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बॉर्डर पर सुरक्षा में सेंध! सोलर कैमरों के जरिए सेना की जासूसी, एक गिरफ्तारी के बाद कई लोग रडार पर

चंडीगढ़. पंजाब पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस जालंधर यूनिट को एक बड़ी कामयाबी मिली है। एजेंसी ने आईएसआई समर्थित जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए फिरोजपुर निवासी सुखविंदर सिंह उर्फ सुखा को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में जो खुलासे सामने आए हैं, उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस के अनुसार आरोपित और उसके साथी राज्य के विभिन्न इलाकों में चीन निर्मित सोलर सीसीटीवी कैमरे लगा रहे थे। ये कैमरे 4जी कनेक्टिविटी से लैस थे, जिनके जरिए संवेदनशील ठिकानों की लाइव फुटेज सीधे पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों तक भेजी जा रही थी। खास बात यह है कि जिन स्थानों को निगरानी के लिए चुना गया, उनमें सेना से जुड़े प्रतिष्ठान भी शामिल हैं। कपूरथला से बरामद किए गए उपकरणों ने इस पूरे नेटवर्क की गंभीरता को उजागर किया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह एक सुनियोजित साजिश के तहत किया जा रहा था, जिसमें तकनीक का इस्तेमाल कर संवेदनशील जानकारियां जुटाई जा रही थीं। कैमरों की सच्चाई जानने में जुटी पुलिस पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि इन कैमरों को किन-किन स्थानों पर लगाया गया और कितनी अवधि से यह गतिविधि चल रही थी। इस मामले में अमृतसर स्थित स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (एसएसओसी) थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस आरोपित के नेटवर्क के ‘फॉरवर्ड’ और ‘बैकवर्ड’ लिंक खंगाल रही है, ताकि इस मॉड्यूल से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि कुछ और गिरफ्तारियां भी संभव हैं। सूत्रों के मुताबिक, आरोपित मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए लाइव फीड साझा करता था, जिससे हैंडलर रियल टाइम में गतिविधियों पर नजर रख सकें। विदेशी एजेंसियों की भूमिका को लेकर भी जांच इस पूरे मामले में विदेशी एजेंसियों की भूमिका को लेकर भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं इस नेटवर्क का संबंध सीमा पार से होने वाली अन्य गतिविधियों से तो नहीं है। पंजाब पुलिस ने स्पष्ट किया है कि राज्य में सक्रिय किसी भी तरह के जासूसी नेटवर्क को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए इस तरह के मॉड्यूल को जड़ से खत्म किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक के जरिए जासूसी के तरीकों में बदलाव आया है, जिससे सतर्कता और बढ़ाने की जरूरत है। फिलहाल, इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और पूरे मामले की गहराई से जांच जारी है।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल का आदेश: विभागीय अधिकारी और निर्माण एजेंसी समय-सीमा में कार्य पूरा करें

विभागीय अधिकारी एवं निर्माण एजेंसी आपसी समन्वय से समय-सीमा में पूर्ण करें कार्य: उप मुख्यमंत्री शुक्ल स्वास्थ्य अधोसंरचना विकास कार्यों की समीक्षा की भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्रदेश में संचालित विभिन्न अधोसंरचना विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने विभागीय अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसियों को निर्देश दिए कि कार्यों में बेहतर समन्वय स्थापित कर समय सीमा में कार्य पूर्ण किए जायें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि निर्माण एजेंसियों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए अधोसंरचना विकास कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सभी परियोजनाओं की नियमित एवं सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में विभिन्न परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति, प्रगति, चुनौतियों एवं उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मेडिकल कॉलेज इंदौर में चल रहे सुदृढ़ीकरण एवं उन्नयन कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने जिला चिकित्सालय पन्ना, सतना एवं सीधी में संचालित कार्यों की प्रगति का भी विस्तृत जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मेडिकल कॉलेज बुधनी, मंडला एवं छतरपुर में आवश्यक फर्नीचर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए टेंडर प्रक्रिया को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि सभी आवश्यक संसाधनों की समय पर उपलब्धता से स्वास्थ्य संस्थानों में बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित की जा सकेंगी एवं उनका संचालन समय सीमा में प्रारम्भ हो सकेगा। बैठक में आयुक्त, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा धनराजू एस., एमडी एमपीबीडीसी तथा निर्माण एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

