samacharsecretary.com

Urban Transformation: 1 लाख करोड़ की योजना से टियर-2/3 शहरों की बदलेगी तस्वीर

चंडीगढ़. हरियाणा समेत देश के समस्त राज्यों में शहरी विकास को नई रफ्तार देने के लिए केंद्रीय ऊर्जा, शहरी विकास एवं आवासन मंत्री मनोहर लाल ने शहरी चुनौती कोष (अर्बन चैलेंज फंड) और क्रेडिट रिपमेंट गारंटी सब-स्कीम (सीआरजीएसएस) की शुरुआत की है। एक लाख करोड़ रुपये के शहरी चुनौती कोष के साथ चार लाख करोड़ रुपये के निवेश का रोडमैप तैयार किया गया है, जिसमें विशेष फोकस टियर-2 और टियर-3 शहरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की योजना है। केंद्रीय शहरी, ऊर्जा एवं आवासन मंत्री मनोहर लाल द्वारा लांच किए गए शहरी चुनौती कोष को शहरों के बुनियादी ढांचे के वित्त पोषण में बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस कोष के जरिये नगर निकायों को म्युनिसिपल बांड, बैंक ऋण और पीपीपी के माध्यम से संसाधन जुटाने का अवसर मिलेगा। साथ ही, सीआरजीएसएस के माध्यम से छोटे शहरों को क्रेडिट गारंटी का सहारा मिलेगा, जिससे वे भी बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में भागीदारी कर सकेंगे। कार्यक्रम में कई राज्यों के मुख्यमंत्री और प्रतिनिधि जुड़े। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि एक लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता वाले इस फंड के माध्यम से केंद्र सरकार चार लाख करोड़ तक के निवेश को आकर्षित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। यह फंड पारंपरिक अनुदान प्रणाली से आगे बढ़कर निवेश को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण होगा। अब शहरों को केवल फंड देने की बजाय उन्हें वित्तीय रूप से मजबूत, जवाबदेह और निवेश के लिए तैयार बनाना केंद्र सरकार का मुख्य उद्देश्य है। केंद्रीय मंत्री के अनुसार ‘विकसित भारत 2047’ का सपना इन्हीं शहरों की मजबूती पर निर्भर करता है। कोष की खास बात यह है कि इसमें केंद्रीय सहायता परियोजना लागत के अधिकतम 25 प्रतिशत तक सीमित रहेगी, जबकि कम से कम 50 प्रतिशत फंड म्युनिसिपल बांड, बैंक ऋण और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के जरिए जुटाया जाएगा। इससे न केवल वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित होगा बल्कि निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। कुल आवंटन में से 90 हजार करोड़ रुपये परियोजनाओं के लिए, पांच हजार करोड़ रुपये परियोजना की तैयारी और क्षमता निर्माण के लिए और पांच हजार करोड़ रुपये क्रेडिट पुनर्भुगतान गारंटी उप-योजना के लिए निर्धारित किए गए हैं। शहरी चुनौती कोष शहरों में परिवर्तनकारी परियोजनाओं को बढ़ावा देगा, जिनमें पुराने शहरों और बाजारों का पुनर्विकास, शहरी परिवहन और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी, गैर-मोटर चालित परिवहन, जल और स्वच्छता ढांचा तथा जलवायु-लचीला विकास शामिल हैं। इस योजना के तहत केवल वही परियोजनाएं प्राथमिकता में होंगी जो स्केलेबल, प्रभावशाली और वित्तीय रूप से व्यवहार्य (बैंक योग्य) हों, ताकि उनका दीर्घकालिक असर दिखाई दे। इस योजना का प्रमुख स्तंभ बताते हुए उन्होंने कहा कि निकायों को अपनी वित्तीय क्षमता मजबूत करने, सुधार लागू करने और बाजार आधारित फंडिंग अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। यह महत्वाकांक्षी ‘शहरी चुनौती कोष’ वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू रहेगा, जिसका उद्देश्य भारत के शहरों को नए आर्थिक विकास केंद्रों और भविष्य के ग्रोथ इंजन के रूप में विकसित करना है।

