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ईरान ने कहा, दूसरा अमेरिकी F-35 जेट किया गया गिरा

तेहरान  अमेरिका-ईरान जंग का आज 35वां दिन है. जंग भीषण होती जा रही है. इस बीच ईरान ने आज एक बड़ा दावा किया है. ईरानी सेना ने दावा किया है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने बमबारी करने आए एक और अमेरिकी F-35 फाइटर जेट को मार गिराया है. हालांकि, इसकी अभी स्वंतत्र एजेंसियों से पुष्टि नहीं हो सकी है. ईरान का दावा है कि अमेरिकी फाइटर जेट को उसने सेंट्रल ईरान में मार गिराया. ये दूसरा F-35 जेट है जिसे मार गिराने का ईरान ने दावा किया है. साथ ही ईरानी सेना ने कहा कि हिट हुए इस विमान के पायलट के बचने के चांस कम ही हैं।  F-35 अमेरिका का सबसे मजबूत स्टील्थ फाइटर जेट माना जाता है. ईरान ने इससे पहले एक और F-35 फाइटर जेट को हिट किया था और जिसमें काफी नुकसान पहुंचा था।  ईरान के खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए बताया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने इस हाई-टेक विमान को सेंट्रल ईरान के ऊपर सटीक निशाना बनाया. ईरान का दावा है कि यह फाइटर जेट ब्रिटेन के 'आरएएफ लाकेनहीथ' (RAF Lakenheath) बेस की एक खास स्क्वाड्रन से जुड़ा हुआ था. हालांकि, अभी तक अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन ईरान अपनी बात पर पूरी तरह अड़ा हुआ है।  ईरानी सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, जैसे ही मिसाइल विमान से टकराई, उसमें जोरदार धमाका हुआ और वह मलबे में तब्दील हो गया. सेना का मानना है कि इतनी भीषण टक्कर और विस्फोट के बाद पायलट का बच पाना लगभग नामुमकिन है. गौर करने वाली बात यह है कि यह दूसरा मौका है जब ईरान ने अमेरिका के सबसे एडवांस फाइटर जेट F-35 को गिराने का दावा किया है. इससे पहले भी एक जेट को बुरी तरह नुकसान पहुंचाने की बात सामने आई थी।  इससे पहले 19 मार्च 2026 को भी ईरान ने दुनिया को तब हैरान कर दिया था, जब उसने पहली बार इस 'अदृश्य' माने जाने वाले स्टील्थ जेट को मार गिराया था. युद्ध के इतिहास में यह पहली बार था जब कोई F-35 किसी हमले का शिकार हुआ हो. दिलचस्प बात यह थी कि उस वक्त राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान के पास अब कोई डिफेंस सिस्टम नहीं बचा, लेकिन कुछ ही घंटों बाद ईरान ने उसी F-35 को ट्रैक किया, लॉक किया और सीधे ढेर कर दिया. अब एक बार फिर ईरान ने वैसा ही दावा किया है।  F-35 को दुनिया का सबसे स्मार्ट और 'अदृश्य' विमान माना जाता है. इसे इस तरह बनाया गया है कि यह दुश्मन के राडार की पकड़ में न आए और चुपके से हमला कर सके. अगर ईरान का यह दावा सच निकलता है, तो यह अमेरिकी वायुसेना के लिए बहुत बड़ा तकनीकी और सामरिक झटका साबित होगा।  

छात्रवृत्ति की फिर होगी व्यवस्था, योगी सरकार वंचित छात्रों के लिए पोर्टल फिर से खोलेगी