सम्राट चौधरी सरकार में बड़ा फेरबदल तय, मंत्रियों की सूची पर नजर

पटना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का मतदान खत्म होते ही बिहार के लोगों का फोकस मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की 15 दिन पुरानी सरकार के कैबिनेट विस्तार पर आ गया है। बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पहले सीएम बने सम्राट चौधरी ने जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के दो उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव के साथ 15 अप्रैल को शपथ ली थी। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की नई सरकार के पूरी तरह गठन के लिए बंगाल चुनाव के खत्म होने का इंतजार चल रहा था। ऐतिहासिक 92 फीसदी से ऊपर वोटिंग के साथ दो चरण में बंगाल का चुनाव खत्म हो चुका है। अब चर्चा है कि सम्राट चौधरी कैबिनेट का विस्तार 3 मई या 6 मई को हो सकता है। सम्राट कैबिनेट के विस्तार के लिए 3 मई और 6 मई की अटकल को भी बंगाल चुनाव से ही जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व बंगाल से चुनाव की आंतरिक रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जिसमें चुनाव नतीजों में पार्टी के संभावित प्रदर्शन का अनुमान होगा। बंगाल चुनाव की इंटरनल रिपोर्ट में अगर हर हाल में भाजपा की जीत का भरोसा जताया गया होगा तो पार्टी नतीजों के बाद 6 मई को बिहार कैबिनेट का विस्तार करवा सकती है। लेकिन, अगर बंगाल से आई रिपोर्ट में भाजपा की जीत को लेकर कोई किंतु-परंतु जैसी आशंका होगी तो पार्टी की कोशिश होगी कि सम्राट चौधरी कैबिनेट का विस्तार चुनाव नतीजों से पहले ही 3 मई को निबटा लिया जाए। बिहार में सीएम समेत 36 नेता मंत्री बन सकते हैं। सम्राट चौधरी कैबिनेट में भाजपा से ज्यादा होंगे जदयू के मंत्री, बड़े मंत्रालय भी मिलेंगे? सम्राट चौधरी की सरकार बनने के बाद से ही कैबिनेट में भाजपा और जदयू के मंत्रियों की संख्या को लेकर भी अटकलों का दौर चल रहा है। पूर्व सीएम नीतीश कुमार की कैबिनेट में भाजपा के मंत्रियों की संख्या जदयू से ज्यादा थी। जदयू के नेताओं का कहना है कि सम्राट चौधरी की सरकार में मॉडल वही रहेगा। यानी भाजपा का सीएम है तो जदयू के मंत्रियों की संख्या ज्यादा होगी। मंत्रालय बंटवारे में भी नीतीश के फॉर्मूले से चले तो जदयू को कई बडे़ मंत्रालय भी मिल सकते हैं। सम्राट सरकार में सीएम और दोनों डिप्टी सीएम के अलावा भाजपा के 14 और जदयू के 15 नेता मंत्री बन सकते हैं। सम्राट चौधरी कैबिनेट में 36 के 36 मंत्री पद नहीं भरे जाएंगे नीतीश कुमार की ही तरह सम्राट चौधरी कैबिनेट में 36 के 36 पद भरने के बदले 1-2 मंत्रियों की जगह बनाकर रख सकते हैं, ताकि भविष्य में दूसरे दलों में तोड़-फोड़ की जरूरत पड़े तो डील के लिए ऑफर का इंतजाम रहे। सरकार में 1-2 मंत्रियों की जगह खाली हो तो उसकी बदौलत सामने वाली पार्टी के कुछ विधायकों को अपने वश में करना आसान हो जाता है। भाजपा और जदयू दोनों अपने कोटे से कम से कम 1-1 पद खाली रख सकती है। पिछली सरकार में जदयू के ज्यादातर मंत्री फिर से जगह पाएंगे। भाजपा के भी ज्यादातर मंत्री फिर से आएंगे, लेकिन नीतीश मिश्रा, कृष्ण ऋषि, नीरज सिंह बबलू जैसे कुछ पुराने मंत्री फिर से सरकार में आ सकते हैं। सम्राट चौधरी की सरकार में पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा को क्या मिलेगा? सीएम सम्राट और डिप्टी सीएम विजय और बिजेंद्र को छोड़कर नीतीश कैबिनेट में मंत्री रहे सारे नेता फिलहाल पूर्व मंत्री बने हुए हैं। नीतीश की अगुवाई वाली सरकारों में मंत्री रहे ज्यादातर नेता इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि उनको फिर मौका मिलेगा या नहीं और मिला तो मंत्रालय पुराना रहेगा या बदल जाएगा। इन पूर्व मंत्रियों में सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा की हो रही है, जिन्हें पहली किस्त में सरकार में जगह नहीं मिल पाई। सोशल मीडिया पर इसे लेकर पॉजिटिव और नेगेटिव चीजों की भरमार लगी है। विजय सिन्हा को मंत्री बनाया जाएगा, इस पर संशय नहीं है, लेकिन पुराने मंत्रालय ही मिलेंगे या और बड़ा मंत्रालय मिलेगा, इस पर अटकलबाजी चल रही है। नीतीश सरकार में विजय कुमार सिन्हा के पास राजस्व और भूमि सुधार, खनन और भूतत्व के अलावा भाजपा के अध्यक्ष बने नितिन नबीन के इस्तीफे के बाद से नगर विकास और आवास विभाग भी था। राजस्व और भूमि सुधार में विजय का तेवर भरा रूप दिख रहा था। चर्चा है कि उन्हें पथ निर्माण विभाग का मंत्री बनाया जा सकता है, जो पिछली सरकार में नितिन नबीन के बाद दिलीप जायसवाल को मिला था। सम्राट चौधरी सरकार में दीपक कुशवाहा का क्या होगा, चिराग और मांझी बदलेंगे मंत्री? चिराग पासवान की लोजपा-आर, जीतनराम मांझी की हम और उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो को पहले की तरह कैबिनेट में 2-1-1 मंत्री मिलेंगे, यह मोटा-माटी तय दिख रहा है। जीतनराम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन और उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश कुशवाहा फिर से मंत्री बनेंगे, यह भी तय दिख रहा है। चिराग पासवान भी अपने दोनों पुराने मंत्री संजय पासवान और संजय सिंह को रिपीट करेंगे, इसकी प्रबल संभावना है।

