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बीजेपी की रणनीति: नरोत्तम मिश्रा पर फिर दांव, उपचुनाव की तैयारियों में तेजी

 दतिया  दतिया से कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेन्द्र भारती को सहकारिता बैंक भ्रष्टाचार मामले में एमपी एमएलए कोर्ट द्वारा दोषी करार देते हुए तीन साल की सजा सुनाई गई है। इसके बाद उनकी विधानसभा की सदस्यता भी शून्य घोषित कर दी गई है । कोर्ट में राजेंद्र भारती के केस की सुनवाई भी आगे बढ़ गई है। इस बीच बीजेपी ने दतिया में उपचुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। मंगलवार को प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भोपाल में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात की जिससे राजनैतिक सरगर्मी बढ़ गई। राजेंद्र भारती दतिया से पिछले चुनाव में नरोत्तम मिश्रा को हराकर ही विधायक बने थे। यही वजह है कि दोनों नेताओं की इस मुलाकात को दतिया में संभावित उपचुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। दतिया से कांग्रेस विधायक रहे राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद सियासी चहलकदमी तेज हो गई है। भाजपा ने तो अंदरखेमे अभी से उपचुनाव की तैयारियां शुरू कर दी है। मंगलवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के बीच राजधानी में बंद कमरे में तकरीबन आधा घंटे तक चर्चा चली। प्रदेश अध्यक्ष के भोपाल स्थित आवास में यह मुलाकात हुई। पार्टी सूत्रों के मुताबिक भाजपा ने अभी से इस सीट को लेकर गुणा-भाग शुरू कर दिया है। बता दें, दतिया पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का मजबूत गढ़ रही है। वे यहां से तीन बार जीते, लेकिन पिछले चुनाव में उन्हें राजेंद्र भारती से हार मिली थी। नरोत्तम मिश्रा को राज्यसभा भेजने पर विचार सवर्ण वर्ग की नाराजगी दूर करने के लिए भाजपा नरोत्तम मिश्रा का राज्यसभा भेजने का दांव चल सकती है। यह अलग बात है कि भाजपा का यह दांव जातिगत राजनीति में कितना कारगर साबित होता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नरोत्तम मिश्रा को राज्यसभा भेजकर सवर्णों के राजनीतिक गुस्से को ठंडा किया जा सकता है। फिर यूजीसी पर अब फैसला कोर्ट से आना है, जिसका सभी को इंतजार है। 27 साल पुराने मामले में भारती को कोर्ट से झटका दतिया से कांग्रेस विधायक रहे राजेंद्र भारती को दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट ने बीते दिनों 27 साल पुराने एक बैंक फ्रॉड मामले में दोषी पाया था। उन्हें विभिन्न मामलों में अधिकतम तीन साल की सजा मिली। उधर कोर्ट का फैसला आते ही उसी दिन विधानसभा सचिवालय ने उनकी विधायकी निरस्त कर दी। हालांकि एक्शन नियमों के अनुरूप हुए, लेकिन कांग्रेस ने इसे सरकार की साजिश करार दिया था। सन 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में प्रदेश के दिग्गज नेता और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा हार गए थे। प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़े राजेन्द्र भारती जीतकर विधायक बन गए थे। उन्होंने चुनाव में भाजपा के नरोत्तम मिश्रा को 7742 वोटों से शिकस्त दी थी। तब राजेन्द्र भारती को 88977 वोट मिले थे और नरोत्तम मिश्रा को 81235 वोट प्राप्त हुए थे। विधानसभा चुनाव में हार के बाद भी पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा चुप नहीं बैठे। वे इलाके और प्रदेश की राजनीति में लगातार सक्रिय रहे हैं। दतिया में उपचुनाव होने की स्थिति में पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा बीजेपी के उम्मीदवार के रूप में स्वाभाविक दावेदार होंगे। इधर दिल्ली हाईकोर्ट ने राजेंद्र भारती केस की अगली सुनवाई के लिए 15 अप्रैल की तारीख तय की है। कोर्ट ने राज्य सरकार व शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई पर उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि दतिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक रहे राजेन्द्र भारती को बीते दिनों सहकारिता बैंक घोटाले में दोषी मानते हुए एमपी एमएलए कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई है। सजा का फैसला आने के कुछ घंटों बाद ही मध्यप्रदेश विधानसभा के सचिवालय ने राजेन्द्र भारती की सदस्यता शून्य घोषित कर दी थी। अब राजेन्द्र भारती की विधानसभा की सदस्यता और राजनैतिक भविष्य का फैसला हाईकोर्ट में ही तय होगा।

