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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर सुर्खियों में, पाकिस्तान के संयुक्त गश्त प्रस्ताव पर चर्चा तेज

नई दिल्ली  अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता बेनतीजा रही। इस दौरान दोनों देशों के बीच किसी भी बात को लेकर आम सहमति नहीं बनी। यह वार्ता भले ही सिर्फ दो देशों के बीच हुई, लेकिन दुनिया की निगाहें इसपर टिकी हुई थीं। इसका सबसे बड़ा केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज था, जिसपर युद्ध के बाद से ही पहरा है। हालांकि, शनिवार को इस समुद्री मार्ग से कम से कम 16 जहाज गुजरे। युद्धविराम के बाद का अब तक का सबसे व्यस्त दिन रहा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी नौसेना के गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS फ्रैंक ई. पीटरसन और USS माइकल मर्फी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन जहाजों को विशेष रूप से ईरानी समुद्री बारूदी सुरंगों को साफ करने के अभियान में लगाया गया है ताकि जहाजों के लिए रास्ता सुरक्षित किया जा सके। नौसेना की निगरानी करने वाली संस्था 'मैरीन ट्रैफिक' ने बताया कि USS माइकल मर्फी की सुरक्षा में चीन, हांगकांग और लाइबेरिया के झंडे वाले तीन विशाल कच्चे तेल के टैंकरों को सफलतापूर्वक मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अपने संक्षिप्त संबोधन में होर्मुज (Strait of Hormuz) के फिर से खोलने जैसे संवेदनशील विषय पर किसी भी असहमति का जिक्र नहीं किया। आपको बता दें कि यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग का बंद होना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा माना जा रहा है। पाकिस्तान का संयुक्त गश्त प्रस्ताव इस्लामाबाद में संपन्न अमेरिका-ईरान सीधी बातचीत में पाकिस्तान ने इस विवादित जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही बहाल करने के लिए एक रूपरेखा पेश की है। अल जजीरा अरबी की रिपोर्ट के अनुसार, एक सूत्र ने पुष्टि की है कि पाकिस्तान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में संयुक्त गश्त का प्रस्ताव दिया। इसका मकदसद, अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए इस मार्ग को सुरक्षित और बाधा रहित बनाना है। पाकिस्तान ने सुझाव दिया है कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए इस रणनीतिक जलमार्ग की निगरानी में संयुक्त तंत्र विकसित किया जाए। होर्मुज का खुलना क्यों जरूरी? दुनिया के कुल तेल निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। युद्ध के दौरान इस मार्ग के बाधित होने से वैश्विक तेल बाजार में भारी अस्थिरता पैदा हो गई थी। अब जबकि शनिवार को एक ही दिन में 16 जहाजों ने इसे पार किया है, यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत के संकेत हैं।

