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मंगल पांडेय की खाली सीट पर फिर होगा MLC उपचुनाव

 पटना बिहार विधान परिषद की एक और सीट पर उपचुनाव की घोषणा हो गई है। विधानसभा कोटे की एक सीट के लिए 12 मई को मतदान होगा। यह सीट पूर्व मंत्री मंगल पांडेय के विधायक निर्वाचित होने के कारण खाली हुई थी। यह सीट 16 नवंबर 2025 से खाली है। मंगल पांडेय का कार्यकाल 6 मई 2030 तक था। अब इस पर उपचुनाव कराया जाएगा। उपचुनाव में जो जीतकर इस सीट से जो एमएलसी बनेंगे, वह 4 साल तक इस पद पर रहेंगे भारत निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को इस सीट पर उपचुनाव की घोषणा की। आयोग के अनुसार विधान परिषद की इस सीट पर उपचुनाव के लिए 23 अप्रैल को अधिसूचना जारी की जाएगी। उसी दिन नामांकन की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। नॉमिनेशन की आखिरी तारीख 30 अप्रैल है। इसके बाद 2 अप्रैल को नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी की जाएगी। 4 मई तक नामांकन वापसी हो सकेगी। इसके बाद 12 मई को सुबह 9 से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना की जाएगी और रिजल्ट जारी कर दिया जाएगा। नडीए के खाते में जाएगी यह सीट? इस उपचुनाव में सत्ताधारी गठबंधन एनडीए की जीत लगभग तय मानी जा रही है। बिहार विधानसभा में एनडीए का संख्याबल भारी है। विधानसभा कोटे की एक ही सीट पर मतदान होने इसका फायदा सत्ताधारी गठबंधन को मिलेगा। यह सीट पहले भाजपा के पास थी, तो माना जा रहा है कि इस बार भी इसी पार्टी से किसी को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। हालांकि, भाजपा अपने सहयोगी दलों में से भी किसी को प्रत्याशी बनवा सकती है। नामांकन के दौरान उम्मीदवारी पर स्थिति साफ हो जाएगी। इस उपचुनाव में विपक्ष की ओर से प्रत्याशी उतारा जाता है या नहीं, यह देखने वाली बात होगी। भोजपुर-बक्सर स्थानीय निकाय सीट पर भी 12 मई को ही वोटिंग बिहार विधान परिषद में स्थानीय निकाय कोटे की भोजपुर-बक्सर सीट पर उपचुनाव के लिए मतदान भी 12 मई को ही होने वाला है। इस उपचुनाव की घोषमा चुनाव आयोग के द्वारा पिछले दिनों की गई थी। जदयू के एमएलसी रहे राधाचरण साह के विधायक निर्वाचित होने के बाद यह सीट खाली हुई थी। उपचुनाव में एनडीए की ओर से राधाचरण के बेटे कन्हैया प्रसाद को प्रत्याशी बनाया गया है। वह जदयू के सिंबल पर ही चुनाव लड़ेंगे। वहीं, महागठबंधन से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सोनू राय को टिकट दिया है, जो पूर्व एमएलसी लालदास राय के बेटे हैं।

छत्तीसगढ़ में बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत: सीएम साय ने खोला SBI का नया भवन

रायपुर.  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के कचहरी चौक स्थित भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की कचहरी शाखा के नवीन एवं अत्याधुनिक परिसर का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्य महाप्रबंधक प्रभाष कुमार सुबुद्धि, उप महाप्रबंधक रमेश सिन्हा, प्रबंधक अनिल यादव सहित बैंक के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह अत्यंत हर्ष और सौभाग्य का विषय है कि पिछले 50 वर्षों से संचालित एसबीआई की कचहरी शाखा अब नए आधुनिक भवन में स्थानांतरित होकर ग्राहकों को और बेहतर सेवाएं प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि इस नए परिसर में उपभोक्ताओं को अत्याधुनिक बैंकिंग सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उनके कार्य और अधिक सहज और त्वरित होंगे। मुख्यमंत्री साय ने बैंकिंग व्यवस्था को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि भारतीय स्टेट बैंक अपने दायित्वों का उत्कृष्ट निर्वहन कर रहा है और आगे भी ग्राहकों की सेवा में इसी तरह अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर शाखा के अधिकारियों और ग्राहकों को शुभारंभ की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उल्लेखनीय है कि एसबीआई की कचहरी शाखा ने हाल ही में अपनी सेवाओं के 50 वर्ष पूर्ण किए हैं। ग्राहकों को बेहतर, सुविधाजनक और उन्नत बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शाखा को पंडरी रोड स्थित आक्सीजोन क्षेत्र में नए परिसर में स्थानांतरित किया गया है, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ बेहतर बैंकिंग अनुभव सुनिश्चित किया जाएगा।

