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सुभाषिनी बालासुब्रमण्यन की मौत से 2 दिन पहले की आखिरी पोस्ट, पति संग झगड़े की खबरें

मुंबई  पॉपुलर तमिल टीवी एक्ट्रेस सुभाषिनी बालासुब्रमण्यन अब इस दुनिया में नहीं हैं. 36 साल की टैलेंटेड एक्ट्रेस ने चेन्नई स्थित अपने घर में आत्महत्या कर मौत को गले लगा लिया. सुभाषिनी अपने फ्लैट में मृत पाई गईं. उनकी अचानक हुई मौत ने पूरी इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया है. उनकी मौत से परिवार और फैंस को तगड़ा झटका लगा है।  सुभाषिनी की आखिरी पोस्ट वायरल हर किसी के दिल में यही सवाल है कि सुभाषिनी ने क्यों मौत को गले लगाया. रिपोर्ट्स में ये भी दावे किए जा रहे हैं कि एक्ट्रेस डिप्रेशन में थीं. पति संग झगड़ा होने के बाद वो तनाव में थीं. ऐसे में एक्ट्रेस की आखिरी सोशल मीडिया पोस्ट देखने के बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है, क्योंकि अपनी आखिरी पोस्ट में सुभाषिनी काफी खुश नजर आ रही हैं. उन्हें देखकर इस बात का अंदाजा भी नहीं होता कि वो डिप्रेशन में थीं।  निधन से सिर्फ दो दिन पहले 4 अप्रैल को ही सुभाषिनी ने अपने इंस्टा हैंडल पर अपना एक फन वीडियो शेयर किया था. वो जंगल में हंसते-चहकते हुए वॉक करती हुई दिखाई दी थीं. वो काफी खुश लग रही थीं. ऐसे में फैंस इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि वो किसी दर्द में थीं और उन्होंने अपनी जान दे दी है।  फैंस का टूटा दिल सुभाषिनी का आखिरी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा हैं. फैंस उन्हें देखकर इमोशनल हो रहे हैं. एक यूजर ने लिखा- जिंदगी बहुत ही अनप्रिडिक्टेबल है. वो कितनी खुश नजर आ रही थीं. कई यूजर्स कमेंट सेक्शन में दुख जता रहे हैं तो कई शॉक्ड हैं।  श्रीलंका छोड़ चेन्नई में बसी थीं सुभाषिनी की बात करें तो वो सन टीवी के पॉपुलर सीरियल 'कायल' में अपने रोल के लिए जानी जाती थीं. 6 अप्रैल 2026 को वो चेन्नई में अपने घर में मृत पाई गईं. पुलिस की शुरुआती रिपोर्ट्स में सुभाषिनी की मौत का कारण आत्महत्या बताया गया. बताया जा रहा है कि पति संग वीडियो कॉल पर उनकी बहस हुई थी, जिससे वो परेशान थीं. हालांकि, एक्ट्रेस की मौत के पीछे के सही कारणों की पुलिस अभी भी जांच कर रही है।   सुभाषिनी श्रीलंका की रहने वाली थीं. मगर सालों पहले ही वो श्रीलंका से आकर चेन्नई में बस गई थीं. वो तमिल इंडस्ट्री में अपने कदम जमा रही थीं. उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई थी. मगर अफसोस बेहद कम उम्र में वो इस दुनिया से हमेशा के लिए रुख्सत हो गईं। 

ईरान में भारतीयों के लिए अलर्ट: भारत सरकार की चेतावनी—48 घंटे बेहद अहम, हेल्पलाइन नंबर जारी