रील से रियल पॉलिटिक्स तक: अंकिता परमार की एंट्री, पार्टी में ही विरोध

बड़ोदरा गुजरात में स्थानीय निकाय चुनावों का बिगुल बज चुका है और जैसे ही भाजपा ने अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की, वडोदरा की पोर जिला पंचायत सीट अचानक चर्चा के केंद्र में आ गई. बीजेपी ने यहां से सोशल मीडिया स्टार अंकिता परमार को चुनावी मैदान में उतारकर सबको चौंका दिया है. अंकिता के इंस्टाग्राम पर लाखों फॉलोअर्स हैं, लेकिन चुनावी राजनीति की जमीन पर उनकी एंट्री इतनी आसान नहीं दिख रही. दरअसल, अंकिता को टिकट मिलते ही पार्टी के अंदर पुरानी और जमीनी कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामने आने लगी है. भाजपा की ही पुरानी कार्यकर्ता नयना परमार ने अंकिता के खिलाफ खुलेआम बागी तेवर अपना लिए हैं. नयना ने न केवल विरोध जताया, बल्कि निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा भी कर दी है. माना जा रहा है कि नयना का यह कदम अंकिता के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है. इस बगावत की वजह से भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगने का बड़ा डर है. पार्टी के लिए अब चुनौती यह है कि वह अपनों को कैसे मनाए, क्योंकि अगर वोट बंटते हैं तो इसका सीधा फायदा विरोधियों को मिल सकता है. . राजनीति और सोशल मीडिया का मेल अंकिता परमार के लिए राजनीति कोई नई चीज नहीं है. 5 साल पहले वे तालुका पंचायत की सदस्य चुनी गई थीं और ढाई साल तक अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी संभाली. रायपुर की कलिंगा यूनिवर्सिटी से बी.कॉम करने वाली अंकिता फिलहाल प्रदेश युवा मोर्चा की उपाध्यक्ष हैं. उन्होंने राजनीति के साथ-साथ सोशल मीडिया पर अपनी एक जबरदस्त पहचान बनाई है. यही वजह है कि उनकी रील के साथ-साथ उनकी कार्यशैली की भी चर्चा होती रही है. वे जानती हैं कि आज के दौर में जनता तक पहुंचने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म कितना जरूरी है और इसी का फायदा उन्हें इस चुनाव में मिल सकता है. अंकिता का जन्म वडोदरा में हुआ, लेकिन उनकी शादी पोर गांव में हुई. उनके ससुर 45 सालों तक सक्रिय राजनीति में रहे और उन्हीं के नक्शेकदम पर चलते हुए अंकिता ने इस फील्ड में कदम रखा. अंकिता का मानना है कि महिलाओं को 'इंडिपेंडेंट' यानी आत्मनिर्भर होना चाहिए. वे पीएम मोदी के 'फिट इंडिया' अभियान की बड़ी फैन हैं और खुद का जिम भी चलाती हैं, जहाँ वे रोज जमकर वर्कआउट करती हैं. वे अक्सर अपने वीडियो के जरिए युवाओं को स्वस्थ रहने का संदेश देती हैं, जिससे उनकी एक अलग ही 'फैन फॉलोइंग' बन गई है. भाजपा को उम्मीद है कि अंकिता की लोकप्रियता का फायदा उन्हें चुनावों में मिलेगा. पार्टी को लगता है कि एक युवा चेहरा, जो सोशल मीडिया पर सक्रिय हो, युवाओं और महिलाओं को ज्यादा बेहतर ढंग से पार्टी से जोड़ सकता है. अब देखना होगा कि सोशल मीडिया पर रील से दिल जीतने वाली अंकिता, क्या जनता का वोट भी जीत पाती हैं. क्या उनकी डिजिटल लोकप्रियता उन्हें जिला पंचायत की दहलीज तक पहुंचा पाएगी, यह आने वाले चुनाव के नतीजे तय करेंगे.

महंगे और अनुपलब्ध गैस सिलेंडर ने बढ़ाई मुश्किलें, उधना स्टेशन पर उमड़ी भीड़

सूरत गुजरात के सूरत में इन दिनों घरेलू गैस सिलेंडर की किल्लत ने गंभीर सामाजिक संकट खड़ा कर दिया है. मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण सप्लाई प्रभावित होने और स्थानीय स्तर पर कालाबाज़ारी बढ़ने से आम लोगों, खासकर प्रवासी श्रमिकों के लिए हालात बेहद मुश्किल हो गए हैं. स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि बड़ी संख्या में मजदूर शहर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं. स्टेशन पर भीड़, खुले मैदान में परिवार के साथ बैठे नजर आए लोग शनिवार रात और रविवार सुबह उधना रेलवे स्टेशन पर हजारों श्रमिकों की भीड़ देखने को मिली. रेलवे स्टेशन के वेटिंग एरिया से लेकर खुले मैदान तक लोग अपने परिवारों के साथ बैठे नजर आए. ट्रेनों में सफर करने के लिए लंबी कतारें लगी हुई थीं, जिससे साफ है कि पलायन का सिलसिला पिछले एक महीने से लगातार जारी है. मजदूरों ने बताया कि उन्हें सामान्य कीमत पर गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा है. कई लोगों का कहना है कि सिलेंडर या तो उपलब्ध नहीं है या फिर ब्लैक में कई गुना ज्यादा कीमत पर बेचा जा रहा है. सीमित आय वाले इन श्रमिकों के लिए इतना महंगा सिलेंडर खरीद पाना संभव नहीं है. ऐसे में खाना बनाना और रोजमर्रा का जीवन चलाना कठिन हो गया है. श्रमिकों का पलायन उद्योगों के लिए भी बना चिंता का विषय एक श्रमिक ने बताया कि “काम तो मिल रहा है, लेकिन खाना बनाने के लिए गैस नहीं है. महंगे सिलेंडर खरीदना हमारे बस की बात नहीं है, इसलिए गांव लौटना ही बेहतर विकल्प है.” कई परिवारों ने भी यही कारण बताते हुए शहर छोड़ने का निर्णय लिया है. आपको बता दें कि सूरत देश का एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र है, जहां टेक्सटाइल और डायमंड इंडस्ट्री में लाखों प्रवासी मजदूर काम करते हैं. ऐसे में श्रमिकों का यह पलायन उद्योगों के लिए भी चिंता का विषय बनता जा रहा है. यदि यही स्थिति बनी रही, तो उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है. फिलहाल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती गैस की आपूर्ति को सामान्य करना और कालाबाज़ारी पर सख्ती से रोक लगाना है. जब तक यह समस्या हल नहीं होती, तब तक सूरत से श्रमिकों का पलायन जारी रहने की आशंका बनी हुई है.

भारतीय मूल के अरविंदर का जलवा: Cricket Canada के प्रधान चुने गए, जीत दर्ज

फिरोजपुर. दुनियाभर में बसे पंजाबियों के लिए गर्व का क्षण तब बना, जब फिरोजपुर के गांव कोठा अंबरहर के रहने वाले अरविंदर सिंह खोसा ने क्रिकेट कनाडा के प्रधान पद का चुनाव जीत लिया। उनकी इस उपलब्धि से क्षेत्र में खुशी का माहौल है और लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं। इस संबंध में जानकारी देते हुए उनके पूर्व शारीरिक शिक्षा अध्यापक और राज्य व राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता गुरनाम सिद्धू गामा ने बताया कि अरविंदर सिंह खोसा बचपन से ही खेलों में रुचि रखते थे। उनके पिता स्वर्गीय निशान सिंह खोसा और चाचा सुखवंत सिंह खोसा की प्रेरणा से उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरू किया। अरविंदर सिंह खोसा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा डाल चंद सीनियर सेकेंडरी स्कूल से प्राप्त की, जबकि उच्च शिक्षा गुरु नानक कॉलेज से पूरी की। उनके खेलने के अंदाज के कारण उनके साथी उन्हें ‘अफरीदी’ कहकर बुलाते थे। अदालत से मिली सफलता कनाडा से फोन पर बातचीत करते हुए अरविंदर खोसा ने बताया कि वहां क्रिकेट संस्था के चुनाव लंबे समय से नहीं हो पा रहे थे। इन चुनावों को करवाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दबाव था। उन्होंने बताया कि पहले उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत के आदेश के बाद शुक्रवार को चुनाव कराए गए, जिसमें 10 में से 8 राज्यों ने उनके पक्ष में मतदान किया। इस तरह उन्होंने बड़ी बढ़त के साथ जीत हासिल की। क्रिकेट के विकास के लिए करेंगे मेहनत अरविंदर खोसा ने कहा कि वह इस जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाएंगे और कनाडा में क्रिकेट के विकास के लिए पूरी मेहनत करेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में वहां क्रिकेट को नई दिशा मिलेगी। उनकी इस सफलता पर पूर्व विधायक कुलबीर सिंह जीरा, गुरनाम सिद्धू, सुखजिंदर सिंह कुलगढ़ी, गुरभेज सिंह, लखविंदर सिंह, अभिनेता हरिंदर भुल्लर सहित कई प्रमुख लोगों ने उन्हें बधाई दी। लोगों का कहना है कि अरविंदर खोसा ने पंजाब और देश का नाम ऊंचा किया है।

