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दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में 18 आरोपी, 2 नाबालिग जेजेबी के पास; उत्तम नगर हत्याकांड में हुआ नया मोड़

नई दिल्ली   दिल्ली के उत्तम नगर में होली के दिन हुए विवाद में 26 वर्षीय तरुण की मौत के मामले में दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए द्वारका कोर्ट में 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में कुल 18 लोगों को आरोपी बनाया गया है जबकि इस पूरे मामले में कुल 20 आरोपी बनाए गए हैं, जिनमें से 2 नाबालिग हैं। नाबालिग आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मामला जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) को भेजने की अपील की गई है। पुलिस के अनुसार, यह घटना 4 मार्च को होली के दिन उत्तम नगर की जेजे कॉलोनी में हुई थी। एक 7 से 9 साल की बच्ची द्वारा फेंका गया पानी का गुब्बारा सड़क पर खड़ी एक महिला को लग गया, जिसके बाद मामूली कहासुनी ने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर एक पक्ष के लोगों ने लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से हमला कर दिया। चार्जशीट में बताया गया है कि इस झड़प के बाद तरुण को उसके घर के पास रोककर बेरहमी से पीटा गया। गंभीर रूप से घायल तरुण को अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन अगले दिन उसकी मौत हो गई। तरुण डिजिटल मार्केटिंग का कोर्स कर रहा था। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट, गैरकानूनी जमावड़ा, दंगा भड़काने समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 95 और 103(2) भी जोड़ी गई हैं। जांच के दौरान दो आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो सकी है। उनके खिलाफ कोर्ट से गैर-जमानती वारंट जारी किए जा चुके हैं। पुलिस उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है। इस घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। हालात को देखते हुए भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएअफ) की तैनाती की गई थी। मामले ने सांप्रदायिक रंग भी ले लिया था, जिसके चलते ईद के दौरान भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट पर नजर रखी गई। इस घटना पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई थीं। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत कई नेताओं ने इस घटना की निंदा करते हुए पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिया था।

फारूक अब्दुल्ला बोले, पंजाब के डबल ब्लास्ट में नया क्या है, भारत में धमाके आम हैं

श्रीनगर  पंजाब में एक दिन में हुए दो धमाकों के बाद तनाव बना हुआ है। पुलिस का कहना है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े एजेंट्स राज्य में माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला का कहना है कि देश में धमाके होना कोई नई बात नहीं है। फिलहाल, इन घटनाओं की जांच जारी है। राहत की बात है कि किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है। बुधवार को पत्रकारों ने अब्दुल्ला से पंजाब में हुई घटना को लेकर सवाल किया था। इसपर उन्होंने जवाब दिया, 'हिन्दुस्तान में ब्लास्ट होते रहते हैं। कौन सी नई बात है। आगे।' पंजाब में ब्लास्ट पंजाब के जालंधर में हुए विस्फोट के करीब तीन घंटे बाद अमृतसर में खासा के सेना छावनी क्षेत्र के पास मंगलवार देर रात एक और विस्फोट हुआ। जालंधर में मंगलवार को सीमा सुरक्षा बल (BSF) के पंजाब फ्रंटियर के मुख्यालय के बाहर विस्फोट हुआ था। पहला विस्फोट जालंधर में रात करीब आठ बजे हुआ, जबकि दूसरा धमाका रात करीब 11 बजे अमृतसर में हुआ। स्कूटर में हुआ ब्लास्ट एसएसपी ने बताया कि शुरुआती जांच से पता चला है कि किसी व्यक्ति ने चारदीवारी की ओर कुछ फेंका और उससे विस्फोट हो गया। विस्फोट के बाद टिन की शीट का एक टुकड़ा और चारदीवारी गिर गई। विस्फोट से एक स्कूटर और एक 'ट्रैफिक सिग्नल' का खंभा क्षतिग्रस्त हो तथा पास की एक दुकान के शीशे टूट गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि पंजाब फ्रंटियर स्थित बीएसएफ मुख्यालय के बाहर खड़े स्कूटर में आग लग गई। यह स्कूटर गुरप्रीत सिंह का था, जो नियमित रूप से इलाके में पार्सल पहुंचाते हैं। पाकिस्तान का हाथ? पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने कहा, 'आज मैंने अमृतसर का दौरा किया। कल आर्मी एरिया में एक कम तीव्रता वाला विस्फोट हुआ था। मैंने उस घटनास्थल का मुआयना किया… खासा छावनी में स्थित सैन्य शिविर की बाहरी दीवार के पास धमाके की सूचना मिली थी। इसके तुरंत बाद पंजाब बम निरोधक दस्ते, पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और फोरेंसिक विशेषज्ञों को मौके पर बुलाया गया। पूरे इलाके की अच्छी तरह से जांच करने के बाद, वैज्ञानिक परीक्षण के लिए वहां से नमूने इकट्ठा किए गए हैं। इस मामले में कानून की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है।' उन्होंने कहा, 'सेना और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर इस मामले की जांच की जा रही है। कई टीमें इस पर काम कर रही हैं। वे मानवीय इंटेलिजेंस, तकनीकी इंटेलिजेंस और फोरेंसिक इनपुट्स की मदद से जांच को आगे बढ़ा रही हैं… हमें संदेह है कि चूंकि ऑपरेशन सिंदूर की बरसी आने वाली है, इसलिए यह पंजाब में अशांति फैलाने की पाकिस्तान की आईएसआई (ISI) की साजिश का हिस्सा हो सकता है।' डीजीपी ने कहा, 'इस घटना को लेकर अभी तक किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली है, इसलिए हम जांच कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि यह एक देशी बम था जिसे असेंबल किया गया था। चूंकि मौके पर कोई तार नहीं मिले हैं, इसलिए पूरी संभावना है कि या तो यह टाइम्ड एक्सप्लोजन था या इसे रिमोट के जरिए अंजाम दिया गया है।' पंजाब में अशांति फैलाने की साजिश पुलिस अधिकारी ने कहा, 'हम सीसीटीवी फुटेज की जांच से मिले सुरागों पर काम कर रहे हैं। मैं आपको बताना चाहता हूं कि यह आईएसआई की एक कोशिश है। वे एक झूठा नैरेटिव बना रहे हैं और यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि पंजाब में अशांति है। मैं यह कहना चाहता हूं कि पंजाब देश का सबसे शांतिपूर्ण राज्य है। पाकिस्तान की आईएसआई के मुट्ठी भर तत्व पंजाब की स्थिति को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं…।'