पाकिस्तान यात्रा से लौटे श्रद्धालु: बैसाखी पर्व पर गुरुधामों के दर्शन, सकुशल पूरी हुई यात्रा

अमृतसर. शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से बैसाखी और खालसा साजना दिवस पर पाकिस्तान गए सिख श्रद्धालुओं का जत्था वाघा-अटारी बॉर्डर के रास्ते भारत लौट आया है। पाकिस्तान स्थित गुरुधामों के दर्शन करके लौटे इस जत्थे में कुल 2238 श्रद्धालु शामिल थे। पाकिस्तान से लौटे श्रद्धालुओं ने अपने अनुभव सांझा करते हुए बताया कि उनकी यात्रा बेहद सुखद और शांतिपूर्ण रही। उन्होंने कहा कि उनको वहां किसी भी तरह की परेशानी नहीं आई, बल्कि पाकिस्तान सरकार और प्रशासन की ओर से रहने, सुरक्षा और लंगर सहित सभी आवश्यक सुविधाओं का अच्छा प्रबंध किया गया था। श्रद्धालुओं ने बताया कि उन्होंने श्री ननकाना साहिब, श्री पंजा साहिब, श्री डेरा साहिब और श्री करतारपुर साहिब सहित कई पवित्र स्थलों पर माथा टेका। उन्होंने भारत और पाकिस्तान दोनों सरकारों का धन्यवाद करते हुए अपील की कि धार्मिक यात्राओं के लिए अन्य कॉरिडोर और सुविधाएं बढ़ाई जाएं।

वन भूमि पर कब्जे की कोशिश विफल: जगदलपुर में 14 ग्रामीणों को पुलिस ने दबोचा

जगदलपुर. बस्तर जिले के माचकोट वन परिक्षेत्र में वन भूमि पर अवैध कब्जे की कोशिश को वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नाकाम कर दिया है। दो अलग-अलग वन अपराध मामलों में कुल 14 ग्रामीणों को गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए सभी आरोपी सुकमा जिले के निवासी बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, लंबे समय से अंदरूनी जंगल क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई कर जमीन पर कब्जा करने की तैयारी चल रही थी। वन विभाग को लगातार बाहरी लोगों के कुल्हाड़ी लेकर जंगल में घूमने की सूचना मिल रही थी। इसके बाद विभागीय टीम ने गुप्त निगरानी और रेकी शुरू की। जांच में सामने आया कि एक गिरोह सुनियोजित तरीके से जंगल की भूमि खाली कर कब्जा जमाने की योजना बना रहा था। वन अमले ने मौके पर दबिश देकर 14 लोगों को धर दबोचा। अधिकारियों के मुताबिक गिरोह का सरगना नागेश पहले भी इसी तरह के मामले में गिरफ्तार हो चुका है। रिहाई के बाद भी वह ग्रामीणों को बहला-फुसलाकर फिर अतिक्रमण के लिए ला रहा था। वन विभाग ने पिछले एक वर्ष में 28 से 30 बाहरी लोगों को पकड़कर चेतावनी दी थी। इस बार आरोपियों पर भारतीय वन अधिनियम 1927 और लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम 1984 के तहत मामला दर्ज किया गया है। सभी आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। वन विभाग ने साफ किया है कि जंगल की जमीन पर कब्जे की हर कोशिश पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

गर्मियों में उफान: UP-MP और अन्य राज्यों में हीटवेव, गोंदिया में ट्रैफिक सिग्नल बंद

