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पंजाब की हार, RR ने यशस्वी और फरेरा की पारी से 6 विकेट से रौंदा

मुल्लापुर IPL 2026 के 40वें मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स ने पंजाब किंग्स को उसके घर में घुसकर 6 विकटों से रौंद दिया है और अब तक अजेय रही टीम के घमंड को मिट्टी में मिला दिया है। पहले बल्लेबाजी करते हुए पंजाब की टीम ने 223 रनों का लक्ष्य दिया था, जिसे RR ने 19.4 ओवर में हासिल कर लिया। पंजाब किंग्स ने दिया 223 रनों का विशाल लक्ष्य मुल्लापुर में खेले जा रहे इस मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करने के मौके को पंजाब किंग्स ने खूब भुनाया। सलामी बल्लेबाज प्रियांश आर्या 11 गेंदों में 29 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर आउट हुए। इसके बाद प्रभसिमरन सिंह ने 35 गेंदों में अर्धशतक जड़ते हुए 44 गेंदों में 59 रन बनाए। कूपर कोनोली ने 14 गेंदों में 30 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली जिससे रन रेट मेंटेन रहा। आज के मैच में कप्तान श्रेयस अय्यर रन बनाने के लिए संघर्ष करते नजर आए और 27 गेंदों में 30 रन बनाकर आउट हुए। मार्कस स्टोइनिस ने शानदारि फिनिशिंग टच देते हुए बृजेश शर्मा के आखिरी ओवर में 24 रन जड़े। उन्होंने 2024 के बाद अपनी पहली फिफ्टी सिर्फ 20 गेंदों में बनाई। स्टोइनिस 4 चौके और 6 छक्कों की मदद से 22 गेंदों में 62 रन बनाकर नाबाद पवेलियन लौटे और टीम के स्कोर को 222 रनों पर पहुंचा दिया। राजस्थान के गेंदबाजों का ऐसा रहा हाल राजस्थान की ओर से यशराज पुंजा को 2 और नांद्र बर्गर और आर्चर को एक-एक विकेट मिले। सभी गेंदबाज महंगे साबित हुए और अपने चार ओवर के स्पेल में जडेजा को छोड़कर सभी ने 40 से ऊपर रन दिए। जडेजा ने चार ओवर में 32 रन खर्चे। राजस्थान रॉयल्स ने फरेरा, सूर्यवंशी और जायसवाल की पारी से हासिल की जीत 223 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए राजस्थान रॉयल्स की टीम ने हमेशा की तरह विस्फोटक शुरुआत की और सिर्फ पहली 19 गेंदों में ही 50 रन पूरे कर लिए। टीम का स्कोर जब 51 रन था तब वैभव सूर्यवंशी 16 गेंदों में 43 रन बनाकर पवेलियन लौटे। इसके बाद यशस्वी जायसवाल और धुव्र जुरैल ने पारी को संभाला। जायसवाल ने 27 गेंदों में 51 रनों की पारी खेली, जबकि ध्रुव जुरैल ने 20 गेंदों में 16 रन बाए। इन बल्लेबाजों के आउट होने के बाद रियान पराग और फरेरा ने पारी को संभाला। हालांकि, 16 गेंदों में 29 रन बनाकर फरेरा यूजी चहल की गेंद पर चलते बने। फरेरा और इंपैक्ट प्लेयर के रूप में आए शुभम दुबे ने राजस्थान रॉयल्स की जीत को सुनिश्चित किया। डोवानन फरेरा ने 26 गेंदों में 52 रन बनाए जबकि शुभम दुबे ने 12 गेंदों में 31 रनों की इंपैक्टफुल पारी खेली और 19.2 ओवर में ही 223 के लक्ष्य को आसानी से 4 विकेट खोकर हासिल कर लिया। महंगे साबित हुए पंजाब किंग्स के गेंदबाज पंजाब किंग्स की ओर से हरप्रीत ब्रार ( 4 ओवर 25 रन) और यूजी चहल ( चार ओवर 36 रन तीन विकेट) किफायती रहे बाकी के सभी गेंदबाज काफी महंगे साबित हुए। अर्शदीप सिंह ने वैभव सूर्यवंशी के रूप में एक विकेट जरूर लिया लेकिन उन्होंने 4 ओवर में 68 रन खर्च कर दिए। फर्ग्यूसन ने 4 ओवर में 57 रन लुटाए जबकि, 3.2 ओवर में मार्को यान्सेन ने 41 रन खर्चे। राजस्थान रॉयल्स ने पंजाब किंग्स को 4 गेंद शेष रहते 6 विकेट से हराया। RR- 228/4 (19.2) PBKS- 222/4 (20 ओवर) पंजाब किंग्स (प्लेइंग इलेवन): प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर), प्रियांश आर्य, श्रेयस अय्यर (कप्तान), कूपर कोनोली, सूर्यांश शेडगे, नेहल वढेरा, मार्कस स्टोइनिस, मार्को जानसन, लॉकी फर्ग्यूसन, अर्शदीप सिंह, युजवेंद्र चहल राजस्थान रॉयल्स (प्लेइंग इलेवन): वैभव सूर्यवंशी, यशस्वी जयसवाल, ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), रियान पराग (कप्तान), डोनोवन फरेरा, रवींद्र जड़ेजा, दासुन शनाका, जोफ्रा आर्चर, नंद्रे बर्गर, ब्रिजेश शर्मा, यश राज पुंजा PBKS VS RR मैच के बाद पॉइंट्स टेबल पर इन टीमों की स्थिति इस जीत के साथ राजस्थान रॉयल्स की टीम 9 मैचों में 6 जीत और 3 हार के साथ 12 अंकों के साथ पॉइंट्स टेबल पर तीसरे पायदान पर पहुंच गई है, जबिक पंजाब किंग्स 8 मैचों में 6 जीत, 1 हार और 1 रद्द मैच की वजह से 13 अंकों के साथ पॉइंट्स टेबल पर टॉप पर बनी हुई है।

