samacharsecretary.com

E85 पेट्रोल से बदलेंगे फ्यूल नियम, पेट्रोल में 85% एथेनॉल, सरकार ने जारी किया ड्राफ्ट नोटिफिकेशन

नई दिल्ली  भारत सरकार ने सेंटर मोटर व्हीकल रूल्स में बदलाव के लिए एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसका उद्देश्य देश में मौजूदा E20 पेट्रोल प्रोग्राम से आगे बड़कर अधिक इथेनॉल वाले ईंधन को औपचारिक तौर पर शामिल करना है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने बताया कि इन संशोधनों में E85 ईंधन और E100 ईंधन के प्रावधान शामिल हैं। E100 होने पर वाहन लगभग पूरी तरह शुद्ध इथेनॉल पर चल सकेंगे। नियमों में मुख्य बदलाव नोटिफिकेशन के अनुसार, देशभर में E20 ईंधन लागू करने के लिए पेट्रोल के मानकों को E10/3 से बदलकर E10/E20 किया जाएगा। प्रस्ताव में E85 और E100 ईंधन को औपचारिक रूप से नियमों में शामिल किया गया है। साथ ही बायोडीजल के संदर्भ को B10 से बढ़ाकर B100 कर दिया गया है। चुनिंदा श्रेणियों में वाहन के कुल वजन की सीमा को 3,000 किलो से बढ़ाकर 3,500 किलो किया गया है। इसके अलावा उत्सर्जन परीक्षण के मानकों और तकनीकी शब्दावली को भी बेहतर बनाया गया है। हाइड्रोजन ईंधन के वर्गीकरण को भी बदलकर Hydrogen + CN की जगह Hydrogen+ CNG कर दिया गया है। क्या है नया प्रस्ताव सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने 27 अप्रैल को मोटर व्हीकल एक्ट के तहत एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है. इसका मकसद इमीशन से जुड़े नियमों, फ्यूल क्लासिफिकेशन और हाई इथेनॉल ब्लेंड से जुड़े तकनीकी शब्दों में बदलाव करना है. इस प्रस्ताव में सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 में संशोधन कर E85 या E100 तक के फ्यूल के लिए व्हीकल स्टैंडर्ड को शामिल करने की बात कही गई है. इससे पहले ये सीमा केवल E85 तक ही थी।  इन बदलावों के तहत पेट्रोल के साथ इथेनॉल की मिलावट की सीमा E10 से बढ़ाकर E20 तक की जा रही है. साथ ही B100 बायोडीजल के लिए भी प्रावधान जोड़े गए हैं. इससे साफ है कि सरकार अब हाई-ब्लेंड फ्यूल के पूरे रेंज को सपोर्ट करने के लिए नियम बना रही है. सरकार ने इस ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को फिलहाल पब्लिक कमेंट के लिए जारी किया है. यानी आम लोग और इंडस्ट्री से जुड़े लोग अपनी राय दे सकते हैं. सभी सुझाव मिलने के बाद सरकार अंतिम फैसला लेगी।  इथेनॉल को लेकर रेगुलेटरी कदम CNBC-TV18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उस प्रस्तावित कदम का मतलब यह नहीं है कि ज्यादा इथेनॉल वाले ईंधन को तुरंत लागू कर दिया जाएगा। इसका मकसद फिलहाल टेस्टिंग और मूल्यांकन के लिए नियम बनाना है। इसका मकसद E850E100 ईंधन के लिए फ्लेक्स-फ्यूल की तैयारी और जरूरी ढांचे का जायजा लेना है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पहले बताया था कि इस विषय पर संबंधित पक्षों के साथ सलाह-मशविरा जारी है। भारत यहां तक कैसे पहुंचा भारत ने 2025 में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का अपना लक्ष्य हासिल कर लिया है। यह उपलब्धि पिछले कई सालों की मेहनत और मुख्य रूप से गन्ने और अनाज से मिले इथेनॉल की आपूर्ति के कारण संभव हो पाई है। Ethanol Programme सरकार की उस नीति का अहम हिस्सा रहा है जिसके मकसद पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम करना और परिवहन ईंधन के स्त्रोतों में विविधता लाना है। गडकरी पहले ही कर चुके हैं अलर्ट केंद्रीय सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बीते कल दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि, "आने वाले समय में इन ट्रेडिशनल फ्यूल (पेट्रोल-डीजल) पर चलने वाली गाड़ियों का कोई भविष्य नहीं है." गडकरी ने वाहन निर्माता कंपनियों से अपील की कि, वे जल्द से जल्द बायोफ्यूल और अन्य वैकल्पिक फ्यूल की तरफ शिफ्ट करें. उनका कहना है कि पेट्रोल और डीजल न सिर्फ महंगे हैं बल्कि ये देश के लिए गंभीर समस्या भी बनते जा रहे हैं।  वाहन निर्माता कंपनियों ने धीरे-धीरे E20 ईंधन से चलने वाले इंजन पेश किए हैं जबकि नीति निर्माता साथ-साथ इस पर काम कर रहे हैं।

