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फिरोजपुर-पट्टी रेल लिंक पर किसानों की ‘1 करोड़ प्रति एकड़’ की मांग, आंदोलन की धमकी

फिरोजपुर फिरोजपुर-पट्टी रेल लिंक प्रोजेक्ट का किसानों ने विरोध करना शुरू कर दिया गया है। जिले के तीन गांवों के किसानों ने चेतावनी दी कि जब तक सरकार जमीन का उचित मुआवजा नहीं देती, तब तक उनके गांव में रेल लाइन बिछाने नहीं दी जाएगी और केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट का धरने लगाकर विरोध किया जाएगा।गांव कुतुबद्दीन वाला, दुला सिंह वाला और कालेके हिटाड़ में 121 एकड़ सात कनाल छह मरले भूमि सरकार द्वारा प्रोजेक्ट के लिए एक्वायर करने की योजना है और इसमें 60 से 65 घर भी प्रभावित होते हैं।  सरकार की ओर से गांव • एक करोड़ प्रति एकड़ मुआवजे की मांग कर रहे किसान • फिरोजपुर-पट्टी रेल लिंक के लिए जमीन का किया जा रहा अधिग्रहण प्रोजेक्ट के लिए होगा 165.69 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण बता दें कि 13 वर्ष से लटकते आ रहे फिरोजपुर-पट्टी रेल लिंक प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार की ओर से नवंबर 2025 में 764 करोड़ की राशि जारी करने की घोषणा की जा चुकी है। प्रोजेक्ट के तहत मल्लांवाला से पट्टी तक 25.72 किलोमीटर का रेल ट्रैक बिछने के बाद फिरोजपुर से अमृतसर की दूरी भी कम होगी। सरकार द्वारा दो जिलों में 165.69 हेक्टेयर भूमि एक्वायर करनी है, जिसमें फिरोजपुर की 70.01 हेक्टेयर और तरनतारन के आठ गांवो की 95.68 हेक्टेयर भूमि शामिल है। कालेके हिटाड़ गांव के किसान मनदीप सिंह ने कहा कि उसके पास छह एकड़ भूमि है। अगर सरकार उनकी भूमि ले लेगी तो घर में काफी दिक्कत आ जाएगी। सरकार जमीन की कीमत कम लगा रही है, जो कि सही नहीं है। 33 से 35 लाख प्रति एकड़ मुआवजा देंगे: एसडीएम जीरा के एसडीएम अरविन्द्रपाल सिंह ने कहा कि किसानों को 33 से 35 लाख प्रति एकड़ के मुताबिक मुआवजा देने का निर्णय हुआ है। प्रशासन की ओर से प्रोजेक्ट पर कार्य किया जा रहा है। रुपये का मुआवजा किसानों को देने के लिए बजट बनाया गया था। भारतीय किसान यूनियन तोतेवाला के प्रांतीय अध्यक्ष सुख गिल ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा भूमि एक्वायर करने के नाम पर किसानों के साथ सीधे तौर पर धक्का किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को प्रति एकड़ एक करोड़ से सवा करोड़ का मुआवजा दिया जाना चाहिए। अगर उचित मुआवजा न मिला तो रेल ट्रैक बनने नहीं दिया जाएगा। रेलवे स्टेशनों पर धरने दिए जाएंगे। किसान मलूक सिंह, बचित्र सिंह, परमजीत व पाला सिंह ने कहा कि जिन किसानों की भूमि एक्वायर की जानी है, उनका बैंकों का कर्ज माफ करने के अलावा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए। दुल्ला सिंह वाला में धुस्सी बांध के इन साइड में 3.80 लाख प्रति एकड़ कलेक्टर रेट 4.98 लाख प्रति एकड़ और धुस्सी बांध के 3.87 लाख प्रति एकड़ रेट निर्धारित किया गया है। तीन वर्ष पहले प्रशासन द्वारा 30 करोड़ 99 लाख।   

रांची: स्नातक शिक्षक नियुक्ति मामले में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की सुनवाई 2 मई को

