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हाई कोर्ट में गरमाया भोजशाला मुद्दा: हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस का दावा—1978 सर्वे ने मंदिर होने की पुष्टि की

इंदौर धार की ऐतिहासिक भोजशाला के धार्मिक स्वरूप के निर्धारण को लेकर मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में मंथन मंगलवार को भी जारी रहा। याचिकाकर्ता हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने लगातार दूसरे दिन तर्क रखे। उन्होंने कहा कि भोजशाला मंदिर है, मस्जिद नहीं; यह बात वर्ष 1978 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा कराए गए सर्वे में सिद्ध हो चुकी है। यह जमीन कभी वक्फ बोर्ड की थी ही नहीं। भोजशाला राष्ट्रीय महत्व की संरक्षित धरोहर है। वक्फ एक्ट के प्रावधान इस पर लागू होते ही नहीं हैं। एडवोकेट जैन ने अयोध्या राम मंदिर से जुड़े तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि “वन्स ए टेंपल, ऑलवेज ए टेंपल” नी एक बार मंदिर रहा स्थल हमेशा मंदिर ही रहेगा। उन्होंने अपनी बात के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के न्यायदृष्टांत भी प्रस्तुत किए। सलमान खुर्शीद ने मांगा शासन का पक्ष मंगलवार दोपहर करीब ढाई बजे न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ के समक्ष मामले में सुनवाई शुरू हुई। सुनवाई के दौरान मस्जिद पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा कि शासन को भी अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। इस पर कोर्ट ने कहा कि हम पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि पहले सभी याचिकाकर्ता अपना-अपना पक्ष रखेंगे, इसके बाद सभी प्रतिवादी एक-एक कर अपनी बात रखेंगे। अंत में हस्तक्षेपकर्ताओं को सुना जाएगा। सुनवाई बुधवार को भी होगी और एडवोकेट जैन अपनी बहस जारी रखेंगे। मंदिरों को तोड़कर बनाई गई थीं मस्जिदें एडवोकेट जैन ने सोमवार की बहस आगे बढ़ाते हुए कहा कि इतिहास की पुस्तकों से स्पष्ट है कि भोजशाला मंदिर ही है। यह बात सिर्फ पुस्तकें ही नहीं बल्कि शासन की साइटें भी कह रही हैं। जैन ने कहा कि मंदिर में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जाती है। एक बार मंदिर स्थापित होने के बाद वह स्थल हमेशा मंदिर ही माना जाता है। इतिहास की पुस्तकों से स्पष्ट है कि धार और मांडव में मंदिरों को तोड़कर दो मस्जिदें बनाई गई थीं। भोजशाला राष्ट्रीय महत्व की संरक्षित धरोहर है। अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार इसके धार्मिक चरित्र के विपरीत जाकर कोई काम नहीं किया जा सकता। जैन ने कोर्ट को यह भी बताया कि इसके पहले भी तीन बार भोजशाला का मामला कोर्ट पहुंच चुका है। शासन के शपथ पत्र और राजस्व रिकॉर्ड जैन ने कहा कि शासन खुद शपथ पत्र पर यह स्वीकार कर चुका है कि भोजशाला मंदिर ही है। इसे कभी वक्फ संपत्ति के रूप में मान्यता नहीं मिली। उन्होंने कोर्ट को बताया कि राजस्व रिकॉर्ड में भी उक्त जमीन भोजशाला के रूप में ही दर्ज है, यह बात खुद शासन की ओर से प्रस्तुत शपथ पत्र में कही गई है। जिस जमीन पर कमाल मौला दरगाह बनी है वह अलग है। इसके पहले भी भोजशाला का नाम हटाने का प्रयास हुआ लेकिन कभी सफलता नहीं मिली। एडवोकेट जैन ने वक्फ संपत्ति के नोटिफिकेशन का हवाला देते हुए कहा कि वक्फ एक्ट में स्पष्ट लिखा है कि राष्ट्रीय महत्व की संरक्षित धरोहरों पर यह एक्ट लागू नहीं होता है और भोजशाला राष्ट्रीय महत्व की संरक्षित धरोहर है।

शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने दुर्ग के प्राथमिक विद्यालय का किया निरीक्षण