क्रूड ऑयल के दाम 111 डॉलर पार, पेट्रोल 393 रुपये पर, कई देशों में तेल संकट बढ़ा

मुंबई यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) के फैसले से दुनिया भर में तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है. ब्रेंट क्रूड करीब 2.8% बढ़कर 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि WTI भी लगभग 100 डॉलर के आसपास है. इसी बीच UAE ने 1 मई से OPEC और OPEC+ छोड़ने का बड़ा फैसला लिया है.इससे पूरी दुनिया के तेल बाजार, कीमतों और सप्लाई सिस्टम पर असर पड़ सकता है।  OPEC और OPEC+ क्या है? ओपेक यानी ऑर्गनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (OPEC) एक ऐसा ग्रुप है जिसमें बड़े तेल उत्पादक देश शामिल हैं. इसमें सऊदी अरब, इराक, ईरान, कुवैत जैसे देश शामिल हैं और हाल तक यूएई भी इसका हिस्सा था.इसका मुख्य काम तेल उत्पादन को कंट्रोल करके कीमतों को मैनेज करना है।  OPEC कैसे काम करता है?  ओपेक तरराष्ट्रीय तेल बाजार  में बैलेंस बनाए रखने की कोशिश करता है.जब वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें गिरने लगती हैं, तो ओपेक देश मिलकर तेल की सप्लाई (उत्पादन) में कटौती कर देते हैं, ताकि मांग के मुकाबले आपूर्ति कम होने से कीमतें फिर से स्थिर हो सकें.इसके विपरीत, जब तेल की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं और दुनिया भर में ऊर्जा संकट का खतरा मंडराने लगता है, तो ओपेक उत्पादन बढ़ाकर बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ा देता है.इससे सदस्य देशों की कमाई  सुरक्षित बनी रहती है और और ग्लोबल मार्केट में कीमतों में  ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होता।  OPEC क्या है और क्यों इतना ताकतवर है? ओपेक+ में ओपेक के साथ कुछ और देश भी जुड़े हैं, जैसे रूस.यह 2016 में तब बना जब तेल की कीमतें गिर गई थीं और ओपेक अकेले बाजार को संभाल नहीं पा रहा था.आज ओपेक+ दुनिया के करीब 40-50% तेल उत्पादन को कंट्रोल करता है।  ओपेक+ (OPEC+) की असली ताकत इस बात में छिपी है कि यह संगठन दुनिया के तेल सप्लाई के एक बहुत बड़े हिस्से को कंट्रोल करता है.जब भी ओपेक+ के सदस्य देश कोई फैसला लेते हैं, तो उसका असर तुरंत अंतरराष्ट्रीय बाजार पर दिखाई देता है और तेल की कीमतें पलक झपकते ही ऊपर-नीचे होने लगती हैं.चूंकि दुनिया की इकोनॉमी तेल पर टिकी है, इसलिए इनके फैसलों का सीधा असर हर देश की महंगाई, ट्रांसपोर्ट की लागत और पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.यही वजह है कि ओपेक+ को इतना ताकतवर माना जाता है, क्योंकि यह पूरी दुनिया की जेब और बाजार की दिशा बदल सकती है।  यूएई ने ओपेक क्यों छोड़ा? जान लें वजह इसके अलावा, यूएई को भविष्य की भी चिंता है क्योंकि रिन्यूएबल एनर्जी(Renewable Energy) के बढ़ते चलन के कारण आने वाले समय में तेल की मांग घट सकती है. ऐसे में यूएई की सोच यह है कि आज का तेल भविष्य की तुलना में ज्यादा कीमती हो सकता है, इसलिए वह अभी अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल करके ज्यादा से ज्यादा कमाई करना चाहता है. ओपेक की पाबंदियों से बाहर निकलकर वह अपनी इकोनॉमी को और मजबूत करने और भविष्य के जोखिमों से निपटने की तैयारी कर रहा है।  घरेलू वायदा बाजार में गिरावट जहां अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी दिखी, वहीं घरेलू स्तर पर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। क्रूड ऑयल करीब 0.88% यानी 84 रुपये गिरकर 9,401 रुपये पर कारोबार करता दिखा।  होरमुज जलडमरूमध्य बना चिंता का कारण Strait of Hormuz को लेकर बनी अनिश्चितता भी कीमतों में तेजी की बड़ी वजह है। यह अहम समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और LNG सप्लाई का लगभग 20% संभालता है, और यहां किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर बाजार पर पड़ सकता है। भारत पर पड़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं, तो भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। इससे महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यूएई और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से उत्पादन को लेकर मतभेद थे.इसके अलावा कोटा सिस्टम से यूएई संतुष्ट नहीं था.वह अपनी मार्केट शेयर बढ़ाना चाहता है।  यूएई के बाहर निकलने का असर क्या होगा? यूएई के ओपेक से बाहर निकलने का असर काफी गहरा हो सकता है, जिससे सबसे पहले ओपेक की वैश्विक ताकत कमजोर पड़ सकती है.यूएई उन गिने-चुने देशों में शामिल था जिसके पास जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त तेल उत्पादन करने की बड़ी क्षमता थी, और उसके जाने से संगठन का दबदबा कम होना तय है.दूसरा बड़ा असर तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के रूप में दिख सकता है. चूंकि अब सप्लाई को एक सुर में कंट्रोल करना मुश्किल होगा, इसलिए बाजार पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा वोलाटाइल हो सकता है. अंत में, इससे तेल बाजार पूरी तरह बिखर सकता है. जब हर देश संगठन की एकजुटता के बजाय अपने निजी फायदे और रणनीति के हिसाब से फैसले लेने लगेगा, तो इससे एकजुटता कम होगी और भविष्य में ग्लोबल मार्केट को संतुलित करना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा।  क्यों बढ़ रही हैं तेल की कीमतें? क्या आगे भी जारी रहेगी तेजी इस समय सबसे बड़ा कारण है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है.ईरान युद्ध के कारण सप्लाई बाधित है और निर्यात कम हो गया है.इसी वजह से कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं.अगर हालात सामान्य होते हैं और यूएई ज्यादा उत्पादन शुरू करता है:सप्लाई बढ़ सकती है कीमतें फिर नीचे आ सकती हैं.लेकिन अभी बाजार अनिश्चित है कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।  भारत पर क्या असर पड़ेगा? क्या पेट्रोल-डीजल होगा महंगा?  ग्लोबल ऑयल मार्केट में होने वाली इस हलचल का भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर सीधा और बड़ा असर पड़ता है. कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से न केवल पेट्रोल-डीजल महंगा होने का डर रहता है, बल्कि इससे माल ढुलाई की लागत बढ़ती है, जिससे सीधे तौर पर महंगाई में इजाफा होता है और देश का व्यापार घाटा भी बढ़ सकता है।  हालांकि, आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि केंद्र सरकार ने फिलहाल कीमतों में बढ़ोतरी की किसी भी संभावना से इनकार किया है. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने साफ किया है कि पेट्रोल … Read more

