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वनप्लस पैड 4 लॉन्च डेट कन्फर्म,30 अप्रैल को मिलेगा पावरफुल टैबलेट, जानें फीचर्स

वनप्लस भारत में एक नया टैबलेट लॉन्च करने जा रहा है, जिसका नाम OnePlus Pad 4 होगा. यह टैबलेट बीते साल लॉन्च किए गए OnePlus Pad 3 का अपग्रेड वर्जन होगा. कंपनी ने बताया है कि यह टैबलेट भारत में 30 अप्रैल को लॉन्च होगा. इसमें ऑक्सीजनओएस का सपोर्ट मिलेगा. OnePlus Pad 4 की जानकारी वनप्लस के ऑफिशियल पोर्टल पर शेयर की है. यह एक प्रोडक्टिविटी फोक्स्ड टैबलेट है, जिसमें हाई एंड स्पेसिफिकेशन्स मिलते हैं. वनप्लस के अपकमिंग टैबलेट एक लाइटवेट प्रोडक्ट होगा और इसमें मेटल यूनिबॉडी डिजाइन का यूज किया गया है. यह डिवाइस भारत में दो कलर वेरिएंट में लॉन्च होगा,  जो ड्यून ग्लो और सैग मिस्ट कलर हैं. OnePlus Pad 4 का डिस्प्ले वनप्लस पोर्टल पर लिस्ट डिटेल्स के मुताबिक, OnePlus Pad 4 में  13.2 इंच का 3.4K (3.4 हजार रेजोल्युशन) मिलेगा. यह 144Hz के रिफ्रेश रेट्स के साथ आता है. इसमें आई केयर फीचर मिलेगा, जो लंबे समय तक स्क्रीन देखने की वजह से आंखों पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सकेगा. वनप्लस पैड 4 का प्रोसेसर वनप्लस पैड 4 में बेहतर परफॉर्मेंस का यूज किया जाएगा. AnTuTu बेंचमार्क पर 4.1 मिलियन का स्कोर मिला है. इस डिवाइस में Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट का यूज किया जाएगा. वनप्लस पैड 4 की रैम और बैटरी वनप्लस पैड 4 में मैक्सिमम 12GB की LPDDR5X RAM मिलेगी. इसके अलावा 512जीबी इंटरनल स्टोरेज मिलेगी. साथ ही 13380mAh की बैटरी दी जाएगी, जिसको चार्जिंग के लिए 80W का सुपर वूक फास्ट चार्जिंग मिलेगा. वनप्लस पैड 4 के साथ असेसरीज भी मिलेंगी वनप्लस पैड 4 के साथ कुछ असेसरीज भी मिलती है. इसमें डेडिकेटेड स्मार्ट कीबोर्ड और न्यू वनप्लरस स्टाइलो प्रो भी मिलेगा, जिसे खासतौर से स्केचिंग और राइटिंग के लिए तैयार किया गया है. वनप्लस पैड 4 की कीमत को लेकर अभी कोई ऑफिशियल जानकारी सामने नहीं आई है. ना ही इसके साथ मिलने वाले बैंक ऑफर्स को लेकर कोई डिटेल्स शेयर की है. हालांकि वनप्लस पैड 3 की शुरुआती कीमत 49,999 रुपये रखी गई थी.

CDS ने बद्रीनाथ में चारधाम यात्रा की तैयारियों की की समीक्षा, 3 दिन में शुरू होगी यात्रा