 रांची  स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्ति से संबंधित मामले में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की सुनवाई दो मई को होगी। दो मई को दोपहर एक बजे पुराने हाई कोर्ट भवन, डोरंडा में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बैठेगी और सुनवाई की जाएगी। फिलहाल इस सुनवाई में केवल अधिवक्ता ही उपस्थित हो सकते हैं। अभ्यर्थियों की व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक नहीं है। प्रार्थी के अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता ने बताया कि फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के चेयरमैन जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की ओर से इसकी जानकारी दी गई है। बता दें कि इस मामले में 257 याचिकाओं पर हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की कोर्ट में सुनवाई चल रही है। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में सेवानिवृत्ति जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का नया चेयरमैन बनाया है। इससे पहले अदालत ने पूर्व में राज्य स्तर पर बने मेरिट लिस्ट की अनियमितता के मामले में इसकी जांच के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाने का निर्देश दिया था। अदालत ने उक्त कमेटी को पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। प्रार्थियों का दावा था कि राज्य स्तर पर बनी मेरिट लिस्ट में काफी त्रुटियां है। जिन्हें निर्धारित कट आफ से कम नंबर मिले हैं उनका चयन कर लिया गया है, जबकि उनसे ज्यादा नंबर पाने वालों का चयन नहीं हुआ है।

जापानी लाइफस्टाइल के 5 हेल्दी राज: लंबी उम्र और फिट बॉडी का आसान फॉर्मूला

हेल्दी और फिट रहने की बात आती है तो जापानी लाइफस्टाइल को दुनिया में सबसे बेहतर माना जाता है. जापान के लोग न सिर्फ लंबी उम्र जीते हैं, बल्कि बढ़ती उम्र में भी एक्टिव और एनर्जेटिक बने रहते हैं. उनकी फिटनेस का राज सिर्फ डाइट या एक्सरसाइज नहीं, बल्कि उनकी रोजाना की आदतों और लाइफस्टाइल में छुपा होता है. अगर आप भी बिना ज्यादा मेहनत के हेल्दी रहना चाहते हैं तो जापानी लोगों की कुछ आसान आदतें अपनाकर अपने जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं. धीरे-धीरे चबाकर खाएं जापानी लोग खाना बहुत आराम से और धीरे-धीरे चबाकर खाते हैं. इससे खाना अच्छे से पचता है और कम खाने में ही पेट भरा हुआ महसूस होता है. यह आदत ओवरईटिंग से बचाती है और वजन कंट्रोल रखने में मदद करती है. खाने में वैरायटी बढ़ाएं जापान में लोग एक बार में ज्यादा मात्रा में खाने के बजाय अलग-अलग चीजें थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाते हैं. इससे शरीर को कई तरह के पोषक तत्व मिलते हैं और खाने में वैरायटी भी बनी रहती है, जबकि ओवरईटिंग नहीं होती. खुद को एक्टिव रखें जापानी लोग अपनी डेली रूटीन में फिजिकल एक्टिविटी को जरूर शामिल करते हैं. वे अक्सर पैदल चलते हैं या साइकिल का इस्तेमाल करते हैं. इससे उनका शरीर एक्टिव रहता है और फिटनेस बनी रहती है. भूख का 80% ही खाएं जापान में 'हारा हाची बू' नाम की परंपरा है, जिसमें लोग अपनी भूख का सिर्फ 80% ही खाते हैं. यह आदत ज्यादा खाने से रोकती है और वजन को बैलेंस रखने में मदद करती है. ग्रीन टी ग्रीन टी जापानी संस्कृति का अहम हिस्सा है. इसमें भरपूर एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो मेटाबॉलिज्म को तेज करते हैं और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं. रेगुलर ग्रीन टी पीने से डाइजेशन बेहतर होता है और वजन कंट्रोल में रहता है. अगर आप भी फिट और हेल्दी रहना चाहते हैं तो इन आसान आदतों को अपनी डेली रूटीन में शामिल कर सकते हैं. छोटी-छोटी ये आदतें आपके लाइफस्टाइल में बड़ा बदलाव ला सकती हैं.

Water Management Initiative: 46 गांवों में ग्रे-वॉटर प्लांट से दूर होगी पानी की किल्लत

