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गर्मी की छुट्टियों में स्पेशल ट्रेनें और बढ़ेगा AC कोच, अब आसानी से मिलेगा सीट

सागर  रेलवे ने गर्मी के मौसम में यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला किया है। इस पहल से यात्रियों को काफी राहत मिलेगी, जिससे उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने में कोई परेशानी नहीं होगी। एसएमटी-गोरखपुर-सीएसएमटी प्रतिदिन स्पेशल ट्रेन 01079 सीएमएमटी से गोरखपुर स्पेशल ट्रेन 1 से 14 अप्रेल तक (14 ट्रिप) एवं समर के समय 15 से 30 अप्रैल तक (16 ट्रिप) प्रतिदिन सीएमएमटी स्टेशन से रात 10.30 बजे चलेगी जो. अगले दिन शाम 6.15 बजे बीना जंक्शन पहुंचकर तीसरे दिन सुबह 10 बजे गोरखपुर स्टेशन पहुंचेगी। इसी प्रकार 01080 गोरखपुर से सीएमएमटी स्पेशल 3 से 16 अप्रेल तक (14 ट्रिप) एवं समर के अवसर पर 17 अप्रेल से 2 मई तक (16 ट्रिप) प्रतिदिन गोरखपुर स्टेशन से दोपहर 2.30 बजे चलेगी, जो अगले दिन सुबह 6.10 बजे बीना रुकते हुए तीसरे दिन रात 12.40 बजे सीएमएमटी स्टेशन पहुंचेगी। इस ट्रेन में कुल 22 कोच रहेंगे। ट्रेन दोनों तरफ से दादर, ठाणे, कल्याण, नासिक रोड, मनमाड, जलगांव, भुसावल, खंडवा, इटारसी, भौपाल, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, उरई, कानपुर, सेंट्रल, लखनऊ, गोंडा, बस्ती एवं खलीलाबाद स्टेशनों पर रुकेगी। एलटीटी-बनारस-एलटीटी द्वि-साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन 01073 एलटीटी से बनारस स्पेशल ट्रेन 1 से 9 अप्रैल तक (4 ट्रिप) एवं समर सीजन में 15 से 30 अप्रैल तक (6 ट्रिप) द्वि- साप्ताहिक (बुधवार एवं गुरुवार) लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्टेशन से दोपहर 12.15 बजे चलेगी, जो अगले दिन सुबह 7.55 बजे बीना पहुंचकर रात 11.30 बजे बनारस स्टेशन पहुंचेगी। इसी प्रकार 01074 बनारस से एलटीटी स्पेशल ट्रेन 3 से 11 अप्रैल तक (4 ट्रिप) एवं समर सीजन में 17 अप्रैल से 2 मई तक (6 ट्रिप) द्वि-साप्ताहिक (शुक्रवार एवं शनिवार) बनारस स्टेशन से सुबह 5.30 बजे चलेगी, जो रात 10.25 बजे बीना पहुंचकर अगले दिन शाम 4.40 बजे लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्टेशन पहुंचेगी। इस ट्रेन में कुल 22 कोच रहेंगे। ट्रेन दोनों तरफ से ठाणे, कल्याण, इगतपुरी, नासिक रोड, जलगांव, भुसावल, खंडवा, इटारसी. रानी कमलापति बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, उरई गोविंदपुरी, फतेहपुर एवं सूबेदारगंज (प्रयागराज) स्टेशनों पर रुकेगी। अहमदाबाद-कोलकाता में बढ़ाया गया एसी कोच रेलवे ने समर सीजन में यात्रियों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए बीना जंक्शन से होकर जाने वाली अहमदाबाद-कोलकाता-अहमदाबाद एक्सप्रेस एक थर्ड एसी कोच मई माह से अगले आदेश तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। 19413/14 अहमदाबाद-कोलकाता-अहमदाबाद एक्सप्रेस में 27 मई को अहमदाबाद से एवं 30 मई को कोलकाता से इस ट्रेन में अब 6 थर्ड एसी कोच होंगें। 

अखाड़ा परिषद का बड़ा फैसला, अर्धकुंभ 2027 और महाकुंभ 2028 में बिना पहचान पत्र के नहीं होंगे साधु संतों का प्रवेश