बद्रीनाथ  उत्तराखंड में 19 अप्रैल से शुरू हो रही चारधाम यात्रा से पहले तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) अनिल चौहान गुरुवार को बदरीनाथ धाम पहुंचे, जहां उन्होंने यात्रा व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। उनके दौरे को सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। सीडीएस अनिल चौहान सबसे पहले बदरीनाथ हेलीपैड पहुंचे, जहां पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान अधिकारियों ने चारधाम यात्रा को लेकर किए गए इंतजामों की विस्तृत जानकारी दी। बैठक में सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, तीर्थयात्रियों की सुविधाएं और आपदा से निपटने की तैयारियों पर विशेष चर्चा हुई। सीडीएस ने स्पष्ट कहा कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए और सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह सुचारू रहनी चाहिए। तैयारियों का जायजा लिया उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा उत्तराखंड की पहचान और पर्यटन की रीढ़ है, इसलिए इसमें आने वाले श्रद्धालु यहां से सकारात्मक और आध्यात्मिक अनुभव लेकर जाएं, यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत रखने और हर स्थिति से निपटने के लिए सतर्क रहने के निर्देश भी दिए। सूर्य देवभूमि चैलेंज 2.0 का शुभारंभ इसी दौरान सीडीएस अनिल चौहान ने गढ़वाल के हिमालयी क्षेत्र में भारतीय सेना द्वारा आयोजित ‘सूर्य देवभूमि चैलेंज 2.0’ प्रतियोगिता का भी विधिवत शुभारंभ किया। 16 से 20 अप्रैल तक आयोजित होने वाली इस साहसिक प्रतियोगिता का उद्देश्य खेलों के माध्यम से विरासत संरक्षण, पर्यटन और सीमांत क्षेत्रों के विकास को बढ़ावा देना है। ‘वाइब्रेंट विलेज योजना’ के तहत यह आयोजन सीमावर्ती गांवों में रोजगार और पर्यटन को नई गति देने की पहल माना जा रहा है। प्रतियोगिता में 113 किलोमीटर की दौड़ होगी करीब 113 किलोमीटर लंबी इस चुनौतीपूर्ण यात्रा में तीन प्रमुख केदार—कल्पेश्वर, रुद्रनाथ और तुंगनाथ को शामिल किया गया है। प्रतियोगिता में कुल 300 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें 200 पुरुष और महिलाएं तथा 100 सेवा कर्मी शामिल हैं। विभिन्न आयु वर्ग के प्रतिभागियों के लिए कुल 14 लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी निर्धारित की गई है। चारधाम यात्रा का काउंटडाउन यह प्रतियोगिता तीन चरणों में पूरी होगी। पहले दिन हेलंग से कलगोठ तक 36 किलोमीटर, दूसरे दिन कलगोठ से मंडल तक 39 किलोमीटर और तीसरे दिन मंडल से ऊखीमठ तक 38 किलोमीटर की कठिन दूरी तय की जाएगी। यह आयोजन न सिर्फ साहसिक खेलों को बढ़ावा देगा, बल्कि उत्तराखंड के दूरस्थ इलाकों को भी नई पहचान दिलाने में मदद करेगा। चारधाम यात्रा का काउंटडाउन भी शुरू हो चुका है। 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलेंगे, जबकि 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इसे देखते हुए सभी विभाग तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं, ताकि यात्रा सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।

महिला आरक्षण लागू होने के बाद 6 राज्यों में 400 से ज्यादा सीटें, लोकसभा चुनाव में आएगी बड़ी बदलाव