 नई दिल्ली भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी को लेकर चेतावनी जारी की है. IMD ने पश्चिमी मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में 23 अप्रैल तक हीटवेव का अलर्ट जारी किया है।  साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान और पूर्वी मध्य प्रदेश में 20 और 21 अप्रैल को हीटवेव की स्थिति बनने की संभावना है. इसके अलावा मौसम विभाग ने झारखंड में 22 अप्रैल तक जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 23 अप्रैल तक हीटवेव का अलर्ट जारी है. वहीं, इस बीच पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और ओडिशा में हीटवेव की संभावना बनी हुई है।  महाराष्ट्र में हाय गर्मी महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में भीषण गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है, जहां तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है. इस चिलचिलाती धूप ने नागरिकों का हाल बेहाल कर दिया है. विशेष रूप से गोंदिया शहर के प्रमुख चौराहों पर सिग्नल लाल होने के कारण लोगों को काफी देर तक कड़ी धूप में खड़ा रहना पड़ता था, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।  जनता की इस समस्या को देखते हुए, नागरिकों ने जिला यातायात शाखा के पुलिस निरीक्षक नागेश भास्कर से अनुरोध किया कि दोपहर के समय सिग्नल बंद रखे जाएं. नागरिकों की इस जायज मांग पर संज्ञान लेते हुए यातायात पुलिस ने एक जरूरी फैसला लिया है. इस बीच सिग्नल बंद रहने का समय दोपहर 12:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक तय किया गया है. इसके बाद शाम 4 बजे से सिग्नल फिर से चालू कर दिए जाएंगे।  इस फैसले के कारण अब नागरिकों को तपती धूप में चौराहों पर रुकना नहीं पड़ रहा है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिला है. जिला यातायात पुलिस के इस मानवीय कदम की शहरवासियों द्वारा सराहना की जा रही है।  दिल्ली में बढ़ेगा पारा भारत मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में 20 अप्रैल को अधिकतम तापमान 39°C से 41°C और न्यूनतम तापमान 20°C से 22°C के बीच रहने की संभावना है. ज्यादातर इलाकों में न्यूनतम तापमान सामान्य के आसपास रहेगा, जबकि अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा सकता है।  आने वाले दिनों में भी गर्मी से राहत के संकेत नहीं हैं, दिल्ली-एनसीआर में अधिकतम तापमान 40°C से 42°C के बीच बना रह सकता है।  मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यहां लू चलने की संभावना नहीं है, लेकिन तापमान सामान्य से अधिक रहने के कारण स्वास्थ्य को लेकर जोखिम बना रह सकता है. इसका असर खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर ज्यादा पड़ सकता है।  क्या सावधानियां बरतें:     लंबे समय तक सीधे धूप में रहने से बचें     हल्के और ढीले-ढाले सूती कपड़े पहनें     बाहर निकलते समय सिर को कपड़े, टोपी या छाते से ढकें     पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें  

जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में बस दुर्घटना, 15 की मौत; मृतकों की संख्या बढ़ सकती है

उधमपुर  जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में एक यात्री बस खाई में गिर गई है। इस भीषण हादसे में 15 लोगों के मारे जाने की खबर है, जबकि कई यात्री घायल हुए हैं। यह घटना तब हुई, जब बस रामनगर से उधमनगर की ओर जा रही थी। यह हादसा उस वक्त हुआ, जब बस रामनगर के पास ही एक गांव कगोर्ट से गुजर रही थी। जानकारी मिली है कि ऊंची पहाड़ी पर बने रोड से गुजरती हुई बस का एक तीखे मोड़ के पास नियंत्रण खो गया। यह हादसा सुबह 10 बजे के करीब ही हुआ। हादसे के बाद से बचाव अभियान जारी है। कई लोगों को इस घटना के बाद अस्पताल में एडमिट कराया गया है और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। यह बस उधमपुर जा रही थी, तभी यह हादसा हुआ। इस घटना को लेकर एलजी मनोज सिन्हा ने दुख जताया है। उन्होंने कहा कि यह हादसा बेहद दुखद और दिल तोड़ने वाला है। मेरी संवेदनाएं मृतकों के साथ हैं। मैं पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। इसके अलावा घायलों के जल्द स्वस्थ होने की भी कामना है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी इस घटना को लेकर एक्स पर एक पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा कि मेरी उधमपुर के डिप्टी कमिश्नर मिंगा शेरपा से बात हुई है। उनका कहना है कि रेस्क्यू ऑपरेशन समय रहते शुरू हो गया था और घायलों को उचित इलाज दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस घटना के बारे में मुझे कुछ समय पहले ही जानकारी मिली थी और मैंने तुरंत उधमपुर के डिप्टी कमिश्नर से बात की। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, स्थानीय प्रशासन और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच गई. घायलों को निकालकर नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है. उधमपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में इमरजेंसी वार्ड को अलर्ट कर दिया गया है. डॉक्टरों की टीम घायलों का इलाज कर रही है. जिला प्रशासन ने हादसे पर दुख जताते हुए कहा कि विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है. रामनगर के एसडीएम ने बताया कि बचाव कार्य जारी है और घायलों को तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।  उधमपुर-रामनगर मार्ग पर सड़क की स्थिति और मौसम को लेकर अक्सर हादसे होते रहते हैं. पहाड़ी इलाका होने के कारण मोड़ों पर सतर्कता बरतना जरूरी होता है. इस हादसे के कारण स्थानीय स्तर पर यातायात प्रभावित हुआ है. पुलिस ने आसपास के इलाके में यातायात को डायवर्ट कर दिया है. स्थानीय लोग बस हादसों को रोकने के लिए सड़क सुधार और बेहतर यातायात प्रबंधन की मांग कर रहे हैं। 