परीक्षा से पहले ही परीक्षा खत्म! पूर्णिया यूनिवर्सिटी की लापरवाही से हंगामा

पूर्णिया बिहार का पूर्णिया विश्वविद्यालय हाल में ही एक शोध छात्रा के साथ एक विभागाध्यक्ष की तस्वीर और वीडियो वायरल होने के बाद अब स्नातक प्रथम खण्ड की परीक्षा को लेकर सुर्खियों में है. पूर्णियां विश्वविद्यालय इस मामले में देश का संभवतः पहला विश्वविद्यालय होगा, जहां एक परीक्षा के लिए तीन अलग अलग एडमिट-कार्ड जारी किए गए हैं और उससे भी बड़ी हैरानी की बात यह है कि निर्धारित तारीख से एक दिन पहले ही परीक्षा हो गई. परीक्षा से वंचित हजारों छात्र-छात्रों का परीक्षा केंद्र और विश्वविद्यालय परिसर में आक्रोश देखने को मिला है. हालांकि, विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक इस लापरवाही का पूरा ठीकरा समर्थ पोर्टल पर फोड़ रहे हैं. एक ही परीक्षा का तीन-तीन कार्ड दरअसल, पूर्णिया विश्वविद्यालय स्नातक में प्रथम वर्ष की परीक्षा 30 मार्च से शुरू हुई है. जो 15 अप्रैल तक चलेगी. इसी बीच एक हैरानी की बात सामने आई कि परीक्षा शुरू होने से पहले तकनीकी त्रुटियों की वजह से दो बार परीक्षार्थियों को एडमिट कार्ड जारी किया गया. दूसरी बार वाले एडमिट कार्ड से 30 मार्च और 04 अप्रैल को परीक्षा भी सम्पन्न हुई. इसके बाद फिर विश्वविद्यालय ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए तीसरा एडमिट कार्ड जारी किया और परीक्षा तिथि में भी परिवर्तन किया. इस एडमिट कार्ड के अनुसार, 08 अप्रैल और 10 अप्रैल को होने वाली परीक्षा को विस्तारित करते हुए क्रमशः 09 और 11 अप्रैल कर दिया गया. 11 अप्रैल की सुबह की पाली की परीक्षा देने जब सैकड़ों परीक्षार्थी जिला मुख्यालय स्थित आर केके कॉलेज केंद्र पहुंचे तो उन्हें परीक्षा केंद्र में यह कहकर प्रवेश करने से रोक दिया कि इन विषयों की परीक्षा 10 अप्रैल को ही पूरी हो चुकी है. इसके बाद सैकड़ों परीक्षार्थी आक्रोशित हो गए और उन्होंने सहरसा-पूर्णिया मार्ग को जामकर नारेबाजी किया. परीक्षार्थी इमराना खातून ने बताया कि 08 तारीख से आ रहे हैं, फर्स्ट सिटींग में परीक्षा थी, कैंसल हो गया. फिर बोला कि 09 तारीख को होगा, वह भी कैंसल हो गया. फिर 11 तारीख बताया गया, लेकिन आज भी नही हो रहा है. हमलोगों को धक्का मारकर बाहर कर दिया गया. समर्थ पोर्टल की गड़बड़ी से हुई छात्रों को परेशानी परीक्षा नियंत्रक प्रो अमरकांत सिंह ने बताया कि समर्थ पोर्टल द्वारा पहली बार फॉर्म भराया गया. तकनीकी त्रुटियों की वजह से बच्चों को परेशानी हुई. उनकी परेशानियों को देखते हुए विश्वविद्यालय अपनी जिम्मेदारी लेता है. छुटे हुए बच्चों की परीक्षा फिर से ली जाएगी. आगे की परीक्षा स्थगित की जाती है. परीक्षा नियंत्रक प्रो अमरकांत सिंह कहते हैं कि भारत सरकार के समर्थ पोर्टल द्वारा पहली बार परीक्षा फॉर्म भराया गया है और तकनीकी त्रुटि के कारण विश्वविद्यालय के बच्चों को परेशानी हुई है. उनकी परेशानी को देखते हुए विश्वविद्यालय अपनी जिम्मेदारी लेता है. परीक्षार्थियों को कोई असुविधा नही हो, इसलिए उक्त विषय की परीक्षा फिर से ली जाएगी और आगे की परीक्षा को स्थगित कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि समर्थ पोर्टल ने बताया है कि जो त्रुटि है, उसको दूर कर लिया गया है. छात्र नेता पीयूष पुजारा विश्वविद्यालय की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहते हैं कि ऐसा लगता है कि परीक्षा विभाग और विश्वविद्यालय खेल बनकर रह गया है उन्हें पता ही नही है कि उनका मैनेजमेंट क्या है और बार-बार एडमिट कार्ड निकलना पड़ता है. परीक्षा नियंत्रक ने कहा कि इसकी नैतिक जिम्मेवारी परीक्षा विभाग लेती है और आगे की परीक्षा स्थगित की जाती है.इसका मतलब तो यह हुआ कि परीक्षा विभाग और पूर्णियां विश्वविद्यालय खेल बनकर रह गया है और उन्हें पता ही नही है कि उनका मैनेजमेंट क्या है ,बार-बार एडमिट कार्ड बदलना पड़ता है.  