राजा का परिवार हाईकोर्ट में उठाएगा सोनम की जमानत के खिलाफ मामला, मां ने कहा- ‘वो किसी के साथ कुछ भी कर सकती है

इंदौर इंदौर के बहुचर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड की आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत मिलने के बाद अब राजा का परिवार उसकी जमानत खारिज कराने की कोशिश में जुट गया है. इसे लेकर राजा के भाई विपिन ने शिलांग के वकील से बात की है और हाईकोर्ट में जमानत रद्द कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है. वकील ने उनसे संबंधित दस्तावेज भेज दिए हैं, जिन पर साइन कर वे दोबारा वापस भेजेंगे. मालूम हो कि राजा रघुवंशी हनीमून मनाने पत्नी सोनम के साथ शिलांग गए थे. जहां उनकी पत्नी ने ही प्रेमी के साथ मिलकर उनकी हत्या करवा दी थी. पिछले साल सामने आए इस केस ने पति-पत्नी के प्यार और भरोसे वाले रिश्ते पर गंभीर सवाल खड़े किए थे. कई दिनों तक चली जांच के बाद सोनम को यूपी के गाजीपुर से गिरफ्तार किया गया था. लेकिन अब सोनम को जमानत मिलने से इस मामले की यादें फिर से ताजा हो गई है।  हाई कोर्ट में सोनम की जमानत खारिज करने की दायर करेंगे याचिका राजा रघुवंशी के भाई विपिन रघुवंशी ने कहा, "मैंने वकील से बात की तो उन्होंने बताया कि सोनम को जब गाजीपुर से पुलिस ने गिरफ्तार किया था तो गिरफ्तारी की वजह नहीं बताई थी. इसी आधार पर कोर्ट ने सोनम को जमानत दी है. अब हाई कोर्ट में सोनम की जमानत खारिज करने के लिए अपील दायर करेंगे।  राजा की मां बोलीं- सोनम को फांसी देनी चाहिए थी राजा रघुवंशी की मां उमा रघुवंशी ने कहा, "हमें कानून पर पूरा भरोसा था, फिर भी सोनम को जमानत दे दी गई. सरकार को सोनम को नहीं छोड़ना चाहिए था, बल्कि उसे फांसी देनी चाहिए थी. गोविंद रघुवंशी पूरे मामले का मास्टरमाइंड है. गोविंद ने पैसा देकर सबको खरीद लिया है और जमानत में भी मदद की है. सोनम रघुवंशी अगर माफी मांगने भी इंदौर आती है तो उसे माफ नहीं करेंगे।  राजा की मां बोली- सोनम किसी के साथ कुछ भी कर सकती है उन्होंने कहा कि सोनम रघुवंशी को आखिर जमानत कैसे मिल गई, जब वह गुनहगार है? सोनम ने अपने पति को अपनी आंखों के सामने मरवाया था, तो जमानत किस आधार पर मिल गई? हमें तो भरोसा था कि इंसाफ मिलेगा, लेकिन नहीं मिला. प्रधानमंत्री से मांग की है कि सीबीआई की जांच कराई जाए. सोनम किसी के साथ मिलकर कुछ भी कर सकती है, इसलिए उनके परिवार को खतरा है।  26 मई को शिलांग से लापता हुए थे राजा, बाद में मिली थी लाश बता दें कि राजा रघुवंशी और उनकी पत्नी सोनम 21 मई 2025 को हनीमून मनाने शिलांग गए थे. यहां से दोनों 26 मई को सोहरा घूमने गए, जहां दोनों लापता हो गए थे. पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय टीमों ने बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया. करीब एक हफ्ते बाद 2 जून 2026 को राजा का शव सोहरा के मशहूर वेई सादोंग फॉल्स के पास एक गहरी खाई में मिला था।  