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बैठक में गरजे CM साय: अधूरी रिपोर्ट पर PWD अधिकारी को लगाई कड़ी फटकार

रायपुर. विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार के तहत बलरामपुर प्रवास के दौरान समीक्षा बैठक में प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया. समीक्षा बैठक के दौरान लोक निर्माण विभाग के एक अधिकारी द्वारा सड़क मरम्मत की सही जानकारी नहीं देने पर मुख्यमंत्री ने कड़ी फटकार लगाई और स्पष्ट निर्देश दिया कि मीटिंग से बाहर जाकर सही जानकारी लेकर आइए. इस घटनाक्रम के बाद बैठक में सन्नाटा छा गया और यह संदेश साफ हो गया कि अब किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी. सीएम ने अधिकारियों के बीच यह स्पष्ट किया है कि जनहित से जुड़े कामों को समय और प्राथमिकता के साथ पूरा किए जाए.  समय सीमा से पूरे हों काम मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार का विकास सड़कों से ही दिखाई देता है, इसलिए मानसून से पहले सभी सड़कों की मरम्मत अनिवार्य रूप से पूरी की जाए. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आबादी वाले क्षेत्रों की सड़कों को प्राथमिकता दी जाए और समय-सीमा में काम पूरा किया जाए, अन्यथा सख्त कार्रवाई के लिए तैयार रहें. उन्होंने प्रशासनिक अमले को संबोधित करते हुए कहा कि सभी अपने कार्यालयों को “सेवा तीर्थ” मानें, जहां जनता की सेवा सर्वोच्च प्राथमिकता हो. साथ ही कलेक्टरों को अपने अधीनस्थ अधिकारियों के काम का नियमित मूल्यांकन करने और जरूरत पड़ने पर कठोर कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. जल्द शुरू होगी सीएम हेल्पलाइन मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य के राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जाएगा, जिससे नागरिकों को खसरा-नक्शा डिजिटल हस्ताक्षर के साथ घर बैठे मिल सकेगा. इसके अलावा “मुख्यमंत्री हेल्पलाइन” भी जल्द शुरू की जाएगी, जहां टोल फ्री नंबर पर आमजन अपनी समस्याएं दर्ज करा सकेंगे. बैठक में उन्होंने DMF फंड के उपयोग को लेकर भी सख्त निर्देश दिए और कहा कि इसका उपयोग केवल खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास में ही किया जाए.

एमपी में बिजली बिल में सरचार्ज का तगड़ा झटका, एक महीने तक बढ़ेगी जेब पर अतिरिक्त खर्च