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की ईरान पर हमले की डेडलाइन खत्म होने का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, दुनिया में इसको लेकर आशंकाएं बढ़ गई हैं। इसी बीच भारत ने ईरान में रहने वाले भारतीय नागरिकों एडवाइजरी जारी की है। एडवायजरी में कहा गया है कि जो भारतीय नागरिक अभी भी ईरान में हैं, उन्हें अगले 48 घंटों तक वहीं रहना चाहिए जहां वे हैं। उन्हें सभी बिजली और सैन्य ठिकानों के दूर रहना चाहिए। बहुमंजिला इमारतों की ऊपरी मंजिलों पर जाने से बचना चाहिए, घर के अंदर ही रहना ही चाहिए और हाइवे पर किसी भी तरह की आवाजाही के लिए दूतावास के साथ सख्ती से तालमेल बिठाना चाहिए। ए़डवायजरी दूतावास से नियमित संपर्क बनाए रखें सरकार की ओर से कहा गया है कि जो लोग दूतावास द्वारा बुक किए गए होटलों में ठहरे हैं, उन्हें वहीं अंदर रहना चाहिए और मौके पर मौजूद दूतावास की टीमों के साथ नियमित संपर्क रखना चाहिए। सभी से अनुरोध है कि वे आधिकारिक अपडेट्स पर बारीकी से नजर रखें। दूतावास ने जारी किए आपातकालीन नंबर मोबाइल नंबर: +989128109115; +989128109102; ईमेल: cons.tehran@mea.gov.in +989128109109; +989932179359

अवैध निर्माण पर सख्ती: पोटका में प्रशासन का एक्शन, कई ठिकानों पर चला बुलडोजर

पूर्वी सिंहभूम. झारखंड के पूर्वी सिंहभूम के पोटका में अंचलाधिकारी निकिता बाला के निर्देश पर मंगलवार को पोटका थाना क्षेत्र के तुड़ी मौजा में किए गए अतिक्रमण पर प्रशासन का बुलडोजर चलाया गया. मिली जानकारी अनुसार तुड़ी मौजा में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर ठेकेदार रंजीत मिश्रा, जमशेदपुर रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड और मनोज कुमार सिंह द्वारा अवैध निर्माण कर कार्य किया जा रहा था जिसकी सूचना मिलने के बाद पोटका की अंचलाधिकारी निकिता बाला द्वारा जे पी एल ई के तहत केस दायर कर समय सीमा के तहत सभी को अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था.  भारी सुरक्षा में कार्रवाई समय सीमा बीत जाने के वावजूद किसी के द्वारा अतिक्रमण नही हटाया गया. जिसके बाद जिला प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने के सीआई हेमंत कुमार और राजस्व कर्मचारी शांति राम षाड़ंगी को दंडाधिकारी के रूप में तैनात कर भारी संख्या में सुरक्षा बलों की नियुक्ति कर रंजीत मिश्रा, मनोज कुमार सिंह एवं जमशेदपुर रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा किए गए अतिक्रमण को पूरी तरह से हटा दिया गया. अभियान जारी रहेगा पोटका की अंचलाधिकारी निकिता बाला ने कहा कि क्षेत्र जहां भी अतिक्रमण की सूचना मिलती है वहां से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने बताया कि सभी अतिक्रमणकारियों पर जे पी एल ई के तहत मामला दर्ज कर समय दिया गया था. समय सीमा समाप्त होने के बाद जिला प्रशासन के निर्देश पर अतिक्रमण हटाने की कारवाई की गई है. 

नई जिम्मेदारी की शुरुआत: राज्य सूचना आयुक्तों ने ली शपथ, पारदर्शिता को मिलेगा बढ़ावा

भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग के नवनियुक्त राज्य सूचना आयुक्तों को मंगलवार को शपथ दिलाई। समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मुख्य सचिव अनुराग जैन मंचासीन थे। शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन लोकभवन के सांदीपनि सभागार में किया गया था। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल भी मौजूद थे। राज्यपाल  पटेल ने  आलोक नागर और  राजेश भट्ट को राज्य सूचना आयुक्त के पद की शपथ दिलाई। उन्होंने शपथ ग्रहण के बाद राज्य सूचना आयुक्तों को पुष्प-गुच्छ भेंट कर बधाई एवं शुभकामनाएं दी। शपथ विधि का संचालन अपर मुख्य सचिव  संजय शुक्ल ने किया। शपथ ग्रहण समारोह में मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष  अवधेश प्रताप सिंह, मुख्य सूचना आयुक्त  विजय यादव, सूचना आयुक्त  ओंकार नाथ, डॉ. वंदना गांधी, डॉ. उमाशंकर पचौरी, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय  नीरज मंडलोई, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय  आलोक सिंह, पुलिस आयुक्त भोपाल  संजय कुमार, जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, सूचना आयुक्तों के परिजन, लोकभवन और सूचना आयोग के अधिकारी मौजूद रहे।    

स्टूडेंट्स के लिए अहम खबर: पंजाब में छुट्टी घोषित, पंजाब यूनिवर्सिटी की सभी परीक्षाएं टलीं

चंडीगढ़. पंजाब यूनिवर्सिटी (पी.यू.) ने 8 अप्रैल को होने वाली सभी परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। यह फैसला श्री गुरु नाभा दास जी के जन्मदिन पर पंजाब सरकार द्वारा घोषित की गई जनतक छुट्टी के कारण लिया गया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन के अनुसार 8 अप्रैल को होने वाली सभी परीक्षाओं अब 16 अप्रैल को होंगी। विद्यार्थियों को सलाह की गई है कि वह नई तारीख के अनुसार अपनी तैयारियों को पक्का करें और किसी भी अपडेट के लिए यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल वेबसाइट पर नजर रखें।     8 अप्रैल को जनतक छुट्टी का ऐलान दरअसल श्री गुरु नाभा दास जी का जन्मदिवस 8 अप्रैल को मनाया जा रहा है। संगत की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस दिन पंजाब में सरकारी छुट्टी घोषित की गई है। इस दौरान सभी सरकारी और निजी स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे। इसके साथ ही इस दिन सरकारी संस्थानों में भी छुट्टी रहेगी। 

अल फलाह यूनिवर्सिटी पर शिकंजा: ED ने चेयरमैन की करोड़ों की संपत्ति जब्त की, जांच तेज

नई दिल्ली  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अल फलाह ग्रुप के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उनकी 39.45 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क कर ली है। इस संपत्ति में दिल्ली के जामिया नगर का एक घर, फरीदाबाद में खेती की जमीन और कई बैंक खाते शामिल हैं। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी यह जांच छात्रों के साथ हुई धोखाधड़ी के मामले में की जा रही है। 61 वर्षीय सिद्दीकी फिलहाल जेल में हैं। उनकी यूनिवर्सिटी पहले भी सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर रही है। इससे पहले ईडी इस मामले में यूनिवर्सिटी की 140 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त कर चुकी है। सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही ईडी ने अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी के दिल्ली के जामिया नगर में एक घर, फरीदाबाद में खेती की जमीन और कई बैंक खातों में जमा 39 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की है। ईडी की ओर से पीएमएलए कानून के तहत इन संपत्तियों को जब्त करने के लिए एक अस्थायी आदेश जारी किया गया है। जब्त संपत्तियों में घर, जमीन और रकम शामिल सूत्रों के अनुसार, ईडी की ओर से जब्त की गई संपत्तियों में दिल्ली के जामिया नगर का एक घर, फरीदाबाद के धौज में खेती की जमीन और बैंक खातों में जमा पैसे शामिल हैं। इन संपत्तियों की कुल कीमत 39.45 करोड़ रुपये है। बता दें कि 61 वर्षीय जवाद अहमद सिद्दीकी अभी जेल में हैं। जवाद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के उस मामले में हुई है। यह मामला छात्रों के साथ धोखाधड़ी से जुड़ा है। लाल किला ब्लास्ट से चर्चा में अल फलाह यूनिवर्सिटी फरीदाबाद में स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी जांच एजेंसियों की नजर में तब आई जब वे 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किला क्षेत्र में एक बम धमाका हुआ था। इस धमाके में 15 लोगों की जान गई थी। एजेंसियों की जांच में एक ह्वाइट कॉलर आतंकी मॉड्यूल का पता चला था। इस मामले में सिद्दीकी को पिछले साल ईडी ने गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने पहले ही यूनिवर्सिटी की लगभग 140 करोड़ रुपये की जमीन और इमारत को जब्त कर लिया है। क्या आरोप? सिद्दीकी के अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से चलाए जा रहे संस्थानों पर छात्रों से धोखाधड़ी के आरोप थे। एजेंसी का आरोप है कि विश्वविद्यालय ने 2018 से 2025 के बीच 415.10 करोड़ रुपये जुटाए और छात्रों के पैसे का निजी इस्तेमाल किया। 24 मार्च को ईडी ने सिद्दीकी को एक अन्य धनशोधन मामले में गिरफ्तार किया जिसमें जांच से पता चला कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए गलत तरीके से जमीन हड़पी थी। सिद्दीकी ने कुछ लोगों के साथ मिलकर इस जालसाजी को अंजाम दिया।

