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KKR बनाम LSG पिच रिपोर्ट और हेड-टू-हेड आंकड़े, जानें आज के मैच की संभावित प्लेइंग इलेवन

कोलकाता आईपीएल के 19वें सीजन का 15वां मुकाबला कोलकाता नाईट राइडर्स और लखनऊ सुपर जायंट्स (Kolkata Knight Riders vs Lucknow Super Giants) के बीच कोलकाता के बहुचर्चित ईडन गार्डन्स क्रिकेट स्टेडियम (Eden Gardens Cricket Stadium Kolkata) में 9 अप्रैल 2026 दिन गुरूवार को खेला जाएगा। इस मुकाबले में कोलकाता नाईट राइडर्स की टीम अपने पहले तीन में से दो मुकाबले हारकर (एक मैच बारिश की वजह से बेनतीजा) उतरने वाली है, वहीं लखनऊ सुपर जायंट्स की टीम अपने पहले दो में से एक मुकाबला हारकर और एक मुकाबला जीतकर यहां पहुंची है। इस मुकाबले में कोलकाता की कप्तानी जहां एक बार फिर आजिंक्य (Ajinkya Rahane) करेंगे। वहीं लखनऊ की कप्तानी ऋषभ पंत (Rishabh Pant) करते नजर आएंगे। आईपीएल 2026 में आज का मैच कोलकाता नाईट राइडर्स और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच होने जा रहा है। जहां कोलकाता की टीम ने अब तक इस सीजन में खेले अपने शुरुआती तीन में से दो मुकाबले हारे हैं और उनका एक मुकाबला बारिश की वजह से बेनतीजा रहा है। वहीं लखनऊ सुपर जायंट्स की टीम ने अब तक आईपीएल 2026 में अपने पहले दो मुकाबलों में से एक में जीत दर्ज की है, जबकि एक मैच में उसे हार का सामना करना पड़ा है। ऐसी स्थिति में कोलकाता नाईट राइडर्स इस मैच को जीतकर चाहेगी कि इस सीजन में वह पहली जीत दर्ज करके अंक तालिका में थोड़ा आगे बढ़े। वहीं लखनऊ की टीम चाहेगी कि पिछले मैच की तरह ही इस मैच में भी वह अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखे। कोलकाता नाईट राइडर्स बनाम लखनऊ सुपर जायंट्स आईपीएल 2026 में आज के मैच की पिच रिपोर्ट आज दोनों टीमों के बीच होने वाला मुकाबला कोलकाता के बहुचर्चित ईडन गार्डन्स क्रिकेट स्टेडियम में होने जा रहा है। ईडन गार्डन्स क्रिकेट स्टेडियम पर टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी करना पसंद करती है। इस स्टेडियम पर टी20 में पहली इनिंग का औसत स्कोर 163 रन रहा है। ईडन गार्डन स्टेडियम में काली मिट्‌टी की पिच बनाई गई है। यह पिच बल्लेबाजों को काफी रास आती है। हालांकि, खेल की शुरुआत में तेज गेंदबाजों को यहां थोड़ी मदद मिलती है। इसके बाद पिच पर स्पिनर्स हावी होने लगते हैं। अगर एक बार बल्लेबाज की निगाह यहां जम गई तो वह बड़ी आसानी से लंबे-लंबे शॉट्स लगा सकते हैं। कोलकाता नाईट राइडर्स बनाम लखनऊ सुपर जायंट्स हेड-टू-हेड के आंकड़े कोलकाता नाईट राइडर्स और लखनऊ सुपर जायंट्स की टीमें अब तक आईपीएल इतिहास में 6 बार आमने-सामने आ चुकी हैं। दोनों टीमों के बीच हुए इन मुकाबलों में 4 बार बाजी लखनऊ की टीम ने मारी है। वहीं कोलकाता नाईट राइडर्स की टीम ने 6 में से सिर्फ 2 मैच अपने नाम किये हैं। IPL 2025 में इन दोनों टीमों के बीच सिर्फ एक मुकाबला हुआ था। जिसमें LSG ने केकेआर को 4 रन हराकर मैच अपने नाम किया था। वहीं IPL 2024 में दोनों टीमों के बीच दो मुकाबले खेले गए थे और दोनों मैच KKR ने जीते थे। आज के मुकाबले में कोलकाता और लखनऊ के किन खिलाड़ियों पर होंगी निगाहें? आईपीएल 2026 में जब आज तीन बार की चैंपियन कोलकाता नाईट राइडर्स का सामना लखनऊ सुपर जायंट्स से होगा तो पिच रिपोर्ट को देखते हुए कई ऐसे खिलाड़ी होंगे जो अकेले दम पर इस टी20 मैच की दिशा और दशा तय कर सकते हैं। कोलकाता को अपने कप्तान आजिंक्य रहाणे से एक अदद ओपनिंग पारी की उम्मीद होगी। इसके अलावा उप-कप्तान रिंकू सिंह, फिन एलेन, कैमरन ग्रीन, सुनील नरेन से भी अच्छी बल्लेबाजी की उम्मीद होगी। गेंदबाजी में बात करें तो केकेआर को सुनील नरेन, वैभव अरोड़ा, ब्लेसिंग मुजरबानी से उम्मीद रहेगी। वहीं दूसरी तरफ लखनऊ की टीम को कप्तान ऋषभ पंत, एडेन मार्करम, निकोलस पूरन से अच्छी बल्लेबाजी की उम्मीद होगी। जबकि गेंदबाजी में मोहम्मद शमी अच्छी बॉलिंग कर रहे हैं। उनके अलावा आवेश खान, मयंक यादव, दिग्वेश राठी और मोहसिन खान से अच्छी गेंदबाजी की उम्मीद होगी। कोलकाता नाइट राइडर्स और लखनऊ सुपर जायंट्स की आईपीएल 2026 में टीमें कोलकाता नाइट राइडर्स की आईपीएल 2026 की टीम (Kolkata Knight Riders Full Squads)- अजिंक्य रहाणे (कप्तान), रिंकू सिंह (उपकप्तान), फिन एलेन, तेजस्वी दहिया, मनीष पांडे, रोवमैन पावेल, अंगकृष रघुवंशी, रमनदीप सिंह, सार्थक रंजन, टिम सीफर्ट, राहुल त्रिपाठी, दक्ष कामरा, कैमरन ग्रीन, सुनील नरेन, नवदीप सैनी, प्रशांत सोलंकी, उमरान मलिक, रचिन रविंद्र, वरुण चक्रवर्ती, अनुकूल रॉय, वैभव अरोड़ा, सौरभ दुबे, कार्तिक त्यागी और ब्लेसिंग मुजरबानी। लखनऊ सुपर जायंट्स की आईपीएल 2026 की टीम (Lucknow Super Giants Full Squads)- ऋषभ पंत (कप्तान), आयुष बडोनी, मैथ्यू ब्रीट्ज़के, एडेन मार्करम, निकोलस पूरन, अर्शिन कुलकर्णी, मिचेल मार्श, शाहबाज़ अहमद, आकाश महाराज सिंह, अवेश खान, मोहम्मद शमी, प्रिंस यादव, दिग्वेश सिंह राठी, अर्जुन सचिन तेंदुलकर, मयंक प्रभु यादव, वानिंदु हसरंगा, एनरिक नोर्किया, जोश इंग्लिस, अब्दुल समद, हिम्मत सिंह, नमन तिवारी, अक्षत रघुवंशी, मोहसिन खान, मणिमारन सिद्धार्थ, मुकुल चौधरी।

