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संघर्ष से सफलता तक,झारखंड की दिव्यानी बनीं रांची की पहली महिला फुटबॉल स्टार

रांची झारखंड के रांची जिले की प्रतिभाशाली फुटबॉल खिलाड़ी दिव्यानी लिंडा ने अपने संघर्ष, समर्पण और मेहनत के दम पर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. ये रांची की पहली महिला खिलाड़ी बन गई हैं, जिन्हें AFC U-17 Women’s Asian Cup में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है. इस वर्ष झारखंड से एक साथ 4 खिलाड़ियों का चयन हुआ है, जो राज्य के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है. संघर्ष से सफलता तक का सफर दिव्यानी लिंडा चंद्र पंचायत के चंदरा गांव की निवासी हैं. सीमित संसाधनों, खेल मैदान की कमी और पारिवारिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया. कठिन परिस्थितियों में भी उनका आत्मविश्वास और मेहनत उन्हें लगातार आगे बढ़ाता रहा, जिसका परिणाम आज पूरे देश के सामने है. स्टार वॉरियर्स से बनी पहचान दिव्यानी Star Warriors Football Club, कांके ब्लॉक में संचालित क्लब की प्रमुख खिलाड़ी हैं. उनकी इस उपलब्धि से न सिर्फ उनका परिवार, बल्कि पूरा कांके क्षेत्र और क्लब गौरवान्वित हुआ है. कोच अनवरूल हक उर्फ बबलू का अहम योगदान दिव्यानी की सफलता के पीछे उनके कोच अनवरूल हक (बबलू) का विशेष योगदान रहा है, जो क्लब के संस्थापक भी हैं. उन्होंने दिव्यानी की प्रतिभा को पहचान कर उसे निखारा और हर कठिन समय में मार्गदर्शन दिया. झारखंड का गौरव दिव्यानी लिंडा झारखंड की दूसरी खिलाड़ी बन चुकी हैं, जिन्हें इतने बड़े एशियाई स्तर के टूर्नामेंट में खेलने का अवसर मिला है. वहीं, रांची की पहली खिलाड़ी बनकर उन्होंने एक नया इतिहास स्थापित किया है. प्रेरणा की मिसाल दिव्यानी की सफलता हर उस युवा खिलाड़ी के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखता है. बधाई और शुभकामनाएं इस उपलब्धि पर स्टार वॉरियर्स फुटबॉल क्लब के संरक्षक जगदीश सिंह (जग्गू), कांके उप प्रमुख अजय कुमार बैठा, कोषाध्यक्ष सह पंचायत समिति सदस्य रेशमी तिर्की और देवेंद्र स्वामी प्रकाश, छोटू टोप्पो, सुरेन्द्र उरांव, डॉ. शहनवाज कुरैशी, समंदर लाल, रामेंद्र कुमार, राणा मिश्रा, नुरुल हक, एकरामुल अंसारी सहित अन्य सदस्यों ने दिव्यानी को बधाई और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं.

भारत के Sujit Kalkal ने रचा इतिहास, वर्ल्ड नंबर-1 बनकर ओलंपिक की राह की मजबूत दावेदारी

