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रायपुर की बैंक सखी आशा एक्का ने आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की, 5 करोड़ से ज्यादा का ट्रांजेक्शन

रायपुर : बैंक सखी बन आशा एक्का ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई इबारत, 5 करोड़ से अधिक का किया ट्रांजेक्शन बुजुर्गों और असहाय के लिए सहारा बनीं बैंक सखी आशा एक्का ग्रामीण अर्थव्यवस्था को डिजिटल क्रांति से जोड़ रही बिहान की दीदीयां रायपुर ग्रामीण अंचलों में महिला सशक्तिकरण और डिजिटल बैंकिंग को घर-घर पहुंचाने में 'बिहान' की दीदियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सरगुजा जिले के ग्राम कांति प्रकाशपुर की रहने वाली आशा एक्का आज जिले की उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं, जो घर की चारदीवारी से निकलकर आर्थिक आजादी की राह चुनना चाहती हैं। बैंक सखी और बैंक मित्र के रूप में सेवा वर्ष 2017 से 'बिहान' (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) से जुड़ी आशा एक्का ने अपनी 12वीं तक की शिक्षा का सदुपयोग करते हुए बैंक सखी और बैंक मित्र की जिम्मेदारी संभाली। वे न केवल एक गृहिणी हैं, बल्कि गाँव की बैंकिंग व्यवस्था की मुख्य कड़ी बन चुकी हैं। आशा बताती हैं कि उनके पति छोटे किसान हैं और घर पर किराना दुकान चलाते हैं, लेकिन बिहान से जुड़ने के बाद उनकी पहचान और आमदनी दोनों में बड़ा बदलाव आया है। बुजुर्गों और असहाय के लिए बनीं सहारा आशा का कार्य केवल ट्रांजेक्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सेवा भाव से भी कार्य कर रही हैं। गाँव की बुजुर्ग महिलाएँ जिन्हें पेंशन लेने दूर जाना पड़ता है या मनरेगा के मजदूर जिन्हें मजदूरी भुगतान के लिए बैंक के चक्कर काटने पड़ते हैं, आशा उन सभी का भुगतान गाँव में ही सुनिश्चित करती हैं। वे कहती हैं, "जो लोग बैंक आने-जाने में असमर्थ हैं, मैं उनके घर जाकर बैंकिंग सेवा प्रदान करती हूँ। जब वे खुशी से दुआएं देते हैं, तो काम की थकान मिट जाती है।" 5 करोड़ का ट्रांजेक्शन और आत्मनिर्भरता श्रीमती आशा एक्का अब तक लगभग 5 करोड़ रुपये का वित्तीय ट्रांजेक्शन कर चुकी हैं। इस कार्य से उन्हें हर  महीने 10 से 12 हजार रुपये की सम्मानजनक आय हो रही है। इस आर्थिक संबल से वे अपने दो बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिला पा रही हैं।  शासन की योजनाओं का जताया आभार अपनी सफलता का श्रेय केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को देते हुए आशा ने कहा कि बिहान योजना ने हम जैसी गरीब महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है। उन्होंने इस अवसर के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार करते हुए कहा कि आज हम जैसी हजारों ग्रामीण महिलाएं महिला सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण पेश कर रही हैं, जो न केवल अपने परिवार की आजीविका चला रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को डिजिटल क्रांति से भी जोड़ रही हैं।