नई दिल्ली महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से ही लागू करने की तैयारी है। इसके लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सीटों में 50 फीसदी का इजाफा किया जा रहा है। अब तक 543 सांसद देश के लिए नीतियां बनाते थे और अब इनकी संख्या 816 हो जाएगी। फिर भी उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, बिहार और बंगाल जैसे राज्य पहले की तरह ही ताकतवर होंगे और उनके सांसदों की संख्या का अनुपात वैसा ही रहेगा। हालांकि अब कुल सीटों का ही नंबर बढ़ जाने के चलते देश के 6 राज्यों में ही इतनी सीटें होंगी कि आंकड़ा 400 पार पहुंच जाएगा। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बंगाल, बिहार, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश शामिल हैं। उत्तर प्रदेश में फिलहाल 80 सांसद हैं और अब यहां से 120 सांसद चुनकर दिल्ली जाएंगे। इसी तरह बंगाल का आंकड़ा 42 से बढ़कर 63 होगा तो वहीं महाराष्ट्र में 48 की बजाय 72 सांसद चुने जाएंगे। बिहार से 40 के स्थान पर 60 लोकसभा एमपी होंगे तो वहीं मध्य प्रदेश का आंकड़ा 29 से बढ़कर 44 हो जाएगा। इस तरह इन 6 राज्यों की ही सीटों को मिला लें तो आंकड़ा 418 का होता है। ऐसे में केंद्र सरकार किस दल या गठबंधन की होगी, यह तय करने में इन 6 राज्यों का महत्वपूर्ण रोल होगा। अब भी राजनीतिक जुमले के तौर पर कहा जाता है कि लखनऊ से ही दिल्ली का रास्ता तय होता है। इस स्थिति में कोई बदलाव अब भी नहीं होगा। इसके अलावा महाराष्ट्र, बंगाल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्य भी पहले की तरह ही ताकतवर बने रहेंगे। इस दौरान सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि साउथ इंडिया के राज्यों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा। खुद होम मिनिस्टर अमित शाह ने गुरुवार को लोकसभा में बताया कि 28 सीटों वाले कर्नाटक में अब 42 सांसद चुने जाएंगे। इसके आंध्र प्रदेश की संख्या 25 से बढ़कर 38 हो जाएगी और केरल में 20 की बजाय 30 सांसद रहेंगे। एक तिहाई सीटें पर कैसे लागू होगा महिलाओं का आरक्षण बता दें कि महिला आरक्षण लागू होते ही सभी राज्यों की एक तिहाई सीटों से महिलाएं ही चुनी जाएंगी। इस तरह यूपी में 120 में से 40 सांसद महिला होंगी। इसके अलावा बिहार में यह आंकड़ा 20 का होगा। इस आरक्षण को रोटेशन के तहत लागू करने की तैयारी है। वहीं एससी और एसटी वर्ग की महिलाओं को उस वर्ग की तय सीटों में से ही 33 फीसदी की हिस्सेदारी दी जाएगी। हालांकि विपक्ष का कहना है कि मुस्लिम और ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए भी कुछ प्रावधान किया जाए।

मुल्तानी मिट्टी फेस पैक: टमाटर और गुलाब जल से पाएं नैचुरल पिंक ग्लो

हर महिला चाहती है कि उसकी स्किन सुंदर हो जिसके लिए वो महंगे से महंगे फेशियल भी कराती हैं लेकिन केमिकल युक्त फेशियल अक्सर आपकी स्किन को कुछ समय के लिए तो अच्छा ग्लो देते हैं लेकिन लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकते हैं. ऐसे में मुल्तानी मिट्टी एक प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प है. अगर आप इसमें सही चीजें मिलाकर लगाएं तो यह न केवल चेहरे की गंदगी और एक्स्ट्रा ऑयल हटाती है बल्कि आपको वो पिंकिश ग्लो भी देती है जिसके लिए आप पार्लर जाती हैं. मुल्तानी मिट्टी में छिपे खनिज तत्व स्किन को टाइट करते हैं और इन दो खास चीजों का मिश्रण चेहरे पर गुलाबी निखार लाने का काम करता है. मुल्तानी मिट्टी में क्या मिलाएं चेहरे पर गुलाबी निखार पाने के लिए आपको मुल्तानी मिट्टी में ये दो चीजें मिलानी हैं. इनमें पहला है गुलाब जल जो स्किन के pH लेवल को बैलेंस करता है और चेहरे पर गुलाबी चमक देता है. इसके अलावा दूसरा है टमाटर का रस. टमाटर के रस में मौजूद लाइकोपीन त्वचा को नैचुरल ग्लो देता है और टैनिंग हटाता है. फेस पैक बनाने की विधि मुल्तानी मिट्टी: 2 बड़े चम्मच टमाटर का रस: 1 बड़ा चम्मच (ताजा) गुलाब जल: जरूरत के अनुसार (पेस्ट बनाने के लिए) शहद: आधा चम्मच (अगर स्किन ड्राई है तो शहर मिलाना चाहिए) बनाने और लगाने का तरीका एक कांच की कटोरी में मुल्तानी मिट्टी का पाउडर लें. इसमें ताजा टमाटर का रस और गुलाब जल डालकर एक स्मूद पेस्ट तैयार करें. चेहरे को साफ पानी से धोकर सुखा लें. अब इस पैक की एक पतली परत गर्दन और चेहरे पर लगाएं. इसे 15 मिनट तक या सूखने तक लगा रहने दें. चेहरे पर थोड़ा पानी छिड़कें और हल्के हाथों से मसाज करते हुए ठंडे पानी से धो लें. हफ्ते में 2 बार इसका इस्तेमाल करने से चेहरे पर फर्क दिखने लगेगा.

