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वन विभाग की नई योजना, मानसून से पहले ही शुरू होगा पौधरोपण अभियान

 रांची  झारखंड में वन क्षेत्र के अलावा औषधीय पार्क, सामुदायिक स्थल पर लगाने के लिए तीन लाख पौधे तैयार हैं। वन विभाग आमतौर पर जुलाई से पौधरोपण प्रारंभ करता है, लेकिन अप्रैल के आखिरी सप्ताह से राज्य में बारिश हो रही है। विभाग की नर्सरी में तैयार पौधों को औषधीय पार्क, स्कूल, आवासीय सामुदायिक भूखंड पर लगाया जाएगा। ये पौधे अनुदानित दर पर लोगों को दिए जाएंगे। इसके अलावा वन भूमि पर इस वर्ष दस लाख से अधिक पौधे लगाने की योजना है। कृषि विश्वविद्यालय स्थित वानिकी संकाय के विशेषज्ञ ज्ञानरंजन पांडेय ने बताया कि लोहरदगा से लेकर डाल्टेनगंज तक पिछले दस सालों में लाखों आंवला के पेड़ लगाए गए हैं आयुर्वेद से जुड़ी कंपनियों ने झारखंड में उत्पादित आंवला को उच्च गुणवत्ता वाला माना है। इस वर्ष आंवला और जामुन के पौधे पार्कों और सामुदायिक स्थलों पर लगाए जाएंगे। राज्य में छह औषधीय पार्क बनाकर उनमें वेलनेस उत्पाद में प्रयुक्त होने वाले फलदार पौधे लगाए जाएंगे। पांच साल पहले लगे पौधों की उत्तरजीविता बढ़ी राज्य के वन क्षेत्र में पांच साल पहले जो पौधे लगाए गए थे, उनमें से 80 प्रतिशत अब वृक्ष का स्वरूप ले रहे हैं। केंद्रीय वन उत्पादकता संस्थान ने राज्य में पौधों के संरक्षण की उत्तम श्रेणी की रिपोर्ट दी है। केंद्रीय संस्थान पांच वर्ष में पौधों की वृद्धि, उनके आसपास की हरियाली और सुरक्षा का आकलन कर रिपोर्ट देती है। पिछले दो सालों से हुई बारिश ने भी पौधों की वृद्धि में योगदान दिया है। 130 एकड़ नई भूमि पौधरोपण के लिए चिह्नित वन एवं पर्यावरण विभाग ने 130 एकड़ नई वन भूमि में मानसून के दौरान पौधरोपण की योजना बनाई है। इनमें सामाजिक वानिकी और क्षतिपूर्ति वानिकी योजना के तहत पौधे लगाए जाएंगे। विभाग ने इस वर्ष अतिक्रमण मुक्त की गई भूमि पर भी पौधरोपण की तैयारी की है।  

दिग्गज नेता रमेश चेन्निथला ने हरिपाड़ सीट जीती, CPI उम्मीदवार को करारी हार

केरल केरल में 140 सीटों वाली विधानसभा चुनाव में मतों की गिनती जारी है। कांग्रेस के दिग्गज नेता रमेश चेन्निथला ने हरिपाड़ (Haripad) विधानसभा सीट से 23,000 से अधिक वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज कर ली है। चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार उन्हें आधिकारिक रूप से विजयी घोषित कर दिया गया है। 12 मंत्री भी पीछे चल रहे रुझानों में जहां सीएम पिनाराई विजयन समेत लगभग 12 मंत्री भी अपनी प्रतिद्वदियों से पीछे चल रहे हैं। यहां कांग्रेस गठबंधन यूडीएफ की सरकार बनते दिख रही है। सीएम विजयन अपने प्रतिद्वंदी वी पी अब्दुल रशीद से पीछे चल रहे हैं। निर्वाचन क्षेत्र नाम उम्मीदवारों के नाम वोट शेयर मलप्पुरम केरलम पी.के कुन्हालीकुट्टी आईयूएमएल 7,185 70.83% लीड Puthuppally केरलम सलाह. चांडी ओमन कांग्रेस 10,740 65.51 % लीड मांकड़ा केरलम मंजलमकुझी अली आईयूएमएल 18,480 65.32% लीड एर्नाड केरलम पी.के.बशीर आईयूएमएल 6,194 65.24 % लीड एर्नाकुलम केरलम टी जे विनोद कांग्रेस 4,450 60.58% लीड कन्नूर केरलम वकील टी.ओ. मोहनन कांग्रेस 6,884 59.55% लीड

बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन से बुलाया विशेष सत्र, झामुमो ने किया पलटवार