समर कैंप आरोह-2026 नए स्वरूप में होंगे : मंत्री सारंग

भोपाल.  खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने नई पहल शुरू करते हुए समर कैंप 'आरोह-2026' को नए स्वरूप में करवाने का निर्णय लिया है। इस बार व्यक्तित्व विकास एवं रचनात्मक गतिविधियों को भी समर कैंप में शामिल किया जा रहा है। इस संबंध में गुरूवार को तात्या टोपे खेल स्टेडियम में आयोजित प्रदेश के सभी खेल अधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री सारंग ने समर कैंप में नई गतिविधियों के बारे में बताया। एक मई से शुरू होगा समर कैंप मंत्री सारंग ने कहा कि भोपाल सहित सभी जगह 1 मई से समर कैंप शुरू होगा। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की अधिकारिक वेबसाइट और क्यूआर कोड को स्केन करके इसमें 18 अप्रैल से रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है। उन्होंने सभी खेल अधिकारियों से कहा कि इसमें युवा समन्वयकों से जुड़ कर इसका आयोजन/गतिविधियां ब्लॉक एवं ग्रामीण स्तर तक की जाए। समर कैंप से सशक्त व्यक्तित्व का निर्माण हो मंत्री सारंग ने कहा कि प्रदेश में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों तक खेल विभाग के इस समर कैंप 'आरोह-26' की जानकारी हो और लोग इसमें शामिल हो। यह समर कैंप एक मूवमेंट के रूप में जाना जाए, जैसे फिट इंडिया मूवमेंट, स्वच्छता अभियान आदि। इसी प्रकार यह समर कैंप केवल गतिविधि केन्द्रित नहीं होकर बच्चों और परिवार सहित समाज को जोड़ने का एक सकारात्मक संदेश दें। हमारा उद्देश्य केवल प्रतिभा का विकास ही नहीं बल्कि एक ऐसे सशक्त व्यक्तित्व का निर्माण भी है जो परिवार का गौरव एवं राष्ट्र और समाज का आधार बने। मंत्री सारंग ने कहा कि खेल अधोसंरचना का विकास, प्रतिभाओं को निखारें वाले कोच और प्रतिभाएं तलाशना हमारा मुख्य उद्देश्य है। साथ ही खिलाड़ी को उत्तम खिलाड़ी बनाना और युवाओं को खिलाड़ी बनाने में कोचेस की महत्वपूर्ण भूमिका है। युवाओं का शारीरिक और मानसिक समग्र विकास खेल के जरिये ही हो सकता है। विभाग का मुख्य काम भी युवाओं को खेल से जोड़ना और युवाओं का कल्याण करना है, जो मानसिक एवं बौद्धिक विकास के जरिये किया जा सकता है। इसके लिए जागरूकता एवं काउंसिंग जैसे कार्यक्रम को भी शामिल किया जा सकता है। बैठक में खेल संचालक अंशुमान यादव एवं संयुक्त संचालक बी.एस. यादव सहित प्रदेश के खेल अधिकारी मौजूद थे।  

Punjab Women Police: महिला पुलिसकर्मी पंजाब में बड़े अभियानों का नेतृत्व कर रही हैं, ऑपरेशन प्रहार से गैंगस्टर तक

