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संवेदनशील नेतृत्व का प्रभाव: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर वृद्ध हितग्राही को मिली तत्काल राहत

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संवेदनशील, सजग और जनकेंद्रित नेतृत्व का एक और सशक्त उदाहरण सामने आया है, जहाँ एक वृद्ध हितग्राही की समस्या पर त्वरित संज्ञान लेते हुए शासन ने तुरंत राहत सुनिश्चित की। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश पर गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर विकासखण्ड के ग्राम पथर्री निवासी भीखलु राम ध्रुव को जिला प्रशासन की सक्रियता से बड़ी राहत मिली है। मीडिया के माध्यम से प्रसारित एक खबर में यह जानकारी सामने आई थी कि भीखलु राम ध्रुव लंबे समय से पेंशन और राशन जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित थे। इस खबर को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बिना विलंब किए तत्काल संज्ञान लिया और जिला प्रशासन को निर्देशित किया कि संबंधित हितग्राही को शीघ्र लाभ उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया और प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई शुरू की गई। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप कलेक्टर बीएस उइके ने स्वयं मामले की जानकारी ली और संबंधित विभागीय अधिकारियों को तत्काल समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जांच में यह तथ्य सामने आया कि भीखलु राम ध्रुव का ई-केवाईसी किसी कारणवश लंबित था, जिसके कारण उन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था। प्रशासन द्वारा तत्काल ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूर्ण कराई गई, जिससे उन्हें पुनः शासकीय योजनाओं का लाभ मिलना प्रारंभ हो गया है। प्रशासन की तत्परता का परिणाम यह रहा कि भीखलु राम ध्रुव को तीन माह की लंबित वृद्धावस्था पेंशन एकमुश्त प्रदान की गई।  वहीं खाद्य विभाग द्वारा भी संवेदनशीलता दिखाते हुए उनके घर पहुंचकर 01 क्विंटल चावल उपलब्ध कराया गया है। अब उन्हें नियमित रूप से उचित मूल्य की दुकान से राशन मिलना सुनिश्चित किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के इस मानवीय और तत्पर हस्तक्षेप से राहत प्राप्त करने पर भीखलु राम ध्रुव ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पेंशन और राशन मिल जाने से मेरे जीवन में बड़ी राहत आई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की यह संवेदनशीलता मेरे लिए बहुत मायने रखती है। अब मुझे भरोसा है कि सरकार हमारी चिंता करती है।  उल्लखेनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शासन केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रत्येक जरूरतमंद तक उनका लाभ समय पर पहुंचे, इसके लिए निरंतर सजग और प्रतिबद्ध है।

तेहरान से फिर शुरू हुईं कमर्शियल फ्लाइट्स, ईरान ने इन देशों के लिए उड़ानें बहाल की