छात्रवृत्ति से वंचित छात्रों को दूसरा मौका, योगी सरकार फिर खोलेगी पोर्टल सामान्य, एससी-एसटी और ट्रांसजेंडर छात्रों को मिलेगा लाभ, किसी भी पात्र छात्र को नहीं रहने दिया जाएगा वंचित 2025-26 सत्र के छूटे छात्रों के लिए दोबारा आवेदन का अवसर, पिछले वर्ष 53 हजार से अधिक छात्रों को ₹81 करोड़ से ज्यादा की सहायता हर वर्ग तक शिक्षा और आर्थिक सहयोग पहुंचाना योगी सरकार का लक्ष्य लखनऊ उत्तर प्रदेश में छात्र-छात्राओं के हित में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए योगी सरकार ने छात्रवृत्ति से वंचित रह गए छात्रों को बड़ा मौका देने का फैसला किया है। समाज कल्याण विभाग जल्द ही शैक्षिक सत्र 2025-26 के अंतर्गत संचालित छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के छूटे हुए छात्रों के लिए पोर्टल दोबारा खोलेगा, ताकि वे पुनः आवेदन कर इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकें। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र छात्र केवल तकनीकी या अन्य कारणों से छात्रवृत्ति से वंचित न रह जाए। इस योजना का लाभ सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) के साथ-साथ ट्रांसजेंडर समुदाय के विद्यार्थियों को भी मिलेगा, जो सामाजिक समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। समाज कल्याण विभाग के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी इसी तरह की पहल के तहत पोर्टल खोला गया था, जिसके माध्यम से 53,041 छात्रों को कुल 81.12 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति प्रदान की गई। इनमें अनुसूचित जाति के 25,395 छात्रों को 30.65 करोड़ रुपये तथा सामान्य वर्ग के 27,646 छात्रों को 50.47 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि हर जरूरतमंद छात्र तक शिक्षा का लाभ पहुंचे और कोई भी छात्र आर्थिक कारणों से अपनी पढ़ाई बीच में न छोड़े। योगी सरकार की यह पहल न केवल शिक्षा के क्षेत्र में समावेशी विकास को बढ़ावा देगी, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे हजारों छात्रों को अपनी शिक्षा जारी रखने का अवसर मिलेगा और उनका भविष्य मजबूत होगा।

विजिलेंस ब्यूरो को सौंपी गई वीसी के घोटालों की फाइल, करोड़ों की हेराफेरी और अवैध नियुक्तियों के आरोप

 चंडीगढ़ हरियाणा के चार विश्वविद्यालयों में वर्तमान व पूर्व कुलपतियों (वीसी) पर वित्तीय अनियमितताओं व भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। सरकार ने इन मामलों की जांच के लिए समग्र फाइल राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसएंडएसीबी) के पास भेज दी है। इन कुलपतियों में गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय (जीजेयू) हिसार के कुलपति प्रो. नरसी राम, दीनबंधु छोटू राम विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी) मुरथल के प्रो. प्रकाश सिंह, श्री कृष्ण आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय (एसकेएयू) कुरुक्षेत्र के प्रो. करतार सिंह धीमान और महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) रोहतक पूर्व वीसी प्रो. राजबीर सिंह हैं। इन चारों के खिलाफ सरकार को कई शिकायतें मिली थीं। इसके बाद मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने जांच के लिए एसएंडएसीबी के डीजपी डॉ. अर्शिंदर सिंह चावला को फाइल भेजी दी। उनको एक तय समयसीमा में जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए है। आरोप सही पाए जाने पर विजिलेंस तत्काल मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी भी कर सकती है। चावला ने बताया कि चारों विश्वविद्यालयों में भ्रष्टाचार संबंधित शिकायत आई है। अभी वरिष्ठ स्तर पर अधिकारियों की तरफ से जांच की जा रही है, जल्द ही आगे की जानकारी देंगे। ये हैं आरोप डीयूआरयूएसटी मुरथल : प्रोफेसर प्रकाश सिंह विद्यार्थी कोष के लगभग 50 करोड़ रुपये में हेराफेर किए जाने का आरोप है। आरोप है कि इस राशि को सरकारी बैंक के बजाय निजी बैंक में कम ब्याज दर पर फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के रूप में रखा गया, जिससे विश्वविद्यालय को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। जीजेयू हिसार, प्रो. नरसी राम नॉन-टीचिंग स्टाफ की भर्ती में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरतने का आरोप है। इन आरोपों को लेकर वीसी ने कहा कि उनके कार्यकाल में अब तक नॉन टीचिंग स्टाफ की भर्ती नहीं की गई है और न इस तरह का मामला उनके सामने आया है। कब और किस वीसी के कार्यकाल में ऐसा हुआ, इसकी जानकारी उनको नहीं है। एसकेएयू, प्रो करतार सिंह धीमान आरक्षण नियमों और भर्ती रोस्टर का उल्लंघन करने के आरोप हैं। उन्होंने कहा कि आरोप बेबुनियाद हैं और किसने लगाए, यह भी कोई पता नहीं है। उनके पास कोई शिकायत व सवाल भी नहीं आया है। किसी भी प्रकार की कोई अनियमितता आरक्षण रोस्टर में भर्ती के दौरान नहीं की गई। समाज कल्याण विभाग से संबंध कर रोस्टर बनवाया गया और सरकार के नियमानुसार ही भर्ती की गई। एक एसोसिएट प्रोफेसर व 36 सहायक प्रोफेसर पदों पर भर्ती निकाली गई थी जिनमें 23 योग्य अभ्यर्थी मिले थे और उन्हें पूरे नियमों के अनुसार ही प्रक्रिया कर मार्च में ज्वाइन भी करवा दिया गया। बाकी पदों के लिए फिर से भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एमडीयू रोहतक, पूर्व कुलपति राजबीर सिंह विश्वविद्यालय परिसर के लिए 20 हजार पौधों की खरीद में वित्तीय हेराफेरी और नियुक्तियों में अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल करने के आरोप हैं।