 रांची  नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से नारी शक्ति वंदन पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। उन्होंने रविवार को प्रदेश कार्यालय में प्रेस वार्ता कर कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री से मिलने के लिए समय मांगा गया था जो नहीं मिला। मरांडी ने कहा कि पार्टी के महामंत्री अमर कुमार बाउरी द्वारा 30 अप्रैल से ही मुख्यमंत्री से मिलने का समय लेने का प्रयास किया जा रहा था। समय नहीं मिलने पर उनको एक पत्र लिखकर ही सारी बातों से अवगत करा दिया जा रहा है। केंद्र सरकार ने 16, 17, 18 अप्रैल को नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद में लाया था। इससे देश की आधी आबादी के लिए लोकसभा और विधानसभा में 33% सीटें उनके लिए आरक्षित होगी। झारखंड में 14 लोकसभा की सीटें बढ़कर 21 हो जाती। जिसमें सात महिलाओं के लिए रिजर्व होती। इसी प्रकार विधानसभा की सीटें 81 से बढ़कर 121 हो जाती। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इसके विरोध में मतदान किया। इसलिए पार्टी ने तय किया था कि मुख्यमंत्री से मिलकर उनसे पार्टी आग्रह करेगी कि इस मुद्दे पर राज्यपाल की सहमति से एक विशेष सत्र बुलाएं और सदन से पारित कराकर केंद्र को प्रस्ताव भेजें। झामुमो का पलटवार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात का समय नहीं मिलने के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के आरोप पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पलटवार किया है। महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री के पास निरर्थक सवालों के लिए समय नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कोई सकारात्मक एजेंडा हो तो सरकार संवाद के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन केवल राजनीतिक आरोपों के आधार पर मुलाकात की अपेक्षा उचित नहीं है। भट्टाचार्य ने नगर निकाय चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने 33 प्रतिशत आरक्षण लागू कर ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी की है। इसके बावजूद विपक्ष महिलाओं के नाम पर राजनीति कर उन्हें गुमराह कर रहा है।  

बंगाल काउंटिंग के दौरान दीदी का भरोसा बरकरार, घर के बाहर गूंजे ‘जय श्रीराम’

कोलकत्ता पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम की तस्वीर अब धीरे-धीरे साफ हो रही है। दोपहर 1 बजे तक की काउंटिंग में बीजेपी जबरदस्त बहुमत हासिल कर ली है। बीजेपी 191 सीटों पर आगे चल रही है। जबकि ममता बनर्ती की टीएमसी 95 सीटों पर सिमटती हुई दिख रही है। चुनाव आयोग के मुताबिक भाजपा 187 और टीएमसी 92 सीटों पर आगे चल रही है। जबरदस्त जीत होता देख बीजेपी कार्यकर्ता सड़कों पर उतकर जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया है। ममता बनर्जी के घर के बाहर बीजीपी कार्यकर्ताओं ने जय श्रीराम के नारे लगाए। वहीं काउंटिंग के बीच सीएम ममता बनर्जी का बयान सामने आया है। दीदी ने टीएमसी कैंडिडेट और कार्यकर्ताओं से बूथ नहीं छोड़ने की अपील की है। पश्चिम बंगाल में चुनाव में रुझानों में बड़ी जीत की संभावना के बीच बीजेपी के कुछ कार्यकर्ता ममता के घर पहुंच गए। इन लोगों ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए। वहीं पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव मतगणना के बीच ममता बनर्जी ने पहला बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि हमें काउंटिंग सेंटर जाने से रोका जा रहा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से काउंटिंग सेंटर्स न छोड़ने को कहा है। टीएमसी के कार्यकर्ता काउंटिंग सेंटर्स को न छोड़ें क्योंकि अभी सिर्फ 4 राउंड की गिनती हुई है। ममता बनर्जी ने दावा किया है कि आखिरी राउंड के बाद टीएमसी ही जीतेगी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा- “काउंटिंग एजेंट और उम्मीदवार काउंटिग सेंटर छोड़कर न आएं। यह भाजपा का प्लान है, मैं कल से ही बोल रही हूं पहले उन्हें आगे दिखाया जाएगा। कई जगह उन्होंने काउंटिंग को बंद कर रखा है। कल्याणी में ऐसी मशीनें मिली हैं जहां कोई मेल नहीं है, सेंट्रल फोर्स के जरिए हर तरफ से TMC पर अत्याचार हो रहा है। सब गलत बताया जा रहा है- ममता बनर्जी ममता बनर्जी ने कहा- “SIR के जरिए उन्होंने वोट लूटने की कोशिश की और अब भी 100 से ज्यादा सीटों पर हम आगे हैं जिसे बताया नहीं जा रहा। सब गलत बताया जा रहा है। पूरी तरह चुनाव आयोग अपनी इच्छा से काम कर रहा है और उनके साथ सेंट्रल फोर्स भी है। सेंट्रल फोर्स के साथ पुलिस भी काम कर रही है। मैं पार्टी कार्यकर्ताओं को कहती हूं कि मन खराब करने की जरूरत नहीं है, आप सूर्यास्त के बाद जीतेंगे। 2-4 राउंड की गिनती हुई है, 14-18 राउंड तक गिनती होती है, हम जीतेंगे। किसी को डरने की कोई जरूरत नहीं है।  कोलकाता पुलिस ने जीत के जश्न पर लगाई रोक कोलकाता पुलिस ने जीत के जश्न पर रोक लगा दी है। दरअसल, आज विजय जुलूस निकाले जाने वाला था, उस पर रोक लगा दी गई है। आरजी कर हत्याकांड के पीड़ित की मां रत्ना देबनाथ पनिहाटी में 5,067 वोटों से आगे भारतीय जनता पार्टी की रत्ना देबनाथ, जिन्हें आरजी कर हत्याकांड के पीड़ित की माता के रूप में जाना जाता है, पनिहाटी (111) में 13,784 वोटों के साथ आगे चल रही हैं। उनसे आगे अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के तीर्थंकर घोष हैं, जिन्हें 8,717 वोट मिले हैं. 13 में से 2 दौर के मतदान के बाद रत्ना देबनाथ रत्ना देबनाथ से 5,067 वोटों से पीछे हैं। कलातन दासगुप्ता को 3,237 वोट मिले हैं, जबकि सुभाषिश भट्टाचार्य, साधना चक्रवर्ती और संजीव कुमार घोष को क्रमशः 153, 72 और 39 वोट मिले हैं।