हरिद्वार साल 2027 में हरिद्वार में अर्ध कुंभ और 2028 में उज्जैन में महाकुंभ का आयोजन होने वाला है। यह दोनों ही आयोजन सुव्यवस्थित तथा पारदर्शी तरीके से हो सकें इसके लिए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की ओर से एक बड़ा निर्णय लिया गया है। दरअसल भारतीय खड़ा परिषद एवं श्रीमनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री महेंद्र रवींद्र पुरी नहीं निर्णय लिया है कि हरिद्वार अर्धकुंभ और सिंहस्थ महाकुंभ में किसी भी साधु संत को बिना आधिकारिक पहचान के प्रवेश नहीं दिया जाएगा। सभी को अपना आधार कार्ड अनिवार्य रूप से अपने साथ रखना होगा। अखाड़ा परिषद का बड़ा निर्णय श्री महंत रवींद्र पुरी ने बताया कि यह निर्णय अखाड़ा परिषद की ओर से इसलिए लिया गया है ताकि फर्जी साधुओं पर अंकुश लगाया जा सके। जो भी भगवाधारी बिना पहचान पत्र के मिलेंगे उनकी विशेष जांच की जाएगी और अगर आवश्यकता पड़ी तो उन्हें मेले में प्रवेश से रोका भी जाएगा। अखाड़ा अध्यक्ष के मुताबिक यह दोनों ही मिले सनातन धर्म की आस्था, परंपरा और संस्कृति का प्रतीक है। फर्जी साधुओं की मौजूदगी से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो सकती है। उन्होंने सभी अखाड़ों से इस अभियान में सहयोग करने की अपील की है। श्रद्धालुओं से भी अपील की गई है कि वह सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति के झांसे में ना आएं।