पारंपरिक नजराना पर कोर्ट सख्त, अवैध वसूली को बताया अपराध

प्रयागराज इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ट्रांसजेंडरों (किन्नरों) के पारंपरिक बधाई उपहारों को लेकर दिए एक अहम आदेश में कहा है कि उनके पास ऐसे उपहार या पारंपरिक भेंट (नजराना) लेने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। रेखा देवी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के केस में 15 अप्रैल को दिए इस महत्वपूर्ण फैसले में, न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने किन्नर रेखा देवी द्वारा अन्य किन्नरों द्वारा कथित रूप से अपने ‘क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र’ के अतिक्रमण के खिलाफ सुरक्षा की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस केस में याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि इस प्रकार की वसूली कई सालों से हो रही थी। इसे प्रथागत अधिकार का दर्जा प्राप्त था। हालांकि मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि इस तरह की भेंट लेने का कोई कानूनी आधार नहीं है। न्यायाधीश ने कहा, ‘कानून के अनुसार ही किसी व्यक्ति से धन, कर, शुल्क या उपकर वसूले जा सकते हैं। इस तरह की अनुमति देने वाला कोई वैध या कानूनी आधार नहीं है।’ कोर्ट ने कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ता द्वारा मांगे गए ऐसे अधिकार कानून द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं हैं। भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत न्यायालय अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए, कानून के समर्थन के बिना याचिकाकर्ता के कृत्यों को वैध नहीं ठहरा सकता।’ इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फैसले देते हुए यह भी कहा कि किसी नागरिक को केवल उतनी ही कर, उपकर या शुल्क का भुगतान करने का निर्देश दिया जा सकता है, जिसे कानून के अनुसार उससे वैध रूप से वसूला जा सकता है। कोर्ट ने याचिका में की गई प्रार्थना को अस्वीकार कर दिया और कहा कि इस प्रकार धन की वसूली को किसी भी तरह से वैध नहीं ठहराया जा सकता। अवैध वसूली है अपराध हाई कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता के प्रति किसी प्रकार की नरमी बरती जाती है, तो संभव है कि कई अन्य व्यक्ति या गिरोह सक्रिय हों और व्यक्तियों से जबरन अवैध वसूली कर रहे हों। इस प्रकार की अवैध वसूली को देश में कानून द्वारा कभी भी मान्यता नहीं दी गई है। यह भारतीय न्याय संहिता के तहत एक अपराध है। एक-दूसरे के क्षेत्र के अतिक्रमण की हुई थी शिकायत इस मामले में अधिवक्ता संगीता वर्मा ने कोर्ट में याचिकाकर्ता का पक्ष रखा। कोर्ट को यह बताया गया था कि याचिकाकर्ता गोंडा जिले के किन्नर समुदाय से संबंध रखता है। वह लंबे समय से एक विशेष क्षेत्र में बकाया वसूलने के अपने पारंपरिक अधिकार का प्रयोग करता आ रहा है। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में बताया कि गोंडा जिले में इसी तरह के किन्नर समुदाय के कुछ और लोग भी रहते हैं जो बधाई का काम करते हैं। वे एक-दूसरे के क्षेत्राधिकार का अतिक्रमण कर रहे हैं, जिसके चलते समुदाय के सदस्यों के बीच शत्रुता और हिंसा पैदा हो रही है। हिंसा के भय से मांगी थी सुरक्षा इस मामले में याचिकाकर्ता ने हिंसा के भय के बिना बधाई का काम जारी रखने को अपना मौलिक अधिकारों बताते हुए उसकी रक्षा के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत संरक्षण का दावा किया था। याचिका में बधाई के लिए क्षेत्रों के सीमांकन का निर्देश देने की भी मांग की गई थी। नहीं किया जा सकता इस प्रथा का संरक्षण इस याचिका पर सुनवाई के बाद दिए फैसले में हाई कोर्ट ने कहा कि चूंकि बधाई वसूलने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है, इसलिए इस प्रथा का संरक्षण नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने ट्रांसजेंडर संरक्षण कानून में हाल ही में हुए परिवर्तनों पर भी ध्यान दिया। कोर्ट ने कहा- ‘हमने पाया है कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के अनुसार भी ऐसे किसी अधिकार के संरक्षण की मांग नहीं की गई है, हालांकि उक्त अधिनियम में ट्रांसजेंडर व्यक्ति को अपना लिंग निर्धारित करने का अधिकार दिया गया है। भारत की संसद में 2026 का एक नया विधेयक विचाराधीन है, जो किसी व्यक्ति के लिंग निर्धारण के संबंध में 2019 के अधिनियम से काफी भिन्न है।’