CM भगवंत मान की राष्ट्रपति से अहम बैठक तय, डिपोर्टेशन और दलबदल मुद्दे एजेंडे में

चंडीगढ़. पंजाब की सियासत में राज्यसभा सदस्यों के भाजपा में शामिल होने के मुद्दे पर घमासान के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान 5 मई को राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को संवैधानिक स्तर पर उठाया जाएगा ताकि जनता के जनादेश का सम्मान सुनिश्चित किया जा सके। पत्रकारों के साथ बातचीत में मान ने कहा कि जिन सदस्यों को पार्टी और जनता के भरोसे उच्च सदन में भेजा गया, उनका दल बदलना गंभीर विषय है। सरकार इस पर सभी कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इस बीच मुख्यमंत्री ने ऑस्ट्रेलिया से डिपोर्ट किए जा रहे भारतीयों के मुद्दे पर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आज 15 लोगों को डिपोर्ट किया जा रहा है, जिनमें 11 पंजाब के हैं और एक महिला भी शामिल है। दिल्ली जाएंगे सीएम भगवंत मान अन्य में 2 तेलंगाना, 1 हरियाणा और 2 उत्तराखंड के रहने वाले हैं। मान ने कहा कि वह खुद दिल्ली जाकर इन लोगों को रिसीव करेंगे। उन्होंने कहा कि जैसे ही ये पंजाब पहुंचेंगे, पूरे मामले की गहन पड़ताल की जाएगी और जो भी जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। पटियाला में रेलवे लाइन पर हुए धमाके के मामले में भी मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर की जा रही है। अब तक कुछ आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है और पूछताछ जारी है। मान ने बताया कि जांच में अमृतपाल सिंह से जुड़े कुछ नाम सामने आने की बात सामने आई है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। कानून व्यवस्था पर भी दिया बयान उन्होंने दोहराया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। चाहे किसी का भी राजनीतिक या सामाजिक समर्थन हो, अगर जांच में दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है और किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उधर, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में राज्यसभा विवाद, सुरक्षा मामलों और डिपोर्टी जैसे मुद्दों पर सियासी हलचल और बढ़ने के संकेत हैं।