तेल संकट का समाधान: मोदी सरकार ने अरुणाचल को बनाया भारत का नया ‘ऑयल फील्ड

नई दिल्ली ईरान जंग की वजह से दुन‍िया में तेल गैस का गंभीर संकट है. अभी तो सीजफायर हो गया है, लेकिन कब यह इलाका फ‍िर आग की चपेट में आ जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता. इसल‍िए मोदी सरकार ने अभी से ऐसी तैयारी शुरू कर दी है क‍ि तेल गैस का संकट ही नहीं रहेगा. सरकार ने अरुणाचल प्रदेश में दो बड़े हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देकर साफ कर दिया है कि भारत अब तेल के लिए खाड़ी देशों का मोहताज नहीं रहेगा. जान‍िए कैसे ये प्रोजेक्ट्स चीन की नाक के नीचे नॉर्थ-ईस्ट की किस्मत बदल देंगे।  जिस वक्त पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सीजफायर के बाद ईरान होर्मुज का ताला खोलता है या नहीं, या तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाती हैं या नहीं, ठीक उसी वक्त मोदी कैबिनेट ने एक बहुत बड़ा फैसला ल‍िया है. सरकार ने देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के ल‍िए मिशन मोड पर काम शुरू कर द‍िया है. बुधवार को केंद्रीय कैब‍िनेट ने अरुणाचल प्रदेश में जिन दो प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली दी, वे भारत को खाड़ी देशों के तेल पर निर्भरता कम करने और ग्रीन एनर्जी की तरफ बढ़ने में मदद करेंगे।  40,000 करोड़ का एनर्जी गिफ्ट     1200 मेगावाट का कालाई-II प्रोजेक्ट: अरुणाचल प्रदेश के अंजा जिले में बनने वाला यह प्रोजेक्ट लोहित बेसिन में पहला बड़ा हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट है.इस पर 14,105.83 करोड़ का खर्च आएगा. जब यह बनकर तैयार हो जाएगा तो इससे हर साल 4852.95 मिलियन यूनिट ब‍िजली का प्रोडक्‍शन होगा. यह THDC इंडिया लिमिटेड और अरुणाचल प्रदेश सरकार का जॉइंट वेंचर होगा, जिसे भारत सरकार की तरफ से फाइनेंशियल सपोर्ट मिलेगा. यह प्रोजेक्ट न केवल अरुणाचल में बिजली की सप्लाई सुधारेगा, बल्कि पीक डिमांड को मैनेज करने और नेशनल ग्रिड को बैलेंस करने में बहुत बड़ा योगदान देगा।     1720 मेगावाट का कमला प्रोजेक्ट: यह अरुणाचल प्रदेश का दूसरा बड़ा तोहफा है. इस प्रोजेक्ट की ताकत कालाई-II से भी ज्यादा है, जिससे पूरा क्षेत्र रोशनी से नहा उठेगा. जब ये दोनों प्रोजेक्ट्स अपनी पूरी क्षमता पर काम करेंगे, तो अरुणाचल प्रदेश भारत के लिए ‘बिजली का पावरहाउस’ बन जाएगा।  अरुणाचल बनेगा पावरहाउस और रोज़गार का हब मोदी सरकार का यह फैसला सिर्फ बिजली बनाने के लिए नहीं है, बल्कि यह नॉर्थ-ईस्ट के लोगों की साख और सम्मान से भी जुड़ा है. इन प्रोजेक्ट्स को बनाने और चलाने में हजारों लोगों की जरूरत होगी. बड़ी संख्या में लोगों को रोज़गार मिलेगा. इन प्रोजेक्ट्स तक पहुंचने के लिए अरुणाचल में लगभग 29 किलोमीटर की नई सड़कें और पुल बनाए जाएंगे. इससे पूरा इलाका मेनस्ट्रीम से जुड़ जाएगा. इन प्रोजेक्ट्स के शुरू होने से अरुणाचल प्रदेश को 12% बिजली बिल्कुल मुफ्त मिलेगी. इसके अलावा, एक अतिरिक्त 1% बिजली लोकल एरिया डेवलपमेंट फंड के लिए रिजर्व होगी, जिससे स्थानीय स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों का विकास होगा।  चीन की नाक के नीचे विकास का ‘डंका’ इस प्रोजेक्‍ट के पीछे एक बहुत बड़ी जियो-पॉलिटिकल ड‍िप्‍लोमेसी भी छिपी है. जिस इलाके में ये प्रोजेक्ट्स बन रहे हैं, उस पर चीन अक्सर अपनी नजरें गड़ाता रहता है. ऐसे संवेदनशील इलाके में ₹40,000 करोड़ का निवेश करना और हाइड्रो पावर के जरिए पानी पर अपना कंट्रोल मजबूत करना चीन के लिए एक बड़ा संदेश है. मोदी सरकार ने यह साफ कर दिया है कि नॉर्थ-ईस्ट भारत का अभिन्न हिस्सा है और यहां विकास की गति अब रुकने वाली नहीं है. यह एक्ट ईस्ट पॉलिसी का एक जबरदस्त उदाहरण है। 

नवीन शिक्षा नीति विद्यार्थियों को रोजगारमूलक शिक्षा प्रदान करने और संस्कृति एवं पारिवारिक मूल्यों से जोड़ने का कर रही है कार्य : स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह

भोपाल.  स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने गुरुवार को शाजापुर जिले में 58 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित सरदार वल्लभ भाई पटेल सांदीपनि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के नवीन भवन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने स्कूल की अरूण एवं उदय कक्षा का अवलोकन कर विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को नए भवन की शुभकामनाएं दी। छोटे-छोटे बच्चों ने अपने हाथों से बनाए पुष्पगुच्छ भेंटकर मंत्री सिंह का स्वागत किया। इसके उपरांत मंत्री सिंह ने प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में सहभागिता की। नवीन भवन के शुभारंभ अवसर पर मंत्री सिंह ने कहा कि यह दिन विद्यालय परिवार के लिए ऐतिहासिक है। आने वाले अनेक दशकों तक विद्यार्थी इस नवीन सांदीपनि विद्यालय में अध्ययन कर अपने भविष्य का निर्माण करेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लागू होने से शिक्षण व्यवस्था में व्यापक बदलाव आया है। मध्यप्रदेश इस नीति के क्रियान्वयन में अग्रणी राज्य रहा है। नवीन शिक्षा नीति विद्यार्थियों को रोजगारमूलक शिक्षा प्रदान करने के साथ ही उन्हें अपनी संस्कृति एवं पारिवारिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य कर रही है। प्रदेश में शासकीय विद्यालयों के परिणाम निरंतर बेहतर हो रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा प्रत्येक जिले में सांदीपनि विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं, जहां विद्यार्थियों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही विद्यालयों में विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें, साइकिल वितरण, विद्युत व्यवस्था, भवन निर्माण एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं निर्धारित समयावधि में उपलब्ध कराई जा रही हैं। मंत्री सिंह ने कहा कि विकास एक सतत प्रक्रिया है और व्यक्ति जीवनभर सीखता रहता है। विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए मंत्री सिंह ने कहा कि वे भविष्य में वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर सहित विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़कर प्रदेश और देश का नाम रोशन करें। कार्यक्रम के दौरान विधायक अरूण भीमावद की मांग पर मंत्री सिंह ने नवीन सांदीपनि विद्यालय भवन के लिए पानी की टंकी निर्माण, बहुउद्देशीय हॉल के लिए आधुनिकीकरण, सरदार वल्लभ भाई पटेल की 25 फीट ऊंची प्रतिमा की स्थापना, कक्षाओं के लिए शेष फर्नीचर उपलब्ध करने सहित  जिले के अन्य विद्यालयों के विकास के लिए करोड़ों रुपए की राशि देने की घोषणा की। गरीबी रेखा के नीचे और मध्यम वर्गीय परिवार का सपना पूरा कर रही सरकार कार्यक्रम के दौरान विधायक अरूण भीमावद ने कहा कि गरीबी रेखा के नीचे जीवन जीने वाले एवं मध्यम वर्गीय परिवार का सपना था कि निजी विद्यालय की तर्ज पर शासकीय स्कूल भवन हो, अच्छी शिक्षा और अच्छे शिक्षक मिले, यह सपना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह के नेतृत्व में साकार हुआ हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जिले में और भी सांदीपनि विद्यालय भवन बनेंगे। शिक्षा के क्षेत्र में अमूलचूल परिवर्तन जिले में दिखाई दे रहा हैं। इस नवीन विद्यालय भवन में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के विद्यार्थी अध्ययन करेंगे। क्षेत्रीय सांसद महेन्द्र सिंह सोलंकी ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में शाजापुर सहित प्रदेश के सभी जिले शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहे हैं।  प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों का विस्तार किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल रहा है। उन्होंने शिक्षकों एवं अभिभावकों से आग्रह किया कि बच्चों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ नैतिक मूल्यों की शिक्षा भी दें। बच्चों को देश सेवा की भावना, नशे से दूर रहने, यातायात नियमों एवं कानून का पालन करने के प्रति जागरूक बनाएं। उन्हें समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करें। बच्चों का सर्वांगीण विकास भारतीय संस्कृति के अनुरूप होना चाहिए। जब बच्चे अपनी संस्कृति और मूल्यों के साथ आगे बढ़ेंगे तभी उनमें से श्रेष्ठ डॉक्टर, वकील, इंजीनियर सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रतिभाएं विकसित होंगी। जिला शिक्षा अधिकारी राजेन्द्र शिप्रे ने जिले की शिक्षण व्यवस्था की प्रगति एवं उपलब्धियों पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी। विद्यार्थियों को पाठयपुस्तकों का किया वितरण कार्यक्रम के दौरान मंत्री सिंह एवं अन्य अतिथियों द्वारा विद्यार्थियों को नवीन शैक्षणिक सत्र के लिए पाठ्यपुस्तकों का वितरण किया गया। साथ ही कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने साइबर जागरूकता की शपथ ली। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष हेमराज सिंह सिसोदिया, नगर पालिका उपाध्यक्ष संतोष जोशी, विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती सविता सोनी, डॉ. रवि पाण्डे, योगेन्द्र सिंह जादौन (बंटी बना), विजय सिंह बैस, शीतल भावसार, आशीष नागर, राय सिंह मालवीय, उमेश टेलर, गोविंद नायक, हरिओम गोठी सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी, पालक एवं शिक्षक उपस्थित थे। 