बिलासपुर. स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में बिलासपुर जिले की ग्राम पंचायतों में तरल अपशिष्ट (लिक्विड वेस्ट) के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए विकेन्द्रित अपशिष्ट जल शोधन प्रणाली (DEWATS) को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में निकलने वाले गंदे पानी को सीधे नालियों, नदियों एवं तालाबों में जाने से रोका जाएगा तथा उसे उपचारित कर पुनः उपयोग के लायक बनाया जाएगा। यह प्रणाली जल स्रोतों (नदियों व तालाबों) को प्रदूषणमुक्त रखने के साथ-साथ ग्रामीण आबादी को स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराएगी। इस प्रणाली से अपशिष्ट जल के उचित उपचार के साथ ही पर्यावरण व जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। विकेन्द्रित अपशिष्ट जल शोधन प्रणाली पारंपरिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की तुलना में किफायती एवं प्रकृति-आधारित तकनीक पर आधारित है। इसमें रासायनिक प्रक्रिया के बजाय सूक्ष्म जीवों एवं पौधों की सहायता से जल का शोधन किया जाता है। इस तकनीक की विशेषता यह है कि अपशिष्ट जल का उपचार उसी स्थान (ऑन-साइट ट्रीटमेंट) पर किया जाता है, जहां वह उत्पन्न होता है। इस उपचारित जल का उपयोग बागवानी, कृषि कार्य एवं शौचालय फ्लशिंग जैसे कार्यों में किया जा सकता है। इससे भूजल स्तर में सुधार के साथ जल संसाधनों का संरक्षण भी होगा। बिलासपुर जिले में अभी विकेन्द्रित अपशिष्ट जल शोधन प्रणाली की 46 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें से 25 के कार्य पूर्ण हो चुके हैं। शेष 21 कार्य प्रगति पर हैं। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संदीप अग्रवाल ने बताया कि इस तकनीक के माध्यम से न केवल जल की बर्बादी को रोका जा रहा है, बल्कि ओडीएफ प्लस (ODF Plus) लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों के लिए टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल समाधान साबित होगी।

शंभू ब्लास्ट के बाद रेलवे सुरक्षा पर हाई अलर्ट, संवेदनशील इलाकों में बढ़ी पेट्रोलिंग

 चंडीगढ़  पंजाब में रेलवे ट्रैक आतंकियों के निशाने पर है। सोमवार रात पटियाला के शंभू में डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर (डीएफसी) के ट्रैक पर हुए ब्लास्ट ने इस खतरे को और गहरा कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियां इसे एक बड़े पैटर्न के तौर पर देख रही हैं, जिसमें रेलवे नेटवर्क को लगातार निशाना बनाने की कोशिशें सामने आ रही हैं। इससे पहले रेलवे ट्रैक के आसपास सोलर सीसीटीवी कैमरे कैमरे लगाए जाने के मामले सामने आए थे। पांच कैमरे पंजाब में लगे थे। एक पठानकोट व एक कपूरथला में बरामद किया था, लेकिन जालंधर मोगा व पटियाला में लगे तीन कैमरों का पता नहीं। जांच में पता चला था कि इनका इस्तेमाल जासूसी और ट्रैक की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जा रहा था। हाल ही में लखनऊ एटीएस (एटीएस) की ओर से भी एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया गया, जो अलग-अलग इलाकों में रेलवे ट्रैक के आसपास आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम देता था। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां बड़े हमलों की तैयारी का हिस्सा हो सकती हैं। पिछले दो वर्षों के दौरान कई घटनाएं आई सामने पंजाब में पिछले दो वर्षों के दौरान भी कई घटनाएं सामने आई हैं। 23 जनवरी 2026 में सरहिंद के पास डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर (डीएफसी) रेलवे ट्रैक पर धमाका हुआ था, जिसमें करीब 60 फीट पटरी क्षतिग्रस्त हुई थी। वहीं, 2024 और 2025 में कई बार रेलवे ट्रैक पर लोहे की सरिया या अन्य वस्तुएं रखकर ट्रेन को पटरी से उतारने की कोशिशें हुईं थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि रेलवे ट्रैक, खासकर मालगाड़ियों के रूट, देश की सप्लाई चेन की रीढ़ हैं। कोयला, खाद, अनाज और औद्योगिक सामान की ढुलाई इन्हीं रास्तों से होती है। ऐसे में इनको नुकसान पहुंचाने की कोशिश सीधे तौर पर आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है। संवेदनशील इलाकों में पेट्रोलिंग बढ़ी फिलहाल रेलवे, आरपीएफ और राज्य पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में पेट्रोलिंग बढ़ा दी है। निगरानी के लिए तकनीकी सर्विलांस और खुफिया इनपुट पर खास ध्यान दिया जा रहा है। फिर भी ऐसे षड्यंत्रों को समय रहते नाकाम करना बड़ी चुनौती है। पंजाब में रेलवे ट्रैक को उड़ाने की लगातार धमकियां मिल रही थीं। गत 24 अप्रैल को भी पटियाला, बठिंडा, लुधियाना व अमृतसर में ईमेल पर बम से रेलवे ट्रैक उड़ाने की धमकी मिली थी। तीन दिन बाद शंभू में ब्लास्ट की घटना हो गई।  