चरखी दादरी. जिले के गांव इमलोटा निवासी पहलवान सुजीत कलकल लगातार सफलता के नए अध्याय लिखते जा रहे हैं। वे एक के बाद एक सफलता हासिल कर देश के लिए मेडल हासिल कर रहे हैं। उनके इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग की नई रैंकिंग में वे टॉप पर पहुंचे है और दुनिया के नंबर वन पहलवान बन गए हैं। खेल प्रेमियों में उनकी इस उपलब्धि से खुशी का माहौल है। उन्होंने इसे जिला दादरी व देश-प्रदेश के लिए गौरव का क्षण बताया। उल्लेखनीय है कि भारतीय युवा पहलवान सुजीत कलकल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए वर्ल्ड रेसलिंग रैंकिंग में नंबर-वन स्थान हासिल कर देश का नाम रोशन किया है। 65 किलोग्राम भारवर्ग में खेलते हुए सुजीत कलकल ने लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर बड़े नामी पहलवानों को मैट पर पछाड़ते हुए अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप सहित बड़ी प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल हासिल किए। नंबर वन पहलवान बने सुजीत उसी का परिणाम है, जिसने उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पहलवानों की सूची में सबसे ऊपर पहुंचा दिया। उनकी इस खेल उपलब्धि पर खेल प्रेमियों और कुश्ती जगत से जुड़े लोगों ने खुशी जाहिर की है। कोचों और विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सुजीत इसी तरह प्रदर्शन करते रहे, तो आने वाले दिनों में देश की झोली में अनेक गोल्ड मेडल डालने का काम करेंगे। सुजीत कलकल का नंबर-वन बनना न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह भारतीय कुश्ती के बढ़ते स्तर और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी मजबूती का भी प्रतीक है। उनकी इस उपलब्धि से देशभर के युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी और वे भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित होंगे। लगातार जीत चुके हैं 6 गोल्ड मेडल: कोच सुजीत कलकल के पिता एवं कोच दयानंद कलकल ने बताया कि सुजीत शानदार लय में चल रहे हैं। उन्होंने बीते करीब एक साल के दौरान जिस भी इंटरनेशनल चैंपियनशिप में शिरकत की है उसमें गोल्ड मेडल हासिल किया है। उन्होंने बताया कि डबल लेग होल्ड, फीतले बांधना व भारंदाज उनके प्रमुख दांव-पेंज हैं। जिनके दम पर वे लगातार जीत हासिल करते हुए लगातार छह गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। उन्होंने बताया कि 2025 में सीनियर वर्ल्ड रैंकिंग में दो बार गोल्ड मेडल, अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड, वर्ल्ड सीनियर रैंकिंग चैंपियनशिप में दो गोल्ड और अब सीनियर एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड सहित लगातार छह गोल्ड मेडल हासिल किए हैं। उम्मीद है कि वे जीत के इस सफर को जारी रखेंगे और अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए मेडल हासिल कर देश, प्रदेश व दादरी जिले का नाम रोशन करेंगे। उन्होंने कहा कि सुजीत ने अपने खेल प्रदर्शन से साबित कर दिया है कि वे ओलिंपिक में मेडल जीतने का मादा रखते हैं। देश को सुजीत से बड़ी उम्मीदें: योगेश जिला कुश्ती संघ के सचिव योगेश इमलोटा ने कहा कि सुजीत कलकल ने जिस प्रकार का प्रदर्शन किया है उससे देश के खेल प्रेमियों को इस युवा पहलवान से बड़ी उम्मीदें हैं। उन्होंने कहा कि वे लगातार जीत हासिल कर जिस लय में आगे बढ़ रहे हैं उसको देखकर कहा जा सकता है कि ओलिंपिक का पदक अब उनसे दूर नहीं हैं। उन्होंने जिला कुश्ती संघ की ओर से सुजीत को नंबर वन रैंकिंग हासिल करने पर बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि यह देश, प्रदेश व जिले के लिए गर्व की बात है।