EPFO 3.0 में होंगे ये अहम बदलाव: फटाफट विड्रॉल, UPI और पेंशन सुविधाएं

 नई दिल्‍ली अक्‍सर ईपीएफओ सर्विसेज को लेकर कर्मचारियों की शिकायत देखी गई है कि उन्‍हें क्‍लेम करने में देरी होती है, ज्‍यादा पेपरवर्क और कंपनी के ऊपर ज्‍यादा निर्भरता रहती है. इन्‍हीं सभी परेशानियों को दूर करने के लिए सरकार EPFO 3.0 लेकर आ रही है, जो जल्‍द ही लॉन्‍च हो सकता है, जिसके बाद PF का एक्‍सेस पूरी तरह से आसान हो जाएगा।  आपका क्‍लेम फटाफट सेटल होगा, पेपरवर्क बहुत कम हो जाएगा और नियोक्‍ता पर निर्भरता भी घट जाएगी. आप आसानी से ATM और UPI की मदद से पैसे की निकासी कर सकते हैं. EPFO 3.0 खासतौर पर कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन के सिस्‍टम का एक डिजिटल अपडेट है, जो मैन्‍युअल काम को कम करने और लाखों कस्‍टमर्स के लिए सर्विस डिस्‍ट्रीब्‍यूशन में सुधार करने के लिए डिजाइन किया गया है. आने वाले महीनों में इसको पूरी तरह से चालू किया जा सकता है, जिसमें से कई सुविधाएं पहले ही शुरू की जा चुकी हैं और अन्‍य पर काम चल रहा है।  फटाफट होगा क्‍लेम सेटलमेंट  सबसे बड़े बदलावों में से एक दावा क्‍लेम सेटलमेंट को लेकर है. ईपीएफओ ने दावों के ऑटो सेटलमेंट का विस्तार किया है और इसकी सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी है. विड्रॉल रिक्‍वेस्‍ट का एक बड़ा हिस्‍सा अब ऑटोमैटिक रूप से अप्रूव किया जा रहा है, जिससे समय की बचत हो रही है और मैन्‍युअल अप्रूवल की आवश्‍यकता कम हो रही है।  इस बदलाव से नियोक्‍ताओं पर निर्भरता भी कम हो रही है. पहले नौकरी बदलने पर PF अकाउंट में पैसा ट्रांसफर के लिए अक्‍सर कंपनी के अपूवल की आवश्‍यकता होती थी, जिससे देरी होती थी. नए सिस्‍टम के तहत KYC अनुपालन वाले अकाउंट्स के लिए ऐसे कई ट्रांसफर ऑटोमैटिक तरीके से किए जा रहे हैं, जिससे कर्मचारियों को अपने फंड को आसानी से ट्रांसफर करने की सुविधा मिल रही है।  UPI से विड्रॉल नए डेवलपमेंट के तहत एक अन्‍य महत्‍वपूर्ण सुविधा डिजिटल पेमेंट सिस्‍ट के माध्‍यम से पीएफ निकालने की क्षमता है. ईपीएफओ यूपीआई के माध्‍यम से विड्रॉल को सक्षम करने पर काम कर रहा है, जिससे मौजूदा प्रॉसेस की तुलना में पैसा सीधे बैंक अकाउंट में बहुत तेजी से जमा को सकेगी।  इसके साथ ही क्‍लेम फाइल करने, ट्रैक करने और निकासी जैसी सेवाओं को सुव्‍यवस्थित करने के लिए एक नया मोबाइल ऐप पेश किए जाने की उम्‍मीद है, जिससे फिजिकल पेपरवर्क या ऑफिस जाने की आवश्‍यकता और भी कम हो जाएगी।  यूनिफाइड पेंशन सिस्‍टम  ईपीएफओ 3.0 के तहत पेंशन सिस्‍टम को भी यूनिफाइड किया जा रहा है. लाभार्थियों के लिए पेंशन का तेजी से और ज्‍यादा समान वितरण सुनिश्चित करने के उद्देश्‍य से यूनिफाइड पेंशन पेमेंट सिस्टम पहले ही सभी कार्यालयों में लागू की जा चुकी है. पीएफ बचत तक पहुंच में देरी, तकनीकी गड़बड़ियों और प्रशासनिक अड़चनों को लेकर सालों से मिल रही शिकायतों के बाद सुधार की मांग उठाई गई है।  ऑटोमैटिक और डिजिटल वेरिफिकेशन की ओर बढ़ते हुए, सरकार इस सिस्‍टम को पारंपरिक नौकरशाही के बजाय बैंकिंग प्लेटफॉर्म की तरह कार्य करने का प्रयास कर रही है. हालांकि, अभी सभी सुविधाएं पूरी तरह से चालू नहीं हुई हैं. UPI बेस्‍ड विड्रॉल जैसी सर्विस और नए डिजिटल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के कुछ हिस्से अभी भी शुरू किए जा रहे हैं, और सिस्टम अभी भी बदलाव के दौर में है।  सैलरी कर्मचारियों के लिए, इन बदलावों का मतलब इमरजेंसी के दौरान पैसे तक तुरंत पहुंच, नौकरी बदलते समय खातों में पैसा ट्रांसफर की सुगमता और नियोक्ताओं या मध्यस्थों पर कम निर्भरता हो सकती है. साथ ही आसान पहुंच से पीएफ के यूज के तरीके में भी बदलाव आ सकता है, क्‍योंकि यह चिंता बनी हुई है कि बार-बार विड्रॉल से लॉन्गटर्म रिटायरमेंट सेविंग प्रभावित हो सकती है। 

भोपाल में छोटे तालाब और शाहपुरा तालाब के सुंदरीकरण के लिए नगर निगम ने 11.5 करोड़ रुपये की व्यापक योजना बनाई