वेट लॉस इंजेक्शन पर 70% की छूट, जानें क्यों गिर रहे हैं दाम

नई दिल्ली भारत में वेगोवी, मौनजारो और ओजेम्पिक जैसी दवाएं वेट लॉस के लिए इस्तेमाल की जा रही थीं. डायबिटीज मैनेज करने वाली इन दवाओं की मासिक कीमत आम आदमी की पहुंच से काफी दूर होती थी लेकिन अब 21 मार्च से ये दवाएं सस्ती हो रही हैं. दरअसल, दुनिया की मशहूर वेट लॉस ड्रग 'सेमाग्लूटाइड' (Semaglutide) का पेटेंट 20 मार्च को खत्म हो रहा है. इसका सीधा मतलब यह है कि अब तक जिस दवा पर चुनिंदा विदेशी कंपनियों का कब्जा था, पेटेंट खत्म होने के बाद अब अब भारत की दिग्गज फार्मा कंपनियां उनके जेनेरिक वर्जन बाजार में उतार सकेंगी. शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक कीमतें करीब 70 फीसदी तक गिर सकती हैं।   5 हजार से कम होंगी कीमतें भारत में अभी इन वेट लॉस इंजेक्शंस का मासिक खर्च 9,000 रुपये से लेकर 28,000 रुपये तक होता है. लेकिन 21 मार्च से शुरू हो रहे 'पेटेंट क्लिफ' (पेटेंट खत्म होना) के बाद ये कीमतें 30 या 50 नहीं, बल्कि सीधे 70 फीसदी तक कम हो सकती हैं।  एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले कुछ समय में यह खर्च घटकर महज 3,000 से 4,000 रुपये प्रति महीना रह जाएगा. जेनेरिक दवाएं इसलिए सस्ती होती हैं क्योंकि कंपनियों को रिसर्च पर अरबों डॉलर खर्च नहीं करने पड़ते, वे सीधे उसी फार्मूले पर दवा तैयार करती हैं जिसकी प्रभावशीलता पहले ही साबित हो चुकी है।  54 से ज्यादा कंपनियां बाजार में उतारेंगी दवा सेमाग्लूटाइड वही साल्ट है जो दुनिया भर में 'ओजेंपिक' और 'वेगोवी' जैसे ब्रांड्स के नाम से मशहूर है. अब तक इसके पेटेंट की वजह से मोनोपॉली बनी हुई थी लेकिन अब भारत की करीब 54 कंपनियां अपनी जेनेरिक वर्जन लाने के लिए तैयार हैं।  रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत की बड़ी दवा कंपनियां जैसे Sun Pharma, Dr Reddy’s, Lupin, Ajanta, Zydus Lifesciences, Natco आदि जेनेरिक सेमाग्लूटाइड इंजेक्शन के लिए रेगुलेटरी तैयारियां काफी आगे बढ़ा चुकी हैं।  इंडस्ट्री अनुमान कहता है कि इतने अधिक ब्रांड मार्केट में आने से न केवल कीमतों पर दबाव बढ़ेगा, बल्कि डोज, पेन डिवाइस और सर्विस मॉडल के स्तर पर भी कंपनियों के बीच कॉम्पिटिशन दिख सकता है।  शॉर्टकट ना समझें  इंडियन एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और ओबेसिटी एक्सपर्ट ये इंजेक्शन लॉन्च होने के बाद से ही चेतावनी दे रहे हैं कि GLP-1 ड्रग्स को सोशल मीडिया ट्रेंड या जल्दी वजन घटाने का शॉर्टकट मानना खतरनाक हो सकता है. दिल्ली और मुंबई के ओबेसिटी एक्सपर्ट और डॉक्टर्स ने इंटरव्यू में साफ कहा है कि ये इंजेक्शन सिर्फ उन मरीजों के लिए हैं जो क्लिनिकली मोटापे से ग्रस्त हैं यानी BMI, कॉमॉर्बिडिटीज और मेडिकल हिस्ट्री के हिसाब से डॉक्यूमेंटेड मोटापे से जूझ रहे हैं न कि उन लोगों के लिए जिनका उद्देश्य सिर्फ कुछ किलो वजन घटाना है।  भले ही ये इंजेक्शन सस्ते और आसानी से उपलब्ध होने जा रहे हैं लेकिन डॉक्टर्स ने कड़ी चेतावनी भी दी है. यह कोई शॉर्टकट नहीं है जिसे कोई भी अपनी मर्जी से लगा ले. सेमाग्लूटाइड एक पावरफुल मेटाबॉलिक दवा है जो शरीर के हार्मोन्स, ब्लड शुगर और पाचन तंत्र पर सीधा असर डालती है. इसे केवल क्रॉनिक ओबेसिटी (अत्यधिक मोटापा) या गंभीर डायबिटीज के मरीजों को ही इस्तेमाल करना चाहिए।  डॉक्टर्स ने दी ये चेतावनी डायबिटीज के क्षेत्र में जाने-माने नाम डॉ. वी. मोहन ने 'पेटेंट क्लिफ' के बारे में इंटरव्यू के दौरान कहा, 'अब तक इसकी कीमत एक बड़ी बाधा थी, लेकिन मार्च 2026 के बाद जब 40 से ज्यादा कंपनियां बाजार में उतरेंगी, तो यह आम आदमी की पहुंच में होगा. लेकिन इनसे 'स्टोमक पैरालिसिस' जैसे दुर्लभ साइड-इफेक्ट्स भी हो सकते हैं जिससे सावधान रहने की जरूरत है।  पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. अंबरीश मिथल ने आजतक हेल्थ समिट में कहा था, 'सेमाग्लूटाइड' जैसे GLP-1 ड्रग्स केवल शुगर कंट्रोल नहीं करते, बल्कि शरीर का 15 से 18% वजन कम करने में मदद कर सकते हैं लेकिन यह कोई 'मैजिक पिल' नहीं है. इसे बिना डॉक्टर की सलाह के लेना खतरनाक हो सकता है. साथ ही, इसके साथ प्रोटीन डाइट और एक्सरसाइज भी जरूरी है।  एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और महाराष्ट्र टास्क फोर्स के मेंबर डॉ. शशांक जोशी ने इन दवाओं के बारे में कहा था, 'ये दवाएं केवल वजन नहीं घटातीं बल्कि लिवर और पैंक्रियाज में जमा चर्बी को भी कम करती हैं, जिससे डायबिटीज को 'रिमिसन' (खत्म होने की स्थिति) में ले जाना संभव हो सकता है लेकिन बिना एक्सपर्ट की सलाह के बिना इनका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।  बिना डॉक्टरी सलाह के न लें दवा हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन दवाओं को शुरू करने से पहले शरीर के कई टेस्ट जरूरी हैं. इसे केवल एंडोक्रिनोलॉजिस्ट या इंटरनल मेडिसिन स्पेशलिस्ट की देखरेख में ही लिया जाना चाहिए. साथ ही, यह ध्यान रखना जरूरी है कि केवल सेमाग्लूटाइड का पेटेंट खत्म हुआ है. अन्य एडवांस ड्रग्स जैसे 'टिर्जेपेटाइड' (मौनजारो) के दाम फिलहाल कम नहीं होंगे क्योंकि उनका पेटेंट अभी प्रभावी है। 

मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल में खाली पड़े 60% पद, 187 में से सिर्फ 73 कर्मचारी ही कार्यरत