हिंगलाज मंदिर में मना उत्सव, पाकिस्तान में 3 लाख हिंदू पहुंचे; जानिए मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

 बलूचिस्तान प्रांत  पाकिस्तान में तीन दिवसीय हिंगलाज माता उत्सव रविवार को संपन्न हो गया है। खबर है कि इस दौरान करीब 3 लाख हिंदू मंदिर पहुंचे थे। कहा जा रहा है कि यह आंकड़ा बीते साल हुए उत्सव से करीब तीन गुना ज्यादा था। इस दौरान आयोजन स्थल पर भंडारा, चिकित्सा सुविधा की भी व्यवस्था की गई थी। उत्सव के दौरान तीर्थयात्री सैकड़ों किमी की यात्रा कर मंदिर पहुंचते हैं। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर में इस महीने करीब 3 लाख हिंदू श्रद्धालु पहुंचे थे। जबकि, पूरे साल में यह आंकड़ा करीब 10 लाख है। मंदिर पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं ने थारपरकर, उमरकोट और संहार समेत सिंध के कई इलाकों से लंबी यात्रा की थी। कहा जाता है कि इस यात्रा को पूरी करने में 20 दिनों का समय लग जाता है। हिंगलाज मंदिर का इतिहास पाकिस्तान में इस तीर्थस्थल को नानी का मंदिर भी कहा जाता है। यह 51 शक्ति पीठों में से एक हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, यहां सती का सिर गिरा था। लयारी तहसील के पहाड़ी इलाके में स्थित यह मंदिर हिंगोल नदीं के पास एक गुफा में बना हुआ है। कराची से इसकी दूरी लगभग 250 किलोमीटर उत्तर पश्चिम में है। यह इलाका हिंगोल नेशनल पार्क क्षेत्र में आता है। पूरे पाकिस्तान से आते हैं श्रद्धालु इस तीर्थ यात्रा को हिंगलाज यात्रा कहा जाता है, जिसमें पाकिस्तान के कई हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कठिन यात्रा कर पहुंचते हैं। अप्रैल 2024 में एपी न्यूज से बातचीत में हिंगलाज माता मंदिर के पदाधिकारी वर्सीमल दीवानी ने बताया था कि इस त्योहार में सिर्फ पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू ही शामिल हो सकते हैं। तब उन्होंने पाकिस्तानी सरकार से दुनिया के अन्य हिस्सों में हिंदुओं को वीजा देने की अपील भी की थी। हालांकि, कहा यह भी जा रहा है कि इस यात्रा में अन्य देशों से भी श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसे होती है पूजा हर साल अप्रैल में इस उत्सव का आयोजन होता है, जिसके तहत तीसरे दिन पुजारी मंत्रों का जाप करते हैं और देवताओं को भेंट स्वीकार करने के लिए बुलाते हैं। हर श्रद्धालु हिंगलाज माता मंदिर में 3 नारियल चढ़ाता है। एक ओर जहां कुछ श्रद्धालु पूरे 4 दिनों के उत्सव में शामिल रहते हैं। वहीं, कुछ पूजा कर लौट जाते हैं। कठिन है यात्रा सड़क मार्ग से कराची से हिंगलाज की दूरी तय करने में करीब 4 घंटे का समय लगता है। कुछ तीर्थयात्री कार या बसों से पहुंचते हैं। जबकि, कुछ साइकिल से आते हैं। कहा जाता है कि पहले इस यात्रा को पूरा करने में करीब 150 किमी पैदल चलना होता था। तब श्रद्धालु रेगिस्तान से पास की सड़क तक का सफर तय कर मंदिर पहुंचते थे। हालांकि, अब मकरान कोस्टल हाईवे ने रास्ता आसान कर दिया है। इस साल का आयोजन डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर उत्सव के लिए बलूचिस्तान सरकार, प्रांत के आपदा प्रबंधक और जिला प्रशासन ने कई स्तरों पर तैयारियां की थीं। वहीं, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था के चलते मौके पर मौजूद रहे। सुरक्षा के लिए पाकिस्तान सेना, फ्रंटियर कोर, पुलिस और लेवी की टुकड़ियों को तैनात किया गया था।