एमपी के 6 जिलों में खनिज खनन का रास्ता साफ, मैंगनीज और बाक्साइट से होगी समृद्धि

भोपाल  मध्यप्रदेश में प्रचुर खनिज हैं। इनमें मैंगनीज, बाक्साइट जैसे महंगे खनिज भी शामिल हैं। कई जगहों पर दुर्लभ खनिज भी मिले हैं। प्रदेश में खनिजों का उत्पादन बढ़ाने के लिए अब बंद पड़ी खदानों में भी दोबारा खनन शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इससे राजस्व बढऩे के साथ खनिजों की आवक भी बढ़ेगी। मप्र स्टेट माइनिंग डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने फिलहाल 6 जिलों में बंद पड़ी सात खदानों में खनिजों की खोजबीन शुरू कराने की तैयारी की है। इनमें मुख्यत: बॉक्साइट, मैंगनीज और लाइमस्टोन की खदानें शामिल हैं। यहां पर पहले यह देखा जाएगा कि अभी कितना खनिज भंडार मौजूद है। इसके बाद इन खदानों की दोबारा नीलामी की जाएगी। अन्य बंद पड़ी खदानों को भी दोबारा खनन के लिए खोजा जा रहा है। माइनिंग कॉरपोरेशन चिह्नित की गई सात बंद खदानों में बोरहोल और ड्रिलिंग कराकर खनिज के सैंपल एकत्रित करने के लिए एजेंसियों का चयन कर रहा है। कॉरपोरेशन के साथ पहले से काम कर रही कंपनियों में से ही इसके लिए प्रस्ताव मांगे गए हैं। कंपनियां कॉरपोरेशन के अधिकारियों के साथ मिलकर काम करेंगी और बंद पड़े इन खनिज ब्लॉक्स में तय दूरी तक ड्रिलिंग कर खनिजों की मात्रा का आकलन करेंगी। खदानों से सैंपल लेकर क्वालिटी और कवांटिटी की होगी जांच कॉरपोरेशन के अधिकारियों अनुसार, सैंपलिंग के लिए इन सातों ब्लॉक में 20 बोरहोल्स कर कुल 660 मीटर ड्रिलिंग की जाएगी। सभी ब्लॉक से 462 सैंपल एकत्रित कर संबंधित एजेंसी देगी। सैंपलिंग के बाद खनिजों की क्वालिटी और क्वांटिटी का आकलन प्रयोगशालाओं में कराया जाएगा। इसके बाद इन ब्लॉक्स को नीलामी में लाया जाएगा। सात के अलावा अन्य खनिज ब्लॉक भी चिन्हित करने का काम किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि प्रमुख रूप से ऐसे ब्लॉक चिन्हित कर रहे हैं जिनकी लीज लेप्स हो गई है या जहां काम बंद हो चुका है। सबसे ज्यादा खदानों की नीलामी से उद्योग और रोजगार को बढ़ावा खनिज नीलामी में वर्ष 2025 में देशभर में नीलाम किए गए 141 खनिज बलॉकों में से 32 खनिज ब्लॉकों की नीलामी मध्यप्रदेश में हुई है, जो देश में सर्वाधिक है। खान एवं खनिज विकास (एमएमडीआर) संशोधन अधिनियम, 2025 और इससे जुड़े नियमों में किए गए बदलावों से खनिज अन्वेषण, नीलामी, निवेश और स्थानीय विकास को गति मिली है। चूना पत्थर, लौह अयस्क और बॉक्साइट जैसे प्रमुख खनिजों की नीलामी से सीमेंट, स्टील और संबद्ध उद्योगों को भी मजबूती मिली है। खनन नियमों के सरलीकरण, खनिज एक्सचेंज की व्यवस्था और नीलामी प्रक्रिया को तेज़ किए जाने से मध्यप्रदेश में खनिज क्षेत्र में निजी निवेश भी बढ़ रहा है। इससे राज्य के युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित हो रहे हैं। इन बंद खदानों में एक्सप्लोरेशन ब्लॉक और जिला खनिज क्षेत्रफल हेक्टेयर में गायत्री मिनरल्स रीवा बॉक्साइट 32 डीके जैन सतना बॉक्साइट 10.6 केसी बगाडिया कटनी लाइमस्टोन 8 सीतापथोर बालाघाट मैंगनीज 20.2 पीएस हजारी दमोह लाइमस्टोन 5.66 सीसीआईएल-1 नीमच लाइमस्टोन 336 सीसीआईएल-2 नीमच लाइमस्टोन 163

मंजू जायसवाल का अनोखा तरीका: चित्रों के जरिए गणित सिखाकर जबलपुर में बच्चों का 95% रिजल्ट

जबलपुर  शहर से लगभग 5 किलोमीटर दूर रेगवा नाम का एक बड़ा गांव है. इस गांव में सरकारी माध्यमिक शाला स्कूल है, इसमें छठवीं से लेकर आठवीं तक की पढ़ाई होती है. कुल मिलाकर तीन क्लासों में 120 से ज्यादा बच्चों का एडमिशन है. इसी स्कूल में मंजू जायसवाल गणित की शिक्षिका है. मंजू जायसवाल का पढ़ाई का तरीका बिलकुल अलग है. दरअसल उन्होंने मैथ्स की पढ़ाने के लिए एक अनोखा प्रयोग किया है. बच्चों के मन से गणित का निकाला डर मंजू जायसवाल का कहना है कि, ''उन्होंने बच्चों को पढ़ाने के दौरान पाया कि बच्चों को गणित बहुत कठिन लगती है और गणित की वजह से कई बार बच्चे स्कूल तक नहीं आते हैं. इन बच्चों को घर में भी कोई पढ़ाने वाला नहीं होता ना ही ये ट्यूशन पढ़ते हैं. ऐसी स्थिति में इनकी गणित बहुत कमजोरी रहती है. इसलिए हमने एक नया प्रयोग शुरू किया और गणित को रंगों और चित्रों के माध्यम से पढ़ाना शुरू किया.'' बच्चों की पढ़ाई में हुआ सुधार  मंजू जायसवाल का कहना है कि, ''पढ़ने में बच्चा कितना भी कमजोर हो लेकिन चित्रों और रंगों के प्रति बच्चों का आकर्षण रहता है. इसलिए जैसे ही हमने यह प्रयोग शुरू किया तो बच्चों ने गणित में भी इंटरेस्ट लेना शुरू कर दिया.हमारी टीम जब स्कूल में पहुंची तो उस समय स्कूल में 15 बच्चे थे. दरअसल अभी नए साल की क्लास शुरू हुई है, इसलिए स्कूल में उपस्थिति की संख्या कम है और ज्यादातर बच्चे नए हैं. लेकिन इसके बावजूद मंजू जायसवाल ने बच्चों को एक चित्र बनाने के लिए कहां और उन्होंने बच्चों से पूल बनवाया. 95 प्रतिशत हुआ स्कूल का रिजल्ट बच्चों ने तुरंत फूल बनाना शुरू कर दिया फिर स्कूल के भीतर उन्होंने गणित की संख्या रखी और बच्चों से भी कहा कि इस गणित की संख्या से जुड़े हुए सवाल को हल करें. लगभग सभी बच्चों ने इसकी कोशिश की, कुछ बच्चे इसमें सफल भी रहे. मंजू जायसवाल ने बताया कि, पिछले सालों में हमारे स्कूल का रिजल्ट लगभग 95% रहा है जिसमें गणित विषय में सभी को फर्स्ट डिवीजन के मार्क्स मिले हैं. बच्चों का लग रहा पढ़ाई में मन राधिका इसी स्कूल में 2 सालों से पढ़ रही है. उनका कहना है, ''उसका मन भी शुरू में गणित में नहीं लगता था लेकिन चित्रों के जरिए जब से गणित पढ़ना शुरू किया है तब से उनकी गणित अच्छी हो गई है और अब भी चित्रों के माध्यम से ही गणित को समझती हैं.'' स्कूल के प्रधानाध्यापक शैलेंद्र दुबे का कहना है कि ''हमारी कोशिश होती है कि हम ज्यादातर सामान्य शिक्षा को रुचि कर बनाकर पेश करें. पहले चित्रों का उपयोग केवल सामाजिक विज्ञान पर्यावरण जैसे विषयों में ही होता था लेकिन हमने गणित में भी इसका प्रयोग शुरू किया तो अच्छे परिणाम मिले.'' सरकारी स्कूलों के शिक्षक शिक्षा को नौकरी की तरह करते हैं बहुत हद तक उनकी कोशिश बच्चों को सिखाने की नहीं होती. यदि सरकारी माध्यम के स्कूलों में शिक्षक पूरी जिम्मेदारी के साथ छात्रों को पढ़ाना शुरू करें तो सरकारी स्कूल से भी होनहार बच्चे निकल सकते हैं. मंजू जायसवाल की कोशिश कुछ ऐसी ही है.

