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पहली बार EC ने बंगाल के 90 लाख से ज्यादा वोटरों का जिलेवार डेटा जारी किया

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच वोटर लिस्ट को लेकर नया अपडेट आ गया है। चुनाव से ठीक पहले चुनाव आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर बड़ा और अहम डेटा जारी किया है। इस बार खास बात यह रही कि आयोग ने पहली बार जिलावार तरीके से नाम जोड़ने और हटाने की पूरी जानकारी सार्वजनिक की है। अगर आंकड़ों पर नजर डालें, तो तस्वीर काफी बड़ी और जटिल दिखती है। आयोग के मुताबिक, अब तक कुल 90.66 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। यह बड़ा डेटा माना जा रहा है। अबतक 90.66 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए  चुनाव आयोग ने पहली बार जिलेवार तरीके से नाम जोड़ने और हटाने की भी जानकारी शेयर की है. आयोग के अनुसार पश्चिम बंगाल में एसआईआर की इस प्रक्रिया में अब तक कुल 90.66 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. पहले चरण में दिसंबर 2025 में ड्राफ्ट लिस्ट के दौरान 58.2 लाख नाम हटाए गए थे, जबकि फरवरी 2026 की अंतिम सूची तक 5.46 लाख अतिरिक्त नाम हटाए गए हैं।  चुनाव आयोग के मुताबिक लॉजिकल विसंगति यानी डेटा में तकनीकी गड़बड़ियों के आधार पर 60 लाख से ज्यादा वोटरों को जांच के दायरे में रखा गया था. इन मामलों को अंडर एडजुडिकेशन की कैटेगरी में रखा गया था ताकि अधिकारी गहराई से इनकी जांच कर सकें. आयोग के मुताबिक, अब तक लगभग 59.84 लाख मामलों का निपटारा किया जा चुका है. इस जांच के बाद करीब 32.68 लाख पात्र लोगों के नाम दोबारा जोड़े गए हैं, जबकि अपात्र मिले 27.16 लाख लोगों के नाम काटे गए।  ECI के इतिहास में पहली बार हुआ ये काम इलेक्शन कमीशन के इतिहास में ये पहली बार है जब पश्चिम बंगाल को लेकर एसआईआर के संबंध में जिलेवार नाम जोड़ने और हटाने का डेटा सार्वजनिक किया गया है. आयोग का मकसद पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और चुनावी सूचियों की विश्वसनीयता को बढ़ाना है. बता दें कि ये डेटा अब सार्वजनिक तौर पर भी उपलब्ध है।  न्यायिक अधिकारियों के ई-हस्ताक्षर होते ही जारी होंगे आंकड़े जबकि पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, न्यायिक निर्णय के लिए भेजे गए कुल 60,06,675 मामलों में से 59,84,512 मामलों की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जिन पर न्यायिक अधिकारियों के ई-हस्ताक्षर भी हो चुके हैं। इसके अलावा, 59,84,512 मामलों में से, जिन मतदाताओं को न्यायिक अधिकारियों द्वारा हटाए जाने योग्य माना गया है। उनके नामों को हटा दिया गया है। उनकी संख्या 27,16,393 है। 91 लाख वोटरों के कट जाएंगे नाम इसका मतलब यह है कि पश्चिम बंगाल में हटाए गए मतदाताओं की कुल संख्या वर्तमान में 90,83,345 है। मालूम हो कि पिछले साल नवंबर में पश्चिम बंगाल के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की अधिसूचना जारी होने से पहले, राज्य में मतदाताओं की कुल संख्या 7,66,37,529 थी। पिछले साल दिसंबर में प्रकाशित मतदाताओं की मसौदा सूची में, कुल 58,20,899 नाम हटाए गए थे। 28 फरवरी को जारी की गई अंतिम वोटर लिस्ट में, हटाए गए नामों की संख्या बढ़कर 63,66,952 हो गई। अब, न्यायिक अधिकारियों ने 27,16,393 मामलों को हटाने लायक पाया है। इसके बाद, पूरे SIR प्रक्रिया के बाद पश्चिम बंगाल में हटाए गए वोटरों की कुल संख्या बढ़कर 90,83,345 हो गई है। इसके अलावा CEO कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि जिन वोटरों के नाम न्यायिक जांच प्रक्रिया में "हटाने लायक" पाए गए हैं। उन्हें अपनी बात रखने का और अपील करने का एक अवसर मिलेगा। वहीं, विपक्षी दल (खासकर तृणमूल कांग्रेस) इस बड़े पैमाने पर नाम हटाने को वोटरों को बाहर करने की साजिश बता रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि अल्पसंख्यक और सीमावर्ती इलाकों पर ज्यादा असर पड़ा है. वहीं, बीजेपी और चुनाव आयोग इसे मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने का जरूरी कदम बता रहे हैं।  दो चरणों में मतदान पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 दो चरणों- 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है. ऐसे में इस SIR प्रक्रिया और नाम हटाने के आंकड़ों पर सियासी घमासान तेज हो गया है।  एक बार अपील करने का मिलेगा मौका CEO कार्यालय से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, न्यायिक जांच अभ्यास के दौरान "हटाने लायक" पाए गए मामलों की सबसे अधिक संख्या अल्पसंख्यक-बहुल मुर्शिदाबाद जिले से थी। मुर्शिदाबाद से हटाए गए नामों की कुल संख्या 4,55,137 है। इसके बाद उत्तर 24 परगना का नंबर आता है। जहां 3,25,666 नाम हटाए गए। बता दे कि पश्चिम बंगाल में दो चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होंगे। पहले चरण में 152 विधानसभा सीटों के लिए मतदान होगा और दूसरे चरण में बाकी 142 सीटों पर मतदान होगा। इसके बाद चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर डेटा जारी बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट आज मंगलवार तक हर हाल में पब्लिश करने के आदेश दिए थे. साथ ही यह भी कहा था कि अगर सभी दस्तावेजों पर डिजिटल साइन नहीं भी हुए तो भी लिस्ट निकाली जाए. इसके अलावा कलकत्ता हाईकोर्ट को 3 पूर्व जजों की एक कमेटी बनाने के आदेश दिए. वोटर लिस्ट पब्लिश करने की आखिरी तारीख सोमवार थी, लेकिन काम न पूरा होने के चलते संभव नहीं सका. लिहाजा आज मंगलवार को चुनाव आयोग ने डेटा जारी किया है। 