पश्चिम बंगाल चुनाव: दिल्ली जैसा हाल दोहराती कांग्रेस, राहुल गांधी की भूमिका पर चर्चा तेज

नई दिल्ली राहुल गांधी का पश्चिम बंगाल चुनाव में करीब करीब उसी अंदाज में नजर आए, जैसे दिल्ली विधानसभा चुनाव में देखे गए थे – और मुद्दे की बात यह है कि बंगाल के नतीजे भी दिल्ली जैसे ही लग रहे हैं. दिल्ली की ही तरह बंगाल में भी कांग्रेस के जीरो बैलेंस की ही संभावना नजर आ रही है. ये बंगाल का लगातार दूसरा विधानसभा चुनाव है, जब पार्टी सीटों के हिसाब से शून्य प्राप्त करने जा रही है. पश्चिम बंगाल चुनाव में राहुल गांधी की दिलचस्पी को उनके एक वीडियो से समझने की कोशिश की जा सकती है. पश्चिम बंगाल में जिस दिन दूसरे चरण की वोटिंग होनी थी, उस दिन राहुल गांधी ने ग्रेटर निकोबार प्रोजेक्ट पर बयान जारी किया था. 29 अप्रैल को सुबह आठ बजे (7:58 am पर) सोशल साइट X पर एक वीडियो पोस्ट कर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला था. राहुल गांधी ने वीडियो निकोबार के कैंपबेल बे में प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे आदिवासी नेताओं से मिलने के बाद बनाई थी. बाद में, सरकार की तरफ से राहुल गांधी के आरोपों का जवाब भी दे दिया गया. कांग्रेस के कैंपेन के हिसाब से देखें तो राहुल गांधी ने विधानसभा चुनाव के दौरान दो बार पश्चिम बंगाल का दौरा किया है, और 5 रैलियां की हैं. 2024 के आम चुनाव में तो राहुल गांधी चुनाव प्रचार के लिए गए तक नहीं थे. 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी एक दिन के दौरे पर गए थे, और दो चुनावी रैलियां की थीं. कहने को तो पश्चिम बंगाल कांग्रेस पूरे बंगाल में विधानसभा चुनाव लड़ा है, बंगाल कांग्रेस के बड़े नेता अधीर रंजन चौधरी भी विधानसभा चुनाव लड़े, लेकिन राहुल गांधी सिर्फ दो दिन के लिए रस्म अदा करने गए – आखिर पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर राहुल गांधी की रणनीति क्या थी? मोदी पर गरम, ममता पर नरम पश्चिम बंगाल में हुए दो चरणों के मतदान में हिंसा की कोई बड़ी घटना नहीं हुई है, न ही उस दौरान किसी की जान गई है. चुनाव आयोग ने तो पहले से ही शांतिपूर्ण मतदान का दावा किया था. लेकिन, पहले चरण के मतदान के बाद 23 अप्रैल को आसनसोल में कांग्रेस के एक कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई थी. पश्चिम बंगाल कांग्रेस का आरोप है कि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस से जुड़े गुंडों ने ही पार्टी कार्यकर्ता की हत्या की है, जो राज्य में खत्म हो चुके कानून व्यवस्था का सबूत है. राहुल गांधी ने भी सोशल साइट X पर एक पोस्ट में ऐसा ही आरोप लगाया है. राहुल गांधी ने लिखा, 'कांग्रेस कार्यकर्ता देबदीप चटर्जी की वोटिंग के बाद TMC से जुड़े गुंडों द्वारा की गई हत्या बेहद निंदनीय है. शोकाकुल परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं. पश्चिम बंगाल में आज लोकतंत्र नहीं, TMC का गुंडा राज चल रहा है. वोट के बाद विरोधी आवाजों को डराना, मारना, मिटाना – यही TMC का चरित्र बन चुका है.'