अदालत में क्या हुआ राज कुशवाहा की जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. उसके वकील पी. योबिन ने कहा कि उन्होंने अदालत के सामने सभी जरूरी पक्ष रख दिए हैं और अब फैसले का इंतजार है. उन्होंने यह भी कहा कि बाकी आरोपियों की जमानत याचिकाएं भी जल्द दायर की जाएंगी।  वकील से बात कर शुरू की प्रक्रिया  विपिन ने बताया कि जमानत खारिज कराने के लिए उन्होंने शिलॉन्ग में वकील से संपर्क किया है। वे खुद शिलॉन्ग नहीं जाएंगे, लेकिन सभी कागजी प्रक्रिया पूरी करेंगे, ताकि हाईकोर्ट में अपील की जा सके। वकील ने उनसे जुड़े दस्तावेज भेज दिए हैं। विपिन ने बताया कि कागज मिल चुके हैं और वे साइन कर जल्द ही वापस भेजेंगे, जिससे अपील दाखिल की जा सके। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में करीब एक हफ्ते का समय लग सकता है। 11 मई 2025 को शादी, 21 को हनीमून और 23 को हुई थी राजा की हत्या राजा रघुवंशी की सोनम से शादी इसी साल 11 मई 2025 को हुई थी। सोनम रघुवंशी और राजा 21 मई को हनीमून मनाने के लिए मेघालय के शिलॉन्ग गए थे, जहां 23 मई को हनीमून के दौरान लापता हो गए। 10 दिन बाद पुलिस ने 30 फीट गहरी खाई से उनका क्षत-विक्षत शव बरामद किया, जिस पर धारदार हथियार से किए गए कई घाव थे। सोनम तब लापता थी। इसके बाद यूपी में उसने सरेंडर किया था। उससे पूछताछ के बाद आकाश, आनंद और विशाल को पकड़ा था। सोनम के राज कुशवाहा से प्रेम सबंध थे। हालांकि, उसके परिवार ने इस बात से इनकार किया था। पत्नी सोनम राजा को दर्शनीय स्थलों की सैर के बहाने एक सुदूर स्थान पर बुलाकर ले गई थी। उनके पीछे अन्य तीनों हत्या के आरोपी भी चले गए थे। फिर दो छुरों से वार कर उसकी हत्या कर दी, जिनमें से एक छुरा बाद में जंगल से बरामद किया गया। सोनम घटनास्थल से भाग गई और बाद में उसने उत्तर प्रदेश में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। सोनम और राज सहित सभी पांचों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। सोनम को कैसे मिली जमानत सोनम रघुवंशी को जमानत देते समय अदालत ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए. अदालत ने पाया कि गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों में जिन धाराओं का उल्लेख किया गया था, उनमें त्रुटियां थीं. अदालत ने कहा कि आरोपी को यह स्पष्ट रूप से बताना जरूरी होता है कि उसे किस अपराध और किस धारा के तहत गिरफ्तार किया गया है. लेकिन इस मामले में यह प्रक्रिया सही तरीके से पूरी नहीं हुई. पुलिस ने इसे लिपिकीय गलती बताया, लेकिन अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया. अदालत का मानना था कि यह गलती आरोपी के अधिकारों को प्रभावित करती है. अदालत ने एक और महत्वपूर्ण बिंदु पर ध्यान दिया. आदेश में कहा गया कि ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि सोनम को गिरफ्तारी के बाद वकील की सुविधा दी गई थी. जब उसे पहली बार गाजीपुर अदालत में पेश किया गया, तब भी यह स्पष्ट नहीं था कि उसे कानूनी सलाह का अवसर मिला या नहीं।  जमानत की शर्तें हालांकि अदालत ने जमानत दी है, लेकिन इसके साथ … Read more

पॉलिटेक्निक छात्रों का कमाल, वेस्ट मटेरियल से तैयार की पेट्रोल से चलने वाली ऑफ-रोड बग्गी