रायपुर शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने दुर्ग के प्राथमिक विद्यालय का किया निरीक्षण छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग एवं विधि-विधायी मंत्री  गजेन्द्र यादव आज दुर्ग के शनिचरी बाजार स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल प्राथमिक शाला पहुँचकर विद्यालय परिसर का निरीक्षण किया तथा विद्यार्थियों से सीधे संवाद कर उनकी पढ़ाई, आवश्यकताओं एवं सीखने के अनुभवों की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान मंत्री  यादव ने विद्यार्थियों से आत्मीय चर्चा करते हुए उन्हें नियमित रूप से अध्ययन करने के लिए प्रोत्साहित  किया। बच्चों द्वारा बताई गई आवश्यकताओं को शीघ्र पूर्ण करने हेतु संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए। मंत्री  यादव ने शिक्षकों को निर्देश दिए कि बच्चों की पढ़ाई को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए गंभीरता एवं समर्पण के साथ कार्य करें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की मजबूत शिक्षा ही उनके उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है। इस अवसर पर विद्यालय में विकसित किए जा रहे स्मार्ट क्लास के प्रति विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। मंत्री  यादव ने बताया कि आगामी शैक्षणिक सत्र से विद्यालय में स्मार्ट क्लास के माध्यम से पढ़ाई प्रारंभ की जाएगी, जिससे विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा सुविधाओं का लाभ मिलेगा और उनका भविष्य अधिक सशक्त बनेगा। यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार शासकीय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रभावी कदम उठा रही है। शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद एवं अन्य सह-पाठयक्रम गतिविधियों पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए, ताकि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके। इस अवसर पर सभापति  श्याम शर्मा,  कमलेश फेकर, पार्षद  नरेंद्र बंजारे,  मनीष कोठारी,  गोविंद देवांगन, मती हर्षिका संभव जैन,  दिनेश देवांगन,  अमित पटेल,  नवीन साहू सहित वार्ड के नागरिक उपस्थित रहे।

दीर्घकालिक उपयोगिता और समग्र विकास को ध्यान में रखकर करें विकास कार्य : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में रीवा जिले में मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल (एमपीएचआईडीसी) के प्रगतिरत कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा जिले में पुनर्घनत्वीकरण योजना में केंद्रीय जेल रीवा, बीहर रिवर फ्रंट, वॉटर स्पोर्ट्स सुविधाएं और बोट क्लब सहित अन्य प्रस्तावित परियोजनाओं की बिंदुवार समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी कार्य निर्धारित समय सीमा और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूर्ण किए जाएं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि विकास कार्यों की योजना बनाते समय भविष्य की आवश्यकताओं, नागरिकों की सुविधा तथा आधुनिक अधोसंरचना को विशेष प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि परियोजनाएं दीर्घकालिक उपयोगिता और शहर के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए तैयार की जाएं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए और किसी भी प्रकार की बाधा या विलंब को तत्काल दूर करते हुए परियोजनाओं को गति दी जाए। उन्होंने कहा कि रीवा को एक सुव्यवस्थित और आधुनिक शहर के रूप में विकसित करने के लिए सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करें। बैठक में अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास संजय दुबे सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