एमपी के इस बड़े शहर को लेकर हाईकोर्ट की चेतावनी: पहाड़ियां बचाना जरूरी, नहीं तो बनेगा रेगिस्तान

 ग्वालियर  प्राकृतिक धरोहर और पहचान रही पहाडिय़ों पर लैंड माफिया के अवैध कब्जों व मुरम के बेखौफ उत्खनन को लेकर ग्वालियर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह मामला केवल कानूनी या प्रशासनिक नहीं है, बल्कि हमारे अस्तित्व से जुड़ा है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि इन पहाडिय़ों को समय रहते नहीं बचाया गया, तो इनका पूरी तरह समाप्त होना तय है, जिसका गंभीर पर्यावरणीय खामियाजा शहर की आने वाली पीढिय़ों को भुगतना पड़ेगा। अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए माना कि राजनीतिक संरक्षण, प्रशासनिक ढिलाई और पुलिस की निष्क्रियता के कारण लैंड माफिया बेखौफ होकर पहाडिय़ों को छलनी कर रहे हैं। विशेष रूप से गुड़ा-गुड़ी के नाके और आसपास के क्षेत्रों में पहाड़ों को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। कोर्ट ने ​पब्लिक ट्रस्ट डॉकि्ट्रन (सार्वजनिक न्यास सिद्धांत) का हवाला देते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा करना राज्य की बुनियादी जिम्मेदारी है, जिसमें प्रशासन पूरी तरह विफल दिख रहा है। अब 'सिटी फॉरेस्ट' के रूप में पहचानेंगे पहाड़ : कोर्ट ने एक दूरगामी कल्पना पेश करते हुए इन पहाडिय़ों को 'सिटी फॉरेस्ट' के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया है। यहाँ मॉर्निंग वॉक, योग और पारिवारिक पिकनिक के लिए स्थान विकसित किए जाएंगे। इससे न केवल शहर का पर्यावरण सुधरेगा, बल्कि ग्वालियर में हर साल बढ़ती भीषण गर्मी से भी राहत मिल सकेगी। कोर्ट ने इस मॉडल को अन्य जिलों के लिए भी नजीर बनाने पर जोर दिया है। कलेक्टर की अध्यक्षता में बनी हाई-लेवल कमेटी मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने ग्वालियर कलेक्टर की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। इस कमेटी में नगर निगम, पुलिस, वन विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति, आयुर्वेद विशेषज्ञ और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों को शामिल किया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहाडिय़ों को माफिया से मुक्त कराकर वहां फेंसिंग की जाए और बड़े पैमाने पर औषधीय व फलदार पौधे लगाए जाएं। हाई-पावर कमेटी में ये रहेंगे .     अध्यक्ष: जिला कलेक्टर, ग्वालियर     समन्वयक/सचिव: विवेक खेडकर (एडिशनल एडवोकेट जनरल)     सदस्य: पुलिस अधीक्षक, नगर निगम आयुक्त, डीएफओ, कुलपति (कृषि विवि)     विशेषज्ञ: गौरीशंकर दुबे (पूर्व प्रिंसिपल रजिस्ट्रार), डॉ. धर्मेन्द्र रिछारिया (आयुर्वेद), डॉ. आशुतोष गुप्ता (सीनियर वेटरनरी सर्जन), प्रशांत शर्मा (अधिवक्ता) प्रमुख बिंदु चार बिंदुओं पर 23 अप्रेल को मांगी रिपोर्ट हाई लेवल कमेटी का विधिवत गठन और सभी सदस्यों की सहमति। कमेटी की पहली बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों का ब्यौरा। पहाडिय़ों के सर्वे और फेंसिंग के लिए तैयार की गई प्रारंभिक कार्ययोजना। सिटी फॉरेस्ट प्रोजेक्ट को लेकर धरातल पर शुरू की गई कार्रवाई।

संपत्ति में ‘मालिकाना हक’ बदलना हुआ महंगा, स्टांप शुल्क के बारे में जानें पूरी जानकारी