केंद्र सरकार की उर्वरक सब्सिडी पहल: अन्नदाताओं को मिलेगी 41 हजार करोड़ की मदद

अन्नदाताओं को उरर्वकों पर सब्सिडी के लिए केंद्र सरकार ने दी 41 हजार करोड़ से अधिक की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी का माना आभार भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के हित में केंद्र सरकार द्वारा लिए गए फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केन्द्रीय मंत्रीमंडल ने फॉस्फेट एवं पोटेशियम उर्वरकों पर न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी (NBS) को मंजूरी दी है जो अन्नदाताओं के हित में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय निर्णय है। खरीब सीजन- 2026 में इससे किसान प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन-2026 के लिए फॉस्फेट एवं पोटेशियम उर्वरकों पर पोषक तत्व आधारित सब्सिडी के लिए 41 हजार 533.81 करोड़ की बजटीय व्यवस्था को स्वीकृति प्रदान की है। यह एक महत्वपूर्ण निर्णय है। गत वर्ष स्वीकृत राशि से यह 4,317 करोड़ रुपए अधिक है। वैश्विक चुनौतियों और अंतर्राष्ट्रीय कीमतों के रुझानों के बावजूद केंद्र सरकार ने किसानों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह सुनिश्चित किया है कि उर्वरक रियायती, किफायती एवं उचित दरों पर उपलब्ध हों और उन पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। मध्यप्रदेश में किसान-कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र सरकार का यह निर्णय कृषि लागत को संतुलित कर किसानों की आय और उत्पादन क्षमता को सुदृढ़ करेगा। मध्यप्रदेश में वर्ष 2026 कृषि और कृषक कल्याण वर्ष है। इस नाते ऐसे निर्णय मध्यप्रदेश के अन्नदाताओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी हैं। मध्यप्रदेश सरकार किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। किसानों को नई तकनीक से अवगत करवाने के लिए उन्नत कृषि महोत्सव भी आयोजित किए जा रहे हैं। कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों को शिक्षित जागरूक बनाने और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लाभ प्रदान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान हितैषी इस पहल के लिए प्रधानमंत्री मोदी एवं केंद्रीय मंत्रीमंडल का हार्दिक आभार व्यक्त किया है।  

बालाघाट के 100 गांवों में बिजली, स्कूल और अन्य सुविधाओं की मिलेगी सौगात, बदलेगा माहौल