5 किलो LPG सिलेंडरों का कोटा दोगुना, मजदूरों और गरीबों को मिलेगा राहत

नई दिल्ली देशभर में एलपीजी गैस सिलेंडर की किल्लत के बीच सरकार ने प्रवासी मजदूरों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने अपना गांव छोड़कर शहरों में जाकर कमाई करने वाले मजदूरों के लिए 5 किलो वाले एलपीजी सिलिंडर का कोटा डबल कर दिया है। सरकार ने कहा है कि रोजाना सप्लाई किए जाने वाले 5 किलो के सिलेंडरों की संख्या अब दोगुनी कर दी जाएगी। 2-3 मार्च 2026 को मजदूरों के लिए जितने सिलेंडर एक दिन में सप्लाई करने का लक्ष्य रखा गया था, अब उससे दोगुना सिलेंडर भेजे जाएंगे। बिना कनेक्शन मिलता है छोटू सिलेंडर बता दें कि इन सिलिंडरों को एफटीएल गैस सिलिंडर भी कहा जाता है। सराकर अब दोगुनी संख्या में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इन सिलिंडरों की सप्लाई करेगी। आम तौर पर यह सिलिंडर प्रवासी मजदूरों या फिर छात्रों के लिए ही बना है। दरअसल परमानेंट अड्रेस ना होने की वजह से लोगों को स्थायी गैस कनेक्शन मिलना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में कोई भी एक पहचान पत्र दिखाकर छोटू सिलेंडर लिया जा सकता है। मजदूरों को बड़ी राहत एक दिन पहले ही कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मोदी सरकार को घेरते हुए कहा था कि सबसे बड़ा वार मजदूरों और गरीबों पर ही किया जाता है। कोविड की तरह एक बार फिर मजदूरो को गांव की ओर चलने का वक्त आ गया है। हालांकि सरकार ने यह फैसला लेकर मजदूर क्लास को बड़ी राहत दी है। यह नया कोटा पहले से तय 20 फीसदी के कोटे के अतिरिक्त होगा। ब्लैक मार्केटिंग रोकने का प्रयास एलपीजी संकट की खबरें आते ही सिलेंडरो की ब्लैक मार्केटिंग शुरू हो गई थी। ऐसे में सरकार ने एक समय सीमा तय कर दी कि एक कनेक्शन पर उतने दिन से पहले बुकिंग नहीं हो पाएगी। इसका उद्देश्य ब्लैक मार्केटिंग और भीड़ दोनों को नियंत्रित करना था। छोटू सिलेंडर का कोट बढ़ाने का भी उद्देश्य यही है। अब राज्य सरकारों और ऑइल मार्केटिंग कंपनियों को यह सुनिश्चित करना है कि जरूतमंद लोगों तक पर्याप्त सिलेंडर पहुंच जाएं। इंडक्शन चूल्हों को लेकर भी दी गई ढील विद्युत मंत्रालय ने इस साल 01 जुलाई से इंडक्शन चूल्हों के लिए स्टार रेटिंग की व्यवस्था अनिवार्य करने के लिए पिछले साल दिसंबर में अधिसूचना जारी की थी। सोमवार को जारी नयी अधिसूचना में इस तारीख को 01 जनवरी 2027 कर दिया गया है। अधिसूचना में कहा गया है कि ऊर्जा दक्षता ब्यूरो के परामर्श से स्टार रेटिंग की अनिवार्यता को टालने का फैसला किया गया है और सरकार इस बात से संतुष्ट है कि इसे छह महीने के लिए टाला जा सकता है।