पर्यावरण की ओर बड़ा कदम: हिसार में 3 एकड़ में तैयार होगा ई-बस स्टैंड

हिसार. हिसार बस डिपो में इलेक्ट्रिक बसों के लिए अलग स्टैंड बनाने की दिशा में काम शुरू हो गया है। इसके तहत करीब 3.09 एकड़ भूमि पर उगी झाड़ियों को जेसीबी व अन्य मशीनें मंगवाकर हटाया जा रहा है और निर्माण कार्य की औपचारिक शुरुआत कर दी गई है। नया बस स्टैंड आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा, जिससे यात्रियों को बेहतर और सुगम परिवहन सुविधा मिल सकेगी। डिपो में पहले ही पांच इलेक्ट्रिक बसें लाई जा चुकी हैं, जबकि पांच और बसें जल्द शामिल की जाएंगी। यह बस स्टैंड करीब 14 करोड़ रुपये की लागत में तैयार किया जाएगा। यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है, जिससे प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद शहर में इलेक्ट्रिक बस सेवा को और मजबूती मिलेगी। फिलहाल चलाई जा रही पांच बसों को आजाद नगर रूट व तोशाम रोड पर आधार अस्पताल तक चलाया जा रहा है। हिसार में 50 बसें लाने की योजना है। नया इलेक्ट्रिक स्टैंड बनाए जाने पर यहां कुल 10 इलेक्ट्रिक चार्जर स्थापित किए जाएंगे। जिनसे बसों को चार्ज किया जाएगा। इन बसों को विभिन्न रूटों पर चलाया जाएगा।