 तेहरान  मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच एक अच्छी खबर सामने आई है। ईरान की राजधानी तेहरान से एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाओं की बहाली हो गई है। ईरान के सबसे बड़े हवाई अड्डे, इमाम खुमैनी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IKA) ने शनिवार सुबह से अपनी अंतरराष्ट्रीय यात्री उड़ानों को फिर से शुरू कर दिया है। बता दें कि युद्ध जैसी स्थितियों के कारण लंबे समय से बंद पड़े आसमान में अब नागरिक विमानों की आवाजाही शुरू हो गई है, जिसे वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इन शहरों के लिए रवाना हुई पहली उड़ानें हवाई अड्डा अधिकारियों के अनुसार, उड़ानों की बहाली के बाद तेहरान से पहली आउटबाउंड (बाहर जाने वाली) फ्लाइट्स मस्कट (ओमान), इस्तांबुल (तुर्की) और सऊदी अरब के मदीना शहर के लिए रवाना हुईं। इन उड़ानों के शुरू होने से न केवल फंसे हुए यात्रियों को राहत मिली है, बल्कि कूटनीतिक गलियारों में भी इसे एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। भारतीय दूतावास ने दी यात्रा ना करने की सलाह दो दिन पहले ही भारत ने अपने नागरिकों को ईरान की यात्रा न करने की सलाह दी है। यह परामर्श हाल की उन खबरों के मद्देनजर जारी किया गया है, जिनमें दोनों देशों के बीच कुछ उड़ानों के परिचालन की बात कही गई है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने अपने नवीनतम परामर्श में कहा, "क्षेत्रीय तनाव के कारण हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध और परिचालन संबंधी अनिश्चितताएं ईरान से आने-जाने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को प्रभावित कर रही हैं।' दूतावास ने स्पष्ट किया, "भारत और ईरान के बीच कुछ उड़ानों के शुरू होने की खबरों के मद्देनजर, पिछले परामर्शों को जारी रखते हुए, भारतीय नागरिकों को दृढ़ता से सलाह दी जाती है कि वे हवाई या सड़क मार्ग से ईरान की यात्रा न करें। गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद हवाई सेवाएं बंद कर दी गई थीं। पाकिस्तान की मध्यस्थता से आठ अप्रैल से लागू हुआ अस्थायी संघर्ष विराम 22 अप्रैल को समाप्त हो रहा है, हालांकि दीर्घकालिक शांति के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। अमेरिका ईरान वार्ता पर क्या है अपडेट इस्लामाबाद में प्रस्तावित अमेरिका और ईरान का वार्ता पर अभी शंका बनी हुई है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के तहत 'लॉकडाउन' एक सप्ताह से जारी है। ईरान के विदेश मंत्री अराघची अपनी टीम के साथ पहुंच चुके हैं। हालांकि अमेरिका का प्रतिनिधिमंडल अभी नहीं पहुंचा है। इससे पहले ईरान ने अमेरिका से सीधी बात करने से भी इनकार कर दिया था। पिछली बार भी इस्लामाबाद में ही शांति वार्ता हुई थी जिसका कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला था। अमेरिका का कहना है ईरान उसकी मांगों के हिसाब से वार्ता का प्रस्ताव तैयार रखे। मशहद एयरपोर्ट भी हुआ एक्टिव तेहरान से पहले, ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद के हवाई अड्डे को भी इस हफ्ते की शुरुआत में खोल दिया गया था। उत्तर-पूर्वी ईरान में स्थित यह शहर धार्मिक और व्यापारिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। धीरे-धीरे देश के अन्य हिस्सों में भी हवाई यातायात परिचालन को बहाल किया जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि ईरान अब अपनी नागरिक सेवाओं को सामान्य करने की कोशिश कर रहा है। दुनिया ने ली राहत की सांस युद्ध के माहौल में किसी देश के मुख्य हवाई अड्डे का खुलना शांति की दिशा में एक बड़ा संकेत होता है। जब तक हवाई क्षेत्र बंद रहता है, तब तक बड़े सैन्य टकराव की आशंका बनी रहती है। तेहरान एयरपोर्ट से कमर्शियल उड़ानों का शुरू होना यह संकेत देता है कि सुरक्षा व्यवस्था अब पहले से बेहतर है और नागरिक उड्डयन के लिए खतरा कम हुआ है।  