बारिश का अलर्ट 13 राज्यों में, 4 प्रदेशों में हीटवेव की चेतावनी; आज का मौसम कैसा रहेगा?

नई दिल्ली भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज देश के कई राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। देश के 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के लिए यह अनुमान लगाया गया है। वहीं, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित छह राज्यों के लिए लू का अलर्ट भी जारी किया गया है। मौमस एजेंसी का कहना है कि पूर्वोत्तर भारत के राज्यों असम और मेघालय में आज अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। इसके अलावा, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में गरज के साथ बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग का कहना है कि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में आज ओलावृष्टि की संभावना है। इसके अलावा, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और राजस्थान में बिजली कड़कने के साथ हल्की बारिश हो सकती है। इन राज्यों में हीटवेव की चेतावनी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और कर्नाटक अलग-अलग हिस्सों में आज लू चलने की बहुत संभावना है। आंध्र प्रदेश, तटीय कर्नाटक, गुजरात, केरल, कोंकण और गोवा, ओडिशा और तमिलनाडु में मौसम काफी गर्म और उमस भरा रहेगा। आपको बता दें कि कल देश का सबसे अधिक तापमान उत्तर प्रदेश के बांदा में 44.4°C दर्ज किया गया । विदर्भ, मराठवाड़ा और दिल्ली के अधिकांश हिस्सों में तापमान 40°C से 44°C के बीच रहा। न्यूनतम तापमान की बात करें तो मैदानी इलाकों में सबसे कम न्यूनतम तापमान उत्तर प्रदेश के सरसावा में 14.0°C दर्ज किया गया। मौसम विभाग के कहना है कि अगले तीन दिनों के दौरान पूर्वोत्तर भारत और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में व्यापक बारिश की संभावना है। गुजरात और प्रायद्वीपीय भारत के पश्चिमी हिस्सों में छिटपुट बारिश हो सकती है। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के बागवानों को फलदार पेड़ों को बचाने के लिए ओला-नेट का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