भोपाल में बड़ा तालाब के पास बुलडोजर की कार्रवाई, 9 दुकानों को गिराया, 347 अन्य पर कार्रवाई की तैयारी

भोपाल बड़ा तालाब के किनारे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू हो गई है। भदाभदा इलाके से कार्रवाई की शुरुआत हुई है। तालाब किनारे अवैध रूप से बने नौ दुकानों को सोमवार को जमींदोज कर दिया गया है। वहीं, 347 लिस्टेड जगह हैं, जिन पर कार्रवाई होनी है। इसे लेकर भोपाल प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। 21 अप्रैल तक चलेगा अतिक्रमण अभियान दरअसल, भोपाल की लाइफलाइन कही जाने वाली बड़ी झील जो न सिर्फ शहर की पहचान है बल्कि भोपाल की जनता की प्यास भी बुझाती है। इसी बड़ा तालाब के किनारे बने अतिक्रमणों पर आज से बुलडोजर चलना शुरू हो गया है जो 21 अप्रैल तक चलेगा। जिला प्रशासन ने 347 अतिक्रमण चिह्नित किए हैं, जो तालाब के फुल टैंक लेवल (FTL) के 50 मीटर दायरे में आते हैं, जिन पर अवैध निर्माण किया गया है। भदभदा इलाके में चला बुलडोजर पहले दिन भदभदा इलाके में बुलडोजर एक्शन देखने को मिला है। नौ दुकानों पर प्रशासन का बुलडोजर चला, कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा है। हालांकि स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने विरोध जताया, लेकिन बुलडोजर चलता रहा। बड़े तालाब के किनारे है अतिक्रमण     भोपाल की शान है बड़ा तालाब     नोटिस के बाद गुरुवार से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू     347 अतिक्रमणकारियों को लिस्टेड किया गया     नोटिस देने के बाद हो रही है कार्रवाई 15 दिनों में हटाया जाएगा अतिक्रमण वहीं, तालाब किनारे जितने भी अतिक्रमण हैं वो 15 दिनों के अंदर हटाए जाएंगे। 16 मार्च 2022 के बाद बने सभी निर्माण हटाए जाएंगे। एनजीटी के निर्देश के बाद जिला प्रशासन अतिक्रमण को चिह्नित कर रहा है। सभी लोगों को चिह्नित कर नोटिस दिया गया था। इसके साथ ही उनसे कहा गया था कि आप खुद से हटा लें, नहीं तो प्रशासन हटाएगी। गौरतब है कि आज से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू हो गई है। कुछ जगहों पर लोग खुद हटा रहे हैं। हर इलाके से अतिक्रमण हटाने के लिए अलग-अलग तारीख तय की गई है। प्रेमपुरा में हटाई गई दुकानों और मकानों की जमीन की कीमत कलेक्टर गाइडलाइन के मुताबिक 2788 रुपए प्रति वर्ग फीट के हिसाब से 3 करोड़ रुपए से ज्यादा आंकी गई है। 72 घंटे में दुकानों को खाली कराया गया था, इसके बाद सोमवार सुबह एसडीएम अर्चना शर्मा और तहसीलदार कुणाल राऊत टीम के साथ कार्रवाई शुरू की। टीटी नगर सर्कल में एफटीएल क्षेत्र में 116 अतिक्रमण चिह्नित किए गए हैं। इनमें 68 सरकारी और 48 निजी जमीन पर बने हैं। निजी जमीन पर बने 92 निर्माण-होटल, रिसोर्ट, फार्महाउस, मकान और दुकान की अलग से जांच चल रही है। नगर निगम ने इन्हें नोटिस देकर दस्तावेज मांगे हैं। पहले नोटिस, फिर कार्रवाई… अतिक्रमण चिह्नित करने के बाद संबंधित को नोटिस देकर दस्तावेज मांगे गए और सुनवाई की गई। जिन मामलों में अतिक्रमण पाया गया, वहां कार्रवाई की गई। बुजुर्ग दंपति को राहत… भदभदा चौराहे पर कार्रवाई के दौरान टीम एक कमरे तक पहुंची, जहां चलने-फिरने में असमर्थ बुजुर्ग दंपति रह रहे थे। उन्हें देख एसडीएम टीटी नगर अर्चना शर्मा ने कमरा नहीं तोड़ने के निर्देश दिए और अधिकारियों को देखभाल के लिए कहा। एफटीएल के 50 मीटर दायरे में सख्ती बड़े तालाब के फुल टैंक लेवल (FTL) से 50 मीटर तक के दायरे में आने वाले सभी अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस सीमा के भीतर किसी भी तरह का अतिक्रमण नहीं बचेगा। 16 मार्च 2022 को भोज वेटलैंड रूल्स लागू होने के बाद बने सभी निर्माण हटाए जाएंगे। इसी आधार पर पूरी कार्रवाई की जा रही है। इन गांवों में सबसे ज्यादा कब्जे टीटी नगर एसडीएम सर्कल के गौरा गांव और बिसनखेड़ी में सबसे ज्यादा अतिक्रमण सामने आए हैं। इसके अलावा बैरागढ़ और बहेटा इलाके में भी बड़ी संख्या में निर्माण किए गए हैं। 25 फरवरी से शुरू हुआ अभियान 28 फरवरी के बाद धीमा पड़ गया था, लेकिन अब प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए रोजाना कार्रवाई का शेड्यूल तय कर दिया है। किस दिन कहां चलेगा बुलडोजर 10 अप्रैल: हलालपुरा 11 अप्रैल: बैरागढ़ (काशियाना बंगले के पीछे) 12-13 अप्रैल: सेवनिया गोंड 15-16 अप्रैल: बैरागढ़ (मकान, मैरिज गार्डन) 17 अप्रैल: हुजूर तहसील 18-19 अप्रैल: टीटी नगर 20 अप्रैल: बैरागढ़ शेष अतिक्रमण 21 अप्रैल: हुजूर तहसील अंतिम कार्रवाई वन विहार में पिलर निर्माण पर नया विवाद कार्रवाई के बीच वन विहार नेशनल पार्क क्षेत्र में करीब 2.5 किमी में 100 से ज्यादा पिलर लगाए जाने का मामला सामने आया है। विशेषज्ञ इसे वेटलैंड नियमों के खिलाफ बता रहे हैं। पर्यावरणविद् राशिद नूर खान ने इस मामले को गंभीर बताते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में ले जाने की तैयारी की है।  