नक्सलमुक्त बस्तर में अब हो रहा है तेजी से अधोसंरचना निर्माण

रायपुर. नक्सलमुक्त आबूझमाड़ क्षेत्र में अब बुनियादी सुविधाओं का निर्माण कार्य तेजी से किये जा रहे हैं । अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में सड़क, जल निकासी, ओवरहेड टैंक, लघु सिंचाई योजना सहित अन्य कार्यो ने जोर पकड़ लिया है । पिछले दिनों नक्सलमुक्त आबूझमाड़ में सीटीई की टीम ने विभिन्न निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया । टीम ने नारायणपुर के हरिमार्कटोला, सड़क का निरीक्षण किया। टीम ने देखा कि निर्मित सड़कों मोटाई और चौड़ाई को सही मानक स्तर की है, इसी तरह ग्राम दूरस्थ ओरछा ब्लाक में निर्मित शेड की निरीक्षण किया गया । जिले के ग्राम पालकी में निर्मित ओवरहेड टैंक की टीम ने निरीक्षण किया। इसी तरह से जल संसाधन विभाग के अंतर्गत बैनूर रिजर्वायर के नवीनीकरण कार्य का निरीक्षण किया गया। टीम ने निर्माण कार्यों में लगे अधिकारियों से निर्माण कार्यों की विस्तार से जानकारी ली एवं अधिकारियों को जरूरी मार्गदर्शन भी दिया। नक्सलमुक्त बस्तर में अब विभिन्न निर्माण कार्यों के निरीक्षण करने जांच एजेन्सीयों के दल आसानी से पहुंच रहे हैं। तकनीकी टीमों द्वारा निर्माण कार्यों को कराने स्थानीय अधिकारियों को उचित मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है, जिससे अब सुदूर अबूझमाड़ में निर्माण कार्य गुणवत्ता पूर्ण तेजी से किए जाने लगे हैं।

जेपीएससी JET परीक्षा में सख्त सुरक्षा व्यवस्था, बायोमेट्रिक और आईरिस वेरिफिकेशन लागू

 रांची  राज्य में झारखंड पात्रता परीक्षा (जेट) लगभग 18 वर्ष बाद रविवार को आयोजित होगी। झारखंड लोक सेवा आयोग ने इस परीक्षा के लिए छह जिलों रांची, बोकारो, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, हजारीबाग तथा देवघर में कुल 435 केंद्र बनाए हैं। साथ ही परीक्षा में किसी तरह की गड़बड़ी व कदाचार रोकने के लिए पुख्ता तैयारी की है। परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक तथा आइआरआइएस वेरिफिकेशन की भी व्यवस्था की गई है। इस परीक्षा के माध्यम से राजकीय विश्वविद्यालयों व उसके अंगीभूत कालेजों में सहायक प्राध्यापक के पदों पर अभ्यर्थियों की नियुक्ति की पात्रता तय होगी तथा पीएचडी में नामांकन होगा। यह परीक्षा एक पाली में सुबह 10 बजे से अपराह्न एक बजे तक आयोजित होगी। दो पत्रों की यह परीक्षा ओएमआर शीट पर होगी, जिसमें वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाएंगे। पहले पत्र में शिक्षण व शोध क्षमता पर 50 प्रश्न पूछे जाएंगे। प्रत्येक प्रश्न दो अंकों का होगा। इसी तरह, दूसरा पत्र संबंधित विषय का होगा, जिसमें 100 प्रश्न पूछे जाएंगे। इसमें भी प्रत्येक प्रश्न दो अंकों का होगा। इस तरह पहला पत्र 100 तथा दूसरा पत्र 200 अंकों का होगा। इसमें निगेटिव मार्किंग नहीं होगी। यह परीक्षा कुल 43 विषयों में आयोजित होगी। बताते चलें कि आयोग ने इस परीक्षा के लिए सात मार्च 2024 को ही इसके शीघ्र विज्ञापन जारी होने की सूचना प्रकाशित की थी। इसके लगभग डेढ़ वर्ष बाद इसका विज्ञापन निकला तथा 16 सितंबर 2025 से आनलाइन आवेदन लिए गए थे। राज्य में इससे पहले झारखंड पात्रता परीक्षा वर्ष 2007-08 में आयोजित हुई थी, जो काफी विवादित हुई थी। कम से कम एक घंटा पहले केंद्र पर पहुंचने के निर्देश आयोग ने परीक्षार्थियों को कम से कम एक घंटा पहले केंद्र पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं। साथ ही परीक्षार्थियों को प्रवेश पत्र, उपस्थिति पत्रक, वैध फोटोयुक्त पहचान पत्र तथा दो पासपोर्ट साइज का रंगीन फोटो अनिवार्य रूप से लाने को कहा गया है।  