​आत्मविश्वास से बदल रही जिंदगी: पुनर्वास केंद्र में हुनर सीख रहे मुख्यधारा में लौटे 40 पूर्व नक्सली

​रायपुर नारायणपुर में आत्मसमर्पित नक्सलियों की नई पारी छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में हिंसा और आतंक का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सली अब 'नवनिर्माण' की राह पर निकल पड़े हैं। जिले के लाइवलीहुड कॉलेज स्थित पुनर्वास केंद्र में इन लोगों को केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन जीने का आधार भी मिल रहा है। कभी बंदूक थामने वाले इन हाथों ने अब खेतों की खुशहाली के लिए ट्रैक्टर का स्टीयरिंग थामना शुरू कर दिया है। ​लोकतंत्र की मुख्यधारा से जुड़ाव प्रशासनिक पहल के तहत पुनर्वासितों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। इसी कड़ी में हाल ही में 8 पुनर्वासितों को वोटर आईडी कार्ड वितरित किए गए, जिससे वे अब लोकतंत्र का हिस्सा बन गए हैं। इसके अतिरिक्त, 40 लोगों के फॉर्म-6 भरवाकर उन्हें मतदाता सूची से जोड़ने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। यह कदम उन्हें केवल पहचान ही नहीं, बल्कि समाज में बराबरी का हक भी दिला रहा है। ​कलेक्टर की पहल पर शुरू हुआ प्रशिक्षण पुनर्वास केंद्र के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर के समक्ष 40 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने ट्रैक्टर चलाने और उसकी मरम्मत सीखने की इच्छा जताई। कलेक्टर ने इस सकारात्मक पहल को तुरंत मंजूरी दी और सोमवार से ही प्रशिक्षण कार्यक्रम का गणेश कर दिया।​विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की देखरेख में ये सभी लोग अब ट्रैक्टर की तकनीकी बारीकियों और रख-रखाव का प्रशिक्षण ले रहे हैं। गौरतलब है कि इनमें से कई ऐसे हैं जिन्होंने पूर्व में साइकिल तक नहीं चलाई थी, लेकिन आज वे पूरी गंभीरता के साथ आधुनिक कृषि यंत्रों का कौशल सीख रहे हैं। ​आत्मनिर्भरता से उज्ज्वल भविष्य की ओर यह प्रशिक्षण केवल कौशल विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके जीवन को नई दिशा देने वाला माध्यम है। खेती-किसानी और परिवहन के क्षेत्र में इस कौशल से उन्हें न केवल रोजगार मिलेगा, बल्कि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी हो सकेंगे। ​अतीत की अस्थिरता और डर के साये से निकलकर अब इन लोगों के चेहरों पर आत्मविश्वास और भविष्य के प्रति स्पष्ट उम्मीदें देखी जा सकती हैं। नारायणपुर का यह केंद्र आज केवल एक पुनर्वास स्थल नहीं, बल्कि विश्वास और बदलाव का एक आदर्श उदाहरण बनकर उभरा है। यह साबित करता है कि सही अवसर और सहयोग मिले, तो भटका हुआ हर व्यक्ति समाज की प्रगति में अपना बहुमूल्य योगदान दे सकता है।