आज शाम 6:30 बजे BJP मुख्यालय में PM मोदी कार्यकर्ताओं से करेंगे सीधी बातचीत

नई दिल्ली पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के रुझानों में भाजपा का प्रदर्शन बेहद मजबूत नजर आ रहा है. खास तौर पर पश्चिम बंगाल और असम में पार्टी भारी बढ़त के साथ सरकार बनाने की ओर बढ़ती दिख रही है. ताजा रुझानों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में भाजपा करीब 181  सीटों पर आगे चल रही है, जबकि असम में पार्टी 95 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।  इन रुझानों के बीच पार्टी में उत्साह का माहौल है और जश्न की तैयारियां शुरू हो गई हैं. सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम करीब 6:30  बजे नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय पहुंचेंगे. यहां वह पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर सकते हैं और इस जीत के लिए उन्हें बधाई देंगे।  पश्चिम बंगाल में भाजपा का यह प्रदर्शन खास तौर पर अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्य लंबे समय से क्षेत्रीय दलों का गढ़ रहा है. ऐसे में पार्टी की यह बढ़त राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रही है. वहीं असम में भाजपा ने अपनी पकड़ बरकरार रखते हुए एक बार फिर मजबूत प्रदर्शन किया है, जिससे पार्टी का आत्मविश्वास और बढ़ा है।  इसके अलावा पुड्डुचेरी में भी भाजपा गठबंधन शानदार प्रदर्शन करता नजर आ रहा है और सरकार बनाने की स्थिति में दिख रहा है. यहां पार्टी अपने सहयोगियों के साथ मिलकर बहुमत हासिल करने के करीब पहुंच गई है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की इस बढ़त के पीछे उसकी आक्रामक चुनावी रणनीति, संगठन की मजबूत पकड़ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता अहम कारक रही है. हालांकि, अभी ये रुझान हैं और अंतिम परिणाम आना बाकी है. इसके बावजूद भाजपा खेमे में उत्साह चरम पर है. अब सभी की नजरें आधिकारिक नतीजों और उसके बाद बनने वाली सरकारों पर टिकी हैं, जो आने वाले समय में इन राज्यों की राजनीतिक दिशा तय करेंगी।  722 उम्मीदवार मैदान में राज्य की 126 विधानसभा सीटों पर 722 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 59 महिला उम्मीदवार शामिल हैं। कांग्रेस ने सबसे अधिक 99 उम्मीदवार उतारे, जिसके बाद भाजपा ने 90 उम्मीदवार उतारे। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) ने 30 सीटों पर चुनाव लड़ा। एनडीए सहयोगियों में, असम गण परिषद ने 26 उम्मीदवार उतारे, जबकि बोडो पीपुल्स फ्रंट ने 11 सीटों पर चुनाव लड़ा। विपक्षी गठबंधन में राइजर दल ने 13 उम्मीदवार उतारे, असम जातीय परिषद ने 10, माकपा ने तीन और ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस ने दो सीटों पर चुनाव लड़ा। चुनाव मैदान में शामिल अन्य पार्टियों में आम आदमी पार्टी और यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल शामिल हैं, जिन्होंने 18-18 सीटों पर चुनाव लड़ा। तृणमूल कांग्रेस ने 22 और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने 16 सीटों पर चुनाव लड़ा। इसके अलावा, 258 निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं। 9 अप्रैल को हुआ मतदान राज्य में विधानसभा चुनावों के लिए मतदान 9 अप्रैल को हुआ, जिसमें 2.50 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने अपने मत का इस्तेमाल किया। इस बार कुल 85.96 प्रतिशत मतदान हुआ।

चुनावी नतीजों पर संतोष सुमन का तंज, ममता से लेकर कांग्रेस तक पर तीखी टिप्पणी

नई दिल्ली हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) सेकुलर के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मंत्री संतोष कुमार सुमन ने अलग-अलग राज्यों से आए चुनाव परिणामों पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व की जमकर सराहना करते हुए विपक्ष पर करारा तंज कसा है। संतोष सुमन ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में आज उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक पूरे विपक्ष की हालत 'झालमुड़ी' जैसी हो गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की राजनीति में विपक्ष अब पूरी तरह से अपनी प्रासंगिकता खो चुका है और जनता ने उनके एजेंडे को नकार दिया है। 'देशविरोधी ताकतों की कठपुतलियों के लिए जगह नहीं' विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए संतोष सुमन ने कहा कि आज देश की राजनीति में विपक्षी दलों का हाल ऐसा हो गया है कि आम जनता उनकी असलियत समझ चुकी है। उन्होंने कहा कि देश के नागरिक अब जागरूक हो गए हैं और वे यह भली-भांति जान चुके हैं कि देशविरोधी ताकतों के इशारे पर काम करने वाली कठपुतलियों के लिए हिंदुस्तान में कोई जगह नहीं बची है। जनता अब सिर्फ विकास और राष्ट्रहित की राजनीति को ही अपना समर्थन दे रही है। विपक्ष को जमकर घेरा अलग-अलग राज्यों के चुनाव परिणामों की समीक्षा करते हुए संतोष सुमन ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में 'ममता बुआ' की नीतियों और उनकी राजनीतिक सोच पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। वहां की जनता अब पूरी तरह से सत्ता में बदलाव का मन बना चुकी है। वहीं, असम का जिक्र करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा की जमकर तारीफ की। सुमन ने कहा कि हिमंता बिस्वा शर्मा के नेतृत्व में हुए विकास और उनकी निर्णायक राजनीति ने असम में विपक्ष को पूरी तरह से पीछे छोड़ दिया है। कांग्रेस नेताओं पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव परिणामों में कांग्रेस के गौरव गोगोई और पवन खेड़ा का 'पेड़ा' बन गया है। दक्षिण भारत में DMK से बढ़ रही है नाराजगी दक्षिण भारत की राजनीति पर अपनी बात रखते हुए 'हम' के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि वहां भी विपक्ष के लिए स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत में DMK की विचारधारा और उनके नेताओं द्वारा हाल ही में दिए गए कुछ विवादित बयानों को लेकर आम लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। जनता के बीच पनप रहा यह गुस्सा अब सीधे तौर पर वहां के राजनीतिक और चुनावी परिणामों में भी स्पष्ट रूप से दिखने लगा है।