Census 2026: छत्तीसगढ़ में एक मई से शुरू होगा सर्वे, पहले गिने जाएंगे घर

रायपुर. भारत सरकार द्वारा आयोजित जनगणना 2027 के अंतर्गत प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (House Listing & Housing Census) का कार्य छत्तीसगढ़ में 01 मई से 30 मई 2026 तक 30 दिनों की अवधि में संचालित किया जाएगा। यह चरण जनगणना प्रक्रिया का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है, जिसके माध्यम से प्रत्येक आवासीय एवं गैर-आवासीय भवन, मकान की स्थिति, उपयोग एवं उपलब्ध सुविधाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्रित की जाएगी। डिजिटल इंडिया के अंतर्गत इस बार आम जनता की सुविधा के लिए स्व-गणना (Self-Enumeration) का विकल्प भी उपलब्ध कराया गया है। इच्छुक नागरिक 16 अप्रैल 2026 से 30 अप्रैल 2026 के मध्य निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपने परिवार एवं मकान से संबंधित जानकारी दर्ज कर सकते हैं। स्व-गणना करने वाले परिवारों को एक स्व-गणना आईडी (Self-Enumeration ID) प्रदान की जाएगी, जिसे सुरक्षित रखना आवश्यक होगा तथा प्रगणक के आने पर प्रगणकों को देना होगा। आपके द्वारा भरी जानकारी की पुष्टि के बाद प्रगणक उसे सब्मिट कर देगा। इन बिंदुओं पर एकत्रित की जाएगी जानकारी प्रत्येक भवन एवं मकान की संख्या, स्थिति एवं प्रकार, मकान का उपयोग, (आवासीय/व्यावसायिक/अन्य), निर्माण की प्रकृति (कच्चा/पक्का/अर्ध-पक्का), परिवारों की संख्या एवं उनके आवासीय विवरण, उपलब्ध बुनियादी सुविधाएं, जैसे- पेयजल की उपलब्धता, शौचालय की सुविधा, विद्युत कनेक्शन, रसोई गैस/ईंधन का प्रकार, इंटरनेट/संचार सुविधाएं यह जानकारी देश की सामाजिक-आर्थिक योजनाओं, शहरी एवं ग्रामीण विकास, आवास योजनाओं, जल एवं स्वच्छता कार्यक्रमों तथा बुनियादी ढांचे के विकास हेतु अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। प्रगणक निर्धारित अवधि के दौरान प्रत्येक घर पर जाकर जानकारी एकत्रित करेंगे। प्रगणक अधिकृत पहचान पत्र के साथ जाएंगे, जिसकी पुष्टि नागरिकों द्वारा की जा सकती है। नागरिकों से अनुरोध है कि वे प्रगणकों को सही एवं पूर्ण जानकारी प्रदान करें। स्व-गणना कर चुके परिवारों को अपनी (Self-Enumeration ID) प्रगणक को बतानी होगी। पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी सभी जानकारी जनगणना के दौरान एकत्रित की गई सभी जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी। इस जानकारी का उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों एवं नीतिगत निर्णयों के लिए किया जाएगा। किसी भी व्यक्ति विशेष की जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। जनगणना कार्य में सक्रिय सहयोग प्रदान करें। निर्धारित समयावधि में स्व-गणना का लाभ उठाएं। केवल अधिकृत गणनाकर्मियों को ही जानकारी प्रदान करें। सटीक एवं सत्य जानकारी देना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। निगरानी के लिए जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर खुलेंगे नियंत्रण कक्ष जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जाएंगे। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण किया जाएगा। शिकायत निवारण के लिए हेल्पलाइन/ऑनलाइन प्रणाली उपलब्ध होगी। जनगणना कार्य निदेशालय छत्तीसगढ़ के निदेशक ने सभी नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करें। आपकी सटीक एवं पूर्ण जानकारी देश की विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होगी। जनगणना से प्राप्त आंकड़े देश की आर्थिक, सामाजिक एवं बुनियादी विकास योजनाओं की आधारशिला होते हैं। यह प्रक्रिया सरकार को सटीक नीति निर्माण, संसाधन आवंटन एवं भविष्य की योजनाओं के निर्धारण में सहायता प्रदान करती है।जनगणना देश की सबसे व्यापक प्रशासनिक प्रक्रिया है, जो सरकार को जनसंख्या, आवास एवं बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का आंकलन करने में सहायता प्रदान करती है। इससे प्राप्त आंकड़ों के आधार पर भविष्य की योजनाएं अधिक प्रभावी एवं समावेशी बनाई जाती है।

गुरु-चंद्रमा की युति से बनेगा शुभ योग, करियर में तरक्की के संकेत

ज्योतिष शास्त्र में कई ऐसे शुभ योग बताए गए हैं, जो व्यक्ति के जीवन में तरक्की, सम्मान और सुख-सुविधाएं लेकर आते हैं. इन्हीं में से एक खास योग है गजकेसरी राजयोग, जो चंद्रमा और गुरु ग्रह के साथ आने से बनता है. अप्रैल 2026 में यह शुभ योग बनने जा रहा है. 21 अप्रैल को चंद्रमा मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से ही गुरु बृहस्पति मौजूद रहेंगे. इन दोनों ग्रहों की युति से गजकेसरी राजयोग बनेगा, जिसे बेहद शुभ माना जाता है. ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा मन, भावनाएं और सुख का कारक होता है, जबकि गुरु ज्ञान, धन और भाग्य से जुड़ा ग्रह है. जब ये दोनों ग्रह साथ आते हैं, तो कई क्षेत्रों में सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है. इस योग का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा, लेकिन मिथुन, सिंह और कन्या राशि वालों के लिए यह समय ज्यादा फायदेमंद हो सकता है. कैसे बनता है गजकेसरी राजयोग? ज्योतिष के अनुसार जब गुरु और चंद्रमा एक ही राशि में हों या एक-दूसरे से केंद्र स्थान (1, 4, 7, 10 भाव) में हों, तब गजकेसरी राजयोग बनता है. यह योग कुंडली में शुभ परिणाम देने वाला माना जाता है और व्यक्ति को सफलता दिलाने में मदद करता है. मिथुन राशि (Gemini) मिथुन राशि के लोगों के लिए यह योग करियर में ग्रोथ लेकर आ सकता है. नौकरी में प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने के योग हैं. आपकी बात करने की क्षमता आपको आगे बढ़ने में मदद करेगी. बिजनेस में भी नए अवसर मिल सकते हैं और साझेदारी फायदेमंद साबित हो सकती है. हालांकि खर्च बढ़ सकते हैं, इसलिए बजट का ध्यान रखें और जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास से बचें. सिंह राशि (Leo) सिंह राशि वालों के लिए यह योग आय और लाभ के मामले में अच्छा साबित हो सकता है. इस दौरान आपकी मेहनत की सराहना होगी और ऑफिस में आपकी पहचान बढ़ सकती है. बिजनेस करने वालों को निवेश से फायदा मिलने के संकेत हैं और नए मौके भी मिल सकते हैं. परिवार में कोई अच्छी खबर मिल सकती है, लेकिन जल्दबाजी या अहंकार से बचना जरूरी होगा, वरना नुकसान हो सकता है. कन्या राशि (Virgo) कन्या राशि वालों के लिए यह समय भाग्य का साथ देने वाला हो सकता है. रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं और करियर में स्थिरता आ सकती है. नई नौकरी या बिजनेस के अवसर मिल सकते हैं. इस दौरान यात्रा के योग बन रहे हैं और किसी धार्मिक कार्य में शामिल होने का मौका मिल सकता है. हालांकि काम का दबाव बढ़ सकता है, इसलिए सेहत का ध्यान रखें और पर्याप्त आराम करें.