Honda City का नया फेसलिफ्ट मॉडल और नई SUV भारत में होगी लॉन्च, तारीख जानें

मुंबई  कार निर्माता कंपनी Honda Cars India आगामी 22 मई 2026 को अपनी फेसलिफ़्टेड Honda City और एकदम नई Honda ZR-V SUV को लॉन्च करने वाली है. जहां Honda City को अपनी मौजूदा पांचवीं जेनरेशन में दूसरा फेसलिफ़्ट मिलेगा, वहीं Honda ZR-V की बात करें तो इसके साथ भारत में एक नई नेमप्लेट की एंट्री होगी. खास बात यह है कि इस कार को कम्प्लीटली बिल्ट यूनिट (CBU) के तौर पर लाया जाएगा और उम्मीद है कि यह Honda की लाइनअप में ज़्यादा प्रीमियम सेगमेंट में अपनी जगह बनाएगी।  नई Honda ZR-V SUV का डिजाइन दुनिया भर में, Honda ZR-V को Honda HR-V और Honda CR-V के बीच रखा गया है. डिजाइन की बात करें तो इसमें पतले LED हेडलैंप दिए गए हैं, जिनके साथ एक बड़ी ग्लॉस ब्लैक ग्रिल दी गई है. वहीं पीछे की तरफ, इसमें हॉरिजॉन्टल तरीके से लगे टेल-लैंप दिए गए हैं, जो टेलगेट में ही इंटीग्रेटेड हैं।  आकार की बात करें तो, Honda ZR-V की लंबाई 4,568 mm, चौड़ाई 1,840 mm और ऊंचाई 1,620 mm रखी गई है, और इसका व्हीलबेस 2,657 mm मिलता है।  नई Honda ZR-V SUV का इंटीरियर इसके इंटीरियर की बात करें तो, इसमें Apple CarPlay और Android Auto के साथ एक 9-इंच की फ्री-स्टैंडिंग टचस्क्रीन और एक डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर मिलता है. इसके अलावा, कार में हेड-अप डिस्प्ले, वायरलेस चार्जिंग और पावर्ड टेलगेट जैसी अन्य दिलचस्प फीचर भी इसमें शामिल हैं. दूसरी पंक्ति की सीटें लगी होने पर, इसकी बूट कैपेसिटी 370 लीटर है।  सेफ्टी फीचर्स की बात करें तो Honda ZR-V में Honda का Sensing suite दिया गया है, जिसमें कोलिजन मिटिगेशन ब्रेकिंग, लेन कीप असिस्ट, अडैप्टिव क्रूज़ कंट्रोल और ऐसे ही कई फ़ीचर्स शामिल हैं।  नई Honda ZR-V SUV का पावरट्रेन Honda ZR-V को दुनिया भर में Honda के e:HEV हाइब्रिड सिस्टम के साथ पेश किया गया है. इसमें 2.0-लीटर पेट्रोल इंजन के साथ दो इलेक्ट्रिक मोटर लगाई गई हैं, जो मिलकर 181 bhp की पावर और 315 Nm का टॉर्क जेनरेट करते हैं. यह सिस्टम इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और इंजन ड्राइव मोड के बीच स्विच कर सकता है।  Honda City फेसलिफ्ट वहीं, Honda City की बात करें तो यह इसके मौजूदा पांचवीं जनरेशन के मॉडल का दूसरा अपडेट होगा, जिसे पहली बार 2023 में फ़ेसलिफ़्ट मिला था. इस बार, बाहरी हिस्से में होने वाले बदलावों के सीमित रहने की उम्मीद है. ये बदलाव शायद हेडलाइट्स, टेल-लैंप्स, बंपर्स और अलॉय व्हील्स जैसे हिस्सों में किए गए छोटे-मोटे सुधारों तक ही सीमित रहेंगे।  ज़्यादा ध्यान इसके अंदरूनी हिस्से पर दिया जा सकता है. इसमें ड्राइवर की सीट को पावर से एडजस्ट करने का फीचर, आगे की सीटों में वेंटिलेशन, एक बड़ा इंफोटेनमेंट सिस्टम और पूरी तरह से डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर जैसे फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं।  इसके अलावा, पावरट्रेन की बात करें तो यहां पर कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा. Honda City फेसलिफ्ट में मौजूदा 1.5-लीटर पेट्रोल इंजन ही बरकरार रखा जाएगा, जो 6-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन और CVT ऑटोमैटिक, दोनों विकल्पों के साथ उपलब्ध है।  वहीं कीमत पर नजर डालें तो, मौजूदा मॉडल की कीमतें 12 लाख रुपये से 16.07 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) के बीच रखी गई हैं, जबकि इसके हाइब्रिड वर्जन की कीमत 20 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है. ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि फेसलिफ्ट की कीमत इससे थोड़ी ज़्यादा होगी। 