भोपाल  प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं पर अप्रैल माह के बिल में अतिरिक्त शुल्क लागू किया गया है। मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (MPPMCL) ने फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPAS) की दर 5.36 प्रतिशत तय की है। यह दर उपभोक्ताओं के बिजली बिल में ऊर्जा शुल्क के साथ जोड़ी जाएगी। बिजली कंपनियों ने एक महीने पहले ही बिजली दरों में 4.8 प्रतिशत का इजाफा किया था। यह सरचार्ज 24 अप्रैल 2026 से 24 मई 2026 एक महीने की अवधि के लिए लागू रहेगा।  कंपनी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अप्रैल 2026 के लिए FPPAS की गणना 5.40 प्रतिशत आई थी। नियामक आयोग के नियमों के तहत यदि यह 5 प्रतिशत से अधिक होता है तो 5 प्रतिशत मूल रूप से लागू किया जाता है और शेष राशि का 90 प्रतिशत जोड़कर अंतिम दर तय की जाती है। इसी आधार पर 5.36 प्रतिशत FPPAS निर्धारित किया गया है। इस दौरान उपभोक्ताओं को अपने बिजली बिल में ऊर्जा शुल्क के साथ यह अतिरिक्त राशि भी चुकानी होगी। इसके बाद अगले महीने के लिए दरें अलग से तय की जाएंगी, जो उस समय की फ्यूल और पावर खरीद लागत पर निर्भर करेंगी।  इस आदेश के तहत सभी बिजली वितरण कंपनियों पूर्व, मध्य और पश्चिम क्षेत्र को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस सरचार्ज को उपभोक्ताओं के बिल में शामिल करें और इसकी जानकारी अपनी वेबसाइट पर भी सार्वजनिक करें। इस फैसले से घरेलू और व्यावसायिक दोनों उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में बढ़ोतरी होगी। पहले से ही महंगाई के दबाव में चल रहे उपभोक्ताओं पर यह अतिरिक्त शुल्क आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला माना जा रहा है।  चुपचाप बढ़ा दिए बिजली के दाम बताया जा रहा है कि, बिजली कंपनियों को बिजली खरीदने में ज्यादा खर्च आ रहा है, जिसका बोझ अब बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर डाला जा रहा है। हालांकि, इस बढ़ोतरी को लेकर अबतक विभागीय अधिकारियों की ओर से किसी तरह की जानकारी या सफाई नहीं दी गई है। आम लोगों के बजट पर पड़ेगा असर ज्यादातर लोगों को अभी तक इसकी जानकारी भी नहीं है। सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि बार-बार इस तरह की बढ़ोतरी से आम लोगों का घरेलू बजट प्रभावित होता है और लोगों में नाराजगी भी बढ़ सकती है। अब आम आदमी को 4.26 की जगह 11 प्रतिशत ज्यादा बिल चुकाना होगा। बढ़ने लगी लोगों की चिंता मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड ने अप्रैल 2026 के लिए फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज की नई दर 5.36 फीसदी तय कर दी है। इसके बाद मई 2026 से कुल 6 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है, जबकि मार्च 2026 में ये दर ऋणात्मक 0.63 प्रतिशत थी। राज्य में पहले अप्रैल 2026 से 4.8 फीसद की बढ़ोतरी हुई थी। इस तरह लगातार जारी बिजली दरों में बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालांकि, इस तरह हुई बढ़ोतरी को लेकर अधिकारी कोई जवाब नहीं दे रहे हैं। -बिजली कंपनी ने अप्रैल और मई 2026 से बिजली बिल में कुल मिलाकर करीब 11 फीसदी सरचार्ज की बढ़ोतरी की गई है। -इस बढ़ोतरी का असर प्रदेश के गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों की जेब पर पड़ेगा। -कंपनियों को बिजली खरीदने में ज्यादा खर्च आ रहा है, जिसका बोझ अब बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर डाला गया है। -हालिया बढ़ोतरी को लेकर अबतक विभागीय अधिकारियों की ओर से किसी तरह की जानकारी या सफाई नहीं दी गई है। यानी ये बढ़ोतरी चुपचाप कर दी गई है। 

UP के 1.43 लाख शिक्षामित्रों के लिए खुशखबरी, बढ़े मानदेय के बाद सम्मान कार्यक्रम

 लखनऊ उत्तर प्रदेश के 1:43 लाख शिक्षा मित्रों के लिए 5 मई का दिन बेहद खास होने जा रहा है। योगी सरकार ने शिक्षामित्रों के मानदेय में वृद्धि के बाद अब उनके सम्मान को भी प्राथमिकता देते हुए व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। इस पहल को प्रदेशव्यापी स्वरूप देते हुए आगामी 5 मई को गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्यस्तरीय भव्य कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। 18,000 रुपए प्रतिमाह मानदेय के साथ लगभग 1.43 लाख शिक्षामित्रों को इस प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा, जिसके माध्यम से पूरे प्रदेश में स्पष्ट तौर पर यह संदेश देने की कोशिश की जाएगी कि शिक्षा व्यवस्था की नींव को मजबूत करने वाले शिक्षामित्रों को अब उचित पहचान और संबल मिल रहा है। योगी कैबिनेट की मंजूरी के बाद प्रदेश के शिक्षा मित्रों को अप्रैल महीने से ही बढ़े हुए मानदेय का लाभ मिलना शुरू हो चुका है। अब 5 मई को गोरखपुर के बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह से मुख्यमंत्री इसका औपचारिक शुभारंभ करेंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिक्षा मित्रों के साथ संवाद भी करेंगे। पांच मई को सुबह 11 बजे होने वाले इस कार्यक्रम के समानांतर प्रदेश के सभी जनपदों में भी आयोजन कर इसे व्यापक रूप दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग 1.43 लाख शिक्षामित्रों के लिए लिया गया यह निर्णय अब पूरी तरह लागू हो चुका है। 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी इस व्यवस्था के अंतर्गत बेसिक शिक्षा के 13,597 और समग्र शिक्षा के 1,29,332 शिक्षामित्रों को 18,000 रुपए प्रतिमाह की दर से भुगतान किया जा रहा है। योगी सरकार का कहना है कि इससे उनका आर्थिक सशक्तीकरण हुआ है। योगी सरकार का कहना है कि प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र में सुधार और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है। पहले मानदेय में वृद्धि और अब उन्हें सम्मान देने के लिए की जा रही यह पहल शिक्षामित्रों के मनोबल को बढ़ाने के साथ-साथ विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को भी नई दिशा देगी। गोरखपुर में पांच मई को होने जा रहा यह आयोजन शिक्षा सुधार के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। लाइव प्रसारण और व्यापक भागीदारी शिक्षा मित्रों के लिए गोरखपुर के आयोजित इसा कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दूरदर्शन और मुख्यमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर किया जाएगा, जिससे प्रदेश भर के शिक्षा मित्र इस अवसर के साक्षी बन सकें। साथ ही, सभी जनपदों में भी समानांतर रूप से आयोजन किए जाएंगे, जहां स्थानीय स्तर पर जन-प्रतिनिधियों, अधिकारियों, शिक्षकों और शिक्षा मित्रों की भागीदारी उल्लेखनीय होगी।