आर.टी.ई. के तहत प्रवेश न देने वाले निजी स्कूलों की मान्यता होगी रद्द

आर.टी.ई. के तहत प्रवेश न देने वाले निजी विद्यालयों की मान्यता होगी रद्द आर.टी.ई. प्रतिपूर्ति राशि दूसरे राज्यों से बेहतर  रायपुर छत्तीसगढ़ में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009, अप्रैल 2010 से प्रभावी है। इसके अंतर्गत प्रदेश के गैर-अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं। इन सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर, दुर्बल वर्ग और वंचित समूह के बच्चों को उनके निवास क्षेत्र के भीतर प्रवेश दिलाया जाता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार गरीब बच्चों की शिक्षा के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और सभी के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। ​प्रतिपूर्ति राशि का पारदर्शी भुगतान            शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत निजी स्कूलों को नर्सरी या कक्षा 1 में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना अनिवार्य है। इसके बदले राज्य सरकार प्रति बच्चा व्यय के आधार पर स्कूलों को प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान करती है। यह राशि सरकारी स्कूल में प्रति बच्चे पर होने वाले खर्च या निजी स्कूल की वास्तविक फीस (दोनों में से जो भी कम हो) के आधार पर निर्धारित की जाती है। ​अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर प्रतिपूर्ति             छत्तीसगढ़ में शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि कई पड़ोसी राज्यों की तुलना में बेहतर या उनके समकक्ष है। प्रदेश में वर्ष 2011-12 से ही कक्षा 1 से 5 तक 7000 रूपए और कक्षा 6 से 8 तक 11 हजार 400 रूपए वार्षिक प्रतिपूर्ति राशि निर्धारित है। तुलनात्मक रूप से देखें तो मध्य प्रदेश में 4,419 रूपए बिहार में 6,569 रूपए, झारखंड में 5,100 रूपए और उत्तर प्रदेश में 5,400 रूपए वार्षिक दिए जाते हैं। यद्यपि ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में यह राशि अधिक है, किंतु समग्र मूल्यांकन में छत्तीसगढ़ की प्रतिपूर्ति राशि संतुलित और उचित है। ​साढ़े तीन लाख से अधिक बच्चे ले रहे लाभ             वर्तमान में राज्य के 6,862 निजी विद्यालयों में आर.टी.ई. के माध्यम से लगभग 3,63,515 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इस वर्ष भी कक्षा पहली की लगभग 22,000 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है। चूंकि सभी निजी विद्यालयों को आर.टी.ई. अधिनियम के प्रावधानों के तहत ही मान्यता दी गई है, अतः यह उनकी वैधानिक जिम्मेदारी है कि वे निर्धारित सीटों पर प्रवेश सुनिश्चित करें। ​नियमों के उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई            यदि कोई निजी विद्यालय आर.टी.ई. के तहत प्रवेश देने से इंकार करता है या प्रक्रिया में व्यवधान डालता है, तो राज्य शासन उनके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा। इसमें विद्यालय की मान्यता समाप्त करने तक का प्रावधान शामिल है। शिक्षा विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस संबंध में फैलाई जा रही किसी भी भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक तथ्यों पर ही विश्वास करें।