भिंड में होगा राज्य स्तरीय कार्यक्रम सभी जिला मुख्यालयों और विकासखंड स्तर पर होंगे आयोजन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती 14 अप्रैल के अवसर पर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। डॉ. अंबेडकर की जयंती के कार्यक्रम 8 अप्रैल से आरंभ होकर 14 अप्रैल तक चलेंगे। राज्य स्तरीय कार्यक्रम भिंड जिला मुख्यालय पर होगा। जिला मुख्यालयों सहित सभी विकासखंडों में भी अंबेडकर जयंती पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रभारी मंत्रियों को अपने प्रभार के जिले के कार्यक्रमों की रूपरेखा तय कर, आवश्यक समन्वय करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संत रविदास जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में 31 मार्च 2027 तक सामाजिक समरसता कार्यक्रमों का आयोजन संपूर्ण प्रदेश में किया जाएगा। कार्यक्रमों की रूपरेखा जिला स्तर पर तैयार होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रभारी मंत्रीगण को सामाजिक समरसता कार्यक्रमों का जिला स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बीता सप्ताह मध्यप्रदेश के लिए शुभ रहा। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने प्रदेश को नए फोरलेन मार्गों की कई स्वीकृतियां प्रदान कर सौगातें दी। एन.एच. 46 के इटारसी-बैतूल सेक्शन में 758 करोड़ रुपए लागत के 22 किलोमीटर लंबे टाइगर कॉरिडोर को स्वीकृत किया गया। इसी तरह प्रदेश के निवाड़ी और उत्तर प्रदेश के झांसी को जोड़ने वाले 15.6 किलोमीटर लंबे फोरलेन दक्षिणी बाइपास के निर्माण और बंगाय खास से ओरछा तिगेला के निर्माण तथा एन.एच. 44 और एन.एच. 39 को जोड़ने वाली लिंक रोड के लिए 631.73 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। इन स्वीकृतियों से प्रदेश के व्यापारिक, आर्थिक, पर्यटन इत्यादि सभी तरह की गतिविधियों को लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन सौगातों के लिए प्रधानमंत्री  मोदी तथा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री  नितिन गडकरी का आभार माना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में हुए अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन "महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम" के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि सम्मेलन में प्रख्यात खगोल, वैज्ञानिकों द्वारा भारतीय काल गणना की वैज्ञानिकता और प्राचीन श्रेष्ठता पर गहन मंथन किया गया। उज्जैन नगरी लंबे समय तक काल गणना का केंद्र रही है, भूमध्य रेखा और कर्क रेखा का कटाव केंद्र बिंदु जो पहले उज्जैन में था अब उज्जैन से 32 किलोमीटर दूर डोंगला में शिफ्ट हो गया है। उज्जैन की गौरवशाली पहचान को विश्व पटल पर पुनः स्थापित करना भी कार्यक्रम का उद्देश्य था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 31 मार्च को वाराणसी में एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन हुआ। यह सम्मेलन मुख्यत: एक जिला-एक उत्पाद, जीआई टैग उत्पादों, निर्यात योग्य उत्पादों, पारम्परिक शिल्प और क्षेत्रीय विशेषताओं को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने पर केंद्रित रहा। दोनों राज्यों के विशिष्ट उत्पादों को प्रोत्साहन देते हुए उनके ब्रांडिंग, विपणन एवं निर्यात को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया। औद्योगिक सहयोग, निवेश संवर्धन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं पर्यटन विकास को नई गति प्रदान करने के उद्देश्य से विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसी क्रम में बताया कि वाराणसी में सुशासन की उत्कृष्ट परंपरा के नायक सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का तीन दिवसीय समारोह 3 अप्रैल से प्रारंभ होकर 5 अप्रैल तक चला। उद्घाटन दिवस में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुये। बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय नागरिकों ने इस महानाट्य को देखा। इस महानाट्य के भव्य मंचन एवं औजस्वी प्रस्तुतियों से तीनों दिन दर्शकों ने हजारों वर्ष पुराने स्वर्णिम युगों की यात्रा की। महानाट्य की सबसे बड़ी विशेषता इनकी यथार्थवादी प्रस्तुतिकरण रहीं। इस महानाट्य से महाकाल की नगरी उज्जैन एवं बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी के बीच जीवंत तादात्म्य स्थापित हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी घोषित तिथि से एक दिन पहले अर्थात् 9 अप्रैल से आरंभ हो रही है। प्रथमत: लघु और सीमांत पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं लिया जाएगा, उनकी स्लॉट बुकिंग प्रारंभ हो गई है। गेहूं की खरीदी प्रारंभ करने के लिये आवश्यक बारदाने उपलब्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को अपने प्रभार के जिलों में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की व्यवस्थाओं की सतत् निगरानी करने और आवश्यक समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए।  

किसानों की जमीन पर नजर: भोपाल में ‘विदेशी कनेक्शन’ वाले भूमाफिया के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज

भोपाल कोलार इलाके में एक व्यक्ति पर आरोप हैं कि वह पाकिस्तान से पलायन कर भोपाल आया है। कलेक्टर की अनुमति के बिना किसानों की जमीनों को हड़पने का प्रयास कर रहा है। वहीं ग्राम पंचायत सुतलिया पठार, नीलबड़ में भूमाफिया द्वारा शासकीय भूमि की खोदाई कर कोपर-मुरम निकालकर बेचा जा रहा है। एक अन्य मामले में भूमाफिया ने शासकीय भूमि पर कब्जा कर शराब दुकान का संचालन कर अवैध आर्थिक लाभ कमाया है। यह मामले कलेक्टर जनसुनवाई में मंगलवार को लोगों ने उठाते हुए कार्रवाई की मांग की है। इनके अलावा 200 लोगों ने आवेदन देते हुए विभिन्न शिकायतें दर्ज करवाई हैं। पाकिस्तान से आए व्यक्ति पर किसानों की जमीन हड़पने का आरोप जानकारी के अनुसार कोलार के रहने वाले सुरेश प्रजापति ने आरोप लगाए हैं कि हंसराज नानकदास कनरूमल पाकिस्तान से पलायन कर भोपाल आए हैं। जिनके द्वारा ग्राम पंचायत कालापानी महवाड़िया के 25 गरीब किसानों की जमीन को अधिकारियों के साथ मिलकर हड़पने का प्रयास किया जा रहा है। इससे विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है, यह जमीन किसानों को 1959 की शासकीय पट्टों पर दी गई थी। ऐसे में जमीन का सीमांकन व नामांतरण रोका जाए और हंसराज के पाकिस्तान से भारत आने तक के सभी कागजों की जांच करवाई जाए। एडीएम ने मामले की जांच कोलार तहसीलदार को सौंप दी है। शासकीय भूमि पर शराब दुकान का संचालन वहीं इंडस रीजेंसी के रहने वाले नितिन कुमार सिंह ने शिकायत करते हुए बताया कि ग्राम पंचायत सुतलिया पठार, नीलबड़ में रसूखदार व राजनीतिक पकड़ रखने वाले भूमाफिया द्वारा शासकीय भूमि में अवैध उत्खनन कर कोपरा-मुरम निकालकर बेचा जा रहा है। इसके बाद भी खनिज अधिकारियों द्वारा कार्रवाई नहीं की जा रही है। एचटी क्वार्टर पुलिस लाइन शाहजहानाबाद के संतोष साहू सहित अन्य रहवासियों ने शिकायत की है कि भूमाफिया देवेंद्र अग्निहोत्री ने शासकीय भूमि पर कब्जा कर तीन साल से शराब दुकान संचालित कर किराया वसूल रहा है। अवैध किराए का समायोजन शासन के पक्ष में करते हुए दुकान को बंद कर भूमाफिया पर कार्रवाई की जानी चाहिए। मुआवजे के लिए मां को बताया मृत करोंद शिवनगर में रहने वाले नारायण ने शिकायत की है कि पिता की मृत्यु के बाद मां लीला बाई नानी के पास रहती है। उनकी जमीन हरसूद जिला खंडवा में थी जो कि इंदिरा सागर बांध डूब में आ गई थी। जिसका मुआवजा शासन द्वारा एक लाख 20 हजार रुपये दिया गया था जो कि मेरे मामा सोमा कोगे ने मां को मृत घोषित कर खुद रख लिया है। अब मुझे व मेरी मां को जान से मारने की धमकी दे रहा है। प्रियंक शिंदे ने शिकायत की है कि जहांगीराबाद में बाबा और उसका बेटा गोलू अपने घर में माता रानी का दरबार लगाता है। जिसमें वह टोकन के रूप में 50 रुपये भी लेता है। एक महिला ने बताया कि बाबा व उसके बेटे ने उसके साथ व अन्य महिलाओं के साथ अश्लील हरकतें की हैं। तब से वह मानसिक रूप से प्रताड़ित है। एक अन्य मामले में महिला ने बताया कि रवि चौहान के नाम से बनी फर्जी आईडी से उसे बदनाम किया जा रहा है। दोनों मामलों की जांच पुलिस को सौंप दी है।  

कुपोषण पर बड़ा अभियान: 8वां पोषण पखवाड़ा 9 अप्रैल से शुरू, जागरूकता को मिलेगा नया विस्तार