चंडीगढ़   गैंगस्टर-विरोधी महत्वपूर्ण मुहिमों की निगरानी से लेकर समुदाय-केंद्रित पहलों का नेतृत्व करने तक, पंजाब पुलिस की महिला अधिकारी न केवल आपराधिक नेटवर्क को ध्वस्त कर रही हैं बल्कि पुलिस के भीतर नेतृत्व की नयी परिभाषा गढ़ रही हैं। नेतृत्व की भूमिकाओं में महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति ने पंजाब पुलिस को देश की सबसे प्रगतिशील कानून प्रवर्तन एजेंसियों में से एक बना दिया है। अधिकारियों ने बताया कि महिला अधिकारी वर्तमान में 'गैंगस्ट्रां ते वार' और 'ऑपरेशन प्रहार' जैसे प्रमुख अभियानों की निगरानी कर रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि ये अधिकारी न केवल राज्य को अपराध से बचा रही हैं बल्कि युवा महिलाओं की एक नई पीढ़ी को कानून प्रवर्तन में करियर बनाने के लिए प्रेरित भी कर रही हैं। वर्तमान में पुलिस के विशेष महानिदेशक (एसडीजीपी) से लेकर पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) तक विभिन्न पदों पर 79 महिला अधिकारी तैनात हैं। पंजाब पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक पंजाब पुलिस में चार एसडीजीपी, एक अपर डीजीपी (पुलिस महानिदेशक), दो पुलिस महानिरीक्षक (आईजी), दो उप आईजी, 18 वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/सहायक आईजी, 23 पुलिस अधीक्षक (एसपी), एक सहायक एसपी तथा 28 उप एसपी शामिल हैं। इन 79 अधिकारियों में से पांच अधिकारी फील्ड ड्यूटी पर तैनात हैं, जिसके तहत उन्हें 'गैंगस्ट्रां ते वार' सहित विभिन्न अभियानों की निगरानी और उनमें भागीदारी करनी होती है। बयान में कहा गया है कि ये अधिकारी अपराध से निपटने के लिए लगन से काम करते हैं, वहीं उनके परिवार और टीम के सदस्य उनके योगदान पर गर्व करते हैं। मजबूत शैक्षणिक और प्रशिक्षण योग्यताओं के साथ पुलिस में शामिल होने वाली महिला अधिकारियों ने परिचालन और प्रशासनिक भूमिकाओं में सक्षम नेताओं के रूप में खुद को जल्दी ही स्थापित कर लिया है। फरीदकोट की एसएसपी प्रज्ञा जैन ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक पुलिसिंग की पहचान योग्यता और समन्वय से होती है, न कि लैंगिक पहचान से। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि महिला अधिकारी हर स्तर पर अपना योगदान दे रही हैं। फरीदकोट रेंज की पुलिस महानिरीक्षक, नीलम्बरी जगदाले ने इस बात पर जोर दिया कि 'गैंगस्ट्रां ते वार' अभियान आपराधिक तंत्र को जड़ से खत्म करने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि गुंडागर्दी, मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध को जड़ से खत्म करने के दृढ़ संकल्प के साथ पुलिस की टीम राज्य भर में माफियाओं, उनके सहयोगियों, उनके रिश्तेदारों, असामाजिक तत्वों, मादक पदार्थों के तस्करों और संगठित आपराधिक समूहों के खिलाफ लगातार लक्षित और कड़ी कार्रवाई कर रही हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को ओंकारेश्वर में सांस्कृतिक महाकुंभ एकात्म पर्व का करेंगे शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव, ज्ञान की पुण्यभूमि ओंकारेश्वर में सांस्कृतिक महाकुंभ एकात्म पर्व का शुक्रवार को करेंगे शुभारंभ दार्शनिक चिंतन, सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक ऊर्जा का पाँच दिवसीय आयोजन देश-विदेश के शीर्ष संत, मनीषी और विद्वान देंगे एकात्मता का वैश्विक संदेश ओंकारेश्वर भारतीय संस्कृति के पुनरुद्धारक और अद्वैत वेदांत के प्रखर प्रणेता आदि गुरु शंकराचार्य की दीक्षा स्थली ओंकारेश्वर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कल, 17 अप्रैल शुक्रवार से पाँच दिवसीय 'एकात्म पर्व' का मंगलमय शुभारंभ करेंगे। मांधाता पर्वत की कंदराओं में रचे-बसे 'एकात्म धाम' में आयोजित यह महोत्सव दार्शनिक चिंतन, सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनूठा संगम होगा। वैशाख शुक्ल पंचमी के पावन अवसर पर आयोजित इस अनुष्ठान में देश-विदेश के शीर्ष संत, मनीषी और विद्वान सम्मिलित होकर एकात्मता के वैश्विक संदेश को रेखांकित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव अद्वैत लोक एवं अक्षर ब्रह्म प्रदर्शनी का लोकार्पण करेंगे साथ ही वैदिक अनुष्ठान में भी सम्मिलित होंगे। इस अवसर पर द्वारका पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती के पावन सान्निध्य तथा विवेकानंद केंद्र की उपाध्यक्ष पद्मनिवेदिता भिड़े, स्वामी शारदानंद सरस्वती की गरिमामय उपस्थिति रहेगी। एकात्म पर्व के महत्वपूर्ण वैचारिक सत्र 'अद्वैतामृतम् – विमर्श सभा' के अंतर्गत अद्वैत दर्शन की समकालीन प्रासंगिकता पर गहन संवाद होगा। विशेष रूप से प्रथम दिन 'अद्वैत एवं Gen-Z' जैसे आधुनिक विषय पर युवा दृष्टिकोण प्रस्तुत किया जाएगा। आगामी दिनों में अद्वैत दर्शन का कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), पर्यावरण संरक्षण, वैश्विक शांति और सिख संप्रदाय के 'एक ओंकार' के साथ अंतर्संबंधों पर विद्वतापूर्ण चर्चा होगी। यह बौद्धिक मंथन आधुनिक समाज और नई पीढ़ी को अद्वैत की शाश्वत अवधारणा से जोड़ने का एक अभिनव प्रयास है। सांस्कृतिक संध्या 'रसो वै सः' के अंतर्गत प्रतिदिन देश के प्रतिष्ठित कलाकार अपनी कला की प्रस्तुति देंगे। महोत्सव के प्रथम दिवस जयतीर्थ मेवुंडी का शास्त्रीय गायन और शुभदा वराडकर की ओड़िसी प्रस्तुति 'एकम्' आकर्षण का केंद्र रहेगी। इसी क्रम में आगामी दिनों में भरतनाट्यम, कर्नाटक संगीत और निर्गुण वाणी के माध्यम से अद्वैत के भावों को अभिव्यक्त किया जाएगा। महोत्सव का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पक्ष 21 अप्रैल को आयोजित होने वाला दीक्षा समारोह है, जिसमें देश-विदेश के 700 से अधिक युवा 'शंकरदूत' के रूप में संकल्प लेंगे। मध्य प्रदेश शासन 'ओंकारेश्वर' में 'एकात्म धाम'के माध्यम से आचार्य शंकर के दर्शन को वैश्विक फलक पर स्थापित कर रहा है। यहाँ स्थापित 108 फीट ऊँची 'एकात्मता की मूर्ति' (Statue of Oneness) और निर्माणाधीन 'अद्वैत लोक' संग्रहालय न केवल पर्यटन बल्कि आध्यात्मिक जिज्ञासा के वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। कल से प्रारंभ हो रहा यह पर्व समस्त राष्ट्र को सांस्कृतिक और वैचारिक सूत्र में पिरोने की दिशा में एक महती कदम सिद्ध होगा।  