सरकार की नई योजना: डीजल में अल्कोहल और कमर्शियल LPG में DME मिलाने की तैयारी

नई दिल्ली पश्चिम एशिया तनाव के बीच ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने ब्लेंडेड डीजल और कमर्शियल LPG की शुरुआत की दिशा में अहम कदम उठाए हैं। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) इन ईंधनों के लिए गुणवत्ता मानकों को अंतिम रूप देने में जुटा है। डीजल में 10% मिलेगा आइसोब्यूटाइल अल्कोहल BIS उन मानकों को अंतिम रूप दे रहा है, जिनके तहत डीजल में 10% आइसोब्यूटाइल अल्कोहल (IBA) मिलाया जाएगा। IBA एक ज्वलनशील लिक्विड है, जो आमतौर पर अनाजों से बनता है। रिफाइनरियों और ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्रीज से मिले सुझावों के आधार पर ये मानक तैयार किए जा रहे हैं। 15 जून 2026 तक यह मानक जारी होने की उम्मीद है। BIS की टीम स्अेक होल्डर्स के साथ लगातार बैठकें कर रही है। आयातित क्रूड पर निर्भरता घटेगी और किसानों व ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया बाजार मिल सकता है। कमर्शियल LPG में मिलाया जाएगा DME सरकार ने कमर्शियल उपयोग के लिए DME (डाइमिथाइल ईथर) मिले LPG के मानकों को भी अंतिम रूप दे दिया है। DME प्राकृतिक गैस, कोयला और बायोमास से बनाया जा सकता है। इसके नोटिफिकेशन की संभावित तिथि 15 मई 2026 है। इस दिन संशोधित मानक जारी करने की संभावना है। घरेलू LPG सिलेंडरों में अभी मिश्रण नहीं किया जाएगा। यह केवल होटल, रेस्टोरेंट, उद्योगों जैसे कमर्शियल यूजर के लिए होगा। अधिकारियों के अनुसार, DME मिश्रण घरेलू खाना पकाने के लिए फिलहाल उपयुक्त नहीं है। ब्लेंडेड डीजल के लिए जल्द आएगा ड्राफ्ट ब्लेंडेड डीजल के मसौदा मानक (Draft Standard) को भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) के डॉ. भारत नेवलकर की अगुवाई वाले वर्किंग ग्रुप ने तैयार किया है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने फ्यूल कैरेक्टराइजेशन स्टडी किए, जिसके बाद और सैंपल टेस्ट किए गए। अंतिम अधिसूचना से पहले मानकों का ड्राफ्ट सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी किया जाएगा। बता दें ऑटोमोटिव को छोड़कर घरेलू, कमर्शियल, इंडस्ट्रियल इस्तेमाल के लिए भारत के पास पहले से LPG मिश्रण के लिए एक मानक मौजूद है, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया था। अब सरकार ने इसे केवल कमर्शियल इस्तेमाल के लिए प्राथमिकता देते हुए संशोधन का फैसला किया है। पश्चिम एशिया संकट का एशियाई देशों पर असर 28 अप्रैल 2026 तक होर्मुज स्ट्रेट पर कोई बड़ी बातचीत नहीं हुई है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से एशियाई देशों का तेल-गैस आयात ठप है। भारत, चीन, जापान रूस-वेनेजुएला-अफ्रीका से नए सौदे कर रहे हैं। एशियाई देश अपने भंडार पर तीन-चार महीने चल सकते हैं, उसके बाद स्थिति गंभीर हो जाएगी। ऐसे में सरकारें ऊर्जा संकट से निपटने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रहीं हैं। भारत की यह तैयारी भी इसी संकट से निपटने के लिए हो रही है।

एमपी में ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट में सुनवाई तेज, पक्ष और विपक्ष की याचिकाएं अलग करने का आदेश

जबलपुर  मध्य प्रदेश में  27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण किए जाने से संबंधित याचिकाओं पर सोमवार से तीन दिनों तक लगातार सुनवाई प्रारंभ हुई। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव कुमार सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने ओबीसी आरक्षण के पक्ष तथा विपक्ष में दायर याचिकाओं को अलग-अलग करने के निर्देश जारी किए हैं। याचिकाओं पर मंगलवार को भी सुनवाई जारी है। गौरतलब है कि प्रदेश में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने के पक्ष तथा विपक्ष में हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं। आरक्षण के खिलाफ दायर याचिका में तर्क दिया गया था कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इंदिरा साहनी तथा मराठा आरक्षण के संबंध में दायर याचिकाओं में स्पष्ट कहा गया है कि आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। कुछ याचिकाओं में फॉर्मूला 87:13 को चुनौती देते हुए 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर आपत्ति की गई थी। पक्ष में दायर की गई याचिकाओं में आबादी के अनुपात में आरक्षण की मांग की गई थी। कोर्ट ने तीन दिनों तक नियमित सुनवाई के निर्देश जारी किए थे हाईकोर्ट ने कुछ याचिकाओं की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने पर रोक लगा दी थी। जिसके बाद प्रदेश सरकार सहित अन्य पक्षकारों ने सर्वोच्च न्यायालय में इसी मुद्दे पर एसएलपी दायर की थी। सर्वोच्च न्यायालय ने सभी एसएलपी को सुनवाई के लिए वापस हाईकोर्ट भेज दिया था। हाईकोर्ट ने 27 अप्रैल से लगातार तीन दिनों तक नियमित सुनवाई के निर्देश जारी किए थे। वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने युगलपीठ को बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने तीन माह में संबंधित याचिकाओं के निराकरण के निर्देश जारी किए हैं। युगलपीठ को याचिका की सुनवाई के दौरान जानकारी दी गई कि ओबीसी आरक्षण के विपक्ष में 70 तथा पक्ष में 30 याचिकाएं दायर की गई हैं। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद तर्क प्रस्तुत करने के लिए पक्ष व विपक्ष में दायर याचिकाओं को अलग-अलग करने के आदेश जारी किए हैं।