अंबाला अक्सर कहा जाता है कि यदि इंसान ठान ले तो सीमित संसाधनों से भी बड़े काम किए जा सकते हैं. दरअसल जुगाड़, हुनर और जज़्बा, जब ये तीनों एक साथ मिलते हैं, तो साधारण संसाधन भी असाधारण नतीजे दे जाते हैं. बता दें कि, इस कहावत को सच कर दिखाया है राजकीय पॉलिटेक्निक, अंबाला के ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग के छात्रों ने, जिन्होंने कबाड़ यानी वेस्ट मटेरियल से एक अनोखी छोटी गाड़ी (बग्गी) तैयार कर सबको चौंका दिया है. वहीं छात्रों ने अपनी इस अनूठी रचना का नाम “यमदूद” रखा है, जो इन दिनों काफी ज्यादा चर्चा का विषय बनी हुई है. वही इस बग्गी को तैयार करने में लोहे के पाइप और पुराने वाहनों के अनुपयोगी पार्ट्स का इस्तेमाल किया गया है. हैरानी की बात तो यह है कि इस पूरी गाड़ी को बनाने में छात्रों का केवल लगभग 80 हजार रुपये का खर्चा आया हैं. हालांकि, इस बग्गी में उपयुक्त अधिकांश सामग्री पहले से उपलब्ध कबाड़ से ली गई, जिससे लागत बेहद कम रही है ओर छोटी गाड़ी का एक अच्छा मॉडल तैयार हुआ हैं. इस बग्गी की खासियत सिर्फ इसकी कम लागत ही नहीं हैं, बल्कि इसमें दिए गए आधुनिक सेफ्टी फीचर्स ओर मनोरंजन के स्पीकर लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं. गाड़ी को तैयार करने में 80 हजार रुपए का आया खर्चा वहीं इस बारे में लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए छात्र नैतिक ने बताया कि उनके द्वारा बनाई गई, यह गाड़ी टूटी सड़कों के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद है क्योंकि यह ऑफ रोड पर काफी आराम से चलती हैं. उन्होंने कहा कि इसका डिजाइन भी इस तरह से तैयार हुआ है कि इसका वेट काफी कम है और दूसरी गाड़ियों के मुकाबले इसका इंजन गाड़ी के आखरी में रखा गया है. ताकि यह सही ढंग से चल सके और खेतों में दूसरी गाड़ियों के मुकाबले बिल्कुल कंफर्टेबल तरीके से कार्य करें. उन्होंने बताया कि इस गाड़ी को तैयार करने में उनका लगभग 80 हजार रुपए का खर्चा आया है, ओर सभी साथियों ने मिलकर यह अपने खर्चे पर गाड़ी (बग्गी) तैयार की हैं. उन्होंने कहा कि इस बग्गी को बनाने में पांच लोगों को दो महीने का समय लगा है ओर इसके इंजन के ऊपर एक बड़ा फेन, पंखा लगाया है ताकि वह ठंडा रह सके. उन्होंने बताया कि यह गाड़ी पेट्रोल से चलती है और लगभग 1 लीटर पेट्रोल में 20 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है, जो इसे किफायती भी बनाता है. उन्होंने बताया वेस्ट पाइप और प्लास्टिक के साथ-साथ गाड़ी के पार्ट्स की मदद से यह बग्गी तैयार हुई है, और इसमें सेफ्टी के लिए लाइटिंग व मनोरंजन के लिए म्यूजिक सिस्टम लगाया हैं. वहीं छात्र तुषार ने बताया कि ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग फील्ड में उन्हें गाड़ी के इंजन के बारे में पढ़ाया गया था, जिसके बाद उनके मन में विचार आया कि क्यूं न वह वेस्ट मटेरियल से एक गाड़ी तैयार करें. उन्होंने बताया कि इस गाड़ी में फिर 624 सीसी का इंजन फिट किया गया था और अब वह इस गाड़ी को काफी आसानी से चला पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस गाड़ी में आगे दो लोग बैठ सकते हैं और पीछे तीन लोगों के खड़े होने की व्यवस्था की गई है. उन्होंने बताया कि इस गाड़ी में फीचर दूसरे गाड़ियों के मुकाबले काफी ज्यादा बदले गए हैं और इसमें टेक्निकल चेंज करके बग्गी के मॉडल को तैयार किया हैं. उन्होंने कहा कि जल्द वह इस गाड़ी को मार्केट में उतारेंगे और फिर यह ग्रामीण क्षेत्र में काफी ज्यादा फायदेमंद साबित होगी.