12वीं रिजल्ट में बेटियों का जलवा, रशीदा नाज ने झारखंड टॉप किया, छोटी कुमारी आर्ट्स में अव्वल

रांची. जैक ने इंटरमीडिएट (12वीं) परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया। इस वर्ष तीनों संकाय आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस में छात्र-छात्राओं ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। आर्ट्स संकाय में 96.14 प्रतिशत, विज्ञान संकाय में 82.92 प्रतिशत, कॉमर्स संकाय में 93.37 प्रतिशत परीक्षार्थियों ने सफलता प्राप्त किया। इंटरमीडिएट आर्ट्स संकाय में छोटी कुमार (बोकारो) ने 478 अंक लाकर पहला स्थान प्राप्त किया। दूसरे स्थान पर अंकित कुमार (दुमका) 474 अंकों के साथ रहे, जबकि तीसरे स्थान पर अंशु कुमारी (रांची) ने 473 अंक प्राप्त किए। कॉमर्स में स्वेता प्रसाद अव्वल कॉमर्स संकाय में स्वेता प्रसाद (योगोदा सत्संग इंटरमीडिएट महाविद्यालय, रांची) ने 478 अंक के साथ राज्य में पहला स्थान हासिल किया। दूसरे स्थान पर कृष कुमार बरनवाल (बाल कृष्णा +2 हाई स्कूल) 472 अंकों के साथ रहे, जबकि तीसरे स्थान पर प्रियंशी खत्री (सेंट जेवियर्स गर्ल्स इंटर कॉलेज, चाईबासा) ने 471 अंक प्राप्त किए। साइंस में रशीदा नाज ने मारी बाजी साइंस संकाय में इस बार शानदार प्रदर्शन करते हुए रशीदा नाज (डीएवी+2 पाथरडीह, धनबाद) ने 489 अंक के साथ टॉप किया। दूसरे स्थान पर मो फैजान आलम (आरके +2 हाई स्कूल, पाटन) 483 अंक के साथ रहे। तीसरे स्थान पर संयुक्त रूप से आकांक्षा कुमारी (SS +2 हाई स्कूल, सिमरिया) और सना आफरीन (+2 सरबोदया हाई स्कूल, सतबरवा) ने 481 अंक प्राप्त किए।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम, धमाकों के बाद चंडीगढ़ पुलिस HQ में बुलेटप्रूफ गेट इंस्टॉल