भोपाल  मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB), जो विभिन्न शासकीय विभागों के लिए भर्ती प्रक्रिया संचालित करता है, खुद अपने ही विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। हालात यह हैं कि मंडल में स्वीकृत 187 पदों के मुकाबले सिर्फ 73 कर्मचारी ही कार्यरत हैं, जबकि 114 पद अब भी खाली पड़े हैं। यानी करीब 60% पद रिक्त हैं। मंडल का मुख्य कार्य अलग-अलग सरकारी विभागों के लिए भर्ती करना है, लेकिन अपने ही यहां कर्मचारियों की कमी के कारण यह काम प्रभावित हो रहा है। कई अहम पद जैसे अतिरिक्त संचालक, नियंत्रक, संयुक्त संचालक, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, प्रोग्रामर, सहायक संचालक, लेखा अधिकारी और अधीक्षक के पद खाली हैं।  डिप्टी कंट्रोलर के 5 पदों में से 4 खाली हैं, जबकि जूनियर अकाउंट्स ऑफिसर के 2 पदों में से 1 पद रिक्त है। सहायक ग्रेड-1 के 13 में से 10 पद, सहायक ग्रेड-2 के 28 में से 15 पद और सहायक ग्रेड-3 के 41 में से 23 पद खाली हैं। डाटा एंट्री ऑपरेटर के 5 में से 2 पद भी रिक्त हैं। इसके अलावा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के अधिकांश पद भी खाली पड़े हैं।   अतिरिक्त प्रभार से चल रहा काम कई महत्वपूर्ण पदों पर अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देकर काम चलाया जा रहा है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय शुक्ला मंडल के अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं, जबकि अजॉय कटेसरिया निदेशक का अतिरिक्त जिम्मा देख रहे हैं। भर्ती परीक्षाओं पर भी असर स्टाफ की कमी का असर मंडल की कार्यप्रणाली पर भी पड़ रहा है। पिछले साल मंडल ने 16 परीक्षाएं आयोजित की थीं, जबकि इस साल 22 परीक्षाएं कराने की योजना है। कर्मचारियों की कमी के कारण कई काम आउटसोर्स कर्मचारियों से कराए जा रहे हैं और निगरानी भी प्रभावित हो रही है। मंडल में पद खाली रहने की एक बड़ी वजह भर्ती परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताएं भी मानी जा रही हैं, जिसके चलते व्यवस्था प्रभावित हुई है। 

कानपुर मेट्रो के कॉरिडोर-1 के शेष हिस्से में जल्द शुरू होंगी यात्री सेवाएं, कॉरिडोर-2 का भी तेज गति से हो रहा निर्माण

कानपुर मेट्रो के कॉरिडोर-1 और 2 का विस्तारीकरण प्रगति पर, मार्च 2027 तक होगा पूरा कानपुर मेट्रो के कॉरिडोर-1 के शेष हिस्से में जल्द शुरू होंगी यात्री सेवाएं, कॉरिडोर-2 का भी तेज गति से हो रहा निर्माण कानपुर मेट्रो के विस्तार से शहर को मिलेगी आधुनिक यातायात व्यवस्था और औद्योगिक विकास को रफ्तार लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सतत विकास के विजन के अनुरूप प्रदेश के प्रमुख शहरों में तेज, भविष्योन्मुखी और प्रदूषण रहित मेट्रो परियोजनाओं का विकास किया जा रहा है। इस क्रम में औद्योगिक नगरी कानपुर में मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के तहत विकसित हो रही मेट्रो परियोजना तेजी से अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। जिसके तहत कानपुर मेट्रो परियोजना के कॉरिडोर-1 में आईआईटी कानपुर से कानपुर सेंट्रल तक मेट्रो सेवा का सुगम परिचालन हो रहा है, शेष भाग का कार्य इस वर्ष तक पूरा हो जाएगा। जिसमें बारादेवी से नौबस्ता तक पांच एलिवेटेड स्टेशनों में टेस्टिंग और ट्रायल रन चल रहा है। वहीं कॉरिडोर-2 के तहत सीएसए यूनिवर्सिटी से बर्रा मेट्रो स्टेशन तक निर्माण कार्य भी तेज गति से चल रहा है, जिसके मार्च 2027 तक पूरा होने की संभावना है। कॉरिडोर-1 के 5 एलिवेटेड स्टेशनों में चल रहा है ट्रायल रन कानपुर मेट्रो का कॉरिडोर-1, जो आईआईटी से नौबस्ता तक लगभग 23 किलोमीटर लंबा है, इसमें से 15.4 किलोमीटर का सेक्शन परिचालन में है। शेष हिस्से में अंडरग्राउंड व एलिवेटेड दोनों सेक्शन का निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है। इसके तहत झकरकट्टी से ट्रांसपोर्ट नगर तक दो अंडरग्राउंड स्टेशनों का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, इनमें फिनिशिंग का कार्य भी समाप्ति की ओर है। टीबीएम सुरंग की अप लाइन में ट्रैक बिछाया जा चुका है, जबकि डाउन लाइन में कार्य अंतिम चरण में है। वहीं, बारादेवी से नौबस्ता तक पांच एलिवेटेड स्टेशनों का भी संरचनात्मक कार्य पूरा हो चुका है, फिनिशिंग का कार्य तेज गति से चल रहा है। इस सेक्शन में जनवरी 2026 से ट्रेन टेस्टिंग और ट्रायल रन किया जा रहा है, जिससे जल्द ही इस हिस्से में यात्री सेवाएं शुरू होने की उम्मीद है। सीएसए यूनिवर्सिटी से बर्रा तक कॉरिडोर-2 में हो रहा तेज गति से विकास कानपुर मेट्रो परियोजना के तहत सीएसए यूनिवर्सिटी से बर्रा तक लगभग 8.6 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर-2 का निर्माण कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस कॉरिडोर के तहत रावतपुर से डबल पुलिया तक तीन भूमिगत स्टेशनों का निर्माण कार्य जारी है, टीबीएम सुरंग का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इसके अलावा सीएसए यूनिवर्सिटी/विजय नगर से बर्रा तक पांच एलिवेटेड स्टेशनों का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। ये सभी निर्माण कार्य मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कानपुर मेट्रो परियोजना के पूरा होने से शहर की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इससे न केवल ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या में कमी आएगी, बल्कि शहर के आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी। कानपुर मेट्रो परियोजना, शहर को आधुनिक, सुगम और पर्यावरण अनुकूल परिवहन प्रणाली प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