2200 करोड़ की जमीन से कब्जा हटाने पहुंची टीम पर विरोध, कार्रवाई रुकी

जयपुर जयपुर में को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान उस समय हालात बिगड़ गए, जब हाउसिंग बोर्ड की टीम को स्थानीय लोगों के विरोध और पथराव का सामना करना पड़ा. मामला बीटू बाइपास से द्रव्यवती नदी तक फैली करीब 42 बीघा सरकारी जमीन से जुड़ा है, जिसकी कीमत 2200 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है. हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद हाउसिंग बोर्ड प्रशासन कब्जा लेने की कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंचा था. उप-आवासन आयुक्त संजय शर्मा के नेतृत्व में टीम जेसीबी मशीनों के साथ पहुंची और अवैध निर्माणों को हटाने की शुरुआत की. इस दौरान बाउंड्री वॉल और अस्थायी ढांचों को तोड़ा जाने लगा. तभी प्रशासन की टीम को मौके पर विरोध झेलना पड़ा. महिलाओं ने जेसीबी पर फेंके पत्थर कार्रवाई शुरू होते ही वहां रह रहे लोगों ने विरोध जताया और देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया. कुछ महिलाओं द्वारा जेसीबी पर पत्थर फेंके जाने के बाद स्थिति और बिगड़ गई, जिसके चलते प्रशासन को कुछ समय के लिए कार्रवाई रोकनी पड़ी. भू-माफियाओं ने किया घोटाला! बताया जा रहा है कि संबंधित जमीन का अधिग्रहण हाउसिंग बोर्ड ने वर्ष 1989 में किया था और 1991 में इसकी प्रक्रिया पूरी हो गई थी, लेकिन लंबे समय तक कब्जा नहीं लिया जा सका. इसी बीच कथित तौर पर भू-माफियाओं ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यहां कॉलोनी विकसित कर दी और प्लॉट बेच दिए. सूत्रों के अनुसार, पुराने दस्तावेजों के सहारे जमीन का सौदा दिखाकर कई लोगों को कम दामों में भूखंड आवंटित किए गए. साल 2019 में कॉलोनी के नियमितीकरण का मामला उठा. तब जयपुर विकास प्राधिकरण ने एनओसी मांगी, लेकिन हाउसिंग बोर्ड ने इसे खारिज कर दिया. इसके बाद मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच एसीबी को सौंप दी गई थी. फिलहाल, प्रशासन की सख्ती और स्थानीय विरोध के बीच यह कार्रवाई शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है.