आर्थिक संकट के अंधेरे से उबरकर रोशन हुआ कुसुम बाई का घर

​रायपुर     जनकल्याणकारी योजनाओं की सफलता का पैमाना वह मुस्कान है, जो किसी गरीब के चेहरे पर तब आती है, जब उसे उम्मीद की नई किरण दिखाई देती है। छत्तीसगढ़ शासन की ‘मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026’ आज प्रदेश के हजारों परिवारों के लिए ऐसी ही एक उम्मीद बनकर उभरी है। धमतरी जिले की कुसुम बाई सतनामी की कहानी इस योजना की संवेदनशीलता और प्रभावशीलता का जीवंत उदाहरण है। बढ़ता कर्ज और मानसिक तनाव        ​धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के ग्राम चरमुडिया की निवासी  कुसुम बाई सतनामी का परिवार पिछले काफी समय से आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा था। सीमित आय और परिवार की अन्य अनिवार्य जरूरतों के बीच बिजली बिल का भुगतान पीछे छूटता गया। देखते ही देखते बकाया राशि का पहाड़ खड़ा हो गया और कुल राशि 37 हज़ार 70 रुपए तक जा पहुँची। भारी भरकम बिल और ऊपर से बढ़ता अधिभार (सरचार्ज) कुसुम बाई के लिए मानसिक और आर्थिक बोझ बन चुका था। ​ योजना बनी मददगार     ​जब कुसुम बाई को शासन की नई समाधान योजना की जानकारी मिली, तो उन्होंने बिना देर किए आवेदन किया। विद्युत विभाग के सहयोग से प्रक्रिया इतनी सरल रही कि उन्हें शीघ्र ही योजना का लाभ मिल गया।​कुसुम बाई को ​कुल बकाया राशि: 37 हज़ार 70 रुपए में से 28 हज़ार 640 रुपए की छूट प्रदान की गई।इसमें ​विशेष लाभ के रूप में अधिभार (सरचार्ज) में 100% की माफी दी गई। इस प्रकार शेष राशि के भुगतान हेतु आसान किस्तों का विकल्प मिलने से बिल पटाने की चिंता से मुक्ति मिली। इस पर  कुसुम बाई ने कहा कि बकाया बिल को लेकर मैं हमेशा चिंता में रहती थी। समझ नहीं आ रहा था कि इतनी बड़ी राशि कहाँ से लाऊंगी। लेकिन इस योजना ने मेरा 28 हज़ार रुपए से ज्यादा का बोझ कम कर दिया। अब मैं नियमित रूप से बिल जमा कर पा रही हूँ। मुख्यमंत्री जी को बहुत-बहुत धन्यवाद। ​धमतरी जिले में योजना की शानदार प्रगति      ​ कुसुम बाई केवल एक उदाहरण हैं, धमतरी के कुरूद विकासखंड और पूरे जिले में यह योजना एक जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है। अब तक जिले में 4,652 हितग्राहियों की पहचान की गई है, जिनमें से 4,115 उपभोक्ता आवेदन की प्रक्रिया पूर्ण कर चुके हैं। कुल 537 उपभोक्ताओं को अब तक प्रत्यक्ष लाभ मिल चुका है। ​यह योजना विशेष रूप से राज्य के उन वर्गों को लक्षित कर बनाई गई है जो किन्हीं कारणों से विकास की मुख्यधारा से पीछे छूट गए थे। ​बी.पी.एल. एवं घरेलू उपभोक्ताओं के आर्थिक बोझ कम करने हेतु विशेष प्रावधान किया गया है। इसी तरह  अन्नदाताओं कृषकों को बकाया से मुक्ति दी गई है। इस योजना के तहत मूल बकाया राशि पर 50 से 75 प्रतिशत तक की छूट और सरचार्ज की पूरी माफी दी गई है। संवेदनशीलता का सशक्त उदाहरण        ​मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026 केवल एक वित्तीय राहत की योजना नहीं है, बल्कि यह शासन की पारदर्शिता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है। यह योजना लोगों को डिफॉल्टर की श्रेणी से बाहर निकालकर उन्हें एक 'नियमित और सम्मानित उपभोक्ता' के रूप में नई शुरुआत करने का अवसर दे रही है। धमतरी की कुसुम बाई जैसी हजारों माताओं-बहनों के घरों में आज जो बिजली की रोशनी है, उसके पीछे शासन की इसी कल्याणकारी सोच का हाथ है।