बार-बार चाबी खोना सिर्फ आदत नहीं, जानिए वास्तु और मान्यताओं का संकेत

घर की चाबियां छोटी सी चीज़ हैं, लेकिन रोज़मर्रा की ज़िंदगी में सबसे ज़रूरी भी. फिर भी कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हें हर दिन चाबी ढूंढनी पड़ती है कभी टेबल पर, कभी बैग में, तो कभी घर के किसी कोने में. अगर आपके साथ भी ऐसा बार-बार हो रहा है, तो इसे सिर्फ लापरवाही मानकर नजरअंदाज न करें. कुछ मान्यताओं के अनुसार, यह आपकी आदतों के साथ-साथ घर की ऊर्जा और जीवन की स्थिति से जुड़ा संकेत भी हो सकता है. धार्मिक मान्यताओं में क्या माना जाता है? धार्मिक दृष्टि से बार-बार चाबी खोना सामान्य बात नहीं माना जाता. इसे जीवन में चल रही अव्यवस्था या अस्थिरता का संकेत माना जाता है. चाबियां सुरक्षा और नियंत्रण का प्रतीक होती हैं, इसलिए उनका बार-बार खोना इस बात की ओर इशारा कर सकता है कि व्यक्ति अपने कामों या फैसलों पर पूरी पकड़ नहीं बना पा रहा है.  कुछ मान्यताओं में इसे नकारात्मक ऊर्जा या ग्रहों के असंतुलन से भी जोड़कर देखा जाता है, खासकर तब जब घर में चीज़ें लगातार खोने लगें. वास्तु शास्त्र के अनुसार, चाबियों के लिए एक तय और सही स्थान होना बेहद जरूरी है.     चाबियां उत्तर या पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है.     घर के मुख्य दरवाजे के पास दीवार पर की-होल्डर लगाना अच्छा रहता है.     चाबियां हमेशा ऐसी जगह रखें जो आसानी से दिखे और पहुंच में हो.     ध्यान रखें कि चाबियाँ जमीन के बहुत पास या गंदी जगह पर न हों.  इन गलतियों से बचें     चाबियां किचन, गैस स्टोव या बाथरूम के पास न रखें     बेड या तकिए के नीचे चाबी रखना अशुभ माना जाता है     चाबियों को अलग-अलग जगहों पर बिखरा कर न रखें     पुरानी, टूटी या बेकार चाबियाँ घर में जमा न करें सिर्फ धार्मिक या वास्तु कारण ही नहीं, बल्कि बार-बार चाबी खोना आपकी दिनचर्या, तनाव और फोकस की कमी का भी संकेत हो सकता है.

बलबीर सिंह सीचेवाल का बड़ा खुलासा, ‘आप छोड़ने वाले सांसदों ने मुझे भी बुलाया था, पर मैंने मना कर दिया’

चंडीगढ़ आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल ने रविवार को बड़ा दावा करते हुए कहा कि पार्टी छोड़ने वाले सांसदों ने उन्हें भी अपने साथ आने का न्यौता दिया था लेकिन उन्होंने साफ इंकार कर दिया। सीचेवाल ने कहा कि राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने उन्हें फोन कर आजाद समूह में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था।  सीचेवाल ने सात सांसदों के एक साथ पार्टी छोड़ने पर दुख जताते हुए इसे आम आदमी पार्टी के साथ बेवफाई करार दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने इन नेताओं को राज्यसभा में भेजकर पंजाब के मुद्दे उठाने का मौका दिया लेकिन अब उन्होंने अचानक पार्टी छोड़ दी।  