चंडीगढ़. पंजाब में हाल ही में हुए धमाकों के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है। इसी के तहत चंडीगढ़ स्थित पंजाब पुलिस मुख्यालय पर बुलेटप्रूफ गेट लगाए गए हैं, ताकि किसी भी संभावित खतरे से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। ISI का हो सकता है हाथ: DGP उधर, डीजीपी गौरव यादव विभिन्न स्थानों का दौरा कर स्थिति का जायजा ले रहे हैं।अमृतसर में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा। प्रारंभिक जांच में ISI की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि पंजाब इस समय प्रॉक्सी वॉर का सामना कर रहा है और ऐसी घटनाओं के जरिए माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, अभी तक किसी संगठन ने आधिकारिक तौर पर जिम्मेदारी नहीं ली है।

धमधा के विकास को मिलेगा नया रफ्तार, नगर पालिका गठन का ऐलान

रायपुर. लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम में दुर्ग जिले के धमधा नगर पंचायत पहुंचे उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने धमधा नगर पंचायत के नगर पालिका में उन्नयन की घोषणा की। धमधावासी लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे। नगर पालिका के रूप में उन्नयन के बाद शहर को विकास कार्यों के लिए और ज्यादा मिलेगी तथा विकास कार्यों में तेजी आएगी। लोगों की बहुप्रतीक्षित मांग को पूर्ण करने वाली उप मुख्यमंत्री श्री साव की इस घोषणा से धमधा के सुव्यवस्थित विकास तथा जनसुविधाएं विकसित करने के कामों को और अधिक गति मिलेगी। उप मुख्यमंत्री साव ने अपने धमधा प्रवास के दौरान करीब 7 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। इसमें 4 करोड़ 60 लाख रुपए के कार्यों का लोकार्पण और 2 करोड़ 39 लाख रुपए के कार्यों का भूमिपूजन शामिल है। उन्होंने शहर के विकास के लिए 2 करोड़ रुपए देने की भी घोषणा की। साव ने बताया कि विगत दो वर्षों में धमधा नगर पंचायत के विकास के लिए 13 करोड़ रुपए दिए गए हैं। प्रदेश के सभी नगरीय निकायों के विकास के लिए सक्रियता और गंभीरता से काम किए जा रहे हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, दुर्ग के सांसद विजय बघेल, विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा, ईश्वर साहू और ललित चन्द्राकर भी कार्यक्रम में शामिल हुए। तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष जितेन्द्र साहू, धमधा नगर पंचायत की अध्यक्ष श्वेता अग्रवाल, उपाध्यक्ष ब्रिजेन्द्र दानी, जनपद पंचायत के अध्यक्ष लिमन साहू और पूर्व मंत्री जागेश्वर साहू सहित सुरेन्द्र कौशिक, जितेन्द्र वर्मा, प्रीतपाल बेलचंदन, पार्षद एवं जनप्रतिनिधि भी इस दौरान मौजूद थे।

एम्स भोपाल का प्रतिनिधिमंडल उपमुख्यमंत्री शुक्ल से मिला, प्रदेश में ऑर्गन ट्रांसप्लांट को मजबूत बनाने पर विमर्श