सियासी समीकरणों में बदलाव, बीजेपी के सवर्ण वोट बैंक में असंतोष

पटना  कहते हैं कि राजनीति में नेता भले ही अपने वोट बैंक के भरोसे रहें, लेकिन उनकी एक गलती बना-बनाया वोट बैंक न सिर्फ बिगाड़ सकती है बल्कि भड़का भी सकती है। सोशल मीडिया पर इन दिनों जिस तरह की चर्चा चल रही है, उसको देख कर बीजेपी के मामले में भी ऐसा ही लग रहा है। एक तरफ विजय कुमार सिन्हा का त्याग-तपस्या-बलिदान वाला बयान और दूसरी तरफ श्रेयसी सिंह की चुप्पी। उधर नीतीश ने इसी बहाने अपनी तरफ से मरहम लगा दिया। समझिए कैसे। बिहार में बीजेपी से कोर वोटर हुए नाराज बिहार में बीजेपी को सत्ता में लाने में भूमिहार ब्राह्मणों का बड़ा हाथ माना जाता रहा है। 2005 में जब ये वोटर लालू प्रसाद यादव के चलते कांग्रेस से बिदके थे, तो उन्होंने अपना सारा समर्थन बीजेपी की झोली में डाल दिया। पटना का बिक्रम विधानसभा क्षेत्र हो या फिर बेगूसराय में 2015 को छोड़ बाकी विधानसभा चुनाव। भूमिहार ब्राह्मण और ब्राह्मण बिरादरी बहुल क्षेत्रों में लोगों ने बीजेपी को हाथों-हाथ लिया। हालांकि कुछ क्षेत्रों में कांग्रेस को फिर से इसी समाज का समर्थन मिला और उसने वापसी भी की। लेकिन अब यही समाज बीजेपी से फिर से नाराज है। और तो और बीजेपी के कुछ चुनिंदा 'राय' यानी यादव वोटर भी नाराज दिख रहे हैं। सोशल मीडिया पर दिख रही नाराजगी सोशल मीडिया साइट्स पर आप जाएंगे तो आपको कई ऐसे पोस्ट मिलेंगे, जिसमें खुल कर बिहार बीजेपी को कोसा जा रहा है। यहां तक कहा जा रहा है कि बीजेपी को जब सरकार बनाने का मौका मिला तो अपने उन कोर वोटरों को ही भूल गई, जिसने उन्हें सत्ता के इस मुकाम तक पहुंचाया। अपनी पार्टी के किसी नेता को छोड़ बाहर से आए चेहरे पर भरोसा किया गया। ऐसे में कोर वोटरों को सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनाए जाने से ज्यादा ऐतराज अपनी अनदेखी का है। वहीं जिस तरह से सियासी हवा में श्रेयसी सिंह का नाम तैरा, उसके बाद राजपूत वोटरों के एक तबके में भी नाराजगी दिख रही है। इन सबका असर भी देखने को मिला। बिहार में पहली बार बीजेपी सत्ता की ड्राइविंग सीट पर है, लेकिन इसकी खुशी बीजेपी के ज्यादातर कार्यकर्ताओं में ही नहीं दिख रही है। कहने वाले तो यहां तक कह रहे हैं कि एक बार पटना बीजेपी ऑफिस घूम आइए, आपको सहज अंदाजा मिल जाएगा।     2005 में बीजेपी को नीतीश के जरिए सत्ता में लाने में सवर्ण वोटरों की बड़ी भूमिका     सवर्ण वोटरों ने बीजेपी को एकजुट होकर एकमुश्त वोट दिया था और देते रहे     लेकिन अब नए समीकरण गढ़ने पर बीजेपी को यही वोटर सुना रहे     नाराजगी सम्राट चौधरी को सीएम बनाने से नहीं बल्कि अपनी अनदेखी होने से नीतीश ने इसी मौके का उठाया फायदा पूर्व सीएम नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री की गद्दी तो छोड़ दी लेकिन जाते-जाते उन्होंने जातीय समीकरणों की ऐसी गोटी फिट की, जो भले ही सरकार को बनाए रखने में नींव का काम करे। लेकिन बीजेपी के लिए मुसीबत ही बनेगी। नीतीश कुमार ने अपने भरोसेमंद मंत्री विजय कुमार चौधरी (भूमिहार) और बिजेंद्र प्रसाद यादव (यादव) को उपमुख्यमंत्री बनवाकर बीजेपी के कोर वोटरों के दिल पर मरहम लगा दिया। बात ये रही कि कुर्मी जाति से किसी को बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली, तो जदयू में निशांत के नाम और राजनीति में आने के बाद संतुष्टि है, नाराजगी नहीं। अब क्या करेगी बीजेपी? ये फैसला कोई नहीं कर सकता कि बीजेपी क्या करेगी? ये पूरी तरह से उसका अंदरुनी मसला है, लेकिन विधायक दल की बैठक के बाद जिस तरह से विजय कुमार सिन्हा ने त्याग-तपस्या-बलिदान और कमांडर वाली बात की, उससे उन्होंने काफी हद तक बीजेपी में भूमिहार वोटरों की सहानुभूति अपनी ओर खींच ली। ऐसे में अब बिहार बीजेपी के सामने सबसे बड़ी समस्या यही है कि वो अपने कोर वोटरों को मनाए कैसे, क्योंकि ये वोटर ऐसी जमात है जो नाराज होने पर शिफ्ट होने में देर नहीं करते। अब बीजेपी इन्हें फिर से कैसे पाले में लाती है, जाहिर है इसके लिए उसके थिंक टैंक में मंथन जरूर हो रहा होगा।