बालाघाट  मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी बाहुल्य वनांचल क्षेत्र के सैकड़ों गांव नक्सलवाद की चपेट में बीते 35 सालों से भी अधिक समय से न केवल डर के साये में जीवन बिताने को मजबूर रहे, बल्कि इस लम्बे अरसे के दौरान विकास की मुख्य धारा से कोसों दूर रह गए. लेकिन नक्सलवाद के खात्मे के साथ ही यहां के लोगों का जीवन भयमुक्त और खुशहाल नजर आने लगा है. अब यहां विकास की बयार नजर आने लगी है. यह कहना गलत नहीं होगी कि कभी नक्सलवाद का दंष झेलने वाले गांवों में अब विकास का पहिया घूमने लगा है।  100 गांवों में होगा विकास कार्य नक्सलवाद की चपेट में रहे तकरीबन 100 से अधिक गांवों में 300 करोड़ से अधिक की राशि से बिजली पानी, सड़क सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं को मुहैया कराया जायेगा. नक्सलवाद जिले के लिए नासूर की तरह था. जिसके कारण वनांचल क्षेत्र के सैकड़ों गांव विकास की मुख्य धारा से अलग थलग पड़े रह गए. चूंकि जब भी इन ग्रामीण अंचलों में कार्य किये जाते थे, तो नक्सली उन कार्यों में बाधा उत्पन्न करते थे, कभी मशीनों को जला देते थे, तो कभी ठेकेदारों को डराते धमकाते थे।  नक्सली इन क्षेत्रों का विकास कभी नहीं चाहते थे. नक्सलवाद यहां पर विकास की राह में सबसे बड़ा रोड़ा था. लेकिन अब समय बदला है और समय के साथ यहां की तस्वीर भी बदलने लगी है. बरसों विकास से दूर रहने वाले गांवों में अब जीवन खुशहाल नजर आ रहा है।  शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार पर जोर बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीणा ने बताया कि, ''जिले के बैहर, परसवाड़ा, बिरसा, लांजी, किरनापुर सहित बालाघाट विकासखण्ड के सैकड़ों गांव नक्सलवाद की चपेट में रहे. अब उन सभी गांवों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेव्हलपमेंट, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. जहां पर उन इलाकों के सभी जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर विकास का खाका तैयार किया जा रहा है, जिसे शासन को भेज कर स्वीकृति ली जा सकेगी।  सोलर सेंटर एवं ट्रांसफार्मर की स्थापना फिलहाल इन वनांचल क्षेत्रों के 16 गांवों में जल संसाधन विभाग द्वारा सिचांई की योजनाएं तैयार कर खेती को बेहतर बनाने काम जारी है. वहीं विद्युत विभाग द्वारा सोलर सेंटर एवं ट्रांसफार्मर स्थापना के लिए तकरीबन 13.50 करोड़ रूपये के प्रस्ताव तैयार हैं. खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की 37 गांवों में उचित मूल्य की दुकान और 50 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम के निर्माण की योजना है. इसके अलावा तीन करोड़ की राशि से महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण व मरम्मत कार्य प्रस्तावित हैं।  इसी के साथ सर्व शिक्षा अभियान के तहत शाला भवन निर्माण, उद्योग एवं तकनीकि विभाग द्वारा आईटीआई भवन व छात्रावास, मत्स्य विभाग द्वारा तालाब निर्माण, पशुपालन विभाग द्वारा पशु पेड़, कृषि विभाग द्वारा 1.74 करोड़ की राशि से कृषि विकास कार्य, उद्यानिकी विभाग द्वारा नर्सरी स्थापना, पीएम सड़क योजनांतर्गत 189 किमी लंबाई की 41 सड़कों का निर्माण, स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य केन्द्रों का सुधार, आयुष विभाग द्वारा 3.45 करोड़ के औषधालय निर्माण के प्रस्ताव शामिल हैं।  डर से निकल खुशहाली की तरफ बढ़े ग्रामीण इस तरह अब कभी लाल आतंक का गढ़ माने जाने वाले बालाघाट जिले के वनांचल क्षेत्रों में जीवन खुशहाली की ओर है. डर और भयमुक्त माहौल निर्मित होने से लोगों के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आ रहे हैं. वहीं शासन प्रशासन द्वारा यहां के विकास का खाका तैयार कर जिस तरह से कार्यों का संपादन किया जा रहा है, निश्चित तौर पर आने वाले समय में यहां निवासरत लोगों को शासन की योजनाओं का लाभ मिलेगा और उनके जीवन स्तर में भी बदलाव होगा। 