हाईकोर्ट में ट्राइडेंट मामला: फैसला सुरक्षित, प्रदूषण बोर्ड की कार्रवाई पर उठे सवाल

चंडीगढ़. ट्राइडेंट समूह और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बीच चल रहे विवाद पर उच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले में ट्राइडेंट समूह ने बोर्ड की कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बताया है, जबकि बोर्ड ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे नियमों के तहत की गई सामान्य जांच बताया है। ट्राइडेंट ग्रुप हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि उसके संस्थापक एवं राज्यसभा सांसद राजेंद्र गुप्ता के राजनीतिक पाला बदलने के तुरंत बाद पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने बदले की भावना से फैक्टरी पर असामान्य कार्रवाई शुरू कर दी व उसकी सुरक्षा भी वापिस ले ली गई है। सोमवार को याचिकाकर्ता ट्राइडेंट ग्रुप की ओर से  हाई कोर्ट के समक्ष यह प्रमुख तर्क रखा कि ट्राइडेंट ग्रुप पर कार्रवाई पर्यावरणीय उल्लंघन के बजाय “राजनीतिक प्रतिशोध” से प्रेरित प्रतीत होती है। अदालत को बताया गया कि कंपनी के चेयरमैन एमेरिटस के राजनीतिक रुख बदलने के बाद ही अचानक कड़ी कार्रवाई शुरू हुई। ट्राइडेंट ग्रुप ने कहा कि ट्राइडेंट ग्रुप के यार्न और अन्य डिवीजनों को 7 अप्रैल और 13 अप्रैल 2026 तक वैध कंसेंट/क्लियरेंस प्राप्त थे, जबकि पेपर डिवीजन का पूर्व अनुमति रिकॉर्ड भी मौजूद है और टॉवल डिवीजन के लिए आवेदन 30 जनवरी 2026 से लंबित है। निरीक्षण विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत होना चाहिए याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी कहा कि निरीक्षण करने की शक्ति पर कोई विवाद नहीं, लेकिन निरीक्षण भी विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। आरोप लगाया गया कि 30 अप्रैल की शाम लगभग 7:30 बजे 30 सदस्यीय टीम ने अचानक परिसर में प्रवेश किया, स्टाफ पर दबाव बनाया, नमूने लिए और प्रक्रिया का उचित पालन नहीं किया गया। अदालत को बताया कि सैंपलिंग रिपोर्ट पर उन्होंने “प्रोटेस्ट” के साथ हस्ताक्षर किए थे क्योंकि उन्हें आशंका थी कि कार्रवाई पूर्वाग्रहपूर्ण ढंग से आगे बढ़ाई जा रही है। साथ ही, अदालत के समक्ष ई-फाइल की गई अतिरिक्त दस्तावेजी सामग्री पेश कर यह दर्शाने का प्रयास किया गया कि नियामक संस्थाएं पूर्व में लगातार निरीक्षण करती रही हैं और ट्राइडेंट ग्रुप को हालिया समय तक आवश्यक स्वीकृतियां मिलती रही हैं। बोर्ड ने आरोप खारिज किए दूसरी ओर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से इस पूरे आरोप को “कल्पना” करार दिया गया। बोर्ड के वकील ने स्पष्ट कहा कि यह कोई “रेड” नहीं बल्कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों के तहत नियमित निरीक्षण था। अदालत को बताया गया कि वाटर एक्ट की धारा 23 के तहत रेड कैटेगरी और बड़े औद्योगिक इकाइयों की नियमित जांच अनिवार्य है तथा पिछले छह महीनों में लगभग 450 निरीक्षण किए जा चुके हैं। बोर्ड ने जोर देकर कहा कि अभी तक याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई प्रतिकूल आदेश पारित ही नहीं हुआ है, इसलिए याचिका समयपूर्व है। उनका तर्क था कि ट्राइडेंट ग्रुप अदालत से