उप मुख्यमंत्री शुक्ल से एम्स भोपाल के प्रतिनिधिमंडल ने की भेंट प्रदेश में ऑर्गन ट्रांसप्लांट गतिविधियों के सुदृढ़ीकरण पर हुआ विमर्श भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल से मंत्रालय में एम्स भोपाल के प्रतिनिधिमंडल ने भेंट कर प्रदेश में ऑर्गन ट्रांसप्लांट गतिविधियों के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण के संबंध में विस्तृत चर्चा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में ऑर्गन ट्रांसप्लांट गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार सतत प्रयास कर रही है। ऑर्गन डोनर्स को "गार्ड ऑफ ऑनर" प्रदान कर तथा उनके परिजनों को 26 जनवरी एवं 15 अगस्त के अवसर पर सार्वजनिक रूप से सम्मानित कर प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऑर्गन डोनेशन से हम कई जिंदगियों में आशा का नया प्रकाश ला सकते हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आमजन में ऑर्गन डोनेशन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर जन-जागरूकता अभियान, कार्यशालाएँ एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे अधिक से अधिक लोग इस पुनीत कार्य से जुड़ सकें। राज्य सरकार ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन के क्षेत्र में एम्स के तकनीकी सहयोग एवं सुझावों का स्वागत करती है। उन्होंने एम्स द्वारा अब तक किए गए ऑर्गन ट्रांसप्लांट सेवाओं एवं जागरूकता गतिविधियों की सराहना भी की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निदेशक प्रो. डॉ. मधाबानंद कर सहित समस्त प्रतिनिधिमंडल को सम्मानित किया। बैठक में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत किडनी ट्रांसप्लांट पैकेज में वृद्धि करने और हार्ट एवं लंग ट्रांसप्लांट को शामिल करने के विषय पर चर्चा हुई। साथ ही प्रत्यारोपण सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। अंग प्राप्ति प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने के लिए संभावित ब्रेन-डेड डोनर्स की समय पर पहचान एवं त्वरित रेफरल प्रणाली को मजबूत करने पर तकनीकी सहयोग के विषयों पर विमर्श किया गया। इस दिशा में प्रदेश के शासकीय अस्पतालों एवं मेडिकल कॉलेजों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिये एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने का सुझाव भी रखा गया, जिससे अंग प्राप्ति एवं प्रत्यारोपण की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित हो सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अंग प्रत्यारोपण प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाने एवं जागरूकता गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्राप्त सुझावों पर शीघ्र यथोचित कार्यवाही की जाएगी। बैठक में प्रत्यारोपण सर्जरी में आधुनिक तकनीकों, विशेष रूप से रोबोटिक सर्जरी के विस्तार पर भी चर्चा हुई, जिससे उपचार की गुणवत्ता और सफलता दर में वृद्धि सुनिश्चित की जा सके। एम्स की टीम ने हार्ट ट्रांसप्लांट, किडनी ट्रांसप्लांट में अब तक की गई प्रगति, लंग ट्रांसप्लांट सेवाओं के विस्तार तथा अन्य तकनीकी पहलुओं की जानकारी प्रस्तुत की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने राज्य सरकार की ओर से इन सेवाओं के विस्तार हेतु पूर्ण सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया। बैठक में एम्स के निदेशक प्रो. डॉ. मधाबानंद कर डिप्टी डायरेक्टर संदेश कुंअर जैन, चिकित्सा अधीक्षक डॉ विकास गुप्ता सहित ऑर्गन ट्रांसप्लांट टीम के सदस्य उपस्थित थे।  

चुनावी जादू: सीएम मोहन ने 7 सीटों पर किया प्रचार, 6 पर मिली जीत; 5 नेताओं को मिली थी जिम्मेदारी