सुरों की दुनिया में शोक की लहर: आशा भोसले ने दुनिया को कहा अलविदा

नई दिल्ली बॉलीवुड की लेजेंडरी सिंगर्स में से एक आशा भोसले ने दुनिया को अलविदा कह दिया है. वो 92 साल की थीं. आशा भोसले को 11 अप्रैल को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. अस्पताल के डॉक्टर प्रति समदानी ने कन्फर्म किया था कि सिंगर उनकी केयर भी हैं. सिंगर की पोती ने बताया था कि चेस्ट इंफेक्शन और थकान के कारण उनकी तबीयत बिगड़ी है. मगर अब खबर आई है कि आशा भोसले का निधन हो गया है. आशा भोसले ने 40 के दशक में अपने करियर की शुरुआत की थी. उन्होंने लेजेंडरी डायरेक्टर बिमल रॉय, राज कपूर के साथ-साथ लेजेंडरी म्यूजिक कम्पोजर ओ पी नय्यर, सरदार मलिक, सज्जाद हुसैन, एस मोहिंदर, ए आर रहमान संग काम किया था. उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर 40 और 50 के दशक की सबसे बड़ी गायिकाओं में से एक थीं. मंगेशकर परिवार से आईं आशा भी अपनी बहन की ही तरह सुरीली आवाज वाली थीं. आशा ने अपनी आवाज का जादू बॉलीवुड में 1950 के दशक में चलाया. हालांकि उन्होंने बड़ी फिल्मों में अपनी आवाज देने से पहले कई लो बजट फिल्मों में गाना गाकर पहचान पाई. 1952 में आई फिल्म 'संगदिल' में उन्होंने गाने गाए थे. म्यूजिक कम्पोजर सज्जाद हुसैन की इस एल्बम ने आशा को फेम दिलाया. उस जमाने के जाने माने डायरेक्टर बिमल रॉय ने 1953 में आई फिल्म 'परिणीता' में आशा भोसले को साइन किया था. इसके बाद राज कपूर ने उनकी अपनी 1954 की फिल्म 'बूट पोलिश' में काम दिया. लेजेंडरी म्यूजिक कम्पोजर ओ पी नय्यर के साथ आशा ने 1952 से लेकर 1956 तक कई गानों पर काम किया था. मगर 1957 में आई बी आर चोपड़ा की फिल्म 'नया दौर' के साथ आशा भोसले ने सफलता का असली स्वाद चखा. इस फिल्म के गाने भी नय्यर ने ही कम्पोज किए थे. बॉलीवुड में आशा ने बनाई अलग पहचान मोहम्मद रफी के साथ आशा भोसले की जोड़ी उस जमाने में सुपरहिट थी. दोनों ने मिलकर 'मांग के साथ तुम्हारा', 'साथी हाथ बढ़ाना' और 'उड़ें जब जब जुल्फें तेरी' को गाया था. साहिर लुधियानवी के बोल और रफी संग आशा की आवाज का जादू सभी के सिर चढ़कर बोलता था. उन्होंने 60 के दशक की फिल्म 'गुमराह', 'हमराज', 'आदमी और इंसान' संग कई और में अपनी आवाज दी. 1966 में उन्होंने आर डी बर्मन के साथ फिल्म 'तीसरी मंजिल' के लिए गाने गाए थे, जिन्हें खूब सराहा गया. इसके बाद वो दौर आया जब आशा भोसले ने बॉलीवुड के हिट डांस नंबर गाने शुरू किए. कहा जाता है कि जब उन्होंने पहली बार 'आजा आजा' गाने को सुना था तो उन्हें लगा था कि वो वेस्टर्न म्यूजिक ट्यून पर नहीं गा पाएंगी. बर्मन ने इसे बदलने का ऑफर दिया, मगर आशा ने मना कर दिया. बाद में उन्होंने इसे एक चैलेंज की तरह लिया और 10 दिन रिहर्सल करने के बाद इसे रिकॉर्ड किया था. आज भी ये गाना लोगों की जुबान पर है. 'आजा आजा' के बाद आशा ने 'ओ हसीना जुल्फों वाली', 'ओ मेरे सनम रे', 'पिया तू अब तो आजा' और 'ये मेरा दिल' जैसे बढ़िया गाने गाए, जो हर पार्टी की जान बन गए थे. गजल गायिकी ने दिलाया नेशनल अवॉर्ड 1981 में आशा भोसले ने गजल गायिकी में अपना हाथ आजमाया. उन्होंने फिल्म 'उमराव जान' में 'दिल चीज क्या है', 'इन आंखों की मस्ती के', 'ये क्या जगह है दोस्तों' और 'जुस्तजू जिसकी थी' जैसी गजलों को गाकर सभी का दिल खुश कर दिया था. इस फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर खय्याम थे, जिन्होंने आशा की आवाज को लो पिच पर ला दिया था. इन्हीं गजलों ने उन्हें उनका पहला नेशनल अवॉर्ड दिलवाया. इसके बाद उन्हें फिल्म 'इजाजत' के अपने गाने 'मेरा कुछ सामान' के लिए अपना दूसरा नेशनल अवॉर्ड मिला. 