नक्सलवाद के अंधकार से बाहर निकली शर्मिला, स्वावलंबन की दिशा में बढ़ी कदम

नक्सलवाद का अंधेरा छोड़ शर्मिला ने थामी स्वावलंबन की सुई दंतेवाड़ा में लिख रही हैं बदलाव की इबारत रायपुर ​बस्तर संभाग के नक्सल मुक्त घोषित होने के बाद अब हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने वाले युवाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन दिखने लगा है। इसकी सबसे बड़ी मिसाल बीजापुर की शर्मिला पोयामी बनकर उभरी हैं, जिन्होंने कभी हाथों में बंदूक थामी थी, लेकिन आज वे लाइवलीहुड कॉलेज में सुई-धागे से अपने और अपने परिवार के भविष्य के सपने बुन रही हैं। ​हिंसा के रास्ते से मुख्यधारा का सफर ​          बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक की रहने वाली 19 वर्षीय शर्मिला कभी भैरमगढ़ एरिया कमेटी की सक्रिय सदस्य थीं। गुरिल्ला युद्ध और हथियारों का प्रशिक्षण लेने वाली शर्मिला को जल्द ही अहसास हो गया कि प्रगति का मार्ग बंदूक से नहीं, बल्कि शांति और शिक्षा से निकलता है। इसी संकल्प के साथ उन्होंने 07 फरवरी 2026 को आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का निर्णय लिया। ​कौशल विकास से आत्मनिर्भरता की ओर ​        राज्य शासन की पुनर्वास नीति के तहत शर्मिला को दंतेवाड़ा के लाइवलीहुड कॉलेज में प्रवेश दिलाया गया। बीते 45 दिनों से वे यहाँ सिलाई का गहन प्रशिक्षण ले रही हैं। अब वे आधुनिक परिधान जैसे सूट और ब्लाउज सिलने की बारीकियां सीख रही हैं। प्रशिक्षण के बाद उनका लक्ष्य अपने गाँव लौटकर सिलाई केंद्र खोलना और अपनी 4 एकड़ पुश्तैनी जमीन पर आधुनिक खेती (टमाटर, मूली व भाजियाँ) कर परिवार को आर्थिक संबल प्रदान करना है। ​सुविधाओं ने बदला नजरिया          ​शर्मिला ने बताया कि मुख्यधारा में लौटने के बाद उन्हें पहली बार शासन की ओर से इतनी बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं, ​पौष्टिक आहाररू कॉलेज में नियमित रूप से अंडा, मछली, चिकन और हरी सब्जियां दी जा रही हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य में बड़ा सुधार हुआ है। ​सक्रिय सहभागितारू बढ़ते आत्मविश्वास का ही परिणाम है कि उन्होंने हाल ही में जगदलपुर में आयोजित मैराथन दौड़ में भी हिस्सा लिया। ​पारिवारिक प्रेरणा- शर्मिला की दीदी मुड़ो पोयामी (पूर्व नक्सल सदस्य) भी मुख्यधारा में लौटकर आत्मनिर्भरता की राह पर हैं। ​गाँव के विकास की उम्मीद ​         शिक्षा और कौशल की ताकत को समझने के बाद शर्मिला अब अपने क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं के प्रति भी सजग हैं। वे चाहती हैं कि उनके गाँव की कच्ची सड़कों और पेयजल की समस्याओं का जल्द निराकरण हो ताकि विकास की यह लहर सुदूर अंचलों तक पहुँचे। ​शर्मिला पोयामी का यह संघर्षपूर्ण सफर हिंसा से विकास की ओर बढ़ते नए छत्तीसगढ़ की एक सशक्त पहचान बन गया है।