एमपी हाईकोर्ट का अहम फैसला, पति की संपत्ति और नौकरी पर दावे को लेकर दिया आदेश

जबलपुर  भारतीयों में आजकल बिना विधिवत तलाक लिए दूसरी शादी करने का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। कई समाजों में बहुविवाह की भी प्रथा है जिसका सहारा लेकर इसे मान्यता देने की कोशिश की जाती है। इस पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। पति की संपत्ति और नौकरी के दावे पर एमपी हाईकोर्ट MP High Court ने बड़ा फैसला देते हुए दूसरी पत्नी की याचिका खारिज कर दी। महिला ने आदिवासी समाज की प्रथाओं का जिक्र किया था जिसपर कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बिना ठोस साक्ष्य के बहुविवाह की परंपरा मान्य नहीं की जा सकती है। इसी के साथ दूसरी पत्नी का दावा भी खारिज कर दिया। आदिवासी समाज में बहुविवाह की प्रथा है। इसका हवाला देकर शहडोल की पाव जनजाति की महिला मुन्नी बाई ने खुद को भगत सिंह की दूसरी पत्नी बताते हुए पति की मौत के बाद मिले नौकरी से जुड़े लाभ और उनकी संपत्ति देने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इधर पहली पत्नी फूलमती ने खुद को अकेली वैध पत्नी बताते हुए कहा कि सरकारी सेवा अभिलेख में भी पत्नी के तौर पर उनका ही नाम दर्ज है। जबलपुर हाईकोर्ट ने केस की सुनवाई करते हुए कहा है कि बिना प्रमाण के किसी समाज में बहुविवाह की परंपरा को मान्यता नहीं दी जा सकती। सिर्फ आदिवासी परंपरा का हवाला देकर किसी महिला को पति की संपदा या नौकरी में अधिकार नहीं मिल सकता। इसके साथ शहडोल की महिला की याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे दावे के लिए ठोस साक्ष्य जरूरी हैं। दरअसल, मुन्नी बाई ने याचिका दायर कर कहा था, वह भगत सिंह की दूसरी पत्नी है। वे पाव जनजाति से हैं। इसमें बहुविवाह की परंपरा है। उन पर हिन्दू विवाह अधिनियम लागू नहीं होता। उसने पति की मृत्यु के बाद संपत्ति में हिस्सा और नौकरी से जुड़े लाभ देने की मांग की थी। पहली पत्नी फूलमती ने इसका विरोध किया। दस्तावेज में पहली पत्नी का नाम पहली पत्नी फूलमती की ओर से तर्क दिया गया, वह अकेली वैध पत्नी है। सरकारी सेवा अभिलेख में भी पत्नी के तौर पर उनका नाम दर्ज है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ता ने कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया है। कोई मान्य दस्तावेज, परंपरा का प्रमाण भी नहीं पेश किए। इसके बाद फैसला सुनाया।

वॉट्सऐप करेगा डिजिटल अरेस्ट में इस्तेमाल हो रहे डिवाइस ID को ब्लॉक, केंद्र सरकार का कड़ा कदम