SC जज ने उठाया बड़ा सवाल: लालची जजों को सिस्टम से बाहर करना क्यों है जरूरी?

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने हाल ही में एक कार्यक्रम में अदालत में जजों के आचरण को लेकर अहम बातें कही हैं। शनिवार को न्यायपालिका में ईमानदारी के मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि जो जज लालच का शिकार हो जाते हैं, उनका सिस्टम में कोई स्थान नहीं है और उन्हें हटा दिया जाना चाहिए। कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बाद आज ज्यूडिशियरी में शामिल अधिकारियों को बहुत अच्छा वेतन और सेवा शर्तें मिल रही हैं, इसलिए किसी भी तरह का अनैतिक आचरण अपनाना सही नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर कोई जज लालच में आ जाता है, तो उसे सिस्टम से ही हटा दिया जाना चाहिए।” प्रलोभन से बचना चाहिए- SC जज SC जज ने आगे कहा कि एक जज को अपने वैध वेतन में खुश रहना चाहिए और किसी भी तरह के प्रलोभन से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा न कर पाना न्याय प्रणाली की बुनियाद को कमजोर करता है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायिक स्वतंत्रता केवल बाहरी दबावों से मुक्त होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आंतरिक अनुशासन और ईमानदारी बनाए रखना भी शामिल है। जस्टिस नागरत्ना ने फैसले लेने की प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि एक भी गलत फैसला न्यायपालिका पर जनता का भरोसा कमजोर कर सकता है। उन्होंने अदालतों के प्रशासनिक कामकाज में भी पारदर्शिता और निष्पक्षता की जरूरत पर जोर दिया, खासकर जिला न्यायपालिका में। वहीं उन्होंने हाईकोर्ट से अपील की है कि वे अधिकारियों के लिए सहयोगी वातावरण बनाने की कोशिश करें। AI के खतरों पर भी बोलीं जस्टिस नागरत्ना इस दौरान ज्यूडिशियरी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां वकीलों ने अदालत में एआई टूल्स से तैयार किए गए ऐसे कानून का हवाला दिया, जो थे ही नहीं। उन्होंने कहा है कि वकीलों को जिन फैसलों का वे हवाला देते हैं, उनकी सत्यता की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए।

Haryana Police Recruitment Update: प्रेग्नेंट कैंडिडेट्स को राहत नहीं, अब चश्मा पहनने वालों के लिए खुला मौका