1995 में आशा भोसले ने 62 साल की उम्र में एक्ट्रेस उर्मिला मतोंडकर को अपनी आवाज दी. उर्मिला की फिल्म 'रंगीला' के गाने 'तन्हा तन्हा' और 'रंगीला रे' उन्होंने गाए. 2000 में दशक में आई 'लगान' के गाने 'राधा कैसे न जले', फिल्म 'प्यार तूने क्या किया' के गाने 'कमबख्त इश्क', फिल्म 'लकी' के गाने 'लकी लिप्स' को आशा भोसले ने ही गाया था. ये सभी गाने आगे चलकर सुपरहिट हुए. आशा के नाम है ये रिकॉर्ड साल 2013 में आशा भोसले ने अपना एक्टिंग डेब्यू किया था. 79 साल की आशा को फिल्म 'माई' में एक 65 साल की महिला के रोल में देखा गया था, जो अल्जाइमर की मरीज है. महिला को उसके बच्चे छोड़ जाते हैं. अपने काम के लिए क्रिटिक्स से आशा भोसले को तारीफ मिली थी. मई 2020 में आशा ने आशा भोसले ऑफिशियल के नाम से अपना यूट्यूब चैनल लॉन्च किया था. हिंदी, बंगाली, मराठी समेत आशा भोसले ने अपने करियर में 20 भाषाओं में गाने गाए. इसके चलते उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था. जनवरी 2025 में आशा भोसले को दुबई में एक कॉन्सर्ट करते देखा गया था. 91 साल की आशा, जिन्हें प्यार से आशा ताई बुलाया जाता था, दमदार अंदाज में परफॉर्म करती दिखीं. उन्होंने इस कॉन्सर्ट में पंजाबी सिंगर करण औजला के हिट गाने 'तौबा तौबा' को गाया था. ये गाना विक्की कौशल की फिल्म 'बैड न्यूज' का था. ऐसे में विक्की के अतरंगी स्टेप्स को आशा भोसले ने भी कॉपी किया और स्टेज पर धूम मचाई थी.

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा बयान: FIR के बाद समझौता करना न्यायिक सिस्टम के साथ खिलवाड़

जबलपुर. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम आदेश में कहा कि किसी के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराना और फिर बाद में समझौता कर लेना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। ऐसे मामलों में सख्ती से निपटना बेहद जरूरी है। कोर्ट ने यह भी माना कि इस तरह की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है, जो कानून के दुरुपयोग की ओर इशारा करती है। इस मत के साथ जस्टिस संदीप एन भट्ट की सिंगल बेंच ने जबलपुर के उद्योगपति महेश केमतानी पर 50 हजार रु का जुर्माना लगा दिया। यह राशि एक हफ्ते में हाई कोर्ट बार एसोसिएशन में जमा करनी होगी। जबलपुर के महानद्दा स्थित शुभ मोटर्स के महेश केमतानी ने संदीप कुमार मिश्रा, नेहा विश्वकर्मा और नसीम खान उर्फ मुस्कान पर करीब 97 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए मदन महल थाने में एफआइआर दर्ज कराई थी। 12 लाख रुपये बरामद हुए थे जांच के दौरान संदीप मिश्रा को गिरफ्तार किया गया था। उससे करीब 12 लाख रु बरामद हुए थे। आरोपी संदीप मिश्रा ने इसी मामले में जमानत के लिए यह अर्जी लगाई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि आरोपी का शिकायतकर्ता से समझौता हो चुका है। राज्य सरकार की ओर से अर्जी का विरोध किया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी और महेश केमतानी पर 50 हजार रुपए जुर्माना लगाते हुए आरोपी संदीप मिश्रा की जमानत अर्जी मंजूर कर ली।