भोपाल  छोटे तालाब और शाहपुरा तालाब को सुरक्षित करने और सुंदरीकरण के लिए नगर निगम ने व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के बाद काम भी शुरू करा दिया है। दोनों ही तालाबों के सुंदरीकरण पर नगर निगम का झील प्रकोष्ठ द्वारा करीब साढ़े 11 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। तालाबों में दशकों से जमा कचरे और मिट्टी के कारण तालाबों की गहराई कम हो गई थी, जिसे निकाला जाएगा। निगम प्रशासन ने वैज्ञानिक तरीके से गाद हटाने का निर्णय लिया है। तालाबों को संरक्षित करने के लिए पिचिंग का काम भी किया जाना है, लेकिन छोटे तालाब को वेटलैंड का हिस्सा होने की वजह से यहां पक्का निर्माण न करते हुए निगम पत्थरों को बिछाकर पिचिंग करा रहा है। तालाबों में मिलने वाले सीवेज के गंदे पानी को उपचारित करने के बाद ही तालाबों में छोड़ा जाएगा। छोटा तालाब के 1.4 किमी में होगी पिचिंग छोटे तालाब पर करीब 4.97 करोड़ रुपये की लागत से काम चल रहा है। करीब 1.4 किलोमीटर एरिया में कई जगह पर पुरानी पिचिंग उखड़ गई है, उसकी जगह पर नई पिचिंग बनाई जा रही है। डीसिल्टिंग कर तालाब के तल में जमी गाद को बाहर निकाला जाएगा। पांच नए फव्वारे भी लगाए जाएंगे। प्रोफेसर कॉलोनी वाले एरिया में नया पाथवे बनाया जाएगा और उसके किनारे पर पौधे लगेंगे। वर्तमान में बाणगंगा नाले से सीवेज सीधे मिलकर पानी को गंदा कर रहे पानी को उपचारित करने के लिए सीवेज प्रकोष्ठ 10 एमएलडी का एसटीपी लगाएगा। शाहपुरा तालाब के पास नया पार्क होगा विकसित शाहपुरा तालाब में भी इसी तरह डीसिल्टिंग कर गाद निकाली जाएगी और किनारों पर पिचिंग की जाएगी। यहां एक फव्वारा पहले से लगा हुआ है, जबकि सात नए फव्वारे लगाने का प्रस्ताव है। पंचशील नाला और चूनाभट्टी नाला के पानी के उपचार की व्यवस्था की जाएगी। तालाब के आसपास पाथवे का निर्माण, पौधरोपण और विद्युत व्यवस्था की जाएगा। बंसल अस्पताल के पास एक नया पार्क भी विकसित किया जाएगा। इस परियोजना पर करीब साढ़े छह करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इनका कहना है     शहर के तालाबों के सुंदरीकरण के लिए कार्य किए जा रहे हैं। तालाबों को सुरक्षित करने के लिए पिचिंग और उनकी गाद भी निकालने का काम किया जा रहा है।तालाबों में नए फव्वारे लगाए जाएंगे- तन्मय वशिष्ठ शर्मा, अपर आयुक्त।  

रायपुर: बंजर डंप क्षेत्र से हरा-भरा जंगल बनाने की दिशा में गेवरा की अनूठी पहल

रायपुर : बंजर डंप क्षेत्र से हरा-भरा जंगल बनने की ओर गेवरा की अनूठी पहल मिश्रित प्रजातियों के पौधों का सफल रोपण कर बंजर भूमि को हरियाली में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। कोरबा जिले के गेवरा परिक्षेत्र में स्थित 12.45 हेक्टेयर के डंप क्षेत्र में 33 हजार 935 मिश्रित प्रजातियों के पौधों का सफल रोपण कर बंजर भूमि को हरियाली में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। वन मंत्री केदार कश्यप ने छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम की इस पहल की सराहना की है। जहां हरियाली संभव नहीं थी, वहां उगा जंगल           कोयला खनन के बाद डंप क्षेत्रों में उपजाऊ मिट्टी नीचे दब जाती है, जबकि ऊपर पत्थर, कोयला अवशेष और अनुपजाऊ मिट्टी रह जाती है। ऐसे क्षेत्र आमतौर पर बंजर हो जाते हैं और वहां पौधों का उगना बेहद कठिन होता है। लेकिन वन विकास निगम के प्रयासों से यही बंजर भूमि अब धीरे-धीरे हरियाली से ढकती जा रही है। वैज्ञानिक पद्धति से किया गया वृक्षारोपण           डंप क्षेत्र में जल स्तर कम होने और पोषक तत्वों की कमी को ध्यान में रखते हुए विशेष उपाय किए गए। वर्मी कम्पोस्ट, नीमखली और डीएपी का उपयोग कर मिट्टी को उर्वर बनाया गया, जीपीएस सर्वे और सीमांकन के बाद व्यवस्थित गड्ढे तैयार किए गए, 3–4 फीट ऊंचाई के स्वस्थ पौधों का चयन कर रोपण किया गया। मिश्रित प्रजातियों से बढ़ेगी जैव विविधता            इस क्षेत्र में नीम, शीशम, सिरस, कचनार, करंज, आंवला, बांस, महोगनी, सहतूत, महुआ और बेल जैसी विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। इनसे आने वाले समय में यह क्षेत्र पक्षियों, गिलहरी और अन्य वन्य जीवों के लिए अनुकूल आवास बन सकेगा। निरंतर देखभाल से मिल रही सफलता           रोपण के बाद पौधों की नियमित देखभाल की जा रही है, जिसमें सिंचाई, निंदाई- गुड़ाई,खाद डालना, सुरक्षा और घास कटाई मृत पौधों का समय पर प्रतिस्थापन जैसे कार्य शामिल हैं। वर्ष 2025 से 2029 तक 5 वर्षों तक रखरखाव के बाद इस विकसित हरित क्षेत्र को एसईसीएल गेवरा को सौंपा जाएगा। प्रेरणादायक परिणाम          यह पहल दर्शाती है कि सही योजना, तकनीक और सतत प्रयासों से पत्थरीली व अनुपजाऊ भूमि को भी घने जंगल में बदला जा सकता हैl गेवरा का यह डंप क्षेत्र आने वाले वर्षों में एक सघन, हरित और जैव विविधता से भरपूर मानव-निर्मित जंगल के रूप में विकसित होगा, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरक पहल बन चुकी है।