  नई दिल्ली डिजिटल अरेस्ट स्कैम को लेकर सरकार ने बड़ा एक्शन का ऐलान किया है. सरकार ने वॉट्सऐप को डिजिटल अरेस्ट इस्तेमाल हो रहे डिवाइस IDs ब्लॉक करने का आदेश दिया है. बहुत से स्कैम में इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप WhatsApp का यूज किया जाता है, जिसमें विक्टिम के पास वॉट्सऐप कॉल, वीडियो कॉल और मैसेज तक भेजे जाते हैं।  गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाली साइबर विंग इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर (I4C) की रिपोर्ट के आधार पर एक्शन लेने को कहा है. असल में साइबर स्कैमर्स बार-बार नए अकाउंट बनाते हैं, इसलिए डिवाइस लेवल पर रोक लगाने की तैयारी।  WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म पर Skype जैसी सेफ्टी फीचर्स लागू करने पर विचार हो रहा है. IT Rules 2021 के तहत डिलीट अकाउंट का डेटा 180 दिन तक सुरक्षित रखने पर जोर दिया जा सकता, जिससे जांच एजेंसियों को जांच में मदद मिल सके. मैलिशियस APK और फर्जी ऐप्स को पहचानकर ब्लॉक उनको भी ब्लॉक करने की योजना है।  WhatsApp एक पॉपुलर मैसेजिंग ऐप है, जिसका बारत में करोड़ों लोग यूज करते हैं. इसी पॉपुलैरिटी का फायदा उठाते हुए साइबर स्कैमर्स वॉट्सऐप पर आईडी बनाकर भोले-भाले लोगों को शिकार बनाते हैं. ऐसे में सरकार साइबर ठगों द्वारा यूज होने वाली ID को ब्लॉक करना चाहती है।   डिवाइस IDs क्या होता है?  डिवाइस IDs, असल में किसी भी गैजेट की पहचान होती है, जो एक यूनिक नंबर होता है. यह ठीक वैसा नंबर होता है जैसा कि भारत में हर एक भारतीय का आधार नंबर होता है।  डिवाइस आईडी कई तरह की हो सकती है, जिसमें IMEI नंबर, मैक एड्रेस , डिवाइस सीरियल नंहर और एडवर्टाइजिंग नंबर भी होता है।      IMEI नंबरः मोबाइल नेटवर्क में फोन की पहचान के लिए (सिम आधारित) यूज होती है.      MAC एड्रेस: Wi-Fi या नेटवर्क पहचान के लिए यूज होती है.      डिवाइस सीरीज नंबर: यह कंपनी प्रोवाइड कराती है और यह यूनिक नंबर होता है.     Advertising ID: ऐप्स और Ads के लिए यूज होता है.  डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या होता है?   डिजिटल अरेस्ट स्कैम में आरोपी खुद को पुलिस/एजेंसी बताकर विक्टिम को डराते हैं और पैसे ठगते हैं. WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म का यूज करके वे विक्टिम को अलग-अलग बहाने बनाकर पहले विक्टिम को डराते हैं, फिक गिरफ्तारी की धमकी देते हैं।  इसके बाद उनको किसी दूसरे शहर में जांच के लिए बुलाते हैं और जब विक्टिम दूसरे शहर पहुंचने में असर्मथता दिखाता है तो उसे डिजिटली जांच में सहयोग करने को कहते हैं. इसी को डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है. इन केस में विक्टिम को कैमरे के सामने रहने का फेक ऑर्डर दिया जाता है. बीते करीब दो साल से बहुत से लोगों को डिजिटल अरेस्ट करके उनकी मेहनत की कमाई को ठगा जा रहा है।  डिजिटल अरेस्ट स्कैम से ऐसे सेफ रहें साइबर ठग डिजिटल अरेस्ट स्कैम का शिकार बनाने के लिए अलग-अलग ट्रिक का यूज करते हैं. इसमें वे फेक सिम कार्ड का मिसयूज, पार्सल स्कैम और यहां तक फर्जी नोटिस भेजकर भी डरा सकते हैं।  डिजिटल अरेस्ट स्कैम से बचाव के लिए जरूरी है कि अनजान नंबर से आने वाले कॉल पर भरोसा नहीं करना और घबराना नहीं है. फर्जी आरोप सुनकर डरना नहीं है. बचाव के लिए करीबी पुलिस स्टेशन या संचार साथी की हेल्प लाइन नंबर पर कॉल करें और पूरे मामले के बारे में बताएं।   ऑनलाइन गिरफ्तारी जैसा कुछ नहीं होता  अनजान नंबर से आने वाला कॉल या वीडियो कॉल करने वाला शख्स फोन पर या वीडियो कॉल पर गवाही देने को कहता है. सबसे पहले जान लें कि ऑनलाइन जांच जैसा कोई प्रावधान नहीं है. इसके लिए करीबी पुलिस थाने भी जा सकते हैं।  ओटीपी और बैंक डिटेल्स शेयर ना करें  डिजिटल अरेस्ट करके जांच के नाम पर लोगों की बैंक डिटेल्स और फैमिली के अन्य मेंबर्स की डिटेल्स मांगी जाती है. यहां तक कि बैंक अकाउंट में मौजूद रकम भी पूछते हैं फिर OTP या फिर जांच के नाम पर रुपयों को दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर करने को कहेंगे. ऐसे लोगों से सावधान रहना है और उनकी कंप्लेंट संचार साथी पर जाकर करें। 