राघव चड्ढा और संदीप पाठक के फैसले पर भी उन्होंने हैरानी जताई। कहा कि इन नेताओं ने पंजाब में सत्ता का पूरा आनंद लिया और अब पार्टी को अलविदा कह दिया। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल ने रविवार को बड़ा दावा करते हुए कहा कि पार्टी छोड़ने वाले सांसदों ने उन्हें भी अपने साथ आने का न्योता दिया था लेकिन उन्होंने साफ इंकार कर दिया। सीचेवाल ने कहा कि राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने उन्हें फोन कर आजाद समूह में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था।   सीचेवाल ने सात सांसदों के एक साथ पार्टी छोड़ने पर दुख जताते हुए इसे आम आदमी पार्टी के साथ बेवफाई करार दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने इन नेताओं को राज्यसभा में भेजकर पंजाब के मुद्दे उठाने का मौका दिया लेकिन अब उन्होंने अचानक पार्टी छोड़ दी।  राघव चड्ढा और संदीप पाठक के फैसले पर भी उन्होंने हैरानी जताई। कहा कि इन नेताओं ने पंजाब में सत्ता का पूरा आनंद लिया और अब पार्टी को अलविदा कह दिया। हमने पंजाब के साथ कोई गद्दारी नहीं की, दस गुना ज्यादा कम करेंगे : साहनी आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद विक्रमजीत साहनी ने आप के आरोपों पर कहा कि हम गद्दार नहीं हैं। हम 10 गुना ज्यादा काम करेंगे। वर्ष 2022 पंजाब विधानसभा चुनाव में सांसद राघव चड्ढा और संदीप पाठक का अहम रोल था लेकिन पिछले कुछ समय से उन्हें साइड लाइन कर दिया गया। राघव चड्ढा और पाठक को साइडलाइन करने से बढ़ा असंतोष सांसद साहनी ने एक टीवी चैनल पर इंटरव्यू के दौरान कहा कि आप के दिल्ली चुनाव हारने के बाद नई टीम ने मोर्चा संभाल लिया। चड्ढा को संसद में उपनेता के पद से हटाने के बाद रोष बढ़ गया। दोनों प्रमुख नेताओं को नजरअंदाज करना गलती थी। बाकी सांसदों में भी इसे लेकर असंतोष था। साहनी ने कहा कि वह इसे लेकर आप प्रमुख केजरीवाल से भी मिले थे। केजरीवाल ने उन्हें इस्तीफा देने के लिए बोल दिया था।   साहनी ने कहा कि वे इस्तीफा देने लगे थे लेकिन अपने करीबियों के साथ विचार विमर्श के बाद ही इस्तीफा न देने का फैसला लिया और इस दौरान सहमति बनी कि भाजपा ही पंजाब का भला कर सकती है। इसके बाद ही पार्टी में शामिल होने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा पंजाब को जो मिलना चाहिए था वो सही समन्वय के कारण मिल नहीं पा रहा है।   पिछले चार साल से चुनावी मोड ही चल रहा है और राज्य और केंद्र सरकार दोनों एक दूसरे को कोस रहे रहे हैं। युवा पीढ़ी खेती नहीं करना चाहती है तो ऐसे हालात में पंजाब का क्या हो सकता है, क्योंकि केंद्र सरकार पंजाब के लिए बहुत कुछ करना चाहती है।   साहनी ने कहा कि फ्रेट सब्सिडी देने के लिए केंद्र तैयार है लेकिन आंकड़ों के साथ प्रस्ताव तो देना ही होगा। चुनाव के बारे में अभी कुछ नहीं कहना चाहता हूं, क्योंकि पंजाब के लोग समझदार हैं और 2027 विधानसभा चुनाव में उचित फैसला लेंगे।  