भोपाल  राजनीति में कई बार नारे नहीं, आंकड़े ज्यादा जोर से बोलते हैं. बंगाल चुनाव नतीजों के बाद मध्य प्रदेश भाजपा के भीतर ऐसा ही एक आंकड़ा खास दिलचस्पी से चर्चा में है 7 में से 6. ये वो स्ट्राइक रेट है, जो पश्चिम बंगाल में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के चुनावी अभियान से जोड़ा जा रहा है. बंगाल जैसे राज्य में, जहां भाजपा ने बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया है, डॉ. यादव के प्रचार वाले इलाकों का हिसाब-किताब अब पार्टी के भीतर राजनीतिक महत्व रखता है।  डॉ. मोहन यादव ने पश्चिम बंगाल में कुल सात विधानसभा सीटों पर प्रचार किया. इनमें से भाजपा ने छह सीटों पर जीत दर्ज की. यानी बंगाल में उनका स्ट्राइक रेट करीब 86 प्रतिशत रहा. इस गणित का सबसे मजबूत हिस्सा बांकुरा जिले से सामने आया. डॉ. यादव ने यहां पांच विधानसभा सीटों पर प्रचार किया था और भाजपा उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल कराने के दौरान भी मौजूद रहे थे. नतीजा यह रहा कि भाजपा ने इन पांचों सीटों पर जीत हासिल की।  बांकुरा में 100 प्रतिशत स्ट्राइक रेट का गणित सलतोरा सीट पर भाजपा की चंदना बाउरी ने टीएमसी उम्मीदवार को 32 हजार से ज्यादा वोटों से हराया. छातना में सत्यप्रकाश मुखोपाध्याय ने 47 हजार से अधिक वोटों से जीत दर्ज की. बांकुरा सीट पर नीलाद्रि शेखर दाना ने टीएमसी उम्मीदवार को 54 हजार से ज्यादा वोटों से पराजित किया. बरजोरा में बिलेश्वर सिन्हा ने 40 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल की, जबकि ओंदा सीट पर अमरनाथ शाखा भी विजयी रहे. यानी बांकुरा में आंकड़ा साफ रहा 5 सीटें, 5 जीत, यहां डॉ. मोहन यादव का स्ट्राइक रेट 100 प्रतिशत रहा।  बांकुरा से शुरू किया चुनावी अभियान, जिले की सभी सीटें जीती बीजेपी डॉ. मोहन यादव का बंगाल चुनाव अभियान 2 अप्रैल को बांकुरा जिले से शुरू हुआ। सीएम ने बीजेपी उम्मीदवारों के नामांकन में हिस्सा लिया और संयुक्त जनसभा को संबोधित किया। यही क्लस्टर आगे चलकर भाजपा के लिए सबसे मजबूत साबित हुआ। मेदिनीपुरी में जीते, कमरहाटी में हारे 18 अप्रैल को सीएम ने कोलकाता और मेदिनीपुर में प्रचार किया। सीएम ने कमरहाटी में बीजेपी उम्मीदवार अरूप चौधरी और मेदिनीपुर विधानसभा सीट पर बीजेपी प्रत्याशी दिलीप घोष के समर्थन में प्रचार किया। मेदिनीपुरी में तो बीजेपी उम्मीदवार दिलीप घोष 30 हजार के बडे़ अंतर से टीएमसी केंडिडेट को हराकर जीत गए। लेकिन, कमरहाटी में अरुप चौधरी टीएमसी उम्मीदवार से चुनाव हार गए। बीजेपी ने चुनिंदा नेताओं को भेजा बीजेपी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में चुनिंदा नेताओं को ही भेजा था। सीएम डॉ मोहन यादव के अलावा केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विधायक रामेश्वर शर्मा, मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते, राज्यसभा सांसद डॉ उमेश नाथ महाराज को भी भेजा था। तीखे प्रहार और धर्मयुद्ध का आह्वान प्रचार के दौरान डॉ. यादव ने तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला था. उन्होंने कहा था, “ममता दीदी बंगालियों का हक बांग्लादेश को देने पर तुली हैं. इसलिए यह केवल चुनाव नहीं, बल्कि धर्मयुद्ध है. इस वातावरण में श्रीराम का मंत्र हम सबको शक्ति दे रहा है।  गढ़ में सेंध और खड़गपुर की बड़ी जीत 18 अप्रैल को डॉ. यादव ने कोलकाता जिले की कमरहाटी विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार अरूप चौधरी और मेदिनीपुर जिले की खड़गपुर सदर सीट पर भाजपा उम्मीदवार दिलीप घोष के समर्थन में भी प्रचार किया था. कमरहाटी सीट को लंबे समय से टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है. यहां शुरुआती रुझानों में भाजपा उम्मीदवार की बढ़त ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी थी, हालांकि करीबी मुकाबले में अरूप चौधरी करीब 5 हजार वोटों से हार गए. लेकिन खड़गपुर सदर में भाजपा नेता दिलीप घोष ने जीत दर्ज की और टीएमसी उम्मीदवार को 30 हजार से अधिक वोटों से पराजित किया. इस तरह बंगाल का चुनावी समीकरण कुछ यूं रहा बांकुरा में 5 में 5, खड़गपुर सदर में 1 में 1 और कमरहाटी में 1 हार . कुल मिलाकर 7 में 6 सीटें भाजपा के खाते में गईं।  बिहार और हरियाणा में भी चला मोहन यादव का सिक्का प्रतिशत में देखें तो यह आंकड़ा करीब 85.7 प्रतिशत बैठता है. यह लगभग वैसा ही है जैसा बिहार चुनाव में डॉ. यादव के प्रचार वाले क्षेत्रों में देखा गया था. बिहार में उन्होंने 25 विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार किया था, जिनमें से भाजपा ने 21 सीटें जीतीं. वहां उनका स्ट्राइक रेट 84 प्रतिशत रहा था. हरियाणा चुनाव में भी डॉ. मोहन यादव को भाजपा ने स्टार प्रचारक के रूप में भिवानी, दादरी, तोशाम, झज्जर और बवानी खेड़ा जैसे क्षेत्रों में उतारा था, जहां पार्टी को चार सीटों पर सफलता मिली।  बंगाल नतीजों के बाद बातचीत में डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जनता ने अन्याय, अत्याचार और कुशासन से मुक्ति के लिए वोट दिया है और एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा जताया है. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे अब भाजपा के लिए “मास्कॉट” बनते जा रहे हैं, तो उन्होंने इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया. उन्होंने कहा, “हमारे केवल एक ही मास्कॉट हैं माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. अब 17 राज्यों में हमारे मुख्यमंत्री होंगे. स्वतंत्रता के बाद के दौर में यह बहुत बड़ी उपलब्धि है।  विपक्ष पर प्रहार और जीत का उत्सव उन्होंने विपक्ष पर भी तीखा निशाना साधा. डॉ. यादव ने कहा, “जैसा बोओगे, वैसा काटोगे. ममता दीदी ने हमारी बहनों का मजाक उड़ाया, सोनिया जी ने भी उनका उपहास किया. पांच पीढ़ियों ने महिलाओं के साथ अन्याय किया, अब जनता ने उस अन्याय का बदला लिया है. बताइए, अगर बंगाल में ‘जय श्रीराम' का नारा नहीं लगेगा, तो फिर कहां लगेगा? अपने अंदाज में उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा की खुशी अब “माउंट एवरेस्ट से भी ऊपर” पहुंच गई है. उन्होंने कहा, “यहां मिठाई से जश्न मनाने की परंपरा है. हम झालमुड़ी भी खाएंगे, कलाकंद भी खाएंगे और मिठाइयां भी खाएंगे। 