ग्रामीण विकास में बड़ा बदलाव, रेरा की तर्ज पर बनेगा नया प्राधिकरण

पटना बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब बहुमंजिली इमारत या मकान के निर्माण के पूर्व इसका नक्शा पास कराना अनिवार्य होगा। जल्द ही यह प्रावधान लागू हो सकता है। पंचायती राज विभाग ने इसके लिए नियमावली का प्रारूप तैयार कर लिया है। इस पर विधि विभाग और उच्चस्तरीय कमेटी से मंजूरी ली जाएगी। नियमावली के प्रारूप को राज्य मंत्रिपरिषद से मंजूरी मिलने के बाद विधानमंडल से पारित कराया जाएगा। शहरों से सटे ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में अपार्टमेंट निर्माण को देखते हुए यह तैयारी की जा रही है। नियमावली में रेरा (रियल एस्टेट विनिमय और विकास अधिनियम) की तर्ज पर प्राधिकार गठित करने का प्रावधान है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाली बहुमंजिली इमारत के नक्शे को स्वीकृति देगा। यह बिल्डरों को परियोजना रजिस्टर करने (500 वर्गमीटर से अधिक) पर खरीदार की राशि का 70 फीसदी अलग खाते में रखने और समय पर कब्जा देने के लिए बाध्य करेगा। जमा कराए गए 70 फीसदी कोष का भी इस्तेमाल सिर्फ उसी परियोजना के निर्माण में किया जा सकेगा। खरीदारों को समय पर कब्जा नहीं देने की स्थिति या देरी होने पर उन्हें ब्याज सहित हर्जाना देना पड़ सकता है। प्राधिकार में बिल्डर को प्रोजेक्ट का लेआउट, योजना, सरकारी मंजूरी और काम की प्रगति की जानकारी साझा करनी होगी। इसमें निर्माण का संपूर्ण एरिया (बिल्डप एरिया) और वास्तविक जगह (कॉरपेट एरिया) भी स्पष्ट रहेगा, ताकि बिल्डर धोखे से खरीदारों से ज्यादा कीमत नहीं वसूल सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में बहुमंजिला भवन में पांच साल में दोषपूर्ण निर्माण या संरचनात्मक कमी मिलने पर बिल्डर को उसे मुफ्त में ठीक करना होगा। खरीदार संबंधित संस्था के पास बिल्डर के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

यूपी सियासत में गरमाहट: डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने सपा और ‘INDIA’ गठबंधन पर बोला हमला