तीर्थ, विरासत और इको-टूरिज्म स्थलों तक पहुंच होगी तेज और आसान

लखनऊ गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण होने के साथ उत्तर प्रदेश में विकास, आस्था और पर्यटन को नई रफ्तार मिल गई है। मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह एक्सप्रेसवे केवल यातायात का आधुनिक मार्ग नहीं, बल्कि प्रदेश के प्रमुख तीर्थ स्थलों को जोड़ने वाला मजबूत आध्यात्मिक कॉरिडोर बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में साकार हुआ 594 किलोमीटर लंबा विश्वस्तरीय कॉरिडोर मेरठ से प्रयागराज तक पश्चिम, मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश को तेज रफ्तार संपर्क से जोड़ रहा है। करीब 36,230 करोड़ रुपये की लागत से बने छह लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे से यात्रा समय में भारी कमी आएगी और मेरठ से प्रयागराज का सफर अब करीब 6 घंटे में पूरा हो सकेगा। इससे धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यावरण पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी, साथ ही व्यापार, निवेश, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को भी नई गति मिलेगी। मेरठ के हस्तिनापुर को मिला अधिक फायदा  गंगा एक्सप्रेसवे से सबसे अधिक लाभ पाने वाले क्षेत्रों में मेरठ जिले का हस्तिनापुर है। महाभारत काल से जुड़ा हस्तिनापुर जैन धर्म का भी प्रमुख तीर्थस्थल है। यहां योगी सरकार 15 करोड़ रुपये से अधिक की एकीकृत पर्यटन विकास परियोजना चला रही है। बेहतर सड़क संपर्क से दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। पाण्डेश्वर महादेव मंदिर, करण मंदिर, उल्टा खेड़ा उत्खनन स्थल और हस्तिनापुर वन्यजीव अभ्यारण्य जैसे स्थल अब नई पहचान पाएंगे। संभल क्षेत्र को भी इस परियोजना से नई ऊर्जा मिलेगी। यहां विकसित हो रहे कुरुक्षेत्र तीर्थ स्थल तक पहुंच आसान होने से धार्मिक पर्यटन को बल मिलेगा।  यह मार्ग धार्मिक तथा प्राकृतिक पर्यटन को एक साथ जोड़ता है   हापुड़ के ब्रजघाट गढ़मुक्तेश्वर, बुलंदशहर के अवंतिका देवी मंदिर, अमरोहा के वासुदेव मंदिर, बदायूं के श्रीरामचंद्र विराजमान मंदिर और शाहजहांपुर के परशुराम मंदिर जैसे स्थलों को भी इस कॉरिडोर से बड़ा लाभ मिलेगा। बागपत के लाक्षागृह जैसे ऐतिहासिक स्थलों के पर्यटन महत्व में भी वृद्धि होगी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में हरदोई के वनेश्वर महादेव मंदिर, उन्नाव के नवाबगंज इको-टूरिज्म क्षेत्र, रायबरेली के चामुंडा शक्तिपीठ, प्रतापगढ़ के मां ज्वाला देवी धाम और प्रयागराज तक यह मार्ग धार्मिक तथा प्राकृतिक पर्यटन को एक साथ जोड़ता है। प्रयागराज ब्लैकबक रिजर्व जैसे स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यावरण पर्यटन को भी गति मिलेगी। इको-टूरिज्म स्थलों को प्रदान करेगा नई ऊर्जा पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि गंगा एक्सप्रेस-वे के शुरू होने से पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन आसान होगा। यह एक्सप्रेस-वे जैन सर्किट, महाभारत सर्किट और 'कल्कि धाम' संभल के अतिरिक्त मार्ग के आसपास के इको-टूरिज्म स्थलों को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा। उन्होंने कहा, गंगा एक्सप्रेस-वे अब केवल एक सड़क नहीं, यह एक सपने की मूर्त अभिव्यक्ति है। गंगा एक्सप्रेस वे से मेरठ और प्रयागराज की दूरी 10-12 घंटे से घटकर महज 5 घंटे रह जाने की उम्मीद है। मेरठ से एक्सप्रेस-वे की शुरुआत होगी जो हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ होते हुए प्रयागराज में समाप्त होगी।

राजस्थान ATS की बड़ी कार्रवाई: फर्जी आधार सेंटर से राष्ट्र विरोधी नेटवर्क का खुलासा