निजी बैंकों में सरकारी पैसे का निवेश पड़ा भारी, अब 3 दिन में देनी होगी पाई-पाई की जानकारी

चंडीगढ़ आईडीएफसी फर्स्ट व कोटक महेंद्रा बैंक में सरकारी राशि के गबन के केस सामने आने के बाद हरियाणा सरकार सतर्क हो गई है। वित्त विभाग ने सभी प्रशासनिक विभागों को उनके बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) से संबंधित जानकारी तीन दिन में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने पत्र जारी कर सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे निर्धारित प्रारूप में जानकारी जल्द से जल्द उपलब्ध कराएं। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी विभाग, निगम व बोर्ड अपनी जानकारी पहले संबंधित विभाग को भेजेंगे, वहीं से इसका संकलन कर आगे भेजा जाएगा। नियमों का पालन न करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। हरियाणा सरकार के कई विभागों का पैसा निजी बैंकों में पड़ा था जिसे बैंक कर्मियों ने मिलीभगत कर रियल एस्टेट व ज्वेलरी में निवेश कर दिया। इससे सबक लेते हुए अब हरियाणा सरकार ने निर्देश जारी किए हैं। हालांकि वित्त विभाग ने साल 2025 में भी निर्देश दिए थे। इन निर्देशों में सभी विभागों को अपने बैंक खातों और एफडी का आंतरिक ऑडिट कर 15 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया था। इसके बावजूद कई विभागों से अधूरी जानकारी मिली या निर्धारित फॉर्मेट में डेटा प्रस्तुत नहीं किया गया। कुछ मामलों में फील्ड कार्यालयों ने सीधे वित्त विभाग को जानकारी भेज दी जबकि विभागीय स्तर पर इसके संकलन कर भेजा जाना था। वित्त विभाग ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि यह प्रक्रिया निर्धारित नियमों के खिलाफ है और इससे डेटा की सटीकता भी प्रभावित होती है। तय फार्मेट में पांच तक भेजनी है जानकारी सभी विभागों को 20 मार्च 2026 तक की जानकारी 5 अप्रैल 2026 तक अनिवार्य रूप से भेजने के निर्देश दिए गए हैं। वित्त विभाग ने इसके लिए सभी विभागों को एक प्रारूप भेजा है। जारी प्रारूप में बैंक खाता संख्या, खाता खोलने की तिथि, बैंक और शाखा का नाम, बैलेंस, खाते का प्रकार व वित्त विभाग की अनुमति से खाता खोला गया या नहीं जैसी जानकारियां मांगी गई हैं। एफडी के लिए जमा राशि, ब्याज दर, परिपक्वता तिथि और अन्य विवरण देने होंगे।  