सीएम युवा योजना को गति देने के लिए क्रेडिट काउंसलर्स की ट्रेनिंग शुरू, जिलों में तैनात होंगे 90 सर्टिफाइड काउंसलर

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देशों के तहत प्रदेश सरकार ने सीएम युवा योजना में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए इस वर्ष 1.5 लाख युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी क्रम में युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उन्हें बैंकिंग प्रक्रिया में सक्षम बनाने के उद्देश्य से गोमतीनगर में सर्टिफाइड क्रेडिट काउंसलर्स (सीसीसी) की विशेष ट्रेनिंग आयोजित की गई। पहले बैच में 50 जिलों और दूसरे बैच में 25 जिलों को शामिल किया गया है। यूपीकॉन के सभी कर्मचारियों को इस प्रशिक्षण से जोड़ा जा रहा है, ताकि वे जमीनी स्तर पर युवाओं को बेहतर मार्गदर्शन दे सकें। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद कुल 90 सर्टिफाइड क्रेडिट काउंसलर प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात किए जाएंगे। ये काउंसलर सीएम युवा योजना के तहत ऋण लेने वाले लाभार्थियों को बैंकिंग प्रक्रियाओं, दस्तावेजीकरण और प्रोजेक्ट तैयार करने में मदद करेंगे, जिससे युवाओं को आसानी से ऋण प्राप्त हो सके। काउंसलर्स निभाएंगे सेतु की भूमिका यूपीकॉन के एमडी प्रवीण सिंह ने बताया कि सर्टिफाइड क्रेडिट काउंसलर एमएसएमई उद्यमियों और बैंकों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करेंगे। वे न केवल उद्यमियों को उपयुक्त ऋण योजनाओं की जानकारी देंगे, बल्कि प्रोजेक्ट रिपोर्ट, वित्तीय विवरण और आवश्यक दस्तावेज़ तैयार करने में भी सहयोग करेंगे। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने संबोधन में क्रेडिट रेटिंग, सिबिल स्कोर और ग्रीन एवं नए प्रोजेक्ट्स के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सही वित्तीय योजना और बेहतर क्रेडिट प्रोफाइल के माध्यम से युवा उद्यमी न केवल आसानी से ऋण प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि अपने व्यवसाय को भी सफल बना सकते हैं। रोजगार और वित्तीय समावेशन को मिलेगा बढ़ावा यह पहल न केवल युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि अनुभवी पेशेवरों विशेषकर सेवानिवृत्त बैंक अधिकारियों को भी अपनी विशेषज्ञता का उपयोग करने का अवसर प्रदान करती है। प्रदेश सरकार की यह पहल वित्तीय समावेशन को सुदृढ़ करते हुए एमएसएमई सेक्टर को नई ऊर्जा देने का कार्य करेगी। आने वाले समय में यह मॉडल प्रदेश में रोजगार सृजन और आर्थिक सशक्तीकरण का मजबूत आधार बनेगा। एमएसएमई सेक्टर को मिलेगा मजबूती का आधार यह प्रशिक्षण कार्यक्रम स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (सिडबी) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस (आईआईबीएफ) के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। खास बात यह है कि यह सीसीसी कोर्स रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया  द्वारा अनुमोदित है, जिसे प्रदेश में व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है। सर्टिफाइड क्रेडिट काउंसलर योजना आरबीआई की वित्तीय समावेशन समिति की सिफारिशों पर आधारित है। इसका उद्देश्य एमएसएमई उद्यमियों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना और उन्हें ऋण प्राप्त करने में आने वाली कठिनाइयों को दूर करना है। इस ढांचे के अंतर्गत सिड्बी को एक्रीडिटिंग एजेंसी और इंप्लीमेंटिंग एंड रजिस्टरिंग अथॉरिटी की भूमिका दी गई है, जबकि आईआईबीएफ  द्वारा इस कोर्स को विकसित किया गया है। यह सर्टिफिकेशन प्राप्त करना सीसीसी बनने के लिए अनिवार्य है।