दिल्ली के दिल तोड़े आखिरी गेंद का ड्रामा और मिलर का बड़ा गलती

नईदिल्ली  इंडियन प्रीमियर लीग के एक बेहद रोमांचक मुकाबले में 8 अप्रैल को गुजरात टाइटन्स ने आखिरी गेंद पर दिल्ली कैपिटल्स को हराकर सीजन की अपनी पहली जीत दर्ज की. मैच का नतीजा अंतिम गेंद तक झूलता रहा, जहां डेविड मिलर की एक छोटी सी चूक दिल्ली पर भारी पड़ गई.यह मुकाबला द‍िल्ली के अरुण जेटली स्टेड‍ियम में खेला गया।  211 रन के टारगेट का पीछा करते हुए दिल्ली कैपिटल्स की टीम 20 ओवर में 8 विकेट पर 209 रन ही बना सकी और जीत से महज एक रन दूर रह गई।  आखिरी ओवर में जीत के लिए 13 रन चाहिए थे. प्रसिद्ध कृष्णा गेंदबाजी कर रहे थे. मिलर ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए मैच को आखिरी गेंद तक पहुंचा दिया. लेकिन चौथी गेंद पर सिंगल लेने से इनकार करना उनकी सबसे बड़ी गलती साबित हुई।  अंतिम गेंद पर दिल्ली को 2 रन चाहिए थे. प्रसिद्ध ने धीमी बाउंसर डाली, जिसे मिलर कनेक्ट नहीं कर सके. रन लेने की कोशिश में कुलदीप यादव क्रीज से बाहर रह गए और जोस बटलर ने स्टंपिंग कर मैच गुजरात की झोली में डाल दिया. दिल्ली ने वाइड के लिए रिव्यू लिया, लेकिन गेंद सही करार दी गई।  जान‍िए आख‍िरी ओवर का रोमांच  19वें ओवर तक टाइटन्स का खेल पूरी तरह नियंत्रण में था और घरेलू टीम को अंतिम दो ओवरों में 36 रन चाहिए थे. इससे पहले वो स‍िराज के ओवर में 23 रन जड़ चुके थे।  प्रसिद्ध कृष्णा को अंतिम छह गेंदों पर 13 रन का बचाव करना था.विप्रज निगम पहली गेंद पर चौका लगाने के बाद आउट हो गए, जिससे मिलर को अंतिम तीन गेंदों पर 8 रन बनाने थे.इसके बाद चौथी गेंद पर लॉन्ग-ऑफ पर एक बड़ा हिट लगाया गया जिसने दिल्ली कैपिटल्स के लिए लगभग मैच तय कर दिया।  लेकिन पांचवी गेंद जो प्रसिद्ध कृष्णा ने डेविड मिलर को फेंकी, उस पर कोई रन नहीं नहीं आया. शॉर्ट ऑफ लेंथ की बॉल को एंगल से खेला, मिलर ने घूमकर डीप स्क्वायर लेग पर पुल किया. जब कुलदीप को वापस भेजा गया तो वह आधे रास्ते पर थे. मिलर खुद ऐसा करना चाहते थे. अगर स्कोर बराबर होता तो सिंगल मिल जाता और अगर कुलदीप चूक भी जाते, तो भी मैच टाई हो जाता. इसके बाद समीकरण 1 गेंद पर 2 रन हो गया।  आखिरी गेंद पर 2 रन चाहिए थे, प्रसिद्ध ने धीमी बाउंसर फेंकी जिसे मिलर ने कनेक्ट नहीं किया, और रन के लिए चले गए, जिससे कुलदीप यादव क्रीज से बाहर हो गए।  रिव्यू में वाइड बताया गया लेकिन इसे फेयर डिलीवरी माना गया, जिससे मिलर निराश हुए.यह दिल्ली कैपिटल्स की इस सीजन की पहली हार थी, जबकि टाइटन्स ने आखिरकार तीसरी कोशिश में पूरे पॉइंट हासिल किए।  10 साल में वॉशिंगटन सुंदर ने जड़ी पहली IPL फिफ्टी सुंदर को भारत के बेहतरीन ऑलराउंडरों में गिना जाता है, लेकिन आईपीएल में अपने पहले अर्धशतक तक पहुंचने में उन्हें पूरे 10 साल लग गए. 68 मैच और 48 पारियों के बाद सुंदर ने आखिरकार बल्ला उठाकर जश्न मनाया।  दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ सुंदर ने 32 गेंदों में 55 रन बनाए. उनकी इस पारी में 5 चौके और 2 छक्के शामिल रहे. यह पारी सिर्फ एक अर्धशतक नहीं थी, बल्कि वॉशिंगटन सुंदर के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है. अपने पूरे आईपीएल करियर में सुंदर को बल्लेबाजी के पर्याप्त मौके नहीं मिले और जब भी मौका मिला, वह उसे बड़े स्कोर में बदल नहीं पाए।  इससे पहले आईपीएल में उनका सबसे बड़ा स्कोर 49 रन था, जो उन्होंने पिछले सीजन में बनाया था. बता दें कि सुंदर ने 2017 में पहली बार आईपीएल खेला था. लेकिन उनके बल्ले से फिफ्टी नहीं आई थी. आईपीएल में सुंदर ने 4 टीमों के लिए खेला है और अबतक कुल 588 रन बनाए हैं।  इस पारी की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने जोस बटलर के साथ मिलकर 103 रन की साझेदारी की. बटलर ने भी अर्धशतक लगाया और दोनों बल्लेबाजों ने मिलकर मैच का रुख बदल दिया. ऐसी रही सुंदर की बल्लेबाजी सुंदर की पारी को तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है. शुरुआत में उन्होंने सिर्फ 12 गेंदों में लगभग 29 रन बनाए. इसके बाद उन्होंने थोड़ा समय लिया और अगली 16 गेंदों में 15 रन जोड़े. फिर आखिरी चरण में उन्होंने दोबारा तेजी से रन बनाना शुरू किया।  गुजरात टाइटंस ने अंत में 4 विकेट पर 210 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया. यह स्कोर ऐसे गेंदबाजी आक्रमण के खिलाफ आया, जिसे मजबूत माना जाता है।  बटलर-ग‍िल-सुंदर चमके इससे पहले, जोस बटलर ने 27 गेंदों में 52 रन की विस्फोटक पारी खेलते हुए टीम को तेज शुरुआत दिलाई. उन्होंने मुकेश कुमार के एक ओवर में तीन छक्कों सहित 23 रन बटोरे. पावरप्ले में दिल्ली ने 68 रन बना लिए थे।  बटलर के आउट होने के बाद कप्तान शुभमन गिल ने मोर्चा संभाला. उन्होंने 70 रन की शानदार पारी खेली, जिसमें पांच छक्के शामिल थे. वॉशिंगटन सुंदर ने भी 32 गेंदों में 55 रन बनाकर टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया. गुजरात ने 20 ओवर में 4 विकेट पर 210 रन बनाए।  दिल्ली की ओर से केएल राहुल ने 52 गेंदों में 92 रन की पारी खेली, जबकि पथुम निसांका ने 41 रन बनाए. दोनों के बीच 76 रन की साझेदारी हुई, जिससे टीम मजबूत स्थिति में दिख रही थी।  हालांकि, म‍िड‍िल ओवर्स में राशिद खान ने तीन विकेट लेकर मैच का रुख बदल दिया. इसके बाद दिल्ली की पारी लड़खड़ा गई. आखिरी ओवर से पहले दिल्ली को 36 रन चाहिए थे. मिलर ने मोहम्मद सिराज के ओवर में 23 रन बनाकर मैच में जान डाल दी, लेकिन अंत में उनकी एक गलती टीम को भारी पड़ गई।   म‍िलर का ओवरकॉन्फ‍िडेंस पड़ा द‍िल्ली पर भारी सीजन की शुरुआत में लगातार दो करीबी मुकाबले हारने वाली गुजरात टीम इस बार आखिरकार जीत की ओर झुकी. हालांकि, दिल्ली के डेविड मिलर लगभग हीरो बन गए थे, लेकिन आखिरी दो गेंदों में लिया गया उनका फैसला टीम पर भारी पड़ गया।  मैच का टर्निंग पॉइंट: राशिद का जादू गुजरात की जीत के असली हीरो राशिद खान रहे. उन्होंने 4 ओवर में 17 रन देकर 3 विकेट झटके. 10वें ओवर में … Read more