भोपाल  संपत्ति का परिवार में ही विक्रय या टाइटल में बदलाव पर भोपाल समेत मप्र में कलेक्टर गाइडलाइन का सवा फीसदी से दस फीसदी तक शुल्क चुकाना पड़ रहा है। उप्र में ये महज पांच हजार रुपए में हो जाता है। वहां रजिस्ट्री फीस फिक्स्ड है। पारिवारिक संपत्ति में मालिकाना हक बदलने की महंगी दर की वजह से यहां लोग बेहद जरूरी होने पर ही मालिकाना हक बदलवाते हैं, बाद में ये देरी पारिवारिक विवाद की वजह बनती है। मौजूदा संपत्ति मामलों में 60 फीसदी पारिवारिक ही है। सालाना करीब 15 हजार संपत्तियां परिवार में ही ट्रांसफर होती है। यदि उप्र की तरह यहां भी पारिवारिक मालिकाना हक बदलवाने की दर सस्ती हो तो ये विवाद खत्म हो जाए। अभी मध्यप्रदेश में है ये नियम     नगरीय निकाय के भीतर संपत्ति है और परिवार में इसे गिफ्ट करना चाहते हैं तो संपत्ति मूल्य का दस फीसदी स्टांप शुल्क लिया जाता है।     नगरीय निकाय से बाहर के इलाके में संपत्ति है और परिवार में इसे गिफ्ट करना चाहते हैं, तो सात फीसदी स्टांप ड्यूटी लगती है।     संपत्ति का एक को-ऑनर अपनी संपत्ति का हिस्सा साथी को-ऑनर के नाम करना चाहता है तो हक विलेख किया जाता है, इसमें 1.3 फीसदी स्टांप शुल्क लगता है।     को-ऑनर परिवार से बाहर का सदस्य है तो हक विलेख करने पर स्टांप शुल्क 5.8 फीसदी लगता है। यूपी में है ये नियम उत्तर प्रदेश सरकार ने पुरखों की संपत्ति के बंटवारे से लेकर पारिवारिक संपत्ति को परिवार में ही दूसरे सदस्य के नाम करने पर महज 5000 रुपए स्टांप शुल्क तय कर दिया। इसके लिए स्टांप एवं निबंधन विभाग के नियमों को बदला जा रहा है। …तो मिले ये लाभ     पारिवारिक संपत्ति विवाद 60 फीसदी तक खत्म होंगे।     बंटवारा ये लेकर हक त्याग आसान और सस्ता होगा। परिवार में हक विलेख पर 1.3 फीसदी शुल्क, जबकि गिफ्ट पर नगरीय सीमा में दस फीसदी स्टांप ड्यूटी लगेगी। मप्र सरकार के नियम हैं, जो पूरे प्रदेश में समान तौर पर लागू होते हैं। स्वप्नेश शर्मा, जिला पंजीयक, भोपाल एमपी में प्रॉपर्टी खरीदना महंगा मध्य प्रदेश में 1 अप्रेल से प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री महंगी हो चुकी है। केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की बैठक में विभिन्न जिलों की नई कलेक्टर गाइडलाइन को मंजूरी दे दी गई है। इससे प्रदेश में जमीन की कीमतों में औसतन 16% की बढ़ोतरी हो गई है। प्रदेश में कुल एक लाख से अधिक लोकेशन में से करीब 65 हजार स्थानों पर रेट बढ़ाए गए हैं। हालांकि कुछ क्षेत्रों में रेट यथावत भी रखे हैं। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी इंदौर और भोपाल की प्रॉपर्टी में हुई है। विभिन्न जिलों में 5 से 300 प्रतिशत तक रेट बढ़ाए गए। भोपाल में अधिकतम 180 प्रतिशत तक रेट बढ़ेंगे। इंदौर में कई लोकेशन पर 300% इजाफा होगा। यही नहीं इस बार पक्के मकानों की निर्माण लागत भी बढ़ा दी गई है। बने हुए मकानों की रजिस्ट्री और महंगी हो जाएगी। नई गाइडलाइन 1 अप्रेल से लागू होने के बाद रजिस्ट्री के लिए नए रेट्स के आधार पर ही जमीन का मूल्यांकन किया जाएगा, इसी के अनुसार स्टाम्प और पंजीयन शुल्क लगेगा।

‘सुपर एल नीनो’ का कहर: सूखा, बाढ़ और हीटवेव से दुनिया परेशान, भारत के मानसून पर होगा असर

 नई दिल्ली  प्रशांत महासागर में बन रहा एल नीनो इस साल दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह एल नीनो बेहद ताकतवर हो सकता है, जो मौसम के पैटर्न को बदलकर कई देशों में सूखा, बाढ़ और गर्मी बढ़ा सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय प्रशांत महासागर में तेजी से गर्मी बढ़ रही है, जिससे एल नीनो बनने के संकेत मिल रहे हैं। यूरोपीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र के ताजा अनुमान के मुताबिक, इस साल सुपर एल नीनो बनने की संभावना काफी ज्यादा है। अगर ऐसा होता है, तो यह सिर्फ एक सामान्य जलवायु बदलाव नहीं होगा, बल्कि इसका असर कई सालों तक रह सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका प्रभाव 2027 तक वैश्विक तापमान को बढ़ा सकता है। एल नीनो तब बनता है जब प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। यह बदलाव छोटा लगता है, लेकिन इससे हवा की दिशा, बारिश और मौसम के पूरे सिस्टम में बड़ा बदलाव आ जाता है। कब बनता है 'सुपर एल नीनो' जब समुद्र का तापमान सामान्य से करीब 2 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा बढ़ जाता है, तब इसे 'सुपर एल नीनो' कहा जाता है। ऐसे मजबूत एल नीनो हर 10 से 15 साल में एक बार आते हैं, लेकिन जब आते हैं तो उनका असर ज्यादा बड़ा और लंबा होता है। अभी के मॉडल्स बता रहे हैं कि तापमान 1997-98 और 2015-16 जैसे बड़े एल नीनो के स्तर तक पहुंच सकता है। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यह पिछले 100 सालों में सबसे ताकतवर एल नीनो में से एक हो सकता है। हालांकि, हर एल नीनो एक जैसा नहीं होता और इसके असर अलग-अलग जगहों पर अलग तरह से दिखते हैं। भारत और दुनिया पर असर भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता मानसून को लेकर है। मजबूत एल नीनो के दौरान अक्सर बारिश कमजोर या असमान होती है, खासकर उत्तर और मध्य भारत में। इससे खेती, पानी की उपलब्धता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। दक्षिण-पूर्व एशिया और कैरेबियन के कुछ हिस्सों में सूखा और ज्यादा गर्मी पड़ सकती है। वहीं, दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट जैसे पेरू और इक्वाडोर में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, प्रशांत महासागर में चक्रवात और तूफान बढ़ सकते हैं, जबकि अटलांटिक महासागर में तूफानों की संख्या कम हो सकती है। एजेंसी ने यह भी कहा है कि इस साल देश में सूखे की आशंका करीब 30 फीसदी तक है, जबकि 40 फीसदी संभावना ऐसी है कि बारिश सामान्य से कम ही रहे। अब सबकी नजर सरकारी मौसम विभाग India Meteorological Department (IMD) पर टिकी हुई हैं। कहा जा रहा है कि सरकारी मौसम विभाग इस महीने के आखिर तक मानसून को लेकर अपना पहला आधिकारिक अनुमान जारी कर सकता है।  किस महीने कितनी होगी बारिश? निजी मौसम एजेंसी स्काइमेट के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक 2026 के मानसून सीजन में बारिश का पैटर्न संतुलित नहीं रहेगा। चार महीनों के इस सीजन में सिर्फ जून में सामान्य बारिश की उम्मीद जताई गई है, जबकि बाकी महीनों में बारिश औसत से कम रहने का अनुमान जताया गया है। स्काइमेट के अनुसार जून में बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज यानी एलपीए का करीब 101 फीसदी रह सकती है। इस महीने के सामान्य रहने की संभावना 40 फीसदी है, जबकि 40 फीसदी संभावना इसे सामान्य से कम रहने की भी है। जून का एलपीए 165.3 मिमी है। जुलाई महीने में बारिश एलपीए के 95 फीसदी तक रहने का अनुमान है, यानी यह सामान्य से कम रह सकती है। जुलाई के लिए सामान्य और कम बारिश, दोनों की संभावना 40-40 फीसदी बताई गई है। इस महीने का एलपीए 280.5 मिमी है। अगस्त-सितंबर में बारिश का हाल अगस्त में भी बारिश की स्थिति कमजोर हो सकती है। स्काइमेट का अनुमान है कि इस महीने बारिश एलपीए के 92 फीसदी तक ही रह सकती है। अगस्त में कम बारिश होने की संभावना करीब 60 फीसदी बताई गई है। इस महीने का एलपीए 254.9 मिमी है। वहीं सितंबर में भी राहत के संकेत नहीं हैं। देशभर में औसत बारिश एलपीए के 89 फीसदी रहने का अनुमान है, जो सामान्य से कम श्रेणी में आता है। सितंबर में कम बारिश होने की संभावना सबसे ज्यादा 79 फीसदी बताई गई है। इस महीने का एलपीए 167.9 मिमी है। कुल मिलाकर स्काइमेट के शुरुआती अनुमान से साफ है कि 2026 के मानसून में जून को छोड़कर बाकी तीनों महीनों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है। इससे खेती और जल संसाधनों पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है। अल नीनो की वापसी कमजोर मानसून का संकेत स्काईमेट के मैनेजिंग डायरेक्टर जतिन सिंह के मुताबिक, पिछले डेढ़ साल से सक्रिय 'ला नीना' की स्थिति अब समाप्त हो रही है। प्रशांत महासागर अब 'ईएनएसओ-न्यूट्रल' (ENSO-neutral) की ओर बढ़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मानसून के शुरुआती चरण में 'अल नीनो' (El Niño) के विकसित होने की संभावना है, जो सीजन के दूसरे भाग में और मजबूत हो सकता है। अल नीनो के कारण मानसून कमजोर पड़ सकता है और बारिश के वितरण में अनियमितता देखने को मिल सकती है। तापमान और मौसम का बढ़ता खतरा एल नीनो के कारण दुनिया के कई हिस्सों में तापमान बढ़ने की संभावना है। यूरोप, अफ्रीका, मिडिल ईस्ट, दक्षिण अमेरिका और अमेरिका के कुछ हिस्सों में ज्यादा और तेज हीटवेव देखने को मिल सकती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि मजबूत एल नीनो वैश्विक तापमान को नए रिकॉर्ड तक पहुंचा सकता है। ऐसे में 2027 का साल बेहद गर्म हो सकता है। साथ ही, गर्म हवा ज्यादा नमी को रोककर रखती है, जिससे जब बारिश होती है तो वह ज्यादा तेज और भारी होती है। इससे कुछ जगहों पर अचानक बाढ़ का खतरा भी बढ़ जाता है, जबकि दूसरी जगहों पर सूखा बना रहता है। अभी भी बनी हुई है अनिश्चितता हालांकि संकेत मजबूत हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी पूरी तरह निश्चित नहीं कहा जा सकता कि एल नीनो कितना ताकतवर होगा। आने वाले महीनों में इसके असर का सही अंदाजा लगेगा। अगर समुद्र का तापमान इसी … Read more