सीटें, कई दावेदार: झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर बढ़ी हलचल, गठबंधन गणित पर टिकी नजरें

रांची  झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज होने लगी है। राज्य से राज्यसभा की दो सीटें खाली होने जा रही हैं, जिन पर सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष दोनों की नजरें टिकी हुई हैं। इन सीटों को लेकर सत्ता पक्ष में भी अंदरूनी खींचतान के संकेत मिल रहे हैं, जबकि भाजपा सीमित संख्या के बावजूद मुकाबले को रोचक बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) दोनों सीटों पर अपनी दावेदारी मजबूत मान रहा है। पार्टी का मानना है कि राज्य की राजनीति में उसकी प्रमुख भूमिका के मद्देनजर उसे अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। हालांकि, यह राह इतनी आसान नहीं है। झामुमो को इन दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस के सहयोग की आवश्यकता होगी। गठबंधन की मजबूती और आपसी तालमेल इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। कांग्रेस के लिए भी यह चुनाव कम अहम नहीं है। असम विधानसभा चुनाव में तालमेल की कमी के कारण पार्टी पहले से ही असहज स्थिति में है। ऐसे में झारखंड में राज्यसभा सीट पर अपनी दावेदारी छोड़ना उसके लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदायक साबित हो सकता है। पार्टी के भीतर यह संदेश देने की कोशिश होगी कि वह गठबंधन में बराबरी की हिस्सेदार है और अपने राजनीतिक हितों से समझौता नहीं करेगी। भाजपा की मौजूदगी से रोमांचक होगा चुनाव, रेस में सीता सोरेन विपक्षी भाजपा भी इस चुनाव को हल्के में लेने के मूड में नहीं दिख रही है। भले ही पार्टी के पास अपने दम पर जीत के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है, लेकिन सहयोगी दलों आजसू पार्टी, जदयू और लोजपा के साथ मिलाकर उसके पास 24 वोट हैं। ऐसे में यदि भाजपा चार अतिरिक्त वोटों का इंतजाम कर लेती है तो वह अपने प्रत्याशी को जीत दिलाने की स्थिति में आ सकती है। यही कारण है कि भाजपा संभावित क्रॉस वोटिंग और रणनीतिक समर्थन की संभावनाओं पर नजर बनाए हुए है। पार्टी के संभावित उम्मीदवारों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। भाजपा की ओर से सीता सोरेन का नाम चर्चा में है। यदि उन्हें मैदान में उतारा जाता है तो चुनाव दिलचस्प हो सकता है। आंकड़ा गठबंधन के पक्ष में संख्या बल के लिहाज से देखें तो राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए एक उम्मीदवार को निर्धारित 28 वोटों की आवश्यकता होगी। सत्तारूढ़ गठबंधन के घटक दलों झामुमो, कांग्रेस, राजद, भाकपा माले को मिलाकर 56 विधायकों का आंकड़ा है, जो दो सीटों पर जीत के लिए पर्याप्त है, लेकिन इसके लिए गठबंधन के घटक दलों में आपसी तालमेल और विश्वास आवश्यक है।  