रायपुर छत्तीसगढ़ में 9 से 23 अप्रैल तक 8वां पोषण पखवाड़ा, कुपोषण के खिलाफ जन-आंदोलन को मिलेगा नया विस्तार प्रदेश में कुपोषण के खिलाफ चल रहे जन-आंदोलन को और सशक्त बनाने के लिए 9 से 23 अप्रैल तक 8वां पोषण पखवाड़ा आयोजित किया जाएगा। भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा मिशन पोषण 2.0 के अंतर्गत आयोजित इस अभियान का उद्देश्य जन-भागीदारी के माध्यम से “कुपोषण मुक्त भारत” के संकल्प को मजबूती देना है। इस वर्ष पखवाड़ा की थीम “जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क के विकास को अधिकतम करना” रखी गई है, जो बच्चों के प्रारंभिक वर्षों में पोषण, स्वास्थ्य और समुचित देखभाल के महत्व को केंद्र में रखती है। विशेषज्ञों के अनुसार, जीवन के पहले छह वर्ष बच्चे के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास की नींव होते हैं, इसलिए इस अवधि में उचित पोषण अत्यंत आवश्यक है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 से संचालित पोषण अभियान को जन-आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसके तहत जन-जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में इस वर्ष का पोषण पखवाड़ा भी सामुदायिक भागीदारी को केंद्र में रखकर आयोजित किया जाएगा। पोषण पखवाड़ा के सफल क्रियान्वयन के लिए 7 अप्रैल को शाम 4 बजे राज्य स्तर पर विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।बैठक मे महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक डॉ रेणुका श्रीवास्तव, संयुक्त संचालक डी. एस. मरावी, उपसंचालक श्रुति नेलकर, अभय देवांगन सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास, स्कूल शिक्षा, नगरीय प्रशासन, कृषि, खाद्य, आयुष, जल संसाधन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन सहित विभिन्न विभागों के अन्य अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में विभागों को अपनी-अपनी कार्ययोजना तैयार कर अभियान में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। पोषण पखवाड़ा के दौरान प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। इनमें बच्चों और गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच, पोषण परामर्श, अन्नप्राशन, गोदभराई, स्वच्छता एवं संतुलित आहार के प्रति जागरूकता कार्यक्रम प्रमुख रूप से शामिल हैं। साथ ही स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य पदार्थों के उपयोग को बढ़ावा देते हुए पोषण व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप यह अभियान न केवल बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करेगा, बल्कि समाज में पोषण के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना को भी सुदृढ़ करेगा। छत्तीसगढ़ में इस पहल के माध्यम से कुपोषण दर में कमी लाने और मातृ-शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। राज्य सरकार ने सभी विभागों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस अभियान को जन-आंदोलन के रूप में सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं, ताकि “सुपोषित छत्तीसगढ़” का सपना साकार हो सके।  