बालोद का औराटोला बना मिसाल: आत्मनिर्भरता से ‘लखपति दीदी ग्राम’ की पहचान

रायपुर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘‘बिहान’’ अंतर्गत स्व-सहायता समूह की महिलाओं को विभिन्न आजीविका मूलक गतिविधियों से जोड़कर उनके परिवार की वार्षिक आय 01 लाख रूपये या उससे अधिक आय अर्जित करने में सक्षम बनाकर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। जिसके तहत् बालोद जिले में 20 हजार 982 लखपति दीदी बनायी गई है। इसके विस्तृत स्वरूप में लखपति ग्राम की अवधारणा भी विकसित की गई है जो कि ग्रामीण विकास की एक ऐसी दूरदर्शी सोच है, जिसके केंद्र में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आर्थिक उन्नति है। बालोद जिले में इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गाँव का प्रत्येक परिवार सालाना कम से कम 01 लाख रुपये या उससे अधिक की शुद्ध आय अर्जित कर सके। यहाँ इस अवधारणा के निम्न मुख्य पहलुओं को लेकर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं विभागीय उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में बालोद जिले में कार्य कराया जा रहा है। लखपति ग्राम का लक्ष्य केवल गरीबी रेखा से बाहर निकलना नहीं है बल्कि ग्रामीण परिवारों को ’लखपति दीदी’ के रूप में विकसित करके उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। यह स्थायी आजीविका और बेहतर जीवन स्तर पर केंद्रित है जिसके तहत् बहुआयामी आजीविका स्त्रोत को प्राथमिकता दी गई जिसमें एक परिवार केवल एक स्त्रोत जैसे सिर्फ खेती पर निर्भर रहकर लखपति नहीं बन सकता। इसके लिए 03-04 विभिन्न आय के स्रोतों को अपनाया गया है। उन्नत कृषि अंतर्गत जैसे बेमौसमी सब्जियाँ, नकदी फसलें और जैविक खेत, पशुपालन अंतर्गत डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन या मत्स्य पालन, गैर कृषि उद्यम अंतर्गत मशरूम उत्पादन, सिलाई या छोटे ग्रामीण उद्योग, कौशल विकास अंतर्गत प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत तकनीकी प्रशिक्षण शामिल है।  जिले में लखपति ग्राम की सफलता हेतु निम्न बिन्दुओं को आधार बनाकर क्रियान्वयन किया जा रहा है। प्रत्येक परिवार की उनकी वर्तमान आय और भविष्य के लक्ष्यों के आधार पर एक ’आजीविका योजना’  तैयार कराया गया है। तत्पश्चात् वित्तीय समावेशन के माध्यम से कम ब्याज पर बैंक ऋण 4054 एसएचजी को 114 करोड़ ऋण प्रदाय किया गया है एवं वूमेन लेड इंटरप्राईज फायनेंस के तहत् 801 एसएचजी को 10 करोड़ का ऋण दिया किया गया है। इसी क्रम में स्व-सहायता समूह द्वारा उत्पादित वस्तुओं को क्षेत्रीय सरस मेला, स्थानीय बाजार एवं शासकीय कार्यालय मंे स्टाॅल लगाकर विक्रय किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों और ग्राम संगठनों के माध्यम से सामूहिक शक्ति का उपयोग कर एक तंत्र का निर्माण किया गया है।  इस अवधारणा को धरातल पर उतारने के लिए ’आजीविका सखियों’ और ’पशु सखियों’ की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जो घर-घर जाकर महिलाओं को तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण प्रदान करती हैं। बालोद जिले के लिए यह गौरव का विषय है कि डौंडी विकासखंड का औराटोला गाँव जिले का प्रथम ’लखपति ग्राम’ बनकर उभरा है। इस गाँव ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो सामूहिक प्रयास से गरीबी को मात दी जा सकती है।      