नई दिल्ली पश्चिमी बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के वोटों की गिनती के रुझानों के बीच ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में सोशल मीडिया के जरिए वार-पलटवार का दौर एक बार फिर तेज हो गया है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। केशव मौर्य ने न केवल अखिलेश यादव के राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठाए, बल्कि 'इंडिया' गठबंधन के प्रमुख चेहरों—ममता बनर्जी, एमके स्टालिन और राहुल गांधी को भी निशाने पर लिया है। दरअसल पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और तमिलनाडु में स्टालिन वोटों के रुझान में हारते नजर आ रहे हैं। विपक्षी गठबंधन पर 'हाशिए' वाला प्रहार डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल (X) पर ट्वीट करते हुए लिखा कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव को अब उत्तर प्रदेश की जनता सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने क्षेत्रीय क्षत्रपों पर हमला बोलते हुए कहा कि जिन 'दीदी' (ममता बनर्जी) और 'भैया' (एम.के. स्टालिन) के भरोसे अखिलेश अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश कर रहे थे, देश की जनता ने उन्हें हाशिए पर धकेल दिया है। मौर्य ने तंज कसते हुए आगे लिखा, "अखिलेश यादव के 'भैया' राहुल गांधी का हाल तो पूरा देश पहले ही देख चुका है। हाल ही में बिहार में तेजस्वी यादव भी 'चारों खाने चित्त' हो चुके हैं। ऐसे में अखिलेश का इन नेताओं के साथ गठबंधन केवल डूबती कश्ती का सहारा है।" 2027 के 'सत्ता के सपनों' पर प्रहार केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें अब 2027 में उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी के मुंगेरीलाल के सपने देखना छोड़ देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्माई नेतृत्व और डबल इंजन सरकार के विकास कार्यों के सामने विपक्ष की नकारात्मक राजनीति पूरी तरह विफल हो चुकी है। डिप्टी सीएम ने तंज भरे लहजे में 'सपा बहादुर' शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा, "सच तो यह है कि मोदी जी के नेतृत्व में अब सपा के हिस्से में केवल 'अंतहीन इंतजार' ही लिखा है। जनता का विश्वास अब सिर्फ और सिर्फ भाजपा के साथ है।" सियासी गलियारों में चर्चा तेज केशव मौर्य का यह बयान ऐसे समय में आया है जब समाजवादी पार्टी लगातार 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे के साथ खुद को 2027 के लिए तैयार बता रही है। मौर्य का यह हमला स्पष्ट करता है कि भाजपा यूपी चुनावों से पहले सपा के राष्ट्रीय स्तर के गठबंधनों की विफलता को जनता के बीच मुद्दा बनाएगी। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि केशव मौर्य ने इस ट्वीट के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि अखिलेश यादव के सहयोगी दल उन्हें चुनावी वैतरणी पार कराने में अब सक्षम नहीं हैं।