सरकार को है किसानों के हितों की चिंता: कृषि मंत्री रामविचार नेताम

रायपुर छत्तीसगढ़ में रासायनिक उर्वरकों की कालाबाजारी करने वालों पर अब सख्त कार्रवाई तय है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि खाद की जमाखोरी या अधिक मूल्य पर बिक्री करने वालों पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं गड़बड़ी पाए जाने पर सीधे जेल भी भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा कि पश्चिमी एशिया संकट के कारण रासायनिक उर्वरकों की कमी की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार पूरी तरह सजग है। खाद की कमी नहीं होगी। इसके साथ ही किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आपूर्ति और बेहतर होगी, इसलिए किसानों को किसी भी प्रकार से घबराहट या पैनिक होने की आवश्यकता नहीं है। कृषि मंत्री नेताम ने आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित समेति कक्ष में रायपुर और दुर्ग संभाग के अधिकारियों की आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान इस आशय के वक्तव्य दिए।               मंत्री नेताम ने बताया कि राज्य सरकार खरीफ 2026 की तैयारियों को लेकर पूरी तरह सक्रिय है और उर्वरक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। जिलों के संबंधित विभागीय अमले को नियमित एवं आकस्मिक निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आते ही तत्काल कार्रवाई की जा सके।                श्री नेताम ने बैठक में आगामी 5 मई से 20 मई तक पूरे प्रदेश में “विकसित भारत संकल्प अभियान” की तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिकों, विभागीय अधिकारियों और मैदानी अमले की टीम गांव-गांव जाकर किसानों, किसान समूहों और संगठनों से सीधे संवाद करेगी। इस दौरान किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, वैकल्पिक उर्वरकों और आधुनिक खेती के तरीकों की जानकारी दी जाएगी। अभियान के दौरान कृषि के साथ-साथ अन्य विभाग जैसे-मछली पालन, उद्यानिकी, पशुपालन, कृषि विज्ञान केन्द्र के विशेषज्ञ भाग लेंगे, जिसमें विभिन्न विभागीय योजनाओं का प्रचार-प्रसार तथा विभागीय प्रकरण तैयार करने हेतु निर्देशित किया।                मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अभियान को प्राथमिकता और गंभीरता के साथ संचालित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंच सके। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल जागरूकता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मौके पर ही किसानों की समस्याओं का समाधान और योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया भी सुनिश्चित की जाएगी।               बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि पिछले वर्ष डीएपी की आपूर्ति में आई बाधाओं को देखते हुए इस बार एनपीके,  एसएसपी और अन्य वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। सरकार का फोकस केवल उर्वरक उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और आधुनिक बनाने पर है। किसानों की आय बढ़ाने और लागत घटाने के उद्देश्य से दलहन, तिलहन और अन्य वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने की रणनीति पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।              बैठक में फार्मर आई डी के तहत एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीयन हेतु शेष बचे हुए कृषकों का एक सप्ताह के भीतर पंजीयन करने हेतु निर्देश दिए गए ताकि कोई भी किसान पी.एम.किसान योजना से लाभान्वित होने से वंचित न रहे। उन्होंने खरीफ सीजन में किसानों को सुगमतापूर्वक उर्वरक व्यवस्था हेतु दूरस्थ अंचलों में प्राथमिकता के आधार पर उर्वरक का भण्डारण करने हेतु निर्देशित किया।                        मंत्री नेताम ने विभागीय योजनाओं में वर्ष 2025-26 में हुए व्यय की समीक्षा के दौरान विशेष रूप से फसल प्रदर्शन योजना एवं ग्रीष्मकालीन धान के बदले दलहन-तिलहन को बढावा देने हेतु समीक्षा की, जिसमें रायपुर संभाग के अधीन जिलों में और अधिक प्रयास कर ग्रीष्मकालीन धान के रकबे को कम करके दलहन तिलहन एवं मक्का फसल को बढावा देने हेतु निर्देशित किया गया साथ ही धमतरी जिले में विगत् दो वर्षाे में दलहन तिलहन के रकबे में वृद्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की गई तथा अन्य जिलों में भी दलहन एवं तिलहन के रकबे में वृद्धि करने हेतु निर्देशित किया गया।                  मंत्री नेताम ने रायपुर और दुर्ग संभाग के पी.एम.आशा की समीक्षा के दौरान पाया कि धमतरी जिले को छोडकर अन्य जिलों में प्रगति नगण्य है आगामी एक सप्ताह के भीतर मार्कफेड, नाफेड एवं समिति स्तर पर समन्वय करके दलहन तिलहन की खरीदी हेतु और अधिक प्रयास करने पर बल दिया।               मंत्री नेताम ने बैठक में वाटर बॉडी में मखाना एवं सिंघाडा की खेती के लिए उद्यानिकी विभाग को विशेष कार्ययोजना बना कर कृषक एवं कृषक समूहों से आवश्यक चर्चा कर उन्हें प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने मखाना की खेती हेतु जिला धमतरी में किए गए कार्य की सराहना की गई। मखाना की खेती के साथ-साथ मछली पालन के लिए किसानों को जागरूक करने निर्देश दिए।             बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्तमती शहला निगार, कृषि, छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम के संचालक अजय अग्रवाल, मत्स्य पालन विभाग के संचालक एस.एस. नाग, पशुधन विकास विभाग के संचालक चन्द्रकांत वर्मा, उद्यानिकी विभाग के संचालक लोकेश चन्द्राकर, रायपुर के संयुक्त संचालक गयाराम और दुर्ग की संयुक्त संचालकमती गोपिका गबेल सहित जिले एवं राज्य के अधिकारी उपस्थित थे।