मूलतः यह आदेश चाहता है कि भविष्य में संभावित प्रतिकूल रिपोर्ट के आधार पर भी कोई कार्रवाई न हो, जबकि अभी केवल निरीक्षण हुआ है और कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। याचिका की वैधता पर भी उठा सवाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से सबसे पहले याचिका की वैधता  पर तीखा सवाल उठाया गया। बोर्ड के वकील ने अदालत को स्पष्ट कहा कि अभी तक उद्योग के खिलाफ कोई अंतिम या दंडात्मक आदेश पारित ही नहीं हुआ, इसलिए याचिका समयपूर्व  है। उनका तर्क था कि केवल आशंका के आधार पर अदालत से यह मांग नहीं की जा सकती कि भविष्य में संभावित कार्रवाई रोकी जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि कोई प्रतिकूल आदेश पारित होता है तो एनजीटी की धारा 14 के तहत वैकल्पिक वैधानिक उपाय उपलब्ध है, इसलिए सीधे हाई कोर्ट का हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए। सैंपल लेने के दौरान नहीं हुई नियमों की पालना याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत के समक्ष विस्तार से कहा कि सैंपल लेने की शक्ति पर विवाद नहीं है, लेकिन कानून में निर्धारित प्रक्रिया बाध्यकारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि निरीक्षण टीम ने मौके पर विधिसम्मत नोटिस नहीं दिया, नमूनों को दो भागों में विभाजित नहीं किया, न ही उन्हें विधिवत सील कर उद्योग प्रतिनिधि के हस्ताक्षर लिए गए। धारा 21(3) का उल्लेख करते हुए कहा गया कि यदि यह प्रक्रिया नहीं अपनाई गई तो ऐसे नमूनों की विश्लेषण रिपोर्ट कानूनी साक्ष्य के रूप में भी संदिग्ध हो सकती है। कोर्ट में अन्य सांसदों का भी उठा मुद्दा याचिकाकर्ता ने अदालत को यह भी बताया कि पीपीसीबी के अपने रिकॉर्ड के अनुसार 25 मार्च 2026 तक उद्योग के विभिन्न मानक निर्धारित सीमा के भीतर थे और 13 अप्रैल 2026 तक सहमति आदेश भी जारी किया गया था। ऐसे में एक महीने के भीतर अचानक कठोर रुख अपनाने पर संदेह स्वाभाविक है। अदालत ने एक ओर माना कि राजनीतिक समय-क्रम से आशंका पैदा हो सकती है, लेकिन साथ ही कहा कि अंतिम सुरक्षा कानून सम्मत प्रक्रिया के भीतर ही दी जाएगी। कोर्ट को एक मीडिया हाउस के खिलाफ कार्रवाई ओर क्रिकेटर हरभजन सिंह व संदीप पाठक के खिलाफ कार्रवाई का भी हवाला दिया गया। कंपनी का दावा- वैध कंसेंट मौजूद कंपनी के पास अब भी वैध कंसेंट मौजूद हैं, हालिया निरीक्षण से पहले तक उसके अनुपालन रिकॉर्ड बोर्ड के दस्तावेजों में संतोषजनक हैं, और इसलिए बिना निष्पक्ष संयुक्त निरीक्षण के किसी भी कठोर कदम- विशेषकर बिजली कटौती, बंदी या 33A के तहत दमनात्मक आदेश- से 15,000 कर्मचारियों वाली सूचीबद्ध कंपनी को अपूरणीय क्षति हो सकती है। उसने अदालत से कम-से-कम इतना संरक्षण मांगा कि बिना शो-कॉज नोटिस या निष्पक्ष प्रक्रिया कोई कठोर कदम न उठाया जाए। इसके विपरीत, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अत्यंत आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि याचिका वस्तुतः अदालत से यह निर्देश चाहती है कि एक वैधानिक प्राधिकरण अपनी शक्तियों का उपयोग किस प्रकार करे जो न्यायिक मर्यादा के विपरीत है। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपन फैसला सुरक्षित रख लिया।