हिंसा की आग में मणिपुर: बिष्णुपुर धमाके में दो मासूमों की जान गई, कई जिलों में कर्फ्यू लागू

देश   मणिपुर के बिष्णुपुर में बम हमले के बाद हुई हिंसा के चलते मणिपुर की घाटी के चार जिलों में कर्फ्यू लगा दिया है। इस हमले में दो बच्चों की मौत हो गई थी। इससे क्रुद्ध स्थानीय लोगों के हिंसक विरोध-प्रदर्शन में तेल टैंकर जलाने से लेकर अस्थायी पुलिस चौकी तक नष्ट की गई है। मुख्यमंत्री ने इस हमले को ''बर्बर कृत्य'' करार दिया और लोगों को आश्वासन दिया कि अपराध के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाएगी और कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। मणिपुर सरकार ने दो बच्चों की जान लेने वाले बम हमलों की जांच NIA को सौंपने का फैसला किया है। बम हमले में दो बच्चों की मौत पुलिस के अनुसार यह घटना देर रात एक बजे हुई जब संदिग्ध उग्रवादियों ने मोइरांग ट्रोंग्लाओबी क्षेत्र में एक घर पर बम फेंका। इस हमले में 5 वर्षीय लड़के और 6 महीने की दुधमुंही बच्ची की मौत हो गई। दोनों बच्चे और उनकी मां अपने बेडरूम में सो रहे थे जब घर में बम विस्फोट किया गया। स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया पुलिस अधिकारी ने बताया कि स्थानीय लोगों ने सुबह विरोध प्रदर्शन किया और क्षेत्र में एक पेट्रोल पंप के पास दो तेल टैंकर और एक ट्रक को आग लगा दी। उन्होंने मोइरांग पुलिस स्टेशन के सामने टायर जलाए और एक अस्थायी पुलिस चौकी को नष्ट कर दिया। सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। विस्फोटक उपकरण भी बरामद ट्रोंग्लाओबी के पास एक विस्फोटक उपकरण भी बरामद किया गया। मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद ¨सह ने कहा कि यह मानवता पर सीधा हमला है और मणिपुर में अर्जित शांति को बाधित करने का प्रयास है। ऐसे उग्रवादी कृत्यों को किसी भी परिस्थिति में सहन नहीं किया जाएगा। मणिपुर सरकार हर नागरिक की सुरक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित है और यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी कि शांति-व्यवस्था और स्थिरता को कोई खतरा नहीं पहुंचे। वहीं, स्थानीय एनपीपी विधायक शांति सिंह ने ''ट्रोंग्लाओबी में कुकी नार्को-उग्रवादियों पर इस क्रूर हमले का आरोप लगाया है।  

छत्तीसगढ़ सरकार का कड़ा रुख: RTE के तहत प्रवेश नहीं देने पर स्कूलों पर गिरेगी गाज