जयपुर राजस्थान में फर्जी आधार कार्ड के रैकेट मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है. ATS की सूचना पर फर्जी आधार सेंटर चलाने में मदद करने वाले DOIT और आधार के कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है. पकड़े गए लोगों में प्रोग्रामर, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के सहायक प्रोग्रामर और एक संविदाकर्मी शामिल है. ये सभी कर्मचारी अपनी आईडी और तकनीकी पहुंच का इस्तेमाल कर फर्जी बायोमेट्रिक्स के जरिए आधार कार्ड बनाने में गिरोह की मदद कर रहे थे. इस मामले में अब तक कुल 7 आरोपियों को दबोचा जा चुका है. जानकारी के मुताबिक, फर्जी तरीके से बनाए गए आधार साइबर क्राइम और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल किया जा रहा था. आरोपी के पास मिले थे कई उपकरण दरअसल, एटीएस ने कुछ दिन पहले भादरा में फर्जी आधार सेंटर पकड़ा था, जिसमें आरोपी कुलदीप शर्मा को गिरफ्तार किया गया था. उसके पास से लैपटॉप, प्रिटंर, आईरिस डिवाइस, जीपीएस डिवाइस, फिंगरप्रिंट डाई, कैमरा, मोबाइल फोन सहित कई अन्य उपकरण बरामद हुए थे. इसके अलावा जसवन्त, बलराम व अमीर खान को भी गिरफ्तार किया जा चुका है. आधार सेंटर जसवंत और आमिर ख़ान के नाम से ही अलॉट था और ये दोनों अपनी फिंगर प्रिंट और आंखों की Retina से कुलदीप से फर्जी आधार सेंटर हनुमानगढ़ में चलवा रहे थे. एटीएस के मुताबिक, गिरोह द्वारा फर्जी तरीके से बनाए गए आधार कार्ड का उपयोग राष्ट्र विरोधी गतिविधियों, फर्जी सिम कार्ड जारी करने, साइबर अपराधों के लिए और फर्जी बैंक खाते खुलवाने में किया जा रहा था. एटीएस के एडीजी एमएन दिनेश ने बताया कि भादरा के ही फर्जी आधार सेंटर से हरियाणा निवासी एक युवक का पासपोर्ट बना था. जब राजस्थान एटीएस ने जांच आगे बढ़ाया तो पता चला कि इस मामले में आधार doit के कुछ कर्मचारी भी मिले हुए हैं. उसके बाद हनुमानगढ़ में ब्लॉक भादरा के दिनेश कुमार (प्रोग्रामर) और रामनिवास सोनी (सहायक प्रोग्रामर) सहित एक संविदाकर्मी रवि शीला (आर-स्वान इंजीनियर) को पकड़ा गया. गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की हो रही जांच आरपियों द्वारा अब तक इस प्रकार फर्जी तरीके से कितने आधार तैयार किए गए हैं. इस बारे में UIDAI & DOIT से समन्वय स्थापित कर जानकारी जुटाई जा रही है. वहीं गिरोह के द्वारा चलाए जा रहे इस धोखाधडी के नेटवर्क मे जुड़े अन्य साथियों के संबध में गहनता से जांच-पड़ताल जारी है. ATS के पास इनपुट है कि इस तरह से फ़र्ज़ी आधार सेंटर राजस्थान में और भी कई शहरों में चल रहे हैं. इस फ़र्ज़ी आधार सेंटर की सहायता से ग़लत लोग फ़र्ज़ी आधार कार्ड बनवा रहे हैं. इससे मोबाइल नंबर लिए जा रहे हैं और ये मोबाइल नंबर साइबर ठगी में उपयोग किया जा रहा है. वहीं, बैंक खाते खुलवाए जा रहे, उसमें साइबर अपराध से जुड़े पैसे मंगवाए जा रहे हैं. इसके अलावा पासपोर्ट बनवाकर राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल में लिया जा रहा है. बता दें कि हाल ही में जयपुर से एक मामला सामने आया था, जिसमें पाकिस्तान का आतंकी खरगोश जयपुर आया और फ़र्ज़ी आधार के इस्तेमाल कर वह पासपोर्ट बनवाकर वापस इंडोनेशिया से खाड़ी देश में फ़रार हो गया. इस तरह से आधार कार्ड का बड़ा रैकेट पूरे राजस्थान में चल रहा है.

राष्ट्रपति भवन के अमृत उद्यान में कराया गया विशेष भ्रमण

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुख-सुविधा और मानसिक प्रसन्नता के लिए लगातार नई पहल कर रही है। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के तहत बुजुर्गों को प्रदेश के धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है, जिससे उनके जीवन में उत्साह और सकारात्मकता बनी रहे। इस तरह से 2022 से 2026 के वित्तीय वर्ष तक योगी सरकार यूपी के वृद्धाश्रमों में रहने वाले 2493 वरिष्ठ नागरिकों को भ्रमण करवा चुकी है।  राष्ट्रपति भवन का कराया गया भ्रमण  हाल ही में उत्तर प्रदेश के एनसीआर क्षेत्र के विभिन्न जनपदों से आए 211 वृद्धजनों को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन के प्रसिद्ध अमृत उद्यान का भ्रमण कराया गया। इस दौरान बुजुर्गों ने उद्यान की सुंदरता, हरियाली और मनोहारी वातावरण का आनंद लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को सुखद, ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक अनुभव प्रदान करना था। विभाग की ओर से आवागमन, जलपान, सुरक्षा और अन्य सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं। बुजुर्गों ने संगम में लगाई डुबकी वहीं धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए सरकार ने प्रयागराज में आयोजित प्रयागराज महाकुंभ 2025 में 1,515 वरिष्ठ नागरिकों को स्नान का अवसर उपलब्ध कराया। वहीं माघ मेला 2026 में 767 बुजुर्गों ने संगम में डुबकी लगाकर अपनी लंबे समय से संजोई इच्छा पूरी की। इन आयोजनों में भाग लेकर बुजुर्गों ने आध्यात्मिक संतोष और आत्मिक शांति का अनुभव किया। धार्मिक स्थलों के कराएं जाते हैं दर्शन योगी सरकार की यह पहल केवल बाहरी भ्रमण तक सीमित नहीं है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों को समय-समय पर स्थानीय मंदिरों, धार्मिक स्थलों और दर्शनीय स्थानों के दर्शन भी कराए जाते हैं। इससे वृद्धजनों के मन में उत्साह बना रहता है, अकेलेपन की भावना कम होती है और जीवन के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होती है। सम्मान और खुशहाली के लिए काम कर रही योगी सरकार  समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि  2022- 23 के वित्तीय वर्ष से 2025-26 के वित्तीय वर्ष तक कुल 2493 वरिष्ठ नागरिकों को प्रयागराज महाकुंभ, माघ मेला और राष्ट्रपति भवन के अमृत उद्यान का भ्रमण कराया गया है। इसके अलावा समय- समय पर निकटतम धार्मिक स्थलों पर भी ले जाने का काम किया जाता है। योगी सरकार की यह पहल साबित कर रही है कि बुजुर्ग केवल परिवार ही नहीं, बल्कि समाज की धरोहर हैं, जिनके सम्मान और खुशहाली के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड) से अनाथ बच्चों को मिल रहा सहारा