Electric Vehicle को बढ़ावा: हरियाणा के नए आवासों में चार्जिंग सुविधा होगी जरूरी

चंडीगढ़. भविष्य में हरियाणा के बड़े शहरों में विकसित होने वाले शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के रखरखाव व चार्जिंग की व्यवस्था करने पर विशेष फोकस होगा। राज्य में आवासीय तथा गैर आवासीय क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जर के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करना अनिवार्य किया जाने वाला है। प्रदेश सरकार इसके लिए हरियाणा बिल्डिंग कोड 2017 में बदलाव करेगी। हरियाणा के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट ने एक नोटिस जारी कर आम नागरिकों से दावे तथा आपत्तियां मांगी हैं। प्रस्तावित संशोधनों को सरकार से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। अब इन्हें 30 दिनों के लिए यानी 26 मई तक सार्वजनिक डोमेन में रखा जा रहा है, ताकि संबंधित पक्षों और नागरिकों से इन पर आपत्तियां और सुझाव प्राप्त किए जा सकें। संशोधित नियमों के तहत, सभी नई और मरम्मत की गई गैर-रिहायशी इमारतों जैसे शापिंग कांप्लेक्स, माल, होटल और आफिस स्पेस, जहां कम से कम 10 कारों की पार्किंग की व्यवस्था है, वहां हर तीन पार्किंग स्लाट के लिए कम से कम एक ईवी चार्जिंग स्पाट उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। इमारतों को 100 फीसदी ईवी तैयार बनाया जाए इसके अलावा, ऐसी इमारतों को 100 प्रतिशत ईवी-तैयार बनाया जाना चाहिए, जिसके लिए चार्जिंग प्वाइंट तक जाने वाली तारों के लिए पाइप पहले से ही लगाई गई होगी। इसी तरह रिहायशी कांप्लेक्स, जिनमें सहकारी आवास समितियां, ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट और आरडब्ल्यूए द्वारा प्रबंधित रिहायशी ब्लाक शामिल हैं और जहां 10 या उससे अधिक कारों की पार्किंग की जगह है, उन्हें हर पांच पार्किंग स्लाट के लिए एक ईवी चार्जिंग स्पाट उपलब्ध कराना होगा। उन्हें पूरी तरह से ईवी-तैयार इन्फ्रास्ट्रक्चर भी उपलब्ध कराना होगा। संशोधन में यह स्पष्ट किया गया है कि ईवी चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को फ्लोर एरिया रेश्यो गणना से छूट दी जाएगी। इस फैसले से डेवलपर्स और आवास समितियों को नये नियमों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है, क्योंकि उन्हें अतिरिक्त निर्मित क्षेत्र (बिल्ट-अप-एरिया) से जुड़ी पाबंदियों से मुक्ति मिलेगी। स्पॉट को बेसमेंट और स्टिल्ट फ्लोपर पर भी लगाया जा सके ड्राफ्ट के अनुसार चार्जिंग स्पॉट को बेसमेंट और स्टिल्ट फ्लोर पर भी लगाया जा सकता है, बशर्ते वे निर्धारित अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन करते होंगे। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के निदेशक अमित खत्री ने लोगों और संबंधित पक्षों से ईमेल के माध्यम से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। ये सुझाव और आपत्तियां संशोधनों की औपचारिक अधिसूचना जारी होने से पहले प्राप्त की जाएंगी।