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि RTE के तहत बच्चों को प्रवेश नहीं देने वाले निजी स्कूलों की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। बता दें कि प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने प्रतिपूर्ति राशि नहीं बढ़ाने पर RTE के तहत बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश नहीं देने का ऐलान किया था, जिसके बाद सरकार ने कड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के गैर-अनुदान प्राप्त निजी विद्यालयों में RTE के तहत प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं। इन सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), दुर्बल वर्ग और वंचित समूह के बच्चों को उनके निवास क्षेत्र के भीतर प्रवेश दिया जाता है।सरकार ने यह भी साफ किया है कि छत्तीसगढ़ में दी जाने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति राशि कई राज्यों के मुकाबले बेहतर या उनके बराबर है। कक्षा 1 से 5 तक: ₹7,000 प्रतिवर्ष, कक्षा 6 से 8 तक: ₹11,400 प्रतिवर्ष दिया जा रहा है। वहीं, दूसरे राज्यों में मध्य प्रदेश में ₹4,419, बिहार में ₹6,569, झारखंड में ₹5,100, उत्तर प्रदेश में ₹5,400 दिया जा रहा है। हालांकि ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में यह राशि अधिक बताई गई है, लेकिन समग्र रूप से छत्तीसगढ़ की प्रतिपूर्ति को संतुलित और उचित बताया गया है। वर्तमान में प्रदेश के 6,862 निजी स्कूलों में RTE के माध्यम से लगभग 3,63,515 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। वहीं इस वर्ष कक्षा पहली में करीब 22,000 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है। राज्य सरकार गरीब बच्चों की शिक्षा के प्रति संवेदनशील छत्तीसगढ़ में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009, अप्रैल 2010 से प्रभावी है। इसके अंतर्गत प्रदेश के गैर-अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं। इन सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर, दुर्बल वर्ग और वंचित समूह के बच्चों को उनके निवास क्षेत्र के भीतर प्रवेश दिलाया जाता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार गरीब बच्चों की शिक्षा के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और सभी के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। प्रतिपूर्ति राशि का पारदर्शी भुगतान शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत निजी स्कूलों को नर्सरी या कक्षा 1 में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना अनिवार्य है। इसके बदले राज्य सरकार प्रति बच्चा व्यय के आधार पर स्कूलों को प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान करती है। यह राशि सरकारी स्कूल में प्रति बच्चे पर होने वाले खर्च या निजी स्कूल की वास्तविक फीस (दोनों में से जो भी कम हो) के आधार पर निर्धारित की जाती है। ​अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर प्रतिपूर्ति छत्तीसगढ़ में शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि कई पड़ोसी राज्यों की तुलना में बेहतर या उनके समकक्ष है। प्रदेश में वर्ष 2011-12 से ही कक्षा 1 से 5 तक 7000 रूपए और कक्षा 6 से 8 तक 11 हजार 400 रूपए वार्षिक प्रतिपूर्ति राशि निर्धारित है। तुलनात्मक रूप से देखें तो मध्य प्रदेश में 4,419 रूपए बिहार में 6,569 रूपए, झारखंड में 5,100 रूपए और उत्तर प्रदेश में 5,400 रूपए वार्षिक दिए जाते हैं। यद्यपि ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में यह राशि अधिक है, किंतु समग्र मूल्यांकन में छत्तीसगढ़ की प्रतिपूर्ति राशि संतुलित और उचित है। ​साढ़े तीन लाख से अधिक बच्चे ले रहे लाभ वर्तमान में राज्य के 6,862 निजी विद्यालयों में आर.टी.ई. के माध्यम से लगभग 3,63,515 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इस वर्ष भी कक्षा पहली की लगभग 22,000 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है। चूंकि सभी निजी विद्यालयों को आर.टी.ई. अधिनियम के प्रावधानों के तहत ही मान्यता दी गई है, अतः यह उनकी वैधानिक जिम्मेदारी है कि वे निर्धारित सीटों पर प्रवेश सुनिश्चित करें। ​नियमों के उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई यदि कोई निजी विद्यालय आरटीई के तहत प्रवेश देने से इंकार करता है या प्रक्रिया में व्यवधान डालता है तो राज्य शासन उनके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा। इसमें विद्यालय की मान्यता समाप्त करने तक का प्रावधान शामिल है। शिक्षा विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस संबंध में फैलाई जा रही किसी भी भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक तथ्यों पर ही विश्वास करें।

सीएम मोहन यादव का एलान: प्रदेश के मजरे, टोले और सांदीपनि स्कूल जल्द सड़कों से जुड़ेंगे