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बेसहारा बेटियों के लिए अभिभावक की भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19) के तहत योगी सरकार ने न सिर्फ अनाथ बच्चों के भविष्य को सुरक्षित किया है, बल्कि बेसहारा बेटियों की शादी कराकर उनके जीवन में माता-पिता की कमी को काफी हद तक पूरा करने का प्रयास किया है। इस योजना के तहत अब तक 60 से ज्यादा बेसहारा बेटियों की शादी कराई जा चुकी है। योजना के तहत योगी सरकार बेटियों की शादी के लिए 1 लाख रुपये की आर्थिक मदद कर रही है। यह इस बात का प्रतीक है कि सरकार जमीनी स्तर पर जिम्मेदारी निभा रही है। बेटियों की शादी कराकर सरकार ने अभिभावक की भूमिका निभाई दरअसल मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19) आज हजारों परिवारों के लिए उम्मीद का सहारा बन चुकी है। योगी सरकार ने इस योजना के तहत अब तक 66 बेसहारा बेटियों की शादी कराई है। इस तरह यह सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि उन बेटियों के लिए एक भरोसा है, जिनके सिर से माता-पिता का साया उठ चुका है। सरकार इन बेटियों के विवाह के लिए 1,01,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, जिससे उनका नया जीवन सम्मान के साथ शुरू हो सके। वर्तमान में 10 हजार से ज्यादा बच्चों को मिल रहा लाभ इस योजना की शुरुआत साल 2021 में की गई थी। इसका उद्देश्य उन बच्चों को सहारा देना है, जिन्होंने कोविड-19 महामारी के कारण 1 मार्च 2020 के बाद अपने माता-पिता या अभिभावकों को खो दिया था। ऐसे बच्चों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके भरण-पोषण, शिक्षा और भविष्य की होती है। इसे ध्यान में रखते हुए योगी सरकार ने एक व्यापक और संवेदनशील व्यवस्था तैयार की। वर्तमान समय में इस योजना के तहत 10,904 बच्चों को लाभ मिल रहा है, जबकि शुरुआत में यह संख्या 13,926 थी।  हजारों बच्चों को मिल रहा योजना का लाभ कई बच्चे समय के साथ वयस्क हो गए या योजना की अवधि पूरी कर चुके हैं, जिससे लाभार्थियों की संख्या में कमी आई है। इसके बावजूद हजारों बच्चों को निरंतर सहायता मिल रही है, जो इस योजना की प्रभावशीलता को दर्शाता है। साथ ही बच्चों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार प्रतिमाह 4000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। यह सहायता 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने या 12वीं कक्षा पास करने तक (जो पहले हो) दी जाती है। इसके साथ ही शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने 8085 लैपटॉप भी वितरित किए हैं, जिससे बच्चे डिजिटल शिक्षा से जुड़ सकें और प्रतिस्पर्धी माहौल में पीछे न रहें। कोविड के कारण अनाथ हुए बच्चों के लिए निशुल्क आवास की व्यवस्था योजना के तहत 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए कई विशेष प्रावधान किए गए हैं। जिन बच्चों का कोई अभिभावक नहीं है, उनके लिए सरकारी बाल देखरेख संस्थाओं में निःशुल्क आवास की व्यवस्था की गई है। वहीं 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कक्षा 12 तक कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और अटल आवासीय विद्यालयों में मुफ्त शिक्षा दी जा रही है। इसके साथ ही उन्हें 12,000 रुपये सालाना की अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जाती है। बच्चों की संपत्ति सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी जिलाधिकारी को योगी सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इन बच्चों की संपत्ति सुरक्षित रहे। इसके लिए जिलाधिकारी को इन बच्चों का संरक्षक बनाया गया है, ताकि उनकी चल-अचल संपत्ति की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। यह कदम बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा 18 से 23 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को भी योजना के दायरे में रखा गया है। उच्च शिक्षा, डिप्लोमा या प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे नीट,जेईई और क्लैट की तैयारी कर रहे युवाओं को प्रतिमाह 2500 रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इससे न केवल उनकी पढ़ाई जारी रहती है, बल्कि उन्हें अपने सपनों को साकार करने का अवसर भी मिलता है। योगी सरकार का लक्ष्यः कोई बेटी खुद को असहाय न महसूस करें महिला कल्याण निदेशालय की निदेशक डॉ. वंदना वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19) प्रदेश सरकार की एक संवेदनशील और दूरदर्शी पहल है, जिसका उद्देश्य उन बच्चों और बेटियों को संबल देना है, जिन्होंने महामारी में अपने अभिभावकों को खो दिया। डॉ. वर्मा ने बताया कि योजना के तहत बच्चों को आर्थिक सहायता, मुफ्त शिक्षा, डिजिटल संसाधन और सुरक्षित आवास जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। साथ ही बालिग होने पर बेटियों के विवाह के लिए आर्थिक सहयोग भी सुनिश्चित किया गया है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा या बेटी खुद को असहाय महसूस न करे और सभी को समान अवसर मिल सकें।