महिलाओं के हाथ में स्टीयरिंग: हरियाणा सरकार की ‘पिंक कैब’ योजना से बढ़ेगा रोजगार

चंडीगढ़. हरियाणा की गरीब व जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत खासकर “लखपति दीदी” बनाने के लिए राज्य सरकार खास पहल करने जा रही है। प्रदेश सरकार ने महिलाओं के लिए पिंक कैब योजना आरंभ करने का निर्णय लिया है। इस योजना के अंतर्गत न केवल महिलाओं को वाहन चलाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए उन्हें 10 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण भी उपलब्ध कराया जाएगा। राज्य सरकार ने युवा सशक्तीकरण एवं उद्यमिता विकास की योजनाओं को बढ़ावा देने की कड़ी में पिंक कैब योजना आरंभ करने का सैद्धांतिक निर्णय लिया है। महिलाओं के लिए विशेष “पिंक टैक्सी” या “महिला कैब” का विचार भारत और दुनिया के कई हिस्सों में अलग-अलग समय पर शुरू हुआ। देश में सबसे शुरुआती संगठित पहल चेन्नई (2014) में “पिंक टैक्सी” के रूप में देखी गई, जहां महिलाओं द्वारा महिलाओं के लिए कैब सेवा शुरू की गई थी। इसके बाद देश के कई शहरों जैसे बेंगलुरु, कोलकाता और दिल्ली में इस तरह की सेवाएं शुरू हुईं। वैश्विक स्तर पर भी 2015 के आसपास “पिंक टैक्सी” जैसे महिला केंद्रित माडल सामने आए, जिनका मुख्य उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा और रोजगार था। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस बार के बजट में पिंक कैब योजना की शुरुआत करने के संकेत दिए हैं। राज्य में करीब पांच लाख लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य है, जिसमें से आधी से ज्यादा महिलाएं अब तक लखपति बन चुकी हैं। लखपति दीदी स्वयं सहायता समूह की एक ऐसी सदस्य होती है, जिसकी सालाना पारिवारिक आय एक लाख रुपये या इससे अधिक है। इस आय की गणना कम से कम चार कृषि मौसमों या चार व्यापार चक्रों के लिए की जाती है, जिनकी औसत मासिक आय 10 हजार रुपये से अधिक है, जो कि लगातार बनी रहे। पिंक कैब योजना के अंतर्गत सरकार की चाह है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें स्वाभिमान पैदा किया जा सके। प्रदेश सरकार “पिंक कैब योजना” शुरू कर महिलाओं को वाहन चलाने का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ेगी, ताकि उनमें आत्मनिर्भरता और सुरक्षा की भावना बढ़ सके। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को न सिर्फ रोजगार देना है, बल्कि उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराना भी है। पिंक कैब योजना के तहत महिलाएं स्वयं वाहन चलाकर आय अर्जित कर सकेंगी और परिवहन क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ा सकेंगी। पिंक कैब योजना को केंद्र सरकार की “लखपति दीदी” अवधारणा से इसलिए जोड़ा गया है, ताकि महिलाएं नियमित आय के स्रोत से जुड़ सकें। महिलाओं को मिलेंगी कई प्रकार की सुविधाएं – – वाहन चलाने का विशेष प्रशिक्षण – इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए 10 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण – स्वरोजगार के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता – सुरक्षित परिवहन सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था महिलाओं को क्या-क्या लाभ होंगे? 1. आर्थिक सशक्तीकरण – महिलाएं खुद वाहन चलाकर नियमित आय कमा सकेंगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी 2. रोजगार के नए अवसर – परिवहन क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और बड़े स्तर पर रोजगार सृजित होगा 3. सुरक्षित यात्रा व्यवस्था – महिला ड्राइवर होने से महिला यात्रियों को अधिक सुरक्षित महसूस होगा, जिससे इस सेवा की मांग भी बढ़ेगी 4. आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास – प्रशिक्षण और स्वरोजगार से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे सामाजिक रूप से अधिक सशक्त बनेंगी 5. हरित (ग्रीन) परिवहन को बढ़ावा 6. इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। प्रदेश सरकार ने युवाओं को उद्यमी बनाने का प्रशिक्षण देने के लिए 60 करोड़ रुपये की लागत से तीन राज्य उद्यमिता विकास संस्थान स्थापित करने का निर्णय लिया है। ऐसे प्रत्येक संस्थान में प्रति वर्ष एक हजार युवाओं को उद्यमिता का प्रशिक्षण देने की क्षमता होगी। इनमें महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहेंगी। करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक राज्य कौशल संकाय प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र भी स्थापित करने की राज्य सरकार की योजना है।

मानसा थर्मल प्लांट पर ड्रोन का खतरा: देर रात दिखी संदिग्ध गतिविधि, पुलिस-सेना हाई अलर्ट पर