होशियारपुर में सरपंच का अनोखा कदम, रेलवे ने नहीं दिया गेटमैन तो खुद दिखाते हैं ट्रेन को हरी झंडी

होशियारपुर  गढ़शंकर के गांव बसियाला के सरपंच गुरदेव सिंह बिना गार्ड वाले रेलवे क्रॉसिंग पर एक अनौपचारिक गेटमैन की भूमिका निभा रहे हैं। सरपंच गुरदेव सिंह खुद मोर्चा संभालते हुए फाटक खोलते और बंद करते हैं। रेलवे विभाग ने अब तक फाटक पर कोई कर्मचारी तैनात नहीं किया है, जिसके कारण सरपंच को यह जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है। इस स्थिति के चलते गांववासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। सरपंच गुरदेव सिंह ने कहा कि मुझे डर है कि कभी भी किसी बड़े हादसे का सामना करना पड़ सकता है। रेलवे फाटक पर कर्मचारियों की तैनाती न होने के कारण मुझे खुद फाटक खोलने और बंद करने का काम करना पड़ता है। हमने कई बार अधिकारियों से इस मामले में मदद मांगी है, लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकला। हमें एक रास्ता यहां से रेलवे ने दिया है जो नवांशहर के गांव मुबारिकपुर में निकलता है। जबकि हमारे गांव बसियाला व रसूलपुर गढ़शंकर में पड़ते है। इसके अलावा यह रास्ता दोपहर और शाम के समय महिलाओं के अकेले आने जाने के लिए तो खतरनाक है। गन्ने की ट्रॉलियां भी इस रास्ते से नहीं निकल सकती। गांव वासियों के फाटक पर पहले एक व्यक्ति दस हजार सैलरी पर रखा था। वह भी काम छोड़ गया। उसके बाद से मैं खुद ही फाटक खोलने बंद करने का काम करता हूं।  ग्रामीणों ने चंदा इकठ्ठा कर लगवाया फाटक फाटक नहीं होने पर ग्रामीणों ने खुद चंदा इकट्ठा कर फाटक लगवाया, ताकि आने-जाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. इसके बावजूद कई बार रेलवे अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से यहां कर्मचारी तैनात करने की मांग की गई और इसके लिए ज्ञापन भी दिए गए, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. कुछ समय के लिए ग्रामीणों ने एक व्यक्ति को मासिक वेतन पर रखा भी, लेकिन कुछ ही समय बाद वह काम छोड़कर चला गया।  सरपंच में खुद संभाली जिम्मेदारी इसके बाद सरपंच गुरदेव सिंह ने खुद यह जिम्मेदारी संभाल ली. वह दिन में दो बार, जब ट्रेन आने का समय होता है. अपनी दुकान छोड़कर फाटक पर पहुंचते हैं. पहले वह मुबारकपुर के रेलवे स्टाफ से फोन पर ट्रेन की जानकारी लेते हैं, फिर समय पर फाटक बंद कर देते हैं और हाथ में हरी झंडी लेकर ट्रेन को सुरक्षित गुजरने का संकेत देते हैं।  न हो कोई हादसा इसलिए खुद ली जिम्मेदारी गुरदेव सिंह का कहना है कि उन्हें हमेशा इस बात का डर रहता है कि कहीं लापरवाही के कारण कोई बड़ा हादसा न हो जाए, इसलिए उन्होंने इसे अपनी नैतिक जिम्मेदारी मान लिया है. गांव के लोग भी उनके इस प्रयास की सराहना कर रहे हैं।  गांववासियों का कहना है कि यह रास्ता महिलाओं और बच्चों के लिए भी खतरनाक हो सकता है, खासकर जब वे अकेले इस रास्ते से गुजरती हैं। गांववासियों ने बार-बार विभिन्न नेताओं और अधिकारियों को ज्ञापन देकर रेलवे से इस फाटक पर कर्मचारी तैनात करने की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पहले रेलवे ने इस रास्ते को बंद कर दिया था, लेकिन गांववासियों के संघर्ष के बाद इसे फिर से खोला गया। हालांकि, फाटक पर कर्मचारियों की तैनाती अभी तक नहीं की गई है। पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना ने हाल ही में केंद्रीय राज्य रेलवे मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू से मिलकर इस समस्या का समाधान करने की अपील की थी। बिट्टू ने आश्वासन दिया था कि जल्द ही इस मामले में कार्रवाई की जाएगी और एक टीम भेजकर कर्मचारी तैनात किया जाएगा। गांववासियों की मांग है कि रेलवे विभाग शीघ्र इस समस्या का समाधान करें और फाटक पर सुरक्षा के लिए कर्मचारी तैनात करें, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।