नर सेवा-नारायण सेवा के मूलमंत्र को साकार कर रही है सरकार : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल.  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा है कि नर सेवा-नारायण सेवा मध्यप्रदेश की सरकार का मूलमंत्र है। मंत्री तोमर ने रेसकोर्स रोड स्थित सरकारी कार्यालय पर सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के 722 लाभार्थियों को हित लाभ के प्रमाण पत्र वितरित किए। ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि आपका यह सेवक जिस मुकाम पर है, यह आपके आशीर्वाद का ही प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि आज जिन 722 लाभार्थियों को सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है, यह उनका हक है, जो मध्य प्रदेश की कर्मशील सरकार द्वारा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हर जरुरतमंद के चेहरे पर खुशहाली लाना प्रदेश सरकार का संकल्प है। इसकी पूर्ति के लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। हमारा उद्देश्य सिर्फ विकास के सपने दिखाना या सिर्फ बातें करना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्य करना है। उन्होंने दोहराया कि हर जरुरतमंद के चेहरे पर खुशहाली लाना ही हमारा लक्ष्य है। मंत्री तोमर ने कहा कि विकास का यह सिलसिला अभी थमने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि शहर के प्रत्येक नागरिक को अच्छी शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराना ही शासन की प्राथमिकता है। हम जो कहते हैं, वह करके दिखाते हैं। हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि अपने जीवन में स्वच्छता को अपनाएंगे और एक नया स्वस्थ, हरा-भरा, नशा मुक्त समाज बनाएंगे। उन्होंने कहा कि हमें अपने शहर को साफ और सुंदर बनाने के लिए साथ मिलकर अपना सहयोग देना होगा। ऊर्जा मंत्री ने राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत प्रमाण पत्र प्रदान किए। इसमें 209 पेंशन प्रमाण पत्र, 205 राशन पात्रता पर्ची, 244 कामकाजी महिला कार्ड तथा 64 आयुष्मान कार्ड शामिल हैं।  

भारत का ‘त्रिदेव’ है S-400 और THAAD का मुकाबला, 10,000 KMPH की रफ्तार से अटैक, पलक झपकते ही नष्ट