चंडीगढ़. हरियाणा में साढ़े पांच हजार पुलिस कर्मचारियों की भर्ती की प्रक्रिया रफ्तार पकड़ चुकी है। पुलिस कॉन्स्टेबल बनने के लिए 3.24 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं। सोमवार से पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्टेडियम में शारीरिक मापदंड परीक्षा (पीएमटी) की प्रक्रिया आरंभ हो जाएगी। इस दौरान अभ्यर्थियों में भर्ती के नियमों को लेकर कुछ संशय है। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन हिम्मत सिंह ने गूगल फार्म के माध्यम से अभ्यर्थियों से सवाल पूछे हैं, जिनमें से कुछ ऐसे चुनींदा सवालों के जवाब दिए गए हैं, जो समस्त अभ्यर्थियों को दिशा देने का काम करेंगे। आयोग के चेयरमैन ने कहा है कि पुलिस की भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और तकनीक आधारित होगी। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने सिरसा की सुनीता व लक्ष्मी, भिवानी की मालती देवी, कुरुक्षेत्र की काजल, महेंद्रगढ़ की पिंकी और जींद की मीना के एक सवाल का जवाब देते हुए स्पष्ट किया है कि शारीरिक मापदंड परीक्षा में किसी भी गर्भवती महिला को कोई छूट नहीं दी जाएगी। विशेष परिस्थितियों में केवल पीएसटी (फिजिकल स्क्रीनिंग टेस्ट-शारीरिक जांच परीक्षा) में ही छूट दी जा सकती है। गर्भवती महिला अभ्यर्थियों को मेडिकल प्रमाण पत्र लाना अनिवार्य होगा। इस संबंध में विस्तृत जानकारी के साथ एक अलग सार्वजनिक सूचना पीएसटी से पहले जारी कर दी जाएगी। पीएमटी में उम्मीदवार की लंबाई व छाती (पुरुषों के लिए) समेत विभिन्न शारीरिक मापदंड चेक किए जाते हैं। पीएसटी में उम्मीदवार की दौड़ और शारीरिक क्षमता (फिटनेस टेस्ट) लिया जाता है। पीएमटी की प्रक्रिया 31 मई तक पूरी हो सकेगी, जबकि पीएसटी की प्रक्रिया अगले एक पखवाड़े के भीतर किसी भी समय आरंभ हो सकती है। पीएसटी की विस्तृत समय सारणी जल्द होगी जारी रेवाड़ी की प्रियांशु यादव, नूंह के लक्षित व ओमप्रकाश, सोनीपत की एकता, कैथल के विशाल और चुलियाना के अक्षत ने कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन से पूछा है कि क्या पीएमटी और पीएसटी एक साथ होंगे। यदि नहीं तो इनके बीच में कितने समय का अंतर होगा। क्या 85 दिनों की अवधि में पूरी प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा। इस सवाल के जवाब में हिम्मत सिंह ने बताया कि पीएमटी का नोटिस जारी किया जा चुका है। पीएसटी इसके बाद आयोजित होगा, जिसकी विस्तृत समय सारणी अलग से जारी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जरूरी नहीं है कि पीएमटी खत्म होने के बाद ही पीएसटी आरंभ होगा। पीएसटी की प्रक्रिया पीएमटी के चलते-चलते भी शुरू की जा सकेगी। एडमिट कार्ड और एक फोटो पहचान पत्र जरूरी नूंह के ओमप्रकाश, महेंद्रगढ़ की पूजा और जहांगीरपुर की रेणु ने सवाल पूछा है कि पीएमटी और पीएसटी के दौरान कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी हैं। इस सवाल के जवाब में आयोग ने कहा है कि पीएमटी-पीएसटी का एडमिट कार्ड और एक फोटो पहचान पत्र साथ लाने होंगे। इन दस्तावेजों के बिना प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। दौड़ के दौरान नहीं मिलेगी स्टाप वाच, स्क्रीन लगेगी