14 से 18 वर्ष तक के बच्चों का खतरनाक उद्योगों में नियोजन अब प्रतिबंधित

14 से 18 वर्ष तक के बच्चों का खतरनाक उद्योगों एवं प्रक्रियाओं में नियोजन प्रतिबंधित श्रम स्टार रेटिंग के लिये बाल श्रम अथवा बंधक श्रम नहीं होने की घोषणा आवश्यक भोपाल प्रदेश में 14 वर्ष से 18 वर्ष तक के बच्चों का खतरनाक उद्योगों एवं प्रक्रियाओं में नियोजन प्रतिबंधित है। श्रम विभाग द्वारा श्रम स्टार रेटिंग के तहत बाल श्रम अथवा बंधक श्रम पाये जाने की स्थिति में ज़ीरो टॉलरेंस की नीति के तहत संबंधित संस्थान को शून्य अंक दिये जाने की व्यवस्था की गई है एवं इस संबंध में सभी श्रम अधिकारियों को निर्देश दिये गये है। साथ ही यह भी निर्देश दिये गये है कि ऐसे संस्थान जिनमें बाल श्रमिक अथवा बंधुआ श्रमिक नियोजित नहीं किये गए है, उनमें यदि अन्य मापदण्डों की पूर्ति थोडी कम भी हो, तो उन्हें भी श्रम स्टार रेटिंग प्राप्त करने हेतु प्रेरित किया जाये। इस संबंध में श्रम विभाग द्वारा वेदा पहल के अंतर्गत प्रदेश में बाल श्रम का पूरी तरह उन्मूलन कर बच्चों को शिक्षा, पुर्नवास, सुरक्षा और अवसर प्रदान करने के संबंध में नियमित रूप से प्रत्येक शुक्रवार को समीक्षा बैठक आयोजित की जा रही है एवं अभियोजन मामलों की कड़ी निगरानी की जा रही है। इसी प्रकार चाइल्ड हेल्प लाइन नम्बर 1098 (टोल-फ्री 24/7) पर प्राप्त शिकायतों की मॉनीटरिंग की जा रही है। उल्लेखनीय है कि माननीय न्यायालय द्वारा बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 के अंतर्गत मामलों में जुर्माना 20 हजार रूपये से 50 हजार रूपये तथा कारावास 6 माह से 2 वर्ष तक सजा का प्रावधान है। इसी प्रकार माननीय न्यायालय द्वारा बंधक श्रम पद्धति (उत्सादन) अधिनियम, 1976 के अंतर्गत अधिकतम कारावास (3 वर्ष) की सजा या अधिकतम जुर्माना 2 हजार रूपये का प्रावधान है। बंधक श्रमिकों के पुर्नवास हेतु केन्द्र प्रवर्तित योजना 2021 में वयस्क पुरूष बंधक श्रमिक हितग्राहियों को एक लाख रूपये की पुनर्वास सहायता तथा अनाथ बच्चों (संगठित क्षेत्र अथवा बल पूर्वक कार्य) तथा महिला बंधक श्रमिकों को दो लाख रूपये की पुनर्वास सहायता दिये जाने के प्रावधान हैं वहीं शारिरिक शोषण अथवा मानव तस्करी से पीडितों को तीन लाख रूपये पुनर्वास सहायता दिये जाने के प्रावधान है। प्रत्येक जिले में बंधक श्रमिकों के पुनर्वास हेतु कार्पस फंड का गठन किया गया है।  

आयुक्त भोंडवे का निर्देश: विभागीय समन्वय और समयबद्ध कार्ययोजना के तहत करें कार्य

विभागीय समन्वय और समयबद्ध कार्ययोजना के साथ कार्य करें : आयुक्त भोंडवे बेतवा नदी के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए में उच्च स्तरीय बैठक हुई भोपाल बेतवा नदी के पावन जल को स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाए रखने के पुनीत उद्देश्य से गुरुवार को पालिका भवन में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य ध्येय नदी के पारिस्थितिक तंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए राज्य और केंद्र सरकार के प्रयासों को सूत्रबद्ध करना था। विभागीय समन्वय से सिद्ध होगा संकल्प नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि बेतवा का पुनर्जीवन केवल एक प्रशासनिक लक्ष्य नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता है। उन्होंने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि नदी के संरक्षण के लिये एक समेकित कार्ययोजना तैयार की जाए, जिसमें जल संसाधन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका स्पष्ट और समन्वित हो। आयुक्त भोंडवे ने इस बात पर विशेष बल दिया कि योजनाओं का क्रियान्वयन केवल कागजों तक सीमित न रहकर धरातल पर दिखाई देना चाहिए, जिसके लिए वे स्वयं समय-समय पर कार्यों की समीक्षा करेंगे। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन का सहयोग बैठक जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के सहयोग से आयोजित की गई। बैठक में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के कार्यकारी निदेशक (परियोजना) बृजेन्द्र स्वरूप विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने नदी संरक्षण के विविध तकनीकी आयामों और वैश्विक मानकों पर प्रकाश डालते हुए केंद्र की ओर से हर संभव तकनीकी और वित्तीय सहयोग का आश्वासन दिया। प्रदूषण मुक्ति और जल संवर्धन पर गहन विमर्श बेतवा नदी में मिल रहे अपशिष्टों को रोकने के लिए आधुनिक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की स्थापना, जल भराव क्षेत्रों का संरक्षण और तटवर्ती क्षेत्रों में वृक्षारोपण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चिंतन-मनन किया गया। आयुक्त भोंडवे ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के मानकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए नगरीय निकायों को और अधिक उत्तरदायी बनाया जाएगा। बैठक में जल संसाधन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वन विभाग और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संबंधित नगरीय निकायों के प्रतिनिधियों उपस्थित रहें।  