मध्यप्रदेश में रेल सेवाओं का हुआ ऐतिहासिक विस्तार, पिछले दो सालों में बड़ी उपलब्धि

मध्यप्रदेश में पिछले दो सालों में रेल सेवाओं में हुआ अभूतपूर्व विस्तार रेलवे ट्रैक की लंबाई बढ़कर हुई 5,200 किमी देश का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क डबल इंजन सरकार का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरा मध्यप्रदेश बेहतर रेल संपर्क से अगले दो सालों में अर्थ-व्यवस्था में आएगा बदलाव मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अथक प्रयासों का परिणाम, केंद्र से मिला सहयोग भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अथक प्रयासों के फलस्वरूप मध्यप्रदेश में पिछले दो सालों में रेल सेवाओं और बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। मध्यप्रदेश 'डबल इंजन सरकार' का एक शानदार उदाहरण बनकर उभरा है। अब प्रदेश भारत का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है और रेल कनेक्टिविटी में सबसे बड़ी हिस्सेदारी वाले शीर्ष दस राज्यों में से एक है। रेलवे ट्रैक की लंबाई बढ़कर 5,200 किलोमीटर हो गई है, जो देश के कुल रेल नेटवर्क का 7.6% है। बेहतर रेल सेवाओं के माध्यम से देश के सभी हिस्सों तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। मध्यप्रदेश के लिए आवंटित रेलवे बजट में 24 गुना वृद्धि हुई है। इस वर्ष 15,188 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो एक रिकॉर्ड है। पिछले वर्ष यह राशि 14,745 करोड़ रुपये थी। वर्ष 2009 से 2014 तक, वार्षिक बजट केवल 632 करोड़ रुपये था। वर्तमान में 1,18,379 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न रेल परियोजनाएँ अलग-अलग चरणों में चल रही हैं। आर्थिक विकास में आयेगी तेजी मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से केंद्र सरकार ने कई प्रमुख रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिससे राज्य को आर्थिक परिवर्तन की गति तेज करने में मदद मिली है। इस प्रगति का श्रेय केंद्र और राज्य सरकारों के बीच गहरी आपसी समझ और समन्वय को जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जबलपुर-गोंदिया रेलवे लाइन और इंदौर-मनमाड रेलवे लाइन के दोहरीकरण, तथा सिंहस्थ कुंभ मेला : 2028 के संदर्भ में अन्य अधोसंरचना विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी है। बड़ी उपलब्धि यह है कि राज्य में रेल लाइनों का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। अमृत भारत स्टेशन योजना में छह स्टेशनों – कटनी दक्षिण, नर्मदापुरम, ओरछा, सिवनी, शाजापुर और श्रीधाम – पर पुनर्विकास का काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा, पूरे राज्य में 74 स्टेशनों को अपग्रेड किया जा रहा है। यात्रियों के लिये 3,163 करोड़ रुपये की आधुनिक सुविधाएँ विकसित की जा रही है। वंदे भारत ट्रेनें यात्रियों के लिए वरदान साबित हुई हैं। इनमें भोपाल-नई दिल्ली, इंदौर-नागपुर, भोपाल-रीवा और खजुराहो-बनारस शामिल हैं। इंदौर और भोपाल में 2 मेट्रो ट्रेनें चल रही हैं, जिनसे शहरी आबादी को राहत मिली है। रायसेन ज़िले के उमरिया गाँव में 1800 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक रेल कोच निर्माण इकाई बनाई जा रही है। इससे 5000 लोगों को रोजगार मिलेगा। बड़े राज्यों में सीधा संपर्क जबलपुर-गोंदिया रेल लाइन के दोहरीकरण से महाकौशल क्षेत्र में बड़ा बदलाव आएगा। इससे पर्यटन, धार्मिक गतिविधियों और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। इस प्रोजेक्ट में 5,200 करोड़ रुपये से ज़्यादा का निवेश किया गया है। कान्हा नेशनल पार्क और धुआँधार जलप्रपात जैसे पर्यटन स्थलों में पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। इससे जबलपुर सहित मण्डला, सिवनी और बालाघाट जिलों को सीधा लाभ मिलेगा। व्यापार-व्यवसाय और पर्यटन क्षेत्र का विस्तार होगा। कोयला, इस्पात, सीमेंट, खाद्यान्न और उर्वरक के परिवहन में तेजी आयेगी। उद्योगों के लिये मजबूत सप्लाई चेन बनेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इंदौर-मनमाड रेलवे लाइन 18,036 करोड़ रुपये से ज़्यादा की लागत से बनाई जा रही है। इन रेलवे प्रोजेक्ट्स से मध्यप्रदेश को बड़े आर्थिक लाभ की उम्मीद है। इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन धार, खरगौन और बड़वानी जिलों को सीधा लाभ होगा। कृषि और व्यापार बढ़ेगा। बाजरा और अनाज उत्पादक जिलों की पहुँच बड़े बाजारों तक बनेगी। उज्जैन और ओंकारेंश्वर जैसे धार्मिक महत्व के शहरों से सम्पर्क बढ़ेगा। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, 3 नई ट्रेनें शुरू की गई हैं। रीवा से पुणे (जबलपुर और सतना होते हुए), जबलपुर से रायपुर (नैनपुर, बालाघाट और गोंदिया होते हुए), और ग्वालियर से बेंगलुरु (गुना और भोपाल होते हुए)। ये सेवाएँ कनेक्टिविटी को और भी बेहतर बनाएँगी। केंद्रीय मंत्रीमंडल ने 2 बड़े कमर्शियल हब-मुंबई और इंदौर – के बीच 309 किलोमीटर लंबी एक नई रेलवे लाइन को भी मंज़ूरी दी है। इन कमर्शियल केंद्रों को जोड़ने के अलावा, यह प्रोजेक्ट महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के उन क्षेत्रों को भी जोड़ेगा जहाँ अभी रेलवे कनेक्टिविटी नहीं है। यह रेलवे लाइन महाराष्ट्र के 2 ज़िलों और मध्यप्रदेश के 4 ज़िलों से होकर गुज़रेगी। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 18,036 करोड़ रुपये है, और यह 2028-29 तक पूरा हो जाएगा। यह प्रोजेक्ट पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। एकीकृत योजना के माध्यम से, यह यात्रा को आसान बनायेगा। सामान और सेवाओं के निर्बाध प्रवाह को संभव बनाएगा। यह परियोजना महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के 6 जिलों को कवर करेगी। इसमें 30 नए स्टेशन बनाए जाएंगे। इससे बड़वानी जैसा आकांक्षी जिला भी रेलवे कनेक्टिविटी से लाभान्वित होगा। लगभग 1,000 गांवों और लगभग 30 लाख लोगों को रेलवे कनेक्टिविटी की सुविधा मिलेगी। यह परियोजना जवाहरलाल नेहरू पोर्ट गेटवे पोर्ट और अन्य बंदरगाहों को पीथमपुर ऑटो क्लस्टर औद्योगिक केंद्र से भी जोड़ेगी। इस क्लस्टर में 90 बड़े उद्योग और 700 छोटे और मध्यम उद्यम हैं। इसके अतिरिक्त, यह परियोजना मध्यप्रदेश के बाजरा उत्पादक जिलों को महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक जिलों से जोड़ेगी, जिससे इन उत्पादों का देश के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों तक परिवहन आसान हो जाएगा। नई परियोजनाओं की शुरूआत भोपाल-रामगंज मंडी रेललाइन से राजगढ़ और भोपाल का सीधा संपर्क राजस्थान में हो जायेगा। इस 276 किमी लाइन में से 169 किमी पर काम पूरा हो गया है। इससे व्यापार, खेती और आम नागरिकों को सुविधा होगी। इटारसी-भोपाल-बीना और इटारसी-नागपुर चौथी रेललाइन को मंजूरी मिल चुकी है। वर्ष 2009 से 2014 के बीच जहां 145 कि.मी. नई रेल पटरियाँ बिछाई गईं, जिनका औसत 29 कि.मी. प्रति वर्ष रहा वहीं 2014 से 2025 तक, 2,651 कि.मी. नई पटरियाँ बिछाई गईं, जिनका औसत 241 कि.मी. प्रति वर्ष रहा, जो कि लगभग 8 गुना ज़्यादा है। वर्तमान में, 4,740 किमी के रेलवे प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिनकी अनुमानित लागत 89,543 करोड़ रूपये है। ये प्रोजेक्ट्स विकास के अलग-अलग चरणों में हैं। अब तक 2,092 किमी पर … Read more

सीएम मोहन यादव का ऐलान: 6 महीने में मध्य प्रदेश में लागू होगा यूसीसी, गोवा-उत्तराखंड मॉडल की करेंगे स्टडी