बिजली कटौती पर सरकार सख्त, मंत्री Arora ने गिनाए संकट के कारण और दिया राहत का भरोसा

चंडीगढ़. पंजाब में अचानक बढ़ी गर्मी ने बिजली व्यवस्था पर सीधा असर डाला है। भीषण लू और तापमान में लगातार बढ़ोतरी के कारण बिजली की मांग में तेजी से उछाल दर्ज किया गया है। विभाग के अनुसार इस तरह की मांग पहले कभी अप्रैल महीने में देखने को नहीं मिली, जिससे पूरे तंत्र पर दबाव बढ़ गया है।  बिजली मंत्री संजीव अरोड़ा ने बताया कि पहले से तय कार्यक्रम के तहत मरम्मत कार्य चल रहे थे। इसी वजह से कई स्थानों पर नियोजित बिजली कट लगाए गए, जिससे उपभोक्ताओं को कटौती अधिक महसूस हुई। 17 अप्रैल के बाद पैदा हुई स्थिति का यही सबसे बड़ा कारण है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अब ऐसे नियोजित कट चार घंटे से ज्यादा नहीं होंगे और व्यवस्था को सामान्य रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। खेती के मौसम ने भी बिजली की मांग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस समय फसलों की कटाई के साथ-साथ आलू और टमाटर जैसी फसलों की खेती के लिए लगातार बिजली की जरूरत रहती है। किसानों को तय समय पर बिजली उपलब्ध कराना जरूरी होने के कारण ग्रिड पर अतिरिक्त दबाव बन गया है। हालात पर विभाग रख रहा नजर विभाग के अनुसार राज्य में करीब छह हजार करोड़ रुपये की लागत से प्रसारण और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने का काम चल रहा है। लेकिन अचानक बढ़ी मांग के कारण इस काम की गति भी प्रभावित हो रही है। इसके बावजूद अधिकारियों का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। राहत के तौर पर उद्योगों को रात के समय खुले प्रावधान के तहत सीधे बिजली खरीदने की अनुमति दी गई है, ताकि दिन के समय ग्रिड पर लोड कम किया जा सके और आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। अनावश्यक बिजली उपकरणों के इस्तेमाल से बचें विभाग का दावा है कि राज्य में जरूरत के अनुसार बिजली उपलब्ध कराई जा रही है और प्रदेश अभी भी बिजली के मामले में आत्मनिर्भर स्थिति में है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सभी तैयारियां पहले से थीं, लेकिन अप्रैल में इतनी अधिक मांग अप्रत्याशित रही। उपभोक्ताओं से भी अपील की गई है कि वे अधिक खपत वाले समय में अनावश्यक बिजली उपकरणों का इस्तेमाल न करें, ताकि सभी को सुचारु रूप से बिजली मिल सके। बिजली की अधिकतम मांग में 12% की बढ़ोतरी अप्रैल की शुरुआत में: बिजली का इस्तेमाल पिछले साल के मुकाबले 7% से 21% तक कम था। पिछले 10 दिनों में: भारी गर्मी की वजह से बिजली के इस्तेमाल और इसकी डिमांड में जबरदस्त उछाल आया है। बड़ी छलांग: अधिकतम मांग 15 अप्रैल को लगभग 7900 MW थी, जो 25 अप्रैल तक बढ़कर 12000 MW के पार पहुंच गई है। स्थिति को सुधारने के लिए उठाए गए कदम बिजली कटौती का समय तय: लोगों को परेशानी न हो, इसलिए बिजली कटौती को ज्यादा से ज्यादा 4 घंटे तक ही सीमित रखा गया है। दूसरे राज्यों से बिजली का लेनदेन: दूसरे राज्यों के साथ 1500-2000 MW बिजली के लिए बातचीत आखिरी दौर में है; ये समझौते जल्द ही पूरे कर लिए जाएंगे। हाइड्रो पावर प्लांट फिर से शुरू: 2025 की बाढ़ में सरकारी हाइड्रो यूनिट्स को नुकसान पहुँचा था। मरम्मत का काम 10 मई तक पूरा हो जाएगा, जिससे ग्रिड में 300 MW बिजली और जुड़ जाएगी। अतिरिक्त बिजली की खरीदारी: ग्रिड के लिए लगभग 1500 MW एक्स्ट्रा बिजली अलग-अलग राज्यों और प्राइवेट कंपनियों से खरीदी जा रही है। केंद्र सरकार से मदद: गर्मियों के पीक महीनों में राहत देने के लिए पंजाब केंद्र सरकार के कोटे से लगभग 2000 MW बिजली लेने की तैयारी कर रहा है। शॉर्ट-टर्म टेंडर: बाजार में कम समय वाले टेंडर निकाले गए हैं ताकि बिना किसी देरी के तुरंत फालतू बिजली खरीदी जा सके। चार्ज में छूट: अगले 2 महीनों के लिए शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक 'व्हीलिंग चार्ज' और 'क्रॉस सब्सिडी' में छूट दी गई है।

मलावी में महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा का अनावरण, सिख समुदाय ने किया जोरदार स्वागत

चंडीगढ़ भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) ने मलावी, अफ्रीका में महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा की स्थापना की। महाराजा रणजीत सिंह, जिन्हें शेर-ए-पंजाब के नाम से जाना जाता है, एक महान भारतीय योद्धा और दूरदर्शी नेता थे। इस प्रतिमा का औपचारिक अनावरण 19 अप्रैल को बैसाखी समारोह के अवसर पर भारत के उच्चायुक्त श्री अमराराम गुजर और ब्लैंटायर सिटी के काउंसलर आइजैक जोमो उस्मान द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। समारोह में सिख समुदाय के 400 से अधिक सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भारत सरकार द्वारा उपहार स्वरूप प्रदान की गई यह प्रतिमा महाराजा रणजीत सिंह के जीवन और विरासत को समर्पित है। उनके साहस, कुशल नेतृत्व और दूरदर्शिता आज भी विश्वभर में पीढ़ियों को प्रेरित करती है। इस अवसर पर आइसीसीआर की महानिदेशक के. नंदनी संगला ने कहा कि यह स्थापना प्रवासी भारतीय समुदाय, विशेषकर सिख समाज, के लिए अपनी समृद्ध विरासत से जुड़ने का महत्वपूर्ण अवसर है। उच्चायुक्त श्री अमराराम ने इस ऐतिहासिक संबंध को महाराजा रणजीत सिंह के वैश्विक प्रभाव का प्रतीक बताया।