बस्तर के गांवों तक बिजली पहुँचने से अंधकार और भय कम हुआ जीवन में आई रोशनी

रायपुर. नक्सल समस्या के दूर होने के साथ बस्तर क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। पहली बार दूरस्थ गांवों तक बिजली पहुँचने से अंधकार और भय कम हुआ है, जीवन स्तर में सुधार आया है और विकास को नई गति मिली है, जो बस्तर के सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की ओर संकेत करता है। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिला का अबूझमाड़ क्षेत्र का ग्राम ईरपानार दशकों के अंधेरे के बाद पहली बार बिजली की रौशनी से जगमगा उठा है। यह विकास राज्य सरकार की नियद नेल्ला नार (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत संभव हुआ है, जिसका उद्देश्य बस्तर के दूरस्थ और संवेदनशील इलाकों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना है। बिजली आने से ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। अब वे मोबाइल चार्ज कर सकेंगे, पंखे चला सकेंगे और रात के समय सांप-बिच्छू के डर से मुक्त होकर सुरक्षित महसूस करेंगे। कभी नक्शे पर नाम भर रह गया ईरपानार आज उम्मीदों की नई पहचान बन गया है। अबूझमाड़ के गहरे जंगलों, ऊंचे पहाड़ों और दुर्गम पगडंडियों के बीच बसे इस छोटे से गांव में पहली बार बिजली पहुँची है। वर्षों तक अंधेरे में जीवन गुजारने वाले ग्रामीणों के घरों में जब पहली बार बल्ब जले, तो गांव ने सिर्फ उजाला नहीं देखा, बल्कि विकास को महसूस किया। ईरपानार के अलावा, बस्तर संभाग के अन्य नक्सल प्रभावित इलाकों जैसे बीजापुर के चिल्कापल्ली (जनवरी 2025) और तेमिनार (मार्च 2025) में भी पिछले कुछ समय में बिजली पहुंची है, जो विकास के नए अध्याय की शुरुआत है। इन क्षेत्रों में श्नियद नेल्ला नारश् (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत तेजी से बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। ईरपानार नारायणपुर जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी स्थित है, लेकिन यह दूरी सामान्य रास्ते जैसी नहीं है। यहां तक पहुंचने के लिए कच्चे मार्ग, पहाड़ी चढ़ाई, घने वन क्षेत्र और कई स्थानों पर पैदल सफर करना पड़ता है। बरसात के मौसम में संपर्क और भी कठिन हो जाता है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड, नारायणपुर संभाग ने इस चुनौतीपूर्ण कार्य को प्राथमिकता से पूरा किया। कार्यपालन अभियंता सहित विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद मिशन मोड में काम कर सफलता हासिल की। घने जंगलों के बीच चला विकास अभियान कलेक्टर नाराणपुर ने बताया कि ईरपानार तक बिजली पहुंचाना सामान्य तकनीकी कार्य नहीं था। कई हिस्सों में बिजली खंभे, तार और सामग्री पहुंचाने के लिए कठिन श्रम करना पड़ा। टीम को ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों, जंगलों और सीमित संसाधनों के बीच काम करना पड़ा। कई स्थानों पर मशीनों की बजाय मानव श्रम और स्थानीय सहयोग से सामग्री पहुंचाई गई।बिजली लाइन विस्तार, पोल स्थापना और कनेक्शन कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा कर विभागीय टीम ने मिसाल पेश की है। 56.11 लाख की लागत लेकिन असर पीढ़ियों तक ग्राम ईरपानार के विद्युतीकरण कार्य पर कुल 56.11 लाख रूपए की लागत आई। इस परियोजना के तहत गांव के परिवारों को पहली बार विद्युत कनेक्शन प्रदान किया गया एवं उस सोच का प्रतीक ह,ै जिसमें अंतिम छोर पर बसे परिवार को भी विकास का समान अधिकार दिया जा रहा है। अब बच्चों के सपनों को मिलेगा उजाला बिजली आने से अब गांव के बच्चों को रात में पढ़ाई के लिए रोशनी मिलेगी। मोबाइल चार्जिंग जैसी सामान्य सुविधा, जो शहरों में सहज है, अब यहां भी उपलब्ध होगी। पंखे, लाइट और छोटे घरेलू उपकरणों से जीवन आसान होगा। भविष्य में डिजिटल शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, संचार सुविधाओं और छोटे व्यवसायों के अवसर भी विकसित हो सकते हैं। ग्रामीणों की आंखों में दिखी खुशी जब पहली बार गांव में बल्ब जले, तो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर चेहरे पर उत्साह दिखाई दिया। कई ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने अपने घरों में पहली बार स्थायी रोशनी देखी है। वर्षों से लालटेन, लकड़ी और सीमित साधनों पर निर्भर जीवन अब बदलने लगा है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और बिजली विभाग की टीम के प्रति आभार जताया। लोगों ने इसे गांव के लिए ऐतिहासिक दिन बताया। अबूझमाड़ में बदलाव की नई शुरुआत ईरपानार के अबुझमाड़ के ही हांदावाड़ा गांव में भी हाल के महीनों में पहली बार बिजली पहुंची है, जो बस्तर में एक नए अध्याय की शुरुआत है। ईरपानार जैसे अन्य दूरस्थ गांवों को भी प्राथमिकता के आधार पर बिजली, सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है।