मध्य प्रदेश में 12 लाख कर्मचारियों को राहत, DA में 3% की बढ़ोतरी, मई में मिलेगी बढ़ी हुई सैलरी

भोपाल  अप्रैल की शुरुआत मध्य प्रदेश के 12 लाख कर्मचारियों के लिए खुशखबरी लेकर आई है। प्रदेश सरकार के वित्त विभाग ने प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए 3 फीसदी महंगाई भत्ता और राहत भत्ता बढ़ाने को लेकर आदेश जारी कर दिया है। आगे अब एरियर 6 किस्तों में मिलेगा, 4200 रुपए तक सैलरी में बढ़ोतरी होगी, बढ़ी हुई राशि अप्रेल की सैलरी में जोड़कर मई में दी जाएगी। सरकार ने पेंशनरों को भी बड़ी सौगात दी है, उनकी मंहगाई राहत 58% और 257% तक बढ़ गई है। जारी आदेश के अनुसार सातवें वेतनमान के अंतर्गत कर्मचारियों को मिलने वाला महंगाई भत्ता अब दिनांक एक जुलाई 2025 से (भुगतान माह अगस्त 2025 से) 55 प्रतिशत से 3 प्रतिशत बढ़ाकर 58 प्रतिशत कर दिया गया है। महंगाई भत्ता अब 58 प्रतिशत होगा वित्त विभाग के परिपत्र के अनुसार यह बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता 1 जुलाई 2025 से कुल 58 प्रतिशत देय माना जाएगा। सरकार द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि 3 प्रतिशत की इस वृद्धि के बाद कर्मचारियों का कुल महंगाई भत्ता अब 58 प्रतिशत हो जाएगा। यह निर्णय राज्य के लाखों कर्मचारियों के लिए आर्थिक राहत लेकर आएगा। 6 किश्तों में होगा एरियर का भुगतान वित्त विभाग ने शासकीय सेवकों को महंगाई भत्ते में हुई वृद्धि का लाभ एक जुलाई 2025 से 31 मार्च 2026 तक की एरियर राशि का भुगतान 6 समान किश्तों में दिया जाएगा। इन किश्तों का भुगतान मई, जून, जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2026 में किया जाएगा। सेवानिवृत्त और दिवंगत कर्मचारियों के लिए विशेष प्रावधान वित्त विभाग ने जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि जो कर्मचारी 1 जुलाई 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच सेवानिवृत्त हो चुके हैं या जिनका निधन हो गया है, उन्हें अथवा उनके नामांकित सदस्य को एरियर की पूरी राशि एकमुश्त प्रदान की जाएगी। भुगतान संबंधी अन्य निर्देश महंगाई भत्ते की गणना में 50 पैसे या उससे अधिक राशि को अगले पूर्ण रुपए में जोड़ा जाएगा। जबकि 50 पैसे से कम राशि को छोड़ दिया जाएगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि महंगाई भत्ते का कोई भी हिस्सा किसी अन्य प्रयोजन के लिए वेतन का भाग नहीं माना जाएगा। सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि महंगाई भत्ते के भुगतान पर होने वाला व्यय संबंधित विभाग के स्वीकृत बजट प्रावधान के भीतर ही सुनिश्चित किया जाए।

योगी सरकार के 9 वर्षों में विकास के पहिए ने पकड़ी रफ्तार, तराई के 1500 गांवों में फैला दूध का कारोबार