योगी की रैलियों में उमड़ी भीड़, बंगाल में जीत का बनता समीकरण

बंगाल भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक में से एक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की एक प्रसिद्ध कविता है, ‘अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा.’ उनकी कविता की ये पंक्तियां आज बंगाल में साकार होती दिख रही है. भाजपा के मूल संगठन जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्मभूमि में अब कमल खिलने जा रहा है. पश्चिम बंगाल में मतगणना जारी है. खबर लिखे जाने तक जो रुझान सामने आए हैं, उनके मुताबक बीजेपी करीब 190 सीटों पर आगे चल रही है. इन नतीजों के पीछे पूरे संगठन की मेहनत है. लेकिन इन सबसे इतर एक फैक्टर है जिसने इन चुनावों में खासा प्रभाव डाला है. विशेषकर जिन सीटों पर सीएम योगी ने प्रचार किया उनमें से अधिकतर सीटों पर भाजपा कब्जा करती दिख रही है. यानी योगी फैक्टर ने अपना जादू चला दिया है. बंगाल चुनाव में उत्तर प्रदेश के नेताओं की महती भूमिका रही है. देशभर में किसी भी राज्य में चुनाव हों उसमें एक जोड़ी हमेशा हिट रही है. वो है मोदी और योगी की जोड़ी. इसी तरह बंगाल के चुनाव में भी उत्तर प्रदेश के प्रमुख चेहरों ने मोर्चा संभाला. जिसमें सबसे पहले खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं. उन्होंने लगातार जनसभाएं और रैलियां की. इतना ही नहीं, उन्होंने सीधे जनता से जुड़ने का प्रयास किया. दुकान पर जाकर झालमुड़ी खाना, लोगों के बीच जाना इसका उदाहरण है. जिसने लोगों को प्रभावित किया. वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पार्टी के पक्ष में जमकर माहौल बनाया है. मुख्यमंत्री योगी की डिमांड हर राज्य में रही है. बिहार के चुनाव हों, महाराष्ट्र के चुनाव हों, ओडिशा के चुनाव हों, छत्तीसगढ़ के चुनाव हों, मध्यप्रदेश या राजस्थान के चुनाव हों, हर प्रदेश में सीएम योगी की अपनी फैन फॉलोविंग है. हिंदुत्व की छवि वाले योगी किसी भी क्षेत्र में जाकर वहां की जनता के बीच गहरी छाप छोड़ते हैं. बंगाल में भी इसका असर देखने को मिल रहा है. बंगाल में योगी की सभाओं में जबरदस्त भीड़ देखने को मिली. योगी को सुनने के लिए बड़ा जनसमूह उतरा. कई जगहों पर इतनी भीड़ दिखी कि वहां पैर रखने तक की जगह नहीं थी. कुल मिलाकर योगी ने इस भीड़ को वोट में तब्दील करने का पूरा प्रयास किया. जिसका नतीजा सकारात्मक दिख रहा है. जिन जिन क्षेत्र में योगी ने सभाएं की वहां अधिकतर सीटों पर कमल खिलता दिख रहा है. इन सीटों पर बीजेपी को बढ़त     कल्याणी विधानसभा में भाजपा को बढ़त मिल रही है. यहां अनुपम बिस्वास आगे चल रही हैं.     नंदकुमार सीट में खानरा निर्मल आगे चल रहे हैं.     बागदा विधानसभा में सोमा ठाकुर आगे चल रही हैं.     कटवा में कृष्णा घोष ने बढ़त बनाई हुई है.     माथाभांगा (कूच बिहार) में निशीथ प्रमाणिक जीत की ओर बढ़ रहे हैं.     धूपगुड़ी विधानसभा में नरेश चंद्र राय लीड लिए हुए हैं.     बांकुरा विधानसभा सीट पर नीलाद्री शेखर आगे चल रहे हैं.     कांथी दक्षिण सीट में भी अरुप कुमार दास बढ़त बनाए हुए हैं.     गोपालपुर विधानसभा सीट से तरुणज्योति तिवारी आगे चल रहे हैं.     दम दम विधानसभा सीट से अरिजीत बख्शी बढ़त बनाए हुए हैं.     जोरासांको सीट से विजय ओझा लीड बनाए हुए हैं.     चकदहा विधानसभा में बंकिम चंद्र घोष आगे चल रहे हैं.     उदयनारायणपुर सीट पर प्रभाकर पंडित बढ़त बनाए हुए हैं.     पिंगला विधानसभा में स्वागता मन्ना आगे चल रही हैं.     जॉयपुर सीट से बिस्वजीत महतो बढ़त बनाए हुए हैं.     गारबेटा विधानसभा में पारादीप लोधा जीत की ओर बढ़ रहे हैं.     बाराबनी सीट पर अरिजीत रॉय आगे चल रहे हैं.     रामपुरहाट विधानसभा में ध्रुब साहा बढ़त बनाए हुए हैं.     सोनामुखी विधानसभा में दिबाकर घरामी आगे चल रहे हैं. बता दें कि जिन विधानसभाओं में योगी ने धुंआधार प्रचार किया है उनके आसपास के क्षेत्रों में भी उनका प्रभाव पड़ा है. बिहार में चला था मोदी-योगी का जादू बता दें कि 5 महीने पहले हुए बिहार चुनाव में 202 सीटों के साथ NDA की प्रचंड जीत हुई थी. भाजपा ने अकेले 89 सीटें जीती थीं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 रैलियों से NDA को 97 सीटें दिलाई थीं. इसमें 44 नई सीटें थीं. पीएम का स्ट्राइक रेट 80% रहा था. इसी तरह सीएम योगी ने भी 80% स्टाइक रेट के साथ 98 सीटें जितवाई थीं. बिहार में सबसे ज्यादा डिमांड भी सीएम योगी की रैलियों, सभा और रोड शो की रही थी.