35 करोड़ मनी लॉन्ड्रिंग केस,ईडी की गवाही पर तेज हुई ट्रायल प्रक्रिया

रांची झारखंड टेंडर कमीशन घोटाले की करीब 35 करोड़ राशि की मनी लाउंड्रिंग में पूर्व मंत्री आलमगीर आलम समेत अन्य से जुड़े मामले में डे-टू-डे सुनवाई शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के आलोक में मामले की डे-टू-डे ट्रायल शुरू हो चुका है। 21 अप्रैल से जारी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के गवाहों का बयान दर्ज किया जा रहा है। साथ ही गवाह ईडी द्वारा जब्त कई महत्वपूर्ण दस्तावेज की पहचान साक्ष्य के रूप में करवायी जा रही है। एग्रीमेंट, बैंक खाते का स्टेटमेंट, रजिस्ट्री डीड समेत अन्य दस्तावेज शामिल हैं। सुनवाई के दौरान जेल में बंद पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, संजीव लाल और जहांगीर आलम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया जाता है। अन्य आरोपियों की ओर से वकील उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। यह मामला उस चर्चित 35 करोड़ रुपये की नकद बरामदगी से जुड़ा है, जो ईडी की छापेमारी के दौरान सामने आई थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में कमीशनखोरी के जरिए अवैध धन अर्जित कर उसे ठिकाने लगाया गया। बता दें कि इस मामले में ईडी ने पूछताछ के दौरान 15 मई 2024 को गिरफ्तार किया था, तब से वह जेल में है। मामले में ग्रामीण विकास विभाग के चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम समेत अन्य ट्रायल फेस कर रहे हैं। 11 तक महत्वपूर्ण गवाहों की करानी है गवाही सुप्रीम कोर्ट में पिछले दिनों आलमगीर आलम और संजीव लाल की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दोनों को जमानत देने से इनकार किया गया। साथ ही ईडी को निर्देश दिया गया कि चार सप्ताह के अंदर महत्वपूर्ण गवाहों की जांच पूरी करें। इसी आदेश के आलोक में त्वरित सुनवाई प्रारंभ की गई है।