तराई में आई श्वेतक्रांति से 51 हजार महिलाएं बनीं उद्यमी योगी सरकार के 9 वर्षों में विकास के पहिए ने पकड़ी रफ्तार, तराई के 1500 गांवों में फैला दूध का कारोबार हर महीने 03, 13 और 23 तारीख को आता है सभी के खाते में पैसा तराई के छह जिलों में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं बना रहीं रिकॉर्ड एक लाख लीटर से ज्यादा प्रतिदिन की बिक्री से महिलाओं ने किया सवा दो सौ करोड़ से ज्यादा का कारोबार लखनऊ  उत्तर प्रदेश के तराई और आसपास के क्षेत्र अब महिला सशक्तीकरण और आर्थिक क्रांति का नया केंद्र बन चुके हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आई श्वेतक्रांति ने बरेली, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, शाहजहांपुर, सीतापुर और रामपुर जैसे जिलों की दिशा और दशा बदल दी है। यहां 1500 गांवों में फैले दुग्ध व्यवसाय के जरिए 51 हजार महिलाएं उद्यमी बनकर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं। इन सभी महिलाओं के खाते में हर महीने 03, 13 और 23 तारीख को पैसा आ जाता है। सृजनी एमपीसीएल के नेतृत्व में तराई के इन जिलों में अब हर सुबह दूध संग्रहण किया जाता है, जहां महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उत्पादन से लेकर संग्रहण और विपणन तक की पूरी जिम्मेदारी संभाल रहीं हैं। परिणामस्वरूप क्षेत्र में प्रतिदिन एक लाख लीटर से अधिक दूध का कारोबार हो रहा है और अब तक महिलाएं सवा दो सौ करोड़ रुपये से ज्यादा का व्यवसाय कर चुकीं हैं। जो क्षेत्र पहले विकास की दौड़ में पिछड़े माने जाते थे, वहीं योगी सरकार के कार्यकाल में अब महिलाओं की मेहनत से नई आर्थिक पहचान बन रही है और गांव-गांव में रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं। गांव की अर्थव्यवस्था की प्रमुख संचालक बन रहीं महिलाएं इस परिवर्तन के पीछे उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की महत्वपूर्ण भूमिका है, जिसने महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने का काम किया। इसी का परिणाम है कि महिलाएं अब केवल सहयोगी नहीं, बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था की प्रमुख संचालक बन गईं हैं। छह हजार से अधिक गांवों में सक्सेज मॉडल  प्रदेश स्तर पर भी यह बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश आज दुग्ध उत्पादन में देश में अग्रणी बन चुका है, जहां ग्रामीण महिलाएं प्रतिदिन लगभग 10 लाख लीटर दूध का संग्रहण कर रहीं हैं। 31 जिलों में महिलाओं ने पांच हजार करोड़ रुपये का कारोबार किया है और छह हजार से अधिक गांवों में इस मॉडल ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। तराई की यह श्वेतक्रांति केवल आर्थिक उन्नति की कहानी नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का भी सशक्त उदाहरण है। महिलाएं अब आत्मनिर्भर बनकर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति दे रही हैं।

अभ्युदय योजना: यूपीपीसीएस चयनित अभ्यर्थियों ने योगी सरकार की सराहना की, बनी सफलता की सीढ़ी