मानसा/पंचकूला. उत्तर भारत के सबसे बड़े तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (टीएसपीएल) के ऊपर तीन से चार शक्की ड्रोन की गतिविधि देखने के बाद पुलिस की ओर से सुरक्षा के कड़े प्रबंध कर दिए गए हैं, इन ड्रोन की सूचना पुलिस ने भारतीय फौज को देने के बाद बठिंडा स्थित अधिकारियों की ओर से थर्मल प्लांट का निरीक्षण किया गया बताया जा रहा है कि तीन से चार थर्मल प्लांट की चारद्वारी नंबर 194 के नजदीक इन ड्रोन को काफी समय थर्मल के ऊपर उड़ते देखा गया इस दौरान यूनिट का सर्वेक्षण करने के बाद गेट नंबर 2 के द्वारा प्लांट से बाहर चले गए। मामले की गंभीरता को देखते प्लांट प्रबंधन के सुरक्षा प्रबंधन की ओर से इस मामले की जानकारी पुलिस चौकी बहनीवाल इंचार्ज को दी गई, पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते इसकी जांच शुरू कर दी गई है, उन्होंने बताया कि थर्मल की ओर से रात के समय कुछ ड्रोन उड़ने की सूचना दी गई है जिसकी पुलिस जांच कर रही है। वहीं पंचकूला के अंतर्गत पीडब्ल्यूडी कॉलोनी के पास 4/5 अप्रैल देर रात एक सड़क हादसा घटित हुआ। त्रिलोकपुर की ओर से आ रहे एक अनियंत्रित ट्रक ने मोटरसाइकिल सवार दो चचेरे भाइयों को इतनी जोरदार टक्कर मारी कि दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने उसी दिन आरोपित ट्रक चालक को गिरफ्तार कर वाहन को कब्जे में ले लिया है। पंचकूला वासी मृतक के भाई निशांत ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि शनिवार रात वह अपने छोटे भाई अरुण (18) और चाचा के लड़के दीक्षित के साथ अपनी मौसी के लड़के से मिलने गांव बडोना कलां गए थे। रात करीब 12.15 बजे जब वे वापस अपने गांव लौट रहे थे, तो रायपुररानी में पीर बाबा की मजार के पास यह हादसा हुआ। निशांत अपनी बाइक पर पीछे चल रहा था, जबकि अरुण अपनी मोटरसाइकिल चला रहा था और दीक्षित उसके पीछे बैठा था। निशांत ने बताया कि त्रिलोकपुर की ओर से आ रहे ट्रक के चालक ने वाहन को बेहद तेज रफ्तार और लापरवाही से चलाते हुए गलत दिशा में लाकर अरुण की मोटरसाइकिल को सीधी टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों भाई सड़क पर गिर गए और ट्रक का पिछला टायर उनके ऊपर से गुजर गया। चश्मदीदों और राहगीरों ने तुरंत ट्रक को रुकवाया और पुलिस को सूचना दी, लेकिन तब तक अरुण और दीक्षित की मौत हो चुकी थी। डीसीपी पंचकूला सृष्टि गुप्ता ने बताया कि यह सड़क हादसा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सूचना मिलते ही रायपुररानी थाना से मुख्य सिपाही राजीव कुमार और उनकी टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर नागरिक अस्पताल की मोर्चरी में पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया था। शिकायतकर्ता निशांत के बयान के आधार पर आरोपित ट्रक चालक अभिषेक ठाकुर, निवासी जिला चम्बा (हिमाचल प्रदेश) के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1), 281 और 324(4) के तहत मामला दर्ज किया गया। मौके से दुर्घटनाग्रस्त मोटरसाइकिल और ट्रक को जब्त किआ गया। हमारी टीम द्वारा उसी दिन आरोपी चालक को गिरफ्तार कर लिया गया था।

महिलाओं को बड़ी राहत: महतारी वंदन योजना की 26वीं किश्त ट्रांसफर, लाखों लाभार्थियों को फायदा

रायपुर. छत्तीसगढ़ में लाखों महिलाओं के लिए अच्छी खबर है. महतारी वंदन योजना की 26वीं किस्त जारी कर दी गई है. इस योजना के तहत पूरे राज्य में 68.48 लाख से ज्यादा महिलाओं के बैंक खातों में ₹641.62 करोड़ ट्रांसफर किए गए हैं.  खास बात यह है कि बस्तर संभाग के दूरदराज और नक्सल प्रभावित इलाकों में चल रही 'नियद नेल्ला नार' योजना के तहत आने वाले गांवों की 7,773 महिलाओं को भी इस किस्त का लाभ मिला है. महतारी वंदन योजना की 26वीं किस्त जारी छत्तीसगढ़ सरकार ने महतारी वंदन योजना की 26वीं किस्त जारी कर दी है. इस योजना के तहत, 68.48 लाख महिलाओं के खातों में DBT के माध्यम से ₹641.62 करोड़ की राशि हस्तांतरित की गई है. प्रत्येक महिला को ₹1,000 की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई है. आपके खाते में पैसे आए है या नहीं? नीचे दिए गए आसान तरीकों से चेक कर सकते हैं.  1,000 रुपये की राशि यह योजना मार्च 2024 में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को पूरा करने और महिलाओं के कल्याण को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी. तब से लाभार्थी महिलाओं को हर महीने नियमित रूप से ₹1,000 की वित्तीय सहायता प्राप्त हो रही है. इस योजना के तहत अब तक लाभार्थी महिलाओं को कुल ₹16,881 करोड़ की राशि वितरित की जा चुकी है. KYC सत्यापन की प्रक्रिया इस योजना के तहत लाभार्थी महिलाओं के लिए KYC सत्यापन की प्रक्रिया को भी तेज किया जा रहा है. KYC अपडेट करने की यह प्रक्रिया 3 अप्रैल को E-Governance Services India Limited के माध्यम से शुरू की गई थी और 30 जून तक जारी रहेगी. जल्द से जल्द पूरा करवा लें e-KYC महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने महतारी वंदन योजना की महिला लाभार्थियों विशेष रूप से उन लाभार्थियों जिन्होंने अभी तक अपना e-KYC पूरा नहीं किया है से अपील की है कि वे इसे तत्काल पूरा करवा लें, ताकि इस योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता बिना किसी रुकावट के सीधे उनके खातों में जमा की जा सके. इन महिलाओं को नहीं मिली 26वीं किस्त महिला एवं बाल विकास विभाग से मिली जानकारी के अनुसार महतारी वंदन योजना के तहत लाभार्थियों की कुल संख्या 6,894,633 है. इनमें से उन लाभार्थियों को छोड़कर जिनका KYC सत्यापन अभी लंबित है, 26वीं किस्त 6,848,899 लाभार्थियों को वितरित कर दी गई है. ऐसे चेक करें आपके खाते में महतारी वंदन योजना के तहत ₹1,000 की राशि  आई है या नहीं इसके चेक करने के लिए आधिकारिक वेबसाइट mahtarivandan.cgstate.gov.in पर जाएं. इसके बाद Application and Payment Status पर क्लिक करें, फिर अपना मोबाइल नंबर या आधार नंबर और साथ में कैप्चा डालें और Submit पर क्लिक करें.  इससे बाद आपको जानकारी मिल जाएगी.