भोपाल  डॉ. मोहन यादव सरकार मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रियों से कहा कि यूसीसी का अध्ययन करें, इसे राज्य में लागू करना है। इस संकेत के बाद गृह विभाग में प्रक्रिया तेज हो गई है, क्योंकि यूसीसी बिल तैयार करने की जिम्मेदारी इसी विभाग की है। सूत्रों के अनुसार, जल्द ही राज्य स्तर पर एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाई जाएगी। इसी साल दिवाली से पहले प्रदेश में यूसीसी लागू किया जा सकता है। सूत्र बताते हैं कि समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तैयार करने से पहले गोवा और उत्तराखंड में कुछ समय पहले लागू किए गए यूसीसी का अध्ययन किया जा रहा है। जिससे मध्य प्रदेश के लिए व्यावहारिक और संतुलित मॉडल तैयार किया जा सके। ड्राफ्ट तैयार होते ही इसे कैबिनेट में पेश किया जाएगा। सरकार इसे राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से संवेदनशील मानते हुए सही समय पर कैबिनेट में लाने की रणनीति बना रही है। राज्य स्तरीय कमेटी बनने के बाद आगे की प्रक्रिया और ड्राफ्ट को कैबिनेट में पेश करने की टाइमलाइन तय की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक राज्य स्तर पर जल्द ही एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की जाएगी। ताकि 6 महीने में ही राज्य में यूसीसी को लागू किया जा सके। इसके लिए मध्य प्रदेश को दिल्ली से भी संकेत मिल चुके हैं। अन्य राज्यों के मॉडल का अध्ययन और अनुभव देख तैयार होगा प्रदेश का प्रारूप मध्य प्रदेश सरकार इस विषय पर अन्य राज्यों के मॉडल का भी अध्ययन करेंगी। इसमें गोवा सिविल कोड का अधिकारी अध्ययन करेंगी। खास तौर पर उन राज्यों के अनुभवों को देखा जा रहा है, जहां इस तरह के कानून पर काम हो चुका है या प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। इसके आधार पर प्रदेश के लिए उपयुक्त प्रारूप तैयार किया जाएगा। इसके बाद इसे कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा। मानसून सत्र 2026 में कैबिनेट में लाने की तैयारी, आ सकता है बड़ा फैसला यूसीसी बिल को लेकर मानसून सत्र 2026 में ही प्रस्ताव को कैबिनेट में लाया जा सकता है। सरकार की तैयारी है कि यूसीसी को मध्यप्रदेश में व्यावहारिक मॉडल को सोच-परख के साथ लाया जाए। किसी वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाए बिना इसे लागू किया जाएगा। इसके लिए बाकायदा कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों से चर्चा की जाएगी और पूरी व्यावहारिकता के साथ इसे लागू किया जाएगा। कुल मिलाकर यदि सबकुछ सरकार के मुताबिक सही रहा तो मानसून सत्र 2026 में ही इस पर बड़ा फैसला आने की उम्मीद भी है। यूसीसी लागू करने से क्या बदलेगा यूसीसी के लागू होते ही प्रदेश में सभी धर्मों के लिए शादी, तलाक, विरासत और यहां तक कि गोद लेने की प्रक्रिया के लिए नियम एक समान होंगे। वहीं अलग-अलग मान्यताएं और पर्सनल लॉ खत्म हो जाएंगे। शादी और तलाक के लिए हर धर्म के अपने अलग-अलग नियम है। यूसीसी के बाद विवाह पंजीयन अनिवार्य हो जाएगा। न्यूनतम आयु समान होगी, तलाक के कानूनी आधार सभी के लिए एक समान होंगे। जहां बहुविवाह वहां क्या बदलाव कई पर्सनल लॉ में एक से अधिक विवाह की अनुमति या गुंजाइश रखी गई है। यूसीसी लागू होते ही ऐसे पर्सनल कानून खत्म या व्यवस्था खत्म हो जाएगी। संपत्ति पर क्या दिखेगा असर यूसीसी लागू होने के बाद बेटियों को भी परिवार के बेटों के बराबर संपत्ति लेने का अधिकार होगा। यूसीसी लागू होते ही यह नियम सभी के लिए समान रूप से मानने योग्य होगा। मध्य प्रदेश के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या? मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में जनजातीय और विशेष पिछड़ी जनजातियां निवास करती हैं। जहां पारंपरिक विवाह पद्धतियां चलन में हैं। इन परंपराओं को यूसीसी में शामिल करना या अलग प्रावधान बनाना प्रदेश सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित होगा। इन प्रथाओं और परंपराओं में दापा प्रथा (वधू का मूल्य देना), भगेली/लम्सना विवाह (युवक-युवती भाग कर शादी करते हैं और बाद में समाज मान्यता देता है), सेवा विवाह (वधू मूल्य न देने पर लड़का ससुराल में रहकर सेवाएं देता है), वहीं नातरा प्रथा (विधवा पुनर्विवाह या साथी बदलने की अनुमति) जैसी प्रथाएं बड़ी चुनौती साबित होंगी। बता दें कि प्रदेश में आदिवासी जनजाति वर्ग की 47 फीसदी सीट आरक्षित हैं। वहीं सरकार हर वर्ग की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए यूसीसी लागू करने पर विचार कर रही है। ऐसे में यह सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी। किन राज्यों में यूसीसी लागू, कहां चल रही प्रक्रिया     मध्य प्रदेश में गठित होने वाली है कमेटी, मंत्री शुरू करेंगे यूसीसी का अध्ययन।     गुजरात में मार्च 2026 में बिल पास हुआ है, अब इसे लागू करने की तैयारी चल रही है।     उत्तरप्रदेश में भी यूसीसी लागू करने की तैयारियां जारी हैं।     असम में नवंबर 2025 में यूसीसी लागू किया गया। यहां बहू विवाह निषेध कानून पास हुआ, यूसीसी की दिशा में कदम बढ़ाया।     उत्तराखंड में फरवरी 2024 में बिल पास होने के बाद, 27 जनवरी 2025 को लागू किया गया।     गोवा में 1867 के पुर्तगाली सिविल कोड के कारण यहां यूसीसी पहले से लागू है। स्वतंत्र भारत का पहला राज्य जिसने लागू किया यूसीसी बता दें कि गोवा के बाद और स्वतंत्र भारत की बात की जाए तो यूसीसी को अपने यहां लागू करने वाला देश का पहला उत्तराखंड था। यूसीसी लागू करने के बाद से यहां शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। लिव इन रिलेशनशिप का 30 दिन में रजिस्ट्रेशन भी यहां अनिवार्य किया गया है। ऐसा न करने वालों पर 3 महीने तक जेल की सजा और जुर्माना या फिर दोनों का प्रावधान है। उत्तराखंड का मॉडल गुजरात ने किया फॉलो उत्तराखंड के मॉडल को ही गुजरात ने भी फॉलो किया। धोखे, दबाव या पहचान छिपाकर शादी को अपराध माना गया। इस पर 7 साल की सजा और जेल भी हो सकती है। 60 दिन में लिव इन रजिस्ट्रेशन कराना होगा। संपत्ति पर बेटे और बेटी का बराबर हक। एसटी को कानून से बाहर रखा गया है। असम में पूरी तरह लागू नहीं यूसीसी उधर असम ऐसा राज्य है जहां यूसीसी लागू है लेकिन पूरी तरह से नहीं। यहां बहु विवाह को अपराध घोषित किया गया है। वहीं छठी … Read more