अंग्रेजी शराब ठेकेदार की मनमानी एमआरपी से ज्यादा वसूली करने का आरोप

राजेंद्र ग्राम /छबिलाल  जिले के पुष्पराजगढ़ में अधिकृत अंग्रेजी शराब ठेकेदार पर मनमानी तरीके से शराब बेचने के गंभीर आरोप लगाया जा रहा हैं की अंग्रेजी शराब ठेकेदार के द्वारा बोतल में लिखी एमआरपी से अधिक दाम वसूले जा रहे हैं और लाइसेंस दुकान की बजाय पुष्पराजगढ़ के कई गांव में अंग्रेजी शराब दुकान का संचालन कराकर शराब की बिक्री की जा रही है ग्रामीणों ने बताया कि बोतल पर छपी कीमत से ज्यादा 50 रूपए से 100 रूपए तक अधिक लिए जा रहे हैं विरोध करने पर ठेकेदार के कर्मचारी अभद्रता व्यवहार करते हैं एवं गांव – गांव में शराब पहुंचा कर बिक्री की जाती है जैसे करपा, सरई, लीला टोला, बेनिवारी,व तीर्थ नगरी अमरकंटक जैसे स्थान में शराब पहुंचा कर विक्रय की जाती है।और समय की अवहेलना भी करते हुए रात 10:00 के बाद भी बिक्री जारी रहती है जबकि नियमानुसार 10:00 बजे दुकान बंद हो जानी चाहिए शराब ठेकेदार के लोग शाम होते ही गांव में घुस जाते हैं युवा नशे की लत में पड़े रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है की एमआरपी रेट में ही शराब बिक्री किया जाए नहीं तो शराब दुकान ही बंद किया जाए इस तरीके का आरोप लगाते हुए शासन से उचित निष्पक्ष जांच करते हुए अंग्रेजी शराब संचालन करने की मांग की गई है।

सरपंच और सचिव कर रहे अपने मन की राज ग्रामीणों ने लगाया आरोप

राजेंद्रग्राम/छबिलाल  जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत परसेल कला के वार्ड क्रमांक 6 में इन दिनों काफी अत्याचार करने का आरोप सामने आ रहा है जहां सीसी रोड का काम चल रहा है जहां गुणवत्ता विहीन बताया जा रहा है एवं मजदूरों से काम को ना करा कर मशीन का उपयोग किया जा रहा है जिसमें गरीब मजदूरों को होने वाले नुकसान का भरपाई कौन करेगा सरकार का कहना है की मजदूर मजदूरी करने बाहर न जाकर अपने गांव में खुले कामों में काम कर के जीवन यापन करने का आश्वासन दिया जा रहा है जहां सरपंच और सचिव की मनमानी के कारण मजदूरों को काम से वंचित किया जा रहा है। जहां सरपंच धर्मी भाई मरावी के द्वारा मजदूरों को मजदूरी करने विदेशों में जाने के लिए मजबूर किया जाता है । ग्रामीणों का कहना है की सरपंच धर्मी बाई  मरावी व सचिव नेम कुमार सोनवानी के द्वारा किसी भी काम को पूरा नहीं किया जाता है अगर सीसी रोड बनाया जा रहा है तो आधा अधूरा छोड़ दिया जा रहा है उसे पूरा नहीं किया जाता है ऐसे कई मामले जहां इन दिनो ग्राम पंचायत परसेल कला मे बताया जा रहा है ग्रामीणों का यह भी आरोप है की सीसी रोड में जहां उच्च क्वालिटी की सीमेंट लगानी चाहिए वहां हल्की से हल्की सीमेंट से सीसी सड़क का निर्माण कराया जा रहा है।उस सीमेंट नाम खजुराहो बताया जा रहा है जहां उच्च क्वालिटी का सीमेंट से सीसी रोड बनाना था वहां तो खजुराहो जैसे सीमेंट का इस्तेमाल किया जा रहा है जिससे गरीब से गरीब भी इस सीमेंट का इस्तेमाल काम करते हैं। ऐसे में क्या सीसी सड़क अपनी उम्र तक टिक पाएगी ग्रामीणों का कहना है की सरकार को पैसा का दुरुपयोग ना किया जाए उपयोग में लाया जाए और अधूरी कामों को पूरी किया जाए। और ग्रामीणों के द्वारा यह भी बताया गया की ग्राम सभा अध्यक्ष अनूप सिंह मरावी को गाली गलौज कर सरपंच धर्मी बाई के द्वारा अभद्रता व्यवहार किया गया है। रोजगार सहायक सचिव करते हैं ठेकेदारी सरकारी मटेरियल को लगाते हैं अपने निजी कार्य में।   रोजगार सहायक सचिव संतोष सिंह कुशराम के द्वारा ग्राम पंचायत पर सेल कला में स्वयं की ठेकेदारी चलाते हुए कार्यो को किया जा रहा है जहां पंचायत के पैसों से मटेरियल मंगाया तो जाता है लेकिन उसे अपने निजी घर में गिरवा कर अपने स्वयं के कार्य में भी लगाया जाता है लेकिन इनको देखने वाले कोई अधिकारी कर्मचारी नहीं है बल्कि ग्रामीण अगर बोलते हैं तो उनको अनदेखा करते हुए अपना काम निकाल लेते हैं इस तरह का आरोप लगाया जा रहा है। रोजगार सहायक सचिव संतोष सिंह कुशराम के ऊपर लगाया जा रहा है जहां ग्रामीणों ने सरकार के पैसों का उचित कार्य में लगाने की मांग करते हुए निष्पक्ष जांच करने की मांग की गई है।