औराटोला की सफलता के पीछे बिहान योजना और महिलाओं की अटूट मेहनत है। यहाँ की महिलाओं ने पारंपरिक खेती के दायरे से बाहर निकलकर बहुआयामी आजीविका को अपनाया। गाँव में अब दर्जनों ऐसी महिलाएं हैं जिनकी वार्षिक आय 01 लाख रुपये से अधिक है। इसके अंतर्गत महिलाओं ने खाली पड़ी जमीनों पर उन्नत किस्म की सब्जियाँ उगाना शुरू किया, उन्नत नस्ल के पशु और वैज्ञानिक तरीके से देखरेख करना, गाँव में उन महिलाओं का समूह बनाया गया जो अन्य महिलाओं को भी आर्थिक नियोजन सिखाती हैं। बालोद जिले के औराटोला जैसे गाँवों की प्रेरणा लेकर यहाँ तीन महिलाओं की काल्पनिक लेकिन यथार्थवादी सफलता की कहानियाँ दर्शाती हैं कि कैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम करके महिलाएँ ’लखपति दीदी’ बन रही हैं। कुमेश्वरी मसिया ने बताया कि उसने प्रेरणा स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मत्स्य विभाग से मत्स्य पालन का प्रशिक्षण लिया। उन्होंने समूह के माध्यम से 50 हजार रूपये का ऋण लिया और तालाब की सफाई करवाकर उसमें रोहू और कतला मछलियों के बीज डाले। मछली पालन के साथ-साथ कुमेश्वरी नें पैतृक भूमि 20 डिसमिल में सब्जी बाड़ी का कार्य प्रारंभ किया। मछलीपालन हेतु वर्तमान में मत्स्य विभाग द्वारा उन्हें मछली जाल एवं आईस बाॅक्स प्रदाय किया गया है। परिणाम स्वरूप आज कुमेश्वरी साल में दो बार मछली की खेप बेचती हैं और सब्जी बेचकर एवं खर्च काटकर उनकी वार्षिक शुद्ध आय 01 लाख 17 हजार रूपये तक पहुँच गई है। बिहान योजना के तहत अटल महिला स्व-सहायता समूह के अध्यक्ष लाकेश्वरी दीदी बताती है कि समूह के 10 सदस्यों ने फाईल पैड बनाने का प्रशिक्षण लिया और सभी सदस्य सहमत होकर बिहान के माध्यम से 01 लाख रूपये बैंक से ऋण लेकर फाईल पैड की एक छोटी यूनिट स्थापित किया और फाईल पैड विक्रय हेतु उन्होंने केवल शहर पर निर्भर रहने के बजाय आसपास के लोकल बुक डिपो, एवं शासकीय कार्यालय में कम कीमत पर फाईल पैड उपलब्ध कराया जा रहा हैं। फाईल पैड अच्छी गुणवत्ता और कम दाम के कारण उनके मांग बढ़ गई इस प्रकार सभी खर्च निकालने पर प्रत्येक माह सभी सदस्य 07 से 08 हजार रूपये आय अर्जित कर रही है। प्रेरणा स्व-सहायता समूह की लोकेश्वरी साहू ने लखपति दीदी पहल के तहत पशु पालन हेतु ’पशु सखी’ से प्रशिक्षण लिया और बिहान के माध्यम से 01 लाख का ऋण लेकर दो उन्नत नस्ल की जर्सी गायें खरीदीं। उन्होंने पारंपरिक चारे के बजाय ’अजोला’ और संतुलित पशु आहार का उपयोग शुरू किया। पशु पालन के साथ-साथ लोकेश्वरी ने आरसेटी के माध्यम से सिलाई मशीन का प्रशिक्षण लेकर सिलाई कार्य प्रारंभ की एवं मशरूम उत्पादन हेतु लोकेश्वरी दीदी ने कृषि विज्ञान केन्द्र अरौद से मशरूम का प्रशिक्षण प्राप्त कर मशरूम उत्पादन प्रारंभ किया प्रति दिन 10-15 कि.ग्रा. मशरूम उत्पादन कर 200 रू. प्रति कि.ग्रा. की दर से लोकल बाजार, सी.एल.एफ. मीटिंग एवं स्कूल, जनपद एवं जिला कार्यालय एवं अन्य विभागों में जाकर विक्रय कर रही है। लोकेश्वरी साहू बताती है कि वह केवल दूध बेचना ही नहीं बल्कि बचे हुए दूध से खोवा और पनीर बनाना भी सीखा, जिससे मुनाफा दोगुना हो गया। परिणाम स्वरूप दूध और दुग्ध उत्पादों की बिक्री, सिलाई कार्य एवं मशरूम से उनकी मासिक आय 11 हजार रूपये से ऊपर हो गई। जिससे वे … Read more