ज्ञान भारतम् अभियान: एमसीबी जिले में पांडुलिपि सर्वे शुरू, 1850 की दुर्लभ हस्तलिखित धरोहर का डिजिटलीकरण

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी ज्ञान भारतम् अभियान के अंतर्गत राज्य शासन के निर्देशानुसार जिले में प्राचीन पांडुलिपियों (हस्तलिखित ग्रंथों) के संरक्षण हेतु व्यापक सर्वे अभियान प्रारंभ कर दिया गया है। इस पहल के तहत तीन मास्टर ट्रेनर एवं 137 सर्वेक्षकों की नियुक्ति कर सभी ग्राम पंचायतों में सर्वे कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला कलेक्टर डी. राहुल वेंकट ने जिला स्तरीय समिति का गठन करते हुए सभी सर्वेक्षकों की ऑनलाइन बैठक ली। उन्होंने अभियान की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि सर्वे के दौरान कम से कम 60–70 वर्ष या उससे अधिक प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथों की पहचान की जाएगी। ऐसे ग्रंथ पुस्तकालयों, मंदिरों एवं निजी संग्रहों में विशेष रूप से मिल सकते हैं, खासकर उन परिवारों में जहां पीढ़ियों से पुरानी धरोहरें सुरक्षित रखी गई हैं। इसी क्रम में चिरमिरी निवासी व्याख्याता प्रदीप कुमार बेहरा के निवास पर विशेष पहल की गई। यहां ज्ञान भारतम् अभियान के जिला नोडल अधिकारी डॉ. विनोद पांडेय, चिरमिरी नगर निगम के महापौर रामनरेश राय एवं रितेश श्रीवास्तव की उपस्थिति में लगभग वर्ष 1850 की उड़िया भाषा की 6 दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया गया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने श्री बेहरा के द्वारा संरक्षित इस अमूल्य विरासत की सराहना की। महापौर ने आम नागरिकों से अपील की कि वे अपने पास उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों की जानकारी देकर इस अभियान में सक्रिय सहयोग करें। वहीं कलेक्टर ने भी पांडुलिपि संरक्षण के लिए श्री बेहरा को बधाई देते हुए इसे सांस्कृतिक धरोहर बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

भीषण गर्मी में ग्रामीणों को मिली बड़ी राहत: भरतपुर के कई गाँवों में खराब हैंडपंप हुए दुरुस्त

भीषण गर्मी में ग्रामीणों को मिली बड़ी राहत: भरतपुर के कई गाँवों में खराब हैंडपंप हुए दुरुस्त मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिले में पड़ रही भीषण गर्मी और गहराते जल संकट के बीच लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) ने पेयजल व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए कमर कस ली है। प्रशासन की सक्रियता से ग्रामीण क्षेत्रों में बंद पड़े हैंडपंपों को युद्ध स्तर पर सुधारा जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। इन गाँवों में हुआ त्वरित सुधार विभागीय टीम ने हाल ही में विकासखंड भरतपुर के ग्राम पंचायत घाघरा, बेला और लरकोडा का दौरा किया। यहाँ लंबे समय से खराब और बंद पड़े हैंडपंपों का न केवल निरीक्षण किया गया, बल्कि मौके पर ही उनकी मरम्मत कर उन्हें दोबारा चालू किया गया। प्राथमिकता पर पेयजल आपूर्ति भीषण गर्मी की तीव्रता को देखते हुए प्रशासन ने खराब हैंडपंपों को प्राथमिकता के आधार पर सुधारने के निर्देश दिए है। (PHE) विभाग की इस मुस्तैदी से ग्रामीणों को अब स्वच्छ पेयजल के लिए दूर नहीं भटकना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन की इस संवेदनशीलता और तत्परता की सराहना की है। जिलेभर में अभियान जारी प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, जिले के अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भी हैंडपंप सुधार का कार्य निरंतर प्रगति पर है। विभाग का लक्ष्य है कि इस भीषण तपिश में किसी भी ग्रामीण को पानी की किल्लत का सामना न करना पड़े।