शुक्र गोचर 2026: वृषभ राशि में प्रवेश से इन राशियों को मिलेगा बड़ा लाभ

 अप्रैल 2026 में शुक्र ग्रह का राशि परिवर्तन ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है. 19 अप्रैल को शुक्र अपनी ही राशि वृषभ में प्रवेश करने जा रहे हैं, जिसे उसका स्वराशि गोचर कहा जाता है.ऐसी स्थिति में इसका प्रभाव और अधिक शक्तिशाली हो जाता है, जिससे कई राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं. शुक्र को धन, प्रेम, सौंदर्य और विलासिता का कारक ग्रह माना जाता है. जब यह अपनी ही राशि में आता है, तो जीवन में सुख-सुविधाओं, आकर्षण और आर्थिक मजबूती का स्तर बढ़ सकता है. इस बार का गोचर भी कुछ ऐसा ही संकेत दे रहा है, जहां कुछ राशियों के लिए यह समय तरक्की और समृद्धि लेकर आ सकता है. वृषभ– सबसे ज्यादा लाभ वृषभ राशि के लोगों को मिलने की संभावना है. इस दौरान आत्मविश्वास में वृद्धि होगी. व्यक्तित्व में निखार आएगा.  आय के नए स्रोत बन सकते हैं. आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हो सकती है. साथ ही, जीवन में सुख-सुविधाओं का विस्तार भी संभव है, जिससे जीवनशैली में सुधार देखने को मिलेगा. कन्या- कन्या राशि के लिए भी यह गोचर लाभकारी माना जा रहा है. करियर और व्यापार में नए अवसर सामने आ सकते हैं.  लंबे समय से अटके काम पूरे हो सकते हैं. भाग्य का साथ मिलने से सफलता के रास्ते आसान हो जाएंगे.  परिवार में सकारात्मक माहौल बना रहेगा . रिश्तों में मजबूती आएगी. कुंभ- कुंभ राशि के जातकों के लिए भी यह समय प्रगति का संकेत दे रहा है.  नौकरी में उन्नति, वेतन वृद्धि या नए अवसर मिल सकते हैं.  निवेश के लिहाज से भी समय अनुकूल रह सकता है, जिससे भविष्य में लाभ मिलने की संभावना बढ़ेगी. परिवार के साथ संबंध बेहतर होंगे .जीवन में स्थिरता आएगी. इसके अलावा, कुछ अन्य राशियों को भी इस गोचर से आंशिक लाभ मिल सकता है, खासकर आर्थिक मामलों और सामाजिक प्रतिष्ठा में. हालांकि हर राशि पर प्रभाव अलग-अलग होगा, इसलिए किसी भी बड़े निर्णय से पहले सोच-समझकर कदम उठाना जरूरी रहेगा.

गन्ना खेती होगी आधुनिक, किसानों को मशीनें किराये पर मिलेंगी

पटना  बिहार सरकार ने राज्य में गन्ना की खेती को आधुनिक बनाने के साथ ही छोटे और सीमांत किसानों की लागत कम करने के उद्देश्य से गन्ना उत्पादक वाले जिलों में ‘कस्टम हायरिंग सेंटर’ (गन्ना सेवा केंद्र) स्थापित करने का निर्णय है लिया है । इसका मुख्य उद्देश्य मशीनीकरण को बढ़ावा देना, गन्ने की खेती में लागत को कम करना और उत्पादन को बढ़ाना है। विदित हो कि राज्य में गन्ना की खेती विस्तार करने के उद्देश्य से गन्ना उद्योग विभाग द्वारा कई योजनाएं शुरू की गई है, ताकि किसान गन्ना की खेती की तरफ आकर्षित हो सकें। किसानों को फायदा गन्ना की खेती को बढ़ावा देने के लिए गन्ना उद्योग विभाग द्वारा राज्य के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों में गन्ना सेवा केंद्र की स्थापना करने का निर्णय लिया है, ताकि गन्ना की खेती करने के लिए किसान इस सेंटर से आधुनिक मशीनों को किराये पर ले सकेंगे। लघु एवं सीमांत किसानों को महंगी मशीन खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उनके जरूरत के समय इस सेंटर पर मशीनें उपलब्ध रहेंगी। बताया जाता है कि राज्य में ज्यादातर छोटे और सीमांत गन्ना किसान हैं, जिन्हें खेती के दौरान लंबे समय से विभिन्न समस्याओं से जूझना पड़ता है। गन्ना किसानों की समस्या जिसमें खेती की लागत बहुत अधिक होना और उत्पादन कम होना, अत्याधुनिक मशीनों का आभाव एवं मजदूरों के भरोसे ज्यादातर काम कराना शामिल है। गन्ना की खेती करने में भूमि की तैयारी से लेकर उसके बुवाई और कटाई जैसे काम हाथ से होने के कारण प्रति एकड़ लागत बहुत बढ़ जाती है। इसको देखते हुए गन्ना उद्योग विभाग ने जिलों में ‘कस्टम हायरिंग सेंटर’ स्थापित करने का निर्णय लिया है। यहां उपलब्ध मशीनें गन्ना खेती के पूरे चक्र के लिए रहेंगी, जिससे की किसानों को मिट्टी की तैयारी करने से लेकर बीज उपचार, बुवाई, सिंचाई सहायता और कटाई में सहायता मिलेगी। इसके साथ ही किसानों को प्रति एकड़ लागत कम होगी, समय पर खेती के काम होंगे और गन्ना का उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बढ़ेंगे। गन्ना सेवा केंद्र ये सीएचसी आगे चलकर 'गन्ना सेवा केंद्र' के रूप में भी काम करेंगे। यह किसानों के लिए एक वन-स्टॉप समाधान होगा। यहां किसानों को खेती से जुड़ी सलाह, नई किस्मों की जानकारी, सरकारी योजनाओं और सब्सिडी की जानकारी, मिल और बाजार से जुड़ाव के बारे में भी जानकारी मिलेगी। इससे किसानों का समय और खर्च दोनों बचेंगे और सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिलेगा।  