हिसार के सुनील, बोलन (हिसार) की दिक्षा, कापड़ो के प्रवीण, महेंद्रगढ़ के रविंद्र और बहादुरगढ़ के प्रदीप कुमार ने सवाल किया कि क्या दौड़ के दौरान स्टाप वाच उपलब्ध कराई जाएगी, जिसके जवाब में कर्मचारी चयन आयोग के चेयमरैन हिम्मत सिंह ने कहा कि पीएसटी के दौरान समय रिकॉर्ड आरएफआईडी आधारित प्रणाली से किया जाएगा, जो कि जर्मन की मशीनों से होगा। अलग से स्टॉप वाच उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। कर्मचारी चयन आयोग डिस्पले स्क्रीन लगवाने की कोशिश कर रहा है, जिस पर दौड़ के समय को लाइव देखा जा सकेगा। कोई शिकायत है तो मौके पर मौजूद मिलेगी समिति नरवाना के दर्शन और रेवाड़ी के हरिपाल ने तकनीकी गड़बड़ी होने पर क्या होगा यानी पीएमटी मशीनों से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए आयोग के पास क्या फार्मूला है। इस सवाल के जवाब में चेयरमैन ने कहा कि सभी केंद्रों पर पूरी तकनीकी व्यवस्था रहेगी। किसी भी समस्या के लिए मौके पर शिकायत समिति मौजूद रहेगी, जिसके पास अभ्यर्थी अपनी शिकायत दर्ज करवा सकता है। लेकिन हमें उम्मीद है कि कोई तकनीकी समस्या नहीं आने वाली है। मेडिकल प्रक्रिया में पास होना जरूरी नूंह के मोहम्मद कैफ और सोनीपत के सरोहा ने पूछा कि क्या चश्मा पहनने वाले अभ्यर्थी दौड़ में भाग ले सकते हैं। इस सवाल पर चेयरमैन हिम्मत सिंह ने कहा कि पीएमटी-पीएसटी में चश्मे को लेकर कोई प्रतिबंध नहीं है, परंतु पुलिस के भर्ती नियमों के मुताबिक मेडिकल प्रक्रिया से आपको गुजरना होगा। यदि मेडिकल प्रक्रिया से गुजरने के दौरान किसी तरह की कोई समस्या आती है तो अलग बात है। पीएमटी-पीएसटी के लिए जारी हो चुके निर्देश रोहतक की प्रीति व नितेश, भिवानी के राहुल तंवर व कपिल, नरवाना के मनकीत, कालां के अंकित और हांसी के मनु ने पीएमटी-पीएसटी के लिए ऊंचाई एवं छाती की माप के संबंध में आयोग से स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया है। इस पर आयोग ने कहा कि इस बारे में विस्तृत दिशा निर्देश अलग से जारी हो चुके हैं। इसके बावजूद पुरुष कॉन्स्टेबल के लिए ऊंचाई 170 सेंटीमीटर (आरक्षित 168) और छाती 83 से 87 सेंटीमीटर का प्रविधान है। महिला कॉन्स्टेबल के लिए ऊंचाई 158 सेंटीमीटर और आरक्षित वर्ग के लिए 156 सेंटीमीटर है। अब उम्मीदवारों के लिए अगला फोकस पीएमटी पास कर पीएसटी की तैयारी करना है। कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन हिम्मत सिंह का दावा है कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जल्द पूरी की जाएगी। सिख अभ्यर्थियों के लिए धार्मिक मर्यादाओं का अनुपालन लंबाई, वजन और छाती के मापन से यदि कोई अभ्यर्थी संतुष्ट नहीं होगा तो वह अपील काउंटर पर आवेदन कर दोबारा माप करा सकता है।अभ्यर्थियों के लिए बैगेज जमा करने और विश्राम क्षेत्र की व्यवस्था की गई है। जीरकपुर से सुबह पांच बजे से 10 बसों की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। किसी भी अभ्यर्थी को एनर्जी बूस्टर का सेवन नहीं करना चाहिए। सिख अभ्यर्थियों के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। उनके मापन के लिए धार्मिक मर्यादाओं के अनुरूप अलग व्यवस्था और सिख कर्मचारियों की तैनाती की गई है।