निगरानी विभाग का शिकंजा: सिकंदरा में कार्यपालक पदाधिकारी समेत दो गिरफ्तार

जमुई जमुई जिले में मंगलवार को निगरानी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। सिकंदरा नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी संतोष कुमार को 50 हजार रुपये घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। इस दौरान उनके साथ स्वच्छता प्रहरी सोनू चौधरी को भी टीम ने दबोच लिया। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। शिकायतों के बाद बिछाया गया जाल जानकारी के अनुसार, निगरानी विभाग को लंबे समय से दोनों के खिलाफ अवैध वसूली की शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों की सत्यता जांचने के लिए विभाग ने गुप्त रूप से जाल बिछाया। छापेमारी में रंगे हाथ पकड़े गए आरोपी योजना के तहत मंगलवार करीब 3 बजे टीम ने छापेमारी की। इसी दौरान दोनों आरोपी कथित रूप से 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए। लेन-देन की पुष्टि होते ही टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों को गिरफ्तार कर लिया और मौके से नकद राशि भी बरामद की। पुलिस का बयान और आगे की कार्रवाई सिकंदरा थानाध्यक्ष विकास कुमार ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और आगे की कानूनी प्रक्रिया निगरानी विभाग द्वारा की जा रही है। उन्होंने कहा कि मामले में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में चर्चा का माहौल है और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। वहीं, निगरानी विभाग की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त कदम के रूप में देखा जा रहा है।  

साइबर ठगी पर बड़ा वार: बिहार पुलिस ने चिन्हित किए हजारों म्यूल अकाउंट्स

पटना बिहार पुलिस की साइबर क्राइम एंड सिक्योरिटी यूनिट ने बढ़ते साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए फिर से बड़ा अभियान छेड़ दिया है। ‘साइबर प्रहार 3.0’ के तहत राज्यभर में व्यापक कार्रवाई करते हुए 5036 म्यूल अकाउंट्स की पहचान की गई है। इस कार्रवाई के दायरे में 22 बैंक शाखाओं के अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है, जिसकी गहन जांच की जा रही है। साइबर अपराध इकाई द्वारा कई संदिग्ध बैंक खातों को चिन्हित कर लिया गया है, जिनका उपयोग ठगी के पैसों के लेन-देन में किया जा रहा था। लालच देकर बैंक खाते का इस्तेमाल करते थे साइबर क्राइम एंड सिक्योरिटी यूनिट की जांच में पता चला कि साइबर फ्रॉड लोगों को पैसों की लालच देकर उनके बैंक खाते का इस्तेमाल करते थे। पासबुक, सिम कार्ड और एटीएम अपने पास रख लेते थे। इन खातों में ठगी की रकम मंगाई जाती थी। बिहार पुलिस का कहना है कि इन खातों के जरिए बड़े स्तर पर साइबर ठगी के नेटवर्क को संचालित किया जा रहा था। कई संदिग्धों को नोटिस जारी किए गए अभियान के तहत अब तक 72 करोड़ रुपये से जुड़े साइबर फ्रॉड के मामलों में कानूनी शिकंजा कसा गया है। कई संदिग्धों को नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि कुछ की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगी और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। जांच के दौरान बैंकिंग सिस्टम में संभावित मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है। इसी को देखते हुए संबंधित बैंक अधिकारियों की भूमिका की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। क्या होते हैं म्यूल अकाउंट्स? बोलचाल की भाषा में म्यूल का मतलब 'खच्चर' होता है, जिसका इस्तेमाल सामान ढोने के लिए किया जाता है। कुछ इसी तरह का काम म्यूल अकाउंट्स का भी होता है। म्यूल अकाउंट्स दरअसल ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल फाइनेंशियल फ्राड में किया जाता है। यह अकाउंट्स या तो फर्जी नाम-पते पर रजिस्टर्ड होते हैं या इन्हें कोई और यूज कर रहा होता है। इस तरह के अकाउंट्स का इस्तेमाल फाइनेंशियल फ्रॉड में पैसे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। चूकिं म्यूल अकाउंट में दी गई जानकारी सही नहीं होती, इन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।