उत्तर बस्तर कांकेर में जल संरक्षण और आजीविका पर कार्य करने वाली महिलाओं ने साझा किया अपना अनुभव

उत्तर बस्तर कांकेर : आजीविका और जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले समूह की महिलाओं ने साझा किए अनुभव संकेतकों पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले हुए सम्मानित उत्तर बस्तर कांकेर ग्रामों में जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे कार्यकर्ताओं, सामुदायिक सदस्यों, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों एवं अन्य हितधारकों के अनुभवों को साझा करने शुक्रवार 20 मार्च को जिला पंचायत एवं गैर शासकीय संगठन प्रदान के संयुक्त तत्वावधान में जिला पंचायत के सभाकक्ष में "प्रेरणा से प्रगति" नामक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और पंचायत स्तर पर जल संरक्षण और संवर्धन पर चर्चा की गई, साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री हरेश मंडावी ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम समुदाय एवं ग्राम पंचायतों को प्रेरित करने के साथ-साथ उनके कार्यों को नई दिशा मिलती है। उन्होंने पंचायत उन्नति सूचकांक (पीएआई) के महत्व, ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) की प्रभावशीलता तथा महिला स्वयं सहायता समूहों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही यह भी बताया कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में एक डिजिटल टूल विकसित कर ग्राम पंचायत विकास योजना की प्रक्रिया को डिजिटाइज किया गया है, जिसके माध्यम से जिले की प्रगति अब ऑनलाइन रूप से देखी जा सकती है। इस डिजिटल व्यवस्था से योजनाओं की निगरानी, पारदर्शिता एवं समयवद्ध क्रियान्वयन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों, स्व सहायता समूह की महिलाओं एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के कैडरों ने अपने अनुभव साझा किए। कई प्रतिभागियों ने बताया कि किस प्रकार जल संसाधन आधारित आजीविका गतिविधियों जैसे मत्स्य पालन, सब्जी उत्पादन एवं अन्य कृषि आधारित कार्यों के माध्यम से उनकी आय में वृद्धि हुई है तथा जीवन स्तर में सुधार आया है। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट कार्य करने वाले संकुल स्तरीय संघ, उच्च पंचायत उन्नति सूचकांक प्राप्त करने वाली तथा बेहतर ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार करने वाली ग्राम पंचायतों एवं सक्रिय राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन कैडरों का सम्मान किया गया। विशेष रूप से आजीविका संवर्धन हेतु जल क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली दीदियों को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने जल संसाधनों के प्रभावी उपयोग से न केवल अपनी आय में वृद्धि की है, बल्कि अन्य समुदाय सदस्यों के लिए भी प्रेरणा का कार्य किया है। इस अवसर पर जिला एवं जनपद पंचायतों के अधिकारी कर्मचारी और समूह की महिलाएं उपस्थित थीं।

250 करोड़ का जेट विमान खरीदी मध्यप्रदेश सरकार ने, जल्द मिलेगी किराए के विमान से छुटकारा

 भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार को जल्द ही किराए के विमान से मुक्ति मिल जाएगी। राज्य सरकार ने 250 करोड़ का जेट विमान खरीदा है जिसकी जल्द डिलीवरी होगी। कनाडा में सरकार का नया विमान लगभग तैयार हो चुका है। भोपाल लाने के पहले इसका परीक्षण किया जाएगा। इसके लिए पायलट व दो इंजीनियर जून में कनाडा जाएंगे। विमान की जांच के ही इस काम में 50 लाख रुपए लगेंगे। अभी सरकार के पास खुद का विमान नहीं है। जरूरत के वक्त राज्य सरकार द्वारा किराए से विमान लिए जा रहे हैं। कनाडा में राज्य सरकार का नया जेट विमान (चैलेंजर 3500) लगभग तैयार हो गया है। इसे तैयार कर रही बाम्बार्डियर कंपनी जून 2026 के अंत तक सरकार को सौंपने जा रही है। डिलीवरी लेने से पहले विमान की तकनीकी जांच की जाएगी जिसके लिए सरकार ने समिति गठित कर दी है। विमान की तकनीकी जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम चिह्नित की गई है। ये निजी विशेषज्ञ हैं, जो जांच के लिए 50 लाख रुपए ले रहे हैं। विमान की जांच टीम में विमानन विभाग में पदस्थ पायलट विश्वास राय, तकनीकी विशेषज्ञ जेपी शर्मा और रश्मि सिंह शामिल हैं। 250 करोड़ का है विमान, एक बार में करीब 3500 किमी का सफर तय करेगा राज्य सरकार के नए विमान की कीमत 250 करोड़ है। यह अत्याधुनिक जेट विमान है जिसमें अनेक खूबियां हैं। नया विमान 870 प्रति किमी तक की रफ़्तार से उड़ान भर सकता है। विमानन विशेषज्ञों के अनुसार यह जेट विमान एक बार में करीब 3500 किमी का सफर तय करेगा। एक वरिष्ठ अफसर ने इसे अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस विमान बताया है। अधिकारी के अनुसार ​इसमें 8 से 10 यात्री सफर कर सकते हैं। विमान में दो कैबिन क्रू अलग से होंगे। नया जेट विमान आते ही राज्य सरकार को किराए से राहत मिल जाएगी बता दें, अभी सरकार के पास खुद का विमान नहीं है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के हवाई दौरों या अन्य अनिवार्य सेवाओं के लिए जरूरत के वक्त राज्य सरकार द्वारा किराए से विमान लिए जा रहे हैं। इसपर हर महीने लाखों रुपए खर्च हो रहे हैं। नया जेट विमान आते ही राज्य सरकार को किराए से राहत मिल जाएगी।