नई दिल्ली ईरान जंग ने पूरी दुनिया को एक बार फिर से हथियारों की रेस में धकेल दिया है. यूरोप से लेकर चीन, भारत समेत तमाम देश अपनी क्षमताओं के अनुसार डिफेंस सिस्‍टम को अपग्रेड करने में जुटा है. मॉडर्न वॉरफेयर में फाइटर जेट, मिसाइल और ड्रोन की भूमिका बेहद अहम हो चुकी है. ईरान की कम लागत वाली शाहेद ड्रोन ने अमेरिका और इजरायल को गहरे जख्‍म दिए हैं. वहीं, अमेरिका-इजरायल की घातक मिसाइलों ने ईरान को तबाही की दहलीज पर ला खड़ा किया है. इसमें एक बात सबसे अहम है – अमेरिका, इजरायल और ईरान एक-दूसरे की जमीन पर गए बिना ही तबाही लाई है. विध्‍वंस की ऐसी लकीर खींच दी गई है, जिससे पूरी दुनिया में डर और भय का आलम है. यही वजह है कि अब यूरोप के साथ ही जापान जैसे देश भी अपनी सुरक्षा को लेकर फ‍िक्रमंद हो गए हैं. नई टेक्‍नोलॉजी की मदद से कट‍िंग एज वेपन सिस्‍टम डेवलप करने में अरबों डॉलर का इन्‍वेस्‍टमेंट करने की योजना बनाई जा रही है. भारत भी इस रेस में पीछे नहीं रहना चाहता है. नेशनल एयर डिफेंस सिस्‍टम प्रोजेक्‍ट मिशन सुदर्शन चक्र पर काम शुरू हो चुका है. इसके साथ ही एक और डिफेंस प्रोजेक्‍ट पर काम चल रहा है. इसके पूरा होने पर एक ऐसा सिस्‍टम डेवलप होगा, जिसके प्रहार के सामने S-400, THAAD, HQ-9B और आयरन डोम जैसे अत्‍याधुनिक वायु रक्षा प्रणाली भी पस्‍त हो जाएंगे. इस हाइपरसोनिक सिस्‍टम में 3 मिसाइलें होंगी, जिससे हवा, पानी और आसमान अभेद्य क‍िला बन जाएगा. भारत के इस ‘त्रिदेव’ के सामने चीन-पाकिस्‍तान जैसे देशों की हालत खराब होनी तय है । जानकारी के अनुसार, भारत की हाइपरसोनिक तकनीक को लेकर महत्वाकांक्षा अब केवल भविष्य की योजना नहीं रही, बल्कि तेजी से वर्तमान सैन्य क्षमता में बदलती दिखाई दे रही है. देश एक बहुस्तरीय (मल्टीलेयर) हाइपरसोनिक स्ट्राइक नेटवर्क विकसित कर रहा है, जो परमाणु प्रतिरोध (Nuclear Detterent), समुद्री प्रभुत्व और अत्यधिक सटीक हमलों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है. ‘डिफेंस डॉट इन’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस रणनीतिक बदलाव के केंद्र में तीन अत्याधुनिक और आपस में जुड़े वेपन सिस्टम हैं – ध्वनि हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (Dhvani HGV), लॉन्ग-रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (LR-AShM) और एक्सटेंडेड ट्रैजेक्टरी लॉन्ग ड्यूरेशन हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल (ET-LDHCM). ये तीनों मिलकर भारत की सैन्य ताकत को नई ऊंचाई देने की दिशा में काम कर रहे हैं । ध्‍वनि हाइपरसोनिक ग्‍लाइड व्‍हीकल ध्वनि हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल भारत के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है. यह लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम है और परमाणु पेलोड ले जाने की क्षमता रखता है. इसकी रफ्तार मैक-5 से कहीं अधिक बताई जा रही है और इसकी रेंज करीब 10,000 किलोमीटर तक हो सकती है. खास बात यह है कि यह ऊपरी वायुमंडल (upper atmosphere) में अनियमित रास्तों पर ग्लाइड करता है, जिससे इसे ट्रैक और इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल हो जाता है. वर्ष 2026 के दौरान इसके ट्रायल में हीट-रेजिस्टेंट मैटेरियल, टार्गेटिंग सॉफ्टवेयर और अंतिम चरण की नेविगेशन सिस्‍टम की विश्वसनीयता पर फोकस किया जा रहा है । लॉन्ग-रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल दूसरी ओर, LR-AShM भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तैयार की जा रही है. लगभग 1,500 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली यह मिसाइल चलती मोबाइल नेवी वॉरशिप के साथ-साथ जमीन पर मौजूद लक्ष्यों को भी निशाना बना सकती है. इसका मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में विरोधियों की गतिविधियों को सीमित करना है. इस मिसाइल की खासियत यह है कि इसमें पूरी तरह स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक्स और सेंसर का उपयोग किया गया है, जिससे विदेशी निर्भरता समाप्त होती है. इसके भूमि, समुद्र और हवा से लॉन्च किए जाने वाले संस्करण विकसित किए जा रहे हैं, जो इसे एक व्यावहारिक युद्धक हथियार बनाते हैं। एक्सटेंडेड ट्रैजेक्टरी लॉन्ग ड्यूरेशन हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल ET-LDHCM इस हाइपरसोनिक ट्राएंगल का तीसरा महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो क्रूज मिसाइल और ग्लाइड व्हीकल के बीच की कड़ी का काम करता है. वर्ष 2025 में इसके महत्वपूर्ण परीक्षण किए गए थे. यह मिसाइल मैक-8 (तकरीबन 10 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार) से अधिक की गति से उड़ान भर सकती है और 1,500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय कर सकती है. इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी लचीलापन (वर्सेटिलिटी) है. यह उड़ान के दौरान अपना रास्ता बदल सकती है और इसे हवाई जहाज, नौसैनिक जहाज या जमीन से लॉन्च किया जा सकता है. यह उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों को भेदने में सक्षम मानी जा रही है। हाइपरसोनिक मिसाइल क्या होती है? हाइपरसोनिक मिसाइल ऐसी उन्नत हथियार प्रणाली है, जो ध्वनि की गति (मैक 1) से कम से कम पांच गुना यानी मैक 5 या उससे अधिक रफ्तार से उड़ती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी अत्यधिक गति, सटीकता और रास्ता बदलने की क्षमता है, जिससे इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है। यह पारंपरिक बैलिस्टिक या क्रूज मिसाइलों से कैसे अलग है? बैलिस्टिक मिसाइलें तय प्रक्षेपवक्र (trajectory) में ऊपर जाकर गिरती हैं, जबकि क्रूज मिसाइलें कम ऊंचाई पर उड़ती हैं लेकिन उनकी गति अपेक्षाकृत कम होती है. हाइपरसोनिक मिसाइल इन दोनों का संयोजन मानी जाती है—यह बहुत तेज होती है और उड़ान के दौरान दिशा बदल सकती है, जिससे दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणाली इसे ट्रैक करना मुश्किल पाती है। हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी के प्रमुख प्रकार कौन-कौन से हैं? मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं – हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV), जिसे रॉकेट से ऊंचाई पर ले जाकर छोड़ा जाता है, जहां से यह ग्लाइड करते हुए लक्ष्य तक पहुंचता है. दूसरा, हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल (HCM) जो स्क्रैमजेट इंजन से संचालित होती है और पूरे रास्ते हाइपरसोनिक स्‍पीड बनाए रखती है। दुनिया में किन देशों के पास यह तकनीक है? इस क्षेत्र में अमेरिका, रूस और चीन सबसे आगे माने जाते हैं. रूस ने ‘किंजल’ और ‘अवांगार्ड’ जैसे सिस्टम तैनात किए हैं, जबकि चीन ने भी कई सफल परीक्षण किए हैं. अमेरिका भी इस टेक्नोलॉजी पर तेजी से काम कर रहा है। भारत की स्थिति क्या है? भारत भी हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी में तेजी से प्रगति कर रहा है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर व्हीकल (HSTDV) का सफल परीक्षण किया है. इसके अलावा, लंबी दूरी की हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलों पर भी काम जारी … Read more

एम्स भोपाल से मातृ मृत्यु के वैज्ञानिक कारणों की पहचान, बिना किसी झंझट के फ्री पैथोलॉजिकल ऑटोप्सी