रणबीर, आलिया और विक्की कौशल स्टारर ‘लव एंड वॉर’ की रिलीज डेट का ऐलान

संजय लीला भंसाली एक ऐसे डायरेक्टर हैं जिनकी फिल्मों का इंतजार ऑडियंस हमेशा करती हैं. अब जब से उन्होंने अपनी फिल्म 'लव एंड वॉर' की घोषणा की है, तब से ही इसे लेकर एक्साइटमेंट हैं. अब इस फिल्म से जुड़ा एक ऐसा अपडेट सामने आया है, जिसका फैंस को बेसब्री से इंतजार था. दरअसल भंसाली ने आखिरकार अपनी इस फिल्म की रिलीज डेट पर मुहर लगा दी है, जिससे साफ हो गया है कि रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विक्की कौशल की यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाने के लिए पूरी तरह तैयार है. बता दें कि भव्य स्तर पर बनी लव एंड वॉर, संजय लीला भंसाली की अब तक की सबसे महत्वाकांक्षी रोमांटिक ड्रामा फिल्म है. अपनी भव्य कहानी और इमोशनल गहराई के साथ, यह फिल्म भारत की सबसे बड़ी लव सागा और इंडियन सिनेमा की सबसे शानदार रोमांटिक फिल्मों में से एक मानी जा रही है. रिलीज डेट से उठा पर्दा संजय लीला भंसाली ने 'लव एंड वॉर' को 21 जनवरी 2027 को रिलीज करने का फैसला किया है. फिल्म हिंदी, तमिल और तेलुगु भाषाओं में रिलीज होगी. मेकर्स ने ऑफिशियल अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर तारीख पर मुहर लगाई है. इसी के साथ अब फैंस के बीच हलचल शुरू हो गई है. क्या होगी फिल्म की कहानी? भंसाली ने एक इंटरव्यू के दौरान इस फिल्म की कहानी और इसके मिजाज को लेकर कुछ खास बातें शेयर कीं थी. उन्होंने बताया कि यह फिल्म एक 'लव ट्रायंगल' पर आधारित होगी. लंबे समय बाद भंसाली किसी प्रेम कहानी पर फोकस कर रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि यह फिल्म उनकी पिछली रिलीज 'हीरामंडी' या 'पद्मावत' जैसी ऐतिहासिक भव्यता से थोड़ी अलग होगी. स्टारकास्ट इस फिल्म की ताकत वहीं रणबीर कपूर, विक्की कौशल और आलिया भट्ट की कास्टिंग इस फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष माना जा रहा है. भंसाली इन तीनों को काफी पसंद करते हैं. बताया जा रहा है कि इस फिल्म का बजट करीब 200 करोड़ रुपये है. युद्ध के बैकग्राउंड पर सेट फिल्म की कहानी में ग्रैंड विजुअल्स, इमोशनल डेप्थ और हाई-स्टेक्स ड्रामा का मिक्स होने की उम्मीद है.