महिलाओं के मोबाइल में बजी खुशियों की घंटी, महतारी वंदन की 26वीं किश्त जारी

महिलाओं के मोबाईल में बजी खुशियों की घंटी,महतारी वंदन की 26वीं किश्त जारी 68.48 लाख महिलाओं के खाते में ट्रांसफर हुए 641.62 करोड़ रूपए  हितग्राही महिलाओं को अब तक 16,240 करोड़ की मदद रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य की महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक  सशक्तिकरण के लिए संचालित महतारी वंदन योजना की 26वीं किश्त की राशि आज जारी की गई। इसके जारी होते ही हितग्राही महिलाओं के मोबाईल में खुशियों के नोटिफिकेशन की घंटी बज उठी। इस योजना के तहत राज्य की 68 लाख 48 हजार 899 महिलाओं को 641 करोड़ 62 लाख 92 हजार रूपए उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए। लाभान्वित हितग्राहियों में 7773 महिलाएं नियद नेल्ला नार के योजना के गांवों की रहने वाली है।  छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी जी की गारंटी को पूरा करने के लिए और महिलाओं की बेहतरी के लिए यह योजना मार्च 2024 में शुरू की गई थी। तब से लेकर अब तक हर महीने हितग्राही महिलाओं को एक-एक हजार रूपए की सहायता राशि नियमित रूप से दी जा रही है। इस योजना के तहत अब तक हितग्राही महिलाओं को 16,881 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है।  गौरतलब है कि इस योजना के अंतर्गत हितग्राही महिलाओं के केवाईसी पूरा किए जाने का काम भी तेजी से कराया जा रहा है। केवाईसी के अद्यतन की यह प्रक्रिया ई-गवर्नेस सर्विसेस इंडिया लिमिटेड के माध्यम से 3 अप्रैल से शुरू की गई है, जो 30 जून तक चलेगी। व्हीएलई द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायत भवन में तथा शहरी क्षेत्र में वार्ड कार्यालय में केवाईसी अद्यतन का कार्य हो रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने महतारी वंदन योजना की ऐसी हितग्राही महिलाओं से जिनका ई-केवाईसी नहीं हुआ है, उनसे तत्काल ई-केवाईसी कराने की अपील की है ताकि योजना की सहायता राशि बिना किसी व्यवधान के उनके खाते में पहुंच सके।  महिला एवं बाल विकास विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार महतारी वंदन योजना के हितग्राहियों की संख्या 68,94,633 है, जिसमें से केवाईसी हेतु लंबित हितग्राहियों को छोड़कर 68,48,899 हितग्राहियों को 26वीं किश्त का भुगतान किया गया है।

7 अप्रैल को सीएम योगी देंगे ‘ग्रेटर आगरा’ योजना के तहत 5142 करोड़ की सौगात

7 अप्रैल को सीएम योगी देंगे 5142 करोड़ की 'ग्रेटर आगरा' योजना की सौगात  वृंदावन में श्रीमद् जगतगुरु द्वाराचार्य मलूकनाथ जी महाराज की 452 वीं जयंती महोत्सव में भी करेंगे शिरकत  449.65 हेक्टेयर में रायपुर और रहन कलां में विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ विकसित होगा 'ग्रेटर आगरा'  विभिन्न परियोजनाओं का करेंगे लोकार्पण व शिलान्यास, विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे मुख्यमंत्री लखनऊ/आगरा  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 7 अप्रैल को ताजनगरी आगरा के लोगों को एक ऐतिहासिक सौगात देने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री 5142 करोड़ रुपये की लागत वाली महत्वाकांक्षी 'ग्रेटर आगरा' योजना का भूमि पूजन और शिलान्यास करेंगे। इस दौरान वह टाउनशिप के मॉडल का अवलोकन भी करेंगे। इसके साथ ही जनपद के विभिन्न विभागों की करोड़ों रुपये की अन्य विकास परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री वृंदावन में श्रीमद् जगतगुरु द्वाराचार्य मलूकनाथ जी महाराज की 452 वीं जयंती महोत्सव में भी शिरकत करेंगे और करीब एक घंटा महोत्सव में रहेंगे। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगी 'ग्रेटर आगरा' टाउनशिप योगी सरकार की 'नए शहर प्रोत्साहन योजना' और शहरी विस्तारीकरण के तहत आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) द्वारा इस विशाल टाउनशिप का निर्माण किया जा रहा है। ग्राम रायपुर और रहन कलां की 449.65 हेक्टेयर भूमि पर 10 अत्याधुनिक आवासीय टाउनशिप बसाई जाएंगी। 'ग्रेटर आगरा' विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस होगा, जिसमें बेहतरीन पार्क, चौड़ी सड़कें, निर्बाध बिजली-पानी की आपूर्ति और सभी आधुनिक सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यह योजना आगरा के आवासीय स्वरूप को पूरी तरह बदल देगी। जनसभा को करेंगे संबोधित प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 7 अप्रैल को 4:25 बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हेलीकॉप्टर एक्सप्रेसवे के समीप रायपुर रहन कलां स्थित कार्यक्रम स्थल पर उतरेगा। वहां आगरा के प्रभारी मंत्री/ पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह उनका भव्य स्वागत करेंगे। दोपहर 4:30 बजे मुख्यमंत्री 'ग्रेटर आगरा' योजना का शिलान्यास व भूमिपूजन करेंगे। इसके बाद वह करोड़ों रुपये की अन्य परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास कर एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम संपन्न होने के बाद शाम करीब 5:25 बजे मुख्यमंत्री आगरा से प्रस्थान करेंगे। प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा दी जा रही 'ग्रेटर आगरा' की यह सौगात शहर के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। यह एक विश्वस्तरीय परियोजना है। कार्यक्रम को ऐतिहासिक और सफल बनाने के लिए हमने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया है। सभी अधिकारियों को जनसभा, सुरक्षा, पार्किंग और हेलीपैड की व्यवस्थाओं को समय से और पूरी गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप लखनऊ के युवाओं ने तैयार किया ‘दिव्यास्त्र’