जनसेवा और सादगी की मिसाल रामेश्वर पासवान अब नहीं रहे

 सिकंदरा सिकंदरा विधानसभा क्षेत्र की राजनीति के मजबूत स्तंभ और सात बार विधायक रहे रामेश्वर पासवान का बुधवार सुबह हृदयाघात से निधन हो गया। 92 वर्षीय पासवान ने पटना स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन के साथ ही बिहार की राजनीति में सादगी, सौम्यता और जनसेवा की एक लंबी परंपरा का अंत हो गया। स्वजनों के अनुसार, वे रोज की तरह अपने दैनिक कार्यों के बाद विश्राम कर रहे थे, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और दिल की धड़कन अनियंत्रित हो गई। परिवार के लोग जब तक कुछ समझ पाते, तब तक उनका निधन हो चुका था। उनके बड़े पुत्र जयप्रकाश पासवान ने बताया कि गुरुवार को जमुई जिले के पैतृक गांव नौआडीह में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है। जनसेवा और सादगी की मिसाल रामेश्वर पासवान सात बार सिकंदरा से विधायक चुने गए और उन्होंने समाज कल्याण मंत्री व पीडब्ल्यूडी मंत्री जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाली। उनका पूरा राजनीतिक जीवन आम लोगों, खासकर गरीबों और किसानों के हितों के लिए समर्पित रहा। वे अपनी सादगी, शालीनता और मिलनसार स्वभाव के लिए जाने जाते थे, जिसने उन्हें हर वर्ग के लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया। शोक की लहर, नेताओं ने दी श्रद्धांजलि उनके निधन की खबर मिलते ही सिकंदरा, जमुई और पटना सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक दलों, बुद्धिजीवियों और आम लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। सर्वदलीय नेताओं ने उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया। स्थानीय लोगों द्वारा शोक सभा आयोजित कर उनके राजनीतिक जीवन और योगदान को याद किया गया। बताया कि रामेश्वर पासवान हमेशा अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के लिए प्रयासरत रहते थे। उनके निधन से न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र को अपूरणीय क्षति हुई है। उनकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।