कैबिनेट विस्तार से पहले बीजेपी की रणनीति, अरविंद शर्मा को बनाया MLC उम्मीदवार

पटना बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और दो डिप्टी सीएम वाली नई सरकार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पूर्व उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा को कैबिनेट विस्तार तक के लिए इंतजार कराने से भूमिहार समाज में उपजी नाराजगी को भाजपा मैनेज करने में जुट गई है। विधायक बन चुके पार्टी के वरिष्ठ नेता मंगल पांडेय के इस्तीफे से खाली हुई विधान परिषद की एक सीट के लिए हो रहे उप-चुनाव में भाजपा ने 46 साल पुराने कार्यकर्ता अरविंद शर्मा को टिकट दिया है। विधानसभा कोटे की इस सीट पर 202 विधायकों के समर्थन वाले एनडीए के कैंडिडेट अरविंद शर्मा की जीत तय है, जो भूमिहार जाति से हैं। अरविंद शर्मा को टिकट मिलने को पार्टी से शुरुआत से जुड़े कार्यकर्ताओं के समर्पण का इनाम बताया जा रहा है। अरविंद शर्मा ने गुरुवार को नामांकन के आखिरी दिन पर्चा भरा है। उनके साथ दौरान सीएम सम्राट चौधरी, डिप्टी सीएम विजय चौधरी, जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, जदयू विधायक दल के नेता श्रवण कुमार और लोजपा-आर के विधायक दल के नेता राजू तिवारी समेत एनडीए गठबंधन के अन्य नेता मौजूद रहे। विपक्ष के पास इतने विधायक नहीं हैं कि वो चुनाव लड़ने की भी सोच सके। इसलिए अरविंद शर्मा इस चुनाव में इकलौते कैंडिडेट होने के आधार पर निर्विरोध जीत जाएंगे। कोई कैंडिडेट आ जाता है तो 12 मई को मतदान और फिर उसी शाम को नतीजे आएंगे। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की सरकार के दौर में नक्सलियों और रणवीर सेना के संघर्ष का केंद्र रहे जहानाबाद से काटकर बनाए गए अरवल जिले के बंभई गांव के रहने वाले अरविंद शर्मा पटना में रहते हैं। भाजपा में पहले जिलाध्यक्ष और जिलों में प्रभारी रह चुके अरविंद शर्मा को सम्राट चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष कार्यकाल में बिहार कार्यालय का प्रभारी बनाया गया था। भाजपा के अध्यक्ष नितिन नवीन के दिवंगत पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा और अरविंद शर्मा एक दौर के नेता हैं और गहरे मित्र रहे हैं। अरविंद शर्मा एक बार विधानसभा चुनाव लड़ने की रेस में थे, लेकिन टिकट का समीकरण नहीं बन पाया था। अब उनको पक्की जीत वाली सीट से एमएलसी का टिकट मिलने से पुराने कार्यकर्ताओं में उत्साह है कि पार्टी नेतृत्व कब किसे धैर्य का धमाकेदार तोहफा दे, कोई नहीं जानता। विधान परिषद में जून में 9 और सीटें खाली हो रही है, जिसका चुनाव मजेदार होगा। विपक्ष के पास जितने विधायक हैं, उसमें एकजुटता दिखाने पर एक सीट निकल सकती है। बाकी 8 सीटों पर एनडीए के कैंडिडेट बाजी मारेंगे, ऐसा माहौल दिख रहा है। अगले चुनाव में रालोमो अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश कुशवाहा को मौका मिलने को लेकर भी अटकलों का बाजार गर्म है।

पेंड्रा के मेधावी विद्यार्थियों से वीडियो कॉल

रायपुर छत्तीसगढ़ में बोर्ड परीक्षाओं में सफलता हासिल करने वाले विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कैबिनेट मंत्री  राजेश अग्रवाल ने अपने प्रभार क्षेत्र पेंड्रा के मेधावी विद्यार्थियों ताहिरा खान, भूमिका और ओंकार केंवट से वीडियो कॉल के माध्यम से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को उनकी उत्कृष्ट सफलता पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।        मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि विद्यार्थियों की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने विद्यार्थियों के परिश्रम, अनुशासन और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सफलता अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी। उन्होंने विद्यार्थियों को आगे भी इसी लगन और मेहनत के साथ अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।        इस अवसर पर उन्होंने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की कक्षा 10 वीं एवं 12 वीं की मुख्य परीक्षा में सफल होने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके अभिभावकों और गुरुजनों के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता में शिक्षकों के मार्गदर्शन और अभिभावकों के सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मंत्री  अग्रवाल ने सभी सफल विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें आगे की पढ़ाई और जीवन में निरंतर सफलता प्राप्त करने के लिए शुभकामनाएँ दीं।

शहर में पीएम आवास योजना के आवेदन को लेकर निगम ने लगाया कैंप, पात्र लोगों को मिलेगा लाभ