पंजाब में सत्कार कानून लागू होने के बाद CM मान का बड़ा संदेश, “अब बेअदबी बर्दाश्त नहीं”

रूपनगर/चंडीगढ़. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को खालसा पंथ की जन्मस्थली श्री आनंदपुर साहिब से राज्यव्यापी शुकराना यात्रा की शुरुआत की। मुख्यमंत्री के साथ कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस और आनंदपुर साहिब लोकसभा क्षेत्र से सांसद मलविंदर सिंह कंग भी मौजूद रहे। यात्रा शुरू करने से पहले मुख्यमंत्री ने तख्त श्री केसगढ़ साहिब में माथा टेककर आशीर्वाद लिया। यह यात्रा पंजाब सरकार द्वारा हाल ही में लागू “जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार कानून संशोधन 2026” के लागू होने के बाद निकाली जा रही है। सरकार का कहना है कि इस नए कानून का उद्देश्य श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों की बेअदबी रोकना और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है। इसी को लेकर सरकार ने इसे श्रद्धा और धन्यवाद से जुड़ी “शुकराना यात्रा” का नाम दिया है। सरकार ने लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखा मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब सरकार श्री गुरु ग्रंथ साहिब की गरिमा और सम्मान की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लोग बेअदबी की घटनाओं पर सख्त कानून की मांग कर रहे थे और अब सरकार ने लोगों की भावनाओं के अनुसार कदम उठाया है। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब की धरती गुरुओं, पीरों और संतों की भूमि है, इसलिए यहां धार्मिक भावनाओं का सम्मान सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि परमात्मा ने उनसे सेवा ली है और अब कोई गुरु ग्रंथ साहिब का अपमान नहीं कर पाएगा।  तीन दिनों तक चलेगी ये यात्रा ये शुकराना यात्रा पंजाब में तीन दिन तक चलेगी और इस दौरान कई जिलों से होकर गुजरेगी। जानें किस दिन कहां से गुजरेगी ये यात्रा- पहला दिन- श्री आनंदपुर साहिब से शुरू होकर रूपनगर, बलाचौर, बंगा और फगवाड़ा पहुंचेगी। दूसरा दिन- जालंधर, बाबा बकाला, अमृतसर, तरनतारन, जीरा, फरीदकोट और कोटकपूरा से होकर निकलेगी। तीसरा दिन- मुख्यमंत्री का काफिला बठिंडा, तख्त श्री दमदमा साहिब तलवंडी साबो, सरदूलगढ़, मानसा, बरनाला, सुनाम, संगरूर, समाना और पटियाला पहुंचेगा। यात्रा का समापन श्री फतेहगढ़ साहिब में होगा। यात्रा को लेकर विभिन्न जिलों में प्रशासन और पुलिस द्वारा विशेष प्रबंध किए गए हैं। रास्तों में स्वागत द्वार बनाए गए हैं और बड़ी संख्या में लोग मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए पहुंच रहे हैं। धार्मिक संगठनों और स्थानीय लोगों में भी यात्रा को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।

अनुकंपा नियुक्ति में नौकरी में प्राथमिकता मिलेगी, लेकिन संपत्ति का हक नहीं: हाईकोर्ट