विवाह में देरी का कारण हो सकता है वास्तु दोष, इन दिशाओं पर जरूर दें ध्यान

बढ़ती उम्र के कारण विवाह में देरी हो रही है. या फिर रिश्ते तो आ रहे हैं, लेकिन पसंद-नापसंद का झंझट हो रहा है. विवाह की बात बनते-बनते बिगड़ जाती है. यदि आपके घर में भी किसी के साथ ऐसी समस्या है तो अपने घर की कुछ विशेष दिशाओं पर ध्यान दें. इन दिशाओं का वास्तु दोष घर में मंगल कार्य, विवाह, अच्छे रिश्ते मिलने में दिक्कत पैदा कर सकता है. वैसे आजकल के सिंगल फैमिली के दौर में विवाह से संबंधित दिक्कतें आम हो गई हैं. पूर्व दिशा यदि आपकी बच्चे के लिए विवाह के रिश्ते नहीं आ रहे हैं तो घर में पूर्व दिशा को देखें कि यहां कोई वास्तु दोष तो नहीं. पूर्व दिशा आपके जीवन में सही रिश्तों को जोड़ने की दिशा है. यहां पीला रंग, टॉयलेट और रसोई का होना जीवन से ऐसे रिश्तों को दूर कर सकता है जो आपके लिए बेहतर हैं. ऐसे में लोग रिश्तों के लिए प्रयास तो करते हैं, लेकिन अच्छे रिश्ते आसानी से नहीं मिलते हैं. अच्छे और मनचाहे रिश्तों तक संपर्क ही नहीं हो पाता है. ऐसा घर की पूर्व दिशा में वास्तु दोष के कारण भी हो सकता है. इस दिशा में हरा रंग का होना अच्छा है.   दक्षिण-पूर्व दिशा आपने कई बार प्रयास किए, लेकिन घर में मंगल कार्य नहीं हो पाते हैं. जब भी सोचो कुछ न कुछ पेंच फंस जाता है. ऐसे में आपके घर की दक्षिण-पूर्व दिशा में वास्तु दोष हो सकता है. ये विवाह ही नहीं, किसी भी प्रकार का मंगल कार्य होने में दिक्कत पैदा कर सकता है. दक्षिण-पूर्व दिशा में किसी भी प्रकार से गड्ढा, टॉयलेट, नीला या काला रंग वास्तु दोष पैदा करता है. इस दिशा में वास्तु दोष आपको धन संबंधी समस्या भी देता है. पैसे के कारण मंगल कार्य और विवाह में बाधा आती है. इनकम का फ्लो बिगड़ सकता है. दक्षिण-पश्चिम दिशा यह विवाह के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिशा है. विवाह होने के लिए और विवाह टिका रहने के लिए भी दक्षिण-पश्चिम दिशा का वास्तु रहित होना जरूरी है. यह पितरों की दिशा है. इस दिशा का क्षेत्र कभी डाउन नहीं होना चाहिए. किसी भी प्रकार से अंडरग्राउंड वॉटर टैंक, जमीन में गड्ढा भी इस दिशा में वास्तु दोष पैदा करता है. यहां रसोई-टॉयलेट और हरा-नीला-काला रंग वास्तु दोष पैदा करता है. इस दिशा का वास्तु दोष जीवन में स्थिरता नहीं रहने देता है. पृथ्वी तत्व की यह दिशा विवाह होने में आ रही दिक्कतों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. विवाह के बाद जिन लोगों के वैवाहिक जीवन में समस्याएं रहती हैं, उन्हें भी अपने घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा के वास्तु दोष को अवश्य देखना चाहिए.

हरियाणा निकाय चुनाव: सीएम नायब सैनी ने सोनीपत में गिनाई उपलब्धियां, कांग्रेस पर साधा निशाना

चंडीगढ़ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी निकाय चुनावों की सरगर्मियों के बीच सोनीपत पहुंचे। आज उन्होंने सोनीपत के वॉर्ड नंबर 8 से अपने दौरे की शुरुआत की और पहले गांव राई में जनसभा को संबोधित किया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी आज सोनीपत में करीब दो दर्जन छोटी-छोटी जनसभाएं करेंगे। मेयर उम्मीदवार ने करीब 19 कार्यक्रम रखे हैं। मंच से संबोधन में सीएम नायब सिंह सैनी ने कहा कि वॉर्ड के पार्षद और मेयर को अपना आशीर्वाद देने का काम जनता करेगी। सीएम सैनी ने गिनाई उपलब्धियां सीएम ने कहा कि डेढ़ वर्ष पहले विधानसभा चुनाव में 217 संकल्पों में से 63 पूरे कर दिए गए हैं और 163 संकल्पों पर युद्ध स्तर पर काम चल रहा है जिन्हें डबल इंजन की सरकार पूरा करने का काम कर रही है।  कम आय वाले परिवारों को गैस सिलिंडर 500 रुपये में उपलब्ध करवाया जा रहा है। किसानों की पूरी फसल एमएसपी पर खरीदी जा रही है। युवाओं को बिना पर्ची-खर्ची के 2 लाख नौकरियां दी गईं। लाडो लक्ष्मी योजना लागू कर दी गई है। कांग्रेस पर बोला हमला नायब सिंह सैनी ने कांग्रेस की अन्य राज्यों की सरकारों पर हमला बोलते हुए कहा कि वहां महिलाओं को कोई सुरक्षा नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने दिल्ली में जो गलती की, वो हरियाणा में भी देखने को मिली। महिलाओं की तरफदारी करने की जगह वे बाहर बैठ गए। सीएम ने जनता से अपील की कि कमल के फूल पर बटन दबाकर मेयर और पार्षदों को जिताएं। वहीं, हरियाणा बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ोली  ने भी बीजेपी के पार्षदों और मेयर को जिताने की लोगों से अपील की।  