Tata Intra EV पिकअप ट्रक लॉन्च, कीमत 11.95 लाख रुपये और रेंज 211 किमी

मुंबई  वाहन निर्माता कंपनी Tata Motors ने भारतीय बाजार में अपनी इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल्स की लाइनअप में विस्तार करते हुए नए Tata Intra EV Pickup को लॉन्च किया है. इस पिकअप को कंपनी ने 11.95 लाख (एक्स-शोरूम) की कीमत पर लॉन्च किया है।  ध्यान देने वाली बात यह है कि यह नया इलेक्ट्रिक पिकअप ट्रक मौजूदा Tata Intra प्लेटफॉर्म पर ही आधारित है और इसमें एक खास EV पावरट्रेन का इस्तेमाल किया गया है, जिससे कमर्शियल व्हीकल्स के क्षेत्र में एक टिकाऊ मोबिलिटी समाधान दिया जा सके. Tata Intra EV Pickup को पूरे देश में कंपनी के कमर्शियल गाड़ियों के डीलरशिप नेटवर्क के ज़रिए बेचा जाएगा।  बता दें कि Tata Intra EV Pickup एक छोटा कमर्शियल वाहन है, जिसे 'लास्ट-माइल' और शहर के अंदर माल ढुलाई के कामों के लिए डिज़ाइन किया गया है. कंपनी से मिली जानकारी के अनुसार, इसकी पेलोड क्षमता 1,750 kg रखी गई है, और इसमें 10 फीट 2 इंच तक लंबे लोड बॉडी का विकल्प भी दिया गया है. इस वजह से यह ई-कॉमर्स, FMCG डिस्ट्रीब्यूशन, कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स और वेस्ट मैनेजमेंट जैसी सेवाओं में इस्तेमाल के लिए बेहद उपयुक्त है।  Tata Intra EV Pickup का पावरट्रेन इस पिकअप में मिलने वाले पावरट्रेन की बात करें तो, इसमें 72 kW की इलेक्ट्रिक मोटर लगाई गई है, जो 230 Nm का पीक टॉर्क प्रदान करती है. कंपनी का दावा है कि यह गाड़ी लोड के साथ 23 प्रतिशत तक की ग्रेडिबिलिटी (चढ़ाई चढ़ने की क्षमता) के लिए डिजाइन की गई है. इसमें लगी इलेक्ट्रिक मोटर 28.2 kWh के बैटरी पैक से पावर लेती है, जिसे धूल और पानी से बचाव के लिए IP67-रेटिंग मिली है. इसकी मदद से, Intra EV एक बार चार्ज करने पर 211 km तक की रेंज दे सकती है।  इसमें CCS2 फ़ास्ट चार्जर से चार्जिंग का फीचर दिया गया है. कंपनी से मिली जानकारी के अनुसार, इसे 10 से 80 प्रतिशत तक चार्ज होने में लगभग 55 मिनट का समय लगता है. इसकी बैटरी पर छह साल या 2 लाख किलोमीटर की वारंटी दी जा रही है।  Tata Intra EV Pickup के सेफ्टी फीचर्स सेफ्टी फीचर्स की बात करें तो, Tata Intra EV Pickup में एक इलेक्ट्रॉनिक ब्रेकिंग सिस्टम और तीन लेवल की रीजेनरेटिव ब्रेकिंग दी गई है. इससे इसकी एफिशिएंसी बेहतर होती है और इसकी रियल-वर्ल्ड रेंज बढ़ जाती है. इस गाड़ी में Tata Motors का Fleet Edge टेलीमैटिक्स सिस्टम भी दिया गया है, जो फ्लीट ऑपरेटर्स को रियल-टाइम ट्रैकिंग, गाड़ी की डायग्नोस्टिक्स और प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस के बारे में डेटा प्रदान करता है।  Tata Intra EV Pickup का इंटीरियर Intra EV पिकअप के केबिन की बात करें तो इसको इस्तेमाल में आसानी पर खास ध्यान देकर डिज़ाइन किया गया है, जिसमें वॉक-थ्रू लेआउट और इलेक्ट्रिक पावर-असिस्टेड स्टीयरिंग का फीचर दिया गया है. इसका इलेक्ट्रिक ड्राइवट्रेन, पारंपरिक डीज़ल से चलने वाले पिकअप की तुलना में NVH (शोर, कंपन और कठोरता) के स्तर को कम रखने में मदद करेगा।  Tata Motors का कहना है कि Tata Intra EV पिकअप को उसके बड़े EV इकोसिस्टम का सपोर्ट मिलेगा, जिसमें पूरे भारत में 25,000 से ज़्यादा चार्जिंग पॉइंट और 200 से ज़्यादा खास EV सर्विस सेंटर शामिल हैं. पार्टनर बैंकों और NBFCs के ज़रिए फाइनेंसिंग के विकल्प भी दिए जाएंगे। 

मंत्री दिलीप जायसवाल से मुलाकात, सम्मानित किए गए पत्रकार समिति के नेता

भोपाल मध्य प्रदेश शासन के मंत्री भाई दिलीप जायसवाल से मुलाकात कर,समिति अध्यक्ष अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति डल्लू कुमार सोनी एवं मध्य प्रदेश समिति अध्यक्ष प्रीतम कुमार वर्मन,छत्तीसगढ़ प्रदेश महासचिव धर्मेंद्र वस्त्रकर  संयुक्त मुलाकात कर वार्तालाप कर स्मृति चिन्ह देकर देकर सम्मान करते हुए। 

जल गंगा संवर्धन अभियान-2026: प्रदेश में जल संरक्षण को मिल रही नई दिशा

जल गंगा संवर्धन अभियान-2026: प्रदेश में जल संरक्षण को मिल रही नई गति अभियान में 6242 करोड़ रुपये की लागत से कराए जा रहे 2 लाख 44 हजार से अधिक कार्य भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में पानी की प्रत्येक बूंद को सहेजने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रदेश में बड़ी संख्या में खेत तालाब, अमृत सरोवर, रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और सूखे कुँओं को नया जीवन देने का कार्य किया जा रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल द्वारा समूचे अभियान की निरंतर निगरानी रखी जा रही है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा अभियान के तहत पूरे प्रदेश में जल संरक्षण के 2 लाख 44 हजार से अधिक कार्य किए जा रहे हैं, जिसकी लागत 6242 करोड़ रुपये हैं। इस वर्ष के जल गंगा संवर्धन अभियान में पूर्व के कार्य की पूर्णता पर विशेष जोर दिया गया है। मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद के आयुक्त अवि प्रसाद ने बताया कि इस साल जल गंगा संवर्धन अभियान: 2025 के लंबित कार्यों तथा महात्मा गांधी नरेगा योजना अंतर्गत चल रहे पानी से संबंधित कार्यों की पूर्णता लक्षित की गई है। लक्ष्य के अनुक्रम में 84 हजार से अधिक कार्य पूरे प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान: 2026 की प्रगति भी दिखाई देने लगी है। 19 मार्च से शुरू हुए अभियान के तीसरे चरण को महज 20 दिन ही पूरे हुए और 84 हजार से अधिक कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं। ये वे कार्य हैं जो पिछले वर्ष अधूरे रह गए थे। जल गंगा संवर्धन अभियान में टॉप 5 जिले जल गंगा संवर्धन अभियान में खंडवा, उज्जैन, खरगोन, डिंडौरी और बालाघाट टॉप 5 जिलों में शामिल हैं।  

पांच अग्रणी राज्य देश के कुल दूध का करते हैं 54 फीसदी उत्पादन, इसमें अकेले यूपी की हिस्सेदारी 16 फीसदी

ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं ने संभाली कमान, पांच कंपनियों के जरिए जुड़ीं चार लाख महिला किसान सीएम योगी के कार्यकाल में पहली बार इतनी सशक्त हुईं महिलाएं लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में पहले की तुलना में 40 प्रतिशत दुग्ध उत्पादन बढ़ गया है। यही नहीं, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों को पीछे छोड़ते हुए यूपी सबसे सशक्त बनकर उभरा है। देश के कुल दुग्ध उत्पादन में पांच अग्रणी राज्यों की 54 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसमें अकेले उत्तर प्रदेश का योगदान 16 फीसदी तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा प्रदेश की बढ़ती ताकत और मजबूत डेयरी संरचना का स्पष्ट उदाहरण है। सीएम योगी के कार्यकाल में दुग्ध उत्पादन में जबरदस्त उछाल दर्ज हुआ है। वर्ष 2016-17 में जहां उत्पादन 277 लाख मीट्रिक टन था, वहीं वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 388 लाख मीट्रिक टन के पार पहुंच गया है।  सीएम योगी के जमीनी स्तर पर किए प्रयासों का परिणाम : मुकेश मेश्राम पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि करीब 40 प्रतिशत की यह वृद्धि प्रदेश में योजनाबद्ध विकास और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जमीनी स्तर पर किए गए ठोस प्रयासों का परिणाम है। बड़ी ताकत बनीं ग्रामीण महिलाएं इस दुग्ध क्रांति की बड़ी ताकत ग्रामीण महिलाएं बनीं हैं। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से लाखों महिलाएं डेयरी गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। प्रदेश के 31 जिलों में महिला समूह प्रतिदिन करीब 10 लाख लीटर दूध का संग्रहण कर रहे हैं और करीब 5000 करोड़ रुपये का कारोबार कर चुके हैं। प्रदेश में पांच प्रमुख दुग्ध उत्पादक कंपनियों के जरिए करीब चार लाख महिला किसान जुड़ीं हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है। फरवरी 2026 तक इन कंपनियों का कुल कारोबार पांच हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। बुंदेलखंड क्षेत्र में ‘बलिनी एमपीसीएल’, पूर्वांचल में ‘काशी एमपीसीएल’, अवध क्षेत्र में सामर्थ्य एमपीसीएल, गोरखपुर मंडल में ‘श्री बाबा गोरखनाथ कृपा एमपीसीएल, तराई क्षेत्र में सृजन एमपीसीएल’ से जुड़कर महिलाएं रिकॉर्ड बना रही हैं। उत्तर प्रदेश की बदल रही तस्वीर पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि योगी सरकार के कार्यकाल में पहली बार महिलाओं को इतने बड़े पैमाने पर आर्थिक मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें सशक्त बनाया गया है। दुग्ध उत्पादन में यह रिकॉर्ड वृद्धि न केवल आर्थिक मजबूती का संकेत है, बल्कि उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर का भी प्रतीक बन गई है।

होर्मुज तनाव समाप्त, रूस के बाद अब भारत को मिल रही तेल की बड़ी खेप

नई दिल्‍ली मिडिल ईस्‍ट में जंग के कारण तेल संकट पैदा हुआ है, जिस कारण कई देशों में तेल की कीमतें आसमान पर पहुंच चुकी है. अभी ब्रेंट क्रूड ऑयल 112 डॉलर के करीब आ चुका है. इस बीच, भारत ने अपने कच्‍चे तेल के आयात में विविधता लाया है. भारत ईरानी और रूसी तेल की खरीद तो कर ही रहा है. इस बीच खबर है कि भारत को वेनेजुएला से एक बड़ी खेप मिल रही है।  कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर के अनुसार, दक्षिण अमेरिकी देश से पिछली खेप आने के लगभग एक साल बाद, इस महीने लगभग 10-12 मिलियन बैरल वेनेजुएला का कच्चा तेल भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है. वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद फिर से शुरू होना ऐसे समय में हुआ है, जब भारतीय रिफाइनर कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर विकल्पों में विविधता ला रही हैं।  रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल में आने वाले कार्गो को हालिया रुकावट से काफी पहले ही सुरक्षित कर लिया गया था, जो एक लंबे समय की रणनीतिक बदलाव को दिखाता है. अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रोक लगने से पहले वेनेजुएला का कच्चे तेल का आयात औसतन 1.9 मिलियन बैरल था।  भारत के लिए बेहतर विकल्‍प है वेनेजुएला  वेनेजुएला भारत के लिए तेल का नया मार्केट है, जो भारत का एक बड़ा विकल्‍प देता है. खासकर होर्मुज रास्‍ता बंद होने के बाद से भारत के कच्‍चे तेल की आपूर्ति पूरी कर सकता है और भारत में तेल की कीमतें स्थिर रह सकती हैं और युद्ध का प्रभाव कम हो सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि वेनेजुएला से तेल आने पर इनमें से कुछ माल कोच्चि बंदरगाह पर उतारे जा सकते हैं, जहां बीपीसीएल की रिफाइनरी है।  हर तरफ से भारत के पास आ रहा तेल गौरतलब है कि अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर कंट्रोल के बाद भारतीय रिफाइनरियों और अमेरिका के बीच वेनेजुएला से तेल खरीदने की डील हुई है, जिसके तहत पहली खेप भारत आ रही है. इसके साथ ही अमेरिका द्वारा रूस और ईरानी तेल पर से प्रतिबंध हटाने के बाद भारत रूसी और ईरानी तेल खरीद रहा है. इसके साथ ही भारत अफ्रीकी देशों से भी तेल की आपूर्ति कर रहा है, जिसमें से प्रमुख देश अंगोल है।  क्‍यों खास है वेनेजुएला का तेल  वेनेजुला में दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार मौजूद हैं. यह एक हैवी और एक्‍स्‍ट्रा हैवी क्रूड ऑयल की बड़ी मात्रा रखता है. यह तेल भले ही रिफाइन करना थोड़ा महंगा पड़ता है, लेकिन इसकी उपलब्धता बहुत अधिक है, इसलिए लंबी अवधि में यह सप्लाई के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है।