SIR अभियान का असर: 12 राज्यों में 10% से ज्यादा मतदाता सूची से बाहर

नई दिल्ली भारतीय चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की वोटर लिस्ट से करीब 5.2 करोड़ अयोग्य मतदाताओं के नाम हटा दिए हैं जो कि इन राज्यों के कुल मतदाताओं का लगभग 10.2 प्रतिशत है. आयोग का कहना है कि ये अभियान वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा और सटीक बनाने के उद्देश्य से चलाया गया, जिसमें अनुपस्थित, ट्रांसफर, मृत, डबल पंजीकृत और अन्य अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, ताकि फर्जी मतदान की गुंजाइश खत्म हो सके. आयोग ने बताया कि SIR का पहला चरण बिहार में शुरू किया गया था. इसके बाद उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात और तमिलनाडु जैसे 11 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में एसआईआर अभियान शुरू किया गया था. अभियान के दौरान कुल 51 करोड़ मतदाताओं की जांच की गई, जिसमें से 10.2% नाम अनुपस्थित, मृत या फर्जी पाए जाने पर हटाए गए. आयोग ने ये कदम मतदाता सूची को शुद्ध और सटीक बनाने के उद्देश्य से उठाया है. इस प्रक्रिया में अंदमान-निकोबार से लेकर केरल तक के चुनावी डेटा को खंगाला गया और लाखों नए नाम भी जोड़े गए. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में कटे सबसे ज्याद नाम आंकड़ों के अनुसार, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में सबसे अधिक 16.6% नाम हटाए गए. इसके बाद उत्तर प्रदेश में 13.2% और गुजरात में 13.1% नामों की छंटनी की गई है. छत्तीसगढ़ में भी 11.3% मतदाताओं के नाम सूची से बाहर किए गए. बंगाल में ये दर 10.9% रही, जहां न्यायिक प्रक्रिया के जरिए 27 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए. इन राज्यों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग थे जो या तो स्थायी रूप से ट्रांसफर हो चुके थे या उनकी मृत्यु हो चुकी थी. '6.5 करोड़ ने नहीं किया कभी मतदान' SIR अभियान के दौरान पाया गया कि 13 करोड़ लोग अपने पंजीकृत पतों पर अनुपस्थित थे, जबकि 3.1 करोड़ लोग दूसरे राज्यों में चले गए थे. इसके अलावा मतदाता सूची ने करीब 6.5 करोड़ ऐसे मतदाता थे, जिन्होंने कभी मतदान ही नहीं किया. इससे फर्जी वोटिंग की आशंका बनी रहती थी. लिहाजा उन्हें हटाने से एक शुद्ध और सटीक मतदाता सूची तैयार हुई है. अब इन 12 प्रदेशों में शुद्धिकरण के बाद कुल 45.8 करोड़ मतदाता पंजीकृत हैं. पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में क्रमशः 20.9% और 10% की शुद्ध गिरावट दर्ज की गई है, जबकि पुडुचेरी में मतदाताओं की संख्या में 1% की शुद्ध गिरावट देखी गई है. मध्य प्रदेश में 5.7, राजस्थान में 5.4, केरल में 2.5 और लक्षद्वीप में 0.3% मतदाताओं की संख्या में कमी आई है. UP में जोड़े गए सबसे ज्यादा नाम आयोग ने बताया कि नाम हटाने के साथ-साथ निर्वाचन आयोग ने 2 करोड़ नए नाम मतदाता सूची में जोड़े भी हैं. जिसमें उत्तर प्रदेश 92.4 लाख नए मतदाताओं के साथ पहले स्थान पर है. यूपी के बाद तमिलनाडु में 35 लाख, केरल में 20.4 लाख और राजस्थान में 15.4 लाख नए नाम शामिल किए गए. मध्य प्रदेश में 12.9 लाख और गुजरात में 12 लाख से अधिक मतदाताओं ने फॉर्म 6 और फॉर्म 8 के जरिए अपना पंजीकरण कराया, जिससे सूची में युवाओं की भागीदारी बढ़ी है.