अक्षय कुमार की वॉर फिल्म ‘गोरखा’ बंद, फैंस की उम्मीदों को झटका

अक्षय कुमार के फैंस के लिए एक उदास कर देने वाली खबर सामने आई है. लंबे समय से जिस वॉर ड्रामा 'गोरखा' का इंतजार किया जा रहा था, उसे लेकर अब खुद खिलाड़ी कुमार ने स्थिति साफ कर दी है. अब यह साफ हो गया है कि यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में जा चुका है. अपनी अगली फिल्म 'भूत बंगला' की तैयारियों के बीच अक्षय ने उन तमाम अटकलों पर हमेशा के लिए विराम लगा दिया है. साल 2021 में जब इस फिल्म का ऐलान हुआ था, तब अक्षय के लुक और फिल्म की कहानी ने जबरदस्त सुर्खियां बटोरी थीं. अक्षय कुमार का खुलासा हाल ही में एक लाइव चैट सेशन के दौरान जब फैंस अक्षय कुमार से उनकी आने वाली फिल्मों के बारे में सवाल पूछ रहे थे, तभी एक फैन ने 'गोरखा' को लेकर अपडेट मांगा. अक्षय ने बिना किसी घुमाव के सीधा और साफ जवाब देते हुए कहा, 'नहीं, 'गोरखा' फिल्म नहीं बन रही है.' इस एक लाइन के जवाब ने उन लाखों फैंस की उम्मीदों को तोड़ दिया, जो अक्षय को पर्दे पर एक महान युद्ध नायक की भूमिका में देखना चाहते थे. इस प्रोजेक्ट को लेकर अनिश्चितता काफी समय से बनी हुई थी. फिल्ममेकर आनंद एल. राय ने 2023 में ही कुछ इशारे दिए थे. हालांकि उस वक्त उन्होंने इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया था कि अक्षय ने फिल्म छोड़ दी है, लेकिन उन्होंने यह जरूर माना था कि कुछ तकनीकी और तथ्यात्मक दिक्कतें आ रही हैं. उनका कहना था कि कहानी से जुड़े कुछ तथ्यों पर स्पष्टीकरण की जरूरत है, जिसकी वजह से काम को फिलहाल रोक दिया गया है. अब लगता है कि वे दिक्कतें हल नहीं हो पाईं और फिल्म को बंद करने का फैसला लेना पड़ा. क्या थी गोरखा की कहानी? 'गोरखा' की घोषणा अक्टूबर 2021 में बड़े धूमधाम से की गई थी. यह फिल्म भारतीय सेना की 5वीं गोरखा राइफल्स के जांबाज अधिकारी मेजर जनरल इयान कार्डोज़ो के जीवन पर आधारित थी. फिल्म का डायरेक्शन नेशनल अवॉर्ड विजेता संजय पूरन सिंह चौहान करने वाले थे. इसमें 1962, 1965 और खास तौर पर 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की बहादुरी की गाथा दिखाई जानी थी. मेजर जनरल इयान कार्डोजो को उनकी निडरता के लिए जाना जाता है, और अक्षय कुमार इस किरदार को लेकर काफी उत्साहित थे. भूत बंगला को लेकर चर्चा में फिल्म की घोषणा के वक्त जो पहला पोस्टर जारी किया गया था, उसमें अक्षय का अवतार बेहद दमदार नजर आ रहा था.  लोगों का मानना था कि अक्षय एक बार फिर 'केसरी' जैसा जादू बिखेरने को तैयार हैं. फिलहाल अक्षय कुमार अपना पूरा ध्यान अपनी आने वाली हॉरर-कॉमेडी फिल्म 'भूत बंगला' पर लगा रहे हैं. हालांकि 'गोरखा' प्रोजेक्ट के बंद भी खिलाड़ी कुमार के पास अभी भी कई बड़े प्रोजेक्ट्स कतार में हैं.