भोपाल  प्रदेश में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) की स्थिति को सुधारने और प्रसव के दौरान होने वाली मौतों के वास्तविक कारणों की पहचान के लिए एम्स भोपाल में अब मातृ मृत्यु के मामलों में मुफ्त पैथोलॉजिकल (क्लिनिकल) ऑटोप्सी की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। यह सेवा उन परिवारों के लिए मददगार साबित होगी जो अपनी प्रियजन की असामयिक मृत्यु के पीछे के वैज्ञानिक कारणों को समझना चाहते हैं। खास बात यह है कि यह पूरी प्रक्रिया पुलिस हस्तक्षेप से मुक्त है और पूरी तरह गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न की जाती है। आमतौर पर ऑटोप्सी या पोस्टमार्टम का नाम आते ही पुलिस और कानूनी कार्यवाही का विचार आता है, लेकिन एम्स की यह सुविधा इससे पूरी तरह अलग है। यह एक क्लिनिकल ऑटोप्सी है, जो केवल परिवार के लिखित अनुरोध और सहमति पर की जाती है। इसमें पुलिस की कोई भूमिका नहीं होती। इसका मुख्य उद्देश्य चिकित्सा विज्ञान की मदद से मृत्यु के उन कारणों को खोजना है, जो सामान्य जांच में स्पष्ट नहीं हो पाते। एम्स प्रबंधन के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया लगभग डेढ़ घंटे में पूरी हो जाती है। विशेषज्ञों द्वारा केवल जांच के लिए आवश्यक सूक्ष्म ऊतक ही लिए जाते हैं और सभी अंगों को पुनः शरीर में सुरक्षित स्थापित कर दिया जाता है। चेहरे को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचाई जाती और शरीर को टांकों से सुरक्षित कर ससम्मान परिवार को सौंपा जाता है। इसलिए जरूरी है जांच     हिस्टोपैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी रिपोर्ट के जरिए परिवार को पता चलता है कि मृत्यु के वास्तविक कारण क्या थे।     इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलती है कि कौन सी मौतें रोकी जा सकती थीं।     प्रमाणिक डेटा के आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं में आवश्यक सुधार किए जा सकेंगे। इनका कहना है     मातृ मृत्यु के मामलों को कम करना हमारी प्राथमिकता है। पैथोलाजिकल आटोप्सी के माध्यम से हम मृत्यु के उन सूक्ष्म कारणों तक पहुंच सकते हैं, जो भविष्य में अन्य महिलाओं की जान बचाने के लिए प्रभावी रणनीति बनाने में मदद करेंगे- प्रो. डा. माधवानन्द कर, कार्यपालक निदेशक, एम्स भोपाल।  

मोहला : पीएम-आशा योजना में किसानों को राहतः चना, मसूर और सरसों पंजीयन की तिथि 20 अप्रैल तक बढ़ी

मोहला : पीएम-आशा योजना में किसानों को राहतः चना, मसूर और सरसों पंजीयन की तिथि 20 अप्रैल तक बढ़ी – रबी फसल उपार्जन हेतु पंजीयन जारी, नेफेड खरीदेगा एमएसपी पर चना, मसूर और सरसों – किसानों को 20 अप्रैल तक करना होगा पंजीयन, समर्थन मूल्य पर होगी फसलों की खरीदी मोहला  प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान पीएमआशा योजना के अंतर्गत प्राइस सपोर्ट स्कीम के तहत दलहनी एवं तिलहनी फसलों चनाए मसूर और सरसों की खेती करने वाले किसानों के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि बढ़ाकर अब 20 अप्रैल 2026 कर दी गई है। पहले यह तिथि 31 मार्च 2026 निर्धारित थी। रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए किसानों को एकीकृत किसान पोर्टल  https://kisan.cg.nic.in/ पर पंजीयन कराना अनिवार्य होगा, जिसके लिए वे अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के माध्यम से सेवा सहकारी समितियों में आवेदन जमा कर सकते हैं। आवेदन के साथ ऋण पुस्तिका बी-1, पी-II आधार कार्ड और बैंक पासबुक की छायाप्रति देना आवश्यक है।          राज्य शासन के निर्देशानुसार, जिन किसानों की गिरदावली या डीसीएस अपूर्ण है, उनके फसल और रकबे के सत्यापन हेतु पटवारी एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर से जारी प्रमाण पत्र मान्य किया जाएगा। इसके आधार पर अधिसूचित सहकारी समितियां उपार्जन की प्रक्रिया पूरी करेंगी। जिले में उपार्जन कार्य के लिए भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ नेफेड को केंद्रीय एजेंसी के रूप में नियुक्त किया गया है, जो पंजीकृत किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपज खरीदेगी।         सरकार द्वारा रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया गया है, जिसमें चना 5875  रुपए प्रति क्विंटल, मसूर 7000 रुपए प्रति क्विंटल और सरसों 6500 रुपए प्रति क्विंटल शामिल हैं। उपार्जन के लिए जिले में विकासखंड मोहला की आदिम जाति सेवा सहकारी समिति गोटाटोला और विकासखंड चौकी की आदिम जाति सेवा सहकारी समिति आमाटोला को अधिकृत केंद्र बनाया गया है। किसानों से सप्ताह में सोमवार से शुक्रवार तक उपज खरीदी जाएगी। योजना के तहत प्रति एकड़ चना 6 क्विंटल, मसूर 2 क्विंटल और सरसों 5 क्विंटल की सीमा तक समर्थन मूल्य पर खरीदी की जाएगी।