इंदौर  अनुकंपा नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस जयकुमार पिल्लई की एकलपीठ ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति संपत्ति का अधिकार नहीं, बल्कि संकटग्रस्त परिवार को तात्कालिक राहत देने की योजना है। कोर्ट ने पिता की नौकरी पर दावा करने वाली बेटी की याचिका खारिज कर दी। रतलाम जिला अस्पताल में पदस्थ ड्राइवर रमेशवान गोस्वामी का 22 जून 2020 को सेवा के दौरान निधन हो गया था। इसके बाद पुत्र रितेश वान ने दिसंबर 2021 में अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। इसी पद पर रितेश की बहन और रमेशवान की बेटी अनीता वान ने भी दावा प्रस्तुत किया। दोनों के दावे सामने आने पर विभाग ने 23 जनवरी 2024 और 6 फरवरी 2024 को पत्र जारी कर सक्सेशन सर्टिफिकेट प्रस्तुत करने को कहा। इसे चुनौती देते हुए भाई-बहन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। दोनों पक्षों ने रखे तर्क रितेश की ओर से दलील दी गई कि उनका नाम पिता ने सेवा के दौरान नामिनी के तौर पर शामिल किया था। पूरा परिवार पिता की आय पर निर्भर था और उनकी बहन शादीशुदा होने के कारण अलग रहती है। अनीता हलफनामा देकर उन्हें नियुक्ति की सहमति दे चुकी है। अनीता ने खुद को वैध वारिस बताते हुए सेवा लाभों में बराबरी का अधिकार जताया और नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट को फर्जी बताया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस सिद्धांत का हवाला भी दिया, जिसमें कहा है कि नामिनी संरक्षक होता है, मालिक नहीं। सरकार की ओर से दलील दी थी कि दोनों के दावे होने के कारण सही वारिस तय करने के लिए सक्सेशन सर्टिफिकेट मांगा गया। नीति में सबकुछ स्पष्ट हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि अनुकंपा नियुक्ति में सक्सेशन सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होती। यह नियुक्ति राहतकारी नीति है। विभाग द्वारा सक्सेशन सर्टिफिकेट मांगना मनमाना और कानून के विपरीत है। हाईकोर्ट ने कहा कि 2014 में अनुकंपा नियुक्ति नीति बनी थी। कर्मचारी की मृत्यु 2020 में हुई थी, इसलिए उस समय की नीति ही लागू होगी। 2023 में नीति में हुआ बदलाव इस पर लागू नहीं होगा। 2014 की नीति में अनुकंपा नियुक्ति के लिए प्राथमिकता क्रम तय है। इसमें पति/पत्नी, फिर पुत्र या अविवाहित पुत्री, उसके बाद विधवा-तलाकशुदा पुत्री और अंत में कोर्ट ने निर्देश दिया कि नियुक्ति से पहले रितेश को हलफनामा देना होगा कि वे अपनी मां और अन्य आश्रितों का भरण-पोषण करेंगे। यदि वे ऐसा करने में असफल रहते हैं तो उनकी नियुक्ति रद्द की जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल की कचरा खंती में लगी आग पर कलेक्टरों को दिए सख्त आदेश, जुर्माना लगाया जा सकता है