सूर्य गोचर से बनेगा गोल्डन पीरियड, मेष से कुंभ तक 6 राशियों को बड़ा लाभ

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राजा सूर्य का राशि परिवर्तन एक अत्यंत प्रभावशाली घटना मानी जाती है.  15 मई 2026 को सूर्य देव मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं. खास बात यह है कि यह गोचर शनिश्चरी अमावस्या से ठीक पहले हो रहा है, जो इसकी शुभता को कई गुना बढ़ा देता है. सूर्य का यह राशि परिवर्तन मेष, कर्क समेत 6 राशियों के लिए गोल्डन पीरियड की शुरुआत साबित होगा. सूर्य गोचर का महत्व और प्रभाव सूर्य जब वृषभ राशि में आते हैं, तो इसे वृषभ संक्रांति कहा जाता है. इस गोचर से न केवल आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, बल्कि सरकारी कार्यों और करियर में मान-सम्मान भी बढ़ता है.  शनि और सूर्य के बीच का यह विशेष संयोग जातकों के जीवन से आर्थिक तंगी को दूर करने और अटके हुए कामों को गति देने वाला माना जा रहा है. इन 6 राशियों को मिलेगा बंपर लाभ मेष राशि: आपकी राशि से दूसरे भाव में सूर्य का गोचर धन की बचत करने में मदद करेगा. नई नौकरी के प्रस्ताव मिल सकते हैं. इस समय निवेश से लाभ होगा. कर्क राशि: आय के नए स्रोत खुलेंगे. कार्यक्षेत्र में सीनियर अधिकारियों का सहयोग मिलेगा. पुराने विवादों से छुटकारा मिलेगा. सिंह राशि: सूर्य आपके स्वामी हैं और दसवें भाव में इनका आना आपके करियर में बड़ी छलांग लगवा सकता है.  सामाजिक पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. कन्या राशि: भाग्य का पूरा साथ मिलेगा. लंबी दूरी की यात्राएं लाभदायक रहेंगी. वृश्चिक राशि: व्यापार में साझेदारी से बड़ा मुनाफा होगा.  वैवाहिक जीवन की परेशानियां दूर होंगी, नया काम शुरू करने के लिए समय उत्तम है. कुंभ राशि: सुख-सुविधाओं और प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में सफलता मिलेगी. परिवार में खुशहाली का माहौल रहेगा. करें ये विशेष उपाय सूर्य के इस गोचर का अधिकतम लाभ उठाने के लिए जातकों को प्रतिदिन सूर्योदय के समय तांबे के लोटे से जल अर्पित करना चाहिए.  साथ ही 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' मंत्र का जाप करना शुभ फलदायी रहता है.