अरुण साव बोले – खेलों में समग्र विकास के लिए छत्तीसगढ़ तैयार

रायपुर.  राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के खेल मंत्रियों का दो दिवसीय चिंतन शिविर आज श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर (Sher-i-Kashmir International Conference Centre) में प्रारंभ हुआ। इस राष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण आयोजन में केंद्रीय युवा कार्य और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे, विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के खेल मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं।  छत्तीसगढ़ की ओर से उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार इस चिंतन शिविर में भागीदारी कर रहे हैं। उप मुख्यमंत्री साव ने इस मौके पर कहा कि छत्तीसगढ़ खेलों के क्षेत्र में समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। छत्तीसगढ़ पूरे देश के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ेगा।  साव ने बताया कि आज शिविर के पहले दिन केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के साथ देश में खेलों को नई दिशा देने पर मंथन किया गया। यह पहल न केवल नीतियों को मजबूत करेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को आगे लाने का मार्ग भी प्रशस्त करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न के अनुरूप 2047 तक भारत को खेल महाशक्ति बनाने केंद्र सरकार और राज्य सरकारें एकजुट होकर कार्य कर रही हैं। छत्तीसगढ़ के हर गांव और हर शहर से नए खिलाड़ी उभरें और देश-विदेश के खेल मंचों पर अपना परचम लहराएं, यह हमारा लक्ष्य है। 26 अप्रैल तक चलने वाला यह शिविर देश में खेलों के समग्र विकास, नीति सुधार, वैश्विक स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लक्ष्य को हासिल करने और भारत को खेल शक्ति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। केन्द्रीय युवा कार्य और खेल मंत्रालय द्वारा लगातार दूसरे वर्ष इस चिंतन शिविर का आयोजन किया गया है।  चिंतन शिविर के पहले दिन के प्रमुख सत्रों में ‘मेडल स्ट्रेटजी – खेलो इंडिया’ पर गहन मंथन किया गया। विभिन्न राज्यों से प्राप्त सुझावों के आधार पर खेल प्रशिक्षकों के पोटेंशियल को विकसित करने पर सर्वसम्मति बनी। साथ ही वर्ष 2048 तक भारत को ओलंपिक पदक तालिका में शीर्ष 5 देशों में शामिल करने के रोडमैप पर व्यापक चर्चा हुई। इसमें स्पोर्ट्स साइंस के विस्तार एवं उसके प्रभावी उपयोग को खेल विकास का महत्वपूर्ण आधार माना गया। खेल मंत्रालय द्वारा इस पर निरंतर कार्य किया जा रहा है। द्वितीय सत्र ‘खेलो भारत नीति – केंद्र एवं राज्य समन्वय को सुदृढ़ करना’ विषय पर आयोजित हुआ। इस सत्र में विभिन्न राज्यों के बेस्ट प्रेक्टिसेस को साझा किया गया। खिलाड़ियों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के प्रभावी उपयोग, प्रतिभा पहचान (Talent Identification) तथा खेल अकादमियों के मानकीकरण पर विशेष बल दिया गया। सत्र के दौरान विद्यालय स्तर पर खेलों को सशक्त बनाने के लिए शारीरिक शिक्षा को अनिवार्य रूप से जोड़ने, खेल शिक्षकों की भर्ती एवं उन्हें उन्नत प्रशिक्षण प्रदान करने पर सहमति बनी। साथ ही खिलाड़ियों का समग्र डॉटा-बेस तैयार करने पर राज्यों एवं केंद्र द्वारा संयुक्त रूप से कार्य करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया, ताकि प्रतिभाओं की सही पहचान सुनिश्चित हो सके। इस सत्र में यह भी रेखांकित किया गया कि खिलाड़ियों को केवल नौकरी प्राप्त करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि देश के लिए पदक जीतने के लक्ष्य के साथ समर्पित होकर खेलना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को अधिक अवसर, सम्मान एवं आर्थिक लाभ प्राप्त होते हैं। साथ ही इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि खिलाड़ियों के लिए ऐसी व्यवस्था (मॉडल) विकसित की जाए, जिससे वे नौकरी प्राप्त करने के बाद भी खेल जारी रखें और अपने खेल करियर को बीच में न छोड़ें। ग्रामीण क्षेत्रों में खेल संस्कृति विकसित करने, जमीनी स्तर पर सुविधाओं के विस्तार तथा बच्चों को अधिक समय खेल गतिविधियों में देने पर भी विशेष जोर दिया गया। साथ ही खेल अधोसंरचना के निर्माण में विशेषज्ञों की भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई गई। तीसरे सत्र में डोपिंग एवं खेल नैतिकता पर गंभीर चर्चा हुई। खेलों में प्रतिबंधित  दवाईयों के उपयोग पर कड़े नियम बनाने तथा डोपिंग को अपराध की श्रेणी में लाने के विषय पर केंद्र सरकार एवं खेल मंत्रालय की सख्त नीति को दोहराया गया। इस सत्र में ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा ने खेलों में सुरक्षित एवं पेशेवर वातावरण सुनिश्चित करने तथा खिलाड़ियों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से सेफ गॉर्डिंग ऑफिसर्स (Safe Guarding Officers) की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया।