भोपाल  आदमपुर छावनी डंप साइट पर आग लगने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. मंगलवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कचरा मैनेजमेंट के लिए कलेक्टरों को सीधी कार्रवाई के पावर दे दिए हैं. अब खुले में कचरा जलाने या गंदगी फैलाने पर ऑन द स्पॉट जुर्माना लगाया जाएगा. कोर्ट ने देश के सभी राज्यों से कचरा प्रबंधन के लिए रोडमैप मांगा है, जो भोपाल की आदमपुर डंप साइट पर बार-बार लगने वाली आग के संदर्भ में हुआ है. आदमपुर कचरा खंती में पिछले सप्ताह भी आग लग गई थी।  सुप्रीम कोर्ट ने कलेक्टरों को दिए पावर सुप्रीम कोर्ट में भोपाल की आदमपुर कचरा खंती में बार-बार लग रही आग की सुनवाई ने देशभर की वेस्ट मैनेजमेंट व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए कि कचरा प्रबंधन के लिए एनवायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट 1986 के तहत कलेक्टरों को सीधे अधिकार देने और मोबाइल कोर्ट चलाने का प्लान तैयार किया जाएगा, ताकि मौके पर ही कार्रवाई और जुर्माना हो सके. कोर्ट ने सभी राज्यों से कहा है कि 22 मई को होने वाली अगली सुनवाई तक कलेक्टरों को पावर देने का रोडमैप, कचरा छंटाई, प्रोसेसिंग की योजना और पेनाल्टी और मोबाइल कोर्ट की व्यवस्था पर ठोस रिपोर्ट पेश करें।  दरअसल, भोपाल की आदमपुर कचरा खंती में बार-बार लगने वाली आग को लेकर पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी. पांडे ने मार्च 2023 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की थी. इस पर 31 जुलाई 2023 को भोपाल नगर निगम पर 1 करोड़ 80 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया. जुर्माने के खिलाफ निगम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां 16 मई 2025 से सुनवाई चल रही है. इस केस में मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव समेत 6 वरिष्ठ अधिकारियों को भी प्रतिवादी बनाया गया है।  सुनवाई में देशभर के चीफ सेक्रेटरी को बुलाया डॉ. सुभाष सी. पांडे ने बताया कि "सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये केस भोपाल या इंदौर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश की समस्या है. इस सुनवाई में देश के विभिन्न मुख्य सचिवों को बुलाया गया था. कोर्ट ने साफ कहा है कि नियमों का पालन सही ढंग से नहीं हो रहा है. ऐसे में स्वच्छ भारत अभियान पूरी तरह से लागू नहीं हो सकेगा. कुछ सीएस ने अपनी समस्याएं भी बताईं. कर्नाटक, एमपी, बिहार समेत अन्य मुख्य सचिवों से बात भी की. उन्होंने कहा कि नया प्लान बना रहे हैं।  सभी चीफ सेक्रेटरी ने भरी हामी डॉ. पांडे ने बताया, कोर्ट ने कहा कि 1 साल के लिए एनवायरमेंट प्रोटेक्शन 1986 की धारा 5 का अधिकार कलेक्टर को दे रहे हैं. यानी, सभी अधिकारों को पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और निगम से लेकर कलेक्टरों को पावर देंगे. सभी चीफ सेक्रेटरी ने भी हामी भरी है. डॉ. पांडे ने बताया, सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में कहा था कि 1 अप्रैल से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2026 लागू हो जाएंगे. नए नियम देश में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की समस्या की पहचान करने और उसे हल करने के तरीके में पूरी तरह से शामिल हैं।  देश में हर दिन 1.70 लाख टन म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट इस नियम के मकसद को पूरा करने के लिए ऐसे निर्देश जारी करना सही समझते हैं, जो न सिर्फ भोपाल नगर निगम पर बल्कि पूरे देश पर लागू हों. इसका कारण यह है कि लोकल बॉडीज द्वारा SWM रूल्स, 2016 के हिसाब से पालन की स्थिति कुछ हद तक या तो पालन कर रही हैं या नहीं. कोर्ट ने कहा था कि सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की वेस्ट मैनेजमेंट पर सालाना रिपोर्ट 2021-2022 बताती है कि देश में घरेलू, कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और सहायक कामों से हर दिन करीब 1.70 लाख टन म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट पैदा होता है।  भोपाल और इंदौर जैसे कई शहरों में कलेक्शन एफिशिएंसी में सुधार हुआ है, लेकिन प्रोसेसिंग की दर अभी भी एक बड़ी रुकावट बनी हुई है. जो कचरा बिना प्रोसेस किया जाता है, वह अक्सर बिना साइंटिफिक लैंडफिल या पुराने डंपसाइट में चला जाता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, आज की पीढ़ी ज्यादा कानूनी सुधारों का इंतजार नहीं कर सकती. पुराने कचरे के जमा होने, ग्राउंडवाटर और हवा के कंटैमिनेशन के लिए 1 अप्रैल से लागू मौजूदा आदेशों का तुरंत पालन करने की जरूरत है।  जिम्मेदार प्रतिनिधि, समय की जरूरतों के हिसाब से जवाब देने वाले प्रतिनिधि भी होते हैं. नियम आसान हैं और इन्हें लोकल बॉडीज के एडमिनिस्ट्रेशन के साथ पार्षद, महापौर, उनके चेयरपर्सन और वार्ड सदस्यों को थोड़ी भागीदारी से सीखने और लागू करने की जरूरत है. पिछली सुनवाई के आखिरी में भोपाल निगम से जुड़े केस को लेकर कहा था कि आदमपुर छावनी डंप साइट के मामले में पुराने कचरे के लिए कुछ और पेपरवर्क पूरा करने की जरूरत है. टेंडर को फाइनल करने में कुछ और समय लगेगा. इसलिए वह इस मामले में टेंडर को फाइनल करने के लिए दो हफ्ते का समय मांगती हैं. उन्हें यह समय दिया जाता है।