हाईकोर्ट ने खारिज किया कर्मचारियों का वेतनवृद्धि दावा, प्रदेश में बड़ा झटका

ग्वालियर एमपी में वेतनवृद्धि पर कर्मचारियों को बड़ा झटका लगा है। निजी सहायता प्राप्त (ग्रांट-इन-एड) स्कूलों के कर्मचारी शिक्षकों को ग्वालियर हाईकोर्ट ने यह झटका दिया है। कोर्ट ने इन कर्मचारियों का वेतनवृद्धि का दावा खारिज कर दिया है। निजी सहायता प्राप्त (ग्रांट-इन-एड) स्कूलों के कर्मचारी शिक्षकों ने बीएड पर दो अतिरिक्त वेतनवृद्धियां देने की मांग की थी जिसे हाईकोर्ट ने साफ तौर पर नकार दिया। इन शिक्षकों ने खुद को सरकारी शिक्षकों के समान बताते हुए वेतनवृद्धि का लाभ मांगा था। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने निजी सहायता प्राप्त (ग्रांट-इन-एड) स्कूलों के कर्मचारी शिक्षकों को बड़ा झटका देते हुए बीएड डिग्री के आधार पर दो अतिरिक्त वेतनवृद्धि (एडवांस इंक्रीमेंट) देने की मांग खारिज कर दी है। रामदास यादव एवं अन्य बनाम राज्य एवं अन्य में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे लाभ केवल शासकीय शिक्षकों के लिए लागू होते हैं। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि उन्होंने स्वयं के खर्च पर बीएड डिग्री हासिल की है और पूर्व सरकारी आदेशों के अनुसार उन्हें दो अतिरिक्त वेतनवृद्धि मिलनी चाहिए। उनका कहना था कि वे भी अनुदान प्राप्त संस्थानों में कार्यरत हैं, इसलिए सरकारी शिक्षकों के समान लाभ मिलना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि भले ही सरकार से अनुदान मिलता हो, लेकिन वे शासकीय कर्मचारी नहीं हालांकि कोर्ट ने उनका दावा मानने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता निजी संस्थानों में कार्यरत हैं, भले ही उन्हें सरकार से अनुदान मिलता हो, लेकिन वे शासकीय कर्मचारी नहीं हैं। इसलिए वे सरकारी शिक्षकों के बराबर अतिरिक्त लाभ का दावा नहीं कर सकते। हाईकोर्ट ने दिया एक और अहम आदेश, 'शौर्य दीदी' की निगरानी में भेजा मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक और मामले में अहम फैसला दिया। हैबियस कॉर्पस याचिका की सुनवाई के दौरान पारिवारिक विवाद सुलझाते हुए हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया। सुशील सिंह चौहान बनाम राज्य एवं अन्य मामले में कोर्ट ने काउंसलिंग के बाद पत्नी को पति के साथ रहने की अनुमति दी और 'शौर्य दीदी' की निगरानी में रखने के निर्देश दिए। मामले में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी लापता है और उसे अवैध रूप से कहीं रखा गया है। सुनवाई के दौरान पुलिस ने महिला को कोर्ट में पेश किया। महिला ने बताया कि पति के बुरे व्यवहार और प्रताडऩा से परेशान होकर वह घर छोड़कर आगरा में रह रही थी। कोर्ट के निर्देश पर काउंसलिंग कराई गई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बन गई। पत्नी ने शर्त रखी कि यदि पति अच्छा व्यवहार करेगा, तो वह उसके साथ रहने को तैयार है। पति ने भी कोर्ट के समक्ष भविष्य में किसी प्रकार की प्रताडऩा न करने का भरोसा दिलाया।

भोपाल में खुलेगा वित्तीय प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भोपाल में वित्तीय प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान (फाइनेंस ट्रेंनिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट) खोले जाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। आज मंत्रि-परिषद की बैठक में एफटीआरआई की स्थापना के संबंध में अपनी स्वीकृति भी प्रदान कर दी है। उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा ने वित्तीय प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान की स्थापना की स्वीकृति लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव और मंत्रि-परिषद का आभार माना है। उप मुख्यमंत्री  देवडा ने कहा कि इसका उद्देश्य राज्य की वित्तीय शासन प्रणाली एवं प्रशासनिक दक्षता को सुदृढ़ करना है। वर्तमान में प्रदेश में 7 संभागीय लेखा प्रशिक्षण शालाएँ संचालित हैं। इनमें प्रशिक्षण का मानकीकरण, आधुनिक डिजिटल दक्षता तथा शोध एवं नवाचार के पर्याप्त समावेश का अभाव है। इनके कार्य को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक एकीकृत, आधुनिक एवं उच्च गुणवत्ता वाली संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता है। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने बताया कि संस्थान को प्रशिक्षण, शोध, नीति समर्थन एवं नवाचार के राष्ट्रीय स्तर के उत्कृष्टता केन्द्र सेन्टर फॉर एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जायेगा। इसके लिये राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंध संस्थान (NIFM), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नाबार्ड (NABARD) आदि प्रतिष्ठित संस्थानों से समन्वय किया जाएगा। विषय-विशेषज्ञों को अतिथि व्याख्यान हेतु आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभी संस्‍थान के लिए कुल 13 नियमित पदों की संरचना प्रस्तावित की गई है। आवश्यकतानुसार पदों की पूर्ति स्थानांतरण एवं प्रतिनियुक्ति के माध्यम से की जाएगी। प्रस्‍ताव से तीन वर्षों में लगभग रुपये 26 करोड़ का व्‍यय अनुमानित है। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने कहा कि संस्थान के संचालन के लिए आरसीवीपी नरोन्हा अकादमी की उपलब्ध अधोसंरचना का उपयोग किया जाएगा तथा आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण कक्ष एवं डिजिटल संसाधनों की व्यवस्था की जाएगी। संस्थान की स्थापना से वित्तीय प्रबंधन, लेखा प्रणाली, डिजिटल वित्तीय प्रशासन तथा नीति निर्माण की क्षमता में व्यापक सुधार होगा, जिससे प्रदेश में सुशासन और वित्तीय अनुशासन को नई मजबूती मिलेगी।