Weather Update: पंजाब में छाए बादल, गर्मी से मिली राहत, तापमान लुढ़का

पठानकोट. शहर में मौसम ने अचानक करवट ली है। दिनभर तेज धूप के बीच बादलों की आवाजाही से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। शनिवार को अधिकतम तापमान 35.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि न्यूनतम तापमान गिरकर 18.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। कल के मुकाबले अधिकतम तापमान में करीब 1.2 डिग्री की कमी आई है, जिससे लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत मिली है। दोपहर बाद आसमान में बादल छाने लगे और हवाएं चलने से वातावरण सुहावना हो गया। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के असर से उत्तरी पाकिस्तान और आसपास के क्षेत्रों में चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है, जिसका प्रभाव पठानकोट और आसपास के इलाकों पर भी देखा जा रहा है। आने वाले 24 घंटों में अलग-अलग स्थानों पर हल्की वर्षा होने की संभावना जताई गई है। इसके बाद मौसम के फिर से शुष्क रहने की उम्मीद है, हालांकि तापमान में 2 से 3 डिग्री तक बढ़ोतरी हो सकती है। सुबह तेज धूप के बाद दोपहर तक बादलों और सूरज के बीच आंख-मिचौली चलती रही। हल्की हवाओं के कारण लोगों ने राहत महसूस की, लेकिन उमस बरकरार रही। गर्मी से बचने के लिए लोग दुपट्टे और कपड़ों से मुंह ढककर निकलते नजर आए। मौसम में आए इस बदलाव ने फिलहाल लोगों को राहत दी है और अब सभी की नजरें संभावित बारिश पर टिकी हैं।

अलर्ट प्रशासन ने रोकी बाल विवाह की 2 घटनाएं, समय रहते समझाइश देकर टली बड़ी कार्रवाई

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही. देश के कई राज्यों में अक्षय तृतीया के अवसर को विवाह के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है, जिसके चलते इस अवधि में बाल विवाह के मामले भी सामने आते हैं। इसी के मद्देनजर जिले में प्रशासन और बाल संरक्षण विभाग की सतर्कता के चलते दो अलग-अलग मामलों में नाबालिगों के संभावित बाल विवाह को समय रहते रोक दिया गया। सूचना प्राप्त होते ही संबंधित टीमों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की और बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत दोनों विवाहों को रुकवा दिया। पहला मामला: सोन बचरवार पंचायत पहला मामला पेंड्रा ब्लॉक के ग्राम पंचायत सोन बचरवार का है, जहां एक नाबालिग बालक की शादी की तैयारी चल रही थी। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना मिलने के बाद जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने तत्काल टीम को मौके पर भेजा। दस्तावेजों की जांच में पाया गया कि बालक की उम्र 17 वर्ष 10 माह 14 दिन है, जो निर्धारित कानूनी आयु 21 वर्ष से कम है। इसके बाद टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए विवाह रुकवाया। दूसरा मामला: गुम्मा टोला में कार्रवाई दूसरा मामला ग्राम पंचायत गुम्मा टोला का है, जहां थाना गौरेला क्षेत्र में एक अन्य नाबालिग के विवाह की सूचना चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से मिली। टीम ने मौके पर पहुंचकर दस्तावेजों की जांच की, जिसमें बालक की उम्र 20 वर्ष 9 माह 7 दिन पाई गई, जो बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत निर्धारित उम्र से कम है। इसके चलते इस विवाह को भी रोक दिया गया। परिजनों को दी गई समझाइश दोनों मामलों में टीम ने बालक-बालिका के माता-पिता और परिवारजनों को समझाइश दी तथा बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। साथ ही, भविष्य में बाल विवाह नहीं करने के लिए घोषणा पत्र और पंचनामा पर हस्ताक्षर भी कराए गए। टीम की सराहनीय भूमिका इस पूरी कार्रवाई में जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल संरक्षण अधिकारी, परियोजना अधिकारी, सेक्टर सुपरवाइजर, चाइल्ड हेल्पलाइन, गौरेला पुलिस और पेंड्रा पुलिस की भूमिका सराहनीय रही। प्रशासन की इस तत्परता से एक बार फिर बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पर प्रभावी रोक लगाने का संदेश गया है।