CBSE स्कूलों में नया बदलाव, विद्यार्थियों के लिए लिया गया बड़ा फैसला

लुधियाना   सैंट्रल बोर्ड ऑफ सैकेंडरी एजुकेशन (सी.बी.एस.ई.) ने विद्यार्थियों की पढ़ाई की क्वालिटी और सुधारों के उद्देश्य से बड़े बदलाव किए हैं। स्कूलों के पारंपरिक क्लासरूम, जो अब तक केवल चार दीवारी और ब्लैक बोर्ड तक सीमित थे, अब स्किल लैब के रूप में नजर आएंगे। सी.बी.एस.ई. ने सत्र 2026-27 के लिए यह बड़े बदलाव किए हैं जिससे विद्यार्थी किताबी दुनिया से निकलकर जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकेंगे। नए बदलावों के तहत अब रटने की आदत को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है और पढ़ाई को पूरी तरह प्रैक्टिकल नॉलेज पर फोकस किया जाएगा। बोर्ड ने कक्षा तीसरी से ही आर्टिफिशियल इंटैलीजैंस (एआई) और कोडिंग को अनिवार्य कर दिया है। विद्यार्थी अब इंटरडिसीप्लिनरी प्रोजैक्ट्स के माध्यम से सीखेंगे कि अलग-अलग विषय एक-दूसरे से कैसे जुड़े हैं। उदाहरण के तौर पर स्मार्ट सिटी जैसे प्रोजैक्ट पर काम करते समय वे बजट कैलकुलेशन के लिए मैथ्स, एनर्जी मैनेजमेंट के लिए साइंस और शहरी नियोजन के लिए सोशल साइंस का एक साथ प्रयोग करेंगे। इसके अलावा, 'स्किल सैटरडे' जैसे नवाचारों के जरिए बच्चों में फाइनेंशियल लिटरेसी और पब्लिक स्पीकिंग जैसे जीवन कौशल विकसित किए जाएंगे। परीक्षा का नया पैटर्न : रटने की आदत होगी खत्म  बोर्ड ने परीक्षा के तनाव को कम करने और योग्यता को परखने के लिए इवैल्यूएशन पैटर्न में भी बड़ा बदलाव किया है। अब पेपर में 50 प्रतिशत सवाल कॉम्पिटैंसी यानी योग्यता और व्यावहारिक प्रयोग पर आधारित होंगे। अब किताब के पीछे दिए गए प्रश्नों को रटकर अच्छे मार्क्स लाना मुश्किल होगा। मनोचिकित्सकों के अनुसार, एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग और इस नए परीक्षा पैटर्न से विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और मानसिक तनाव कम होगा। व्यावहारिक होगी गणित  गणित की जटिलताओं को दूर करने के लिए स्कूलों में 'रियल लाइफ मैथ सिमुलेशन' का सहारा लिया जाएगा। इसके तहत स्कूलों में मिनी मार्कीट बनाए जाएंगे, जहां विद्यार्थी खुद दुकानदार और ग्राहक बनेंगे। इस एक्टिविटी से वे डिस्काऊंट, प्रॉफिट और लॉस जैसे कठिन समीकरणों को रटने के बजाय प्रैक्टिकली हल करना सीखेंगे।

कुंआकोंडा के दुर्गम अंचल में पहली बार समग्र जांच का अनुभव, 62 ग्रामीणों की स्क्रीनिंग; गर्भवती सहित 4 मरीज तत्काल रेफर

रायपुर 11 किमी की दूरी नहीं बनी बाधा, स्वास्थ्य टीम पहुंची लोहागांव के हर दरवाजे तक घने जंगल, ऊंचे पहाड़ और कठिन रास्तों के बीच बसे लोहागांव में सोमवार को स्वास्थ्य सेवाएं सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि भरोसे की दस्तक बनकर पहुंचीं। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बैलाडीला की पहाड़ियों से घिरे विकासखंड कुआकोंडा के इस सुदूर गांव तक पहुंचने के लिए करीब 11 किलोमीटर का पैदल सफर तय किया। ऐसा सफर, जो सामान्य दिनों में भी आसान नहीं माना जाता। 11 किमी की दूरी नहीं बनी बाधा, स्वास्थ्य टीम पहुंची लोहागांव के हर दरवाजे तक गांव पहुंचने के बाद टीम ने 62 ग्रामीणों की विस्तृत स्वास्थ्य जांच की। इनमें बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे शामिल रहे, जिनमें कई ऐसे लोग भी थे, जिन्होंने पहली बार इस तरह की समग्र जांच कराई। मलेरिया और सिकल सेल (हीमोग्लोबिन) की जांच के साथ-साथ मोतियाबिंद और कुष्ठ रोग के संभावित मरीजों की पहचान की गई। गर्भवती महिलाओं की विशेष जांच की गई, वहीं बच्चों का टीकाकरण भी सुनिश्चित किया गया। जांच के दौरान 4 मरीजों की स्थिति गंभीर पाई गई, जिन्हें तत्काल जिला अस्पताल रेफर किया गया। इनमें एक गर्भवती महिला, एक मोतियाबिंद मरीज और दो मलेरिया पॉजिटिव मरीज शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, समय रहते इन मरीजों की पहचान होना आगे चलकर गंभीर जटिलताओं को रोकने में मददगार साबित होगा। दरअसल, 13 अप्रैल से शुरू हुए इस अभियान के तहत पूरे जिले में 76 स्वास्थ्य स्थलों के माध्यम से टीमें गांव-गांव पहुंच रही हैं। इसका उद्देश्य केवल उपचार देना नहीं, बल्कि दूरस्थ अंचलों में छिपी बीमारियों की समय रहते पहचान कर उन्हें स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ना है। लोहागांव जैसे दुर्गम क्षेत्रों में टीम की यह पहुंच इस बात का संकेत है कि अब स्वास्थ्य सेवाएं “इंतजार” नहीं, बल्कि “पहलकदमी” के रूप में सामने आ रही हैं। जहां पहले दूरी और संसाधनों की कमी बड़ी बाधा थी, वहीं अब यही अभियान उन बाधाओं को पार करने की कोशिश करता दिख रहा है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया का दबदबा बढ़ा, एमपी में 5 समर्थकों को दिलाए बड़े पद