योगी सरकार 22 मार्च को 1,228 नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को सौंपेगी नियुक्ति पत्र

योगी सरकार 1,228 नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को 22 मार्च को सौंपेगी नियुक्ति पत्र  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को लोकभवन में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में 492 अभ्यर्थियों को सौंपेंगे पत्र  736 नवचयनित अभ्यर्थियों को लाइव प्रोग्राम के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि सौंपेंगे नियुक्ति पत्र 13 राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं 2 संस्थानों में दी जाएगी नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को तैनाती    लखनऊ  योगी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में लगातार ठोस और दूरदर्शी कदम उठा रही है। इसी कड़ी में योगी सरकार रविवार को 1,228 नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित करेगी। इनमें से 492 नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोकभवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में नियुक्ति पत्र वितरित करेंगे जबकि शेष को लाइव प्रोग्राम के दौरान 13 राजकीय मेडिकल कॉलेज और 2 संस्थानों में जनप्रतिनिधियों द्वारा नियुक्ति पत्र सौंपे जाएंगे। बता दें कि योगी सरकार ने इस वर्ष प्रदेश के डेढ़ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने का निर्णय लिया है। इसी के तहत कई विभागों में भर्ती प्रक्रिया चल रही है जबकि विभिन्न विभागों में भर्ती का विज्ञापन निकालने की तैयारी अंतिम चरण में है।  13 राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं दो संस्थानों को मिलेंगे नर्सिंग अधिकारी अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अमित कुमार घोष ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभाग में खाली पदों पर नियुक्ति करने के निर्देश दिए थे ताकि प्रदेश के ज्यादा से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी मिल सके। इसी के तहत चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से 13 राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं 2 चिकित्सा संस्थानों में रिक्त नर्सिंग अधिकारियों के पदों के लिए भर्ती निकाली गई थी। ऐसे में लोक सेवा आयोग, प्रयागराज द्वारा चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग में 1,228 नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। योगी सरकार रविवार को सभी नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्त पत्र वितरित करेगी। सीएम योगी 492 नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को सौंपेंगे नियुक्ति पत्र चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग की सचिव एवं महानिदेशक डॉ. सारिका मोहन ने बताया कि 13 राजकीय मेडिकल कॉलेज क्रमश: आगरा, कानपुर, प्रयागराज, मेरठ, झांसी, गोरखपुर, अंबेडकरनगर, कन्नौज, आजमगढ़, जालौन, सहारनपुर, बांदा एवं बदायूं के साथ 2 संस्थान जेके कैंसर संस्थान तथा हृदय रोग संस्थान कानपुर के लिए 1,228 नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसमें 1,097 महिला अभ्यर्थी और 131 पुरुष अभ्यर्थी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को लोकभवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में 492 नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित करेंगे। वहीं, सभी 13 राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं 2 संस्थानों में लाइव प्रोग्राम के दौरान जनप्रतिनिधियों द्वारा 736 नवचयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे।  अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर 94 नवचयनित मुख्य सेविकाओं को वितरित किए गए थे नियुक्ति पत्र योगी सरकार ने इस वर्ष प्रदेश के युवाओं को डेढ़ लाख सरकारी नौकरी देने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में रविवार को 1,228 नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे। इसके अलावा 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 94 नवचयनित मुख्य सेविकाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए थे। वहीं, हाल ही में उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं पदोन्नति बोर्ड की ओर से दरोगा एवं समकक्ष के 4,543 पदों की परीक्षा संपन्न कराई गई। इसके अलावा विभिन्न विभागों की ओर से भी भर्ती प्रक्रिया चल रही है।