भोपाल  जल्द ही प्रदेश के मजरे, टोले ओर सांदीपनि स्कूल सड़कों से जुड़ेंगे। इन्हें आपस में जोड़ने के लिए 7 हजार 135 सडकें बनाई जाएंगी। यह काम सुगम संपर्कता परियोजना के तहत किए जाएंगे। सड़क निर्माण कार्यों में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं कार्यों की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए ड्रोन का उपयोग किया जाएगा। सिपरी सॉफ्टवेयर का उपयोग अब सिर्फ डीपीआर तैयार करने के लिए ही नहीं किया जाएगा, बल्कि इससे सड़क के साथ पुल-पुलियों की स्थिति की निगरानी करने में भी मदद ली जाएगी। सीएम ने की समीक्षा एमपी के सीएम डॉ. मोहन यादव ने उक्त परियोजना की समीक्षा बैठक आयोजित की। इस बैठक में संबंधित अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिए गए कि गांव-गांव के विकास के लिए सड़कों की इस परियोजना का काम तेजी से किया जाए। जहां आबादी 100 से पार, वहीं बिछेगी सड़क इस परियोजना की खासियत ये है कि इसके तहत 100 से अधिक आबादी वाले मजरों-टोलों को सड़क सुविधा से जोड़ा जाएगा। ये सड़कें वीबी-जीराम-जी योजना के अंतर्गत बनावाई जाएंगी। 7000 से ज्यादा सड़कों का नेटवर्क तैयार करने वाले इस काम पर 1000 करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं। सुगम संपर्कता परियोजना के तहत शुरू किए जाने वाले इस काम के लिए प्रदेश की प्रत्येक जनपद पंचायत तीन करोड़ तक की स्वीकृति दे सकेंगी। यह भी होगा -पूर्व में बनी सड़कों की रिम्स पोर्टल के माध्यम से जियो-इंवेंट्री की जा रही है। इससे नई सड़कों के चयन में दोहराव की स्थिति नहीं बनेगी। जियो इंवेंट्री में राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, पीएमजीएसवाय, मुख्य जिला सड़क और संपर्कता एप से चयनित सड़कें शामिल हैं।  -निर्धारित लक्ष्य के अनुसार 33 हजार 655 सड़कों में से 17 हजार 437 सड़कों की जियो इंवेंट्री का कार्य पूरा कर लिया है। इसके साथ ही 9 जिलों में 80 प्रतिशत से अधिक सर्वे कार्य पूर्ण कर लिया गया है। रतलाम, जबलपुर, आगर-मालवा, मंदसौर और पन्ना उक्त काम में आगे है। ऐसे समझें पूरा प्लान कुल सड़कें- 7,135 बजट- करीब 1000 करोड़ रुपए कवरेज- 100+ आबादी वाले सभी मजरे-टोले योजना- वीबी-जीराम-जी योजना के तहत होना है निर्माण तकनीक- ड्रोन से मॉनिटरिंग, सिपरी सॉफ्टवेयर से निगरानी मंजूरी का अधिकार- हर जनपद पंचायत को 3 करोड़ रुपए तक की स्वीकृति प्रगति रिपोर्ट कुल चिह्नित सड़कें- 33,655 जियो इंवेंट्री पूरी- 17,437 80% से ज्यादा सर्वे वाले जिले रतलाम जबलपुर आगर-मालवा मंदसौर पन्ना क्या बदलेगा? -अब हर गांव अपने नजदीकी शहरों से जुड़ेगा -बच्चों के लिए पक्की सड़क बनीं तो स्कूल जाना आसान होगा -मरीजों को समय पर अस्पताल तक पहुंचना आसाना होगा -किसानों को मंडी तक बेहतर कनेक्टिविटी -बरसात में कटने और कीचड़ में बदलने वाली सड़कें अब पक्की होंगी