कृषि मंत्री कंषाना ने कहा: किसानों के कल्याण के लिए राज्य सरकार उठा रही है महत्वपूर्ण कदम

किसानों के कल्याण, समृद्धि और खुशहाली के लिए राज्य सरकार द्वारा लिए जा रहे हैं महत्वपूर्ण निर्णय: कृषि मंत्री कंषाना पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ खेती के लिए नरवाई प्रबंधन को किया जा रहा है मजबूत भोपाल  किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल  सिंह कंषाना ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में किसानों के कल्याण समृद्धि और खुशहाली के लिए अनेक प्रयास किया जा रहे हैं। प्रदेश में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ यादव द्वारा किसानों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं। इस वर्ष गेहूं उपार्जन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये निर्धारित किया गया है। राज्य सरकार द्वारा घोषित 40 रुपये का अतिरिक्त बोनस सहित किसानों को 2625 रूपये प्रति किंवटल की राशि मिलेगी। कृषि मंत्री कंषाना ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ खेती के लिए नरवाई प्रबंधन को मजबूत किया जा रहा है। प्रदेश में धारा 163 के तहत नरवाई जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इसके तहत ढाई हजार रुपए से लेकर 15 हजार हजार रुपए तक जुर्माना लगाने का प्रावधान है। पराली प्रबंधन यंत्रों जैसे हैप्पी सीडर और सुपर सीडर पर अनुदान राशि प्रदान की जा रही है। किसानों को विभिन्न माध्यमों से पराली न जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। मंत्री कंषाना ने कहा कि राज्य सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2026 में सरसों उत्पादक किसानों के लिए भावांतर भुगतान योजना लागू की है। इसके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 5950 रूपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। बाजार मूल्य और न्यूनतम समर्थन मूल्य के अंतर की राशि किसानों के बैंक खातों में सीधे प्रदान की जायेगी। राज्य सरकार ने वर्ष 2026 में किसानों के लिए उड़द की सरकारी खरीद पर 600 रुपके प्रति क्विंटल का बोनस देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। उड़द का न्यूनतम समर्थन मूल्प 7800 रुपये प्रति किंवटल है जिसमें 600 रूपये अतिरिक्त बोनस सहित किसानों को 8400 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ मिलेगा। मंत्री कंषाना ने कहा कि मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा लगभग 55 लाख हेक्टेयर तक पहुँच गया है। राज्य सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर तक ले जाना है। प्रदेश में पीएम कुसुम योजना के तहत किसानों को सिंचाई के लिए सोलर पंप लगाने पर 90 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिल रही है।  मध्यप्रदेश में दुग्ध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम के माध्यम से दुग्ध उत्पादन और पशुपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीकों, उन्नत बीज और कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सेटेलाइट और ड्रोन सर्वे द्वारा फसलों की निगरानी की जा रही है। फूड प्रोसेसिंग यूनिट का विस्तार और मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश में जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रयास किये जा रहे है।  

प्रदेश में 9 से 23 अप्रैल तक मनाया जाएगा 8वां पोषण पखवाड़ा

प्रदेश में 9 से 23 अप्रैल तक मनाया जाएगा 8वां पोषण पखवाड़ा बच्चों के मस्तिष्क विकास पर रहेगा विशेष फोकस भोपाल  प्रदेश में 9 अप्रैल से 23 अप्रैल 2026 तक 8वां “पोषण पखवाड़ा” मनाया जाएगा। इस वर्ष पोषण पखवाड़े का मुख्य थीम “जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क का अधिकतम विकास (Maximizing Brain Development in the First Six Years of Life)” निर्धारित किया गया है। पखवाड़े का औपचारिक शुभारंभ 9 अप्रैल को आंगनवाड़ी केन्द्रों और समुदाय स्तर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया जाएगा। इस दौरान “पोषण पर चर्चा” कार्यक्रम के माध्यम से समुदाय के साथ संवाद स्थापित किया जाएगा। पोषण पखवाड़े में मुख्य रूप से मातृ एवं शिशु पोषण, जन्म से 3 वर्ष तक मस्तिष्क विकास के लिए प्रारंभिक प्रोत्साहन, 3 से 6 वर्ष तक खेल आधारित शिक्षा, बच्चों में स्क्रीन टाइम कम करने में परिवार और समुदाय की भूमिका तथा सशक्त आंगनवाड़ी निर्माण में सामुदायिक सहयोग जैसे विषयों पर गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार मानव मस्तिष्क का लगभग 85 प्रतिशत विकास जन्म से 6 वर्ष की आयु तक हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पोषण पखवाड़े में परिवारों और समुदायों में ऐसे व्यवहारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा, जो बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को मजबूत बनाते हैं। अभियान के तहत विभिन्न तिथियों पर गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य शिविर, पोषण संबंधी कहानी वाचन, दादी-नानी के अनुभव साझा कार्यक्रम, स्थानीय खाद्य सामग्रियों से पौष्टिक व्यंजन प्रतियोगिता, जंक फूड के दुष्प्रभावों पर जागरूकता रैली, बच्चों के विकासात्मक मील के पत्थरों की पहचान अभियान तथा माता-पिता के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा बच्चों में स्क्रीन टाइम कम करने, खेल आधारित सीखने, माता-पिता की भागीदारी बढ़ाने तथा सामुदायिक सहयोग से आंगनवाड़ी केन्द्रों को मजबूत बनाने के लिए भी विशेष गतिविधियाँ होंगी। 22 अप्रैल को पंखुड़ी पोर्टल के माध्यम से आंगनवाड़ी केन्द्रों के लिए सामुदायिक सहयोग एवं दान अभियान चलाया जाएगा, जबकि 23 अप्रैल को पोषण मेला आयोजित कर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाज के प्रभावशाली व्यक्तियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। पोषण पखवाड़े में सभी जिलों में रैलियां, पोषण वाटिका निर्माण, प्रश्नोत्तरी, पोस्टर एवं नारा लेखन प्रतियोगिता, सोशल मीडिया अभियान तथा आंगनवाड़ी केन्द्रों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही अभियान से संबंधित गतिविधियों की जानकारी पोषण अभियान के जन-आंदोलन डैशबोर्ड पर दर्ज की जाएगी। प्रदेश में इस अभियान के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास विभाग, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य, नगरीय प्रशासन एवं विकास तथा स्कूल शिक्षा विभाग सहित विभिन्न विभागों के समन्वय से कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।