अभ्युदय योजना बनी सफलता की सीढ़ी, यूपीपीसीएस चयनित अभ्यर्थियों ने योगी सरकार की सराहना की डीएसपी से नायब तहसीलदार तक चयनित युवाओं ने कहा – मुफ्त कोचिंग और गाइडेंस से मिली बड़ी मदद रायबरेली के हर्ष सिंह को मिली 7वीं रैंक, बोले- इंटरव्यू तक अभ्युदय से मिला मार्गदर्शन नमन तिवारी ने कहा- सिलेबस समझने से लेकर रणनीति तक हर स्तर पर मिली मदद आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए वरदान बनी योजना, विजेंद्र सिंह ने बताई उपयोगिता लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना एक बार फिर युवाओं की सफलता की मजबूत आधारशिला बनकर उभरी है। यूपीपीसीएस 2024 के परिणाम में चयनित अभ्यर्थियों ने इस योजना को अपनी सफलता का अहम कारण बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना की है। चयनित अभ्यर्थियों ने एक स्वर में कहा कि योगी सरकार की यह पहल न केवल शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर प्रदान कर रही है, बल्कि प्रदेश के युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का मंच भी दे रही है। रायबरेली के हर्ष सिंह, जिन्हें यूपीपीसीएस 2024 में 7वीं रैंक प्राप्त हुई है और डिप्टी एसपी पद पर चयन हुआ है, ने बताया कि अभ्युदय योजना से जुड़कर उन्हें तैयारी के हर चरण में मार्गदर्शन मिला। उन्होंने कहा कि मुख्य परीक्षा के बाद इंटरव्यू की तैयारी में भी इस योजना की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। हर्ष सिंह ने इसे युवाओं के लिए एक “महत्वाकांक्षी और परिवर्तनकारी योजना” बताते हुए कहा कि इससे प्रतिभाशाली युवाओं को अपने लक्ष्य तक पहुंचने का अवसर मिलता है। वहीं, उन्नाव के नमन तिवारी, जिनका चयन नायब तहसीलदार पद पर हुआ है, ने कहा कि अभ्युदय योजना ने परीक्षा के पैटर्न को समझने और रणनीति बनाने में उनकी काफी मदद की। उन्होंने बताया कि कई बार सिलेबस और विषयों को समझने में कठिनाई होती थी, लेकिन योजना के तहत उपलब्ध फैकल्टी और मार्गदर्शन ने इन चुनौतियों को आसान बना दिया। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि यह योजना उन छात्रों के लिए बेहद उपयोगी है, जो महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते। अमरोहा के विजेंद्र सिंह, जिन्हें 741वीं रैंक प्राप्त हुई है, ने भी इस योजना को आर्थिक रूप से कमजोर और पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए वरदान बताया। उन्होंने कहा कि अभ्युदय योजना के तहत न केवल कोचिंग, बल्कि आवासीय सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे छात्रों को बेहतर तैयारी का माहौल मिलता है।

सीएम योगी ने पद्म पुरस्कार विजेताओं और आकाशवाणी के वरिष्ठ लोक सेवा प्रसारकों को किया सम्मानित

सीएम योगी ने पद्म पुरस्कार से सम्मानित विभूतियों और आकाशवाणी के वरिष्ठ लोक सेवा प्रसारकों को किया सम्मानित लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आकाशवाणी लखनऊ के 89वें स्थापना दिवस पर अनेक विभूतियों को सम्मानित किया। इन विभूतियों ने पद्म पुरस्कार से सम्मानित होकर उत्तर प्रदेश का नाम गौरवान्वित किया है। वहीं आकाशवाणी की सफलता में ‘नींव के पत्थर’ रहे वरिष्ठ लोकसेवा प्रसारकों को भी सम्मानित किया गया। सीएम योगी ने कहा कि सम्मान पाने वाले लोगों का योगदान खुद के लिए नहीं, बल्कि देश-प्रदेश और विकसित भारत की संकल्पना को आगे बढ़ाने के लिए है। सीएम ने कहा कि नींव के पत्थरों को ढूंढना व सम्मानित करना गौरव का क्षण होता है। मुख्यमंत्री ने पद्म पुरस्कार पाने वाली विभूतियों का किया सम्मान मुख्यमंत्री ने पद्म पुरस्कार प्राप्त विभूतियों को सम्मानित किया। सीएम के हाथों मंच पर साहित्यकार विद्या बिंदु सिंह, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष पं. हदय नारायण दीक्षित (उनके पुत्रों अरुण दीक्षित व दिलीप दीक्षित ने ग्रहण किया), प्रो. सोनिया नित्यानंद (कुलपति केजीएमयू), मालिनी अवस्थी (लोकगायिका), अरुणिमा सिन्हा (दिव्यांग पर्वतारोही), डॉ. अनिल रस्तोगी (रंगमंच), रामशरण वर्मा (प्रगतिशील किसान), डॉ. सुनील प्रधान (चिकित्सक), डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. केके ठकराल, प्रो. नवजीवन रस्तोगी, प्रो. शादाब मोहम्मद, सुधा सिंह (खेल), एसएस सरकार (पुरस्कार प्रमोद मिश्र ने प्राप्त किया) को सम्मान मिला।  आकाशवाणी के वरिष्ठ लोक सेवा प्रसारकों को भी किया सम्मानित  सीएम योगी ने आकाशवाणी केंद्रों को ऊंचाई देने वाले वरिष्ठ लोक सेवा प्रसारकों को भी सम्मानित किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों सुशील राबर्ट बनर्जी, सतीश कुमार ग्रोवर, यज्ञदेव पंडित, विजय कुमार बनर्जी, रज्जन लाल, नवनीत मिश्र, भोलानाथ, केवल कुमार को सम्मान मिला।