नोट बरसाने’ का ड्रामा, तांत्रिक बनकर गिरोह ने ऐसे लूटा शिकार

अजमेर तत्र-मंत्र से नोट बरसाने का पाखंड और भोले-भाले लोगों से पैसे ऐंठने के बाद मौत का ड्रामा, यह मामला किसी फिल्मी सीन से कम नहीं लगता. डीग में ऐसी ही ठगी का भंडाफोड़ हुआ है, जहां आरोपी खुद को तांत्रिक बताते हुए पैसा दोगुना करने का झांसा देता था. इस एवज में उसने कई लोगों से ठगी कर ली. पुलिस ने शातिर और संगठित गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया है. कामां थाना पुलिस और डीएसटी टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए गिरोह के 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया. पुलिस ने इनके पास से ठगी गई पूरी राशि  4 लाख 35 हजाररुपए बरामद कर ली है. सुनसान जगह ले गया आरोपी डीग एसपी शरण कांबले ने बताया कि अजमेर निवासी राजेंद्र सिंह सोलंकी को गिरोह ने फोन कर झांसे में लिया था. उसे खेडली जल्लो क्षेत्र के एक सुनसान जगह पर बुलाया गया. वहां गिरोह ने पहले से ही एक पटकथा तैयार कर रखी था. एक छोटे कद का व्यक्ति 'तांत्रिक' बनकर बैठा था, जिसने तंत्र-मंत्र और कंबल से नोट बरसाने का पाखंड किया. इसके बाद पैसे ठगने का खेल शुरू होता था. पैसे हड़पने के बाद 'नाटक' शुरू जैसे ही पीड़ित राजेंद्र ने 4 लाख 35 हजार रुपए आरोपियों को सौंपे, तांत्रिक ने अचानक 'मौत' का नाटक शुरू कर दिया. गिरोह के अन्य सदस्यों ने वहां डर का माहौल पैदा कर दिया और पीड़ित को पुलिस केस और मौत के डर से वहां से भागने पर मजबूर कर दिया. जांच में सामने आया है कि गिरोह का मुख्य सरगना पिछले 10 वर्षों के दौरान कई लोगों को ठगी का शिकार बना चुका है. आरोपियों से पूछताछ कर गिरोही के अन्य साथियों और पीड़ित के बारे में भी पता लगाया जा रहा है.

हाफा मोड़ पर सकरी पुलिस की बड़ी दबिश: 335 नग अंग्रेजी शराब के साथ दो तस्कर गिरफ्तार, 40 हजार की खेप जब्त