सम्राट चौधरी सरकार में शराबबंदी नीति पर सवाल, राजस्व नुकसान का मुद्दा उठा

 पटना बिहार में बीजेपी के नेतृत्व में सरकार बन गई है जिसके मुखिया सम्राट चौधरी बनाए गए हैं। इसी के साथ नीतीश कुमार की शराबबंदी कानून बहस तेज हो गई है। एनडीए में शामिल उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा(आरएलएम)के विधायक माधव आनंद ने इस कानून को राज्य के लिए नुकसानदायक बताते हुए समीक्षा करके समाप्त करने की मांग की है। गुरुवार को सीएम सम्राट चौधरी से मिलकर लौटे माधव आनंद मीडिया कर्मियों से बात की और कहा कि उनसे बिहार की जनता को काफी उम्मीदे हैं। वे बिहार नाम वैश्विक स्तर पर ले जाएंगे। बिहार में बीस साल पुराने नीतीश युग का अंत हो गया। इसके साथ ही उनके फैसलों पर चर्चा शुरू हो गई। पूर्ण शराबबंदी नीतीश कुमार का बहुत बड़ा क्रांतिकारी और कदम है। नीतीश कुमार सीएम पद से हटते ही शराबबंदी पर सत्ता पक्ष की ओर से ही सवाल उठने लगे हैं। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के मधुबनी विधायक सीएम से मिलने उनके सरकारी आवास पर पहुंचे। बाहर निकले तो काफी प्रसन्न मुद्रा में दिखे। उन्होंने कहा कि सीएम शपथ लेने के साथ ही ऐक्टिव हैं। लोगों से मिल रहे हैं। शराबबंदी के सवाल पर माधव आनंद ने क्रांतिकारी बयान दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में शराबबंदी कानून की कोई आवश्यकता नहीं है। इससे राजस्व की हानि हो रही है। उन्होंने कहा कि सदन में ही नीतीश कुमार के सामने शराबबंदी की समीक्षा की मांग की थी। अर्थशास्त्री होने के नाते आज फिर से कह रहा हूं कि बिहार में शराबबंदी की कोई जरूरत नहीं है बल्कि, जागरुकता पैदा करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शरबबंदी कोई समाधान नहीं हो सकता। बिहार को राजस्व का बहुत नुकसान हो रहा है। बिहार को विकसित बनाने के लिए फंड की आवश्यकता है जिसकी कमी महसूस की जाती है। हमारे राज्य का राजस्व दूसरे राज्यों और देशों में जा रहा है। शराबबंदी नीतीश कुमार की ऐतिहासिक पहल थी। इसके दस साल हो गए। अब इसकी समीक्षा होनी चाहिए। इसकी बिहार जैसे राज्य में कोई जरूरत नहीं है जहां राजस्व की बहुत अधिक जरूरत है। माधव आनंद ने कहा कि जागरुकता और जानकारी बढ़ेगी तो लोग खुद नशे से दूर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार बिहार के विकास के लिए तेजी से काम करेगी और प्रदेश काफी तरक्की करेगा। नीतीश कुमार ने जो खाका खींचा उसे वर्तमान सरकार आगे बढ़ाएगी। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलेरेंस की नीति जारी रहेगी। बिहार अब इतिहास रचेगा। विकसित भारत और विकसित बिहार की परिकल्पना जरूर साकार होगी। हालांकि, सम्राट चौधरी पहले ही शराबंदी कानून को लागू रखने की बात कह चुके हैं। बिहार में 2016 से पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है। इस दौरान करोड़ों लीटर शराब जब्त किए गए और लाखों लोगों को जेल भेजा गया। लेकिन, जहरीली शराब से बड़ी संख्या में लोग मारे गए और राज्य में अपराध का एक नया नेटवर्क शराब के अवैध कारोबार की वजह से तैयार हो गया।