गैस उपभोक्ताओं के लिए नई गाइडलाइन: OTP डिलीवरी और eKYC अनिवार्य होने के संकेत

 जयपुर LPG गैस को लेकर आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है. कुछ परेशानी इसलिए भी हुई की लोगों को गैस बुकिंग और डिलिवरी के नियमों की जानकारी नहीं थी. ऐसे में अब 1 मई 2026 से LPG गैस सिलेंडर से जुड़े बदलाव होने वाले हैं तो आपको इसके बारे में जानकारी जरूर होनी चाहिए. इसके तहत LPG की बुकिंग से लेकर डिलिवरी तक कई नियम बदल रहे हैं. अगर आप इसे समझ लेगें तो आपको परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा. बता दें घरेलू गैस की कीमतों में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी. वहीं 1 मई 2026 को गैस के कीमतों में बदलाव किया जा सकता है. साथ ही कमर्शियल सिलेंडर की कीमत भी लगातार बढ़े हैं तो इसकी कीमत भी बदल सकती है. बदलेगा बुकिंग का नियम नए नियम के तहत LPG सिलेंडर बुक करने का समय अंतराल 25 दिन कर दिया गया है. जो पहले 21 दिन था. जबकि ग्रामीण इलाकों में 45 दिन का समय होगा. यानी 45 दिन बाद ही गैस की बुकिंग की जा सकेगी. ऐसे में अगर आप गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपको बुकिंग के समय को ध्यान रखना होगा. आप गैस सिलेंडर कई तरीकों से बुक कर सकते हैं. व्हाट्सऐप, मिस्ड कॉल, SMS, मोबाइल ऐप या वेबसाइट के जरिए आसानी से बुकिंग की जा सकती है. बस ध्यान रखें कि बुकिंग हमेशा अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से ही करें. साथ ही ध्यान रखें कि किसी अनजान लिंक या नंबर से बुकिंग न करें और पेमेंट करने से पहले डिटेल्स जरूर चेक करें. बदलेगा डिलिवरी का नियम गैस की होम डिलिवरी का नियम भी बदला गया है. गैस की डिलिवरी सुरक्षित तरीके से हो इसके लिए OTP सिस्टम लागू किया गया है. यानी अगर आपके घर पर सिलेंडर आता है तो आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर OTP आएगा जिसे आपको डिलिवरी बॉय को बताना होगा. OTP के जरिए डिलिवरी होने से गैस सिलेंडर सही व्यक्ति को मिलेगा और इसमें गड़बड़ी नहीं होगी. PNG हो सकता अनिवार्य सरकार लगातार PNG कनेक्शन को बढ़ावा दे रही है. ऐसे में जिन क्षेत्रों में PNG पाइपलाइन उपलब्ध है वहां लोगों को तय समय में कनेक्शन लेना अनिवार्य किया जा सकता है. ऐसा नहीं करने पर LPG गैस सिलेंडर की डिलिवरी बंद की जा सकती है. अब गैस सिलेंडर के लिए eKYC जरूरी होगा. ऐसा नहीं करने पर सिलेंडर की डिलिवरी रूक सकती है, जबकि सब्सिडी का लाभ भी मिलना बंद हो सकता है. यह एक वित्त वर्ष में एक बार करना जरूरी होता है.

ग्राम हांफा में मनाया जाएगा भगवान श्री नृसिंह देव जी का प्रगटोत्सव”

 सकरी   (कैलाश वस्त्रकार)ग्राम हांफा में कल 30 अप्रैल, गुरुवार को भगवान श्री नृसिंह देव जी का पावन प्रगटोत्सव बड़े ही श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ बघर्रा पाठ मंदिर परिसर में भव्य रूप से मनाया जाएगा। इस धार्मिक आयोजन को लेकर पूरे ग्राम सहित आसपास क्षेत्रों में उत्साह का माहौल बना हुआ है।मंदिर के आचार्य पंडित धनेश उपाध्याय ने समस्त ग्रामवासियों, भक्त माताओं,बुजुर्गों एवं युवा साथियों से इस पावन उत्सव में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर धर्म लाभ अर्जित करने अपील की है। उन्होंने बताया कि यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि ग्राम की एकता और सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है।उत्सव के अवसर पर मंदिर परिसर में भगवान नृसिंह नाथ की विशेष पूजा-अर्चना, महाआरती, छप्पन भोग-प्रसाद वितरण, महिला संकीर्तन एवं रामायण पाठ का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम के अनुसार संध्या 6:30 बजे से महाआरती एवं उसके पश्चात श्रद्धालुओं के लिए भोग प्रसाद भंडारे की व्यवस्था की गई है। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से इस आयोजन को और अधिक भव्य बनाने के लिए अपनी श्रद्धा अनुसार तन मन धन से उपस्थिति का आग्रह किया है। बघर्रा पाठ महराज ग्राम हांफा के सुरक्षा प्रहरी के रूप में स्थापित मान्य देवता माने जाते हैं। स्थानीय जनश्रुति के अनुसार पुराने समय में जब ग्राम के चारों ओर घना जंगल हुआ करता था और जंगली जानवर मवेशियों को नुकसान पहुंचाते थे, तब ग्रामवासियों ने इस समस्या के समाधान हेतु गोकने नाला के किनारे ऊंचे स्थान पर बघर्रा पाठ महराज की स्थापना की थी। तभी से ग्राम की सुरक्षा, सुख-समृद्धि और मंगल कार्यों में उनकी विशेष पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है। भक्तजन बघर्रा पाठ महाराज जी को नरसिंह देव का प्रतिरूप मानते है। आस पास के ग्रामीण भक्तजन विवाह के बाद  नववधू के गृह प्रवेश से पूर्व सबसे पहले बघर्रा पाठ महराज के दर्शन और आशीर्वाद लेते है, इसी प्रकार प्रत्येक मांगलिक कार्य उनकी पूजा-अर्चना के बिना पूर्ण नहीं माना जाता है।भगवान श्री नृसिंह देव जी का प्रगटोत्सव कार्यक्रम  को सफ़ल बनाने के लिए पंडित धनेश उपाध्याय एवं श्रद्धालुगण जुटे हुए है।