सकरी. अवैध शराब के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सकरी पुलिस ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए हाफा मोड़ पर घेराबंदी कर दो आरोपियों को भारी मात्रा में अंग्रेजी शराब के साथ गिरफ्तार किया है। मुखबिर की सटीक सूचना पर की गई इस कार्रवाई से क्षेत्र में अवैध कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, हाफा मोड़ क्षेत्र में अवैध शराब परिवहन की सूचना मिलते ही टीम ने तत्काल घेराबंदी कर संदिग्धों को रोककर तलाशी ली। इस दौरान घिरधौना निवासी योगेन्द्र यादव (24 वर्ष), पिता बोधराम यादव के पास से 2 सफेद बोरियों में 185 नग अंग्रेजी शराब बरामद की गई। वहीं, दूसरे आरोपी जरौंधा निवासी रवि वर्मा, पिता अरुण वर्मा के कब्जे से 2 सफेद बोरियों में 150 नग अंग्रेजी शराब जब्त की गई। दोनों के पास से कुल 335 नग अंग्रेजी शराब बरामद हुई है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 40 हजार रुपए बताई जा रही है। पुलिस ने मौके पर ही दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और उनके खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। सख्ती के मूड में पुलिस, तस्करों में दहशत सकरी पुलिस की इस कार्रवाई से साफ संकेत मिल रहा है कि अवैध शराब कारोबार पर अब कड़ा प्रहार जारी रहेगा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है और किसी भी प्रकार के अवैध कारोबार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुखबिर तंत्र हुआ मजबूत इस कार्रवाई में मुखबिर की भूमिका अहम रही, जिसकी सूचना पर पुलिस ने सटीक समय पर दबिश देकर बड़ी खेप पकड़ने में सफलता हासिल की। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि पुलिस का खुफिया नेटवर्क अब पहले से अधिक सक्रिय और मजबूत हो गया है। जनता ने की सराहना इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस की तत्परता और सक्रियता की सराहना की है। लोगों का कहना है कि इस तरह की लगातार कार्रवाई से क्षेत्र में अपराध और अवैध गतिविधियों पर निश्चित रूप से अंकुश लगेगा।

घरेलू विवाद ने लिया खौफनाक मोड़: आरक्षक की दूसरी पत्नी के हमले में मां-बेटे की मौत

दुर्ग. दुर्ग के एसटीएफ कॉलोनी में शनिवार सुबह महिला ने आरक्षक ललितेश यादव के घर घुसकर परिवारवालों पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया. हमले में आरक्षक की पत्नी और 9 वर्षीय बेटे की मौके पर मौत हो गई, वहीं एक बेटी गंभीर घायल हो गई. एक बेटी ने बाथरुम में छिपकर अपनी जान बचाने में कामयाब रही. पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी महिला सरोजनी भारद्वाज और बीजापुर में पदस्थ आरक्षक ललितेश यादव के बीच संबंध थे. बताया जा रहा है कि महिला एक दिन पहले भी आरक्षक के घर पहुंची थी, इस दौरान उसे समझाकर वापस भेज दिया गया था. लेकिन महिला ने आज फिर से घर में घुसकर खौफनाक वारदात को अंजाम दे दिया. महिला द्वारा चाकू से किए गए हमले में आरक्षक की पत्नी रीना यादव और 9 वर्षीय बेटे आदित्य यादव की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, वहीं हमले में गंभीर रूप से घायल आरक्षक की बेटी तानिया यादव को उपचार के लिए अस्पताल के आईसीयू में रखा है. घटना के दौरान दूसरी बेटी नैना यादव ने बाथरूम में छिपकर किसी तरह से अपनी जान बचाई. घटना के बाद पूरे कॉलोनी में सनसनी फैल गई है. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची. घटना की गंभीरता को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. घटना के संबंध में सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी ने बताया कि आरोपी महिला ने घर में घुसकर महिला और बच्चों पर हमला किया है, जिसमें दो की मौत हो गई और एक बच्ची का इलाज जारी है. फिलहाल, आरोपी से पूछताछ कर पूरे मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है. फेसबुक में दोस्ती, फिर की शादी! घटना को लेकर जो जानकारी सामने आ रही है, उसके अनुसार बीजापुर में पदस्थ आरक्षक ललितेश यादव और जांजगीर-चांपा में रहने वाली आरोपी महिला सरोजनी भारद्वाज के बीच फेसबुक के जरिए दोस्ती हुई थी, जो जल्द ही प्यार में बदल गया. बताया जा रहा है कि आरक्षक ने कथित तौर पर महिला से दूसरी शादी भी कर ली थी. अब पुलिस कथित दूसरी पत्नी के आरक्षक की पहली पत्नी और बच्चों पर हमले के पीछे की वजह जानने में जुटी हुई है.