कभी तमंचों के लिए बदनाम रहा यूपी, अब बना ‘ड्रोन शक्ति’ का हब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप लखनऊ के युवाओं ने तैयार किया ‘दिव्यास्त्र’ योगी सरकार की डिफेंस कॉरिडोर और स्टार्टअप नीति का असर, लखनऊ में निजी कंपनी का बड़ा इनोवेशन 500 किमी रेंज, एआई बेस्ड सिस्टम और कम लागत, यूपी के युवाओं का ड्रोन बनेगा सेना के लिए गेमचेंजर लखनऊ  कभी अवैध हथियारों और ‘तमंचों’ के लिए बदनाम रहा उत्तर प्रदेश अब नई पहचान गढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश तेजी से डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप हब के रूप में उभर रहा है। इसी बदलाव की मिसाल राजधानी लखनऊ में देखने को मिली, जहां एक प्राइवेट स्टार्टअप ने अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक विकसित की है। यह दर्शाता है कि योगी आदित्यनाथ के विजन और नीतियों का असर जमीन पर दिख रहा है, जहां कभी अपराध की पहचान थी, वहीं अब डिफेंस टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप्स का नया युग आकार ले रहा है। तीन युवा उद्यमियों – पवन, रविंद्र पाल सिंह और सौरभ सिंह द्वारा स्थापित कंपनी हॉवरिट (Hoverit) ने “दिव्यास्त्र एमके-1” नाम का एडवांस यूएवी तैयार किया है। यह ड्रोन आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है, जो निगरानी के साथ-साथ सटीक हमले करने में सक्षम है। इस ड्रोन की प्रमुख खासियत इसकी 500 किलोमीटर की रेंज, लगभग 5 घंटे की उड़ान क्षमता और एआई आधारित टारगेटिंग सिस्टम है। यह 10,000 फीट तक उड़ सकता है और करीब 15 किलोग्राम तक पेलोड ले जाकर सटीक निशाना साध सकता है। लागत के मामले में भी यह बाजार के अन्य विकल्पों से काफी सस्ता बताया जा रहा है। स्टार्टअप के संस्थापकों का कहना है कि प्रदेश में बेहतर नीतियों और डिफेंस कॉरिडोर जैसी योजनाओं के चलते उन्हें तेजी से आगे बढ़ने का मौका मिला। यही कारण है कि आज यह कंपनी भारतीय सेना के लिए ड्रोन सप्लाई करने की दिशा में काम कर रही है और उसे शुरुआती ऑर्डर भी मिल चुके हैं। आने वाले समय में कंपनी “एमके-2” वर्जन पर भी काम कर रही है, जिसकी रेंज 2000 किलोमीटर और पेलोड क्षमता 80 किलोग्राम तक हो सकती है। इसके लिए यूपी डिफेंस कॉरिडोर में नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की जा रही है, जहां हर महीने 20 ड्रोन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। यही नहीं, कंपनी ने डिफेंस सेक्टर के लिए कई तरह के ड्रोन और यूएवी विकसित किए हैं, जिनमें निगरानी के लिए “आंख” ड्रोन, 20 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने वाला “बाज” ड्रोन, शेल (बम) गिराने वाले ड्रोन, VTOL यूएवी (जो बिना रनवे के उड़ान भरते हैं) शामिल हैं। इसके अलावा ये कंपनी डिकॉय ड्रोन (दुश्मन को भ्रमित करने के लिए) और आईएसआर (इंटेलिजेंस, सर्विलांस, रिकॉन) यूएवी भी बना रही है, जिससे यह साफ होता है कि यह स्टार्टअप सिर्फ एक ड्रोन नहीं बल्कि निगरानी, सप्लाई और स्ट्राइक तीनों के लिए एक पूरा ड्रोन सिस्टम तैयार कर रहा है। उल्लेखनीय है कि अब युद्धों में तकनीक की भूमिका निर्णायक हो गई है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के युवाओं द्वारा विकसित यह इनोवेशन न सिर्फ राज्य की बदली हुई छवि को दर्शाता है, बल्कि देश की सुरक्षा को भी नई मजबूती देता है।