FMG इंटर्न को मिलेगा ₹17,500 स्टाइपेंड, राज्य सरकार का बड़ा फैसला

रांची झारखंड मंत्रिमंडल की बैठक में बुधवार को राज्य के चार जिलों धनबाद, जामताड़ा, गिरिडीह और खूंटी के सदर अस्पतालों को पीपीपी मोड में मेडिकल कॉलेज के रूप में उन्नयन की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। साथ ही विदेशों से मेडिकल ग्रेजुएट की पढ़ाई (फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट) करने वाले छात्रों को राज्य के मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप के दौरान स्टाईपंड की भी मंजूरी दी गयी। अब एफएमजी इंटर्न को 17500 रुपए स्टाईपंड मिलेंगे। स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने इस फैसले के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों की कमी के कारण हमारे राज्य में डॉक्टरों की भारी कमी रही है। मैं स्वयं इसका उदाहरण हूं, मुझे अपनी मेडिकल शिक्षा के लिए राज्य से बाहर जाना पड़ा। बाहर के डॉक्टर राज्य में आने से कतराते हैं, ऐसे में स्थानीय स्तर पर डॉक्टर तैयार करना ही स्थायी समाधान है। राज्य में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ने से स्थानीय युवाओं को मेडिकल शिक्षा का अवसर मिलेगा। डॉक्टरों की कमी दूर होगी तो उच्च स्तरीय इलाज की सुविधा जिले में ही उपलब्ध होगी। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के साथ ही स्थानीय रोजगार के नए मौके सृजित होंगे। क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा। मरीजों को बाहर जाने की जरूरत कम होगी। केंद्र और राज्य के सहयोग से होगा विकास चार जिलों में मेडिकल कॉलेज का राज्य सरकार द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर बीते अक्तूबर में केंद्र सरकार ने सहमति दी थी। चारों जिलों में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना पीपीपी (सार्वजनिक निजी सहभागिता) मोड में की जाएगी। यह स्वीकृति भारत सरकार की ‘पीपीपी मोड में मेडिकल कॉलेज स्थापना योजना’ के तहत दी गई है। चारों जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना केंद्र-राज्य की मदद से होगा। परियोजना का संचालन वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के डिपार्टमेंट ऑफ ईकोनॉमिक अफेयर द्वारा संचालित व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण, यानी वीजीएफ (वायबिलिटी गैप फंडिंग) की उप योजना 1 एवं 2 के अंतर्गत कार्यान्वित की जाएगी। इन योजनाओं के तहत कार्यान्वित होंगे कॉलेज मेडिकल कॉलेज धनबाद परियोजना वीजीएफ उपयोजना-1 के तहत, खूंटी, जामताड़ा व गिरिडीह मेडिकल कॉलेज परियोजना वीजीएफ उपयोजना-2 के तहत कार्यान्वित होंगे। इस उप योजना-2 के तहत भारत सरकार 40% पूंजीगत व्यय सहायता तथा 25% परिचालन व्यय सहायता प्रदान करेगी। जबकि, झारखंड सरकार 25% से 40% तक पूंजीगत व्यय तथा 15% से 25% तक परिचालन व्यय सहायता के रूप में योगदान देगी। उपयोजना-1 के तहत पूंजीगत सहायता के रूप में भारत सरकार से 30 प्रतिशत तथा राज्य सरकार से 30 प्रतिशत के अनुपात में प्रदान की जाएगी। जिलों में खुलेंगे नए कॉलेज खूंटी 50 एमबीबीएस सीटें जामताड़ा 100 एमबीबीएस सीटें धनबाद 100 एमबीबीएस सीटें गिरिडीह 100 एमबीबीएस सीटें

परीक्षाओं में नकल पर सख्ती: चयन आयोग की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति, AI कैमरों से होगी लाइव निगरानी

प्रयागराज/लखनऊ. प्रतियोगी परीक्षाओं को पारदर्शी और नकलविहीन बनाए रखने की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग ने सख्त कदम उठाए हैं। आयोग के अध्यक्ष डॉ प्रशांत कुमार ने बताया कि आगामी परीक्षाओं में जीरो टॉलरेंस नीति को पूरी तरह लागू किया जाएगा, जिससे शुचिता, पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।  उन्होंने बताया कि इसके लिए आयोग मुख्यालय में अत्याधुनिक एकीकृत कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जहां से सभी परीक्षा केंद्रों की सघन निगरानी की जाएगी। इस कंट्रोल रूम में दो दर्जन से अधिक हाई-क्वालिटी स्क्रीन और एआई कैमरों की व्यवस्था की गई है, जिससे परीक्षा केंद्रों की गतिविधियों पर रियल-टाइम नजर रखी जा सकेगी। यह व्यवस्था परीक्षा प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी एवं नकलविहीन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। डॉ. प्रशांत कुमार ने कहा कि आयोग द्वारा परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ आधुनिक निगरानी तंत्र को अपनाया जा रहा है, जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता को तुरंत चिन्हित कर आवश्यक कार्रवाई की जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनुचित साधनों के प्रयोग पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने अभ्यर्थियों से अपील की कि वे परीक्षा को पूर्ण ईमानदारी एवं नियमों के अनुरूप दें तथा किसी भी प्रकार की अफवाहों या भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न दें। आयोग द्वारा सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पारदर्शिता एवं निष्पक्षता के साथ सुनिश्चित की जा रही हैं।