Census 2026: 1 मई से सर्वे में बदला पैटर्न, अब लाइफस्टाइल और खान-पान पर भी पूछे जाएंगे सवाल

राजनांदगांव. वर्ष 2011 के बाद पूरे देशभर में जनगणना कार्य शुरू हो गया है। एक मई से प्रगणक घर घर जाकर 33 बिन्दुओं में लोगों से जानकारी लेगें। इसमें रहने, खाने और लाइफ स्टाइल की जानकारी मांगी जाएगी। स्मार्ट फोन व घर के फर्श में उपयोग होने वाले सभी बिन्दुओं की जानकारी इस बार ली जाएगी। राज्य के गृह मंत्रालय ने जनगणना के लिए निर्देश जारी कर दिए है। जिसके तहत 33 बिन्दुओ के अंदर लोगों को जानकारी मांगी जाएगी। जिसमें लोगों के रहने, खाने, मनोरंजन, इंटरनेट व कौन से अनाज खा रहे सहित मोबाइल नंबर मांगे जाएंगे। बहरहाल जनगणना के पहले चरण की तैयारियां शुरू हो गई हैं। जानकारी अनुसार वर्ष 2011 में जनगणना होने के बाद दुबारा सर्वे नही हो पाया था । प्रत्येक दस साल में होने वाला जनगणना कार्य अब होने जा रहा हैं। इसकी तैयारी वर्ष 2025 के अंतिम माह से शुरू हो गई है। गृह मंत्रालय द्वारा इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी गई हैं। जिसमें 33 बिन्दु निर्धारित किए गए है प्रक्रियाः पूरी तरह से पेपरलेस, डिजिटल डेटा संग्रह मोबाइल ऐप के माध्यम से होगा। ये प्रश्न पूछे जाएंगे जनगणना में 1. भवन नंबर (नगर या स्थानीय प्राधिकरण अथवा जनगणना नंबर ) 2. जनगणना मकान नंबर 3. मकान के फर्श में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री 4. मकान के दीवार में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री 5. मकान के छत में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री 6. मकान के उपयोग 7. मकान की हालत 8. परिवार की जानकारी 9 परिवार में सामान्यतः रहने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या 10. परिवार के मुखिया का नाम 11. परिवार के मुखिया का लिंग 12. क्या परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य से संबन्धित है 13. मकान के स्वामित्व की स्थिति 14. परिवार के पास रहने के लिए उपलब्ध कमरों की संख्या 15. परिवार में रहने वाले विवाहित दंपत्तियों की संख्या 16. पेयजल का मुख्य स्रोत 17. पेयजल स्रोत की उपलब्धता 18. प्रकाश का मुख्य स्रोत 19. शौचालय की सुलभता 20. शौचालय का प्रकार 21. गंदे पानी की निकासी 22. बाथरूम की चाबियों की उपलब्धता 23. रसोई घर और एलपीजी, पीएनजी कनेक्शन की उपलब्धता, 24. खाना पकाने के लिए प्रयुक्त मुख्य ईधन 25. रेडियो ट्रांजिस्टर 26. टेलिविजन 27. इंटरनेट सुविधा 28 लैपटॉप कम्प्यूटर 29. टेलीफोन, मोबाइल फोन, स्मार्ट फोन 30. साइकिल, स्कूटर, मोटर साइकिल, मोपेड 31. कार, जीप, वैन 32. परिवार द्वारा उपभोग किया जाने वाले मुख्य अनाज 33. मोबाइल नंबर की जानकारी देनी होगी। चार सहायक उप निरीक्षकों को उप निरीक्षक पद पर पदोन्नति भिलाईनगर। दुर्ग जिला में पदस्थ सहायक उप निरीक्षकों गोरख नाथ चौधरी, पूर्ण बहादुर कांकी, चन्द्रशेखर सोनी व केशव दयाल तिवारी को उप निरीक्षक पद पर पदोन्नत किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग विजय अग्रवाल ने पदोन्नत अधिकारियों को स्टार लगा कर शुभकामनाएं दी तथा नई जिम्मेदारियों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा, अनुशासन एवं जनोन्मुख पुलिसिंग के साथ करने के लिए प्रेरित किया गया। पदोन्नति प्राप्त अधिकारियों ने अपने दायित्वों के प्रति समर्पण दोहराते हुए कानून व्यवस्था, अपराध नियंत्रण एवं आमजन की सुरक्षा के प्रति और अधिक प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया गया।