भोपाल   एमपी में विभिन्न निगमों, मंडलों, विशेष क्षेत्र प्राधिकरणों में नियुक्तियों का दौर लगातार जारी है। इसी क्रम में ग्वालियर विकास प्राधिकरण जीडीए और विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण साडा में भी नियुक्तियां की गई हैं। इन नियुक्तियों के संबंध में प्रदेश के नगरीय विकास विभाग द्वारा जारी आदेश के साथ ही ग्वालियर में ज्योतिरादित्य सिंधिया का दबदबा साफ नजर आया। ग्वालियर के विकास की रूपरेखा तय करने वाली दो सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं ग्वालियर विकास प्राधिकरण और विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण में सिंधिया समर्थकों अहम दायित्व दिए गए हैं। हालिया राजनैतिक नियुक्तियों ने प्रदेश की राजनीति में एक स्पष्ट संदेश दिया है। ग्वालियर चंबल इलाके में सत्ता के केंद्र में अब भी ज्योतिरादित्य सिंधिया ही हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि इन पदों के लिए खींचतान लंबी चलेगी, लेकिन अंतिम सूची ने यह साफ कर दिया है कि ग्वालियर के निर्णयों में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का बड़ा प्रभाव रहता है। जीडीए और साडा में जिन नेताओं की नियुक्तियां हुई, उन्हें ज्योतिरादित्य सिंधिया के खेमे का ही माना जाता है जीडीए और साडा में जिन नेताओं की नियुक्तियां हुई हैं उन्हें ज्योतिरादित्य सिंधिया के खेमे का ही माना जाता है। दरअसल इन दोनों प्राधिकरणों में उन्होंने अपने 5 समर्थकों को अहम पद दिला दिए हैं। अध्यक्ष पद पर मधुसूदन भदौरिया की नियुक्ति में सिंधिया की रजामंदी, उपाध्यक्ष के रूप में सुधीर गुप्ता व वेद प्रकाश शिवहरे का चयन ग्वालियर विकास प्राधिकरण (जीडीए) अध्यक्ष पद पर मधुसूदन भदौरिया की नियुक्ति में सिंधिया की रजामंदी और उपाध्यक्ष के रूप में सुधीर गुप्ता व वेद प्रकाश शिवहरे का चयन सीधे तौर पर सिंधिया खेमे की मजबूती को दर्शाता है। ये सभी नेता सिंधिया समर्थक माने जाते हैं। विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) ग्वालियर के भविष्य के विस्तार के लिए जिम्मेदार इस संस्था की कमान अशोक शर्मा को सौंपी गई है, जबकि हरीश मेवाफरोश को उपाध्यक्ष बनाया गया है। ये दोनों भी सिंधिया के खेमे के ही माने गए हैं। सत्ता का स्पष्ट संतुलन: आर्थिक शक्ति केंद्रों पर सिंधिया खेमे के लोगों की नियुक्तियां इन नियुक्तियों के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि ग्वालियर के विकास से संबंधित निर्णयों में ज्योतिरादित्य सिंधिया की भूमिका और उनका दबदबा न केवल कायम है, बल्कि पहले से कहीं अधिक संगठित व सशक्त होकर उभरा है। जीडीए और साडा के मुख्य पदों पर नियुक्तियों को लेकर जो हालिया विश्लेषण सामने आए हैं, वे इशारा करते हैं कि यह केवल संगठन की मजबूती नहीं, बल्कि सिंधिया के दबदबे का परिणाम है।