नगर विकास विभाग की नई पहल, 264 निकायों को जोड़ेगा एकीकृत ई-गवर्नेंस सिस्टम

पटना शहरी निकायों के नागरिकों को अपनी समस्या के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। उन्हें निकाय से संबंधित समस्या का समाधान अब एक क्लिक पर मिलेगा। यानी सभी नगरीय सुविधाएं एक प्लेटफार्म पर मिलेंगी। नगर विकास विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए पोर्टल विकसित किया जा रहा है। इसी पोर्टल पर राज्य के 264 निकायों से संबंधित कार्य होंगे। वर्तमान में होल्डिंग टैक्स को छोड़कर अन्य सभी तरह की सुविधाओं के लिए नागरिकों को निकाय कार्यालय का चक्कर काटना पड़ता है। सभी निकायों की अपनी अलग-अलग व्यवस्था है। नियमों के पालन में एकरूपता नहीं है। इसीलिए नगर विकास विभाग ने राष्ट्रीय शहरी डिजिटल मिशन के तहत ई-गवर्नेंस मॉड्यूल्स विकसित करने का निर्णय लिया है। इसका मकसद शहरी नागरिकों को सभी तरह की सेवाओं की ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके लिए सॉफ्टवेयर विकसित किया जा रहा है। सॉफ्टवेयर विकसित होने के साथ ही सभी निकाय एक पोर्टल से जुड़ जाएंगे। उसी पोर्टल पर अलग-अलग 15 प्रकार की सेवाओं के विकल्प मौजूद होंगे। आम नागरिक अपनी जरूरत के हिसाब से विकल्प का चयन कर सकता है। संबंधित निकाय के पास उनकी समस्या भेज दी जाएगी। मुख्यालय स्तर से इसकी निगरानी की जाएगी। इससे नागरिकों की समस्या का समाधान भी सुनिश्चित होगा। इसके अलावा विकास से जुड़े कार्यों के दुहराव से भी बचा जा सकेगा।नगर विकास विभाग ने इस पर अगले पांच वर्षों में करीब 120 करोड़ रुपये खर्च करने का निर्णय लिया है। लोगों को 15 प्रकार की सुविधाएं प्राप्त होंगी शहरी नागरिकों को पंद्रह प्रकार की सेवाएं ऑनलाइन मिलेंगी। इसमें प्रोपर्टी टैक्स, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, व्यापार लाइसेंस, नक्शा पास कराना, किसी समस्या की शिकायत करना, किसी काम के लिए एनओसी लेना, पेयजल और सीवरेज कनेक्शन, होर्डिंग्स या विज्ञापन, अन्य कर संग्रह, साफ-सफाई और ठोस कचरा प्रबंधन से संबंधित कार्य होंगे। निकायों के लीगल, एसेट मैनेजमेंट, मैटेरियल मैनेजमेंट आदि प्रमुख कार्य शामिल हैं। कर्मचारियों को प्रशिक्षण मिलेगा सॉफ्टवेयर विकसित होने के साथ ही नगर विकास विभाग इस सेवा की शुरुआत कर देगा। इससे पहले नगर निकायों के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। सरकार ने सात निश्चय-3 के तहत सबका सम्मान, जीवन आसान के तहत ई-गवर्नेंस को लागू कर रही है। इसके संचालन के लिए मुख्यालय स्तर पर विशेषज्ञों की एक टीम होगी।

श्री हरमंदिर साहिब की बेअदबी के आरोप में एआई से बनाई तस्वीर, एसजीपीसी ने जांच शुरू की

अमृतसर तीन युवकों की ओर से एआई के जरिए तस्वीर बनाकर श्री हरमंदिर साहब की बेअदबी करने का मामला सामने आया है। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस तस्वीर में तीन व्यक्तियों को परिक्रमा क्षेत्र में चप्पल पहने हुए दिखाया गया है, जबकि उनके सिर भी ढके नहीं हैं। सिख मर्यादा के विपरीत इस तरह के दृश्य को लेकर लोगों ने आपत्ति जताई है।  जानकारी के अनुसार, यह तस्वीर एक इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट की गई थी। तस्वीर में एक व्यक्ति नई स्कूटी के साथ हाथ में स्कूटी की चाबी पकड़े खड़ा है। जबकि दो अन्य उसके बगल में खड़े दिखाई दे रहे हैं। पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही है।  सिख संगठनों की ओर से  जब संबंधित व्यक्ति से संपर्क किया गया तो उसने तस्वीर हटाने और माफी मांगने की बात कही। पोस्ट डालने वाले ने इसे अनजाने में हुई गलती बताया ओर माफ करने की अपील की। यह पहला मामला नहीं है, जब इस तरह की सामग्री सामने आई हो। इससे पहले भी एआई तकनीक का इस्तेमाल कर एक वीडियो तैयार किया गया था, जिसमें एक कंकाल को पगड़ी पहनाकर परिक्रमा क्षेत्र में दिखाया गया था। उसी वीडियो में लंगर हॉल में जूते पहनकर भोजन करते हुए दृश्य भी जोड़े गए थे। इसके अलावा एक अन्य वीडियो में एक युवक को वाहन सहित परिक्रमा में दिखाया गया था, जिसे लेकर भी विवाद हुआ था। कुछ समय पहले एक युवक द्वारा पवित्र सरोवर में प्रवेश कर कुल्ला करता हुए रील बनाने का मामला भी सामने आया था, जिस पर धार्मिक संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने जांच शुरू कर दी है।  एसजीपीसी के कानूनी सलाहकार अमन बीर सिंह ने बताया कि संबंधित तस्वीर मंगवाई गई है और इसकी तकनीकी जांच एआई कमेटी के माध्यम से कराई जाएगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। धार्मिक संस्थाओं का कहना है कि इस तरह की डिजिटल सामग्री न केवल धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करती है, बल्कि तकनीक के दुरुपयोग का भी उदाहरण है। ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय करना और आवश्यक कदम उठाना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।