फिलहाल कोई ठोस राहत देने के संकेत नहीं दिए हैं। EPFO: न्यूनतम पेंशन बढ़ोतरी पर सरकार ने दिया जवाब, कर्मचारियों के लिए खबर EPFO Pension: कर्मचारी पेंशन योजना यानी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत मिलने वाली पेंशन बढ़ाने की लंबे समय से चल रही मांग एक बार फिर संसद में उठी, लेकिन सरकार ने इस पर फिलहाल कोई ठोस राहत देने के संकेत नहीं दिए हैं। लोकसभा में श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने साफ कहा कि अभी न्यूनतम पेंशन बढ़ाने या किसी नई सिफारिश को लागू करने की योजना नहीं है। क्या है डिटेल दरअसल, यह मुद्दा सांसद एन. के. प्रेमचंद्रन ने लोकसभा में उठाया था। उन्होंने सरकार से पूछा था कि क्या उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों पर कोई कार्रवाई होगी, क्या न्यूनतम पेंशन बढ़ाने पर विचार हो रहा है, और क्या पेंशनर्स को ज्यादा समय दिया जाएगा ताकि वे उच्च पेंशन के लिए जरूरी रकम जमा कर सकें। सरकार ने क्या कहा सरकार ने अपने जवाब में कहा कि कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) एक “परिभाषित अंशदान-परिभाषित लाभ” स्कीम है। इसका मतलब है कि पेंशन फंड कर्मचारियों के नियोक्ता के 8.33% योगदान और केंद्र सरकार के 1.16% योगदान से बनता है (जो अधिकतम ₹15,000 सैलरी तक लागू है)। इसी फंड से सभी पेंशन दी जाती है, इसलिए इसकी वित्तीय स्थिति को संतुलित रखना जरूरी है। न्यूनतम पेंशन पर बातचीत न्यूनतम पेंशन को लेकर सरकार ने फिर दोहराया कि अभी भी ₹1,000 प्रति महीने की पेंशन दी जा रही है, जो बजट से अतिरिक्त सहायता के रूप में दी जाती है। हालांकि, इसे बढ़ाने को लेकर कोई नई घोषणा नहीं की गई। पेंशनर्स की मांग है कि इसे बढ़ाकर कम से कम ₹7,500 किया जाए, क्योंकि महंगाई के इस दौर में ₹1,000 बेहद कम मानी जा रही है। उच्च पेंशन के मामले में सरकार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 2022 के फैसले के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने आवेदन किया। 31 जनवरी 2025 तक करीब 15.24 लाख आवेदन मिले थे, जिनमें से 99% से ज्यादा मामलों का निपटारा हो चुका है। पात्र लोगों को डिमांड लेटर भेजे जा चुके हैं और जिन्होंने पैसे जमा कर दिए हैं, उन्हें PPO भी जारी किया जा रहा है। जहां तक अतिरिक्त समय देने की बात है, सरकार ने साफ किया कि डिमांड लेटर मिलने के बाद पेंशनर्स को केवल 3 महीने का समय दिया जाता है, और फिलहाल इस अवधि को बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। कुल मिलाकर, सरकार का रुख यही है कि पेंशन बढ़ाने से पहले फंड की दीर्घकालिक स्थिरता को ध्यान में रखना जरूरी है।

रामनवमी के मौके पर छतरपुर में अनोखा आयोजन, शोभायात्रा में 2000 लड़कियों की तलवारबाजी

छतरपुर  अयोध्या की तर्ज पर रामनवमी का उत्सव छतरपुर में जोर-शोर से मनाया जाता है. उत्सव के लिए पूरे शहर को रंगबिरंगी लाइटों और फूलों से सजाया गया. उत्सव की तैयारी तेज हो चुकी है, आयोजन में सबसे खास जो बात होती है, वह लड़कियों की तलवारबाजी होती है. जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं. 2000 लड़कियां एक साथ हाथों में तलवार, ढोल, मजीरा, छीका लेकर रामनवमी पर रथ के आगे निकलती हैं.  जो आकर्षण का केंद्र होता है. वहीं रामालय कार्यलय के शुभारंभ पर लड़कियों ने जब तलबार बाजी दिखाई तो लोग हैरान रह गए. 27 मार्च को रामनवमी के मौके पर शहर आकर्षक झांकियों के साथ विशाल शोभायात्रा निकली जाएगी. जो रामलीला मैदान गल्ला मंडी से शुरू हो कर पूरे शहर में भ्रमण करेगी. नव प्रताप नवयुवक संघ की कलाकार प्रतीक्षा तिवारी बताती हैं "हम लोग महल परिवार में तलवारबाजी सिखाते हैं, करीब 2000 बच्चे बिना किसी भेदभाव के तलवारबाजी सीख रहे हैं.  रामवनवी में इसका प्रदर्शन करते हैं. इसके साथ ही प्रताप नवयुवक संघ के अध्यक्ष प्रदीप सेन ने कहा कि रामनवमी की भव्यता और दिव्यता के लिए शहर में बच्चों को कुछ सिखाया जाता है, जो उनके जीवन में काम आए. आत्म रक्षा के लिए सभी विधाएं सिखाई जाती है, जैसे तलवार, लाठी, फरसा, कराटे.