रांची रांची नगर निगम की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत शहर के विभिन्न वार्डों में विशेष कैंप लगेगा। गुरुवार से इसकी शुरुआत होगी। पहले दिन कुल आठ वार्डों में शिविर लगेंगे। इस पहल का उद्देश्य ऐसे पात्र व वंचित लोगों तक योजना का लाभ पहुंचाना है, जिनके पास देश में कहीं भी पक्का मकान नहीं है और जो अब तक किसी कारणवश इस योजना से वंचित रह गए हैं। शिविर में केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार आवेदन लिए जाएंगे। निगम के मुताबिक, आवेदन परिवार के महिला या पुरुष मुखिया के नाम से होगा, जिसमें पति-पत्नी और अविवाहित बच्चे शामिल होंगे। आवेदक या उसके परिवार के किसी भी सदस्य के नाम पर भारत में कहीं भी पक्का मकान नहीं होना चाहिए। साथ ही, जो लोग पहले से किसी सरकारी आवास योजना का लाभ ले चुके हैं, वे इसके लिए पात्र नहीं होंगे। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के ऐसे परिवार, जिनकी वार्षिक आय तीन लाख रुपये से कम है, आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज आवेदन के लिए भूमि से संबंधित अद्यतन कागजात, परिवार की फोटो, पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, बैंक पासबुक, आय प्रमाण पत्र, आवास होल्डिंग रसीद, स्व-प्रमाण पत्र एवं पक्का मकान नहीं होने का शपथ पत्र समेत अन्य दस्तावेज आवश्यक हैं। इस दौरान लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन देने की सुविधा मिलेगी। इन वार्डों में यहां लगेंगे शिविर वार्ड संख्या स्थान 1,2 और 3 जोगो पहाड़, एदलहातू 4 और 5 पहान टोली, अटल क्लिनिक 7,11 और 12 दुर्गा सोरेन चौक, हाई टेंशन मैदान कल इन आठ वार्डों में यहां शिविर लगेंगे और लोग प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन कर सकेंगे और इस बारे में जानकारी भी मिल जाएगी। वार्ड संख्या स्थान 13,14 और 46 वार्ड कार्यालय, बहु बाजार चुटिया 6 और 8 सामुदायिक भवन, क्लिनिक 15,16 और 17 कर्बला चौक, निगम कार्यालय इसी प्रकार चार मई को वार्ड संख्या 25 व 26 में कार्तिक उरांव चौक, 27, 28 व 29 को सेल्टर हाउस मधुकम, 24 व 43 को कडरू दुर्गा मंदिर, 30, 32, 33 और 34 को सामुदायिक भवन टंगराटोली में शिविर लगेगा। पांच मई को वार्ड संख्या 37, 38, 39, 40, 41, 42, 49 व 35 में शिविर लगेगा। छह मई को वार्ड संख्या 44, 45, 48, 18, 19, 9 व 10 में शिविर लगेगा। सात मई को कुल ग्यारह वार्डों में शिविर लगेगा। इसमें वार्ड संख्या 20, 21, 22, 23, 47, 36, 31, 50, 51, 52 व 53 शामिल हैं।

बड़ी राहत: Bihar में CO अधिकारियों की हड़ताल टली, 4 मई से सेवाएं बहाल

पटना. बिहार में 9 मार्च 2026 से अनिश्चितकालीन सामूहिक हड़ताल पर गए अंचलाधिकारियों ने हड़ताल स्थगित (Bihar CO Strike News) करने का फैसला लिया है। संयुक्त मोर्चा, बिहार राजस्व सेवा महासंघ ने हड़ताल को स्थगित करने को लेकर आधिकारिक बयान जारी किया है। बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन में भरोसा रखते हुए और व्यापक जनहित को सर्वोपरि रखते हुए अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश (हड़ताल) को स्थगित करने का सर्वसम्मत निर्णय लिया गया है। आगे कहा गया कि यह निर्णय आम जनजीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए तथा प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। 4 मई को दफ्तर जाएंगे सीओ बयान में यह भी स्पष्ट रूप से कहा गया कि संयुक्त मोर्चा के सभी सदस्य (अंचलाधिकारी) 04.05.2026 तिथि को अपने-अपने पदस्थापन स्थल पर योगदान करेंगे। सरकार से मोर्चा को उम्मीद संयुक्त मोर्चा ने कहा है कि उनको उम्मीद है कि बिहार सरकार सकारात्मक एवं ठोस कदम उठाएगी तथा भूमि सुधार उप समाहर्ता सहित पूर्व में प्रस्तुत 11 सूत्री मांग-पत्र पर गंभीरता पूर्वक विचार कर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। सरकार को अब 2 महीने का अल्टीमेटम हालांकि, मोर्चा की ओर यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर निर्धारित समयावधि (2 महीने) के भीतर मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जाती है, तो संयुक्त मोर्चा फिर से सामूहिक अवकाश (हड़ताल) पर जा सकता है।