मायरा की मासूम डिमांड ने बदला माहौल, अभिरा ने मां के सच पर कही बड़ी बात

 ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ के 27 अप्रैल के एपिसोड में अभिरा और अरमान, मायरा को अपने साथ बाहर लेकर आते हैं। मायरा, अभिरा को गले लगाती है और आई लव यू कहती है। अभिरा को यकीन नहीं होता है। अभिरा को लगता है कि ये कोई सपना है। ऐसे में मायरा, अभिरा को 100 टाइम्स आई लव यू कहती है और ये यकीन दिलाती है कि ये रियल है, सपना नहीं। (ये भी पढ़ें: Anupama 27 April: दिग्विजय को प्रेम ने लगाया गले, श्रुति को देख गौतम को ये आदेश देती हैं मोटी बा) कोयल की मम्मी से वादा करते हैं अरमान और अभिरा इस बीच कोयल आती है। मायरा, कोयल से मिलती है और उसे थैंक्यू बोलती है। अभिरा भी कोयल की मम्मा का शुक्रियाअदा करती है। अभिरा वादा करती है कि वो उनके लिए जॉब ढूंढेगी। वहीं अरमान कहता है कि वो कोयल की पढ़ाई के लिए फंड्स इकट्ठा करेगा। इसके बाद मायरा सबसे मिलती है। अभिरा सोचती है, ‘आज मायरा खुश है इसलिए आज कुछ नहीं बोलूंगी, लेकिन कल मां का सच बाहर लाकर रहूंगी।’ फूफा-सा मांगते हैं माफी सबसे मिलने के बाद मायरा को याद आता है कि मुक्ति ने कसम खाई थी कि जब तक वो नहीं आएगी तब तक वो कोल्ड्रिंग नहीं पिएगी। ऐसे में मायरा, माधव से पैसे लेती है और मुक्ति के पास जाती है। वहीं फूफा-सा, अभिरा से माफी मांगते हैं। फूफा-सा कहते हैं, ‘अभिरा तुम इतने साल तक कोर्ट-कचहरी से दूर थी इसलिए मुझे लगा कि तुम ये केस नहीं लड़ पाओगी। मुझे माफ कर देना।’ मुक्ति और मायरा का मिलन मायरा को देख मुक्ति खुश हो जाती है। दोनों मिलकर कोल्ड्रिंग पीते हैं। मुक्ति इमोशनल हाे जाती है। मुक्ति, मायरा से पूछती है, ‘क्या हम मां को शेयर कर सकते हैं?’ फिर मुक्ति कहती है, ‘नहीं! तुमने तो बहुत पहले ही मना कर दिया था। कोई बात नहीं।’ मायरा पहले मुक्ति को मारती है और फिर खुद को। मायरा कहती है, ‘मैंने तुम्हे इसलिए मारा क्योंकि तुम बकवास कर रही हो और खुद को इसलिए मारा क्योंकि मैंने भी पहले बकवास ही बोला था।’ इसके बाद मायरा, मुक्ति का अपने परिवार में स्वागत करती है। मायरा की डिमांड मायरा, अभिरा और अरमान से कहती है कि उसे मां और पापा के बीच किसी एक को नहीं चुनना है। उसे मां, पापा और मुक्ति तीनों चाहिए। ये सुनकर अभिरा और अरमान इमाेशनल हो जाते हैं। वहीं विद्या को गुस्सा आने लगता है।